RAMAYAN AND MAHABHARAT
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| Introduction | DIL KI AWAZ Pure Ramayana and Pure Mahabharata:शुद्ध रामायण और शुद्ध महाभारत:दिल की आवाज़ रामायण और महाभारत की कुछ और मनघडंत कल्पनाएँ जो कोई अस्तित्व तो नहीं रखती पर हिन्दू धर्म की पवित्र संस्कृति को अपमानित जरूर करवाती हैं, देखें – १.पांचाल नरेश की कन्या होने से – द्रौपदी पांचाली थी, पांच पतियों की पत्नी होने से नहीं। (यदि कोई इस से उलटा कहे तो वह संस्कृत और इतिहास दोनों से ही अनभिज्ञ है।) २.श्री कृष्ण की सोलह हजार से भी अधिक रानियाँ मानना। (यह भी भारत वर्ष के अंध काल की एक और मनघडंत कल्पना है।) ३.सीता का निर्वासन (सम्पूर्ण उत्तर रामायण ही बाद की कपोल-कल्पना है, जिसका कोई सम्बन्ध वाल्मीकि रामायण से नहीं है।) ४.हनुमान,बालि,सुग्रीव आदि को बन्दर या वानर मानना। (वे सभी मनुष्य ही थे, हनुमान श्रेष्ठ विद्वान्, अति बुद्धिमान और आकर्षक व्यक्तित्व वाले थे।) सन्दर्भ*: *श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, गीता प्रेस, गोरखपुर |
| Favorite books | सन्दर्भ*: *श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, गीता प्रेस, गोरखपुर |

