gdata.io.handleScriptLoaded({"version":"1.0","encoding":"UTF-8","feed":{"xmlns":"http://www.w3.org/2005/Atom","xmlns$openSearch":"http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/","xmlns$gd":"http://schemas.google.com/g/2005","xmlns$georss":"http://www.georss.org/georss","xmlns$thr":"http://purl.org/syndication/thread/1.0","xmlns$blogger":"http://schemas.google.com/blogger/2008","id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729"},"updated":{"$t":"2024-01-04T07:05:49.164+05:30"},"category":[{"term":"jivan parichay"},{"term":"Science"},{"term":"dharma"},{"term":"rajdhani"},{"term":"other"},{"term":"Geography"},{"term":"country"},{"term":"technology"},{"term":"Hindi Grammar"},{"term":"chhattisgarh"}],"title":{"type":"text","$t":"REXGIN IN 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/\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eरायपुर\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिनांक 30/11/2023\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रिय मित्र, चन्द्रावार\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआज प्रातः उठते ही मैंने समाचार-पत्र पढ़ने को हाथ में लिया कि सबसे पहले छात्र संघ के चुनाव परिणामों पर दृष्टि पड़ी। जब मैंने पूरा समाचार पढ़ा और तुम्हारा नाम सी. एम. डी. कॉलेज छात्र संघ के चुनाव में विजेता के रूप में देखा तो मेरा हृदय आनन्द और खुशी से झूम उठा। तुम्हारी इस विजय के लिए, हार्दिक बधाई स्वीकार करना।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमैं कामना करता हूँ कि भविष्य में भी तुम जीवन के अन्य क्षेत्रों में सदैव विजयी बनो और गगनचुम्बी चरित्र का निर्माण करो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपुनः बधाई के साथ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eतुम्हारा हृदयाभिन्न राजेश शर्मा\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5990423701024047561"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5990423701024047561"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/12/mitr-ko-badhai-patr-likhie.html","title":"मित्र को बधाई पत्र लिखिए - mitr ko badhai patr likhie"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"पल्लवन किसे कहते है - pallavan kise kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eपल्लवन का अर्थ है किसी कथन अथवा सूक्ति को विभिन्न उदाहरणों और प्रमाणों द्वारा विस्तृत करके लिखना। इसे हम विस्तारण भी कहते हैं। यह संक्षेपण का ठीक उल्टा है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंक्षेपण प्रायः मूल पाठ का लगभग एक-तिहाई होता है। इसमें शब्द सीमा का बन्धन होता है जबकि विस्तारण में ऐसी किसी सीमा का बन्धन नहीं रहता। हम विस्तारण सुविधानुसार अनुच्छेदों में लिख सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन में हम किसी सूक्ति, कहावत, काव्य पंक्ति, वाक्य, छन्द या लघु प्रोक्ति आदि का विस्तार करते हैं तथा यह प्रयास करते हैं कि संक्षेप में प्रस्तुत मूल कथ्य को लेकर विस्तार से समझाते हुए उदाहरणों द्वारा सन्तुष्ट करते हुए, उसके विपक्ष में सम्भावित तकों को काटते हुए, उसे इतना विस्तार दें कि मूल कथ्य पूर्णरूप से स्पष्ट हो जाए।\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003ca 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जीवन में संक्षेपण का जितना महत्त्व है, उतना पल्लवन का नहीं। संक्षेपण व्यावसायिक और प्रशासनिक क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है। आज के उद्योगपति व्यवसायी अथवा उच्चाधिकारियों के पास इतना समय नहीं कि वे पूरे पत्र व्यवहार को पढ़ें पत्र-व्यवहार का सार ही जानना चाहते हैं अतः संक्षेप में, सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों का समावेश होता है। पल्लवन (विस्तारण) की दैनन्दिन जीवन में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है। फिर भी उसका अपन महत्त्व और उपयोगिता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलेखकों और विचारकों के विचारों की व्याख्या अथवा आशय समझने के लिए पल्लवन एक अच्छा माध्यम है। संस्कृत के सूत्र-ग्रंथ, कारिका - ग्रंथ तो गम्भीर विचारों के आदर्श ग्रंथ हैं। हिन्दी में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और सरदार पूर्णसिंह तथा अंग्रेजी में फ्रांसिस बेकन जैसे लेखक हैं, जिनके सुगुम्फित विचार वाले वाक्य व्याख्या की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे विचारकों के भावों को पल्लवन (विस्तारण) के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है। यही पल्लवन की उपयोगिता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन का अर्थ है विस्तार करना। पल्लवन विचारों का एक ऐसा क्रमबद्ध पुनर्प्रस्तुतीकरण है जिसमें उदाहरण के सहारे बात को स्पष्ट करना होता है। पल्लवन लेखन कला का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। पल्लवन के लिए निम्न प्रक्रिया और नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस विधि द्वारा पल्लवन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(1) वाचन – सर्वप्रथम पल्लवन के लिए दिये गये वाक्य, सूक्ति, लोकोक्ति, कहावत या या काव्य पंक्ति को इतना ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए कि उसका मूल भाव अच्छी तरह समझ में आ जाये - मूल भाव को समझना ही विस्तारण की कुंजी है । इस कुंजी के हाथ में आते ही आगे का मार्ग सरल हो जायेगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(2) मूल भाव के पोषक भावों की खोज - दिये गये सन्दर्भ में मुख्य भाव के साथ उसके सहायक या पोषक भाव भी निहित रहते हैं। उसे समझने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि यही सहायक भाव मूल भाव को भी पुष्ट करते हैं ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(3) अनुक्रम से लेखन - मूल और उसके सहायक भाव को समझने के बाद, उनके महत्त्व के आधार पर क्रम से लिखना चाहिए। सबसे पहले मूल भाव और फिर सहायक भाव लिखना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(4) आवश्यक दृष्टान्तों, उदाहरणों और विवरणों का लेखन - अनुक्रम से लेखन के पश्चात् मूल भाव को पुष्ट करने वाले आवश्यक उदाहरणों, दृष्टान्तों, विवरणों को लिखना चाहिए, जिससे मूल भाव स्पष्ट हो जाये ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(5) प्रथम प्रारूप- उपर्युक्त प्रक्रिया सम्पूर्ण करने के बाद विस्तारण का प्रथम प्रारूप (Draft) तैयार करना चाहिए तथा विस्तारण को आवश्यकतानुसार अनुच्छेदों में लिख लेना चाहिए। पल्लवन प्रायः एक बड़े पैराग्राफ के रूप में होना चाहिए, उसे इतना छोटा नहीं होना चाहिए कि मूल कथ्य ही स्पष्ट न हो। इसके साथ ही उसे इतना बड़ा भी नहीं होना चाहिए कि वह निबन्ध का रूप ग्रहण कर ले।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(6) प्रारूप का निरीक्षण - प्रारूप निरीक्षण के समय निम्न बातों का ध्यान देना चाहिए - (i) सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वह मूल के भाव या भावों के अनुरूप ही विकसित हुआ है, या नहीं ?\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(ii) यदि कोई अनावश्यक प्रसंग या अप्रासंगिक विवरण आ गया हो तो उसे तुरन्त निकाल देना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(iii) पल्लवन करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हम जो कुछ भी लिख रहे हैं उसका सीधा सम्बन्ध मूल वाक्य या सूक्ति से हो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(iv) भाव, भाषा, अभिव्यक्ति की दृष्टि से स्पष्ट मौलिक और सरल होना चाहिए। यदि कहीं क्लिष्टता आ गई हो तो उसे हटा देना चाहिए तथा सरल भावों को प्रकट करना चाहिए ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(v) पल्लवन की रचना हमेशा अन्य पुरुष में होनी चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(vi) व्याकरण और विराम चिन्हों आदि की अशुद्धियाँ नहीं होनी चाहिए। (vi) यदि शब्द संख्या निर्धारित हो तो उसका पालन करना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(viii) व्यास शैली पल्लवन का मूलाधार है, अतः शैली के लेखन का अभ्यास करना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपल्लवन की परिभाषा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपल्लवन की कुछ परिभाषाएँ निम्नवत् हैं - डॉ. वासुदेव नन्दन प्रसाद के अनुसार, \"किसी सुगठित एवं गुम्फित विचार अथवा के विस्तार को पल्लवन कहते हैं।\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रो. राजेन्द्र प्रसाद सिंह के अनुसार, \"पल्लवन का अर्थ होता है, पल्लव उत्पन्न क अर्थात् विषय का विस्तार करना।\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबेन के अनुसार, \"विस्तारीकरण या पल्लवन किसी एक विचार को ए अनुच्छेद (पैराग्राफ) में विस्तृत करना है। इसका उद्देश्य नियन्त्रित होता है तथा इसमें मूल विचार है विस्तृत करने तथा अवांछनीय सामग्री देने का निषेध होता है।\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eटी. एस. इमाम के अनुसार, \"विस्तारण किसी भाव के विस्तार या परिवर्द्धन की क्रिया या विचार निरूपण की प्रक्रिया है। यह एक प्रसरणशील विचार-विमर्श है जो किसी विषय के उन सब विवरणों पर विस्तार पाता है जो व्याख्याओं, उदाहरणों और प्रमाणों द्वारा पुष्ट होता है। \"\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कह सकते हैं कि “किसी सूक्ति, सुभाषित अथवा सुगठि तथा सुगुम्फित विचार वाले आदर्श वाक्य के मूल भाव का तर्कसम्मत शैली में विभिन्न उदाहरण विवरणों और दृष्टान्तों द्वारा किया गया परिवर्द्धन या पल्लवन ही विस्तारण है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपल्लवन का महत्त्व\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eव्यावसायिक और प्रशासनिक क्षेत्र में संक्षेपण ने अपन, महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है। हमारे दैनिक जीवन में संक्षेपण का जितना महत्त्व है उतना पल्ला का नहीं। फिर भी पल्लवन का अपना अलग ही महत्त्व है आप देख सकते हैं कि सभी भाषा कुछ ऐसे लेखक और विचारक होते हैं जो अपने गम्भीर विचारों को ऐसी शैली में रखते हैं उनका यथार्थ भाव सरलता से सबकी समझ में नहीं आता । उनकी व्याख्या अथवा आशय समझने के लिए पल्लवन एक अच्छा माध्यम है - संस्कृत के सूत्र-ग्रन्थ, कारिका- ग्रन्थ जो गम्भीर विचारों के आदर्श ग्रन्थ हैं। उन पर बड़े-बड़े व्याख्या ग्रन्थ लिखे गये हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकिन्तु हिन्दी में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और सरदार पूर्णसिंह तथा अंग्रेजी में फ्रांसिस बेकन जैसे लेखक हैं जिनके सुगुम्फित विचार वाले वाक्य व्याख्या की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे विचारकों के भावों को पल्लवन के माध्यम से स्पष्ट किय जा सकता है। यही पल्लवन की उपयोगिता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपल्लवन का आशय\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपल्लवन विचारों का एक ऐसा क्रमबद्ध पुनर्प्रस्तुतीकरण है जिसमें उदाहरण के सहारे बात को स्पष्ट करना होता है । कतिपय भावों, विचारों और रचना संकेतों का स्पष्टीकरण ही पल्लवन है जिसमें प्रारम्भ से लेकर अन्त तक मूलभाव या विचार के मन्तव्य की रक्षा की जाती है। पल्लवन लेखन कला का एक महत्वपूर्ण अंग है। किसी भाव पूर्ण वाक्य, कथन, वाक्यांश, लोकोक्ति तथा पद्यात्मक सूक्ति को समझाकर लिखना पल्लवन कहलाता है। संक्षेप में किसी सुगठित विचार अथवा भाव के विस्तार को पल्लवन कहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकिसी सूक्ति सुभाषित अथवा सुगठित तथा सुगुम्फित विचार वाले आदर्श वाक्य के भाव का तर्कसम्मत शैली में विभिन्न उदाहरणों, विवरणों और दृष्टान्तों द्वारा किया गया परिवर्द्धन ही पल्लवन है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकुशल विस्तारक के गुण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. गहन अध्ययनशीलता - कुशल विस्तारक के लिए गहन अध्ययनशील होना आवश्यक है। वह कला, दर्शन, इतिहास, भूगोल और सामान्य वैज्ञानिक विषयों में रुचि रखे और इन विषयों से सम्बन्धित लेख आदि पत्र-पत्रिकाओं में पढ़े । मासिक ज्ञानवर्द्धक पत्र-पत्रिकाएँ आदि पढ़ना एक कुशल विस्तारक के लिए अनिवार्य है, इनसे उसके ज्ञान का संवर्द्धन होगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. सूक्ष्म निरीक्षण दृष्टि - कुशल विस्तारक दृष्टि का सूक्ष्म निरीक्षण होना बहुत उपयोगी है। इससे दिये गये वाक्य का मूल भाव वह तत्काल जान लेगा । विस्तारण में मूल भाव का ज्ञान ही मुख्य है। यदि उसे जान लिया गया तो पल्लवन में देर नहीं होगी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. तार्किकता - कुशल विस्तारक को तर्कप्रिय होना चाहिए। तार्किकता से अभिप्राय है – तर्कसम्मत विचार सारणि का पल्लवन। यदि किसी विस्तारक को अपने विचारों को तर्कसम्मत रखने का अभ्यास है तो वह मूल भाव का विस्तार करते समय उसे क्रमबद्ध और तारतम्य से युक्त रखेगा और अपने विस्तार को अपनी कसौटी पर भी कस लेगा। इस प्रकार असम्बद्ध विचारों का सम्मिश्रण न हो पायेगा।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. तटस्थता - तटस्थता भी कुशल विस्तारक का एक गुण है। दिये गये सन्दर्भों का तटस्थ पल्लवन ही उसके कार्य का क्षेत्र है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. व्याख्या शक्ति सम्पन्न होना - व्याख्याता जिस प्रकार भाषण को सयुक्तिक ढंग से दृष्टान्तों और उदाहरणों से पुष्ट करता चलता है वैसे ही विस्तारक को भी मूल भाव को उदाहरणों, दृष्टान्तों या प्रमाणों द्वारा पल्लवित करना चाहिए । इसलिए उसमें इस व्याख्या शक्ति का होना अत्यावश्यक है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. भाषाधिकार – कुशल विस्तारक का भाषाधिकारी भी होना बहुत जरूरी है। भाषाधिकार होने पर ही अभिव्यंजना शैली में दक्षता आ सकेगी, क्योंकि जब तक भाषा पर अधिकार नहीं होगा तब तक पल्लवन की गुंजाइश ही नहीं निकलेगी। इसलिए भाषा को उसकी अनुवर्तनी होना आवश्यक है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. मेधावी होना – मेधा का अर्थ है बुद्धि । बुद्धि प्रायः जन्मजात होती है, परन्तु श्रम, अभ्यास, अध्ययन द्वारा उसे प्रखर बनाया जा सकता है। अतः मनन द्वारा अपनी बुद्धि को तीक्ष्ण बनाना आवश्यक है, क्योंकि एक कुशल विस्तारक को मेधावी होना आवश्यक है। मेधावी मनुष्य की कल्पना भी उच्च होती है। थोड़े को विस्तार से कहने में उसे कठिनाई नहीं होती और वह अपेक्षाकृत अच्छी तरह पल्लवन कर सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअभ्यास\u0026nbsp; - अभ्यास तो हमेशा से ही प्रत्येक वस्तु के लिए आवश्यक है। व्यक्ति चाहे मेधावी हो, तार्किक हो, अध्ययनशील हो या व्याख्या शक्ति से सम्पन्न हो पर यदि उसे विस्तारण का अभ्यास नहीं हो तो उसके लिए पल्लवन आसान नहीं होगा – पल्लवन में आसानी हो इसके लिए अभ्यास का होना अति आवश्यक है ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपल्लवन से आप क्या समझते हैं ?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तर – पल्लवन संक्षेपण का ठीक उल्टा है। संक्षेप में हम किसी लेख, भाषण आदि को इस रूप में छोटा (संक्षेप में) करके लिखते हैं कि उसका केन्द्रीय मूल्य या कथ्य आ जाए तथा परिधीय या गौण बातें निकल जाएँ। इसके विपरीत पल्लवन में हम किसी सूक्ति “विपत्ति मित्रों की कसौटी है”, कहावत “नौ दिन चले अढाई कोस\" काव्य पंक्ति “का वर्षा जब कृषि सुखानी\" वाक्य–“जिसे दुःख का स्वाद नहीं मिला, उसे सुख का स्वाद क्या मिलेगा\", छन्द या लघु प्रोक्ति - \"दो-तीन वाक्यों का सुसंगठित और अपने आप में स्वतन्त्र वाक्य बंध\", आदि का विस्तार करते हैं और यह प्रयास करते हैं कि संक्षेप में प्रस्तुत मूल कथ्य को लेकर, विस्तार से समझते हुए, उदाहरणों द्वारा सन्तुष्ट करते हुए, उसके विपक्ष में सम्भावित तर्कों को काटते हुए, उसे इतना विस्तार दें कि मूल कथ्य पूर्णरूप से स्पष्ट हो जाए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eध्यान देने योग्य बातें– पल्लवन के विषय में क्रमानुसार निम्नलिखित बातें स्मरण रखने की हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(1) पल्लवन में मूल कथन का ही विस्तार होता है ताकि वह अपने सभी आयामों के साथ गहराई से स्पष्ट हो सकें।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(2) पल्लवन में मूल कथ्य के साथ कोई दूसरा ऐसा कथ्य नहीं आना चाहिए जो मूल वाक्य जैसा हो अथवा उससे अधिक महत्वपूर्ण लगे और उसके आने से मूल कथ्य गौण हो जाए अथवा दब जाए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(3) इसमें मूल कथ्य को समझाने के लिए उदाहरण आदि दिये जा सकते हैं, किन्तु यह स्मरणीय है कि वे किसी रूप में मूल कथ्य के विरोधी न हों।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(4) विस्तार में जाते हुए पल्लवन में मूल कथ्य के पक्ष में सम्भावित समस्त तर्क दिये जाने चाहिए जिससे यह स्पष्ट हो सके। साथ ही आवश्यकतानुसार वे भी तर्क दिये जाने चाहिए जो मूल कथ्य के विरोध में सम्भावित तर्कों को काट सके।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(5) पल्लवित सामग्री में आद्यांत सहज प्रवाह होना अपेक्षित है। इसमें प्रारम्भिक वाक्य अगले वाक्य से जुड़ा होना चाहिए तथा अन्तिम वाक्य अपने पूर्व के वाक्य से, बीच के वाक्य से अत्यन्त सहज रूप में आगे-पीछे के वाक्यों से जुड़ा होना चाहिए अर्थात् पूरी सामग्री में सुविचारित पूर्वापर क्रम होना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(6) कि मूल कथ्य ही रूप ग्रहण पल्लवन प्रायः एक बड़े पैराग्राफ के रूप में होना चाहिए, उसे इतना छोटा नहीं होना चाहिए स्पष्ट न हो । इसके साथ ही उसे इतना बड़ा भी न होना चाहिए कि वह निबन्ध को ले। यों पल्लवन के लिये दिये जाने वाली सूक्तियों, लोकोक्तियों, काव्य-पंक्तियों आदि पर निबन्ध भी लिखे जा सकते हैं और लिखे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(7) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पल्लवन की भाषा शुद्ध, सरल और संयत होनी चाहिए तथा उदाहरण भूतकालिक क्रिया में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपल्लवन के कुछ उदाहरण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. \" पर उपदेश कुशल बहुतेरे \"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - यह सूक्ति गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से ली गई है। तुलसीदास जी ने इस सूक्ति वाक्य में मनुष्य स्वभाव का वर्णन करते हुए बताया है कि दूसरों को उपदेश देने में बहुत लोग कुशल होते हैं। किसी काम को स्वयं करना बहुत कठिन है, पर दूसरों को उसे करने के विषय में बताना सरल है । इसी बात का संकेत करने वाली तुलसी की पूरी अर्द्धाल इस प्रकार है - \u003cb\u003eपर उपदेश कुशल बहुतेरे । स्वयं करहिं ते नर न घनेरे।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक प्रचलित लोक कथा इस पर पर्याप्त प्रकाश डालती है । एक चित्रकार ने चित्र बनाकर चौराहे पर रख दिया। साथ ही एक बोर्ड लगा दिया कि इस चित्र में जो त्रुटियाँ हों, उनका संकेत कर दें | अगले दिन चित्रकार ने देखा तो पूरे चित्र पर जगह-जगह गुणा के निशान (x) बने हुए थे । अगले दिन उसने उसी प्रकार का चित्र बनाकर वहीं रख और पास बोर्ड लगा दिया – \"किसी को इसमें कमी मालूम हो तो उसे पूरा कर दे ।” चित्रकार ने अगले दिन पाया कि उसका चित्र ज्यों का त्यों रखा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. “महत्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - जिस प्रकार सीपी में मोती रहता है, उसी प्रकार निष्ठुरता में महत्वाकांक्षा मोती। सुदृश कमनीय एवं रमणीय महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए कभी-कभी कठोर काम भी करने पड़ते हैं। यदि कोई सहृदय और उदार होकर यह चाहे कि प्रत्येक महत्वाकांक्षा पूरी हो जाए, तो यह असंभव है। महत्वाकांक्षी व्यक्ति को अनेक अवसरों पर निष्ठुरता एवं क्रूरता का परिचय देना पड़ता है। दूसरे शब्दों में यदि कोई व्यक्ति निष्ठुरता तथा क्रूरता दिखा रहा है, तो निस्संदेह परोक्षतः उसके पीछे उसकी महत्वाकांक्षा विद्यमान है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. \"क्रोध अन्धा होता है। \"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - क्रोध एक उम्र मनोविकार है। क्रोध के आवेग में मनुष्य विवेक खो देता है । उसे उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं रह जाता । वह क्रोध के परिणामों पर भी विचार नहीं करता। क्रोध के आवेग में व्यक्ति अपना ही अनिष्ट कर बैठता है । क्रोधित व्यक्ति की दृष्टि सदैव दुःख-दाता पर ही रहती है। वह कभी अपना दोष नहीं देखता । इस प्रकार सामाजिक जीवन में क्रोध शान्ति भंग करने वाला मनोविकार माना गया है। इसीलिए क्रोध को अन्धा कहा गया है। जिस प्रकार अन्धा व्यक्ति अपने मार्ग से भटक जाता है, उसी प्रकार क्रुद्ध व्यक्ति विवेक के अभाव में अनुचित कार्य कर बैठता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. \"साहित्य समाज का दर्पण है।\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - साहित्य के निर्माण में समाज का प्रमुख हाथ रहता है और बिना समाज के साहित्य का निर्माण असम्भव है। यदि हम किसी समाज या जाति के उत्थान-पतन, आचार-व्यवहार, सभ्यता संस्कृति आदि के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमें उस समाज से सम्बन्धित साहित्य का अध्ययन करना पड़ेगा। संसार की सभ्य जातियों में उन्हीं की गणना करना, जिनका साहित्य उच्च कोटि का होता है। जिस समय समाज जैसा होगा, उस समय उसी प्रकार के साहित्य की रचना की जायेगी। इसलिए साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. \"अपने बच्चों के प्रति उदार कोई माँ नहीं, जितनी धरती।\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - धरती माता कहलाती । हमारा जीवन धरती के बिना नहीं चलता। वही हमें धनधान्य देती है, वही जल | सारी खनिज सम्पदा धरती से ही निकलती है। धरती माता हमें अन्न प्रदान करती है । रबी-खरीफ फसलों की जननी धरती ही है। किसान खेत में अन्न के दाने बोता है। धरती मानो मनुष्य के नाम हरी स्याही से लिख देती है कि तुम्हारा दिया चार महीने में चौबीस गुना करके लौटा दूँगी। वेदों से लेकर आज तक धरती के गुण गाये गए हैं। वेदों में कहा गया है कि पृथ्वी हमारी माँ है, हम पृथ्वी के बेटे हैं। धरती को वसुधा कहते हैं और वसुन्धरा भी । धरती रत्नगर्भा होती है। कविवर बच्चन ने धरती की प्रशस्ति में लिखा है - 'लाख आकर्षित करे आकाश, अपनाता कहाँ है ?\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. \"जहाँ सुमति तहँ सम्पत्ति नाना\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - सुमति शब्द का अर्थ है - सु + मति अर्थात् अच्छी बुद्धि। यह पंक्ति गोस्वामी तुलसीदास जी कृत रामचरितमानस से ली गई है। इस पंक्ति का साधारण अर्थ यह है कि जहाँ अच्छी बुद्धि होती है, वहाँ तरह-तरह की सम्पत्तियाँ रहती हैं। सम्पत्ति शब्द का अर्थ धन के अतिरिक्त प्रसन्नता भी होता है। अच्छी बुद्धि वाला मनुष्य भले काम करेगा और बुरे कामों से बचेगा। विपत्तियाँ बुरे काम करने वाले को ही घेरती हैं। अच्छी बुद्धि वाला स्वयं तो अच्छे मार्ग पर चलता ही है, दूसरों को भी अच्छी सलाह देकर उचित काम करने और अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि सभी प्रकार की धन-सम्पत्ति और प्रसन्नता वहीं रहती है, जहाँ अच्छी बुद्धि होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. \"परहित सरिस धर्म नहि भाई\"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपल्लवन - धर्म के कई कार्य और लक्षण बताये जाते हैं, जैसे धैर्य, क्षमा आत्म-निग्रह, चोरी न करना, सच बोलना, क्रोध न करना, अहिंसा परमोधर्मः । परन्तु परोपकार के समान कोई और धर्म नहीं है। परोपकारी हिंसा नहीं कर सकता, चोरी नहीं करेगा, शत्रु का भी भला करेगा, क्रोध तो करेगा ही नहीं। इसलिए सारे धर्म परहित या परोपकार के अंदर आ जाते हैं।\"\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2363165008735957359"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2363165008735957359"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/12/pallavan-kise-kahate-hain.html","title":"पल्लवन किसे कहते है - pallavan kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"नौकरी पाने के लिए आवेदन-पत्र - naukri pane ke liye aavedan patra"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eआवेदन-पत्र का ढाँचा पारिवारिक पत्र से कुछ भिन्न होता है। इसमें पत्र प्रेषक का पता दायें हाथ पर ऊपर के कोने पर नहीं लिखा जाता है, अपितु बायें हाथ की ओर पत्र की समाप्ति पर नीचे लिखा जाता है। पत्र के प्रारम्भ में बायें कोने पर 'सेवा में उसकी अगली पंक्ति में कुछ स्थान छोड़कर प्रेषिती (जिसे पत्र भेजा जा रहा है) का पद और पता लिखा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसम्बोधन के लिए ‘महोदय’ लिखा जाता है। आवेदनों में अभिवादन नहीं होता है। सीधे 'निवेदन है' या 'सविनय निवेदन है से पत्र का कलेवर प्रारम्भ होता है। स्वनिर्देश तथा हस्ताक्षर सभी पत्रों की भाँति इसमें भी पत्र के नीचे दायीं ओर रहते हैं। दिनांक भी आवेदनों में नीचे दिया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh_7Jll6SRL_pbUbIO48JiT2_PVIV1vO9e5ax-sBHPVi_FcmYAK4tHHfI1RZKSXtZhd-aHXGfkuc-v35lU092upuI0T9WAc7YBdyIgkG_mYCGSXg8c5TZpDia60IgPLbvaiDmKsvdnV3L2G13Sy957doLGYBXPXQgBzSYb6kpkWJVGENhtNMM_kQ2hMkeyW/s600/20231127_195047.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"नौकरी पाने के लिए आवेदन-पत्र\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"394\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"210\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh_7Jll6SRL_pbUbIO48JiT2_PVIV1vO9e5ax-sBHPVi_FcmYAK4tHHfI1RZKSXtZhd-aHXGfkuc-v35lU092upuI0T9WAc7YBdyIgkG_mYCGSXg8c5TZpDia60IgPLbvaiDmKsvdnV3L2G13Sy957doLGYBXPXQgBzSYb6kpkWJVGENhtNMM_kQ2hMkeyW/w320-h210/20231127_195047.webp\" title\u003d\"नौकरी पाने के लिए आवेदन-पत्र\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eध्यान देने योग्य अन्य महत्वपूर्ण बातें -\u003c/b\u003e 1. आवेदन पत्रों की भाषा स्पष्ट, संक्षिप्त और शिष्ट होनी चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. लम्बे वाक्यों का प्रयोग अनुचित है। असंगत बातें लिखकर आवेदन को लम्बा कर देने से भी कोई लाभ नहीं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. कठोर अथवा कर्कश शब्दों का उपयोग भी आवेदन पत्र में नहीं किया जाना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. नम्र भाव और सन्तुलित शैली में लिखे आवेदन ही प्रभावपूर्ण होते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनौकरी पाने के लिए आवेदन-पत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eलेखाधिकारी के स्थान हेतु आवेदन\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसेवा में,\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003eप्रबन्धक महोदय,\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003eस्टील ट्यूब ऑफ इण्डिया लि.\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003eभिलाई (छ.ग.)\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eविषय - \u003c/b\u003eलेखाधिकारी पद हेतु आवेदन पत्र\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमान्यवर,\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमुझे दैनिक भास्क॒र में दिनांक 30 अगस्त, 2023 को प्रकाशित आपके विज्ञापन के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि आपके यशस्वी कार्यालय में एक लेखाधिकारी की आवश्यकता है। उस सन्दर्भ में अपनी सेवाएँ निम्न शैक्षणिक व अन्य योग्यताओं की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत करता हूँ।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. नाम - राजेश कुमार अग्रवाल।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. आयु (व जन्म तिथि) – 28 वर्ष (1 मई, 1995) ।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. स्थायी पता – 475 एम. जी. रोड, रायपुर (छत्तीसगढ़)।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. शिक्षा - (क) हायर सेकेण्डरी 2012 में म. प्र. माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल से प्रथ श्रेणी में उत्तीर्ण की ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(ख) बी. कॉम - सन् 2016 में पं. रविशंकर शुक्ल वि. वि. से प्रथम श्रेणी में ।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(ग) एम. कॉम - सन् 2019 में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. अनुभव - मैं अगस्त, 2020 से प्रायस इण्डस्ट्रीज बिलासपुर में लिपिक के पद पर कार्य कर रहा हूँ। यद्यपि सभी उच्च अधिकारी मेरे कार्य प्रदर्शन से सन्तुष्ट हैं, तथापि मैं अपनी उन्नति हेतु आवेदन प्रेषित कर रहा हूँ\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. अन्य विवरण - मैं 28 वर्ष का एक स्वस्थ नवयुवक हूँ । विद्यालय जीवन में ही खेलकूद, एन. सी. सी. व साहित्यिक गतिविधियों में अग्रणी रहा हूँ ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. सन्दर्भ हेतु नाम - मैं अपने चारित्रिक परिचय हेतु निम्न दो महानुभावों के नाम प्रेषित कर रहा हूँ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(क) डॉ. आर. के. वर्मा, एम. ए., एम. कॉम, साहित्य रत्न, वाणिज्य विभाग, दुर्गा वाणिज्य परं महाविद्यालय रायपुर।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eराज मोहल्ला रायपुर - 452-002\u003c/p\u003e\u003cp\u003e(ख) प्रबन्धक, प्रयास इण्डस्ट्रीज\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअन्त में, मैं आपको पूर्ण दक्षता व लगन से कार्य करने का विश्वास दिलाना चाहता हूँ । धन्यवाद सहित,\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंलग्न - (1) 5 अंक सूचियाँ\u003c/p\u003e\u003cp\u003e( 2 ) 2 प्रमाण-पत्र - खेलकूद\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिनांक : 2 सितम्बर, 2023\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003eभवदीय\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003eराजेश कुमार अग्रवाल\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003e475, एम. जी. रोड, रायपुर (छ. ग.)\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6608813243588697512"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6608813243588697512"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/11/naukri-pane-ke-liye-aavedan-patra.html","title":"नौकरी पाने के लिए आवेदन-पत्र - naukri pane ke liye aavedan patra"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh_7Jll6SRL_pbUbIO48JiT2_PVIV1vO9e5ax-sBHPVi_FcmYAK4tHHfI1RZKSXtZhd-aHXGfkuc-v35lU092upuI0T9WAc7YBdyIgkG_mYCGSXg8c5TZpDia60IgPLbvaiDmKsvdnV3L2G13Sy957doLGYBXPXQgBzSYb6kpkWJVGENhtNMM_kQ2hMkeyW/s72-w320-c-h210/20231127_195047.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7027928857059937295"},"published":{"$t":"2023-11-19T04:37:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-19T08:25:28.912+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"वचन किसे कहते है - हिंदी व्याकरण"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  वचन का अर्थ \"संख्या\" है, और इसका उपयोग भाषा में संख्या की दृष्टि से किया जाता\n  है। हिंदी व्याकरण में, वचन दो प्रकार के होते हैं - एकवचन और बहुवचन।\u0026nbsp;वचन\n  का उपयोग हिंदी भाषा में सही संख्या की स्पष्टता के लिए होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eवचन किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  संस्कृत भाषा में, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि की संख्या को दर्शाने वाले शब्द\n  को वचन कहते है। जब हम किसी शब्द को एक ही व्यक्ति या वस्तु को सूचित करने के लिए\n  प्रयोग करते हैं, तो उसे एकवचन कहते हैं, और जब वह शब्द एक से अधिक व्यक्ति या\n  वस्तु को सूचित करते हैं, तो उसे बहुवचन कहते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण के लिए -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e1. एकवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eगुलाब - गुलाब खिला है।\u003cbr /\u003eकिताब - मैंने एक किताब पढ़ी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. बहुवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eगुलाब - गुलाब खिले हैं।\u003cbr /\u003eकिताब - हमने कई किताबें खरीदीं हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. एकवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकुत्ता - वहाँ एक कुत्ता भोंक रहा है।\u003cbr /\u003eघड़ी - उनके एक सोने की घड़ी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. बहुवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकुत्ता - उनके घर में कई कुत्ते हैं।\u003cbr /\u003eघड़ी - उनके पास कई घड़ियां हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. एकवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकमरा - वहाँ एक कमरा खाली है।\u003cbr /\u003eफूल - एक फूल बहुत सुंदर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. बहुवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकमरा - हमारे घर में कई कमरे हैं।\u003cbr /\u003eफूल - बगीचे में कई फूल खिले हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. एकवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eस्कूल - स्कूल में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।\u003cbr /\u003eकुर्सी - यहाँ एक कुर्सी खाली है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e8. बहुवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eस्कूल - हमारे शहर में कई स्कूल हैं।\u003cbr /\u003eकुर्सी - इस कक्ष में कई कुर्सियां हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e9. एकवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eगाड़ी - उसकी गाड़ी बहुत तेज़ है।\u003cbr /\u003eपेन - मेरे पास एक पेन है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e10. बहुवचन\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eगाड़ी - उनके पास कई गाड़ियां हैं।\u003cbr /\u003eपेन - उनके बच्चों के पास कई पेन हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6eoIcpIpDVFGme-9sj_LnqgqIG55SX50r4XLmwlG7tWpzzIvh0QAlWz0YbRmk_9Lh3MC9GaEibScM9c5-zN78Ce2AzOfWDjiuiCKG8CO1XmsqzV25WDGxXiqWek_oceN9Kvf2aApftXoBTLeWtl5-cI0FW3WxYoE_2gF-bkfSoEdkwY_lscdRyFFFLww1/s600/20231119_082353.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"वचन किसे कहते है - हिंदी व्याकरण\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"395\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"211\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj6eoIcpIpDVFGme-9sj_LnqgqIG55SX50r4XLmwlG7tWpzzIvh0QAlWz0YbRmk_9Lh3MC9GaEibScM9c5-zN78Ce2AzOfWDjiuiCKG8CO1XmsqzV25WDGxXiqWek_oceN9Kvf2aApftXoBTLeWtl5-cI0FW3WxYoE_2gF-bkfSoEdkwY_lscdRyFFFLww1/w320-h211/20231119_082353.webp\" title\u003d\"वचन किसे कहते है - हिंदी व्याकरण\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वचन का प्रयोग भाषा की सुधार और सुव्यवस्था के लिए किया जाता है, जिससे सुनने\n  वाला या पढ़ने वाला व्यक्ति सही से समझ सके कि शब्द किस संख्या में हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eपरिभाषा \u003c/b\u003e- संज्ञा के जिस रूप से संख्या का बोध होता है उसे हिंदी में वचन\n  कहते हैं अथार्त संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का\n  पता चले वचन हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eवचन के प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eवचन दो प्रकार के होते है \u003cspan style\u003d\"color: #800180;\"\u003eएक वचन\u003c/span\u003e और\n    \u003cspan style\u003d\"color: #800180;\"\u003eबहुवचन\u003c/span\u003e।\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e1 एकवचन\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- किसी शब्द से एक ही वस्तु का बोध हो, उसे एकवचन कहते हैं।\n  जैसे-लड़का, गाय, सिपाही, बच्चा, कपड़ा, माता, माला, पुस्तक, स्त्री, टोपी बंदर,\n  मोर आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e2 बहुवचन\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp; शब्द में एक से अधिक संख्या का बोध हो उसे बहुवचन\n  कहते हैं। जैसे-लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ,\n  गुरुजन, रोटियाँ, स्त्रियाँ, लताएँ, बेटे आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eबहुवचन बनाने के लिए नियम\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  आकारांत पुलिंग शब्दों के अंत में ' ए ' लगाकर एक वचन को बहुवचन बनाया जा सकता\n  हैं। अकारान्त शब्द वे शब्द होते हैं जिसके अंत में ' अ ' आता है। जैसे - लड़का,\n  घोड़ा, बेटा, कक्षा, बालिका, गधा आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eशब्द\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eबहुवचन\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़का\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़के\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eघोडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eघोड़े\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगधा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगधे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cp\u003e\n  जिन शब्दों के अन्त में ' आ ' ध्वनि सुनाई देती है उसे आकारान्त शब्द होते हैं। जैसे बात, लता, आँख, पुस्तक इत्यादि। आकारान्त\u0026nbsp;स्त्रीलिंग शब्दों के अंत में ' एँ ' लगाकर बहुवचन बनाया जाता हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eशब्द\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eबहुवचन\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eलता\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलताएं\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबात\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबातें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eआँख\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eआंखें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eपुस्तक\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपुस्तकें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cp\u003e\n  इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में या लगा देते हैं। जैसे : जाति - जातियाँ, नदी -\n  नदियाँ, लड़की - लड़कियाँ।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  स्त्रीलिंग में अंतिम उ, ऊ में ए जोड़कर दीर्घ ऊ का हस्व हो जाता है। जैसे : वस्तु\n  - वस्तुएँ, बहु - बहुएँ।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कुछ शब्दों में गण, जन आदि शब्द लगाकर बहुवचन बनाया जाता है। जैसे : नेता -\n  नेतागण, सुधी - सुधिजन।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eनोट\u003c/b\u003e - कुछ शब्द दोनों वचनों में एक जैसे होते\u0026nbsp;हैं। जैसे - क्षमा, जल,\n  प्रेम, गिरि, पिता, चाचा, मित्र, फल, बाजार, फूल, दादा, राजा, विद्यार्थी आदि।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eबहुवचन शब्द -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eएकवचन\u0026nbsp;\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eबहुवचन\u0026nbsp;\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबहन\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबहनें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसड़क\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसड़के\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगाय\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगायें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबात\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबातें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकौआ\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकौए\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगधा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगधे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकेला\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकेले\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकविता\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकविताएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eलता\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलताएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकली\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकलियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eनीति\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनीतियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकॉपी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकॉपियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़की\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़कियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eथाली\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eथालियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eनारी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनारियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगौ\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगौएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबहू\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबहूएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eवधू\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवधुएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eवस्तु\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवस्तुएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eधातु\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eधातुएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eमित्र\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमित्रवर्ग\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eविद्यार्थी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eविद्यार्थीगण\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसेना\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेनादल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगुरु\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगुरुजन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eश्रोता\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eश्रोताजन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eपत्ता\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपत्ते\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबेटे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़का\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलड़के\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकिताब\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिताबें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगाड़ी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगाड़ियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकुत्ता\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकुत्ते\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबच्चा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबच्चे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगाना\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगाने\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकमरा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकमरे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगाय\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगाएं\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eदुकान\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eदुकानें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eपुस्तक\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपुस्तकें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबच्ची\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबच्चियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबुढ़ा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबुढ़े\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eनदी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनदियाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसितारा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसितारे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबाग\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबागें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eपौधा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपौधे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसफलता\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसफलताएँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eरात\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eरातें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eचाय\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eचायें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबैंक\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबैंकें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबिस्तर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबिस्तरें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eतारीख\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eतारीखें\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eमिठाई\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमिठाईयाँ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n     \u003ctr\u003e\n      \u003ctd align\u003d\"center\" colspan\u003d\"2\"\u003eकुछ एक वचन जो बहुवचन में परिवर्तित नहीं होते\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eएकवचन\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eबहुवचन\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eस्कूल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eस्कूल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eफूल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eफूल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबाल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबाल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eफल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eफल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसमय\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसमय\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध - swachh bharat abhiyan essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eस्वच्छ भारत अभियान भारत को साफ-सुथरा बनाने के लिए एक बेहतरीन शुरुआत है। यदि सभी नागरिक एक साथ इस अभियान में भाग लेंगे, तो भारत जल्द ही स्वच्छता की ओर अग्रसर हो जाएगा। जब भारत की स्वच्छ स्थिति में सुधार होगा। भारत में पर्यटकों संख्या में वृद्धि होगी।