DR. ANWER JAMAL

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Gender MALE
Location U.P., India
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Introduction धर्म और मत में अंतर है। धर्म ईश्वर निर्धारित करता है और मत इंसान बनाता है। धर्म से शांति आती है और मत से अशांति। मत बहुत से होते हैं और धर्म केवल एक है। धर्म का लोप करने वाले वे धर्मगुरू होते हैं जो धर्म के नाम पर अपना मत चला देते हैं। इसलाम एक धर्म है। इसे शिया-सुन्नी, हनफ़ी-शाफ़ई, देवबन्दी और बरेली मतों में बांटने वाले हम इंसान हैं। हम अपने मत पर चलते हैं और समझते हैं कि हम ईश्वर के धर्म पर चल रहे हैं। कोई नादानी से ऐसा करते हैं और कोई जानबूझकर। मज़हबी ठेकेदारों का सारा ज़ोर इस बात पर होता है कि लोग उनकी बात आंखें मूंदकर मान लें और कोई सवाल न करें। आप क़ुरआन पढ़िए, आप पैग़ंबर मुहम्मद साहब स. की जीवनी पढ़िए। आपको शांति मिलेगी क्योंकि आपको धर्म मिलेगा। अवाम को लूटने वाले उलमा और पीरों से सावधान
Interests ऋषियों का आदर्श चरित्र
Favorite Movies The day after tomorrow
Favorite Books चार वेद, दो बाइबिल और एक कुरआन

क्या कल्याण के लिए और बेहतर भविष्य के लिए चरित्र में सुधार लाज़िमी है ?