gdata.io.handleScriptLoaded({"version":"1.0","encoding":"UTF-8","feed":{"xmlns":"http://www.w3.org/2005/Atom","xmlns$openSearch":"http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/","xmlns$gd":"http://schemas.google.com/g/2005","xmlns$georss":"http://www.georss.org/georss","xmlns$thr":"http://purl.org/syndication/thread/1.0","xmlns$blogger":"http://schemas.google.com/blogger/2008","id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729"},"updated":{"$t":"2024-01-04T07:05:49.164+05:30"},"category":[{"term":"jivan parichay"},{"term":"Science"},{"term":"dharma"},{"term":"rajdhani"},{"term":"other"},{"term":"Geography"},{"term":"country"},{"term":"technology"},{"term":"Hindi Grammar"},{"term":"chhattisgarh"}],"title":{"type":"text","$t":"REXGIN IN 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patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"generator":{"version":"7.00","uri":"https://www.blogger.com","$t":"Blogger"},"openSearch$totalResults":{"$t":"74"},"openSearch$startIndex":{"$t":"1"},"openSearch$itemsPerPage":{"$t":"100"},"entry":[{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-1146313727520250804"},"published":{"$t":"2023-11-11T05:04:00.000+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-11T05:04:15.481+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"पर्यावरण का महत्व - paryavaran ka mahatva"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv\u003e\n  \u003cp\u003e\n    इस धरती पर रहने वाली सभी जीवित और अजीवित\u0026nbsp;चीजें पर्यावरण के अंतर्गत आती\n    हैं। चाहे वे जमीन पर रहते हो\u0026nbsp;या पानी पर सभी\u0026nbsp;पर्यावरण का हिस्सा\n    होते हैं। पर्यावरण में हवा, पानी, सूरज की रोशनी, पौधे, जानवर आदि शामिल हैं।\n    पर्यावरण हमारे चारो ओर व्याप्त वातावरण को कहा जाता है। जो हमें प्रत्यक्ष या\n    अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    पृथ्वी\u0026nbsp;हमारे\u0026nbsp;सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन पाया\n    जाता\u0026nbsp;है। पर्यावरण जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते है। जो सभी जीवो को\n    सुरक्षा प्रदान करता है। पर्यावरण क्या है\u0026nbsp;इस पर एक ऑलरेडी पोस्ट लिख गया\n    है इस पोस्ट में \u003cb\u003eपर्यावरण का महत्व\u003c/b\u003e के बारे में जानकारी दी जा\n    रही\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    मानव ने अपने फायदे के लिए पर्यावरण को बहुत नुकशान पहुंचाया है। जिसके परिणाम\n    स्वरुप आज कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है। जिसमे\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e,\n    प्रदूषण\u0026nbsp;जैसी समस्याएं\u0026nbsp;शामिल है। इसके अलावा कई गंभीर बीमारिया\n    पर्यावरण असंतुलन के कारण होते\u0026nbsp;है। लेकिन प्रकृति ने हमें कई उपहार दिए है\n    जिसके कारण मानव आज इस धरती पर जीवित रह पाया हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    जब समाज आर्थिक संकटों, युद्धों और अंतहीन सामाजिक समस्याओं का सामना कर रहा हो\n    तब भी पर्यावरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह मायने रखता है क्योंकि पृथ्वी ही\n    एकमात्र घर है जो मनुष्यों के पास है, और यह हवा, भोजन और अन्य ज़रूरतें प्रदान\n    करता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण का महत्व -\u0026nbsp;Importance of environment\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp\u003e\n    हम वास्तव में पर्यावरण के वास्तविक मूल्य को नहीं समझते\u0026nbsp;हैं। लेकिन हम\n    इसके कुछ महत्व का अनुमान लगा सकते हैं। जो हमें इसके महत्व को समझने में मदद\n    कर सकते हैं। पर्यावरण में जीवित जीवों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका\n    निभाता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    यह पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखता है। जो पृथ्वी पर जीवन को बचाये रखता\n    हैं।\u0026nbsp;यह भोजन, आवास, हवा प्रदान करता है। मानव की सभी जरूरतों को पूरा\n    करता है चाहे वह बड़ा हो या छोटा।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\n  \u003c!--link ads--\u003e\n  \u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\n  \u003cscript\u003e\n    (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});\n  \u003c/script\u003e\n  \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    इसके अलावा, मनुष्य का संपूर्ण जीवन पर्यावरणीय कारकों पर पूरी तरह निर्भर करता\n    है। पृथ्वी पर विभिन्न जीवन चक्रों को बनाए रखने में भी मदद करता है। सबसे\n    महत्वपूर्ण बात, हमारा पर्यावरण प्राकृतिक सौंदर्य का स्रोत है और शारीरिक और\n    मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    लाखों वर्षों से, प्रकृति हमें एक बेहतर जीवन जीने के लिए\u0026nbsp;कपड़े, भोजन,\n    प्रकाश, हवा, झरने और जंगलों तक सब कुछ प्रदान करती है। पारिस्थितिकी तंत्र\n    हमें कृषि और फसलों को उगाने में मदद करता है। हमारे अपशिष्ट उत्पादों को कृषि\n    के लिए खाद के रूप में अवशोषित और विघटित किया गया था।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-vnPPuKJkA5Y/X3gKFKApqSI/AAAAAAAAELM/TT1tcgn4NJg10Hxgn7Atgv7C_amNUiTCwCPcBGAYYCw/s600/20201003_101432.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"पर्यावरण का महत्व - environment in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-vnPPuKJkA5Y/X3gKFKApqSI/AAAAAAAAELM/TT1tcgn4NJg10Hxgn7Atgv7C_amNUiTCwCPcBGAYYCw/w320-h213/20201003_101432.webp\" title\u003d\"पर्यावरण का महत्व - environment in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।\n    पृथ्वी विभिन्न जीवित प्रजातियों का घर है और हम सभी भोजन, हवा, पानी और अन्य\n    जरूरतों के लिए पर्यावरण पर निर्भर हैं। इसलिए हम सभी का यह कर्तव्य है की\n    पर्यावरण की रक्षा करे है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cli\u003eमनुष्य के स्वस्थ जीवन में पर्यावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      पर्यावरण एकमात्र घर है जो मनुष्यों के पास है, और यह हवा, भोजन और अन्य\n      जरूरतें प्रदान करता है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      मानवता की संपूर्ण जीवन समर्थन प्रणाली सभी पर्यावरणीय कारकों की भलाई पर\n      निर्भर करती है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      पर्यावरण वायु और जलवायु को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      एक और कारण पर्यावरण इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राकृतिक सुंदरता का\n      स्रोत है।\n    \u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eपर्यावरण पृथ्वी पर जीवन का प्रमुख अस्तित्व है।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eइस पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का एकमात्र कारक पर्यावरण है।\u003c/li\u003e\n  \u003c/ol\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan\u003e\u003cb\u003eपारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    मानवता की संपूर्ण जीवन समर्थन प्रणाली पृथ्वी पर रहने वाली सभी प्रजातियों की\n    भलाई पर निर्भर करती है। इसे आमतौर पर बायोस्फीयर के रूप में जाना जाता है, यह\n    शब्द 1920 के दशक में एक रूसी वैज्ञानिक व्लादिमीर वर्नाडस्की द्वारा गढ़ा गया\n    था। बायोस्फीयर एक वैश्विक पारिस्थितिक तंत्र को संदर्भित करता है जिसमें सभी\n    जीवित चीजें एक दूसरे पर आश्रित हैं। समग्र जीवमंडल या पारिस्थितिकी तंत्र के\n    भीतर, वर्षावन, महासागर, रेगिस्तान और टुंड्रा जैसे छोटे पारिस्थितिक तंत्र\n    हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003cb\u003eसजीव और निर्जीव पदार्थ\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    पारिस्थितिकी तंत्र जीवित और निर्जीव भागों से बना होता है, चाहे वह स्थलीय हो\n    या जलीय। निर्जीव भाग मिट्टी, जल, वायु और पोषक तत्व हैं, और जीवित तत्व पौधे,\n    जानवर, सूक्ष्म जीव और मनुष्य हैं। एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र में लाखों\n    प्रजातियों का समर्थन करते हुए सभी रासायनिक तत्व और पोषक तत्व एक चक्र में\n    घूमते हैं। असंख्य प्रजातियां चक्रीय तत्वों की प्रक्रिया में मदद करती हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003cb\u003eमानवीय गतिविधियों से पर्यावरण पर प्रभाव\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    विभिन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियाँ हैं जो सीधे पर्यावरणीय आपदाओं के लिए\n    जिम्मेदार होते हैं, जिसके कारण अम्ल वर्षा, महासागरों का अम्लीकरण, जलवायु में\n    परिवर्तन, ओजोन परत का ह्रास, ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण आदि समस्याएं होती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    आज उच्च जनसंख्या और इतने सारे लोगों का दबाव प्रकृति पर भारी पड़ रहा है और\n    बहुत अधिक तनाव पैदा कर रहा है। दुनिया भर में जीवित प्राणियों की पूरी\n    व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। हमारे ग्रह का जैव तंत्र, जिसमें रासायनिक और भौतिक\n    वातावरण दोनों शामिल हैं, लगातार बदल रहा है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    जिससे हमारी दुनिया धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है। पहले मनुष्य पर्यावरण को\n    ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे और अगर करते भी थे तो वह जमीन के एक छोटे से\n    क्षेत्र पर होते थे। हालाँकि, आज मानव आबादी विभिन्न तकनीकी प्रगति, ऑटोमोबाइल\n    का विस्तार है। इस प्रकार वे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp; को पूरी तरह से\n    व्यवधान और असंतुलित कर\u0026nbsp;रहा हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    दीर्घकालिक परिणामों को समझे बिना, लोग लगातार\u0026nbsp; ऐसे तकनीक का उपयोग कर रहे\n    हैं जो हमारी प्रकृति पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    वर्षों से, लोग विभिन्न बीमारियों, महामारी, अकाल, दुर्घटनाओं और वेक्टर जनित\n    रोगों के बारे में चिंतित थे। पालतू जानवरों ने लोगों के बीच नए संक्रामक विकार\n    पैदा किए, लोगों के बीच बेहतर स्वास्थ्य के लिए नई चुनौतियां पैदा कीं\u0026nbsp;\n    हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    प्रौद्योगिकियों की प्रगति और उद्योगों के विकास के साथ, विभिन्न जल जनित और\n    अन्य बीमारियों को रोका गया हैं। हालांकि, यह हानिकारक गैसों, रसायनों और\n    निर्माण कचरे का उपयोग करके पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    व्यापार और वाणिज्य, उद्योग और अन्य कारखानों ने मनुष्यों के लिए कृषि क्षेत्र\n    को छोड़कर तकनीकी दुनिया में कदम रखने का मार्ग प्रशस्त किया। वायु, जल और मृदा\n    प्रदूषण पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। हानिकारक ग्रीन हाउस गैसो की अधिकता\n    से पर्यावरण गर्म हो रहा हैं। सुरक्षात्मक ओजोन परत नष्ट हो रही है, जिससे\n    सूर्य की सीधी अल्ट्रा-वायलेट किरणें पृथ्वी में प्रवेश करती हैं और बर्फ\n    पिघलने लगती हैं और जानवरों और मनुष्यों में गंभीर त्वचा रोग पैदा करती हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    पेड़ों की कमी, बढ़ते प्रदूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के कारण विभिन्न\n    जानवर विलुप्त होने के कगार पर हैं। कभी ग्रामीण जिलों से शहरी क्षेत्रों में\n    प्रवास करने वाले पक्षी अब उद्योगों के हानिकारक उत्सर्जन और इलेक्ट्रॉनिक\n    तरंगों के कारण दिखाई नहीं देते है। प्रकृति का यह असंतुलन पृथ्वी पर लंबे समय\n    तक चलने वाले जीवन के लिए गंभीर समस्याएं और खतरा पैदा कर रहा है।\n  \u003c/p\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1146313727520250804"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1146313727520250804"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/paryavaran-ka-mahatva.html","title":"पर्यावरण का महत्व - paryavaran ka mahatva"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-vnPPuKJkA5Y/X3gKFKApqSI/AAAAAAAAELM/TT1tcgn4NJg10Hxgn7Atgv7C_amNUiTCwCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h213/20201003_101432.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7958585937528886836"},"published":{"$t":"2023-08-29T10:05:00.020+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-28T21:21:31.736+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"पठार किसे कहते हैं - what are plateaus"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  पठार जिन्हें ऊँचे सपाट भू-भाग के रूप में जाना जाता है, यह पृथ्वी की सतह पर\n  स्थित एक महत्वपूर्ण स्थलरूप हैं। ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों व विशाल मैदानों के\n  विपरीत, पठारों में एक अनोखा आकर्षण होता है। जो प्राकृतिक सुंदरता, भूवैज्ञानिक\n  महत्व और पारिस्थितिक विविधता का एक मनोरम मिश्रण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपठार किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  पठार भूमि के ऊंचे समतल क्षेत्र को कहते हैं। जो आस-पास के मैदान से ऊंचा\n  होता हैं। जिनके एक या अधिक किनारों पर तीव्र ढलान होती है। पठार की विशेषता ऊँची\n  समतल सतह हैं, जो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच अधिक पाया जाता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  पठारों का आकार कुछ किलोमीटर से लेकर हजारों किलोमीटर तक हो सकता है। अधिकतर पठार\n  का निर्माण टेक्टोनिक प्लेट के परिवर्तन, ज्वालामुखी विस्फोट और धरातलीय क्रियाओं\n  से होता हैं। सम्पूर्ण धरातल के 33 प्रतिशत भाग पर पठार पाया जाता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपठार कितने प्रकार के होते है\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eपठार के निम्नलिखित प्रकार होते हैं -\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e1. टेक्टोनिक पठार -\u003c/b\u003e इनका निर्माण टेक्टोनिक प्लेटों की गति और टकराव के\n  कारण होता है। जब दो प्लेटें टकराती हैं, तो वे भूमि के कुछ हिस्सों को ऊपर\n  धकेलती हैं, जिससे ऊंचे पठार का निर्माण होता हैं। पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका\n  में कोलोराडो पठार और भारत के उत्तर में स्थित तिब्बत का पठार टेक्टोनिक पठार के\n  उदाहरण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca 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बार-बार होने वाले ज्वालामुखी विस्फोटों से निकलने वाला लावा समय के\n  साथ पुरे क्षेत्र में फैल जाता हैं और ऊंची सपाट सतह का निर्माण करता है। दक्कन\n  का पठार ज्वालामुख पठार का एक अच्छा उदाहरण है।\n\u003c/p\u003e\n\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e3. अपरदनात्मक पठार -\u003c/b\u003e इस प्रकार के पठार का निर्माण कटाव की क्रमिक\n  प्रक्रिया से होता हैं, जो नदियों और ग्लेशियरों की गतिविधियों के कारण होता है।\n  आस-पास के क्षेत्रों की तुलना में भूमि का कटाव अधिक तेजी से होता है, जिसके\n  परिणामस्वरूप सपाट और ऊँची सतह का निर्माण होता है। भारत का गढ़वाल पठार इसका एक\n  अच्छा उदाहरण हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलंबिया का पठार भी इस तरह का पठार\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e4. विच्छेदित पठार -\u003c/b\u003e इस तरह के पठारों को का निर्माण नदियों और नालों के\n  कटाव के कारण होता है। जिसके परिणामस्वरूप गहरी घाटियों और ऊंचे पठारों का\n  निर्माण होता है। भारत में असम का पठार विच्छेदित पठार का एक अच्छा उदाहरण है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपठार का महत्व\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  पठारों का पारिस्थितिक और मानवीय महत्व होता है। अधिकतर पठारी क्षेत्रों में\n  मूल्यवान संसाधन पाया जाता हैं। इतिहास में कई सभ्यताएँ अपनी रक्षा और उपजाऊ भूमि\n  की विशेषताओं के कारण पठारों पर विकसित हुई हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eपठारी क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में खनिज भंडार\n  पाया जाता हैं। जैसे अफ़्रीका के पठार सोने खदान के लिए प्रसिद्ध है। भारत में\n  छोटानागपुर का पठार लोहा, कोयला और मैंगनीज के विशाल भंडार के लिए जाना जाता है।\n  पठारी क्षेत्रों में झरने पाए जाते हैं। जो प्रकृति प्रेमी को अपने और\n  आकर्षित करते हैं। इसके अलावा दर्शनीय स्थल भी बड़े पैमाने पर पठारी क्षेत्रों\n  में स्थित होते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व के प्रमुख पठार\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  पठार शब्द का उपयोग ऐसे क्षेत्रों के लिए किया जाता हैं\u0026nbsp; जिसके कम से कम एक\n  तरफ बहुत ढलान हो या आस पास की सतह से काफी ऊँचा हो और ऊपरी सतह समतल हो। पठार का\n  महत्वपूर्ण विशेषता ऊपरी भाग का समतल होना होता है। विश्व के प्रमुख पठारों की\n  सूची नीचे दी गई है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eतिब्बत का पठार -\u003c/b\u003e एशिया में स्थित एक विशाल ऊंचा पठार है। यह पठार तिब्बत,\n  किंघई, सिचुआन, झिंजियांग, भूटान, लद्दाख और लाहौल क्षेत्र में फैला हुआ हैं। यह\n  उत्तर से दक्षिण तक लगभग 1,000 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम तक 2,500 किलोमीटर तक\n  फैला है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे बड़ा पठार है, जिसका क्षेत्रफल\n  2,500,000 वर्ग किलोमीटर है।\u0026nbsp; इस पठार की औसत ऊंचाई 4,500 मीटर हैं। तिब्बत\n  का पठार दुनिया की दो सबसे ऊंची चोटियों, माउंट एवरेस्ट और K2 पर्वत से घिरा है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  तिब्बत का पठार एक शुष्क मैदानी पठार है जो पर्वत श्रृंखलाओं और बड़ी खारे झीलों\n  से घिरा हुआ है। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा लगभग 100 से 300 मिलीमीटर तक होती\n  है। क्षेत्र के दक्षिणी और पूर्वी किनारों पर घास के मैदान हैं। जहाँ खानाबदोश\n  चरवाहों की आबादी पायी जाती हैं। साल के छह महीने यहाँ ठंढ पड़ती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eमंगोलिया का पठार - \u003c/b\u003eमध्य एशियाई पठार का हिस्सा है जिसका क्षेत्रफल लगभग\n  3,200,000 वर्ग किलोमीटर है। यह पूर्व में ग्रेटर हिंगगन पर्वत, दक्षिण में यिन\n  पर्वत, पश्चिम में अल्ताई पर्वत और उत्तर में सायन पर्वत से घिरा है। पठार में\n  गोबी रेगिस्तान के साथ-साथ शुष्क मैदानी क्षेत्र भी शामिल हैं। इस पठार की ऊंचाई\n  लगभग 1,000 से 1,500 मीटर है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह पठार चीन और रूस के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूरे मंगोलिया में फैला हुआ है।\n  भीतरी मंगोलिया और झिंजियांग में डज़ुंगेरियन बेसिन के कुछ हिस्से पठार के चीनी\n  हिस्से को घेरते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eअरब का पठार -\u003c/b\u003e पश्चिम एशिया में एक प्रायद्वीप है, जो अरब प्लेट पर\n  अफ्रीका के उत्तर-पूर्व में स्थित है । यह 32,37,500 वर्ग किमी में फैला हुआ हैं।\n  अरब प्रायद्वीप दुनिया का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भौगोलिक रूप से अरब का पठार बहरीन, कुवैत , ओमान , कतर , सऊदी अरब , संयुक्त अरब\n  अमीरात, यमन, इराक और जॉर्डन तक फैला हुआ हैं। इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सऊदी अरब\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अरबियन पठार का निर्माण 56 से 23 मिलियन वर्ष पहले लाल सागर के दरार के\n  परिणामस्वरूप हुआ था। इसकी सीमा पश्चिम में लाल सागर, उत्तर-पूर्व में फारस की\n  खाड़ी, ओमान की खाड़ी और उत्तर में मेसोपोटामिया और दक्षिण-पूर्व में अरब सागर व\n  हिंद महासागर से लगती हैं। यह क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार के\n  कारण विश्व विख्यात है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eइस क्षेत्र को चार अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया गया हैं:\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eकेंद्रीय पठार - नज्द और अल-यामामा\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eदक्षिण अरब - यमन , हद्रामौत और ओमान\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eअल-बहरीन - पूर्वी अरब या अल-हस्सा\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eहेजाज - पश्चिमी तट के लिए तिहामा\u003c/li\u003e\n\u003c/ol\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003eअनातोलिया का पठार\u0026nbsp;-\u003c/b\u003e तुर्की के अधिकांश क्षेत्रों में फैला हुआ है।\n  पठार की ऊंचाई 600 मीटर से लेकर 1,200 मीटर तक है। तुर्की की राजधानी अंकारा इस\n  पठार के उत्तर-पश्चिमी भाग में बसा हुआ है।\u0026nbsp;अनातोलिया के पठार को देश का\n  हृदय स्थल माना जाता है। पठार पर दो सबसे बड़े बेसिन कोन्या ओवसी और तुज़ गोलू\n  स्थित हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  यह पठार शुष्क है तथा काली और रेगिस्तानी मिट्टी का मिश्रण है। यहां गर्मियां\n  अनातोलिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक गर्म और शुष्क होती हैं, लेकिन\n  सर्दियों में भी अधिक ठंडी होती हैं, यहाँ अक्सर भारी बर्फबारी पड़ती है। पठार\n  ज्यादातर स्टेपी से ढका हुआ है, जिसमें छोटी घास, झाड़ियाँ और छोटे पेड़ पाए जाते\n  हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7958585937528886836"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7958585937528886836"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2023/08/what-are-plateaus.html","title":"पठार किसे कहते हैं - what are plateaus"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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किसे कहते हैं - pradushan kya hai"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003eप्रदूषण एक गंभीर समस्या है जो पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा पैदा करता है। यह प्राकृतिक वातावरण में हानिकारक पदार्थों, दूषित जल और हानिकारक गैस की अधिकता को संदर्भित करता है। जिसके परिणामस्वरूप जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन नष्ट होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रदूषण के विभिन्न रूप है, जिसमें वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण शामिल है। औद्योगीकरण, शहरीकरण, परिवहन और अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन जैसी मानवीय गतिविधियाँ प्रदूषण में योगदान करते हैं। जिसके कारण जहरीले प्रदूषकों, ग्रीनहाउस गैसों, रसायनों और अपशिष्ट पदार्थों को पर्यावरण में छोड़ने से जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, जैव विविधता की हानि, श्वसन रोग और पारिस्थितिक असंतुलन सहित कई हानिकारक प्रभाव होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउधोग और तकनीकी विकास ने प्रदूषण की समस्या उत्त्पन्न की है। जिससे की\n  हमारे दैनिक जीवन में कई समस्याएं उत्त्पन्न हो रही है। इसमें बीमारिया, पर्यावरण को खतरा,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e, तापमान में वृद्धि और मानसून में अनिश्चिता जैसे परिवर्तन शामिल हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रदूषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  अवांछित तत्व का\u0026nbsp;वातावरण में मिल जाना ही\u0026nbsp;प्रदूषण कहलाता\u0026nbsp;है। यह\n  हवा, भूमि, पानी और ध्वनि को प्रदूषित करते है। जिसका जीवो पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष\u0026nbsp;प्रभाव पड़ता है। और मानव के लिए यह\n  कई बीमारी लेकर आता है। प्रदूषण की समस्या एक मानवीय क्रिया हैं। जो पर्यावरण को\n  हानि पहुंचते हैं। जल और वायु प्रदूषण जीवों को अधिक प्रभावित करते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  दिल्ली की बात करे तो देश में सबसे प्रदूषित शहर है। इसका कारण वाहनों और कारखानो\n  से निकलने वाले धुआँ हैं। ठण्ड के दिनों में यहाँ का मौसम और अधिक ख़राब हो जाता\n  हैं। सड़को पर धुंध ही धुंध दिखाई देता हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रदूषण के कारण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003eहमारा ग्रह कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक वायु प्रदूषण है, जो मुख्य रूप से उद्योगों, वाहनों और जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण होता है। वायु प्रदूषण के उच्च स्तर से श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जैसे कि अस्थमा और फेफड़ों के अन्य रोग, साथ ही हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजल प्रदूषण एक और महत्वपूर्ण चिंता है, जो जल निकायों में अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और कृषि अपवाह के निर्वहन से उत्पन्न होता है। यह प्रदूषण न केवल जलीय पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है बल्कि पीने के पानी के स्रोतों को भी दूषित करता है, जिससे मनुष्यों और वन्य जीवन के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा होता है। यह समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बाधित करता है, जिससे मछली की आबादी में कमी आती है और प्रवाल भित्तियों का विनाश होता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hY-vq14I6II/YHP0cwOlUPI/AAAAAAAAEpg/oqj2e-Es8LUzWu67OmeMxhq-kTj1vYQ1ACLcBGAsYHQ/s500/1626a330d529b997e27e173806762ace.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"प्रदूषण किसे कहते हैं - pradushan kya hai\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"334\" data-original-width\u003d\"500\" height\u003d\"214\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hY-vq14I6II/YHP0cwOlUPI/AAAAAAAAEpg/oqj2e-Es8LUzWu67OmeMxhq-kTj1vYQ1ACLcBGAsYHQ/w320-h214/1626a330d529b997e27e173806762ace.webp\" title\u003d\"प्रदूषण किसे कहते हैं - pradushan kya hai\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eमृदा प्रदूषण तब होता है जब रसायन, भारी धातु और कृषि कीटनाशक मिट्टी में रिसते हैं, जिससे यह अनुपजाऊ हो जाती है और कृषि उद्देश्यों के लिए अनुपयुक्त हो जाती है। इसके खाद्य उत्पादन के साथ-साथ पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता के समग्र स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अतिरिक्त, ध्वनि प्रदूषण, मुख्य रूप से परिवहन, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है, मानव स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालता है, जिसमें तनाव के स्तर में वृद्धि, श्रवण हानि और नींद की गड़बड़ी शामिल है। यह वन्यजीवों के आवासों को भी परेशान करता है, उनके व्यवहार और संचार पैटर्न को प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रदूषण को रोकने के लिए कठोर नियमों, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने, अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने सहित बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। यह व्यक्तियों, उद्योगों और सरकारों के लिए आवश्यक है कि वे प्रदूषण को कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने और सभी के लिए एक स्वस्थ और अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय उपाय करें।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cb\u003eप्रदूषण के प्रकार\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\n  1. वायु प्रदूषण\u003c/b\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eवायु प्रदूषण का तात्पर्य पृथ्वी के वातावरण में हानिकारक पदार्थों और प्रदूषकों की उपस्थिति से है। यह एक वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दा है जो हमारे द्वारा सांस लेने वाली हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिक तंत्र और हमारे ग्रह की समग्र भलाई को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण हो सकता है, जैसे ज्वालामुखी विस्फोट और धूल भरी आंधी, लेकिन वायु प्रदूषण का अधिकांश हिस्सा मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवायु प्रदूषण के कई स्रोत हैं, जिनमें शामिल हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. औद्योगिक उत्सर्जन:\u003c/b\u003e उद्योग हवा में विभिन्न प्रकार के प्रदूषकों का उत्सर्जन करते हैं, जिनमें पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs), और भारी धातुएँ शामिल हैं। विनिर्माण, बिजली उत्पादन और रासायनिक उत्पादन जैसी औद्योगिक प्रक्रियाएं वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. वाहन उत्सर्जन:\u003c/b\u003e वाहनों में जीवाश्म ईंधन के दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कण पदार्थ सहित प्रदूषक निकलते हैं। कारों, ट्रकों और मोटरसाइकिलों से निकलने वाले उत्सर्जन का शहरी वायु प्रदूषण में प्रमुख योगदान है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. बिजली उत्पादन:\u003c/b\u003e बिजली संयंत्रों में कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस के जलने से हवा में प्रदूषक निकलते हैं। बिजली संयंत्र जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भर करते हैं, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसों का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो क्षेत्रीय और वैश्विक वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. आवासीय ताप और खाना पकाने\u003c/b\u003e: कुछ क्षेत्रों में आवासीय ताप और खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला और बायोमास जैसे ठोस ईंधन के उपयोग से हानिकारक प्रदूषक निकलते हैं, जिनमें कण पदार्थ, कार्बन मोनोऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक शामिल हैं। इन स्रोतों से घर के अंदर वायु प्रदूषण के गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. कृषि गतिविधियाँ:\u003c/b\u003e कृषि पद्धतियाँ, जैसे कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग, पशुपालन और कृषि अवशेषों को जलाना, वायु प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं। अमोनिया, मीथेन और धूल कृषि गतिविधियों से जुड़े आम प्रदूषक हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव महत्वपूर्ण हैं। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से सांस की बीमारी, हृदय संबंधी समस्याएं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। वायु प्रदूषण पौधों, जानवरों और जलीय जीवन सहित पारिस्थितिक तंत्र को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अतिरिक्त, कुछ वायु प्रदूषक, जैसे कि ग्रीनहाउस गैसें, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवायु प्रदूषण से निपटने के लिए, अक्षय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण में सुधार, सख्त वाहन उत्सर्जन मानकों को लागू करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और स्वच्छ हवा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने जैसी स्थायी प्रथाओं को अपनाना महत्वपूर्ण है। सरकारी विनियम, तकनीकी प्रगति, और व्यक्तिगत कार्य सभी वायु प्रदूषण को कम करने और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  2 . जल प्रदूषण\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eजल प्रदूषण हानिकारक पदार्थों और प्रदूषकों के साथ नदियों, झीलों, महासागरों और भूजल जैसे जल निकायों के प्रदूषण को संदर्भित करता है। यह एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा है जो जलीय पारिस्थितिक तंत्र, मानव स्वास्थ्य और स्वच्छ जल संसाधनों की समग्र उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजल प्रदूषण विभिन्न स्रोतों और गतिविधियों के कारण हो सकता है, जिनमें शामिल हैं -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. औद्योगिक निर्वहन:\u003c/b\u003e उद्योग जल निकायों में प्रदूषकों की एक विस्तृत श्रृंखला छोड़ते हैं। इनमें जहरीले रसायन, भारी धातु, सॉल्वैंट्स, तेल और अन्य हानिकारक पदार्थ शामिल हो सकते हैं। औद्योगिक कचरे के अनुचित निपटान और अपर्याप्त अपशिष्ट जल उपचार से महत्वपूर्ण जल प्रदूषण हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. कृषि अपवाह:\u003c/b\u003e कृषि पद्धतियों में उर्वरकों, कीटनाशकों और शाकनाशियों के उपयोग के परिणामस्वरूप इन रसायनों का बहाव निकटवर्ती जल निकायों में हो सकता है। इस कृषि अपवाह में नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शैवाल की अत्यधिक वृद्धि का कारण बन सकते हैं और यूट्रोफिकेशन को जन्म दे सकते हैं। इसमें कीटनाशक और शाकनाशी भी होते हैं जो जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. नगरपालिका अपशिष्ट जल:\u003c/b\u003e घरों, व्यवसायों और शहरी क्षेत्रों से अनुचित तरीके से उपचारित या अनुपचारित सीवेज और अपशिष्ट जल जल निकायों को दूषित कर सकते हैं। सीवेज में रोगजनक, कार्बनिक पदार्थ, पोषक तत्व और अन्य प्रदूषक स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं और जलीय वातावरण के पारिस्थितिक संतुलन को बाधित कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. तेल रिसाव:\u003c/b\u003e जहाजों, पाइपलाइनों, या अपतटीय ड्रिलिंग गतिविधियों से दुर्घटनावश या जानबूझकर तेल रिसाव से जल निकायों पर भयावह प्रभाव पड़ सकता है। तेल रिसाव पानी की सतह को ढक सकता है, जिससे समुद्री जीवन, समुद्री पक्षी और तटीय पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। वे जल स्तंभ में भी प्रवेश कर सकते हैं, जिससे जलीय जीवों को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. प्लास्टिक प्रदूषण:\u003c/b\u003e नदियों और महासागरों जैसे जल निकायों में प्लास्टिक कचरे का अनुचित निपटान और संचय एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है। प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक्स में टूट जाता है, जिसे समुद्री जीवन द्वारा निगला जा सकता है, जिससे उलझाव, घुटन और बाधित पारिस्थितिक तंत्र हो सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजल प्रदूषण के परिणाम दूरगामी हैं। यह मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है, क्योंकि दूषित जल स्रोत हैजा, पेचिश और जठरांत्र संबंधी बीमारियों जैसे जलजनित रोगों को जन्म दे सकते हैं। जल प्रदूषण जलीय पारिस्थितिक तंत्र को भी बाधित करता है, ऑक्सीजन के स्तर को कम करता है, समुद्री जीवन को हानि पहुँचाता है, और प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुँचाता है। यह स्वच्छ जल संसाधनों पर निर्भर मछली पकड़ने और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजल संसाधनों की रक्षा करना और सभी के लिए स्वच्छ और सुलभ जल सुनिश्चित करना पारिस्थितिक तंत्र और मानव आबादी दोनों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।\u003c/p\u003e\n\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  3 . ध्वनि प्रदूषण\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eध्वनि प्रदूषण पर्यावरण में शोर के अत्यधिक या परेशान करने वाले स्तरों की उपस्थिति को संदर्भित करता है जो मानव स्वास्थ्य, कल्याण और पारिस्थितिक तंत्र के प्राकृतिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह मुख्य रूप से मानव गतिविधियों के कारण होता है और शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eध्वनि प्रदूषण के सामान्य स्रोतों में शामिल हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. परिवहन: \u003c/b\u003eध्वनि प्रदूषण में कार, ट्रक, मोटरसाइकिल और सार्वजनिक परिवहन सहित सड़क यातायात का प्रमुख योगदान है। हवाई अड्डों से विमान का शोर और ट्रेनों और रेलवे प्रणालियों से रेलवे का शोर भी समग्र शोर स्तरों में योगदान देता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. औद्योगिक गतिविधियाँ:\u003c/b\u003e औद्योगिक संचालन, जैसे कारखाने, निर्माण स्थल और बिजली संयंत्र, महत्वपूर्ण मात्रा में शोर उत्पन्न करते हैं। भारी मशीनरी, उपकरण और निर्माण प्रक्रियाएं तेज और निरंतर शोर पैदा कर सकती हैं जो आसपास के निवासियों के लिए हानिकारक हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. निर्माण और बुनियादी ढांचे का विकास:\u003c/b\u003e ड्रिलिंग, हथौड़े और भारी मशीनरी से जुड़ी निर्माण गतिविधियाँ उच्च स्तर का ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न कर सकती हैं। बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, जैसे कि राजमार्ग या भवन, में निर्माण अवधि लंबी हो सकती है जो आस-पास के समुदायों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. मनोरंजक शोर: \u003c/b\u003eमनोरंजक गतिविधियों से शोर, जैसे संगीत कार्यक्रम, खेल आयोजन, बार और नाइट क्लब, ध्वनि प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं। ये गतिविधियां अक्सर शहरी क्षेत्रों में होती हैं और आवासीय पड़ोस की शांति को बाधित कर सकती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. घरेलू और सामुदायिक शोर:\u003c/b\u003e घरेलू उपकरणों, एयर कंडीशनर, लॉनमॉवर, भौंकने वाले कुत्तों और तेज़ संगीत से शोर छोटे पैमाने पर ध्वनि प्रदूषण में योगदान दे सकता है। सामुदायिक कार्यक्रम, सामाजिक समारोहों और सार्वजनिक घोषणाओं से भी शोर उत्पन्न हो सकता है जो आस-पास के निवासियों को प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमानव स्वास्थ्य पर ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव विविध हैं और अस्थायी झुंझलाहट से लेकर दीर्घकालिक स्वास्थ्य मुद्दों तक हो सकते हैं। अत्यधिक शोर के लंबे समय तक संपर्क के कुछ प्रभावों में तनाव, नींद की गड़बड़ी, उच्च रक्तचाप, श्रवण हानि, बिगड़ा हुआ ध्यान और कम उत्पादकता शामिल हैं। ध्वनि प्रदूषण भी संचार को बाधित कर सकता है, सीखने के वातावरण में हस्तक्षेप कर सकता है और मनोवैज्ञानिक परेशानी पैदा कर सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अतिरिक्त, ध्वनि प्रदूषण का वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण जानवरों को निवास स्थान में व्यवधान, परिवर्तित व्यवहार पैटर्न, संचार हस्तक्षेप और प्रजनन सफलता में कमी का अनुभव हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eध्वनि प्रदूषण को कम करने से न केवल व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है बल्कि मानव और वन्यजीव दोनों के लिए स्वस्थ और अधिक टिकाऊ रहने वाले वातावरण बनाने में भी मदद मिलती है।\u003c/p\u003e\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e4.\u0026nbsp;मृदा प्रदूषण\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eमृदा प्रदूषण, जिसे मृदा संदूषण के रूप में भी जाना जाता है, मिट्टी में हानिकारक पदार्थों और प्रदूषकों की उपस्थिति को संदर्भित करता है जिनका मिट्टी की गुणवत्ता, पारिस्थितिक तंत्र और कृषि उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह तब होता है जब मानवीय गतिविधियाँ प्रदूषकों को मिट्टी में लाती हैं, जिससे इसके रासायनिक, भौतिक और जैविक गुणों में परिवर्तन होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमृदा प्रदूषण के कारणों को विभिन्न स्रोतों में वर्गीकृत किया जा सकता है:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. औद्योगिक गतिविधियाँ:\u003c/b\u003e औद्योगिक प्रक्रियाएँ औद्योगिक कचरे के अनुचित निपटान, रासायनिक फैल या भंडारण टैंकों से रिसाव के माध्यम से प्रदूषकों को मिट्टी में छोड़ सकती हैं। भारी धातु, सॉल्वैंट्स, पेट्रोलियम उत्पाद और जहरीले रसायन औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े आम प्रदूषक हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. कृषि पद्धतियाँ:\u003c/b\u003e गहन कृषि पद्धतियाँ, जैसे कि रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, शाकनाशियों और पशुधन अपशिष्ट का अत्यधिक उपयोग, मृदा प्रदूषण में योगदान कर सकता है। ये पदार्थ, जब अनुपयुक्त या बड़ी मात्रा में उपयोग किए जाते हैं, मिट्टी को दूषित कर सकते हैं, मिट्टी की उर्वरता, पानी की गुणवत्ता और पौधों और जानवरों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. अनुचित अपशिष्ट निपटान:\u003c/b\u003e घरेलू कचरे, निर्माण मलबे और खतरनाक सामग्रियों के अनुचित निपटान सहित अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं से मृदा प्रदूषण हो सकता है। जिन लैंडफिल और डंपसाइटों को ठीक से डिज़ाइन या प्रबंधित नहीं किया गया है, वे अंतर्निहित मिट्टी और आसपास के भूजल को दूषित कर सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. खनन गतिविधियाँ:\u003c/b\u003e खनन कार्य प्रदूषकों जैसे भारी धातुओं, एसिड और जहरीले रसायनों को मिट्टी में छोड़ सकते हैं। खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण के परिणामस्वरूप मिट्टी का क्षरण, क्षरण और अत्यधिक दूषित क्षेत्रों का निर्माण हो सकता है, जिन्हें माइन टेलिंग के रूप में जाना जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. दूषित जल स्रोत: \u003c/b\u003eदूषित जल से सिंचाई या आस-पास के जल निकायों से प्रदूषकों के रिसाव से मृदा प्रदूषण हो सकता है। पानी में प्रदूषक, जैसे औद्योगिक अपशिष्ट जल या अनुपचारित सीवेज, मिट्टी द्वारा अवशोषित किया जा सकता है, इसकी गुणवत्ता और इसमें उगाई जाने वाली फसलों को प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसतत खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने, पारिस्थितिक तंत्र संतुलन बनाए रखने और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मृदा स्वास्थ्य की रक्षा और संरक्षण महत्वपूर्ण है।\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003eप्रदूषण के उपाय\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  प्रदूषण को रोकना हमरी जिम्मेदारी है। इसे अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे\n  जाकर इसका परिणाम\u0026nbsp;और खतरनाक होगा। अभी हमारे सामने इसके कारण कई परेशानी\n  उत्पन्न हो रहा है। हवा बहुत दुषित होने लगा है।\u0026nbsp; कई प्रकार की नयी बीमारी\n  जन्म ले रही है। पर्यावण में कई अनपेक्षित परिवर्तन हो रहे है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदुषण को कम करने के लिए\u0026nbsp;हमें जितना हो सके पेड़ लगाना होगा है। पेड़\n  कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखती है और ऑक्सीजन को वातावरण में उत्सर्जित करती हैं।\n  जिससे पर्यावरण में संतुलन बना रहता हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कम से कम डीजल, पेट्रोल से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे की,\n  हानि कारक गैस की उत्सर्जन कम होगा। बैटरी से चलने वाले वाहन का उपयोग इसके लिए\n  उत्तम होगा। साईकल का इतेमाल करना उपयोगी होगा।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कारखानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए। सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए\n  उपाय ढूढ़ना होगा। कारखानों में एक पैरामीटर के ऊपर प्रदूषण होता है। तो उस\n  फ़ैक्टरी को बंद करना चाहिए या प्रदूषण काम हो ऐसी कारखानों का परिवर्तन करने का\n  आदेश चाहिए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  प्रदूषण के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया से जानकारी प्राप्त कर सकते\n  है और आपको जो अच्छा लगे उसे निबंध में जोड़ सकते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/9222299224169239208"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/9222299224169239208"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/08/pollution-essay-in-hindi.html","title":"प्रदूषण किसे कहते हैं - pradushan kya hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-hY-vq14I6II/YHP0cwOlUPI/AAAAAAAAEpg/oqj2e-Es8LUzWu67OmeMxhq-kTj1vYQ1ACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h214/1626a330d529b997e27e173806762ace.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8109132531452658412"},"published":{"$t":"2023-04-28T23:24:00.005+05:30"},"updated":{"$t":"2023-07-26T08:25:15.051+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जनसंख्या किसे कहते है - jansankhya kise kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eनमस्कार आपका स्वगत हैं। इस पोस्ट में जनसंख्या से जुडी जानकारी दी गयी हैं। आसा करता हूँ की आपको पसंद आएगा। जनसंख्या शब्द आपने कई बार सुना होगा। आखिर इसका अर्थ क्या हैं और जनसंख्या किसे कहते है ? चलिए जानते हैं।\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eजनसंख्या एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या को दर्शाता है। जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवास और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर यह भिन्न हो सकता है। सामान्य शब्दों में लोगों की संख्या को ही जनसंख्या कहा जाता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजनगणना के माध्यम से जनसंख्या का पता लगया जाता हैं। हमारे देश में हर 10 साल में जनगणना की जाती हैं। 2023 के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या\u0026nbsp;142 करोड़ हैं जबकि विश्व की अनुमानित जनसंख्या 7.832 अरब है। वर्तमान में भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए अब विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिक\u0026nbsp;जनसंख्या होने के कई फायदे और नुकसान होते हैं। अधिक लोग होंगे तो अधिक भोजन, पानी और संसाधन की आवश्यता होगी और बेरोजगारी भी बढ़ेगी। जबकि सस्ता मजदूर और विकास में अधिक जनसंख्या लाभ पहुँचता हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eबढ़ती जनसंख्या के लाभ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eकई विशेषज्ञों का मानना हैं की अधिक जनसंख्या अपने आप में कोई समस्या नहीं है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कुछ संभावित लाभ इस प्रकार हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउच्च जनसंख्या घनत्व से सहयोग और विचार में वृद्धि होती है, जो नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। एक बड़ी आबादी में विभिन्न संस्कृतियों के लोगों रहते है, जिससे समाज में अधिक विविधता और समृद्धि आती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिक आबादी होने कारण वस्तुओं और सेवाओं की अधिक मांग में वृद्धि होती है, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही जनसंख्या अधिक होने के कारण श्रम शक्ति सस्ती और आसानी से प्राप्त जाती है, जो व्यवसायों और उद्योगों के लिए फायदेमंद होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये संभावित लाभ चुनौतियों के साथ आती हैं, जैसे संसाधनों और बुनियादी ढांचे की कमी तथा प्रकृति पर प्रतिकूल प्रभाव\u0026nbsp; पड़ता हैं। बढ़ती हुई आबादी अच्छा है या नहीं यह कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें जीवन की गुणवत्ता शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eबढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eबढ़ती हुई जनसंख्या के कारण समाज पर नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। बढ़ती जनसंख्या के कुछ दुष्परिणाम इस प्रकार हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती है, भोजन, पानी और ऊर्जा जैसे संसाधनों की मांग बढ़ती जाती है। इससे पर्यावरण पर दबाव पड़ता है और प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो सकती है। जनसंख्या बढ़ती है तो लोगों को आवास, सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसे बुनियादी जरूरतों की कमी आने लगती है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhXgnKABC5x0518XjTIN2XG-P3p_9ZC70r7HDzNoQjjHHyMBy71ZNSjVnuFdheQt5nes0IDppE4663EzZ4g8jSeP_idhrH1BdYD8kBkbgoJx6M_pNiCUvg49Mbf940GPB5Js8FPAHPCXkQcrim5CZn6_Jk-6q8xz0UUAyb9zr0loEWL0402GjN201bHxg/s600/20230429_153021.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जनसंख्या किसे कहते है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"398\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhXgnKABC5x0518XjTIN2XG-P3p_9ZC70r7HDzNoQjjHHyMBy71ZNSjVnuFdheQt5nes0IDppE4663EzZ4g8jSeP_idhrH1BdYD8kBkbgoJx6M_pNiCUvg49Mbf940GPB5Js8FPAHPCXkQcrim5CZn6_Jk-6q8xz0UUAyb9zr0loEWL0402GjN201bHxg/w320-h212/20230429_153021.webp\" title\u003d\"जनसंख्या किसे कहते है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eयह यातायात में भीड़ और अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाओं को जन्म दे सकता है। जनसंख्या बढ़ने से पर्यावरण का क्षरण होता है क्योंकि संसाधनों की माँग अधिक हो जाती हैं जिससे प्रदूषण का स्तर उच्च हो जाता है। इससे जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और जैव विविधता को हानि पहुँचती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुल मिलाकर बढ़ती हुई जनसंख्या के प्रभाव विभिन्न कारकों पर निर्भर करते हैं जैसे कि आर्थिक विकास का स्तर, सरकार की नीतियां और संसाधनों की उपलब्धता आदि।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व की जनसंख्या कितनी है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e2021 तक दुनिया की आबादी लगभग 7.9 बिलियन थी। प्रति वर्ष लगभग 1.05% की वर्तमान वृद्धि दर के साथ, विश्व जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दुनिया की आबादी 2050 तक 9.7 अरब और सदी के अंत तक 10.9 अरब तक पहुंच जाएगी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजनसंख्या वृद्धि की दर विभिन्न क्षेत्रों और देशों के बीच भिन्न है। कुछ देशों में तेजी से जनसंख्या वृद्धि हो रही है और अन्य स्थानों पर घटती जा रही है। जनसंख्या वृद्धि विभिन्न कारकों से प्रभावित होती है। जिनमें प्रजनन दर, मृत्यु दर, प्रवासन और सरकारी नीतियां शामिल होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजनसंख्या में वृद्धि का खाद्य, संसाधन, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। नीति निर्माताओं के लिए जनसंख्या वृद्धि का प्रभावों पर विचार करना और इन चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियां बनाना महत्वपूर्ण होता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपरिवार नियोजन, समानता, गरीबी, स्वास्थ्य और मानव अधिकारों जैसे मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। यह 1989 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित किया गया था, और तब से प्रतिवर्ष मनाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व जनसंख्या दिवस का विषय प्रत्येक वर्ष बदलता रहता है, लेकिन इसका व्यापक लक्ष्य व्यक्तियों और परिवारों की भलाई को बढ़ावा देना और विकास सुनिश्चित करना है। जनसंख्या से जुड़े मुद्दों के बारे में\u0026nbsp; जानकारी साझा करना इसका मुख्य उदेश्य हैं। दुनिया भर के विभिन्न संगठनों, सरकारों द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व जनसंख्या दिवस पर लोगों को जीवन में सुधार लाने और सतत विकास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसमें प्रजनन स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों का समर्थन किया जाता हैं। साथ ही परिवार नियोजन और शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दिया जाता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत की जनसंख्या\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e2021 तक भारत की जनसंख्या लगभग 1.366 बिलियन थी। यह चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश था। लगभग 1.2% प्रति वर्ष की वर्तमान वृद्धि दर के साथ, भारत की जनसंख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रही है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजनसंख्या में वृद्धि का भारत के विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढाँचे से संबंधित चुनौतियाँ शामिल हैं। भारत सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों को लागू किया है। जिनमें परिवार नियोजन, शिक्षा और कौशल कार्यक्रम और स्वास्थ्य देखभाल शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदेश भर में बोली जाने वाली 1,600 से अधिक भाषाओं के साथ, भारत की जनसंख्या महत्वपूर्ण विविधता की विशेषता रखता है। यह विविधता भारत की संस्कृति, भोजन और परंपराओं में भी देखा जा सकता है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8109132531452658412"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8109132531452658412"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/08/janasankhya-vrddhi-ke-prabhaav.html","title":"जनसंख्या किसे कहते है - jansankhya kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhXgnKABC5x0518XjTIN2XG-P3p_9ZC70r7HDzNoQjjHHyMBy71ZNSjVnuFdheQt5nes0IDppE4663EzZ4g8jSeP_idhrH1BdYD8kBkbgoJx6M_pNiCUvg49Mbf940GPB5Js8FPAHPCXkQcrim5CZn6_Jk-6q8xz0UUAyb9zr0loEWL0402GjN201bHxg/s72-w320-c-h212/20230429_153021.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-2375609471259247759"},"published":{"$t":"2022-12-25T23:34:00.022+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-03T06:04:22.000+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कैसे हुई"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003e\n  मरुस्थल या रेगिस्तान ऐसी जगह होती है। जहां पर रेत ही रेत दिखाई देती है और\n  वर्षा नाममात्र की होती है। नीचे दिए गए चित्र में आपको रेगिस्तान दिखाई दे रहा\n  होगा। इन क्षेत्रों में पानी की इतनी कमी होती हैं की पेड़ पौधे और छोटे छोटे घास\n  भी नहीं उग पाते हैं। जिसके कारण मिट्टी का कटाव अधिक होता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भारत के सबसे बड़े रेगिस्तान की बात करें तो वह है, थार का मरुस्थल जो भारत और\n  पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कैसे हुई इसके बारे में वैज्ञानिकों के दो मत हैं।\n  कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि टेक्टोनिक प्लेट की परिवर्तन से इस क्षेत्र में\n  मरुस्थल की उत्पत्ति हुई है। जो इससे पहले एक हरा भरा मैदान हुआ करता था।\n\u003c/p\u003e\n\n\u003cp\u003e\n  कुछ वैज्ञानिक का यह मत है कि यह क्षेत्र कालांतर में समुद्र के अन्दर समुद्र था।\n  जो समय के साथ धीरे-धीरे पानी से बाहर आता गया और मानवीय गतिविधियों के कारण यह\n  क्षेत्र मरुस्थल में परिवर्तित हो गया।\n\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj8pd7n5Rx4VhZmkI5Z_C_yhUimImztHG5Ms_96vPvKDZY6fB_v8B1Jj9htH15e49GLgXKheyHfNwjQGmQaYEoPrarW4NTn-NFc9saZJ-6PnTMXlDQmwsm9N99YiH7Lrpl-iZp_L1EW3BRi6VGjmANLx83UmgCwo7Dn_afTghCmTAv36lVJhtACLPqHtt9b/s600/20231103_055745.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कैसे हुई\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"426\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj8pd7n5Rx4VhZmkI5Z_C_yhUimImztHG5Ms_96vPvKDZY6fB_v8B1Jj9htH15e49GLgXKheyHfNwjQGmQaYEoPrarW4NTn-NFc9saZJ-6PnTMXlDQmwsm9N99YiH7Lrpl-iZp_L1EW3BRi6VGjmANLx83UmgCwo7Dn_afTghCmTAv36lVJhtACLPqHtt9b/w640-h426/20231103_055745.webp\" title\u003d\"थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कैसे हुई\" width\u003d\"640\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्र से मिले पत्थर से पता चला हैं की यह 100 से\n  200 करोड़ साल पहले समुद्र हुआ करता था। साथ ही कुछ पुराने पेड़ के अवशेष भी मिले\n  हैं। जो ha बताने हैं की यहां एक समृद्ध जंगल हुआ करता था। यह सभी अवशेष भू\n  विज्ञान संग्रहालय उदयपुर में रखा गया है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  थार मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल 200000 वर्ग किलोमीटर है। जो भारत के राजस्थान,\n  पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों में तथा पाकिस्तान के सिंध और पंजाब\n  प्रांत में फैला है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2375609471259247759"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2375609471259247759"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2022/12/blog-post.html","title":"थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कैसे हुई"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj8pd7n5Rx4VhZmkI5Z_C_yhUimImztHG5Ms_96vPvKDZY6fB_v8B1Jj9htH15e49GLgXKheyHfNwjQGmQaYEoPrarW4NTn-NFc9saZJ-6PnTMXlDQmwsm9N99YiH7Lrpl-iZp_L1EW3BRi6VGjmANLx83UmgCwo7Dn_afTghCmTAv36lVJhtACLPqHtt9b/s72-w640-c-h426/20231103_055745.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-311332991939486683"},"published":{"$t":"2021-08-01T19:57:00.008+05:30"},"updated":{"$t":"2023-11-07T02:30:18.141+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"सहारा मरुस्थल कहाँ है - Sahara desert in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eसहारा मरुस्थल\u0026nbsp;दुनिया का सबसे बड़ा गर्म रेगिस्तान है। यह अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा रेगिस्तान है। सहारा पृथ्वी पर सबसे कठोर वातावरण में से एक है, जो 3.6 मिलियन वर्ग मील को कवर करता है। यह लगभग\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;जीतना बड़ा हैं। रेगिस्तान का नाम अरबी शब्द aḥrā से आया है, जिसका अर्थ गर्म भूमि होता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसहारा मरुस्थल कहाँ है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अफ्रीका में स्थित, सहारा रेगिस्तान महाद्वीप के एक बड़े हिस्से को कवर करता है। रेगिस्तान का क्षेत्रफल लगभग 92 लाख वर्ग किलोमीटर है।\u0026nbsp;यह अटलांटिक महासागर से लाल सागर तक फैला हुआ है।\u0026nbsp;जिसकी लंबाई 5600 किलोमीटर और चौड़ाई 1300 किलोमीटर है।\u0026nbsp;सहारा मरुस्थल क्षेत्रफल के आधार पर भारत के दूने से अधिक है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसहारा की सीमा पश्चिम में अटलांटिक महासागर, पूर्व में लाल सागर, उत्तर में भूमध्य सागर और दक्षिण में साहेल सवाना से लगती है। विशाल रेगिस्तान 11 देशों में फैला है। जिसमें अल्जीरिया, चाड, मिस्र, लीबिया, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, नाइजर, पश्चिमी सहारा, सूडान और ट्यूनीशिया देश आते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसहारा रेगिस्तान में विभिन्न प्रकार की विशेषताएं पायी जाती हैं। जिसमें रेत के टील सबसे प्रसिद्ध है, जिन्हें अक्सर फिल्मों में दर्शाया जाता है। टीले लगभग 600 फीट ऊंचे हो सकते हैं, लेकिन वे पूरे रेगिस्तान के लगभग 15 प्रतिशत हिस्से को ही कवर करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjN1Wjz8c3CXouIefzhyphenhyphenQ3lQZ_oJ_Vq_3wLjB-ZHU4K0v4f9Nl4jTZ1ZmwQmdpgdh_xx3gCnaw7D4Y_4ZBLw8kfCcRcFGY8S8_dXeE_te_Ifr_0dm7lOv9DArI3XW1hsRGA2Yq3Vb9tu967OktSZbwHyE-bsRqLTUN1wBt8zTQx2u_0o63yAb0PgpK36Sq2/s600/20231103_061602.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सहारा मरुस्थल कहाँ है - Sahara desert in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjN1Wjz8c3CXouIefzhyphenhyphenQ3lQZ_oJ_Vq_3wLjB-ZHU4K0v4f9Nl4jTZ1ZmwQmdpgdh_xx3gCnaw7D4Y_4ZBLw8kfCcRcFGY8S8_dXeE_te_Ifr_0dm7lOv9DArI3XW1hsRGA2Yq3Vb9tu967OktSZbwHyE-bsRqLTUN1wBt8zTQx2u_0o63yAb0PgpK36Sq2/w320-h213/20231103_061602.webp\" title\u003d\"सहारा मरुस्थल कहाँ है - Sahara desert in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअन्य स्थलिय विशेषताओं में पहाड़, पठार, रेत और बजरी से ढके मैदान, नमक के क्षेत्र, बेसिन और अवसाद शामिल हैं। चाड में एक \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी \u003c/a\u003eपर्वत हैं जिसे एमी कौसी कहा जाता हैं। यह पर्वत सहारा का सबसे ऊंचा स्थान है और मिस्र में स्थित कतरा डिप्रेशन सबसे गहरा स्थान है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालाँकि पूरे क्षेत्र में पानी की कमी है, सहारा में दो स्थायी नदियाँ नील और नाइजर हैं। यहाँ कम से कम 20 मौसमी झीलें और विशाल जलभृत हैं। जो 90 से अधिक प्रमुख रेगिस्तानी क्षेत्रों में पानी का प्राथमिक स्रोत हैं। जल प्रबंधन अधिकारियों को एक बार डर था कि सहारा में जलभृत अति प्रयोग के कारण जल्द ही सूख जाएंगे लेकिन 2013 में जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला कि जलभृत अभी भी बारिश और अपवाह के माध्यम से जल से परिपूर्ण हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eवनस्पति और जीव\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eसहारा मरुस्थल में कठोर शुष्क परिस्थिति होने बावजूद यह कई पौधे और जानवर का\u0026nbsp;घर हैं। विश्व वन्यजीव कोष के अनुसार, सहारा में पौधों की लगभग 500 प्रजातियां, 70 स्तनधारी प्रजातियां, 90 एवियन प्रजातियां और 100 सरीसृप प्रजातियां पायी जाती हैं। इसके आलावा मकड़ियों, बिच्छुओं और अन्य छोटे आर्थ्रोपोड भी यहाँ रहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऊंट सहारा के सबसे प्रतिष्ठित जानवरों में से एक हैं। जो सहारा मरुस्थल का बड़े स्तनधारी जीवो में से एक हैं। ऊंटों को लगभग 3000 साल पहले पालतू बनाया गया था। जिसका इस्तेमाल इन रेगिस्तानी इलाको में परिवहन के लिए किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-AGOBrbq4K5c/YQdMaxmQdhI/AAAAAAAAFRg/6pGvwmIkJmUilpd69-5DAlNYx_V_ThHRgCLcBGAsYHQ/s600/20210802_070703.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सहारा मरुस्थल कहाँ है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"401\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"214\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-AGOBrbq4K5c/YQdMaxmQdhI/AAAAAAAAFRg/6pGvwmIkJmUilpd69-5DAlNYx_V_ThHRgCLcBGAsYHQ/w320-h214/20210802_070703.webp\" title\u003d\"सहारा मरुस्थल कहाँ है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eऊंट को रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है। यह जीव गर्म वातावरण के लिए अनुकूल हैं। ऊंट की पीठ पर वसा को जमा करने वाले कूबड़ होते हैं, जिसका उपयोग ऊँट भोजन न मिलने पर ऊर्जा के रूप में करता है। ऊंट बिना पानी के एक सप्ताह से अधिक और बिना\u0026nbsp;भोजन के महीनों तक जीवित रह सकता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसहारा में और कई वन्य जीव रहते हैं जिसमें गज़ेल, मृग, चीता, कैराकल, रेगिस्तानी लोमड़ी और जंगली कुत्ते शामिल हैं। यहाँ कई रेंगने वाले जीवों की प्रजातियां पायी जाती हैं, जिनमें सांपों और छिपकलियों की कई प्रजातियां शामिल हैं। इसके अलावा बीटल, बिच्छू और कई प्रकार की चींटियां यहाँ पायी जाती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकई पौधों की प्रजातियों ने इस शुष्क परिस्थितियों के अनुकूलित अपने आप को ढाल लिया है। यहाँ पाए जाने वाले पेड़ पौधे पानी की जरुरत को पूरा करने के लिए अपने जड़ को भूमिगत जल तक फैलाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस रेगिस्तान में सबसे अधिक शुष्क क्षेत्र होने के कारण बहुत कम पेड़ पौधे पाए जाते है, लेकिन नील घाटी क्षेत्र में जैतून के पेड़, खजूर और विभिन्न झाड़ियों सहित विभिन्न पेड़-पौधे की प्रजातियाँ पायी जाती हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसहारा मरुस्थल की जलवायु\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e2019 में साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सहारा हर 20,000 वर्षों में एक शुष्क, दुर्गम रेगिस्तान और एक हरे-भरे, हरे-भरे नखलिस्तान से वैकल्पिक रूप से बदल जाता है। अध्ययन के लेखकों ने पिछले 240,000 से सहारा से धूल जमा युक्त समुद्री तलछट की जांच की। वर्षों।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eटीम ने पाया कि सूखे और हरे रंग के सहारा के बीच का चक्र पृथ्वी की धुरी के झुकाव में मामूली बदलाव के अनुरूप है, जो मानसून की गतिविधि को भी संचालित करता है। जब पृथ्वी की धुरी ने उत्तरी गोलार्ध को सूर्य के करीब एक डिग्री आज के 23.5 डिग्री के बजाय लगभग 24.5 डिग्री झुका दिया, तो उसे अधिक धूप मिली, जिससे मानसून की बारिश में वृद्धि हुई और इसलिए, सहारा में हरे भरे परिदृश्य का समर्थन किया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपुरातत्वविदों ने प्रागैतिहासिक गुफा और रॉक पेंटिंग और अन्य पुरातत्व अवशेषों की खोज की है, जो इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कभी हरे भरे सहारा में जीवन कैसा था। मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों से पता चलता है कि लगभग 7,000 साल पहले, प्राचीन चरवाहों ने पशुओं को उठाया और पौधों को काटा जो अब एक शुष्क रेगिस्तान है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलेकिन पिछले 2000 वर्षों से सहारा की जलवायु काफी स्थिर रही है। उत्तरपूर्वी हवाएँ रेगिस्तान के ऊपर की हवा को सुखा देती हैं और गर्म हवाएँ भूमध्य रेखा की ओर ले जाती हैं। ये हवाएं असाधारण गति तक पहुंच सकती हैं और गंभीर धूल भरी आंधी का कारण बन सकती हैं जो स्थानीय दृश्यता को शून्य तक गिरा सकती हैं। सहारा से धूल दुनिया के विपरीत दिशा में व्यापारिक हवाओं पर यात्रा करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसहारा में वर्षा शून्य से लेकर लगभग 3 इंच प्रति वर्ष वर्षा होती है, कुछ स्थानों पर एक समय में कई वर्षों तक वर्षा नहीं होती है। कभी-कभी अधिक ऊंचाई पर बर्फ गिरती है। दिन के समय का गर्मी का तापमान अक्सर 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) से अधिक होता है और रात के समय लगभग ठंड के तापमान तक गिर सकता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजलवायु परिवर्तन का प्रभाव\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eजर्नल ऑफ क्लाइमेट में प्रकाशित 2018 के एक अध्ययन के अनुसार, 1920 के बाद से सहारा रेगिस्तान का क्षेत्रफल लगभग 10 प्रतिशत बढ़ गया है। जबकि सहारा सहित सभी रेगिस्तान, शुष्क मौसम के दौरान क्षेत्र में वृद्धि और गीले मौसम के दौरान कमी, प्राकृतिक जलवायु चक्रों के साथ मानव-कारण जलवायु परिवर्तन, सहारा रेगिस्तान को अधिक बढ़ने और कम सिकुड़ने का कारण बन रहे हैं। अध्ययन के लेखकों ने अनुमान लगाया कि रेगिस्तान के विस्तार का लगभग एक तिहाई मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन के कारण था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने का एक प्रस्ताव सहारा में बड़े पैमाने पर पवन और सौर फार्म स्थापित करना है। जर्नल साइंस में प्रकाशित 2018 के एक अध्ययन के अनुसार, खेत स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेंगे और वातावरण में प्रवेश करने वाली ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को कम करेंगे, और आसपास के क्षेत्र में वर्षा में वृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसिमुलेशन से पता चला है कि पवन खेतों वाले क्षेत्रों में, विशेष रूप से रात में, गर्म तापमान होगा, जो हवा के टर्बाइनों द्वारा वातावरण में उच्च से सतह पर गर्म हवा लाने के कारण होता है। शोधकर्ताओं ने यह भी अनुमान लगाया कि पवन खेतों पर वर्षा औसतन दोगुनी होगी, जिससे वनस्पति में अनुमानित 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी। सौर फार्म सिमुलेशन ने समान परिणाम उत्पन्न किए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअध्ययन के लेखकों ने भविष्यवाणी की है कि एक बड़े पैमाने पर सहारन पवन फार्म लगभग 3 टेरावाट विद्युत शक्ति का उत्पादन करेगा, जबकि एक बड़े पैमाने पर सहारन सौर फार्म लगभग 79 टेरावाट का उत्पादन करेगा, जो कि 2017 में खपत की गई विद्युत शक्ति के 18 टेरावाट से काफी अधिक है। अतिरिक्त ऊर्जा को अधिक बड़े पैमाने की परियोजनाओं में लगाया जा सकता है जिसमें कृषि और जल विलवणीकरण में वृद्धि शामिल है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/311332991939486683"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/311332991939486683"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/08/sahara-desert-in-hindi.html","title":"सहारा मरुस्थल कहाँ है - Sahara desert in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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की सबसे लंबी नदी कौन सी है - largest river in the world in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eनदी हमारे लिए महतपूर्ण हैं इससे हमे कृषि और अन्य जरूरतों के लिए जल प्राप्त होता हैं। इस पोस्ट में हम विश्व की सबसे लंबी नदियो के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह पता करना इतना आसान नहीं है कि एक नदी कितनी लंबी है। कई सहायक   नदियाँ एक बड़ी नदी बनाती हैं, तो आप कैसे परिभाषित करेंगे   कि नदी वास्तव में कहाँ से शुरू होती है। वैज्ञानिकों द्वारा विश्व की सबसे लंबी नदी के नील नदी को माना गया हैं। जिसकी लंबाई 6650 किलोमीटर हैं। नीचे विश्व के तीन प्रमुख नदियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व की सबसे लंबी नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eनील नदी\u0026nbsp;\u0026nbsp;4,132 मील\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eअमेज़न नदी\u0026nbsp;4,000 मील\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eयांग्त्ज़ी नदी\u0026nbsp;3,915 मील\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनील नदी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  नील नदी उत्तरपूर्वी अफ्रीका में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। नील   नदी अफ्रीका की नहीं बल्कि दुनिया की सबसे लंबी नदी है। इसकी कुल लंबाई 6650 किलोमीटर है। यह दक्षिण से उत्तर की ओर बहने वाली नदी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनील नदी अफ्रीका के 11 देशों से होकर बहती हैं - तंजानिया,   युगांडा, रवांडा, बुरुंडी, कांगो, केन्या, इथियोपिया, इरिट्रिया, दक्षिण सूडान,   सूडान गणराज्य और मिस्र। नील मिस्र और सूडान का प्रमुख जल स्रोत   है। इस नदी में कई लोग मछली पकड़कर अपना जीवन यापन करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अल काहिरा और भूमध्य सागर के बीच का डेल्टा पोषक   तत्वों से भरपूर है। नील नदी के किनारे उपजाऊ मिट्टी पाई जाती है। अंतरिक्ष से नील नदी के   हरे-भरे तटों और बंजर रेगिस्तान के बीच का अंतर स्पष्ट देखा जा सकता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनील की सहायक नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  नील की दो प्रमुख सहायक नदियाँ व्हाइट नील और ब्लू नील हैं। व्हाइट नील को   नील नदी का प्राथमिक धारा माना जाता है। हालाँकि, ब्लू नील अधिकांश   पानी का स्रोत प्रवाहित करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  व्हाइट नील ब्लू नील की तुलना में काफी लंबी है यह मध्य अफ्रीका के ग्रेट लेक्स से निकलती है। यह   तंजानिया, युगांडा और दक्षिण सूडान से होकर उत्तर की ओर बहती है।   ब्लू नील इथियोपिया के टाना झील से निकलती हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg2c_sABNFzGF6_YAWaun0x_lsdV0NfqAkryShw4ZCXT3MR1_NI-uN4rxFjIXvJ_NQcbCrGDi7zgcjSClZKqNnyZACqHpYa5rVi7fTy_BXanmM0OauaYZcANCRj88bT2TI1-CX9lSzEKs6BshzranVxDxPR5RyAwiUCuX_5q-KKel5A3iAhXfru88VAxA/s600/20230329_062246.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"विश्व की सबसे लंबी नदी कौन सी है - largest river in the world in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg2c_sABNFzGF6_YAWaun0x_lsdV0NfqAkryShw4ZCXT3MR1_NI-uN4rxFjIXvJ_NQcbCrGDi7zgcjSClZKqNnyZACqHpYa5rVi7fTy_BXanmM0OauaYZcANCRj88bT2TI1-CX9lSzEKs6BshzranVxDxPR5RyAwiUCuX_5q-KKel5A3iAhXfru88VAxA/w320-h213/20230329_062246.webp\" title\u003d\"विश्व की सबसे लंबी नदी कौन सी है - largest river in the world in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eनील नदी का उत्तरी भाग लगभग पूरी तरह से सूडानी रेगिस्तान के माध्यम से मिस्र तक   उत्तर में बहती है। नदी अलेक्जेंड्रिया में भूमध्य सागर में मिलती है। मिस्रऔर   सूडानी राज्य प्राचीन काल से ही नदी पर और इसकी वार्षिक बाढ़ पर निर्भर रहे हैं।   मिस्र की अधिकांश आबादी और शहर उत्तर में नील नदी घाटी के हिस्सों में स्थित हैं।   प्राचीन मिस्र के लगभग सभी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल नदी के किनारे विकसित हुए   हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनिल नदी का उद्गम स्थल\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  नील नदी प्रणाली में दो प्रमुख सहायक नदियाँ हैं जो संयुक्त रूप से मौजूदा नील   नदी, व्हाइट नाइल बनाती हैं, जो नील नदी के प्रवाह और ब्लू नाइल को बहुत कम पानी   की आपूर्ति करती है। व्हाइट नाइल का स्रोत लुविरोन्ज़ा नदी है, ब्लू नाइल का   स्रोत इथियोपियाई हाइलैंड्स में गिलगेल एब्बे वाटरशेड में टाना झील है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Jv0CSj3ZxfQ/YQTSdxO1dKI/AAAAAAAAFRA/t7Y9zMHX-ckLXJmfI4pW5GHMj8ufKOEFQCLcBGAsYHQ/s600/20210731_100149.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"विश्व की सबसे लंबी नदी कौन सी है - largest river in the world in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"600\" data-original-width\u003d\"374\" height\u003d\"320\" 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रस्सी बनाना, लेकिन अब तक इसका सबसे महत्वपूर्ण उपयोग कागज बनाने में किया जाता   था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नदी के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग दूसरों के साथ व्यापार करने के अलावा,   प्रारंभिक मिस्रियों ने नदी का उपयोग स्नान, पीने, मनोरंजन और परिवहन के लिए किया   करते थे।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आज, 95 प्रतिशत मिस्रवासी नील नदी के कुछ किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। नहरें   नील नदी से खेतों को सींचने और शहरों को सहारा देने के लिए पानी लाती हैं। नील   नदी कृषि और मछली पकड़ने के लिए आदर्श है। नील नदी ने हजारों वर्षों से एक   महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग के रूप में भी काम किया है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आज, अल काहिरा के कुछ निवासियों ने भीड़-भाड़ वाली सड़कों से बचने के लिए निजी   स्पीड बोट, पानी की टैक्सियों की तरह उपयोग करना शुरू कर दिया है। मिस्र में   असवान हाई डैम जैसे बांध हैं जिससे जलविद्युत शक्ति का निर्माण किया जाता हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअमेज़न\u0026nbsp;नदी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  अमेज़न नदी पानी के विस्तार और मात्रा के मामले में दुनिया में सबसे बड़ी है।   6992 किलोमीटर के साथ, यह दक्षिण अमेरिका के अमेज़न के जंगल से होकर गुजरता है   और अटलांटिक महासागर में बहता है। इसकी एक हजार से अधिक सहायक नदियाँ हैं, जैसे   कि मदीरा, नीग्रो और जपुरा आदि। इनके सहायक नादिया ग्रह पर 10 सबसे बड़ी नदियों   में से हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKTe4t29KUwCYMriWZh8Kc5hO-BD09L_ZRTWfOdhWitu7KlvtPV8zsl6HONwiTgHXj1phIcdxbaYnhBtj439OsaFIP-7_FEWsbsJ-_7sI7ZzQaTHRhtCCAIQ_RDYC1053wywkyXeC-7WkhxskOV7unFMi8k_HBjDYAIH5Rukc0r59DOakHZtq-CdHoFw/s600/20230329_215355.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अमेज़न नदी का नक्शा - map\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiKTe4t29KUwCYMriWZh8Kc5hO-BD09L_ZRTWfOdhWitu7KlvtPV8zsl6HONwiTgHXj1phIcdxbaYnhBtj439OsaFIP-7_FEWsbsJ-_7sI7ZzQaTHRhtCCAIQ_RDYC1053wywkyXeC-7WkhxskOV7unFMi8k_HBjDYAIH5Rukc0r59DOakHZtq-CdHoFw/w320-h213/20230329_215355.webp\" title\u003d\"अमेज़न नदी का नक्शा - map\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  नील नदी को आमतौर पर दुनिया की सबसे लंबी नदी के रूप में माना जाता है, जिसकी   लंबाई लगभग 6852 किमी है, और अमेज़न 6400 किमी के साथ दूसरे स्थान पर है। लेकिन   2007 और 2008 में किए गए ब्राजीलियाई और पेरू के अध्ययनों ने अमेज़न के स्रोत   में दक्षिणी अमेज़न बेसिन और पैरा डो टोकैंटिन्स मुहाना के ज्वारीय चैनलों की   खोज की और इस प्रकार निष्कर्ष निकाला कि अमेज़न की लंबाई 6 992 किमी है, इसलिए,   नील नदी से भी लंबा हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca 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लेकिन खतरनाक   जीवों का घर है। लेकिन अमेज़ॅन नदी की गहराई में दुनिया की अविश्वसनीय और भयानक   जीव शार्क रहते हैं। यह एक आदम खोर मछली हैं जिसके नुकीले दांत होते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयांग्त्ज़ी नदी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  यांग्त्ज़ी नदी एशिया की सबसे लंबी नदी है और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है।   एक देश में पूरी तरह से बहने वाली सबसे लंबी नदी तिब्बत में तंगगुला पर्वत के   हिमनद से अपनी यात्रा शुरू करती है और शंघाई शहर के पास पूर्वी चीन सागर\u0026nbsp;   मिलने से पहले लगभग 3,915 मील यात्रा करती है। नदी चीन की10 प्रांतों से होकर   बहती है या उसकी सीमा बनाती है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca 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चीन में, नदी को चांग जियांग कहा जाता है। जिसका   अर्थ है \"लंबी नदी\", जबकि यांग्त्ज़ी नाम नदी के छोटे से हिस्से केलिए आरक्षित   है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नदी विभिन्न प्रकार के इलाकों से होकर बहती है, जिसमें उच्च पठार और तराई के   मैदान शामिल हैं, लेकिन इसकी अधिकांश यात्रा - इसका लगभग तीन-चौथाई - पहाड़ी   क्षेत्रों से होती है। इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार, नदी की लगभग 700   सहायक नदियाँ हैं। जिसमें आठ प्रमुख नदियाँ - यालुंग, मिन, जियालिंग, हान, वू,   युआन, जियांग और गण हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEinQ7CJXd2DfkjccUPQQQ-B7kXVT-j9DdlcXholtc_FDyHWYA_Hyr3333HHRtdb9wddO1ROcEH7SHQzx2ev7kJtJ4ZZTISb8h1pl4ftMNTqTmJ23mYm0wl7AOQ-cXOQaFI8WSNsT90PQz6euJiBXCmsvdhEOpYW5TC3gAHJLPi0NIuiT9y1GNdW7G5c5g/s600/20230329_215521.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"यांग्त्ज़ी नदी\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEinQ7CJXd2DfkjccUPQQQ-B7kXVT-j9DdlcXholtc_FDyHWYA_Hyr3333HHRtdb9wddO1ROcEH7SHQzx2ev7kJtJ4ZZTISb8h1pl4ftMNTqTmJ23mYm0wl7AOQ-cXOQaFI8WSNsT90PQz6euJiBXCmsvdhEOpYW5TC3gAHJLPi0NIuiT9y1GNdW7G5c5g/w320-h213/20230329_215521.webp\" title\u003d\"यांग्त्ज़ी नदी\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  यांग्त्ज़ी चीनी कृषि, उद्योग और यात्रा में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह   देश का प्राथमिक जलमार्ग है, और लगभग एक तिहाई आबादी इसके बेसिन में निवेश करती   है। परंपरागत रूप से, यांग्त्ज़ी नदी को उत्तर और दक्षिण चीन के बीच एक विभाजन   रेखा माना जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत की सबसे लंबी नदी\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  गंगा नदी जिसे भारत में मां गंगा के रूप में जाना जाता है, हिंदू मान्यताओं के आधार पर गंगा सबसे पवित्र नदियों में से एक है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे लंबी नदी भी   है। इसका उद्गम उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर होता है। यह उत्तराखंड के देवप्रयाग   में भागीरथी और अलकनंदा नदियों के संगम से गंगा का जन्म होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगंगा नदी में प्रदूषण एक बड़ी   समस्या है, न केवल लोगों के लिए, बल्कि जलीय जीवों के लिए भी। नदी से 140 से अधिक   मछलियों की प्रजातियां पायी जाती हैं। गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है जो 2,525 किमी का रास्ता तय करती हैं। जबकि गोदावरी 1465 किमी के   साथ भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगंगा नदी भारतीय राज्य उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर बहती हैं। गंगा का   अंतिम भाग बांग्लादेश में समाप्त होता है। जहां गंगा बंगाल की खाड़ी में मिल   जाती है। गंगा की कुछप्रमुख सहायक नदियाँ यमुना, सोन, गोमती, घाघरा, गंडक और   कोशी हैं।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6996081642377453779"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6996081642377453779"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/07/largest-river-in-world-in-hindi.html","title":"विश्व की सबसे लंबी नदी कौन सी है - largest river in the world in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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भाटा क्या होता है - what is tide in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eज्वार भाटा क्या होता है\u0026nbsp;\u003c/b\u003eयह महत्वपूर्ण सवाल हैं जो समुद्र कीबड़ी लहरों से\u0026nbsp;सम्बंधित है। यदि आप समुद्र ⛵ तट पर गए होंगे तो आपने विशाल लहरों को जरूर देखा होगा। जो कुछ समय के लिए आता और फिर वापस चला जाता है। इसे ही ज्वर भाटा कहते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वार भाटा का कारण\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eज्वार चंद्रमा और सूर्य 🌞 के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण उत्पन्न होता है। ज्वार-भाटा का बढ़ना और गिरना प्राकृतिक दुनिया 🌎 में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समुद्र से संबंधित गतिविधियों पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eज्वार दुनिया में सबसे विश्वसनीय घटनाओं में से एक है। जैसे ही सूरज पूर्व में उगता है और रात में तारे निकलते हैं, हमें विश्वास है कि समुद्र का पानी नियमित रूप से हमारे तटों पर उठेगा और गिरेगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eज्वार बहुत लंबी अवधि की तरंगें हैं जो चंद्रमा और सूर्य द्वारा लगाए गए बलों के जवाब में महासागरों के माध्यम से चलती हैं। ज्वार महासागरों में उत्पन्न होते हैं और समुद्र तट की ओर बढ़ते हैं जहां वे समुद्र की सतह के नियमित उत्थान और पतन के रूप में दिखाई देते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजब लहर का उच्चतम भाग, या शिखा, किसी विशेष स्थान पर पहुँचती है, तो उच्च ज्वार आता है; कम ज्वार लहर के सबसे निचले हिस्से या उसके गर्त से मेल खाता है। उच्च ज्वार और निम्न ज्वार के बीच की ऊँचाई के अंतर को ज्वारीय श्रेणी कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वार भाटा और सुनामी में अंतर\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eज्वारीय तरंगें सूर्य या चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा निर्मित तरंगें हैं, और जल निकायों के स्तर में परिवर्तन का कारण बनती हैं। सुनामी भी पानी की लहरों की एक श्रृंखला है जो पानी के बड़े पिंडों के विस्थापन के कारण होती है, लेकिन भूकंपीय गड़बड़ी के कारण होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eज्वार भाटा -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;1. ज्वारीय तरंगें सूर्य या चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा निर्मित तरंगें हैं, और जल निकायों के स्तर में परिवर्तन का कारण बनती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. ज्वार की लहरें सूर्य और चंद्रमा द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. एक बदलते ज्वार की तीव्रता केवल कुछ हिस्सों में ही ध्यान देने योग्य होती है, जहां यह काफी अधिक है (बे ऑफ फंडी, कनाडा में 55 फीट जितना ऊंचा)।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. ज्वार की लहरें तटीय क्षेत्रों में सबसे अधिक देखी जाने वाली घटनाएं हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. तटीय क्षेत्र में प्रतिदिन ज्वार की लहरें आती हैं।\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-4aNc6lmd5ts/YOVQu5BrGrI/AAAAAAAAFGA/aaNnnXdD4xs1gG4VNIqlT84LXzLvuzzAwCLcBGAsYHQ/s615/Gu9QNL7.gif\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ज्वार भाटा क्या होता है - what is tide in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"477\" data-original-width\u003d\"615\" height\u003d\"248\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-4aNc6lmd5ts/YOVQu5BrGrI/AAAAAAAAFGA/aaNnnXdD4xs1gG4VNIqlT84LXzLvuzzAwCLcBGAsYHQ/w320-h248/Gu9QNL7.gif\" title\u003d\"ज्वार भाटा क्या होता है - what is tide in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eज्वार भाटा\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसुनामी -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e1.\u003cb\u003e\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपानी की लहरों की एक श्रृंखला है जो पानी के बड़े पिंडों के विस्थापन के कारण होती है। उनके पास आम तौर पर कम आयाम होता है लेकिन एक उच्च (कुछ सौ किमी लंबी) तरंग दैर्ध्य होती है। सुनामी आमतौर पर समुद्र में किसी का ध्यान नहीं जाता है लेकिन उथले पानी या भूमि में प्रमुख होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. सुनामी\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e, पनडुब्बी ज्वालामुखियों के फटने या समुद्र या महासागर में किसी गैस के बुलबुले के फूटने से उत्पन्न होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. सुनामी की तरंग दैर्ध्य 200 किलोमीटर तक हो सकती है और यह 800 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की यात्रा कर सकती है। जब सुनामी भूमि के पास उथले पानी के पास आती है, तो गति कम हो जाती है, और आयाम बहुत तेजी से बढ़ता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. अधिकांश सुनामी (80%) प्रशांत महासागर में आती हैं, लेकिन यदि अंतर्निहित कारण मौजूद हों तो किसी भी बड़े पानी के शरीर में आ सकती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. सुनामी तभी आती है जब बड़े जलाशयों में भूकंपीय विक्षोभ होता है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वार भाटा से हानि\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eज्वारीय तरंगें समुद्र की लहरें होती हैं जो समय-समय पर होती हैं और पृथ्वी और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति पर निर्भर करती हैं। यही कारण है कि हर दिन ज्वार का आगमन अलग-अलग होता है। ज्वार की लहर की ऊंचाई चंद्रमा द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल से निर्धारित होती है; इसलिए यह चंद्रमा के नए और पूर्ण चरणों के दौरान उच्चतम और चंद्रमा के चौथाई चरणों के दौरान सबसे कम है। तटीय क्षेत्रों में प्रतिदिन दो उच्च और दो निम्न ज्वार का अनुभव होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eज्वार की लहरें सूर्य और चंद्रमा दोनों के कारण होती हैं, लेकिन पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी के कारण, ज्वार की लहरों पर चंद्रमा का प्रभाव सूर्य की तुलना में बहुत अधिक होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक बदलते ज्वार की तीव्रता केवल कुछ हिस्सों तक सिमित होती\u0026nbsp;है। कनाडा में बे ऑफ फंडी जहां ज्वर की उचाई\u0026nbsp;55 फीट तक पहुंचगयी थी।