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्वच्छ भारत अभियान पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eस्वच्छ भारत अभियान सबसे महत्वपूर्ण अभियान है। यह अभियान भारत को स्वच्छ बनाने का सपना हैं। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए इसे 2 अक्टूबर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इसकी शुरुआत की थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eस्वच्छ भारत अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया और सभी कस्बों, ग्रामीण और शहरी इलाकों को शामिल किया गया हैं। इसने लोगों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलेगी।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eइसका उद्देश्य सभी घरों के लिए स्वच्छता सुविधाओं का निर्माण करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे आम समस्याओं में से एक खुले में शौच है। स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य इसे खत्म करना है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अलावा, भारत सरकार का इरादा सभी नागरिकों को हैंडपंप, उचित जल निकासी व्यवस्था, स्नान की सुविधा प्रदान करना है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत आज गांव और छोटे कश्बों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध हैं। यह गांव के लिए बड़ी समस्या थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदूसरे शब्दों में, स्वच्छ भारत अभियान उचित अपशिष्ट प्रबंधन में भी मददकरता हैं। जब हम कचरे का सही तरीके से निपटान करेंगे और कचरे को रिसाइकिल करेंगे, तो इससे देश का विकास होगा। जैसा कि इसका मुख्य ध्यान एक ग्रामीण क्षेत्र है, इसके माध्यम से ग्रामीण नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: 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दुनिया के सबसे गंदगी वाले देशों में से एक है, और यह मिशन इस स्थिति को बदल सकता है। भारत को स्वच्छ और सुन्दर बनने के लिए स्वच्छ भारत अभियान जैसे स्वच्छता अभियान की आवश्यकता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्वच्छ भारत अभियान की उपलब्धियां\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eस्वच्छ भारत अभियान, भारत सरकार द्वारा 2014 में भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाने और स्वच्छ वातावरण प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। स्वच्छ भारत अभियान की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. खुले में शौच मुक्त - स्वच्छ भारत अभियान का एक प्राथमिक लक्ष्य भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना था। इस संबंध में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों ने खुले में शौच मुक्त कर लिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. शौचालय का निर्माण - मिशन ने स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लाखों शौचालयों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया हैं। खुले में शौच को खत्म करने के लिए व्यक्तिगत घरेलू शौचालय उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. अपशिष्ट प्रबंधन - स्वच्छ भारत अभियान ने अपशिष्ट प्रबंधन के उचित निपटान और पुनर्चक्रण प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eस्वच्छता रैंकिंग - स्वच्छता के आधार पर शहरों का आकलन और रैंकिंग करने के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस पहल ने अपने स्वच्छता मानकों में सुधार के लिए शहरों और राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअंतर्राष्ट्रीय मान्यता - स्वच्छ भारत अभियान को बड़े पैमाने पर स्वच्छता संबंधी मुद्दों के समाधान के प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली हैं। अभियान की उसके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और अपेक्षाकृत कम अवधि में हुई प्रगति के लिए सराहना मिला हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालांकि महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, और स्वच्छ भारत अभियान की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। इस पहल ने एक स्वच्छ भारत की नींव रखी है, लेकिन उपलब्धियों को बनाए रखने और नई चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्वच्छ भारत अभियान पर 10 पंक्तियाँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e1. विज़न - स्वच्छ भारत अभियान 2 अक्टूबर 2014 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त भारत प्राप्त करने की दृष्टि से शुरू किया गया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. उद्देश्य - अभियान का प्राथमिक उद्देश्य देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देना था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. खुले में शौच-मुक्त - मिशन का लक्ष्य लाखों शौचालयों का निर्माण करके और लोगों के व्यवहार में परिवर्तन करके खुले में शौच मुक्त करना है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. भागीदारी - स्वच्छ भारत अभियान ने उचित स्वच्छता बनाए रखने में समुदायों, स्थानीय निकायों और व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. अपशिष्ट प्रबंधन - इस अभियान के तहत अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दों को ध्यान दिया गया हैं और उचित अपशिष्ट निपटान व रीसाइक्लिंग की वकालत की गयी हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. सरकारी पहल - सरकार ने राज्यों और शहरों को स्वच्छता प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लेने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और पुरस्कार सहित कई पहल कीं हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. जागरूकता अभियान - स्वच्छ भारत अभियान ने नागरिकों को स्वच्छता के महत्व के बारे में शिक्षित और प्रेरित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया, जिसमें मशहूर हस्तियों और सार्वजनिक हस्तियों को शामिल किया गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e8. स्वच्छता\u0026nbsp;सर्वेक्षण - स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए शहरों को उनके स्वच्छता मानकों के आधार पर रैंक करने के लिए शुरू किया गया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e9. अंतर्राष्ट्रीय मान्यता - इस अभियान को अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और स्वच्छता और स्वच्छता में सुधार के लिए की गई महत्वपूर्ण प्रगति के लिए अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e10. चल रही चुनौतियाँ - हालाँकि प्रगति हुई है, लेकिन चल रही चुनौतियाँ, जैसे कि व्यवहार में परिवर्तन को बनाए रखना और अपशिष्ट प्रबंधन के को बनाए रखना आवश्यक है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7905703483974969603"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7905703483974969603"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/swachh-bharat-abhiyan-essay-in-hindi.html","title":"स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध - swachh bharat abhiyan essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjx9Wibo8vaf06WUM_SQy7g7znWuuOcNnFnG1pmQaX1U96xBgrSi_XKYfG27VhxQaKjintR3kRD7ELBlisP9DOBqHHdOl3pxxicX6vD_mPt54b1JWWt5eqTr9Pm_YprdciqpwkzXjrvBKsY6V1yDJqEy24HBXYVPFxLOmXvnrN43cY3QBV4JSwaXT237Ju_/s72-w320-c-h213/20231119_032026.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6106200694019258037"},"published":{"$t":"2023-11-11T06:40:00.000+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-11T06:40:25.739+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"सर्वनाम किसे कहते है - सर्वनाम के प्रकार"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में सर्वनाम के बारे में जानकारी दी गयी हैं। सर्वनाम\n  क्या है ? और सर्वनाम के कितने प्रकार होते हैं?\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसर्वनाम किसे कहते है\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eउत्तर - \u003c/b\u003eजो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में लाए जाते हैं, उन्हें\n  सर्वनाम कहते हैं। जैसे - मैं, वह, आप, तुम, कौन, हम, वे आदि। सर्वनाम की\n  आवश्यकता सामान्यतः इसलिए होती है कि संज्ञा का बार-बार प्रयोग न करना\n  पड़े।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  संज्ञा की अपेक्षा सर्वनाम इसलिए विलक्षण है कि संज्ञा से जहाँ उसी वस्तु का बोध\n  होता है जिसका वह नाम है, वहीं सर्वनाम में पूर्वापर सम्बन्ध के अनुसार किसी भी\n  वस्तु का बोध होता है। जैसे घोड़ा कहने से केवल ‘घोड़े’ का होता है किन्तु 'वह'\n  कहने से पूर्वापर सम्बन्ध के अनुसार ही किसी वस्तु का बोध होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eउदाहरण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eवह \u003c/b\u003eस्कूल जा रहा हैं।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eतुम\u003c/b\u003e कौन से गाँव में रहते हो ?\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eमै \u003c/b\u003eकल इंदौर जाऊंगा।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eक्या \u003cb\u003eयह \u003c/b\u003eतुम्हारा कलम हैं?\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eउसका \u003c/b\u003eनाम क्या हैं ?\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eवे\u003c/b\u003e सिनेमा देखने कितने बजे जाने वाले हैं ?\u003c/li\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसर्वनाम के भेद या प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहिन्दी में सर्वनाम मुख्यत: पाँच प्रकार के होते हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eपुरूषवाचक - मैं, तू, वह, हम, मैंने\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eनिश्चयवाचक - 'यह, वह\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअनिश्चयवाचक - कोई, कुछ\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसंबंधवाचक - जो, सो\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eप्रश्नवाचक - कौन, क्या\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e 1. पुरूष वाचक सर्वनाम\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपुरुष वाचक सर्वनाम उसे कहते हैं जो किसी व्यक्ति (स्त्री अथवा पुरुष) के नाम के बदले में आते हैं। इसके तीन भाग हैं, उत्तम पुरुष में स्वयं लेखक या वक्ता आता है, मध्यम पुरुष में पाठक या श्रोता आता है तथा अन्य पुरुष में लेखक और श्रोता के अलावा कोई अन्य आता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपुरूष वाचक सर्वनाम के तीन भेद हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eउत्तम पुरुष – मैं, हम, हमारा।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमध्यम पुरुष – तू, तुम्हारा, आप, तुम।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअन्य पुरुष - वह, वे, यह, ये आदि।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e\n  उत्तम पुरूष -\u003c/b\u003e प्रवक्त\u0026nbsp; या लेखक जो भी शब्द अपने लिए प्रयोग करता है उसे\n  उत्तम पुरूष कहते हैं। जैसे- मैं लिखता हूँ। हम लिखते हैं। इस सेन्टेंस में मैं\n  और हम\u0026nbsp; उत्तम पुरूष सर्वनाम होगा।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e\n  मध्यम पुरूष -\u003c/b\u003e सुनने वाला के लिए मध्यम पुरूष का प्रयोग किया जाता है। जैसे की-\n  तुम जाओ। आप जाइये। इन सभी वाक्यों में तुम और आप मध्यम पुरूष होता हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e\n  अन्य पुरूष - \u003c/b\u003eप्रवक्ता व\u0026nbsp; लेखक द्वारा श्रोता के अतिरिक्त किसी दुसरे\u0026nbsp;\n  (तीसरे) के लिए अन्य पुरूष का प्रयोग होता है।\u0026nbsp; जैसे- वह पढ़ता है। वे पढ़ते\n  हैं।\u0026nbsp; इन वाक्यों में वह और वे शब्द अन्य पुरूष हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Ubb8CT5NiJI/XalFHQfGaoI/AAAAAAAABCc/VM08rAi-6DYgaTIKoFWQdYUFrIGEMT5RACLcBGAsYHQ/s1600/sarvnam.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सर्वनाम किसे कहते हैं - sarvanam ke bhed\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Ubb8CT5NiJI/XalFHQfGaoI/AAAAAAAABCc/VM08rAi-6DYgaTIKoFWQdYUFrIGEMT5RACLcBGAsYHQ/w320-h180/sarvnam.jpg\" title\u003d\"सर्वनाम किसे कहते हैं - sarvanam ke bhed\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. निश्चय वाचक सर्वनाम\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजिस सर्वनाम से बोलने वाले व्यक्ति के पास या दूर की किसी वस्तु की निश्चितता का बोध होता है उसे निश्चय वाचक सर्वनाम कहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउदाहरण –\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eयह शीला की बहन है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवह श्याम का घर है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eये हिरन हैं।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवे बाहर गए हैं।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eयह किताब मेरी है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवह तुम्हारी है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजिस सर्वनाम के द्वारा किसी निश्चित वस्तु का बोध नहीं हो पाता उसे अनिश्चित वाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- कोई, कुछ। कोई शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित व्यक्ति के लिए और कुछ शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित पदार्थ के लिए प्रयुक्त होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउदाहरण –\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eयहाँ कोई आया था।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eइसमें कुछ सामग्री है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबाहर कोई है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमुझे कुछ नहीं\n  मिला।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. संबंधवाचक सर्वनाम\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऐसे सर्वनाम जिससे वाक्य में किसी दूसरे सर्वनाम से संबंध का बोध होता है। उसे संबंध वाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे - जो, सो, जैसा, वैसा आदि।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउदाहरण -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eजो परिश्रम करेगा वह सफल होगा।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eजो जैसा बोयेगा वह वैसा ही काटेगा।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. प्रश्नवाचक सर्वनाम\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजिस सर्वनाम से प्रश्न का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे - कौन, क्या।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउदाहरण -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eकौन आया है ?\u003c/li\u003e\u003cli\u003eतुम्हें क्या हो गया है?\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003eइन\n  वाक्यों में कौन और क्या शब्द प्रश्रवाचक सर्वनाम हैं। कौन शब्द का प्रयोग\n  प्राणियों के लिए और क्या का प्रयोग जड़ पदार्थों के लिए होता है।\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कामता प्रसाद गुरु के अनुसार हिन्दी के प्राय: सभी सर्वनाम प्राकृत अपभ्रंश\n  द्वारा संस्कृत से निकले हैं।\u003c/p\u003e\n\n\u003ctable border\u003d\"1\"\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eअहम्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअम्ह\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमैं, हम\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eत्वम्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eतुम्ह\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eतू, तुम\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eएष\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eएअ\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eयह, ये\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसः\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसो, वह, वे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकः\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eको\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकौन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकिम्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिम्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eक्या\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकोऽपि\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोवि\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोई\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eआत्मन्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eआप\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eआप\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकिंचित्\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिंचि\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकुछ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eसंज्ञा और सर्वनाम को परिभाषित करते हुए प्रत्येक को पाँच-पाँच\n  उदाहरणों से स्पष्ट कीजिये।\n\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - संज्ञा की परिभाषा - संज्ञा उस विकारी शब्द को कहते हैं जिससे किसी विशेष\n  वस्तु, व्यक्ति या स्थान के नाम का बोध होता है। वस्तु का अर्थ व्यापक होता है।\n  इसके अंतर्गत प्राणी, पदार्थ और धर्म आते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण - 1. हिमालय, 2. पर्वत, 3. नम्रता, 4. सोना, 5. चाँदी।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  सर्वनाम की परिभाषा - जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में लाये जाते हैं,\n  उन्हें सर्वनाम कहते हैं। जैसे - मैं, तुम, वह आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उदाहरण - 1. मैं, तू, वह, 2. यह, वह, 3. कोई, कुछ, 4. जो, सो, जैसा, वैसा, 5.\n  कौन, क्या।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6106200694019258037"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6106200694019258037"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/02/blog-post.html","title":"सर्वनाम किसे कहते है - सर्वनाम के प्रकार"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-Ubb8CT5NiJI/XalFHQfGaoI/AAAAAAAABCc/VM08rAi-6DYgaTIKoFWQdYUFrIGEMT5RACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h180/sarvnam.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7583899940845227848"},"published":{"$t":"2023-11-11T06:37:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:15:07.291+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"जन्माष्टमी पर निबंध - Janmashtami Essay in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eश्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को हुआ था। द्वापर युग में जन्मे कृष्ण की लीला बहुत ही नटखट और ज्ञान से भरी हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबालपन में माखन चोरी से लेकर महाभारत में गीता उपदेश तक उनका जीवन सामान्य नहीं था। उनका जन्म लगभग 5,200 साल पहले का माना जाता हैं। श्री कृष्ण भगवन विष्णु के अवतार थे। जिनका जन्म पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ था।\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजन्माष्टमी पर निबंध\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eश्री कृष्ण के जन्म दिन को जन्माष्टमी के रूप में पूरी दिनया में मनाया जाता हैं। यह त्यौहार आमतौर पर अगस्त के महीने में कृष्ण\n  पक्ष की अष्टमी को मनाते हैं। भगवान श्री कृष्ण का जन्म 12 बजे रात को कारागार में हुआ था। कृष्ण के पिता वासुदेव और उनकी माता का नाम देवकी था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमथुरा के राजा अग्रसेन का पुत्र कंस और पुत्री का नाम देवकी था। कंस एक अत्याचारी था। लेकिन अपनी बहन से बहुत प्रेम करता था। देवकी को शादी वासुदेव के साथ हुआ। जब कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल छोड़ने जा रहा था। तभी आकाशवाणी हुई की देवकी का आठवां पुत्र तुम्हारा काल होगा।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकंस बहुत क्रोधित हो गया और अपनी बहन देवकी और वासुदेव को कारावास में बंद कर दिया और खुद राजा बन गया। समय के साथ देवकी और वसुदेव के 7 पुत्र को कंस ने कारावास में ही मर दिया। आठवें पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने जन्म लिया पूरा कारावास निद्रा में चला गया।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवासुदेव की बेदिया खुल गई और सभी दरवाजे खुल गए। वासुदेव ने कृष्ण की रक्षा के लिए अपने मित्र नंद के पास ले गया। श्रीकृष्ण की परवरिश गोकुल में हुआ था।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eश्रीकृष्ण को माखन खाने का बहुत शौक था। उसके\n  कारण वह हमेशा अपनी माँ की रसोई से चोरी करता था। इसलिए उनका नाम 'नटखट नंद लाल' भी हैं। श्रीकृष्ण काले रंग के थे। इसलिए उन्हें श्याम के नाम से भी जाना जाता हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभारत के आलावा अन्य कई देशो में जन्माष्टमी मनाया जाता हैं। लोग उपवास रखते हैं और शाम को फलाहार कर व्रत तोड़ते हैं। भगवन श्री कृष्ण की पूजा की जाती हैं। माखन और मिठाई का भोग लगाया जाता हैं। अधिकतर माता पिता अपने बच्चे को कृष्ण की तरह सजाते हैं। यह त्यौहार छोटे बच्चो को अधिक प्रिय हैं। क्योकि इस दिन कई खेल का आयोजन किया जाता हैं। जिसमे मुख्य मटकी तोड़\u0026nbsp;सबसे लोकप्रिय हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg_DflWJWg_7qPGMwhR0EjuAcnrsmPutNytk4rAzXELPGmDRe4HvMjTPmXgRL0vSNunFEtaqLGMlhBBiAPS_51yc7iiFCz8A3VKNoGqQNy5clxZ9dGeutkNnixGaCBsE-nSj4knploDYE55fE51AWIf3Goak7sIS51x-TsQfvTZ3jS19BHKUjvud-e_3kXP/s600/20231111_183041.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जन्माष्टमी पर निबंध - Janmashtami Essay in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"397\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg_DflWJWg_7qPGMwhR0EjuAcnrsmPutNytk4rAzXELPGmDRe4HvMjTPmXgRL0vSNunFEtaqLGMlhBBiAPS_51yc7iiFCz8A3VKNoGqQNy5clxZ9dGeutkNnixGaCBsE-nSj4knploDYE55fE51AWIf3Goak7sIS51x-TsQfvTZ3jS19BHKUjvud-e_3kXP/w320-h212/20231111_183041.webp\" title\u003d\"जन्माष्टमी पर निबंध - Janmashtami Essay in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eआसमान में माखन से भरे मटकी को लटकाया जाता हैं। जिसे बाल गोविन्द द्वारा तोडा जाता हैं। यह एक प्रयोगिता हैं। जिसमे कई लोग भाग लेते हैं। सभी को समान अवसर दिए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eचूंकि मटकी बहुत अधिक उची होती है, इसलिए उन्हें एक लंबा पिरामिड बनाकर तोड़ना होता हैं। कई\n  लोगों को खेल में भाग लेना पड़ता है। इसके अलावा, अन्य टीमें भी होती हैं जो\n  उन्हें मटकी तोड़ने से रोकती हैं। प्रत्येक\n  टीम को एक विशेष समय अवधि के लिए मौका मिलता है। अगर टीम समय रहते ऐसा नहीं कर\n  पाती है तो दूसरी टीम कोशिश करती है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eलोग अपने घरों को बाहर से रोशनी से\n  सजाते हैं और मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान किये जाते हैं। परिणामस्वरूप, हम पूरे दिन घंटियों और मंत्रों की\n  आवाज सुनते हैं। लोग विभिन्न धार्मिक गीतों पर नृत्य करते हैं। यह हिंदू\n  धर्म का सबसे सुखद त्योहारों में से एक है।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7583899940845227848"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7583899940845227848"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/janmashtami-essay-in-hindi.html","title":"जन्माष्टमी पर निबंध - Janmashtami Essay in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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छात्रों द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किया जाता है। भारत सरकार हर साल राजधानी नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करती है जहां एक विशेष परेड की जाती है। इस महान कार्यक्रम को देखने के लिए लोग सुबह-सुबह ही राजपथ पर इकट्ठा हो जाते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारतीय सशस्त्र बलों एक परेड की जाती है, जिसमें विभिन्न हथियारों, टैंकों, बड़ी बंदूकों आदि का प्रदर्शन किया जाता है। सैन्य बैंड, एन.सी.सी. कैडेट और पुलिस भी अलग-अलग धुनें बजाते हुए परेड में भाग लेते हैं। देश के विभिन्न राज्य अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रगति से संबंधित विशेष झाँकियाँ भी प्रदर्शित करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलोक नृत्यों का प्रदर्शन भी किया जाता है।\u0026nbsp;गणतंत्र दिवस को पुरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता हैं। कार्यक्रम के अंत में, आकाश में राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक को दर्शाते हुए तिरंगे फूलों की वर्षा हवाई जहाजों से की जाती है। शांति के प्रतीक रंग-बिरंगे गुब्बारे भी आसमान में उड़ाए जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eभारत का संविधान\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। इसे 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। संविधान ने देश के मौलिक शासकीय दस्तावेज भारत सरकार अधिनियम 1935 को बदल दिया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंविधान भारत को एक संप्रभु , समाजवादी , धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है, अपने नागरिकों को न्याय , समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है। भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। 1950 का मूल संविधान को संसद भवन में संरक्षित रखा गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। संविधान सभा के निर्माण का प्रस्ताव सर्वप्रथम वर्ष 1934 में एम. एन. रॉय द्वारा रखा गया था।\u0026nbsp;संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निश्चित की गई थी। सभा ने देश के सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर सविंधान का निर्माण किया। इसे 4 नवंबर 1947 को उसी समिति द्वारा संविधान सभा के सामने पेश किया\n  गया।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: 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अधिकारों को शामिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका उद्देश्य संतुलन बनाना\n  था ताकि देश के सभी नागरिक अपने धर्मों, संस्कृति, जाति और लिंग के भेद भाव बिना समान अधिकार प्राप्त हो सके।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e26 जनवरी को संसद का पहला सत्र भी आयोजित किया गया था। इसके अलावा इसी दिन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शपथ ग्रहण किया था। इस प्रकार यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन ब्रिटिश शासन\n  के अंत और भारत गणतंत्र का उदय हुआ था।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगणतंत्र दिवस समारोह\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  भारतीय हर साल 26 जनवरी को बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। इस दिन, लोग\n  अपने धर्म, जाति, पंथ, लिंग, और बहुत कुछ भूल जाते हैं। यह पूरे देश को एक साथ\n  लाता है। यह वास्तव में हमारे देश की विविधता को दर्शाता है। भारत की राजधानी में गणतंत्र दिवस परेड निकला जाता है जो भारतीय सेना की ताकत और\n  हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  ये परेड अन्य शहरों में भी होते हैं। जहां बहुत सारे स्कूल भाग लेते हैं। इस दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता हैं। नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रपति हमारे राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं और 21\n  तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रगान गया जाता हैं। कई स्कूलों में कार्यक्रम रखा जाता हैं। जिसमे छात्र और छात्राये भाग लेते हैं।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/349540428592598855"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/349540428592598855"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/100-essay-on-republic-day-in-hindi.html","title":"गणतंत्र दिवस पर निबंध - essay on republic day in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"होली पर निबंध - Holi Essay in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  होली रंगों का\u0026nbsp;त्योहार है। इसे असत्य पर सत्य के जीत रूप में मनाया जाता हैं। होली पुरे देश में मनाये जाने वाले त्योहारों में\n  से एक है। फाल्गुन महीने के बसंत पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहोली पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eविशेष रूप से उत्तर भारत में उत्साह के साथ होली मनाया जाता हैं। लोग लकड़ी के ढेर को एक स्थान पर रखकर होलिका दहन करते हैं। अगले दिन ढोल, नगाड़ो और रंगो के साथ होली खेली जाती है। लोग होली के दिन सफेद कपड़े पहनते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलोग एक दूसरे पर रंग लगाकर अपने प्रेम को प्रगट करते हैं। होली के दिन लोग अपनी परेशानियों को भूल जाते हैं और उत्साह के साथ त्योहार को मनाया जाता हैं। श्री कृष्ण की नगरी\u0026nbsp;मथुरा और वृंदावन में 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहोली प्रेम और भाईचारा फैलाती है। यह देश में सद्भाव और खुशी लाता है। यह रंगीन त्योहार लोगों को एकजुट करता है और जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEigAsxBGuDW7R7z_eE3VOfYtSeHd9kBq8KgMFhiGG2Azkkb-0C1y6nefzTNA61FTGdRYJcBZ2lVlchZA1biEf-9Xh2QRxCCT0PWYKknrnKMVaqrfwbvm0LaV3_km2wptGf68vNZBL28sa9NmHSgxEZUjs57rROUQtWEDRCsglEAdc6Hw4gg0rzgmgAeKTgC/s600/20231103_103415.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"होली पर निबंध - Holi Essay in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"398\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" 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मस्ती, नाच गाना के साथ इस त्यौहार को मानते है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहोली क्यों मनाया जाता हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eमहर्षि कश्यप और उनकी पत्नी दिति के दो पुत्र हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष थे। हिरण्यकशिपु ने कठिन तपस्या करके भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर वरदान प्राप्त कर लिया कि मैं मनुष्य द्वारा मारा जाऊ, न पशु द्वारा, न दिन में मरु न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र से और न किसी शस्त्र से।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस वरदान ने उसे अहंकारी बना दिया और वह अपने को अमर समझने लगा। उसने इंद्र का राज्य छीन लिया और तीनों लोकों को प्रताड़ित करने लगा। वह चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें। उसने अपने राज्य में विष्णु की पूजा को वर्जित कर दिया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहिरण्यकशिपु के चार पुत्र थे। हिरण्यकशिपु का सबसे बड़ा पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का उपासक था। हिरण्यकशिपु के मना करने के बावजूद वह विष्णु की पूजा करता था। क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर प्रज्ज्वलित अग्नि में चली जाय क्योंकि होलिका को वरदान था किअग्नि उसे जला नहीं सकती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eफाल्गुन महीने के बसंत पूर्णिमा को होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी। प्रह्लाद का बाल भी बाँका न हुआ पर होलिका जलकर राख हो गई। तक से हल साल बसंत पूर्णिमा को होलिका जलाया जाता हैं।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1602298576000991613"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1602298576000991613"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/holi-essay-in-hindi.html","title":"होली पर निबंध - Holi Essay in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEigAsxBGuDW7R7z_eE3VOfYtSeHd9kBq8KgMFhiGG2Azkkb-0C1y6nefzTNA61FTGdRYJcBZ2lVlchZA1biEf-9Xh2QRxCCT0PWYKknrnKMVaqrfwbvm0LaV3_km2wptGf68vNZBL28sa9NmHSgxEZUjs57rROUQtWEDRCsglEAdc6Hw4gg0rzgmgAeKTgC/s72-w320-c-h212/20231103_103415.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-9217512258896693304"},"published":{"$t":"2023-11-05T15:50:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-05T15:50:37.802+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"समास किसे कहते हैं - samas kise kahte hai"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eसमास शब्द का अर्थ होता है - संक्षेप या लाघव। यह व्याकरण का महत्त्वपूर्ण पारिभाषिक शब्द हैं। 'दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) का परस्पर सम्बन्ध बतलाने वाले शब्दों अथवा प्रत्ययों का लोप होने पर उन दो या अधिक शब्दों में जो एक स्वतंत्र शब्द बनता है, उन शब्दों को सामासिक शब्द कहते हैं और उन ( दो या दो से अधिक) शब्दों के संयोग को समास की संज्ञा दी जाती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक विभक्तित्व और एक पदत्व समास की प्रमुख विशेषता है। समास संज्ञा पदों का ही होता है, क्रिया पदों का नहीं। संक्षिप्ततः दो या अधिक पद जब अपनी विभक्ति का लोप कर परस्पर मिल जाते हैं, तो उसे ही समास कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसमास के मूलत: चार और प्रकारान्तर से 6 भेद होते हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eद्वन्द्व समास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअव्ययीभाव समास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eतत्पुरुष समास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकर्मधारय समास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eद्विगु समास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबहुब्रीहि समास\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. द्वन्द्व समास\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eद्वन्द्व समास में जिन दो पदों का मेल होता है वे दोनों ही पद प्रधान होते हैं। इनके बीच योजक चिह्न, 'तथा' 'व', 'और' का लोप हो जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eरात और दिन \u003d रात-दिन\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदाल और भात \u003d दाल-भात\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसीता और राम \u003d सीता-राम\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपाप व पुण्य \u003d पाप-पुण्य\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदाल और रोटी \u003d दाल-रोटी\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहाँ दोनों पद प्रधान हैं। दोनों पदों का समान महत्व है। इनके बीच योजक चिन्ह लगाकर योजक शब्दों ‘या’, ‘और’ का लोप कर दिया गया । द्वन्द्व समास, इतरेत्तर द्वन्द्व, समाहार द्वन्द्व व वैकल्पिक द्वन्द्व के रूप में विभाजित किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOyrBFR6e0uyxegptkSh4HwD1kekG5Hxj0xS6LQuQSP6VwC0w3_MU2hSEhfuFlUUyHZVlGSnS3aAgvn5v-XZoGxq7qdeTwqZDebeHM4ZDgJ1RKgy9nJYyrPF_EsoGdzDtwGS3TsDtEl3AMtTtnvU5aaDklAGQUr_3DrAqtg3a9xFFNZhXGpy8ZEjN86OTx/s600/20231105_154623.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"समास किसे कहते हैं - samas kise kahte hai\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"397\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhOyrBFR6e0uyxegptkSh4HwD1kekG5Hxj0xS6LQuQSP6VwC0w3_MU2hSEhfuFlUUyHZVlGSnS3aAgvn5v-XZoGxq7qdeTwqZDebeHM4ZDgJ1RKgy9nJYyrPF_EsoGdzDtwGS3TsDtEl3AMtTtnvU5aaDklAGQUr_3DrAqtg3a9xFFNZhXGpy8ZEjN86OTx/w320-h212/20231105_154623.webp\" title\u003d\"समास किसे कहते हैं - samas kise kahte hai\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eदोनों पदों का अस्तित्व इतरेत्तर द्वन्द्व है। दोनों पदों का अस्तित्व न होकर समुच्चय में समाहित होना समाहार द्वन्द्व है। दोनों पदों के बीच 'या', 'अथवा' का विकल्प वैकल्पिक द्वन्द्व कहलाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. अव्ययीभाव समास\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहाँ जिन दो पदों का मेल होता है उनमें पूर्व पद प्रधान होता है। इसका पूर्व पद अव्यय या अविकारी शब्द होता है अर्थात् इसका रूप परिवर्तन नहीं होता। पूर्व पद प्रधान अव्ययी भाव समास कहलाता है। ऐसे समस्त पदों का विग्रह करने में कठिनाई होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eप्रतिदिन ( दिन-रात )\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eयथाशक्ति ( शक्ति के अनुसार )\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभरपेट ( पेट भरकर )\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआजन्म ( जन्म भर )\u003c/li\u003e\u003cli\u003eजन्मान्ध ( जन्म से अन्धा )\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआमरण ( मरने तक )\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआजीवन ( जीवन भर )\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइनमें पूर्व पद अविकारी शब्द है। इनके रूप का क्षय नहीं होता है। इसी कारण इसे अव्यय कहते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. तत्पुरुष समास\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eतत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान होता है। इसमें विभक्ति या कारक चिन्हों का लोप हो जाता है। इन्हीं कारकों के आधार पर इनका विभाजन और नामकरण किया गया है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eराजा का पुत्र - राजपुत्र\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबैलों की गाड़ी - बैलगाड़ी\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशोक से आकुल - शोकाकुल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eहाथ के लिए कड़ी - हथकड़ी\u003c/li\u003e\u003cli\u003eचितचोर - चित को चुराने वाला\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविभक्ति कारक के आधार पर इसके 6 भेद किये जाते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eकर्म तत्पुरुष\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकरण तत्पुरुष\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसम्प्रदान तत्पुरुष\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअपादान तत्पुरुष\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसम्बन्ध तत्पुरुष\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअधिकरण\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. कर्म तत्पुरुष -\u003c/b\u003e जिसमें कर्म कारक की विभक्ति ‘को' का लोप हो जाता है, कर्म तत्पुरुष कहलाता है। जैसे - माखन को चुराने वाला \u003d माखनचोर स्वर्ग को गया हुआ \u003d स्वर्गगत।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. करण तत्पुरुष -\u003c/b\u003e जिसमें कारण कारक की विभक्ति 'से' का लोप हो जाता है, करण तत्पुरुष कहलाता है। जैसे - नीति से युक्त \u003d नीतियुक्त। शोक से आकुल \u003d शोकाकुल। कलम से बद्ध \u003d कलमबद्ध।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. सम्प्रदान तत्पुरुष –\u003c/b\u003e जिसमें सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए' का लोप हो जाता है, सम्प्रदान तत्पुरुष कहलाता है। जैसे- देश के लिए भक्ति - देश भक्ति। राह के लिए खर्च - राहखर्च। हाथ के लिए कड़ी - हथकड़ी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. अपादान तत्पुरुष -\u003c/b\u003e जिसमें अपादान कारक की विभक्ति ‘से' का लोप हो जाता है, अपादान तत्पुरुष कहलाता है। यहाँ ‘से’ का प्रयोग सम्बन्ध विच्छेद के लिए होता है। जैसे ऋण से मुक्त - ऋणमुक्त। चिन्ता से मुक्त - चिन्तामुक्त। रण से भागने वाला - रणछोड़। पथ से भ्रष्ट - पथभ्रष्ट।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. सम्बन्ध तत्पुरुष -\u003c/b\u003e जिसमें सम्बन्ध कारक की विभक्ति (का, की, के) का लोप हो जाता है, सम्बन्ध तत्पुरुष कहलाता है। जैसे - राष्ट्र का पिता - राष्ट्रपिता। राजा का पुत्र \u003d राजपुत्र। स्वर की साधना - स्वरसाधना। देशभक्ति \u003d देश के प्रति भक्ति। सेना का पति - सेनापति।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. अधिकरण तत्पुरुष -\u003c/b\u003e जहाँ अधिकरण कारक की विभक्ति ‘में’ और ‘पर' का लोप हो जाता है, अधिकरण तत्पुरुष कहलाता है। जैसे- ध्यान में मग्न \u003d ध्यानमग्न। अमेरिकावासी- अमेरिका में निवास करने वाला। आप पर बीती \u003d आपबीती। भारत में रहने वाला \u003d भारतवासी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउपर्युक्त 6 तत्पुरुषों का समाहार तत्पुरुष में है, कर्ता कारक की विभक्ति को एक स्वतन्त्र रूप दिया गया है। वही कर्मधारय कहलाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. कर्मधारय समास\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह तत्पुरुष का ही एक रूप है। इसमें भी उत्तर पद ही प्रधान होता है। इस समास में एक ही कारक कर्ता की ही विभक्ति आती है। इसमें पूर्व पद गुणवाचक विशेषण होता है तथा उत्तर पद विशेषण। पूर्व पद, उत्तर पद की विशेषता बताता है। जैसे -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eनील गगन \u003d नीला आकाश\u003c/li\u003e\u003cli\u003eरक्त कमल \u003d लाल कमल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभव सागर \u003d भवरूपी सागर\u003c/li\u003e\u003cli\u003eविद्युल्लता \u003d विद्युत् जैसी लता\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. द्विगु समास - द्विगु समास कर्मधारय समास का ही एक रूप है। इसमें पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण होता है। इसमें भी उत्तर पद प्रधान होता है। जैसे -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eपंचभुज \u003d पाँच भुजा\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eत्रिलोक \u003d तीनों लोक\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपंचमुखी \u003d पाँच मुख वाला\u003c/li\u003e\u003cli\u003eनव रस \u003d नौ रसों का समूह\u003c/li\u003e\u003cli\u003eचौराहा \u003d चार राहों का समूह\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eनवग्रह \u003d नौ ग्रहों का समूह\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपंचशील \u003d पाँच शीलों वाला\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. बहुब्रीहि समास - इस समास में दोनों पद, अप्रधान या गौण होते हैं। यहाँ दोनों पद मिलकर एक तीसरे ही अर्थ की प्रतीति कराते हैं। इसका अर्थ रूढ़ि या परम्परा से ज्ञात किया जाता है अर्थात् जिसमें दोनों पद प्रधान न हों और किसी अन्य अर्थ की प्रधानता हो, बहुब्रीहि समास कहलाता है। जैसे\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eलम्बोदर \u003d लम्बा है उदर जिसका \u003d गणेश\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदशानन \u003d दस है आनन जिसका \u003d रावण\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपीताम्बर \u003d पीला है वस्त्र जिसका \u003d विष्णु\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवीणापणि \u003d वीणा है हाथों में जिसके \u003d सरस्वती\u003c/li\u003e\u003cli\u003eघनश्याम \u003d घन की तरह श्याम है जो \u003d कृष्ण\u003c/li\u003e\u003cli\u003eचक्रपाणि \u003d चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके \u003d विष्णु\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइन्हें कर्मधारय या द्विगु में भी समाहित किया जा सकता है। जब ये सामान्य अर्थ में प्रयुक्त होंगे तो कर्मधारय या द्विगु होंगे, लेकिन जब अन्य अर्थ में प्रयुक्त होंगे तो बहुब्रीहि कहलायेंगे।