रेणु मिश्रा

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About me

Gender FEMALE
Industry Communications or Media
Location अनपरा, सोनभद्र व वाराणसी , उत्तर-प्रदेश , India
Introduction सोचती हूँ, क्या लिखूं अपने बारे में… काम वही करती हूँ जो दिल को राज़ी हो, दिल को सुकून दे। अपने शर्तों पे जीना और जीवन में आगे बढ़ना सीखा है.… वैसे भी किसी ने सच ही कहा है,"आदमी, आदमी को क्या देगा, जो भी देगा, वो ख़ुदा देगा।" अब तक ये सीखा है, "आप ज़िन्दगी को जितनी सरलता से जियेंगे, वो आपको उतनी ही मोहब्बत करेगी।" इतना ही कहना है.… "मैंने ज़िन्दगी को बड़ी बेफ़िक्री से है जिया, कभी ना तोला,ना टटोला, ना मोल किया। रचनाधर्मिता के विषय मे बात की जाये तो कविता, कहानी लिखने का शौक़ छात्र जीवन के समय से ही है। यह यात्रा सर्वप्रथम बनारस हिन्दू यूनिवरसिटि के सभागार से शुरू होकर दैनिक जागरण मे पहुंची और वहाँ से होते हुए कई पत्र-पत्रिकाओं तक पहुंची। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं मे लिखने का क्रम जीवन पर्यंत जारी रहेगा। वर्ष 2013 मे, एक साझा काव्य संग्रह "विरहगीतिका" मे मेरी कविताओं का प्रकाशन हुआ, जो कि काफी चर्चा का विषय रही। इसके अतिरिक्त पिछले वर्ष 2014 मे नए साझा काव्य-संग्रह "धूप के रंग" मे भी कवितायें प्रकाशित हुई जिन्हे काफी सराहना मिली।
Interests शौक़ की बात की जाये तो कवितायें और कहानियाँ लिखना मेरा पहला शौक़ ही नहीं जुनून भी है। इसके अलावा संगीत के बिना जीवन मे कोई रस नहीं इसलिए गीत-ग़ज़ल सुनना भी पसंद है। उम्दा स्तर की किताबें-पत्रिकाएँ पढ़ना-गुनना। पठन पाठन की बात करे तो यदि कोई किताबों के जंगल जैसा कोई जगह हो और मैं वहाँ कहीं खो गयी हूँ तो खोये रहना चाहूंगी। आला दर्ज़े के घुम्मकड़ों की श्रेणी मे स्थान मिले तो अन्यथा नहीं होगा। नृत्य करना, बैडमिंटन खेलना, छोटे-मोटे सामाजिक कार्यों मे दिलचस्पी...जैसे प्रौढ़ एवं बच्चों को पढ़ाना, औरतों को कम्प्युटर सिखाना आदि।