\u0026nbsp;अधिक तीव्र\u0026nbsp;ज्वार में समुद्र तट पर घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता होती है और इसके परिणामस्वरूप बाढ़ आ सकती है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वार-भाटा का महत्व\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eवे पृथ्वी के भू-आकृतियों में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं। जबकि वे समुद्र तटों को नष्ट कर सकते हैं, वे खाड़ियों और इनलेट्स के निर्माण में भी मदद करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमजबूत ज्वार नदियों के निचले बाढ़ के मैदानों के निर्माण में मदद करते हैं। ये बहुत उपजाऊ होते हैं। चूंकि ज्वार-भाटे से मलबा बह जाता है, वे बंदरगाह को साफ रखने में मदद करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eठंडे देशों में, ज्वार खारे पानी को किनारे पर लाते हैं और उनकी निरंतर गति बंदरगाह को बर्फ से बंधी होने से रोकती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउच्च ज्वार के दौरान समुद्र तट के निचले इलाकों में पानी फंस जाता है जिसका उपयोग नमक के निर्माण के लिए किया जाता है। भारत में पश्चिमी तट के किनारे नमक का निर्माण इस प्रकार किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eज्वार के वैकल्पिक उत्थान और पतन मछुआरे को बाहर निकलने और ज्वार के साथ तट पर वापस लौटने में मदद करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eज्वारीय ऊर्जा तेजी से ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण गैर पारंपरिक स्रोत बनती जा रही है। इनका उपयोग कच्छ की खाड़ी और गुजरात राज्य में बिजली के उत्पादन में किया जाता है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4037761029966233720"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4037761029966233720"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/07/what-is-tide-in-hindi.html","title":"ज्वार भाटा क्या होता है - what is tide in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-4aNc6lmd5ts/YOVQu5BrGrI/AAAAAAAAFGA/aaNnnXdD4xs1gG4VNIqlT84LXzLvuzzAwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h248/Gu9QNL7.gif","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-1129448578450128688"},"published":{"$t":"2021-07-07T17:12:00.013+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:07:02.918+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"दक्षिणी गोलार्द्ध किसे कहते हैं - southern hemisphere in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eपृथ्वी को भूमध्य रेखा द्वारा दो\u0026nbsp;बराबर भागों में बांटा गया हैं। ऊपरी भाग उत्तरी गोलार्ध और नीचले भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं। इस पोस्ट में हम\u0026nbsp;दक्षिणी गोलार्द्ध के बारे में जानेंगे। पिछले पोस्ट में हम \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/northern-hemisphere-in-hindi.html\"\u003eउत्तरी\u0026nbsp;गोलार्द्ध\u003c/a\u003e के बारे में जानकारी दे चुके हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्द्ध में अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका का लगभग 90%, अफ्रीका का एक तिहाई और एशिया के कुछ क्षेत्र आते है। जबकि चार महासागर हिन्द महासागर, अटलांटिक महासागर, दक्षिणी महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर भी इसी का हिस्सा है। दक्षिणी गोलार्द्ध का 80.9 प्रतिशत पानी है। जबकि उत्तरी गोलार्ध का 60.7 प्रतिशत पानी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी के झुकाव के कारण दक्षिण\u0026nbsp;गोलार्द्ध में गर्मी का मौसम दिसंबर से फरवरी और सर्दी का मौसम जून से अगस्त तक होती है। 22 या 23 सितंबर को दिन और रात की लम्बाई समान होती हैं, जिसे वर्णाल विषुव कहते है। जबकि 20 या 21 मार्च को शरद विषुव होता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिणी गोलार्द्ध की विशेषताएँ\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध की जलवायु उत्तरी गोलार्ध की तुलना में थोड़ी हल्की होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दक्षिणी गोलार्ध में काफी अधिक महासागर और बहुत कम भूमि है। पानी गर्म होता है और जमीन की तुलना में धीमी गति से ठंडा होता है। अन्य कारण ग्रीनहाउस है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध में सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर उत्तर दिशा से होकर गुजरता है। हालांकि मकर रेखा पर सूर्य सीधे ऊपर की ओर दिखाई दे सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्द्ध के लोगों को सूर्य दाएं से बाएं पथ का अनुशरण करते दिखता है, जब उत्तरी गोलार्ध में सूर्य को दाएं\u0026nbsp;से बाएं\u0026nbsp;गति करते देखा जाता है, क्योंकि यह दक्षिणी आकाश से गुजरता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसूर्य की छाया पूरे दिन में घड़ी के सुइयों की दिशा के विपरीत घूमती है। मकर रेखा के दक्षिण से सूर्य ग्रहण को देखने पर चंद्रमा सूर्य की डिस्क पर बाएं से दाएं चलती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध के जंगलों में असाधारण विशेषताएं हैं जो उन्हें उत्तरी गोलार्ध के जंगलों से अलग करती हैं। इन क्षेत्रों में जिव व पेड़ों की अद्वितीय प्रजातियां पायी जाती हैं। नीलगिरी पेड़ मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है, लेकिन अब इसे लुगदी उत्पादन के लिए दक्षिणी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भी लगाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिणी गोलार्ध के देश\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध में 800 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं, जो कुल आबादी का लगभग 10 से 12% है। उन 800 मिलियन लोगों में से 200 मिलियन से अधिक ब्राजील में रहते हैं। जो दक्षिणी गोलार्ध में भूमि क्षेत्र के हिसाब से सबसे बड़ा देश है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध में सबसे अधिक आबादी वाला देश इंडोनेशिया है, जहाँ 267 मिलियन लोग रहते हैं। पुर्तगाली दक्षिणी गोलार्ध में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। जिसके 8 देशों में लगभग 230 मिलियन से अधिक बोलने वाले लोग हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़े महानगर जकार्ता जहाँ 33 मिलियन लोग रहते हैं। अन्य शहर साओ पाउलो, किंशासा, ब्यूनस आयर्स, रियो डी जनेरियो, सुरबाया और जोहान्सबर्ग हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअफ्रीका\u003c/b\u003e - इस हमद्वीप का लगभग एक तिहाई भाग दक्षिणी गोलार्ध में पड़ता है। जो पूर्व में सोमालिया से पश्चिम में गैबॉन तक हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअंटार्कटिका \u003c/b\u003e- पुर का पूरा महाद्वीप दक्षिणी गोलार्ध के अंदर आता हैं। यह\u0026nbsp;दक्षिणी गोलार्द्ध के केंद में स्थित हैं। जिसका कुल क्षेत्रफल\u0026nbsp;1 करोड़ 40 लाख वर्ग किमी है। यह लगभग बर्फ से ढाका हुआ हैं। यहाँ आबादी न के बराबर हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएशिया\u003c/b\u003e - एशिया के दक्षिणी पूर्वी\u0026nbsp;क्षेत्र दक्षिणी गोलार्द्ध में आते हैं। प्रमुख देश इंडोनेशिया हैं। हिंद महासागर के अधिकांश भाग दक्षिणी गोलार्द्ध का हिस्सा हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eऑस्ट्रेलिया\u003c/b\u003e - संपूर्ण महाद्वीप और छोटे द्वीप जैसे तस्मानिया और न्यू गिनी पूरी तरह से दक्षिणी गोलार्ध के भीतर आते हैं। प्रमुख देश ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और\u0026nbsp;पापुआ न्यू गिनी हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eदक्षिण अमेरिका\u003c/b\u003e - इस महाद्वीप का अधिकांश भाग दक्षिणी गोलार्द्ध में आता हैं। पूर्व में ब्राजील के अमेज़ॅन नदी से लेकर पश्चिम में इक्वाडोर तक दक्षिणी गोलार्द्ध का हिस्सा हैं। प्रमुख देश ब्राजील, इक्वाडोर, पेरू, चीली अर्जेंटीना, बोलीविया,\u0026nbsp;पराग्वे और उरुग्वे हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-oImbXfbx61A/YOWTBbpERpI/AAAAAAAAFGI/QU8wZNrlTQIuag_mzr2KlL71YGsvsBgLwCLcBGAsYHQ/s600/20210707_164131.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-oImbXfbx61A/YOWTBbpERpI/AAAAAAAAFGI/QU8wZNrlTQIuag_mzr2KlL71YGsvsBgLwCLcBGAsYHQ/s320/20210707_164131.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1129448578450128688"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1129448578450128688"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/07/southern-hemisphere-in-hindi.html","title":"दक्षिणी गोलार्द्ध किसे कहते हैं - southern hemisphere in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eउत्तरी गोलार्ध पृथ्वी का आधा भाग है जो भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित है। सौर मंडल के अन्य ग्रहों में भी\u0026nbsp;पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के रूप में में परिभाषित किया गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी के 23.43 डिग्री अक्षीय झुकाव के कारण, उत्तरी गोलार्ध में सर्दी दिसंबर से मार्च तक रहती है, जबकि ग्रीष्मकाल जून से सितंबर तक रहता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकैलेंडर वर्ष और खगोलीय वर्ष के बीच अंतर\u0026nbsp;के कारण हर साल तिथियां बदलती रहती हैं। उत्तरी गोलार्ध के भीतर, समुद्री धाराएँ मौसम के पैटर्न को बदल सकती हैं जो उत्तरी तट के भीतर कई कारकों को प्रभावित करती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eव्यापारिक हवाएँ भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं। हवाएँ अपने साथ सतही जल को खींचती हैं, जिससे धाराएँ बनती हैं, जो कोरिओलिस प्रभाव के कारण पश्चिम की ओर बहती हैं। धाराएँ फिर उत्तर की ओर बढ़ते हुए दाईं ओर झुकती हैं। लगभग 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर पछुआ हवाएं, धाराओं को वापस पूर्व की ओर धकेलती हैं। दक्षिणावर्त लूप का निर्माण करती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी गोलार्ध में 80.9% पानी की तुलना में इसकी सतह 60.7% पानी विधमान है, और यहाँ पृथ्वी की 67.3% भूमि मौजूद है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका पूरी तरह से पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध पर स्थित हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूगोल और जलवायु\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eआर्कटिक उत्तरी ध्रुव (90° अक्षांश) के आसपास का एक क्षेत्र है। इसकी जलवायु ठंडी सर्दियाँ और ठंडी ग्रीष्मकाल की विशेषता है। वर्षा ज्यादातर बर्फ के रूप में आती है। आर्कटिक सर्कल (66°34′ अक्षांश) के अंदर के क्षेत्र गर्मियों में कुछ दिनों का अनुभव करते हैं जब सूर्य कभी अस्त नहीं होता है, और कुछ दिन सर्दियों के दौरान जब यह कभी नहीं उगता है। इन चरणों की अवधि आर्कटिक सर्कल पर स्थित स्थानों के लिए एक दिन से लेकर ध्रुव के पास कई महीनों तक भिन्न होती है, जो उत्तरी गोलार्ध के मध्य में है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआर्कटिक सर्कल और कर्क रेखा (23°26′ अक्षांश) के बीच उत्तरी समशीतोष्ण क्षेत्र स्थित है। गर्मी और सर्दी के बीच इन क्षेत्रों में परिवर्तन आमतौर पर अत्यधिक गर्म या ठंडे होने के बजाय हल्के होते हैं। हालांकि, एक समशीतोष्ण जलवायु में बहुत अप्रत्याशित मौसम हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउष्णकटिबंधीय क्षेत्र (कर्क रेखा और भूमध्य रेखा के बीच, 0° अक्षांश) आम तौर पर पूरे वर्ष गर्म होते हैं और गर्मियों के महीनों के दौरान बरसात के मौसम और सर्दियों के महीनों के दौरान शुष्क मौसम का अनुभव करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी गोलार्ध में, पृथ्वी की सतह के ऊपर या ऊपर घूमने वाली वस्तुएं कोरिओलिस प्रभाव के कारण दायीं ओर मुड़ जाती हैं। नतीजतन, हवा या पानी के बड़े पैमाने पर क्षैतिज प्रवाह घड़ी की दिशा में मुड़ने वाले गियर बनाते हैं। ये उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागरों में महासागर परिसंचरण पैटर्न में सबसे अच्छी तरह से देखे जाते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Cx7Ps_ancp8/YOUawnq6lLI/AAAAAAAAFFo/uQDFBpmGW0kNqQb5EH609I4UXfI-d5DcgCLcBGAsYHQ/s600/20210707_083741.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"उत्तरी गोलार्ध क्या है - northern hemisphere in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Cx7Ps_ancp8/YOUawnq6lLI/AAAAAAAAFFo/uQDFBpmGW0kNqQb5EH609I4UXfI-d5DcgCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210707_083741.webp\" title\u003d\"उत्तरी गोलार्ध क्या है - northern hemisphere in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eउत्तरी गोलार्ध\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003eउत्तरी गोलार्ध के भीतर, समुद्री धाराएं मौसम के पैटर्न को बदल सकती हैं जो उत्तरी तट के भीतर कई कारकों को प्रभावित करती हैं; जैसे अल नीनो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसी कारण से, पृथ्वी की उत्तरी सतह की ओर नीचे की ओर हवा का प्रवाह एक दक्षिणावर्त पैटर्न में सतह पर फैल जाता है। इस प्रकार, दक्षिणावर्त वायु परिसंचरण उत्तरी गोलार्ध में उच्च दबाव वाले मौसम कोशिकाओं की विशेषता है। इसके विपरीत, पृथ्वी की उत्तरी सतह से उठने वाली हवा (निम्न दबाव का क्षेत्र बनाकर) वामावर्त पैटर्न में हवा को अपनी ओर खींचती है। तूफान और उष्णकटिबंधीय तूफान (विशाल कम दबाव प्रणाली) उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त घूमते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउत्तरी गोलार्ध के देश\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eगोलार्ध की शाब्दिक परिभाषा \"आधा गोला\" है जो लोगों को यह विश्वास दिला सकती है कि उत्तरी गोलार्ध में दुनिया के आधे देश और आधी आबादी शामिल होगी। यह एक गलत धारणा है। वास्तव में, ग्रह पर अधिकांश भूमि उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और दुनिया की लगभग 90% आबादी वहाँ रहती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी गोलार्ध में स्थित सैकड़ों देशों को निर्धारित करने का सबसे अच्छा तरीका वर्तमान विश्व मानचित्र से परामर्श करना है। मानचित्र पर भूमध्य रेखा का पता लगाएँ। उस रेखा से ऊपर के प्रत्येक देश को उत्तरी गोलार्ध का हिस्सा माना जाता है। इसमें उत्तरी अमेरिका का पूरा महाद्वीप (जिसमें मध्य अमेरिका शामिल है) और पूरे यूरोप, अधिकांश एशिया, लगभग दो तिहाई अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का लगभग दस प्रतिशत शामिल है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अमेरिका में लगभग 42 देश शामिल हैं, जिनमें कनाडा,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e, मैक्सिको और ग्रीनलैंड के साथ-साथ मध्य अमेरिका के छोटे देश और कैरिबियन के विभिन्न द्वीप राष्ट्र शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयूरोप पचास देशों और अन्य दर्जन क्षेत्रों से बना है। इसमें पूर्वी यूरोप, कुछ पूर्व सोवियत राज्य, उत्तरी यूरोप, मध्य यूरोप और भूमध्यसागरीय देश और द्वीप शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइंडोनेशिया को छोड़कर, लगभग पूरा एशिया उत्तरी गोलार्ध में है, जो भूमध्य रेखा को पार करता है और इसकी अधिकांश भूमि दक्षिणी गोलार्ध में है। एशिया में चीन, रूस और शेष पूर्व सोवियत राज्य, जापान, भारत और मध्य पूर्वी देशों के साथ-साथ फिलीपींस जैसे द्वीप शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 54 देश।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफ्रीका में 32 देश हैं जो मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध में हैं, जिनमें केन्या, इथियोपिया, मिस्र, लीबिया, मोरक्को और पश्चिमी सहारा शामिल हैं। कुछ और उत्तरी गोलार्ध में आंशिक रूप से स्थित हैं लेकिन ज्यादातर दक्षिणी में स्थित हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण अमेरिका में पांच देश हैं जो ज्यादातर उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं और दो अन्य जो आंशिक रूप से भूमध्य रेखा से ऊपर हैं।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2477312672934837007"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2477312672934837007"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/07/northern-hemisphere-in-hindi.html","title":"उत्तरी गोलार्ध क्या है - northern hemisphere in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-Cx7Ps_ancp8/YOUawnq6lLI/AAAAAAAAFFo/uQDFBpmGW0kNqQb5EH609I4UXfI-d5DcgCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210707_083741.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6876242012520303905"},"published":{"$t":"2021-07-06T16:44:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:08:08.771+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"पृथ्वी की परिधि क्या है - circumference of earth in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपरिधि एक शब्द है जिसका उपयोग किसी वृत्त की सीमा की लंबाई का वर्णन करने के लिए किया जाता है। पृथ्वी को आकार में गोलाकार माना जाता है और इसलिए इसकी त्रिज्या, व्यास और परिधि होती है। पृथ्वी की परिधि किलोमीटर या मील में मापी जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसे भूमध्य रेखा के चारों ओर और ध्रुवों के चारों ओर मापा जाता है जो अलग-अलग मान देते हैं। आइए चर्चा करें कि उनकी गणना व्यक्तिगत रूप से कैसे की जाती है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी की परिधि क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी की परिधि उसके चारों ओर मापी गई लंबाई या दूरी है। उदाहरण के लिए, यदि आप पृथ्वी पर एक बिंदु पर खड़े होते हैं और पृथ्वी के चारों ओर एक सीधे रास्ते में घूमते हैं, और फिर से उसी बिंदु पर पहुँचते हैं, तो आपके द्वारा तय की गई दूरी पृथ्वी की परिधि है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी की परिधि इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कैसे मापा जाता है। जब इसे भूमध्य रेखा के चारों ओर मापा जाता है, तो यह 40,075 किमी (लगभग, 24,901 मील) होता है, जबकि, यदि इसे उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक मापा जाता है तो यह 40,008 किमी (लगभग, 24,860 मील) होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक गोले की परिधि नहीं होती है लेकिन एक गोले के वृत्ताकार क्रॉस-सेक्शन की परिधि होती है। क्रॉस-सेक्शन का स्थान जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि त्रिज्या की लंबाई में परिवर्तन होता है क्योंकि हम गोले के केंद्र से दूर जाते हैं। उसके लिए, हमें गोले का सबसे बड़ा वृत्त (बड़ा वृत्त) ज्ञात करना होगा। निम्नलिखित आकृति को देखें जो एक गोले के बड़े वृत्त को दर्शाती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअब, बड़े वृत्त की परिधि या वृत्ताकार क्रॉस-सेक्शन इसके चारों ओर की दूरी है और इसे गोले की परिधि के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। गणितीय रूप से, इसकी गणना सूत्र द्वारा की जा सकती है:\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपरिधि \u003d 2πR या πD, जहां 'R' गोले की त्रिज्या है और 'D' गोले का व्यास है (यदि गोलाकार क्रॉस-सेक्शन को गोले के ठीक केंद्र में लिया जाता है)।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eउदाहरण\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक टेनिस बॉल पर विचार करें, जिसके बड़े वृत्त का व्यास 10 इंच है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअब, टेनिस गेंद की परिधि (C) होगी:\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003eC \u003d πD\u003cbr /\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u003d 3.14 × 10\u0026nbsp;\u003cbr /\u003e\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u003d 31.4 inches\u003c/div\u003e\u003cp\u003eअतः परिधि \u003d 31.4 इंच।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी की परिधि की गणना कैसे करें?\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eविधि : 2000 साल पहले इस्तेमाल किए गए ज्यामितीय सूत्र का उपयोग करके पृथ्वी की परिधि का पता लगाया जा सकता है। इरेटोस्थनीज, मिस्र के अलेक्जेंड्रिया में प्रमुख पुस्तकालयाध्यक्ष, 200 ई.पू. निम्नलिखित विधि का उपयोग करके पृथ्वी की परिधि का अनुमान लगाया। वह निम्नलिखित बातों को जानता था और उसी के अनुसार उसकी गणना करता था:\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवर्ष के सबसे लंबे दिन पर, सूर्य सीधे सियेन, मिस्र के ऊपर होगा, जिसका अर्थ है कि सूर्य की किरणों का कोण 0° होगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमिस्र के सिएने से अलेक्जेंड्रिया शहर की दूरी 5000 स्टेडियम थी। ('स्टेडिया' 'स्टेडियन' का बहुवचन रूप है, लंबाई की एक इकाई, जो लगभग 185 से 192 मीटर या 607 फीट की दूरी को संदर्भित करती है)\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउन्होंने अलेक्जेंड्रिया शहर में किरणों के कोण की गणना की, जिसे 7.2 ° मापा गया।\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-IdJRGYFLAMk/YOSDK46x-2I/AAAAAAAAFFY/-y5exsZz-5U7ecNxFiImDU37hvaDqxuMQCLcBGAsYHQ/s600/20210706_215127.jpg\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"पृथ्वी की परिधि क्या है - circumference of earth in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-IdJRGYFLAMk/YOSDK46x-2I/AAAAAAAAFFY/-y5exsZz-5U7ecNxFiImDU37hvaDqxuMQCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210706_215127.jpg\" title\u003d\"पृथ्वी की परिधि क्या है - circumference of earth in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u0026nbsp;circumference of earth in Hindi\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003eफिर उन्होंने निम्नलिखित संबंध का उपयोग किया:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\"चाप के कोण का पूर्ण कोण से अनुपात \u003d चाप की लंबाई का परिधि से अनुपात\", जिसे 7.2°/360° \u003d 5000/C के रूप में लिखा जा सकता है। सरलीकरण करने पर, वह 2,50,000 स्टेडियम के अनुमानित मूल्य पर पहुंचे, जो लगभग 28,738 मील के बराबर है। यह अनुमानित मूल्य 24,901 मील के वास्तविक मूल्य के करीब है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6876242012520303905"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6876242012520303905"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/07/circumference-of-earth-in-hindi.html","title":"पृथ्वी की परिधि क्या है - circumference of earth in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-IdJRGYFLAMk/YOSDK46x-2I/AAAAAAAAFFY/-y5exsZz-5U7ecNxFiImDU37hvaDqxuMQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210706_215127.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-47663561811402389"},"published":{"$t":"2021-06-13T06:50:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:10:00.541+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"द्वीप किसे कहते हैं - what is island in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  द्वीप वह स्थान या क्षेत्र है जो पानी से घिरा होता हैं। जैसे मेडागास्कर द्वीप   यह अरब सागर का सबसे बड़ा द्वीप हैं। वैसे तो कई देश एक द्वीप होते है। आपने भारत  के नक्सा में श्रीलंका को देखा ही होगा वह एक द्वीप देश है जो चारो ओर से पानी से   घिरा हुआ है। अब आपको द्वीप किसे कहते है समझ आ गया होगा। तो चलिए देखते\u0026nbsp; की   परिभाषा क्या है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eपरिभषा\u003c/b\u003e - द्वीप या टापू उपमहाद्वीपीय भूमि का टुकड़ा होता है जो पानी से   घिरा हुआ होता है। महाद्वीप भी पानी से घिरे हुए हो सकते\u0026nbsp;हैं, लेकिन बड़े   होने के कारण उन्हें द्वीप नहीं माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया विश्व का\u0026nbsp;सबसे   छोटा महाद्वीप हैं जोकि सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड से तीन गुना बड़ा है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दुनिया भर में समुद्र, झीलों और नदियों में अनगिनत द्वीप मौजूद\u0026nbsp;हैं। आकार,   जलवायु और उनमें रहने वाले जीवों के प्रकार में बहुत भिन्न होती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कई द्वीप काफी छोटे हैं, जो आधे हेक्टेयर से भी कम क्षेत्र को\u0026nbsp;कवर करते हैं।   इन छोटे द्वीपों को अक्सर टापू कहा जाता है। नदियों में द्वीपों को कभी-कभी   आइओट्स कहा जाता है। विशाल\u0026nbsp;द्वीप का\u0026nbsp;उदाहरण, ग्रीनलैंड है जिसका   क्षेत्रफल\u0026nbsp;लगभग 2,166,000 वर्ग किलोमीटर है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कुछ द्वीप पूरे वर्ष ठंडे और बर्फ से ढके रहते हैं, जैसे\u0026nbsp;अलास्का में स्थित   अलेउतियन द्वीप। दक्षिण प्रशांत महासागर में ईस्टर द्वीप निकटतम मुख्य भूमि से   हजारों किलोमीटर दूर हैं। जबकि\u0026nbsp;यूनानी द्वीप जिन्हें साइक्लेड्स के रूप में   जाना जाता है एजियन सागर में स्थित है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eद्वीपीय वन्यजीव\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eएक द्वीप पर और उसके आसपास रहने वाले जीवों के प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि उस द्वीप का निर्माण कैसे हुआ और वह कहाँ स्थित है। महाद्वीपीय द्वीपों में उस महाद्वीप के समान वन्यजीव होते हैं, जिनसे वे कभी जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, दक्षिणी कैलिफोर्निया से छह चैनल द्वीपों के मूल निवासी गंभीर रूप से लुप्तप्राय द्वीप लोमड़ी, उत्तरी अमेरिकी मुख्य भूमि के ग्रे लोमड़ी की तरह है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालाँकि, अलग-थलग समुद्री और प्रवाल द्वीपों में पौधे और पशु जीवन होते हैं जो शायद दूर के स्थानों से आए होते हैं। जल के आर-पार लंबी दूरी तय करके जीव इन द्वीपों तक पहुंचते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ पौधों के बीज समुद्र में बहकर यात्रा करते हैं। उदाहरण के लिए, नारियल के के बीज जो अधिक दूरी तक तैर सकते हैं। लाल मैंग्रोव पेड़ों के बीज अक्सर समुद्र तट के किनारे नए स्थानों पर तैरते रहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअन्य पौधों के बीज हवा माध्यम से द्वीपों तक पहुंचते हैं। कई हल्के बीज, जैसे भुलक्कड़ थीस्ल बीज और फ़र्न के बीजाणु, हवा की धाराओं में लंबी दूरी तक बह सकते हैं। फिर भी अन्य पौधों के बीजों को पक्षियों द्वारा द्वीपों तक पहुँचाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eद्वीप समूह किसे कहते है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  द्वीप समूह नाम से स्पष्ट हो रहा है की ये द्वीप का समूह होता हैं। जो एक सिमित   क्षेत्र\u0026nbsp; होते है। अगर अपने भारत के नक़्शे में अंदमान द्वीप को देखा होगा तो   वह एक द्वीप समूह का अच्छा उदाहरण है। एशिया में कई द्वीप समूह देश है जैसे जापान  और इंडोनेशिया, पिलीपिंस द्वीप समूह आदि।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"द्वीप किसे कहते हैं - what is island in hindi\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ejzrvJmpgT8/YMVdCWxW4-I/AAAAAAAAE-M/LXCuSlFYuF8E0cbyiyCoVp-xso9AsCcxQCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210613_064656_1.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"द्वीप किसे कहते हैं - what is island in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eभारत में द्वीपों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है और इसमें विभिन्न प्रकार के जीव और वनस्पति हैं। भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं - एक बंगाल की खाड़ी में और दूसरा अरब सागर में। ऐसा माना जाता है कि ये द्वीप पनडुब्बी पहाड़ों का एक ऊंचा हिस्सा हैं। हालांकि, कुछ छोटे द्वीप मूल रूप से ज्वालामुखी हैं। भारत में एकमात्र सक्रिय\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eबैरेन द्वीप भी निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबंगाल की खाड़ी द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप/द्वीप हैं। ये लगभग 6°N-14°N और 92°E-94°E के बीच स्थित हैं। आइलेट्स के दो प्रमुख समूहों में रिची का द्वीपसमूह और भूलभुलैया द्वीप शामिल हैं। द्वीप के पूरे समूह को दो व्यापक श्रेणियों में बांटा गया है - उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार। उन्हें एक जल निकाय द्वारा अलग किया जाता है जिसे दस डिग्री चैनल कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये द्वीप पनडुब्बी पहाड़ों का एक ऊंचा हिस्सा हैं। हालांकि, कुछ छोटे द्वीप मूल रूप से ज्वालामुखी से बने हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं। ये 8°N-12°N और 71°E -74°E देशांतर के बीच स्थित हैं। ये द्वीप केरल तट से 280 किमी-480 किमी की दूरी पर स्थित हैं। संपूर्ण द्वीप समूह प्रवाल निक्षेपों से निर्मित है। यहाँ लगभग 36 द्वीप हैं जिनमें से 11 बसे हुए हैं। मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किमी है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eद्वीप कितने प्रकार के होते हैं\u0026nbsp; \u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eप्रमुख छह प्रकार के द्वीप होते हैं: 1. महाद्वीपीय, 2.\u0026nbsp;ज्वारीय\u0026nbsp;, 3.\u0026nbsp;बैरियर, 4. महासागर, 5. कोरल, और 6. कृत्रिम।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. महाद्वीपीय द्वीप\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- ये कभी एक महाद्वीप से जुड़े हुए थे। वे अभी भी महाद्वीपीय शेल्फ से बने हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि लाखों साल पहले एक ही बड़ा महाद्वीप हुआ करता था। इस महाद्वीप को पैंजिया कहा जाता था। आखिरकार, पृथ्वी की पपड़ी की धीमी गति ने पैंजिया को कई टुकड़ों में तोड़ दिया। जिससे जमीन के कुछ बड़े हिस्से बंट गए। ग्रीनलैंड और मेडागास्कर इस प्रकार के महाद्वीपीय द्वीप हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. ज्वारीय द्वीप \u003c/b\u003e- एक प्रकार का महाद्वीपीय द्वीप है जहां द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने वाली भूमि पूरी तरह से नष्ट नहीं होती है, लेकिन उच्च ज्वार कारण\u0026nbsp; पानी के नीचे रहती है। मॉन्ट सेंट-मिशेल, फ्रांस का प्रसिद्ध द्वीप एक ज्वारीय द्वीप का एक उदाहरण है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. बैरियर द्वीप -\u003c/b\u003e संकरे होते हैं और समुद्र तट के समानांतर स्थित होते हैं। कुछ महाद्वीपीय शेल्फ का हिस्सा हैं और तलछट-रेत, गाद और बजरी से बने होते हैं। बैरियर द्वीप भी कोरल द्वीप हो सकते हैं, जो अरबों छोटे प्रवाल एक्सोस्केलेटन से बने होते हैं। बैरियर द्वीप एक लैगून द्वारा तट से अलग होते हैं। उन्हें बाधा द्वीप कहा जाता है क्योंकि वे समुद्र और मुख्य भूमि के बीच बाधाओं के रूप में कार्य करते हैं। वे तूफान की लहरों और हवाओं से सीधे तट को प्रभावित होने से बचाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. महासागरीय द्वीप - \u003c/b\u003eजिसे ज्वालामुखीय द्वीप भी कहा जाता है, समुद्र तल पर ज्वालामुखियों के फटने से बनते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी ऊंचाई क्या है, समुद्री द्वीपों को \"उच्च द्वीप\" के रूप में भी जाना जाता है। महाद्वीपीय और प्रवाल द्वीप की तुलना में सैकड़ों मीटर ऊंचे हो सकते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. प्रवाल द्वीप\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- इसे निचले द्वीप\u0026nbsp; से भी जाना जाता है हैं यह गर्म पानी में छोटे समुद्री जानवरों द्वारा बनाए जाते हैं जिन्हें मूंगा कहा जाता है। मूंगे कैल्शियम कार्बोनेट के कठोर बाहरी कंकाल होते हैं। इसे चूना पत्थर के रूप में भी जाना जाता है, समुद्री जीवों जैसे क्लैम और मसल्स के गोले के समान होते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ प्रवाल भित्तियाँ समुद्र तल से मोटी परतों में विकसित हो सकती हैं, जब तक कि वे पानी की सतह को तोड़कर प्रवाल द्वीपों का निर्माण नहीं कर देतीं। अन्य कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ, जैसे चट्टान और रेत, प्रवाल द्वीप बनाने में मदद करते हैं। बहामास के द्वीप, अटलांटिक महासागर और कैरेबियन सागर में, प्रवाल द्वीप पाए जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. कृत्रिम द्वीप -\u003c/b\u003e लोगों द्वारा बनाए जाते हैं। कृत्रिम द्वीप अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग तरीकों से बनाए जाते हैं। कृत्रिम द्वीप अपने आसपास के पानी को बहाकर पहले से मौजूद द्वीप के हिस्से का विस्तार शामिल हैं। यह विकास, कृषि के लिए अधिक कृषि योग्य भूमि बनाता है। 14 वीं शताब्दी के मेक्सिको के नहुआ लोगों ने टेक्सकोको झील में एक कृत्रिम द्वीप से अपनी राजधानी टेनोच्टिट्लान बनाई। उन्होंने दलदली झील में एक द्वीप का विस्तार किया और इसे सड़कों के माध्यम से मुख्य भूमि से जोड़ा। एक्वाडक्ट्स ने शहर के 200,000 निवासियों को मीठे पानी की आपूर्ति की। मेक्सिको सिटी टेनोचिट्लान के अवशेषों पर स्थित है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eद्वीप और लोग\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eकैसे दुनिया के सबसे दूरस्थ द्वीपों की खोज की गई और उन्हें बसाया गया, यह मानव इतिहास की सबसे आकर्षक कहानियों में से एक है। विशाल प्रशांत महासागर कई छोटे द्वीपों से घिरा हुआ है, जैसे कि मार्केसास, ईस्टर द्वीप और हवाई द्वीप आदि। ये द्वीप अमेरिका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के तटों से बहुत दूर हैं। 1500 के दशक में जब यूरोपीय लोगों ने प्रशांत द्वीपों की खोज शुरू की, तो उन्होंने पाया कि वहां पहले से ही लोग रह रहे हैं। अब हम इन लोगों को पॉलिनेशियन के नाम से जानते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिकांश वैज्ञानिकों का कहना है कि इन प्रशांत द्वीप निवासियों के पूर्वज मूल रूप से दक्षिण पूर्व एशिया से आए थे, शायद ताइवान के आसपास। प्रसिद्ध वैज्ञानिक थोर हेअरडाहल असहमत थे। उन्होंने कहा कि पॉलिनेशियन उत्तरी और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटों से प्रशांत द्वीपों में गए है। लेकिन भाषाई और आनुवंशिक सबूत बताते हैं कि इसकी संभावना नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलगभग 3,000–4,000 साल पहले, प्रारंभिक पोलिनेशियनों के समूह समुद्र के हजारों किलोमीटर से अधिक की समुद्री यात्राओं पर समुद्री डोंगी में निकले थे। उस समय कम्पास या नक्शे के बिना यात्रा किया जाता था, उन्होंने उन द्वीपों की खोज की जिनके बारे में वे नहीं जान सकते थे। उनके सबसे प्रसिद्ध अभियान उन्हें पूर्व में हवाई द्वीप और ईस्टर द्वीप तक ले गए। हाल के साक्ष्यों से पता चलता है कि ये शुरुआती लोग हिंद महासागर के पार पश्चिम से ए होंगे। वे शायद अफ्रीकी द्वीप मेडागास्कर में रहने वाले पहले व्यक्ति थे।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/47663561811402389"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/47663561811402389"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/06/what-is-island-in-hindi.html","title":"द्वीप किसे कहते हैं - what is island in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-ejzrvJmpgT8/YMVdCWxW4-I/AAAAAAAAE-M/LXCuSlFYuF8E0cbyiyCoVp-xso9AsCcxQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210613_064656_1.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5514539747147022587"},"published":{"$t":"2021-05-28T22:04:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:10:39.662+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मानसून किसे कहते हैं - what is monsoon called in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"display: none; margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e        \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-CARDuZAdB2A/YOB73UgN_wI/AAAAAAAAFDU/i968Hz8vlQQ6kBkMGf2Df2mwOG_4XsWOACLcBGAsYHQ/s600/20210703_202943.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"मानसून किसे कहते हैं - What is monsoon\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-CARDuZAdB2A/YOB73UgN_wI/AAAAAAAAFDU/i968Hz8vlQQ6kBkMGf2Df2mwOG_4XsWOACLcBGAsYHQ/w320-h213/20210703_202943.webp\" title\u003d\"मानसून किसे कहते हैं - What is monsoon\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e      \u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e        \u0026nbsp;what is monsoon called in Hindi       \u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eमानसून \u003c/b\u003eमतलब बारिश का महीना भारत में बारिश जुलाई से सितंबर के बीच होती   है। तपती गर्मी के बाद मानसून राहत और खुशियाँ लेकर आता हैं। इन महीनो में कई   हिन्दू त्यौहार का आगाज होता है। चारो और हरियाली दिखाई देती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  लोगो को बारिश में भीगना काफी पसद आता हैं। इनके अलावा इस मौसम में लोग वाटरफॉल जैसे   रोमांचक दृश्य को देखने भी जाते है। क्योकि जायदातर जल प्रपात मानसून के महीने   में सक्रीय होते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमानसून किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  मानसून ऐसी हवाये होती है जो\u0026nbsp;बारिश का कारण बनती है। अगर\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;की बात करे तो यह हवाएं\u0026nbsp;अरब सागर  और बंगाल की खाड़ी के माध्यम से पहुँचती\u0026nbsp;है। इन हवाओं के साथ पानी की बदले   भारतीय उपमहाद्वीप में पहुँचती है और तीन महीनो तक\u0026nbsp;भरी बारिश करती   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अधिकांश   उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मानसून वर्षा का कारण बनती है। मानसून हवाएं अक्सर\u0026nbsp;हिन्द महासागर\u0026nbsp;से बहती हुयी भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करती हुयी भारत, बांग्लादेश,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u0026nbsp;और श्रीलंका जैसे देशो में बारिश लती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  मानसून हवाएं हमेशा\u0026nbsp;ठंडे क्षेत्र से गर्म क्षेत्रों की ओर बहती है। और उन   क्षेत्रों में कुछ महीनो तक बारिश करती\u0026nbsp;है। भारत में 16 जून के बाद मानसून   दक्षिण भारत में प्रवेश करता है फिर धीरे धीरे पुरे भारत में फ़ैल जाता है। जब यह   हवाएं   हिमालय की\u0026nbsp;विशाल शिखर से टकराती है तो उत्तर और पूर्वी भारत में अधिक वर्षा होती   है। जिसके कारण\u0026nbsp; इलाको में बाढ़ जैसी विपदा भी आ जाती\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दक्षिण पूर्व एशिया में दो प्रकार की मानसून पायी जाती है। ग्रीष्म मानसून और   शीतकालीन मानसून भारत और इसके पडोसी देशो में\u0026nbsp;जलवायु का निर्धारण करती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबारिश क्यों होती है\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबादल पानी या बर्फ से बनते हैं जो पृथ्वी की सतह से वाष्पित हुए होते हैं। जब यह वाष्पित हो जाता है - अर्थात, पृथ्वी की सतह से वायुमंडल में उड़ जाता\u0026nbsp;है। तो वह\u0026nbsp;जल वाष्प के रूप में होता है। जलवाष्प ठंडा होने पर बादलों में बदल जाता है और संघनित हो जाता है। यानी वापस तरल पानी या बर्फ में बदल जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबादल में अन्य पानी की बूंदों पर अधिक पानी संघनित होने के साथ बूंदें बनने लगती\u0026nbsp;हैं। जब वे बहुत भारी हो जाते हैं। तो\u0026nbsp;यहां बारिश के रूप में पृथ्वी पर गिरने लगती\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eग्रीष्मकालीन मानसून\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  ग्रीष्म मानसून में भारी वर्षा बात है। यह आमतौर पर अप्रैल और सितंबर के बीच आते   है। जैसे ही सर्दी समाप्त होती है। दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर से गर्म   और\u0026nbsp;नम हवाएं भारत,   श्रीलंका,   बांग्लादेश और म्यांमार की ओर   बहती है। और बारिश लाती हैं। ग्रीष्म मानसून इन क्षेत्रों में अधिक वर्षा का कारण   बनती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में लोग अधिकतर कृषि पर निर्भर होते है और सिचाई के   लिए पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर करती हैं। इसलिए\u0026nbsp;ग्रीष्मकालीन मानसून इन   क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इन देशों में   झीले, नदियों,   या बर्फीले क्षेत्रों में पानी का\u0026nbsp;आभाव के कारण\u0026nbsp;सिंचाई प्रणाली नहीं है। भूमिगत जल   की आपूर्ति भी\u0026nbsp; बहुत कम\u0026nbsp;हैं। और लगातार वाटर लेवल कम होता जा रहा हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003eमानसून का प्रभाव\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ग्रीष्मकालीन मानसून के पानी से नदी और बांध जल मग्न हो जाते\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;यहाँ पर\u0026nbsp;चावल   और चाय कुछ ऐसी फसलें हैं जो इन्ही क्षेत्रों में अधिक होते है और पूरी तरह   से\u0026nbsp;गर्मियों के मानसून पर निर्भर करती हैं। डेयरी फार्म, जो भारत को दुनिया   में सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनाने में मदद करते हैं। गायों को स्वस्थ और अच्छी तरह   से खिलाने के लिए मानसून की बारिश अहम् भूमिका निभाती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में   उद्योग भी ग्रीष्म मानसून पर निर्भर करते हैं। क्षेत्र में बिजली का एक बड़ा   हिस्सा\u0026nbsp; जलविद्युत ऊर्जा संयंत्रों द्वारा उत्पादित किया जाता है, जो मानसून   के दौरान एकत्र किए गए पानी से संचालित होते हैं। बिजली अस्पतालों, स्कूलों और   व्यवसायों को ऊर्जा देती है जो इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने   में मदद करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जब ग्रीष्मकालीन मानसून में देरी\u0026nbsp;या वर्षा की कमी होती\u0026nbsp;है, तो क्षेत्र   की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। कम ही\u0026nbsp;लोगो के पास पानी की\u0026nbsp;व्यवस्था होती   है। जिससे सरकारों को   खाना आयात करना पड़ता है। बिजली अधिक महंगी हो जाती है। इसी कारण\u0026nbsp;ग्रीष्मकालीन   मानसून को भारत का सच्चा वित्त मंत्री कहा गया है। \u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-R1jt5RxX128/YPAkWkE-aCI/AAAAAAAAFKo/mmZ3j5SKx_8bdUAK0H-qvfvvxl1gDLDiwCLcBGAsYHQ/s512/original.gif\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"मानसून किसे कहते हैं - what is monsoon called in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"512\" data-original-width\u003d\"512\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-R1jt5RxX128/YPAkWkE-aCI/AAAAAAAAFKo/mmZ3j5SKx_8bdUAK0H-qvfvvxl1gDLDiwCLcBGAsYHQ/w320-h320/original.gif\" title\u003d\"मानसून किसे कहते हैं - what is monsoon called in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबारिश\u0026nbsp;\u003cbr /\u003e\u003c/span\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  मानसून बड़ा नुकसान भी कर सकता है। मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों के निवासियों को हर मानसून के दौरान\u0026nbsp;लगभग आधा मीटर पानी के साथ सड़कों पर बाढ़ आने की आदत   होती है। जब ग्रीष्मकालीन मानसून अपेक्षा से अधिक वर्षा लती\u0026nbsp;है। तो\u0026nbsp;मुंबई   जैसे शहरों में पूरा मोहल्ला डूब सकता है। पहाड़ी और ग्रामीण\u0026nbsp;क्षेत्रों में मिट्टी के   खिसकने से सड़क\u0026nbsp;दब जाते हैं और फसलों को भारी नुकसान होता\u0026nbsp;हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  2005 में मानसून ने पश्चिमी भारत को तबाह कर दिया था। जैसे ही ग्रीष्मकालीन मानसून   दक्षिण-पश्चिम से आया, इसने सबसे पहले   गुजरात राज्य में प्रवेश किया। अधिक बारिश से यहाँ\u0026nbsp;100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। फिर मॉनसून की बारिश   ने   महाराष्ट्र राज्य   में दस्तक दी। महाराष्ट्र में बाढ़ से एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। 26   जुलाई, 2005 को महाराष्ट्र के मुंबई शहर में लगभग 39.1 इंच बारिश हुई थी। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशीतकालीन मानसून\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  हिंद महासागर का शीतकालीन मानसून जो अक्टूबर से अप्रैल तक रहता है। ग्रीष्मकाल   मानसून की तुलना में कम वर्षा करती है। शुष्क शीत मानसून उत्तर पूर्व से चलने वाली\u0026nbsp;हवाएँ मंगोलिया और उत्तर-पश्चिमी   चीन के क्षेत्र से\u0026nbsp;शुरू होती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दक्षिण पूर्व एशिया में ग्रीष्मकालीन मानसून की तुलना में शीतकालीन मानसून कम   शक्तिशाली होते हैं। क्योंकि हिमालय पर्वत मानसून की अधिकांश हवा और नमी को तट तक   पहुंचने से रोकते हैं। हिमालय अधिकांश ठंडी हवा को दक्षिणी भारत और श्रीलंका जैसे   स्थानों तक पहुँचने नहीं देता है। शीतकालीन मानसून कभी-कभी सूखे होते हैं। अर्थात वर्षा बिलकुल नहीं होती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हालांकि सभी शीतकालीन मानसून शुष्क नहीं होते हैं। दक्षिण पूर्व एशिया के   पश्चिमी भाग के विपरीत, दक्षिण पूर्व   एशिया के   पूर्वी,   प्रशांत तट पर   सर्दियों में बारिश का मौसम होता है। शीतकालीन मानसून दक्षिण चीन सागर से   इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रों में अधिक वर्षा करती\u0026nbsp;है। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअन्य मानसून\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई मानसून जिसका मुख्य कारण\u0026nbsp;हिंद   महासागर\u0026nbsp;से चलने वाली हवाएं\u0026nbsp;है। यह मानसून उत्तरी   ऑस्ट्रेलिया से रूस के प्रशांत तट तक वर्षा करती\u0026nbsp;है। दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मानसूनी हवाएँ मौजूद हैं। जैसे की\u0026nbsp;उत्तर   अमेरिकी मानसून साल में आमतौर पर गर्मियों के बीच में एक बार आता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकैलिफ़ोर्निया की खाड़ी से गर्म व\u0026nbsp;नम हवा उत्तर-पूर्व की ओर चलती है। जबकि इधर मेक्सिको की खाड़ी से गर्म नम हवा उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने   लगती\u0026nbsp;है। ये दोनों हवाएँ मध्य मेक्सिको में सिएरा माद्रे ओशिडेंटल पहाड़ों   पर टकराती हैं। और अमेरिका में\u0026nbsp;   मानसूनी वर्षा का कारण बनती\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उत्तर अमेरिकी मानसून फायर फाइटर\u0026nbsp;के लिए एक प्राकृतिक सहायक होते\u0026nbsp;है। एरिज़ोना में गर्मी का तापमान नियमित रूप से 100 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक तक   पहुँच जाता है। जिसके कारण वह जंगल में आग लगना आम बात हो जाती है। और\u0026nbsp;आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। इसी दौरान उत्तर अमेरिकी मानसून का आगमन आग पर काबू करने में मदद करती हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी   अमेरिकी मानसून भी इस क्षेत्र के अधिकांश रेगिस्तानी पारिस्थितिक तंत्रों के लिए   प्राथमिक जल स्रोत है। हालांकि\u0026nbsp;हिन्द महासागर\u0026nbsp;में यह भारी बारिश लोगों और व्यवसायों के लिए दैनिक   जीवन में समस्या उत्पन्न कर सकती\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5514539747147022587"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5514539747147022587"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/05/what-is-monsoon-called-in-hindi.html","title":"मानसून किसे कहते हैं - what is monsoon called in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-CARDuZAdB2A/YOB73UgN_wI/AAAAAAAAFDU/i968Hz8vlQQ6kBkMGf2Df2mwOG_4XsWOACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210703_202943.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6897350380926433342"},"published":{"$t":"2021-05-22T03:51:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:11:35.473+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"सतपुड़ा पर्वत किस राज्य में स्थित है - satpura parvat kis rajya mein hai"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eसतपुड़ा पर्वतमाला \u003c/b\u003eमध्य   भारत में पहाड़ियों की एक श्रृंखला है। यह पूर्वी\u0026nbsp;गुजरात\u0026nbsp;राज्य से महाराष्ट्र और\u0026nbsp;मध्य प्रदेश\u0026nbsp;की सीमा से होते हुए पूर्व में छत्तीसगढ़ तक फैली है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह पर्वतमाला उत्तर में विंध्य पर्वतमाला के समानांतर है, और ये दो पूर्व-पश्चिम   पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप को उत्तरी भारत के इंडो-गंगा के मैदान और दक्षिण के   दक्कन पठार को विभाजित करती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा नदी अमरकंटक में सतपुड़ा के उत्तर-पूर्वी छोर से निकलती है, और सतपुड़ा और   विंध्य पर्वतमाला के बीच बहती है। और अरब सागर में मिलती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ताप्ती नदी सतपुड़ा के पूर्वी-मध्य भाग में निकलती है, और राज्य की सीमा को पार   करते हुए रेंज के दक्षिणी ढलानों पर पश्चिम की ओर बहती है। सूरत में अरब सागर मिल   जाती है। अमरकंटक से मुलताई, तापी नदी का उद्गम स्थल लगभग 465 किलोमीटर दूर हैं,   पहाड़ी श्रृंखला से अलग स्थित है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  गोदावरी नदी और उसकी सहायक नदियाँ दक्कन के पठार में बहाती हैं, जो कि दक्षिण   सिमा में स्थित है, और महानदी नदी सीमा के पूर्वी भाग में बहती है। गोदावरी और   महानदी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इसके पूर्वी छोर पर सतपुड़ा श्रेणी   छोटानागपुर पठार की पहाड़िया है। सतपुड़ा रेंज एक विशाल पर्वत है और इसके उत्तर   में नर्मदा घाटी\u0026nbsp;और दक्षिण में बहुत छोटी लेकिन समानांतर तापी घाटी है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूगोल\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा के पूर्वी भाग पर पश्चिमी भाग की तुलना में अधिक वर्षा होती है, और पूर्वी   घाटी में नम पर्णपाती वन क्षेत्र का निर्माण करते हैं। नर्मदा घाटी और पश्चिमी   विंध्य रेंज के साथ-साथ मौसम शुष्क होती जाती है। नर्मदा घाटी के शुष्क पर्णपाती   वन क्षेत्र के भीतर स्थित हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा और ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं जो अरब सागर में गिरती हैं। नर्मदा पूर्वी   मध्य प्रदेश से निकलती है और विंध्य रेंज और सतपुड़ा रेंज के बीच एक संकीर्ण घाटी   के माध्यम से, राज्य भर में पश्चिम में बहती है। यह खंभात की खाड़ी में गिरती   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  तापी नदी, नर्मदा के दक्षिण में 80 और 160 किलोमीटर के बीच एक छोटे, समानांतर का   अनुसरण करती है, जो महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों से होकर   खंभात की खाड़ी  में गिरती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपरिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा के अधिकांश भाग में घने जंगल थे; लेकिन हाल के दशकों में यह क्षेत्र   धीरे-धीरे वनों की कटाई के अधीन रहा है, हालांकि वनों के महत्वपूर्ण क्षेत्र अभी   भी खड़े हुए हैं। ये वन क्षेत्र बंगाल टाइगर, बारासिंघा, गौर, ढोल, स्लॉथ बियर,   चौसिंगा सहित कई लुप्तप्राय प्रजातियों को आवास प्रदान करते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हालाँकि, सतपुड़ा अब कई बाघ अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह जंगल कभी भारतीय   हाथियों, शेर और एशियाई चीतों का गढ़ हुआ करता था। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कान्हा, पेंच, गुगामाल और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व,   मेलघाट टाइगर रिजर्व और बोरी रिजर्व फॉरेस्ट सहित कई संरक्षित क्षेत्र है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा फाउंडेशन, एक जमीनी संगठन है जो इस क्षेत्र को संरक्षित करने का प्रयास   करता है, और विकास व बुनियादी ढांचा अवैध शिकार जैसे चुनौतियों का सामना करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपर्यटन स्थल\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अमरकंटक, जिसे \"तीर्थराज\" (तीर्थों का राजा) भी कहा जाता है, भारत के मध्य प्रदेश   के अनूपपुर में एक तीर्थ शहर और एक नगर पंचायत है। अमरकंटक क्षेत्र अद्वितीय   प्राकृतिक विरासत क्षेत्र है और विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला का मिलन बिंदु है,   जिसमें मैकल हिल्स आधार हैं। यहीं से नर्मदा नदी, सोन नदी और जोहिला नदी निकलती   है। कहा जाता है कि 15 वीं शताब्दी के लोकप्रिय भारतीय रहस्यवादी कवि कबीर ने   कबीर चबूतरा पर ध्यान किया था, जिसे कबीर का मंच कहा जाता है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9kG3XerDZbw/YOR-hFB6yAI/AAAAAAAAFFA/LuCzicvqCy0Bljli_fOuTsWXKTTnOpKSwCLcBGAsYHQ/s600/20210706_213058.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सतपुड़ा पर्वत किस राज्य में स्थित है - satpura parvat kis rajya mein hai\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"204\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9kG3XerDZbw/YOR-hFB6yAI/AAAAAAAAFFA/LuCzicvqCy0Bljli_fOuTsWXKTTnOpKSwCLcBGAsYHQ/w320-h204/20210706_213058.jpg\" title\u003d\"सतपुड़ा पर्वत किस राज्य में स्थित है - satpura parvat kis rajya mein hai\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  कान्हा राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में एक   राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य है। 1930 के दशक में, कान्हा क्षेत्र को 250 और   300 किमी 2 के दो अभयारण्यों, हॉलन और बंजार में विभाजित किया गया था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कान्हा राष्ट्रीय उद्यान 1 जून 1955 को बनाया गया था। आज यह दो जिलों मंडला और   बालाघाट में 940 किमी 2 के क्षेत्र में फैला हुआ है। 1,067 किमी 2 के आसपास के   बफर जोन और 110 किमी 2 फेन अभयारण्य के साथ मिलकर यह कान्हा टाइगर रिजर्व बनाता   है। यह मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। पार्क में शाही बंगाल टाइगर,   तेंदुए, सुस्त भालू, बरसिंघा और जंगली कुत्ते है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कान्हा के हरे-भरे साल और बांस के जंगल, घास के मैदान और घाटियों ने रुडयार्ड   किपलिंग को \"जंगल बुक\" (प्रसिद्ध उपन्यास) के लिए प्रेरणा प्रदान की। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पचमढ़ी का एक हिल स्टेशन मध्य प्रदेश में स्थित हैं। जंगलों, पशु अभ्यारण्य,   नदियों और चट्टानी इलाके इसके आकर्षण हैं। यह ट्रैकिंग, मछली पकड़ने और साहसिक   गतिविधियों के लिए एक पर्यटन स्थल है। इसे 'सतपुड़ा की रानी' के रूप में भी जाना   जाता है। सतपुड़ा रेंज का उच्चतम बिंदु, धूपगढ़, पचमढ़ी में स्थित है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बोरी वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश में स्थित है। बोरी वन्यजीव अभयारण्य में भारत   का सबसे पुराना वन संरक्षित, बोरी रिजर्व वन शामिल है, जिसे 1865 में तेवा नदी के   किनारे स्थापित किया गया था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अभयारण्य सतपुड़ा रेंज की उत्तरी तलहटी में स्थित 518 किमी 2 (200 वर्ग मील) के   क्षेत्र को कवर करता है। यह उत्तर और पूर्व में सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और   पश्चिम में तवा नदी से घिरा है। अभयारण्य, सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और पचमढ़ी   अभयारण्य के साथ मिलकर पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व बनाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अभयारण्य ज्यादातर मिश्रित पर्णपाती और बांस के जंगलों में आच्छादित है, पूर्वी   हाइलैंड्स नम पर्णपाती जंगलों के ईकोरियोजन का हिस्सा है। यह पश्चिमी और पूर्वी   भारत के जंगलों के बीच एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। प्रमुख पेड़ों में सागौन   (टेक्टोना ग्रैंडिस), धोरा (एनोगेइसस लैटिफोलिया), तेंदु (डायोस्पायरोस   मेलानॉक्सिलॉन) शामिल हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बड़ी स्तनपायी प्रजातियों में बाघ, तेंदुआ, जंगली सूअर, मंटजैक हिरण, गौर (बॉस   गौरस), चीतल हिरण (अक्ष अक्ष), सांभर (सर्वस यूनिकलर), और रीसस मैकाक शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसतपुड़ा किस प्रकार का पर्वत है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला काले पहाड़ों के अंतर्गत आती हैं। ये दो श्रेणियां   भारत के मध्य-पश्चिमी भाग में स्थित हैं। काले पहाड़, जिन्हें फॉल्ट ब्लैक   माउंटेन भी कहा जाता है, वे पहाड़ हैं जो पृथ्वी की पपड़ी से निकली दरारों/दोषों   से बनते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसतपुड़ा पर्वत श्रंखला कहाँ स्थित है ?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा रेंज, पहाड़ियों की श्रृंखला है जो दक्कन पठार का हिस्सा हैं, यह\u0026nbsp;   पश्चिमी भारत महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश राज्यों का हिस्सा है। यह भारत के सबसे   बड़े हिस्से में लगभग 560 मील तक फैली हुई हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसतपुड़ा कितना पुराना है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतपुड़ा माउंटेन बेल्ट 1800 Ma में\u0026nbsp;विकसित हुआ जब प्रोटेरोज़ोइक समय के   दौरान उत्तर भारतीय ब्लॉक और दक्षिण भारतीय ब्लॉक का टकराव हुआ। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसतपुड़ा श्रेणी का उच्चतम बिंदु कौन सा है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eधूपगढ़ -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eदक्षिण-मध्य मध्य प्रदेश में पचमढ़ी के पास धूपगढ़ चोटी   4,429 फीट ऊँची है, यह राज्य का सबसे ऊंचा स्थान है। \u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6897350380926433342"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6897350380926433342"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/05/satpura-parvat-kis-rajya-mein-hai.html","title":"सतपुड़ा पर्वत किस राज्य में स्थित है - satpura parvat kis rajya mein hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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khambhat ki khadi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eखंभात की खाड़ी\u003c/b\u003e\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;के   अरब सागर  तट पर एक खाड़ी है, जो   मुंबई शहर के   उत्तर में\u0026nbsp;गुजरात\u0026nbsp;राज्य की सीमा पर है। खंभात की खाड़ी लगभग 200 किमी लंबी, उत्तर में लगभग 20   किमी और दक्षिण में 70 किमी चौड़ी है। गुजरात में बहने वाली प्रमुख नदियां   नर्मदा, ताप्ती, माही और   साबरमती हैं   जो खाड़ी में मुहाना बनाती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह गुजरात के दक्षिण-पूर्वी भाग से काठियावाड़   प्रायद्वीप को विभाजित करता है।\u0026nbsp; खाड़ी के पार 30 किलोमीटर बांध (कल्पसार परियोजना)   निर्माण की योजना है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eवन्यजीव\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  खाड़ी के पश्चिम में, एशियाई शेर गिर वन राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास,   काठियावाड़ या सौराष्ट्र के क्षेत्र हैं। खाड़ी के पूर्व में, डांग वन और   शूलपनेश्वर वन्यजीव अभयारण्य, जहां गुजरात महाराष्ट्र और\u0026nbsp;मध्य प्रदेश\u0026nbsp;से मिलता है, बंगाल टाइगर की मेजबानी करता था। \u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Dk3qqiWdQa0/YOR9NdeNseI/AAAAAAAAFE4/fTn6Z_1KSGYcpTxICa1XzbFZAEr_S-fWQCLcBGAsYHQ/s600/20210706_212504.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"खंभात की खाड़ी कहां स्थित है - khambhat ki khadi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Dk3qqiWdQa0/YOR9NdeNseI/AAAAAAAAFE4/fTn6Z_1KSGYcpTxICa1XzbFZAEr_S-fWQCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210706_212504.webp\" title\u003d\"खंभात की खाड़ी कहां स्थित है - khambhat ki khadi\" width\u003d\"320\" 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narmada nadi ka udgam sthal"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eनर्मदा नदी, जिसे रेवा भी कहा जाता है, पहले नर्बदा के नाम से भी जाना   जाता था। यह नदी   भारत के मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसे कई मायनों में   मध्य प्रदेश और   गुजरात राज्य की जीवन रेखा\" के रूप में भी जाना जाता है। नर्मदा मध्य प्रदेश के अनूपपुर   जिले के अमरकंटक पठार से निकलती है। यह उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच   पारंपरिक सीमा बनाता है और गुजरात के भरूच शहर के पश्चिम में 30 किमी पश्चिम में   खंभात की खाड़ी  के माध्यम से   अरब सागर  में बहने से पहले 1,312 किमी\u0026nbsp;पश्चिम की ओर बहती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eमुख्य बिंदु\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003e    राज्य - मध्य प्रदेश,     महाराष्ट्र,     गुजरात।   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    सहायक नदियाँ\u0026nbsp;- बुरहनेर नदी, बंजार नदी, शेर नदी, शक्कर नदी, दुधी नदी,     तवा नदी, गंजल नदी।   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003eस्रोत - नर्मदा कुंड।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eस्थान - मध्य प्रदेश, भारत\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eऊंचाई - 1,048 मीटर।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eलंबाई - 1,315 किमी\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eबेसिन - 1,080,000 किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eनिर्वहन - खंभात की खाड़ी, गुजरात\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    बांध - इंदिरा सागर बांध, ओंकारेश्वर, महेश्वर बांध, बरगी बांध, मान बांध, तवा     बांध, नर्मदा नहर, सरदार सरोवर।   \u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह\u0026nbsp; भारत की केवल तीन प्रमुख नदियों में से एक है जो पूर्व से पश्चिम (सबसे   लंबी पश्चिम में बहने वाली नदी) की ओर बहती है। यह भारत की नदियों में से एक है   जो सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला के बीच पश्चिम में बहने वाली भ्रंश घाटी में बहती   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भ्रंश घाटी नदी होने के कारण नर्मदा नदी डेल्टा नहीं बनाती है। भ्रंश घाटी नदी   मुहाना बनाती है। अन्य नदियाँ जो भ्रंश घाटी से होकर बहती हैं उनमें छोटा नागपुर   पठार में दामोदर नदी और ताप्ती शामिल हैं। ताप्ती नदी और माही नदी भी भ्रंश   घाटियों के माध्यम से बहती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा का स्रोत एक छोटा जलाशय है, जिसे नर्मदा कुंड के नाम से जाना जाता है, जो   पूर्वी मध्य प्रदेश के शहडोल क्षेत्र के अनूपपुर जिले में अमरकंटक पठार पर   अमरकंटक में स्थित है। नदी सोनमड से उतरती है, फिर कपिलधारा जलप्रपात के रूप में   एक चट्टान पर गिरती है और पहाड़ियों में बहती है, चट्टानों और द्वीपों को पार   करते हुए रामनगर के खंडहर महल तक एक मार्ग से बहती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  रामनगर और मंडला के बीच 25 किमी की दूरी तय करती है। नदी फिर उत्तर-पश्चिम में   जबलपुर की ओर एक संकीर्ण लूप में बहती है। इस शहर के करीब 9 मीटर निचे की   ओर\u0026nbsp; बहने के बाद,\u0026nbsp; मैग्नीशियम चूना पत्थर के माध्यम से एक गहरी संकीर्ण   चैनल में बहती है। अरब सागर से मिलने से पहले नर्मदा उत्तर में विंध्य   स्कार्पियों और दक्षिण में   सतपुड़ा श्रेणी के बीच तीन संकरी घाटियों में प्रवेश करती है। घाटी का दक्षिणी विस्तार   अधिकांश स्थानों पर चौड़ा है। ये तीन घाटी खंड स्कार्पियों और सतपुड़ा पहाड़ियों   की निकटवर्ती रेखा से अलग होते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  मार्बल रॉक्स से निकलकर नदी अपने पहले उपजाऊ बेसिन में प्रवेश करती है, जो दक्षिण   में लगभग 320 किमी तक फैली हुई है। उत्तर में, घाटी बरना-बरेली मैदान तक सीमित है   जो होशंगाबाद के सामने बरखारा पहाड़ियों पर समाप्त होती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"-webkit-text-stroke-width: 0px; clear: both; color: black; font-family: \u0026quot;Times New Roman\u0026quot;; font-size: medium; font-style: normal; font-variant-caps: normal; font-variant-ligatures: normal; font-weight: 400; letter-spacing: normal; orphans: 2; text-align: center; text-decoration-color: initial; text-decoration-style: initial; text-decoration-thickness: initial; text-indent: 0px; text-transform: none; white-space: normal; widows: 2; word-spacing: 0px;\"\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"-webkit-text-stroke-width: 0px; font-family: \u0026quot;Times New Roman\u0026quot;; letter-spacing: normal; margin-left: auto; margin-right: auto; orphans: 2; text-decoration-color: initial; text-decoration-style: initial; text-decoration-thickness: initial; text-transform: none; widows: 2; word-spacing: 0px;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-aRfevz4r8Aw/YKobPwrbI5I/AAAAAAAAE7A/bJqJi4a3W0EPcYXMEDncvA2aP5DPYpH3QCLcBGAsYHQ/s1280/20210523_143023.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है - narmada nadi ka udgam sthal\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1220\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"305\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-aRfevz4r8Aw/YKobPwrbI5I/AAAAAAAAE7A/bJqJi4a3W0EPcYXMEDncvA2aP5DPYpH3QCLcBGAsYHQ/w320-h305/20210523_143023.webp\" style\u003d\"cursor: move;\" title\u003d\"नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है - narmada nadi ka udgam sthal\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003enarmada nadi ka udgam sthal\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  बरेली के पास और आगरा से मुंबई रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग 3 के क्रॉसिंग घाट के पास   कुछ किलोमीटर नीचे, नर्मदा मंडलेश्वर मैदान में प्रवेश करती है, दूसरा बेसिन लगभग   180 किमी लंबा और 65 किमी चौड़ा है। दक्षिण. बेसिन की उत्तरी पट्टी केवल 25 किमी   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनर्मदा बेसिन\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा बेसिन, विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच स्थित, 98,796 किमी 2\u0026nbsp; के   क्षेत्र में फैली हुई है। दक्कन के पठार के उत्तरी छोर पर स्थित है यह\u0026nbsp;   बेसिन में मध्य प्रदेश (82%), गुजरात (12%) महाराष्ट्र\u0026nbsp; (4%) और छत्तीसगढ़  में (2%) शामिल हैं। नदी मार्ग में 41 सहायक नदियाँ हैं, जिनमें से २२\u0026nbsp;   सतपुड़ा श्रेणी से हैं और शेष दाहिने किनारे पर विंध्य श्रेणी से हैं। धूपगढ़   (1,350 मीटर), पचमढ़ी के पास नर्मदा बेसिन का उच्चतम बिंदु है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बेसिन में पांच भौगोलिक क्षेत्र हैं। वे हैं: (1) शहडोल, मंडला, दुर्ग, बालाघाट   और सिवनी जिलों को कवर करने वाले ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र हैं, (2) जबलपुर,   नरसिंहपुर, सागर, दमोह, छिंदवाड़ा, होसंगाबाद, बैतूल, रायसेन और जिलों को कवर   करने वाले ऊपरी मैदान है, (3) खंडवा के जिलों, खरगोन, देवास, इंदौर और धार के   हिस्से को कवर करने वाले मध्य मैदान, (4) पश्चिमी निमाड़, झाबुआ, धूलिया, नर्मदा   और वडोदरा के कुछ हिस्सों को कवर करने वाले निचले पहाड़ी क्षेत्र, और ( 5) मुख्य   रूप से नर्मदा, भरूच और वडोदरा जिले के कुछ हिस्सों को कवर करने वाले निचले   मैदान।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सिंचाई आयोग (1972) ने मध्य प्रदेश में नर्मदा बेसिन को सूखा प्रभावित और उत्तरी   गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के एक बड़े हिस्से को वर्षा की अत्यधिक अविश्वसनीयता   के कारण अर्ध-शुष्क या शुष्क कमी वाले क्षेत्रों के रूप में परिभासित किया गया   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनर्मदा नदी के बारे में\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  1. नर्मदा को रीवा भी कहा जाता है। यह मध्य भारत में और पांचवीं सबसे लंबी नदी   है। नर्मदा का स्रोत नर्मदा कुंड है जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक   में स्थित है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  2. गोदावरी और कृष्णा के बाद नर्मदा तीसरी सबसे लंबी नदी है जो पूरी तरह से भारत   के भीतर बहती है। मध्य प्रदेश के लोग पूरी तरह से नर्मदा नदी पर निर्भर हैं, वे   नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  3. यह भारत की प्रमुख नदियों में से एक है जो ताप्ती और माही के साथ पूर्व से   पश्चिम की ओर बहती है। यह मध्य प्रदेश (1,077 किमी), महाराष्ट्र (74 किमी) और   गुजरात (161 किमी) राज्यों से होकर बहती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  4. नर्मदा की सहायक नदियाँ कभी-कभी पर्वतमालाओं के बीच घाटी में बाढ़ का कारण   बनती हैं। इस नर्मदा के किनारे लगाए गए भारतीय सागौन के पेड़ हिमालय पर्वत   श्रृंखला के पेड़ों की तुलना में पुराने हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  5. नर्मदा भारत की पांच पवित्र नदियों में से एक है। अन्य चार गोदावरी नदी, गंगा   नदी, यमुना नदी और कावेरी नदी हैं। नर्मदा नदी को हिंदुओं का महत्वपूर्ण तीर्थ   स्थल माना जाता है। यह भगवान शिव के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  6. नर्मदा नदी की 3 राज्यों में लगभग 20 शाखाएं हैं। यह लगभग 20 करोड़ लोगों की   जीवन रेखा है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eइतिहास के तथ्य\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भारतीय इतिहास में, चालुक्य वंश के कन्नड़ सम्राट पुलकेशिन द्वितीय के बारे में   कहा जाता है कि उन्होंने नर्मदा के तट पर कन्नौज के सम्राट हर्षवर्धन को हराया   था। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  घाटी भव्य माहेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जो हाथ से बुनी जाती हैं; गर्म   और ठंडे मौसम में आरामदायक, आकर्षक और फिर भी हल्का। \u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1662410364376022681"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1662410364376022681"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/05/narmada-nadi-ka-udgam-sthal.html","title":"नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है - narmada nadi ka udgam sthal"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eहिमनद या ग्लेशियर\u003c/b\u003e बर्फ का एक विशाल ढेर होता है जो धीरे-धीरे जमीन पर   फैलता है। \"ग्लेशियर\" फ्रांसीसी शब्द ग्लेस (ग्लाह-से) से आया है, जिसका अर्थ है   बर्फ। ग्लेशियर को अक्सर \"बर्फ की नदियाँ\" कहा जाता है। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eग्लेशियर के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eग्लेशियर दो प्रकार की हो सकती हैं: अल्पाइन ग्लेशियर और बर्फ की चादरें।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e1. अल्पाइन ग्लेशियर\u0026nbsp;-\u0026nbsp;\u003c/b\u003eहिमनद बनते हैं। कभी-कभी, अल्पाइन   ग्लेशियर गंदगी, मिट्टी को अपने रास्ते से हटाकर घाटियों को बनाते हैं।   ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर हर महाद्वीप के ऊंचे पहाड़ों में अल्पाइन ग्लेशियर पाए   जाते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  स्विट्जरलैंड में गोर्नर ग्लेशियर और तंजानिया में फर्टवांगलर ग्लेशियर दोनों   विशिष्ट अल्पाइन ग्लेशियर हैं। अल्पाइन ग्लेशियर को घाटी हिमनद या पर्वतीय हिमनद   भी कहा जाता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपर्वतीय हिमनद\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ये हिमनद उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में विकसित होते हैं, जो अक्सर कई चोटियों या   यहां तक कि एक पर्वत श्रृंखला तक फैले होते हैं। सबसे बड़े पर्वतीय हिमनद आर्कटिक   कनाडा, अलास्का, दक्षिण अमेरिका में एंडीज और एशिया में   हिमालय में पाए जाते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eघाटी के हिमनद\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आमतौर पर पर्वतीय हिमनदों या बर्फ के मैदानों से निकलने वाले, ये हिमनद विशाल   घाटियों में फैल जाते हैं। घाटी के ग्लेशियर बहुत लंबे हो सकते हैं, अक्सर बर्फ   की रेखा से नीचे बहते हुए, कभी-कभी समुद्र के स्तर तक पहुँच जाते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eटाइडवाटर ग्लेशियर\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ये घाटी के ग्लेशियर हैं जो समुद्र में पहुंचने के   लिए काफी दूर तक बहते हैं। कुछ स्थानों में, ज्वार के पानी के ग्लेशियर मुहरों के   लिए प्रजनन आवास प्रदान करते हैं। टाइडवाटर ग्लेशियर कई छोटे हिमखंडों को शांत   करने के लिए जिम्मेदार हैं, जो हालांकि अंटार्कटिक हिमखंडों के रूप में नहीं हैं,   फिर भी शिपिंग लेन के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e2. बर्फ की चादरें\u003c/b\u003e - अल्पाइन ग्लेशियरों के विपरीत, पहाड़ी क्षेत्रों तक   सीमित नहीं होती हैं। वे चौड़े गुंबद बनाते हैं और अपने केंद्रों से सभी दिशाओं   में फैले हुए हैं। जैसे-जैसे बर्फ की चादरें फैलती हैं, वे अपने चारों ओर सब कुछ   बर्फ की मोटी चादर से ढक देते हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जिसमें घाटियाँ, मैदान और यहाँ तक कि पूरे पहाड़ भी शामिल हैं। सबसे बड़ी बर्फ की   चादरें, जिन्हें महाद्वीपीय हिमनद कहा जाता है, विशाल क्षेत्रों में फैली हुई   हैं। आज, महाद्वीपीय हिमनद अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड द्वीप के अधिकांश भाग को कवर   करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-nieR1JmoOJA/YKcNJjuQe-I/AAAAAAAAE6U/eV6fQOYvdtA6zBYaloIukCIM4efkRU-BQCLcBGAsYHQ/s1280/20210521_065928.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ग्लेशियर किसे कहते हैं - glacier in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"864\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"216\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-nieR1JmoOJA/YKcNJjuQe-I/AAAAAAAAE6U/eV6fQOYvdtA6zBYaloIukCIM4efkRU-BQCLcBGAsYHQ/w320-h216/20210521_065928.webp\" title\u003d\"ग्लेशियर किसे कहते हैं - glacier in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  प्लेइस्टोसिन कालावधि के दौरान विशाल बर्फ की चादरों ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप   के अधिकांश हिस्से को कवर किया था। जिसे हिमयुग भी कहा जाता है। लगभग 18,000 साल   पहले बर्फ की चादरें अपने सबसे बड़े आकार में पहुंच गईं। जैसे-जैसे प्राचीन   ग्लेशियर फैलते गए, उन्होंने पृथ्वी की सतह को बदल दिया। प्लेइस्टोसिन हिमयुग के   दौरान, पृथ्वी की लगभग एक तिहाई भूमि ग्लेशियरों से ढकी हुई थी। आज, पृथ्वी की   भूमि का लगभग दसवां भाग हिमनदों की बर्फ से ढका हुआ है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबर्फ की टोपियां\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बर्फ की टोपियां छोटी बर्फ की चादरें होती हैं, जो 50,000 वर्ग किलोमीटर (19,305   वर्ग मील) से कम को कवर करती हैं। वे मुख्य रूप से ध्रुवीय और उप-ध्रुवीय   क्षेत्रों में बनते हैं और महाद्वीपीय पैमाने की बर्फ की चादरों से छोटे होते   हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eआइसफ़ील्ड\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आइसफील्ड्स आइस कैप के समान हैं, सिवाय इसके कि उनका प्रवाह अंतर्निहित स्थलाकृति   से प्रभावित होता है, और वे आमतौर पर आइस कैप से छोटे होते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबर्फ की धाराएं\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बर्फ की धाराएँ बड़े रिबन जैसे हिमनद होते हैं जो एक बर्फ की चादर के भीतर होते   हैं - वे बर्फ से घिरे होते हैं जो रॉक आउटक्रॉप या पर्वत श्रृंखलाओं के बजाय   अधिक धीमी गति से बह रही होती है। बहने वाली बर्फ के ये विशाल परत अक्सर बहुत   संवेदनशील होते हैं। अंटार्कटिक बर्फ की चादर में कई बर्फ की धाराएँ हैं। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eग्लेशियर कैसे बनता है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  ग्लेशियर उन जगहों पर बनने लगते हैं जहां हर साल अधिक बर्फ गिरती है। गिरने के   तुरंत बाद, बर्फ सिकुड़ने लगती है, या घनी हो जाती है। यह धीरे-धीरे हल्के   क्रिस्टल से कठोर बर्फ में बदल जाता है। नई बर्फ गिरती है और इस दानेदार बर्फ को   दबा देती है। कठोर बर्फ और भी संकुचित हो जाती है। जिसे फ़र्न कहा जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैसे-जैसे साल बीतते हैं, फ़र्न की परतें एक-दूसरे के ऊपर बनती जाती हैं। जब बर्फ   काफी मोटी हो जाती है - लगभग 50 मीटर तक। ग्लेशियर इतना भारी है और इतना दबाव   डालता है कि तापमान में बिना किसी वृद्धि के फर्न और बर्फ पिघल जाते हैं। पिघला   हुआ पानी भारी ग्लेशियर के तल को पतला बनाता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  गुरुत्वाकर्षण से अल्पाइन ग्लेशियर घाटी में धीरे-धीरे नीचे चला जाता है। कुछ   ग्लेशियर, जिन्हें हैंगिंग ग्लेशियर कहा जाता है, एक पहाड़ की पूरी लंबाई में   नहीं बहते हैं। हिमस्खलन और हिमपात हिमनदों की बर्फ को बड़े ग्लेशियर में से   स्थानांतरित करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  एक ग्लेशियर में बर्फ का बड़ा द्रव्यमान प्लास्टिक या तरल की तरह व्यवहार करता   है। यह बहती है, रिसती है, और असमान सतहों पर तब तक फिसलती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हालांकि ग्लेशियर धीरे-धीरे चलते हैं, लेकिन वे बेहद शक्तिशाली होते हैं। बड़े   बुलडोजर की तरह, वे साल-दर-साल खिसकते हैं, कुचलते होते हैं और अपने रास्ते में   आने वाले लगभग हर चीज को हटा देते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कभी-कभी, ज्वालामुखियों पर ग्लेशियर बनते हैं। जब ये\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eफटते हैं तो ये   विशेष रूप से खतरनाक होते हैं। वे भूमि और वातावरण बहुत हानि पहुंचते हैं। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहिमालय का सबसे बड़ा ग्लेशियर\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  काराकोरम में स्थित 76 किमी लंबा सियाचिन ग्लेशियर, भारतीय हिमालय का सबसे लंबा   ग्लेशियर है और दुनिया के गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर   है। यह ग्रेट ड्रेनेज डिवाइड के दक्षिण में स्थित है जो यूरेशियन प्लेट को भारतीय   उपमहाद्वीप से अलग करता है और इंदिरा कर्नल में समुद्र तल से 5,753 मीटर (18,875   फीट) की ऊंचाई पर है। हिमालय के कुछ महत्वपूर्ण हिमनदों की सूची और स्थान चित्र   और तालिका 1 में प्रस्तुत किए गए हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसरो हिमनद सूची के अनुसार, सिंधु,   गंगा और   ब्रह्मपुत्र के तीन मुख्य ग्लेशियर घाटियों के साथ अन्य 32,392 ग्लेशियर हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भारतीय हिमालय के ग्लेशियरों को तीन भौगोलिक भागों में विभाजित किया गया है,   जिन्हें आमतौर पर पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिमालय के रूप में जाना जाता है। कुल   मिलाकर, हिमालय की पर्वत श्रृंखला लगभग 2,400 किमी तक फैली हुई है और दो प्रमुख   जलवायु प्रणालियों द्वारा पोषित है। पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी हिमालय,   ट्रांस-हिमालय और\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-tibet.html\"\u003eतिब्बत\u003c/a\u003e\u0026nbsp;हिमालय में सर्दियों की वर्षा के लिए मध्य अक्षांश के   पश्चिमी भाग जिम्मेदार हैं। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eग्लेशियर कैसे पिघलता है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में ग्लेशियर खतरनाक दरों से\u0026nbsp;पिघल रही हैं, और   गर्म हवा ही एकमात्र इसका\u0026nbsp;कारण नहीं है। वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि   गर्म समुद्र का पानी के कारण\u0026nbsp;बर्फ तेजी से पिघल रही\u0026nbsp;है । \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ग्रीनलैंड में यह एक बढ़ती हुई समस्या है, वैज्ञानिकों का कहना है यह अंटार्कटिका   में ग्लेशियरों के पिघलने का प्रमुख कारण हो सकता है। इसके अलावा अधिक दबाव के   कारण भी ग्लेशियर धीरे धीरे पिघलती रहती हैं। जिसके कारण पर्वतीय क्षेत्र जैसे   हिमालय में नदियों का निर्माण होता हैं। भारत में बहने वाली कई नदियों का उद्गम   स्थान है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e के कारण हिमनद अधिक तेजी से पिघलने लगी है जिसके कारण समुद्र का   जल स्तर साल दर साल बढ़\u0026nbsp; रहा है। एक अनुमान के अनुसार यदि ऐसा ही हाल\u0026nbsp;   रहा तो विश्व की कई शहर जल मग्न हो जायेगा।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2472862574128745464"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2472862574128745464"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/05/glacier-in-hindi.html","title":"ग्लेशियर किसे कहते हैं - glacier in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-nieR1JmoOJA/YKcNJjuQe-I/AAAAAAAAE6U/eV6fQOYvdtA6zBYaloIukCIM4efkRU-BQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h216/20210521_065928.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8998548015910154138"},"published":{"$t":"2021-05-17T19:09:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:13:15.929+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जैविक और अजैविक संसाधन क्या है - Biological and Abiotic Resources"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  पारिस्थितिक तंत्र को आकार देने के लिए जैविक और अजैविक दो आवश्यक कारक जिम्मेदार होते हैं। जैविक   कारक एक पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी जीवित प्राणियों को संदर्भित करते हैं   और अजैविक कारक सभी गैर-जीवित घटकों जैसे भौतिक स्थितियों और रासायनिक तत्व होते   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसलिए, अजैविक और जैविक दोनों संसाधन उत्तर जीविता और प्रजनन प्रक्रिया को   प्रभावित करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसके अलावा, ये दोनों घटक एक दूसरे पर निर्भर हैं। मान लीजिए कि यदि किसी एक कारक   को हटा दिया जाता है या बदल दिया जाता है, तो इसका असर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र   को भुगतना पड़ेगा। निस्संदेह, अजैविक कारक जीवों के अस्तित्व को सीधे प्रभावित   करते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैविक का अर्थ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयह पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी जीवित चीजों से संबंधित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eजैविक कारक\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैविक कारक पारिस्थितिकी तंत्र में सभी जीवित चीजों से संबंधित हैं। उनकी   उपस्थिति और उनके जैविक उपोत्पाद एक पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना को प्रभावित   करते हैं। जैविक कारक जानवरों और मनुष्यों से लेकर पौधों, कवक और बैक्टीरिया तक   सभी जीवित जीवों को संदर्भित करते हैं। प्रत्येक प्रजाति के प्रजनन और भोजन आदि   जैसी आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न जैविक कारकों के बीच परस्पर   क्रिया आवश्यक है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैविक कारकों के उदाहरण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  जैविक संसाधनों के उदाहरणों में पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी जीवित घटक   शामिल हैं। इनमें उत्पादक, उपभोक्ता, डीकंपोजर और डिट्राइवोर्स शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअजैविक का अर्थ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  अजैविक शब्द एक पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी निर्जीव कारकों को संदर्भित   करता है। सूर्य का प्रकाश, जल, भूमि, सभी अजैविक कारक हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअजैविक कारक\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अजैविक कारक सभी निर्जीव, अर्थात वातावरण, जलमंडल और स्थलमंडल में मौजूद रासायनिक   और भौतिक कारकों को संदर्भित करते हैं। सूर्य का प्रकाश, वायु, वर्षा, खनिज और   मिट्टी अजैविक कारकों के कुछ उदाहरण हैं। पारिस्थितिक तंत्र में प्रजातियों के   अस्तित्व और प्रजनन पर इन कारकों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उदाहरण के लिए, पर्याप्त मात्रा में सूर्य के प्रकाश के बिना, स्वपोषी जीव जीवित   रहने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। जब ये जीव अंततः मर जाते हैं, तो यह प्राथमिक   उपभोक्ताओं के लिए भोजन की कमी पैदा करेगा। यह प्रभाव हर जीव को प्रभावित करते   हुए खाद्य श्रृंखला को कैस्केड करता है। नतीजतन, यह पारिस्थितिकी तंत्र में   असंतुलन की ओर जाता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअजैविक कारकों के उदाहरण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  अजैविक उदाहरण आमतौर पर पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार पर निर्भर करते हैं। उदाहरण   के लिए, एक स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में अजैविक घटकों में हवा, मौसम, पानी,   तापमान, आर्द्रता, ऊंचाई, मिट्टी का पीएच स्तर, मिट्टी का प्रकार और बहुत कुछ   शामिल हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में अजैविक उदाहरणों में पानी की लवणता,   ऑक्सीजन का स्तर, पीएच स्तर, जल प्रवाह दर, पानी की गहराई और तापमान शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GOvSlzwu3Qw/YKP20XmsmyI/AAAAAAAAE5w/o4lFMSS_NmUMOZSsGV7Dhn1VJeVuSSOiACPcBGAYYCw/s600/20210518_224412.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GOvSlzwu3Qw/YKP20XmsmyI/AAAAAAAAE5w/o4lFMSS_NmUMOZSsGV7Dhn1VJeVuSSOiACPcBGAYYCw/w320-h213/20210518_224412.