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/9217512258896693304"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/9217512258896693304"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/11/samas-kise-kahte-hai.html","title":"समास किसे कहते हैं - samas kise kahte hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"नक्सलवाद पर निबंध - Essay on naxalism in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eनक्सलवाद, जिसे माओवाद या नक्सली आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से चली आ रही आंतरिक सुरक्षा चुनौती है जिससे भारत कई दशकों से जूझ रहा है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सलवाद 1960 के दशक से ही भारत के लिए बड़ा ख़तरा रहा है। राज्यों और केंद्र सरकार दोनों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति में सुधार किया है। वर्तमान में ये उग्रवादी केवल कुछ अलग-थलग क्षेत्रों में ही सक्रिय हैं। हालाँकि, वे अभी भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सलवाद शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई है, जहां 1967 में स्थानीय जमींदारों के खिलाफ किसानो ने विद्रोह किया था। जमींदारों ने भूमि विवाद को लेकर एक किसान की पिटाई की थी।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनक्सलवाद पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eरुपरेखा -\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eप्रस्तावना\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eछत्तीसगढ़ में नक्सलवाद\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\u003cli\u003e\u003cb\u003eपश्चिम बंगाल में नक्सलवाद\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\u003cli\u003e\u003cb\u003eओडिशा में नक्सलवाद\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eनक्सलवाद के कारण\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\u003cli\u003e\u003cb\u003eनक्सलवाद का प्रभाव\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e1. प्रस्तावना\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सलियों को वामपंथी कम्युनिस्ट माना जाता है जो माओत्से तुंग की राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करते हैं। इन नक्सलियों को यही लगता है की यह लोकतंत्र एक मात्र दिखावा है। आज नक्सलाद एक विचारधारा न होकर हिंसा बन गया है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eशुरुआत में नक्सली आंदोलन पश्चिम बंगाल में उत्पन्न हुआ और बाद में आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड\u0026nbsp;राज्यों सहित दक्षिणी और पूर्वी भारत के पिछड़े क्षेत्रों में फैल गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh2B3k-iOBYFtZkR6FARRMaxhEgl2pVY0WndYokpqsyTmFfFYXy3MT7DPybJjPwqtk6O6EEHZe8taHSp2IbcfKxvceYy3anDEPoLDtMTa2_r3cPUji2HS1u35ZReZsyfvM1_tqKgqKOQhjlh_nAThgvsyGXuGR1QPrn-xXJqc3ImnQu-Qghf_oKhg2mQtTB/s600/20231103_055953.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"नक्सलवाद पर निबंध - Essay on naxalism in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" 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पसारने शुरू किये।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू होने के बाद नक्सलियों ने अपने समूह में स्थानीय आदिवासियों को भर्ती करना शुरू कर दिया है। भारत के अर्धसैनिक बलों और राज्य सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ किया गया आक्रामक कार्यवाही को भारतीय मीडिया द्वारा ऑपरेशन ग्रीन हंट का नाम दिया गया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण बस्तर में कई नक्सल समूह हैं: क्रांतिकारी मजदूर संघ, क्रांतिकारी आदिवासी, महिला संघ, चेतना नाट्य मंच आदि विभिन्न नक्सली संगठनों में हजारों आदिवासी सदस्य हैं। जो सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं और उन्हें पहचानना सुरक्षा बलों के लिए आसान नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस क्षेत्र में हुए सबसे भयानक हमलों में 2010 में चिंतलनार में 76 सीआरपीएफ जवानों का नरसंहार और 2013 में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की हत्या शामिल है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसलवा जुडूम अभियान के संस्थापक महेंद्र कर्मा व् उनके अन्य साथी नेताओं को 25 मई, 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन-यात्रा की बैठक कर सुकुमा से लौटते हुए करीब 200 कांग्रेसी नेताओं और उनके 25 वाहनों के काफिले पर 250 माओवादियों ने फायरिंग की जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल उनके पुत्र दिनेश पटेल, वी.सी. शुक्ल, उदय मुदलियार, गोपी माधवानी, फूलो देवी नेताम इत्यादि अनेक कार्यकर्ता की मौत हो गयी थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3.\u0026nbsp;पश्चिम बंगाल में नक्सलवाद\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1967 के नक्सली विद्रोह की जन्मस्थली पश्चिम बंगाल में एक दशक पहले माओवादी विद्रोह में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eराज्य सरकार ने इन विद्रोही समूहों से निपटने के लिए 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में कई सैन्य कार्रवाई की थी। फिर भी, 1990 के दशक के अंत में, माओवादी अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने में कामयाब हो गए और पूरे राज्य में फैल गए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसन 2000 की शुरुआत में सीपीआई-माओवादियों का नियंत्रण 18 जिलों था और उन्होंने उनमें से कई में जिलों में आंदोलन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2009 में राज्य सरकार ने विभिन्न वामपंथी चरमपंथी समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया था और राज्य में उग्रवाद से निपटने के लिए विशेष बटालियन बनाई गयी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2010 में 425 नक्सल घटना हुआ था। जो 2018 के अंत तक यह संख्या शून्य हो गई थी। सरकार ने कई विद्रोहियों से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कराने के लिए सफलतापूर्वक बातचीत भी की थी। वर्तमान में केवल झारग्राम जिला उग्रवाद से अत्यधिक प्रभावित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. ओडिशा में नक्सलवाद\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1990 के दशक के अंत में ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद में तेजी से वृद्धि देखी गई थी। 2000 के दशक के अंत में एक समय पर, माओवादियों ने ओडिशा के 30 में से 22 जिलों को प्रभावित किया था। माओवादी सबसे पिछड़े और वन, खनिज समृद्ध जिले में केंद्रित थे जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी रहती थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सल समूहों द्वारा किए गए हमलों की तीव्रता इतनी भयानक थी कि बड़ी संख्या में लोग मारे गए, संपत्तियाँ नष्ट हो गईं, सरकारी प्रणालियाँ ठप्प हो गईं और आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हो गईं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2008 में इस क्षेत्र में सबसे भयानक विद्रोही हमले हुए, जिसके कारण सरकार को इस मुद्दे के समाधान के लिए बड़े कदम उठाने पड़े। 2015 से 2016 के बीच 1,000 से ज्यादा नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। वर्तमान में केवल 8 जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. नक्सलवाद के कारण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवन कुप्रबंधन नक्सलवाद के प्रसार का एक प्रमुख कारण था। इसकी उत्पत्ति ब्रिटिश प्रशासन के समय हुई जब वन संसाधनों पर एकाधिकार सुनिश्चित करने के लिए नए कानून पारित किए गए। 1990 के दशक में वैश्वीकरण के बाद, स्थिति तब और खराब हो गई जब सरकार ने वन संसाधनों का दोहन बढ़ा दिया। इसने पारंपरिक वनवासियों को हिंसा के माध्यम से सरकार के खिलाफ अपनी आकांक्षाओं के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऔद्योगीकरण की कमी बुनियादी ढांचे की खराब वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी के कारण इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच असमानता पैदा हुई। इससे अलग-थलग पड़े गांवों के स्थानीय लोगों में सरकार विरोधी मानसिकता पैदा हो गई है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूमि सुधारों के ख़राब कार्यान्वयन से आवश्यक परिणाम नहीं मिले हैं। भारत की कृषि व्यवस्था की विशेषता उचित सर्वेक्षणों और अन्य विवरणों का अभाव है। इस कारण से, इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुँचाया और स्थानीय जमींदारों द्वारा वंचित और शोषित लोगों में सरकार विरोधी भावनाएँ अधिक थीं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत में बेरोज़गार युवा नक्सलवाद आंदोलन के प्रमुख समर्थकों में से एक हैं। इस समूह में अधिकतर मेडिकल और इंजीनियरिंग स्नातक शामिल हैं। विश्वविद्यालय कट्टरपंथी विचारधाराओं के लिए प्रमुख प्रजनन स्थलों में से एक बन गए हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सलवाद का कारण अधिकारों व अन्याय के लिए आन्दोलन करना था। लेकिन आगे चलकर वह प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति गहराता असंतोष, आदिवासियों के अधिकारों का हनन, स्त्रियों का दैहिक शोषण इत्यादि ऐसे अनेक कारणों ने इन लोगों को नक्सलियों से जुड़ने पर मजबूर कर दिया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. नक्सलवाद का प्रभाव\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: नक्सलवाद भारतीय राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती है। सशस्त्र विद्रोह के परिणामस्वरूप सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं, जिससे दोनों पक्षों को नुकसान हुआ। सरकार ने नक्सलियों से निपटने के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है और उग्रवाद विरोधी अभियान शुरू किया है, लेकिन कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. विकास में बाधा: नक्सल प्रभावित क्षेत्र अक्सर भारत में सबसे अविकसित और गरीब क्षेत्र हैं। नक्सलियों की मौजूदगी बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा डालती है, क्योंकि सरकारी परियोजनाओं और निर्माण को अक्सर विद्रोहियों द्वारा नष्ट कर दिया जाता है। इससे गरीबी और अविकसितता और बढ़ती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ: नक्सली विद्रोह मानवाधिकारों के हनन से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें गैर-न्यायिक हत्याओं, अपहरण और डराने-धमकाने की रणनीति के आरोप शामिल हैं। लगातार चल रहे इस संघर्ष का शिकार अक्सर निर्दोष नागरिक बनते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव: नक्सलवाद ने कई राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है, स्थानीय राजनीति और चुनावों को प्रभावित किया है। इसके अतिरिक्त, इसने प्रभावित समुदायों में सामाजिक विभाजन और अविश्वास पैदा किया है, जिससे कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. वैचारिक संघर्ष: नक्सलवाद की वैचारिक बुनियाद भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। नक्सली संसदीय लोकतंत्र को अस्वीकार करते हैं और सशस्त्र क्रांति की वकालत करते हैं, जिससे भारतीय राज्य के साथ मौलिक वैचारिक टकराव होता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003e7. निष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनक्सलवाद एक जटिल और गहरी जड़ें जमा चुकी है। इस मुद्दे के समाधान के लिए, सरकार को समावेशी विकास को बढ़ावा देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और प्रभावित समुदायों के साथ बातचीत करने के अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कायम रखते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए सुरक्षा उपायों और सामाजिक सुधारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4888009349619517177"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4888009349619517177"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/09/essay-on-naxalism-in-hindi.html","title":"नक्सलवाद पर निबंध - Essay on naxalism in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"उर्दू भाषा की लिपि क्या है - urdu bhasha in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eउर्दू मुख्य रूप से दक्षिण एशिया, विशेषकर पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में बोली जाने वाली भाषा है। यह भारत की 22 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है और पाकिस्तान की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में इसके बोलने वाले रहते है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउर्दू भाषा की लिपि क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eउर्दू फारसी-अरबी लिपि में लिखी जाती है, जो उर्दू के लिए विशिष्ट ध्वनियों को समायोजित करने के लिए अतिरिक्त अक्षरों के साथ अरबी लिपि का एक विस्तारित रूप है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरबी, फ़ारसी और तुर्की भाषाओं के प्रभाव से उर्दू के विकास का पता 11वीं शताब्दी में लगाया जा सकता है। यह मुगल साम्राज्य के दौरान कविता और साहित्य की भाषा के रूप में विकसित हुई थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउर्दू की भाषाई जड़ें इंडो-आर्यन और इंडो-यूरोपीय भाषा परिवारों से हैं। यह हिंदी, पंजाबी और गुजराती जैसी भाषाओं के साथ शब्दावली और व्याकरण साझा करता है। उर्दू पाकिस्तान की आधिकारिक भाषाओं में से एक है और एक सामान्य भाषा के रूप में कार्य करती है, जो विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच संचार की सुविधा प्रदान करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउर्दू की एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा है जिसमें कविता, गद्य और नाटक शामिल हैं। मिर्ज़ा ग़ालिब, अल्लामा इक़बाल और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जैसे प्रसिद्ध कवियों ने उर्दू साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"उर्दू भाषा की लिपि क्या है - urdu bhasha in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-C5nt1tFXcHw/X3f4-LHJlyI/AAAAAAAAEHs/UK0jhsHvjKsddFjpmi4bM6bYbmHqj69SwCPcBGAYYCw/w320-h212/20201003_093544.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"उर्दू भाषा की लिपि क्या है - urdu bhasha in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eउर्दू दक्षिण एशिया के सांस्कृतिक ताने-बाने में गहराई से समाई हुई है। यह कविता, संगीत, फ़िल्म और दैनिक संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उर्दू हिंदी के साथ महत्वपूर्ण मात्रा में शब्दावली साझा करती है, और दोनों भाषाओं के मौखिक रूप अक्सर परस्पर सुगम होते हैं। मुख्य अंतर स्क्रिप्ट में और कुछ हद तक, कुछ शब्दावली विकल्पों में है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण एशियाई लोगों के वैश्विक प्रवासी के कारण, उर्दू दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बोली और समझी जाती है। उर्दू का उपयोग स्कूलों में शिक्षा के माध्यम के रूप में किया जाता है और समाचार पत्रों, टेलीविजन और रेडियो सहित मीडिया में भी इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। उर्दू एक ऐसी भाषा है जो दक्षिण एशिया की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\n  उर्दू भाषा की लिपि नस्तालीक़ है। उर्दू एक इंडो-आर्यन भाषा है। इस भाषा का\n  अधिकतर उपयोग भारतीय उपमहाद्वीप में किया जाता हैं। उर्दू जम्मू कश्मीर का राजकीय\n  भाषा हैं जबकि पडोसी देश \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/04/pakistan-in-hindi.html\"\u003eपाकिस्तान \u003c/a\u003eका राष्ट्रीय भाषा है। \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/04/india-in-hindi.html\"\u003eभारत \u003c/a\u003eके तेलंगाना,\n  आंध्र प्रदेश, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में उर्दू बोली जाती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउर्दू भाषा का इतिहास\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  उर्दू का विकास 11 वीं शताब्दी में मुगल काल के समय हुआ था। यह हिंदुस्तानी भाषा\n  परिवार का एक प्रमुख भाषा है। उर्दू शब्द की उत्पत्ति चगताई भाषा से\n  हुयी है। जो एक विलुप्त तुर्की भाषा है। हलाकि उर्दू को हिंदी के समान\n  कहा जाता है। लेकिन हिंदी देवनागरी लिपि का उपयोग करती है। जबकि उर्दू फारसी-अरबी\n  का उपयोग करती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उर्दू भाषा फारसी शब्दों पर अधिक निर्भर करती है। 1780 में कवि गुलाम हमदानी मुशफी ने इस भाषा को उर्दू नाम दिया, जिसके कारण भारत में\u0026nbsp;मुसलमानों और हिंदुओं में अलगाव की भावना शुरू हो गयी थी। इसके बाद सभी मुसलमान उर्दू बोलने लगे।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eफारसी से संबंध\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  उर्दू अरबी वर्णमाला का उपयोग करता है। उर्दू में जो अतिरिक्त अक्षर पाए जाते हैं उनमें ٹ, शामिल हैं। वर्णमाला\n  को और समृद्ध बनाने के लिए ه (h) और ی (y) जैसे ध्वनियों का उपयोग किया जाता हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उर्दू को दाएं से बाएं नस्तालीक़\u0026nbsp;शैली में भी लिखा जाता है। नस्तलीक शैली को श्रापपूर्ण लिपि माना जाता है, जिसका\n  आविष्कार तबरेज़ के मिर अलली ने किया था। जो मुगल काल में 1402 से 1502 तक एक प्रसिद्ध लेखक थे।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3225332002092422892"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3225332002092422892"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/blog-post_29.html","title":"उर्दू भाषा की लिपि क्या है - urdu bhasha in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-C5nt1tFXcHw/X3f4-LHJlyI/AAAAAAAAEHs/UK0jhsHvjKsddFjpmi4bM6bYbmHqj69SwCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h212/20201003_093544.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6570915397042230151"},"published":{"$t":"2023-04-05T23:37:00.078+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T16:34:01.517+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"अपठित गद्यांश किसे कहते हैं"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eजो पढ़ा हुआ न हो उसे अपठित गद्यांश कहते है। पाठ्य पुस्तक के पाठ पहले से पठित होने के कारण सरल लगते हैं। इस कारण प्रायः छात्र इन अवतरणों को सरलता से हल कर लेते हैं। किन्तु अपठित गद्यांश अपेक्षाकृत कठिन लगते हैं। अतः विद्यार्थी अपठित गद्यांश को देखते ही घबड़ा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रायः देखा जाता हैं कि विद्यार्थी अपठित गद्यांश का सीधा अर्थ लिख देना अथवा उस गद्यांश में कुछ शब्दों का हेर-फेर करके ज्यों का त्यों नकल कर देना अपना कर्तव्य समझ लेता है और यह विचार कर सन्तोष कर लेता है कि कुछ तो अंक मिल ही जायेंगे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिकांश परीक्षार्थी अपठित गद्यांश के प्रश्नों का सही उत्तर नहीं लिखते। पूछा जाता है सरलार्थ, तो वे लिखते हैं, व्याख्या। यदि व्याख्या पूछी जाती है तो वे करते हैं शब्दार्थ। यदि किसी प्रश्न का उत्तर पूछा जाता है तो वे पूरे गद्यांश को उतारकर रख देते हैं। यह प्रश्न न समझने की कमी और उत्तर देने की विधि से अनभिज्ञ होने के कारण होता है। अतः इस कमी को दूर करने के लिये विद्यार्थियों को सतत अभ्यास करते रहना आवश्यक है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअपठित गद्यांश को हल करने की विधि जानने से पूर्व सरलार्थ, भावार्थ, व्याख्या, आशय या सारांश आदि का अर्थ जान लेना आवश्यक है। इनको ठीक से समझ लेने पर छात्रों को कोई कठिनाई न होंगी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरलार्थ \u003c/b\u003e- गद्यांश के प्रत्येक शब्द और प्रत्येक वाक्य को अपनी भाषा में लिख देना ही सरलार्थ है। इसमें कठिन शब्दों या वाक्यों को अपनी सरल भाषा में लिखना होता है। भावार्थ- गद्यांश में निहित लेखक के भावों या विचारों को संक्षेप में लिखना भावार्थ है। इसमें कठिन शब्दों या वाक्यों का अर्थ न लिखकर लेखक के भावों और विचारों को अपनी सरल भाषा में कम से कम शब्दों में लिखना होता है। यह आकार में पूरे गद्यांश का आधे से अधिक नहीं होना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eव्याख्या \u003c/b\u003e- गद्यांश में दिये लेखक के विचारों को विस्तार के साथ स्पष्ट करना और शब्दों का समाधान प्रस्तुत करना व्याख्या कहलाता है। इसमें आवश्यक होने पर उदाहरण देना भी श्रेयस्कर है। व्याख्या में आकार की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसारांश \u003c/b\u003e- गद्यांश में दिये लेखक के मूल भावों को अति संक्षिप्त रूप में स्पष्ट करना सारांश कहलाता है। सारांश भावार्थ की अपेक्षा संक्षिप्त होता है । यह आकार में पूरे गद्यांश का एक तिहाई से अधिक कदापि नहीं होना चाहिए। सारांश को ही आशय, तात्पर्य और अभिप्राय भी कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeub4TJDpLTKKnI0bvJIamwJfSajwsltCYdIfL7sPkHZ9FEl9LSTweuoJW-4SDOALlJRyPKB3l0negN2ftMfdbFm-ZNl39IIK_Xxc_ldtcT1TOUhv8lv2BtJs0jYmaJrSapBELIUZ4NzZ7dfTQubhdn--M-8GM48JOgGK1objPKLj-jHrugk0Vjo0aeA/s600/20230421_090531.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अपठित गद्यांश किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeub4TJDpLTKKnI0bvJIamwJfSajwsltCYdIfL7sPkHZ9FEl9LSTweuoJW-4SDOALlJRyPKB3l0negN2ftMfdbFm-ZNl39IIK_Xxc_ldtcT1TOUhv8lv2BtJs0jYmaJrSapBELIUZ4NzZ7dfTQubhdn--M-8GM48JOgGK1objPKLj-jHrugk0Vjo0aeA/w320-h213/20230421_090531.webp\" title\u003d\"अपठित गद्यांश किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eअपठित गद्यांश हल करने हेतु आवश्यक निर्देश - अपठित गद्यांश के प्रश्नों को हल करने के लिए विद्यार्थियों को निम्नलिखित निर्देशों कोध्यान में रखना चाहिये।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. अपठित गद्यांश एक बार पढ़ने से समझ नहीं आता हैं। इसलिए उसे कम से कम तीन-चार बार ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिये और उसमें निहित लेखक के विचारों को समझने का प्रयास करना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. गद्यांश की भाषा में कठिन शब्दों के वास्तविक अर्थ के चक्कर में अधिक समय नष्ट न करके उसके भाव को समझने का प्रयास करना चाहिये।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. सरलार्थ समझने के बाद देखना चाहिए कि परीक्षक क्या चाहता है ? तब विचारपूर्वक उसका उत्तर ढंग से लिखना चाहिये।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. व्याख्या, सरलार्थ, भावार्थ, सारांश आदि में जो भी बात पूछी गई हों, उसी के अनुसार ऊपर बताये गये ढंग से लिखना चाहिए, ताकि ऊपर दी गयी बातों में क्रम बन जाये।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. लिखते समय इतना ध्यान अवश्य रखा जाये कि जो भी आप लिखें, वह व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हो और उसकी भाषा भी सरल हो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. यदि प्रश्न में उत्तर देने की कोई सीमा निर्धारित हो, तो उसका पूरा ध्यान रखा जाये । व्यर्थ. का विस्तार आपको अच्छे अंक नहीं दिला सकेगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. रेखांकित अथवा मोटे काले छपे वाक्यों या अंशों को ध्यान से दो-तीन बार पढ़कर उनके अर्थ पर विचार करना चाहिए, तत्पश्चात् व्याख्या या अर्थ लिखना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e8. गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न भी पूछे जाते हैं जिनका उत्तर उसी गद्यांश में छिपा रहता है। छात्रों को सर्वप्रथम गद्यांश का मूल भाव ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए, तदुपरान्त प्रश्नों के उत्तर गद्यांश के आधार पर ही संक्षेप में अपनी भाषा में देने चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e9. अपठित गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न अति लघु उत्तरीय होते हैं । अतः इन प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 20-25 शब्दों में ही होने चाहिए। विस्तारपूर्वक उत्तर देने की कोई आवश्यकता नहीं है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e10. अपठित गद्यांश का शीर्षक पूछने पर पहले उसके भाव और तथ्य को भली प्रकार समझना चाहिए। फिर विचारपूर्वक शीर्षक लिखना चाहिए। शीर्षक लिखते समय निम्नलिखित बिन्दुओं का ध्यान रखा जाये -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eशीर्षक कम से कम शब्दों का हो।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशीर्षक में गद्यांश का पूरा भाव निहित हो।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशीर्षक आकर्षक और प्रभावशाली हो।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशीर्षक सरल और बोधगम्य हो।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशीर्षक प्रायः प्रथम या अन्तिम पंक्ति में होता है।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e11. अपठित गद्यांश को सम्यक रूप से हल करने के लिए छात्रों में व्यापक शब्द-भण्डार की जानकारी तथा तत्सम्बन्धी ज्ञान-वृद्धि विशेष आवश्यक है। अतः छात्रों को पाठ्य-पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों का पूर्ण मनोयोग से अध्ययन करना चाहिए।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6570915397042230151"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6570915397042230151"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/01/blog-post_30.html","title":"अपठित गद्यांश किसे कहते हैं"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgeub4TJDpLTKKnI0bvJIamwJfSajwsltCYdIfL7sPkHZ9FEl9LSTweuoJW-4SDOALlJRyPKB3l0negN2ftMfdbFm-ZNl39IIK_Xxc_ldtcT1TOUhv8lv2BtJs0jYmaJrSapBELIUZ4NzZ7dfTQubhdn--M-8GM48JOgGK1objPKLj-jHrugk0Vjo0aeA/s72-w320-c-h213/20230421_090531.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4126048822236165343"},"published":{"$t":"2021-08-01T12:55:00.005+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-07T02:31:18.359+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"मोहल्ले की सफाई हेतु नगर निगम को पत्र"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eनगर निगम और नगरपालिका को मोहल्ले की सफाई के लिए आवेदन पत्र है।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तर -\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रति,\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;नगर प्रबंधक / नगर आयुक्त / कार्यकारी अधिकारी,\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003eनगर निगम।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;भोपाल, मध्यप्रदेश\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविषय - मोहल्ले की सफाई न होने के संबंध में आवेदन पत्र।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; महोदय,\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;निवेदन है कि हम वार्ड नंबर 10 भोपाल मध्यप्रदेश के निवासी हैं। हमारे मुहल्ले में जगह-जगह गंदगी मिलना आम बात हो गई है। जगह-जगह कचरे के ढेर हैं।नालियां गंदे पानी से भरी रहती हैं। कचरा नहीं उठने के कारण सड़कों से बदबू आती है। गंदगी के कारण सड़क पार करना भी मुश्किल हो रहा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअतः महोदय से अनुरोध है कि नगर के नियुक्त कर्मचारियों को हमारे मोहल्ले की सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने के निर्देश दिए जाये। सफाईकर्मी सप्ताह में केवल एक दिन यहाँ की सफाई करते हैं। अतः आप नियमित रूप से सफाई के लिए आदेश देने की कृपा करे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिनांक 01.08.2023\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003eभवदीय\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003eक्षेत्र के निवासी\u003c/p\u003e\u003ca 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/\u003e\u003c/a\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4126048822236165343"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4126048822236165343"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/08/blog-post.html","title":"मोहल्ले की सफाई हेतु नगर निगम को पत्र"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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निवेदन है कि मेरी कक्षा 10 वीं की अंकसूची रेलगाड़ी में यात्रा करते समय खो गई है। मैंने सन 20020 में दसवीं की परीक्षा दी थी, अतः मुझे अंकसूची की द्वितीय प्रति भेजने की कृपा करें। मैंने निर्धारित शुल्क 100 रूपये\u0026nbsp;बैंक चालान नंबर 14453 को दिनांक 26.02.2023 को भेज रहा हूं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;संबंधित जानकारी निम्नलिखित है -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eनाम - सुरेश कुमार नेताम\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपिता - श्री माखन लाल नेताम\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपरीक्षा का नाम - हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा 2020\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपरीक्षा केंद्र क्रमांक - 6523\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपरीक्षा केंद्र - शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअनुक्रमांक - 22562356\u003c/li\u003e\u003cli\u003eनियमित/स्वाध्यायी\u0026nbsp;- नियमित\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपूरा पता - सुरेश कुमार नेताम C/O\u0026nbsp; श्री माखन लाल नेताम\u0026nbsp;भोपाल मध्यप्रदेश।\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिनांक :- 26.02.2023\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003eविनीत\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: right;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eसुरेश कुमार नेताम\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEifEDa7Dr8iD2TRylyUl27HQwur0YtWG8DzuQAYbSi-JzooRyIpuSqrDFolAj3S6NG2EHi8mvFs8X9SRxedIEHM1KylD_ocojPdqQgpSgOd1viiNb55YVnlKnd4J-yI_YhvXDQs-xyidiL_UTnkAnD09AqZbj-q6poVt8otlJLfX09n3bahzurxpAYcnMgA/s600/20231103_063434.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अंकसूची की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु एक आवेदन पत्र लिखिए\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" 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patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEifEDa7Dr8iD2TRylyUl27HQwur0YtWG8DzuQAYbSi-JzooRyIpuSqrDFolAj3S6NG2EHi8mvFs8X9SRxedIEHM1KylD_ocojPdqQgpSgOd1viiNb55YVnlKnd4J-yI_YhvXDQs-xyidiL_UTnkAnD09AqZbj-q6poVt8otlJLfX09n3bahzurxpAYcnMgA/s72-w320-c-h213/20231103_063434.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7469932622581299294"},"published":{"$t":"2020-10-12T13:52:00.008+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:17:01.724+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"बाल दिवस पर निबंध - children day essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eचाचा नेहरू के बच्चों के प्रति असीम प्रेम के कारण 1964 में नेहरू जी की मृत्यु के बाद से उनके जन्म दिन को बाल दिवस के रूप में घोषित किया गया था। स्कूल और कॉलेज में हर साल 14 नवंबर को उत्साह के साथ बाल दिवस मनाया जाता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। पं. जवाहरलाल नेहरू को चाचा नेहरू के नाम से जाता था। बच्चों के प्रति उनका प्रेम अधिक था। उन्होंने हमेशा इस बात की वकालत की हैं की बच्चों को उनका बचपन और उच्च शिक्षा मिलना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबच्चे भारत का भविष्य हैं। इसलिए प्रत्येक स्कूल इस दिन को विभिन्न कार्यक्रमों जैसे प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे नृत्य, संगीत और नाटक के साथ मानते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eचाचा नेहरू हमेशा यह मानते थे कि एक बच्चा कल का भविष्य है और इसलिए बच्चों का एक सुंदर बचपन की यादें होना चाहिए। इस दिन शिक्षक और माता-पिता बच्चों को उपहार के रूप में चॉकलेट और खिलौने वितरित करके अपने प्यार और स्नेह को प्रदर्शित करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-fcV5bxfdsYU/X89fBjFk2ZI/AAAAAAAAEV0/c3Fo9QOTtt8or8CmXrx79jWK4o08xIEigCLcBGAsYHQ/s600/20201208_163856.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"बाल दिवस पर निबंध - children's day essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-fcV5bxfdsYU/X89fBjFk2ZI/AAAAAAAAEV0/c3Fo9QOTtt8or8CmXrx79jWK4o08xIEigCLcBGAsYHQ/w320-h213/20201208_163856.webp\" title\u003d\"बाल दिवस पर निबंध - children's day essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eकई गैर-सरकारी संगठन इस दिन को अनाथ बच्चों की मदद करते हैं। वे कई कार्यक्रम योजित करते हैं। लोग बच्चों के बीच किताबें, भोजन, चॉकलेट, खिलौने और अन्य आवश्यक सामान वितरित करते हैं। साथ ही, वे अनाथालयों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं जहां बच्चे नृत्य, संगीत, खेल आदि कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबच्चों को पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। बच्चों को उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सरकार द्वारा घोषित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था। \"आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे। जिस तरह से हम उन्हें लाएंगे वह देश के भविष्य को निर्धारित करेगा।\" चाचा नेहरू के प्रसिद्ध विचारों को याद रखने और उन्हें मनाने के लिए बाल दिवस एक सुंदर अवसर है। बाल दिवस पर उत्सव बच्चों और वयस्कों दोनों को जागरूक करने का एक तरीका है कि बच्चे देश का भविष्य हैं। इसलिए हर किसी को बच्चे को एक पूर्ण बचपन प्रदान करने की जिम्मेदारी को समझना चाहिए।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7469932622581299294"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7469932622581299294"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/children-day-essay-in-hindi.html","title":"बाल दिवस पर निबंध - children day essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-fcV5bxfdsYU/X89fBjFk2ZI/AAAAAAAAEV0/c3Fo9QOTtt8or8CmXrx79jWK4o08xIEigCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20201208_163856.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7827973622983891614"},"published":{"$t":"2020-10-12T13:46:00.010+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:17:18.887+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"शिक्षक दिवस पर निबंध - teachers day essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  शिक्षकों के योगदान पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता है। एक शिक्षक ही हैं जो माता पिता\n  के बाद बच्चों के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उन्हें एक सही मार्ग दिखाते\n  हैं। हमें हमेशा अपने अपने शिक्षकों का सम्मन करना चाहिए।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  हम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस रूप में मनाते हैं। भारत\n  के उप राष्ट्रपति के साथ एक एक शिक्षक थे। एक बार उनके छात्रों ने जन्मदिन मानाने\n  की आग्रह किया तभी डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा यदि मेरा जन्म दिन को शिक्षक\n  दिवस के रूप में मनाया जायेगा तो मुझे बहुत खुशी होगी। तभी से हर साल 5 सितंबर को\n  शिक्षक दिवस मनाया जाता है।\n\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसभी स्कुल और कॉलेज में शिक्षक दिवस को धूम धाम से मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों को सम्मनित किया जाता है। कार्यक्रम होते है। कई प्रतियोगिताये भी कराई जाती है।\u003c/p\u003e\n\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh9krdLXjn8vFPxzP8z2zdTmgqDqiDzm2qRe8aqod55Fnf8VAGdoJmEeD7yS6-qT4BHwpmPwtkFLzHaKxapg7S0jRWzlVNYnVDWIFraBIXP6pd6-OUJuwH0TR-9BXyKkW6vTq-KicUQjzNdAfEbca2iu-un6coV_3HvBndQGJwoaI7l3S9FWms2HTx7O-yK/s600/20231121_065353.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"शिक्षक दिवस पर निबंध - teachers day essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"396\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"211\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh9krdLXjn8vFPxzP8z2zdTmgqDqiDzm2qRe8aqod55Fnf8VAGdoJmEeD7yS6-qT4BHwpmPwtkFLzHaKxapg7S0jRWzlVNYnVDWIFraBIXP6pd6-OUJuwH0TR-9BXyKkW6vTq-KicUQjzNdAfEbca2iu-un6coV_3HvBndQGJwoaI7l3S9FWms2HTx7O-yK/w320-h211/20231121_065353.webp\" title\u003d\"शिक्षक दिवस पर निबंध - teachers day essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  भारत के साथ और कई देशो में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। जैसे -\n  पाकिस्तान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जर्मनी\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/sri-lanka-capital-in-hindi.html\"\u003eश्रीलंका\u0026nbsp;\u003c/a\u003eआदि।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eशिक्षक कई भूमिकाएँ निभाते हैं -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col\u003e\n  \u003cli\u003eछात्रों को उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में मार्गदर्शन करना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअध्ययन कौशल, समय प्रबंधन और लक्ष्य निर्धारण पर सलाह देना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eछात्रों के लिए एक सकारात्मक रोल मॉडल के रूप में कार्य करना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eछात्रों की समझ और प्रगति का मूल्यांकन करना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअसाइनमेंट और परीक्षाओं पर रचनात्मक प्रतिक्रिया प्रदान करना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और निर्देश देना।\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  शिक्षक वह होता है जो मार्गदर्शक और प्रेरणा का श्रोत होते\u0026nbsp;है। उन पर ज्ञान और नैतिकता को आगे बढ़ाने की जिम्मेदरी होती है। प्राचीन काल से ही भारत में गुरु शिष्य की परंपरा रही है। महाभारत काल में एकलव्य\n  ने अपने गुरु को अगुठे को काट कर गुरु दक्षिणा दिया था। इस घटना से पता चलता है\n  की गुरु का स्थान क्या होता है। कबीर दास जी ने अपने दोहे में गुरु के महत्व को इस बताया हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003ci\u003eगुरु गोविन्द दोनों खड़े काके लागु पाय।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eबलिहारी गुरु आपने गोविन्द\n    दियो बताये।।\u0026nbsp;\u003c/i\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  संत कबीर दास ने तो गुरु को भगवान से भी ऊपर बताया है। इस कविता में गुरु और\n  भगवान को एक साथ खड़े होने की बात कही गयी है। पहले किसे\u0026nbsp;प्रणाम करू यह\n  दुविधा बानी है। गुरु ने ही भगवान तक जाने का मार्ग बताया है। इसलिए गुरु को बड़ा\n  माना गया है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  मानव जीवन में शिक्षा जितना महत्व रखता है। वही अच्छे शिक्षक का मिलना उतना ही कठीन है। एक अच्छा\u0026nbsp;गुरु का मिलना\u0026nbsp;आपके जीवन को एक अलग ही दिशा\n  प्रदान कर करता है।\u0026nbsp;शिक्षक समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनका महत्व कक्षा की सीमा से कहीं आगे तक फैला हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eशिक्षक छात्रों को विभिन्न विषयों जानकारी और कौशल प्रदान करते हैं। शिक्षक अक्सर रोल मॉडल के रूप में काम करते हैं, जो छात्रों के मूल्यों, नैतिकता और चरित्र को आकार देने में मदद करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eशिक्षकों के पास छात्रों को अपने जुनून को आगे बढ़ाने, लक्ष्य निर्धारित करने और चुनौतियों पर काबू पाने के लिए प्रेरित करने की शक्ति होती है।\u0026nbsp;शिक्षक छात्रों को भविष्य की शैक्षणिक गतिविधियों, करियर और जिम्मेदार नागरिकता के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eशिक्षक सामाजिक विरासत को संरक्षित करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और ज्ञान को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।\u0026nbsp;शिक्षक व्यक्तियों के बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को आकार देने और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक समर्पित और प्रभावी शिक्षक का प्रभाव कक्षा से कहीं आगे तक फैला होता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अपने व्यस्त जीवन में, हम कृतज्ञता व्यक्त करना भूल गए हैं। इस दिन हम अपने\n  शिक्षकों को धन्यवाद देने और प्यार व्यक्त कर सकते हैं। ताकि उन्हें भी अपने कार्य पर गर्व हो सके। उनके साथ अपने अनुभव साझा कर\n  सकते हैं। इससे उन्हें खुश मिलेगी। शिक्षक दिवस पर कुछ ऐसे उपहार दे सकते हैं। जिससे उनकी यादे जुडी हो और उन्हें और अच्छा करने की प्रेरणा मिले।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  हमें भी उनका आशीर्वाद लेना चाहिए और उन्हें यह बताना\u0026nbsp;चाहिए कि जब भी उन्हें\n  हमारी जरूरत होगी, हम उनके लिए हमेशा मौजूद रहेंगे। छात्र सामूहिक रूप से उन्हें किताबें और अन्य सामग्री उपहार में दे सकते हैं। उनके\n  साथ बिताया गया समय और कृतज्ञता शिक्षकों को गौरवान्वित करने का एक\n  अच्छा माध्यमहो सकता हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eहमारे विकास में शिक्षक एक महत्वपूर्ण भूमिका होता हैं। यही कारण है\n  कि शिक्षक दिवस केे दिन शिक्षकों को धन्यवाद दिया जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहम अपने जीवन में\n  शिक्षकों के योगदान का सम्मान करते है। बच्चों के\n  पालन-पोषण में शिक्षकों द्वारा किए गए कर्तव्य बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस तरह से\n  शिक्षक दिवस को मनाना उनके\u0026nbsp;पेशे और समाज में उनकी भूमिका को पहचानने की दिशा\n  में एक\u0026nbsp;अच्छा\u0026nbsp;कदम है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7827973622983891614"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7827973622983891614"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/teachers-day-essay-in-hindi.html","title":"शिक्षक दिवस पर निबंध - teachers day essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEh9krdLXjn8vFPxzP8z2zdTmgqDqiDzm2qRe8aqod55Fnf8VAGdoJmEeD7yS6-qT4BHwpmPwtkFLzHaKxapg7S0jRWzlVNYnVDWIFraBIXP6pd6-OUJuwH0TR-9BXyKkW6vTq-KicUQjzNdAfEbca2iu-un6coV_3HvBndQGJwoaI7l3S9FWms2HTx7O-yK/s72-w320-c-h211/20231121_065353.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5579845503281179443"},"published":{"$t":"2020-10-12T13:36:00.015+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:17:40.821+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"स्वतंत्रता दिवस पर निबंध - independence day essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003eप्रति वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था। इस दिन हम उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलगभग दो शताब्दियों तक अंग्रेजों ने हमारे देेश पर शासन किया हैं। ब्रिटिश अधिकारी हमारे साथ गुलामों की तरह व्यवहार करते हैं। 