ताहम...

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Industry Communications or Media
Location भोपाल, मध्य प्रदेश, India
Introduction ताहम.... लिखने-लिखाने का न आदि है न अंत, अतः यह हमारा "इम्प्लोजन" है, कि हम लेखन को हम एक संस्कृति मानते हैं। हमारे लिए शिल्प या कंटेंट जितना महत्वपूर्ण है, उतना रचने वाली की प्रकृति, परिवेश, दायरे, परिस्थिति और संवेदना भी। अवधी की वो कहावत " सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसके बहत्तर छेद ? " हमें विचलित कर जाती है। जहाँ सूप और चलनी की अलग अलग प्रकृति के बावजूद चलनी को खारिज कर दिया गया। सवाल चलनी और सूप में किसी के पक्ष में होने का नहीं, वरन लेखक या रचना के लोकतान्त्रिक समायोजन का है। समायोजन हमारे लिए, संवाद है,स्वीकार्य है,समभाव है,सहचर्य है और इन सब से जुडा प्रखर प्रतिवाद भी है।