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. जैविक कारक क्या हैं\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैविक कारक एक पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद जीवित घटक हैं। अधिक विशेष रूप से,   इसमें सभी वनस्पति और जीव शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. जैविक संसाधनों के कुछ उदाहरण बताइए।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eपौधों\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eजानवरों\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eकवक\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eजीवाणु\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. अजैविक कारक क्या हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अजैविक कारक एक पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी निर्जीव घटकों को संदर्भित करते   हैं। इसमें आमतौर पर भौतिक और रासायनिक घटक शामिल होते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. अजैविक कारकों के कुछ उदाहरण दीजिए।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअजैविक कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eजलवायु\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eनमी\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eतेज़ी\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eहवा\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eऊंचाई\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमिट्टी का प्रकार\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eप्रकाश प्रवेश\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपानी की गहराई\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eऑक्सीजन सामग्री\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eगंदगी\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e5. अजैविक और जैविक संसाधनों के बीच अंतःक्रिया का एक उदाहरण विस्तृत करें।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैविक संसाधनों में एक पारिस्थितिकी तंत्र में हर जीवनरूप शामिल होता है। ये   जीवनरूप अजैविक कारकों पर निर्भर करते हैं क्योंकि ये सीधे उनकी वृद्धि,   उत्तरजीविता और प्रजनन को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, मैलापन एक अजैविक   कारक है जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रमुख रूप से प्रभावित करता है। मैलापन   का उच्च स्तर जलमग्न पौधों के विकास को रोकता है। इसके परिणामस्वरूप अन्य   प्रजातियां प्रभावित होती हैं जो भोजन या आश्रय के लिए इन पौधों पर निर्भर करती   हैं। \u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8998548015910154138"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8998548015910154138"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/05/biological-and-abiotic-resources.html","title":"जैविक और अजैविक संसाधन क्या है - Biological and Abiotic Resources"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-GOvSlzwu3Qw/YKP20XmsmyI/AAAAAAAAE5w/o4lFMSS_NmUMOZSsGV7Dhn1VJeVuSSOiACPcBGAYYCw/s72-w320-c-h213/20210518_224412.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7167592287241574889"},"published":{"$t":"2021-02-26T11:45:00.007+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:15:26.570+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"ग्रह किसे कहते है - Planet in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  सभी जानते हैं कि पृथ्वी, मंगल और बृहस्पति ग्रह हैं। लेकिन प्लूटो को पहले ग्रह\n  माना जाता था, कुछ कारणों से अब इसे ग्रह नहीं माना जाता हैं। वैज्ञानिकों के बीच\n  आज भी ग्रह की परिभाषा पर बहस जारी है। आखिर कौनसे पिंड को ग्रह माना जाता हैं?\n  चलिए जानते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eग्रह किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\n  \u003cp\u003e\n    ग्रह आकाश में स्थित वह पिंड है, जो सूर्य की परिक्रमा करता है। यह आकर में\n    काफी बड़े या छोटे हो सकते है। हमरे सौरमंडल में 8 ग्रह है। बुध, शुक्र, पृथ्वी,\n    मंगल,\u0026nbsp;बृहस्पति, शनि, अरुण और बरुन। ग्रह दो प्रकार के होते है भूमिगत\n    ग्रह और गैसीय ग्रह।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"font-size: medium;\"\u003e\u003cb\u003e\n    परिभाषा\n\u003c/b\u003e    - ग्रह एक एक खगोलीय पिंड है जो सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में चक्कर\n      लगता है। उनके पास पर्याप्त द्रव्यमान और लगभग गोल आकर होता हैं। इनके पास\n      अपना ग्रुत्वकर्षण बल होता हैं। जो आप पास के मलवे को आकर्षित करता\n      हैं।\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    ग्रह की सबसे हालिया परिभाषा को 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा\n    अपनाया गया था। इसका यह कहता है कि एक ग्रह में ये तीन लक्षण होने चाहिए -\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n  \u003col\u003e\n    \u003cli\u003eउसे एक तारे की परिक्रमा करनी चाहिए।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eपिंड का आकार गोल होना चाहिए।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003eयह इतना बड़ा होना चाहिए कि उसमे पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण हो।\u003c/li\u003e\n    \u003cli\u003e\n      यह इतना बड़ा होना चाहिए कि उसका गुरुत्वाकर्षण अपने आस पास के वस्तु को\n      आकर्षित करे।\n    \u003c/li\u003e\n  \u003c/ol\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n\n  \u003c/div\u003e\n\n\u003ch3\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहमारे सौरमंडल में ग्रहों की संख्या कितनी है\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eबुध -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह और सूर्य के सबसे नजदीक बुध\n    पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा ही बड़ा है। बुध की सतह से, सूर्य पृथ्वी से देखने\n    पर तीन गुना से अधिक बड़ा दिखाई देगा, और सूर्य का प्रकाश सात गुना तेज होगा।\n    सूर्य से इसकी निकटता के बावजूद, बुध हमारे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह नहीं\n    है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eशुक्र -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसूर्य से दूसरा ग्रह है और पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी ग्रह\n    है। यह चार स्थलीय ग्रहों में से एक है, और इसे अक्सर पृथ्वी का जुड़वां कहा\n    जाता है। क्योंकि यह आकार और घनत्व में समान है। हालांकि दोनों ग्रहों के बीच\n    तापमान में बहुत अंतर हैं। यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eपृथ्वी -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;हमारा गृह ग्रह सूर्य से तीसरा ग्रह है, और अब तक हम जिस\n    एकमात्र स्थान के बारे में जानते हैं, वह जीवित चीजों का निवास है। जबकि पृथ्वी\n    सौर मंडल का केवल पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है, यह हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा\n    विश्व है जिसकी सतह पर तरल पानी है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    पास के शुक्र से थोड़ा ही बड़ा, पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट के चार ग्रहों में\n    से सबसे बड़ा है, जो सभी चट्टान और धातु से बने हैं। पृथ्वी को अंग्रेज़ी में\n    अर्थ कहा जाता है। पृथ्वी नाम कम से कम 1000 साल पुराना है। पृथ्वी को छोड़कर\n    सभी ग्रहों का नाम ग्रीक और रोमन देवी-देवताओं के नाम पर रखा गया था।\n  \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dWmfxocxfPE/YDX7CEW-dTI/AAAAAAAAFy4/PpOm8D20O9ERigO2eiJ-CZJFNVw5SKlywCLcBGAsYHQ/s600/1_encF5EeouyEH8YTANng4Aw.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ग्रह किसे कहते है - Planet in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dWmfxocxfPE/YDX7CEW-dTI/AAAAAAAAFy4/PpOm8D20O9ERigO2eiJ-CZJFNVw5SKlywCLcBGAsYHQ/w320-h213/1_encF5EeouyEH8YTANng4Aw.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" title\u003d\"ग्रह किसे कहते है - Planet in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eमंगल -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसूर्य से चौथा ग्रह है - एक बहुत ही पतले वातावरण के साथ\n    धूल, ठंडा, रेगिस्तानी दुनिया वाला ग्रह हैं। मंगल भी एक गतिशील ग्रह है जिसमें\n    मौसम, ध्रुवीय बर्फ की टोपी, घाटी, विलुप्त\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eके सबूत हैं। अतीत में\n    और भी अधिक सक्रिय ज्वालमुखी रहे होंगे। मंगल हमारे सौर मंडल में सबसे अधिक\n    खोजे गए पिंडों में से एक है, और यह एकमात्र ऐसा ग्रह है। जहां हमने रोवर्स\n    भेजे हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eबृहस्पति \u003c/b\u003e- यह सूर्य से पांचवा क्रम का ग्रह हैं। बृहस्पति सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह\n      है।इसका आकर सभी ग्रहों के दोगुने से भी अधिक हैं। बृहस्पति में हाइड्रोजन और हीलियम के वातावरण में तैरते हुए अमोनिया और पानी\n      के ठंडे, हवा वाले बादल हैं। बृहस्पति का प्रतिष्ठित ग्रेट रेड स्पॉट पृथ्वी\n      से भी बड़ा एक विशाल तूफान है। जो सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eशनि -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसूर्य से छठा ग्रह है और हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा\n    ग्रह है। हजारों सुंदर छल्लों से सुशोभित शनि ग्रहों में अद्वितीय है। यह\n    एकमात्र ऐसा ग्रह नहीं है जिसके छल्ले हैं - जो बर्फ और चट्टान के टुकड़ों से\n    बने हैं। बृहस्पति की तरह, शनि एक विशाल ग्रह है जो ज्यादातर हाइड्रोजन और\n    हीलियम से बनी है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eयूरेनस -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसूर्य से सातवां ग्रह है, और हमारे सौर मंडल में तीसरा\n    सबसे बड़ा व्यास\u0026nbsp; वाला ग्रह है। यह एक दूरबीन की सहायता से पाया गया पहला\n    ग्रह था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    यूरेनस की खोज 1781 में खगोलशास्त्री विलियम हर्शल ने की थी, हालांकि उन्होंने\n    मूल रूप से सोचा था कि यह एक धूमकेतु या एक तारा है। दो साल बाद इसे नए ग्रह के\n    रूप में स्वीकार किया गया था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cb\u003eनेपच्यून -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;पृथ्वी की तुलना में सूर्य से 30 गुना से अधिक दूर,\n    नेपच्यून हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जो नग्न आंखों से दिखाई नहीं\n    देता है। 1846 के खोज के बाद से अपनी पहली बार 2011 में नेपच्यून ने 165 साल की\n    कक्षा पूरी की हैं।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp\u003e\n    यह हमारे सौरमंडल का आठवां ग्रह है। नासा का वोयाजर 2 एकमात्र अंतरिक्ष यान है\n    जिसने नेप्च्यून को करीब से देखा है।\n  \u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7167592287241574889"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7167592287241574889"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/02/planet-in-hindi.html","title":"ग्रह किसे कहते है - Planet in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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आकार\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e1,737.1 km\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eचन्द्रमा आयु\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e4.53 billion years\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eचंद्रमा का द्रव्यमान\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e7.35 x 10 19 टन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eचंद्रमा का तापमान\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e127 ° C\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eअंग्रेजी नाम\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eMOON\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e\u003ch2\u003eचंद्रमा किसे कहते हैं\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा पृथ्वी से परे एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ मनुष्यों ने पैर जमाए हैं।   यह\u0026nbsp;रात के समय आकाश में सबसे चमकीली और सबसे बड़ी वस्तु हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा   पृथ्वी का   एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। येे पृथ्वी के व्यास का एक-चौथाई है। और सौर मंडल   का पांचवा सबसे बड़ा उपग्रह है। चंद्रमा 384,400 किमी के औसत दूरी पर, पृथ्वी की   परिक्रमा करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह को बस \"moon\" (चन्द्रमा) कहा जाता है क्योंकि लोग   नहीं जानते थे कि अन्य चंद्रमा मौजूद हैं जब तक कि गैलीलियो गैलीली ने 1610 में   बृहस्पति की परिक्रमा करने वाले चार चंद्रमाओं की खोज नहीं की थी। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव, पृथ्वी के दिन को थोड़ा लंबा करता है। चंद्रमा   को एक चट्टानी पिंड के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसमें वायुमंडल, जलमंडल,   या\u0026nbsp;\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;Google Sans\u0026quot;, sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; font-size: inherit; font-weight: inherit;\"\u003eगुरुत्वाकर्षण\u0026nbsp;\u003c/span\u003eक्षेत्र का अभाव है। और इसकी सतह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के 0.1654 ग्राम के   बराबर\u0026nbsp;में है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर 27.3 दिनों में एक चककर\u0026nbsp;पूरा करता है। यह उपग्रह   हमारी\u0026nbsp;पृथ्वी के ग्रुत्वकर्षण से बंधा हुआ है। इसी कारण चंदमा पृथ्वी का   चक्कर लगाती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी पर मंगल ग्रह जितने बड़े पिंड के टकराने के बाद चंद्रमा का निर्माण हुयी   है। इसके होने से हमारी धरती पर स्थिर जलवायु ओर ज्वार भाटा बनता है। यदि धरती के   पास यह चाँद नहीं होता तो सैयद यहाँ जीवन संभव नहीं हो पता।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी का चंद्रमा हमारे सौर मंडल में 190+ चंद्रमाओं में से पांचवां सबसे बड़ा   उपग्रह है। वर्तमान में NASA के पास तीन रोबोटिक अंतरिक्ष यान हैं जो चंद्रमा की   खोज कर रहे हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी के परे चंद्रमा पहला स्थान था, 1950 के दशक के अंत में अंतरिक्ष युग शुरू   होने के बाद पहुंचने की कोशिश की गयी। आधा दर्जन से अधिक देशों के 100 से अधिक   अंतरिक्ष यान भेजा है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआकार और दूरी\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  लगभग 1,080 मील (1,740 किलोमीटर) की त्रिज्या के साथ, चंद्रमा पृथ्वी की चौड़ाई   के एक तिहाई से भी कम है। यदि पृथ्वी एक निकल के आकार की है, तो चंद्रमा कॉफी बिन   जितना बड़ा होगा। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा औसतन 238,855 मील (384,400 किलोमीटर) दूर है। इसका मतलब है कि पृथ्वी और   चंद्रमा के बीच 30 पृथ्वी के आकार के ग्रह फिट हो सकते हैं। चंद्रमा धीरे-धीरे   पृथ्वी से दूर जा रहा है, हर साल लगभग एक इंच। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकक्षा और परिक्रमा\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा उसी दर पर घूम रहा है, जो पृथ्वी अपने परिधि के चारों ओर घूमता है जिसे   सिंक्रोनस रोटेशन कहा जाता है। इसलिए एक ही गोलार्ध हर समय पृथ्वी की ओर रहता   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कुछ लोग कहते हैं की हम पृथ्वी से कभी चन्द्रमा के \"डार्क साइड\" को नहीं देखते   लेकिन यह भ्रामक है। जैसे कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, अलग-अलग हिस्से   अलग-अलग समय पर धूप या अंधेरे में होते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा 27 पृथ्वी दिनों में पृथ्वी की पूरी परिक्रमा करता है और उसी दर पर या   उसी समय में घूमता है। चूँकि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम रही है और सूर्य की   परिक्रमा करती है। हमारे दृष्टिकोण से, चंद्रमा हमें हर 29 दिन परिक्रमा करता हुआ   दिखाई देता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eसंरचना\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी के चंद्रमा में एक कोर, मेंटल और क्रस्ट है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा का कोर अन्य स्थलीय निकायों के कोर की तुलना में आनुपातिक रूप से छोटा   है। यह 56 मील मोटी एक तरल लोहे के खोल से घिरा हुआ है। 93 मील की मोटाई के साथ   आंशिक रूप से पिघली हुई परत लोहे के कोर को घेरती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  मेंटल आंशिक रूप से पिघली परत के ऊपर से चंद्रमा की पपड़ी के नीचे तक फैला हुआ   है। सबसे अधिक संभावना है जैसे जैतून और पाइरॉक्सिन जैसे खनिज, जो मैग्नीशियम,   लोहा, सिलिकॉन और ऑक्सीजन परमाणुओं से बने हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह टाइटेनियम, यूरेनियम, थोरियम, पोटेशियम और हाइड्रोजन की थोड़ी मात्रा के साथ   ऑक्सीजन, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, लोहा, कैल्शियम और एल्यूमीनियम से बना है। बहुत   पहले चंद्रमा में सक्रिय\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eथे, लेकिन आज वे सभी निष्क्रिय हैं और लाखों   वर्षों तक नहीं फटे हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eप्राकृतिक उपग्रह किसे कहते है ?\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  प्राकृतिक उपग्रह अंतरिक्ष में एक खगोलीय पिंड है जो एक बड़े पिंड के चारों ओर   परिक्रमा करता है। चंद्रमा को प्राकृतिक उपग्रह कहा जाता है क्योंकि वे ग्रहों की   परिक्रमा करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी के पास एक प्राकृतिक उपग्रह है\u0026nbsp;जिसे चंद्रमा\u0026nbsp;कहा जाता है।   चंद्रमा 1 किमी / सेकंड की कक्षीय गति से घूमते हुए पृथ्वी की परिक्रमा करने में   27.3 दिन लेता है। \u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-_vd5m1Uz53c/YDW0OlLp0AI/AAAAAAAAFyU/B-jrNUGI8VoOLGfFhy1t3yJXnvqjIAjUQCLcBGAsYHQ/s600/full-moon-stars-sea-sky-wallpaper-preview.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"Moon in hindi, चंद्रमा किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-_vd5m1Uz53c/YDW0OlLp0AI/AAAAAAAAFyU/B-jrNUGI8VoOLGfFhy1t3yJXnvqjIAjUQCLcBGAsYHQ/w320-h213/full-moon-stars-sea-sky-wallpaper-preview.webp\" title\u003d\"Moon in hindi, chand kise kahate hain, चंद्रमा किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eMoon in Hindi\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  ऐसे उपग्रह जो लोगों द्वारा बनाए जाते हैं और रॉकेट का उपयोग करके कक्षा में   लॉन्च किए जाते हैं, कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले   हजारों कृत्रिम उपग्रह हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रमुख उपग्रह\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e \u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eप्राकृतिक उपग्रह\u0026nbsp;\u003c/th\u003e      \u003cth\u003eग्रह\u0026nbsp;\u003c/th\u003e\u003cth\u003eकक्षीय गति (औसत)\u003c/th\u003e      \u003cth\u003eपरिक्रमा का समय\u003c/th\u003e           \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eचंद्रमा\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eपृथ्वी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e1.0 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e27.3 days\u003c/td\u003e           \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eलो\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eबृहस्पति\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e17.33 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e1.77 days\u003c/td\u003e           \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eयूरोपा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eबृहस्पति\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e13.74 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e3.55 days\u003c/td\u003e           \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eगेनीमेड\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eबृहस्पति\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e10.88 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e7.16 days\u003c/td\u003e          \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकैलिस्टो\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eबृहस्पति\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e8.20 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e16.69 days\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eफोबोस\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eमंगल\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e2.14 km/s\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e0.32 days\u003c/td\u003e          \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eचंद्रमा पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा पर पहुंचने वाली पहली मानव निर्मित वस्तु लूना 2 थी जो सोवियत संघ ने   1959 में अंतरिक्ष यान से भेजा था। इसके बाद 1966 में लूना 9 द्वारा पहली सफल   सॉफ्ट लैंडिंग हुई। अब तक का एकमात्र मानव चंद्र मिशन\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;की   नासा अपोलो कार्यक्रम है। जिसने 1968 में अपोलो 8 के साथ पहले मानवयुक्त चंद्र   अभियान की शुरुआत हुयी थी।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उसके बाद छ: बार चाँद पर मनुष्यों को\u0026nbsp;1969 और 1972 के बीच रिसर्च के लिए   भेजा जा चूका है।\u0026nbsp;इन मिसन में चाँद के मिट्टी के नमूने लाये गए थे   इससे\u0026nbsp;चंद्रमा की उत्पत्ति, आंतरिक संरचना और इतिहास की विस्तृत जानकारी   मिली।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  एक थ्योरी के अनुसार\u0026nbsp;चंद्रमा लगभग 4.51 बिलियन साल पहले बना था। पृथ्वी पर   एक विशालय काय पिंड के टकराने से धरती का कुछ टुकड़ा अलग हो गया और चन्द्रमा   (moon) का निर्माण हुआ है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan\u003ewhat is a moon in Hindi\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  moon केवल पृथ्वी के उपग्रह को नहीं कहा जाता बल्कि हमारे सौरमंडल में जितने भी   उपग्रह है उन सभी को moon से संदर्भित किया जाता हैं। हिंदी में इसे चन्द्रमा या   चाँद भी कहा जाता हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  Moon जिसे प्राकृतिक उपग्रह, ऑर्बिट प्लानेट और हमारे सौर मंडल में क्षुद्रग्रहों   के रूप में भी जाना जाता है। पृथ्वी के पास एक moon है, और हमारे सौर मंडल में   200 से अधिक moons हैं। अधिकांश प्रमुख ग्रह - बुध और शुक्र को छोड़कर सभी के पास   moon हैं। शनि और बृहस्पति के पास दर्जनों moon हैं जो इन ग्रहो की परिक्रमा करते   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  Moon कई आकार और प्रकार के हो सकते हैं। कुछ के सतह में वायुमंडल और यहां तक कि   छिपे हुए महासागर भी हैं। अधिकांश Moons संभवत: प्रारंभिक सौर मंडल में ग्रहों के   चारों ओर घूमने वाली गैस और धूल की डिस्क से बनते हैं, हालांकि यह भी \"कैप्चर किए   गए\" की बाहरी पिंड सौरमंडल में आ जाते है और बड़ी ग्रहों के चारों परिक्रमा करने   लगते हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eचाँद को उनके नाम कैसे मिलते हैं\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हमारे सौर मंडल में अधिकांश चंद्रमाओं को पौराणिक देवताओं के नामों से नामित किया   गया है। उदाहरण के लिए, शनि पर खोजे गए सबसे नए चंद्रमा का नाम एक विशालकाय   बर्गेलमीर नॉर्स देवताओं के लिए रखा गया है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यूरेनस इसका अपवाद है। यूरेनस के चंद्रमाओं को विलियम शेक्सपियर के नाटकों के   पात्रों के नाम पर रखा गया है ऑर्फ़ेलिया और पक।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eग्रह तथा उनके\u0026nbsp;उपग्रहों की संख्या\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eबुध - 0\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eशुक्र - 0\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपृथ्वी - 1\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमंगल - 2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eबृहस्पति - 79 (53 confirmed, 26 provisional)\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eशनि - 62 (53 confirmed, 9 provisional)\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eयूरेनस - 27\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eनेपच्यून - 14\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eभारत का चंद्र मिशन\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eचंद्रयान -1\u003c/b\u003e, भारत का प्रथम चंद्र मिशन, एस डी एस सी, शार, था   जिसे\u0026nbsp;श्रीहरिकोटा से 22 अक्तूबर, 2008 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित\u0026nbsp;किया   गया था। ये\u0026nbsp;अंतरिक्षयान 100 कि.मी. की ऊँचाई पर चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा   था। अंतरिक्षयान भारत, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन और   बल्गेरिया में निर्मित 11 वैज्ञानिक उपकरणों को वहन का अंतरिक्ष में ले गया था। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eचंद्रयान 2\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- 18 सितंबर 2008 को मनमोहन सिंह ने मिशन को मंजूरी दी।   मिशन को जनवरी 2013 में स्थगित कर 2016 में प्रक्षेपित करने का निर्णय लिया गया।   क्योकि भारत के पास कोई भरी उपग्रह को प्रक्षेपित करने का यान नहीं था। और रूस   सेसहायता करने से मना कर दिया था। तभी भारत में स्वदेशी यान बनाने पर काम की   शुरुआत हुयी। जो 2016 को सफलता पूर्वक तैयार किया गया।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इस मिसन में एक रोबोट को चाँद के सतह पर उतारने की योजना थी और एक उपग्रह चंदमा   का परिक्रमा करके उनसे\u0026nbsp; जानकारी साझा करने वाला था। लेकिन कुछ तकनिकी कारण   से रोबोट का सॉफ्ट लैंडिग नहीं हो पाया और उससे कनेक्टन टूट गया। यह मिशन के तहत   चाँद पर पानी की खोज और उसके भूमि का परीक्षण करना था।\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eNames of Moon in Hindi\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह का अंग्रेजी नाम MOON है। MOON अंग्रेजी   शब्द\u0026nbsp;mōna से लिया गया है। कभी-कभी वैज्ञानिक चाँद के लिए\u0026nbsp;लूना शब्द का   उपयोग करते\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चाँद को हिंदी में आदि नमो से जाना जाता है - मयंक, विधु, सुधाकर, कलानिधि,   निशापति, शशांक, चंद्रमा, चन्द्र, शशि, हिमकर, राकेश, रजनीश, हिमांशु।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3\u003eचन्द्रमा की उत्पत्ति\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  वैज्ञानिक चंद्रमा की उत्पत्ति के सिद्धांत पर एक मत नहीं है। कुछ वैज्ञानिक कहते   है की पृथ्वी के कुछ भाग के अलग होने से चंदमा का निर्माण हुआ है। तो अन्य   वैज्ञानिक पृथ्वी पर क्षुद्रग्रह के टकराने से चंदमा का निर्माण हुआ है यह दवा   करते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नए अनुसंधान के अनुसार, सौर प्रणाली की उत्पत्ति के कुछ 50\u0026nbsp; मिलियन वर्ष   पहले चंद्रमा की रचना 4. 51\u0026nbsp;अरब साल पहले हुई थी। उस समय पृथ्वी बहुत गर्म   थी और अपनी परिधि में बहुत तेज गति से रही थी। जिसके कारण पृथ्वी के छोटे छोटे   टुकड़े\u0026nbsp;अंतरिक्ष में बिखरने लगे कई परिवर्तन के बाद वे इकट्ठा होकर के पिंड   में परिवर्तित हो गया और पृथ्वी की परिक्रमा करने लगा। जिसे हम आज चंद के नाम से   जानते है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e\u003ci\u003e एक अन्य\u0026nbsp;सिद्धांत के अनुशार\u003c/i\u003e\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा की उत्पत्ति का प्रमुख सिद्धांत यह है कि लगभग 4.5 बिलियन साल पहले मंगल   के आकार का एक पिंड पृथ्वी से टकराया था, और इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के मलबे और   पिंड से हमारा प्राकृतिक उपग्रह बना है। नवगठित चंद्रमा एक पिघली हुयी अवस्था में   था। लगभग 100 मिलियन वर्षों के भीतर \"मैग्मा\" का क्रिस्टलीकरण हो गया। जिसमें   हलके चट्टानें ऊपर की ओर तैरने लगी और इससे मून का परत बना। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रमा के होने से पृथ्वी पर वातावरण में बदलाव हुए जिसके परिणाम स्वरुप\u0026nbsp;   जीवन का विकास हुआ। लगभग पूरा चंद्रमा चारकोल-ग्रे, पाउडर धूल और चट्टानी मलबे के   ढेर से ढका हुआ है, जिसे मून रेजोलिथ कहा जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e\u003ci\u003eइसके बारे में\u0026nbsp;अधिक जानकारी\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"color: #cc0000;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://moon.nasa.gov/about/in-depth/\" target\u003d\"_blank\"\u003eAbout the Moon\u003c/a\u003e\u0026nbsp;( English       \u003c/span\u003e\u003c/i\u003e\u003c/b\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #cc0000;\"\u003e\u003cb\u003e\u003ci\u003eArticle\u003c/i\u003e\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cb\u003e\u003ci\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #cc0000;\"\u003e\u0026nbsp;)\u003c/span\u003e\u003c/i\u003e\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eचंद्र ग्रहण क्या है\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  चंद्रग्रहण के दौरान, पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, जिससे चंद्रमा पर   पड़ने वाली सूर्य की रोशनी अवरुद्ध हो जाती है। इसे ही चंद्र ग्रहण कहा जाता   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003eचंद्र ग्रहण के दो प्रकार हैं:\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते   हैं। आंशिक चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया का केवल एक हिस्सा चंद्रमा   को कवर करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  चंद्रग्रहण के कुछ चरणों के दौरान, चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है।ऐसा   इसलिए है क्योंकि उस बिंदु पर चंद्रमा तक पहुंचने वाली सूर्य की रोशनी पृथ्वी के   किनारों\u0026nbsp; होते हुए जाती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3\u003eFacts in moon Hindi\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पुराना है\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eयह हमारे पृथ्वी\u0026nbsp;का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपृथ्वी के बनने के लगभग 30-50 मिलियन वर्ष बाद चंद्रमा बना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा तब अस्तित्व में आया जब एक बड़ी वस्तु पृथ्वी से टकराई।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता 27.3 दिन में पूरा करता हैं।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा के उचित नक्शे बनाने वाला पहला आदमी गैलीलियो था।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e1959 में चंद्रमा पर पहुंचने वाला पहला अंतरिक्ष यान लूना 1 था।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा सौर मंडल का पांचवा सबसे बड़ा moon है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    चंद्रमा की उपस्थिति हमारे ग्रह के जलवायु को स्थिर करने में मदद करती है।   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपृथ्वी से चंद्रमा की दूरी लगभग 240,000 मील (385,000 किमी) है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा में बहुत पतला वातावरण होता है जिसे एक्सोस्फीयर कहा जाता है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eचंद्रमा की पूरी सतह गड्ढों से भरी हुई है।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    नासा के अपोलो 11 मिशन से 1969 में पहली बार मानवयुक्त यान चंद्रमा पर लैंडिंग     हुई थी।\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5310853651305447394"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5310853651305447394"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/02/moon-in-hindi.html","title":"चंद्रमा किसे कहते हैं - Moon in Hindi "}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-_vd5m1Uz53c/YDW0OlLp0AI/AAAAAAAAFyU/B-jrNUGI8VoOLGfFhy1t3yJXnvqjIAjUQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/full-moon-stars-sea-sky-wallpaper-preview.webp","height":"72","width":"72"},"georss$featurename":{"$t":"India"},"georss$point":{"$t":"20.593684 78.96288"},"georss$box":{"$t":"-7.716549836178846 43.80663 48.90391783617885 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उल्कापिंड हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan\u003eसौर मंडल किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, धूमकेतुओं, उल्काओं और अन्य   आकाशीय पिंडों के समूह को सौरमंडल कहते हैं। सूर्य ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।   सूर्य की\u0026nbsp;गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण सभी   ग्रह\u0026nbsp;इसका\u0026nbsp;परिक्रमा करते\u0026nbsp;हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं जिसमे से बृहस्पति सबसे बड़ा है। इसके अलावा कई पिंड और   छोटी ग्रह हैं। जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ग्रहों,   उपग्रह, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह, और उल्कापिंड सौरमंडल के सदस्य होते है। और सूर्य   सौरमंडल में विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का सबसे समृद्ध स्रोत होता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हमारे सौर मंडल से परे, सितारों की तुलना में, अधिक ग्रह उपस्थित   हैं। अब तक हमने मिल्की वे में कई ग्रहों की खोज की है जो किसी तारे की परिक्रमा   करते है। हमारी आकाशगंगा के सैकड़ों अरबों तारों में से अधिकांश के पास अपना ग्रह   हैं, और मिल्की वे, ब्रह्मांड में 100 बिलियन आकाशगंगाओं में से एक है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eसौर मंडल के बारे में 10 जरुरी बातें जानिए\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cblockquote\u003e  1. सौरमंडल में\u0026nbsp;चार विशाल ग्रहों\u0026nbsp;में शनि की तरह किसी और ग्रह के पास इतने खूबसूरत रिंग नहीं   है। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  2. रोबोटिक अंतरिक्ष यान ने 300 से अधिक पृथ्वी की कक्षा से बाहर के स्थलों की   खोज की है। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  3. हमारा सौर मंडल में पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जहाँ पर जीवन मौजूद हैं।\u0026nbsp; \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  4. नासा का वायेजर 1 एकमात्र अंतरिक्ष यान है। जो हमारे सौर मंडल की दुनिया से   बहार गया है।\u0026nbsp; \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  5. हमारा सौर मंडल एक तारा आठ ग्रहों और अनगिनत छोटे पिंडों जैसे बौना ग्रहों   क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से बना है। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  6. हमारा सौर मंडल लगभग 515,000 मील प्रति घंटे (828,000 किलोमीटर प्रति घंटे) पर   मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र की परिक्रमा करता है। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  7. आकाशगंगा केंद्र के चारों ओर एक परिक्रमा को पूरा करने में हमारे सौर मंडल को   230 मिलियन वर्ष लगते हैं। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  8. आकाशगंगाएँ सामान्य तीन प्रकार की हैं - अण्डाकार, सर्पिल और अनियमित। हमारा   मिल्की वे सर्पिल आकाशगंगा है। \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  9. हमारा सौर मंडल अंतरिक्ष का एक क्षेत्र है। इसका कोई वायुमंडल नहीं है। लेकिन   इसमें ग्रह हैं - जहाँ वायुमंडल है जैसे -पृथ्वी।\u0026nbsp; \u003c/blockquote\u003e\u003cblockquote\u003e  10. हमारे सौर मंडल के ग्रह और कुछ क्षुद्रग्रह भी अपनी कक्षाओं में 150 से अधिक   चंद्रमाओं को धारण करते हैं। \u003c/blockquote\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eआकार और दूरी\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हमारा सौर मंडल सूर्य की परिक्रमा करने वाले आठ ग्रहों में सबसे अंतिम ग्रह   युरेनस से भी बहुत दूर तक फैला है। सौर मंडल में कुइपर बेल्ट है जो   नेप्च्यून की कक्षा में बर्फीले पिंडों का एक वलय है, जो बौना ग्रह प्लूटो से   थोड़ा छोटा है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कुइपर बेल्ट के आगे ऊर्ट क्लाउड है। यह विशाल गोला हमारे सौर मंडल को घेरे हुए   है। इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा नहीं गया है, लेकिन इसके अस्तित्व की भविष्यवाणी   गणितीय मॉडल के आधार पर की जाती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ऊर्ट क्लाउड पहाड़ों के आकार से भी बड़े होते हैं, जो हमारे सूर्य की परिक्रमा   1.6 प्रकाश वर्ष दूर से करते हैं। यह 5,000 खगोलीय इकाइयों से लेकर 100,000   खगोलीय इकाइयों तक फैला हुआ है। एक खगोलीय इकाई\u0026nbsp; सूर्य से पृथ्वी की दूरी,   का लगभग 93 मिलियन मील है। ऊर्ट क्लाउड सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव की सीमा के   अंतर्गत आते है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  1977 में लॉन्च किए गए दो नासा अंतरिक्ष यान ने termination shock को पार कर लिया   है: 2004 में वायेजर 1 और 2007 में वायेजर 2।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eउत्पत्ति\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हमारे सौर मंडल का गठन लगभग 4.5 बिलियन साल पहले इंटरस्टेलर गैस और धूल के घने   बादल से हुआ था।\u0026nbsp; इसका निर्माण एक विस्फोट वाले तारे के शॉकवे के कारण हुआ   था। जिसे सुपरनोवा कहा जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  केंद्र में, गुरुत्वाकर्षण अधिक होने से सभी धूल अंदर की ओर खींचे चले गए।   आखिरकार कोर में दबाव इतना अधिक था कि हाइड्रोजन परमाणुओं ने हीलियम का संयोजन और   निर्माण करना शुरू कर दिया, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलने लगी। उसी के साथ,   हमारे सूर्य का जन्म हुआ। सूर्य उपलब्ध पदार्थ के 99 प्रतिशत भाग हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बचे हुए मलवे से बड़े-बड़े पिंडों का निर्माण हुआ। उनमें से कुछ अपने   गुरुत्वाकर्षण से बौने ग्रह और बड़े चंद्रमाओं के रूप में बदल गए। अन्य छोटे बचे   हुए टुकड़े क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्कापिंड और छोटे, अनियमित चंद्रमा बन गए। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eग्रहों के बारे मे जानकारी\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eहमारी आकाशगंगा में सितारों की तुलना में अधिक ग्रह हैं। हमारे सूर्य की परिक्रमा करने वाली ग्रहो की संख्या वर्तमान में आठ हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआंतरिक, चट्टानी ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल हैं। नासा का सबसे नया रोवर - 18 फरवरी, 2021 को मंगल ग्रह पर उतरा। बाहरी ग्रह गैस जॉइंट बृहस्पति, शनि, बर्फीली ग्रह यूरेनस और नेपच्यून हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनेपच्यून से परे, छोटी दुनिया में बौना ग्रह पाया जाता है, जहाँ प्लूटो भी शामिल हैं। जिसे कभी ग्रह माना जाता था। हमारे सौर मंडल से परे हजारों और ग्रह खोजे गए हैं। वैज्ञानिक उन्हें एक्सोप्लैनेट्स कहते हैं (एक्सो का अर्थ है \"from outside\").\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e    \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-b023WB7Mid8/YDR0ZuNPzgI/AAAAAAAAFyE/zQC1S3iuXOIhVygbHW_QlQGMQXqsV8l5wCLcBGAsYHQ/s626/images_1_1_1_1_1_1_2.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सौर मंडल किसे कहते हैं - Solar system in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"396\" data-original-width\u003d\"626\" height\u003d\"202\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-b023WB7Mid8/YDR0ZuNPzgI/AAAAAAAAFyE/zQC1S3iuXOIhVygbHW_QlQGMQXqsV8l5wCLcBGAsYHQ/w320-h202/images_1_1_1_1_1_1_2.webp\" title\u003d\"सौर मंडल किसे कहते हैं - Solar system in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e  \u003c/p\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसूर्य सौर मंडल\u0026nbsp;का मुख्य तारा\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  सूर्य, सौर मंडल के केन्द्र में स्थित एक तारा है। सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे   बड़ा पिंड है, जिसके परिक्रमा   पृथ्वी के साथ   सभी ग्रह लगते हैं। सूर्य में सौर मंडल का 99. 86 द्रव्यमान निहित है। इसका व्यास   लगभग 13 लाख 90 हज़ार किलोमीटर है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह पृथ्वी पर जीवन के लिए ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।\u0026nbsp;सूर्य सौर   मंडल के केंद्र में स्थित है। यह गर्म प्लाज्मा और गैसों\u0026nbsp;का एक   पिंड\u0026nbsp;है। सूर्य का व्यास लगभग 1.39 मिलियन किलोमीटर / 864,000 मील है। यह   हमारे ग्रह के व्यास से 109 गुना अधिक है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सूर्य के द्रव्यमान में 73% हाइड्रोजन, 25% हीलियम, और थोड़ी मात्रा में ऑक्सीजन,   कार्बन, नियोन, लोहा और अन्य तत्व शामिल हैं। वर्तमान में सूर्य हर सेकेंड 600   मिलियन टन हाइड्रोजन को हीलियम में बदल देता है। यह हर सेकंड 4 मिलियन टन पदार्थ   को ऊर्जा में परिवर्तित कर रहा है। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसौर मंडल के ग्रहों के नाम\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हमारे सौर मंडल में बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून   और प्लूटो आदि ग्रह हैं। इसमें से प्लूटो को वैज्ञानिकों ने ग्रह की श्रेणी से   हटा दिया है।\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eग्रहों के नाम\u003c/th\u003e      \u003cth\u003eऔसत तापमान (केल्विन)\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#1\"\u003e1.बुध\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e440 - 100\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#2\"\u003e2.शुक्र\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e730\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#3\"\u003e3.पृथ्वी\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e287\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#4\"\u003e4.मंगल\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e227\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#5\"\u003e5.बृहस्पति\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e152\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#6\"\u003e6.शनि\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e134\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#7\"\u003e7.अरुण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e76\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003e\u003ca href\u003d\"#8\"\u003e8.वरुण\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e72\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp id\u003d\"1\"\u003e  \u003cb\u003e1. बुध ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जिसेअंग्रेजी में Mercury कहा जाता है।\u0026nbsp;सौरमंडल के   आठ ग्रहों में सबसे छोटा और सूर्य का सबसे निकटतम ग्रह है। यह सूर्य की परिक्रमा   लगभग 88 दिन में करता है। जो सभी ग्रहों से सबसे तेज है। वायुमंडल न के बराबर   होने के कारण गर्मी अधिक होती है। बुध का तापमान सर्वाधिक उतार-चढाव वाला है,   जो कि रात्रि में 100 K होती है। और दिन में\u0026nbsp; 700k होता है।\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"2\"\u003e  \u003cb\u003e2.\u0026nbsp;शुक्र ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;सूर्य से दूसरे नंबर का ग्रह है इसे वेनस ग्रह भी   कहा जाता है। यह 224.7 पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा पूरा करता है। इस ग्रह का   नाम प्रेम की देवी के नाम पर रखा गया है। यह सबसे चमकीला ग्रह है। शुक्र सूर्योदय   से पहले या सूर्यास्त के बाद अधिकतम चमकीला दिखाई देता है। इसी कारण से प्राचीन   खगोलविदों ने सुबह का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"3\"\u003e  \u003cb\u003e3. पृथ्वी ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;सौरमण्डल का एक ऐसा ग्रह जहा जीवन पाया जाता है। यह   बुध और शुक्र के बाद सूर्य से तीसरा नंबर का ग्रह है। पृथ्वी सूर्य से लगभग 15   करोड़ किलोमीटर दूर स्थित है। पृथ्वी सूर्य का 365 दिनों में एक चक्कर पूरा करती   है। यह अपने अक्ष पर लंबवत 23.5 डिग्री झुकी हुई है। ये अपना\u0026nbsp; 24 घंटे में   एक चक्कर पूरा करती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"4\"\u003e  \u003cb\u003e4. मंगल ग्रह\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसूर्य से दुरी के आधार पर चौथा क्रमांक का ग्रह है। इसे   लाल गृह भी कहा जाता है।\u0026nbsp; मंगल ग्रह भी पृथ्वी की तरह,\u0026nbsp; एक धरातल वाला   ग्रह है। इसका वातावरण विरल है। सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स   मंगल पर ही स्थित है।\u0026nbsp;मंगलग्रह सूर्य से लगभग 23 करोड़ कि॰मी॰ दूर है। और यह   687 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है। मंगल पर सौर दिवस, पृथ्वी के एक दिन से   मात्र थोड़ा सा लंबा होता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"5\"\u003e  \u003cb\u003e5. बृहस्पति ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;सूर्य से दुरी के आधार पर पाँचवाँ ग्रह है। और   सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह भी। यह एक गैसीय पिंड है। इसका कुल द्रव्यमान सौरमंडल   में मौजूद अन्य सात ग्रहों का ढाई गुना है। इस ग्रह को रात्रि के समय आसानी से   देखा जा सकता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"6\"\u003e  \u003cb\u003e6. शनि ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;सूर्य से छठां नंबर का ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद   सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं। शनि एक गैस जॉइंट ग्रह है। शनि का आंतरिक ढांचा   लोहा, निकल, सिलिकॉन और ऑक्सीजन यौगिक से बना है, जो हाइड्रोजन की एक मोटी परत से   घिरा है। शनि पर हवा की गति 1800 किमी प्रति घंटा तक पहुंच जाती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"6\"\u003e  शनि से सूर्य की औसत दूरी 1.4 अरब किलोमीटर से अधिक है। शनि सूर्य की एक चक्कर   लगाने में 10,759 दिन ( लगभग 29½ वर्ष) लेता हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"7\"\u003e  \u003cb\u003e7. अरुण ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जिसे अंग्रेजी में यूरेनस कहा जाता है। हमारे सौर मण्डल   में सूर्य से सातवाँ क्रमांक का ग्रह है। और तीसरा सबसे बड़ा भी। अरुण एक गैसीय   ग्रह है। 13 मार्च 1781 में विलियम हरशल ने इसकी खोज की घोषणा करी। युरेनस का   द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 14.5 गुना अधिक है। युरेनस प्रत्येक 84 वर्षों में   सूर्य का एक चक्कर लगाता है। इसकी सूर्य से औसत दूरी लगभग 3\u0026nbsp; अरब कि॰मी॰   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003e  \u003cb\u003e8. वरुण ग्रह\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जिसे नॅप्चयून भी कहते\u0026nbsp;है, यह सूर्य से आठवाँ क्रमांक का   ग्रह और\u0026nbsp;सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है। वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से 17   गुना अधिक है। सूर्य से\u0026nbsp; 4.4758 billion km\u0026nbsp; है। वरुण को सूर्य   परिक्रमा करने में 164.79 वर्ष लगते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eप्लूटो की स्थिति\u003c/h3\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eप्लूटो का ग्रह का एक अलग ही इतिहास रहा है। 2006 के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के ग्रह मानदंड के अनुसार, प्लूटो को एक ग्रह नहीं माना जाता है। हालांकि, यह बौना ग्रह का गठन करने के लिए IAU के मानदंडों को पूरा करता है।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eप्लूटो - पृथ्वी के चंद्रमा से छोटा है इसका आकार दिल के समान है। इस आकर्षक दुनिया में नीली आसमान, स्पीनिंग मून, पर्वत और यह बर्फ भी गिरता है जिसका रंग लाल है।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003e14 जुलाई 2015 को, नासा के न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान ने प्लूटो प्रणाली के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक उड़ान भरी - प्लूटो और उसके चंद्रमाओं की पहली क्लोज़-अप तस्वीर प्रदान करना और अन्य डेटा एकत्र करना जिसने सौर मंडल के बाहरी सीमा पर इन रहस्यमय दुनिया की हमारी समझ को बदल दिया है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबौना ग्रह सेरेस\u003c/h3\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eबौना ग्रह सेरेस मंगल और बृहस्पति के बीच क्षुद्रग्रह बेल्ट में सबसे बड़ी वस्तु और आंतरिक सौर मंडल में स्थित एकमात्र बौना ग्रह है। यह खोजे जाने वाले क्षुद्रग्रह बेल्ट का पहला सदस्य था जब 1801 में Giuseppe Piazzi ने इसे देखा था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eकई वर्षों तक इसे एक क्षुद्रग्रह कहा जाता है, सेरेस अपने चट्टानी पड़ोसियों से इतना बड़ा और इतना अलग है कि वैज्ञानिकों ने इसे 2006 में बौना ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया। भले ही सेरेस में क्षुद्रग्रह बेल्ट के कुल द्रव्यमान का 25 प्रतिशत शामिल है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबौना ग्रह मेकमेक\u003c/h3\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eसाथी बौने ग्रहों प्लूटो, एरिस और ह्यूमिया के साथ, मेकमेक कुइपर बेल्ट, नेप्च्यून की कक्षा के बाहर एक क्षेत्र में स्थित है। प्लूटो की तुलना में थोड़ा छोटा है, माकेमेक कुइपर बेल्ट में दूसरी सबसे चमकदार वस्तु है जैसा कि पृथ्वी से देखा गया है । इस बौने ग्रह को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगभग 305 पृथ्वी वर्ष लगते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eमाकेमेक सौर प्रणाली के अध्ययन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह एरिस के साथ-एक ऐसी वस्तु थी जिसकी खोज ने अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ को एक ग्रह की परिभाषा पर पुनर्विचार करने और बौने ग्रहों का नया समूह बनाने के लिए प्रेरित किया।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबौना ग्रह ह्यूमिया\u003c/h3\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eनेप्च्यून की कक्षा से परे कूपर बेल्ट में स्थित, बौना ग्रह ह्यूमिया एक अंडाकार आकार की वस्तु है जिसका त्रिज्या लगभग 385 मील (पृथ्वी से 10 गुना छोटा), और दो चंद्रमा, नमका और हायका है। Haumea पर एक दिन पृथ्वी के केवल चार घंटे के बराबर होती है, यह हमारे सौर मंडल में सबसे तेज़ घूमने वाली बड़ी वस्तुओं में से एक है।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eमूल रूप से Haumea क्विपर बेल्ट में स्थित है और लगभग प्लूटो के समान आकार का है। Haumea हमारे सौर मंडल में सबसे तेज़ घूमने वाली बड़ी वस्तुओं में से एक है। इसका तेज स्पिन Haumea के आकार को विकृत करता है, जिससे यह बौना ग्रह फुटबॉल जैसा दिखता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबौना ग्रह एरिस\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eएरिस हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ज्ञात बौनों में से एक है। यह प्लूटो के समान आकार का है, लेकिन सूर्य से तीन गुना दूर है।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eएरिस पहली बार प्लूटो से बड़ा दिखाई दिया। इसने वैज्ञानिक समुदाय में एक बहस छेड़ दी जिसने 2006 में एक ग्रह की परिभाषा को स्पष्ट करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के निर्णय का नेतृत्व किया। प्लूटो, एरिस और इसी तरह की अन्य वस्तुओं को अब बौने ग्रहों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।\u003c/p\u003e\u003cp id\u003d\"8\"\u003eमूल रूप से 2003 UB313 के रूप में नामित, एरिस का नाम प्राचीन यूनानी देवी की कलह के नाम के नाम पर रखा गया है।\u003c/p\u003e  \u003cdiv style\u003d\"background-color: #008798; color: #e6e6e6; font-size: large; padding: 10px; text-align: center;\"\u003e\u003cb\u003eप्रश्न उत्तर\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. सौर मंडल में कितने ग्रह हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उत्तर - हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह है -\u0026nbsp;बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल,   बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. सबसे गर्म ग्रह कौन सा है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उत्तर - हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह शुक्र हैं। शुक्र के वायुमंडल में मुख्य   रूप से कार्बन डाइऑक्साइड है, जिसमें सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदों के बादल होते   हैं। मोटे वायुमंडल में सूर्य की गर्मी फंस जाती है, जिसके परिणामस्वरूप सतह का   तापमान 880 डिग्री फ़ारेनहाइट (470 डिग्री सेल्सियस) से अधिक होता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. अंतरिक्ष में कितनी आकाशगंगाएँ हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  2016 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अवलोकनीय ब्रह्मांड में दो   ट्रिलियन या दो मिलियन-आकाशगंगाएं हैं। कुछ हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के समान   हैं, जबकि अन्य बिल्कुल अलग हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. हम किस आकाशगंगा में रहते हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हमारी आकाशगंगा, मिल्की वे में कम से कम 100 बिलियन तारे हैं, और अवलोकनीय   ब्रह्मांड में कम से कम 100 बिलियन आकाशगंगाएँ हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5. ब्रह्मांड में कितनी पृथ्वी है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  4 नवंबर 2013 को खगोलविदों ने केप्लर अंतरिक्ष मिशन के आंकड़ों के आधार पर बताया   कि मिल्की वे गैलेक्सी के भीतर सूर्य जैसे सितारों और लाल बौने तारों की परिक्रमा   करने वाले 40 अरब पृथ्वी के आकार के ग्रह हो सकते हैं। निकटतम ग्रह 12 प्रकाश   वर्ष दूर हो सकता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e6. प्लूटो अब ग्रह क्यों नहीं है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) ने एक बौने ग्रह के रूप में प्लूटो की   मान्यता को रद्द कर दिया हैं। क्योंकि यह IAU के तीन मापदंडों को पूरा नहीं करता   था। जो किसी पिंड को ग्रह बनाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e "},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8698148557641412913"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8698148557641412913"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2021/02/solar-system-in-hindi.html","title":"सौर मंडल किसे कहते हैं - Solar system in Hindi "}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएराटोस्थनीज के बारे में:\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइरैटोस्थनीज़ बहु-प्रतिभाशाली थे। वह एक ग्रीक गणितज्ञ, भूगोलवेत्ता, कवि, खगोलशास्त्री और संगीत सिद्धांतकार थे। पृथ्वी की परिधि तथा पृथ्वी से सूर्य की दूरी की गणना करने प्रयास ने\u0026nbsp;पृथ्वी के बारे में जानने का मार्ग प्रशस्त किया।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएराटोस्थनीज ही वह\u0026nbsp;व्यक्ति हैं\u0026nbsp;जिन्होंने दुनिया के पहले मानचित्र का निर्माण और एक एल्गोरिथ्म का आविष्कार था। साथ ही\u0026nbsp;पृथ्वी को पांच जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया जो नीचे दिए गए हैं -\u003c/p\u003e\u003cp\u003eध्रुवों के चारों ओर दो बर्फ़ीली ज़ोन, दो समशीतोष्ण क्षेत्र, और भूमध्य रेखा या उष्णकटिबंधीय क्षेत्र शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअलेक्जेंड्रिया की लाइब्रेरी में एराटोस्थनीज ने दुनिया के बारे में एक व्यापक ग्रंथ लिखा, जिसे उन्होंने \"भूगोल\" कहा गया। यह भूगोल शब्द का पहला उपयोग था। जिसका ग्रीक में अर्थ है \"दुनिया के बारे में लिखना।\"\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूगोल किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभूगोल पृथ्वी और उसके लोगों का अध्ययन है। इसकी विशेषताएं महाद्वीपों, समुद्रों, नदियों और पहाड़ों जैसी चीजें हैं। इसके निवासी सभी लोग और जानवर हैं जो इस पर रहते हैं। इसकी घटनाएं ज्वार, हवा और\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;जैसी चीजें होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक व्यक्ति जो भूगोल का विशेषज्ञ है वह एक भूगोलवेत्ता है। एक भूगोलवेत्ता दुनिया और उसमें मौजूद चीजों को समझने की कोशिश करता है कि वे कैसे शुरू हुए और वे कैसे बदल गए हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूगोल को भौतिक भूगोल और मानव भूगोल नामक दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। भौतिक भूगोल प्राकृतिक\u0026nbsp;पर्यावरण\u0026nbsp;का अध्ययन करता है और मानव भूगोल मानव पर्यावरण का अध्ययन करता है। मानव पर्यावरणीय अध्ययन में किसी देश की जनसंख्या, देश की अर्थव्यवस्था कैसे कर रही है, आदि चीजें शामिल होंगी। पर्यावरण भूगोल भी है।\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-I-wVuRFxgko/X37103h85LI/AAAAAAAAEPs/uXlzZYKIEN0LPYpIiMfxzfq_fQ13FvqyQCPcBGAYYCw/s1280/20201008_164829.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"भूगोल के पिता - father of geography in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1280\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-I-wVuRFxgko/X37103h85LI/AAAAAAAAEPs/uXlzZYKIEN0LPYpIiMfxzfq_fQ13FvqyQCPcBGAYYCw/w320-h320/20201008_164829.webp\" title\u003d\"भूगोल के पिता - father of geography in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u0026nbsp;father of geography in Hindi\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003eमानचित्र भूगोल का एक मुख्य उपकरण हैं, इसलिए भूगोलवेत्ता इनका निर्माण और अध्ययन करने में अधिक समय लगाते हैं। मानचित्र बनाने को कार्टोग्राफी कहा जाता है और मानचित्र बनाने में माहिर लोग कार्टोग्राफर होते हैं।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7501413374075242197"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7501413374075242197"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/father-of-geography-in-hindi.html","title":"भूगोल के पिता - father of geography in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-I-wVuRFxgko/X37103h85LI/AAAAAAAAEPs/uXlzZYKIEN0LPYpIiMfxzfq_fQ13FvqyQCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h320/20201008_164829.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4189453273212035486"},"published":{"$t":"2020-10-02T07:29:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:31:00.983+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं - Overpopulation in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  अभी पृथ्वी पर लगभग 7 बिलियन से भी अधिक लोग रहते हैं। जबकि 19 के दशक में यह   अकड़ा बहुत कम था। भारत और चीन में विश्व की\u0026nbsp;सबसे अधिक जनसंख्या निवास करती   हैं। आगे हम जानेंगे की जनसँख्या किसे कहते है और जनसँख्या वृद्धि क्या   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  एक निश्चित क्षेत्र में रहने वाले लोगो की संख्या को जनसंख्या कहा जाता है। विश्व   की कुल\u0026nbsp;जनसंख्या\u0026nbsp;अप्रैल 2017 में 7.5 बिलियन तक पहुंच गया था।   एशिया सबसे अधिक   आबादी वाला महाद्वीप है। जहां 4.3 बिलियन लोग निवास करते है।\u0026nbsp;विश्व की आबादी   का 60% वही\u0026nbsp;1.4 बिलियन लोगों के साथ सबसे अधिक जनसंख्या\u0026nbsp;वाला देश   चीन\u0026nbsp;है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अधिक जनसंख्या के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। जिसमे\u0026nbsp;जल   प्रदूषण और\u0026nbsp;वायु प्रदूषण,   वनों की कटाई जैसी\u0026nbsp;समस्याएं प्रमुख\u0026nbsp;है। जनसंख्या वृद्धि और   पर्यावरण के बीच संबंधों को समझना प्रदूषण को कम करने\u0026nbsp;में पहला कदम हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या वृद्धि एक विशेष क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि है।   चूंकि आबादी तेजी से बढ़ सकती है।\u0026nbsp; इसलिए संसाधन में कमी तेजी से हो सकती   है। जिससे   वैश्विकतापमान, वनों की कटाई और जैव विविधता में कमी जैसे विशिष्ट पर्यावरणीय समस्याएं हो   रही\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविकसित देशों में लोग काफी अधिक संसाधनों का उपयोग करते है। जबकि   विकासशील देशों में लोग पर्यावरणीय समस्याओं के प्रभावों को अधिक तेज़ी से महसूस   करते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या वृद्धि की अवधारणा मुश्किल है क्योंकि आबादी तेजी से बढ़ सकती है। यदि   आप जनसँख्या वृद्धि के ग्राफ को\u0026nbsp;देखते\u0026nbsp;हैं, तो आपको समय के साथ ऊपर की   ओर एक वक्र दिखाई देता है क्योंकि जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होती है। दर में   लगभग\u0026nbsp;कोई परिवर्तन नहीं होता। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पृथ्वी पर 20   वीं शताब्दी की शुरुआत तक,   ग्रह की आबादी   शून्य से 1.6 बिलियन तक बढ़ी है। जनसंख्या केवल 100 वर्षों में बढ़कर 6.1 बिलियन   हो गई। जो अपेक्षाकृत कम अवधि में मनुष्यों की संख्या में लगभग चार गुना वृद्धि   है। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि के\u0026nbsp;प्रभाव\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  अधिक लोगों को अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। जिसका अर्थ है कि जैसे-जैसे   जनसंख्या बढ़ती है।\u0026nbsp;   पृथ्वी के   संसाधन अधिक तेजी से समाप्त होते हैं। इसका\u0026nbsp;परिणाम वनों की कटाई और    जैव विविधता  का नुकसान है क्योंकि मानव बढ़ती जनसंख्या को समायोजित करने के लिए संसाधनों का   अधिक उपयोग करता\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या वृद्धि से ग्रीनहाउस गैसों में भी वृद्धि होती है। जो कि ज्यादातर CO2   उत्सर्जन से होती हैं। विज़ुअलाइज़ेशन के लिए, 20 वीं शताब्दी के दौरान CO2   उत्सर्जन बारह गुना बढ़ गया था। ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि से\u0026nbsp;जलवायु   परिवर्तन तेजी से होता\u0026nbsp;हैं। जिसके परिणामस्वरूप अंततः दीर्घकालिक समस्याएं   उत्पन्न होती\u0026nbsp;है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  संसाधनों का उपयोग और पर्यावरण पर\u0026nbsp;प्रभाव दुनिया भर में\u0026nbsp; बराबर नहीं   होता है। विकसित देशों के लोगों को विकासशील देशों के लोगों की तुलना में अपनी   जीवन शैली को बनाए रखने के लिए काफी अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउदाहरण   के लिए,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e, जिसमें दुनिया की आबादी का 5 प्रतिशत आबादी है।   वर्तमान में CO2 का 25 प्रतिशत उत्सर्जन\u0026nbsp;करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  विकासशील देशों के लोग पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रभावों को अधिक तीव्रता से   महसूस करते हैं। समुद्र के स्तर में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन, मौसम की घटनाओं   से सीधे प्रभावित होते हैं। साफ पानी की कमी, वायु प्रदूषण और बीमारियों में   वृद्धि का अनुभव करती है। जिसके परिणामस्वरूप जैव विविधता में कमी हो सकती है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण क्या है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  भारत में जनसंख्या में   बड़ी वृद्धि के मुख्य कारण हैं: (i) मृत्यु दर में गिरावट और (ii) लगातार उच्च   जन्म दर। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण मृत्यु दर में गिरावट आई है। सूखे का सामना   करने और महामारी को नियंत्रित करने की क्षमता में सुधार हुआ है। शहरी और ग्रामीण   दोनों क्षेत्रों में रहने की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। शिक्षा के विस्तार और   चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, विशेष रूप से रोगों के खिलाफ टीकाकरण, रोगों की   घटनाओं में कमी आई है। चेचक जैसे रोग पूरी तरह से समाप्त हो गए हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कई आर्थिक, सामाजिक और   राजनीतिक कारकों के कारण जन्म दर उच्च बनी हुई है जो उच्च प्रजनन क्षमता के पक्ष में हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हमारी जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना में कृषि की प्रबलता उच्च जन्म दर का एक   महत्वपूर्ण कारण है। भारत एक\u0026nbsp;कृषि प्रधान देश\u0026nbsp;है। चावल में अधिक ऊर्जा   होता हैं जिसके कारण भारत सहित कई देशो में जनसख्या में वृद्धि हुयी है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जो जन्म दर को कम करते हैं। समाजशास्त्रीय अध्ययनों ने बताया है कि ग्रामीण जीवन   की सामाजिक प्रणाली और पारिवारिक संरचना   शहर या शहर में   प्रत्यारोपण के लिए काफी उल्लेखनीय रूप से बच गई है। इसके अलावा, हालांकि ग्रामीण   क्षेत्रों की तुलना में शहरों में प्रजनन दर कुछ कम है, शहरों में उच्च   पुरुष-महिला अनुपात के कारण अंतर अधिक है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  देश में व्यापक गरीबी और आर्थिक कारक है जो जनसंख्या वृद्धि से निकटता से संबंधित   है। चाहे गरीबी है या उच्च जन्म दर का परिणाम अभी भी एक बहस का मुद्दा है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के उपाय बताइए\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हम जानते हैं कि जन्म दर जनसंख्या वृद्धि के लिए जिम्मेदार है। इसलिए जन्म दर को   कम करने वाले उपायों को अपनाया जाना चाहिए।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसामाजिक उपाय\u003c/span\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e विवाह की न्यूनतम आयु\u003c/b\u003e: भारत, पाकिस्तान या बांग्लादेश जैसे उच्च जनसंख्या   वाले कुछ देशों में बाल विवाह की समस्या अत्यधिक है। अतः एक न्यूनतम उम्र में   शादी से जन्मदर को काम किया जा सकता\u0026nbsp;है। साथ ही कम उम्र में विवाह की   दुष्प्रभाव से लोगो को जागरूक करना\u0026nbsp;चाहिए।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e महिलाओं की स्थिति बढ़ाना:\u003c/b\u003e महिलाओं के साथ अभी भी भेदभाव होते है। वे घर   की चार दीवारों तक ही सीमित हैं। वे अब भी बच्चों को पालने तक ही सीमित हैं।   इसलिए महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित होने के अवसर दिए जाने चाहिए।   उन्हें मुफ्त शिक्षा दी जानी चाहिए। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e शिक्षा का प्रसार \u003c/b\u003e: शिक्षा के प्रसार से लोगों का दृष्टिकोण बदलता है।   शिक्षित पुरुष शादी में देरी करना और परिवार के छोटे मानदंडों को अपनाना पसंद   करते हैं। शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और बार-बार गर्भधारण से   बचती हैं और इस तरह जन्म दर को कम करने में मदद करती हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e दत्तक ग्रहण\u003c/b\u003e: कुछ माता-पिता के पास महंगा चिकित्सा उपचार के बावजूद कोई   बच्चा नहीं है। यह उचित है कि वे अनाथ बच्चों को गोद लें। यह अनाथ बच्चों और बाल   जोड़ों के लिए फायदेमंद होगा। सरकार को गोद लेने के लिए प्रोत्साहन भी देना   चाहिए। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e सामाजिक सुरक्षा:\u003c/b\u003e अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत   कवर किया जाना चाहिए। ताकि वे इन सुविधाओं के साथ वृद्धावस्था, बीमारी, बेरोजगारी   आदि की स्थिति में दूसरों पर निर्भर न रहें, उन्हें अधिक बच्चों की कोई इच्छा   नहीं होगी। \u003c/p\u003e\u003ch4\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eआर्थिक उपाय\u003c/span\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e रोजगार के अधिक अवसर\u003c/b\u003e: पहला और सबसे महत्वपूर्ण उपाय ग्रामीण और शहरी   क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में   प्रच्छन्न बेरोजगारी है। अतः बेरोजगार व्यक्तियों को ग्रामीण पक्ष से शहरी की ओर   स्थानांतरित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। जब उनकी आय बढ़ेगी तो वे अपने जीवन   स्तर में सुधार करेंगे और परिवार के छोटे मानदंडों को अपनाएंगे।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या की जांच करने का एक अन्य तरीका महिलाओं को रोजगार प्रदान करना है।   महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहन दिया जाना   चाहिए। महिलाएं प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय भाग ले रही हैं। परिणामस्वरूप   शिक्षण, चिकित्सा और बैंकिंग आदि में उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e प्रोत्साहन प्रदान करना:\u003c/b\u003e जनसंख्या सहित अधिकांश विकास मुद्दों का मुकाबला   करने में प्रोत्साहन एक कुशल नीति उपाय साबित हुआ है। स्वास्थ्य, शैक्षिक या   वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना एक अत्यधिक प्रभावी जनसंख्या उपाय हो सकता है।   ऐसी कुछ प्रोत्साहन नीतियां हैं जैसे दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को कुछ पैसे   का भुगतान करना या एकल बच्चों के लिए मुफ्त या रियायती शिक्षा आदि, जो जनसंख्या   से संबंधित चुनौतियों का सामना करने वाले अधिकांश विकासशील देशों में हैं और यह   एक उपयोगी उपाय भी साबित हुआ है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  भारत में इसके परिणाम आसानी से देखे जा सकते है। अधिक जनसख्या के कारन गरीबी और   बेरोजगारी उत्त्पन्न होते है। और भी कई प्रकार की समस्याएं उत्त्पन्न होने लगती   है। विकास दर निचे चला जाता है। कृषि भूमि की कमी होने लगती है। पिने योग्य पानी   की कमी आदि समस्याएं उत्त्पन्न होती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबेरोजगारी की समस्या\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या में तेजी से वृद्धि का मतलब श्रम बाजार में आने वाले व्यक्तियों की एक   बड़ी संख्या है जिनके लिए रोजगार प्रदान करना संभव नहीं है। वास्तव में, अविकसित   देशों में, नौकरी चाहने वालों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि योजनाबद्ध   विकास की दिशा में सभी प्रयासों के बावजूद, सभी को रोजगार प्रदान करना संभव नहीं   है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं - Overpopulation in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"395\" data-original-width\u003d\"690\" height\u003d\"183\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-VJE2arQJm24/YGX0PzYoEyI/AAAAAAAAEnY/Bo0Dr9usjIAY6VYydH-IBd2jL6p37Hw7QCLcBGAsYHQ/w320-h183/population_explosion_must_be_next_target.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\" title\u003d\"जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं - Overpopulation in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eजनसंख्या\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003eइन देशों में बेरोजगारी और प्रच्छन्न रोजगार आम समस्याएं हैं। तेजी से बढ़ती   जनसंख्या आर्थिक रूप से पिछड़े देशों के लिए बेरोजगारी की समस्या को हल करना लगभग   असंभव बना देती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eखाद्य पदार्थो की\u0026nbsp;कमी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बढ़ी हुई जनसंख्या का अर्थ है कि अधिक भोजन की मांग\u0026nbsp;जो भोजन के उपलब्ध स्टॉक   पर दबाव बनाता है। यही कारण है कि, तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाले अल्प विकसित   देशों को आम तौर पर भोजन की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है। कृषि उत्पादन   बढ़ाने के अपने सभी प्रयासों के बावजूद, वे अपनी बढ़ती आबादी को खिलाने में सक्षम   नहीं हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भोजन की कमी दो मायनों में आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। सबसे पहले, भोजन की   अपर्याप्त आपूर्ति से उन लोगों का पोषण कम हो जाता है जो उनकी उत्पादकता कम करते   हैं। यह श्रमिकों की उत्पादन क्षमता को और कम कर देता है। दूसरा, खाद्यान्नों की   कमी से खाद्यान्न आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जो उनके विदेशी मुद्रा   संसाधनों पर अनावश्यक रूप से दबाव डालता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eखेती पर प्रभाव\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कम विकसित देशों में अधिकांश आबादी गांव में\u0026nbsp;रहती है। जहां कृषि उनका मुख्य   आधार है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या की वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक है और इसने   भूमि के अनुपात को प्रभावित करती\u0026nbsp;है। इसके अलावा, इस तरह की अर्थव्यवस्थाओं   में प्रच्छन्न बेरोजगारी और प्रति व्यक्ति कृषि उत्पाद कम होने की समस्या बढ़   जाती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  तेजी से जनसंख्या वृद्धि से पर्यावरण परिवर्तन होता है। तेजी से जनसंख्या वृद्धि   ने बेरोजगार पुरुषों और महिलाओं की दर को खतरनाक रूप से\u0026nbsp;बढ़ा दिया है। इसके   कारण, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों जैसे पहाड़ी पक्षों और   उष्णकटिबंधीय जंगलों में बड़ी संख्या में लोग बस रहे\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह खेती के लिए   जंगलों की कटाई की जा रही\u0026nbsp;है जिससे कई पर्यावरण परिवर्तन होते हैं। इन सबके   अलावा, बढ़ती जनसंख्या वृद्धि से औद्योगीकरण के साथ बड़ी संख्या में शहरी   क्षेत्रों का प्रवास होता है। इससे बड़े शहरों और कस्बों में प्रदूषित हवा, पानी,   शोर की समस्या उत्पन्न\u0026nbsp;होती है। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या नियंत्रण कानून\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या नियंत्रण विधेयक, 2019 राकेश सिन्हा द्वारा जुलाई 2019 में राज्यसभा में   पेश किया गया एक प्रस्तावित विधेयक है। विधेयक का उद्देश्य भारत की जनसंख्या   वृद्धि को नियंत्रित करना है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंयुक्त राष्ट्र की विश्व जनसंख्या संभावना 2019   रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या एक दशक के भीतर चीन से आगे निकल जाने\u0026nbsp;   संभावना\u0026nbsp;है। प्रस्तावित विधेयक पर 125 संसद सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे और   अभी तक   कानून का एक अधिनियम नहीं बन पाया है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत की जनसंख्या वृद्धि दर क्या है?\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003e2021 में जनसंख्या 1,393,409,038 है , 2020 से 0.97% की वृद्धि ।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e2020 में जनसंख्या 1,380,004,385 थी , 2019 से 0.99% की वृद्धि ।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e2019 में जनसंख्या 1,366,417,754 थी , 2018 से 1.02% की वृद्धि ।\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e2018 में जनसंख्या 1,352,642,280 थी , 2017 से 1.04% की वृद्धि ।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  2017 में भारत की वृद्धि दर 1.13% है, जो दुनिया में 112 वीं रैंकिंग पर है। भारत   में 50% आबादी 25 वर्ष से कम है। देखा जाय तो भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में   गिरावट आयी हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व जनसंख्या वितरण 2016 के अनुसार\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eविश्व जनसंख्या 759.43 करोड़ है\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eअफ्रीका की जनसंख्या 121.61 करोड़ है\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eएशिया की जनसंख्या 446.27 करोड़ है\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eयूरोप की जनसंख्या\u0026nbsp;74.14 करोड़ है\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eदक्षिण अमेरिका की जनसंख्या\u0026nbsp;42.25 करोड़\u0026nbsp;है\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eउत्तरी अमेरिका की जनसंख्या 57.9 करोड़ है\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan face\u003d\"arial, sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; font-size: large;\"\u003e\u003cb\u003eविश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan\u003eविश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को मनाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस 1989 में     संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा स्थापित किया गया था। हालांकि आपने     जनसंख्या दिवस के बारे में ज्यादा नहीं सुना होगा, लेकिन यह अब लगभग तीन दशकों     से मनाया जा रहा है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003eयह दिन बढ़ती जनसंख्या से संबंधित समाधान मुद्दों को खोजने     की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए है। एक कदम है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बढ़ती जनसंख्या का कारण प्राकृतिक संसाधनों की त्वरित कमी है इस खतरे के अलावा,   विश्व जनसंख्या दिवस को भाईचारे की भावना को मनाने के अवसर के रूप में भी देखा   जाना चाहिए। इस दिन, आपको एक दूसरे के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना   चाहिए। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जनसंख्या प्रभाग कार्य प्रणाली को जनसंख्या पर कार्य करने के लिए संयुक्त राष्ट्र   प्रणाली की एजेंसियों, कार्यक्रमों, निधियों और निकायों के साथ मिलकर काम करता   है। \u003c/p\u003e\u003cdiv\u003e  \u003cspan\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक\u003c/p\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eआर्थिक विकास।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eशिक्षा।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eबच्चों की गुणवत्ता।\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eकल्याणकारी भुगतान।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eसामाजिक और सांस्कृतिक कारक।\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eपरिवार नियोजन की उपलब्धता।\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eमहिला श्रम बाजार की भागीदारी।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e        \u003cli\u003e          \u003cspan\u003e\u003cdiv\u003eमृत्यु दर - चिकित्सा प्रावधान का स्तर।\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/li\u003e      \u003c/ol\u003e    \u003c/div\u003e\u003c/span\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4189453273212035486"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4189453273212035486"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/overpopulation-in-hindi.html","title":"जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं - Overpopulation in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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कहा है - arab sagar in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरब सागर\u003c/b\u003e \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/08/indian-ocean-in-hindi.html\"\u003eहिंदी महासागर\u003c/a\u003e का हिस्सा हैं। जो भारत के पश्चिम में स्थित हैं। अरब सागर भारत के व्यापर के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग हैं।\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;का लगभग 70 प्रतिशत व्यापर इसी मार्ग से होता हैं। इसमें प्रमुख बंदरगाह मुंबई बंदरगाह व जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर कहा है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003eअरब सागर हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। यह सागर ओमान की खाड़ी से लेकर अदन की खाड़ी तक फैला है। यह 1,491,000 वर्ग मील के क्षेत्र में\u0026nbsp; फैला हुआ है। अरब सागर हिंद महासागर से दक्षिण में मिलती है, इसकी गहराई की बात करे तो 8,970 फीट है। और सबसे गर्म समुद्रों में से एक है। \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  मुंबई के उत्तर-पश्चिम पर अरब सागर में पेट्रोलियम और प्राकृतिक-गैस के भंडार का   पता चला है। और उनका गहन दोहन किया गया है। अकार्बनिक पोषक तत्वों के   उच्च स्तर, जैसे फॉस्फेट महत्वपूर्ण\u0026nbsp;हैं। जो एक समृद्ध मछली का उत्पादन करते   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अरब सागर का सतह क्षेत्र लगभग 3,862,000 किमी 2 है। समुद्र की अधिकतम चौड़ाई लगभग   2400\u0026nbsp; किमी है, और इसकी अधिकतम गहराई 4652\u0026nbsp; मीटर है। समुद्र में बहने   वाली सबसे बड़ी नदी सिंधु नदी है । \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अरब सागर की दो महत्वपूर्ण शाखाएँ हैं - दक्षिण-पश्चिम में अदन की खाड़ी, जो   बाब-अल-मंडेब के जलडमरूमध्य के माध्यम से लाल सागर से जुड़ती है ; और ओमान की   खाड़ी उत्तर पश्चिम में, फारस की खाड़ी से जुड़ती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारतीय तट पर खंभात और कच्छ की खाड़ी भी हैं ।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर की\u0026nbsp;सीमाएं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  अरब सागर के तट वाले देश यमन, ओमान,   पाकिस्तान,   ईरान, भारत और मालदीव   हैं। समुद्र के द्वीपों की बात\u0026nbsp;करे तो\u0026nbsp;अफ्रीका के हॉर्न सुकोटरा (यमन   का एक हिस्सा), ओमान के तट में स्थित\u0026nbsp;खुरिय़ा मुरिया द्वीप समूह और   लक्षद्वीप (भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश) स्थित है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से 100 से 250 मील के बीच कोरल एटोल समूह है। सिंधु और   नर्मदा नदियाँ इस समुद्र में बहने वाले प्रमुख नदियाँ हैं। \u003c/p\u003e \u003cp\u003e\u003cb\u003eसीमाएं\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपश्चिम दिशा में: अदन की खाड़ी की पूर्वी सीमा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उत्तर दिशा\u0026nbsp;\u0026nbsp;में: पाकिस्तान के तट पर अरब   प्रायद्वीप।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण दिशा में: मालदीव में अडू एटोल के दक्षिणी छोर से चलने वाली एक रेखा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पूर्व में: लास्साडिव सागर तथा\u0026nbsp;भारत के पश्चिमी तट कोरा दीप और मालदीव में   अडू एटोल हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर के अन्य नाम\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  ऐतिहासिक रूप से अरब सागर को यूरोपीय भूगोलवेत्ताओं और यात्रियों द्वारा   कई\u0026nbsp;नाम दिये\u0026nbsp;गया है। जिसमें भारतीय सागर, सिंधु सागर, दरिया और अरब   सागर, एरिथ्रा सागर और अखज़ार सागर शामिल हैं। भारतीय लोक कथाओं में, इसे दरिया,   सिंधु सागर और अरब समुद्र के रूप में जाना जाता है। तटीय क्षेत्र की लगभग 70   प्रतिशत और अरब सागर के क्षेत्र की 90 प्रतिशत आबादी अरबी\u0026nbsp;नहीं है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अरब सागर कहा है - arab sagar in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"524\" data-original-width\u003d\"824\" height\u003d\"194\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-abkg-tqME5k/YGXjyphXycI/AAAAAAAAEnM/gz8idLLfXjsy0f5VtDy2cFxYzuLX5DivwCLcBGAsYHQ/w320-h194/map.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%; text-align: center;\" title\u003d\"अरब सागर कहा है - arab sagar in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eमानसून\u0026nbsp;जलवायु जनवरी और फरवरी में मध्य अरब सागर में पहुंचते है।\u0026nbsp;समुद्र की   सतह पर लगभग 75 से 77 ° F (24 से 25 ° C) की न्यूनतम हवा का तापमान होता है। जबकि   जून और नवंबर में 82 ° F (28 ° C) से अधिक तापमान होता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरब सागर के\u0026nbsp;प्रमुख नाम:\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cli\u003eभारतीय सागर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eसिंधु सागर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eदरया\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eअरब समुंद्र\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eएरिथ्रियन सी\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eसिंध सागर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eबेहरा अरब\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eअखजर सागर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eमारे डि फारसिया\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eफारसी सागर\u003c/li\u003e  \u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  1718\u0026nbsp; के एक नक्शा में ओमान सागर का नाम \"गल्फ ऑफ होर्मुज\" के रूप में दर्ज   है। 