15 अगस्त 1947 के बाद सब कुछ बलद गया। आज हम जो जीवन जी रहे हैं वह सब देश पर कुर्बान होने वाले स्वतंत्रा सेनानियों की देन हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदेश के सभी लोग स्वतंत्रा दिवस को उत्साह के साथ मनाते हैं। सभी स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों में इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं। भाषण, खेल, नृत्य और स्वजा रोहन किया जाता हैं। स्कूल में प्रेड लिकला जाता हैं। जिसमे बच्चें गीत और नारा लगते हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca 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है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत के स्वतंत्रता सेनानी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली थी, यह दिन हमारे महान नायकों द्वारा लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम का परिणाम है और भारत में 78 वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2024 को पूरे देश में मनाया जाने वाला है। महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान ने भारत को स्वतंत्र दिलाई हैं। न जाने उन्होंने कितनी आंदोलन और लड़ाइयां लड़ी हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहान स्वतंत्रता सेनानियों जैसे सुभाष चंद्र बोस, चंद्र शेखर आज़ाद, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. लाल बहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभ भाई पटेल, महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने बहुत योगदान दिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत के प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी ने देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई है और अपने प्राणों की आहुति दी है। कुछ स्वतंत्रता सेनानी के नाम इस प्रकार हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eबाल गंगाधर तिलक\u003c/li\u003e\u003cli\u003eडॉ. राजेंद्र प्रसाद\u003c/li\u003e\u003cli\u003eडॉ. लाल बहादुर शास्त्री\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसरदार वल्लभभाई पटेल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभगत सिंह\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसुभाष चंद्र बोस\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमहात्मा गांधी\u003c/li\u003e\u003cli\u003eजवाहर लाल नेहरू\u003c/li\u003e\u003cli\u003eचंद्रशेखर आजाद\u003c/li\u003e\u003cli\u003eतांतिया टोपे\u003c/li\u003e\u003cli\u003eलाल लाजपत राय\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसुखदेव\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकुँवर सिंह\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमंगल पांडे\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवी.डी सावरकर\u003c/li\u003e\u003cli\u003eरानी लक्ष्मी बाई\u003c/li\u003e\u003cli\u003eडॉ बी आर अम्बेडकर\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबहादुर शाह जफर\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदादाभाई नौरोजी\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबिपिन चंद्र पाल\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\n\n\u003cp\u003eस्वतंत्रता के पल को जीने के लिए हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इसके अलावा हजारों वीरों के बलिदान को भी याद करने का दिन हैं। हमने यह नहीं भूलना चाहिए की देश को आजादी दिलाने के लिए कितने लोगो ने अपनी जान की क़ुरबानी दी हैं। स्वतंत्रा दिवस हमारे अंदर देशभक्ती को जगाता है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्वतंत्रता दिवस का महत्व\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  हर भारतीय स्वतंत्रता के बारे में एक अलग दृष्टिकोण रखता है। कुछ के लिए,\n  यह लंबे संघर्ष की याद दिलाता है जबकि युवाओं आजादी का अहसास दिलाता है। इस दिन हम देश भर में देशभक्ति की भावना को देख सकते हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  देश भर में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना के साथ भारतीय स्वतंत्रता दिवस मनाते\n  हैं। इस दिन हरव्यक्ति जाती धर्म के परे होकर भारीय होने पर गर्व करता\n  है। यह न केवल स्वतंत्रता का उत्सव है, बल्कि देश की विविधता में एकता का भी\n  प्रतीक है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5579845503281179443"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5579845503281179443"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/independence-day-essay-in-hindi.html","title":"स्वतंत्रता दिवस पर निबंध - independence day essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003e\n  दिवाली या दीपावली खुशियों का त्यौहार हैं। जिसे हर साल\n  कार्तिक मास के अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली के दिन लोग दिप जलाते हैं और पटाखे पोड़ते है। 14 वर्ष वनवास के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ इसी दिन अयोध्या आये थे। इसलिए दिवाली मनाया जाता हैं। अयोध्या में जोरो सोरे से दिवाली मनाया जाता है। क्योकि अयोध्या भगवान राम की जन्म भूमि है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदिवाली क्यों मनाया जाता है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eदिवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू त्योहार है जो दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह रोशनी का त्योहार है जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दिवाली मनाने के कई कारण हैं और ये अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। दिवाली मनाने के कुछ सामान्य कारण यहां दिए गए हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिवाली विभिन्न पौराणिक और धार्मिक कहानियों से जुड़ी है, जैसे रावण को हराने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी और राक्षस नरकासुर पर भगवान कृष्ण की जीत के रूप में मनाया जाता हैं। यह आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिकता की विजय है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-NoLE0MCjsks/YAu9khFNSPI/AAAAAAAAEas/kaA9gj3NiPkm-UUKvc63EA7RkMfuv5qEQCLcBGAsYHQ/s600/20210123_113820.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"दिवाली पर निबंध - diwali essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"337\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-NoLE0MCjsks/YAu9khFNSPI/AAAAAAAAEas/kaA9gj3NiPkm-UUKvc63EA7RkMfuv5qEQCLcBGAsYHQ/w320-h180/20210123_113820.webp\" title\u003d\"दिवाली पर निबंध - diwali essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eयह भगवान राम की प्राचीन कहानी से जुड़ी है, जिन्हें उनके राज्य से निर्वासित कर 14 साल के लिए वनवास में भेज दिया गया था। दीवाली राम द्वारा दुष्ट रावण से विजय होकर घर वापसी का प्रतीक है। सिखों के लिए, यह त्योहार गुरु हरगोबिंद सिंह की जेल से मुक्ति और अमृतसर वापसी का प्रतीक है। यह जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर के आत्म-साक्षात्कार पाने का जश्न है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिवाली को रोशनी के त्योहार के रूप में जाना जाता है। दीपक और मोमबत्तियाँ जलाना अंधकार पर प्रकाश की जीत, खुशी फैलाने और अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक है। लोग अपने घरों को साफ करते हैं और सजाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिवाली को नए उद्यम शुरू करने, महत्वपूर्ण खरीदारी करने के लिए एक शुभ समय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि धन और समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी दिवाली के दौरान घरों में आती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिवाली परंपराओं और रीति-रिवाजों से समृद्ध है, जिसमें तेल के दीये और मोमबत्तियां जलाने से लेकर रंगोली बनाने और मिठाइयाँ तैयार करने तक शामिल है। ये परंपराएँ त्योहार के सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाती हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदिवाली का महत्व\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eदिवाली परंपरागत त्यौहार हैं, जिसका एक आध्यात्मिक महत्व है। प्रकाश अंधेरे पर विजय प्राप्त करता है, बुराई पर अच्छाई की जीत होती है, और ज्ञान अज्ञानता को दूर करता है। दिवाली रोशनी और शक्ति का रूप है, जो हमें बुरे कर्म से दूर रहने की प्रेरणा देती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिवाली एक ऐसा उत्सव है जो धार्मिक और जातिगत सीमाओं से परे होकर देश के हर कोने से लोगों को एकजुट करता है। यह साझा आनंद और हंसी का समय बनाता है। यह त्योहार न केवल घरों को रोशन करता है बल्कि दिलों को भी रोशन करता है, जो सकारात्मकता और समृद्धि से रोशन भविष्य की आशा दिलाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकई लोग दिवाली के दिन गिले शिकवे भूलकर लोगों को माफ करते हैं। इसलिए दीवाली\n  के दौरान दोस्ती और रिश्तेदारी मजबूत होती हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह खूबसूरत त्योहार समृद्धि का प्रतिक है। व्यापारियों के लिए यह अवसर कुबेर के खजाने से काम नहीं है। इस अवसर पर लोग जमकर खरीदारी करते हैं। लोग नए नए कपडे, सजाने के लिए फूल माला और पूजा की सामग्री खरीदते हैं। वे सफलता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eयह हृदय में शांति का प्रकाश लाता\n  है। दिवाली निश्चित रूप से लोगों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। खुशी और आध्यात्मिक प्रदान करती है। रोशनी के इस त्योहार में लोग एक-दूसरे के घरों में मिठाई का आदान प्रदान करते हैं।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2323189166850281976"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2323189166850281976"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/diwali-essay-in-hindi.html","title":"दिवाली पर निबंध - diwali essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  इंटरनेट आधुनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, जिससे संदेश भेजने, जानकारी\n  प्राप्त करने और व्यापर करने के तरीके में काफी बदलाव आया है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट के माध्यम से हम किसी भी जानकरी को आसानी से प्राप्त कर सकते है। आज के\n  समय इंटरनेट का उपयोग लगभग सभी लोग करते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइंटरनेट पर निबंध\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट एक मकड़ी के जल के सामान होता है जो लाखो करोडो कंप्यूटर से जुड़ा होता है।\n  उनमे विडिओ, ऑडियो और डॉक्यूमेंट होते है। जिसे किसी भी कंप्यूटर या मोबाइल में\n  देखा जा सकता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट के कुछ लाभ है तो कुछ नुकसान भी हैं। इसके उपयोग\n  से आपका निजी डाटा लीक हो सकता हैं। या आपके बैंक में पड़े पैसे की चोरी हो सकती हैं। इसके लाभ की बात करे तो बहू हैं। किसी को भी संंदेश भेज सकते हैं और किसी भी विषय को जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"इंटरनेट पर निबंध - internet essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"337\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Y50IZSVSxvw/YAu_byAtAaI/AAAAAAAAEa4/s2nhsVEUpdglLzTAnC_DpJwNG_7K9WfZQCLcBGAsYHQ/w320-h180/20210123_114612.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"इंटरनेट पर निबंध - internet essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट पर लाखों पेज और वेबसाइट हैं। टिम बर्नर्स-ली को इंटरनेट के पिता कहा जा\n  सकता है क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू (वर्ल्ड वाइड वेब) का आविष्कार\n  किया था।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eपरिचय\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट, दुनिया भर के लाखों कंप्यूटर को जोड़ने वाला एक वैश्विक नेटवर्क हैं। यह\n  21वीं सदी में व्यक्तियों और व्यापार के कामकाज के तरीके को आकार देने वाला एक\n  अनिवार्य उपकरण बन गया है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव संचार पर पड़ता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म,\n  ईमेल, इंस्टेंट मैसेजिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने लोगों के बातचीत करने के\n  तरीके को अलग आकार दिया\u0026nbsp; है। इंटरनेट ने संचार को तेज़, अधिक सुलभ और\n  प्रभावी बना दिया है। इसने भौगोलिक बाधाओं को तोड़ दिया है और दुनिया भर के लोगों\n  को जोड़ा है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eसूचना\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट सूचनाओं का एक विशाल भंडार है, जो ज्ञान के अनूठे भंडार तक पहुंच प्रदान\n  करता है। सर्च इंजन उपयोगकर्ताओं को लगभग किसी भी विषय पर कुछ ही सेकंड में\n  जानकारी ढूंढने में सक्षम बनाते हैं। उन्हें इंटरनेट किसी भी विषयों पर खुद को\n  शिक्षित करने और वैश्विक घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eशिक्षा\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट के आगमन के साथ शिक्षा में डिजिटल क्रांति आ गई है। ऑनलाइन शिक्षण\n  प्लेटफार्मों और डिजिटल संसाधनों ने शिक्षा तक पहुंच का विस्तार किया है, जिससे\n  दूरस्थ शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसर प्राप्त होता हैं। इंटरनेट ने शिक्षा को\n  अधिक लचीला, व्यक्तिगत और समावेशी बना दिया है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eव्यापार\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट ने व्यापार को बदल दिया है, नए अवसर और चुनौतियाँ पैदा की हैं। ई-कॉमर्स\n  अब एक संपन्न उद्योग बन गया है, जिसने लोगों के खरीदारी और व्यवसायों के तरीके को\n  बदल दिया है। डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन लेनदेन और दूरस्थ सहयोग मानक प्रथाएं बन\n  गए हैं, जो अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण में योगदान दे रहे हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eचुनौतियाँ और चिंताएँ\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  जहां इंटरनेट ने अनेक लाभ पहुंचाए हैं, वहीं इसने चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं।\n  साइबर सुरक्षा के खतरे, ऑनलाइन गोपनीयता के मुद्दे और गलत सूचना का प्रसार\n  चिंताएं बढ़ा रहा है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल विभाजन इंटरनेट पहुंच और तकनीकी\n  साक्षरता में असमानताओं को उजागर करता है, जिससे कुछ आबादी तक लाभ सीमित हो जाता\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट ने संचार, शिक्षा, व्यवसाय और समाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हुए\n  दुनिया को अभूतपूर्व तरीके से बदल दिया है। इसका निरंतर विकास संभवतः भविष्य को\n  आकार देगा, नए अवसर और चुनौतियाँ पेश करेगा।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eइंटरनेट के कारण सुविधा\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंटरनेट ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है। हम इंटरनेट का उपयोग पैसे भेजने या\n  जमा करने, टिकट बुक करने, मेल भेजने के लिए करते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसके अलावा, इंटरनेट ने पर्यावरण के लिए बहुत योगदान दिया है क्योंकि कार्यालय,\n  स्कूल और कॉलेज डिजिटल हो गए हैं। जिसने अनगिनत कागज बचाया है।\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Y50IZSVSxvw/YAu_byAtAaI/AAAAAAAAEa4/s2nhsVEUpdglLzTAnC_DpJwNG_7K9WfZQCLcBGAsYHQ/s600/20210123_114612.webp\"\u003e\u003cspan style\u003d\"color: black;\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इंटरनेट ने हमारे जीवन को आसान और सुविधाजनक\n  बना दिया है लेकिन हम इस तथ्य को नहीं छोड़ सकते कि इससे अतीत में कई बड़ी\n  समस्याएं पैदा हुई हैं। समय के साथ, हम इसके आदी होते जा रहे हैं।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1612978165964828556"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1612978165964828556"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/internet-essay-in-hindi.html","title":"इंटरनेट पर निबंध - internet essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-Y50IZSVSxvw/YAu_byAtAaI/AAAAAAAAEa4/s2nhsVEUpdglLzTAnC_DpJwNG_7K9WfZQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h180/20210123_114612.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8209255854867719614"},"published":{"$t":"2020-10-12T13:11:00.011+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:18:47.570+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"विज्ञान का चमत्कार निबंध - wonder of science essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003e\n  प्रकृति में उपास्थित संसाधन और वातुओ का क्रमबद्ध अध्यनन और उसके गुण का\n  निरीक्षण कर निष्कर्ष निकलना\u0026nbsp;विज्ञान कहलाता है। विज्ञान ने मानव जीवन के\n  विकाश में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिस मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग हम कर रहे\n  है ये भी विज्ञान का चमत्कार ही है। आज मानव दोगुनी रफ़्तार से तरक्की कर रहा है।\n  पृथ्वी ही नहीं अन्य ग्रहो पर मानव अपने रोबोट भेजने में सफल हुआ है ये विज्ञान\n  ने ही संभव बनाया है।\u0026nbsp;\u003cb\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविज्ञान का चमत्कार निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eविज्ञान के बहुत सारे लाभ हैं। विज्ञान केवल एक\n  क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, यह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी\n  साबित हुआ है। जब हम विज्ञान और इंजीनियरिंग में नवाचारों के बारे में बात करते\n  हैं, तो बिजली पहली चीज है जो दिमाग में आती है। इसने दुनिया के विकास में सबसे अधिक मदद की है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"विज्ञान का चमत्कार निबंध - wonder of science essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"336\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"179\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-uM3Fdk8inkw/YAvCemesWRI/AAAAAAAAEbE/nF-zRd16DJ8Spa9hzdRhGmBSdwlR8rRtACLcBGAsYHQ/w320-h179/20210123_115834.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"विज्ञान का चमत्कार निबंध - wonder of science essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eविज्ञान के बिना 21 वीं सदी में जीवन असंभव हैं। आखिरकार, कंप्यूटर, मोबाइल, मेडिकल,\n  टीवी, एसी और ऑटोमोबाइल के बिना दुनिया की कल्पना करना काफी कठिन है। चिकित्सा क्षेत्र में भी विज्ञान ने बड़े पैमाने पर योगदान दिया है। इसने घातक बीमारियों को ठीक करने में मदद की है। विज्ञान ने दुनिया को अकल्पनीय तरीकों से बदल दिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. चिकित्सा प्रगति -\u003c/b\u003e विज्ञान ने एंटीबायोटिक दवाओं और टीकों की खोज से लेकर उन्नत शल्य चिकित्सा तकनीकों तक चिकित्सा के क्षेत्र में अविश्वसनीय सफलताएं हासिल की हैं। इन प्रगतियों ने जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि की है और कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. तकनीकी नवाचार -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;प्रौद्योगिकी में तेजी से प्रगति ने हमारे रहने और काम करने के तरीके को बदल दिया है। पहिए के आविष्कार से लेकर कंप्यूटर, इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास तक, विज्ञान ने तकनीकी चमत्कार किए हैं जिन्होंने समाज को नया आकार दिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. अंतरिक्ष अन्वेषण -\u003c/b\u003e अंतरिक्ष अन्वेषण ने हमें ब्रह्मांड की गहरी समझ प्रदान की है। चंद्रमा पर उतरना, दूर के ग्रहों और चंद्रमाओं की खोज करना और हमारे सौर मंडल से परे अंतरिक्ष यान भेजना जैसी उपलब्धियां विज्ञान की उल्लेखनीय उपलब्धियां मानी जाती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. नवीकरणीय ऊर्जा -\u003c/b\u003e वैज्ञानिक अनुसंधान से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास हुआ है। ये प्रौद्योगिकियाँ पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान करती हैं और स्थायी ऊर्जा समाधानों में योगदान देती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. जैवप्रौद्योगिकी -\u003c/b\u003e जैवप्रौद्योगिकी में प्रगति ने चिकित्सा, कृषि और उद्योग में क्रांति ला दी है। जेनेटिक इंजीनियरिंग, जीन थेरेपी और मानव जीनोम का मानचित्रण इस बात के उदाहरण हैं कि विज्ञान ने जीवन के बारे में हमारी समझ को कैसे बदल दिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. संचार -\u003c/b\u003e वैज्ञानिक प्रगति ने प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से लेकर इंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकियों के विकास तक संचार में क्रांति ला दी है। इन प्रगतियों ने दुनिया भर के लोगों को अभूतपूर्व तरीके से जोड़ा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e7. ब्रह्मांड की समझ -\u003c/b\u003e सापेक्षता और क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांत जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों और मॉडलों ने ब्रह्मांड की प्रकृति में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान की है। ये सिद्धांत हमें ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले मूलभूत सिद्धांतों को समझने में मदद करते हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविज्ञान के नुकसान\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eयह हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी भी चीज की अधिकता जहर के सामान होता है। विज्ञान भी अलग नहीं है। यदि यह बुरे हाथों में पड़ता है, तो बड़े पैमाने पर\n  विनाश का कारण बन सकता है। परमाणु हथियार विज्ञान का ऐसा अविष्कार हैं जो पूरी दुनिया का अंत कर सकती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eएक और विश्व युद्ध पूरी दुनिया को अंधकारमय बनाने के लिए काफी हैं। परमाणु बम कई दसको तक पर्यावण को दूषित करता है। यह पुरे इकोसिस्टम को नष्ट कर देता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसे-जैसे दुनिया विज्ञान के कारण अधिक\n  औद्योगिक होती गई हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया हैं। सभी उच्च-स्तरीय उद्योग अब\n  प्राकृतिक संसाधनों जैसे पानी, हवा और मिट्टी को प्रदूषित कर रहे हैं। औद्योगिक विकास ने बेरोजगारी की दरों में वृद्धि की है क्योंकि\n  मशीनो ने मानव की जगह ले ली हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eहम कह सकते हैं कि निश्चित रूप से आधुनिक मनुष्य के लिए विज्ञान\n  बहुत फायदेमंद है। लेकिन मानव जाति के लिए कई खोजे विनाशकारी साबित हो सकती हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसलिए, मानव जाति के अधिक से अधिक लाभ के लिए इसका उचित उपयोग किया जाना चाहिए।\n  दुनिया को विज्ञान की बुराई से बचाने के लिए हमें इन वैज्ञानिक आविष्कारों का\n  विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। जैसा कि डॉ। ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने एक\n  बार कहा था कि विज्ञान मानवता के लिए एक सुंदर उपहार है, हमें इसे विकृत नहीं\n  करना चाहिए।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8209255854867719614"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8209255854867719614"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/wonder-of-science-essay-in-hindi.html","title":"विज्ञान का चमत्कार निबंध - wonder of science essay in 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Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"कंप्यूटर पर निबंध - computer essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003eकंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो हमारे काम को आसान बनाते है। कंप्यूटर का उपयोग रक्षा, चिकित्सा, अनुसंधान और व्यापर में किया जाता है। कंप्यूटर आधुनिक जीवन का रीढ़ हैं कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकंप्यूटर पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e\n  कंप्यूटर हमरे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समय के साथ कंप्यूटर बहुत विकसित हो गए हैं। पहले कंप्यूटर का आकर बहुत\n  बड़े होते थे और क्षमता भी कम होती थी। आधुनिक कंप्यूटर छोटे और तेज हो गए है। कंप्यूटर का अविष्कार\n  1822 में चार्ल्स बैबेज ने किया था। पहले इसका उपयोग केवल गणना करने के लिए होता\n  था। आज कंप्यूटर का उपयोग सभी क्षेत्रों में किया जाता हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca 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संक्षिप्त विवरण दिया गया है:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. प्राचीन उपकरण\u003c/b\u003e (20वीं सदी से पहले) - गणना में सहायता करने वाली मशीन की अवधारणा प्राचीन सभ्यताओं से चली आ रही है। अबेकस का उपयोग प्राचीन चीन, ग्रीस और रोम में किया जाता था। एस्ट्रोलैब का उपयोग समय और तारों की स्थिति से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता था। यह दोनों उपकरण प्रारंभिक कंप्यूटर के उदाहरण हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. यांत्रिक कैलकुलेटर \u003c/b\u003e(17वीं-19वीं शताब्दी) - 17वीं शताब्दी में आविष्कारकों ने विशिष्ट गणना करने के लिए यांत्रिक उपकरण बनाना शुरू किया। ब्लेज़ पास्कल ने 1642 में एक यांत्रिक कैलकुलेटर पास्कलाइन का आविष्कार किया। गॉटफ्रीड विल्हेम लीबनिज ने 1673 में स्टेप रेकनर विकसित किया। 19वीं शताब्दी में चार्ल्स बैबेज ने एनालिटिकल इंजन विकसित किया जिसे पूर्ण यांत्रिक कंप्यूटर की श्रेणी में रखा जाता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. एडा लवलेस और प्रोग्रामिंग\u003c/b\u003e (19वीं शताब्दी) - एडा लवलेस, जिन्हें अक्सर दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोग्रामर माना जाता है। उसने चार्ल्स बैबेज के साथ विश्लेषणात्मक इंजन पर विस्तृत नोट्स लिखे। उन्होंने मशीन की मात्र गणना से आगे जाकर जटिल एल्गोरिदम बनाने की क्षमता की कल्पना की।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंप्यूटर\u003c/b\u003e (20वीं सदी की शुरुआत) - 20वीं सदी की शुरुआत में इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंप्यूटर का विकास हुआ। एक उल्लेखनीय उदाहरण हार्वर्ड मार्क I है, जो 1944 में पूरा हुआ, जो एक इलेक्ट्रोमैकेनिकल मशीन थी जो विभिन्न प्रकार की गणनाएँ कर सकती थी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. ENIAC और इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर\u003c/b\u003e (1940): 1945 में पूरा हुआ इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर (ENIAC), अक्सर पहला सामान्य-उद्देश्य वाला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर माना जाता है। इसमें वैक्यूम ट्यूबों का उपयोग किया गया था और विभिन्न कार्यों को करने के लिए इसे प्रोग्राम किया जा सकता था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. यूनिवैक और मेनफ्रेम \u003c/b\u003e(1950) - यूनिवर्सल ऑटोमैटिक कंप्यूटर (यूनिवैक), 1951 में वितरित, संयुक्त राज्य अमेरिका में व्यावसायिक रूप से निर्मित पहला कंप्यूटर था। 1950 और 1960 के दशक में मेनफ्रेम कंप्यूटर, बड़ी और शक्तिशाली मशीनों का उदय हुआ, जिनका उपयोग मुख्य रूप से व्यवसायों और सरकारी संस्थानों द्वारा किया जाता था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e7. ट्रांजिस्टर और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स\u003c/b\u003e (1950-1960) - 1950 के दशक में ट्रांजिस्टर के आविष्कार ने वैक्यूम ट्यूब से छोटे, अधिक विश्वसनीय घटकों की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित किया। माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के विकास ने छोटे और अधिक किफायती कंप्यूटरों के निर्माण में सहयोग दिया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e8. एकीकृत सर्किट \u003c/b\u003e(1960) - 1960 के दशक में जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस द्वारा एकीकृत सर्किट (आईसी) के आविष्कार ने इलेक्ट्रॉनिक घटकों को और भी छोटा कर दिया। इससे छोटे और अधिक शक्तिशाली कंप्यूटरों का विकास हुआ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e9. पर्सनल कंप्यूटर\u003c/b\u003e (1970-1980 के दशक) - 1970 के दशक की शुरुआत में माइक्रोप्रोसेसर की शुरूआत ने पर्सनल कंप्यूटर के लिए मार्ग प्रशस्त किया। Apple और IBM जैसी कंपनियाँ कंप्यूटर को घरों और कार्यालयों में लेगयी, जिससे वे व्यक्तियों के लिए अधिक सुलभ हो गए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e10. इंटरनेट और नेटवर्किंग\u003c/b\u003e (1980-1990 के दशक) - 1980 और 1990 के दशक में इंटरनेट का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे कंप्यूटरों को विश्व स्तर पर जोड़ा गया। इस युग में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) और वर्ल्ड वाइड वेब का विकास भी देखा गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e11. मोबाइल कंप्यूटिंग\u003c/b\u003e (2000-2010) - 21वीं सदी में स्मार्टफोन और टैबलेट के उदय के साथ मोबाइल कंप्यूटिंग का प्रसार हुआ। इन उपकरणों ने कंप्यूटिंग शक्ति को संचार के साथ एकीकृत किया और दैनिक जीवन में सर्वव्यापी बन गए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e12. क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई\u003c/b\u003e (2010-वर्तमान) - क्लाउड कंप्यूटिंग उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंचने की अनुमति देता है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में प्रगति ने सीखने और समस्या में सक्षम प्रणालियों के विकास को जन्म दिया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकंप्यूटर का इतिहास एक गतिशील है, जिसमें प्रत्येक युग अतीत के नवाचारों पर आधारित है। आज के कंप्यूटर सदियों से चले आ रहे विकास का परिणाम हैं और इसमें कई आविष्कारकों, इंजीनियरों और दूरदर्शी लोगों का योगदान शामिल है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकंप्यूटर का कार्य एवं उपयोगिता\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eकंप्यूटर कई प्रकार के कार्य करते हैं और विभिन्न उपयोगिताएँ प्रदान करते हैं, जो उन्हें आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाते हैं। यहाँ कंप्यूटर के कुछ प्रमुख कार्य और उपयोगिताएँ दी गई हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. गणनाएँ -\u003c/b\u003e कंप्यूटर जटिल गणितीय गणनाएँ अविश्वसनीय गति से कर सकते हैं, जिससे वे वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और वित्तीय अनुप्रयोगों में अमूल्य बन जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. डेटा विश्लेषण - \u003c/b\u003eकंप्यूटर डेटा के बड़े सेट का विश्लेषण करते हैं, जिससे व्यवसायों, शोधकर्ताओं और संगठनों को अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. मेमोरी -\u003c/b\u003e कंप्यूटर बड़ी मात्रा में डेटा को विभिन्न रूपों में संग्रहीत कर सकता है, जिसमें टेक्स्ट, चित्र, वीडियो और बहुत कुछ शामिल हैं। यह कुशल डेटा पुनर्प्राप्ति और अपडेट की सुविधा प्रदान करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. ईमेल और मैसेजिंग -\u003c/b\u003e कंप्यूटर ईमेल, इंस्टेंट मैसेजिंग और अन्य ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से संचार सक्षम करते हैं, जिससे लोग विश्व स्तर पर जुड़ते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्लिकेशन वास्तविक समय में संचार की अनुमति देते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. मनोरंजन - \u003c/b\u003eकंप्यूटर गेमिंग के लिए एक मंच प्रदान करता है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए गहन और इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान करता है। कंप्यूटर का उपयोग फिल्में देखने, संगीत सुनने और डिजिटल सामग्री की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंचने के लिए किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. सूचना पुनर्प्राप्ति - \u003c/b\u003eकंप्यूटर वेबसाइटों, सर्च इंजनों और ऑनलाइन डेटाबेस से जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं। कंप्यूटर विशाल डिजिटल लाइब्रेरी और सूचना के भंडार तक पहुंच की सुविधा प्रदान करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकंप्यूटर बहुमुखी उपकरण हैं जो व्यक्तियों, व्यवसायों और समाज की लगातार बदलती मांगों को पूरा करने के लिए अपने कार्यों और उपयोगिताओं का विस्तार करते हुए विकसित होते रहते हैं। दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उनका प्रभाव गहरा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसे-जैसे कंप्यूटर का उपयोग बढ़ता गया, लगभग हर क्षेत्र में अपने संचालन के लिए कंप्यूटर का उपयोग करना एक आवश्यकता बन गया हैं। नीचे हम कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों का उल्लेख कर रहे हैं जो कंप्यूटर का उपयोग करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. चिकित्सा क्षेत्र -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकंप्यूटर ने चिकित्सा क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को बदल दिया है, रोगी देखभाल, चिकित्सा अनुसंधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार में योगदान दिया है। कंप्यूटर का उपयोग स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने, संग्रहीत करने के लिए किया जाता है। कंप्यूटर एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी मेडिकल इमेजिंग प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंप्यूटर रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम को नियंत्रित करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. अनुसंधान -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकंप्यूटर विभिन्न विषयों में अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुसंधान में कंप्यूटर के उपयोग ने डेटा एकत्र करने, विश्लेषण करने और व्याख्या करने के तरीके में क्रांति ला दी है।\u0026nbsp;शोधकर्ता जीव विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में डेटा एकत्र करने के लिए कम्प्यूटरीकृत सेंसर और उपकरणों का उपयोग करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. रक्षा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकंप्यूटर रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और बहुआयामी भूमिका निभाते हैं, जो सैन्य अभियानों, खुफिया जानकारी, और योजना के विभिन्न पहलुओं में योगदान देते हैं। साइबर खतरों के खिलाफ सैन्य नेटवर्क और संचार चैनलों को सुरक्षित करने के लिए कंप्यूटर आवश्यक हैं। कंप्यूटर सिस्टम से लैस ड्रोन का उपयोग निगरानी के लिए किया जाता है, जो मानव जीवन को जोखिम में डाले बिना वास्तविक समय डेटा और खुफिया जानकारी प्रदान करता है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकंप्यूटर के घटक और प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eकंप्यूटर विभिन्न घटकों से मिलकर बना होता है जो एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। इन घटकों को मोटे तौर पर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में वर्गीकृत किया जा सकता है। यहां प्रमुख कंप्यूटर घटकों और उनके प्रकारों का अवलोकन दिया गया है:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eहार्डवेयर घटक:\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) - सीपीयू को अक्सर इंटेल और एएमडी के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। यह कंप्यूटर का \"मस्तिष्क\" है, जो निर्देश प्राप्त करता है और गणना करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. रैम - रैंडम एक्सेस मेमोरी - सीपीयू द्वारा वर्तमान में उपयोग में आने वाले डेटा और प्रोग्राम के लिए अस्थायी भंडारण करता हैं। यह हार्ड ड्राइव की तुलना में तेज़होता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. भंडारण उपकरण - हार्ड डिस्क डाटा को सेव करके रखा जाता हैं। कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लिकेशन और उपयोगकर्ता डेटा को संग्रहीत करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. मदरबोर्ड - विभिन्न मदरबोर्ड विशिष्ट सीपीयू प्रकारों का समर्थन करते हैं। यह कई प्रकार के होते हैं। इसका कार्य सीपीयू, रैम, स्टोरेज और अन्य बाह्य उपकरणों के बीच कनेक्ट और संचार करना होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) - ग्राफिक्स रेंडरिंग को संभालता है और गेमिंग और ग्राफिक्स-गहन कार्यों के लिए आवश्यक होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसॉफ्टवेयर घटक:\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस)\u0026nbsp; विंडोज़, मैकओएस, लिनक्स, आदि इसके प्रकार है। हार्डवेयर संसाधनों का प्रबंधन करता है, एक उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस प्रदान करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर: वर्ड प्रोसेसर, वेब ब्राउज़र, गेम इत्यादि इसके प्रकार हैं। यह प्रोग्राम जो उपयोगकर्ता के लिए विशिष्ट कार्य करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकंप्यूटर के प्रकार:\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) - डेस्कटॉप और लैपटॉप इसके उदाहरण हैं। व्यक्तियों या व्यवसायों के लिए सामान्य उपयोगी सिस्टम होता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. सर्वर - वेब सर्वर, डेटाबेस सर्वर आदि इसके उदाहरण है। किसी नेटवर्क में अन्य कंप्यूटरों को सेवाएँ, डेटा या संसाधन प्रदान करता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. मेनफ्रेम - यह बड़े पैमाने के कंप्यूटर होते हैं। इसका कार्य व्यापक मात्रा में डेटा संसाधित करना और एक साथ कई कार्यों को संभालना हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. सुपरकंप्यूटर - यह एक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग मशीन हैं। इसका उपुओग अत्यधिक उच्च गति पर जटिल गणना करना, वैज्ञानिक अनुसंधान और सिमुलेशन के लिए उपयोग किया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष -\u003c/b\u003e कंप्यूटर एक बहुत ही महत्वपूर्ण मशीन है जो हमारे जीवन का एक उपयोगी हिस्सा बन\n  गया है। इसके अलावा, कंप्यूटर में एक तरफ जुड़वां चेहरे होते हैं, यह एक वरदान है\n  और दूसरी तरफ, यह एक बैन है। इसका उपयोग पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके\n  अलावा, भविष्य में एक दिन आएगा जब मानव सभ्यता कंप्यूटर के बिना जीवित नहीं रह\n  पाएगी क्योंकि हम उन पर बहुत अधिक निर्भर हैं। अब तक यह मानव जाति की एक महान खोज\n  है जिसने हजारों और लाखों लोगों की जान बचाने में मदद की है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3444237339454720780"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3444237339454720780"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/computer-essay-in-hindi.html","title":"कंप्यूटर पर निबंध - computer essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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technology essay in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी जिसे अंग्रेजी में टेक्नोलॉजी कहा जाता हैं। प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन को आसान बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय किया\n  हैं। लेकिन इसके नकारात्मक पहलू को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रौद्योगिकी पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गई है, जो हमारे संवाद करने, काम करने, सीखने और मनोरंजन करने के तरीके को प्रभावित करती है। पिछले कुछ दशकों में, प्रौद्योगिकी के प्रगति ने दुनिया को अभूतपूर्व तरीके से बदल दिया है। यह निबंध समाज पर प्रौद्योगिकी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों की जांच करता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-p9qQm_P5Hlc/X_UdMjlpN6I/AAAAAAAAEYc/bsErsMazT-kmB1nRbu1fuBbY1YRHAzu2QCLcBGAsYHQ/s600/20210106_064324.webp\"\u003e\u003cspan style\u003d\"color: black;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"प्रौद्योगिकी पर निबंध - technology essay in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"398\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-p9qQm_P5Hlc/X_UdMjlpN6I/AAAAAAAAEYc/bsErsMazT-kmB1nRbu1fuBbY1YRHAzu2QCLcBGAsYHQ/w320-h212/20210106_064324.webp\" title\u003d\"प्रौद्योगिकी पर निबंध - technology essay in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/span\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. संचार क्रांति\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी ने संचार में क्रांति ला दी है, भौगोलिक बाधाओं को तोड़ दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, ईमेल और मैसेजिंग ऐप्स ने हमारे बातचीत करने के तरीके को बदल दिया है, वैश्विक कनेक्शन को बढ़ावा दिया है और विचारों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाया है। हालाँकि, गोपनीयता, साइबरबुलिंग और गलत सूचना के प्रसार को लेकर चिंताएँ भी सामने आई हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. शिक्षा\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eशिक्षा में प्रौद्योगिकी ने क्रांति ला दी है। ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल पाठ्यपुस्तकें और शैक्षिक ऐप्स सुलभ सीखने के अवसर प्रदान करते हैं। हालाँकि, डिजिटल शिक्षा एक चुनौती है, क्योंकि हर किसी के पास प्रौद्योगिकी तक पहुँच नहीं होती है, जिससे शैक्षिक परिणामों में असमानताएँ पैदा होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी ने स्वास्थ्य और मेडिकल क्षेत्र में काफी उन्नती किया है, जिससे बीमारी के निदान और उपचार में सुधार हुआ है। एक्सरे, सोनोग्राफी,\u0026nbsp;सीटी स्कैनर और\u0026nbsp;वेंटिलेटर जैसे मशीनों ने बीमारी को पता लगाने और सही उपचार में सहायता करता हैं।\u0026nbsp;स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर जैसे पहनने योग्य उपकरण, स्वास्थ्य मापदंडों की निगरानी, \u200b\u200bशारीरिक गतिविधि पर नज़र रखने और यहां तक कि कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. मनोरंजन विकास\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी के आगमन के साथ मनोरंजन उद्योग में अधिक परिवर्तन आया है। हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उदय से संगीत, फिल्मों, टीवी शो और गेम के लिए स्ट्रीमिंग सेवाओं की लोकप्रियता बढ़ी है। Netflix, Spotify और Hulu जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने लोगों के मनोरंजन सामग्री तक पहुंचने और उसका आनंद लेने के तरीके को बदल दिया है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eट्विटर, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मनोरंजन सामग्री को बढ़ावा देने और उससे जुड़ने के लिए अभिन्न अंग बन गए हैं। हालाँकि अधिक समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पढ़ सकता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. पर्यावरणीय चुनौतियाँ\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजहां प्रौद्योगिकी ने अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं इसने पर्यावरणीय चुनौतियों में भी योगदान दिया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन और निपटान से इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पन्न होता है। प्रौद्योगिकी से जुड़ी ऊर्जा खपत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान करती है, जो जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख चालक है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की निर्माण प्रक्रिया भी कार्बन उत्सर्जन उत्पन्न करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी घटकों के निर्माण के लिए प्राकृतिक संसाधनों का निष्कर्षण संसाधन की कमी में योगदान देता है। इसमें खनिज, धातु और जीवाश्म ईंधन शामिल हैं।\u0026nbsp;प्रौद्योगिकी का उत्पादन और निपटान वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण में योगदान देता है। यदि ठीक से प्रबंधन न किया जाए तो विनिर्माण प्रक्रियाओं में उपयोग किए जाने वाले रसायन पर्यावरण को प्रदूषित कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003e6. जीवन पर प्रभाव\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनियमित रूप से विकसित होती तकनीक हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। इसके अलावा, नई प्रौद्योगिकियां बाजार में तूफान ला रही हैं। जैसे जैसे टेक्नोलॉजी विकसित हो रही हैं। वह मनुष्य के जीवन को आसान बना रही है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआज पल भर में अपने मित्रो और रिश्तेदारों को इंटरनेट की मदद से सन्देश भेज सकते है। उनसे कॉल में\u0026nbsp;बातकर सकते है। यह सब प्रौद्योगिकी के कारण ही\u0026nbsp;संभव हुआ हैं। दुनिया को टेक्नोलॉजी ने छोटा बना दिया हैं। पहले यातायात में कई दिनों से लेकर महीनो का समय लगता था। आज ऐसे विमान है जो कुछ ही घंटो में हजारो किलोमीटर की दुरी तय कर सकती हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलोगों को कुछ ही समय में उनकी आदत पड़ गयी है। प्रौद्योगिकी राष्ट्रों के विकास को प्रेरित करती है। अमेरिका जापान और चीन जैसे देश\u0026nbsp;प्रौद्योगिकी के कारण ही विकसित हुए हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003e7. प्रौद्योगिकी के नुकसान\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रदूषण -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eनई तकनीक से औद्योगीकरण बढ़ता है जो हवा, पानी, मिट्टी और ध्वनि जैसे कई प्रदूषणों को जन्म देता है। इसके अलावा, वे जानवरों, पक्षियों और मनुष्यों में कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी\u0026nbsp;के लिए नए संसाधनों की आवश्यकता होती है, और\u0026nbsp;प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है। जो अंततः प्रकृति के संतुलन को बिगड़ देता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबेरोजगारी -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eएक मशीन कई श्रमिकों का कार्य कर\u0026nbsp;सकती है। इसके अलावा, मशीनें बिना रुके कई घंटों या दिनों तक लगातार एक ही\u0026nbsp;गति से काम कर सकती हैं। इसके कारण, कई श्रमिकों ने अपनी नौकरी खो दी है।