16 वीं शताब्दी में अब्राहम ऑर्टेलियस द्वारा ईरान का मानचित्र जिसमें फारसी   सागर और भारतीय सागर का नाम दिखाई देता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर से लगे राज्य\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरब सागर से सटे भारत के राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाट है। अरब सागर के तट पर भारत के अलावा जो महत्वपूर्ण देश स्थित हैं ईरान, ओमान, पाकिस्तान, यमन और संयुक्त अरब अमीरात प्रमुख हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरब सागर, हिंद महासागर का क्षेत्र है। जो उत्तर में पाकिस्तान, ईरान, और ओमान की खाड़ी से घिरा हुआ है। पश्चिम में अदन की खाड़ी और अरब प्रायद्वीप तथा दक्षिण में लेकसाइडिव सी स्थित है। दक्षिण पूर्व में सोमाली सागर और भारत हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसका कुल क्षेत्रफल 3,862,000 किमी है और इसकी अधिकतम गहराई 4,652 मीटर (15,262 फीट) है। पश्चिम में अदन की खाड़ी अरब-सागर को लाल सागर की जलडमरूमध्य से जोड़ती है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eव्यापार मार्ग\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरब सागर एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग रहा है, जहां से संभवतः तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व से व्यापर किया जाता रहा है। एशिया और यूरोप महाद्वीप के देशों के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जहा से अरबो की व्यापर किया जाता हैं। ये मार्ग आम तौर पर भारत के पश्चिम से शुरू होती हैं, जो आधुनिक ईरान के दुर्गम तट फैली हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमुंबई में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह अरब सागर में सबसे बड़ा बंदरगाह है, और भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह भी है। अरब सागर में प्रमुख भारतीय बंदरगाह मुंद्रा पोर्ट, कांडला पोर्ट, नवा शेवा, विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट द विज़िनहिनजम इंटरनेशनल डीपवाटर मल्टीपर्पस सीपोर्ट हैं, जिन्हें विज़िंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट और त्रिवेंद्रम का बंदरगाह भी कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपोर्ट ऑफ कराची, पाकिस्तान का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त बंदरगाह है। यह करांची शहर के बीच स्थित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह गहरे समुद्र का बंदरगाह है जो बलूचिस्तान के ग्वादर में स्थित है जो कराची से लगभग 460 किमी पश्चिम में है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसलाला बंदरगाह, ओमान क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख बंदरगाह है। अंतर्राष्ट्रीय कार्य बल अक्सर बंदरगाह को आधार के रूप में उपयोग करता है। पोर्ट के अंदर और बाहर आने वाले सभी देशों के युद्धपोतों की एक महत्वपूर्ण संख्या है, जो इसे एक बहुत ही सुरक्षित बुलबुला बनाता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर के द्वीप समूह\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरब सागर में कई द्वीप हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं - लक्षद्वीप द्वीप समूह (भारत), सोकोट्रा (यमन), मसिराह (ओमान) और एस्टोला द्वीप (पाकिस्तान) आदि।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलक्षद्वीप द्वीप समूह भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से 200 से 440 किमी दूर अरब सागर का एक द्वीप समूह है। यह द्वीपसमूह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। जिसका कुल क्षेत्रफल केवल 32 किमी 2 है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसोकोट्रा, जिसे सोकोत्रा \u200b\u200bभी कहा जाता है, सबसे बड़ा द्वीप है, जो चार द्वीपों के एक छोटे से द्वीपसमूह का हिस्सा है। यह कुछ 240 किमी में फैला हुआ है जो अफ्रीका के हॉर्न के पूर्व में और अरब प्रायद्वीप के दक्षिण में स्थित है। जो की यमन का हिस्सा हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएस्टोला द्वीप, जिसे बलूची में जेज़िरा हफ्त तलार के नाम से भी जाना जाता है, पाकिस्तान के क्षेत्रीय जल में अरब सागर के उत्तरी सिरे पर एक छोटा, निर्जन द्वीप है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमासीरा द्वीप जिसे मज़ीरा द्वीप भी कहा जाता है, मुख्य भूमि ओमान के पूर्वी तट से दूर एक द्वीप है, और अरब सागर में ओमान का सबसे बड़ा द्वीप है।यह 95 किमी लंबा 2 से 14 किमी चौड़ा है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 649 वर्ग किमी है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब सागर का न्यूनतम ऑक्सीजन क्षेत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरब सागर में पूर्वी उष्णकटिबंधीय उत्तरी प्रशांत और पूर्वी उष्णकटिबंधीय दक्षिण प्रशांत दुनिया के तीन सबसे बड़े न्यूनतम ऑक्सीजन क्षेत्र, या \"मृत क्षेत्र\" हैं। ओएमजेड में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होता है, कभी-कभी मानक उपकरण द्वारा अवांछनीय होता है। अरब सागर के ओएमजेड में ऑक्सीजन का स्तर दुनिया में सबसे कम है, खासकर ओमान की खाड़ी में।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4318425274251046406"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4318425274251046406"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/arab-sagar-in-hindi.html","title":"अरब सागर कहा है - arab sagar in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eप्रायद्वीप किसे कहते हैं - प्रायद्वीप \u003c/b\u003eभूमि का वह भाग है जो तीन   ओर\u0026nbsp;से पानी से घिरा होता है लेकिन एक तरफ मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ होता है।   प्रायद्वीप भी बहुत बड़ा हो सकता है। अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य का अधिकांश   हिस्सा एक प्रायद्वीप है जो मेक्सिको की खाड़ी और   अटलांटिक महासागर  को अलग करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  प्रायद्वीप सभी   महाद्वीप में पाए   जाते हैं।   उत्तरी अमेरिका  में प्लासेनिया प्रायद्वीप - ब्राजील। बुररंड प्रायद्वीप - ब्रिटिश कोलंबिया।   बैरो प्रायद्वीप - बाफिन द्वीप।\u0026nbsp; यूरोप में इबेरियन प्रायद्वीप हैं। मध्य   अफ्रीका के पूर्वी   तट पर हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका एक विशाल प्रायद्वीप है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया पूर्वी एशिया में कोरियाई प्रायद्वीप कहलाते हैं।   ऑस्ट्रेलिया में यॉर्क प्रायद्वीप है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यूरोप में\u0026nbsp;इबेरियन, इतालवी और बाल्कन प्रायद्वीप हैं। अरब प्रायद्वीप को   दुनिया के सबसे बड़े प्रायद्वीप माना जाता हैं जिसका क्षेत्रफल   लगभग\u0026nbsp;3,237,500 वर्ग किलोमीटर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कई देश प्रायद्वीप हैं जैसे   भारत एक प्रायद्वीप है   इसके अलावा सऊदी अरब भी एक प्रायद्वीप के उदारहण है। यदि यूरेशिया को एक महाद्वीप   माना जाता है तो   यूरोप महाद्वीप  तकनीकी रूप से एक प्रायद्वीप है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत को प्रायद्वीप क्यों कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cp style\u003d\"font-size: medium; font-weight: 400;\"\u003eएक प्रायद्वीप उसे कहा जाता है जो तीन ओर से पानी से घिरा हो और एक तरफ भूमि से घिरा हो। भारत के दक्षिण में हिंद महासागर, पश्चिम में\u0026nbsp;अरब सागर\u0026nbsp;और पूर्व में बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है। और उत्तर में हिमालय की भूमि से जुड़ा है। इसलिए भारत को प्रायद्वीप कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्कन का पठार कहां पर स्थित है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  दक्कन का पठार जिसे विशाल प्रायद्वीपीय पठार के नाम से भी जाना जाता है। भारत का   विशालतम पठार है। दक्षिण भारत का मुख्य भू भाग इस पठार पर स्थित है। इसकी   उत्तर की सीमा सतपुड़ा और विन्ध्याचल है पर्वत शृंखला द्वारा और पूर्व और पश्चिम   की सीमा क्रमशः पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट द्वारा निर्धारित होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्कन का पठार पश्चिमी और दक्षिणी भारत में एक बड़ा पठार है। यह उत्तर में 100 मीटर और दक्षिण में 1000 मीटर से अधिक ऊँचा। यह गंगा के मैदान से उत्तर में सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला से अलग होती है, जो इसकी उत्तरी सीमा बनाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह आठ भारतीय राज्यों में फैला हुआ है: तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के महत्वपूर्ण हिस्सों को कवर करते हुए आवासों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रायद्वीप का अर्थ क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  भूमि का वह हिस्सा जो पानी या समुद्र से तीन तरफ से घिरा हुआ है और एक ओर स्थल   भाग से जुड़ा हुआ होता है। यह बहुत बड़ा या छोटा हो सकता हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रायद्वीप के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं -\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eअरब प्रायद्वीप\u003c/li\u003e\u003cli\u003e  भारतीय\u0026nbsp;प्रायद्वीप\u003c/li\u003e\u003cli\u003eलियाओदोंग प्रायद्वीप\u003c/li\u003e\u003cli\u003eइबेरियन प्रायद्वीप\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण पूर्व एशिया\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअलास्का प्रायद्वीप\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरब प्रायद्वीप\u0026nbsp;-\u0026nbsp;विश्व का सबसे बड़ा प्रायद्वीप\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरब प्रायद्वीप अफ्रीका के उत्तर-पूर्व में स्थित, पश्चिमी\u0026nbsp;एशिया\u0026nbsp;का एक प्रायद्वीप है, जो 3,238,500 वर्ग किमी में फैला हुआ हैं। अरब प्रायद्वीप दुनिया का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभौगोलिक रूप से, अरब प्रायद्वीप में कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यमन के साथ-साथ इराक और जॉर्डन के दक्षिणी हिस्से शामिल हैं। इनमें से सबसे बड़ा देश सऊदी अरब है। प्रायद्वीप, प्लस बहरीन, सोकोट्रा द्वीपसमूह अरब नामक एक भू-राजनीतिक क्षेत्र बनाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरब प्रायद्वीप 56 और 23 मिलियन साल पहले लाल सागर के बहने के परिणामस्वरूप बना हैं। लाल सागर के दक्षिण-पश्चिम, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी हैं उत्तर-पूर्व, लेवंत, उत्तर में मेसोपोटामिया और दक्षिण पूर्व में अरब सागर और हिंद महासागर है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रायद्वीप अरब दुनिया में और विश्व स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार के कारण एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक भूमिका निभाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआधुनिक युग से पहले, इस क्षेत्र को मुख्य रूप से चार अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया गया था: केंद्रीय पठार, दक्षिण अरब, अल-बहरीन, और पश्चिमी तट के लिए हेजाज़ आदि।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारतीय\u0026nbsp;प्रायद्वीप\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभौगोलिक दृष्टि से, यह दक्षिण-मध्य एशिया में प्रायद्वीपीय क्षेत्र है, जो उत्तर में हिमालय, पश्चिम में हिंदू कुश और पूर्व में अराकनी द्वारा घिरा हुआ है। भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण एशिया का उपयोग कभी-कभी इस क्षेत्र को निरूपित करने के लिए किया जाता है, हालांकि दक्षिण एशिया शब्द में अफगानिस्तान भी शामिल हो जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारतीय उपमहाद्वीप दक्षिणी एशिया में एक भौगोलिक क्षेत्र है, जो भारतीय प्लेट पर स्थित है और हिमालय से हिंद महासागर में दक्षिण की ओर प्रक्षेपित है। भौगोलिक रूप से, भारतीय उपमहाद्वीप में आम तौर पर बांग्लादेश, भूटान, भारत,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e, पाकिस्तान और श्रीलंका के सभी हिस्से या मालदीव शामिल हैं। भूगर्भीय रूप से, भारतीय उपमहाद्वीप उस भूभाग से संबंधित है जो क्रेटेशियस के दौरान सुपरकॉन्टिनेंट गोंडवाना से अलग हो गया था और लगभग 55 मिलियन वर्ष पहले यूरेशियन भूभाग में विलय हो गया था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eलियाओडोंग\u0026nbsp;प्रायद्वीप\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eलियाओडोंग प्रायद्वीप पूर्वोत्तर चीन का एक प्रायद्वीप है। यह पश्चिम में डालियो नदी,और पूर्व में यालु नदी के मुहाने के बीच स्थित है, और डालियान के पूरे उप-प्रांतीय शहर और प्रीफेक्चुरल शहरों के कुछहिस्से इसमें शामिल करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-QV44-0q65cc/YGX7nCZ5rTI/AAAAAAAAEng/8-sf5KLOfLYItBmIiFHKiE2kDtMo68CXgCLcBGAsYHQ/s600/shutterstock-614419571.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"प्रायद्वीप किसे कहते हैं\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-QV44-0q65cc/YGX7nCZ5rTI/AAAAAAAAEng/8-sf5KLOfLYItBmIiFHKiE2kDtMo68CXgCLcBGAsYHQ/w320-h213/shutterstock-614419571.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" title\u003d\"प्रायद्वीप किसे कहते हैं\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eलिओडोंग प्रायद्वीप येलो सी के उत्तरी किनारे पर स्थित है। प्रायद्वीप पर पर्वत श्रृंखला के हिस्से को कियानशान पर्वत के रूप में जाना जाता है, जिसका नाम अनशन मे कियान के नाम पर रखा गया है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eइबेरियन प्रायद्वीप\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eइबेरियन प्रायद्वीप जिसे इबेरिया के नाम से भी जाना जाता है, यूरोप के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित एक प्रायद्वीप है, जो यूरेशिया के पश्चिमी किनारे को परिभाषित करता है। यह मुख्य रूप से स्पेन और पुर्तगाल के बीच विभाजित है, जिसमें उनके अधिकांश क्षेत्र शामिल हैं, साथ ही दक्षिणी फ्रांस, अंडोरा और जिब्राल्टर के ब्रिटिश क्षेत्र का एक छोटा सा क्षेत्र शामिल है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलगभग 583,254 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र के साथ, और लगभग 53 मिलियन की आबादी के साथ, यह अरब प्रायद्वीप के बाद क्षेत्रफल के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा यूरोपीय प्रायद्वीप है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण पूर्व एशिया\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदक्षिण पूर्व एशिया, एशिया महाद्वीप का एक प्रायद्वीप भाग हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्व और चीन के दक्षिण में स्थित है और पश्चिम में हिंद महासागर और पूर्व में प्रशांत महासागर से घिरा है। इसमें कंबोडिया, लाओस, म्यांमार (बर्मा), प्रायद्वीपीय मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम के देश शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइंडोचीन शब्द उन्नीसवीं सदी के प्रारंभ में गढ़ा गया था, इस क्षेत्र में भारतीय सभ्यता और चीनी सभ्यता के सांस्कृतिक प्रभाव पर जोर दिया गया था। इस शब्द को बाद में फ्रांसीसी इंडोचाइना (आज का कंबोडिया, वियतनाम और लाओस) की कॉलोनी के नाम के रूप में अपनाया गया।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअलास्का प्रायद्वीप\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअलास्का प्रायद्वीप जो अलास्का की मुख्य भूमि से दक्षिण-पश्चिम में लगभग 800 किमी तक फैला हुआ है और अलेउतियन द्वीप समूह में समाप्त होता है। प्रायद्वीप प्रशांत महासागर को ब्रिस्टल खाड़ी से अलग करता है, जो बेरिंग सागर की एक भुजा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसाहित्य में शब्द \"अलास्का पेनिनसुला\" का उपयोग उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के पूरे उत्तर-पश्चिमी फलाव को निरूपित करने के लिए किया गया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअलास्का प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी से भरा हुआ है, जो उत्तरी अमेरिकी प्लेट के पश्चिमी भाग के नीचे उतरते हुए उत्तरी प्रशांत प्लेट द्वारा निर्मित है; उत्तरी भाग समतल और दलदली है, जो सहस्राब्दियों के कटाव और सामान्य भूकंपीय स्थिरता का परिणाम है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4184537224714505713"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4184537224714505713"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/peninsula-in-hindi.html","title":"प्रायद्वीप किसे कहते हैं - peninsula in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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हैं"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e  दक्षिण एशियाा\u003c/b\u003e - एशिया महाद्वीप\u0026nbsp;के दक्षिणी भाग को कहा जाता\u0026nbsp;है। इसे भारतीय उपमहाद्वीप के रूप में भी जाना   जाता है। इस क्षेत्र में 8 देश आते हैं। यह दक्षिण-पूर्वी एशिया और   हिंद महासागर से घिरा   हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण एशिया में खेती अधिक की जाती है। यहाँ काजू, चावल, मूंगफली, तिल और चाय का उत्पादन अधिक होता हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधन से समृद्ध है। लेकिन संसाधन का उचित दोहन के लिए पर्याप्त\u0026nbsp;टेक्नोलॉजी\u0026nbsp;की कमी है। ये सभी देश विकाशसील देशो के अंतर्गत आते है। दक्षिण एशिया में स्थित देश इस प्रकार हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण एशियाई देशों के नाम\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e         \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eअफ़ग़ानिस्तान\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबांग्लादेश\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभूटान\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभारत\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमालदीव\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003e\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपाकिस्तान\u003c/li\u003e\u003cli\u003eश्रीलंका\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cdiv\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) दक्षिण एशिया के देशो का क्षेत्रीय सरकारी संगठन है। इसके सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका हैं। सार्क में 2019 तक विश्व के क्षेत्रफल का 3%, विश्व की जनसंख्या का 21% और वैश्विक अर्थव्यवस्था का 4.21% (US$3.67 ट्रिलियन) शामिल है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसार्क की स्थापना ढाका में 8 दिसंबर 1985 को हुई थी। इसका सचिवालय नेपाल के काठमांडू में स्थित है। संगठन आर्थिक और क्षेत्रीय एकीकरण के विकास को बढ़ावा देता है।\u0026nbsp; इसने 2006 में दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र का शुभारंभ किया। सार्क संयुक्त राष्ट्र में एक पर्यवेक्षक के रूप में स्थायी राजनयिक संबंध रखता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसार्क का उद्देश्य\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eदक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eक्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास में तेजी लाना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण एशिया के देशों के बीच सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और मजबूत करना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआपसी विश्वास, समझ और एक दूसरे की समस्याओं की सराहना में योगदान।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eआर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग और पारस्परिक सहायता को बढ़ावा देना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअन्य विकासशील देशों के साथ सहयोग को मजबूत करना।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसामान्य हित के मामलों पर अंतर्राष्ट्रीय रूपों में आपस में सहयोग को मजबूत करना।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eसमान उद्देश्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठन के साथ सहयोग करना।\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण एशिया की\u0026nbsp;जलवायु\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदक्षिण एशिया की जलवायु को तीन मूल भंगो में विभाजित किया जा सकता है: उष्णकटिबंधीय, शुष्क और समशीतोष्ण।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पूर्वोत्तर में   \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/09/tropical-climate-in-hindi.html\"\u003eउष्णकटिबंधीय जलवायु\u003c/a\u003e  है। और पश्चिम की और समशीतोष्ण और शुष्क जलवायु पाया जाता है। नमी और ऊँचाई में   परिवर्तन रेगिस्तान बनने का कारण होता है।   थार रेगितान भारत   के पश्चिम क्षेत्र में बड़े भाग पर फैला है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  मानसून इन क्षेत्रों को बहुत प्रभावित करता है। ये हवाएं अपने साथ पानी के बादल   लाते है। और वर्षा का करते है। साल के 2 से 3 महीने तक मानसून रहता है।\u0026nbsp;मानसून\u0026nbsp;विशेष रूप से कृषि को प्रभावित करता है। और इन क्षेत्रों में कृषि अधिक की जाती   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअफगानिस्तान\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअफगानिस्तान दक्षिण एशिया में स्थित एक देश है। अफगानिस्तान की सीमा पूर्व और दक्षिण में पाकिस्तान, पश्चिम में ईरान, उत्तर में तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान और उत्तर पूर्व में चीन से लगती है। यह देश सार्क संगठन का हिस्सा हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफगानिस्तान का क्षेत्रफल 652,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। काबुल इस देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। इसकी आबादी लगभग 32 मिलियन है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफगानिस्तान एक इस्लामी गणराज्य है जिसमें तीन शाखाएँ हैं, कार्यकारी, विधायी और न्यायिक।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eराष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ राष्ट्र का नेतृत्व अध्यक्ष अमलुल्लाह सालेह और उपाध्यक्ष सरवर दानिश करते हैं। नेशनल असेंबली विधायिका है, एक द्विसदनीय निकाय हैं जिसमें दो पक्ष होते हैं। सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश सईद युसूफ हलीम करते है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-gjq27gbTvx4/YGX-A_bLB2I/AAAAAAAAEno/J3c8KFV2NBUivDH-L0vFVh-fnqX8jTa1gCPcBGAYYCw/s820/south-asia-south-asian-countries.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"दक्षिण एशियाई देशों के नाम - dakshin asia in hindi दक्षिण एशिया के देश - दक्षिण एशिया क्या है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"648\" data-original-width\u003d\"820\" height\u003d\"253\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-gjq27gbTvx4/YGX-A_bLB2I/AAAAAAAAEno/J3c8KFV2NBUivDH-L0vFVh-fnqX8jTa1gCPcBGAYYCw/w320-h253/south-asia-south-asian-countries.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" title\u003d\"दक्षिण एशियाई देशों के नाम - dakshin asia in hindi दक्षिण एशिया के देश - दक्षिण एशिया क्या है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, अफगानिस्तान सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा ड्रग्स एंड क्राइम पर प्रकाशित जनवरी 2010 की एक रिपोर्ट से पता चला है कि रिश्वतखोरी राष्ट्र की जीडीपी के 23% के बराबर राशि का उपभोग करती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e17 मई 2020 को, राष्ट्रपति अशरफ गनी और अब्दुल्ला के बीच एक समझौता हुआ जिसमे यह तय हुआ गनी राष्ट्रपति के रूप में अफगानिस्तान का नेतृत्व करेंगे, अब्दुल्ला तालिबान के साथ शांति प्रक्रिया की देखरेख करेंगे।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eबांग्लादेश\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eबांग्लादेश दक्षिण एशिया का एक देश है। यह दुनिया का आठवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जहां की आबादी 163 मिलियन लोगों से अधिक है, 147,570 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में\u0026nbsp; फैला हुआ है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबांग्लादेश पश्चिम, उत्तर और पूर्व में भारत के साथ, दक्षिण-पूर्व में म्यांमार और दक्षिण में बंगाल की खाड़ी के साथ भूमि सीमा साझा करता है। ढाका यहाँ की राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैं। चटगांव, सबसे बड़ा बंदरगाह और दूसरा सबसे बड़ा शहर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबांग्लादेश बंगाल क्षेत्र का बड़ा और पूर्वी भाग है। यह अशोक के शासनकाल में एक मौर्य प्रांत था। 1576 में, अमीर बंगाल सल्तनत को मुगल साम्राज्य में समाहित कर लिया गया था। 1700 के दशक की शुरुआत में सम्राट औरंगजेब आलमगीर और गवर्नर शाइस्ता खान की मृत्यु के बाद, यह क्षेत्र बंगाल के नवाबों के अधीन हो गया। 1757 में प्लासी की लड़ाई में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल के अंतिम नवाब सरज उद-दौला को हराया गया और 1793 तक पूरा क्षेत्र कंपनी के शासन में आ गया।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूटान\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eभूटान पूर्वी हिमालय में स्थित एक भूमि से घिरा देश है। इसकी सीमा उत्तर में चीन और दक्षिण में भारत से लगती है। नेपाल और बांग्लादेश भूटान की निकट स्थित हैं, लेकिन सीमा साझा नहीं करते हैं। देश की आबादी 754,000 से अधिक है और इसका क्षेत्रफल 38,394 वर्ग किलोमीटर है जो भूमि क्षेत्र के मामले में 133 वें स्थान पर है। भूटान राज्य बौद्ध धर्म के साथ एक संवैधानिक राजतंत्र है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eभूटानी हिमालय में, समुद्र तल से 7,000 मीटर से ऊंची चोटियाँ हैं। गंगखर पुएनसम भूटान की सबसे ऊंची चोटी है। भूटान का वन्य जीवन अपनी विविधता के लिए उल्लेखनीय है, जिसमें हिमालयन ताकिन भी शामिल है। भूटान का सबसे बड़ा शहर राजधानी थिम्फू है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eभारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, भूमि क्षेत्र द्वारा सातवां सबसे बड़ा देश है, और दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला लोकतंत्र है। दक्षिण में हिंद महासागर, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर, और दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी से घिरा हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eयह पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ भूमि सिमा साझा करता है। हिंद महासागर में, श्रीलंका और मालदीव भारत के समीपवर्ती देश है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला लोकतंत्र है। एक बहुदलीय प्रणाली के साथ एक संसदीय गणतंत्र देश है। भारत में आठ मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रमुख हैं। 1950 से 1980 के दशक के अंत में, कांग्रेस के पास संसद में बहुमत था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत गणराज्य के पहले तीन आम चुनावों में, 1951, 1957 और 1962 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने आसान जीत हासिल की। 1964 में नेहरू की मृत्यु पर, लाल बहादुर शास्त्री संक्षिप्त प्रधानमंत्री बने; 1966 में उनकी अप्रत्याशित मौत के बाद, नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी 1967 और 1971 में कांग्रेस को चुनावी जीत दिलाने में सफल रहीं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमालदीव\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमालदीव हिंद महासागर में स्थित दक्षिण एशिया का एक छोटा सा द्वीपसमूह है। यह एशियाई महाद्वीप की मुख्य भूमि से लगभग 700 किलोमीटर दूर श्रीलंका और भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। लगभग 298 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला मालदीव सबसे छोटा एशियाई देश है और लगभग 557,426 निवासियों के साथ, एशिया का दूसरा सबसे कम आबादी वाला देश है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमाले यहाँ की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है, जिसे पारंपरिक रूप से \"किंग्स आइलैंड\" कहा जाता है, जहां प्राचीन शाही राजवंशों ने शासन किया था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनेपाल\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eनेपाल दक्षिण एशिया में एक स्थलरुद्ध (landlocked) देश है। यह मुख्य रूप से हिमालय में स्थित है, लेकिन इसमें भारत-गंगा के मैदान के कुछ हिस्सों को भी शामिल है, जो उत्तर में चीन के तिब्बत की सीमा और दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में भारत से लगा हुआ है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनेपाल में एक विविध भूगोल है, जिसमें उपजाऊ मैदान, पहाड़ियाँ, और माउंट एवरेस्ट, पृथ्वी का सबसे ऊँचा स्थान शामिल है। नेपाल एक बहुराष्ट्रीय राज्य है, जिसकी आधिकारिक भाषा नेपाली है। काठमांडू देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंसदीय लोकतंत्र 1951 में पेश किया गया था, लेकिन 1960 और 2005 में नेपाली सम्राटों द्वारा दो बार निलंबित कर दिया गया था। 1990 के दशक में और 2000 के दशक की शुरुआत में नेपाली गृह युद्ध के कारण 2008 में एक धर्म निरपेक्ष गणराज्य की स्थापना आखिरी हिंदू राजशाही को समाप्त कर किया गया।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपाकिस्तान\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपाकिस्तान दक्षिण एशिया में स्थित एक इस्लामिक गणराज्य है। यह दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जिसकी जनसंख्या 212.2 मिलियन से अधिक है, और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है। 881,913 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान 33 वां सबसे बड़ा देश है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके दक्षिण में अरब सागर और ओमान की खाड़ी और पूर्व में भारत, पश्चिम में अफगानिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में ईरान और उत्तर-पूर्व में चीन से इसकी सिमा लगती है। यह उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर द्वारा ताजिकिस्तान से संकीर्ण रूप से अलग है, और ओमान के साथ एक समुद्री सीमा भी साझा करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपाकिस्तान कई प्राचीन संस्कृतियों का घर रहा है जिसमे मेहरगढ़ की 8,500 वर्षीय नवपाषाण स्थल हैं। जो सिंधु घाटी की सभ्यताओं में सबसे व्यापक है। पाकिस्तान का क्षेत्र साम्राज्यों और राजवंशों का क्षेत्र था।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eश्रीलंका\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eश्रीलंका जिसे पहले सीलोन के नाम से जाना जाता था। श्रीलंका एक लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य हैं। यह देश दक्षिण एशिया का द्वीप देश है। यह हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और अरब सागर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप से अलग हैं। श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे इसकी विधायी राजधानी है, और कोलंबो इसका सबसे बड़ा शहर और वित्तीय केंद्र है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eश्रीलंका का प्रलेखित इतिहास 3000 साल पुराना है, जिसमें कम से कम 125,000 साल पहले की प्रागैतिहासिक मानव बस्तियों के प्रमाण हैं। इसकी एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, और श्रीलंका का पहला ज्ञात बौद्ध लेखन, पाली कैनन, 29 ईसा पूर्व में चौथी बौद्ध परिषद की तारीख है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7821067655679822379"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7821067655679822379"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/blog-post_2.html","title":"दक्षिण एशिया में कितने देश हैं"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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city kise kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eअक्सर लोग शहरो में रहना पसंद करते है क्योकि यहाँ सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। जैसे अच्छी शिक्षा, अस्पताल रोजगार और बाजार इसके अलावा और बहुत सारी व्यवस्थाएं गांवो के मुकाबे शहरो में होती हैं। वैज्ञानको ने शहरों को परिभाषित किया हैं। और यह बताया है की\u0026nbsp;शहर को शहर बनाने वाले\u0026nbsp;तत्व क्या\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशहर किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eशहर वह होता हैं। जहाँ के लोग द्वितीय या तृतीय व्यवसाय के कार्य करते है। और जनसंख्या भी अधिक होती है। नगरों में पक्के तथा सुन्दर मकान होते है। अधिकांश लोग शिक्षित होते है। और जो अपने क्षेत्र में सबसे अधिक सुविधा सम्पन्न, और परिवहन साधनो से युक्त होती है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दुनिया का\u0026nbsp;सबसे बड़ा शहर जापान में स्थित टोक्यो शहर को माना जाता\u0026nbsp;है। जिसकी जनसंख्या\u0026nbsp;37   मिलियन से अधिक है। यह शहर बहुत ही खुबसूरत है। हर साल लोग यहाँ घूमने के लिए आते   है। जापान एक द्वीप समूह वाला देश है। जिसके कारण यहाँ का वातावरण स्वास्थ्य वर्धक\u0026nbsp;होता है।   नीचे विश्व के\u0026nbsp;10 सबसे बड़े शहरो के नाम और जनसंख्या दिया गया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदुनिया के सबसे बड़े शहरो की सूचि\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eइन शहरों में 10 मिलियन से अधिक जनसंख्या निवास करती\u0026nbsp;हैं -\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eशहर\u0026nbsp;\u003c/th\u003e      \u003cth\u003eदेश\u0026nbsp;\u003c/th\u003e      \u003cth\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजनसंख्या\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eटोक्यो\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eजापान\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e37+ मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eमेक्सिको सिटी\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eमैक्सिको\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e\u0026nbsp;21 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eमुंबई\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eभारत\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e20 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eसाओ पाउलो\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eब्राजील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e18 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eलागोस\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eनाइजीरिया\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e13 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकलकत्ता\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eभारत\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e13 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eब्यूनस आयर्स\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eअर्जेंटीना\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e12 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eसियोल\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e\u0026nbsp;दक्षिण कोरिया\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e12 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eबीजिंग\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eचीन\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e12 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकराची\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eपाकिस्तान\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e12 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eढाका\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eबांग्लादेश\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e\u0026nbsp;11 मिलियन\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशहर की परिभाषा\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  ऐसा कोई नियम नहीं है जिसका उपयोग दुनिया भर में यह तय करने के लिए किया जाता है   कि कुछ स्थानों को \"शहर\" क्यों कहा जाता है। शहर में कई इमारतें और सड़कें होती   हैं। इसमें कई लोगों के रहने के लिए घर होते\u0026nbsp;हैं। गाँव की तुलना में शहर में   शिक्षा, विज्ञान और स्वास्थ्य का स्तर अच्छा होता है। और यहाँ जनसंख्या अधिक होती   है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सरकारी संगठन होते है जो\u0026nbsp;शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखते है। लोग को   शहरों में सभी प्रकार की सुविधाये आसानी से मिल जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  शहर में आमतौर पर बड़ी कम्पनी और उद्योग लगे होते\u0026nbsp;हैं। यहाँ\u0026nbsp; लोग   द्वितीय और तृतीय व्यवसाय करते है।\u0026nbsp;मुख्य शहर से छोटे शहर\u0026nbsp;जुड़े होते   है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eशहर बनाने वाली कुछ चीजें हैं\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  शहर का एक लंबा इतिहास रहा है। हालाँकि आज कई शहर केवल सैंकड़ों साल\u0026nbsp;पुराने   हैं। फिर भी कुछ ऐसे भी शहर है जो\u0026nbsp;हजारों सालों से हैं। उदाहरण के लिए एथेंस की स्थापना 1000 ईसा पूर्व में हुई थी। यह यूनान की राजधानी है और सबसे प्राचीन शहर में से एक\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  एक बड़ी आबादी, शहरों में निवास करते है। मुख्य शहर के आस\u0026nbsp;पास कई छोटे शहर   हो सकते है\u0026nbsp;इनमें टोक्यो, जापान और इसके आसपास टोक्यो मेट्रोपोलिस, योकोहामा   और चिबा शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जापान में, एक शहर की आबादी कम से कम 50,000 से अधिक व्यक्तियों की है। और शहरों   के बीच, कानूनों के अनुसार विभिन्न ग्रेड हैं, जो जापान की केंद्र सरकार द्वारा   शासित हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"विश्व का सबसे बड़ा शहर कौन सा है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9DghMuffU98/X3f058yVHnI/AAAAAAAAEHg/OaMArgZhr7gS8mN72lOQTk868IKdNlJAQCPcBGAYYCw/w320-h213/20201003_082809.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" title\u003d\"विश्व का सबसे बड़ा शहर कौन सा है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  एक केंद्र जहां व्यापार और सरकार होती है। अक्सर वित्तीय राजधानी के रूप में   वर्णित किया जाता है। जैसे जर्मनी में फ्रैंकफर्ट। वे शहर जहा\u0026nbsp;सरकार होती   है। और पुरे देश को उसी शहर से संभालती है। जिसे राजधानी कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  विशेष अधिकार जिसे नगर विशेषाधिकार कहते हैं जो देश की सरकार या उसके शासक द्वारा   दिया गया है। यह विशेष रूप से यूरोप में मध्य युग के दौरान किया गया था। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशहरों का आकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  शहरों के आकार बहुत भिन्न हो सकते हैं। यह उस शहर के प्रकार पर निर्भर करता है।   वे शहर जो सैकड़ों साल पहले बनाए गए थे और जो बहुत नहीं बदले हैं, आधुनिक शहरों   की तुलना में बहुत छोटे हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दो मुख्य कारण हैं। एक कारण यह है कि पुराने शहरों में अक्सर एक शहर की दीवार   होती है। और अधिकांश शहर इसके अंदर होता है। एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि   पुराने शहरों में सड़कें अक्सर संकीर्ण होती हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यदि शहर बहुत बड़ा हो जाता है, तो बाजार तक पहुंचने के लिए भोजन ले जाने वाली   गाड़ी के लिए मुश्किल था। शहरों में लोगों को भोजन की आवश्यकता होती है। और भोजन   हमेशा शहर के बाहर से आना पड़ता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  क्योंकि नदी ने भोजन और अन्य सामानों को ले जाने के लिए और साथ ही लोगों के   परिवहन के लिए एक परिवहन मार्ग बनाया। लंदन लगातार सैकड़ों वर्षों से बदल रहा है।   जबकि सिएना, जो 1300 के दशक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण शहर था, 700 वर्षों में   बहुत कम बदला है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आधुनिक परिवहन प्रणाली वाले आधुनिक शहर बहुत बड़े हो सकते हैं, क्योंकि सड़कें   कारों, बसों और ट्रकों के लिए पर्याप्त चौड़ी हैं, और अक्सर रेलवे लाइनें भी हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अमेरिका में, शहर शब्द अक्सर उन शहरों के लिए उपयोग किया जाता है जो बहुत बड़े   नहीं हैं। जब पहले यूरोपीय लोग अमेरिका गए, तो उन्होंने नए स्थानों को \"शहर\" नाम   दिया।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में वे स्थान महान शहर होंगे। उदाहरण के लिए, साल्ट   लेक सिटी 148 लोगों के गांव को दिया गया नाम था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जब उन्होंने शहर का निर्माण करना शुरू किया, तो उन्होंने सड़क योजना बनाई और इसे   ग्रेट साल्ट लेक सिटी कहा। अब, 150 साल बाद, यह वास्तव में एक बड़ा शहर है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आधुनिक समय में कई शहर बड़े और बड़े हो गए हैं। पूरे क्षेत्र को अक्सर \"महानगर\"   कहा जाता है और कभी-कभी इसमें कई छोटे प्राचीन शहर और गाँव शामिल हो सकते   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  लंदन के महानगर में लंदन शहर, वेस्टमिंस्टर शहर और कई पुराने गाँव जैसे कि नॉटिंग   हिल, साउथवार्क, रिचमंड, ग्रीनविच और आदि शामिल हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  आधिकारिक तौर पर \"सिटी ऑफ़ लंदन\" के रूप में जाना जाने वाला हिस्सा केवल एक वर्ग   मील तक ही है। बाकी को \"ग्रेटर लंदन\" के रूप में जाना जाता है। कई अन्य शहर उसी   तरह से विकसित हुए हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  ये विशाल शहर रहने के लिए रोमांचक स्थान हो सकते हैं और कई लोग वहां अच्छी नौकरी   पा सकते हैं। लेकिन आधुनिक शहरों में भी कई समस्याएं हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बहुत से लोग शहरों में नौकरी नहीं पा सकते हैं और भीख मांगकर या अपराध करके पैसा   प्राप्त करना चाहते हैं। कारों, कारखानों और कचरे से बहुत अधिक प्रदूषण होता है   जो लोगों को बीमार बनाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  पहले शहर प्राचीन काल में बने थे। उत्तरी भारत में बनारस प्राचीन शहरों में से एक   है जिसका इतिहास 3000 वर्षों से अधिक है। प्राचीन काल से मौजूद अन्य शहरों में   ग्रीस में एथेंस,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/italy-ki-rajdhani.html\"\u003eइटली\u003c/a\u003e\u0026nbsp;में रोम और वोल्तेरा, मिस्र में अलेक्जेंड्रिया और   इंग्लैंड में यॉर्क हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यूरोप में, मध्य युग में आमतौर पर शहर की दीवारें थीं। शहर में रहने वाले लोगों   को उन लोगों पर विशेषाधिकार दिया गया था। मध्यकालीन शहरों में अभी भी दीवारें हैं   जिनमें फ्रांस में कारकासोन, ईरान में तेहरान, स्पेन में टोलेडो और इंग्लैंड में   कैंटरबरी शामिल हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4398643432965242306"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4398643432965242306"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/city-kise-kahate-hain.html","title":"शहर किसे कहते है - city kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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है। यहाँ हर 12 साल में कुंभ मेला का आयोजन किया जाता\u0026nbsp;है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयमुना की सहायक नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  टोंस नदी, यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो 6,315 मीटर ऊंचे\u0026nbsp; बंदरपुंछ\n  पर्वत से निकलती है, और\n  \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/himachal-pradesh-capital-in-hindi.html\"\u003eहिमाचल प्रदेश\u003c/a\u003e\n  में एक बड़ा बेसिन है। यह देहरादून, उत्तराखंड के पास कालसी के नीचे यमुना से\n  मिलती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  हिंडन नदी, जो कि सहारनपुर जिले में, ऊपरी शिवालिक से निचली हिमालयी सीमा में\n  निकलती है। यह पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर है और इसका जलग्रहण क्षेत्र 7,083\n  वर्ग किलोमीटर है, जो मुजफ्फरनगर जिले में दिल्ली के बाहर यमुना में शामिल होती\n  है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयमुना नदी किन राज्यों से होकर गुजरती है\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  यमुना नदी उत्तराखंड,\n  \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/capital-of-haryana-in-hindi.html\"\u003eहरियाणा \u003c/a\u003eऔर दिल्ली से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश पहुँचती है। और विशाल गंगा में मिल जाती\n  है। यमुना की सहायक नदीयो में\u0026nbsp;टोंस, चंबल जैसी नदिया गंगा को विशाल बनती\n  है।सिंध, बेतवा और केन भी इसकी सहायक नदी\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  गंगा के मैदान में यमुना और गंगा दोआब बनाने में मदद करता है। लगभग 57 मिलियन लोग\n  यमुना के पानी पर निर्भर हैं। लगभग 10,000 क्यूबिक बिलियन लीटर का वार्षिक प्रवाह\n  सिंचाई में\u0026nbsp;96 प्रतिशत जल का उपयोगकिया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  70 प्रतिशत से अधिक दिल्ली की जल आपूर्ति नदी से\u0026nbsp;होता है। गंगा की तरह,\n  यमुना\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/hindu-dharm-in-hindi.html\"\u003eहिंदू धर्म\u003c/a\u003e\u0026nbsp;में अत्यधिक पूजनीय है और देवी यमुना के रूप में पूजी जाती है। हिंदू\n  पौराणिक कथाओं में वह सूर्य की पुत्री और मृत्यु के देवता यम की बहन हैं। इसलिए\n  उन्हें यमी के नाम से भी जाना जाता है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, इसके पवित्र जल\n  में स्नान करने से व्यक्ति मृत्यु की पीड़ा से मुक्त हो जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  हथनी कुंड बैराज में इसके पानी को दो बड़ी नहरों में बाटा जाता है। पश्चिमी यमुना\n  नहर हरियाणा की ओर और पूर्वी यमुना नहर उत्तर प्रदेश की ओर बहती है। यमुना\n  नदी\u0026nbsp;नोएडा के पास अत्यधिक प्रदूषित हिंडन नदी सेमिलती है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यमुना का पानी हिमालय में यमुनोत्री से लेकर दिल्ली के वज़ीराबाद बैराज तक लगभग\n  375 किलोमीटर की लंबाई तक इसका पानी स्वच्छ होता\u0026nbsp;है। इसके बाद वज़ीराबाद\n  बैराज और ओखला बैराज के बीच 15 नालों के माध्यम से अपशिष्ट जल का निर्वहन नदी को\n  प्रदूषित करता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  नदी में प्रदूषण के तीन मुख्य स्रोत हैं - घरेलू और नगरपालिका से उत्त्पन्न\n  कचड़े,\u0026nbsp;कृषि और\u0026nbsp;रास्ता बनाने के लिए वनों की कटाई से उत्पन्न मिट्टी का\n  कटाव और उर्वरक, कीटनाशकों से रासायन का नदी में मिलने से यमुना नदी बहुत\n  गन्दी\u0026nbsp; है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयमुना नदी का इतिहास\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  यमुना नदी भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। पिछली कई सदियों से नदी भारतीय\n  संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। यह लाखों लोगों की आजीविका का साधन है।\n  आध्यात्मिक प्रेरणा की खोज में कई लोग बड़ी आशा के साथ इसकी वंदना करते हैं।\n  लेकिन वर्तमान में यह\u0026nbsp;नदी अत्यधिक प्रदूषित है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यमुना नदी उत्तराखंड में उत्तरकाशी के पर्वत श्रृंखला में 6387 मीटर की ऊंचाई पर\n  स्थित चंपासर झील से निकलती है। यह उत्तर भारत के गंगा के मैदानों में प्रवेश\n  करने से पहले हिमालय में बर्फ से ढकी और जंगल की घाटियों की श्रृंखला के माध्यम\n  से चलता है। 1376 किलोमीटर तक चलने के बाद आखिरकार यह नदी यूपी के इलाहाबाद में\n  गंगा नदी में मिल जाती है।\n\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-mAGyfVLY5KI/X3VdQu3_QsI/AAAAAAAAEFI/5xqGerGBW6krJLL4QubXhWbOWBeZEhIoQCPcBGAYYCw/s1079/IMG_20201001_100538.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"यमुना नदी का उद्गम स्थल - यमुना नदी की लंबाई -  yamuna nadi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"805\" data-original-width\u003d\"1079\" height\u003d\"238\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-mAGyfVLY5KI/X3VdQu3_QsI/AAAAAAAAEFI/5xqGerGBW6krJLL4QubXhWbOWBeZEhIoQCPcBGAYYCw/w320-h238/IMG_20201001_100538.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" title\u003d\"यमुना नदी का उद्गम स्थल - यमुना नदी की लंबाई -  yamuna nadi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  गंगा नदी को भारत में पूजनीय मन जाता है। मथुरा और वृंदावन में यमुना नदी का\n  पुराना नाता है। कहा जाता है की कृष्णा ने राधा के लिए यमुना नदी का एवं कर एक\n  कुंड का निर्माण किया था जिसे राधा कुंड कहा जाता है। वासुदेव ने इसी नदी को पर\n  कर कृष्णा को यशोदा\u0026nbsp; नन्द के पास ले गए थे। यमुना सूर्य\u0026nbsp; पुत्री के\n  रूप\u0026nbsp; जाना जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयमुना नदी प्रदूषण को कैसे रोके\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  यमुना गंगा की दूसरी सबसे बड़ी सहायक नदी है और भारत की सबसे लंबी सहायक नदी है।\n  उत्तराखंड यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलते हुए, यह 1,376 किलोमीटर की यात्रा करती\n  है और इसमें 366,223 वर्ग किलोमीटर का ड्रेनेज सिस्टम है। जो पूरे गंगा बेसिन का\n  40.2% हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह त्रिवेणी संगम, प्रयागराज में गंगा के साथ विलीन हो जाती है, जो हर 12 साल में\n  आयोजित होने वाला एक हिंदू त्योहार कुंभ मेला का स्थान है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह कई राज्यों को पार करती है: जिसमे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बाद\n  में दिल्ली से गुजरते हुए, और टोंच, चंबल सहित अपनी सहायक नदियों से मिलते हुए\n  गंगा में मिल जाती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह गंगा के मैदान में अत्यधिक उपजाऊ जलोढ़ लती है और यमुना-गंगा दोआब क्षेत्र\n  बनाने में मदद करता है। लगभग 57 मिलियन लोग यमुना के पानी पर निर्भर हैं, और नदी\n  दिल्ली की 70 प्रतिशत से अधिक पानी की आपूर्ति इसी नदी से होती है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  पहले, यमुना का पानी नीले रंग का था, लेकिन आज यमुना को दुनिया की प्रदूषित\n  नदियों में से एक माना जाता है। यमुना भारत की राजधानी नई दिल्ली में विशेष रूप\n  से प्रदूषित है, जो नदी में अपने कचरे का लगभग 58% डालती है। सबसे ज्यादा प्रदूषण\n  वजीराबाद से आता है, जहां से यमुना दिल्ली में प्रवेश करती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयमुना नदी प्रदूषण के कारण\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  घरेलू स्रोत - दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड\n  (CPCB) के अनुसार,\n  \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/shahar-kise.html\"\u003eशहर \u003c/a\u003eमें कम से कम\n  90% घरेलू प्रदूषित जल यमुना में प्रवाहित होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  प्रदूषित जल मुख्य रूप से घरेलू गतिविधियों से आता है इसलिए नदी में डिटर्जेंट,\n  कपड़े धोने वाले रसायनों और फॉस्फेट यौगिकों की उच्च सामग्री की उपस्थिति होती\n  है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003eअन्य प्रमुख कारण यह है:\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eऔद्योगिक भारी धातु प्रदूषण।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eमूर्ति विसर्जन प्रदूषण बढ़ाने में सहायक।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eप्लास्टिक प्रदूषण।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eयमुना नदी प्रदूषण के उपाय\u003c/li\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  प्रदूषित पानी को साफ करने का सबसे अच्छा तरीका प्रदूषित पानी को साफ करना नहीं\n  है बल्कि प्रदूषण को रोकना है। नदी में कचड़े और गन्दगी को रोकना बहुत जरुरी है।\n  नहीं तो जितना भी सफाई अभियान चलाया जाये यमुना नदी कभी साफ\u0026nbsp; नहीं हो\n  पायेगी। इसमें शहरो और कारखानों से आने वाले प्रदूषण नदी को सबसे अधिक प्रदूषित\n  करती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3413750789886792877"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3413750789886792877"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/10/blog-post.html","title":"यमुना नदी का उद्गम स्थल - yamuna nadi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-mAGyfVLY5KI/X3VdQu3_QsI/AAAAAAAAEFI/5xqGerGBW6krJLL4QubXhWbOWBeZEhIoQCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h238/IMG_20201001_100538.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3915450177881574383"},"published":{"$t":"2020-09-29T19:49:00.007+05:30"},"updated":{"$t":"2023-08-04T06:44:00.376+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"पर्यावरण किसे कहते हैं -  environment in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003eपर्यावरण हमारे\u0026nbsp;जीवन\u0026nbsp;से जुड़ा हुआ है यह हमें शुद्ध हवा भोजन और प्राकृतिक\u0026nbsp;संधान\u0026nbsp;प्रदान करता हैं। जो हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इस लिए हमें पर्यावरण को नुकशान नहीं पहुंचना चाहिए। आगे\u0026nbsp;\u003cb\u003eपर्यावरण क्या है\u003c/b\u003e\u0026nbsp;और इसकी समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण दो शब्दो परि और आवरण से मिलकर बना है। परि का अर्थ है सभी होता हैं, तथा आवरण का अर्थ घेरा होता हैं अर्थात जो हमें चारों और से घेरे हुए है वही पर्यावण कहलाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. परिभाषा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- पर्यावरण का अर्थ होता है - आस-पास।\u0026nbsp;मानव, जन्तुओं या पौधों की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाली बाह्य दशाएँ पर्यावरण के अंतर्गत आते है। इनमे जंगल,\u0026nbsp;नदी, नाले, पहाड़ और\u0026nbsp;मैदान\u0026nbsp;आते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. परिभाषा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकिसी स्थान विशेष में मनुष्य के आस-पास भौतिक वस्तुओं (स्थल, जल, मृदा, वायु-यह रासायनिक तत्व है) का आवरण, जिसके द्वारा मनुष्य घिरा होता है। उसे कहा जा सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. परिभाषा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपार्क के अनुसार, पर्यावरण का अर्थ उन दशाओं के योग से होता है जो मनुष्य को निश्चित समय में निश्चित स्थान पर आवृत्त करती हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण का मानव जीवन में महत्व\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eहमारे दैनिक जीवन में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राचीन काल में मनुष्य प्रकृति से अधिक कनेक्ट हुआ करता था। जिसके कारण स्वस्थ अधिक बेहतर हुआ करती थी। आज मनुष्य पर्यावण से दूर हो गया है। शहरी कारण के कारण लोगो को साफ हवा का मिलना भू दूभर हो गया है। पर्यावरण एक जीव के लिए घर है। जहा पे उसके जीवन यापन की सारी वस्तुए विध्यमान होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण से हमें जल भोजन और प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते है। इसके अलावा किसी भी जिव के लिए वातावरण का होना अति आवश्यक होता है। इसके बिना जीवन असवम्भव होता है। पृथ्वी एक मात्र ऐसा गृह है जहा पे अनुकूल वातावरण पाया जाता है। जहां पे जीव आसानी से जीवन यापन कर सकता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहमारे भोजन, पानी, ईंधन, दवाएं, निर्माण सामग्री और कई अन्य चीजों को प्राप्त करने के लिए मनुष्य पर्यावरण पर निर्भर है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति ने पर्यावरण का दोहन करने में मदद की है, लेकिन इससे प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हुयी है और पर्यावरणीय क्षति का कारण बना है। मानव पर पर्यावरणीय समस्याओं का प्रभाव महत्वपूर्ण है, स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक विकास सहित सभी मानवीय गतिविधियों को प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमानव गतिविधि और पर्यावरण के बीच संबंध\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण का अर्थ है हमारा भौतिक परिवेश और जिस स्थान में हम रहते हैं उसकी विशेषताएं। यह भूमि, समुद्र और वातावरण, व्यापक प्राकृतिक को भी संदर्भित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमनुष्य अपने पर्यावरण के साथ जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, मानव सदियों से फसल उगाने के लिए जंगलों को काट रहा है और ऐसा करके हमने पर्यावरण को बदल दिया है। इसके विपरीत, पर्यावरण हमें कई अलग-अलग तरीकों से भी प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस खंड में हम कुछ ऐसे तरीकों का परिचय देंगे जिनसे मनुष्य अपने पर्यावरण को प्रभावित करते हैं और पर्यावरण हमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से कैसे प्रभावित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक अच्छी जलवायु, सुलभ स्वच्छ पानी, उपजाऊ मिट्टी आदि भौतिक वातावरण के ऐसे पहलू हैं जो लोगों को जीने और फलने-फूलने में सक्षम बनाते हैं। हालांकि, कठोर वातावरण, जैसे कि बहुत गर्म जलवायु, सीमित पानी और बंजर भूमि, लोगों के लिए जीवित रहना अधिक कठिन बना देती है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"पर्यावरण किसे कहते हैं समझाइए -  environment in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-j8mpAWRgH_o/X3NRD5lD3GI/AAAAAAAAEDs/OdiZSiO04J8daJVRqng-3Y6raMbpfYGRQCLcBGAsYHQ/w320-h213/Essay-on-Save-Environment.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%; text-align: center;\" title\u003d\"पर्यावरण किसे कहते हैं समझाइए -  environment in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eहम\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e, बाढ़ और सूखे जैसी प्रमुख पर्यावरणीय घटनाओं से भी प्रभावित होते हैं जो घरों, संपत्ति और कृषि को नुकसान पहुंचाते हैं। ये लोगों के विस्थापन का कारण बन सकते हैं और चोट, जीवन की हानि और आजीविका के विनाश का कारण बन सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवे जल स्रोतों और पाइपलाइनों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे पानी दूषित हो सकता है और बीमारियां फैल सकती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण के साथ हमारा संबंध औद्योगीकरण के साथ बदल गया, जो 18 वीं शताब्दी में यूके में शुरू हुआ, इसके तुरंत बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका में और फिर दुनिया भर में फैल गया। औद्योगीकरण से पहले, मानव गतिविधि के प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण नहीं थे क्योंकि उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकियां पर्यावरण को बड़े पैमाने पर संशोधित करने में सक्षम नहीं थीं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउस समय के लोग सीमित पर्यावरणीय प्रभाव के साथ हाथ के औजारों और सरल तकनीकों का उपयोग करते हुए कृषि कार्य करते थे। औद्योगीकरण ने संसाधनों के अधिक दोहन की अनुमति दी है। उदाहरण के लिए, अब हम पेड़ों को काटने के लिए शक्तिशाली मशीनो का उपयोग करते हैं और फसल उत्पादन के लिए औद्योगिक रूप से उत्पादित रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। इन परिवर्तनों ने पर्यावरण पर मानव प्रभाव को तेजी से बढ़ाया है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्राकृतिक संसाधनों का उपयोग\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eहम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हैं। हम जीवित रहने के लिए भोजन और पानी पर निर्भर हैं और हमें घरेलू खाना पकाने से लेकर प्रमुख औद्योगिक प्रक्रियाओं तक कई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहमारे कपड़े, परिवहन, भवन, उपकरण और हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली अन्य सभी वस्तुओं के उत्पादन के लिए कई अलग-अलग संसाधनों की आवश्यकता होती है। आइए एक सरल उदाहरण लेते हैं। उन संसाधनों के बारे में सोचें जिनका उपयोग आप नोटबुक बनाने के लिए कर रहे हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकागज के निर्माण के लिए उत्पादन प्रक्रिया के लिए लकड़ी और पानी के साथ-साथ ऊर्जा के कच्चे माल की आवश्यकता होती है। लकड़ी की आपूर्ति करने वाले पेड़ों को बढ़ने के लिए मिट्टी, पानी और जमीन की आवश्यकता होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआपकी नोटबुक में स्याही या धातु के स्टेपल या अन्य घटक हो सकते हैं जो अन्य प्रकार के संसाधनों से बनाए गए हैं। संसाधनों की हमारी आवश्यकता बहुत बड़ी है और यह बढ़ती जा रही है क्योंकि जनसंख्या बढ़ती है और प्रति व्यक्ति खपत सामाजिक-आर्थिक प्रगति के साथ बढ़ती है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण को दो भागो में विभाजित किया जाता है - प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। हालाँकि पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण कहीं नहीं पाए जाते। यह विभाजन प्राकृतिक दशाओं में मानव की अधिकता और न्यूनता का कारण है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमानव ने अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए पर्यावरण से छेड़छाड़ किया और प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन नष्ट किया है। जिससे प्राकृतिक के अस्तित्व पर ही संकट उत्पन्न हो गया है। इस तरह की समस्याएँ पर्यावरणीय अवनयन कहलाती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवर्तमान समय में पर्यावरण को समझने और उसे संतुलित करने के लिए मनुष्य को अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। इसी से हमें जीवन की गुणवत्ता प्राप्त हो सकती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. प्राकृतिक पर्यावरण\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eजो कुछ भी मानव निर्मित नहीं है वह प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत आता है। भूमि, वायु, जल, पौधे और जानवर सभी प्राकृतिक पर्यावरण शामिल है। आइए हम प्राकृतिक पर्यावरण के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जानें। ये\u0026nbsp;स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जीवमंडल क्या हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eस्थलमंडल पृथ्वी की ठोस परत है। यह चट्टानों और खनिजों से बना है और मिट्टी की एक पतली परत से ढका हुआ है। स्थलमंडल पहाड़ों, पठारों, मैदानों, घाटियों, भू-आकृतियों आदि के साथ एक अनियमित सतह है। यह वह क्षेत्र है जो हमें वन, चराई के लिए घास के मैदान, कृषि और आवास के लिए भूमि प्रदान करता है। यह खनिजों का भी स्रोत है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजलमंडल जल का क्षेत्र है। इसमें पानी के विभिन्न स्रोत और विभिन्न प्रकार के जल निकाय जैसे नदियाँ, झीलें, समुद्र, महासागर, मुहाना आदि शामिल हैं। यह सभी जीवों के लिए आवश्यक है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवायुमण्डल वायु की वह पतली परत है जो पृथ्वी को घेरे रहती है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा धारण किया जाता है। वायुमंडल सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों को रोककर हमारी रक्षा करता है। इसमें ऑक्सीजन जैसी कई गैसें होती हैं, जो जीवन, धूल और जलवाष्प के लिए आवश्यक हैं। वातावरण में परिवर्तन से मौसम और जलवायु में परिवर्तन होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसारा जीवन जीवमंडल का निर्माण करता है। यह पृथ्वी का वह क्षेत्र है जहाँ भूमि, जल और वायु जीवन का समर्थन करने के लिए एक दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. मानव निर्मित पर्यावरण\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमानव द्वारा निर्मित पर्यावरण है। इसमें विभिन्न अन्य समुदायों के अलावा गांवों, कस्बों, शहरों और परिवहन और संचार सुविधाओं जैसी स्थायी मानव बस्तियां शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमानव पर्यावरण मानव निर्मित पर्यावरण है। इसे इंसानों ने अपनी जरूरत के हिसाब से मॉडिफाई किया है। प्रौद्योगिकी विकसित होने से पहले, मनुष्य खुद को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुकूल बना लेगा। उन्होंने एक सादा जीवन व्यतीत किया और अपने आस-पास की प्रकृति से अपनी आवश्यकताओं को पूरा किया। समय के साथ, उनकी जरूरतें बढ़ती गईं और अधिक विविध होती गईं। मानव ने अपने वातावरण को अपनी आवश्यकता के अनुसार बदलने के नए-नए तरीके सीखे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउन्होंने फसल उगाना, जानवरों को पालतू बनाना और घर बनाना सीखा। उन्होंने पहिया, वस्तु विनिमय प्रणाली, व्यापार और वाणिज्य का आविष्कार किया। परिवहन तेज हो गया। औद्योगिक क्रांति के माध्यम से बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव था। दुनिया भर में संचार आसान और तेज हो गया। उन्होंने एक कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण के बीच एक सही संतुलन आवश्यक है। यदि हम पर्यावरण द्वारा उपलब्ध कराए गए स्रोतों का बुद्धिमानी से उपयोग करें, तो हम एक स्वस्थ संतुलन स्थापित कर सकते हैं। हमें अपने संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करना चाहिए और उनका संरक्षण करना सीखना चाहिए। लकड़ी, खनिज, जल, वायु जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुमूल्य हैं और जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरणीय समस्याएं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eज्यादातर पर्यावरण की समस्याएँ जनसंख्या वृद्धि और मानव द्वारा संसाधनों के उपभोग से हुयी हैं। पर्यावरण में होने वाले वे परिवर्तन से वातावरण में असंतुलन उत्त्पन हो जाता हैं। और इसके कारण पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरा उत्पन्न होता हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1.\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण प्रदूषण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eजलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और अन्य प्राकृतिक आपदाएं होने लगती है। मानव के विकाश ने लगभग सारी पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया हैं। मनुष्य को पर्यावरण से साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण में किसी हानिकारक गैस रसायन या अपषिस्ट पदार्थ का विघटन होना प्रदूषण कहलाता है। यह एक गंभीर समस्या है। खासकर भारत जैसे विकासशील देश के लिए। प्रदूषण कई कारणों से हो सकता है। आता जागरूकता और सरकार की निति इस समस्या का हल हो सकता है। प्रदूषण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है - वायु प्रदूषण जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. जलवायु परिवर्तन\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eहमारे जीवन मे हमने बहुत सारे परिवर्तन देखे है जल वायु परिवर्तन उन्ही मे से एक है जल वायु परिवर्तन के कारण ही पृथ्वी पर मौसम में परिवर्तन होता है। इसके कारण कई समस्याएं उत्त्पन हो सकती है। फसलों को नुकसान होगा। वर्षा की कमी से भूमि बंजर हो जाएगी। पेड़ पौधे नस्ट हो जायेंगे। तथा वातावरण का तापमान बढ़ने लगेगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा चालक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन है, जिनमें से 90% से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन हैं। ऊर्जा की खपत के लिए जीवाश्म ईंधन का जलना इन उत्सर्जन का मुख्य स्रोत है।जिसमें कृषि, वनों की कटाई इसमें और इजाफा करते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूमि पर तापमान वृद्धि वैश्विक औसत वृद्धि से लगभग दोगुनी है, जिससे रेगिस्तान का विस्तार होता है और अधिक गर्मी और जंगल में आग लगने जैसी समस्या उत्पन्न होती है। हिमनदों के पिघलने से समुद्री जल स्तर बढ़ रहा हैं। गर्म तापमान वाष्पीकरण की दर को बढ़ा रहे हैं, जिससे अधिक तीव्र तूफान और मौसम चरम पर है। पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों में कई प्रजातियों का स्थानांतरण या विलुप्त होना शामिल है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजलवायु परिवर्तन से लोगों को खाद्य असुरक्षा, पानी की कमी, बाढ़, संक्रामक रोग, अत्यधिक गर्मी, आर्थिक नुकसान और विस्थापन का खतरा बना हुआ है। इन प्रभावों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को 21वीं सदी में जलवायु परिवर्तन को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताने के लिए प्रेरित किया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. जैवविविधता\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eजैव विविधता जिसका उपयोग पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता का वर्णन करने के लिए किया जाता है। जैव विविधता पौधों, बैक्टीरिया, जानवरों और मनुष्यों सहित हर जीवित चीज को संदर्भित करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि पौधों और जानवरों की लगभग 8.7 मिलियन प्रजातियां अस्तित्व में हैं। हालांकि, अब तक केवल लगभग 1.2 मिलियन प्रजातियों की पहचान की गई है और उनका वर्णन किया गया है, जिनमें से अधिकांश कीड़े हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपीढ़ियों से, वर्तमान में जीवित सभी प्रजातियों में अद्वितीय लक्षण विकसित हुए हैं जो उन्हें अन्य प्रजातियों से अलग बनाते हैं। जीव जो एक दूसरे से इतने भिन्न हो गए हैं कि वे अब एक दूसरे के साथ प्रजनन नहीं कर सकते हैं उन्हें भिन्न प्रजातियां माना जाता है। सभी जीव जो एक दूसरे के साथ प्रजनन कर सकते हैं वे एक प्रजाति में आते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवैज्ञानिक इस बात में रुचि रखते हैं कि वैश्विक स्तर पर कितनी जैव विविधता है, यह देखते हुए कि अभी भी बहुत अधिक जैव विविधता की खोज की जानी है। वे यह भी अध्ययन करते हैं कि वन, घास के मैदान, टुंड्रा या\u0026nbsp;झील\u0026nbsp;जैसे एकल पारिस्थितिक तंत्र में कितनी प्रजातियां मौजूद हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eजैवविविधता ह्रास\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- पृथ्वी पर उपस्थित विभिन्न प्रकार के पारितंत्र में उपस्थित जीवों व वनस्पतियों के प्रजातियों के प्रकार में कमी को जैवविविधता हृास कहते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. प्राकृतिक आपदाएँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक आपदा प्राकृतिक प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप होने वाली एक प्रमुख प्रतिकूल घटना है; उदाहरणों में बाढ़, तूफान, बवंडर,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eविस्फोट, भूकंप, सुनामी, तूफान और अन्य भूगर्भिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक आपदा से जानमाल का नुकसान हो सकता है या संपत्ति की क्षति हो सकती है, जिसकी गंभीर प्रभाव लोगो और जंगली जीवों पर पड़ता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राकृतिक आपदा मानव-निर्मित और प्राकृतिक दोनों हो सकते है। या जलवायु परिवर्तन संभावित रूप से एक भूमिका निभा रहे हैं।\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u0026nbsp;में 2015 के भूकंप के प्रतिकूल विनाशकारी परिणाम थे जिसकी मरम्मत में वर्षों लग गए।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण के लाभ\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण हमें अनगिनत लाभ प्रदान करता है। जंगल, पेड़, जानवर, पानी और हवा आदि। जो मानव जीवन के लिए आवश्यक होते है। जंगल और पेड़ हवा को शुद्ध बनाते हैं और हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं। साथ ही पानी को शुद्ध करते हैं। बाढ़ की संभावना को कम करते हैं और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह उन महत्वपूर्ण प्रणालियों को नियंत्रित करता है जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा, यह पृथ्वी पर जीवन की संस्कृति और गुणवत्ता को बनाए रखता है। पर्यावरण प्रतिदिन होने वाले विभिन्न प्राकृतिक चक्रों को नियंत्रित करता है। ये चक्र जीवित चीजों और पर्यावरण के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। इन चीजों की गड़बड़ी अंततः मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के जीवन चक्र को प्रभावित कर सकती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण ने हमें और अन्य जीवित प्राणियों को हजारों वर्षों से फलने-फूलने में मदद की है। पर्यावरण हमें उपजाऊ भूमि, पानी, हवा, पशुधन और अस्तित्व के लिए कई आवश्यक चीजें प्रदान करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबढ़ती मानव गतिविधि पृथ्वी की सतह पर अधिक दबाव बढ़ा रही है जो अप्राकृतिक रूप से कई आपदाओं का कारण बन रही है। इसके अलावा, हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस गति से कर रहे हैं कि ये संसाधन कुछ ही वर्षों में वे पृथ्वी से गायब हो जाएंगे।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण के घटक\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eसामान्य तौर पर, पर्यावरण में निम्नलिखित प्रमुख घटक होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eजैविक घटक\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभौतिक घटक\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch4\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैविक घटक\u003c/span\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eजैसा कि नाम से पता चलता है, पर्यावरण के जैविक घटक में सभी जीवित चीजें शामिल हैं। इसलिए, इसे पारिस्थितिकी तंत्र का जैविक घटक भी कहा जाता है। पशु, पौधे और सूक्ष्मजीव अजैविक घटकों के साथ परस्पर क्रिया करते हैं, और ये विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र बनाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अलावा, इन पारिस्थितिक तंत्रों में जीवों को समूहों में वर्गीकृत किया जाता है - जैसे उत्पादक, उपभोक्ता और डीकंपोजर। वे खाद्य श्रृंखला पर विभिन्न ट्राफिक स्तरों पर भी कब्जा करते हैं। उदाहरण के लिए, सभी स्वपोषी उत्पादक हैं और खाद्य श्रृंखला में निम्नतम स्तरों पर कब्जा कर लेते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch4\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभौतिक घटक\u003c/span\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp\u003eभौतिक घटक पर्यावरण के निर्जीव भाग को संदर्भित करता है। इन्हें अजैविक कारक भी कहा जाता है और इसमें हवा, पानी, मिट्टी, जलवायु आदि शामिल हैं। भौतिक घटकों को मोटे तौर पर 3 समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है - वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपर्यावरण संरक्षण अधिनियम\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने के लिए लाया गया था। सभी स्रोतों से प्रदूषण को नियंत्रित करने और औद्योगिक सुविधा की स्थापना को प्रतिबंधित करने के लिए अधिकृत करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्यावरण की सुरक्षा और सुधार प्रदान करने के उद्देश्य से 1986 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम बनाया गया था। यह केंद्र सरकार को अपने सभी रूपों में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और देश के विभिन्न हिस्सों के लिए विशिष्ट पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए अधिकृत अधिकारियों को स्थापित करने का अधिकार देता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eनिष्कर्ष\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- हम कह सकते हैं कि यह पर्यावरण हमें जीवन प्रदान करता है। पर्यावरण के बिना, हम जीवित नहीं रह सकते। पर्यावरण का योगदान जीवो के लिए अमूल्य है। फिर भी बदले में हमने पर्यावरण को केवल नुकसान और क्षति पहुंचाई है।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3915450177881574383"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3915450177881574383"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/environment-in-hindi.html","title":"पर्यावरण किसे कहते हैं -  environment in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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है - tropical climate in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eऊष्ण कटिबंध (\u0026nbsp;tropical climate in Hindi\u0026nbsp;)\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकर्क रेखा और मकर रेखा के बीच भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्र को कहा जाता है। उष्णकटिबंधीय जलवायु जिसमें सभी महीनों का तापमान औसतन 18 ° C\u0026nbsp; से अधिक होता है। कुछ उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पूरे वर्ष वर्षा होती है। यह क्षेत्र अधिक गर्मी और वर्षा होता हैं। विश्व का सबसे प्रसिद्ध वर्षा वन इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउष्णकटिबंधीय जलवायु में तापमान\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eविश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत लोग\u0026nbsp;इस क्षेत्र में रहते है।उष्णकटिबंधीय जलवायु में वर्ष भर गर्म होती हैं। औसत 25 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान होता हैं। इसका कारण यह है कि उष्ण कटिबंध के क्षेत्र में\u0026nbsp;सूर्य का प्रकाश सीधा और\u0026nbsp;अधिक पड़ता\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउष्णकटिबंधीय जलवायु में वर्षा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eवर्षा की मात्रा उष्ण कटिबंध के एक क्षेत्र से दूसरे में बहुत भिन्न हो सकती है। दक्षिण अमेरिका में अमेज़ॅन बेसिन के कुछ हिस्सों में प्रति वर्ष लगभग 3 मीटर (9 फीट) बारिश होती है। उष्ण कटिबंध के अन्य क्षेत्रों में शुष्क जलवायु होती है। उत्तरी अफ्रीका में सहारा रेगिस्तान में प्रति वर्ष केवल 2-10 सेंटीमीटर (.793.9 इंच) बारिश होती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउष्णकटिबंधीय जलवायु में जीव जंतु\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eउष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने वाली वर्षा से सीधे तौर पे\u0026nbsp;जिव जंतु और पेड़ पौधे प्रभावित होते\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;यहाँ पे पेड़ पौधे व जानवरों की कई\u0026nbsp;प्रजातियाँ पायी जाती\u0026nbsp;हैं। उदाहरण के लिए, अफ्रीका के शुष्क उष्णकटिबंधीय में बाओबाब वृक्ष पनपता है। बाओबाब अपने विशाल ट्रंक में पानी संग्रहीत करता है। दूसरी ओर \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/sri-lanka-capital-in-hindi.html\"\u003eश्रीलंका \u003c/a\u003eमें पर्याप्त वर्षा होती है।\u0026nbsp; जहां पे\u0026nbsp;मेंढकों की 250 प्रजातिया पायी जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\"उष्णकटिबंधीय\" कभी-कभी उष्णकटिबंधीय जलवायु के लिए एक सामान्य अर्थ में गर्म और नम साल भर गर्म, अक्सर रसीला वनस्पति की भावना के साथ प्रयोग किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकई उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शुष्क और नम मौसम पाया जाता\u0026nbsp;है। इस क्षेत्र में\u0026nbsp;बारिश का मौसम एक या एक से अधिक महीनों से होता है। जब किसी क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा होती है। नमी वाले\u0026nbsp;मौसम को उष्णकटिबंधीय और उपप्रकार के भागों में बांटा जाता है। गर्मियों के दौरान मुख्य रूप से देर से दोपहर और शाम वर्षा होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eउष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत के सबसे व्यापक वन क्षेत्र हैं। इन्हे \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/what-is-monsoon.html\"\u003eमानसूनी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eवन भी कहा जाता है। 200 सेमी और 70 सेमी के बीच वर्षा वाले क्षेत्र में फैला हुआ\u0026nbsp;है। इस प्रकार के\u0026nbsp;वन के पेड़ गर्मियों में लगभग छह से आठ सप्ताह तक अपने पत्ते गिरते हैं। पानी की उपलब्धता के आधार पर, इन वनों को नम और शुष्क पर्णपाती में विभाजित किया जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3867650952574521568"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3867650952574521568"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/tropical-climate-in-hindi.html","title":"उष्णकटिबंधीय जलवायु क्या है - tropical climate in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/capital-of-assam-in-hindi.html\"\u003eअसम \u003c/a\u003eमें लुइट, दिलाओ कहा जाता है। जो तिब्बत,\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;\u0026nbsp;और\u0026nbsp;बांग्लादेश\u0026nbsp;से होकर बहती है। यह डिस्चार्ज के हिसाब से दुनिया की 9वीं सबसे बड़ी और 15वीं सबसे लंबी नदी है। \u003cdiv\u003e  \u003ch2\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eब्रह्मपुत्र नदी कहां से निकलती है\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    तिब्बत में हिमालय के उत्तरी किनारे पर स्थित कैलाश पर्वत के पास, मानसरोवर झील     क्षेत्र सेयह नदी निकलती है। \u0026nbsp;यह हिमालय के माध्यम से दक्षिणी\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-tibet.html\"\u003eतिब्बत\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के     साथ बहती है और अरुणाचल प्रदेश (भारत) में प्रवेश करती हैं।\u003c/p\u003e     \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    यह असम घाटी से ब्रह्मपुत्र के रूप में और बांग्लादेश से जमुना के रूप में जानी     जाती है। यह बांग्लादेश में गंगा नदी के साथ विलीन हो जाती है, और बंगाल की     खाड़ी में बहती है।\u003c/p\u003e  \u003cdiv\u003e    लगभग 3,848 किमी लंबी, ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में सिंचाई और परिवहन के लिए एक     महत्वपूर्ण नदी है। नदी की औसत गहराई 30 मीटर है और इसकी अधिकतम गहराई 135 मीटर     है। जब हिमालय की बर्फ पिघलती है तो नदी में विनाशकारी बाढ़ आ जाती है।\u0026nbsp;   \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    नदी भारत-\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u0026nbsp;सीमा के पूर्व में हिमालय से लेकर असम के मैदानों में बहती है।     ब्रह्मपुत्र की औसत चौड़ाई 5.46 किलोमीटर है। गुवाहाटी के पास पांडु में     ब्रह्मपुत्र का अधिकतम निर्वहन\u0026nbsp; है। भारत में प्रवेश करने तक नदी की ढलान     बहुत ही खड़ी है।\u0026nbsp;   \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    ब्रह्मपुत्र का ऊपरी मार्ग लंबे समय से अज्ञात था, और यारलुंग त्संगपो के साथ     इसकी पहचान केवल 1884-86 में अन्वेषण द्वारा स्थापित की गई थी। इस नदी को अक्सर     त्संगपो-ब्रह्मपुत्र नदी कहा जाता है।\u0026nbsp;   \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    भारतीय उपमहाद्वीप की अधिकांश नदियों में स्त्रीलिंग नाम हैं, जबकि इस नदी का     एक दुर्लभ पुरुष का नाम है। ब्रह्मपुत्र का अर्थ संस्कृत में \"ब्रह्मा का     पुत्र\" होता है।\u0026nbsp;   \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eब्रह्मपुत्र नदी लाल क्यों हो जाता है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e      हर साल, ब्रह्मपुत्र नदी आषाढ़ (जून) के महीने में तीन दिनों के लिए लाल हो       जाती है। कई लोग कहते हैं कि पानी मिट्टी और लोहे के साथ मिलकर लाल रंग का       निर्माण करते है, जो खून की तरह दिखयी देता है। दूसरों का कहना है कि इस       महीने के दौरान पानी में लाल-शैवाल बढ़ता है।     \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eब्रह्मपुत्र नदी किन राज्यों से होकर बहती है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e      ब्रह्मपुत्र नदी 5300 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय के कैलाश पर्वत से निकलती है।       तिब्बत से बहने के बाद यह अरुणाचल प्रदेश से होकर भारत में प्रवेश करती है और       बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करने से पहले असम और बांग्लादेश से होकर बहती है।     \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eब्रह्मपुत्र की लंबाई\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e\u003c/p\u003e    \u003cp\u003e      लगभग 4,696 किमी (2,918 मील) लंबी यह नदी, सिंचाई और परिवहन के लिए एक       महत्वपूर्ण है। नदी की औसत गहराई 140 मीटर (450 फीट) और अधिकतम गहराई 370       मीटर (1,200 फीट) है।     \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकोलिया भमोरा सेतु\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e      कोलिया भमोरा सेतु भारत के असम राज्य में\u0026nbsp;तेजपुर और कलियाबोर के पास       ब्रह्मपुत्र नदी पर कंक्रीट का\u0026nbsp; एक\u0026nbsp;पुल है। इसका नाम अहोम जनरल       कोलिया भोमोरा फुकन के नाम पर रखा गया है। पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 715 के       मार्ग पर पड़ता है, जिसे पहले NH-37A के रूप में जाना जाता है।     \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-__FlMDyOXZ4/YKpIdZuilFI/AAAAAAAAE7M/MqDlhQRNxj06YPqXnLU1-j5bu4m_RiDHQCPcBGAYYCw/s1280/20210523_174746.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ब्रह्मपुत्र नदी कहां से निकलती है - brahmaputra river in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"806\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"201\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-__FlMDyOXZ4/YKpIdZuilFI/AAAAAAAAE7M/MqDlhQRNxj06YPqXnLU1-j5bu4m_RiDHQCPcBGAYYCw/w320-h201/20210523_174746.webp\" title\u003d\"ब्रह्मपुत्र नदी कहां से निकलती है - brahmaputra river in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e    \u003cp\u003e      यह पुल सोनितपुर को\u0026nbsp; नागांव जिले से जोड़ता है। इस पुल की लंबाई 3015       मीटर है, और निर्माण 1981 से 1987 तक हुआ था। इसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन       पीएम राजीव गांधी ने किया था। डाक विभाग, संचार मंत्रालय ने 14 अप्रैल 1987       को इस पुल का स्मारक टिकट जारी किया, जिसकी कीमत INR 2 थी।