\u0026nbsp;जो बेरोजगारी बढ़ाती है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003e8. प्रौद्योगिकी के प्रकार\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआमतौर पर, हम प्रौद्योगिकी को उसी पैमाने पर आंकते हैं लेकिन वास्तव में प्रौद्योगिकी को विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, औद्योगिक प्रौद्योगिकी, वास्तुकला प्रौद्योगिकी, रचनात्मक प्रौद्योगिकी शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eऔद्योगिक -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eयह तकनीक मशीनों के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग और विनिर्माण प्रौद्योगिकी का आयोजन करती है। साथ ही, यह उत्पादन प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बनाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eवास्तुकला -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eइस प्रक्रिया में कला, विज्ञापन और उत्पाद डिजाइन शामिल हैं। जो सॉफ्टवेयर की मदद से बनाए जाते हैं। इसके अलावा, इसमें 3 डी प्रिंटर, वर्चुअल रियलिटी, कंप्यूटर ग्राफिक्स और अन्य पहनने योग्य तकनीक शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसूचान -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eइस तकनीक में सूचना भेजने, प्राप्त करने और संग्रहीत करने के लिए दूरसंचार और कंप्यूटर का उपयोग शामिल है। इंटरनेट सूचना प्रौद्योगिकी का सबसे अच्छा उदाहरण है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रौद्योगिकी आधुनिक समाज का एक अभिन्न अंग बन गई है, जो हमारे जीने, काम करने और एक-दूसरे से जुड़ने के तरीके को आकार देती है। हालाँकि संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर प्रौद्योगिकी के सकारात्मक प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, जैसे गोपनीयता संबंधी चिंताएँ, नौकरी विस्थापन और पर्यावरणीय मुद्दों का समाधान करना आवश्यक है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक टिकाऊ और न्यायसंगत भविष्य बनाने के लिए तकनीकी प्रगति को अपनाने और उनकी संभावित कमियों को दूर करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5261186222705578716"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5261186222705578716"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/technology-essay-in-hindi.html","title":"प्रौद्योगिकी पर निबंध - technology essay in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    शब्द भाषा की सबसे छोटी इकाई है। जिसका एक अर्थ होता है। बिना अर्थ वाले अक्षर\n    के जोड़ को हम शब्द नहीं मन सकते। एक शब्द अन्य शब्दों के साथ मिलकर वाक्य बनाती\n    है। यह बोली और लिखि जाने वाली भाषा का मूल तत्व होता है। जिसके माध्यम से हम\n    अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करते हैं। शब्द वे मूल तत्व हैं जो वाक्य और\n    संपूर्ण पाठ का निर्माण करता हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशब्द किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp\u003e\n    वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं। सार्थक समूह का अर्थ,\u0026nbsp;एक शब्द\n    में आने वाले वर्ण जो की एक व्यवस्थित क्रम में होते है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    जैसे की आम। इसमें आ के बाद म के आने से इसका एक अर्थ स्पष्ट हो रहा हैं। आम एक\n    फल का नाम हैं इसी तरह वह वर्णो का मेल जिसका कोई अर्थ हो शब्द कहलाता\n    हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    एक या एक से अधिक\u0026nbsp;वर्णों के मिलने से शब्द का निर्माण होता हैं। शब्दों के\n    बिना भाषा या वाक्य का निर्माण संभव नहीं हैं। किसी भी भाषा में अच्छी पकड़ के\n    लिए शब्द भंडार का ज्ञान होना अति आवश्यक होता हैं।\u0026nbsp;हिंदी वर्णमाला में 52\n    वर्ण होते हैं जिसमे 35 व्यंजन और 13 स्वर तथा 4 संयुक्त व्यंजन होते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003eशब्द की परिभाषा\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n  \u003cp\u003e\n    व्याकरण में, शब्द भाषा की मूल इकाई है। शब्दों को उनकी कार्य और अर्थ के\n    अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है। शब्द भाषा के लिखित और मौखिक दोनों रूपों में\n    दो या दो से अधिक ध्वनियों के मिश्रण को संदर्भित करता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e\u003cspan\u003eशब्द की विशेषताएं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n  \u003c/h3\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003eपारिभाषिक शब्द का अर्थ सुनिर्धारित होता है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      जिस विषय अथवा सिद्धांत के लिए है, उसी से\u0026nbsp; सम्बध्द या वही अर्थ व्यक्त\n      करता है ।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      एक विषय में एक धारणा को प्रकट करने के लिए एक ही पारिभाषिक शब्द होता है ।\n    \u003c/li\u003e\n  \u003c/ol\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    सभी शब्दों के वर्णों का क्रम निश्चित होता है, जैसे - आम का ही उदाहरण लेते और\n    इसे उलट कर देखें उसका कोई सार्थक शब्द नहीं बनेगा। लेकिन इसमें कुछ अपवाद हैं\n    जैसे कड़क इसको उलटने पर भी ऐसा ही अर्थ निकलता है जिसका सार्थक अर्थ होता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n    \u003ca\n      href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-W-rBAvCZSXg/YJgfYq4owFI/AAAAAAAAE2M/ItwCmEa3Pt0SWxqlfzEXqICTX5Ms4WpowCPcBGAYYCw/s600/20200730_195648.webp\"\n      style\u003d\"text-align: center;\"\n      \u003e\u003cimg\n        alt\u003d\"shabd kise kahate hain, शब्द किसे कहते हैं\"\n        border\u003d\"0\"\n        data-original-height\u003d\"400\"\n        data-original-width\u003d\"600\"\n        height\u003d\"213\"\n        src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-W-rBAvCZSXg/YJgfYq4owFI/AAAAAAAAE2M/ItwCmEa3Pt0SWxqlfzEXqICTX5Ms4WpowCPcBGAYYCw/w320-h213/20200730_195648.webp\"\n        style\u003d\"border-radius: 5%;\"\n        title\u003d\"shabd kise kahate hain,शब्द किसे कहते हैं\"\n        width\u003d\"320\"\n    /\u003e\u003c/a\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    जबकि आम की उलटने पर मआ हो जाता है जिसका कोई सार्थक अर्थ नही है। सभी शब्दों\n    का कोई न कोई अर्थ निश्चित होता है। शब्दों के द्वारा ही वाक्य रचना होती है।\n    जिसके बारे में हम आगे पढने वाले हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e शब्द के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n    \u003c/div\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      हिंदी में शब्द को पांच भागों में वर्गीकरण किया गया है जो की इस प्रकार है -\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cdiv\n      style\u003d\"background-color: #2b826c; color: white; font-weight: 600; padding: 3px 10px;\"\n    \u003e\n      \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n        \u003cli\u003eउत्पत्ति के आधार पर।\u003c/li\u003e\n        \u003cli\u003eअर्थ के आधार पर।\u003c/li\u003e\n        \u003cli\u003eरचना या बनावट के आधार पर।\u003c/li\u003e\n        \u003cli\u003eप्रयोग के आधार पर।\u003c/li\u003e\n        \u003cli\u003eव्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर।\u003c/li\u003e\n      \u003c/ol\u003e\n    \u003c/div\u003e\n    \u003cbr /\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003e\u003cb\u003e1. उत्पत्ति या स्त्रोत के आधार पर\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      इस आधार पर यह देखा जाता है की भाषा का उद्गम या उत्पत्ति कहाँ से हुई है\n      कहाँ से लिया गया है इसे देखा जाता है। इस उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का\n      वर्गीकरण को पांच प्रकारों में बांटा गया है जो की इस प्रकार है -\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003e\u003cspan\u003eतत्सम शब्द -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\n      \u003eतत्सम शब्द हिंदी भाषा के ऐसे शब्द हैं जो संस्कृत से लिये गए हैं तथा इनका\n      ज्यों का त्यों प्रयोग किया जाता है। मतलब इनका रूप परिवर्तन नही होता है।\n      अर्थात हिंदी भाषा में बिना किसी शब्द के मूल रूप को छेड़े बिना इसका प्रयोग\n      किया जाता है। जैसे - अग्नि, सूर्य, चंद्र, माता, पिता, पुत्र आदि।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003e\u003cspan\u003eतद्भव शब्द -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\n      \u003eतत+भव से मिलकर तद्भव शब्द बना है। तत्सम शब्दों में समय और परिस्थितियों के\n      कारण इसके रूप में थोड़ा परिवर्तन किया जाता है। उस शब्द को तद्भव शब्द कहा\n      जाता है।\u0026nbsp; जैसे - अग्नि शब्द का प्रयोग आग के रूप में करना।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003e\u003cb\u003eदेशज शब्द -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\n      \u003eउन शब्दों को देशज शब्द के रूप में जाना जाता है जिनके स्त्रोत का पता न हो\n      और जो की विदेशी भी न हो ऐसे शब्दों को देशज शब्द कहा जाता है। जैसे -\n      डिब्बा, खिड़की, लकड़ी, रोटी, लड़का, लोटा, पेट आदि।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003e\u003cspan\u003eविदेशी शब्द -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\n      \u003eजैसे की इसके नाम से ही स्पष्ट है ऐसे शब्द जो की अंग्रेजी, अरबी, फ़ारसी,\n      पुर्तगाली, चीन, फ्रांसीसी आदि से हिंदी में आएं हों उन्हें ही विदेशी शब्द\n      कहा जाता है। जैसे - नर्स, टेलीफोन और मोटर ये अंग्रेजी शब्द हैं। जबकि कागज,\n      बेगम और तक़दीर अरबी शब्द हैं। इसी प्रकार कई तुर्की, फ्रांसीसी, यूनानी और\n      पुर्तगाली शब्द का प्रयोग हिंदी में किया जाता हैं।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003e\u003cb\u003eसंकर शब्द -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\n      \u003eसंकर शब्द वे शब्द है जो दो भाषाओं के शब्दों से मिलकर बने होते है। उदाहरण\n      - रेलगाड़ी में रेल अंग्रेजी शब्द है, तथा गाड़ी हिंदी शब्द है। ऑपरेशन-कक्ष\n      में ऑपरेशन अंग्रेजी शब्द है और कक्ष संस्कृत शब्द है।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003e\u003cspan\u003e2. अर्थ के आधार पर शब्द के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      अर्थ के आधार पर शब्दों को छः प्रकार में बांटा गया है। जो की इस प्रकार हैं\n      -\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp\u003e\n      \u003cb\u003eएकार्थी शब्द\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- नाम से पता चलता है एकार्थी मतलब एक अर्थ वाला\n      अतः इस प्रकार के शब्दों का सदा एक-सा अर्थ रहता है। जैसे- प्रधानमंत्री,\n      संसद, सम्राट, राष्ट्रपति आदि।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp\u003e\n      \u003cb\u003eअनेकार्थी शब्द\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- अनेक मतलब एक से अधिक इस प्रकार अनेकार्थी शब्द\n      ऐसे शब्द होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। जैसे\n      -\u0026nbsp;\u003cb\u003eपंकज\u0026nbsp;\u003c/b\u003eफूल का नाम हैं और व्यक्ति का नाम भी होता हैं।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp\u003e\n      \u003cb\u003eपर्यायवाची शब्द\u003c/b\u003e\u003cb\u003e\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- पर्यायवाची शब्द उन शब्दों को कहते हैं\n      जिनका अर्थ प्रायः समान होता है। इन शब्दों का उपयोग वाक्य या पदों को सुंदर\n      और समृद्ध करने में किया जाता है। पर्यायवाची शब्द भाषा को विविधता और\n      विस्तृतता प्रदान करते हैं।\u0026nbsp;खुशी -\u0026nbsp;आनंद, प्रसन्नता।\u0026nbsp;भगवान\n      -\u0026nbsp;परमेश्वर,\u0026nbsp;ईश्वर। विद्यालय -\u0026nbsp;स्कूल,\u0026nbsp;शिक्षा संस्थान।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp\u003e\n      \u003cb\u003eविलोम शब्द\u003c/b\u003e - विलोम शब्द उन शब्दों को कहते हैं जिनका अर्थ अपने विलोम\n      के अर्थ के विपरीत होता है। इन शब्दों का उपयोग भाषा में विविधता और\n      संवेदनशीलता लाने के लिए किया जाता है। विलोम शब्द एक शब्द के विपरीत अर्थी\n      शब्दों का समूह होते हैं। जैसे - सफल - असफल। अच्छा - बुरा। बड़ा - छोटा। दिन\n      - रात। आसान - कठिन।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eसमरूपी शब्द\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- समरूपी शब्द एक ही अर्थ के होते हैं या प्रायः\n      समान अर्थी शब्दों का समूह होते हैं। समरूपी शब्द एक ही शब्द के समानार्थक\n      शब्दों का समूह होते हैं। ऐसे शब्दों को भिन्नार्थक या समरूपी शब्द कहते है।\n      जैसे - देखना - नज़र रखना, दर्शन करना। जानना - पता होना, ज्ञात होना। कहना -\n      बोलना,\u0026nbsp; कथन।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eअनेक शब्दों के लिए एक शब्द\u003c/b\u003e - जिन शब्दों का प्रयोग वाक्यांश अथवा\n      शब्द समूह के स्थान पर किया जाता है, जैसे की किसी उद्देश्य या कार्य\u0026nbsp;को\n      एक शब्द के माध्यम से\u0026nbsp;कहना। उन्हें ही हम अनेक शब्दों के लिए एक शब्द\n      कहते हैं। अच्छे भाग्य वाला - सौभाग्यशाली। जिसकी कोई कीमत न हो - अमूल्य।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e3. रचना के आधार पर शब्द के प्रकार\u003c/h3\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      आइये अब देखते हैं रचना के आधार पर शब्द के तीन प्रकार जो की इस प्रकार हैं -\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eरूढ़ शब्द\u003c/b\u003e - ऐसे शब्द जिनका प्रयोग विशेष अर्थ के लिए किया जाता है तथा\n      जिनके अलग होने पर मतलब संधि विच्छेद करने पर कोई अर्थ नही निकलता है उन्हें\n      रूढ़ शब्द के नाम से जाना जाता है। ऐसे शब्द एक परम्परा के तरह प्रयोग किये\n      जाते हैं। जैसे रात, दिन, पुस्तक, घोडा आदि।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eयौगिक शब्द\u003c/b\u003e - ये ऐसे शब्द हैं जिनका अर्थ संधि विच्छेद करने पर अलग\n      अलग लेकिन सार्थक अर्थ निकलता है उन्हें ही यौगिक शब्द कहते हैं, या इसे इस\n      प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है वे शब्द जो सार्थक खंडों के योग से बनाए\n      जाते हैं, यौगिक शब्द कहलाते हैं।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eयोगरूढ़\u0026nbsp; शब्द\u003c/b\u003e - यौगिक शब्द होते हुए भी जो शब्द किसी विशेष अर्थ\n      का बोध कराते हैं, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं। जैसे - पंकज, अर्थात कमल,\n      नीलकंठ अर्थात शिव।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003e\u003cb\u003e4. प्रयोग के आधार पर\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\n      \u003e\u003cb\u003e\u003cspan\u003eशब्द के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      प्रयोग के आधार पर शब्द के तीन प्रकार होते हैं जो इस प्रकार हैं -\n    \u003c/p\u003e\n\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eसामान्य शब्द \u003c/b\u003e- जो शब्द हम दैनिक जीवन में आम बोलचाल में प्रयोग करते\n      हैं, उन्हें सामान्य शब्द कहते है; जैसे - खाना, मकान, विद्यालय, दूध, कमरा\n      आदि।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cdiv\u003e\u003c/div\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eतकनीकी शब्द \u003c/b\u003e- जिन शब्दों का संबंध विभिन्न विषयों, व्यवसायों और\n      विज्ञान आदि से होता है, उन्हें तकनीकी शब्द कहते हैं; जैसे - कम्प्यूटर,\n      रसायन, रेखाचित्र आदि।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eअर्द्ध-तकनीकी शब्द\u003c/b\u003e - जो शब्द तकनीकी होते हुए भी आम आदमी के जीवन में\n      अधिक प्रचलन के कारण सामान्य लोगों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cdiv\u003e\n      \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n        \u003cb\u003e5. व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\n      \u003c/h3\u003e\n      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n        इस व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्द के दो प्रकार होते हैं -\n      \u003c/p\u003e\n      \u003cdiv\u003e\n        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n          \u003cb\u003eविकारी शब्द \u003c/b\u003e- जो शब्द अपना रूप, वाक्य के समय अर्थात काल, लिंग,\n          वचन, कारक आदि के कारण बदलते रहते हैं। उन्हें विकारी शब्द कहते हैं।\n          विकारी शब्द के चार भेद होते हैं जो की इस प्रकार है - संज्ञा, सर्वनाम,\n          विशेषण, क्रिया।\n        \u003c/p\u003e\n      \u003c/div\u003e\n      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n        \u003cb\u003eअविकारी शब्द \u003c/b\u003e- ऐसे शब्द जिसका प्रयोग किसी भी समय या काल में लिंग\n        के साथ या वचन के साथ करने पर जिसके रूप में कोई परिवर्तन न हो उन्हें\n        अविकारी शब्द कहते हैं। अविकारी शब्दों के चार प्रकार इस प्रकार हैं -\n        क्रियाविशेषण, सम्बोधन, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।\n      \u003c/p\u003e\n    \u003c/div\u003e\n  \u003c/div\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3201004581806613552"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3201004581806613552"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/shabd-kise-kahate-hain.html","title":"शब्द किसे कहते हैं - Shabd kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-W-rBAvCZSXg/YJgfYq4owFI/AAAAAAAAE2M/ItwCmEa3Pt0SWxqlfzEXqICTX5Ms4WpowCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h213/20200730_195648.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5403886024117408383"},"published":{"$t":"2020-02-15T13:28:00.000+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:58:29.345+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"पुरस्कार कहानी का सारांश - Jaishankar prasad"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\n  \u003cp\u003e\n    हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। 19 वीं सदी में गद्य में एक नई विधा का\n    विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना जाता है। पुरस्कार कहानी के नायक का नाम\n    वरुण हैं और नायिका का नाम मधुलिका है। दोनो एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे।\n    यह कहानी त्याग और देश भक्ति को दर्शाती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch3\u003e\n    \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपुरस्कार कहानी का सारांश\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n  \u003c/h3\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan\u003e\u003cb\u003eपुरस्कार कहानी का केंद्रीय भाव -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\n    \u003eयह कहानी प्रेम और संघर्ष की कहानी है। इस कहानी की नायिका मधुलिका है।\n    वह\u0026nbsp;अरुण नामक युवक के प्रेम में आसक्त है। साथ ही जन्मभूमि के प्रति भी\n    उसमें अपार भक्ति है। अरुण उसके राज्य पर आक्रमण करना चाहता है। पर मधुलिका\n    कर्तव्य की बलिवेदी पर, अपने प्रेम का बलिदान कर देती है तथा आक्रमण के पूर्व\n    कौशल नरेश को खबर देकर अपनी मातृभूमि की रक्षा करती है। वह\n    \u003cb\u003e\u003cspan\u003eपुरस्कार\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e के रूप में, मृत्युदंड मांगती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपुरस्कार कहानी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n  आर्द्रा नक्षत्र आकाश में\u0026nbsp;काले काले बादलों की घूमड़ के बीच एक कोने से\n  स्वर्ण पुरुष झांकने लगा। वह महाराज की सवारी देख रहा था। तभी बारिश की नन्हीं\n  नन्हीं बूंदों का एक झोंका बरस पड़ा। मंगल सूचना समझ लोगों ने हर्ष के साथ ध्वनि\n  की। रथों, हाथियों और दर्शकों की भीड़ थी।\u0026nbsp;\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    गजराज बैठ गया सीढ़ियों से महाराज उतरे, जिसके बाद सुंदर कन्याओं के दल ने मंगल\n    कलश और फूल बिखेरकर मधुर गीत गाकर आगे बढ़ गयी।\n  \u003c/p\u003e\n   \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n\n    \u003ca\n\n      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बजने लगे कुंवारी लड़कियों ने फूलों की\n    वर्षा की। यह कौशल का उत्सव मनाया जा रहा था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    एक दिन के लिए महाराज को कृषक बनना पड़ाता उस दिन इंद्र पूजा की जाती हैं।\n    नगर-निवासी उस पहाड़ी भूमि में आनंद मनाते। प्रतिवर्ष कृषि का यह महोत्सव\n    उत्साह से संपन्न होता, दूसरे राज्यों से भी युवक राजकुमार इस उत्सव में बड़े\n    चाव से आकर योगदान देते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मगध का एक राज कुमार अरुण अपने रथ पर बैठा\u0026nbsp;बड़े कुतूहल से यह दृश्य देख\n    रहा था। बीजों का एक थाल लिए कुमारी मधुलिका महाराज के साथ थी। बीज बोन के लिए\n    महाराज जब हाथ बढ़ाते, तब मधुलिका उनके सामने थाल आगे कर देती थी।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    यह खेत मधुलिका का था। जो इस साल महाराज की खेती के लिए चुना गया था। इसलिए बीज\n    देने का सम्मान मधुलिका को ही मिला था। सब लोग महाराज का हल चलाना देख रहे थे\n    और अरुण भी देख रहा था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    उत्सव समाप्त होने चला था। महाराज ने मधुलिका के खेत के बदले थाल में कुछ\n    स्वर्ण मुद्राएं रख दिया। मधुलिका ने थाली सिर\u0026nbsp;से लगाकर उन स्वर्ण\n    मुद्राओं को महाराज पर न्योछावर करके बिखेर दिया। मधुलिका की इस क्रिया को लोग\n    आश्चर्य से देखने लगे।\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cscript\n    async\u003d\"\"\n    src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\n  \u003e\u003c/script\u003e\n  \u003c!--mobile article--\u003e\u003cins\n    class\u003d\"adsbygoogle\"\n    data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\"\n    data-ad-format\u003d\"auto\"\n    data-ad-slot\u003d\"1422942514\"\n    data-full-width-responsive\u003d\"true\"\n    style\u003d\"display: block;\"\n  \u003e\u003c/ins\u003e\n  \u003cscript\u003e\n    (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});\n  \u003c/script\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका \u003c/b\u003eने सविनय\u0026nbsp;कहा - देव ! यह मेरे पितृ पितामहों की भूमि है।\n    इसे बेचना अपराध है। इसलिए मूल्य स्वीकार करना मेरी सामर्थ्य के\u0026nbsp;बाहर है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमंत्री\u003c/b\u003e ने तीखे स्वर से कहा - अबोध ! क्या बक रही है? राजकीय अनुग्रह का\n    तिरस्कार ! तेरी भूमि से चौगुना मूल्य है। फिर कोशल का तो यह राष्ट्रीय नियम\n    है। तू आज से राजकीय रक्षण पाने की अधिकारीणी\u0026nbsp;हुई इस धन से अपने को सुखी\n    बना।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका \u003c/b\u003eउत्तेजित होकर - राजकीय रक्षण की अधिकारिणी तो सारी प्रजा है\n    मंत्रिवर ! महाराज\u0026nbsp;को भूमि समर्पण करने में तो मेरा कोई विरोध न था और न\n    है। किंतु मूल्य स्वीकार करना असंभव है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमंत्री \u003c/b\u003eने महाराज के संकेत करने पर\u0026nbsp;कहा - देव ! वाराणसी युद्ध के\n    अंयतम वीर सिंहमित्र की एकमात्र कन्या है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमहाराज \u003c/b\u003eचौक\u0026nbsp;उठे - सिंहमित्र की कन्या ! जिसने मगध के सामने कोशल की\n    लाज रख ली थी, उसी वीर की मधुलिका कन्या है?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमंत्री\u0026nbsp;\u003c/b\u003eने कहा - हाँ महराज वही सिंहमित्र कन्या।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमहाराज \u003c/b\u003eने पूछा - इस उत्सव के परंपरागत नियम क्या हैं, मंत्रीवर?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमंत्री\u0026nbsp;\u003c/b\u003eने कहा -\u0026nbsp;देव, नियम तो बहुत साधारण हैं। किसी भी अच्छी\n    भूमि को इस उत्सव के लिए चुनकर नियमानुसार पुरस्कार स्वरूप उसका मूल्य दे दिया\n    जाता है। वह भी अत्यंत अनुग्रह पूर्वक। भू संपत्ति का चौगुना मूल्य उसे दिया\n    जाता है। उस खेती को वही व्यक्ति वर्ष भर देखता है। लेकिन वह राजा का खेत कहा\n    जाता है।\n  \u003c/p\u003e\n\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    महाराज को विश्राम की अत्यंत आवश्यकता थी। महाराज चुप रहे और जयघोष के साथ सभा\n    विसर्जित हो हुई। सब अपने-अपने शिविरों में चले गए। किंतु मधुलिका को उत्सव में\n    फिर किसी ने न देखा। वह अपने खेत की सीमा पर एक विशाल वृक्ष की छाया में चुपचाप\n    बैठी थी।\u003cbr /\u003e\u003cbr /\u003eरात्रि का उत्सव अब समाप्त हो चला था। राजकुमार अरुण अपने\n    विश्राम भवन में थे। आंखों में नींद न थी। सामने देखा तो एक अश्व खड़ा था। उसे\n    देखते-देखते नगर तोरण पर जा पहुंचा। रक्षक गण अश्व के पैरों के शब्द से चौंक\n    उठे। अरुण वह से तीर की भाती निकल गया।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    घूमता-घूमता अरुण उसी वृक्ष के नीचे पहुंचा, जहां मधुलिका सो रही थी। अरुण ने\n    अपने अश्व को मौन रहने का संकेत किया। उस सुषमा को देखने के लिए। परंतु कोकिल\n    बोल उठी। जैसे उसने अरुण से प्रश्न किया - छि, कुमारी के सोए हुए सौंदर्य पर\n    दृष्टिपात करने वाले दृष्ट तुम कौन ?\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका की आंखें खुल पड़ी उसने एक अपरिचित युवक को\u0026nbsp;\u0026nbsp;देखा। वह संकोच\n    से उठ बैठी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u003c/b\u003e - भद्रे ! तुम ही कल के उत्सव की संचालिका थी ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा \u003c/b\u003e- क्यों आपको कल का स्वप्न सता रहा है ? आप क्या मुझे इस\n    अवस्था में संतुष्ट न रहने देंगे ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u003c/b\u003e - मेरा ह्रदय तुम्हारी उस छवि का भक्त बन गया है, देवि।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा \u003c/b\u003e- मेरे उस अभिनय का मेरी विडंबना का। मनुष्य कितना\n    निर्दय है,\u0026nbsp;अपरिचित ! क्षमा करो जाओ अपने मार्ग।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- सरलता की देवी ! मैं मगध का राजकुमार तुम्हारे\n    अनुग्रह का प्रार्थी हूं। मेरे हृदय की भावना अवगुंठन में रहना नहीं जानती हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- राजकुमार मैं कृषक बालिका हूँ।\u0026nbsp;आप नंदन\n    बिहारी और मैं पृथ्वी पर परिश्रम करके वाली। आज मेरी स्नेह की भूमि पर से मेरा\n    अधिकार छीन लिया गया है। मैं दुख से विकल हूँ। मेरा उपहास न करो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- मैं कौशल नरेश से तुम्हारी भूमि तुम्हें दिलवा\n    दूँगा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-\u0026nbsp;नहीं, वह कौशल का राष्ट्रीय नियम है। मैं\n    उसे बदलना नहीं चाहती, चाहे उससे मुझे कितना ही दुःख हो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;तब\u0026nbsp;तुम्हारा रहस्य क्या है?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-\u0026nbsp;यह रहस्य मानव हृदय का है, मेरा नहीं।\n    राजकुमार, नियमों से यदि मानव ह्रदय बाध्य होता तो आज मगध के राजकुमार का ह्रदय\n    किसी राजकुमारी की ओर न खींचकर एक कृषक बालिका का अपमान करने न आता।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका उठ खड़ी हुई। चोट खाकर राजकुमार लौट गया। अश्व वेग\u0026nbsp;से चला जा रहा\n    था और मधुलिका के ह्रदय में टीस सी\u0026nbsp;होने लगी वह सजल नेत्रों से उड़ती हुई\n    धूल देखने लगी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका ने राजा का उपहार नहीं लिया। वह दूसरे की खेतों में काम करती और\n    रूखी-सूखी खाकर पड़ी रहती थी। मधूक\u0026nbsp;वृक्ष के नीचे उसकी छोटी सी कुटिया थी।\n    जिसके सूखे डंठलों से दीवार बनी थी। कठोर परिश्रम से जो रुखा-सुखा मिलता उसी से\n    उसकी सांसे चलती थी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    दुबली होने पर भी उसके अंग पर तपस्या की कांति थी। आसपास के कृषक उसका आदर करते\n    वह एक आदर्श बालिका की उपाधि देते थे। दिन, सप्ताह, महीने और वर्ष बीतने\n    लगे।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    शीतकाल का मौसम मेघों से भरा आकाश में बिजली दौड़-धूप कर रही थी। मधुलिका का\n    छाजन टपक रहा था। वह ठिठुर कर एक कोने में बैठी थी। मधुलिका अपने अभाव को आज\n    बढाकर सोच रही थी। आज\u0026nbsp;बहुत दिनों बाद उसे बीती हुई बात स्मरण हुई।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    2 नहीं 3 वर्ष हुए होंगे, इसी मधूक वृक्ष\u0026nbsp;के नीचे तरुण राजकुमार ने क्या\n    कहा था ? आज मधुलिका उस बीते हुए क्षण को लौटा लेने के लिए विकल थी। मगध की\n    प्रसाद-माला के वैभव का काल्पनिक चित्र उन सूखे डंठलो के रंध्रों\u0026nbsp;से,\n    नभ\u0026nbsp;में बिजली के आलोक में नाचता\u0026nbsp;हुआ दिखाई देने लगा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    शिशु जैसे श्रावण की संध्या में जुगनू को पकड़ने के लिए हाथ\n    लपकाता\u0026nbsp;है,\u0026nbsp;वैसे ही मधुलिका मन ही मन कह रही थी। कास अभी वह निकल कर\n    आ जाये। वर्षा ने भीषण रूप धारण कर लिया। गड़गड़ाहट बढ़ने लगी, ओले पड़ने की\n    संभावना थी। मधुलिका अपनी जर्जर झोपड़ी के लिए कांप उठती हैं। बहार कुछ आवाज\n    सुनाई देता हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    कौन है यहाँ ?\u0026nbsp;पथिक को आश्रय चाहिए। मधुलिका ने डंठलों का कपाट खोल दिया।\n    बिजली चमक उठी। उसने देखा एक पुरुष घोड़े की डोर पकड़े खड़ा है। वह चिल्ला उठी\n    - राजकुमार ! आश्चर्य से युवक ने कहा - मधुलिका ?\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    एक क्षण के लिए सन्नाटा सा छा गया। मधुलिका अपनी कल्पना को प्रत्यक्ष देखकर,\n    चकित हो गई।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- इतने दिनों के\u0026nbsp;बाद आज फिर!\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e अरुण ने कहा \u003c/b\u003e- कितना समझाया मैंने परंतु .....\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका अपनी दयनीय अवस्था पर संकेत करने देना नहीं चाहती थी। उसने कहा - और आज\n    आपकी यह क्या दशा है? सिर झुका कर अरुण ने कहा - मैं मगध का विद्रोही\n    निर्वासित, कोशल में जीविका खोजने आया हूँ।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका उस अंधकार में हंस पडी। मगध के विद्रोही राजकुमार का स्वागत करें एक\n    अनाथिनी कृषक बालिका, यह भी एक विडंबना है, तो भी मैं स्वागत के लिए प्रस्तुत\n    हूं। अरुण और मधुलिका वटवृक्ष के नीचे बैठे हुए बातें कर रहे हैं। मधुलिका की\n    वाणी में उत्साह था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने पूछा\u003c/b\u003e - जब तुम इतनी विपन्न\u0026nbsp;अवस्था में हो तो फिर इतने\n    सैनिकों को साथ\u0026nbsp;रखने की आवश्यकता है ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- मधुलिका ! बाहुबल\u0026nbsp;तो वीरों की आजीविका है। यह\n    मेरे जीवन-मरण के साथी हैं, भला मैं इन्हें कैसे छोड़ देता और करता ही क्या ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने पूछा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- हम लोग परिश्रम से कमाते और खाते हैं तो\n    तुम..... क्यों नहीं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- भूल ना करो। मैं अपने बाहुबल पर भरोसा करता\n    हूँ।\u0026nbsp;नए राज्य की स्थापना कर सकता हूँ,\u0026nbsp;निराश क्यों हो जाऊं ? अरुण\n    के शब्दों में कंपन था, वह जैसे कुछ कहना चाहता था, पर कह न सकता था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने पूछा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;नवीन राज्य ! ओहो ! तुम्हारा उत्साह तो कम\n    नहीं। भला कैसे ? कोई ढंग बताओ तो मैं भी कल्पना का आनंद ले लूं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-\u0026nbsp;कल्पना का आनंद नहीं मधुलिका मैं तुम्हें\n    राजरानी के समान सिंहासन पर बिठाऊँगा\u0026nbsp;! तुम अपने छीने\u0026nbsp;हुए खेत की\n    चिंता करके वह भयभीत हो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने पूछा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;आह मैं सचमुच आज तक तुम्हारी प्रतीक्षा\n    करती थी, राजकुमार !\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e अरुण ढिठाई से उसके हाथों को दबाकर बोला \u003c/b\u003e- तो मेरा भ्रम था, तुम सचमुच\n    मुझे प्यार करती हो ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    युवती का वक्षस्थल फूल उठा, वहां हाँ भी नहीं कह सकी, ना भी नहीं। अरुण ने उसकी\n    अवस्था का अनुभव कर लिया।\u0026nbsp; कुशल मनुष्य के समान उसने अवसर को हाथ से न\n    जाने दिया। तुरंत बोल तुम्हारी इच्छा हो तो प्राणों से पण\u0026nbsp;लगाकर मैं\n    तुम्हें इस कोशल सिहासन पर बिठा दूं। मधुलीके ! अरुण की खड्ग का आतंक देखोगी\n    ?\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका एक बार कांप उठी। वह कहना चाहती थी - नहीं ! किंतु उसके मुंह से निकला\n    - क्या ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-\u0026nbsp;सत्य मधुलिका, कोशल नरेश तभी से तुम्हारे लिए\n    चिंतित हैं। यह मैं जानता हूँ। तुम्हारी साधारण सी प्रार्थना वे अस्वीकार न\n    करेंगे। मुझे यह भी विदित है कि कोशल के सेनापति अधिकांश सैनिकों के साथ पहाड़ी\n    दस्युओं का\u0026nbsp;दमन करने के लिए बहुत दूर चले गए हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-\u0026nbsp;तुम बोलती नहीं हो ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमंत्रमुग्ध-सी मधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e - जो कहोगे वह करुँगी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    स्वर्णमंच पर कोशल\u0026nbsp;नरेश अर्धनिंद्रित अवस्था\u0026nbsp;में आंखें बंद किए हैं।\n    एक चामरधारिणी युवती पीछे खड़ी अपनी कलाई बड़ी कुशलता से घुमा रही\u0026nbsp;है। चमर\n    के शुभ आंदोलन उस कोष्ट में\u0026nbsp;धीरे-धीरे संचालित हो रहे हैं। तांबूल वाहिनी\n    प्रतिमा के समान दूर खड़ी है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eप्रतिहारी ने आकर कहा -\u003c/b\u003e जय हो देव ! एक स्त्री कुछ प्रार्थना करने आई\n    है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eआंखें खोलते हुए महाराज ने कहा \u003c/b\u003e- स्त्री ! प्रार्थना करने आई है ? आने\n    दो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    प्रतिहारी के साथ मधुलिका आई। उसने प्रणाम किया। महाराज ने स्थिर दृष्टि से\n    उसकी ओर देखा और कहा - तुम्हें कहीं देखा है?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;तीन\u0026nbsp;बरस हुए देव ! मेरी भूमि खेती के\n    लिए ली गई थी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eराजा ने कहा - \u003c/b\u003eओह ! तो तुमने इतने दिन कष्ट में बिताए, आज उसका मूल्य\n    माँगने आई हो, क्यों अच्छा-अच्छा तुम्हें मिलेगा। प्रतिहारी !\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;नहीं महाराज, मुझे मूल्य नहीं चाहिए।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eराजा ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eमूर्ख ! फिर क्या चाहिए ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cscript\n    async\u003d\"\"\n    src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\n  \u003e\u003c/script\u003e\n  \u003c!--mobile article--\u003e\u003cins\n    class\u003d\"adsbygoogle\"\n    data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\"\n    data-ad-format\u003d\"auto\"\n    data-ad-slot\u003d\"1422942514\"\n    data-full-width-responsive\u003d\"true\"\n    style\u003d\"display: block;\"\n  \u003e\u003c/ins\u003e\n  \u003cscript\u003e\n    (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});\n  \u003c/script\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;उतनी ही भूमि, दुर्ग के दक्षिणी नाले के\n    समीप की जंगली भूमि, वही मैं अपनी खेती करूंगी। मुझे एक सहायक मिल गया है। वह\n    मनुष्यों से मेरी सहायता करेगा, भूमि को समतल भी तो बनाना होगा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e महाराज ने कहा - \u003c/b\u003eकृषक बालिके ! वह बड़ी ऊबड़-खाबड़ भूमि है। वह दुर्ग के\n    समीप एक सैनिक महत्व रखती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;तो फिर निराश लौट जाऊं ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमहाराज ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसिंहमित्र की कन्या ! मैं क्या करूं ? तुम्हारी यह\n    प्रार्थना ..\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;देव ! जैसी आज्ञा हो !\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमहाराज ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eजाओ, तुम श्रमजीवीयों को उसमें लगाओ। मैं अमात्य\n    को आज्ञापत्र देने का आदेश करता हूँ।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- जय हो देव ! कहकर प्रणाम करती हुई मधुलिका राज\n    मंदिर के बाहर आई।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    दुर्ग\u0026nbsp;की दक्षिण, भयावने नाले के तट पर घना जंगल है। आज मनुष्यों के पद\n    संचार से शून्यता भंग हो रही थी। अरुण के छिपे हुए सैनिक स्वतंत्रता से इधर-उधर\n    घूमते थे। झाड़ियों को काटकर पत्र बन रहा था।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    नगर दूर था फिर उधर यों ही कोई नहीं आता था। फिर अब तो महाराज की आज्ञा से\n    वहाँ\u0026nbsp;मधुलिका खेत बन रही थी। तब इधर की किसको चिंता होती ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    एक घने कुंज में अरुण और मधुलिका एक - दूसरे को हर्षित नेत्रों से देख रहे थे।\n    संध्या हो चली थी। उसने निविड़ वन में उन नवागत मनुष्यों को देखकर पक्षीगण अपने\n    नीड़ को\u0026nbsp;लौटते हुए अधिक कोलाहल कल कर रहे थे। प्रसन्नता से अरुण की आँखें\n    चमक उठी। सूर्य की अंतिम किरण झुरमुट में घुसकर मधुलिका के कपोलों\u0026nbsp;से\n    खेलने लगीं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा -\u003c/b\u003e चार प्रहर और विश्राम करो, प्रभात में ही इस जीर्ण कलेवर\n    कोशलराष्ट्र की राजधानी श्रावस्ती में तुम्हारा अभिषेक होगा और मगध से\n    निर्वासित मैं एक स्वतंत्र राष्ट्र का अधिपति बनूंगा मधुलिके !\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- भयानक ! अरुण, तुम्हारा साहस देख मैं चकित हो रही\n    हूँ।\u0026nbsp;केवल सौ\u0026nbsp;सैनिकों से तुम..\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;रात के तीसरे प्रहर\u0026nbsp;में मेरी विजय यात्रा होगी।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- तो तुमको इस विजय पर विश्वास है ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;अवश्य ! तुम अपनी झोपड़ी में यह रात बिताओ, प्रभात\n    से तो राज मंदिर ही तुम्हारा लीला निकेतन बनेगा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका प्रसन्न थी। किंतु अरुण के लिए उसकी कल्याण कामना सशंक थी। वह कभी-कभी\n    उद्विग्न-सी होकर बालकों के समान प्रश्न कर बैठती। अरुण उसका समाधान कर\n    देता।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eअरुण ने कहा -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;अच्छा अंधकार अधिक हो गया। अभी तुम्हें दूर जाना है\n    और मुझे भी प्राणपण\u0026nbsp;से इस अभियान के प्रारंभिक कार्यों को अर्धरात्रि तक\n    पूरा कर लेना चाहिए। तब रात्रि भर के लिए विदा मधुलिके !\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका उठ खड़ी हुई झाड़ियों से गुजरती हुई क्रम से बढ़ने वाली अंधकार में वह\n    झोपड़े की ओर चली गई। पथ अंधकारमय\u0026nbsp;था और मधुलिका का हृदय भी विचलित हो\n    उठा। जितनी सुख कल्पना थी, वह जैसे अंधकार में विलीन होने लगी। वह भयभीत थी,\n    पहला भय उसे अरुण के लिए उत्पन्न हुआ। यदि वह सफल न हुआ तो ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    वह सोचने लगी कोशल नरेश ने क्या कहा था। सिंहमित्र की कन्या। कौशल का रक्षक\n    वीर, उसी की कन्या आज क्या करने जा रही है ? नहीं-नहीं। उसे मधुलिका! मधुलिका!\n    सुनाई देने लगी जैसे उसके पिता उस अंधकार में पुकार रहे थे। वह पगली की तरह\n    चिल्ला उठी रास्ता भूल गई।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    रात का एक\u0026nbsp;पहर\u0026nbsp;बीतचला था, पर मधुलिका अपनी झोपड़ी तक न पहुँची थी।\n    उसकी आंखों के सामने कभी सिंहमित्र और कभी अरुण की मूर्ति अंधकार में चित्रित\n    होती जाती। उसे सामने आलोक दिखाई पड़ा। वह बीच पथ में खड़ी हो गई।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    एक सौ सैनिक चले आ रहे थे और आगे-आगे एक वीर अधेड़ सैनिक\u0026nbsp;था। उसके बाएं हाथ\n    में अश्व की वल्गा और दाहिने हाथ में नग्न खड़ग था। अत्यंत धीरता से वह टुकड़ी\n    अपने पथ में चल रही थी परंतु मधुलिका बीच पथ\u0026nbsp;से हिली नहीं। प्रमुख सैनिक\n    पास आ गया। फिर भी मधुलिका नहीं हटी।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eसैनिक ने अश्व रोककर कहा -\u003c/b\u003e कौन ? कोई उत्तर नहीं मिला।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eतब तक दूसरे सैनिक ने कड़ककर कहा \u003c/b\u003e- तू\u0026nbsp;कौन है स्त्री ? कौशल के\n    सेनापति\u0026nbsp;कौशल के सेनापति को उत्तर शीघ्र दे।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका चिल्ला उठी\u003c/b\u003e - बांध लो मुझे। मेरी हत्या करो। मैंने अपराध ही ऐसा\n    किया है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eसेनापति हँस पड़े -\u003c/b\u003e पगली है।\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपगली नहीं, यदि पगली होती, तो इतनी विचार वेदना\n    क्यों होती सेनापति मुझे बांध लो राजा के पास लो राजा के पास ले चलो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eसेनापति ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eक्या\u0026nbsp;है स्पष्ट कहो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eश्रावस्ती का दुर्ग एक प्रहर में दस्युओं के\n    हस्तगत हो जाएगा। दक्षिणी नाले के पार उनका आक्रमण होगा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e सेनापति चौक उठे। उन्होंने आश्चर्य से पूछा -\u003c/b\u003e तू क्या कह रही है\n    ?\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eमैं सत्य कह रही हूं शीघ्रता करो।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    सेनापति ने 80 सैनिकों को नाले की ओर धीरे-धीरे बढ़ने की आज्ञा दी और स्वयं 20\n    अश्वारोहियों\u0026nbsp;के साथ दुर्ग की ओरजाने लगा। मधुलिका को बांधकर ले जाया गया।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जब थोड़े से अश्वारोही बड़े वेग से आते हुए दुर्ग द्वार पर रुके, तब दुर्ग के\n    प्रहरी चौक उठे। उन्होंने सेनापति को पहचाना द्वारा खुला। सेनापति घोड़े की पीठ\n    से उत्तरे। उन्होंने कहा - अग्निसेन ! दुर्ग में कितने सैनिक होंगे ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eसेनापति की जय हो ! दो सौ।\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    उन्हें शीघ्र ही एकत्र करो। परन्तु बिना किसी शब्द के। सौ को लेकर तुम शीघ्र ही\n    चुपचाप दुर्ग के दक्षिण की और चलो। आलोक और शब्द न हो।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    सेनापति ने मधुलिका की ओर देखा और उसे खोलने की आज्ञा दिया। उसे अपने पीछे आने\n    का संकेत कर सेनापति राज मंदिर की और बढ़े। प्रतिहारी ने सेनापति को देखते ही\n    महाराज को सावधान किया। सेनापति और साथ में मधुलिका को देखते ही महराज चंचल हो\n    उठे।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eसेनापति ने कहा\u003c/b\u003e - जय हो देव ! इस स्त्री के कारण मुझे इस समय उपस्थित\n    होना पड़ा है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e महाराज\u003c/b\u003e ने स्थिर नेत्रों से देखकर कहा - सिंहमित्र की कन्या, फिर यहाँ\n    क्यों ? क्या तुम्हारा क्षेत्र नहीं बन रहा है ? कोई बाधा ? सेनापति ! मैंने\n    दुर्ग के दक्षिण नाले के समीप की भूमि इसे दी है। क्या उसी संबंध में तुम कहना\n    चाहते हो ?\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eसेनापति ने कहा\u003c/b\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;देव ! किसी गुप्त शत्रु ने उसी ओर से आज की\n    रात में दुर्ग पर अधिकार कर लेने का प्रबंध किया है और इसी स्त्री ने मुझे यह\n    संदेश दिया है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eराजा ने पूछा \u003c/b\u003e- मधुलिका, यह सत्य है ?\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eमधुलिका ने कहा\u003c/b\u003e - हाँ देव !\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eराजा ने सेनापति से कहा -\u003c/b\u003e सैनिकों को एकत्र करके तुम चलो, मैं अभी आता\n    हूँ।