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगंगा ब्रह्मपुत्र बेसिन\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e      गंगा बेसिन गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन का एक हिस्सा है। नेपाल, भारत और       बांग्लादेश में 1,086,000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा है। नेपाल से दक्षिण की ओर       बहने से पहले तिब्बत के अंदर कई सहायक नदियाँ हैं। बेसिन की आबादी 500 मिलियन       से अधिक है, जिससे यह दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला नदी बेसिन है।     \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp\u003e      ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी -\u0026nbsp;ल्हासा नदी, न्यांग नदी, पार्लंग       ज़ंगबो, लोहित नदी, धनसिरी नदी, कोलॉन्ग नदी, कामेंग नदी, मानस नदी, बेकी       नदी, रैडक नदी, जलंधा नदी, तीस्ता नदी, सुबनसिरी नदी।\u0026nbsp;     \u003c/p\u003e     \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8247202750292499320"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8247202750292499320"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/brahmaputra-river-in-hindi.html","title":"ब्रह्मपुत्र नदी कहां से निकलती है - brahmaputra river in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-__FlMDyOXZ4/YKpIdZuilFI/AAAAAAAAE7M/MqDlhQRNxj06YPqXnLU1-j5bu4m_RiDHQCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h201/20210523_174746.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7442795703087822022"},"published":{"$t":"2020-09-28T17:24:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:44:57.873+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"झील किसे कहते हैं - jhil kise kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eझील की परिभाषा\u003c/b\u003e - झील पानी से भरा वह कुंड है\u0026nbsp;जो चारो ओर भूमि\n  से\u0026nbsp;घिरा होता\u0026nbsp;है। दुनिया में लाखों झीलें हैं। वे हर महाद्वीप पर और हर\n  तरह के वातावरण में पाए जाते हैं। पहाड़ों और रेगिस्तानों में, मैदानों पर, और\n  समुद्र के किनारे में भी झील पाए जाते है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसबसे बड़ा झील\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  झीलो के\u0026nbsp;आकार में बहुत भिन्नता होती हैं। ऐसी छोटी झीलों को अक्सर तालाब कहा\n  जाता है। अन्य झीलें इतनी बड़ी हैं कि उन्हें समुद्र कहा जाता है। यूरोप और एशिया\n  में कैस्पियन सागर, दुनिया की सबसे बड़ी झील है, जिसका क्षेत्रफल 370,000 वर्ग\n  किलोमीटर (143,000 वर्ग मील) से अधिक है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसबसे गहरी झील\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  दुनिया की सबसे गहरी झील रूस में बैकल झील है। इसका तल स्थानों में सतह से लगभग 2\n  किलोमीटर (1 मील से अधिक) नीचे है। हालांकि लेक बैकल झील सुपीरियर झील के आधे से\n  कम सतह वाले क्षेत्र को कवर करती है - उत्तरी अमेरिका की महान झीलों में से एक -\n  यह लगभग चार गुना गहरी है और संयुक्त रूप से सभी महान झीलों के पांचों हिस्से\n  जितना पानी है। अन्य झीलें इतनी उथली हैं कि एक व्यक्ति आसानी से उनके पार जा\n  सकता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसबसे ऊंची झील\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  झीलें कई अलग-अलग ऊँचाइयों पर मौजूद हैं। बोलीविया और पेरू के बीच एंडीज पर्वत\n  में सबसे ऊंची झील टिटिकाका है। यह समुद्र तल से लगभग 3,810 मीटर (12,500 फीट)\n  ऊपर है। सबसे कम झील इजरायल और जॉर्डन के बीच मृत सागर है। यह समुद्र तल से 395\n  मीटर (1,300 फीट)\u0026nbsp; है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eझील के प्रकार\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eज्वालामुखीय झीलें \u003c/b\u003e-\u0026nbsp;\u003ca\n    href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\n    \u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\n  \u003eके शांत होने के बाद उसके गद्दे में पानी भर जाता है और झील का निर्माण हो जाता\n  है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eजैविक झीलें \u003c/b\u003e-\u0026nbsp;जैविक झीलें वनस्पतियों या जीवों की क्रिया द्वारा बन\n  जाती\u0026nbsp;हैं। ये झीलें आकार में अपेक्षाकृत छोटी हैं और यह घटना काफी दुर्लभ\n  हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eग्लेशियल झीलें\u003c/b\u003e -\u0026nbsp;ग्लेशियल झीलों का निर्माण पिघले हुए ग्लेशियर से\n  होता है। जैसे-जैसे ग्लेशियर नीचे बहते हैं, ग्लेशियरों की क्षणिक क्रिया झील का\n  निर्माण करती\u0026nbsp;है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eटेक्टोनिक झील \u003c/b\u003e-\u0026nbsp;टेक्टोनिक के कारण\u0026nbsp;अक्सर दुनिया की कुछ सबसे\n  गहरी और सबसे बड़ी झीलों के निर्माण में होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eगोखुर झीलें \u003c/b\u003e-\u0026nbsp;मैदानी क्षेत्रों मे नदी की धारा दाएं बाए प्रवाहित\n  होती है। ये विसर्प S आकार के होते हैं। बाद में इन मैदानों में झील बनने लगते\n  है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eभूस्खलन झीलें\u003c/b\u003e -\u0026nbsp;भूस्खलन झीलें तब बनती हैं जब एक नदी प्राकृतिक रूप\n  से चट्टान के हिमस्खलन, भूस्खलन, कीचड़, या ज्वालामुखी विस्फोट होती\u0026nbsp;है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eसॉल्यूशन लेक्स\u003c/b\u003e - सॉल्यूशन झीलें\u0026nbsp;तब बनती है जब बेडरोल घुलनशील होता\n  है और बारिश और बेडोल के पानी के खराब होने से बेडरोल का विघटन हो जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca\n    href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-RHGjJ5K0Rjw/X3HObyih50I/AAAAAAAAECI/JDZc8XUoXWINIVck6_WAIP_4q0PZkpxKgCPcBGAYYCw/s600/20200928_171945.webp\"\n    style\u003d\"text-align: center;\"\n    \u003e\u003cimg\n      alt\u003d\"झील के प्रकार  लैगून झील  भारत झीलें  झील in English  कोलेरू झील  खारे पानी की झील  सबसे खारी झील  लैगून झील किसे कहते हैं\"\n      border\u003d\"0\"\n      data-original-height\u003d\"398\"\n      data-original-width\u003d\"600\"\n      height\u003d\"212\"\n      src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-RHGjJ5K0Rjw/X3HObyih50I/AAAAAAAAECI/JDZc8XUoXWINIVck6_WAIP_4q0PZkpxKgCPcBGAYYCw/w320-h212/20200928_171945.webp\"\n      title\u003d\"झील के प्रकार  लैगून झील  भारत झीलें  झील in English  कोलेरू झील  खारे पानी की झील  सबसे खारी झील  लैगून झील किसे कहते हैं\"\n      width\u003d\"320\"\n  /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत के झील\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e1.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवेम्बनाड झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e2\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eचिलिका झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e3\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eशिवाजी सागर झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e4\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eइंदिरा सागर झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e5\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपैंगोंग झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e6.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपुलिकट झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e7.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसरदार सरोवर झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e8.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनागार्जुन सागर झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e9.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलोकतक झील\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e10.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवुलर झील जम्मू\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eलैगून झील किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  समुद्री तटों के किनारे पर कभी कभी\u0026nbsp;उथले\u0026nbsp;पानी में\u0026nbsp;झील\u0026nbsp;का\n  निर्माण है।\u0026nbsp;उसे\u0026nbsp;“लगून झील ” कहा जाता है। इस तरह की झील भारत में\n  ओडिशा के समुद्री किनारे पे बानी\u0026nbsp;चिल्का और पुलिकट झील है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eचिल्का झील कहाँ स्थित है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  चिलिका झील एक खारे पानी की झील है और यह\u0026nbsp; पूर्वी भारत में ओडिशा राज्य में\n  स्थित\u0026nbsp;है। चिलिका काजल क्षेत्र 900 से 1165 वर्ग किमी के बीच है। यह एक 32\n  किमी लंबे और 1.5 किमी चौड़े चैनल द्वारा बंगाल की खाड़ी से जुड़ा हुआ है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमानसरोवर झील कहाँ है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  मानसरोवर झील दुनिया की सबसे ऊंची ताज़े पानी की झीलों में से एक है। 4,583 मीटर\n  की ऊँचाई पर, झील 412 वर्ग किलोमीटर को कवर करती है। दक्षिणी छोर की तुलना में\n  उत्तरी भाग में अधिक गहरा है। यह झील तिब्बत में स्थित है जो चीन आधीन है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7442795703087822022"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7442795703087822022"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/jhil-kise-kahate-hain.html","title":"झील किसे कहते हैं - jhil kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-RHGjJ5K0Rjw/X3HObyih50I/AAAAAAAAECI/JDZc8XUoXWINIVck6_WAIP_4q0PZkpxKgCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h212/20200928_171945.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-481428470040882774"},"published":{"$t":"2020-09-27T09:16:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:48:48.636+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"दक्षिण महासागर - southern ocean in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003eदक्षिणी महासागर जिसे अंटार्कटिक महासागर या ऑस्ट्रेलियाई महासागर के रूप में भी   जाना जाता है। दुनिया के दक्षिण में स्थित एक\u0026nbsp;महासागर\u0026nbsp;है। यह अक्षांश 60 ° दक्षिण में   पृथ्वी के\u0026nbsp;दक्षिण\u0026nbsp; दिशा में\u0026nbsp;फैला है और पूरे अंटार्कटिका महाद्वीप को   चारो ओर से\u0026nbsp;घेरता है। विश्व के पांच\u0026nbsp;महासागरों में से चौथा सबसे बड़ा   महासागर है। इस महासागर जल उत्तर की ओर बहता है।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  विज्ञानियों में दक्षिण महासागर की उत्तरी सीमा को लेकर मतभेद हैं यहाँ तक कि कुछ   वैज्ञानिक इसके अस्तित्व को नकारते हैं और इसे दक्षिणी   प्रशांत महासागर  का\u0026nbsp;हिस्सा मानते हैं। ज्यादातर वैज्ञानिक ने दक्षिणी महासागर को एक महासागर   के रूप में\u0026nbsp;अपनाया है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन ने अभी तक 60° दक्षिणी अक्षांश के दक्षिण में   उपस्थित महासागरों से संबंधित अपनी\u0026nbsp;परिभाषा की पुष्टि नहीं की है। दक्षिण महासागर ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी सिरे से शुरु हो   जाता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e दक्षिणी महासागर की अधिकतम गहराई\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  फरवरी 2019 की शुरुआत में फाइव डीप्स अभियान द्वारा सर्वेक्षण किया गया था।   अभियान के मल्टीबीम सोनार टीम ने बताया की इसकी अधिकतम गहराई\u0026nbsp;7,434 मीटर   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कुछ नक्शों में पांचवा महासागर है\u0026nbsp;जिसे दक्षिणी महासागर बेसिन कहा जाता है,   जिसमें अंटार्कटिका के आसपास का क्षेत्र शामिल है। जिसमें    हिन्द महासागर,   अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;\u0026nbsp;और प्रशांत महासागर के बेसिन के दक्षिणी हिस्से शामिल हैं। अन्य   महासागरो\u0026nbsp;के विपरीत है\u0026nbsp;जो एक महाद्वीप\u0026nbsp;के चारो और स्थित\u0026nbsp;हैं।   दक्षिणी महासागर बेसिन को ऐतिहासिक मानचित्रों पर दर्शाया नहीं जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eSouthern ocean facts in Hindi\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e1. दक्षिणी महासागर का सबसे बड़ा निवासी, ब्लू व्हेल, हर दिन अपने पसंदीदा भोजन को आठ टन तक खा सकता है। और ब्लू व्हेल का पसंदीदा भोजन क्रिल है, एक छोटा क्रस्टेशियन जो एक झींगा जैसा दिखता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2. दक्षिणी महासागर पृथ्वी की सतह का लगभग 6% भाग कवर करता है। जबकि सभी महासागर पृथ्वी की सतह का 71% हिस्सा को कवर करते हैं!\u003c/p\u003e\u003cp\u003eऔसतन, दक्षिण महासागर लगभग 11,000 फीट गहरा है। हालांकि, अपने सबसे गहरे बिंदु पर 23,000 फीट गहरा है। जिसे सैंडविच ट्रेंच कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e3. दक्षिणी महासागर का निर्माण 30 मिलियन वर्ष पहले हुआ था जब अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के भूभाग\u0026nbsp; अलग हो गए थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e4. दक्षिणी महासागर में हिमखंड बहुत ही आसानी से दिख जाता हैं। यहाँ पे 1,000 फीट से अधिक बड़े हिमखंड मौजूद होते है। यह विशाल बर्फ जहाजों और मालवाहक जहाजों के रास्तें रोड़ा बनते है कभी कभी इससे दुर्घना भी हो जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e5. दक्षिणी महासागर में सील की सबसे बड़ी प्रजाति एलिफेंटसील पाया जाता है, जो 8,800 पाउंड तक बढ़ सकती है! यह वही वजन है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hkYDXhZaOq8/X3gJ_LbzchI/AAAAAAAAELc/QezmCm-kLxQkYBuDU5-itjOQ5PdtGsFHQCPcBGAYYCw/s600/20201003_095759.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hkYDXhZaOq8/X3gJ_LbzchI/AAAAAAAAELc/QezmCm-kLxQkYBuDU5-itjOQ5PdtGsFHQCPcBGAYYCw/s320/20201003_095759.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e \u003ch3 style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिणी महासागर की भौगोलिक स्थिति\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both;\"\u003e  दक्षिणी महासागर, भूगर्भीय रूप से महासागरों में सबसे छोटा हैं इसका गठन तब हुआ   जब अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका अलग हो गए। महाद्वीपों के अलग होने से   अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट का निर्माण हुआ। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both;\"\u003e  दक्षिणी महासागर अन्य महासागरों से इस मायने में भिन्न है कि इसकी सबसे बड़ी सीमा   भू-भाग नहीं है। यह अपनी सिमा अटलांटिक, हिन्द और प्रशांत महासागरों के साथ साझा   करता है। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both;\"\u003e  इसे एक अलग महासागर मानने का एक कारण यह है कि दक्षिणी महासागर का अधिकांश पानी   अन्य महासागरों के पानी से अलग है। अंटार्कटिका के चारों ओर घूमने वाले   अंटार्कटिक सर्कम्पोलर करंट के कारण पानी दक्षिणी महासागर के चारों ओर काफी तेजी   से पहुँचाया जाता है। दक्षिणी महासागर का पानी न्यूजीलैंड, दक्षिण अमेरिका के   दक्षिण में दक्षिणी महासागर और\u0026nbsp; प्रशांत महासागर के पानी जैसा दिखता है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-R3F-RcbjxXg/X3AJ0s3fyJI/AAAAAAAAD_Q/ilZKknuomN0rBWyye6XZorBVKfPU7u8jwCPcBGAYYCw/s640/Map-of-Antarctica-and-the-Southern-Ocean-From-http-mapperycom-Antarctica-modified_Q640.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"दक्षिण महासागर - southern ocean in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"640\" data-original-width\u003d\"640\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-R3F-RcbjxXg/X3AJ0s3fyJI/AAAAAAAAD_Q/ilZKknuomN0rBWyye6XZorBVKfPU7u8jwCPcBGAYYCw/w320-h320/Map-of-Antarctica-and-the-Southern-Ocean-From-http-mapperycom-Antarctica-modified_Q640.webp\" style\u003d\"border-radius: 5%;\" title\u003d\"दक्षिण महासागर - southern ocean in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both;\"\u003e  दक्षिणी महासागर में 4000 और 5000 मीटर के बीच की गहराई है, दक्षिणी महासागर की   सबसे बड़ी गहराई 7,236 मीटर दक्षिण सैंडविच ट्रेंच के दक्षिणी छोर पर है।   अंटार्कटिक महाद्वीपीय शेल्फ आम तौर पर संकीर्ण और असामान्य रूप से गहरा दिखाई   देता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिणी महासागर के प्रमुख\u0026nbsp;समुद्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"clear: both;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eवेडेल सागर - 2.8 मिलियन किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eसोमोव सागर - 1.15 मिलियन किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eरिइज़र-लार्सन सागर - 1.138 मिलियन किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eलाज़रेव सागर - 929,000 किमी२\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eस्कोटिया सागर - 900,000 किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eरॉस सागर - 637,000 किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eबेलिंग्सहॉसन सागर - 487,000 किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमावसन सागर - 333,000 किमी2\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eअमुंडसेन सागर - 98,000 किमी२\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eडेविस सागर - 21,000 किमी२\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eदक्षिणी महासागर क्या है\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी महासागर (जिसे अंटार्कटिक महासागर भी कहा जाता है) ग्रह के पाँच महासागरों में सबसे दक्षिण में स्थित है। यह पूरी तरह से अंटार्कटिका महाद्वीप को घेरता है और प्रशांत, हिन्द और अटलांटिक महासागरों के दक्षिणी जल को जोड़ता है। दक्षिणी महासागर विश्व का चौथा सबसे बड़ा महासागर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eदक्षिणी महासागर कितना ठंडा है\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिणी महासागर की सतह के पानी का तापमान 28 और 50 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच रहता है, यह आर्कटिक महासागर के बाद दुनिया के महासागरों में चौथा सबसे ठंडा महासागर है। हिंद महासागर दुनिया का सबसे गर्म महासागर है, जिसकी सतह का तापमान 66 और 82 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच होता है। हिंद महासागर इतना गर्म है क्योंकि यह किसी भी बिंदु पर आर्कटिक महासागर से नहीं जुड़ता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसमुद्र और महासागरों में क्या अंतर है\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसमुद्र और महासागरों के बीच दो मुख्य अंतर होता हैं। पहला समुद्र महासागरों की तुलना में बहुत छोटे होते हैं। दूसरा समुद्र जमीन के सतह\u0026nbsp; होता है, जैसे मृत सागर, आयरिश सागर और उत्तरी सागर। जबकि महासागर विशाल होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/481428470040882774"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/481428470040882774"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/southern-ocean-in-hindi.html","title":"दक्षिण महासागर - southern ocean in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-hkYDXhZaOq8/X3gJ_LbzchI/AAAAAAAAELc/QezmCm-kLxQkYBuDU5-itjOQ5PdtGsFHQCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_095759.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3314388469671966248"},"published":{"$t":"2020-09-27T06:31:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:49:11.580+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eमेरु पर्वत\u003c/b\u003e को सुमेरु, सिनरू, महमेरु के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू,   जैन और बौद्ध इन सभी धर्मों के लिए यहां पर्वत महत्वपूर्ण है। और इसे आध्यात्मिक   लोगों का केंद्र माना जाता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमेरु पर्वत कहाँ है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  मेरु पर्वत उत्तराखंड राज्य में गढ़वाल   हिमालय  में स्थित है। यह थालय सागर और शिवलिंग के बीच स्थित है। इसका मार्ग अत्यधिक   चुनौतीपूर्ण हैं। \"मेरु\" नाम की उत्पत्ति संस्कृत शब्द से हुई है। पहली बार 2001   में वलेरी बबनोव द्वारा चढ़ाई की गई थी। 2006 में अन्य टीमों द्वारा दो   बार.\u0026nbsp; चढ़ाई की गयी।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमेरु पर्वत की ऊंचाई\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  इसकी ऊंचाई 84 हजार योजन हैं। तथा\u0026nbsp;16 हजार योजन में फैला हुआ\u0026nbsp;है। पर्वत   की तीन चोटियाँ हैं दक्षिणी चोटि, मध्य चोटि\u0026nbsp;और उत्तरी चोटि है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  माउंट किलिमंजारो से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम में 4500 मीटर की दूरी पर माउंट   मेरु एक सक्रिय\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eहै।\u0026nbsp;कुछ लोग कहते हैं कि मेरु वास्तव में अधिक   चुनौतीपूर्ण है, और निश्चित रूप से यह बहुत शांत है। इसलिए वहाँ बहुत अधिक   वन्यजीवों को देखा जा सकता है और सुदूरता और एकांत की भावना पास के अधिक प्रसिद्ध   शिखर की तुलना में बहुत अधिक मजबूत है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-oKGGmNpVbKw/YKG9QxulCgI/AAAAAAAAE38/-mMwR4CNpuQNMqjG3jxKKEU7fch8M5PoQCLcBGAsYHQ/s1280/20210517_061612.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"857\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"214\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-oKGGmNpVbKw/YKG9QxulCgI/AAAAAAAAE38/-mMwR4CNpuQNMqjG3jxKKEU7fch8M5PoQCLcBGAsYHQ/w320-h214/20210517_061612.webp\" title\u003d\"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  पहाड़ अरुशा नेशनल पार्क का केंद्रबिंदु है और इसकी उपजाऊ ढलान आसपास के सवाना से   ऊपर उठती है और एक ऐसे जंगल का समर्थन करती है जो विविध वन्य जीवों की मेजबानी   करता है। जिसमें पक्षियों की लगभग 400 प्रजातियां, और बंदर और तेंदुए भी शामिल   हैं। ट्रेकर्स के पास बहुत सारे वन्यजीवों को देखने का अवसर है क्योंकि वे पहाड़   पर चढ़ते और चढ़ते हैं। \u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-SziLNDVtld0/YKG-JirwOmI/AAAAAAAAE4E/DcXkDvnQ0_gBgS78UxhO7h9tF3v-h0zpwCLcBGAsYHQ/s600/lanskape_meru.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-SziLNDVtld0/YKG-JirwOmI/AAAAAAAAE4E/DcXkDvnQ0_gBgS78UxhO7h9tF3v-h0zpwCLcBGAsYHQ/w320-h213/lanskape_meru.webp\" title\u003d\"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3314388469671966248"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3314388469671966248"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/meru-parvat-in-hindi.html","title":"मेरु पर्वत कहां है - meru parvat in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-oKGGmNpVbKw/YKG9QxulCgI/AAAAAAAAE38/-mMwR4CNpuQNMqjG3jxKKEU7fch8M5PoQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h214/20210517_061612.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-2001155479730610558"},"published":{"$t":"2020-09-25T08:42:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:50:44.632+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"सरदार सरोवर बांध कहाँ है - sardar sarovar dam in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eस्थान\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eकेवडिया, नर्मदा\u0026nbsp;नदी, गुजरात\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eनिर्माण शुरू किया गया\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003eअप्रैल 1987\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकमीशन\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e2006-2007\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eबिजली उत्पादन क्षमत\u003c/td\u003e      \u003ctd\u003e1,450MW Expand\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e सरदार सरोवर बांध\u003c/b\u003e  नर्मदा नदी  पर   गुजरात राज्य में केवडिया गाँव में स्थित है। यह देश के सबसे बड़े और सबसे विवादास्पद   बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में से एक है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह नर्मदा घाटी विकास परियोजना का हिस्सा है। जो बिजली पैदा करने और पानी की   आपूर्ति करने की एक प्रमुख योजना है। गुजरात,\u0026nbsp;मध्य प्रदेश और   महाराष्ट्र\u0026nbsp;राज्यों को पीने और सिंचाई। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसरदार सरोवर बांध की ऊंचाई\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  सरदार सरोवर बांध 1,210 मीटर लंबा कंक्रीट का बांध है। जिसकी उचाई\u0026nbsp;163 मीटर   की प्रस्तावित है। इसकी वर्तमान ऊँचाई 121.9 मी हैं। इसके निर्माण में लगभग सात   मिलियन घन कंक्रीट की आवश्यकता पड़ी थी। सरदार सरोवर जलाशय में सकल भंडारण क्षमता   का 0.95 मिलियन हेक्टेयर मीटर है। \u003c/p\u003e \u003cp\u003e  यह 21,000 किमी की औसत लंबाई और 1.7 किमी की चौड़ाई के साथ 37,000 किमी\u0026nbsp;के   क्षेत्र में फैला है। इसमें 87,000 क्यूबिक मीटर सेकेंड की क्षमता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनर्मदा नदी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा नदी\u0026nbsp;, प्रायद्वीप की सबसे बड़ी पश्चिम में बहने वाली नदी हैं। मध्य प्रदेश में   अमरकंटक पर्वत श्रृंखला के पास से निकलती है। यह देश की पांचवीं सबसे बड़ी और   गुजरात की सबसे बड़ी नदी है। यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात को पार करते   हुए\u0026nbsp;खंभात की खाड़ी\u0026nbsp;अरब सागर\u0026nbsp;से मिलती है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नर्मदा को शांति की देवी माना जाता है। नर्मदा बेसिन भारत के सर्वश्रेष्ठ सागौन   लकड़ी के जंगलों का घर है। नर्मदा नदी पर बड़ी सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गई हैं,   जो पूरे मध्य भारत में सैकड़ों किसानों को पानी की आपूर्ति करती हैं। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसरदार सरोवर बांध से लाभान्वित राज्य\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  सरदार सरोवर बांध को 15 जिलों में 1.84 मिलियन हेक्टेयर भूमि और गुजरात में सूखा   प्रभावित क्षेत्रों और 73 उपनगरों के साथ-साथ राजस्थान के दो जिलों में सिंचाई के   लिए पानी की आपूर्ति की जायेगी है। राज्य के 131 शहरों और 9,633 गांवों में 29   मिलियन निवासियों को पीने योग्य पानी की आपूर्ति की उम्मीद है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह वन्यजीव अभयारण्यों और उद्योगों को पानी की आपूर्ति करेगा, साथ ही 2021 तक   अनुमानित गुजरात की अनुमानित 40 मिलियन की जरूरतों को पूरा करेगा। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसरदार सरोवर बांध का उद्घाटन\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  इस योजना की परिकल्पना 1946-1947 में स्वर्गीय सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी। यह   नदी के किनारे 30 प्रमुख बांधों, 135 मध्यम और 3,000 छोटे बांधों के निर्माण की   परिकल्पना है।\u0026nbsp; जिसमें सरदार सरोवर बांध उन सभी में सबसे बड़ा   परियोजना\u0026nbsp;है। इस डैम से\u0026nbsp;कुल 4,000 MW बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 67 वें जन्मदिन के अवसर पर नर्मदा नदी पर   सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया है। अब जो परियोजना दशकों से बहुत विवाद का   विषय रही है। वह दुनिया के सबसे बड़े बांधों में से एक है। केंद्रीय मंत्री नितिन   गडकरी ने परियोजना के लाभ पर दावा किया कि चार करोड़ गुजरातियों को पीने का पानी   मिलेगा और 22,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। कहा कि बांध से 2022 तक गरीब   किसानों को अमीर बनाने के पीएम मोदी के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इस परियोना में बहुत\u0026nbsp;अध्ययन किए जाने के बाद, NWDT ने 1979 में अपना फैसला   दिया। तदनुसार, बांध से खपत के लिए उपलब्ध 35 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी, मध्य   प्रदेश को 65 प्रतिशत, गुजरात को 32 प्रतिशत मिलेगा। और राजस्थान और महाराष्ट्र   शेष 3 प्रतिशत के लिए पात्र होंगे। योजना आयोग ने आखिरकार 1988 में इस परियोजना   को मंजूरी दे दी। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपरियोजना के लाभ\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसिंचाई\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सरदार सरोवर परियोजना से 18.45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।   गुजरात के 15 जिलों में 73 तालुकों के 3112 गांवों को कवर करते हुए भूमि का। इससे   2,46,000 हेक्टेयर की सिंचाई भी होगी।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  राजस्थान के बाड़मेर और जालोर के रणनीतिक रेगिस्तानी जिलों में भूमि की और 37,500   हेक्टेयर। लिफ्ट के माध्यम से महाराष्ट्र के आदिवासी पहाड़ी इलाके में। गुजरात   में लगभग 75% कमांड क्षेत्र सूखा प्रवण है जबकि राजस्थान में पूरी कमान सूखा   प्रवण है। सुनिश्चित जलापूर्ति शीघ्र ही इस क्षेत्र को सूखा मुक्त बनाएगी। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपीने के पानी की सप्लाई\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  वर्ष 2021 तक गुजरात में 28 मिलियन की वर्तमान आबादी और 40 मिलियन से अधिक की   संभावित आबादी के लिए 173 शहरी केंद्रों और 9490 गांवों को पीने का पानी उपलब्ध   कराने के लिए 0.86 एमएएफ पानी का विशेष आवंटन किया गया है। सौराष्ट्र और कच्छ के   शुष्क क्षेत्र के गांवों और शहरी केंद्रों और उत्तरी गुजरात में लवणता और   फ्लोराइड से प्रभावित सभी \"कोई स्रोत नहीं\" गांव और गांव लाभान्वित होंगे। चौतरफा   उत्पादन को बढ़ावा देने वाली परियोजना से कई उद्योगों की जलापूर्ति की आवश्यकता   भी पूरी होगी. \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-q4DoF8FtLOY/X21gnZOG-RI/AAAAAAAAD8o/kQVHQPrq1RU6LaFG8EzwxV2TOmcw4jsQgCPcBGAYYCw/s1280/20200925_084340.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"सरदार सरोवर बांध कहाँ है - sardar sarovar dam in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"959\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"240\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-q4DoF8FtLOY/X21gnZOG-RI/AAAAAAAAD8o/kQVHQPrq1RU6LaFG8EzwxV2TOmcw4jsQgCPcBGAYYCw/w320-h240/20200925_084340.webp\" title\u003d\"सरदार सरोवर बांध कहाँ है - sardar sarovar dam in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबिजली\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  दो बिजली घर हैं। रिवर बेड पावर हाउस और कैनाल हेड पावर हाउस क्रमशः 1200 मेगावाट   और 250 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ। बिजली तीन राज्यों द्वारा साझा की   जाएगी - मध्य प्रदेश - 57%, महाराष्ट्र - 27% और गुजरात 16%। यह देश के पश्चिमी   ग्रिड को एक उपयोगी पीकिंग पावर प्रदान करेगा, जिसके पास वर्तमान में बहुत सीमित   जल विद्युत उत्पादन है। जहां सुविधाजनक फॉल्स उपलब्ध हैं, शाखा नहरों पर सूक्ष्म   जल विद्युत स्टेशनों की एक श्रृंखला की भी योजना बनाई गई है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबाढ़ सुरक्षा\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यह 30000 हेक्टेयर को मापने वाली नदी तक पहुँचने के लिए बाढ़ सुरक्षा भी प्रदान   करेगा। गुजरात में 210 गांवों और भरूच शहर और 4.0 लाख की आबादी को कवर करते हुए। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरदार सरोवर बांध कहाँ है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकेवड़िया\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सरदार सरोवर बांध (SSD), नर्मदा नदी पर, गुजरात राज्य के केवड़िया गाँव में स्थित   है। यह देश में सबसे बड़ी और सबसे विवादास्पद अंतरराज्यीय, बहुउद्देशीय नदी घाटी   परियोजनाओं में से एक है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरदार सरोवर बांध कब बना\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसके निर्माण को पूरा करने में 56 साल लगे। चार भारतीय राज्य गुजरात, मध्य   प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान बांध से आपूर्ति की जाने वाली पानी और बिजली   प्राप्त करते हैं। 17 सितंबर, 2017 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर   बांध का उद्घाटन किया। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरदार सरोवर बांध का निर्माण किसने करवाया था\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सरदार सरोवर परियोजना भारत के पहले उप प्रधान मंत्री सरदार वल्लभाई पटेल की एक   दृष्टि थी। 5 अप्रैल, 1961 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस परियोजना की आधारशिला   रखी थी। \u003c/p\u003e \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2001155479730610558"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2001155479730610558"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/sardar-sarovar-dam-in-hindi.html","title":"सरदार सरोवर बांध कहाँ है - sardar sarovar dam in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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sabarmati river in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003e  साबरमती नदी\u003c/b\u003e भारत की पश्चिम में बहने वाली नदियों में से एक है। यह   राजस्थान के उदयपुर   जिले के   अरावली पर्वत  से निकलती\u0026nbsp;है। और राजस्थान व\u0026nbsp;गुजरात के दक्षिण-पश्चिम दिशा में 371 किमी की यात्रा के बाद अरब सागर के खंभात   की खाड़ी में मिल जाती\u0026nbsp;है। राजस्थान में नदी की लंबाई 48 किमी है। जबकि गुजरात में 323 किमी की दुरी तय करती\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसाबरमती घाटी -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसाबरमती बेसिन का जलग्रहण क्षेत्र 21,674 किमी है। जिसमें से   4,124 किमी राजस्थान राज्य में और शेष 18,550 किमी गुजरात में है। बेसिन   अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित है। इन\u0026nbsp;हिस्सों में 450 से   800 मिमी तक की वर्षा होती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसाबरमती नदी की सहायक नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eसाबरमती की प्रमुख सहायक नदियों में वाटक, वकाल, हाथमती, हरनाव और सेई हैं। साबरमती बेसिन   में औसत वार्षिक जल उपलब्धता 308 मी\u0026nbsp;प्रति व्यक्ति है। जो राष्ट्रीय औसत 1,545 मी\u0026nbsp;प्रति व्यक्ति की तुलना में काफी कम है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  साबरमती एक मौसमी नदी है। जिसका प्रवाह मानसून के मौसम\u0026nbsp;ज्यादा\u0026nbsp;रहता है। जिसमें   मानसून के बाद कम या कोई प्रवाह नहीं होता है। 1968-1979 की अवधि के दौरान   अहमदाबाद में प्रति सेकंड 33 मी का औसत प्रवाह मापा गया था। अगस्त 1973 में आये\u0026nbsp;बाढ़ ने इस क्षेत्र को काफी प्रभावित किया था। यह उस समय का सबसे प्रभावी बाढ़ था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  नदी के उद्गम से जुड़े धार्मिक\u0026nbsp;कहानी में\u0026nbsp;शिव जी के द्वारा\u0026nbsp;देवी गंगा को धरती पर अवतरण से\u0026nbsp;साबरमती नदी का जन्म हुआ है ऐसी मान्यता है। भारत के   स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम को इस नदी के   किनारे स्थापित किया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के   अनुसार\u0026nbsp;साबरमती नदी भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। नदियों का\u0026nbsp;प्रदुषण\u0026nbsp;भारत की प्रमुख समस्या रही\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसेइस नदी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह साबरमती नदी की एक दाहिने किनारे की सहायक नदी है। यह राजस्थान में अरावली पहाड़ियों में निकलती है और दक्षिण-पश्चिम दिशा में कुल 95 किमी की दूरी तय करते हुए इसके दाहिने किनारे पर मिलती है। यह नदी 946 वर्ग किमी के क्षेत्र में बहती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eवकाली नदी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह साबरमती नदी के बाएं किनारे की सहायक नदी है। यह राजस्थान में अरावली पहाड़ियों में निकलती है और दक्षिण-पश्चिम दिशा में कुल 88 किमी की दुरी तय करती है। यह अपने बाएं किनारे पर साबरमती में मिलती है। यह नदी 1625 वर्ग किमी के क्षेत्र में जल निकासी करती है। मेनस इसकी प्रमुख सहायक नदी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eहरनवी नदी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह साबरमती नदी की एक बायीं ओर की सहायक नदी है यह राजस्थान पर्वतमाला के कुलिया पहाड़ियों के उत्तरी भाग से निकलती है और दक्षिण-पश्चिम दिशा में कुल 75 किमी की दूरी तक बहती है। और हरनव साबरमती के बाएं किनारे से जुड़ती है। यह 972 वर्ग किमी के क्षेत्र में बहती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eहाथमती नदी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह साबरमती नदी के बाएं किनारे की सहायक नदी है यह गुजरात राज्य में राजस्थान रेंज के दक्षिण-पश्चिम पहाड़ियों से निकलती है और दक्षिण पश्चिम दिशा में 122 किमी की दूरी तय करते हुए साबरमती से मिलने के लिए बहती है। यह नदी 1526 वर्ग किमी के क्षेत्र में बहती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eवाटराकी नदी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह साबरमती नदी की एक बायीं ओर की सहायक नदी है यह राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पंचारा पहाड़ियों से निकलती है और 248 किमी की दूरी तय करते हुए साबरमती में मिलती है। वात्रक और इसकी सहायक नदियां 8638 वर्ग किमी के क्षेत्र में बहती हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसाबरमती नदी में बांध\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eसाबरमती और उसकी सहायक नदियों पर कई जलाशय हैं। जिसमे\u0026nbsp;धारोई बांध   मुख्य नदी पर स्थित है। हाथमती बाँध, हरनव बाँध और गुहाई बाँध मुख्य   नदी के ऊपर की ओर सहायक नदियों पर बनाया गया\u0026nbsp;हैं। जबकि मेशवो जलाशय, मेश्वो   पिक-अप वियर, माज़म बाँध और वटराक बाँध अन्य प्रमुख बांध\u0026nbsp;हैं। कल्पसर\u0026nbsp;खंभात की खाड़ी\u0026nbsp;में स्थित\u0026nbsp;परियोजना का परिणाम\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसाबरमती नदी कहाँ से निकलती है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eसाबरमती नदी का उद्गम राजस्थान के अरावली पर्वतमाला के दक्षिण-पूर्व में स्थित ढेबर\u0026nbsp;झील\u0026nbsp;है। ये नदी दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हुयी गुजरात राज्य में प्रवेश करती है और मैदानी इलाकों से गुजरती हुयी खंभात की खाड़ी, अरब सागर में मिल जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअपने स्रोत से लगभग 170 किमी दूर हाथमती नदी से\u0026nbsp;मिलती है जो इसकी प्रमुख सहायक नदी है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए नदी अहमदाबाद से होकर गुजरती है और लगभग 65 किमी की दुरी पर\u0026nbsp;अन्य सहायक नदी, वात्रक से मिलती है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकौन सा शहर साबरमती नदी के किनारे स्थित है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eउत्तर - अहमदाबाद\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसाबरमती नदी में कितने पुल हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eनेहरू ब्रिज\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eएलिस ब्रिज\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eसुभाष ब्रिज\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eक्या साबरमती नदी साफ है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  उत्तर - साबरमती को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के राष्ट्रीय   स्वास्थ्य गुणवत्ता कार्यक्रम के तहत देश की सबसे प्रदूषित नदियों में गिना जाता   है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसाबरमती नदी कहां है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  उत्तर - साबरमती नदी राजिस्थान से उतपन्न होकर गुजरात से होते हुए अरब सागर   में\u0026nbsp; मिल जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ZU2L3ZnE87Q/X2xBA-_vptI/AAAAAAAAD74/DvOiVeexz6c7bWVFdAxQOo_JL4skovYuwCPcBGAYYCw/s1024/20200924_121608.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"साबरमती नदी कहां पर है, साबरमती नदी कहां से निकली है, साबरमती नदी कहां से आती है, साबरमती नदी कहां गिरती है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1024\" data-original-width\u003d\"1023\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ZU2L3ZnE87Q/X2xBA-_vptI/AAAAAAAAD74/DvOiVeexz6c7bWVFdAxQOo_JL4skovYuwCPcBGAYYCw/w320-h320/20200924_121608.webp\" title\u003d\"साबरमती नदी कहां पर है, साबरमती नदी कहां से निकली है, साबरमती नदी कहां से आती है, साबरमती नदी कहां गिरती है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e \u003cscript type\u003d\"application/ld+json\"\u003e  {\"@context\":\"https://schema.org\",\"@type\":\"FAQPage\",\"mainEntity\":[{\"@type\":\"Question\",\"name\":\" साबरमती नदी कहाँ से उत्पन्न होती है?\",\"acceptedAnswer\":[{\"@type\":\"Answer\",\"text\":\"राजस्थान के अरावली पर्वतमाला के दक्षिण-पूर्व में स्थित  ढेबर झील से निकलती है। \"}]},{\"@type\":\"Question\",\"name\":\"कौन सा शहर साबरमती नदी के किनारे स्थित है?\",\"acceptedAnswer\":[{\"@type\":\"Answer\",\"text\":\"अहमदाबाद \"}]},{\"@type\":\"Question\",\"name\":\"साबरमती नदी में कितने पुल हैं?\",\"acceptedAnswer\":[{\"@type\":\"Answer\",\"text\":\"नेहरू ब्रिज, एलिस ब्रिज, सुभाष ब्रिज\"}]}]} \u003c/script\u003e "},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1252447593457926000"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1252447593457926000"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/sabarmati-river-in-hindi.html","title":"साबरमती नदी का उद्गम स्थल - sabarmati river in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-ZU2L3ZnE87Q/X2xBA-_vptI/AAAAAAAAD74/DvOiVeexz6c7bWVFdAxQOo_JL4skovYuwCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h320/20200924_121608.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3745182150975398519"},"published":{"$t":"2020-09-24T07:42:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-08-04T06:44:10.425+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"गुजरात का भूगोल - geography of gujarat in hindi"},"content":{"type":"html","$t":" \u003cp\u003e  गुजरात के\u0026nbsp;उत्तर-पश्चिम में   पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर, उत्तर-पूर्व में   राजस्थान राज्य,   पूर्व में मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र स्थित है। अरब सागर राज्य के पश्चिमी तट पर   है। जहा पर\u0026nbsp;सबसे लंबी समुद्री तटरेखा 1,600 किलोमीटर है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  साबरमती गुजरात की सबसे बड़ी नदी है जिसके बाद ताप्ती\u0026nbsp;है, हालांकि नर्मदा राज्य के माध्यम   से सबसे लंबी दूरी तय करती है। सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर बनी है, जो   प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जिसकी लंबाई लगभग 1,312   किलोमीटर (815 मील) है। यह भारत में केवल तीन नदियों में से एक है   जो पूर्व से पश्चिम की ओर\u0026nbsp;बहती हैं। अन्य नदिया\u0026nbsp;तापी नदी और माही नदी हैं।   साबरमती नदी पर एक रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट बनाया गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  गुजरात में भारत की कुछ प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं हैं, जिनमें अरावली, सह्याद्री   (पश्चिमी घाट), विंध्य और सापुतारा शामिल हैं। इसके अलावा गिर पहाड़, बरदा,   जेसोर, चोटिला, आदि गुजरात के विभिन्न भागों में स्थित हैं। गिरनार सबसे ऊंची   चोटी है और सापुतारा राज्य का एकमात्र हिल-स्टेशन है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकच्छ का रण\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  कच्छ का रण गुजरात में कच्छ जिले के उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ नमकीन दलदलीय   क्षेत्र\u0026nbsp;है। यह लगभग 23,300 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह समुद्र का   हिस्सा है जो\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के कारण अलग हो गया है। इसे नामक का\u0026nbsp;रेगिस्तान\u0026nbsp;   जाता है। सिकन्दर महान्\u200c के समय कल में\u0026nbsp;यह एक\u0026nbsp;झील के रूप में\u0026nbsp;था।   उत्तरी रन\u0026nbsp;लगभग 257 किमी में फैली है\u0026nbsp;जबकि पूर्वी रन इससे छोटा   है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 5,178 वर्ग किमी का\u0026nbsp;है। सन्\u200c 1819 में\u0026nbsp;भूकंप के   कारण\u0026nbsp;उत्तरी रन का कुछ भाग ऊपर की ओर उभर गया है इसके कारण मध्य भाग सूखा होता है\u0026nbsp;तथा किनारो में\u0026nbsp;पानी, कीचड़ तथा दलदल भरे होते\u0026nbsp;हैं। ग्रीष्म काल में   दलदल सूखने पर लवण के श्वेत कण सूर्य के प्रकाश में चमकने लगते हैं। जो की एक अद्भुत नजारा होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगुजरात की जलवायु\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  गुजरात की जलवायु में विविध परिस्थितियाँ शामिल हैं। यहाँ के मैदान गर्मियों में   बहुत गर्म और शुष्क होते है जबकि\u0026nbsp;सर्दियों में ठंडे होते हैं। यह ग्रीष्मकालीन पर्वतीय   क्षेत्रों में एक\u0026nbsp;है। सर्दियों के दौरान औसत दिन का तापमान लगभग 29 ° C और   रात में लगभग 12 ° C होता है। ग्रीष्मकाल के दौरान दिन का तापमान लगभग 49 ° C और   रात में 30 ° C होता है।\u0026nbsp;मानसून\u0026nbsp;का मौसम जून से सितंबर तक रहता है।   अधिकांश गुजरात में कम वर्षा होती है। \u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-1n13Io9oZJQ/X2wEghoSuVI/AAAAAAAAD7w/1cvqBfai2gUbuAed7p4B-7At7WnRmVvWwCPcBGAYYCw/s1024/20200924_075718.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"geography of gujarat in hindi  rann of kutch rann of kutch lake rann of kutch map rann of kutch festival rann of kutch gujarat rann of kutch war rann of kutch in gujarat india rann of kutch india rann of kutch salt desert rann of kutch border\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1024\" data-original-width\u003d\"1024\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-1n13Io9oZJQ/X2wEghoSuVI/AAAAAAAAD7w/1cvqBfai2gUbuAed7p4B-7At7WnRmVvWwCPcBGAYYCw/w320-h320/20200924_075718.webp\" title\u003d\"geography of gujarat in hindi  rann of kutch rann of kutch lake rann of kutch map rann of kutch festival rann of kutch gujarat rann of kutch war rann of kutch in gujarat india rann of kutch india rann of kutch salt desert rann of kutch border\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e \u003cp\u003e  दक्षिणी गुजरात और पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता वाले मानसून के दौरान भारी   वर्षा होती है जिससे हवा गर्म महसूस होती है। मानसून का मौसम शुरू होने पर राहत   मिलती है। दिन का तापमान लगभग 35 ° C तक कम हो जाता है। इस मौसम में अधिकांश   वर्षा होती है जिसके कारण\u0026nbsp;बाढ़ अति\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eबीच\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eउम्भरात बीच \u003c/b\u003e- जलालपुर उभारत बीच गुजरात राज्य के तट पर स्थित है और   गुजरात के नवसारी जिले में भारत के सबसे बेहतरीन समुद्र तटों में से एक है। यह   जलालपुर तालुका में आता है। यह\u0026nbsp;खंभात की खाड़ी\u0026nbsp;के तट पर स्थित है, जलालपुर से 34   किमी की दूरी पर हिंद महासागर है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9Em34LNVJrY/X2wEeSkQu_I/AAAAAAAAD7s/T95aDMZs6PsgEk7bg1cTHpxDl7jRtK5YACPcBGAYYCw/s1024/20200924_075314-%2B1.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"rann of kutch rann of kutch lake rann of kutch map rann of kutch festival rann of kutch gujarat rann of kutch war rann of kutch in gujarat india rann of kutch india rann of kutch salt desert rann of kutch border\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1024\" data-original-width\u003d\"1024\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9Em34LNVJrY/X2wEeSkQu_I/AAAAAAAAD7s/T95aDMZs6PsgEk7bg1cTHpxDl7jRtK5YACPcBGAYYCw/w320-h320/20200924_075314-%2B1.webp\" title\u003d\"rann of kutch rann of kutch lake rann of kutch map rann of kutch festival rann of kutch gujarat rann of kutch war rann of kutch in gujarat india rann of kutch india rann of kutch salt desert rann of kutch border\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eअहमदपुर मांडवी बीच \u003c/b\u003e- अहमदपुर मांडवी बीच गुजरात राज्य के समुद्र तट पर   स्थित है और भारत के सबसे बेहतरीन समुद्र तटों में से एक है। यह केंद्र शासित  प्रदेश दीव के करीब\u0026nbsp;है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अन्य बीच -\u0026nbsp;मांडवी बीच, दांडी बीच, चोरवाड बीच, दीव बीच, गोपनाथ बीच,   ऊम्बरगाँव बीच, माधवपुर बीच, तितल बीच (वलसाड)।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eगुजरात के राष्ट्रीय उद्यान\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eगिर वन राष्ट्रीय उद्यान\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eब्लैकबक नेशनल पार्क, वेलवदर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eमरीन नेशनल पार्क, कच्छ की खाड़ी\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eवंसदा नेशनल पार्क\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eपर्वत श्रृंखलाएं\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eविंध्य\u0026nbsp;पर्वत\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eपश्चिमी घाट\u0026nbsp;पर्वत\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eसतपुड़ा पर्वतमाला\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eअरावली श्रेणी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eसापुतारा पर्वतमाला\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e\u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eनदी\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eनर्मदा नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eताप्ती नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eमाही नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eसाबरमती नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eपश्चिम बनास नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eशेत्रुंजी नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eभादर नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eअजी नदी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eविश्वामित्री नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eदमनगंगा नदी\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3745182150975398519"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3745182150975398519"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/09/geography-of-gujarat-in-hindi.html","title":"गुजरात का भूगोल - geography of gujarat in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-1n13Io9oZJQ/X2wEghoSuVI/AAAAAAAAD7w/1cvqBfai2gUbuAed7p4B-7At7WnRmVvWwCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h320/20200924_075718.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5576970655688255189"},"published":{"$t":"2020-08-03T07:49:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:53:42.274+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"हिंद महासागर कहां स्थित है  - Indian Ocean in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  प्रशांत और   अटलांटिक  महासागरों के बाद \u003cb\u003eहिंद महासागर\u003c/b\u003e दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। यह   अफ्रीका,   एशिया\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया और   दक्षिणी महासागर  के बीच स्थित है। हिंद महासागर में \u003cb\u003e68.556 मिलियन वर्ग किलोमीटर\u003c/b\u003e क्षेत्र   फैला हुआ\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eयह काफी बड़ा है - संयुक्त राज्य अमेरिका से\u0026nbsp;लगभग साढ़े 5   गुना बड़ा है। हिंद महासागर में\u0026nbsp;अरब सागर, लैकसिडिव सी, सोमाली सागर, बंगाल की खाड़ी, और अंडमान सागर आदि समाहित हैं। हिंद महासागर को वर्तमान नाम से 1515 से जाना जाता है।\u0026nbsp; इसे पहले पूर्वी महासागर के रूप में जाना जाता था।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp\u003e    हिंद महासागर का नाम     भारत देश     के नाम पर रखा गया है, जो कि महासागर की अधिकांश उत्तरी सीमा पर स्थित है। यह     महासागर व्यापार के     लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। तेल, मछली,     लोहा, कोयला, रबर, और चाय से लेकर हर दिन पानी के माध्यम से यात्रा करने वाले     जहाज। ये सामान आमतौर पर     जापान, अफ्रीका     या फारस की खाड़ी के रास्ते पर हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    हिंद महासागर में लाल सागर और फारस की खाड़ी शामिल है यह\u0026nbsp;दुनिया के     कुल\u0026nbsp;महासागर का 19.5% भाग है। इसकी औसत गहराई 3,741 मीटर और अधिकतम गहराई     7,906 मीटर है।   \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eव्यापार क्षेत्र\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eहिंद महासागर मध्य पूर्व, अफ्रीका और पूर्वी एशिया को यूरोप और अमेरिका से जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग प्रदान करता है। यह फारस की खाड़ी और इंडोनेशिया के तेल क्षेत्रों से पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों का विशेष रूप से भारी यातायात करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eघरेलू खपत और निर्यात के लिए इसकी मछलियाँ सीमावर्ती देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण और बढ़ती महत्व की हैं। रूस, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान से मछली पकड़ने के बेड़े भी मुख्य रूप से झींगा और टूना के लिए हिंद महासागर का दोहन करते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसऊदी अरब, ईरान, भारत और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के अपतटीय क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन के बड़े भंडार का दोहन किया जा रहा है। दुनिया के अपतटीय तेल उत्पादन का अनुमानित 40% हिंद महासागर से आता है। भारी खनिजों और अपतटीय प्लेसर जमा में समृद्ध समुद्र तट की रेत का सीमावर्ती देशों, विशेष रूप से भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, श्रीलंका और थाईलैंड द्वारा सक्रिय रूप से शोषण किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रमुख बंदरगाह:\u003c/b\u003e चेन्नई, भारत; कोलम्बो, श्रीलंका; डरबन दक्षिण अफ्रीका; जकार्ता, इंडोनेशिया; कोलकाता, भारत; मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया; मुंबई, भारत; रिचर्ड्स बे, दक्षिण अफ्रीका।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e  \u003ctable\u003e    \u003ctbody\u003e      \u003ctr\u003e        \u003cth\u003eहिन्द महासागर में स्थित प्रमुख द्वीपों के नाम\u0026nbsp;\u003c/th\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eसेशेल्स\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eरीयूनियन - फ्रांस\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eमेडागास्कर\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eकॉमर्स - स्पेन\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eमालदीव - पुर्तगाल\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003e          श्रीलंका        \u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e    \u003c/tbody\u003e  \u003c/table\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cbr /\u003eहिंद महासागर का क्षेत्रफल कितना है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    हिंद महासागर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है और प्रशांत और अटलांटिक     महासागरों के बाद     पृथ्वी की     सतह का 20% भाग शामिल है। आकार में हिंद महासागर\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के आकार के 5.5 गुना के बराबर है। महासागर की सबसे बड़ी चौड़ाई पश्चिमी     ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के पूर्वी तट के बीच है: 1,000 किमी या 620 मीटर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहिंद महासागर संयुक्त राज्य अमेरिका के आकार का लगभग छह गुना है और अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट तक 9,978 किलोमीटर तक फैला है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहिंद महासागर में सबसे गहरा बिंदु जावा ट्रेंच है। जावा ट्रेंच को सुंडा ट्रेंच भी कहा जाता है। जो लगभग 7,258 मीटर गहरा है। औसत गहराई लगभग 3,890 मीटर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहिंद महासागर में तेल टैंकर फारस की खाड़ी से दुनिया भर के शिपिंग बंदरगाहों के रास्ते में एक दिन में 17 मिलियन बैरल कच्चा तेल ले जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजलवायु\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eहिंद महासागर पृथ्वी पर सबसे गर्म महासागरीय बेसिन है। पानी की गर्मी फाइटोप्लांकटन के विकास को रोकती है और समुद्री जानवरों की मात्रा को गंभीर रूप से सीमित करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसर्दियों के दौरान, हंपबैक व्हेल ध्रुवों के पास ठंडे पानी से भूमध्य रेखा की ओर यात्रा करती है जहा\u0026nbsp;करीब गर्म पानी होता है। यह अनुमान लगाया गया है कि हर साल, 7,000 हंपबैक व्हेल प्रजनन के लिए मेडागास्कर के आसपास के पानी में प्रवास करती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहाँ पूर्वोत्तर मानसून दिसंबर से अप्रैलतक रहता है, दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से अक्टूबर, उष्णकटिबंधीय चक्रवात उत्तरी हिंद महासागर में मई और जून तथा अक्टूबर/नवंबर के दौरान आते है जबकि दक्षिणी हिंद महासागर में जनवरी/फरवरी के दौरान होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रदूषण समस्या\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसमुद्र में डंपिंग, अपशिष्ट निपटान और तेल रिसाव के कारण होने वाला समुद्री प्रदूषण; गहरे समुद्र में खनन; अरब सागर, फारस की खाड़ी और लाल सागर में तेल प्रदूषण; प्रवाल भित्तियों को जलवायु परिवर्तन, प्रत्यक्ष मानव दबाव, और अपर्याप्त शासन, जागरूकता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण खतरा बढ़ा है. जैव विविधता के नुकसान; लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों में डुगोंग, सील, कछुए और व्हेल शामिल हैं.\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमहासागर क्षेत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eपानी से बना और तरल अवस्था में, महासागरों को ठोस महाद्वीपों की तुलना में अलग तरह से सीमांकित किया जाता है। गहराई और प्रकाश के स्तर के आधार पर महासागरों को तीन क्षेत्रों में बांटा गया है। हालांकि कुछ समुद्री जीव जीने के लिए प्रकाश पर निर्भर करते हैं, अन्य इसके बिना कर सकते हैं। पानी में प्रवेश करने वाला सूर्य का प्रकाश सही परिस्थितियों में समुद्र में लगभग 1,000 मीटर की यात्रा कर सकता है, लेकिन 200 मीटर से परे कोई प्रकाश शायद ही कभी होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहासागरों के ऊपरी 200 मीटर को यूफोटिक, या \"सूर्य का प्रकाश,\" क्षेत्र कहा जाता है। इस क्षेत्र में अधिकांश व्यावसायिक मत्स्य पालन शामिल हैं और यह कई संरक्षित समुद्री स्तनधारियों और समुद्री कछुओं का घर है। इस गहराई से परे केवल थोड़ी मात्रा में प्रकाश प्रवेश करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e200 मीटर (656 फीट) और 1,000 मीटर (3,280 फीट) के बीच के क्षेत्र को आमतौर पर \"ट्वाइलाइट\" ज़ोन कहा जाता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह डिस्फ़ोटिक ज़ोन है। इस क्षेत्र में, गहराई कम होने पर प्रकाश की तीव्रता तेजी से विलुप्त हो जाती है। प्रकाश की इतनी कम मात्रा 200 मीटर की गहराई से आगे प्रवेश करती है कि प्रकाश संश्लेषण अब संभव नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BRKn24zxYrM/YNLzfuE_GeI/AAAAAAAAE_o/VDqw8c3JW5w9whjtqYSyMDNvrnX2oD4swCLcBGAsYHQ/s1079/IMG_20210623_140526_1.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"हिंद महासागर कहां स्थित है  - Indian Ocean in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"941\" data-original-width\u003d\"1079\" height\u003d\"279\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BRKn24zxYrM/YNLzfuE_GeI/AAAAAAAAE_o/VDqw8c3JW5w9whjtqYSyMDNvrnX2oD4swCLcBGAsYHQ/w320-h279/IMG_20210623_140526_1.webp\" title\u003d\"हिंद महासागर कहां स्थित है  - Indian Ocean in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eएफ़ोटिक, या \"मध्यरात्रि,\" क्षेत्र 1,000 मीटर (3,280 फीट) से नीचे की गहराई में मौजूद है। सूरज की रोशनी इन गहराइयों तक नहीं पहुंच पाती है और क्षेत्र अंधेरे में नहाया हुआ है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5576970655688255189"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5576970655688255189"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/08/indian-ocean-in-hindi.html","title":"हिंद महासागर कहां स्थित है  - Indian Ocean in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-BRKn24zxYrM/YNLzfuE_GeI/AAAAAAAAE_o/VDqw8c3JW5w9whjtqYSyMDNvrnX2oD4swCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h279/IMG_20210623_140526_1.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-1854284241022991861"},"published":{"$t":"2020-08-03T07:43:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:53:51.207+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"उत्तरी अमेरिका महाद्वीप - North america in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003e\u003cb\u003eउत्तरी अमेरिका\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/northern-hemisphere-in-hindi.html\"\u003eउत्तरी गोलार्ध\u003c/a\u003e\n    में स्थित एक महाद्वीप\u0026nbsp;है। यह आर्कटिक महासागर के उत्तर में, अटलांटिक\n    महासागर से पूर्व और\u0026nbsp;प्रशांत महासागर के पश्चिम और दक्षिण में बसा है।\n    उत्तरी अमेरिका लगभग 24,709,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला\u0026nbsp;है।\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\n  \u003ctable\u003e\n    \u003ctbody\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003eजनसंख्या\u003c/td\u003e\n        \u003ctd\u003e528,720,588 (2010)\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003eक्षेत्र\u003c/td\u003e\n        \u003ctd\u003e9,540,198 वर्ग मील\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n      \u003ctr\u003e\n        \u003ctd\u003eरैंकिंग\u003c/td\u003e\n        \u003ctd\u003eतीसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है\u003c/td\u003e\n      \u003c/tr\u003e\n    \u003c/tbody\u003e\n  \u003c/table\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जो पृथ्वी के\u0026nbsp;कुल\u0026nbsp;भूमि क्षेत्र का लगभग 16.5 प्रतिशत\u0026nbsp;है। एशिया\n    और अफ्रीका के बाद उत्तरी अमेरिका तीसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है।\n    जबकि\u0026nbsp;जनसंख्या\u0026nbsp;के आधार पर\u0026nbsp;एशिया, अफ्रीका और यूरोप के\n    बाद\u0026nbsp;चौथा बड़ा महाद्वीप है। 2013 में इस महाद्वीप की\u0026nbsp;आबादी लगभग 579\n    लाख था।\u003c/p\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  यूरोप\u0026nbsp;के उपनिवेश के कारण अधिकांश उत्तरी अमेरिकी अंग्रेजी, स्पेनिश या\n  फ्रेंच जैसी यूरोपीय भाषाएं बोलते हैं। और उनके राज्यों की संस्कृतियां आमतौर पर\n  पश्चिमी परंपराओं को दर्शाती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तरी अमेरिका के सबसे बड़े देशों में कनाडा, मैक्सिको और\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;का प्रभुत्व है। मध्य अमेरिका और कैरेबियन देशों को भी उत्तरी अमेरिका का हिस्सा\n  माना जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउत्तरी अमेरिका के देशों के नाम\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\u003ci\u003eनोट - क्षेत्रफल\u0026nbsp;वर्ग किमी के अनुशार है।\u0026nbsp;\u003c/i\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eदेश\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eक्षेत्रफल\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eराजधानी\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकनाडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e9,984,670\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eओटावा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e9,629,091\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवॉशिंगटन डी.सी.\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eमैक्सिको\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e1,964,375\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमेक्सिको सिटी\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eनिकारागुआ\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e130,373\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमनागुआ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eहोंडुरास\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e112,492\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eटेगुसिगाल्पा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eक्यूबा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e109,886\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eहवाना\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eगवाटेमाला\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e108,889\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eग्वाटेमाला शहर\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eपनामा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e75,417\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपनामा सिटी\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eकोस्टा रिका\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e51,100\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसान जोस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eडोमिनिकन गणराज्य\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e48,671\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंटो डोमिंगो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eहैती\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e27,750\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपोर्ट-औ-प्रिंस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबेलीज\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e22,966\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबेलमोपैन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eअल साल्वाडोर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e21,041\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसन साल्वाडोर\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबहामास\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e13,943\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनासाउ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eजमैका\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e10,991\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिंग्स्टन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eत्रिनिदाद एंड टोबेगो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e5,130\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपोर्ट-ऑफ-स्पैन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eडोमिनिका\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e751\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eरोज़ू\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंट\u0026nbsp;लूसिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e539\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकैस्ट्रिस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eएंटीगुआ और बारबुडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e442\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंट जॉन्स\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eबारबाडोस\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e430\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eब्रिजटाउन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e389\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिंग्स्टाउन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eग्रेनेडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eG344\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंट जॉर्ज\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंट किट्स और नेविस\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e261\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबस्सेटीर\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eइतिहास\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यूरोपीय लोगों के आने से पहले उत्तरी अमेरिका में पहले वहाँ के\u0026nbsp;मूल\n  जनजातियों और एज़्टेक सभ्यता का राज हुआ करता था। 17 वी सदी\u0026nbsp;में यूरोप ने इस\n  क्षेत्र को\u0026nbsp;उपनिवेश बना लिया और उत्तरी अमेरिका को अपने अधिकार में ले लिया।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-7SHRFlFjQgA/YM1shhpIDNI/AAAAAAAAE_Q/q0JOfCYOPaI0W-i_QrDmOiJP6qdpaUhQgCPcBGAYYCw/s1819/IMG_20210619_090616-%2B1.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"उत्तरी अमेरिका महाद्वीप - North america in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1079\" data-original-width\u003d\"1819\" height\u003d\"190\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-7SHRFlFjQgA/YM1shhpIDNI/AAAAAAAAE_Q/q0JOfCYOPaI0W-i_QrDmOiJP6qdpaUhQgCPcBGAYYCw/w320-h190/IMG_20210619_090616-%2B1.webp\" title\u003d\"उत्तरी अमेरिका महाद्वीप - North america in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  यूरोपीय लोगों ने उत्तरी अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन की और दावा पेश\n  किया। इस क्षेत्र में उनके आगमन से आक्रमणकारियों द्वारा हिंसक संघर्षों और\n  यूरोपीय बीमारियों की शुरूआत के कारण मूल अमेरिकी आबादी में काफी गिरावट आई, मूल\n  अमेरिकियों में इन बीमारियों के प्रति प्रतिरक्षा की कमी थी। देशी संस्कृति में\n  भारी बदलाव आया और राजनीतिक और सांस्कृतिक समूहों के साथ उनका जुड़ाव भी बदल गया।\n  कई भाषाई समूह समाप्त हो गए, और अन्य बहुत जल्दी बदल गए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eनामकरण\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अमेरिका नाम इतालवी व्यापारी और नाविक अमेरिगो वेस्पूची से लिया गया है, जो नई\n  दुनिया की यात्रा करने वाले शुरुआती यूरोपीय खोजकर्ताओं में से एक है। हालाँकि\n  पहले अमेरिका शब्द केवल महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से में लागू होता था, लेकिन जल्द\n  ही यह नाम पूरे भूभाग पर लागू हो गया। वे भाग जो पनामा के उत्तर में फैले हुए है,\n  उन्हें उत्तरी अमेरिका के रूप में जाना जाता है, और जो दक्षिण में विस्तृत हुए\n  उन्हें दक्षिण अमेरिका कहा जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  मध्य और दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ पूरे मेक्सिको को भी लैटिन अमेरिका नाम से\n  जाना जाता है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा को एंग्लो-अमेरिका कहा जाता\n  है। यह सांस्कृतिक विभाजन बहुत वास्तविक है, फिर भी मेक्सिको और मध्य अमेरिका\n  (कैरिबियन समेत) भौतिक भूगोल के मजबूत संबंधों से शेष उत्तरी अमेरिका से बंधे\n  हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  ग्रीनलैंड भी सांस्कृतिक रूप से उत्तरी अमेरिका से विभाजित है, लेकिन शारीरिक रूप\n  से करीब है। कुछ भूगोलवेत्ता संयुक्त राज्य अमेरिका की दक्षिणी सीमा से लेकर\n  कोलंबिया की उत्तरी सीमा तक के क्षेत्र को मध्य अमेरिका के रूप में चिह्नित करते\n  हैं, जो अभी मध्य अमेरिका से अलग है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eभूगोल\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तरी अमेरिका में हर प्रकार के जलवायु पाए जाते है। जिसमे उष्णकटिबंधीय, जो\n  मध्य अमेरिका में पाए जाते हैं; टुंड्रा, जो कनाडा और अलास्का में पाया जाता है;\n  रेगिस्तान, जो रॉकी पर्वत के आंतरिक क्षेत्रों के पास मौजूद हैं; साथ ही कई\n  जंगलपाए जाते है अधिकांश उत्तरी अमेरिका मुख्य रूप से समशीतोष्ण और रहने योग्य\n  कृषि के लिए सक्षम है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तरी अमेरिका में पृथ्वी की कुछ सबसे पुरानी चट्टानें हैं। इसकी भूगर्भिक\n  संरचना कैनेडियन शील्ड नामक प्रीकैम्ब्रियन चट्टान से बानी है। दक्षिण-पूर्व में\n  प्राचीन एपलाचियन पर्वत है जबकि पश्चिम में छोटे और काफी लम्बे कॉर्डिलरास है, जो\n  महाद्वीप के लगभग एक-तिहाई भूमि क्षेत्र पर कब्जा किया हुआ हैं। इन दो पर्वत\n  पेटियों के बीच में पश्चिम में महान मैदानों के समतल क्षेत्र और पूर्व में मध्य\n  तराई क्षेत्र स्थित हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह महाद्वीप प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जिसमें खनिज संपदा, विशाल वन,\n  अत्यधिक मात्रा में ताजे पानी और दुनिया की कुछ सबसे उपजाऊ मिट्टी शामिल हैं।\n  इसने उत्तरी अमेरिका को दुनिया के सबसे अधिक आर्थिक रूप से विकसित क्षेत्रों में\n  से एक बनने में मदद की है, और इसके निवासी उच्च जीवन स्तर का आनंद लेते\n  हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उत्तरी अमेरिका में किसी भी महाद्वीप के प्रति व्यक्ति औसत आय सबसे अधिक है और\n  प्रति व्यक्ति औसत भोजन का सेवन अन्य महाद्वीपों की तुलना में काफी अधिक है।\n  यद्यपि यह दुनिया की आबादी के 10 प्रतिशत से भी कम का घर है, इसकी प्रति व्यक्ति\n  ऊर्जा खपत विश्व औसत से लगभग चार गुना अधिक है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1854284241022991861"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1854284241022991861"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/08/north-america-in-hindi.html","title":"उत्तरी अमेरिका महाद्वीप - North america in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-7SHRFlFjQgA/YM1shhpIDNI/AAAAAAAAE_Q/q0JOfCYOPaI0W-i_QrDmOiJP6qdpaUhQgCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h190/IMG_20210619_090616-%2B1.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8940356312061592318"},"published":{"$t":"2020-08-02T18:42:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:54:34.114+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"अटलांटिक महासागर कहाँ है - Atlantic ocean in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003e  \u003cp style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003eसदियों से अटलांटिक महासागर व्यापार और यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा है। आर्कटिक   सर्कल से अंटार्कटिका तक फैले, \u003cb\u003eअटलांटिक महासागर\u003c/b\u003e की सीमा पश्चिम में   अमेरिका और पूर्व में यूरोप और अफ्रीका से लगती है। यह प्रशांत महासागर के बाद 41   मिलियन वर्ग मील में फैली है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअटलांटिक महासागर कहाँ है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  भूमध्य रेखा अटलांटिक महासागर को उत्तरी अटलांटिक महासागर और दक्षिण अटलांटिक   महासागर में विभाजित करती है और अमेरिका के बीच अटलांटिक महासागर के बेसिन के   पश्चिम और पूर्व में यूरोप और अफ्रीका महाद्वीपों के बीच स्थित है। भूमध्य रेखा   अटलांटिक महासागर को उत्तरी अटलांटिक महासागर और दक्षिण अटलांटिक महासागर में   विभाजित करती है। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eक्षेत्रफल\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;अमेरिका और\u0026nbsp;अफ्रीका\u0026nbsp;के बीच स्थित\u0026nbsp;है। यह\u0026nbsp;उत्तर में आर्कटिक महासागर, दक्षिण-पश्चिम   में\u0026nbsp;प्रशांत महासागर, दक्षिण-पूर्व में\u0026nbsp;हिंद महासागर\u0026nbsp;और दक्षिण में\u0026nbsp;दक्षिणी महासागर\u0026nbsp;से जुड़ा हुआ है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा\u0026nbsp;महासागर\u0026nbsp;है। जिसका क्षेत्रफल लगभग 106,460,000 किमी 2 (41,100,000 वर्ग मील) है।   यह\u0026nbsp;पृथ्वी\u0026nbsp;की सतह का लगभग 20 प्रतिशत और इसके जल सतह क्षेत्र का लगभग 29 प्रतिशत भाग शामिल   है। यह \"पुरानी दुनिया\" को \"नई दुनिया\" से अलग करता है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  वैज्ञानिक और भूगोलवेत्ता अटलांटिक महासागर को दो भागों में विभाजित करते है   उत्तर और दक्षिण अटलांटिक महासागर। उत्तरी अटलांटिक और दक्षिण अटलांटिक में   अलग-अलग धाराएं\u0026nbsp; प्रवाहित होती हैं जो दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करती   हैं। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eमहत्वपूर्ण जानकारी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"background-color: yellow; padding: 10px;\"\u003e  \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cli\u003eक्षेत्रफल -106,460,000 किमी\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eउत्तर अटलांटिक: - 41,490,000 किमी\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eदक्षिण अटलांटिक - 40,270,000 किमी\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eऔसत गहराई - 3,646 मीटर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eअधिकतम गहराई - प्यूर्टो रिको ट्रेंच 8,376 मीटर\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eपानी की मात्रा - 310,410,900 किमी।\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eकिनारे की लंबाई - 111,866 किमी।\u003c/li\u003e  \u003c/ul\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eद्वीप\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp\u003eअटलांटिक महासागर में कई द्वीप हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं -\u003c/p\u003e  \u003ctable\u003e    \u003ctbody\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eबहामा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eकैनरी द्वीप - स्पेन\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eअज़ोरेस - पुर्तगाल\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eकैप वर्दे द्वीप\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eग्रीनलैंड\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e    \u003c/tbody\u003e  \u003c/table\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअटलांटिक महासागर की धाराएं\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअटलांटिक महासागर में महासागरीय धारा निम्निलिखित हैं:\u003c/p\u003e\u003cdiv trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eउत्तरी भूमध्यरेखीय धारा (गर्म)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण भूमध्यरेखीय धारा (गर्म)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eभूमध्यरेखीय काउंटर धारा\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eगल्फ स्ट्रीम (गर्म)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eफ्लोरिडा धारा (गर्म)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकैनरी धारा (ठंडा)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eलैब्राडोर धारा (ठंडा)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eब्राजीलियाई धारा (गर्म)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eफ़ॉकलैंड धारा (ठंडा)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण अटलांटिक धारा (ठंडा)\u003c/li\u003e\u003cli\u003eबेंगुएला धारा (ठंडा)\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूमध्यरेखीय धाराएं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eइस क्षेत्र में स्थिर ट्रेडविंड अफ्रीका के पश्चिमी तट से शुरू होकर पूर्व से पश्चिम की ओर पानी की दो धाराएं लगातार बहती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइन दो धाराओं को उत्तर विषुवतीय धारा और दक्षिण विषुवतीय धारा कहते हैं। उत्तर-पूर्वी ब्राजील पर फैला हुआ भूमि दक्षिण भूमध्यरेखीय धारा को केयेन धारा में विभाजित करता है जो गुयाना तट के साथ बहती है और ब्राजील की धारा जो ब्राजील के तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउत्तरी अटलांटिक महासागर\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकेयेन करंट\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अटलांटिक महासागर में, केयेन धारा उत्तरी भूमध्यरेखीय धारा से जुड़ती है और प्रबल होती है। यह धारा कैरेबियन सागर में भूमध्यरेखीय जल के एक बड़े द्रव्यमान के रूप में उत्तर-पश्चिम की ओर जाती है। यह धारा आगे दो धाराओं में विभाजित है: फ्लोरिडा धारा और गल्फ स्ट्रीम। ये सभी धाराएं गर्म धाराएं हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eफ्लोरिडा करंट\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकेयेन धारा का एक हिस्सा मैक्सिको की खाड़ी में प्रवेश करता है और फ्लोरिडा और क्यूबा के बीच फ्लोरिडा जलडमरूमध्य से निकलता है। इसे फ्लोरिडा करंट कहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eगल्फ स्ट्रीम\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकेयेन का एक अन्य भाग गल्फ स्ट्रीम के रूप में एंटिल्स के पूर्व में उत्तर की ओर जाता है। गल्फ स्ट्रीम सबसे मजबूत महासागरीय धाराओं में से एक है। पश्चिमी हवाओं और पृथ्वी के घूर्णन के संयुक्त प्रभाव से गल्फ स्ट्रीम पूर्व की ओर विक्षेपित हो जाती है। यह उत्तरी अटलांटिक बहाव के रूप में यूरोप पहुंचा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eचूंकि यह बहाव गर्म भूमध्यरेखीय पानी को यूरोप के उच्च अक्षांशों में ले जाता है, यह बंदरगाहों के लिए उपयुक्त परिस्थितियों को सुविधाजनक बनाने के लिए उत्तरी सागर के तटों को ठंढ मुक्त रखता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अटलांटिक से, बहाव तीन दिशाओं में बाहर निकलता है: पूर्व की ओर ब्रिटेन, उत्तर की ओर आर्कटिक तक, और दक्षिण की ओर इबेरियन तट के साथ, कैनरी करंट के रूप में।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकैनरी करंट\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह यूरोप और अफ्रीका के तटों के साथ दक्षिण की ओर बहती है, अंत में उत्तरी भूमध्यरेखीय धारा के साथ विलीन हो जाती है। चूंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों से पानी प्राप्त करता है, इसलिए यह एक ठंडी धारा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउपरोक्त सभी धाराओं का प्रवाह उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक दक्षिणावर्त परिसंचरण पूरा करता है। धाराओं के दक्षिणावर्त परिसंचरण के अलावा, अन्य धाराएँ हैं जो आर्कटिक क्षेत्र से उत्तरी अटलांटिक महासागर में बहती हैं जैसे लैब्राडोर करंट और इर्मिंगर करंट ध्रुवीय ईस्टरलीज़ के प्रभाव में।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eलैब्राडोर करंट\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह धारा पश्चिम ग्रीनलैंड और कनाडा के बाफिन द्वीप के बीच दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। यह धारा कनाडा के न्यूफाउंडलैंड से दूर गर्म गल्फ स्ट्रीम से मिलती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eइर्मिंगर करंट\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसे ईस्ट ग्रीनलैंड करंट भी कहा जाता है। यह आइसलैंड और ग्रीनलैंड के बीच बहती है और अभिसरण के बिंदु पर उत्तरी अटलांटिक बहाव को ठंडा करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसरगोसा सागर\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह उत्तरी अटलांटिक महासागर के मध्य में एक क्षेत्र है जो दक्षिणावर्त दिशा में बहने वाली धाराओं से बनता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में तैरते हुए समुद्री खरपतवार एकत्र होते हैं। यह पृथ्वी पर एकमात्र ऐसा समुद्र है जिसकी कोई तटरेखा नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहम जानते हैं कि गर्म और ठंडी धाराओं के संगम के क्षेत्र सूक्ष्मजीवों और फाइटोप्लांकटन के विकास के लिए अनुकूल क्षेत्र हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eये क्षेत्र मछली जैसे समुद्री जीवों के लिए उत्कृष्ट प्रजनन आधार बनाते हैं।