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    सेनापति के चले जाने पर \u003cb\u003eराजा ने कहा\u003c/b\u003e - सिंहमित्र की कन्या ! तुमने एक\n    बार फिर कोशल का उपकार किया। यह सुचना देकर तुमने पुरस्कार का काम किया है।\n    अच्छा, तुम यहीं ठहरो। पहले उन आततायियों का प्रबंध कर लूँ।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    इस अभियान में अरुण को बन्दी बना लिया गया और भीड़ ने जयघोष किया। सबके मन में\n    उल्लास था। सभा मंडप दर्शकों से भर गया। बन्दी अरुण को देखते ही जनता ने रोष से\n    हुंकार करते हुए कहा - वध करो ! राजा ने सबसे सहमत होकर आज्ञा दी। प्राणदण्ड की\n    आज्ञा दिया !\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका को बुलाया गया। वह पगली सी आकर खड़ी हो गई। कोशल नरेश ने पूछा -\n    मधुलिका, तुझे जो पुरस्कार लेना हो\u0026nbsp; मांग। वह चुप रही।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003e राजा ने कहा -\u003c/b\u003e मेरी जितनी निजी खेती है, मैं सब तुझे देता हूँ।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    मधुलिका ने एक बार बन्दी अरुण की ओर देखा। \u003cb\u003eउसने कहा\u003c/b\u003e - मुझे कुछ\n    नही\u0026nbsp;चाहिए। अरुण हँस पड़ा।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eराजा ने कहा\u003c/b\u003e - नहीं, मैं तुझे अवश्य दूँगा। माँग ले।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eमधुलिका ने कहाँ\u003c/b\u003e - तो मुझे भी प्राणदंड मिले। कहती हुई वह बन्दी अरुण के\n    पास जा खड़ी हुई।\n  \u003c/p\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5403886024117408383"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5403886024117408383"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/02/Jaishankar-prasad-puraskar.html","title":"पुरस्कार कहानी का सारांश - Jaishankar prasad"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Mahatma Gandhi Essay Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eअक्सर महात्मा गाँधी पर निबंध हिंदी के पेपर में आवश्यता आता है। तो चलिए एक\u0026nbsp;अच्छा निबंध कैसे लिखते है जानते है। मैं आपको सलाह दूंगा की आप कोई भी निबंध हो उसे रटने का प्रयास न करे बल्कि उसे समझे या उसके बारे में जितना ज्यादा\u0026nbsp;जानकारी हो सके उतना अर्जित करे। इससे आप उस विषय के बारे में आसानी से निबंध लिख पाएंगे। हिंदी में अच्छा अंक पाने के लिए निबंध एक अच्छा श्रोत होता है इसे कभी भी मिस न करे।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमहात्मा गाँधी पर निबंध\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eनिबंध लिखते समय यह तय करे की\u0026nbsp;आपको जितने शब्द में उत्तर लिखने को कहा जाय उतना ही लिखे उससे काम न लिखे और निबंध का प्रारूप लिखना ना भूले। महात्मा गाँधी के बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप \u003ca 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style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. महात्मा गाँधी का परिचय\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eजन्म - 2 अक्टूबर 1869 को हुआ।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eजन्म स्थान - पोरबन्दर, काठियावाड़, गुजरात (भारत) में।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमृत्यु - 30 जनवरी 1848 को हुआ।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमृत्यु स्थान - नई दिल्ली (भारत)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअन्य नाम - राष्ट्रपिता, महात्मा, बापू, गांधी जी।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशिक्षा - यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"महात्मा गाँधी पर निबंध - Mahatma Gandhi Essay Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"390\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"208\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hv4TC8K5Quw/X17oQlfVF1I/AAAAAAAADm8/4McroyHuAjskT2EUn56PrG4GGGHwDMCowCLcBGAsYHQ/w320-h208/20200914_091730.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"महात्मा गाँधी पर निबंध - Mahatma Gandhi Essay Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गांधी पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये महात्मा गाँधी ने एक प्रवासी वकील के रूप में वहाँ कार्य किये और भारतीय नागरिको की सहायता की उसके बाद सन 1915 में भारत आ गए। महात्मा गाँधी पूरी मानव जाति के लिए मिशाल हैं। उन्होंने हर परिस्थिति में अहिंसा और सत्य का पालन किया और लोगों से भी इनका पालन करने के लिये कहा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत आकर महात्मा गाँधी ने पुरे देश का भ्रमण किया और\u0026nbsp; किसानों, मजदूरों और श्रमिकों को भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करने के लिये प्रेरित किया। गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धान्तो पर चलकर उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सन 1930 में नमक सत्याग्रह और इसके बाद 1942 में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन से अंग्रेजो को करारा जवाब दिया।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउनके इन सिद्धांतों ने पूरी दुनिया में लोगों को नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान गाँधी जी कई वर्षों तक जेल में रहे।\u0026nbsp; उन्हें भारत का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है\u0026nbsp; सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1944 में रंगून रेडियो से गाँधी जी को पहली बार ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्बोधित किया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसदैव शाकाहारी भोजन खाने वाले इस महापुरुष ने आत्मशुद्धि के लिये कई बार लम्बे उपवास भी रखे। उन्होंने अपना जीवन सदाचार में गुजारा। वह सदैव परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनते थे। सन 1921 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभाली और अपने कार्यों से देश के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. महात्मा गांधी का जीवन परिचय\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमोहनदास करमचन्द गान्धी का जन्म गुजरात के शहर पोरबंदर में 2 अक्टूबर सन् 1869 को हुआ था।मोहनदास की माता पुतलीबाई परनामी वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और अत्यधिक धार्मिक प्रवित्ति की थीं जिसका प्रभाव युवा मोहनदास पड़ा और इन्ही मूल्यों ने आगे चलकर उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गाँधी का नाम पहले मोहन दास था फिर बाद में उनको उनके पिता के नाम के साथ जोड़कर मोहन दास करमचन्द गाँधी के नाम से जाने जाना लगा। महात्मा गांधी का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है उन्होंने ज्यादा तकलीफ़ तो नहीं पाई क्योंकि उनके पिता अंग्रेजों के जमाने में दीवान हुआ करते थे। तो उनका बचपन भी उतने ज्यादा तकलीफ़ में नहीं गुजरा था। लेकिन बाद में कई तकलीफ का सामना करना पड़ा। वे भेद भाव के सख्त खिलाफ थे।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकरमचंद की माँ नियमित रूप से व्रत रखती थीं और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा में दिन-रात एक कर देती थीं। इस कारण मोहनदास के स्वाभाव में अहिंसा,\u0026nbsp; शाकाहार,\u0026nbsp; आत्मशुद्धि के लिए व्रत और विभिन्न धर्मों के प्रति उसका झुकाव रहा। सन 1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा अहमदाबाद से उत्तीर्ण की।\u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. महात्मा गांधी बुनियादी शिक्षा\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गाँधी का विवाह 13 साल के आयु पूर्ण करते ही कम उम्र में हो गया था और उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था। जिन्हें \"बा\" कह के भी पुकारा जाता था। उनका बाल विवाह हुआ था। क्योंकि उस समय यह\u0026nbsp; प्रचलित था। उनकी मिडिल स्कूल की शिक्षा पोरबंदर में और हाई स्कूल की शिक्षा राजकोट में हुई। शैक्षणिक स्तर पर मोहनदास एक औसत छात्र ही रहे। जब मोहनदास 15 वर्ष के थे तब इनकी पहली सन्तान ने जन्म लिया लेकिन वह केवल कुछ दिन ही जीवित रही। उनके पिता करमचन्द गाँधी का भी इसी साल इंतकाल हो गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके बाद मोहनदास ने कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन ख़राब स्वास्थ्य और घर की हालत के कारण वह अप्रसन्न रहे और बाद में कॉलेज छोड़कर पोरबंदर वापस चले गए। कुछ समय बाद महात्मा गांधी को पढ़ाई के लिए अलग देश भेजा गया उन्हें विदेश भेजने में उनके बड़े भाई का हाथ था। उन्होंने लंदन में वकालत की डिग्री हासिल की और फिर वहां से मुम्बई के अदालत में वकालत करने के लिए गए लेकिन उनको यह काम पसंद नहीं आया। इस प्रकार वे पेशे से वकील थे।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ साल बाद में मोहनदास और कस्तूरबा के चार सन्तान हुईं। महात्मा गांधी के बेटे का नाम हरीलाल गान्धी (1888), मणिलाल गान्धी (1892), रामदास गान्धी (1897) और देवदास गांधी (1900)।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e5. दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमोहनदास 24 साल की उम्र में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। उन्होंने वहाँ 1893 - 1914 तक रहे। वे कुछ भारतीय व्यापारियों के न्यायिक सलाहकार के तौर पर वहां गए थे। उन्होंने अपने जीवन के 21 साल दक्षिण अफ्रीका में बिताये जहाँ उनके राजनैतिक गतिविधि में भाग लिया। दक्षिण अफ्रीका में उनको गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ा। एक बार ट्रेन में प्रथम क्लास की वैध टिकट होने के बाद तीसरी श्रेणी के डिब्बे पर मजबूर किया गया उनके इन्कार करने पर ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp;ये सारी घटनाएँ उनके के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ बन गईं और मौजूदा सामाजिक और राजनैतिक अन्याय के प्रति जागरुकता का कारण बनीं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अन्याय को देखते हुए उनके मन में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाप कार्य करने का भावना उठा।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण अफ्रीका में गाँधी जी ने भारतियों को अपने खिलाप हो रहे अत्याचाल के विरोध में आवाज उड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भारतियों की नागरिकता सम्बंधित मुद्दे को दक्षिण अफ़्रीकी सरकार के सामने उठाया और सन 1906 के ज़ुलु युद्ध में भारतीयों को भर्ती करने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों को प्रेरित किया।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. गाँधी जी की विशेषताएँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गांधी की विशेषताएँ की बात की करें तो उनके विशेषता में उनका संत व्यवहार बहुत ही बड़ी विशेषता थी। मेरे हिसाब से मैने महात्मा गाँधी के जीवन के बारे में पढ़ा तो पाया की वाकई में उन्होंने अपने आप पर पूरा विजय प्राप्त कर लिया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसत्य प्रेमी - सत्यता उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है उन्होंने किसी भी प्रकार के अनर्गल बातों की ओर ध्यान नहीं दिया था। हमेशा सत्य की राह में चलने के लिए लोगों को कहते थे और खुद भी पालन करते थे ऐसा नहीं की वह सिर्फ कहते थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसहृदय - उनके मन में भी कोई कपट की भावना नहीं थी और वह किसी से भी बुरा व्यवहार नहीं किया करते थे। सभी से एक जैसे व्यवहार वे करते थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eस्वक्षता प्रेमी - महात्मा गांधी के नाम पर आज स्वच्छ भारत का अभियान चलाया जा रहा है क्योंकि वह बहुत ही ज्यादा स्वक्षता को ध्यान में रखते थे। और उन्होंने ही हरि जन की शुरुआत की थी। इस प्रकार से महात्मा गाँधी की अनेक विशेषताएँ थी जिसमें बहुत सारे का वर्णन मैने यहां पर नहीं किया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलेखक - महात्मा गांधी ने कई सारे पत्र पत्रिकाओं का भी लेखन किया और इसके माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहें। उनकी कुछ पुस्तकें इस प्रकार हैं\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e5. महात्मा गाँधी का प्रभाव\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गाँधी को पूरे भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व में जाना जाता है। उनके धन संपत्ति के कारण नहीं बल्कि उनके प्रेम व्यवहार के कारण, सत्य निष्ठा के कारण। भारत पर महात्मा गाँधी के व्यवहार के कारण वह बापू के\u0026nbsp; नाम से संबोधित किये गए और आज उन्हें हर कोई राष्ट्र पिता के नाम से जानता है। जहाँ एक तरफ महात्मागांधी के अच्छे प्रभाव हैं वहीं दूसरी ओर कई आलोचना भी उनके ऊपर देखने को मिलते हैं। ये आलोचनाएं उनके काम और सिद्धांतों को लेकर है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसे - ज़ुलु विद्रोह के संबंध में कहा जाता है कि उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था। विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों का साथ देना और उनसे डिल करना,\u0026nbsp; कि युद्ध में साथ देने के कारण देश को छोड़ने का फैसला अंग्रेजों द्वारा करना। खिलाफत आंदोलन जैसे सम्प्रदायिक आनफॉलन को राष्ट्रीय आंदोलन बनाना। अंग्रेजों के खिलाफ किये जाने वाले हिंसात्मक कार्य जो कि क्रांतिकारियों द्वारा किये जाते थे उनकी निंदा वह किया करते थे।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस प्रकार बहुत से ऐसे कारण भी हैं जिसके कारण महात्मा गांधी की निंदा हुई थी। और भी कारण हैं जिन्हें मैं नहीं लिख रहा हूँ समय के अभाव के कारण आप इसे पढ़ सकते हैं विकिपीडिया से और जान सकते हैं इससे भी और ज्यादा जानकारी पा सकते हैं। महात्मा गांधी जाती प्रथा का समर्थन समझते थे।\u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e6. उपसंहार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमहात्मा गांधी के द्वारा किये गए कार्य को इतने कम शब्दों में बता पाना बहुत ही कठिन कार्य है इसके लिए एक वाक्य में कहा जा सकता है की \" महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जो अपनी छाप पर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी छोड़ने में कामयाब रहे। \"\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदोस्तों ये निबंध मेरे द्वारा अलग अलग जगह से जानकारी जो मुझे अच्छी लगी उसे लेकर लिखा गया है आप चाहें तो इससे और भी अच्छा निबन्ध लिख सकते हैं। निबन्ध को लिखने के लिए आपको बस एक बात का ध्यान रखना है की यहाँ पर जो भी कुछ शेयर करें वह ऐसे लगना चाहिए की आपने वाकई में कहीं से इसको पढ़ा है। निबन्ध को इस प्रकार लिखें माने जीवन्त हो और आप उसके बारे में उसके सामने बता\u0026nbsp; रहें हों।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6619131217957550960"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6619131217957550960"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/12/mahatma-gandhi-essay-hindi.html","title":"महात्मा गाँधी पर निबंध - Mahatma Gandhi Essay Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-hv4TC8K5Quw/X17oQlfVF1I/AAAAAAAADm8/4McroyHuAjskT2EUn56PrG4GGGHwDMCowCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h208/20200914_091730.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3400045033639304035"},"published":{"$t":"2019-12-28T16:24:00.011+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:21:17.168+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"जल संरक्षण पर निबंध - save water essay in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  पृथ्वी का 97 प्रतिशत महासागरों और समुद्र में है जो बहुत खारा है जिसका उपयोग पीने के लिए नहीं किया जा सकता हैं। केवल तीन प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है जिसमें से 2.4 प्रतिशत ग्लेशियरों में जमा हुआ है। अब बचा केवल 0.6 प्रतिशत पानी जो नदियों, झीलों और तालाबों में है। जिसका उपयोग हम पीने और अन्य जरूरतों के लिए करते हैं। जल प्रदुषण के कारण यह भी समय के साथ कम होती जा रही हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003eजल संरक्षण पर निबंध\u0026nbsp;\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  \u003cspan\u003eहवा के बाद     पृथ्वी पर     पानी शायद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ है। पीने के अलावा पानी के अन्य फायदे     भी हैं। पानी से खाना पकाना, कपड़े धोना, सफाई करना जैसे कार्य करते हैं।     पानी पेड़-पौधों और अन्य जंगली जीवों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त जल कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अति आवश्यक है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pMKfoz79_G0/XlZKf7XaMhI/AAAAAAAAB7g/znguqu4rQckUGZKy05D3zPT1koP3nMrAwCLcBGAsYHQ/s1600/water%2Bsaving%2Bin%2Bhindi.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जल संरक्षण की विधि, जल संरक्षण के उपाय क्या है, जल संरक्षण क्या है, जल संरक्षण पर निबंध इन हिंदी, Water saving  in Hindi, जल संरक्षण पर निबंध, जल संरक्षण पर निबंध 3000 शब्दों में,\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"200\" data-original-width\u003d\"320\" height\u003d\"200\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pMKfoz79_G0/XlZKf7XaMhI/AAAAAAAAB7g/znguqu4rQckUGZKy05D3zPT1koP3nMrAwCLcBGAsYHQ/w320-h200/water%2Bsaving%2Bin%2Bhindi.jpg\" title\u003d\"जल संरक्षण की विधि, जल संरक्षण के उपाय क्या है, जल संरक्षण क्या है, जल संरक्षण पर निबंध इन हिंदी, Water saving  in Hindi, जल संरक्षण पर निबंध, जल संरक्षण पर निबंध 3000 शब्दों में,\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cspan\u003eवर्तमान में\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e\u0026nbsp;से संबंधित सबसे बड़ी समस्या पृथ्वी पर एक विशाल     जल ह्रास है। यह मुख्य रूप से विभिन्न स्थानों पर हो रहे पानी के दुरुपयोग के     कारण होता है। वर्तमान परिदृश्य में, पानी की बातचीत के फार्मूले को समझना     महत्वपूर्ण है और इस प्रकार पानी की बचत होगी। क्योंकि शुद्ध जल संसाधन हमारी     सभी आवश्यकताओं के लिए प्राथमिक स्रोत हैं। और जब यह मूल्यह्रास हो जाता है, तो     यह मानव के लिए भारी तबाही की स्थिति पैदा कर सकता है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e \u003ch3\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजल संरक्षण का अर्थ\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e  \u003cp\u003e    \u003cspan\u003eजल संरक्षण जल का सावधानी पूर्वक उपयोग करना। साफ और पिने योग्य पानी को बचा       कर रखना ही जल संरक्षण कहलाता है।\u0026nbsp;इसमें उपयोग किए गए पानी की मात्रा और       गुणवत्ता दोनों शामिल हैं। पानी सभी जीवन के पोषण के लिए आवश्यक पदार्थ है।       कृषि       उद्योग के लिए उपयुक्त जल का होना आवश्यक होता\u0026nbsp;है।\u003c/span\u003e  \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    मानव आबादी\u0026nbsp;बढ़ने के साथ, जल संसाधनों पर गंभीर तनाव पैदा हो गया है।     टंकियों और     झीलों, और     भूजल के दुरुपयोग जैसे सतही जल निकायों की लापरवाही के कारण पिने योग्य जल की     कमी हो रही है।\u0026nbsp;आगे आने वाले वर्षों में यह समस्या और बढ़ती जाएगी।\u0026nbsp;   \u003c/p\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003ch3\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e जल संरक्षण की आवश्यकता\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e  \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e \u003cp\u003e  दोस्तों आप सभी को यह तो पता होगा ही कि पृथ्वी का लगभग 75% भू-भाग में जल पाया   जाता है लेकिन मैं आपको बता दूं कि हमारे पृथ्वी पर जो पीने लायक जल की मात्रा है   वह बहुत ही कम है जिसके कारण आज जल संकट का सामना हमें करना पड़ रहा है और भविष्य   में यहां और भी गंभीर रूप ले सकता है तो इसी को देखते हुए मैंने इस पोस्ट में कुछ   अपने तरफ से पानी को या जल को किस प्रकार से बचाया जा सकता है इस बारे में बताया   है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  वर्तमान में, दुनिया में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो भूजल और खराब वर्षा के कारण पानी   की अत्यधिक कमी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में, भूजल दूषित   है या इसका अत्यधिक उपयोग किया गया है। इस प्रकार, इन कारकों से सूखे की स्थिति   पैदा होती है और इन क्षेत्रों में पानी की कमी होती है। इसके अलावा, शहरीकरण और   औद्योगीकरण ने उन समस्याओं को जोड़ा है जहां आबादी की बढ़ती मांगों को पूरा करने   के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग किया गया है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 1 में से लोगों के पास सुरक्षित पेयजल तक पहुंच   नहीं है। इसे देखते हुए, भविष्य में जल संकट अपरिहार्य प्रतीत होता है। इसके   अलावा, यह पानी के संरक्षण के लिए एक तत्काल कार्य योजना का आह्वान करता है ताकि   आज की पीढ़ियों के लिए कीमती संसाधन को बचाया जा सके। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अभी वर्तमान में हमारे लिए सिर्फ पीने के पानी की समस्या का ही सामना नहीं करना   पड़ रहा है बल्कि भू-जल का जो जल स्तर है वह लगातार नीचे जा रहा है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जिसके कारण अब कृष्ण ऋतु में पानी के किल्लत का सामना करना पड़ता है और दिल्ली   जैसे शहरों में तो पानी की इतनी ज्यादा समस्या है कि लोग खराब पानी से अपना जीवन   यापन करने में मजबूर हो जाते हैं तो इसी को ध्यान में रखते हुए   भारत सरकार भी वर्षा जल   संरक्षण और इसके अलावा जल संरक्षण के बहुत सारे कदम वहां आगे बढ़ा रहे हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजल संरक्षण का महत्व\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e \u003cp\u003e  अगर पानी के importance की बात करें तो यह हमारे जीवन के लिए अत्यंत ही   महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे शरीर का भी लगभग 75% भाग में चल पाया जाता है और   इसके बिना हमारे शरीर के जो पाचन क्रिया हैं या जो अन्य एक्टिविटी है वह संभव   नहीं है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इस प्रकार जल है तो कल है और जल ही जीवन है जैसे कथन सत्य प्रतीत होते हैं   क्योंकि हम भोजन के बिना तो कुछ समय तक रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक पल भी   नहीं रहा जा सकता है।\u0026nbsp;इस प्रकार जल का संरक्षण अत्यंत ही आवश्यक है। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e जल संरक्षण के उपाय\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e \u003cp\u003e  दोस्तों मैंने यहां पर वर्षा जल संरक्षण के कुछ टिप्स दिए हैं जो कि आपके लिए   उपयोगी हो सकते हैं - \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पानी बचाने की पहल -यह पहल पानी के संरक्षण में मदद और बढ़ावा दे सकती है। साथ   ही, यह लोगों में पानी के महत्व के बारे में जागरूकता फैला सकता है। इसके   अतिरिक्त, जल बचाओ अभियान लोगों को यह महसूस करने में मदद करता है कि ताजा और   शुद्ध पानी के स्रोत बहुत सीमित हैं। इसलिए, अगर यह अधिक उपयोग किया जाता है कि   संभावना है कि वे आबादी की बढ़ती मांगों को पूरा करने में सक्षम नहीं हो सकते   हैं। इस अभियान के माध्यम से, हम लोगों के बीच लाभों के बारे में जागरूकता पैदा   कर सकते हैं और पानी का संरक्षण कर सकते हैं और उसका उपयोग कर सकते हैं.\u003c/p\u003e \u003cdiv\u003e  \u003col\u003e    \u003cli\u003eसबसे पहले तो हमें जल का दोहन कम करना चाहिए।\u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहे हैं उसका हमें लाभ लेना       चाहिए।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      Save water save life को चरितार्थ करते हुए हमें जो वर्षा का जल है उसे       संरक्षित रखना चाहिए, बांध बनाकर।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      Water या जल का उपयोग हमें सोच समझ कर करना चाहिए और सीमित मात्रा में करना       चाहिए।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003eगांव में बहने वाले पानी को छोटे-छोटे बांध बनाकर रोकना चाहिए।\u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      इसके अलावा खेतों में भी छोटे से जल संग्रहण के लिए छोटा सा तालाब बनाना       चाहिए और इसका उपयोग हम जब पानी की कमी होगी तब कर सकते हैं।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      पानी की कमी या जल स्तर के नीचे जाने के कारण आज ग्लोबल वार्मिंग और ज्यादा       बढ़ती जा रही है बढ़ती जा रही है जिसके कारण ताप में वृद्धि होने के साथ साथ       पृथ्वी में उपस्थित पानी वाष्प बनकर ऊपर उड़ जाती है।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      घरों में उपयोग किए जाने वाले सावर को हमें धीमा वाला सावर का उपयोग करना       चाहिए ताकि पानी जल्दी ना बहे।     \u003c/li\u003e    \u003cli\u003e      शौचालय में पानी के उपयोग बाल्टी से करना चाहिए क्योंकि नल से ज्यादा पानी की       आवश्यकता पड़ती है।     \u003c/li\u003e  \u003c/ol\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003ch3\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e जल संरक्षण के लाभ\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e  \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e  \u003cp\u003e    वैसे तो जल संरक्षण के बहुत सारे लाभ हैं लेकिन मैं यहां पर सभी का जिक्र ना     करते हुए एक बात साफ करना चाहूंगा कि- अगर आज हम अगर पानी बचाते हैं तो भविष्य     में हमें जब भी किसी भी प्रकार के पानी की आवश्यकता पड़ेगी तो उसके लिए हम     निश्चिंत रहेंगे और आने वाले भविष्य में आने वाली पीढ़ी को पानी की कोई कमी     नहीं होगी और इससे हमारे पृथ्वी का जो जलस्तर है वह भी ठीक से बना रहेगा जिससे     फसलों का उत्पादन हम अच्छे से ले सकते हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    जल संरक्षण आज के ही नहीं बल्कि भविष्य के जल संकट से हमें बचा सकता है इसलिए     हर संभव हमें जल का उपयोग सोच समझ कर करना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3400045033639304035"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3400045033639304035"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/12/save-water-essay-in-hindi.html","title":"जल संरक्षण पर निबंध - save water essay in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-pMKfoz79_G0/XlZKf7XaMhI/AAAAAAAAB7g/znguqu4rQckUGZKy05D3zPT1koP3nMrAwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h200/water%2Bsaving%2Bin%2Bhindi.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4826356280098168309"},"published":{"$t":"2019-09-21T21:11:00.011+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:22:01.932+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"पर्यावरण पर निबंध - Environment essay in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eनिबंध एक लेखन प्रणाली है जिसके माध्यम से हम हमने भाव को दुसरो तक बहुचा सकते हैं। और लोगो को किसी समस्या\u0026nbsp;के बारे में जानकारी देकर\u0026nbsp;जागरूक कर सकते हैं। आज पर्यावरण से जुडी कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसका मुख्य कारण जंगल की कटाई, प्रदूषण और जनसंख्या वृद्धि हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइन समस्याओ का निराकरण मानव और अन्य जीवो के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं। आज भारत सहित कई विकाशील देशो में प्रदुषण और अंधाधुन वनो की कटाई से वातावरण में परिवर्तन देखा जा सकता हैं। जिससे तापमान में वृद्धि मानसून में परिवर्तन और समुद्र तल में वृद्धि हो रही हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयदि हम पर्यावरण शब्द का संधि विच्छेद करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है। परी और आवरण से परी का अर्थ हमारे आस पास के वातावरण से है और आवरण का अर्थ हमें घेरे हुए चारों ओर की प्राकृतिक वस्तुओं जीव जंतुओं पेड़ पौधों के द्वारा बने आवरण से है। इस प्रकार हमारे आस पास के वातावरण को पर्यावरण\u0026nbsp;कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-2oyom9OJQ74/XlZYmwlhmqI/AAAAAAAAB8Y/qZHh00BWJXkZ7IpwxAd0LP1gzVmdDB-jwCLcBGAsYHQ/s1600/environment%2Bessay%2Bin%2Bhindi.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"पर्यावरण पर निबंध - Environment essay in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"213\" data-original-width\u003d\"320\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-2oyom9OJQ74/XlZYmwlhmqI/AAAAAAAAB8Y/qZHh00BWJXkZ7IpwxAd0LP1gzVmdDB-jwCLcBGAsYHQ/w320-h213/environment%2Bessay%2Bin%2Bhindi.jpg\" title\u003d\"पर्यावरण पर निबंध - Environment essay in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eजैसे कि मैंने आपको बताया कि पर्यावरण परी और आवरण अर्थात हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें उपस्थित जीव जंतु से मिलकर बना है। पर्यावरण में मनुष्य के अलावा और भी बहुत सारे जीव जंतु पाए जाते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजो कि अपना जीवन यापन इस पृथ्वी पर करते हैं, जिनका इस पृथ्वी पर अलग अलग प्रभाव होता है। पर्यावरण में पाए जाने वाले जीव जंतु और पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण में कई प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं और इन जंतुओं के द्वारा कभी-कभी कई ऐसे चीजों का निर्माण होता है। जो कि पर्यावरण को एक नई दिशा की ओर ले जाता है। और पर्यावरण में परिवर्तन करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस प्रकार पर्यावरण दोनों प्रकार के सजीव और निर्जीव से मिलकर बना हुआ है। जिनके बिना यह आपस में अधूरे हैं सजीव के बिना निर्जीव अधूरा है और निर्जीव की बिना सजीव अधूरा है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण के प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार का होता है एक मानव निर्मित पर्यावरण और दूसरा प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eमानव निर्मित\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण इस प्रकार के पर्यावरण होते हैं, जो कि मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए गए वातावरण से निर्मित होते हैं। जैसे कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाने वाला वातावरण मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आता है। उसी क्रम में कोसा\u0026nbsp;उद्योग\u0026nbsp;के लिए तैयार किए गए वन आदि। मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्राकृतिक पर्यावरण\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति द्वारा चुने गए ही जीव और निर्जीव जीवित रह पाते हैं। जैसे कि कई हजारों साल पहले डायनासोर पाए जाते थे। लेकिन अब नहीं पाए जाते हैं क्योंकि प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इनका विनाश हो गया और वे लुप्त हो गए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण के हित को देखते हुए इसका निर्माण प्रकृति खुद करती है। जैसे कि हम खाद्य श्रृंखला की बात करें तो यहां प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत ही आएगा क्योंकि प्रकृति कभी भी पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ने देती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवहां पर्यावरण के बिगड़ने के कगार पर स्वयं परिवर्तित होकर पर्यावरण के अनुकूल प्रकृति स्वयं निर्मित करती है। इस प्रकार ऐसे पर्यावरण को\u0026nbsp;हम प्राकृतिक पर्यावरण कहते\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण के लाभ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण से होने वाले लाभ की बात करें तो यहां असीमित है क्योंकि पर्यावरण ही हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। पर्यावरण के कारण हमें खाद्य, वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं। पर्यावरण से हम बहुत से उपयोगी वस्तुएं अपने दैनिक जीवन के लिए प्राप्त कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपार्कों और संरक्षित भूमि का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वन संरक्षण से हरियाली में बढ़ोतरी होती है। पानी की गुणवत्ता और वायु गुणवत्ता में सुधार होता हैं। जैव विविधता में वृद्धि और ग्रीनहाउस गैसों में कमी जैसे लाभ होती हैं। हालांकि, इन पर्यावरणीय लाभों की बारीकियां और उनके पीछे के तंत्र अक्सर कम स्पष्ट होते हैं। इसके अलावा, पर्यावरणीय लाभों को मापना अक्सर मुश्किल होता है और उन पर उतना विचार नहीं किया जा सकता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवृक्षों को पृथ्वी का फेफड़ा कहा जाता है। वे न केवल हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि वे मनुष्यों के लिए हानिकारक कई प्रदूषकों\u0026nbsp; को साफ करते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए शुद्ध वातावरण का होना आवश्यक हैं। पेड़ पौधे वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण से हानि\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण से होने वाली हानियों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और इसके अलावा मनुष्य द्वारा निर्मित प्रदूषण के कारण भी प्राकृतिक आपदा व प्रकृति द्वारा होने वाली हानियां कह\u0026nbsp;सकते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और सुनामी प्रकृति में परिवर्तन के कारण आते हैं। अम्लीय वर्षा पर्यावरण में परिवर्तन के कारण देखने को मिलते हैं।\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;का आना प्राकृतिक है जो कि पर्यावरण के कारण उत्पन्न होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअत्यधिक मात्रा में गर्मी का बढ़ना पर्यावरण से होने वाली बहुत बड़ी समस्या है। कई मामलों में पर्यावरण में जहां पर जीवन देने योग्य है वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर यह मृत्यु का कारण भी बनती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण प्रदूषण\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण प्रदूषण कोई नई घटना नहीं है, फिर भी यह दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है। शहरीकरण, औद्योगीकरण और खनन से वैश्विक पर्यावरण प्रदूषण हो रही हैं। विकसित और विकासशील दोनों देश इस बोझ को एक साथ साझा करते हैं, हालांकि विकसित देशों में जागरूकता और सख्त कानूनों ने पर्यावरण की रक्षा करने में योगदान दिया है। प्रदूषण की ओर वैश्विक ध्यान के बावजूद, इसके गंभीर प्रभाव अभी भी महसूस किया जा रहा है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमनुष्यों और उनके भौतिक परिवेश के बीच व्यापक अध्ययन किया गया है, क्योंकि कई मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। पर्यावरण जैविक और अजैविक तत्वों का योग है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रदूषण को मनुष्यों और अन्य जीवित जीवों के लिए हानिकारक के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रदूषक हानिकारक ठोस, तरल पदार्थ या गैसें हैं जो सामान्य सांद्रता से अधिक मात्रा में उत्पन्न होती हैं जो हमारे पर्यावरण की गुणवत्ता को कम करती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहमारे युग के सबसे बड़े संकटों में से एक वायु प्रदूषण है, जो न केवल जलवायु परिवर्तन पर इसके प्रभाव के कारण है, बल्कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है। कई प्रदूषक हैं जो मनुष्यों में बीमारी के प्रमुख कारक हैं। उनमें से, पार्टिकुलेट मैटर, परिवर्तनशील लेकिन बहुत छोटे व्यास के कण, साँस के माध्यम से श्वसन प्रणाली में प्रवेश करते हैं, जिससे श्वसन और हृदय रोग, प्रजनन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की शिथिलता तथा कैंसर जैसी बीमारिया होती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण दिवस\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eविश्व पर्यावरण दिवस (WED) प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति लोगो में जागरूकता बढ़ाया जाता है। यह आयोजन पहली बार 1974 में आयोजित किया गया था। यह समुद्री प्रदूषण, मानव जनसंख्या वृद्धि,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e, स्थायी खपत और वन्यजीव अपराध जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व पर्यावरण दिवस सार्वजनिक पहुंच के लिए एक वैश्विक मंच है, जिसमें सालाना 143 से अधिक देश भाग लेते है। हर साल एक नए विषय के साथ यह कार्यकम मनाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को पड़ता है। 2021 की थीम\u0026nbsp;\u003cb\u003eपारिस्थितिकी तंत्र की बहाली\u003c/b\u003e\u0026nbsp;है और इसकी मेजबानी पाकिस्तान करेगा। इस मौके पर यूएन डिकेड ऑफ इकोसिस्टम रिस्टोरेशन का भी शुभारंभ होगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003e\u003cb\u003eConclusion\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपर्यावरण पर निबंध\u003c/b\u003e\u0026nbsp;लिखना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। इस प्रकार पर्यावरण के सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त रूप से वर्णन करना ही पर्यावरण पर निबंध को एक आकर्षक लेख बनाता है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4826356280098168309"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4826356280098168309"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/09/environment-essay-in-hindi.html","title":"पर्यावरण पर निबंध - Environment essay in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-2oyom9OJQ74/XlZYmwlhmqI/AAAAAAAAB8Y/qZHh00BWJXkZ7IpwxAd0LP1gzVmdDB-jwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/environment%2Bessay%2Bin%2Bhindi.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7463772937583617520"},"published":{"$t":"2019-09-04T21:44:00.114+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-27T19:28:27.308+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"पत्र लेखन क्या है - patra lekhan in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  पत्र लिखने की परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। प्राचीन समय में पत्र दूर रहने\n  वाले व्यक्ति तक सन्देश भेजने के लिए लिखे जाते थे। जिसे पोस्ट ऑफिस द्वारा भेजा\n  जाता था। पत्र को पहुंचने में कई दिनों का समय लगता था। आज के समय में कुछ ही पल\n  में सन्देश भेजे और प्राप्त किये जा सकते है। पत्र लेखन वर्तमान में पूरी तरह\n  डिजिटल हो गया है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहमारे दैनिक जीवन में पत्र लेखन का बड़ा महत्त्व है। पत्र दो व्यक्तियों के मध्य गहरा संपर्क सूत्र हैं। पत्र के द्वारा अल्प समय में और कम व्यय में सम्बन्ध स्थापित हो जाता हैं। एवं सम्बन्धों में प्रगाढ़ता एवं आत्मीयता आती है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eमनुष्य के प्राकृत एवं निश्छल भावों एवं विचारों का आदान-प्रदान पत्रों के द्वारा ही सम्भव है, व्यावहारिक जीवन में पत्र व्यवहार ही वह सेतु है, जो मानवीय सम्बन्धों को जोड़कर उन्हें सुदृढ़ आधार प्रदान करता है। इसी आधार पर मानव अपना सामाजिक-सामुदायिक विकास करता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः उसको दूसरों से सम्पर्क अथवा सम्बन्ध स्थापित करने व बनाये रखने के लिये लेखन की महती आवश्यकता होती है। इस प्रकार जीवन में पत्र लेखन का अपना महत्वपूर्ण स्थान है।\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपत्र लेखन क्या है\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  पत्र एक लिखित संदेश है जिसे कागज या डिजिटल डॉक्यूमेंट पर लिखा जाता है। यह\n  आमतौर पर प्राप्तकर्ता को मेल या पोस्ट के माध्यम से भेजा जाता है। हालांकि यह\n  आवश्यक नहीं होता है की कोई भी संदेश जो डाक या ईमेल के माध्यम से भेजा जाता है।\n  वह एक पत्र हो, वह दो पक्षों के बीच लिखित बातचीत भी हो सकती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अब ई-मेल संचार का आदर्श बन गया हैं। हालाँकि आज भी बहुत सारे संचार विशेषकर\n  औपचारिक संचार पत्रों के माध्यम से ही होता है। चाहे वह नौकरी के लिए कवर लेटर\n  हो, या बैंक और कॉलेज की स्वीकृति पत्र हो, पत्र अभी भी संचार का एक महत्वपूर्ण\n  माध्यम हैं। पत्र दो प्रकार के होते हैं - औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र जिसके\n  बारे में आगे विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे।\n\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"patra lekhan kya hai, पत्र लेखन किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"391\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"209\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ZgOBw2Z1IvI/X13gLShLAkI/AAAAAAAADmY/CHdEUef0Uo0SRcblLHUxCZiZyA7bbq-pwCLcBGAsYHQ/w320-h209/20200913_142952.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"patra lekhan kya hai, पत्र लेखन किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ch2\u003e\n  \u003cspan\u003eपत्र के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eपत्र दो प्रकार के होते है\n  - औपचारिक पत्र और\u0026nbsp;अनौपचारिक\u0026nbsp;पत्र।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cspan\u003e\u003cb\u003e1 . औपचारिक पत्र -\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cbr /\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  औपचारिक पत्र जिन्हें व्यावसायिक भी कहा जाता है, इस पत्र को विशिष्ट प्रारूप में\n  लिखे जाते हैं। औपचारिक पत्र स्वाभाविक रूप से अनौपचारिक पत्रों की तुलना में\n  अधिक औपचारिक शैली के होते हैं। औपचारिक पत्र कई कारणों से लिखे जा सकते हैं।\n  औपचारिक पत्र लेखन प्रारूप के लिए कुछ विशिष्ट नियमों और परंपराओं की आवश्यकता\n  होती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  सामान्य रूप से निजी कंपनियों में औपचारिक पत्र अंग्रेजी में लिखे जाते हैं।\n  लेकिन, सरकारी कंपनियों में हिंदी भाषा में लिखे औपचारिक पत्र स्वीकार किया जाता\n  हैं। स्कूलों में छात्रों को औपचारिक पत्र प्रारूप भी सिखाए जाते हैं ताकि वे\n  किसी विशेष स्थिति के लिए अपने शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को पत्र लिखने में\n  सक्षम हो सकें।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  औपचारिक पत्र उदहारण इस प्रकार हैं - बीमारी की छुट्टी का आवेदन, विवाह के लिए\n  अवकाश पत्र, इस्तीफा पत्र, नियुक्ति पत्र और शिकायत पत्र आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cspan\u003e\u003cb\u003e2 . अनौपचारिक पत्र -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cbr /\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अनौपचारिक पत्र एक गैर-आधिकारिक पत्र है जिसे हम आमतौर पर अपने दोस्तों, परिवार\n  या रिश्तेदारों को लिखने के लिए उपयोग करते हैं। इसे व्यक्तिगत पत्र भी कहा जाता\n  हैं जिनका उपयोग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अनौपचारिक पत्र में अभिवादन आमतौर पर 'प्रिय' द्वारा दर्शाया जाता है, जैसे प्रिय\n  दोस्त का नाम/रिश्तेदार का नाम। औपचारिक पत्रों के विपरीत इसमें आपको उल्लेख करने\n  की आवश्यकता नहीं है। इसे गोपनीय तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाया\n  जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपत्र लेखन का इतिहास\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  भारत, मिस्र, चीन, सुमेर, रोम और ग्रीस में आज भी पत्र संचार मौजूद हैं। इन देशो\n  में ऐतिहासिक रूप से पत्र का उपयोग सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी में आत्म शिक्षा\n  के लिए किया जाता था। पत्र एक प्रकार से विचारधारा को फैलाने का माध्यम होता था।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  यह आलोचना पढ़ने, आत्म-अभिव्यंजक लेखन और समान विचारधार के लोगों तक विचार का\n  आदान-प्रदान करने का माध्यम था। कुछ लोग इसे सन्देश भेजने तथा प्रतिक्रिया\n  प्राप्त करने का माध्यम बताते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपत्र के माध्यम से ही बाइबल के कई किताबों को बनाया गया है। पत्र कई इतिहासकारों\n  के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। यह पत्र व्यतिगत, राजनीतिक और\n  व्यवसायिक कारण से इतिहास के स्रोत बने हुए हैं। एक निश्चित समय तक लेखन के लिये\n  अकक्षरों को कला के रूप में देखा जाता था। एक शैली के रूप में पत्र लेखन को देखा\n  जाता था। उदाहरण के तौर पर आज भी बीजान्टिन एपिस्टोलोग्राफी को लिया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअगर प्राचीन इतिहास की बात करें तो पत्र के लिए विभिन्न ताम्र पत्रों और\n  शिलालेखों का उपयोग किया जाता था। तथा इसके अलाव धातु, और मोम, कांच, लकड़ी,\n  मिट्टी के बर्तन, जानवरों के खाल का भी उपयोग पत्र लिखने के किया जाता था।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eआधुनिक पत्र लेखन\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    आज बहुत सारी संचार प्रणाली\u0026nbsp; हैं। जिसके कारण पत्र लेखन बहुत कम हो गया\n    है। उदाहरण के रूप में देखें तो आजकल के संचार माध्यम टेलीफोन, मोबाइल जैसे\n    सन्देश भेजने और प्राप्त करने की समय को बहुत कम कर दिया है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    कुछ साल पहले फैक्स मशीन का दौर था। जिसमें टेलीफोन नेटवर्क का उपयोग करके\n    भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के मध्य एक माध्यम का काम किया जिसमें\n    प्राप्तकर्ता के द्वारा उसी प्रकार से हूबहू प्रिंटआउट प्राप्त हो जाता था जिसे\n    फैक्स मशीन कहा जाता था। जो की फोटो के समान होता है।