न्यूफ़ाउंडलैंड, कनाडा के ग्रैंड बैंक तब बनते हैं जब गर्म गल्फ स्ट्रीम ठंडी लैब्राडोर धारा से मिलती है। यह क्षेत्र पृथ्वी पर सबसे समृद्ध मछली पकड़ने का मैदान है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण अटलांटिक महासागर\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदक्षिण अटलांटिक महासागर उत्तरी अटलांटिक महासागर के समान पैटर्न में बहता है लेकिन वामावर्त दिशा में। मध्य जाइरे या सरगोसा सागर की घटना मध्य-दक्षिण अटलांटिक में इतनी विशिष्ट नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eब्राजीलियाई धारा\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह पूर्वोत्तर ब्राजील में केप साओ रोके में दक्षिण भूमध्यरेखीय धारा में विभाजन से बनता है और इसलिए यह एक गर्म धारा है। यह ब्राजील के तट के साथ दक्षिण की ओर यात्रा करता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-vzoa5MENIOQ/X1in49xBJ1I/AAAAAAAADjo/JZOXi0Seb4oTwdNewGk6qD0TPx6WwitZQCLcBGAsYHQ/s1920/20200909_152909.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अटलांटिक महासागर कहाँ है - Atlantic ocean in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1269\" data-original-width\u003d\"1920\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-vzoa5MENIOQ/X1in49xBJ1I/AAAAAAAADjo/JZOXi0Seb4oTwdNewGk6qD0TPx6WwitZQCLcBGAsYHQ/w320-h212/20200909_152909.webp\" title\u003d\"अटलांटिक महासागर कहाँ है Atlantic ocean in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eपश्चिमी हवाओं और पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव में, यह पूर्व की ओर पश्चिम पवन बहाव के साथ दक्षिण अटलांटिक धारा के रूप में विलय करने के लिए प्रेरित करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eदक्षिण अटलांटिक धारा और बेंगुएला धारा\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपश्चिम की ओर बढ़ने पर, अफ्रीका के भूभाग द्वारा धारा को उत्तर की ओर मोड़ दिया जाता है। इसे उत्तर दिशा में अफ्रीका के पश्चिमी तट के साथ बहने वाली बेंगुएला धारा कहते हैं। बेंगुएला धारा पश्चिमी हवा के बहाव से ठंडे ध्रुवीय जल को उष्णकटिबंधीय अक्षांशों में लाती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eये दोनों धाराएँ ठंडे जल हैं। बेंगुएला धारा उत्तर-पश्चिम दिशा में भूमध्य रेखा की ओर बढ़ती है और दक्षिण भूमध्यरेखीय धारा के साथ विलय हो जाती है और इस प्रकार दक्षिण अटलांटिक महासागर के दक्षिणावर्त परिसंचरण को पूरा करती है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअटलांटिक महासागर के गर्त\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eमिल्वौकी, अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा बिंदु हैं, प्यूर्टो रिको द्वीप के उत्तर-पश्चिम में लगभग 100 मील (160 किमी) 27,493 फीट (8,380 मीटर) की गहराई पर स्थित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकिंग्स ट्रौ\u003c/b\u003e उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक पानी के नीचे की गर्त है। यह मध्य-अटलांटिक रिज के पूर्व की ओर, एकोरेस-बिस्के उदय के उत्तर-पश्चिम में और अज़ोरेस के उत्तर-पूर्वोत्तर में लगभग 400 किमी (250 मील) की दूरी पर स्थित है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह लगभग 400 किमी (250 मील) लंबा है, जो उत्तर-पश्चिम-दक्षिण पूर्व दिशा में चल रहा है। पूर्व में यह पीक डीप और फ्रीन डीप में शाखाएं करता है। केंद्र की गहराई 4,500 मीटर (14,800 फीट) है। ट्रफ के चारों ओर ऊंची लकीरें और सीमाउंट हैं, जैसे कि एंटीआल्टेयर सीमाउंट और क्रंब सीमाउंट कॉम्प्लेक्स।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eस्पष्ट रूप से भूगर्भीय रूप से स्थिर क्षेत्र में होने के कारण, रेडियोधर्मी अपशिष्ट निपटान के लिए संभावित स्थान के रूप में ट्रफ का अध्ययन किया गया है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eशाब्दिक अर्थ\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e  \u003cp\u003e    'अटलांटिक' शब्द की उत्पत्ति ग्रीक पौराणिक कथाओं से हुई है जिसका अर्थ है 'सी     ऑफ एटलस'। एटलस वह टाइटन था जिसे धरती के किनारे पर खड़ा होना था और ज़ीउस से     सजा के रूप में अपने कंधों पर आकाश (आकाशीय गोले) ले जाना था क्योंकि एटलस ने     आकाश के नियंत्रण के लिए ओलंपियन देवताओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    प्रशांत महासागर के बाद अटलांटिक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महासागर है और     पृथ्वी की सतह का 25% हिस्सा शामिल है। आकार में अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के आकार के 6.5 गुना के बराबर है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    सबसे बड़ी गहराई प्यूर्टो रिको में मिल्वौकी दीप है: 8,605 मीटर / 28,232 फीट।     औसत गहराई लगभग 3,339 मीटर / 10,955 फीट है। मध्य-मध्य रिज एक पानी के नीचे     (उपमहाद्वीप भी कहा जाता है) पर्वत श्रृंखला है जो आइसलैंड से मोटे तौर पर फैली     हुई है। उत्तर में दक्षिण जॉर्जिया और दक्षिण सैंडविच द्वीप अर्जेंटीना के     दक्षिण में है। रिज समुद्र को दो प्रमुख घाटियों में विभाजित करता है, जो गहराई     में 3,000 मीटर / 9,843 फीट से अधिक हैं। बाईं ओर उपग्रह छवि पर, आप गहरे नीले     समुद्र में ऊर्ध्वाधर (ऊपर से नीचे तक) हल्की नीली रेखा देख सकते हैं।   \u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eतापमान \u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp\u003e    अटलांटिक महासागर का तापमान स्थान और महासागर की धाराओं पर निर्भर करता है।     भूमध्य रेखा के पास पानी गर्म होता है। 28 डिग्री सेल्सियस / 82 डिग्री     फ़ारेनहाइट का उच्च तापमान भूमध्य रेखा के पास तटीय क्षेत्रों में पहुंच जाता     है और न्यूनतम तापमान ध्रुवीय क्षेत्रों में -2 डिग्री सेल्सियस / 28 डिग्री     फ़ारेनहाइट के आसपास होता है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    महत्वपूर्ण जलमार्ग स्पेन और मोरक्को और तुर्की में बोस्पोरस के बीच जिब्राल्टर     के जलडमरूमध्य अटलांटिक महासागर में सबसे प्रसिद्ध जलमार्गों में से दो हैं।   \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअटलांटिक महासागर का रहस्य\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eअटलांटिक महासागर बहुत सारे रहस्य से भरा हुआ है। नेविगेटर और वैज्ञानिक सदियों से इसकी खोज कर रहे हैं लेकिन अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eक्या अटलांटिस मौजूद था? बरमूडा द्वीप समूह के क्षेत्र में जहाज और हवाई जहाज क्यों गायब हो जाते हैं? ये प्रश्न अब तक लंबित हैं। यहां आप अटलांटिक महासागर की सबसे दिलचस्प विशेषताएं पा सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअटलांटिक सबसे नमकीन महासागर है, इसकी औसत लवणता 35‰ है। यह प्रशांत महासागर के बाद दूसरा सबसे बड़ा महासागर है और यह सभी जलवायु क्षेत्रों से होकर गुजरता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e- इतिहास\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसदियों पहले अटलांटिक महासागर का कोई स्थायी नाम नहीं था, इसे पश्चिमी महासागर, छाया का सागर, हरक्यूलिस के स्तंभों से परे समुद्र कहा जाता था। ग्रीक पौराणिक कथाओं के एटलस के बाद जर्मन कार्टोग्राफर वाल्डसीमुलर द्वारा समुद्र को आधुनिक नाम दिया गया था, जिसने आकाश को पकड़ रखा था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैसा कि सर्वविदित है, अटलांटिक महासागर को पार करने वाला पहला नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस था। तब से अटलांटिक को नई और पुरानी दुनिया के बीच की सीमा माना जाता है। कई यात्रियों ने कोलंबस का अनुसरण किया और नई भूमि की खोज और खोज की और महाद्वीपों के बीच संचार जल्द ही स्थापित हो गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअब ट्रान्साटलांटिक उड़ानें आकस्मिक हैं, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एविएटर कितने बहादुर थे जिन्होंने पहले अटलांटिक महासागर को पार करने का उपक्रम किया था। घटना के नायक जॉन एल्कॉक और आर्थर ब्राउन थे, जिन्होंने 1919 में न्यूफ़ाउंडलैंड से क्लिफ़डेन 3168 मीटर लंबी पहली नॉन-स्टॉप ट्रान्साटलांटिक उड़ान का संचालन किया था। बाद में उन्हें नाइट की उपाधि दी गई और उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से पुरस्कृत किया गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e- अटलांटिस - कल्पना या वास्तविकता?\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राचीन सभ्यता के बारे में कई सिद्धांत हैं कि किंवदंती के अनुसार अटलांटिक के क्षेत्र में स्थित था। अटलांटिस समुद्र में डूब गया और कई शताब्दियों के दौरान यात्री गायब सभ्यता की खोज कर रहे हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e- बरमूडा सी\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअटलांटिक महासागर के रहस्यों में से एक बरमूडा ट्रायंगल, \"सी ऑफ द एविल\" में पैदा हुआ है, जहां पानी और विमान बिना किसी कारण के गायब हो जाते हैं। लोग इसे समझाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग जहाजों को अपहरण करने वाले एलियंस में विश्वास करते हैं, कुछ विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में। वैसे भी यह सच है कि इस क्षेत्र में नेविगेशन के लिए मुश्किल है, यहां से अक्सर तूफान और चक्रवात उत्पन्न होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e- अटलांटिक महासागर के उत्तर में एक विशाल द्वीप है - ग्रीनलैंड, जो दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। सबसे दूर का द्वीप अटलांटिक - बौवेट में भी है जो केप ऑफ गुड होप से 1600 किमी की दूरी पर स्थित है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8940356312061592318"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8940356312061592318"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/08/atlantic-ocean-in-hindi.html","title":"अटलांटिक महासागर कहाँ है - Atlantic ocean in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-vzoa5MENIOQ/X1in49xBJ1I/AAAAAAAADjo/JZOXi0Seb4oTwdNewGk6qD0TPx6WwitZQCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h212/20200909_152909.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-1925627460966821355"},"published":{"$t":"2020-08-02T08:55:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:54:55.746+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप - Australia mahadeep in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003e\u003cb\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप\u003c/b\u003e\u0026nbsp;जिसे मेगनेशिया नाम से जाना जाता है। इस   महाद्वीप में\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया और न्यू गिनी का द्वीप शामिल है। इसका   क्षेत्रफल 8.6 लाख\u0026nbsp;किमी है। यह सभी\u0026nbsp;महाद्वीपों में सबसे छोटा है।   ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप अधिकतर भाग   ऑस्ट्रेलिया  देश कवर करता है। यह महाद्वीप 8,600,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    हालांकि ऑस्ट्रेलिया को कई\u0026nbsp;वैज्ञानिक इसे\u0026nbsp;द्वीप    ही\u0026nbsp;मानते\u0026nbsp;है। लेकिन इस पर\u0026nbsp;मतभेद के बाद भी अधिकतर वैज्ञानिक इसे     महाद्वीप ही मानते\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    ऑस्ट्रेलिया द्वीप है या महाद्वीप इसे पता लगाने के लिए हमें द्वीप और महाद्वीप     के बारे में थोड़ा जान लेना चाहिए -\u0026nbsp;द्वीप भूमि वह हिस्सा होता है।\u0026nbsp;जो     पूरी तरह से पानी से घिरा हुआ होता\u0026nbsp;है और आकार में बहुत बड़ा न हो। इस आधार     पर\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया एक द्वीप नहीं हो सकता क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत बड़ा है।   \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअब सवाल आता है की ग्रीनलैंड को फिर महाद्वीप क्यों नहीं माना जाता है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल\u0026nbsp;836,000 वर्ग मील है। यह\u0026nbsp;दुनिया का सबसे द्वीप है। दुर्भाग्य से, एक महाद्वीप की कोई सटीक परिभाषा नहीं है। लेकिन कुछ मापदंड हैं जो आमतौर पर एक महाद्वीप को दूसरे से अलग करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवैज्ञानिको के अनुशार\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया और अधिकांश\u0026nbsp;एशिया\u0026nbsp;अलग-अलग टेक्टॉनिक प्लेटों पर स्थित हैं।\u0026nbsp;ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका के साथ एक टेक्टॉनिक प्लेट साझा करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e  \u003ch3\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के देश और राजधानी\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/span\u003e\u003c/div\u003e  \u003ctable\u003e    \u003ctbody\u003e      \u003ctr\u003e        \u003cth\u003eदेश\u0026nbsp;\u003c/th\u003e        \u003cth\u003eराजधानी\u0026nbsp;\u003c/th\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eऑस्ट्रेलिया\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eकैनबेरा\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eफिजी\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eसुवा\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eकिरिबाती\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eतरावा\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eन्यूजीलैंड\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eवेलिंगटन\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eमंगल द्वीप\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eमाजुरो\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eमाइक्रोनेशिया\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eपालीकिर\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eनरु\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eNO\u0026nbsp;\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eपलाऊ\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eजेरल्मद\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eपापुआ न्यू गिनी\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eपोर्ट मोर्सबी\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eसामोआ\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eएपिया\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eसोलोमन\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eआइलैंड्स होनियारा\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eटोंगा\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eनुकु'अलोफा\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eटुवालू\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eफ़नाफ़ुटि\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd\u003eवानातू\u0026nbsp;\u003c/td\u003e        \u003ctd\u003eपोर्ट विला\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e    \u003c/tbody\u003e  \u003c/table\u003e  \u003cbr /\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की जलवायु\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    ऑस्ट्रेलिया की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय व गर्म है। ऑस्ट्रेलिया के बड़े भौगोलिक     आकार के कारण यहाँ कई प्रकार की जलवायु है। ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा हिस्सा     रेगिस्तान या अर्ध-शुष्क है। केवल दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में समशीतोष्ण     जलवायु है । देश के उत्तरी भाग में एक उष्णकटिबंधीय जलवायु है। इस महाद्वीप में     अधिक समय तक गर्मी पड़ती है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    ऑस्ट्रेलिया मध्यम आकार का महाद्वीप है, जिसे दक्षिणी महासागर ध्रुवीय     क्षेत्रों से अलग करता है। सर्दियों के दौरान ध्रुवीय हवा के कारण थोड़ी ठंडी     पड़ती हैं।\u0026nbsp;   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की झीलें\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/span\u003e\u003c/div\u003e  \u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e    \u003cth\u003eझील\u0026nbsp;\u003c/th\u003e    \u003cth\u003eक्षेत्रफल वर्ग किमी\u0026nbsp;\u003c/th\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eआईरे झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e9,500\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eटोरेंस झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e5,745\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eकार्नेगी झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e5,714\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eमैके झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e3,494\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eफ्रॉम झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e2,596\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eबारली झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e1,980\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eमैकलोड झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e1,500\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e  \u003ctr\u003e    \u003ctd\u003eअमेडस झील\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003ctd\u003e1,032\u003c/td\u003e  \u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cbr /\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की जनसंख्या\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e2020 को ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या 25,693,059 थी। वार्षिक वृद्धि 0.9% थी। जबकि विदेशी प्रवास में 38.6% की भागीदारी थी।\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की मुख्य फसल है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eऑस्ट्रेलिया में उगाई जाने वाली मुख्य फ़सलें गेहूँ हैं। इसके अलावा मोटे अनाज में जौ, जई, मक्का, चावल व तिलहन में कनोला, सूरजमुखी, सोयाबीन और मूंगफली है। गन्ना, कपास, फल, अंगूर, तंबाकू और सब्जियां यहाँ की अन्य फैसले है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-uQqs6ectv5Y/X3gKB8EhY2I/AAAAAAAAELc/ifH7T_5Kb00ADI-S67BefkUmANEx-4g1QCPcBGAYYCw/s600/20201003_100538.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप - Australia mahadeep in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-uQqs6ectv5Y/X3gKB8EhY2I/AAAAAAAAELc/ifH7T_5Kb00ADI-S67BefkUmANEx-4g1QCPcBGAYYCw/w320-h212/20201003_100538.webp\" title\u003d\"ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप - Australia mahadeep in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1925627460966821355"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1925627460966821355"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/08/australia-mahadeep-in-hindi.html","title":"ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप - Australia mahadeep in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-uQqs6ectv5Y/X3gKB8EhY2I/AAAAAAAAELc/ifH7T_5Kb00ADI-S67BefkUmANEx-4g1QCPcBGAYYCw/s72-w320-c-h212/20201003_100538.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4882581092578177321"},"published":{"$t":"2020-08-02T08:33:00.004+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-04T21:55:31.845+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"यूरोप महाद्वीप - Europe continent in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eयूरोप महाद्वीप \u003c/b\u003eजो पूरी तरह से उत्तरी और\u0026nbsp;पूर्वी गोलार्ध में     स्थित है। इसे यूरेशिया का पश्चिमी भाग भी कहा जाता\u0026nbsp;है। यह उत्तर में     आर्कटिक महासागर, पश्चिम में     अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और पूर्व में एशिया से घिरा है। यूरोप को यूराल     पर्वत, यूराल नदी, कैस्पियन सागर, ग्रेटर काकेशस, काला सागर एशिया से अलग     करता\u0026nbsp;है। यूरोप आमतौर पर अपने भौतिक आकार और इतिहास के कारण\u0026nbsp;महाद्वीप     की स्थिति के अनुरूप है।\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयूरोप महाद्वीप का क्षेत्रफल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    यूरोप लगभग 10,180,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह\u0026nbsp;पृथ्वी की सतह के     2%\u0026nbsp; को कवर करता है। यह छठा सबसे बड़ा     महाद्वीप है।     राजनीतिक रूप से, यूरोप को लगभग पचास संप्रभु देशों में विभाजित किया गया है।     जिनमें से रूस सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  महाद्वीप का 39% हिस्सा है और इसकी 15% आबादी शामिल है। 2018 तक यूरोप की कुल   आबादी लगभग 741 मिलियन थी। यूरोपीय का जलवायु गर्म   अटलांटिक धाराओं से काफी हद तक प्रभावित होती है।\u0026nbsp; जो शीत ऋतु और शीतकाल में   एशिया और उत्तरी अमेरिका की जलवायु के साथ-साथ महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों पर   गर्म होती है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयूरोप का इतिहास\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eयूरोप में\u0026nbsp;विशेष रूप से प्राचीन ग्रीस और प्राचीन रोम में पश्चिमी सभ्यता     का जन्मस्थान था। 476 ईस्वी में पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन के     बाद\u0026nbsp;मध्य युग की शुरुआत हुआ। पुनर्जागरण मानवतावाद, कला और विज्ञान के     क्षेत्र में यूरोप में विकास हुआ।\u0026nbsp;एज ऑफ़ डिस्कवरी के बाद से, यूरोप ने     वैश्विक मामलों में एक प्रमुख भूमिका निभाई। 16 वीं और 20 वीं शताब्दियों के     बीच, यूरोपीय शक्तियों ने कई बार अमेरिका, अफ्रीका और\u0026nbsp; एशिया के अधिकांश     हिस्सों में उपनिवेश बनाए।   \u003c/p\u003e  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    18 वीं शताब्दी के अंत में ग्रेट ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति शुरू हुई। जिसके     कारण\u0026nbsp;यूरोप को व्यापक,\u0026nbsp; आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन को     जन्म दिया। दोनों विश्व युद्ध में\u0026nbsp;यूरोप ने\u0026nbsp;सबसे अधिक भाग लिए।\u0026nbsp;     20 वीं शताब्दी के मध्य तक सोवियत संघ और\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;विश्व शक्ति के     रूप में उभरने लगे। उसके बाद\u0026nbsp;यूरोपीय देशो की शक्ति काम पड़ने लगी। शीत     युद्ध के दौरान, यूरोप को नाटो के बीच पश्चिम में नाटो और पूर्व में वारसॉ संधि     के बीच विभाजित किया गया था।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    1949 में यूरोप के परिषद की स्थापना\u0026nbsp;यूरोप को एकजुट करने के विचार से की     गई थी। आगे कुछ राज्यों द्वारा यूरोपीय एकीकरण ने यूरोपीय संघ का गठन किया।     1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद से इसका विस्तार पूर्व में हो रहा है।     यूरोपीय संघ के अधिकांश देशों की मुद्रा यूरो है जिसे\u0026nbsp;यूरोपीय     के\u0026nbsp;लोगों के बीच सबसे अधिक उपयोग की जाती है।   \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-QAmpZ2_pYYw/X2cu8xqGDMI/AAAAAAAAD1M/hkzg08WPAUgxWTiB_ggHZ7sfQ8ul1inXwCPcBGAYYCw/s600/20200920_155824.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"यूरोप महाद्वीप\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"375\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"200\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-QAmpZ2_pYYw/X2cu8xqGDMI/AAAAAAAAD1M/hkzg08WPAUgxWTiB_ggHZ7sfQ8ul1inXwCPcBGAYYCw/w320-h200/20200920_155824.webp\" title\u003d\"यूरोप महाद्वीप\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eयूरोप के देश और जनसंख्या\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  \u003cbr /\u003e  \u003ctable\u003e  \u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e    \u003cth\u003eदेश\u0026nbsp;\u003c/th\u003e    \u003cth\u003eजनसंख्या\u0026nbsp;\u003c/th\u003e  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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003e\u003cb\u003eकच्छ का रण\u003c/b\u003e भारत के कच्छ जिले के   थार रेगिस्तान में   एक नमक का दलदल इलाका है। जो पाकिस्तान और भारत के बीच सीमा पर फैला है। यह   ज्यादातर गुजरात (मुख्य रूप से कच्छ जिला), भारत और सिंध, पाकिस्तान के कुछ   हिस्सों में स्थित है। यह महान रण और छोटे रण में विभाजित है। यह क्षेत्र में   लगभग 7500 वर्ग\u0026nbsp;किमी है और इसे दुनिया के सबसे बड़े नमक का\u0026nbsp;रेगिस्तानों   में से एक माना जाता है। यह क्षेत्र कच्छी लोगों द्वारा बसाया गया है।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकच्छ का रण कहाँ स्थित है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eकच्छ का महान रण भारत के कच्छ जिले और दक्षिणी\u0026nbsp;पाकिस्तान\u0026nbsp;में है। इस रन की उत्तरी सीमा\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;और पाकिस्तान की सीमा है। रण के दो भाग हैं- थार रेगिस्तान में कच्छ के महान रण और कच्छ के महान रण के पास कच्छ के छोटे रण। कच्छ के रण में जाने का सबसे अच्छा समय\u0026nbsp;मानसून\u0026nbsp;के दौरान कच्छ का महान रण जल में समा जाता है। अक्टूबर में, यह प्रकृति के विशाल, शानदार मास्टरपीस में बदलने शुरू हो जाता है, जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। नवंबर से मार्च तक पर्यटन सीजन होता है। इन महीनों में अप्रैल और मई में बहुत गर्मी होती है, हालांकि छुट्टियों से बचा जाना चाहिए।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  कच्छ का महान रण दक्षिणी किनारे पर बन्नी घास के मैदानों पर\u0026nbsp;कच्छ जिले में   स्थित है। इसमें कच्छ की खाड़ी और मुहाने के बीच लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर की   दुरी\u0026nbsp;है। दक्षिणी पाकिस्तान में सिंधु नदी के किनारे तक कच्छ का राण फैला   हुआ है। यह क्षेत्र अरब सागर का एक विशाल उथला भाग था जब तक कि भूगर्भीय परिवर्तन   नहीं आया था। सिकंदर महान के समय में विशाल झील का निर्माण होता था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकच्छ की भूगोलिक स्थिति\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  यह रण\u0026nbsp;भारतीय राज्य गुजरात में स्थित है, विशेष रूप से कच्छ जिले में, जिसके   कारण इसका नाम कच्छ का रण रखा गया है। कुछ हिस्से सिंध (पाकिस्तानी) प्रांत में   फैला\u0026nbsp;हैं। रण शब्द का अर्थ है \"नमक का\u0026nbsp;दलदल\"। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कच्छ का रण लगभग 26,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। \"कच्छ का   महान रण\" रण का बड़ा हिस्सा है। यह पूर्व से पश्चिम में फैला हुआ है, उत्तर में   थार रेगिस्तान और दक्षिण में कच्छ की निचली पहाड़ियाँ\u0026nbsp; है। सिंधु नदी का   डेल्टा दक्षिणी पाकिस्तान के\u0026nbsp;पश्चिम में स्थित है। कच्छ का छोटा रण ग्रेट रण   के दक्षिण-पूर्व में स्थित है, और दक्षिण की खाड़ी तक फैला हुआ है। \u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003cp\u003e  राजस्थान और गुजरात में उत्पन्न होने वाली कई नदियाँ कच्छ के रण में बहती हैं,   जिसमें लुनी नदी, भुकी नदी\u0026nbsp;, भरुड़ नदी\u0026nbsp;, नारा नदी, खारोद, बनास,   सरस्वती, रूपेन, बंभन और माछू नदी\u0026nbsp;\u0026nbsp;शामिल हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सतह आमतौर पर समतल है और समुद्र तल के बहुत समीप है। मानसून के मौसम में   प्रतिवर्ष अधिकांश रण बाढ़ के पानी से भर जाता\u0026nbsp;है। यह\u0026nbsp;रेतीले ऊंचे   मैदान हैं जिन्हें दांव या मेडक के रूप में जाना जाता है। जो बाढ़ के स्तर से दो   से तीन मीटर ऊपर होते हैं। पेड़ और झाड़ियाँ इसी क्षेत्र में\u0026nbsp;पर बढ़ती   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eजलवायु\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- यहाँ की जलवायु\u0026nbsp;इकोरियन उपोष्णकटिबंधीय है। गर्मी के   महीनों में तापमान औसत न्यूनतम 44 .C उच्चतम\u0026nbsp; 50 .C तक पहुँच सकता है।   सर्दियों के दौरान तापमान काम हो जाता\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eपरिस्थितिकी\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- कच्छ का रण इण्डोमलायण क्षेत्र में एकमात्र बड़ा घास   का मैदान है। इस क्षेत्र में एक तरफ रेगिस्तान है और दूसरी ओर समुद्र विभिन्न   पारिस्थितिक तंत्रों को सक्षम बनाता है। जिसमें मैंग्रोव और रेगिस्तानी\u0026nbsp;   वनस्पति शामिल हैं। यहाँ घास के मैदान और रेगिस्तान के\u0026nbsp;वन्यजीवों का एक   अच्छा\u0026nbsp;घर हैं। कठोर परिस्थितियोंमें रहने वाले जीवो के\u0026nbsp;लिए अनुकूलित   स्थान है। इनमें स्थानीय और लुप्तप्राय जानवर और पौधों की प्रजातियां शामिल हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eफ्लोरा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eकच्छ के रण में प्रमुख वनस्पति और कांटेदार झाड़ी है।   सामान्य घास की प्रजातियों में अप्लुडा एरिस्टाटा, सेन्क्रस एसपीपी, पनीसेतुम   एसपीपी।, सिमबोपोगोन एसपीपी, एरागैस्ट्रिस एसपीपी और एलियनसुरस एसपीपी शामिल   हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  बाढ़ क्षेत्र में उगने वाले झाड़ियों\u0026nbsp;को छोड़कर यहाँ के\u0026nbsp;पेड़ दुर्लभ   हैं। गैर-देशी वृक्ष प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा विकसित\u0026nbsp;हो गया है। इसके बीज, फली   जंगली गधों के लिए साल भर का भोजन प्रदान करते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eपशुवर्ग -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;कच्छ का रण स्तनधारियों की लगभग 50 प्रजातियों का घर है।   इसमें\u0026nbsp;भारतीय जंगली गधा , चिंकारा, नीलगाय और ब्लैकबक शामिल है\u0026nbsp;इसके   अलावा\u0026nbsp;भेड़िया, स्ट्रिप हाइपरसिन, स्ट्रिप हाइब्रिड सहित कई बड़े जानवर   भी\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  यहाँ\u0026nbsp;भारतीय जंगली गधे का की काफी बड़ी आबादी थी। अब कच्छ के रण तक ही सीमित   है। नीलगाय और ब्लैकबक प्रजातियों पर खतरा मंडरा रहा\u0026nbsp;है। कच्छ के रण में 200   से अधिक पक्षीयो की\u0026nbsp;प्रजाति\u0026nbsp;हैं। जिनमें खतरे वाली प्रजातियां   फ्लोरीकॉन और हूबारा बस्टर्ड शामिल हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसिंधु घाटी काल\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  सिंधु सभ्यता के लोग लगभग 3500 ईसा पूर्व के कच्छ के रण में बसे हुए प्रतीत होते   हैं। भारत का सबसे बड़ा सिंधु स्थल धोलावीरा शहर, कच्छ के रण में स्थित है। यह   शहर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र पर बनाया गया था, संभवतः यह दर्शाता है कि धोलावीरा के   निवासी खगोल विज्ञान में कुशल थे। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कच्छ के रण में खिरसरा का औद्योगिक स्थल भी था, जहाँ एक गोदाम मिला था। N. S गौड़   और मणि मुरली जैसे कई इंडोलॉजिस्ट का मानना है कि सिंधु सभ्यता के समय एक नौसैनिक   द्वीप समूह था।\u0026nbsp;सिंधु सभ्यता को एक व्यापक व्यापार प्रणाली के रूप में जाना   जाता था। हो सकता है यही से समुद्रो के माध्यम अन्य देशो से व्यापर किया जाता   था।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-I_1nbOzbzxg/X3gKCamzNiI/AAAAAAAAELQ/RC_PEfurBJ4DhuNfQ6CzXeQeEXZLnkTIACPcBGAYYCw/s600/20201003_100649.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-I_1nbOzbzxg/X3gKCamzNiI/AAAAAAAAELQ/RC_PEfurBJ4DhuNfQ6CzXeQeEXZLnkTIACPcBGAYYCw/s320/20201003_100649.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  कच्छ का रण भारत के मौर्य और गुप्त साम्राज्यों दोनों का एक हिस्सा था। कच्छ का   रण ब्रिटिश राज के नियंत्रण मेंआने के बाद\u0026nbsp;नमक की कटाई पर प्रतिबंध लगा   दिया। महात्मा गांधी द्वारा इस प्रतिबंध का विरोध किया गया था। हाल ही में, कच्छ   के रण के निवासियों ने 3 महीने का रण उत्सव का आयोजन शुरू किया है। जो पर्यटन को   बढ़ावा देता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dgwSWXdMUHU/X2cxJHIiDTI/AAAAAAAAD1U/EcS_EkrtyyE8k2j_xd2Ij80wCyo3AN9sQCLcBGAsYHQ/s600/20200920_160712.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"कच्छ का रण\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"375\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"200\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-dgwSWXdMUHU/X2cxJHIiDTI/AAAAAAAAD1U/EcS_EkrtyyE8k2j_xd2Ij80wCyo3AN9sQCLcBGAsYHQ/w320-h200/20200920_160712.webp\" title\u003d\"कच्छ का रण\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकच्छ का संरक्षित क्षेत्र\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  2017 के मूल्यांकन में पाया गया कि 20,946 वर्ग किमी या 76% हिस्सा, संरक्षित   क्षेत्रों में आते\u0026nbsp;है। इनमें कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य शामिल है।   जिसे 1986 में स्थापित किया गया था और इसमें महान रण, और \u0026nbsp;Indian Wild Ass   Sanctuary\u0026nbsp; शामिल हैं, जो 1973 में स्थापित किया गया था और इसमें छोटे रण को   भी शामिल किया।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकच्छ का रण कैसे बना था\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  कच्छ का रण अरब सागर का एक हिस्सा था।\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;ने उजागर हुए समुद्र को नमकीन   रेगिस्तान में बदल दिया। बारिश के मौसम में, रण समुद्र के पानी में डूब जाता है।   खारा पानी अक्टूबर में वापस आ गया, जिससे कच्छ का रण पर्यटकों के लिए तैयार हो   गया।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  नमक रेगिस्तान के बीच   खादिरबेट में स्थित धोलावीरा। यह हड़प्पा सभ्यता का एक मेगा शहर है जो 4000 साल   से अधिक समय पहले अस्तित्व में था। 100+ हेक्टेयर में हड़प्पा सभ्यता की कुछ   आकर्षक झलकियाँ हैं। अन्य प्राचीन शहरों की तरह धोलावीरा में अभी भी सुनियोजित   होने के प्रमाण हैं। \u003c/p\u003e \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8104742455844219253"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8104742455844219253"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/08/rann-of-kutch-in-hindi.html","title":"कच्छ का रण कहा है - rann of kutch in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Pmr55XhsSdA/X3gKCvXah-I/AAAAAAAAELc/yOYCdzNTehUsZAiss90664W9HBjLhdTYQCPcBGAYYCw/s600/20201003_100716.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Pmr55XhsSdA/X3gKCvXah-I/AAAAAAAAELc/yOYCdzNTehUsZAiss90664W9HBjLhdTYQCPcBGAYYCw/s320/20201003_100716.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cb\u003eप्रशांत महासागर\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपृथ्वी\u0026nbsp;के सबसे बड़ा और गहरा     महासागर\u0026nbsp;है। इसका     विस्तार उत्तर में आर्कटिक महासागर से लेकर दक्षिणी महासागर तक है और पश्चिम     में एशिया और     ऑस्ट्रेलिया के महाद्वीपों और पूर्व में अमेरिका से घिरा है। 165,250,000 वर्ग     किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।   \u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रशांत महासागर कहाँ है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eप्रशांत महासागर अमेरिका के बीच प्रशांत     महासागर बेसिन के पूर्व और पश्चिम में एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीपों के     बीच स्थित है। भूमध्य रेखा प्रशांत महासागर को उत्तरी प्रशांत महासागर और     दक्षिण प्रशांत महासागर में विभाजित करती है। नीचे आप प्रशांत महासागर को     दिखाने वाला एक विश्व मानचित्र देख सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eप्रशांत का अर्थ है     \"शांतिपूर्ण\" शांति के लिए और प्रशांत महासागर को इसका नाम 1521 में पुर्तगाली     खोजकर्ता फर्डिनेंड मैगलन से मिला, जिन्होंने अपने पानी को \"मैर पेसिफिको\" कहा     जिसका अर्थ है शांतिपूर्ण समुद्र।   \u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रशांत महासागर का क्षेत्रफल कितना है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eप्रशांत महासागर पृथ्वी पर सबसे     बड़ा महासागर है और     पृथ्वी की     सतह के 30% से अधिक को कवर करता है। 169,479,000 वर्ग किमी / 65,436,200 वर्ग     मीटर की सतह के साथ यह पृथ्वी के जल क्षेत्र का लगभग आधा भाग प्रदान करता है।     क्या आप जानते हैं कि प्रशांत महासागर का आकार एक साथ सभी महाद्वीपों के भूभाग     के कुल आकार से बड़ा है।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रशांत महासागर की गहराई कितना है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eप्रशांत न केवल सबसे बड़ा है।     बल्कि सबसे गहरी खाई के साथ सबसे गहरा महासागर भी है। औसत गहराई लगभग 3,800     मीटर / 12,467 फीट है। द चैलेंजर डीप इन मरीना ट्रेंच, जो फिलीपींस के पश्चिम     और न्यू गिनी के उत्तर में स्थित है। प्रशांत महासागर में 10,920 मी / 35,00027     फीट के साथ सबसे गहरा बिंदु है। यह पृथ्वी की सतह का सबसे निचला हिस्सा है और     इसका गठन दो टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से हुआ था। इसे 'चैलेंजर डीप' क्यों     कहा जाता है? क्योंकि यह एचएमएस चैलेंजर द्वारा 1875 में शोध किया गया था।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eपृथ्वी पर अधिकांश\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u003c/a\u003e\u0026nbsp;प्रशांत महासागर के बेसिन में स्थित हैं। ज्वालामुखी वास्तव में बेसिन     के चारों ओर एक वलय बनाते हैं और इसलिए इसे अग्नि का वलय कहा जाता है। इस     क्षेत्र में ज्वालामुखी गतिविधि के कारण कई\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;आते हैं और फिर महासागर प्लेट     महाद्वीपों की टेक्टोनिक प्लेटों के नीचे हलचल होती\u0026nbsp;है और सुनामी आती     है।\u0026nbsp;जो भूमि से टकराने पर भयानक विनाश का कारण बनती है। विशेष रूप से इस     क्षेत्र में होती है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eप्रशांत महासागर     का तापमान स्थान पर निर्भर करता है। भूमध्य रेखा के पास पानी गर्म होता है। तो     कुछ क्षेत्रों में पानी 30 डिग्री\u0026nbsp;तक होता है। जबकि ध्रुवों के पास पानी     का तापमान हिमांक बिंदु तक कम हो जाता है। सबसे कम तापमान -2 डिग्री सेल्सियस     मापा गया है। प्रशांत महासागर के गर्म पानी में प्रचुर मात्रा में सीलिफ़ पाया     जाता\u0026nbsp;है, जैसे कि डॉल्फ़िन, मछलियाँ और घोंघे, प्रवाल भित्तिया।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रशांत महासागर में द्वीप\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदुनिया के अधिकांश द्वीप प्रशांत महासागर में पाए     जाते हैं। प्रशांत क्षेत्र में वास्तव में 25,000 से अधिक द्वीप हैं और उनमें     से अधिकांश दक्षिणी प्रशांत में भूमध्य रेखा के दक्षिण में पाए जाते हैं। क्या     आप जानते हैं कि इंडोनेशिया में 17,508 द्वीप हैं। जापान में लगभग 3,000 द्वीप     हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eमहासागर में प्रवाल द्वीप हैं जो एक     लैगून से घिरे हैं। दुनिया के अधिकांश एटोल प्रशांत महासागर में स्थित हैं।     चूंकि एटोल केवल गर्म समुद्र के पानी में पाए जाते हैं। सबसे अधिक एटोल     ऑस्ट्रेलिया में बैरियर रीफ के कोरल सी आइलैंड में पाया जाता\u0026nbsp;हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eप्रशांत महासागरों में द्वीपों के कई सुंदर समूह पाए जाते     हैं। ये द्वीप एक द्वीपसमूह बनाते हैं। जैसे फिजी आर्कपेलैगो या हवाई     द्वीपसमूह। मुख्य रूप से द्वीपसमूह या द्वीपों के समूहों से युक्त सबसे बड़े     देश प्रशांत महासागर में स्थित हैं। ये इंडोनेशिया, जापान, फिलीपींस और     न्यूजीलैंड हैं। दरअसल इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्वीपसमूह देश है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/741811374824735965"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/741811374824735965"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/pacific-ocean-in-hindi.html","title":"प्रशांत महासागर कहां पर है - pacific ocean in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-Pmr55XhsSdA/X3gKCvXah-I/AAAAAAAAELc/yOYCdzNTehUsZAiss90664W9HBjLhdTYQCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_100716.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6660633546238353526"},"published":{"$t":"2020-07-31T08:31:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-11T23:36:36.078+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"महासागर किसे कहते हैं - पृथ्वी पर कितने महासागर है"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपृथ्वी के 71 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाला विशाल जल भौगोलिक रूप से अलग-अलग नामित क्षेत्रों में विभाजित है। इन क्षेत्रों के बीच की सीमाएं विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और वैज्ञानिक कारणों से समय के साथ विकसित हुई हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eऐतिहासिक रूप से, चार नामित महासागर बेसिन हैं: अटलांटिक, प्रशांत, हिन्द और आर्कटिक। हालांकि, अधिकांश देश -\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/united-states-of-america-in-hindi.html\"\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका\u003c/a\u003e\u0026nbsp;सहित - अब दक्षिणी (अंटार्कटिक) को पांचवें महासागर बेसिन के रूप में मान्यता देते हैं। प्रशांत, अटलांटिक और हिन्द सबसे अधिक ज्ञात महासागर हैं। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमहासागर किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003eमहासागर \u003c/b\u003eखारे पानी का संग्रह होता है\u0026nbsp;जो   पृथ्वी की सतह   पर विशाल बेसिन में निहित है।   अंतरिक्ष से   देखने\u0026nbsp;पर पृथ्वी के महासागरों की विशालता स्पष्ट रूप दिखाई देता है। पृथ्वी   की सतह का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा है समुद्र से ढका हुआ है।\u0026nbsp;जिसकी औसत गहराई   3,688 मीटर है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जैसा कि विश्व महासागर पृथ्वी के जलमंडल का प्रमुख घटक है। यह जीवन का अभिन्न अंग   है। कार्बन चक्र का हिस्सा है, और जलवायु और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है।   विश्व महासागर 230,000 ज्ञात प्रजातियों का निवास स्थान है। इसका अधिकांश हिस्सा   गहराई पर\u0026nbsp;है। इसलिए महासागर में मौजूद प्रजातियों की संख्या बहुत बड़ी है।   पृथ्वी के महासागरों की उत्पत्ति अज्ञात है। माना जाता है की जीवन यही से विकशित   हुआ है। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसमुद्र का सबसे गहरा बिंदु\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eमहासागर में सबसे गहरा बिंदु मारियाना ट्रेंच है, जो उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के पास प्रशांत महासागर में स्थित है। इसकी अधिकतम गहराई 10,971 मीटर होने का अनुमान लगाया गया है। ब्रिटिश नौसैनिक पोत चैलेंजर ने 1951 में खाई का सर्वेक्षण किया और खाई के सबसे गहरे हिस्से को \"चैलेंजर डीप\" नाम दिया। 1960 में, ट्राएस्टे सफलतापूर्वक खाई की तह तक पहुँच गया, जिसमें दो आदमियों का एक दल था।\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-tyfM5NAuz3M/XyORNWIMOkI/AAAAAAAADaI/wcSe4qu7GlUA0orKZ8Fsb6Vej3WfzZA2ACLcBGAsYHQ/s1600/20200731_085257.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"महासागर किसे कहते हैं - पृथ्वी पर कितने महासागर है what is the ocean called\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"auto\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-tyfM5NAuz3M/XyORNWIMOkI/AAAAAAAADaI/wcSe4qu7GlUA0orKZ8Fsb6Vej3WfzZA2ACLcBGAsYHQ/w640-h426/20200731_085257.jpg\" title\u003d\"महासागर किसे कहते हैं - पृथ्वी पर कितने महासागर है what is the ocean called\" width\u003d\"100%\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e  \u003ch2 style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी पर कितने महासागर है\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"clear: both; text-align: left;\"\u003e    पृथ्वी पर कुल पांच महासागर हैं।     प्रशांत महासागर,     अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर,     आर्कटिक महासागर और अंटार्कटिक महासागर या     दक्षिणी महासागर।   \u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e1 प्रशांत महासागर\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- यह   एशिया और   आस्ट्रेलिया को अमेरिका से अलग करता है। इसका क्षेत्रफल\u0026nbsp; \u0026nbsp;168,723,000   वर्ग किमी में फैला\u0026nbsp;है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e2 अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;-\u003c/b\u003e\u0026nbsp;यूरोप  और अफ्रीका से   अमेरिका को अलग करता है। इसका क्षेत्रफल\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u0026nbsp;85,133,000 वर्ग किमी   है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e3 हिंद महासागर\u003c/b\u003e  की सीमाएं दक्षिणी एशिया और अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया को अलग करती हैं। यह   70,560,000 वर्ग किमी में फैला है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e4 दक्षिणी महासागर\u003c/b\u003e अंटार्कटिका को घेरता है। कभी-कभी प्रशांत, अटलांटिक और   हिन्द महासागरों का विस्तार माना जाता था। 21.960.000 वर्ग किमी में फैला है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  \u003cb\u003e5 आर्कटिक महासागर\u003c/b\u003e की सीमाएँ उत्तरी उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया और   आर्कटिक के हिस्से तक फैला\u0026nbsp; हैं। यह\u0026nbsp;\u0026nbsp;15,558,000 वर्ग किमी में   फैला है। \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व महासागर\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eखारे पानी के वैश्विक, परस्पर जुड़े जल भाग को \"विश्व महासागर\" या वैश्विक महासागर के रूप में जाना जाता है। पानी से भरा विशाल जल भाग समुद्र विज्ञान के लिए मौलिक महत्व रखता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व महासागर की समकालीन अवधारणा 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में रूसी समुद्र विज्ञानी यूली शोकाल्स्की द्वारा महासागर को संदर्भित करने के लिए गढ़ी गई थी जो पृथ्वी के अधिकांश भाग को कवर करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपोस्ट-ग्लेशियल रिबाउंड और समुद्र के स्तर में वृद्धि लगातार विश्व महासागर की तटरेखा और संरचना को बदल रही है। उस ने कहा कि एक वैश्विक महासागर पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में मौजूद है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजलमंडल का कुल द्रव्यमान लगभग 1.4 क्विंटल टन है, जो पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का लगभग 0.023% है। पृथ्वी पर 3% से कम पिने योग्य पानी है जबकि बाकी खारा पानी है, जिसका लगभग सारा हिस्सा समुद्र में है। विश्व महासागर का क्षेत्रफल लगभग 361.9 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जो पृथ्वी की सतह का लगभग 70.9% भाग को कवर करता है, और इसका आयतन लगभग 1.335 बिलियन क्यूबिक किलोमीटर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहासागर कीऔसत गहराई लगभग 3,688 मीटर है, और इसकी अधिकतम गहराई मारियाना ट्रेंच 10,994 मीटर (6.831 मील) है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदुनिया का लगभग आधा समुद्री जल 3,000 मीटर से अधिक गहरा है। गहरे समुद्र का विशाल विस्तार पृथ्वी की सतह के लगभग 66% हिस्से को कवर करता है। इसमें वे समुद्र शामिल नहीं हैं जो विश्व महासागर से नहीं जुड़े हैं, जैसे कैस्पियन सागर।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहासागर का नीला रंग का प्रमुख कारण कार्बनिक पदार्थ और क्लोरोफिल हैं। नाविकों ने बताया है कि समुद्र में अक्सर रात में एक चमक दिखाई देता है जो मीलों तक फैली हुई होती है।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसमुद्री धाराएं क्या होती है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eमहासागरीय धारा, हवा, कोरिओलिस प्रभाव और तापमान, लवणता के अंतर सहित पानी पर काम करने वाली कई ताकतों द्वारा उत्पन्न समुद्री जल की एक निरंतर गति है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगहराई की रूपरेखा और अन्य धाराओं की दिशा महासागरीय धारा को प्रभावित करती है। महासागरीय धाराएँ मुख्य रूप से क्षैतिज जल संचलन हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहासागरीय धारा बहुत दूर तक प्रवाहित होती है और साथ में वे वैश्विक कन्वेयर बेल्ट बनाते हैं, जो पृथ्वी के कई क्षेत्रों की जलवायु को निर्धारित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविशेष रूप से, महासागरीय धाराएँ उन क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं जिनसे वे यात्रा करते हैं। उदाहरण के लिए, अधिक समशीतोष्ण तटों के साथ यात्रा करने वाली गर्म धाराएं उन पर चलने वाली समुद्री हवाओं को गर्म करके क्षेत्र के तापमान में वृद्धि करती हैं। शायद सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण गल्फ स्ट्रीम है, जो उत्तर पश्चिमी यूरोप को समान अक्षांश पर किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक समशीतोष्ण बनाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएक अन्य उदाहरण लीमा, पेरू है, जहां हम्बोल्ट करंट के प्रभाव के कारण उष्णकटिबंधीय अक्षांशों की तुलना में उपोष्णकटिबंधीय होने के कारण, जलवायु ठंडी है। महासागरीय धाराएं जल की गति का पैटर्न हैं जो दुनिया भर के जलवायु क्षेत्रों और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवे मुख्य रूप से हवाओं और समुद्री जल घनत्व द्वारा संचालित होते हैं, हालांकि इसके कई अन्य कारक भी होते है जैसे - समुद्र बेसिन के आकार।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसमुद्री धाराएँ दो प्रकार की होती है - सतही और गहरे पानी की धाराएँ - पूरे ग्रह में समुद्र के पानी के चरित्र और प्रवाह को परिभाषित करने में ये मददगार होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमहासागर से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e5 महासागर कौन से हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविश्व के 5 महासागर - अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर, हिंदी महासागर, आर्कटिक और\u0026nbsp; दक्षिणी महासागर (अंटार्कटिक) हैं। प्रशांत महासागर सबसे बड़ा महासागर हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eमहासागर के बारे में 5 तथ्य क्या हैं?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eहमारे महासागर पृथ्वी की सतह के 70 प्रतिशत से अधिक भाग को कवर करते हैं।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपृथ्वी पर अधिकांश जीवन जलीय है। जो महासागर में पाए जाते है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमहासागरों के पांच प्रतिशत से भी कम का पता लगाया गया है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदुनिया की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला महासागर के भीतर है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदुनिया के सभी संग्रहालयों की तुलना में समुद्र के नीचे अधिक ऐतिहासिक कलाकृतियाँ हैं।\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eपृथ्वी पर सबसे गर्म महासागर किस महासागर को कहा जाता है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहिंद महासागर विश्व का सबसे गर्म महासागर है। लंबे समय तक किया गया तापमान के रिकॉर्ड से पता चला है की हिंद महासागर में 1901–2012 के दौरान लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस (34.2 डिग्री फ़ारेनहाइट) निरंतर तापमान में वृद्धि देखी गयी है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसमुद्र खारा क्यों है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसमुद्र में नमक दो स्रोतों से आता है: भूमि से अपवाह और समुद्र तल में उद्घाटन से, चट्टानें समुद्री जल में घुले लवणों का प्रमुख स्रोत हैं। वर्षा जल थोड़ा अम्लीय होता है, इसलिए यह चट्टानों को नष्ट कर देता है। जो पानी के साथ बहकर समुद्र में मिल जाते है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eविश्व का सबसे बड़ा महासागर कौन सा है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रशांत महासागर विश्व महासागरीय घाटियों में सबसे बड़ा और सबसे गहरा है। लगभग 63 मिलियन वर्ग मील में फैला और पृथ्वी पर आधे से अधिक मुक्त पानी से युक्त है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6660633546238353526"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6660633546238353526"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post.html","title":"महासागर किसे कहते हैं - पृथ्वी पर कितने महासागर है"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-tyfM5NAuz3M/XyORNWIMOkI/AAAAAAAADaI/wcSe4qu7GlUA0orKZ8Fsb6Vej3WfzZA2ACLcBGAsYHQ/s72-w640-c-h426/20200731_085257.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4567446500580756768"},"published":{"$t":"2020-07-30T13:36:00.000+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-01T20:43:17.152+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"अरावली पर्वतमाला कहां है - Aravali Ranges"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली पर्वत\u003c/b\u003e\u0026nbsp;भारत के पश्चिमी भाग में सबसे लोकप्रिय पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तक लगभग 300 मील की दूरी पर फैले अरावली राजस्थान राज्य को अपने विस्तार में रोकते हैं। अरावली पर्वतमाला के सबसे ऊंचे स्थान को गुरु शिखर कहा जाता है, जो माउंट आबू में स्थित है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरावली पर्वत कहां है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eअरावली पर्वत उत्तर पश्चिमी भारत में स्थित एक पर्वत श्रृंखला है। इसकी कुल\u0026nbsp;लंबाई लगभग 430 मील है और यह पर्वतमाला\u0026nbsp;भारत के उत्तरी भाग\u0026nbsp;दिल्ली\u0026nbsp;और\u0026nbsp;हरियाणा से होकर गुजरती है। तथा\u0026nbsp;गुजरात में समाप्त होती है। इस श्रेणी में स्थित चोटियों की\u0026nbsp;चौड़ाई 6 मील और 60 मील के बीच है और ऊँचाई 1,000 फीट से 3,000 फीट के बीच है। सबसे ऊंची चोटी 1,722 मीटर है जिसे\u0026nbsp;गुरु शिखर कहते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरावली\u0026nbsp;पर्वतमाला\u0026nbsp;भारत में गुना पहाड़ों की सबसे पुरानी श्रेणी है। अरावली पर्वतमाला का प्राकृतिक इतिहास उस समय का है जब इंडियन प्लेट एक महासागर द्वारा यूरेशियन प्लेट से अलग हो गया था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्राचीन काल में, अरावली बहुत ऊँची थी। लेकिन लाखों वर्षों के मौसम के प्रभाव के कारण ऊचाई कम होने लगी\u0026nbsp;है। जबकि हिमालय के पहाड़ अभी भी लगातार बढ़ रहे हैं। पृथ्वी की पपड़ी में टेक्टोनिक प्लेटों की गति का\u0026nbsp;बढ़ना रुक गया है। इसलिए अरावली हिमालय की तरह बढ़ नहीं रहा है।\u0026nbsp;अरावली पर्वतमाला\u0026nbsp;प्राचीन पृथ्वी के दो क्रस्ट खंडों में शामिल है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तर पश्चिमी भारत की अरावली, दुनिया के सबसे पुराने गुना पहाड़ों में से एक है। जिसकी\u0026nbsp;300 मीटर से लेकर 900 मी तक की ऊंचाई है। गुजरात के हिम्मतनगर से लेकर हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली तक फैला है।\u0026nbsp;अरावली पर्वत श्रंखला की अनुमानित आयु 570 मिलियन वर्ष है। अरावली पर्वत का 80 % भाग राजस्थान में है। जबकि शेष भाग दिल्ली और हरियाणा में है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरावली पर्वतमाला\u0026nbsp;की विशेषताएं\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरावली पर्वतमाला भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है और इसका निर्माण तब हुआ है जब भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट समुद्र से अलग हो गए थे। पर्वतमाला का गठन प्रीकैम्ब्रियन युग के दौरान अरावली-दिल्ली ऑरोजेन नामक एक घटना के दौरान हुआ था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अतिरिक्त, अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी में है। जो भारतीय\u0026nbsp;प्रायद्वीप\u0026nbsp;के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। पर्वतमाला पृथ्वी की पपड़ी के दो खंडों को मिलाती है जो भारतीय क्रेटन को बनाते हैं। अरावली क्रेटन और बुंदेलखंड क्रेटन।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्वतमाला का उत्तरी भाग, जो चट्टानी हैं अलग-अलग पहाड़ियों से बना है जो\u0026nbsp;हरियाणा और दिल्ली तक फैला हुआ है। जबकि दक्षिणी छोर पालनपुर में स्थित है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरावली पर्वतमाला का उत्तरी विस्तार जो दिल्ली\u0026nbsp;में स्थित है, को दिल्ली पर्वतमाला कहा जाता है। यह क्वार्टजाइट चट्टानों से बना है। तुगलकाबाद से वजीराबाद तक फैला है और मध्य दिल्ली में समाप्त होने से पहले दक्षिणी दिल्ली से होकर गुजरता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिल्ली रेंज राजस्थान में रेगिस्तान की गर्म हवाओं से शहर की रक्षा करता है। दिल्ली रेंज ने केन्या के नैरोबी के बाद दिल्ली को दुनिया का दूसरा सबसे अधिक पक्षी संपन्न राजधानी शहर बना दिया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरावली पर्वत का\u0026nbsp;सर्वोच्च शिखर\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअरावली पर्वतमाला\u0026nbsp;में सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर है, जो माउंट अर्बुडा पर स्थित है और इसकी ऊंचाई 5,650 फीट है। यह चोटी राजस्थान में माउंट आबू से लगभग 9.3 मील की दूरी पर स्थित है। \"गुरु की चोटी\" के रूप में भी जाना जाता है। गुरु शिखर का नाम दत्तात्रेय के नाम पर रखा गया है। जो की एक हिंदू देवता है और शिखर पर एक गुफा है जो उन्हें समर्पित एक मंदिर है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6dYK9xRFVbo/X2cz1w4pezI/AAAAAAAAD1g/MqXIJU1PV6QysB20TfJPGIufh7PBOcDQwCLcBGAsYHQ/s600/20200920_161906.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अरावली पर्वतमाला\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"375\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"200\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6dYK9xRFVbo/X2cz1w4pezI/AAAAAAAAD1g/MqXIJU1PV6QysB20TfJPGIufh7PBOcDQwCLcBGAsYHQ/w320-h200/20200920_161906.webp\" title\u003d\"अरावली पर्वतमाला\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली पर्वतमाला में बहने वाली\u0026nbsp;नदियां\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलूनी, साहिबी और चंबल तीन मुख्य नदियाँ अरावली रेंज से होकर बहती हैं। लूनी नदी पुष्कर घाटी से कच्छ के रण तक फैली हुई है, जबकि साहिबी और चंबल नदियाँ यमुना की शाखाएँ हैं। उत्तर-दक्षिण में बहने वाली नदियाँ की तरह, लूनी राजस्थान सीमा के पश्चिमी ढलानों से शुरू होती हैं और थार रेगिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से से होकर गुजरात में बहती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपश्चिम-उत्तर की ओर बहने वाली नदियाँ राजस्थान से निकलती हैं और दक्षिणी हरियाणा में बहने से पहले शेखावाटी क्षेत्र से होकर बहती हैं। साहिबी नदी मनोहरपुर के पास से निकलती है और हरियाणा से होकर दिल्ली तक जाती है। जहां यह यमुना में मिल जाती है। पश्चिम-उत्तर-पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ जैसे चंबल, राजस्थान सीमा के पूर्वी हिस्से से निकलती हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअरावली पर्वतमाला की प्रमुख चोटियां\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003ctable\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003cth\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: start;\"\u003eपर्वतमाला\u003c/span\u003e\u003c/th\u003e\u003cth\u003eस्थान\u003c/th\u003e\u003cth\u003eउचाई मी.\u003c/th\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eजरगा पर्वतमाला\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eउदयपुर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1431\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eअचलगढ पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1380\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eलोहार्गल पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eझुंझनु\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1051\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eऋषिकेश पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1017\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eखो पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eजयपुर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e920\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eतारागढ पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eअजमेर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e870\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eभेराच पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eअलवर, तोशाम\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eआबू पर्वत पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1295\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eकुम्भलगढ़ पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eराजसमंद\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1224\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eजेलिया डूंगर पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eउदयपुर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1197\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eगुरु शिखर पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1722\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eसेर पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1597\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eदिलवाडा\u0026nbsp;पर्वतमाला\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1442\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eजयराज की पहाड़ी\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसिरोही\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1090\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eरघुनाथगढ पर्वतमाला\u003c/td\u003e\u003ctd\u003eसीकर\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\u003ctd\u003e1055\u0026nbsp;\u003cbr /\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमहत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv style\u003d\"background-color: lightblue; float: left; margin-top: 7px; padding: 10px 15px;\"\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली रेंज किस राज्य में स्थित है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तर - राजस्थान राज्य, अरावली रेंज, उत्तरी भारत की पहाड़ी प्रणाली हैं जो\u0026nbsp;राजस्थान राज्य के माध्यम से 350 मील तक\u0026nbsp;पूर्वोत्तर में चलती\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली पर्वतमाला का निर्माण कब हुआ था?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपर्वत माला का निर्माण पृथ्वी के गर्म लावा का धरताल पर प्रगट होने से होता हैं। दुनिया के इन सबसे पुराने पहाड़ों को बनाने के लिए टेक्टोनिक प्लेटों और मैग्मा के बाहर निकलने में लगभग दो बिलियन वर्ष लगे हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली पर्वतमाला कितनी पुरानी है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूवैज्ञानिकों का कहना है कि यह पर्वत श्रंखला 350\u0026nbsp; करोड़ वर्ष पुरानी है जो हिमालय पर्वतमाला से भी पुरानी है। इस प्रकार यह भारत में वलित पर्वतों की सबसे पुरानी श्रेणी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली क्यों महत्वपूर्ण है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरावली पूर्व में उपजाऊ\u0026nbsp;मैदानों\u0026nbsp;और पश्चिम में रेतीले रेगिस्तान के बीच एक बाधा के रूप में कार्य करती है। ऐतिहासिक रूप से, यह कहा जाता है कि अरावली रेंज ने थार रेगिस्तान के भारत-गंगा के मैदानों की ओर फैलने से रोकती हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअरावली जैव विविधता में समृद्ध है और 300 देशी पौधों की प्रजातियों, 120 पक्षी प्रजातियों और सियार और नेवले जैसे कई विशिष्ट जानवरों को आवास प्रदान करती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअरावली कितने राज्यों से होकर गुजरती है?\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e692 किमी के क्षेत्र में फैले अरावली गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा राज्यों को कवर करते हैं। अरावली का निर्माण लाखों साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप का मुख्य भूमि यूरेशियन प्लेट के टकराने से हुआ था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003col\u003e\u003c/ol\u003e\u003cdiv\u003e  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4567446500580756768"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4567446500580756768"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/aravali-ranges.html","title":"अरावली पर्वतमाला कहां है - Aravali Ranges"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-6dYK9xRFVbo/X2cz1w4pezI/AAAAAAAAD1g/MqXIJU1PV6QysB20TfJPGIufh7PBOcDQwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h200/20200920_161906.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5590877003217787279"},"published":{"$t":"2020-07-30T10:41:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-04-30T22:18:25.948+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"थार का रेगिस्तान कहां है - thar marusthal kahan per hai"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6Av0dGAzbCg/X3gKDXVu-7I/AAAAAAAAELc/rCBK1y5KlZYHmNQgwsRvTHar4nuhG2UTACPcBGAYYCw/s600/20201003_100918.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6Av0dGAzbCg/X3gKDXVu-7I/AAAAAAAAELc/rCBK1y5KlZYHmNQgwsRvTHar4nuhG2UTACPcBGAYYCw/s320/20201003_100918.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003eथार रेगिस्तान \u003c/b\u003eजिसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट के रूप में भी जाना जाता है।   भारतीय उपमहाद्वीप  के उत्तर-पश्चिमी भाग में एक बड़ा शुष्क क्षेत्र है जो 200,000 किमी के क्षेत्र   में फैला\u0026nbsp;है।   भारत और   पाकिस्तान के बीच एक प्राकृतिक सीमा बनाता है। यह दुनिया का 17 वां सबसे बड़ा रेगिस्तान   है। और दुनिया का 9 वां सबसे बड़ा उपोष्णकटिबंधीय   रेगिस्तान है। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  थार रेगिस्तान का लगभग 85% हिस्सा भारत के भीतर स्थित है। तथा\u0026nbsp; शेष 15%   पाकिस्तान में है। भारत में, यह लगभग 170,000 किमी क्षेत्र में\u0026nbsp;है। और   रेगिस्तान के शेष 30,000 किमी भाग\u0026nbsp;पाकिस्तान के भीतर है। थार रेगिस्तान भारत   के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 5%\u0026nbsp; है। रेगिस्तान का 60% से अधिक हिस्सा   भारतीय राज्य   \u003cb\u003eराजस्थान \u003c/b\u003eमें   है। और यह   गुजरात,   पंजाब और हरियाणा और सिंध के पाकिस्तानी प्रांत में फैला हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के भीतर, थार चोलिस्तान कहा जाता\u0026nbsp;है। रेगिस्तान     में एक बहुत शुष्क भाग पश्चिम में स्थित है इसके अलावा\u0026nbsp;पूर्व में रेत के     टीले और थोड़े वर्षा वाले सेमीडेसर्ट क्षेत्र भी हैं।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eथार का भूगोल\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    थार रेगिस्तान के\u0026nbsp;उत्तर-पूर्व में     अरावली पहाड़ि फैला है। तट के किनारे     कच्छ का महान रण    और उत्तर-पश्चिम में सिंधु नदी का जलोढ़ मैदान है।\u0026nbsp;अधिकांश रेगिस्तानी     क्षेत्र में विशाल शिफ्टिंग रेत के टीले हैं जो जलोढ़ मैदानों का निर्माण     करते\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;मानसून\u0026nbsp;की शुरुआत से पहले तेज हवाओं के कारण रेत अत्यधिक उड़ती     है। लूणी नदी रेगिस्तान में एकमात्र नदी है। वर्षा 100-500 मिमी (4–20 इंच)     प्रति वर्ष तक सीमित है। ज्यादातर जुलाई से सितंबर तक बारिश होता\u0026nbsp;है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    थार रेगिस्तान के भीतर खारे पानी की झीलों में से है - सांभर, कुचामन, डीडवाना,     राजस्थान में पचपदरा और फलौदी और गुजरात में खड़गोडा झील\u0026nbsp;शामिल हैं। ये     झीलें मानसून के दौरान वर्षा जल प्राप्त करती हैं और शुष्क मौसम के दौरान     वाष्पित हो जाती हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    माघरेब के प्रागैतिहासिक ऐटेरियन संस्कृति से संबंधित लिथिक उपकरण थार     रेगिस्तान में मध्य पुरापाषाण काल \u200b\u200bमें खोजे गए हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैव विविधता\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  रेगिस्तान में रेत की परतें पहाड़ी और रेतीले मैदानों से फैली हुई हैं। विविध   आवास और पारिस्थितिकी तंत्र के कारण, शुष्क क्षेत्र में वनस्पति, मानव संस्कृति   और पशु जीवन दुनिया के अन्य रेगिस्तानों के विपरीत बहुत समृद्ध है। छिपकली की   लगभग 23 प्रजातियाँ और साँपों की 25 प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।   \u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    कुछ वन्यजीव प्रजातियां, जो भारत के अन्य हिस्सों में तेजी से लुप्त हो रही     हैं, रेगिस्तान में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जैसे कि ब्लैक बक, चिंकारा और     कच्छ के रण में भारतीय जंगली गधा। उन्होंने उत्कृष्ट अस्तित्व की रणनीतियों का     विकास किया है। उनका आकार विभिन्न परिस्थितियों में रहने वाले अन्य समान     जानवरों की तुलना में छोटा है।\u0026nbsp; और वे मुख्य रूप से निशाचर हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    रेगिस्तान में इन जानवरों के अस्तित्व के लिए जिम्मेदार कुछ अन्य कारक हैं।     स्थानीय समुदाय द्वारा प्रदान किया गया संरक्षण भी एक कारक है। थार रेगिस्तान     के अन्य स्तनधारियों में लाल लोमड़ी\u0026nbsp; संख्या बड़ी है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eआबादी\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  थार मरुस्थल दुनिया में सबसे व्यापक रूप से आबादी वाला मरुस्थल है।\u0026nbsp; जिसकी   जनसंख्या घनत्व 83 व्यक्ति प्रति किमी 2 है। भारत में, निवासियों में हिंदू, जैन,   सिख और मुस्लिम शामिल हैं। पाकिस्तान में, निवासियों में मुस्लिम और हिंदू दोनों   शामिल हैं।   \u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    राजस्थान की कुल आबादी का लगभग 40% थार रेगिस्तान में रहते हैं। लोगों का मुख्य     व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। परंपरा से समृद्ध एक रंगीन संस्कृति इस रेगिस्तान     में विद्यमान है। लोगों को लोक संगीत और लोक कविता के लिए एक बड़ा जुनून है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    जोधपुर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर स्क्रब वन क्षेत्र में स्थित है। बीकानेर     और जैसलमेर रेगिस्तान में स्थित हैं। एक बड़ी सिंचाई और बिजली परियोजना ने कृषि     के लिए उत्तरी और पश्चिमी रेगिस्तान के क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया है। छोटी     आबादी ज्यादातर देहाती है।\u003cbr /\u003e  \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eउद्योग\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  राजस्थान भारत में खनन में पहले से प्रतिष्ठित है। ताजमहल का निर्माण नागौर जिले   के सफेद संगमरमर से किया गया था। राज्य भारत में सीमेंट का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत   है। जोधपुर में बलुआ पत्थर ज्यादातर स्मारकों, महत्वपूर्ण इमारतों और आवासीय   भवनों में उपयोग किया जाता है। इस पत्थर को \"चित्तर पटथर\" कहा जाता है।   \u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    जोधपुर में लाल पत्थर की खदानें भी हैं, जिन्हें स्थानीय घाटू पथर के नाम से     जाना जाता है। बलुआ पत्थर जोधपुर और नागुआर जिलों में पाया जाता है। जालोर     ग्रेनाइट का सबसे बड़ा केंद्र है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    बाड़मेर जिले के गिरल, कपूरडी, जालिपा, भड़का स्थानों पर लिग्नाइट कोयला पाया     जाता\u0026nbsp;हैं। बीकानेर जिले में प्लाना, गुढ़ा, बिथनोक, बरसिंहपुर, मंडला चरण,     रनेरी हदला और नागौर जिले में कसनू, मेड़ता, लूणसर आदि का खदान है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5590877003217787279"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5590877003217787279"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/thar-marusthal-kahan-per-hai.html","title":"थार का रेगिस्तान कहां है - thar marusthal kahan per hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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जनसंख्या"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अफ्रीका महाद्वीप आबादी और क्षेत्रफल के आधार पर एशिया के बाद दुनिया का दूसरा\n  सबसे बड़ा महाद्वीप हैं। यह पृथ्वी के कुल क्षेत्र का 6 प्रतिशत और भूमि क्षेत्र\n  का 20 प्रतिशत शामिल है। 2018 तक 1.3 बिलियन लोग निवास करते है जो की दुनिया की\n  कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअफ्रीका महाद्वीप\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  सभी महाद्वीपों में अफ्रीका की औसत जनसंख्या सबसे कम है। प्राकृतिक संसाधनों की\n  अधिकता के बावजूद, महाद्वीप प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है। यहाँ के अधिकतक देश\n  बहुत गरीब है। यूरोपीय उपनिवेशवाद के कारण आर्थिक विस्तार और व्यापार में कमी है।\n  इसके अलावा जंगल और मरुस्थल होने के कारण कृषि बहुत कम होती है। इन्ही कारणों से\n  यहाँ विकास की दर बहुत धीमी रही है।\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअफ्रीका महाद्वीप में कितने देश हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अफ्रीका महाद्वीप में 54 देश है। यह महाद्वीप उत्तर में भूमध्य सागर, लाल सागर,\n  दक्षिण में हिंद महासागर और पश्चिम में अटलांटिक महासागर से घिरा हुआ है। अफ्रीका\n  महाद्वीप का कुल क्षेत्रफल 3 करोड़ 3 लाख किमी से अधिक हैं। अफ्रीका महाद्वीप का\n  सबसे बड़ा द्वीप मेडागास्कर हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अल्जीरिया अफ्रीका का सबसे बड़ा देश है। अफ्रीकी देशो ने आर्थिक और सामाजिक\n  कल्याण के लिए एक संघ स्थापना की है, जिसे अफ्रीकी संघ से जाना जाता है। इसका\n  मुख्यालय इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eसहारा मरुस्थल\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  सहारा का आकार ऐतिहासिक रूप से बेहद परिवर्तनशील रहा है। जिसका क्षेत्र तेजी से\n  उतार-चढ़ाव वाला रहा है कई बार यह जलवायु परिस्थितियों के आधार पर लुप्त हो गया\n  था। हिम युग के अंत में लगभग 10500 ईसा पूर्व सहारा एक उपजाऊ घाटी थी। रॉक कला\n  चित्रों द्वारा इस क्षेत्र को उपजाऊ चित्रण किया गया हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  लगभग 3500 ईसा पूर्व पृथ्वी की कक्षा में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने लगा जिसके\n  कारण सहारा का क्षेत्र मरुस्थल में परिवर्तित हो गया। यहाँ बसें लोग सहारा\n  क्षेत्र से निकलकर नील नदी की ओर चले गए। जहाँ उन्होंने स्थायी बस्तियाँ बनाईं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  मध्य और पूर्वी अफ्रीका में लगातार बारिश की कमी और जलवायु परिवर्तन होने लगी। इस\n  समय के बाद से पूर्वी अफ्रीका में पिछले 200 वर्षों से सूखे की स्थिति बनी हुयी\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअफ्रीका का इतिहास \u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  अफ्रीका को पृथ्वी पर सबसे पुराना बसेरा कहा जाता है। इस महाद्वीप की उत्पत्ति\n  मानव प्रजातियों के साथ हुयी है। 20 वीं शताब्दी के मध्य में वैज्ञानिको ने मानव\n  के कई जीवाश्मों की खोज की है। जो लगभग 7 मिलियन साल पुराना हैं। शोध से पता चला\n  है, प्रारंभिक एपेलिक मानव से आधुनिक मानव का विकाश यही से हुआ हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  होमो सेपियन्स के विकास के बाद अफ्रीका में रहने वाले लोगों ने इसे छोड़ दुनिया\n  के बाकी हिस्सों में चले गए। प्राचीन मानव सभ्यताएं उत्तरी अफ्रीका में विकसित\n  हुआ था। माना जाता हैं की सबसे पहले संस्कृतियों और भाषाओं का विकास अफ्रीका\n  महाद्वीप में हुआ था।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  पिछले 400 वर्षों में अफ्रीका महाद्वीप पर यूरोपीयों का प्रभाव रहा है। 16 वीं\n  शताब्दी के शुरू में ये व्यापार करने आये थे जिसके बाद यहाँ के निवासी को गुलाम\n  बनाया गया और हजारों लोगो को गुलाम बनाकर अमेरिका जैसे देशों में ले जाया गया था।\n\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GEudcthwj1k/YKuKsgpaqKI/AAAAAAAAE7g/QrxGANCfpRkjzcJXptyTQAJUEuU1Vq2vACLcBGAsYHQ/s800/20210524_164211.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अफ्रीका महाद्वीप - africa mahadeep in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"800\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GEudcthwj1k/YKuKsgpaqKI/AAAAAAAAE7g/QrxGANCfpRkjzcJXptyTQAJUEuU1Vq2vACLcBGAsYHQ/w240-h320/20210524_164211.webp\" title\u003d\"अफ्रीका महाद्वीप - africa mahadeep in hindi\" width\u003d\"240\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  19 वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों ने लगभग सभी अफ्रीका देशो को उपनिवेश बना लिया\n  था। 20 वीं शताब्दी में अफ्रीका के अधिकांश क्षेत्रों का विखंडन किया गया ताकि\n  संसाधनों को आसानी से निकाला जा सके।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्रारंभिक सभ्यता\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  अफ्रीका में प्राचीन सभ्यताओं का एक समृद्ध इतिहास रहा है। पूर्वी और दक्षिणी\n  अफ्रीका में पाए जाने वाले मानव जीवाश्मों से पता चला है की अफ्रीकी महाद्वीप\n  मानव जाति का जन्म स्थान है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अफ्रीका में कई महान सभ्यताएं विकसित हुयी हैं, जैसे कि प्राचीन मिस्र, न्युबियन,\n  कार्थाजियन, अक्सुमाइट, घाना साम्राज्य, माली साम्राज्य, सोंघई साम्राज्य और\n  बेनिन साम्राज्य आदि। ये सभ्यताएं अपनी प्रभावशाली वास्तुकला, कला, विज्ञान और\n  संस्कृति के लिए जानी जाती थीं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  लगभग 3300 ईसा पूर्व में उत्तरी अफ्रीका में मिस्र की सभ्यता का उदय हुआ था। यह\n  दुनिया की सबसे लंबे अवधि तक चलने वाली सभ्यताओं में से एक हैं। मिस्र का प्रभाव\n  आधुनिक लीबिया और नूबिया तक था। प्राचीन मिस्रवासियों ने पिरामिडों का निर्माण\n  किया, जो दुनिया की सबसे प्रभावशाली संरचनाओं में से हैं। उन्होंने चिकित्सा,\n  गणित और खगोल विज्ञान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजनसंख्या \u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e2021 में अफ्रीकी महाद्वीप की आबादी लगभग 1.34 बिलियन था। जिससे यह एशिया के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप बन गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफ्रीका की जनसंख्या आने वाले दशकों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है, यह 2050 तक 2.5 अरब तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि उच्च प्रजनन दर, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार होने से हो सकता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफ्रीका की आबादी पिछले 40 वर्षों में तेजी से बढ़ी है। कुछ अफ्रीकी राज्यों में आधी से अधिक आबादी 25 साल से कम उम्र की है। 1950 में अफ्रीका में कुल लोगों की संख्या 229 मिलियन से बढ़कर 1990 में 630 मिलियन हो गई थी। 2018 तक अफ्रीका की जनसंख्या 1.3 बिलियन है। अफ्रीका की कुल जनसंख्या कई महाद्वीपों को पार कर गयी है। जिसमें यूरोप और अमेरिका शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअफ्रीका एक बहुत ही विविध महाद्वीप है, जिसमें 3,000 से अधिक जातीय समूह रहती हैं और 2,000 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह आबादी 54 अलग-अलग देशों में फैली हुई है। सभी देशों की अपनी अनूठी संस्कृति और सामाजिक विशेषताएं हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदेश और राजधानी\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cdiv\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/span\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003cthead\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eक्र.\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eदेश\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eराजधानी\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/thead\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e1.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोरक्को\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eराबट\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e2.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअल्जीरिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअल्जीयर्स\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e3.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eट्यूनीशिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eटुनिस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e4.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलीबिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eट्राइपोलि\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e5.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमिस्र\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकाइरो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e6.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसूडान\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eखार्तूम\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e7.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eइरीट्रिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअस्मारा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e8.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eजिबोटी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eजिबोटी\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e9.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसोमालिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोगदिशु\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e10.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकेन्या\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनैरोबी\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e11.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eतंज़ानिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eडोडोमा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e12.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोज़ाम्बिक\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमैपुटो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e13.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eदक्षिण अफ्रीका\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकेप टाउन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e14.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनामीबिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eविंडहोक\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e15.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअंगोला\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलुआंडा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e16.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकांगो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकीण्षासा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e17.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकांगो गणराज्य\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eब्रैज़ाविल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e18.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगैबन\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलिब्रेविल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e19.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eभूमध्यरेखीय गिनी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमालाबो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e20.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकैमरून\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eयाओंडे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e21.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनाइजीरिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअबुजा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e22.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबेनिन\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपोर्टो-नोवो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e23.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eटोगो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलोम\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e24.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eघाना\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअकरा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e25.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोटे डी आइवर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eयामौस्सोक्रो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e26.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलाइबेरिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोनरोविआ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e27.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसिएरा लियोन\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eफ्रीटाउन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e28.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगिनी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोनेक्री\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e29.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगिनी बिसाऊ\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबिस्सौ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e30.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेनेगल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eडकार\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e31.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eजाम्बिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबंजुल\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e32.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमॉरिटानिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनौकचोट\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e33.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबोत्सवाना\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगबोरोने\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e34.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबुर्किना फासो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eऔगाडौगू\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e35.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबुस्र्न्दी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगिटेगा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e36.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमध्य अफ्रीकी गणराज्य\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबांगुइ\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e37.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eचाड\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअन जमेना\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e38.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eइथियोपिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअदीस अबाबा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e39.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलेसोथो\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमासेरु\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e40.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमलावी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलिलोंग्वे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e41.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमाली\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबामाको\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e42.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनाइजर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eनिआमी\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e43.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eरवांडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकिगली\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e44.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eदक्षिण सूडान\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eजुबा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e45.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eस्वाज़ीलैंड\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eएम्बाबने\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e46.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eयूगांडा\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकाम्पाला\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e47.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eज़ाम्बिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलुसाका\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e48.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eज़िम्बाब्वे\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eहरारे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e49.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकेप वर्ड\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपरैया\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e50.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोमोरोस\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोरोनि\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e51.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमेडागास्कर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eएंटानानैरिवो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e52.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमॉरिशस\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपोर्ट लुइस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e53.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसाओ तोमे और प्रिन्सिपी\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसाओ टोम\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e54.\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेशेल्स\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eविक्टोरिया\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5252976860569023276"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5252976860569023276"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/africa-mahadeep-in-hindi.html","title":"अफ्रीका महाद्वीप - देश, मरुस्थल, इतिहास, जनसंख्या"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-GEudcthwj1k/YKuKsgpaqKI/AAAAAAAAE7g/QrxGANCfpRkjzcJXptyTQAJUEuU1Vq2vACLcBGAsYHQ/s72-w240-c-h320/20210524_164211.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4811113263855404045"},"published":{"$t":"2020-07-29T08:36:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-04-30T22:19:04.313+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"अटाकामा मरुस्थल कहां स्थित है - atacama desert in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-lgcmxpMvGp0/X3gKEInBW5I/AAAAAAAAELU/MF0b8YVnYPA1V-B5ddNbc8qCNuq1lJM-gCPcBGAYYCw/s600/20201003_101155.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-lgcmxpMvGp0/X3gKEInBW5I/AAAAAAAAELU/MF0b8YVnYPA1V-B5ddNbc8qCNuq1lJM-gCPcBGAYYCw/s320/20201003_101155.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cb\u003eअटाकामा मरुस्थल\u003c/b\u003e\u0026nbsp;दक्षिण अमेरिका    में एक रेगिस्तानी पठार है जो कि एंडीज पर्वत के पश्चिम में प्रशांत तट पर     1,600 किमी (990 मील) क्षेत्र को\u0026nbsp;कवर करता है। अटाकामा मरुस्थल दुनिया के     सबसे शुष्क मरुस्थल\u0026nbsp;क्षेत्र में से एक\u0026nbsp;है। यह ध्रुवीय रेगिस्तानों की     तुलना में कम वर्षा प्राप्त करने वाला एकमात्र रेगिस्तान है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    इन क्षेत्रों को मंगल अभियान के लिए पृथ्वी पर प्रयोग स्थलों के रूप में     इस्तेमाल किया गया है। अनुमानों के मुताबिक, अटाकामा रेगिस्तान 105,000 किमी पर     फैला हुआ\u0026nbsp;है। अधिकांश रेगिस्तान पथरीले इलाके, नमक की झीलों (सैलारों),     रेत और फेल्सिक लावा से बना है जो कि एंडीज की ओर बहता है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    शांत उत्तरी-बहने वाले हम्बोल्ट     महासागर की धारा के     कारण और मजबूत     प्रशांत महासागर    की उपस्थिति के कारण रेगिस्तानी का तापमान चरम पर है। अटाकामा मरुस्थल का सबसे     शुष्क क्षेत्र दो पर्वत श्रृंखलाओं (एंडीज और चिली कोस्ट रेंज) के बीच स्थित     है।   \u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअटाकामा मरुस्थल की जलवायु\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    समुद्र तल से\u0026nbsp; 1,500 मीटर की ऊँचाई में\u0026nbsp;अटाकामा मरुस्थल\u0026nbsp;स्थित     है।\u0026nbsp;वर्ष के अधिकांश समय मौसम\u0026nbsp;शुष्क और मध्यम ठंडी राते\u0026nbsp;होते     हैं। इस ऊंचाई के ऊपर ठंडा तापमान के साथ अटाकामा बंजर है। वर्षा की कमी     अटाकामा रेगिस्तान की सबसे प्रमुख विशेषता है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    अटाकामा मरुस्थल पृथ्वी पर सबसे पुराना मरुस्थल है, और कम से कम 3 मिलियन     वर्षों तक तापमान बढ़ता रहा\u0026nbsp;है। जिसके करण\u0026nbsp;यह पृथ्वी का सबसे पुराना     शुष्क क्षेत्र बन गया है। बाष्पीकरणीय संरचनाओं की उपस्थिति से पता चलता है कि     अटाकामा रेगिस्तान के कुछ हिस्सों में, पिछले 200 मिलियन वर्षों के लिए शुष्क     स्थिति बनी हुई है।   \u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins 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height\u003d\"281\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-vGp7l_7dsho/XyDndWbt69I/AAAAAAAADZM/4-CAQ9CdRLEYOwFkSUOAU1umrBK3lGrfACLcBGAsYHQ/s320/The-Atacama-desert-map-e1536479875941.jpg\" title\u003d\"अटाकामा मरुस्थल - Rexgin\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e      \u003ctr\u003e        \u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eअटाकामा मरुस्थल\u003c/td\u003e      \u003c/tr\u003e    \u003c/tbody\u003e  \u003c/table\u003e  \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    यह क्षेत्र इस संबंध में पृथ्वी पर अद्वितीय हो सकता है, और भविष्य के मंगल     अभियानों के लिए उपकरणों का परीक्षण करने के लिए नासा द्वारा उपयोग किया जा रहा     है। टीम ने मंगल जैसे पृथ्वी के वातावरण में वाइकिंग परीक्षणों की नकल की और     पाया कि वे अंटार्कटिक सूखी घाटियों, चिली और पेरू के अटाकामा रेगिस्तान और     अन्य स्थानों से मिट्टी के नमूनों में जीवन के वर्तमान संकेतों को देख     रहे\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4811113263855404045"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4811113263855404045"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/atacama-desert-in-hindi.html","title":"अटाकामा मरुस्थल कहां स्थित है - atacama desert in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-lgcmxpMvGp0/X3gKEInBW5I/AAAAAAAAELU/MF0b8YVnYPA1V-B5ddNbc8qCNuq1lJM-gCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_101155.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-2042200394222215677"},"published":{"$t":"2020-07-28T15:26:00.000+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-01T21:05:34.032+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"महाद्वीप किसे कहते है - continent in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ZCvL5LH64fI/X3gKELElRrI/AAAAAAAAELY/mU3s9mnks9I8Lze-B-6yjZAxHYTL3EOkwCPcBGAYYCw/s600/20201003_101241.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-ZCvL5LH64fI/X3gKELElRrI/AAAAAAAAELY/mU3s9mnks9I8Lze-B-6yjZAxHYTL3EOkwCPcBGAYYCw/s320/20201003_101241.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e  \u003cp\u003eआप जानते हैं कि विश्व में\u0026nbsp;7 महाद्वीप हैं, लेकिन क्या आप वास्तव में एक महाद्वीप की परिभाषा जानते हैं। इसकी कई अलग-अलग और भ्रमित करने वाली परिभाषाएँ हैं। सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत परिभाषा के अनुशार\u0026nbsp;एक महाद्वीप को भूमि के एक बड़े, निरंतर, असतत\u0026nbsp;द्रव्यमान\u0026nbsp;के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो महासागरों से अलग होता है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003eमहाद्वीप किसे कहते हैं\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eमहाद्वीप एक विशाल जमीन का फैलाव है जो पृथ्वी पर समुद्र से अलग दिखाई देते हैं यह आकर में काफी बड़ा होता हैं। जैसे उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका,\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया, एशिया,\u0026nbsp;अंटार्कटिका और अफ्रीका महाद्वीप।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह परिभाषा कुछ हद तक चीजों को भ्रमित करती है। वर्तमान महाद्वीपों में कई पानी से अलग भूभाग हैं लेकिन वे महाद्वीप नहीं हैं। जिसे\u0026nbsp;ग्रीनलैंड, 2,166,086 किमी 2 के साथ दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। जबकि पानी द्वारा प्राकृतिक पृथक्करण के बिना उत्तरी और दक्षिण अमेरिका और\u0026nbsp;एशिया\u0026nbsp;और अफ्रीका को महाद्वीपों के रूप में वर्गीकृत करके इसका खंडन किया जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-PWEt_asQI8c/XyDfWWDDdpI/AAAAAAAADZA/lYjyCymFGOk2INBPQ3EVYi8CKzPGNWqbACLcBGAsYHQ/s1600/world-map-and-continents-1024x791.png\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"महाद्वीप किसे कहते है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"791\" data-original-width\u003d\"1024\" height\u003d\"196\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-PWEt_asQI8c/XyDfWWDDdpI/AAAAAAAADZA/lYjyCymFGOk2INBPQ3EVYi8CKzPGNWqbACLcBGAsYHQ/w320-h196/world-map-and-continents-1024x791.png\" title\u003d\"महाद्वीप किसे कहते है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी के विकास के दौरान महाद्वीपों की संख्या बदल गई है। प्लेट टेक्टोनिक्स और महाद्वीपीय बहाव ने महाद्वीपीय संरचना में परिवर्तन किया है। पृथ्वी में पहले एक भूमि हुआ करती थी। यह महाद्वीप अचानक नहीं आये\u0026nbsp;यह टेक्टोनिक्स प्लेट\u0026nbsp;और महाद्वीपीय बहाव द्वारा आंशिक रूप से ठोस मैग्मा के एक साथ नष्ट होने का परिणाम था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसात-महाद्वीप मॉडल आमतौर पर चीन और अधिकांश अंग्रेजी बोलने वाले देशों में पढ़ाया जाता है। जबकि यूरोप और एशिया को मिलाकर छह महाद्वीप मॉडल को रूस के पूर्वी भागों और जापान में पढ़ाया जाता\u0026nbsp;है। उत्तर और दक्षिण अमेरिका को मिलाकर छह महाद्वीप मॉडल लैटिन अमेरिका और अधिकांश यूरोप में पढ़ाया जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनीचे विश्व के सभी महाद्वीप के नाम दिए गए है और आप चित्र में उन महाद्वीपो को देश सकते हैं। इसमें सभी महाद्वीपों को अन्य रंगो में दर्शाया गया हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eमहाद्वीपों के नाम\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eएशिया\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअफ्रीका\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eउत्तरी अमेरिका\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिणी अमेरिका\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअंटार्कटिका\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eयूरोप\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eऑस्ट्रेलिया\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cdiv\u003e\u003ch3\u003eएशिया\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eएशिया पृथ्वी का सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है, जो मुख्य रूप से पूर्वी और उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह यूरोप महाद्वीप के साथ यूरेशिया के महाद्वीपीय भूभाग और यूरोप और अफ्रीका दोनों के साथ एफ्रो-यूरेशिया के महाद्वीपीय भूभाग को साझा करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया में 44,579,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है, जो पृथ्वी के कुल भूमि क्षेत्र का लगभग 30% और पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्र का 8.7% है। महाद्वीप, जो लंबे समय से अधिकांश मानव आबादी का घर रहा है, पहली सभ्यताओं में से कई का स्थल था। इसके 4.5 बिलियन लोग दुनिया की आबादी का लगभग 60% हिस्सा हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eअफ्रीका\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eएशिया के बाद अफ्रीका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है। 30.3 मिलियन वर्ग किमी में फैला अफ्रीका महाद्वीप पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्र का 6% और 20% भूमि क्षेत्र को कवर करता है। 1.3 अरब लोगों के साथ यह दुनिया की मानव आबादी का लगभग 16% हिस्सा है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2012 में औसत आयु 19.7 थी, जब दुनिया भर में औसत आयु 30.4 थी।\u0026nbsp;प्राकृतिक संसाधनों\u0026nbsp;की एक विस्तृत श्रृंखला के बावजूद, अफ्रीका में प्रति व्यक्ति सबसे कम धनी महाद्वीप है, आंशिक रूप से भौगोलिक बाधाओं के कारण अफ्रीका में यूरोपीय उपनिवेशीकरण की विरासत और शीत युद्ध कारण यह स्थिति हुयी हैं। धन के इस कम संकेंद्रण के बावजूद, हालिया आर्थिक विस्तार और बड़ी और युवा आबादी ने अफ्रीका को व्यापक वैश्विक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण आर्थिक बाजार बना दिया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eउत्तरी अमेरिका\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अमेरिका पूरी तरह से उत्तरी गोलार्ध और पश्चिमी गोलार्ध के भीतर स्थित एक महाद्वीप है। यह उत्तर में आर्कटिक महासागर, पूर्व में अटलांटिक महासागर, दक्षिण-पूर्व में दक्षिण अमेरिका और कैरेबियन सागर और पश्चिम और दक्षिण में प्रशांत महासागर से घिरा है। क्योंकि यह उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट पर है, ग्रीनलैंड को भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्तरी अमेरिका में लगभग 24,709,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है, जो पृथ्वी के भूमि क्षेत्र का लगभग 16.5 % और कुल सतह का लगभग 4.8% है। उत्तरी अमेरिका क्षेत्रफल के हिसाब से एशिया और अफ्रीका के बाद तीसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है, और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बाद जनसंख्या के हिसाब से चौथा सबसे बड़ा महाद्वीप है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eदक्षिण अमेरिका\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eदक्षिण अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध और ज्यादातर दक्षिणी गोलार्ध में स्थित महाद्वीप है।\u0026nbsp;दक्षिण अमेरिका की सीमा पश्चिम में प्रशांत महासागर से लगती है और उत्तर और पूर्व में अटलांटिक महासागर, उत्तरी अमेरिका स्थित हैं जबकि कैरेबियन सागर उत्तर पश्चिम में स्थित है। महाद्वीप में आम तौर पर बारह संप्रभु राज्य शामिल हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण अमेरिका का क्षेत्रफल 17,840,000 वर्ग किलोमीटर है। 2018 तक इसकी जनसंख्या 423 मिलियन से अधिक आंकी गई है। दक्षिण अमेरिका का क्षेत्रफल एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बाद चौथा स्थान हैं और जनसंख्या में पाँचवाँ स्थान पर है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eब्राजील महाद्वीप की आधी से अधिक आबादी के साथ सबसे अधिक आबादी वाला दक्षिण अमेरिकी देश हैं। हाल के दशकों में, ब्राजील ने भी महाद्वीप के सकल घरेलू उत्पाद का आधा उत्पादन किया है और महाद्वीप की पहली क्षेत्रीय शक्ति बन गया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eअंटार्कटिका महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअंटार्कटिका पृथ्वी का सबसे दक्षिणी महाद्वीप है। इसमें भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव शामिल है और दक्षिणी गोलार्ध के अंटार्कटिक क्षेत्र में स्थित है, लगभग पूरी तरह से दक्षिणी महासागर से घिरा हुआ है। 14,200,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के साथ यह पांचवां सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह ऑस्ट्रेलिया के आकार का लगभग दोगुना है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह अब तक का सबसे कम आबादी वाला महाद्वीप है, जिसमें गर्मियों में लगभग 5,000 लोग और सर्दियों में लगभग 1,000 लोग रहते हैं। अंटार्कटिका का लगभग 98% हिस्सा\u0026nbsp;बर्फ\u0026nbsp;से ढका है जिसकी मोटाई औसतन 1.9 किमी है, जो मैकमुर्डो सूखी घाटियों और अंटार्कटिक\u0026nbsp;प्रायद्वीप\u0026nbsp;की सबसे उत्तरी पहुंच को छोड़कर सभी तक फैली हुई है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eयूरोप महाद्वीप\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयूरोप एक महाद्वीप है जो पूरी तरह से उत्तरी गोलार्ध में और ज्यादातर पूर्वी गोलार्ध में स्थित है। इसमें यूरेशिया के महाद्वीपीय भूभाग का सबसे पश्चिमी प्रायद्वीप शामिल है। इसकी सीमा उत्तर में आर्कटिक महासागर, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और पूर्व में एशिया से लगती है। यूरोप को आमतौर पर यूराल पर्वत, यूराल नदी, कैस्पियन सागर, ग्रेटर काकेशस, काला सागर और तुर्की जलडमरूमध्य के जलमार्ग द्वारा एशिया से अलग माना जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालाँकि इस सीमा का अधिकांश भाग भूमि पर है, यूरोप को आम तौर पर अपने महान भौतिक आकार और इसके इतिहास और परंपराओं के कारण पूर्ण महाद्वीप का दर्जा दिया जाता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eऑस्ट्रेलिया महाद्वीप, जिसे कभी-कभी मेगनेशिया के नाम से जाना जाता है। महाद्वीप में मुख्य भूमि ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया और न्यू गिनी द्वीप शामिल हैं। ओशिनिया के भौगोलिक क्षेत्र में स्थित ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप सात महाद्वीपों में सबसे छोटा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहाद्वीप में उथले समुद्रों के ऊपर एक महाद्वीपीय शेल्फ शामिल है जो इसे कई भूभागों में विभाजित करता है। मुख्य भूमि ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी के बीच अराफुरा सागर और टोरेस स्ट्रेट बीच स्थित हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e8.56 मिलियन वर्ग किलोमीटर के कुल भूमि क्षेत्र के साथ, ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप पृथ्वी पर सबसे छोटा, और दूसरा सबसे कम मानव निवास महाद्वीप है। चूंकि ऑस्ट्रेलिया का देश ज्यादातर एक ही भूभाग पर है, और इसमें अधिकांश महाद्वीप शामिल हैं। इसलिए इसे कभी-कभी महासागरों से घिरे एक द्वीप महाद्वीप के रूप में संदर्भित किया जाता है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2042200394222215677"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2042200394222215677"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/continent-in-hindi.html","title":"महाद्वीप किसे कहते है - continent in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-ZCvL5LH64fI/X3gKELElRrI/AAAAAAAAELY/mU3s9mnks9I8Lze-B-6yjZAxHYTL3EOkwCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_101241.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-970022548718263880"},"published":{"$t":"2020-07-28T14:42:00.005+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-07T21:43:52.548+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"दक्षिण अमेरिका - south america countries in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  दक्षिण अमेरिका चौथा सबसे बड़ा महाद्वीप है। यह दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है।\n  इसकी सीमा पूर्व में दक्षिण अटलांटिक महासागर और पश्चिम में दक्षिण प्रशांत\n  महासागर से लगती हैं। इसकी समुद्री तट 32 हजार किलोमीटर लंबा हैं। मकर रेखा\n  दक्षिणी अमेरिका के मध्य से होकर गुजरती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-L82t9SaLBVU/X3gKEkg2mTI/AAAAAAAAELY/PWBe8rvmoYYiNbWaUidBIUSSwu1TA7_4ACPcBGAYYCw/s600/20201003_101327.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-L82t9SaLBVU/X3gKEkg2mTI/AAAAAAAAELY/PWBe8rvmoYYiNbWaUidBIUSSwu1TA7_4ACPcBGAYYCw/s320/20201003_101327.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यहाँ विश्व की सबसे लंबी\u0026nbsp;पर्वत एंडीज पर्वत यही पर स्थित है। सबसे ऊँची\n  टीटीकाका झील भी इसी महाद्वीप में हैं। यह बहने वाली प्रमुख नदी अमेजन, ओरीनिको\n  और रियो डी ला प्लाटा हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण अमेरिका में कितने देश\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  दक्षिण अमेरिका में 12 देश है। यहाँ 3 आश्रित देश भी है जो ब्रिटेन और फ्रांस के\n  अधीन है। नीचे स्वत्रन्त्र देशो की जानकारी दी गयी है। ब्राजील दक्षिण अमेरिका का\n  सबसे बड़ा देश है। जिसका क्षेत्रफल\u0026nbsp;8515767 वर्ग किलोमीटर है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003ctable\u003e\n  \u003ctbody\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003cth\u003eक्र.\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eदेश\u003c/th\u003e\n      \u003cth\u003eराजधानी\u003c/th\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e1\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003e\u003cdiv\u003eअर्जेंटीना\u003c/div\u003e\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eब्यूएनोस ऐरेस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e2\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबोलीविया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसोक्रे\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e3\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eब्राज़िल\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eब्राज़िलिया\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e4\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eचिली\u0026nbsp;\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसेंटिआगो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e5\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eइक्वेडोर\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eक्यूटो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e6\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकोलम्बिया\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eबोगोटा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e7\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eगयाना\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eजार्जटाउन\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e8\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपैराग्वे\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eअसुंसिओन\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e9\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपेरू\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eलिमा\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e10\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eसूरीनाम\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eपेरामरिबो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e1\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eउरुग्वे\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eमोंटेवीडियो\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n    \u003ctr\u003e\n      \u003ctd\u003e12\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eवेनेजुएला\u003c/td\u003e\n      \u003ctd\u003eकैरकस\u003c/td\u003e\n    \u003c/tr\u003e\n  \u003c/tbody\u003e\n\u003c/table\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pX8lQqbRhDw/XyAKDosOURI/AAAAAAAADV4/QK2VjaZM-MUiqy_AijuRRfIDkCenCkjpACLcBGAsYHQ/s1600/351659bb9e40708d0b8b9d2715665238.jpg\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"दक्षिण अमेरिका\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"821\" data-original-width\u003d\"475\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pX8lQqbRhDw/XyAKDosOURI/AAAAAAAADV4/QK2VjaZM-MUiqy_AijuRRfIDkCenCkjpACLcBGAsYHQ/s320/351659bb9e40708d0b8b9d2715665238.jpg\" title\u003d\"दक्षिण अमेरिका\" width\u003d\"184\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eदक्षिण अमेरिका का इतिहास\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  दक्षिण अमेरिका का इतिहास पेरू की पहाड़ियों के आस - पास लाखों वर्षों पूर्व हुई।\n  यहाँ की इंका की सभ्यता को प्राचीन सभ्यता माना जाता है जो पेरू, ईक्वाडोर,\n  बोलीविया, अर्जेंटीना और चिली तक फैला हुआ था।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इंका सभ्यता में शासक को इंका कहा जाता था यह सभ्यता अपनी उत्तम यातायात, संचार\n  एवं डाक व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध था। माचू पिच्चू यहाँ की प्रमुख नगर था जिसके\n  पुरातात्विक अवशेष को आज भी देखे जा सकता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यूरोप के लोगो ने दक्षिणी अमेरिका की खोज सोलहवीं सदी के प्रारम्भ में की थी।\n  किन्तु यूरोप वासियों का विस्तार अठारहवीं सदी में ही हुआ। दक्षिण अमेरिका में\n  अधिकांश निवासी स्पेन व पुर्तगाल से आकर बसे। यूरोपीय प्रभाव के कारण इसे लैटिन\n  अमेरिका भी कहाजाता जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\nयूरोपीय उपनिवेशीकरण से पहले, इंका\u0026nbsp;सभ्यता दक्षिण अमेरिका में एक प्रमुख शक्ति\nथी। 1500 के दशक में, स्पेन और पुर्तगाल ने दक्षिण अमेरिका में उपनिवेशस्थापित\nकिया। सन\u0026nbsp;1800 में साइमन बोलिवर और जोस डी सैन मार्टिन जैसे नेताओं की मदद से\nउपनिवेशों ने स्वतंत्रता प्राप्त हुयी। दक्षिण अमेरिका के अधिकांश लोग अभी भी\u0026nbsp;\nस्पेनिश या पुर्तगाली बोलते हैं।\u003cbr /\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cb\u003eजनसंख्या: \u003c/b\u003e387,489,196 (स्रोत: 2010 संयुक्त राष्ट्र) अमेरिका का नक्शा\u003cbr /\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cb\u003eक्षेत्रफल:\u003c/b\u003e 6,890,000 वर्ग मील\u003cbr /\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cb\u003eरैंकिंग: \u003c/b\u003eयह चौथा सबसे बड़ा और पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है\u003cbr /\u003e\n\u003cbr /\u003e\n\u003cb\u003eप्रमुख बायोम: \u003c/b\u003eवर्षावन, सवाना, घास का मैदान\u003cdiv\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/970022548718263880"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/970022548718263880"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/south-america-countries-in-hindi.html","title":"दक्षिण अमेरिका - south america countries in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6JUOsIWg-YM/X3gKEwyM0II/AAAAAAAAELQ/U3oIpfCREs0h7sWh62O0N3g7YeiOSV2XACPcBGAYYCw/s600/20201003_101402.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6JUOsIWg-YM/X3gKEwyM0II/AAAAAAAAELQ/U3oIpfCREs0h7sWh62O0N3g7YeiOSV2XACPcBGAYYCw/s320/20201003_101402.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e \u003cp\u003eकैलाश पर्वत को काफी दुर्गम स्थान माना जाता है। हिंदुओं और बौद्धों के लिए, कैलाश पर्वत एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ दुनिया के सबसे पवित्र और रहस्यमय पर्वत है।  बौद्ध और हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, कैलाश\u0026nbsp;पर्वत के आसपास प्राचीन मठ और गुफाएं हैं। जहाँ पे\u0026nbsp;ऋषि मुनि निवास करते\u0026nbsp;हैं। इन गुफाओं को केवल कुछ भाग्यशाली लोगों द्वारा देखा गया\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eकैलाश पर्वत कहां पर है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cb\u003eकैलाश पर्वत\u003c/b\u003e जिसे\u0026nbsp;स्वर्ग की सीढ़ियाँ भी कहा जाता है। हिन्दू     मान्यता के अनुशार यह भगवान शिव का घर है। हिमालय की सबसे रहस्यमयी पर्वत     श्रृंखला है। कैलाश पर्वत तिब्बती पठार से 22,000 फीट की     दूरी पर स्थित है। यह     भारत के उत्तर में हिमायल में स्थित है।\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    हर साल, हजारों श्रद्धालु कैलाश की तीर्थयात्रा के लिए\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-tibet.html\"\u003eतिब्बत\u003c/a\u003e\u0026nbsp;में जाते हैं। कुछ लोग को इस क्षेत्र को देखते का सौभाग्य प्राप्त होता\u0026nbsp;हैं और बहुत ही कम लोग शिखर की परिक्रमा पूरी करते हैं। शिखर पर चढ़ने के लिए, कुछ साहसी     पर्वतारोहियों ने प्रयास किया है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eमिलारेपा नाम के एक भिक्षु ने एक बार कैलाश के शीर्ष तक पहुंचने के लिए काफी दूरी तय की थी। जब वह वापस लौटा, तो उसने सभी     को जाने से\u0026nbsp;कैलाश पर जाने के लिए मना करने लगा वह बोलता था की भगवान शिव को आराम करने से परेशान न करें।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/--fLbNKxyDm8/Xx2hVW7I_hI/AAAAAAAADVs/WDrKsHe9Vic9rXY6BJuG8ioR847d0pOQwCLcBGAsYHQ/s1600/downloa-ert.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"कैलाश पर्वत कहां पर है - Rexgin\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"183\" data-original-width\u003d\"276\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/--fLbNKxyDm8/Xx2hVW7I_hI/AAAAAAAADVs/WDrKsHe9Vic9rXY6BJuG8ioR847d0pOQwCLcBGAsYHQ/s1600/downloa-ert.jpg\" title\u003d\"कैलाश पर्वत कहां पर है - Rexgin\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    दो सुंदर झीलें\u0026nbsp;अर्थात् मानसरोवर और रक्षा ताल, कैलाश पर्वत के आधार पर स्थित     हैं। दोनों में से, मानसरोवर, जो 14, 950 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे दुनियाका सबसे\u0026nbsp;ताजे पानी का झील माना जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e    जबकि मानसरोवर का एक गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इसके विरोधी, राक्षस ताल, भगवान     शिव को प्रसन्न करने के लिए राजा रावण द्वारा की गई गहन तपस्या से पैदा हुए थे।     राक्षस\u0026nbsp;तालाब नमकीन पानी से संपन्न है और जलीय जीवन से वंचित है।\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003eकैलाश पर्वत तिब्बत के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित\u0026nbsp;हैं। 6638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हिमालय के सबसे ऊंचे हिस्सों में से एक है और एशिया की कुछ सबसे लंबी नदियों के स्रोत के रूप में कार्य करता है।\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003cp\u003eकैलाश पर्वत पर्वत को\u0026nbsp;तिब्बत में गैंग टिस के रूप में जाना जाता है यह एक प्रमुख शिखर है। काली\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.questionmug.com/2022/04/chattan-kise-kahate-hain.html\"\u003eचट्टान\u0026nbsp;\u003c/a\u003eसे बना कैलाश पर्वत हीरे के आकार का एक अद्भुत पर्वत है जो सुंदर परिदृश्य से घिरा हुआ है जो ऊबड़-खाबड़ और सूखा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकैलाश पर्वत को सबसे पवित्र पहाड़ों में से एक के रूप में जाना जाता है और यह चार धर्मों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्री बन गया है। बौद्ध, जैन, हिंदू और तिब्बती धर्म के लिए यहाँ महत्वपूर्ण स्थान\u0026nbsp;हैं। हर साल दुनिया भर से हजारों लोग इस जगह की तीर्थयात्रा करते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eविभिन्न मान्यताओं के अनुयायी हजारों वर्षों से कैलाश के दर्शन करते आ रहे हैं और पैदल ही इस पवित्र पर्वत की परिक्रमा करते रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि कैलाश के दर्शन करने और इस परंपरा का पालन करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन भर के पाप धुल जाते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालांकि एक दिन में 52 किमी की पैदल यात्रा आसान नहीं है और इसे पूरा करने के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत होने की जरूरत होती है। आमतौर पर लोग इस यात्रा को खत्म करने में 3 दिन का समय लेते हैं। हिंदू और बौद्ध तीर्थयात्री दक्षिणावर्त दिशा में घूमते हैं लेकिन जैन अनुयायी वामावर्त घूमते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहिंदू धर्म के अनुशार भगवन\u0026nbsp;शिव इस प्रसिद्ध पर्वत के शिखर पर निवास करते हैं। कैलाश पर्वत को\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/hindu-dharm-in-hindi.html\"\u003eहिंदू धर्म\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के कई संप्रदायों में स्वर्ग, आत्माओं का अंतिम गंतव्य और दुनिया का पवित्र केंद्र माना जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबौद्ध मानते हैं कि कैलाश बुद्ध डेमचोक का घर है जो सर्वोच्च सद्भाव का प्रतीक है। तिब्बत में बौद्ध धर्म जिसे \"बॉन\" धर्म के रूप में जाना जाता है, कैलाश पर्वत को आकाश देवी सिपाइमेन के निवास के रूप में मानता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजैन धर्म में, कैलाश को अष्टपद पर्वत के रूप में जाना जाता है और यह वह स्थान है जहां उनके विश्वास के निर्माता ऋषभदेव ने पुनर्जन्म से मुक्ति प्राप्त की थी।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3765831098579153824"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3765831098579153824"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/kailash-parvat-in-hindi.html","title":"कैलाश पर्वत कहां पर है - kailash parvat in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-6JUOsIWg-YM/X3gKEwyM0II/AAAAAAAAELQ/U3oIpfCREs0h7sWh62O0N3g7YeiOSV2XACPcBGAYYCw/s72-c/20201003_101402.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8104089562682616315"},"published":{"$t":"2020-07-26T17:19:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-12T09:01:23.611+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भारतीय उपमहाद्वीप के देशों के नाम - Indian subcontinent in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp\u003e    \u003cb\u003eभारतीय उपमहाद्वीप\u003c/b\u003e    एशिया का एक दक्षिणी क्षेत्र और प्रायद्वीप है। जो ज्यादातर भारतीय प्लेट पर स्थित     है और हिमालय से दक्षिण की ओर हिंद महासागर में स्थित है।\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    भूवैज्ञानिक रूप से, भारतीय उपमहाद्वीप उस भूमि से संबंधित है जो गोंडवाना से     अलग हुआ\u0026nbsp;और लगभग 55 मिलियन वर्ष पहले यूरेशियन प्लेट के साथ विलीन हो     गया। भौगोलिक रूप से, यह दक्षिण-मध्य एशिया में प्रायद्वीपीय क्षेत्र है     जो उत्तर में हिमालय, पश्चिम में हिंदू कुश और पूर्व में अराकानी द्वारा     चित्रित है।   \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारतीय उपमहाद्वीप के देशों के नाम\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e          \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9IlXa--lPgI/Xx2drnvceNI/AAAAAAAADVE/1-N61v8ci0Ez_srQkDQYo9efyPEIJsenACLcBGAsYHQ/s1600/20200726_204202.jpg\"\u003e\u003cimg border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1600\" data-original-width\u003d\"1600\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-9IlXa--lPgI/Xx2drnvceNI/AAAAAAAADVE/1-N61v8ci0Ez_srQkDQYo9efyPEIJsenACLcBGAsYHQ/s320/20200726_204202.jpg\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e        \u003c/div\u003e  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e  \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    राजनीतिक रूप से, भारतीय उपमहाद्वीप में     बांग्लादेश, भूटान,     भारत, मालदीव,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e,     श्रीलंका के\u0026nbsp;भाग शामिल हैं। \"भारतीय उपमहाद्वीप\" शब्द का प्रयोग दक्षिण एशिया    के रूप में भी किया\u0026nbsp;जाता है।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारतीय उपमहाद्वीप का\u0026nbsp;नामकरण\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार, \"उपमहाद्वीप\" शब्द एक महाद्वीप का उपखंड     (छोटा रूप\u0026nbsp;) होता है जिसकी एक अलग भौगोलिक, राजनीतिक या सांस्कृतिक पहचान     होती है। और एक\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;की तुलना में कुछ हद तक छोटा होता है। अंग्रेजो ने इस भूमि\u0026nbsp;को 20 वीं     शताब्दी की शुरुआत में, भारतीय उपमहाद्वीप के नाम से पुकारने लगे थे।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    इस शब्द को पहले 1845 में उत्तर और दक्षिण अमेरिका में संदर्भित किया गया था,     इससे पहले कि उन्हें अलग महाद्वीप माना जाता था। भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण     एशियाई उपमहाद्वीप और दक्षिण एशिया जैसे शब्दों का उपयोग एक विवादित विषय है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      भारतीय उपमहाद्वीप कथाकथित \"ग्रेटर इंडिया\" का हिस्सा था, गोंडवाना का एक       क्षेत्र जो लगभग 160\u0026nbsp;मिलियन साल पहले मध्य जुरासिक काल के आसपास पूर्वी       अफ्रीका से दूर       चला गया था। पृथ्वी के भूगर्भ के प्लेटो के खिसकने के कारण से जिसके बाद यह       उपमहाद्वीप उत्तरपूर्व की ओर बहता हुआ, लगभग 55 मिलियन वर्ष पहले यूरेशियन       प्लेट से टकरा गया। जिसके कारण विशाल हिमालय\u0026nbsp; निर्माण हुआ था।     \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cspan\u003eभारतीय उपमहाद्वीप का\u0026nbsp;\u003c/span\u003eभूगोल\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      भारतीय उपमहाद्वीप दक्षिण एशिया में एक प्राकृतिक भौतिक भू-भाग है, जो       भौगोलिक रूप से भारतीय प्लेट का हिस्सा था। जो यूरेशिया के बाकी हिस्सों से       अलग हो गया था। उत्तर में\u0026nbsp;हिमालय होने के कारण भारतीय उपमहाद्वीप का       सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संपर्क मुख्य रूप से अफगानिस्तान      और\u0026nbsp;उत्तर-पश्चिम में, मणिपुर की घाटियों और समुद्री मार्गों से व्यापार       होता\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8104089562682616315"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8104089562682616315"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/indian-subcontinent-in-hindi.html","title":"भारतीय उपमहाद्वीप के देशों के नाम - Indian subcontinent in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-9IlXa--lPgI/Xx2drnvceNI/AAAAAAAADVE/1-N61v8ci0Ez_srQkDQYo9efyPEIJsenACLcBGAsYHQ/s72-c/20200726_204202.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8516529688641902551"},"published":{"$t":"2020-07-26T11:49:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-06T12:57:51.817+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"वायुमंडल का अर्थ क्या है - atmosphere in hindi definition "},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-AMt-CtKVnjE/X3gKFmzOk-I/AAAAAAAAELc/Q_v6sDrJek0XJaraVVnWymBw3QYNWw-bACPcBGAYYCw/s600/20201003_101524.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-AMt-CtKVnjE/X3gKFmzOk-I/AAAAAAAAELc/Q_v6sDrJek0XJaraVVnWymBw3QYNWw-bACPcBGAYYCw/s320/20201003_101524.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e  वायुमंडल का अर्थ \u003c/b\u003e- हम एक अदृश्य महासागर के   तल पर रहते हैं जिसे \u003cb\u003eवायुमंडल \u003c/b\u003eकहा जाता है, हमारे ग्रह के चारों ओर गैसों   की एक परत होती है।\u0026nbsp;जिसमे\u0026nbsp;शुष्क हवा 99 प्रतिशत, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन   की मात्रा भी\u0026nbsp;होती है। जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड, हीलियम, नियॉन और   अन्य गैसें शामिल होते हैं। इन्ही को वायुमंडल कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  वायुमंडल इतना फैला हुआ है कि हम मुश्किल से इसे नोटिस करते हैं। फिर भी इसका वजन   पूरे ग्रह को कवर करने वाले 10 मीटर पानी की परत के बराबर होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eवायुमंडल के निचले 30 किलोमीटर में इसके द्रव्यमान का लगभग 98 प्रतिशत होता है। वायुमण्डल में वायु अधिक ऊँचाई पर बहुत पतला होता है। और अंतरिक्ष में   कोई वायुमंडल होता नहीं होती है।\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e  \u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e        \u003ca 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style\u003d\"text-align: center;\"\u003e        वायुमंडल क्या है\u0026nbsp;       \u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp\u003e    पृथ्वी सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसमें जीवन रहने योग्य वातावरण\u0026nbsp;है। वायुमंडल में प्राण दायनी ऑक्सीजन होती है जो जीवन के लिए अति आवश्यक होता है साथ ही\u0026nbsp;सूरज से निकलने वाली गर्मी और हानिकारक विकिरण से बचने वाले गैस भी वायुमण्डल में विध्यमान\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e  \u003cp\u003eपृथ्वी का वातावरण लगभग 300 मील मोटा है। लेकिन इसका अधिकांश     भाग सतह से 16 किमी के भीतर होता है। ऊंचाई के साथ हवा का दबाव कम हो जाता है।     समुद्र तल पर, हवा का दबाव लगभग 1 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर     होता\u0026nbsp;है। 10,000 फीट पर, हवा का दबाव 0.7 किलोग्राम प्रति वर्ग सेमी     होता\u0026nbsp;है।   \u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eवायुमंडल की परतों के नाम\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    पृथ्वी के वायुमंडल को पाँच मुख्य परतों में विभाजित किया गया है।   \u003c/p\u003e  \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cli\u003eक्षोभमंडल - Troposphere\u0026nbsp;\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eसमतापमण्डल - Stratosphere\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eमध्यमण्डल - Mesosphere\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eआयन मंडल\u0026nbsp;- Ionosphere\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eबाह्यमण्डल- Extracurricular\u003c/li\u003e  \u003c/ol\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    वायुमंडल से गैस ऊपर की और बहती है\u0026nbsp;जब तक कि गैसें अंतरिक्ष में फ़ैल     नहीं जाती हैं। वायुमंडल और अंतरिक्ष के बीच कोई सीमा नहीं है। लेकिन     सतह से लगभग 62 मील (100 किलोमीटर) की एक काल्पनिक रेखा है।जिसे\u0026nbsp;वैज्ञानिकों ने\u0026nbsp;वायुमंडल बाहरी सिमा कहा\u0026nbsp;है।   \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. क्षोभमंडल की ऊंचाई\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    क्षोभमंडल पृथ्वी की सतह के सबसे करीब की परत है। यह 4 से 12 मील (7 से     20 किमी) मोटी होती है और इसमें पृथ्वी का आधा वायुमंडल आता है। हवा जमीन के     पास गर्म होती है और ऊपर की और उठने लगती है। वायुमंडल के लगभग सभी जल वाष्प और     धूल इस परत में मौजूद हैं। इसीलिए यहां बादल पाए जाते हैं।   \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. समताप मंडल की विशेषता\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    समताप मंडल दूसरी परत है। यह क्षोभमंडल के ऊपर शुरू होता है और जमीन से     लगभग 31 मील (50 किमी) ऊपर समाप्त होता है। यहां ओजोन प्रचुर मात्रा में होता है और सूर्य से आने वाले\u0026nbsp;हानिकारक विकिरण को अवशोषित करते हुए वातावरण को गर्म करता है।     यहां की हवा बहुत शुष्क होती है। इसका वातावरण\u0026nbsp;समुद्र तल से लगभग हजार गुना पतला होता\u0026nbsp;है। इसी कारण     यहाँ पर\u0026nbsp;जेट विमान और मौसम के गुब्बारे उड़ाए जाते\u0026nbsp;हैं।   \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. मध्यमण्डल की जानकारी\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eसमताप मंडल के ऊपर के क्षेत्र को मध्यमण्डल कहा जाता है। यहाँ     तापमान फिर से कम होता जाता है, मध्यमण्डल\u0026nbsp;पर तापमान\u0026nbsp;लगभग -90 ° C तक पहुँच     जाता है।   \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. आयन मंडल की ऊंचाई\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    आयनमंडल पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का हिस्सा है। जो\u0026nbsp;लगभग 60 किमी से 1,000     किमी की ऊँचाई पर फैला हुआ है। यह परत\u0026nbsp;वायुमंडलीय में बिजली बनाने     में\u0026nbsp;एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अयन मंडल को चार भागो\u0026nbsp; में     बांटा गया है। सूर्य की विकिरण और रेडियो तरंगो से इस परत में उपस्थित गैस नष्ट     होने लगते है।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e5. बाह्यमण्डल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपृथ्वी के वायुमंडल का सबसे ऊपरी क्षेत्र है क्योंकि यह     धीरे-धीरे अंतरिक्ष के वैक्यूम में बदल जाता है। बाह्यमण्डल में हवा बेहद     पतली होती है - यह हवा\u0026nbsp;शून्य के लगभग होता है। बाह्यमण्डल\u0026nbsp;के नीचे की     परत आयन मंडल है। दोनों के बीच की सीमा को थर्मोपॉज़ कहा जाता है।\u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eवायुमंडल में कौन सी गैस पाई जाती है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    नीचे गैस के नाम और प्रतिशत दिया गया है -   \u003c/p\u003e  \u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cli\u003eनाइट्रोजन\u003cspan style\u003d\"white-space: pre;\"\u003e \u003c/span\u003e- 78.09\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eऑक्सीजन - 20.95\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eआर्गन - 0.93\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eकार्बन डाइआक्साइड - 0.03\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eनिऑन - 0.0018\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eहाइड्रोजन - 0.001\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eहीलियम - 0.000524\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eक्रिप्टन - 0.0001\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eज़ेनान - 0.000008\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eओज़ोन - 0.000001\u003c/li\u003e    \u003cli\u003eमीथेन - अल्प मात्रा\u003c/li\u003e  \u003c/ul\u003e  \u003cbr /\u003e  \u003cb\u003e2. वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत कौन सी है?\u003c/b\u003e\u003cbr /\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    क्षोभमण्डल\u0026nbsp; जीवन और\u0026nbsp;पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सर्वाधिक     महत्त्वपूर्ण होता\u0026nbsp;है क्योंकि मौसम संबंधी सारी घटनाएं यही घटित होती     है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8516529688641902551"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8516529688641902551"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/atmosphere-in-hindi-definition.html","title":"वायुमंडल का अर्थ क्या है - atmosphere in hindi definition "}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-AMt-CtKVnjE/X3gKFmzOk-I/AAAAAAAAELc/Q_v6sDrJek0XJaraVVnWymBw3QYNWw-bACPcBGAYYCw/s72-c/20201003_101524.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3445574350407696281"},"published":{"$t":"2020-07-26T11:35:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-06T12:56:41.172+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जीवमंडल परिभाषा क्या है - jeev mandal kya hai"},"content":{"type":"html","$t":"  \u003cdiv style\u003d\"display: none;\"\u003e        \u003cimg alt\u003d\"जीवमंडल क्या है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"253\" data-original-width\u003d\"450\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6VLx3ByFnX0/XyDcSEUsuyI/AAAAAAAADYU/KJj6ulieHQUZPhOk1ron_XH_tDtoVdWDgCLcBGAsYHQ/w323-h212/2402970-bigthumbnail.jpg\" title\u003d\"जीवमंडल क्या है\" width\u003d\"323\" /\u003e\u003c/div\u003e       \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cb\u003eजीवमंडल\u003c/b\u003e\u0026nbsp;हमारे जीवित संसार का वर्णन करता हैं। सभी जीव जंतु\u0026nbsp;जीवमंडल में पाए जाते\u0026nbsp;है। वायुमंडल पृथ्वी के ऊपरी क्षेत्र में फैला\u0026nbsp;हैं जहां तक\u0026nbsp;पक्षी और कीड़े पाए जाते\u0026nbsp;हैं। जीवमंडल वह तक\u0026nbsp;फैली है, जिसमें किसी भी प्रकार का जीवन मौजूद हो सकता     है।\u0026nbsp;जलमंडल जलमंडल और वायुमंडल जीवमंडल के अंतर्गत आते हैं। क्योंकि इन मंडलो में जीवन पाया जाता हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजीवमंडल परिभाषा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजीवमंडल पृथ्वी की सतह का अपेक्षाकृत पतला परत है जो\u0026nbsp;कुछ किलोमीटर से वायुमंडल में समुद्र के गहरे-समुद्र की लहरों तक फैला हुआ है। जीवमंडल एक वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र है जो जीवित जीवों (बायोटा) और अजैविक (गैर-जीवित) कारकों से बना है। जिनसे वे ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।\u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजीवमंडल क्या है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    जीवमंडल पृथ्वी की वह\u0026nbsp;परत है जहां जीवन मौजूद है। यह परत समुद्र तल से दस किलोमीटर तथा समुद्र से 9\u0026nbsp; किलोमीटर गहराई तक फैला\u0026nbsp;है। जैवमंडल चार परतों में से एक है जो पृथ्वी को स्थलमंडल (चट्टान), जलमंडल (जल) और वायुमंडल (वायु) के साथ घेरती है और यह सभी पारिस्थितिक तंत्रों का योग है।\u003c/p\u003e   \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    जीवमंडल अद्वितीय है। अभी तक ब्रह्मांड में कहीं और जीवन का कोई अस्तित्व नहीं     है। पृथ्वी पर जीवन सूर्य पर निर्भर करता है। प्रकाश संश्लेषण के अद्भुत घटना     में ऊर्जा, सूर्य के प्रकाश के रूप में प्रदान की जाती है, पौधों, कुछ     बैक्टीरिया और प्रोटिस्ट द्वारा इसे ग्रहण\u0026nbsp;कर लिया जाता है।\u0026nbsp;और ऑक्सीजन     का उत्पादन करती है। जानवरों, कवक, परजीवी पौधों और कई बैक्टीरिया की     प्रजातिया\u0026nbsp;प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रकाश संश्लेषण पर     निर्भर करता है।   \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    कई कारक जीवमंडल और हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। पृथ्वी     और सूर्य के बीच की दूरी। यदि हमारा ग्रह सूर्य के करीब होता,     तो बहुत गर्म हो होती\u0026nbsp;है। अगर अधिक\u0026nbsp;दूर होते,     तो बहुत ठंड होती। पृथ्वी का झुकाव उतना ही महत्वपूर्ण है। क्योकि\u0026nbsp;मौसम, जलवायु परिवर्तन पृथ्वी के झुकाव के प्रत्यक्ष परिणाम     हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैवमंडल का निर्माण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eजीवमंडल लगभग 3.5 बिलियन वर्षों से मौजूद है। पहले के जीवा इना ऑक्सीजन के जीवित रहते थे जैसे -\u0026nbsp;प्रोकैरियोट्स बैक्टीरिया और आर्किया जैसे एकल-कोशिका वाले जीव।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ बैक्टीरिया\u0026nbsp;ने एक अनोखी रासायनिक प्रक्रिया विकसित की। वे प्रकाश संस्लेषण और पानी ऑक्सीजन बनाने लगे और यह निरंतर चलता रहा।\u0026nbsp;समय की लंबी अवधि में, वातावरण ने ऑक्सीजन और अन्य गैसों का मिश्रण विकसित हुआ जो जीवन के नए रूपों को बनाए रखने में सहायक\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजीवमंडल में\u0026nbsp;ऑक्सीजन की उपस्थिति ने\u0026nbsp;जटिल जीवन-रूपों को विकसित करने में सहायता की।\u0026nbsp;लाखों विभिन्न पौधों और अन्य प्रकाश संश्लेषक प्रजातियों का विकास हुआ। पशु, पौधों का उपभोग करते हैं। बैक्टीरिया अन्य जीव मृत जानवरों और पौधों को विघटित करने या तोड़ने के लिए विकसित हुए।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमृत पौधों और जानवरों के अवशेष मिट्टी और महासागर में पोषक तत्व बनाते\u0026nbsp;हैं। ये पोषक तत्व बढ़ते पौधों द्वारा पुनः अवशोषित होते हैं। भोजन और ऊर्जा का यह आदान-प्रदान जीवमंडल को एक स्वावलंबी और स्व-विनियमन प्रणाली बनाता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजीवमंडल\u0026nbsp;रिजर्व\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eलोग जीवमंडल में ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कभी-कभी, लोग इस\u0026nbsp;प्रवाह को बाधित भी\u0026nbsp;करते हैं। जब लोग जंगलों को साफ करते हैं या कोयले और तेल जैसे जीवाश्म ईंधन को जलाते हैं।वातावरण में, ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है।\u0026nbsp;जीवमंडल का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग अन्य जीवों के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित करते\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1970 के दशक की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र ने मैन एंड बायोस्फियर प्रोग्राम नामक एक परियोजना की स्थापना की, जो सतत विकास को बढ़ावा देती है। जीवमंडल\u0026nbsp;रिजर्व का कार्य\u0026nbsp;लोगों और प्राकृतिक दुनिया के बीच एक कामकाजी, संतुलित स्थापित करना\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवर्तमान में, दुनिया भर में 563 जीवमंडल रिजर्व हैं। पहला जीवमंडल रिजर्व यांग्बामी, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में स्थापित किया गया था। यांग्बी, उपजाऊ कांगो नदी के बेसिन में, 32,000 पेड़ों की प्रजातियां और जंगली हाथियों के संरक्षण करती\u0026nbsp;हैं। यांग्बी में बायोस्फीयर रिजर्व कृषि, शिकार और खनन जैसी गतिविधियों का समर्थन करता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत सरकार ने देश भर में 18 जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र स्थापित किए हैं। जो जीव जंतुओं का संरक्षण करती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e "},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3445574350407696281"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3445574350407696281"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/07/jeev-mandal-kya-hai.html","title":"जीवमंडल परिभाषा क्या है - jeev mandal kya hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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Earth in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-gcFS_N6V0D0/X3gKF0Ec4zI/AAAAAAAAELg/FBiAjTebNCQQXnIHTbsFtey9xn4sKvOwgCPcBGAYYCw/s600/20201003_101749.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-gcFS_N6V0D0/X3gKF0Ec4zI/AAAAAAAAELg/FBiAjTebNCQQXnIHTbsFtey9xn4sKvOwgCPcBGAYYCw/s320/20201003_101749.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e        \u003cp\u003eपृथ्वी\u0026nbsp;सूर्य से तीसरा\u0026nbsp;ग्रह\u0026nbsp;है और एकमात्र खगोलीय पिंड है जो जीवन को आश्रय देता है। पृथ्वी की सतह का लगभग 29.2% भाग महाद्वीपों और द्वीपों से मिलकर बना है। शेष 70.8% पानी से ढका हुआ है। सूर्य से पृथ्वी की दुरी\u0026nbsp;152.05 मिलियन किलोमीटर है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी के अधिकांश ध्रुवीय क्षेत्र बर्फ से ढके हुए हैं। पृथ्वी की बाहरी परत को कई कठोर टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित किया गया है। जो कई लाखों वर्षों में सतह पर बाह रही हैं, जबकि इसका आंतरिक भाग एक ठोस लोहे के आंतरिक कोर से बना हैं।\u003cb\u003e\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e        \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी का इतिहास\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e        \u003cdiv\u003e          \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास, महाद्वीपों, महासागरों, वायुमंडल और जीवमंडल का विकास। पृथ्वी की सतह पर चट्टान की परतों में उस समय के दौरान की गई विकासवादी प्रक्रियाओं के प्रमाण हैं, जिस समय प्रत्येक परत का निर्माण हुआ था। इस रॉक रिकॉर्ड का शुरू से ही अध्ययन करके, इस प्रकार उनके विकास और समय के साथ परिणामी परिवर्तनों का पता लगाना संभव है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्रागैतिहासिक काल\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजिस समय से इस ग्रह का निर्माण शुरू हुआ, पृथ्वी का इतिहास लगभग 4.6 बिलियन वर्ष पुराना है। सबसे पुरानी ज्ञात चट्टानें- क्यूबेक, कनाडा में है जिसकी आयु 4.28 बिलियन वर्ष है। वास्तव में लगभग 300 मिलियन वर्षों का एक खंड है जिसके लिए चट्टानों के लिए कोई भूगर्भिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइस पूर्व-भूगर्भिक काल का विकास आश्चर्यजनक रूप से बहुत अटकलों का विषय नहीं है। इस अल्प-ज्ञात अवधि को समझने के लिए, निम्नलिखित कारकों पर विचार करना होगा: 4.6 अरब साल पहले गठन की उम्र, 4.3 अरब साल पहले तक संचालन की प्रक्रिया, उल्कापिंडों द्वारा पृथ्वी की बमबारी, और सबसे पहले जिक्रोन क्रिस्टल।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह भूवैज्ञानिकों और खगोलविदों दोनों द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि पृथ्वी लगभग 4.6 बिलियन वर्ष पुरानी है। यह युग कई उल्कापिंडों के समस्थानिक विश्लेषण के साथ-साथ चंद्रमा से मिट्टी और चट्टान के नमूनों से रूबिडियम-स्ट्रोंटियम और यूरेनियम-लेड जैसी डेटिंग विधियों द्वारा प्राप्त किया गया है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह वह समय है जब इन निकायों का गठन हुआ और उस समय सौर मंडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विकसित हुआ। जब सीसा-207 और लेड-206 के समस्थानिकों के विकास का अध्ययन पृथ्वी पर विभिन्न आयु के कई सीसा निक्षेपों से किया जाता है, तो पृथ्वी की आयु लगभग 4.6 बिलियन वर्ष के साथ मेल खाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह लगभग 30 मिलियन वर्षों की अवधि में वे गैस और धूल के एक प्रमुख बादल से ठोस पिंडों के रूप में संघनित हुए हैं। तथाकथित सौर निहारिका जिसके बारे में माना जाता है कि पूरे सौर मंडल का निर्माण लगभग एक ही समय में हुआ था।\u003c/p\u003e          \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--new display ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1359706212\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: 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left;\"\u003eब्रह्मांड एक बहुत बड़ी जगह है, और यह बहुत लंबे समय से विधमान है। यह सब कैसे शुरू हुआ, इसकी कल्पना करना मुश्किल है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eबिग बैंग थ्योरी यह है कि कैसे खगोलविद ब्रह्मांड की शुरुआत के तरीके की व्याख्या करते हैं। यह विचार है कि ब्रह्मांड केवल एक बिंदु के रूप में शुरू हुआ, फिर विस्तारित हुआ और उतना ही बड़ा हो गया जितना अभी है-और यह अभी भी खींच रहा है!\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e1927 में, जॉर्जेस लेमेत्रे नाम के एक खगोलशास्त्री के पास एक बड़ा विचार था। उन्होंने कहा कि बहुत समय पहले ब्रह्मांड की शुरुआत एक बिंदु के रूप में हुई थी। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड अब जितना बड़ा है, उतना बड़ा होने के लिए फैला और विस्तारित हुआ हैं और यह अभी भी फैलता जा रहा है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eठीक दो साल बाद, एडविन हबल नाम के एक खगोलशास्त्री ने देखा कि अन्य आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं। और अभी यह समाप्त नहीं हुआ है। सबसे दूर की आकाशगंगाएँ हमारे निकट की आकाशगंगाओं की तुलना में तेज़ी से आगे बढ़ रही थीं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसका मतलब था कि ब्रह्मांड अभी भी विस्तार कर रहा था, जैसा कि लेमेत्रे ने सोचा था। अगर चीजें अलग हो रही थीं, तो इसका मतलब था कि बहुत पहले, सब कुछ एक साथ करीब था।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआज हम अपने ब्रह्मांड में जो कुछ भी देख सकते हैं - तारे, ग्रह, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह - वे शुरुआत में नहीं थे। वे कहां से आए हैं?\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजब ब्रह्मांड की शुरुआत हुई, तो यह प्रकाश और ऊर्जा के साथ मिश्रित केवल गर्म, छोटे कण थे। अब जैसा हम देख रहे हैं वैसा कुछ नहीं था। जैसे-जैसे सब कुछ फैलता गया और अधिक स्थान लेता गया, यह ठंडा होता गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eछोटे-छोटे कण आपस में जुड़ गए। उन्होंने परमाणुओं का निर्माण किया। फिर वे परमाणु एक साथ समूहित हो गए। बहुत समय के बाद, परमाणुओं ने तारों और आकाशगंगाओं का निर्माण किया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपहले तारों ने बड़े परमाणु और परमाणुओं के समूह बनाए। इससे और अधिक सितारों का जन्म हुआ। उसी समय, आकाशगंगाएँ दुर्घटनाग्रस्त हो रही थीं और एक साथ समूहित हो रही थीं। जैसे-जैसे नए तारे पैदा हो रहे थे और मर रहे थे, तब क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, ग्रह और ब्लैक होल जैसी चीजें बन गईं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी क्यों घूमती है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    ब्रम्हांड में स्थित सभी वस्तुए घूमती रहती है। इसी प्रकार पृथ्वी भी अपने     गुरुत्वाकर्षण के घूमती है। और हमारे सौरमंडल में स्थित सूर्य का चककर लगाती     है। सूर्य में सबसे अधिक गुरुत्वाकर्षण है इसलिए सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा     करते है। पृथ्वी ही नहीं सभी ग्रह और तारे अपनी गुरुत्वाकर्षण के कारण अपनी     धुरी पर घूमते है। इसी के कारण दिन और रात होता है।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी किस पर टिकी है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    पुरानी मान्यता है की पृथ्वी को नाग देवता ने अपने फन पर उठाया हुआ है। लेकिन     यह सत्य नहीं है। पृथ्वी किसी वस्तु पर नहीं टिकी हुयी है। ये तो सूर्य के     गुरुत्वाकर्षण शक्ति से बंधा हुआ है। सूर्य की गुरुत्वाकर्षण इतना है की हमारे     सौरमंडल के सभी ग्रहो को सूर्य के चारो ओर घुमाता है। आसान भाषा में कहु तो     सूर्य के गुरुत्वाकर्षण पर पृथ्वी टिकी हुयी है। यदि सूर्य नहीं होता होता तो     पृथ्वी सीधे ब्रम्हांड में तैरती रहती।   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी का वजन कितना है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    पृथ्वी का वजन कितना है। वैसे पृथ्वी इतना बड़ा है की इसको किसी तराजू पर नापना     असम्भव है। इसके वजन का अनुमान ही लगाया जा सकता है। तो वैज्ञानिको ने पृथ्वी     के वजन 5.972 × 10^24 kg आँका है।\u0026nbsp;   \u003c/p\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी की संरचना कैसे हुई\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    पृथ्वी का आकार ग्लोब के समान है जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर थोड़ी चपटी है।     पृथ्वी की बहरी संरचना एक सामान नहीं है कही पर्वत है कही मैदान तो कही विशाल     महासागर है। पृथ्वी का अकार लगभग गोलाकार है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    पृथ्वी के आंतरिक संरचना की बात करे तो इसे तीन भोगो में बांटा गया है। पृथ्वी     की आंतरिक संरचना को तीन भगो में बाँटा गया हैं - ऊपरी सतह भूपर्पटी,     मध्य स्तर मैंटलऔर आंतरिक स्तर धात्विक क्रोड।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी का कुल     आयतन का 83 प्रतिशत भाग मैटल का है जबकि मात्र 0.5 प्रतिशत भाग ऊपरी सतह     भूपर्पटी का है। पृथ्वी का निर्माण आयरन, ऑक्सीजन, सल्फर, निकिल,     कैलसियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, और अलम्युनियम से हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--new display ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" 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patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-gcFS_N6V0D0/X3gKF0Ec4zI/AAAAAAAAELg/FBiAjTebNCQQXnIHTbsFtey9xn4sKvOwgCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_101749.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3883285689084693015"},"published":{"$t":"2020-04-14T10:23:00.006+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-12T20:57:05.607+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-B6Y4CE5AFl8/X3gKG8A9W5I/AAAAAAAAELQ/MOW_cmwfTLYuh-XI4w6vTmtoM02U8YTLgCPcBGAYYCw/s600/20201003_101955.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-B6Y4CE5AFl8/X3gKG8A9W5I/AAAAAAAAELQ/MOW_cmwfTLYuh-XI4w6vTmtoM02U8YTLgCPcBGAYYCw/s320/20201003_101955.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e \u003cdiv class\u003d\"separator\"\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cp\u003e      \u003cb\u003eएशिया\u003c/b\u003e \u003cb\u003eमहाद्वीप\u003c/b\u003e\u0026nbsp;आकार और जनसंख्या दोनों ही आधार से विश्व       का सबसे बड़ा       महाद्वीप है। और यह\u0026nbsp;उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। पश्चिम में इसकी सीमाएं       यूरोप      महाद्वीप से मिलती हैं। एशिया और यूरोप महाद्वीप को मिलाकर कभी-कभी यूरेशिया       भी कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BU1qBJNMf5Y/YOq-VEIiNxI/AAAAAAAAFJg/IlPl_okTo_onuQIhOQ1TZjhIK__aVhquwCPcBGAYYCw/s600/20210711_151531.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-BU1qBJNMf5Y/YOq-VEIiNxI/AAAAAAAAFJg/IlPl_okTo_onuQIhOQ1TZjhIK__aVhquwCPcBGAYYCw/w320-h213/20210711_151531.webp\" title\u003d\"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eworld map asia\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003eअब यह सवाल आपके मन में आ सकता है की नक्शा में हमें तो एशिया और यूरोप एक ही भूमि से जुड़े हुए है फिर दोनों को अलग अलग महाद्वीप क्यों कहा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूगोल विदों ने टैकटेनिक चट्टान और काकेशस पर्वत और यूराल पर्वत जिम्मेदार माना है जो यूरोप महाद्वीप को\u0026nbsp;प्राकृतिक रूप से एशिया से अलग करते       है। एशियाई महाद्वीप भूमध्य सागर, अन्ध महासागर, आर्कटिक महासागर,       प्रशांत महासागर      और हिन्द महासागर से       घिरा हुआ है। चीन और       भारत विश्व के दो       सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश एशिया महाद्वीप पर स्थित है।\u003c/p\u003e    \u003cp\u003e      कुछ सबसे प्राचीन मानव सभ्यताओं का जन्म इसी महाद्वीप पर हुआ था। भारतीय       सभ्यता, चीनी सभ्यता इत्यादि।\u0026nbsp;रूस का       लगभग तीन चौथाई भू-भाग एशिया में है और शेष यूरोप में पश्चिम में स्थित पर्वतमाला यूरोप को एशिया से अलग करने वाला पर्वतमाला रूस में स्थित\u0026nbsp;है। चार अन्य एशियाई देशों       के कुछ भूभाग भी यूरोप की सीमा में आते हैं।\u003c/p\u003e    \u003cp\u003e      विश्व के कुल भू-भाग का लगभग 30% भूमि एशिया कवर करता\u0026nbsp;है और इस महाद्वीप       की जनसंख्या अन्य सभी महाद्वीपों की तुलना में सबसे अधिक हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e    \u003cp\u003e      उत्तर में बर्फ़ीले आर्कटिक से लेकर दक्षिण में ऊष्ण भूमध्य रेखा तक एशिया       (Asia mahadeep) लगभग 44,579,000 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और अपने में       कुछ विशाल रेगिस्तानों, विश्व के सबसे ऊँचे पर्वतों और कुछ सबसे लंबी नदियों       को समेटे हुए है। विश्व की सबसे ऊंची पर्वतमाला       हिमालय एशिया महाद्वीप में स्थित है।     \u003c/p\u003e    \u003ch2\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया महाद्वीप का नक्शा\u003c/span\u003e    \u003c/h2\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"Asia mahadeep एशिया महाद्वीप\" data-original-height\u003d\"210\" data-original-width\u003d\"320\" height\u003d\"263\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Q4WdVdmUoEM/XpVHT7WmGGI/AAAAAAAACkE/FiTbkY_AeAIPWo3qVYxLaNOV-TjKI82sACK4BGAsYHg/w400-h263/Asia-mahadeep.jpg\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\" title\u003d\"Asia mahadeep एशिया महाद्वीप\" width\u003d\"400\" /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eएशिया महाद्वीप का नक्शा\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e           \u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e    \u003ch2\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया का भूगोल \u003c/span\u003e    \u003c/h2\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp\u003e        एशिया का         भूगोल\u0026nbsp;- एशिया\u0026nbsp;पृथ्वी\u0026nbsp;पर सबसे बड़ा महाद्वीप है। इसमें पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्र का 9% शामिल है, और इसकी सबसे लंबी तटरेखा 62,800 किलोमीटर है। एशिया को आम तौर पर यूरेशिया के पूर्वी चार-पांचवें हिस्से के रूप में परिभाषित किया गया है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह स्वेज नहर और यूराल पर्वत के पूर्व में और काकेशस पर्वत और कैस्पियन और काला सागर के दक्षिण में स्थित है। यह पूर्व में प्रशांत महासागर, दक्षिण में हिंद महासागर और उत्तर में आर्कटिक महासागर से घिरा है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\"\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया को 49 देशों में विभाजित किया गया है, उनमें से पांच जॉर्जिया, अजरबैजान, रूस, कजाकिस्तान और तुर्की अंतरमहाद्वीपीय देश हैं जो आंशिक रूप से यूरोप में स्थित हैं। भौगोलिक रूप से, रूस आंशिक रूप से एशिया में है, लेकिन सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों रूप से एक यूरोपीय राष्ट्र माना जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगोबी रेगिस्तान मंगोलिया में है और अरब रेगिस्तान मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्सों में फैला हुआ है। चीन में यांग्त्ज़ी नदी महाद्वीप की सबसे लंबी नदी है।\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u0026nbsp;और चीन के बीच हिमालय दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है। उष्णकटिबंधीय वर्षावन दक्षिणी एशिया के अधिकांश हिस्सों में फैले हुए हैं और शंकुधारी और पर्णपाती वन उत्तर की ओर स्थित हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया का\u0026nbsp;मुख्य क्षेत्र\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eएशिया के क्षेत्रीय विभाजन के लिए विभिन्न दृष्टिकोण हैं। संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी एजेंसी UNSD द्वारा अन्य क्षेत्रों में निम्नलिखित उपखंड का उपयोग किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा क्षेत्रों में एशिया का यह विभाजन केवल सांख्यिकीय कारणों से किया गया है और इसका अर्थ देशों और क्षेत्रों की राजनीतिक या अन्य संबद्धता के बारे में कोई धारणा नहीं है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cli\u003eउत्तर एशिया - साइबेरिया।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमध्य एशिया - स्टैंस।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपश्चिमी एशिया - मध्य पूर्व।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण एशिया - भारतीय उपमहाद्वीप।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eपूर्वी एशिया - सुदूर पूर्व।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003cli\u003eदक्षिण पूर्व एशिया - ईस्ट इंडीज और इंडोचीन।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएशिया-अफ्रीका सीमा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया और अफ्रीका के बीच की सीमा लाल सागर, स्वेज की खाड़ी और स्वेज नहर है। यह मिस्र को एशिया में सिनाई प्रायद्वीप और अफ्रीका में शेष देश के साथ एक अंतरमहाद्वीपीय देश बनाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएशिया-यूरोप सीमा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया और यूरोप के बीच की सीमा को ऐतिहासिक रूप से यूरोपीय अकादमिक द्वारा परिभाषित किया गया था। 1730 में फिलिप जोहान वॉन स्ट्रालेनबर्ग ने एक नया एटलस प्रकाशित किया जिसमें यूराल पर्वत को एशिया की सीमा के रूप में प्रस्तावित किया गया था। तातिशचेव ने घोषणा की कि उन्होंने वॉन स्ट्रालेनबर्ग को इस विचार का प्रस्ताव दिया था। अगली शताब्दी में 19 वीं शताब्दी के मध्य में यूराल नदी के प्रबल होने तक विभिन्न प्रस्ताव बनाए गए और सीमा को बलपूर्वक काला सागर से कैस्पियन सागर में ले जाया गया था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eएशिया-ओशिनिया सीमा\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया और ओशिनिया के बीच की सीमा आमतौर पर मलय द्वीपसमूह में कहीं स्थित है। इंडोनेशिया में मालुकु द्वीपों को अक्सर दक्षिण पूर्व एशिया की सीमा पर स्थित माना जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--new display ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1359706212\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e    \u003ch2\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया महाद्वीप की जलवायु \u003c/span\u003e    \u003c/h2\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp\u003e        एशिया में सभी प्रकार के मौसम पाए जाते है यहाँ पर अधिक वर्षा वाले\u0026nbsp;स्थान के साथ\u0026nbsp;कई         मरुस्थल में भी है।\u003cbr /\u003eदक्षिण पूर्व एशिया के कुछ भागों में शीतकाल में भी वर्षा         होती है, संपूर्ण एशिया का सबसे अधिक वर्षा वाला इलाका भारत के         मेघालय राज्य में में स्थित मासिनराम नामक स्थान\u0026nbsp;है, चेरापूंजी पर प्रति वर्ष\u0026nbsp;सबसे         ज्यादा वर्षा दर्ज की जाती थी।       \u003c/p\u003e\u003cp\u003eएशिया में अत्यंत विविध जलवायु विशेषताएं हैं। जलवायु साइबेरिया में आर्कटिक और उपमहाद्वीप से लेकर दक्षिणी भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में उष्णकटिबंधीय है। यह दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में नम है, और अधिकांश आंतरिक भाग में सूखा पड़ता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपृथ्वी पर कुछ सबसे बड़े दैनिक तापमान एशिया के पश्चिमी भागों में पाए जाते हैं। हिमालय की उपस्थिति के कारण मानसून का संचलन दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में हावी हो जाता है, जिससे तापीय निम्न का निर्माण होता है जो गर्मियों के दौरान नमी को खींचता है। महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग गर्म हैं। साइबेरिया उत्तरी गोलार्ध में सबसे ठंडे स्थानों में से एक है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात पृथ्वी पर सबसे सक्रिय स्थान फिलीपींस के उत्तर पूर्व और जापान के दक्षिण क्षेत्र है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2010 में किए गए एक सर्वेक्षण में 16 देशों की पहचान की गई जो जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। एशियाई देश बांग्लादेश, भारत, फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड, पाकिस्तान, चीन और श्रीलंका जलवायु परिवर्तन से अत्यधिक जोखिम का सामना करने वाले 16 देशों में शामिल थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ बदलाव पहले से ही हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, अर्ध-शुष्क जलवायु वाले भारत के उष्णकटिबंधीय भागों में, तापमान में 1901 और 2003 के बीच 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया की अर्थव्यवस्था\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eदुनिया में जीडीपी और पीपीपी दोनों के हिसाब से एशिया दुनिया की सबसे बड़ी महाद्वीपीय अर्थव्यवस्था है, और यह सबसे तेजी से बढ़ता आर्थिक क्षेत्र है। 2018 तक, एशिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और तुर्की की हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-LlrMZ6kDnvU/YOrUB-lkAgI/AAAAAAAAFJo/EF8WQWZJZfIfeq5qXHN6Rt2W2669p3oxgCLcBGAsYHQ/s600/20210711_164722.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-LlrMZ6kDnvU/YOrUB-lkAgI/AAAAAAAAFJo/EF8WQWZJZfIfeq5qXHN6Rt2W2669p3oxgCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210711_164722.webp\" title\u003d\"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eएशिया की अर्थव्यवस्था\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं, दोनों की औसत वार्षिक वृद्धि दर 8% से अधिक है। एशिया में हाल ही में बहुत उच्च विकास वाले देशों में इज़राइल, मलेशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस, और खनिज समृद्ध राष्ट्र जैसे कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान, ब्रुनेई, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1000 ईसा पूर्व के दौरान भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। ऐतिहासिक रूप से, भारत पहली से 19वीं शताब्दी तक दो सहस्राब्दियों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जिसने दुनिया के औद्योगिक उत्पादन में 25% का योगदान दिया करता था। साथ ही चीन विश्व पर सबसे बड़ी और सबसे उन्नत अर्थव्यवस्था था और भारत के साथ व्यापर साझा करता था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e1990 में सोवियत संघ और 1968 में जर्मनी को पछाड़ने के बाद, बीसवीं शताब्दी के अंत में जापान एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। अब चीन, जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2010 में, एशिया में 3.3 मिलियन करोड़पति थे, जो 3.4 मिलियन करोड़पतियों के साथ उत्तरी अमेरिका से थोड़ा नीचे थे। पिछले साल एशिया ने यूरोप को पछाड़ दिया था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e      \u003ch3\u003e        \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e          एशिया महाद्वीप के देश एवं राजधानी         \u003c/span\u003e      \u003c/h3\u003e    \u003c/div\u003e    \u003col\u003e      \u003cli\u003e        अफगानिस्तान - काबुल       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        आर्मेनिया - येरेवान       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        अज़रबैजान - बाकू       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eबहरीन - मनामा\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eबांग्लादेश - ढाका\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        भूटान -         थिम्फू       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eब्रुनेई - बंदर सेरी बेगवान\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        कंबोडिया - पनोम पेन्ह       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eचीन - बीजिंग\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eसाइप्रस - निकोसिया\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eजॉर्जिया - तबिलिसी\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eभारत - नई दिल्ली\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eइंडोनेशिया - जकार्ता\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eईरान - तेहरान\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eइराक - बगदाद\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-israel-in-hindi.html\"\u003eइजराइल\u003c/a\u003e- यरूशलेम       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        जापान -         टोक्यो       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eजॉर्डन - अमान\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eकज़ाकस्तान - नूर सुल्तान\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eकुवैत - कुवैत सिटी\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eकिर्गिस्तान - बिश्केक\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eलाओस - वियनतियाने\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eलेबनान - बेरूत\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eमलेशिया - कुआलालंपुर\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eमालदीव - मेल\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eमंगोलिया - उलानबातर\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        म्यांमार -         नायपीडॉ       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        नेपाल -         काठमांडू       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eउत्तर कोरिया - प्योंगयांग हे\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eओमान - मस्कट\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        पाकिस्तान -         इस्लामाबाद      \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eफिलिस्तीन - यरूशलेम\u0026nbsp;\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eफिलीपींस - मनीला\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eकतर - दोहा\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eरूस - मास्को\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eसऊदी अरब - रियाद\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/capital-of-singapore-in-hindi.html\"\u003eसिंगापुर\u003c/a\u003e\u0026nbsp;- सिंगापुर\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eदक्षिण कोरिया - सियोल\u003c/li\u003e      \u003cli\u003e        श्रीलंका -         श्री जयवर्धनेपुरा कोटे       \u003c/li\u003e      \u003cli\u003eसीरिया - दमिश्क\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eताइवान - ताइपे\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eतजाकिस्तान -दुशांबे\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eथाईलैंड - बैंकॉक\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eतिमोर-लेस्ते - दिली\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eतुर्की - अंकारा\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eतुर्कमेनिस्तान - अश्गाबात\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eसंयुक्त अरब अमीरात - अबू धाबी\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eउज़्बेकिस्तान - ताशकंद\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eवियतनाम - हनोई\u003c/li\u003e      \u003cli\u003eयमन - साना\u003c/li\u003e    \u003c/ol\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया में भाषा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eएशिया कई भाषा परिवारों का घर है और कई अलग-अलग भाषाएं यहाँ बोली जाती हैं। अधिकांश एशियाई देशों में एक से अधिक भाषाएँ हैं जो मूल रूप से बोली जाती हैं। उदाहरण के लिए, एथनोलॉग के अनुसार, इंडोनेशिया में 600 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं, भारत में 800 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं, और फिलीपींस में 100 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं। चीन के विभिन्न प्रांतों में कई भाषाएँ और बोलियाँ हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइंडो-यूरोपीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से इंडो-ईरानी शाखा द्वारा किया जाता है। परिवार में भारतीय भाषाएँ हिंदी,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/blog-post_29.html\"\u003eउर्दू\u003c/a\u003e, बंगाली, ओडिया, असमिया, पंजाबी, सिंधी, कश्मीरी, मराठी, गुजराती, सिंहल और अन्य भाषाएँ जो मुख्य रूप से दक्षिण एशिया में बोली जाती हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eईरानी फ़ारसी, कुर्द, पश्तो, बलूची और अन्य भाषाएँ शामिल हैं। मुख्य रूप से ईरान, अनातोलिया, मेसोपोटामिया, मध्य एशिया, काकेशस और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके अलावा, एशिया में बोली जाने वाली इंडो-यूरोपियन की अन्य शाखाओं में स्लाव शाखा शामिल है, जिसमें साइबेरिया में रूसी शामिल हैं; काला सागर के आसपास ग्रीक; और अर्मेनियाई; साथ ही विलुप्त भाषाएं जैसे अनातोलिया के हित्ती और तुर्केस्तान के टोचरियनआदि।