\u003cbr /\u003e\u003cbr /\u003eआज विज्ञान ने\n    इतना तरक्की कर लिया है की एक ही समय में कई लोगो को सन्देश भेजा जा सकता है।\n    आज के इस आधुनिक युग ने पत्र को भले ही भुला दिया हो लेकिन उसका स्थान अपने आप\n    में सुरक्षित है। आज के समय में इंटरनेट के माध्यम से लिखित सन्देश आसानी से\n    भेजे जा सकते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जो की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं किसी भी प्रकार के सन्देश भेजने के लिए इसका\n    उपयोग किया जा सकता है। यह केवल अक्षरों या शब्दों के रूप में ही सन्देश नहीं\n    भेजता है बल्कि यह आज वीडियो और ऑडियो तथा चित्रों के रूप में भी सन्देश को एक\n    स्थान से दूसरे स्थान तक भेजता है। लेकिन आज पत्र शब्द केवल कागज पर लिखे जाने\n    वाले सन्देश के लिए सुरक्षित है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपत्र का साहित्यिक स्रोत\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eऐसे कई\n    साहित्य हैं जिन्हें पत्र से प्रेरित होकर लिखा गया है। इतिहास की जानकारी पत्रों से\u0026nbsp;प्राप्त होती है। इस प्रकार पत्र का जो शिलशिला है वह कई हजारों वर्ष\n    से चला आ रहा है।\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    पत्र सन्देश भेजने का एक माध्यम ही नहीं है बल्कि इससे कई इतिहासिक घटनाओं की\n    जानकारी भी मिलती है। कई सारे इतिहास का पता हमें शिलालेख पत्थरों के\n    माध्यम से मिली हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना की जाए तो वह पत्र लेखन से कई प्रकार से भिन्न\n    है। इसमें वह सभी सुविधाएं नहीं हैं। जो की आज के इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे\n    गए सन्देश में भेजे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआज के इस युग में सन्देश भेजने का सबसे आसान\n    तरीका इंटरनेट और फ़ोन है। ऐसे कई अप्लीकेशन हैं जिसके माध्यम से जानकारी भेजी जाती हैं। कुछ साल पहले पत्र में केवल शब्द शामिल होते थे। लेकिन आज शब्द के साथ चित्र और वीडियो भी भेजे जा सकते हैं।\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eराजा महाराजा के समय एक अलग से पत्र पहुचाने वाला होता था। जो\n    की सन्देश को एक एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाता था। जिसे राज दूत कहकर संबोधित किया जाता था।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऔपचारिक तथा अनौपचारिक पत्र में अन्तर\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eहमें अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के पत्र लिखने पड़ते हैं, कभी अपने ही स्वजनों को, तो कभी किसी कार्यालय से पत्र व्यवहार करना पड़ता है। कभी किसी वस्तु को मँगाने के लिए भी पत्र लिखा जाता है। इस प्रकार हम पत्रों को निम्नलिखित दो भागों में बाँट सकते हैं - (अ) औपचारिक पत्र, एवं (ब) अनौपचारिक पत्र।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e(अ) औपचारिक पत्र\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऔपचारिक पत्रों में मुख्य रूप से निम्न पत्र आते हैं - 1. सरकारी पत्र,2. अर्द्ध सरकारी पत्र, 3. व्यावसायिक पत्र।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eये पत्र अत्यन्त संयमित, विधिसंगत तथा स्पष्ट भाषा-शैली में लिखे जाते हैं। ऐसे पत्र लेखन में निर्धारित औपचारिकताओं का निर्वाह आवश्यक होता है। इस प्रकार के पत्रों में तकनीकी शब्दावली और अभिव्यक्ति की शैली आदि की कुछ अपनी विशिष्टताएँ होती हैं। औपचारिक पत्रों के अन्तर्गत अधिकारियों के पत्र, व्यापारिक पत्र, व्यावसायिक संगठनों के पत्र, समाचार पत्रों को लिखे के जाने वाले पत्र और अशासकीय एवं शासकीय अधिकारियों को लिखे जाने वाले प्रार्थना पत्र आते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e(ब) अनौपचारिक पत्र -\u003c/b\u003e अनौपचारिक पत्रों को दो भागों में बाँट सकते हैं - 1. सामाजिक पत्र, 2. निजी पत्र।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. सामाजिक पत्र में निम्नलिखित पत्र आते हैं\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eविविध पत्र\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबधाई पत्र\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपरिचय पत्र,\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआमन्त्रण पत्र\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशोक पत्र\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. निजी पत्र पूर्णतः व्यक्तिगत सम्बन्धों पर आधारित होते हैं । ये पत्र प्राय: परिवार के अपने सम्बन्धियों को लिखे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअनौपचारिक पत्रों से हमारा अभिप्राय निजी एवं पारिवारिक पत्रों से है। इस प्रकार के पत्रों की भाषा और शैली खुली होती है और यह व्यक्ति पर निर्भर करती है। इनमें भावों की अभिव्यक्ति खुलकर की जाती है। पत्र लिखने वाला अपनी इच्छानुसार सन्देश, आग्रह और अपने दिल की सभी बातें खुलकर प्रकट करता है। ये पत्र अपने निकटतम रिश्तेदारों, सगे-सम्बन्धियों, गुरुजनों, माता-पिता, भाई-बहिन आदि को लिखे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eऔपचारिक तथा अनौपचारिक पत्रों की लेखन प्रक्रिया में अन्तर\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऔपचारिक एवं अनौपचारिक पत्रों की लेखन प्रक्रिया में अन्तर है। अनौपचारिक पत्रों के लेखन में प्रायः वार्तालाप और आत्मीय शैली ही महत्वपूर्ण होती है और पत्र लेखन घनिष्ठता, विश्वसनीयता, निकटता, प्रगाढ़ता आदि के भावों से ओत-प्रोत होता है। इसमें व्यक्तिगत बातें प्रधान होती हैं। औपचारिक पत्र लेखन ऐसा नहीं होता । ऐसे पत्रों को लिखने के कुछ निश्चित प्रतिमान होते हैं, जिनके अभाव में ये पत्र अस्वीकार्य भी हो सकते हैं। यही कारण है कि औपचारिक पत्रों का लेखन पर्याप्त समझ-बूझ के साथ उपयुक्त तरीकों और भाषा-शैली में किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरकारी व अर्द्ध सरकारी पत्र में अन्तर\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. सरकारी पत्र प्रायः विदेशी सरकारों, राज्य सरकारों, सम्बद्ध तथा मातहत कार्यालयों, सार्वजनिक निकायों आदि को लिखे जाते हैं, जबकि अर्द्ध सरकारी पत्र प्रायः केन्द्र सरकार द्वारा अपने विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी अन्य विभाग के व्यक्ति को व्यक्तिगत ध्यान किसी विशिष्ट मामले की ओर आकृष्ट करने के लिए लिखे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. शासकीय (सरकारी) पत्रों में औपचारिकता अधिक होती है, जबकि अर्द्ध सरकारी पत्रों औपचारिकता एवं अनौपचारिकता दोनों होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. शासकीय पत्रों में भावना का स्थान जरा भी नहीं होता, जबकि अर्द्ध सरकारी पत्रों में भावना का सूक्ष्म स्थान होता है और इन पत्रों में घनिष्ठता का समावेश होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. शासकीय पत्रों के सम्बोधन में केवल 'महोदय' लिखा जाता है, जबकि अर्द्ध सरकारी पो में प्रिय, प्रियवर के साथ नाम अथवा उपनाम आदि का प्रयोग होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. शासकीय पत्र के कलेवर में 'मुझे आदेश हुआ है' या 'मुझे निर्देश हुआ है' पदावली प्रयोग किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. पत्र की समाप्ति पर स्वनिर्देश के लिए सरकारी पत्र में 'भवदीय' या 'आपका विश्वास भाजन’ लिखा जाता है, जबकि अर्द्ध सरकारी पत्र में आपका सद्भावी' या ‘आपका ही प्रयोग किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e7. सरकारी पत्र में प्रेषक अपने हस्ताक्षर व पद का उल्लेख करता है, जबकि अर्द्ध सरकारी फ में प्रेषक अधिकांशतः केवल अपने हस्ताक्षर ही करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपत्र लेखन की आवश्यकता एवं महत्व\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपत्र लेखन साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है, उसका एक महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसके अन्तर्गत हमारे दैनिक जीवन के दुःख-सुख के अनेक क्रियाकलाप, विचारों का आदान-प्रदान अत्यन स्वाभाविक ढंग से साहित्य का एक अंग बन जाते हैं । विद्यार्थी जीवन से ही इसका सहज विकास होता है, जहाँ वह अपने आत्मीय, इष्ट मित्रों एवं गुरुजनों से पत्रों एवं प्रार्थना पत्रों के माध्यम से अपने हृदयगत भावों को व्यक्त करना सीखता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएक पत्र लेखन की विशेषताएँ\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआधुनिक युग में पत्र लेखन एक कला है । सतत् अभ्यास से ही कला परिपक्व हो सकती अच्छे पत्र में निम्न विशेषताओं का होना आवश्यक है -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. सरल भाषा-शैली - पत्र की भाषा साधारणतः सरल और बोलचाल की होनी चाहिए। शब्दों के प्रयोग भाव और विषयानुकूल होने चाहिए। पत्रों की शैली रोचक, मधुर, आत्मीय और सहज हो। बातें सीधे-सरल ढंग से कही जानी चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. विचारों की स्पष्टता - पत्र में विचार सुस्पष्ट और सुलझे हुए होने चाहिए। उनका दिखावा न हो। भाषा शिष्ट व प्रिय हो। अप्रिय और अशिष्ट भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. सम्पूर्णता - पत्र में जो लिखा जाना जरूरी है, वह अवश्य लिखा जाए। लेकिन अनावश्यक, अनर्गल, उबाऊ और निरर्थक विवरण या वर्णन टालें। पत्र में सम्पूर्णता हो। बार-बार एक ही बात में को न दोहराएँ।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. संक्षिप्तता–पत्र संक्षिप्त होना चाहिए अर्थात् पत्र अधिक लम्बा नहीं होना चाहिए। पत्र में उन्हीं बातों का विवरण दें, जो आवश्यक हों।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. प्रभविष्णुता – पत्र का आरम्भ और अन्त प्राय: नम्रता, आदर, आत्मीयता, भाव प्रवणता, प्रेमाभिव्यक्ति आदि से यथोचितपूर्ण होना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e6. सुन्दर अक्षर एवं आकर्षक - पत्र में किसी भी प्रकार की काटा-पीटी नहीं होनी चाहिए। सुन्दर अक्षर और सधे हुए वाक्य, मन को प्रसन्न कर देते हैं। कागज अच्छा व साफ सुथरा हो । शीर्षक, तिथि, सम्बोधन, अभिवादन, अनुच्छेद, यथानुसार व क्रमानुसार होने चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपत्र लेखन के अंगों की विवेचना\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1. प्रेषक और लिपि - पत्र के शीर्ष स्थान पर दाहिनी ओर प्रेषक का पता एवं पत्र लेखन की तिथि का उल्लेख होना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. मूल सम्बोधन - सम्बोधन की दृष्टि से पत्र के दो वर्ग हैं- पहले वर्ग में रिश्ते-नाते के सभी लोग और व्यक्तिगत एवं पारिवारिक रूप से जाने-पहचाने व्यक्ति आते हैं। जैसे - श्रद्धेय गुरुजी, आदरणीय, माताजी, चिरंजीवी अमित, प्रिय भाई सुरेश आदि।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदूसरे वर्ग में - घनिष्ठता, श्रद्धा या स्नेह सूचक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि सेवा में, प्रति, इसके नीचे पदनाम, संस्था नाम, पता आदि लिखे जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. अभिवादन या शिष्टाचार - संबोधन की पंक्ति के अन्तिम वर्ण के नीचे नई पंक्ति प्रारम्भ करके अभिवादन या शिष्टाचार सूचक शब्द लिखे जाते हैं, जैसे- प्रणाम, नमस्ते, नमस्कार, जय हिन्द, शुभाशीष, प्रसन्न रहो आदि।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. गौण सम्बोधन - इसका प्रयोग केवल संवृद्धि के दूसरे वर्ग के साथ ही होता है जिनमें शिष्टाचार एवं अभिवादन सूचक शब्द प्रयुक्त नहीं किए जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. विषय वस्तु – पत्र के विषय को प्रारम्भ, मध्य एवं अन्त के रूप में तीन अनुच्छेदों में अथवा आवश्यकतानुसार दो या एक अनुच्छेद में व्यवस्थित करके लिखा जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7463772937583617520"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7463772937583617520"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/09/patra-lekhan-in-hindi.html","title":"पत्र लेखन क्या है - patra lekhan in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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हैं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  काल के तीन भेद है। 1\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003e. भूतकाल,\u0026nbsp; 2. भविष्य काल\u0026nbsp; 3. वर्तमान   काल,\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. भूतकाल किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eबीते हुए काल को\u0026nbsp;व्यक्त करने के लिए भूतकाल का उपयोग किया जाता है। भूत काल मतलब जो बीत गया है उसे\u0026nbsp;कहा जाता है। जैसे कि बीत हुआ कल।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eउदहारण\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eमै स्कुल जाता था।\u003c/span\u003e भूतकाल के वाक्य के अंत में अधिकतर\u0026nbsp;था, थे   थी आदि शब्द आते है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eभूतकाल के उदाहरण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eमै दिल्ली गया था।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eरम काल क्रिकेट खेल रहा था।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eहम स्कूल जाते थे।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eरविवार को हम घूमने गए थे।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमंदिर काल बंद था।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. भविष्य काल\u0026nbsp;किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभविष्य में होने वाले कार्य\u0026nbsp; व्यक्त करने के लिए भविष्य काल का प्रयोग किया जाता है। इस काल में जाऊंगा खाएंगे जीतेंगे आदि शब्द आते है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eमै काल रायपुर   जाऊंगा।\u003c/span\u003e यह भविष्य काल का उदाहरण है इसमें कोई व्यक्ति बोल रहा है कि वह काल   रायपुर जाएगा। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eभविष्य काल के उदाहरण\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eकाल मै होमवर्क करूंगा।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eराजू लांच में पूजा खाएगा।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eहम काल मेला देखने जाएंगे।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eकाल क्रिकेट मैच होगा।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eस्कूल काल बंद रहेगा।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. वर्तमान काल\u0026nbsp;किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eवर्तमान में घटित होने वाले घटना को व्यक्त करने के लिए इस काल का प्रयोग किया जाता है। इस काल का उपयोग भौतिक या वैज्ञानिक तथ्यों को भी व्यक्त करने के लिए होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eमैं पुस्तक पड़ता हूँ।\u003c/span\u003e\u0026nbsp;इस काल में\u0026nbsp;सामान्य रूप \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eहै \u003c/span\u003eऔर\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eहूं \u003c/span\u003eशब्द वाक्य के अंत में आते है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eवर्तमान काल के\u0026nbsp;उदाहरण\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eहम स्कूल जा रहे है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eरम मंदिर जा रहा है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमै खाना खा रहा हूं।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eदीदी कॉलेज जाती है।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"काल कितने प्रकार के होते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"719\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-LoJmhX4uEak/XGbbUakwfXI/AAAAAAAAAic/qfc8EUB2Ybg3ljKZ1a0qYpXSEHLABvwgACPcBGAYYCw/w320-h180/20190215_201946.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"काल कितने प्रकार के होते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7670644477018240351"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7670644477018240351"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/02/tense-in-hindi.html","title":"काल कितने प्रकार के होते हैं - tense in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-LoJmhX4uEak/XGbbUakwfXI/AAAAAAAAAic/qfc8EUB2Ybg3ljKZ1a0qYpXSEHLABvwgACPcBGAYYCw/s72-w320-c-h180/20190215_201946.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8612944345924748746"},"published":{"$t":"2019-02-04T21:20:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:24:58.008+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"संज्ञा की परिभाषा उदाहरण सहित - sangya ki paribhasha"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  नमस्कार दोस्तों हिंदी व्याकरण में संज्ञा के बारे में आज बताने वाला हुं की\n  संज्ञा क्या है और प्रकार कितने है। ये विषय हिंदी में बहुत महत्व रखता हैं।\n  संज्ञा के ज्ञान से हिंदी वाक्य को समझने में आसानी होती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  संज्ञा के बिना वाक्यों का निर्माण मुश्किल होता हैं। संज्ञा वाक्य का आधार होता\n  हैं। और किसी भी भाषा में संज्ञा का ज्ञान आपका उस भाषा में पकड़ को दर्शाता\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv\u003e\n  \u003ctable\u003e\n    \u003cthead\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003cth\u003eअनुक्रम\u003c/th\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n    \u003c/thead\u003e\n    \u003ctbody\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#1\"\u003eसंज्ञा किसे कहते हैं\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#2\"\u003eसंज्ञा की परिभाषा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#3\"\u003eसंज्ञा के भेद कितने होते हैं\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#4\"\u003eव्यक्तिवाचक संज्ञा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#5\"\u003eजातिवाचक संज्ञा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#6\"\u003eभाववाचक संज्ञा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#7\"\u003eसमूहवाचक संज्ञा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#8\"\u003eद्रव्यवाचक संज्ञा\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n    \u003c/tbody\u003e\n  \u003c/table\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003ch2 id\u003d\"1\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसंज्ञा किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  किसी भी व्यक्ति वस्तु या स्थान के नाम को संज्ञा कहते है। जैसे राम, घर, दिल्ली\n  ,मनुष्य, विद्यालय, कक्षा, देश, हिमालय आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  एक वाक्य में, संज्ञाएं, प्रत्यक्ष वस्तु, अप्रत्यक्ष वस्तु, विषय पूरक, वस्तु\n  पूरक, आश्रित या विशेषण की भूमिका निभा सकती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003cimg\n    alt\u003d\"sangya ke prakar, sangya ke bhed, sangya ke kitne bhed hote hain, sangya kise kahte hai, संज्ञा का अर्थ क्या है संज्ञा के कितने भेद होते हैं संज्ञा के पांच प्रकार के होते हैं संज्ञा कितने प्रकार के होते हैं संज्ञा की परिभाषा संज्ञा किसे कहते हैं उदाहरण सहित संज्ञा शब्द किसे कहते हैं\"\n    border\u003d\"0\"\n    data-original-height\u003d\"400\"\n    data-original-width\u003d\"600\"\n    height\u003d\"213\"\n    src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-EmXMSnqSB88/YC29O4q1JbI/AAAAAAAAEio/JR47FgxRqkUAomk48YNaRCPYJ0uYstGLQCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210218_062915.webp\"\n    title\u003d\"sangya ke prakar, sangya ke bhed, sangya ke kitne bhed hote hain, sangya kise kahte hai, संज्ञा का अर्थ क्या है संज्ञा के कितने भेद होते हैं संज्ञा के पांच प्रकार के होते हैं संज्ञा कितने प्रकार के होते हैं संज्ञा की परिभाषा संज्ञा किसे कहते हैं उदाहरण सहित संज्ञा शब्द किसे कहते हैं\"\n    width\u003d\"320\"\n  /\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसंज्ञा की परिभाषा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  व्यक्ति, वस्तु, जाती, भाव, स्थान समूह, पदार्थ के नाम को संज्ञा कहा जाता है।\n  अर्थात् नाम ही संज्ञा है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eउदाहरण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  1.\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eराजेश \u003c/span\u003eएक विद्यार्थी है।\u003cbr /\u003e2.\n  \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eविद्यार्थी \u003c/span\u003eपड़ रहे हैं।\u003cbr /\u003e3.मेरे मामा ने\n  मुझे \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eसोने \u003c/span\u003eकि हार उपहार दी।\u003cbr /\u003e4.आज मैं बहुत\n  \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eखुश \u003c/span\u003eहूं।\u003cbr /\u003e5.आज देश की\n  \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eसेना \u003c/span\u003e ने विजय प्राप्त की।\n\u003c/div\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    6.पुल पार करते समय \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eलड़का \u003c/span\u003eऔर\n    \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eलड़की \u003c/span\u003eहाथ पकड़े हुए थे।\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    7.मुझे अपनी \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eबिल्ली \u003c/span\u003eको गुलाबी धागे से खेलते\n    देखना अच्छा लगता है।\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    8.बारिश हो रही है हर कोई, अपना \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eछाता \u003c/span\u003eऔर\n    बारिश की टोपी पकड़ो और बाहर निकलो।\u0026nbsp;\n  \u003c/div\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसंज्ञा के भेद कितने होते हैं\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp id\u003d\"4\"\u003e\n    \u003cb\u003e1. व्यक्तिवाचक संज्ञा \u003c/b\u003e- इसमें किसी एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान के लिये\n    जिस नाम का प्रयोग किया जाता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cli\u003e\n        व्यक्ति का नाम- रवीना, सीमा, सोनिया गाँधी, श्याम, हरि, सुरेश, सचिन आदि।\n      \u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003eवस्तु का नाम- घर, कार, टाटा चाय, कुरान, गीता, रामायण आदि।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003eस्थान का नाम- ताजमहल, कुतुबमीनार, जयपुर आदि।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003eदिशाओं के नाम- उत्तर, पश्चिम, दक्षिण, पूर्व।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003eदेशों के नाम- भारत, जापान, अमेरिका, पाकिस्तान, बर्मा।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003eराष्ट्रीय जातियों के नाम- भारतीय, रूसी, अमेरिकी।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e\n        समुद्र के नाम- काला सागर, भू मध्य सागर, हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर।\n      \u003c/li\u003e\n    \u003c/ul\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp id\u003d\"5\"\u003e\n    \u003cb\u003e2. जातिवाचक संज्ञा\u003c/b\u003e - जिस संज्ञा शब्द में किसी व्यक्ति,वस्तु, अथवा\n    किसी स्थान की संपूर्ण जाति का बोध हो, तो उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे\n    - मनुष्य, ,पर्वत, मोटर साइकिल, कार, टीवी, पहाड़, तालाब,\u0026nbsp; पशु, पक्षी,\n    लड़का, घोड़ा, बकरी, गाँव, शहर आदि\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cli\u003e'लड़का' से राजेश, सतीश, दिनेश आदि सभी 'लड़कों का बोध होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e'पशु-पक्षियों' से गाय, घोड़ा, कुत्ता आदि सभी जाति का बोध होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e'वस्तु' से मकान कुर्सी, पुस्तक, कलम आदि का बोध होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e'नदी' से गंगा यमुना, कावेरी आदि सभी नदियों का बोध होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e'मनुष्य' कहने से संसार की मनुष्य-जाति का बोध होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e'पहाड़' कहने से संसार के सभी पहाड़ों का बोध होता हैं।\u003c/li\u003e\n    \u003c/ul\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp id\u003d\"6\"\u003e\n    \u003cb\u003e3. भाववाचक संज्ञा \u003c/b\u003e- जिस संज्ञा शब्द से किसी के गुण, दोष, या दशा,\n    स्वभाव, भाव आदि का बोध हो, वहाँ भाव वाचक संज्ञा होता हैं।\u0026nbsp; अथार्त जिस\n    शब्द से किसी मनुष्य की दशा या भाव, आदि का पता चलता है। वह पर भाव वाचक संज्ञा\n    होता है\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003eउदाहरण :- गर्मी, घृणा, दुःख , सुख, प्यार, क्रोध आदि।\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003eहमें मामले की \u003cb\u003eसच्चाई \u003c/b\u003eका पता लगाना होगा।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eश्याम \u003cb\u003eगपशप \u003c/b\u003eकरने वाला व्यक्ति नहीं है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eलोगों का बैंकों से \u003cb\u003eविश्वास \u003c/b\u003eउठ गया है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवह उन्हें \u003cb\u003eहरा \u003c/b\u003eदेगी।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eउसकी सफलता की खबर से मुझे \u003cb\u003eखुशी \u003c/b\u003eहुई।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवे मेरे \u003cb\u003eविचार \u003c/b\u003eपर हँसे।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eसोहन को \u003cb\u003eडर \u003c/b\u003eथा कि वह नीचे गिर जाएगा।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eउसने अपने \u003cb\u003eगुस्से \u003c/b\u003eको नियंत्रित करने की कोशिश की।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eअपनी खुद की \u003cb\u003eताकत \u003c/b\u003eको कम मत समझो।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eसभी में \u003cb\u003eअच्छाई \u003c/b\u003eऔर \u003cb\u003eबुराई \u003c/b\u003eदोनों होती है।\u003c/li\u003e\n  \u003c/ul\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp id\u003d\"7\"\u003e\n    \u003cb\u003e4. समूहवाचक संज्ञा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eजो संज्ञा शब्द किसी समूह या समुदाय को\n    दर्शाता है उसे समूह वाचक संज्ञा कहते है। अथार्त जो शब्द किसी विशिष्ट या एक\n    ही वस्तुओं के समूह, वर्ग जाति को दर्शाता है वहाँ पर समूहवाचक संज्ञा होता\n    है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003eउदहारण :- लकड़ी का गट्ठर , विद्यार्थियों का समूह , भीड़ , सेना आदि।\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003e\n      हमारी \u003cb\u003eकक्षा \u003c/b\u003eने प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय की एक क्षेत्रीय यात्रा\n      की।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eपक्षियों का \u003cb\u003eझुंड \u003c/b\u003eआकाश में उड़ रहे है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eहम \u003cb\u003eजूरी \u003c/b\u003eके फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      इस साल की बास्केटबॉल \u003cb\u003eटीम \u003c/b\u003eमें तीन खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी लंबाई छह\n      फीट से अधिक है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eनेपोलियन की \u003cb\u003eसेना\u003c/b\u003e अंततः वाटरलू में पराजित हुई।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      वह एक विशाल \u003cb\u003eपरिवार \u003c/b\u003eसे आता है: वह ग्यारह बच्चों में सबसे बड़ा है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eरॉक \u003cb\u003eग्रुप \u003c/b\u003eमहीनों से दौरे पर है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eएल्विस के मंच पर आते ही \u003cb\u003eदर्शकों \u003c/b\u003eने जोर-जोर से तालियां बजाईं।\u003c/li\u003e\n  \u003c/ul\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp id\u003d\"8\"\u003e\n    \u003cb\u003e5. द्रव्यवाचक संज्ञा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eजो शब्द किसी ठोस, पदार्थ, धातु, या द्रव्य\n    का बोध करता हैं, उसे पदार्थ वाचक संज्ञा कहते हैं। द्रव्यवाचक संज्ञाओ\n    को\u0026nbsp; नापी या तोली जाती है। ये अगणनीय होती हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    उदहारण :- कोयला, पानी, तेल, मग्नीज, सोना, चांदी, हीरा, चीनी, फल, आदि\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003eमेरी अलमारी में क्रिकेट का \u003cb\u003eबल्ला \u003c/b\u003eहै।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eबल्ला एक पेड़ के लकड़ी का बना होता है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eमेरे भाई के पास मोबाइल \u003cb\u003eफोन \u003c/b\u003eहै।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eफोन \u003cb\u003eप्लास्टिक \u003c/b\u003eऔर \u003cb\u003eमेटल \u003c/b\u003eसे बना है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eमुझे केक के लिए थोड़ा \u003cb\u003eपानी \u003c/b\u003eचाहिए।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eजग \u003cb\u003eमेज \u003c/b\u003eपर है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवहां पर एक \u003cb\u003eकलम \u003c/b\u003eऔर एक डायरी भी है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eकलम की \u003cb\u003eस्याही \u003c/b\u003eखत्म हो गई है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eआपकी शर्ट का \u003cb\u003eबटन \u003c/b\u003eछोटा है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eयह अंगूठी \u003cb\u003eसोने \u003c/b\u003eऔर \u003cb\u003eहीरे\u003c/b\u003e से बनी है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eइस दीवार पर \u003cb\u003eईंटें \u003c/b\u003eढीली हैं।\u003c/li\u003e\n  \u003c/ul\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8612944345924748746"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8612944345924748746"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/02/sangya-ki-paribhasha.html","title":"संज्ञा की परिभाषा उदाहरण सहित - sangya ki paribhasha"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-EmXMSnqSB88/YC29O4q1JbI/AAAAAAAAEio/JR47FgxRqkUAomk48YNaRCPYJ0uYstGLQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210218_062915.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8941848296087587328"},"published":{"$t":"2019-01-28T03:44:00.006+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:24:40.046+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"रस कितने प्रकार के होते हैं - ras ke prakar "},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e रस \u003c/b\u003eकाव्य की आत्मा कहलाती\u0026nbsp;है। जिस प्रकार शरीर का महत्व आत्मा के\n  बिना कुछ नहीं है। उसी प्रकार बिना रस के कोई भी काव्य अधूरा होता\u0026nbsp;है।\n  अर्थात शब्द को हम\u0026nbsp;शरीर मान सकते\u0026nbsp;है और रस को आत्मा।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch2\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eरस किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e रस का शाब्दिक अर्थ\u003c/b\u003e\n  \u003ci\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003eआनंद\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/i\u003eहोता है। काव्य को पढ़ने\u0026nbsp;से हमें जो\u0026nbsp;आनंद की अनुभूति होती है। उसे रस\n  कहते है। रस\u0026nbsp;काव्य का\u0026nbsp;मूल तत्व या उसका\u0026nbsp;प्राण होता\u0026nbsp;है। जिसके\n  बिना काव्य मात्र एक\u0026nbsp;पद्य बनकर रह जाता है। रस किसी भी उत्तम काव्य का\n  अनिवार्य गुण है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eरस कितने प्रकार के होते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cdiv\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eरस के दस प्रकार होते है\u0026nbsp;\u003c/b\u003eजो निम्नलिखित है - यहाँ पर रस के नाम और\n    उनका स्थायी भाव दिया गया है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003eशृंगार रस - रती\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eहास्य रस - हास\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eशान्त रस - निर्वेद\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eकरुण रस - शोक\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eरौद्र रस - क्रोध\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवीर रस - उत्साह\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eअद्भुत रस - आश्चर्य\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवीभत्स रस - घृणा\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eभयानक रस - भय\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eवात्सल्य रस - स्नेह\u003c/li\u003e\n  \u003c/ol\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e1. शृंगार रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    सहृदय के ह्रदय में स्थित रति नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और संचारी भाव\n    के साथ संयोग होता है, उसे श्रृंगार रस कहते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003eउदाहरण:\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय।\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eसौंह करै, भौंहनी हंसे, दैन कहैं नटी जाए।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e2. राम के रूप निहारति जानकी, कंगन के नग की परछाई।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eयातै सबै सुधि भूलि गई, कर टेकि रही, पल टारत नाही।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e3. कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eभरे भौन में करत हैं, नैनन ही सौं बात।।\u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eशृंगार रस दो प्रकार के होते हैं।\u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003col\u003e\n      \u003cli\u003e\n        \u003cb\u003eसंयोग श्रृंगार\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जहां पर नायक नायिका के संयोग या मिलन का वर्णन\n        हो वहां संयोग श्रृंगार होता है।\u003c/li\u003e\n      \u003cli\u003e\n        \u003cb\u003eवियोग श्रृंगार\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जहां पर नायक नायिका के वियोग का वर्णन हो वहां\n        वियोग श्रृंगार होता है।\u0026nbsp;\n      \u003c/li\u003e\n    \u003c/ol\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e2. हास्य रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    सहृदय के हृदय में स्थाई हास नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और संचारी भाव\n    से संयोग होता है। उसे हास्य रस कहते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. महावीर हूं, पापड़ को तोड़ सकता हूँ।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eअवसर आ जाए तो, कागज को मरोड़ सकता हूँ।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e2. कहा बंदरिया ने बंदर से, चलो नहाए गंगा।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eबच्चों को छोड़ेंगे घर में, होने दो हुड़दंगा।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e3. काना ते कानो मत कहे, कानो जायगो रूठ।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eहोले-लोहे पूछ ले, तेरी कैसे गई है फूट।।\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n    \u003cimg alt\u003d\"रस के कितने प्रकार होते हैं, रस किसे कहते हैं ras ke prakar\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-7DOZF-q41KE/X32E95wp8zI/AAAAAAAAEOw/hceNcYE3wa09FLpKoJ4FMmTzj8UVwRZyQCPcBGAYYCw/w320-h213/20201007_140758.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"रस के कितने प्रकार होते हैं - रस किसे कहते हैं ras ke prakar\" width\u003d\"320\" /\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e3. करुण रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित अशोक नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है उसे करुण रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. सब बंधुन को सोच तजि, तजि गुरुकुल को नेह।\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eहा सुशील सूत! किमी कियो अनंत लोक में गेह।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e2. अभी तो मुकुट बंधा था माथ, हुए कल ही हल्दी के हाथ।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eखुले भी न थे लाज के बोल, खिले भी न चुंबन शून्य कपोल।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eहाय! रुक गया यहीं संसार, बना सिंदूर अंगार।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e3. शोक विकल सब रोवहिं रानी, रूप सीतु बल तेज बखानी।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eकरहिं विलाप अनेक प्रकाश, परहिं भूमि तल बारहिं बारा।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e4. वीर रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित उत्साह नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है, उसे वीर रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. द्वार बलि का खोल, चल, भूडोल कर दें।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eएक हिम-गिरि एक सिर का मोल कर दें।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. बुंदेले हर बोलों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eखूब लड़ी मर्दानी वह तो, झाँसी वाली रानी थी।\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e3. मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eयमराज से युद्ध में, प्रस्तुत सदा जानों मुझे।।\u003cbr /\u003eहे सारथे! है द्रोण क्या? आवे स्वयं देवेंद्र भी।\u003cbr /\u003eवे भी न जीतेंगे समर में, आज क्या मुझसे कभी।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e5. रौद्र रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित क्रोध नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और\n    संचारी भाव से संयोग होता है उसे रौद्र रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. रे बालक ! कालवस बोलत, रोही न संभार ।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eधनुहि सम त्रिपुरारि धनु , विदित सकल संसार।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e2. श्री कृष्ण के सुन वचन, अर्जुन क्रोध से जलने लगे।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eसब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगे।।\u003cbr /\u003eसंसार देखे अब हमारे शत्रु , रण में मृत पड़े।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eकरते हुए यह घोषणा, वे हो गए उठकर खड़े।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e6. भयानक रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित बैनामा की स्थाई भाव का जब भी भाव अनुभव और\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है उसे भयानक रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. नभ ते झपटत बाज लखि, भूल्यो सकल प्रपंच।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eकंपित तन व्याकुल नयन, लावक हिल्यो न रंच।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालों सी।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eचली आ रही फेन उगलती, फन फैलाये व्यालों सी।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e7. अद्भुत रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित आश्चर्य नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है उसे अद्भुत रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग ।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eसिगरी लंका जर गई गए निशाचर भाग।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. अखिल भुवन चर-अचर सब, हरि-मुख में लखि मातु।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eचकित भई गदगद वचन, विकसित दृग पुलकातु।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e8. विभक्त रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित जुगुप्सा याद रहना नामक स्थाई भाव का जब विभाव\n    अनुभव और संचारी भाव के साथ संयोग होता है उसे वीभत्स रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eसीस तोरि सीसन्हसन मारहिं।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. जे नर माछी खात है, मूड़ी पूँछ समेत।\u003cbr /\u003eते नर सरगै जात है, नाती पूत समेत।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e9. शांत रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003eसहृदय के हृदय में स्थित निर्वेद नामक स्थाई भाव का जब विभाव अनुभाव\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है तो उसे शांत रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. पानी केरा बुदबुदा अस मानुस की जात।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eदेखत ही छिप जाएगा ज्यों तारा परभात।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. कोऊ कोटिक संग्रहौ, कोऊ लाख-हजार।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eमो संपत्ति जदुपति सदा, बिपति विदारन हार।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cbr /\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cb\u003e10. वात्सल्य रस\u003c/b\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    सहृदय के हृदय में स्थित वात्सल्य नामा के स्थाई भाव का जब विभाव अनुभव और\n    संचारी भाव के साथ संयोग होता है उसे वात्सल्य रस कहते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv\u003e1. धूलि भरे अति शोहित स्याम जू , तैसी बनी सर सुन्दर चोटी ।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003eकाग के भाग बड़े सजनी , हरी हाथ से ले गयो माखन रोटी।।\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2. कबहुँ ससि माँगत आरि करै, कबहुँ प्रतिबिम्ब निहारि डरै।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eकबहुँ करताल बजाय कै नाचत, मातु सबै मन मोद भरै।।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ch3\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eरस की परिभाषा क्या है\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  काव्य के आस्वाद से जो अनिर्वचनीय आनंद प्राप्त होता है , उसे रस कहते है। या\n  काव्य के पठन अथवा श्रवण में जो अलौकिक आनन्द प्राप्त होता है। वही काव्य रस\n  कहलाता है। रस से जिस भाव की अनुभूति होती है वह रस का स्थायी भाव होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  सामान्य भाषा में बोलू तो\u0026nbsp;कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक आदि पढ़ने सुनने से\n  हमें\u0026nbsp;जो आनन्द खुसी दुःख प्रेम आदि भाव\u0026nbsp;की अनुभूति होती है।\u0026nbsp;उसे\n  रस कहते हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003eविलक्षण आंनद\u0026nbsp;और अनिर्वचनीय आनंद\u0026nbsp;क्या है\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  विलक्षण जिज्ञासा उतपन्न करने वाला होता है। रस किसी काव्य का वह अंग है जो आपके\n  अंदर जिज्ञासा या जानने की इक्षा को उतपन्न कर देता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अनिर्वचनीय आनंद\u0026nbsp;जिसको वाणी से नहीं कहा जा सकता वह अनिर्वचनीय आनंद होता\n  है। रस के प्रयोग के कारण इस आनन्द का अनुभव होता है। कई बार हम अपने भाव को\n  शब्दो से बया नहीं कर पते है। बस महसूस करते है। वही अनिर्वचनीय आनंद होता\n  है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eइसके सन्दर्भ में\u0026nbsp; -\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  काव्य के पठन, श्रवण से\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eदर्शक का जब हर लेता मन।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eअलौकिक\n  आनन्द से जब हो जाये\u0026nbsp;तन्मय मन,\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eमन का यह रूप काव्य में रस\n  कहलाये।\u0026nbsp;\n\u003c/div\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ch3\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eरस के अंग कितने होते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eरास के चार अंग होते है जो निम्नलिखित है -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eविभाव\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअनुभाव\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसंचारी भाव\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eस्थायी भाव\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e1. विभाव का अर्थ क्या है -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;स्थायी भाव के होने के कारण को विभाव\n  कहते है।\u0026nbsp;जब कोई व्यक्ति अन्य व्यक्ति के ह्रदय के भावों को जगाता हैं।\n  तो\u0026nbsp;उन्हें विभाव कहते हैं। विशेष रूप से भावों को प्रकट करने वाले\n  तत्व\u0026nbsp;को विभाव कहते हैं। सौंदर्य भी इस रस के जगृत होने के\u0026nbsp;कारण हो\n  सकते\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  इसके दो प्रकार होते है - आलंबन विभाव और उद्दीपन विभाव।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e2. अनुभाव का शाब्दिक अर्थ है\u003c/b\u003e - वाणी और अंगों के अभिनय द्वारा अर्थ प्रकट\n  हो वह\u0026nbsp;अनुभाव होता हैं। अनुभवों की कोई संख्या निश्चित नहीं होती है। लेकिन\n  पठान की दृस्टि से इसे\u0026nbsp;आठ बताया गया है। अनुभाव सरल और सात्विक रूप में आते\n  हैं उन्हें सात्विक भाव कहते हैं। ये अनायास सहज रूप से प्रकट होते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eइनकी संख्या आठ होती है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eस्तम्भ\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eस्वेद\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eरोमांच\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eस्वरभंग\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकंप\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eविवर्णता\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअश्रु\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eप्रलय।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e3. संचारी भाव की परिभाषा\u003c/b\u003e - जो भाव सहृदय के ह्रदय में अस्थायी रूप से\n  विधमान होते है, उन्हें संचारी भाव कहते है। जो स्थानीय भावों के साथ संचरण करते\n  हैं वे संचारी भावहोते\u0026nbsp;हैं। इससे स्थिति और भाव की पुष्टि होती है। एक\n  संचारी किसी स्थायी भाव के साथ नहीं रहता है इसलिए इसे व्यभिचारी भाव भी कहते\n  हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003ci\u003eNote - संचारी भाव की संख्या 33 होती है।\u003c/i\u003e\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e4. स्थाई भाव किसे कहते हैं -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसहृदय के ह्रदय में जो भाव स्थायी रूप\n  से विधमान होते है, उसे स्थायी भाव कहते है। किसी मनुष्य के हृदय में कोई भी भाव\n  स्थाई रूप से निवास करती है वही\u0026nbsp;स्थाई भाव होते है यह चाद भर के लिए न रहकर\n  स्थाई रूप से रहता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cb\u003eप्रश्न उत्तर\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रश्न 1. रस की परिभाषा लिखिए।\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - परिभाषा - रस काव्य की आत्मा है। काव्य के आस्वाद से जो अनिर्वचनीय आनंद\n  की अनुभूति होती है उसे रस कहते हैं, अर्थात कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक आदि\n  देखने, पढ़ने और सुनने में विलक्षण आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते\n  हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\"रसात्मकं वाक्यं काव्यं\" - रसमय वाक्य ही काव्य है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003e\u003cb\u003eप्रश्न 2. रस के प्रमुख अंग कौन-कौन से हैं?\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउत्तर - रस के प्रमुख अंग चार हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col\u003e\n  \u003cli\u003eस्थायी भाव\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसंचारी भाव\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअनुभव\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eविभव\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रश्न 3. स्थायी भाव किसे कहते हैं?\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - स्थायी भाव ऐसे भाव जो मानव मन में सुप्तावस्था में पाये जाते हैं।\n  अनुकूल वातावरण पाकर जाग्रत हो उठते हैं, ऐसे भावों को स्थायी भाव कहते हैं।\n  प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है। इनकी संख्या दस है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eश्रृंगार रस - रति\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eहास्य रस - हास\u003c/li\u003e\u003cli\u003eरौद्र रस - क्रोध\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभयानक रस - भय\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवीर रस - उत्साह\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअद्भूत रस - आश्चर्य\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकरुण रस - शोक\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवीभत्स रस - घृणा\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eशांत रस - निर्वेद, वैराग्य\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eवात्सल्य रस - स्नेह\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रश्न 4. विभाव किसे कहते हैं?\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - स्थायी भाव जिन कारणों से उत्पन्न होते हैं, उन्हें विभाव कहते हैं। जैसे\n  - घृणा करना, काँपना आदि।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003e\u003cb\u003eप्रश्न 5. अनुभाव किसे कहते हैं?\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - आश्रय की बाहरी चेष्टाओं को अनुभाव कहते हैं। जैसे - चीखना, भागने की\n  चेष्टा करना आदि।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रश्न 6. संचारी भाव किसे कहते हैं?\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - संचारी भाव - मानव के मन में जल्दी-जल्दी उत्पन्न होने वाले अस्थिर\n  मनोविकारों को संचारी भाव कहते हैं। एक रस के एक से अधिक स्थायी भाव हो सकते हैं।\n  इनकी संख्या तैंतीस है। जैसे - शंका, मोह, गर्व, हर्ष, चिंता, ग्लानि, आलस्य\n  आदि।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003e\u003cb\u003eप्रश्न 7. स्थायी भाव और संचारी भाव में क्या अंतर है?\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउत्तर - स्थायी भाव और संचारी भाव में अंतर् -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col\u003e\n  \u003cli\u003e\n    स्थायी भाव उत्पन्न होकर शीघ्र नष्ट नहीं होते, किन्तु संचारी भाव पानी के\n    बुलबुले की तरह क्षण-क्षण में बनते बिगड़ते रहते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है, किन्तु एक ही रस से अनेक संचारी भाव हो\n    सकते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    स्थायी भावों की तुलना सरोवर में स्थित जल के साथ की जाती है, संचारी भावों की\n    तुलना पानी में उठने वाली लहरों के साथ की जा सकती है।\u0026nbsp;\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    संचारी भाव, स्थायी भाव को पुष्टि करने में सहायक होते हैं, स्थायी भाव इसकी\n    पूर्ण अवस्था है।\u0026nbsp;\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eस्थायी भावों की संख्या 10 है। संचारी भावों की संख्या 33 है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रश्न 8. रस निष्पत्ति कैसे होती है?\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तर - सहृदय के ह्रदय में स्थित स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव तथा संचारी\n  भावों के साथ संयोग होता है। तब रस की निष्पत्ति होती है।\u003c/p\u003e\n\u003cdiv\u003e\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8941848296087587328"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8941848296087587328"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/01/ras-ke-prakar.html","title":"रस कितने प्रकार के होते हैं - ras ke prakar "}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-7DOZF-q41KE/X32E95wp8zI/AAAAAAAAEOw/hceNcYE3wa09FLpKoJ4FMmTzj8UVwRZyQCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h213/20201007_140758.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3705750713768522370"},"published":{"$t":"2019-01-27T23:20:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:24:19.572+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"दोहा की परिभाषा - दोहा किसे कहते हैं "},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-HtSSLRYPlW0/XlUncbmlYpI/AAAAAAAAB6o/fmuEu_tQkVw99-dH0ynY4MB-moFmrMVfgCLcBGAsYHQ/s1600/doha%2Bki%2Bparibhasha.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"doha ki paribhasha what is doha in hindi doha kise kahate hain doha in hindi दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित दोहे किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"179\" data-original-width\u003d\"320\" height\u003d\"179\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-HtSSLRYPlW0/XlUncbmlYpI/AAAAAAAAB6o/fmuEu_tQkVw99-dH0ynY4MB-moFmrMVfgCLcBGAsYHQ/w320-h179/doha%2Bki%2Bparibhasha.jpg\" title\u003d\"doha ki paribhasha what is doha in hindi doha kise kahate hain doha in hindi दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित दोहे किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआज मैं आप लोगो को हिंदी जनरल का फोर्थ पार्ट में Doha ki paribhasha के बारे में बताने वाला हूं तो इस ब्लॉग को पूरा पढ़िए अगर आप 10 वी या 12वी में\u0026nbsp; है तो आप के लिए यह ब्लॉग बहुत फायदे का हो सकता है।\u003c/p\u003e    \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e       \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदोहा की परिभाषा क्या है ?\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003eदोहा\u003c/b\u003e एक मात्रिक छंद      है जिसके प्रथम और तृतीय चरण में 13,13 मात्राएं होती है। और दूसरे और अंतिम       चरण में 11,11 मात्राएं होती है। इसमें 24 ,24 मात्रा की दो पंक्तियां होती       है।     \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eप्रसिद्ध दोहाकार कबीर दास, मीराबाई, रहीम, तुलसीदास और सूरदास हैं। सबसे लोकप्रिय तुलसीदास की रामचरितमानस है। जिसे दोहा में लिखा गया है, जो संस्कृत महाकाव्य रामायण का प्रतिपादन है।  \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003e दोहा को कैसे पहचाने \u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      दोहा में 24,24 मात्रा की दो पंक्ति होती है तथा अंतिम में एक गुरु और       ( ऽ की तरह ) एक लघु (। की तरह ) होता है।     \u003c/p\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\" style\u003d\"font-size: large; text-align: center;\"\u003eदोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e      \u003ca href\u003d\"https://3.bp.blogspot.com/-TPGgcVvFXxU/XE36lQuGNnI/AAAAAAAAAaM/mojZzdkjtfshWmNEVkfnRaBOCZqJZ2OWgCEwYBhgL/s1600/20190128_000621.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"Doha ki paribhasha Bura jo dekhan main chala doha ka udaharan dohe in hindi example kabir ke dohe in hindi dohe class 9 hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"900\" data-original-width\u003d\"1600\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://3.bp.blogspot.com/-TPGgcVvFXxU/XE36lQuGNnI/AAAAAAAAAaM/mojZzdkjtfshWmNEVkfnRaBOCZqJZ2OWgCEwYBhgL/w320-h180/20190128_000621.jpg\" title\u003d\"Doha ki paribhasha Bura jo dekhan main chala doha ka udaharan dohe in hindi example kabir ke dohe in hindi dohe class 9 hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cp style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e      \u003cbr /\u003e\u003cb\u003e बुरा जो देखन मैं चला , बुरा न मिलिया कोय। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e        जो दिल खोजा अपना , मुझसे बुरा न कोय\u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/p\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e        अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला।         जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं         है।       \u003c/p\u003e      \u003cdiv style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e        \u003cbr /\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--mobile article--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1422942514\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" 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hai\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e      \u003c/div\u003e          \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e        \u003cb\u003e पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ , पंडित भय न कोय। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e ढाई आखर प्रेम का , पढ़े सो पंडित होय॥\u003c/b\u003e      \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"border: 0px; box-sizing: border-box; color: green; margin: 0px; padding: 0px; text-align: justify; vertical-align: middle;\"\u003eअर्थ:\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e इस दोहा में बताया गया है की बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़े हुए लोग भी मृत्यु के द्वार पहुँच जाते है, पर सभी विद्वान नही बन पते।           कबीर कहते हैं कि यदि कोई प्रेम के केवल ढाई अक्षर को अच्छी तरह से समझ जाये तो उससे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं होता, अर्थात           प्यार को  वास्तविक रूप में पहचान ले वही सच्चा ज्ञानी           होगा।\u003c/span\u003e      \u003c/p\u003e      \u003cdiv style\u003d\"border: 0px; box-sizing: border-box; margin-bottom: 26px; padding: 0px; vertical-align: middle;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BkMP1WBc-FM/XE4EeKN7ZqI/AAAAAAAAAbQ/LWp-k5B2vOo1U9j1ZyBZOUCsGodRlRWHACLcBGAs/s1600/20190128_004855.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"sai itna dijiye kabir dohe doha kise kahate hain doha paribhasha udaharan sahit dohe class 10 dohe class 8\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BkMP1WBc-FM/XE4EeKN7ZqI/AAAAAAAAAbQ/LWp-k5B2vOo1U9j1ZyBZOUCsGodRlRWHACLcBGAs/w320-h180/20190128_004855.jpg\" title\u003d\"sai itna dijiye kabir dohe doha kise kahate hain doha paribhasha udaharan sahit dohe class 10 dohe class 8\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"font-family: inherit;\"\u003e\u003cb\u003eसाईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय ।\u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"font-family: inherit;\"\u003e\u003cb\u003e मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e\u003cb style\u003d\"color: #212121; font-family: arial, tahoma, helvetica, freesans, sans-serif; text-align: left;\"\u003eअर्थ -\u003c/b\u003e\u003cspan face\u003d\"\" style\u003d\"color: #212121; text-align: left;\"\u003e इस दोहे में कबीर दास जी भगवान से विनती करते हुए कहते               हैं। \"हे ईश्वर! मेरे ऊपर इतनी कृपा बनाए रखना कि मेरे परिवार               का भरण-पोषण अच्छे से होता रहे। मैं ज्यादा धन की इच्छा नहीं रखताा। बस इतनी नजर रखना कि मेरा परिवार और मैं भूखा ना सोए और मेरे दरवाजे               पर आने वाला कोई भी जीव भूखा ना जाए।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e        \u003cdiv style\u003d\"color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\" style\u003d\"color: #212121; text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e \u003c/span\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"color: #444444; font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif; font-size: 16px;\"\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://2.bp.blogspot.com/-mv00LrNa_aE/XFEXtJsv8UI/AAAAAAAAAcY/DhrablLMq6QFuTdveNc5_QL1uON8xm53wCLcBGAs/s1600/20190129_234252.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"doha ka udaharan doha ka arth doha ki paribhasha in hindi doha kise kahte hai dohe kabir ke kabir ke dohe hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://2.bp.blogspot.com/-mv00LrNa_aE/XFEXtJsv8UI/AAAAAAAAAcY/DhrablLMq6QFuTdveNc5_QL1uON8xm53wCLcBGAs/w320-h180/20190129_234252.jpg\" title\u003d\"doha ka udaharan doha ka arth doha ki paribhasha in hindi doha kise kahte hai dohe kabir ke kabir ke dohe hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e मन  मनोरथ छड़ी दे , तेरा किया कोई। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e            पानी में घीव निकसे , तो रुखा खाये न कोई \u003cspan style\u003d\"color: black; font-family: \u0026quot;times new roman\u0026quot;;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/p\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"font-family: \u0026quot;open sans\u0026quot;, sans-serif;\"\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; color: #444444;\"\u003e          \u003cspan class\u003d\"amp-wp-57b7fc0\" style\u003d\"color: green; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003e\u003cb\u003eअर्थ\u003c/b\u003e:\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003e मनुष्य को समझाते हुए कबीर जी कहते हैं कि मन की इच्छाएं             छोड़ दो, उन्हें तुम अपने बल बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से             घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई नहीं खाएगा।\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cdiv style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e\u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BMrBpwKflgk/XFEY7RiIe4I/AAAAAAAAAck/aO3I6IMk-skC5skZwUCIqcLfmLr95WGTQCLcBGAs/s1600/20190129_234004.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"कबीर दास के 20 प्रसिद्ध दोहे rahim ke dohe in hindi  kabir ke dohe pdf  kabir ke dohe class 10  motivational dohe in hindi  tulsidas ke dohe in hindi  dharmik dohe in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BMrBpwKflgk/XFEY7RiIe4I/AAAAAAAAAck/aO3I6IMk-skC5skZwUCIqcLfmLr95WGTQCLcBGAs/w320-h180/20190129_234004.jpg\" title\u003d\"कबीर दास के 20 प्रसिद्ध दोहे rahim ke dohe in hindi  kabir ke dohe pdf  kabir ke dohe class 10  motivational dohe in hindi  tulsidas ke dohe in hindi  dharmik dohe in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e जाती न पूछो साधु की , पूछ लीजिये ज्ञान। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e            मोल करो तलवार का , पड़ा रहन दो म्यार\u003cspan style\u003d\"color: black; font-family: \u0026quot;times new roman\u0026quot;;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan class\u003d\"amp-wp-57b7fc0\" style\u003d\"color: green; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003eअर्थ:\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003e कबीर जी कहते है, की सज्जन की जाती नहीं पूछनी चाहिए उसके ज्ञान             को समझना चाहिए। तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e        \u003cdiv style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003e\u003cbr /\u003e          \u003c/span\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-lcxzI7Gxr7A/XFHCUIsnTsI/AAAAAAAAAdQ/LRoMvVIUH5Yb2an6piiHFYGOllQ4VpU4QCLcBGAs/s1600/20190130_204919.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए  छंद किसे कहते हैं  दोहा विधान  दोहा के उदाहरण मात्रा सहित  दोहा की परिभाषा क्या है  दोहा का अर्थ  doha chhand ki paribhasha  what is doha in hindi  doha kise kehte hain  chhand kise kahate hain\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-lcxzI7Gxr7A/XFHCUIsnTsI/AAAAAAAAAdQ/LRoMvVIUH5Yb2an6piiHFYGOllQ4VpU4QCLcBGAs/w320-h180/20190130_204919.jpg\" title\u003d\"दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए  छंद किसे कहते हैं  दोहा विधान  दोहा के उदाहरण मात्रा सहित  दोहा की परिभाषा क्या है  दोहा का अर्थ  doha chhand ki paribhasha  what is doha in hindi  doha kise kehte hain  chhand kise kahate hain\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e                 \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e पतिबरता मैली भली गले कांच की पोत। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e            सब सखिया में यो दिपै ज्यों सूरज की जोट\u003cspan style\u003d\"color: black; font-family: \u0026quot;times new roman\u0026quot;;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan class\u003d\"amp-wp-57b7fc0\" style\u003d\"color: green; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003eअर्थ: \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003eपतिव्रता स्त्री यदि तन से मैली भी हो अच्छी है। चाहे उसके गले में             केवल कांच के मोती की माला ही क्यों न हो, फिर भी वह अपनी सब सखियों के             बीच सूर्य के तेज के समान चमकती है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e        \u003cdiv style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003e\u003cbr /\u003e          \u003c/span\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://3.bp.blogspot.com/-Np53-IXOdN0/XFHB1nwoU6I/AAAAAAAAAdI/o_r-WHHv5JwL9uNO80Y23sAE3L_i6_qlACLcBGAs/s1600/20190130_205326.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"prem na badi upje meaning दोहा किसे कहते हैं दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए  दोहा विधान  दोहा की परिभाषा क्या है  दोहा का अर्थ  doha in hindi example\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://3.bp.blogspot.com/-Np53-IXOdN0/XFHB1nwoU6I/AAAAAAAAAdI/o_r-WHHv5JwL9uNO80Y23sAE3L_i6_qlACLcBGAs/w320-h180/20190130_205326.jpg\" title\u003d\"prem na badi upje meaning दोहा किसे कहते हैं दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए  दोहा विधान  दोहा की परिभाषा क्या है  दोहा का अर्थ  doha in hindi example\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e प्रेम न बाड़ी उपजे प्रेम न हाट बिकाई। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e            राजा परजा जेहि रुचे सीस देहि ले जाई\u003cspan style\u003d\"color: black; font-family: \u0026quot;times new roman\u0026quot;;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; color: #444444; font-size: 16px;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003e\u003cspan class\u003d\"amp-wp-57b7fc0\" style\u003d\"color: green; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003eअर्थ: \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif; text-align: start;\"\u003eप्रेम खेत में नहीं उपजता प्रेम बाज़ार में नहीं बिकता चाहे कोई राजा               हो या साधारण प्रजा – यदि प्यार पाना चाहते हैं तो वह आत्म बलिदान से               ही मिलेेगा। त्याग और बलिदान के बिना प्रेम को नहीं पाया जा सकता। प्रेम गहन- सघन भावना है – खरीदी बेचे जाने वाली वस्तु नहीं।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e        \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://4.bp.blogspot.com/-LfZ6M9tuMEA/XFHCw10oxaI/AAAAAAAAAdc/AB6OsGP8vno3nUs8QbFoInJM3iGZ7fcuwCLcBGAs/s1600/20190130_205038.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"doha chhand ke example in hindi  dohe mein kitne charan hote hain   doha ka udaharan matra sahit  doha in hindi motivational dohe in hindi doha antakshari in hindi tulsidas ke dohe in hindi famous dohe दोहा किसे कहते है  दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए दोहा की परिभाषा क्या है दोहा विधान दोहा का अर्थ दोहा के उदाहरण मात्रा सहित\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"720\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://4.bp.blogspot.com/-LfZ6M9tuMEA/XFHCw10oxaI/AAAAAAAAAdc/AB6OsGP8vno3nUs8QbFoInJM3iGZ7fcuwCLcBGAs/w320-h180/20190130_205038.jpg\" title\u003d\"doha chhand ke example in hindi  dohe mein kitne charan hote hain   doha ka udaharan matra sahit  doha in hindi motivational dohe in hindi doha antakshari in hindi tulsidas ke dohe in hindi famous dohe दोहा किसे कहते है  दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए दोहा की परिभाषा क्या है दोहा विधान दोहा का अर्थ दोहा के उदाहरण मात्रा सहित\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"background-color: white; clear: both; color: #444444; font-size: 16px; text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e हाड़ जले लकड़ी जले जलवान हर। \u003cbr /\u003e\u003c/b\u003e\u003cb\u003e            कौतिकहरा भी जले कासों करू पुकार\u003cspan style\u003d\"color: black; font-family: \u0026quot;times new roman\u0026quot;;\"\u003e॥\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/p\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e  \u003cspan class\u003d\"amp-wp-57b7fc0\" style\u003d\"color: green; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003eअर्थ: \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003eदाह क्रिया में हड्डियां जलती हैं उन्हें जलाने वाली लकड़ी जलती है उनमें आग     लगाने वाला भी एक दिन जल जाता है। समय आने पर उस दृश्य को देखने वाला दर्शक भी     जल जाता हैै। जब सब का अंत यही होना हैं तो गुहार किससेे करूं। सभी तो एक नियति से बंधे हैं। सभी का अंत एक     है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #353535; font-family: \u0026quot;merriweather\u0026quot; , \u0026quot;times new roman\u0026quot; , \u0026quot;times\u0026quot; , serif;\"\u003e\u003cb\u003eउत्तर दिया गया:\u003c/b\u003e दोहा की परिभाषा देते हुए उदाहरण भी दीजिए, दोहा किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए, दोहा का अर्थ।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3705750713768522370"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3705750713768522370"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/01/blog-post.html","title":"दोहा की परिभाषा - दोहा किसे कहते हैं "}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-HtSSLRYPlW0/XlUncbmlYpI/AAAAAAAAB6o/fmuEu_tQkVw99-dH0ynY4MB-moFmrMVfgCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h179/doha%2Bki%2Bparibhasha.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-1815309838638730349"},"published":{"$t":"2019-01-24T13:21:00.009+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-26T08:45:41.753+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Hindi Grammar"}],"title":{"type":"text","$t":"विशेषण किसे कहते हैं - विशेषण के प्रकार"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003e\n  इस पोस्ट में \u003cb\u003eविशेषण\u003c/b\u003e को आसान भाषा\n  में समझने का प्रयास किया गया है मुझे आशा है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद विशेषण\n  आपको पूरी तरह से समझ आ जायेगा।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv\u003e\n  \u003ctable\u003e\n    \u003cthead\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003cth\u003eअनुक्रम\u003c/th\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n    \u003c/thead\u003e\n    \u003ctbody\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#1\"\u003eविशेषण किसे कहते हैं\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#2\"\u003eविशेष्य किसे कहते हैं\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#3\"\u003eविशेषण के प्रकार\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#4\"\u003eगुणवाचक विशेषण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#5\"\u003eसंख्यावाचक विशेषण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#6\"\u003eपरिमाणवाचक विशेषण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#7\"\u003eसार्वनामिक विशेषण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n    \u003c/tbody\u003e\n  \u003c/table\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003ch2 id\u003d\"1\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, आकर, उम्र, संख्या, रंगआदि)\n  बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। जैसे \"पुराना\" \"हरा\" और \"हंसमुख\" विशेषणों\n  के उदाहरण हैं। विशेषण संज्ञा या सर्वनाम का वर्णन करताहैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eकाला \u003c/span\u003eघोड़ा जा रहा है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eबादल \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eनीला \u003c/span\u003eहै।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    राजु \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eखुश \u003c/span\u003eहै क्योंकि वह परीक्षा में पास हो\n    गया।\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमित्र \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eईमानदार \u003c/span\u003eहै।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eअच्छा \u003c/span\u003eहै।\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eबलैक बोर्ड \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eकाला \u003c/span\u003eहै।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमिना \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eदुखी \u003c/span\u003eहै।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    क्रिकेट \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eग्यारह \u003c/span\u003eखिलाड़ी खेलते है।\n  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eरेशम \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eमुलायम \u003c/span\u003eहोता है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e\n    भारत \u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eविकासशील \u003c/span\u003eदेश है। \n  \u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इन उदाहरणों में आपको जो हाईलाइट शब्द दिख रहे है वह शब्द विशेषण है। विशेषण को\n  कैसे खोजे -वाक्य: काला घोड़ा जा रहा है। यदि हम इस वाक्य में कर्ता के बाद\n  क्या प्रश्न जोड़ दे तो हमें विशेषण मिल जायेगा जैसे - घोड़ा क्या है ? उत्तर -\n  काला उस वाक्य कीविशेषण होगा।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविशेष्य किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  वाक्य में जिस शब्द की विशेषता जतायी जाती है उसे विशेष्य कहा जाता है। भारत\n  विकासशील देश है। इस उदाहरण में भारत विशेष्य है। क्योंकि भारत की विशेषता बताई\n  जा रही है की भारत एकविकासशील देश है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविशेषण के प्रकार\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  विशेषण के चार प्रकार है। विशेषण के भेद या प्रकार एक ही होता है, यदि विशेषण के\n  कितने भेद है प्रश्न आये तो आपका उत्तर चार ही होना चाहिए। नीचे विस्तार से\n  समझाया गया है।\n\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dpHoo6MHCjE/Xn_yh9Z7XHI/AAAAAAAACW8/je9y-Vmq3DgrK1pYuejJ9Ps8etVraoowQCLcBGAsYHQ/s1600/visheshan_ke_prakar.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"विशेषण किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dpHoo6MHCjE/Xn_yh9Z7XHI/AAAAAAAACW8/je9y-Vmq3DgrK1pYuejJ9Ps8etVraoowQCLcBGAsYHQ/w320-h213/visheshan_ke_prakar.jpg\" title\u003d\"विशेषण किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eक्र.\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eविशेषण के प्रकार\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e1\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगुणवाचक विशेषण\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e2\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसंख्यावाचक विशेषण\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e3\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपरिमाणवाचक विशेषण\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e4\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसार्वनामिक विशेषण\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003ch3 id\u003d\"4\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगुणवाचक विशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e1. गुणवाचक विशेषण \u003c/b\u003eमें गुण के अलावा और कई विशेषता को बतलाता बतलाता है\n  इसमें यह ध्यान देने वाली बात है। गुण वाचक विशेषण का अर्थ - जिस शब्द में संज्ञा\n  या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, दिशा, आकर, अवस्था, स्थान, गंध आदि का बोध होता है,\n  उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eगुणवाचक विशेषण के उदाहरण -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eगुण - अच्छा, ईमानदार, भला, दयालु।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदोष - बुरा, बेईमान, कपटी, छलिया, अपराधी।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eरंग - काला लाल सफ़ेद नीला पीला।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदिशा -उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअकार - गोल, त्रिभुज, चौकोर, आयताकार।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअवस्था - स्वस्थ, बीमार, चलना, दौड़ना, खेलना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eस्थान - दिल्ली, भोपाल, रायपुर, चंडीगढ़, सूरत।\u003c/li\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\n  ऊपर दिए गए चार्ट में सभी गुण वाचक विशेषण के अंतर्गत आते है, इसे और अच्छे से\n  समझ ने के लिए उदाहरण देखते है\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eगुण -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eवह अच्छा लड़का है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eराम ईमानदार व्यक्ति है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eगंगाराम भला व्यक्ति है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकुमकुम दयालु औरत है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  इन वाक्यों में अच्छा, ईमानदार, भला और दयालु शब्द गुण का बोध करा रहे है\n  ये गुण वाचक विशेषण के अंतर्गत आएँगे।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eदोष -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eकंश बुरा व्यक्ति था।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eवह बेईमान आदमी है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकैकई कपटी औरत है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमोहन का दोस्त छलिया है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  बुरा, बेईमान, कपटी और छलिया ये सभी दोष को दर्शाते है, तो यह शब्द गुणवाचक\n  विशेषण है। किसी संज्ञा या सर्वनाम की दोष बताये तो वह गुण वाचक विशेषण\n  होगा।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eरंग -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eघोडा काला है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eआकाश नीला है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eपत्ते हरे है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eपेन लाल रंग का है\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  काला नीला हरा और लाल, रंग को बता रहे है अतः ये भी गुण वाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eदिशा -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eसुरेश का घर उत्तर की ओर है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमैदान दक्षिण की ओर जाने से दिखेगी।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eश्रीलंका दक्षिण में है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eजापान पूर्वी दिशा मे है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उदाहरण में उत्तर दक्षिण और पूर्वी ये शब्द दिशा का बोध करते है। अतः ये\n  गुण वाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eआकार -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eगेंद गोल है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eटेबल चौकोर है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eतुम त्रिभुज बनाओ।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकमरा आयताकार है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसमें गोल चौकोर त्रिभुज और आयताकार ये गुण वाचक विशेषण है। क्योकि ये शब्द आकार\n  का बोद करते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eअवस्था -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eवह स्वस्थ है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकिशन बीमार हो गया है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eराजू दौड़ रहा है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसूरज खेल रहा है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  स्वस्थ बीमार दौड़ और खेल ये शब्द किसी अवस्था को बताते है। अवस्था को बताने वाले\n  शब्द गुण वाचक विशेषण होते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: red;\"\u003eस्थान -\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eमिना रायपुर जा रही है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eवह व्यक्ति पंजाबी है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eताजमहल आगरा में है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eऑलम्पिक जापान में होगा।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  इन वाक्यों में क्रमशः रायपुर, पंजाबी , आगरा और जापान स्थान को बता रहे है ये\n  सभी शब्द गुणवाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 id\u003d\"5\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसंख्यावाचक विशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e2. संख्यावाचक विशेषण\u003c/b\u003e - जिस वाक्य में किसी संज्ञा या सर्वनाम के\n  बारे में विशेसता में संख्या का बोध होता है, उसे संख्यावाचक विशेषण\n  कहते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eकक्षा में 32 विद्यार्थी उपस्थित हैं।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदोनों भाइयों में बड़ा राजेश हैं।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eउनकी दूसरी लड़की की सगाई है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदेश का हरेक युवा वीर है।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e संख्यावाचक विशेषण के भेद\u003c/b\u003e - संख्या वाचक विशेषण को दो भागों में बाँटा\n  गया है - 1 निश्चयवाचक विशेषण 2 अनिश्चयवाचक विशेषण\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  1 निश्चयवाचक विशेषण - जिस वाक्य में एक निश्चित संख्या का बोध हो वह निश्चय\n  संख्या वाचक विशेषण होगा। उदाहरण - मेरे पास 10 पुस्तक है। इसमें यह\n  निश्चित है की मेरे पास 10 पुस्तक है इस विशेषण में संख्या शब्द का उपयोग होता\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  2 अनिश्चयवाचक विशेषण - जिस वाक्य में यह निश्चित नहीं होता संख्या कितनी है तो\n  उसे अनिश्चय संख्या वाचक विशेषण कहा जाता है। उदाहरण - मेरे पास कुछ पुस्तक है।\n  इस वाक्य में कुछ शब्द का उपयोग किया गया है। किसी संख्या का उपयोग नहीं किया गया\n  है अतः यह अनिश्चय संख्या वाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 id\u003d\"6\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपरिमाणवाचक विशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e3. परिमाणवाचक विशेषण -\u003c/b\u003eजिस विशेषण से किसी वस्तु की नाप-तौल का बोध\n  होता है, उसे परिमाण-बोधक विशेषण कहते हैं। इसमें नाप तौल से सम्बंधित शब्द आते\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eमुझे चार मीटर कपड़ा दो।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eममता को एक किलो चीनी चाहिए।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eबीमार को थोड़ा पानी देना चाहिए।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  पहला वाक्य में चार मीटर कपड़े की बात हो रही है मीटर नापने में काम लिया जाता है\n  तो यह परिणाम वाचक विशेषण होगा। दूसरे वाक्य में किलो और तीसरे वाक्य में थोड़ा\n  शब्द परिणाम वाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e परिमाणवाचक विशेषण के प्रकार\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  परिमाणवाचक विशेषण को दो भागों में बाँटा गया है - 1 निश्चयवाचक विशेषण 2\n  अनिश्चयवाचक विशेषण,\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  1. निश्चयवाचक विशेषण - जिस वाक्य में निश्चित माप का बोध हो वह निश्चय वाचक\n  विशेषण होगा। जैसे - मुझे दो किलो चीनी दो। इसमें एक निश्चित वजन की बात हो रही\n  है अतः निश्चयवाचक विशेषण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eसुरेश 2 लीटर दूध किराना दुकान से आना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003e10 मीटर कपड़े काटकर दो।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eरमेश मुझे 10 पुस्तक पुस्तकालय से लाकर देना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमुझे एक गिलास पनि देना।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp\u003e\n  2 अनिश्चयवाचक विशेषण - जिस वाक्य में किसी निश्चिता का बोध नहीं होता वह\n  अनिश्चयवाचक विशेषण कहलाता है। जैसे - मुझे कुछ पेपर चाहिए। इस वाक्य में एक यह\n  निश्चित नहीं है की पेपर कितना चाहिए। कुछ में कितने भी पेपर आ सकते है। इसे हम\n  माप नहीं सकते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eउदाहरण -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eकृष्णा थोड़ा पानी लाना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदूध में कुछ चीनी डालना।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमार्च में तापमान अधिक होता है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eयह पेन्सिल थोड़ा बड़ा है।  \u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eसार्वनामिक विशेषण\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003ch3 id\u003d\"7\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसार्वनामिक विशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e4.सार्वनामिक विशेषण\u003c/b\u003e जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से पहले आए तथा\n  वह विशेषण शब्द की तरह संज्ञा की विशेषता बताये, उसे सार्वनामिक विशेषण कहते\n  हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eवह आदमी व्यवहार से अच्छा है।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकौन लड़का मेरा काम करेगा।\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eक्रिया विशेषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजिस अविकारी शब्द (अव्यय) द्वारा क्रिया की विशेषता का बोध होता है, उसे क्रिया विशेषण कहा जाता है। जैसे- जब, धीरे-धीरे, ऊपर, भीतर, क्यों, कैसे, इतना, भला, नहीं आदि।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअर्थ के आधार पर क्रिया - विशेषण के चार भेद होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eकालवाचक - अभी, एकबार, कब तक, प्रतिदिन।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eस्थानवाचक – अन्दर, ऊपर, नीचे, पीछे।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eरीतिवाचक – शायद, अचानक, कैसे, शीघ्र।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपरिमाणवाचक – अति, इतना, थोड़ा, काफी, कम।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1815309838638730349"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1815309838638730349"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/01/blog-post_24.html","title":"विशेषण किसे कहते हैं - विशेषण के प्रकार"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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