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eएशिया महाद्वीप में धर्म\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eएशिया सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है और बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म, कन्फ्यूशीवाद, हिंदू धर्म, इस्लाम, जैन धर्म, यहूदी धर्म, शिंटो, सिख धर्म, ताओवाद और पारसी धर्म सहित कई धर्मों का जन्मस्थान है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइस क्षेत्र में सभी प्रमुख धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है और नए रूप लगातार सामने आ रहे हैं। एशिया अपनी संस्कृति की विविधता के लिए विख्यात है। इस्लाम एशिया का सबसे बड़ा धर्म है जिसमें लगभग 1.25 अरब अनुयायी हैं,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/hindu-dharm-in-hindi.html\"\u003eहिंदू धर्म\u003c/a\u003e\u0026nbsp;दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eधार्मिक धर्म एशिया के सबसे पुराने धर्म हैं। सभी भारतीय धर्म भारतीय उपमहाद्वीप में उत्पन्न हुए। इन सभी धर्मों में धर्म, कर्म और पुनर्जन्म की अवधारणाएँ हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003eहिन्दू धर्म\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eलगभग 1.2 बिलियन अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म एशिया के दो सबसे बड़े धर्मों में से एक है। यह भारत (83%), नेपाल (85%), और बाली द्वीप (84%) में सबसे बड़ा धर्म है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eभूटान, फिजी, इंडोनेशिया, मलेशिया, बांग्लादेश के एशियाई देशों में अल्पसंख्यकों के साथ , पाकिस्तान, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, यमन, रूस, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर, म्यांमार, फिलीपींस और अफगानिस्तान में भी हिन्दू धर्म मानने वाले रहते है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e2020 तक, भारत में 1.10 बिलियन हिंदू आबादी है। नेपाल में जहां 23.5 मिलियन हिंदू आबादी है, वहीं बांग्लादेश में 14.5 मिलियन हिंदू हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eइसलाम\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलगभग 1.25 बिलियन अनुयायियों के साथ इस्लाम एशिया का सबसे बड़ा धर्म है, एशिया पूर्ण रूप से दुनिया की मुस्लिम आबादी का गठन करता है। इस्लाम एक एकेश्वरवादी और अब्राहमिक धर्म है जो कुरान द्वारा व्यक्त किया गया है, एक पुस्तक जिसे उसके अनुयायियों द्वारा ईश्वर का शब्द माना जाता है और मुहम्मद की शिक्षाओं और आदर्श उदाहरण है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया सबसे अधिक आबादी वाले मुस्लिम देशों का घर है, जिनमें इंडोनेशिया, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश शामिल\u0026nbsp; हैं। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2006 में चीन में 2 करोड़ मुसलमान थे। पश्चिमी एशिया में, ईरान और तुर्की के गैर-अरब देश सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eपारसी धर्म\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपारसी धर्म कभी फारसी साम्राज्य का राजकीय धर्म था, लेकिन अब यह अल्पसंख्यक ज्यादातर भारत और ईरान में पाया जाता है। यह एकेश्वरवादी देवता, अहुरा मज़्दा की पूजा करते है, और इसकी स्थापना जोरोस्टर ने की थी। पारसी धर्म एक धर्म और दर्शन है जो भविष्यवक्ता जोरोस्टर की शिक्षाओं पर आधारित है, शायद 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से कुछ समय पहले स्थापित किया गया था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eकन्फ्यूशीवाद\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकन्फ्यूशीवाद की स्थापना प्राचीन चीन में कन्फ्यूशियस द्वारा की गई थी। कन्फ्यूशीवाद नैतिक, सामाजिक, राजनीतिक, दार्शनिक और धार्मिक चिंताओं का एक जटिल तंत्र है जो पूर्वी एशिया की संस्कृति और इतिहास में व्याप्त है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकन्फ्यूशीवाद परिवार, सामाजिक पदानुक्रम और व्यक्तिगत अखंडता पर जोर देता है और संस्थाओं के बजाय प्रथाओं और दृष्टिकोणों में प्रकट होता है और परिवार और स्थानीय समाज पर केंद्रित होता है। हालाँकि, इसे कुछ समय में पूर्वी एशियाई देशों का राज्य धर्म माना जाता था।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआज चीनी, कोरियाई, जापानी और वियतनामी प्रवासी दुनिया के सभी हिस्सों में कन्फ्यूशीवाद लाए हैं।\u003c/p\u003e    \u003cdiv\u003e   \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3883285689084693015"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3883285689084693015"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/04/asia-mahadeep-in-hindi.html","title":"एशिया महाद्वीप - asia mahadeep in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eआकाशगंगा\u003c/b\u003e\u003cb\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;\u003c/b\u003eगैस, धूल और\n      अरबों सितारों का एक विशाल संग्रह होता है। जिसमे सभी\n      तत्व\u0026nbsp;गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक साथ जुड़े होते है। इसे ही आकाश गंगा कहा\n      जाता है। इसमें कई सूर्य,\n      ग्रह,\n      पिंड और उल्कायें\u0026nbsp;शामिल होती\u0026nbsp;है हमारा\n      पृथ्वी जहा\n      स्थित है। उसे मल्कीवे कहाँ जाता है। मल्कीवे\u0026nbsp;शब्द ग्रीक भाषा\u0026nbsp;से\n      लिया गया है।\u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp; \u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जिसका शाब्दिक अर्थ \"दूधिया\" होता है। इसी कारण से इसे\u0026nbsp;मिल्कीवे कहा\n      जाता\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;आकाशगंगाओं का आकार कुछ सौ मिलियन सितारों से\n      लेकर\u0026nbsp;एक सौ ट्रिलियन सितारों तक हो सकता है। इसका आकार इतना विशाल होगा\n      की आप सोच भी नहीं सकते है। और यह सारे तारे अपने केंद्र का परिक्रमा अर्थात\n      चक्कर लगते है। माना जाता है कि कई आकाशगंगाओं के केंद्रों पर सुपरमैसिव\n      ब्लैक होल होते हैं। मिल्की वे के केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से\n      चार मिलियन गुना अधिक होता\u0026nbsp;\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n  \n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमिल्की वे क्या है\u003c/span\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\n  \u003c!--mobile article--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1422942514\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\n  \u003cscript\u003e\n    (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || 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अलग-अलग तारों में\n        प्रकाश के बैंड की खोज किया। 1920 के दशक की शुरुआत तक, अधिकांश खगोलविदों\n        का मानना था कि मिल्की वे में ब्रह्मांड के सभी सितारे शामिल है।\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003e\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjbMTUtIsmyKoJsv5xhNUhqF89ph2yJLnHsk5lNVw5a1pBd8q0MX9-Rp1QTnRvYxENB-ZuDODYTbN1OCN2Y6x-ovJStMZh5-jrlqFKIYGfEwM5wfpRbIhcGHCgFSAI0tEX5WMUwUBm0bIkDy0dnTfRqd5KkmK7IoNsgROUir5jn2QmUW4BgPkUHJErEoQ/s600/20230329_061614.webp\" style\u003d\"margin-left: 1em; margin-right: 1em;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"आकाशगंगा किसे कहते हैं - akash ganga in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjbMTUtIsmyKoJsv5xhNUhqF89ph2yJLnHsk5lNVw5a1pBd8q0MX9-Rp1QTnRvYxENB-ZuDODYTbN1OCN2Y6x-ovJStMZh5-jrlqFKIYGfEwM5wfpRbIhcGHCgFSAI0tEX5WMUwUBm0bIkDy0dnTfRqd5KkmK7IoNsgROUir5jn2QmUW4BgPkUHJErEoQ/w320-h213/20230329_061614.webp\" title\u003d\"आकाशगंगा किसे कहते हैं - akash ganga in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/span\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003e1920 के खगोलविद हार्लो शैले और हेबर कर्टिस के बीच बहस के बाद, एडविन हबल\n        की टिप्पणियों से पता चला कि मिल्की वे कई आकाशगंगाओं में से एक\n        है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003eजीएन-जेड 11 ने मार्च 2016 में पृथ्वी से 32 बिलियन प्रकाश-वर्ष की दुरी तय\n      किया। उसने सबसे पुरानी और दूर स्थित\u0026nbsp;आकाशगंगा की जानकारी दी।\u0026nbsp;और\n      यह बिग बैंग के ठीक 400 मिलियन साल बाद अस्तित्व मे आया था।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      2016 में जारी किए गए शोध ने ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की संख्या को 200\n      बिलियन के पिछले अनुमान से 2 ट्रिलियन\u0026nbsp;या उससे अधिक तक संशोधित किया\n      गया।\u0026nbsp;कुल मिलाकर जितने पृथ्वी पर रेत के कण है उससे ज्याद ब्रम्हांड में\n      तारे और ग्रह है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eमिल्की वे का व्यास कम से कम 30,000 व्यास\u0026nbsp;है। जबकि पडोसी\n        आकाशगंगा\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u0026nbsp;एंड्रोमेडा गैलेक्सी का व्यास\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n        780,000 है। इसके अलावा ब्राम्हण में और कई बड़े छोटे आकाशगंगाएँ विधमान\n        है।\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"font-size: large; text-align: left;\"\u003eआकाशगंगा कितने है\u003c/span\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eवैज्ञानिक मानते है की एलियन होना चाहिए आप खुद सोचिए एक आकाशगंगा में में\n        इतने ग्रह और तारे\u0026nbsp;है तो 2\u0026nbsp;\u003c/span\u003eट्रिलियन\u0026nbsp;\u003cspan\u003eआकाशगंगाओं में\u0026nbsp;अरबो ग्रह होंगे\u0026nbsp;उसमे से किसी न किसी ग्रह पर पर\n        तो जीवनहोना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003eलगभग 220 किलोमीटर प्रति सेकंड की दर से गैलेक्सी फ़ैल रही है। लगातार तारो\n        और ग्रहो की\u0026nbsp;घूमने की प्रवित्ति के कारण\u0026nbsp;लगभग 90%\n        भाग\u0026nbsp;दूरबीनों के लिए अदृश्य होते है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003eसूर्य की घूर्णन अवधि लगभग 240 मिलियन वर्ष है। मिल्की वे लगभग 600 किमी\n        प्रति सेकंड के वेग से आगे बढ़ रहा है। मिल्की वे के सबसे पुराने सितारे\n        लगभग ब्रह्मांड जीतना\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan\u003eपुराना\u003c/span\u003e\u003cspan\u003e\u0026nbsp;हैं और शायद बिग बैंग के अंधेरे युग के बाद जल्द ही बन गए\n        होंगे।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआकाशगंगाओं के बीच\u0026nbsp;टेनसियस गैस से भरा होता है। जिसका घनत्व औसतन प्रति\n      घन मीटर एक परमाणु से कम होता है। अधिकांश आकाशगंगाएँ गुरुत्वाकर्षण के कारण\n      व्यवस्थित होती हैं।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eमिल्की वे (\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eMilky Way\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e) लोकल ग्रुप का हिस्सा है। जिस पर मिल्कीवे और एंड्रोमेडा \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eगैलेक्सी का दबदबा है। और वह विग्रो सुपरलाइजर\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eका हिस्सा है।\u003c/span\u003e\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eआकाशगंगा का नाम कैसे पड़ा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    खगोलीय शास्त्र\u0026nbsp;में कैपिटल शब्द \"गैलेक्सी\" का उपयोग अक्सर हमारी\n    आकाशगंगा, मिल्की वे को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। ताकि इसे ब्रह्मांड\n    के\u0026nbsp;अन्य आकाशगंगाओं से अलग किया जा सके। अंग्रेजी शब्द मिल्की वे को चॉसर\n    सी द्वारा एक कहानी में प्रयोग किया\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआकाशगंगा शब्द को फ्रांसीसी और मध्यकालीन लैटिन से ग्रीक शब्द से लिया गया\n      है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\n  \u003c!--mobile article--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1422942514\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\n  \u003cscript\u003e\n    (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});\n  \u003c/script\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसे\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u0026nbsp;मिल्की वे नाम दूध के सामान सफ़ेद\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u0026nbsp;दिखाई देने के कारण दिया गया\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003eग्रीक पौराणिक कथाओं में,जीजस अपने बेटे को हेरा के स्तन पर रखता है जबकि वह\n    सो रहा है। इसलिए बच्चा उसके दिव्य दूध पी लेगा और इस तरह अमर हो जाएगा। हेरा\n    स्तनपान करते समय जाग जाती है और फिर उसे पता चलता है कि वह एक अज्ञात बच्चे\n    कोदूध पीला\u0026nbsp;रही है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eआकाशगंगा की दिखावट\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\n  \u003c/h3\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003eमिल्की वे पृथ्वी से सफेद रोशनी के एक धुंधले बैंड के रूप में\n          दिखाई\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003eदेता\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003e\u0026nbsp;है। जिसे हम\u0026nbsp;रात के समय आकाश में फैला हुए देखते\u0026nbsp;है।\n          नग्न आंखोंसे देखे जाने वाले सभी\u0026nbsp;तारे मिल्की वे का हिस्सा\n          होते\u0026nbsp;हैं।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003eप्रकाश की उत्पत्ति अनसुलझी पहेली है\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222; text-align: justify;\"\u003e\u0026nbsp;ग्रेट रिफ्ट और कोलसैक जैसे बैंड के भीतर के अंधेरे क्षेत्र, ऐसे\n          क्षेत्र हैं जहां इंटरस्टेलर धूल दूर के तारों से प्रकाश को अवरुद्ध करता\n          है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003eजैसा कि पृथ्वी से देखा गया है। मिल्की वे के गांगेय विमान के दृश्य\n        क्षेत्र में आकाश का एक क्षेत्र है जिसमें 30 नक्षत्र शामिल होते हैं।\n        गेलेक्टिक केंद्र धनु की दिशा में स्थित है। जहां मिल्की वे सबसे चमकदार\n        है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan face\u003d\"sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #222222;\"\u003eधनु से सफेद प्रकाश का धुंधला बैंड गैलेक्टिक एंटीकेंटर के चारों ओर से\n        गुजरता दिखाई देता है। बैंड फिर आकाश के चारों ओर फ़ैल\n        जाता\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6158982706389929136"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6158982706389929136"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/04/akash-ganga-in-hindi.html","title":"आकाशगंगा किसे कहते हैं - akash ganga in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjbMTUtIsmyKoJsv5xhNUhqF89ph2yJLnHsk5lNVw5a1pBd8q0MX9-Rp1QTnRvYxENB-ZuDODYTbN1OCN2Y6x-ovJStMZh5-jrlqFKIYGfEwM5wfpRbIhcGHCgFSAI0tEX5WMUwUBm0bIkDy0dnTfRqd5KkmK7IoNsgROUir5jn2QmUW4BgPkUHJErEoQ/s72-w320-c-h213/20230329_061614.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5459406355820290513"},"published":{"$t":"2020-03-04T09:28:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-08-04T06:45:38.635+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भूकंप कितने प्रकार के होते है - bhukamp ke prakar"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जिस पर मानव का कोई वश नहीं है। अनेक क्षेत्रों में विकास की ऊंची उड़ान भरने वाला मानव आज भी भूकम्प व ज्वालामुखी की घटना को भगवान भरोसे ही मानता रहा है। फिर भी भूकंप आने की घटनाओं और भूकंपतरंगों का अध्ययन किया जा रहा है जिससे की भूकंप क्या है\u003cb\u003e\u0026nbsp;\u003c/b\u003eइसके प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है इसकी जानकारी प्राप्त हो सके।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eसामान्य भाषा में भूंकप\u0026nbsp;\u003cb\u003e\u003c/b\u003eपृथ्वी\u0026nbsp;पर अचानक आने वाले हलचल को कहा जाता है। ये पृथ्वी के केंद्र से धरातल की और बढ़ते है। इसके कारण हर साल जान माल का नुकसान होता है। भूकंप को उसके तरंगो के माध्यम से नापा जाता है। भूकंप आने के कई कारण हो सकते है जिसमे प्राकृतिक और मानवीय दोनों के कारण आयें हलचल को भूकंप कहा जाता है। ये मानव के लिए विनाश लेकर आते है। विश्व में ऐसे कई उदाहरण है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप कितने प्रकार के होते है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003ctable\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003cth\u003eभूकंप दो प्रकार के होते है\u003c/th\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eप्राकृतिक भूकंप\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eमानवीय भूकंप\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eमानवीय कारण\u0026nbsp;\u003c/b\u003eसे उत्पन्न भूकंप इन्हें कृत्रिम भूकंप भी कहते हैं। ऐसे भूकंप हल्के प्रभाव वाले होते हैं। भवनों के समीप स्थित रेल की पटरी से गुज़र रही एक्सप्रेस से जो तंरगे उत्पन्न होती है वे भी एक प्रकार का भूकंप होता है। कुओं या चट्टान\u0026nbsp;खोदते समय भारी विस्फोट का उपयोग करने पर निकटवर्ती भाग में कुछ क्षणों के लिए हल्का कम्पन महसूस होता\u0026nbsp;है। वे भी भूकंप होते\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवर्तमान में आणविक विस्फोट भी भूकंप के अंतर्गत आते\u0026nbsp;है। यह मानव द्वारा बनाया गया घातक हथियार है। जिसे साधारण भाषा में परमाणु बंम कहा जाता है। इसमें काँच की खिड़कियों में कम्पन की आवाज सुनाई देती है एवं रखा हुआ सामान हिलने लगता है। मानव का यह खोज भी काफी महत्वपूर्ण किन्तु विनाशकारी होती\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eप्राकृतिक भूकंप के प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003eविविध प्रकार की प्राकृतिक घटनाओं से भू - तल पर कम्पन होने लगता है। इस आधार पर पर भूकंप चार प्रकार के होते है -\u0026nbsp;\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. ज्वालामुखी भूकंप\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- जब किसी स्थान पर\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eउत्त्पन होता है तो कई घटनाये होते है जिसमे मैग्मा तेजी से बहार निकता है साथ में गैस और धूल भी निकलता है। जिसके कारण भूकंप भी उत्त्पन होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसी प्रकारमेग्मा एवं उससे सम्बन्धित गैसें जब तेज गति से दौड़ते हुए चट्टानों पर विशेष दबाव डालती है तो इसके प्रभाव से भूकंप आ सकता है। सन् 1969 का एटना का भूकंप भी\u0026nbsp;ज्वालामुखी\u0026nbsp;भूकंप था।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. विवर्तनिक प्लेट भूकंप इसे\u0026nbsp;\u003c/b\u003e- पृथ्वी के अन्दर टेक्टोनिक प्लेट इधर उधर तैरते रहते है। तथा इसके आपस में टकराने से भूगर्भ पर दरार लगती है तथा इसके कारण भूकंप उत्पन्न होने लगते है। यह बहुत विनाशकरी भूकंप का निर्माण करता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइससे कई बार भू-गर्भ के पदार्थ रेत, चट्टानें, गैसें आदि अनियमित रूप से निकलने लगती हैं।\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;में\u0026nbsp;असम\u0026nbsp;का 15 अगस्त, 1950 का भूकंप ऐसा ही था। पेरू में क्वीचेस 1946 जापान में सगामी की खाड़ी एवं\u0026nbsp;संयुक्त राज्य अमेरिका\u0026nbsp;में कैलिफ्रेनिया 1986 में आने वाले भूकम्प ऐसे ही थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e3. पातालीय भूकंप\u0026nbsp;\u003c/b\u003e-जब भूकंप की उत्पत्ति पृथ्वी के अधिक गहराई पर हो तो इसे पातालीय भूकम्प कहते हैं। सामान्यतः ऐसे भूकंप का मूल (Focus) 250 से 680 किलोमीटर के मध्य रहता है। ऐसे भूकंप की उत्पत्ति एवं विशेष शक्तियों के बारे में बहुत कम ज्ञान है। क्योंकि अधिक गहराई में होने वाली क्रियाओं का अनुमान लगाना आज भी कठिन है अधिक गहराई से उत्पन्न भूकंप की तरंगें भू-तल पर अपनी गति व फैलने के स्वरूप आदि विशेषताओं में अन्य भूकम्पों से भिन्न होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e4. भू-सन्तुलन से सम्बन्धित भूकंप -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपृथ्वी के कमजोर भागों में जैसे पर्वतीय प्रदेशों में भूमि असंतुलन सेअचानक विविध प्रकार की गतियाँ होने लगतीहैं। इससे चट्टानें टूटती व पुनः व्यवस्था में आने का प्रयास करती हैं। इस कारण से पर्वतीय भगो में अधिक भूकंप आते है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eप्राकृतिक स्थिति\u0026nbsp;\u003c/b\u003eके अनुशार भूकंप दो प्रकार के होते हैं -\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003ctable\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003cth\u003e\u003cspan style\u003d\"font-weight: normal; text-align: left;\"\u003eइस आधार पर\u0026nbsp;भूकंप को दो भागों में बांटा गया हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/th\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eस्थलीय भूकंप\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd\u003eसामुद्रिक भूकंप\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eस्थलीय भूकंप\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमहाद्वीप\u0026nbsp;एवं बड़े\u0026nbsp;द्वीपों\u0026nbsp;पर आने वाले भूकंप\u0026nbsp;को स्थलीय भूकंप\u0026nbsp;कहते हैं। ऐसे भूकंप\u0026nbsp;जो कि प्रायः अल्पाइन पर्वतीय भागों में बार-बार आते रहे है। अधिक घातक एवं विशेष हानिकारक होते\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e12 जून 1897 एवं 15 अगस्त 1950 को आये असम के भूकंप विनाशकारी एवं विशाल क्षेत्र को प्रभावित करने वाला भूकंप\u0026nbsp;था। अनेक नगर एवं हजारों वर्ग किलोमीटर पर इसका विशेष प्रभाव पड़ा था।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cb\u003eसामुद्रिक\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003cb\u003eभूकंप\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eऐसे भूकम्पों की उत्पत्ति महासागरीय क्षेत्र में होती है। जिसका केंद्र तटीय भागों के आस-पास होता\u0026nbsp;है। ऐसे भूकम्पों का सीधा प्रभाव द्वीपीय\u0026nbsp;देशों\u0026nbsp;पर होता है। विशेषकर प्रशान्त महासागर के पश्चिमी तट पर इस प्रकार के भूकंप से\u0026nbsp;द्वीपीय देशों पर अधिक प्रभाव पड़ता\u0026nbsp;है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eप्रशान्त महासागर तट के आस-पास व द्वीपों के निकट प्रतिदिन 150 से 200 भूकंप के झटके महसूस\u0026nbsp;किये जाते हैं। अकेले जापान में ही 10 से 12 भूकंप\u0026nbsp;प्रतिदिन अंकित किये जाते हैं। कई विद्वानों का विश्वास है कि महासागरों के विशेष भागों में जो दरारें एवं गहरे गर्त पाई जाती हैं। असन्तुलन के कारण वहाँ भूकंप आते रहते\u0026nbsp;हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूकंप के कारणयहाँ लहरें उठती है। ऐसी घातक लहरों कोजापान में सुनामी कहा जाता है। टोकियो में सन् 1925 के भूकम्प से 25 हजार व्यक्ति मारे गये।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप किससे मापा जाता है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभूकंप से सम्बन्धित सभी तथ्यों का अध्ययन जिस यन्त्र द्वारा किया जाता है उसे\u0026nbsp;\u003cb\u003eभूकम्पमापी यंत्र\u003c/b\u003e\u0026nbsp;कहते हैं। इस यन्त्र में लगे हल्के तारों वाले लटकते पदार्थों पर जो क्रिया होती है वह विशेष रोशनी की सहायता से ग्राफ पर अंकित होती जाती है। वहाँ बने कम्पन की रेखाओं से भूकम्प की दिशा और प्रभावित क्षेत्र काज्ञान प्राप्त किया जाता है। सभी बड़े नगरों में इस यंत्र कोस्थापित किये जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूकंप\u0026nbsp;तरंगों का अध्ययन भी इसी यन्त्र से किया जाता है। आजकल अधिक विकसित यन्त्र में फोटो फिल्म की विशेष उच्च स्तर की व्यवस्था होती है। इससे आस-पास के हल्के झटकोंका भी आसानी से अध्ययन किया जा सकता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप केंद्र किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eधरती के अंदरजिस स्थान से चट्टानों में होने वाली परिवर्तन से हलचल की शुरूआत होती है। उसे भूकम्प उत्पत्ति केन्द्र कहते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउत्पत्ति केन्द्र से सभी दिशाओं में जो तरंगें फैलती हैं वही अभिकेन्द्र के चारों ओर वृताकार घेरा बनाती है। इनसे भूकंप से होन वाली हानि का ज्ञान होता है। भूकंप का मूल केन्द्र से हमेशा समान गहराई पर नहीं होता। यह कुछ किलोमीटर से लेकर सौ से अधिक किलोमीटर की गहराई पर हो सकता है। वैसे अधिकांश भूकम्पों के उत्पत्ति केन्द्र की गहराई पृथ्वी से 5 से 8 किलोमीटर के मध्य रहती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारत में भूकंप प्रभावित क्षेत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभारत में भूकंप क्षेत्र को चार भागो में बंटा गया है जोन-2, जोन-3, जोन-4 औरजोन-5 इसमें जोन- 5सबसे खतरनाक क्षेत्र है जहां पर अधिक तीव्र गति की भूकंप आता है। जिसमे उत्तर-पूर्व भारत के हिस्से आते है। जम्मू कश्मीर\u0026nbsp;उत्तराखंड,\u0026nbsp;हिमाचल\u0026nbsp;और असम आते है। दिल्ली और उत्तरप्रदेश के ज्यादातर क्षेत्र जोन-4 में आते है। मध्यभारत जॉन-3 में आता है तथा दक्षिण भारत जोन-2 में आता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप तरंग किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभूकंप केन्द्र केचारों ओर चलने वाली लहरों या कम्पन कोभूकम्प तरंग कहते हैं। इनकी गति समान नहीं रहती। यह रुक-रुककर आगे बढ़ती रहती है। अतः भूकम्प तरंगें कई प्रकार से प्रभावी होती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e1. प्राथमिक या 'P' तरंगें -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;ये तरंगें सबसे अधिक तेज गति से चलती हैं। इनकी गति 8 से 14 किलोमीटर प्रति सेकण्ड तक रहती है। ये तरंगें ठोस एवं तरल पदार्थों में समान रूप से गतिशील होती हैं। इसे संक्षेप में 'P' तरंगें भी कहा जाता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003e2. द्वितीयक या 'S' तरंगें -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;इन लहरों की गति जल में उठने वाली लहरों जैसी होती है। इनकी गति 5 से 7 किलोमीटर प्रति सेकण्ड रहती। तेज भूकम्प के झटकों से इन लहरों के कारण पृथ्वी पर दरारें पड़ जाती हैं।\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5459406355820290513"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5459406355820290513"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/03/bhukamp-ke-prakar.html","title":"भूकंप कितने प्रकार के होते है - bhukamp ke prakar"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}]},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-8315431448372490797"},"published":{"$t":"2020-03-03T20:13:00.009+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-20T23:46:06.617+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भूगोल किसे कहते हैं  - geography in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp\u003eसामान्य व्यक्ति भूगोल को पर्वत, पठार, मैदान, नदियाँ, सागर तथा\n  राजनीतिक सीमाओं का अध्ययन ही समझते है किन्तु भूगोल समस्त विज्ञान का\n  सार\u0026nbsp;है। पहले\u0026nbsp;भूगोल नक्षत्र\u0026nbsp;शास्त्र\u0026nbsp;का हा एक भाग था क्योंकि\n  इसको विकसित करने का प्रयास युनान वासियों ने ही किया था। बाद में अन्य\n  देशों के विद्वानों ने इसका विकास करने में योगदान दिया हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यह एक प्रगतिशील विज्ञान है, जिसका अध्ययन\n  पृथ्वी की\n  उत्पत्ति के साथ ही प्रारम्भ हो गया था। परन्तु इसका स्वरूप, अध्ययन-क्षेत्र और\n  उद्देश्य परिवर्तित होता रहा हैं।\u0026nbsp;भूगोल को अंग्रेजी में जियोग्राफी कहा जाता हैं। जियो का अर्थ पृथ्वी और ग्राफी का अर्थ वर्णन करना होता है। इस प्रकार यह पृथ्वी का अध्ययन करने वाला विषय हैं।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgQwG2xA-IGpqUTCArfyy_SIBuUHzrGEjw6HTRE8Yo9eofp3T7-qznJTJv3YzuuWK4n-PEFpkdG2aDTfOV9ww0W2dA58FODYwMlBZKBksrwO6EYfr2tDvXH3Md0E27aNUZnYtinw67-Oa_905GSiXx3qehbbmbl70UlBTW05QRR_Fxn5CKt50ykpDrpGg/s600/20230403_173101.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"भूगोल किसे कहते हैं  - geography in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgQwG2xA-IGpqUTCArfyy_SIBuUHzrGEjw6HTRE8Yo9eofp3T7-qznJTJv3YzuuWK4n-PEFpkdG2aDTfOV9ww0W2dA58FODYwMlBZKBksrwO6EYfr2tDvXH3Md0E27aNUZnYtinw67-Oa_905GSiXx3qehbbmbl70UlBTW05QRR_Fxn5CKt50ykpDrpGg/w320-h213/20230403_173101.webp\" title\u003d\"भूगोल किसे कहते हैं  - geography in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003eप्राचीन काल में भूगोल को केवल पृथ्वी का वर्णन करने वाला विषय समझा जाता था। प्राचीनकाल में\n  यूनान एवं रोम के अनेक विद्वानों ने महत्वपूर्ण भौगोलिक वर्णन प्रस्तुत किए हैं। जिनमें हेकेटियस, अरस्तु, इरेटोस्थनीज और हेरोडोटस विशेष उल्लेखनीय हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूगोल किसे कहते हैं\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  इरेटॉस्थनीज ने सर्वप्रथम भूगोल का प्रयोग किया\n  था। इसीलिए इन्हें भूगोल का जनक कहा जाता है।\u0026nbsp;पृथ्वी तल पर रहने वाले सभी मानव जाति एवं उसके प्राकतिक वातावरण का अध्ययन करने वाले विषय को भूगोल कहते है।\u0026nbsp; भूगोल की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषा नीचे दिया गया है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eपरिभाषा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eभूगोल एक ऐसा विषय है, जिसका उद्देश्य आकाशीय पिण्डों, थल,\n    महासागर, जीव-जन्तुओं,\n    वनस्पतियों और पृथ्वी के सभी क्षेत्रों का\n    ज्ञान प्राप्त करना हैं। भूगोल के अंतर्गत प्रकृति और मानवीय गतिविधि का अध्ययन किया जाता हैं।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eइमेनुअल काण्ट -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eभूगोल धरातल का अध्ययन करता है तथा यह भूतल के\n  विभिन्न भागों में पायी जाने वाली विभिन्नताओं की पृष्ठभूमि में की गयी व्याख्या\n  का अध्ययन करता है। इसमें सभी घटनाओं के मध्य जटिल एवं क्रियाशील सम्बन्ध तथा\n  अन्तर्सम्बन्ध पर विशेष ध्यान दिया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eकार्ल रिटर -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eभूगोल विज्ञान का वह भाग है जिसमें भूमण्डल\n  के सभी घटनाओं और उनके सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता हैं। पृथ्वी को स्वतन्त्र रूप से मानते\n  हुए वर्णन किया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eहार्टशोर्न -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eभूगोल वह अनुशासन है, जो पृथ्वी को मानव का\n  संसार मानकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर विभिन्न लक्षणों को वर्णन तथा व्याख्या\n  के लिए खोजता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eमोकहाउस -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eभूगोल में पृथ्वी पर प्राकतिक\n  तथा मानवीय दोनों प्रकार के तथ्यों के वितरणों और मानव निवास के रूप में पृथ्वी\n  के धरातल की\u0026nbsp;क्षेत्रीय विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है।\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  20 वी शताब्दी तक भूगोल के अध्ययन में प्रदेश, क्षेत्र तथा उनकी व्याख्या करना\n  सम्मिलित हो गया था तथा इसके साथ-साथ मानव, स्थान तथा स्थानिक अध्ययन के महत्व को\n  भी स्वीकारा किया जाने लगा था। आधुनिक भूगोल में मानव और वातावरण के पारस्परिक\n  सम्बन्धों को दिखाया जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eजीन बून्श का विचार है,\u003c/b\u003e \"यह अब कोई वर्णनों की सूची नहीं, किन्तु यह एक\n  इतिहास है। यह अब केवल स्थान मात्रों की गणना नहीं करता अपितु यह एक व्यवस्थित\n  क्रमबद्ध विषय है। इसका उद्देश्य दोहरा है। कार्यशील तथ्यों के प्रत्यक्ष प्रभाव\n  को\u0026nbsp; वर्गीकृत करना, उनको समझना और इन सभी तथ्यों का सम्मिलित प्रभाव क्या\n  होगा यह निर्देशन करना है।\"\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  उपर्युक्त परिभाषाओं के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है (1)\u0026nbsp;भूगोल पृथ्वी\n  तल का अध्ययन है, (2) भूगोल पारिस्थितिकी का विज्ञान है, (3) भूगोल प्रादेशिक\n  विषमताओं का अध्ययन है. (4) भूगोल स्थानिक संगठनों की संरचनाओं तथा पारस्परिक\n  क्रियाओं का अध्ययन है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  17वीं शताब्दी में अनेक प्राकृतिक एवं सामाजिक विज्ञानों के विकास की भाँति भूगोल\n  का भी एक सुव्यवस्थित रूप स्पष्ट होने लगा। इस काल के विद्वान बाइबिल एवं धार्मिक\n  चिन्तन के प्रभाव से मुक्त होकर स्वतन्त्र स्थायित्व के साथ तथ्यात्मक विवरण\n  प्रस्तुत करने लगे।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  जर्मन विद्वान वारेनियस ने भूगोल में क्रमबद्ध पद्धति का आरम्भ होता है। उन्होंने\n  पहली बार भूगोल को सामान्य भूगोल तथा विशिष्ट भूगोल नामक दो भागों में विभाजित\n  किया। सामान्य भूगोल भौतिक है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभौतिक भूगोल क्या है\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cb\u003eभौतिक भूगोल,\u0026nbsp;\u003c/b\u003eवृहद् भूगोल शास्त्र की एक शाखा है। यह वह विज्ञान है\nजिसमें भौतिक\nपर्यावरण का अध्ययन किया जाता है। इसका स्वरूप परिवर्तित होता रहा है।\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसका प्रयोग भूगोल, सामान्य भूगोल, क्रमबद्ध भूगोल तथा प्राकृतिक भूगोल आदि रूपों\n  में होता रहा है। वर्तमान समय में इसे भौतिक भूगोल\u0026nbsp;कहा जाता है। प्रारम्भिक\n  अवस्था में भौतिक भूगोल को संकुचित अर्थों में प्रयोग किया जाता था।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  18वीं एवं 19वीं शताब्दी में वारेनियस, इमैनुअल काण्ट एवं वॉन हम्बोल्ट आदि ने\n  भौतिक भगोल शब्दों का प्रयोग सामान्य भूगोल के लिए किया जिसे क्रमबद्ध भूगोल कहा\n  जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में भौतिक भूगोल में मात्र\n  अजैविक भूगोल के अध्ययन को ही सम्मिलित गया था। इसमें वनस्पति, जीव एवं मानव प्रजातियों\n  को सम्मिलित नहीं किया गया था।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वाल्थर पैंक ने भौतिक भूगोल को भू-आकृति विज्ञान के रूप में माना हैं। भौतिक\n  भूगोल, भूगोल की वह शाखा है जिसमें समस्त भौतिक वातावरण का अध्ययन सामिल\u0026nbsp;है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभौतिक भूगोल की परिभाषा\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003eभौतिक भूगोल को निम्न विद्वानों ने निम्न प्रकार परिभाषित किया है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eआर्थर होम्स के अनुसार\u003c/b\u003e \"भौतिक वातावरण का अध्ययन ही भौतिक भूगोल है, जिसके\n  अन्तर्गत\n  द्वीपों\u0026nbsp;तथा सागरों व महासागरों की सागरीय तलहटियों के धरातलीय उच्चावच तथा वायु का\n  अध्ययन किया जाता\u0026nbsp;है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eआर्थर होम्स के अनुसार\u003c/b\u003e, \"भौतिक भूगोल\u0026nbsp;में पर्यावरण के तीन तत्वों\n  स्थल, जल एवं वायु का विवरण मिलता है।\"\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eइमैनुअल काण्ट \u003c/b\u003eने भौतिक भूगोल को विशेष महत्व प्रदान करते हुए उसको निम्न\n  प्रकार से परिभाषित किया है।\u0026nbsp; \"भौतिक भूगोल विश्व के ज्ञान का प्रथम भाग है,\n  यह वास्तव में सारभूत प्रारम्भिक तथ्य है जिसके द्वारा विश्व के वस्तुबोध को समझा\n  जा सकता है।\"\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eस्ट्रेलर के अनुसार,\u003c/b\u003e \"भौतिक भूगोल\u0026nbsp;सामान्य रूप से भू-विज्ञान का\n  अध्ययन एवं समन्वय है जो मानव पर्यावरण पर सामान्य रूप से प्रकाश डालते हैं।\"\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eए. के. लोबक के अनुसार,\u003c/b\u003e \"जीवन तथा भौतिक वातावरण के सम्बन्धों का अध्ययन\n  भूगोल का विषय है तथा मात्र भौतिक वातावरण का अध्ययन भौतिक भूगोल है।\"\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003cb\u003eटार व वॉन एन्जिल के अनुसार,\u003c/b\u003e “भौतिक भूगोल के अन्तर्गत पृथ्वी के भौतिक\n  स्वरूपों तथा उनके मानव पर प्रभाव का वर्णन किया जाता है।\"\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  ऊपर दी गई परिभाषाओं से स्पष्ट है कि भौतिक भूगोल का सम्बन्ध भौतिक परिस्थितियों\n  से हैं। परिस्थितियाँ, भौतिक वातावरण तैयार करती हैं अतः भौतिक भूगोल में उस\n  भौतिक वातावरण का ही अध्यनन किया\u0026nbsp;जाता है । यह स्थल, जल एवं वायुमण्डल के\n  सम्बन्धों के प्राकृतिक परिणाम का अध्ययन करता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभौतिक भूगोल का विषय क्षेत्र\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  भौतिक भूगोल की परिभाषाओं में ही इसका अध्ययन-क्षेत्र निहित है। भौतिक\n  भूगोल\u0026nbsp;अनेक भू-विज्ञानों का समन्वय है। इसमें भौतिक पर्यावरण तथा मानव के\n  पारस्परिक सम्बन्धों का भी अध्ययन किया जाता है। भौतिक भूगोल मानव के समस्त\n  प्रारूपों का विश्लेषण व प्राकतिक पर्यावरण का अध्ययन करता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  प्राकृतिक पर्यावरण की भिन्नता को समझने के लिए शैलों की बनावट, मृदा, वनस्पति,\n  खनिज पदार्थ, जलाशय तथा वायुमण्डल का अध्ययन किया जाता है। इसके अध्ययन-क्षेत्र\n  में सम्पूर्ण पृथ्वी ही आ जाती है। पृथ्वी से तात्पर्य उसकी सतह, भूगर्भ एवं\n  वायुमण्डल, स्थल, जल आदि से\u0026nbsp;सम्बन्धित समस्त तत्वों का अध्ययन ही भौतिक\n  भूगोल है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  स्थल अथवा सागर तलहटी में स्थित पृथ्वी के समस्त उच्चावच भौतिक भूगोल\u0026nbsp;की\n  परिधि में आते\n  हैं। इन उच्चावचों का समग्र अध्ययन भौतिक भूगोल में किया जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  मानव अपनी समस्त क्रियाएँ इन्हीं उच्चावचों पर करता है, अतः इनका विस्तृत अध्ययन\n  करना उसका परम दायित्व है। इस पृथ्वी पर रहकर ही मानव जीवित रहने के लिए साँस\n  लेता है जो उसे वायुमण्डल से मिलती है। वायुमण्डल का अध्ययन मौसम एवं जलवायु\n  विज्ञान में किया जाता है अतः ये सभी भौतिक भूगोल\u0026nbsp;के अंग हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eपृथ्वी के\u0026nbsp;उच्चावचों\u0026nbsp;की तीन भागो में बाँटा गया है\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  (1) प्रथम प्रकार के उच्चावच लक्षण - महाद्वीप एवं महासागर।\u003cbr /\u003e(2) द्वितीय\n  प्रकार के उच्चावच लक्षण - पर्वत, पठार, मैदान, महासागरीय मैदान आदि।।\u003cbr /\u003e(3)\n  तृतीय प्रकार के च्चावच लक्षण - घाटियाँ, जल- प्रपात, जलोढ़ पंख, बाढ़ के मैदान,\n  डेल्टा आदि।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इन तीनों प्रकार के उच्चावचों का अध्ययन भौतिक भूगोल में किया जाता है। समस्त\n  स्थलाकृतियों की उत्पत्ति एवं व्यवस्थित विकास का अध्ययन भूआकृति विज्ञान में\n  किया जाता है अतः यह भी भौतिक भूगोल\u0026nbsp;का अंग है।\u0026nbsp;\u003cbr /\u003eसंक्षेप में कहा\n  जा सकता है कि भौतिक भूगोल\u0026nbsp;में सौर परिवार की उत्पत्ति, सूर्य, चन्द्रमा एवं\n  पृथ्वी का सम्बन्ध।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भूगर्भिक चट्टानों की संरचना, भू-क्षरण, अपरदन चक्र, अपरदन, निक्षेपण के\n  कारकों-नदी, हिमानी, पवन, भूमिगत जल आदि द्वारा निर्मित आकृति, गति, मृदा संरचना,\n  विशेषताएँ एवं गुण आदि का अध्ययन इसमें किया जाता है। इसको विस्तार से समझने के\n  लिए इसे विभिन्न शाखाओं में विभक्त किया गया है ।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  खगोलीय शास्त्र, मिश्रित भौतिक विज्ञान, भू-आकृति विज्ञान,जलवायु विज्ञान, जल\n  विज्ञान, समुद्र विज्ञान,\n  हिमनद विज्ञान, मृदा भूगोल, जैव भूगोल एवं स्वास्थ्य भूगोल\u0026nbsp;आदि। इन सभी का अध्ययन\n  ही इसका अध्ययन-क्षेत्र है। स्पष्ट है कि भौतिक भूगोल का क्षेत्र बहुत विस्तृत\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभौतिक भूगोल की शाखा कौन सी है\u003c/span\u003e\n\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  भौतिक भूगोल का सम्बन्ध उन विषयों से है जो प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक वातावरण के\n  तत्वों काअध्ययन करते हैं। इस प्रकार प्राकृतिक तथा सामाजिक दोनों विज्ञानों से\n  भौतिक भूगोल\u0026nbsp;का सम्बन्ध है। समस्त भूविज्ञानों का अपना विशिष्ट क्षेत्र होता\n  है परन्तु उनकी संरचनाएँ अनिवार्य रूप से परस्पर व्याप्त होती हैं और एक-दूसरे के\n  क्षेत्र का अतिक्रमण करती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  पृथ्वी का आकार तथा विस्तार भूमापन विज्ञान से सम्बन्धित है तो पृथ्वी तथा सूर्य\n  के सम्बन्ध ज्योतिषशास तथा भूगणित से सम्बन्धित हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भौतिक भूगोल इन विज्ञानों से इसलिए सम्बन्धित है। क्योंकि सूर्य और चन्द्रमा जैसे\n  आकाशीय पिण्ड पृथ्वी के भौतिक एवं जैविक पर्यावरण को प्रभावित करते है। सूर्य से\n  विकरित होने वाली ऊर्जा से ही भूतल पर जीवों को पोषित करने वाली समस्त ऊर्जा\n  धाराओं एवं पवन की समस्त प्रेरक शक्ति उपलब्ध होती है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  सौर्थिक शक्ति की प्रखरता दैनिक एवं वार्षिक गति में घटती-बढ़ता रहती है। अतः\n  सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के अपने अक्ष एवं कक्षा पर गतियों का ज्ञान भौतिक भूगोल\n  में आवश्यक होता है। चन्द्रमा की गतियों तथा उसकी ज्वारीय शक्ति का अध्ययन समुद्र\n  विज्ञान में किया जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भूविज्ञान में धरातल की बनावट, चट्टानें उनकी उत्पत्ति एवं वितरण, पृथ्वी का\n  भूवैज्ञानिक कालक्रम, चट्टानों में पाये जाने वाले खनिज, पृथ्वी की आन्तरिक\n  संरचना आदि का अध्ययन किया जाता है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भातिक भूगोल में भी पृथ्वी के धरातल का अध्ययन किया जाता है जिसका सम्बन्ध पृथ्वी\n  की आन्तरिक संरचना से रहता है। चट्टानों में जो खनिज पाये जाते हैं, उनका भौतिक\n  भूगोल में महत्वपूर्ण स्थान होता है। खनिजों एवं चट्टानों का निर्माण\n  भूगर्भशास्त्र का भी अध्ययन क्षेत्र है। अतः इसका भूगर्भशास्त्र से निकट का\n  सम्बन्ध है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भूपटल पर स्थलरूपों का विकास आन्तरिक तथा बाह्य बलों द्वारा होता है। आन्तरिक\n  बलों में पटल विरूपणी बल तथा\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eएवं भूकम्प क्रिया जैसे आकस्मिक बल\n  महत्वपूर्ण होते हैं।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  यद्यपि इन बलों का सम्बन्ध भौतिक भौमिकी से है तथापि इन बलों का अध्ययन भूआकृति\n  विज्ञान में स्थल रूपों के विकास को समझने में किया जाता है। जलीय एवं तटीय\n  भूआकृति विज्ञान का अध्ययन तरल यान्त्रिकी और अवसाद विज्ञान से घनिष्ठ रूप से\n  जुड़ा है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसी भाँति शैल पुंज प्रवाह, अपक्षय, पवन के कार्य एवं मृदा का अध्ययन करते समय\n  भौतिक भूगोलवेत्ता को वायुमण्डलीय विज्ञान, मृदा भौतिकी, मृदा-रसायन विज्ञान और\n  मृदा-यान्त्रिकी जैसे विषयों का अध्ययन करना पड़ता है। स्थलरूपों के प्रकारों के\n  अध्ययन में भौतिक एवं ज्वालामुखी विज्ञान के सिद्धान्तों एवं विधियों का अध्ययन\n  अपरिहार्य हो जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भौतिक भूगोल में जैव जगत का अध्ययन किया जाता है । जीव-जन्तु मानव को भोज्य\n  सामग्री, पहनने के लिए वस्त्र (खाल व समूर) तथा\n  उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं। जन्तु विज्ञान में जीव-जन्तुओं के संवर्धन\n  एवं उनके विकास का अध्ययन किया जाता है। इसलिए दोनों एक दूसरे के निकट हैं।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8315431448372490797"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8315431448372490797"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/03/geography-in-hindi.html","title":"भूगोल किसे कहते हैं  - geography in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgQwG2xA-IGpqUTCArfyy_SIBuUHzrGEjw6HTRE8Yo9eofp3T7-qznJTJv3YzuuWK4n-PEFpkdG2aDTfOV9ww0W2dA58FODYwMlBZKBksrwO6EYfr2tDvXH3Md0E27aNUZnYtinw67-Oa_905GSiXx3qehbbmbl70UlBTW05QRR_Fxn5CKt50ykpDrpGg/s72-w320-c-h213/20230403_173101.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7069603851901654451"},"published":{"$t":"2020-03-03T07:41:00.019+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-20T23:46:03.912+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भूकंप किसे कहते हैं - earthquake in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  भूकंप एक प्राकृतिक घटना हैं। जिसके कारण हजारों लोगो की जान चली जाती हैं। यह\n  घटना तब होती हैं जब टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराने लगती हैं। जिसके कारण धरती\n  हिलने लगती हैं और कई ईमारत गिर जाते हैं। जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता\n  हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eरिक्टर स्केल की सहायता से भूकंप की तीव्रता को मापा जाता है। इसकी संख्या 1\n  से 10 के बीच में होता हैं। भारत के इतिहास में सबसे विनाशकारी भूकंप कोलकाता में सन् 1737 को आया था। जिसके कारण लगभग 3 लाख लोगो की जान गयी थी।\u003c/p\u003e\n\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cspan\u003eभूकंप किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  भूकंप पृथ्वी पर अचानक आने\u0026nbsp;वाला एक हलचल है। इसके प्रभाव से धरती हिलने लगती\n  है। भूकंप का पता उसके कम्पन और चारो ओर फैली तरंगो से चलता है। प्राकृतिक कारणों\n  से जब पृथ्वी की सतह कांपने लगती है तो उसे भूकंप\u0026nbsp;कहते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  जिस प्रकार पानी में पत्थर फेंकने से वहाँ से चारों दिशाओं में लहरें फैलने लगती\n  हैं। उसी प्रकार पृथ्वी के अंदर चट्टानों के टकराने से भूकंपीय तंरगे चारों\n  दिशाओं में फैलती जाती हैं। इन तंरगों की सघनता के अनुसार ही भूकंप\u0026nbsp;की शक्ति\n  का पता चल जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\n\u003cb\u003eआर. एस. पवार के अनुसार\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- भूकंप\u0026nbsp;पृथ्वी के आन्तरिक भाग से\nसम्बन्धित वे धरातलीय कम्पन हैं। जो प्रकृति द्वारा उत्पन्न होते हैं। जब भी\nप्राकृतिक कारणों से पृथ्वी के अंदर चट्टानों में किसी प्रकार की विसंगति पैदा होने\nलगती है तो धरती पर भूकंप\u0026nbsp;आने लगता है।\n\u003cdiv\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप की उत्पत्ति के कारण\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan\u003e\u003cb\u003eप्राचीन विचारधारा -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003eप्राचीन मान्यता के अनुसार इसे देवीय शक्ति माना जाता था। बहुत पहले ये धारणा\n    बनी कि जब पृथ्वी पर पाप अधिक होने लगते हैं। तो उनके भार से पृथ्वी हिलने लगती\n    है। बाद में लोगों ने माना कि पृथ्वी नाग सर्प के फन के ऊपर है। जब नाग हिलता\n    है तो पृथ्वी में भी कम्पन होने लगता है। टर्की में पृथ्वी को भैंसे के सींग पर\n    टिकी मानी गई है। उत्तरी अमेरिका में इसे कछुए पर रखा माना जाता था।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n    \u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-VKhqFhppZaI/X3gKIssBvuI/AAAAAAAAELM/cnX5bKsdfos1HovZ2MqAd1JULTuS22bTwCPcBGAYYCw/s320/20201003_102417.webp\" style\u003d\"text-align: center;\" width\u003d\"320\" /\u003e\n\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      आधुनिक समय में प्राचीन विचारधारा को असत्य साबित किया गया\u0026nbsp;है क्योंकि\n      ये सभी बातें\u0026nbsp;विज्ञान से बहुत दूर है। इसमें रखी गई बातों को मानना\n      सम्भव नहीं है। भूकंप\u0026nbsp;की उत्पत्ति के निम्न कारण होते हैं।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan\u003e\u003cb\u003e1. क्रियाशील\u003c/b\u003e\u003cb\u003e\u0026nbsp;जल-वाष्प -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003eपृथ्वी की गहराइयो में दरारों से पानी काफी नीचे पहंचने लगता है। तो पानी\n      तेजी से गर्म होकर वाष्प में बदलता जाता है। साथ ही अनेको प्रकार की गैसें भी\n      वाष्प के साथ मिल जाती है। ऐसी गैस मिश्रित उच्च दबाव वाली वाष्प गतिशील होती\n      है। यह मिश्रित\u0026nbsp;वाष्प पृथ्वी की सतह की ओर आने का प्रयास करती है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      कभी-कभी ये जल वाष्प और गैस कमजोर पृथ्वी की पपड़ी से बाहर आने लगती हैं। इन\n      क्रियाओं से पृथ्वी में कम्पन उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण भूकंप\u0026nbsp;आता\n      है।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: small;\"\u003e2. ज्वालामुखी क्रिया -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003eपृथ्वी के असन्तुलित भागों में जहाँ धरती की परत काफी काम होती है। वहाँ ज्वालामुखी क्रिया अधिक होती हैं।\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eविस्फोट के साथ ही भूकंपीय लहरें उत्पन्न होती हैं। इसका प्रभाव निकटवर्ती क्षेत्रों में अधिक देखा जाता हैं।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eज्वालामुखी और भूकंप एक दूसरे से संबधित होते हैं। मैग्मा तीव्र गति से ऊपर की और बढ़ता हैं और धरती को चीर कर बहार आ जाता हैं। जिसके कारण भूकंपीय तरंगे उत्पन्न होती हैं।\u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003e3. संपीडन की क्रिया\u003c/b\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large; font-weight: bold;\"\u003e\u0026nbsp;-\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003eपृथ्वी की सतह पर अनेक कारणों से संपीडन की क्रियाएं होती है। ऐसी क्रियाओं के प्रभाव से पृथ्वी की चट्टानें टूटती और सतह पर दरार घाटी या पर्वत विकसित होते हैं। जब ऐसी क्रियाएँ\n      पृथ्वी की गहराई में होती हैं तो विस्तृत क्षेत्र में भूकंप\u0026nbsp;आते\n      हैं।\u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cdiv\u003e\n      \u003cdiv\u003e\n        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e4. भू-संतुलन की व्यवस्था -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eपृथ्वी के अधिकांश भागों में भू-संतुलन सम्बन्धी थोड़ी बहुत अव्यवस्था\n          पाई जाती है। किन्तु कुछ भाग ऐसे\u0026nbsp;भी\u0026nbsp;हैं जहाँ कि ऊंचे\n          ऊचे\u0026nbsp;पर्वत एवं गहरे सागर पास पास में स्थित होते है। ऐसे भागों में संतुलन की अव्यवस्था सबसे अधिक पाई जाती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसी कारण वहाँ संतुलन स्थापित करने के लिए\u0026nbsp;प्राकृतिक शक्तियां कार्य करने लगती हैं। जिसके कारण भूकंप आते\u0026nbsp;है। जापान में आने वाले विनाशकारी भूकंप\n          इसी प्रकार की होती हैं।\u0026nbsp;फिलीपीन्स एवं अफगानिस्तान में 4 मार्च 1949 को आया भूकंप भू-संतुलन की अव्यवस्था के कारण था।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb\u003e5. प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत - \u003c/b\u003eइस\u0026nbsp;सिद्धान्त का प्रतिपादन डॉ. एच. एफ. रीड द्वारा किया गया था। इसके अनुसार प्रत्येक चट्टान में थोड़ी\n          मात्रा में दबाव को सहन करने की\n          क्षमता होती है। इसी आधार पर डॉ. रीड ने अपना सिद्धान्त चट्टानों में\n          प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त प्रस्तुत किया।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजब चट्टानों पर क्षमता से\n          अधिक दबाव की स्थिति आ जाती है। तो ऐसी स्थिति में\u0026nbsp;चट्टानें सहन नहीं कर पाती तथा टूट जाती\n          हैं। टूटी हुई चट्टानें फिर से खिंचकर अपनी पुरानी स्थिति में आने लगती हैं। जिसके कारण वहाँ कुछ स्थान खाली हो जाती है।\n          इससे पृथ्वी की सतह पर भूकंप आते हैं।\u003c/p\u003e\n        \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूकंप के प्रभाव\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\n        \u003cp\u003eभूकंप सबसे अधिक विनाशकारी एवं आकस्मिक घटना है जिसके आगे मानव पूरी तरह असहाय होता है। जहाँ ज्वालामुखी का प्रभाव एक स्थान विशेष के आस-पास ही रहता है। वहीं भूकंप का घातक प्रभाव कुछ सौ वर्ग किलोमीटर से लाखों वर्ग किलोमीटर तक होता है। इसके अनेक प्रकार से घातक प्रभाव होते हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\u003cb\u003e1. मानव निर्मित वस्तुओं का नाश\u003c/b\u003e - भूकंप\u0026nbsp;आते ही\u0026nbsp; ईमारत नष्ट हो जाते हैं।\u0026nbsp;बृज तथा खेत-खलिहानों में दरार आ सकती है। सन् 1923 के टोकियो क्षेत्र के\n          भूकंप से 5 लाख भवन नष्ट हो गये थे। हजारों व्यक्ति मारे गये और\n          अरबों की सम्पत्ति को नुकसानहुआ था। इससे उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ था।\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\u003cb\u003e2. नगरों का नष्ट होना -\u003c/b\u003e कभी-कभी भयंकर भूकंप के कारण पुरे शहर को नुकसान होता है। इससे कुछ ही सेकण्ड में बड़े शहर नष्ट हो जाते है। जैसे - यूगोस्लाविया का स्कोपजी शहर, जापान के टोकियो शहर का अधिकांश भाग, टर्की के टेन्जियर्स शहर\u0026nbsp;कुछ ही सेकण्ड में नष्ट हो गया था।\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\u003cb\u003e3. बाढ़ की समस्या -\u003c/b\u003e भूकंप\u0026nbsp;के प्रभाव\n          से जब नदी का मार्ग ही बदल जाता है या उनके मार्ग में भू-स्खलन के कारण नदी अपना मार्ग बदल लेती है अथवा वहाँ अस्थायी झील बन\n          जाती है। दोनों ही दशाओं में निचले क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ आती हैं। वर्तमान काल में सन् 1950 में असम के भूकंप\u0026nbsp;से दिहांग एवं\n          ब्रहापुत्र के मार्ग बदल गया था। और सुबंसिरी नदी का बाँध टूट गया था। जिससे इन क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो गयी थी।\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\u003cb\u003e4. भू-तल पर दरार -\u003c/b\u003e\u0026nbsp;विनाशकारी भूकंपों से धरती पर दरारें पड़ जाती हैं। इन दरारों में गाँव, भवन, सड़कें आदि\n          समा जाते हैं। असम\n          में सन् 1897 एवं 1950 के भूकंप\u0026nbsp;से इसी प्रकार की कई किलोमीटर लंबी दरारें पड़ गयी थी।\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\n          सन् 1819 के सिन्धु डेल्टा के भूकंप\u0026nbsp;से समुद्र में 80 किलोमीटर लंबा व 26 किलोमीटर चौड़ा द्वीप बन गया था। कच्छ की खाड़ी में सन् 1890 के भूकंप\u0026nbsp;से समुद्र का तटीय भाग सागर तल नीचे धंस गया। इस प्रकार के परिवर्तन से\n          सम्पूर्ण प्रदेश के संसाधनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।\u003c/p\u003e\n        \u003cp\u003e\u003cb\u003e5. सागर में भयंकर लहरें उठना -\u003c/b\u003e महासागर या समुद्र में भूकंप आने पर पानी की विशाल लहरें उत्पन्न होती हैं। इससे समुद्र तट पर बने सभी प्रकार की भवन, सडकें, रेलमार्ग, उद्योग कुछ ही\n          सेकण्डों में नष्ट हो जाते हैं। इससे अपार जन-धन की हानि होती है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसन् 1819 के कच्छ की खाड़ी में आये भूकंप से अधिकांश तटीय कस्बे व नगर नष्ट हो\n          गया था। 26 दिसम्बर 2004 को हिन्द महासागर में आये भूकंप से उत्पन्न\n          शक्तिशाली सुनामी भारत, इण्डोनेशिया, थाईलैण्ड,\n          मलेशिया, बांग्लादेश, श्रीलंका व मालदीव में आया था।\u003c/p\u003e\n      \u003c/div\u003e\n    \u003c/div\u003e\n  \u003c/div\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7069603851901654451"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7069603851901654451"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html","title":"भूकंप किसे कहते हैं - earthquake in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-VKhqFhppZaI/X3gKIssBvuI/AAAAAAAAELM/cnX5bKsdfos1HovZ2MqAd1JULTuS22bTwCPcBGAYYCw/s72-c/20201003_102417.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-668943420836179261"},"published":{"$t":"2020-02-29T13:22:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-06T09:09:06.407+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जैव विविधता संरक्षण के उपाय बताइए"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cdiv style\u003d\"display: none; text-align: center;\"\u003e      \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-W1gpij6W3w4/XloXe1SmvcI/AAAAAAAAB-g/CB0f7UT1licU8DJ4m8J1Zpg3GV421nmRACLcBGAsYHQ/s1600/Biodiversity%2Bin%2BHindi.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"Biodiversity in hindi image\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"197\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-W1gpij6W3w4/XloXe1SmvcI/AAAAAAAAB-g/CB0f7UT1licU8DJ4m8J1Zpg3GV421nmRACLcBGAsYHQ/w296-h197/Biodiversity%2Bin%2BHindi.jpg\" title\u003d\"Biodiversity in hindi\" width\u003d\"296\" /\u003e\u003c/a\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cp\u003e        \u003cb\u003eजैव विविधता क्या है - \u003c/b\u003eजैव विविधता\u003cb\u003e \u003c/b\u003eएक ऐसा संसाधन है जो एक         बार समाप्त हो जाने पर दुबारा नहीं प्राप्त किया जा सकता अर्थात् इसका         विलुप्तीकरण हमेशा के लिए हो जाता है। अतः जैव विविधता का संरक्षण आज पूरे         विश्व में एक चिंता का विषय है। जैव विविधता \u0026nbsp;को बनाए रखने के लिए जो         प्रयास किए जा रहे हैं, वह निम्नलिखित हैं -       \u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e    \u003ch2 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eजैव विविधता\u003c/h2\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        जैव विविधता (Biodiversity )         पृथ्वी में\u0026nbsp; वाले जीव जंतुओं में पाए\u0026nbsp; जाने अंतर को कहा जाता है और         यहाँ         पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण होता है यदि एक भी जिव की प्रजाति विलुप हो जाती है तो         पर्यावरण पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए         भारत सरकार ने         समय समय पर जीव जंतु की संरक्षण कार्य क्रम चलाये है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        save the tighr मुहीम के बारे में सुना ही होगा। tighr [बाघ] जंगल का बड़ा         सीकरी है यही यह गायब हो जाता है तो पर्यावरण में कई समस्या होगी जैसे की         शाकाहारी जानवरो की संख्या में विद्धि होगा जिसके कारण हरे मैदान जल्द ही         सफाचट हो जायेंगे मैदान धिरे धिरे बंजर होते जायेगे और बहुत समय तक ऐसा रहा         तो रेगिस्तान में         भी तब्दिल हो जायेगा। इसके यह निष्काष निकलता है की एक जीव की प्रजाति         पर्यायवरण पर किस तरह प्रभाव डालता है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैव विविधता संरक्षण के उपाय\u003c/span\u003e      \u003c/h3\u003e    \u003c/div\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e1. राष्ट्रीय उद्यान\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      वह संरक्षित क्षेत्र जो वन्य जीवों की उन्नति एवं विकास के लिए आरक्षित होता       है, राष्ट्रीय उद्यान कहते हैं। इन क्षेत्रों में वृक्षों का कटाव, चारण,       आखेट तथा अन्य मानवीय क्रिया-कलापों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e2. अभ्यारण्य\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      यह संरक्षित क्षेत्र वन्य जीवों के बचाव और देखरेख के लिये आरक्षित रहता है       तथा यहाँ कुछ सीमा तक मानवीय क्रियाकलाप जैसे- घास काटना, कृषि आदि की अनुमति       होती है अभ्यारण कहते हैं।\u0026nbsp;     \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e3. जैवमंडल प्रारक्षण\u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      यह एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र होता है जिसे विभिन्न खण्डों में बाँटकर प्रत्येक       खण्ड का उपयोग विशिष्ट क्रिया के लिए किया जाता है तथा एक विशिष्ट खंड में       मानवीय क्रियाकलाप की अनुमति होती है।     \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      एक जैवमंडल मुख्यतः तीन खण्डों में विभक्त होता है - प्रथम खण्ड (केन्द्रीय       खण्ड) कानूनी रूप से संरक्षित रहता है। द्वितीय खण्ड (प्रतिरोधक खण्ड) में       विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक संसाधन मिलते हैं जिन पर शैक्षिक व शोध       गतिविधियों चलती है। तृतीय खण्ड (परिचालन खण्ड) जैवमण्डल का सबसे बाहरी       क्षेत्र होता है यहाँ पर मानवीय क्रियाएँ जैसे-खेती करना, पेड़ों से प्राप्त       उत्पादों को एकत्रित करना, जानवरों के लिए घास काटना इत्यादि की जाती है।     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003cb\u003eसम्पूर्ण भारत में जैवमण्डल \u003c/b\u003e\u003cb\u003e\u0026nbsp;प्रारक्षण की संख्या कुल 14 है इसमें प्रमुख निम्मलिखित हैं -\u003c/b\u003e\u003cbr /\u003e    \u003cbr /\u003e    (i) फूलों की घाटी (उत्तराखण्ड)\u003cbr /\u003e    (ii) मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु)\u003cbr /\u003e    (iii) सुन्दर वन (पश्चिम बंगाल)\u003cbr /\u003e    (iv)     थार मरुस्थल (राजस्थान)\u003cbr /\u003e    (v) काजीरंगा (आसाम)\u003cbr /\u003e    (vi) कान्हा (मध्यप्रदेश)।\u003cbr /\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cb\u003eपरस्थान संरक्षन\u003c/b\u003e\u0026nbsp;\u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      इसके अन्तर्गत जीव-जन्तुओं तथा वनस्पतियों का संरक्षण उनके मूल आवास से दूर       स्थापित विभिन्न स्थानों, अप्राकृतिक घर, जीन बैंक तथा प्रयोगशालाओं में किया       जाता है। वर्तमान समय में उत्तक संवर्धन द्वारा पादप संरक्षण कार्यक्रम अधिक       उपयोगी     \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eसिद्ध हो रहा है।\u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003eभारत में वन्य पशु संरक्षण\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      भारत में प्राचीन काल से ही जीवों के संरक्षण की प्रवृत्ति रही है। भारत में       अनेक पशु-पक्षियों को पूज्य श्रेणी में रखा गया था। बौद्ध तथा जैन धर्म में       जीव हत्या को पाप माना जाता है मुस्लिम एवं ब्रिटिश काल में वन्य पुशुओं के       संहार में वृद्धि हुई। स्वतंत्रता के बाद बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण,       जनसंख्या वृद्धि      से पृथ्वी पर वनों का विनाश अत्याधिक हुआ जिससे वन्य पशुओं का ह्रास बहुत       हुआ। वर्तमान समय में पर्यावरण असंतुलन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर अनेक       महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cb\u003eराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास\u003c/b\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      1.भारतीय वन नीति- सर्वप्रथम सन् 1894 ई. में भारतीय वन नीति घोषित की गई।       सन् 1952 में नवीन भारतीय वन नीति घोषित की गई। इन नीतियों में कृषि तथा वन्य       प्राणियों के संरक्षण का प्रावधान था। 2 संविधान में नियम- भारत के संविधान       के अनुच्छेद 48 में पर्यावरण और परिस्थितिकी सुरक्षा का प्रावधान है।     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      भारतीय वन सलाहकार मंडल- भारतीय वन सलाहकार मंडल का गठन 1952 ई में किया गया।       यह वन्य प्राणियों के संरक्षण की निगरानी करता है।     \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      4. पर्यावरण विभाग का गठन- केन्द्र शासन, रूप से गठन किया गया। का गठन-       केन्द्र शासन द्वारा पर्यावरण एवं वन तथा वन्य प्राणी विभाग का पृथक रूप से       किया गया है।\u0026nbsp;     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      प्रशासकीय स्तर पर प्रयास - भारत सरकार ने लुप्त हो रही विभिन्न प्रजातियों       को समाप्त होने से बचाने के लिए इनके नाम \"रेड डाटा बुक\" और संकटग्रस्त       प्राणियों की सूची में रखे हैं। राष्ट्रीय प्राणी बाघ को बचाने के लिए \"बाघ       बचाओ परियोजना\" आरम्भ की गई है।     \u003c/div\u003e    \u003cbr /\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv\u003eछत्तीसगढ़ राज्य द्वारा घोषित वन नीति :- छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा घोषित वन         नीति निम्नानुसार है-       \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cbr /\u003e        \u003col style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cli\u003e            \u0026nbsp;राज्य विभाजन के पहले पूर्ववर्ती म.प्र. सरकार द्वारा घोषित वन             ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदला जाएगा।           \u003c/li\u003e          \u003cli\u003e            \u0026nbsp;राज्य को हर्बल स्टेट बनाने की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए             लघु वनोपज और औषधीय पौधों को संरक्षित एवं संवर्धित किया जाएगा।           \u003c/li\u003e          \u003cli\u003e            वनों को आर्थिक लाभ का स्त्रोत न मानकर राज्य के पर्यावरणीय स्थायित्व             और पारिस्थितिकीय संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। वन क्षेत्रों के कृषि             वानिकी कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।           \u003c/li\u003e          \u003cli\u003e            वनों के नजदीक रहने वाले लोगों के अधिकारों और सुविधाओं का ध्यान रखते             हुए खेतों में वृक्ष लगाकर अपनी जरुरत की जलाऊ लकड़ी और छोटी इमारती             लकड़ी के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।           \u003c/li\u003e          \u003cli\u003e            वन अपराध रोकने के लिए वन अपराध ब्यूरो और विशेष न्यायालयों का गठन             किया जाएगा।           \u003c/li\u003e        \u003c/ol\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cbr /\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e      \u003c!--link ads--\u003e      \u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e      \u003cscript\u003e        (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});       \u003c/script\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003eसंसाधनों के संरक्षण हेतु जन जागृति\u0026nbsp;\u003c/b\u003e        \u003c/h3\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e          क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा ये पंचतत्व अपने प्रकृति के रूप में           जीवनाधार है। परन्तु मनुष्य की प्रकृति, जीवन की चाह, विलासितापूर्ण           जीवनशैली, यन्त्रीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या विस्फोट ने इस प्राकृतिक           व्यवस्था को भारी आघात पहुँचाया है। हम पर्यावरण को निरन्तर प्रदूषित           करते हुए महाविनाश की ओर जा रहे हैं।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cbr /\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e          भारत में हरियाली निरन्तर घटती जा रही है। भूकम्प, बाढ़, सूखा, निरन्तर           कम होती वर्षा, गहराता जल संकट, पेयजल की समस्या और प्रदूषण आज हमारी           चिंताओं के मुख्य विषय बन गए हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण सिमटते           वन, विलुप्त होती नदियाँ, जल, वायु, मृदा में घुलता रासायनिक जहर,           भूल-धुओं पर्यावरण को दूषित कर हे हैं।         \u003c/div\u003e        \u003cbr /\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e          जनसंख्या का बढ़ता प्रतिशत और, प्राकृतिक स्त्रोतों का अनियोजित दोहन           असंतुलन का मूल कारण है। देश की गरीबी और अशिक्षा ने इस समस्या को और           जटिल बना दिया है। इन परिस्थितियों के बीच भी हम पिछले तीन दशकों से           पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। शासन ने इस दिशा में प्रयास करते           हुए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ बनाई है। जैसे-छत्तीसगढ़ वन औषधि का           समृद्ध भण्डार है। वनों की औषधीय प्रजातियों को बचाने के उद्देश्य से           शासन द्वारा राज्य को हर्बल स्टेट बनाने की घोषणा की गई है।\u003cbr /\u003e          \u003cbr /\u003e          इसके क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य में औषधीय एवं अन्य लघु वनोपजों           के संरक्षण विकास, उत्पादन, मूल्य सवंर्धन एवं विपणन से आजीविका सुरक्षा           कार्यदल का गठन किया गया है। इससे पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ छत्तीसगढ़           में निवासरत जनजातिय परिवारों को आजीविका का साधन भी मिलेगा। इसी प्रकार           जीवाश्म ईंधन के कमी को पूरी करने के लिए छत्तीसगढ़ में रतनजोत के पौधे           का रोपण किया जा रहा है। इससे बायोडीजल का निर्माण किया जाएगा।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cbr /\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e          इस प्रकार हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए गरीबों को प्रकृति से आर्थिक           आधार प्रदान करके ही हरी-भरी प्रकृति का महत्व समझाना होगा। हमें वृक्षों           को सामाजिक एवं आर्थिक संसाधन के रूप में प्रचारित करना होगा। निजी तथा           सामुदायिक भूमि पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देना होगा। शिक्षित लोगों           में भी पर्यावरण का अभाव है ये पर्यावरण का महत्त्व अच्छी तरह से जानते           है पर उसके संरक्षण का दायित्व केवल प्रशासन का मानकर बैठ जाते हैं।\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/668943420836179261"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/668943420836179261"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/blog-post.html","title":"जैव विविधता संरक्षण के उपाय बताइए"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-W1gpij6W3w4/XloXe1SmvcI/AAAAAAAAB-g/CB0f7UT1licU8DJ4m8J1Zpg3GV421nmRACLcBGAsYHQ/s72-w296-c-h197/Biodiversity%2Bin%2BHindi.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4058287775286017809"},"published":{"$t":"2020-02-27T20:17:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-05T08:22:25.235+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जल संरक्षण क्या है - conservation of water in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eपिछली आधी सदी में अमेरिका की आबादी दोगुनी हो गई है और पानी की हमारी मांग तीन गुना हो गई है। जल संरक्षण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, और दुनिया पानी बचाने के सुझावों की तलाश में है। अच्छी खबर यह है कि कुछ साधारण बदलावों के साथ, आप अपने जल पदचिह्न को कम कर सकते हैं। और नक्षत्र यहाँ मदद करने के लिए है!\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजल संरक्षण क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eजल संरक्षण पानी के अनावश्यक उपयोग को कम करने के लिए कुशलतापूर्वक पानी का उपयोग करने की प्रथा है। फ्रेश वाटर वॉच के अनुसार, जल संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि ताजा स्वच्छ पानी एक सीमित संसाधन होने के साथ-साथ महंगा भी है। एक गृहस्वामी के रूप में, आप शायद पहले से ही अकुशल पानी के उपयोग की वित्तीय लागतों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इस प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण पर्यावरण और हमारी जेब के लिए महत्वपूर्ण है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपानी कैसे बचाएं: घर के आसपास पानी बचाने के टिप्स\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिकांश घरेलू पानी का उपयोग शौचालय, वाशिंग मशीन, शावर, स्नान, नल और लीक से होता है, लेकिन पानी को बचाने के लिए आप जो कर सकते हैं वह काफी सरल है। पानी बचाने के ये 10 टिप्स आपको अपने घर में पानी बचाने की राह पर ले जाएंगे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअपने शौचालय की पानी की टंकी में एक ईंट लगाएं। आप एक दिन में औसतन 20 गैलन पानी शौचालय में बहाते हैं। यदि आपके पास उच्च दक्षता वाला शौचालय नहीं है, तो अपने टैंक को किसी ऐसी चीज़ से भरने का प्रयास करें जो उस पानी के कुछ हिस्से को विस्थापित कर दे, जैसे कि एक ईंट।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकपड़े धोने के प्रत्येक भार के लिए पानी की सही मात्रा का प्रयोग करें। आमतौर पर घर के अंदर पानी का 15-40 प्रतिशत इस्तेमाल कपड़े धोने से होता है। अपनी मशीन की सेटिंग्स को उचित लोड आकार में समायोजित करना सुनिश्चित करके पानी बचाएं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअपनी वॉशिंग मशीन को समझदारी से चुनें। टॉप-लोड बनाम फ्रंट-लोड वॉशर पर विचार करते समय, फ्रंट-लोडिंग वाशिंग मशीन आमतौर पर कम पानी का उपयोग करती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपौधों को बुद्धिमानी से पानी दें। अपने लॉन या बगीचे को सुबह जल्दी या देर शाम को पानी दें, ताकि पानी बना रहे और तेज धूप से तुरंत वाष्पित न हो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलो-फ्लो शावरहेड स्थापित करें। कम प्रवाह वाले शॉवरहेड के साथ, आप 10 मिनट के शॉवर के दौरान 15 गैलन पानी बचा सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलीक की जाँच करें और मरम्मत करें। घरेलू लीकेज के कारण हर साल औसतन 10,000 गैलन पानी बर्बाद हो जाता है। अपने पानी के पदचिह्न को कम करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है टपका हुआ नल और शौचालय की मरम्मत करना।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eडिशवॉशर का इस्तेमाल करें। बर्तन धोने से घर के अंदर पानी का उपयोग 2 प्रतिशत से भी कम होता है, लेकिन मशीन का उपयोग करना वास्तव में हाथ धोने की तुलना में अधिक पानी कुशल है, खासकर यदि आप पूर्ण भार चलाते हैं। ENERGY STAR® डिशवॉशर अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 1,600 गैलन पानी बचाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपानी बंद कर दें। अपने पूरे घर को दांतों को ब्रश करते या शेविंग करते समय नल बंद करना सिखाएं। जल संरक्षण की हर छोटी सी मदद!\u003c/p\u003e\u003cp\u003eफ्रिज में खाना डीफ्रॉस्ट करें। जमे हुए खाद्य पदार्थों को नल से गर्म पानी के नीचे चलाने के बजाय, रेफ्रिजरेटर में उन्हें डीफ़्रॉस्ट करने के लिए समय पर निर्माण करें।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eबाहरी पानी के उपयोग का प्रबंधन करें। बाहर भी जल संरक्षण के बारे में मत भूलना। सभी होसेस को शट-ऑफ नोजल से लैस करें, जो नली के रिसाव को रोक सकता है।\u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Yv6TUBud-xs/YQFGJeabqGI/AAAAAAAAFPM/f-XIu17BWlEIRZ1pQOnsm2rzGW6WZyRdgCLcBGAsYHQ/s600/20210728_172556.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जल संरक्षण क्या है, जल का दुरुपयोग - conservation of water in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-Yv6TUBud-xs/YQFGJeabqGI/AAAAAAAAFPM/f-XIu17BWlEIRZ1pQOnsm2rzGW6WZyRdgCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210728_172556.webp\" title\u003d\"जल संरक्षण क्या है, जल का दुरुपयोग - conservation of water in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eजल का दुरुपयोग\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4058287775286017809"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4058287775286017809"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/conservation-of-water-in-hindi.html","title":"जल संरक्षण क्या है - conservation of water in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-Yv6TUBud-xs/YQFGJeabqGI/AAAAAAAAFPM/f-XIu17BWlEIRZ1pQOnsm2rzGW6WZyRdgCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/20210728_172556.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7025484282642749061"},"published":{"$t":"2020-02-25T09:07:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-05-20T23:46:11.512+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"अंतरिक्ष किसे कहते है - What is space in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअंतरिक्ष को जानने की उत्सुकता मानव को\u0026nbsp;पहले से रही है। इसलिए रात के समय लोग तारो को देख कर सोचते थे की बहार क्या होगा। यही जानने\u0026nbsp;की इच्छा ने मानव को अंतरिक्ष की ओर जाने पर मजबूर किया। आज मनुष्य को पहले के मुकाबले\u0026nbsp;अंतरिक्ष के बारे में बहुत सी जानकारी मालूम है।\u0026nbsp;पृथ्वी\u0026nbsp;के बाहर\u0026nbsp;ग्रह\u0026nbsp;और तारे के बारे में अध्ययन किया जा रहा है।\u0026nbsp;अंतरिक्ष के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन मैं असल में\u0026nbsp;\u003cb\u003eअंतरिक्ष क्या है\u0026nbsp;\u003c/b\u003eइसके बारे में बनाते वाला हूँ।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअंतरिक्ष किसे कहते है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eब्रम्हांड में मौजूद खली जगह को ही\u0026nbsp;अंतरिक्ष कहा जाता है। अंग्रेजी में स्पेस कहते है जिसका मतलब खली स्थान होता है।\u0026nbsp;वायुमंडल\u0026nbsp;भी अंतरिक्ष का भाग होता है। जहा पर कुछ नहीं होता वह अंतरिक्ष का हिस्सा होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cdiv\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहमें रात्रि को आकाश में जो कुछ भी आकर्षक दिखायी देते हैं वे तो मात्र विशाल अन्तरिक्ष की एक बूंद से भी छोटा भाग ही है। इस ब्रह्माण्ड की सैकड़ों निहारिकाओं में से प्रत्येक में करोड़ों सूर्य पाये जाते हैं। इनमें से अधिकांश तो हमारे सूर्य से भी विशाल एवं बहुत विशाल हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eभारतीय ज्योतिष में जो नक्षत्र गिनाये गये हैं वे भी वास्तव में ऐसे ही तारों या सूर्यों के ही नाम हैं। हमारा सौरमण्डल एवं सूर्य जिस गैलेक्सी का सदस्य है, उनका नाम एन्ड्रोमेडा (देवयानी) निहारिका है। इसमें हमारे सूर्य जैसे दो करोड़ से भी अधिक तारे है। इनमें से अधिकांश में हमारे सूर्य की भांति ही प्रह-उपग्रहों का अपना सौरमण्डल भी है।\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसी आधार पर आज के वैज्ञानिकों का दृढ़ विश्वास है कि अन्तरिक्ष में कहीं न कहीं हमारे जैसा या हमसे भी विकसित वैज्ञानिक संसार एक या अधिक आकाशीय पिण्डों में अवश्य होना चाहिए। अन्तरिक्ष वैज्ञानिक भी उडनतश्तरियों को इसका महत्वपूर्ण प्रमा इसके अतिरिक्त, अति संवेदनशील दूर्वानों को फिल्म पर प्राप्त विशेष सांकेतिक चिह्न भी इसी से सम्बन्धित हो सकते।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहमारी देवयानी\u0026nbsp;आकाशगंगा\u0026nbsp;का रात्रि के अंधेरे में स्वच्छ आकाश में स्पष्टता से अवलोकन किया। जा सकता है। इसकी आकृति कुम्हार के चाक की भांति है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e1 प्रकाशवर्ष वह\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u0026nbsp;दूरी है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजिसे प्रकार शून्य में 2,99,7125 किमी प्रति सेकेंड\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e186.282 मील प्रति किलोमीटर गति के आधार पर सूर्य और\u0026nbsp;पृथ्वी\u0026nbsp;के बीच की औसत दूरी को तय करता है। वर्तमान में यह दूरी सौरमण्डल की दूरियों को मापने के लिए मुख्या\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइकाई बन गई है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GSvwgeDWcvI/XyAvhw0nn_I/AAAAAAAADWo/fEEPNLAbs3kcAp41EGJS4F_-10eF5UY3ACLcBGAsYHQ/s700/10078922-16x9-large.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अंतरिक्ष किसे कहते है - What is space in Hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"394\" data-original-width\u003d\"700\" height\u003d\"180\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-GSvwgeDWcvI/XyAvhw0nn_I/AAAAAAAADWo/fEEPNLAbs3kcAp41EGJS4F_-10eF5UY3ACLcBGAsYHQ/w320-h180/10078922-16x9-large.jpg\" title\u003d\"अंतरिक्ष किसे कहते है - What is space in Hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cb style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eउपर्युक्त विवेचन के पश्चात् भी यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि अंतरिक्ष और आकाश के बीच अन्तर यह है कि आकाश सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सूचक है जिसमें पृथ्वी भी सम्मिलित है जबकि अंतरिक्ष का अर्थ पृथ्वी को छोड़कर शेष सभी स्थान है। वस्ततः अन्तरिक्ष वहाँ से रोकर शेष सभी स्थान है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eवस्तुतः अन्तरिक्ष वहां से शुरू होता है जहाँ पृथ्वी का वाताव के पैमानों से मापना सम्भव नहीं है। समाप्त होता है। अन्तरिक्ष अनन्त है। इसके आयामों को हमारी पृथ्वी के पैमानों से मापना मामा इसीलिए प्रकाश वर्ष और खगोलीय इकाई जैसे नए पैमानों को अपनाया गया है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअंतरिक्ष का रहस्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eअंतरिक्ष विज्ञान के विकाश के बावजूद आज भी ऐसे रहस्य है जिसे सुलझाया नहीं गया है। जिसे समझने और जानने के लिए वैज्ञानिक लगातार अंतरिक्ष ग्रह तारे का अध्ययन कर रहे है। विश्व के\u0026nbsp;प्रसिद्ध अंतरिक्ष संस्था उपग्रह की सहायता से ग्रहो और तारो का अध्ययन कर\u0026nbsp;रहे\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eआपने तो बाड़मुड़ा ट्रैंगल के बारे में सुना ही होगा। कहा जा रहा है की अंतरिक्ष में भी एक ऐसी जगह है जहा से गुजरने से अंतरिक्ष यात्रियों को अजीब लाइट दिखयी देती है और मशीन भी काम करना बंद कर देते है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eइसके अलावा कितने ग्रह तारे है जिसके बारे में हमें मालूम\u0026nbsp;नहीं है। वैज्ञानिक सदियों से जीवन की तलाश कर रहा है। ये भी रहस्य है की ब्रम्हांड में जीवन है या नहीं आज तक हमें जीवन का कही प्रमाण नहीं मिला है। लेकिन वैज्ञानिको का मत है की ब्रम्हांड में जीवन है लेकिन दुरी इतनी है की हम उससे सम्पर्क नहीं कर पा रहे है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eनासा अंतरिक्ष अनुसन्धान केंद्र\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--new display ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1359706212\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cp\u003eनासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में किया गया था। यह अमेरिका की अंतरिक्ष केंद्र संस्था है जहा पर स्पेस से जुड़े अध्ययन किये जाते है। नासा ने चाँद पर मानव भेजा है हाल ही में दो एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष स्टेशन तक कम\u0026nbsp;समय में पहुंचने का रिकॉड बनाया है। नासा की बात करे तो अभी अंतरिक्ष की दुनिया में पहले स्थान पर है। नासा ने कई सेटेलाइट भेजे है। जिन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी वैज्ञानिको को प्रदान किया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eनासा ने कहा कि इसके अलावा दो और एस्टेरॉयड के रविवार 24 जुलाई 2020 को पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा। जिनका नाम नासा ने 2016 डीवाई-30 और 2020 एमई-3 नाम दिया है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअंतरिक्ष में मानव\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमानव ने हमेशा से अंतरिक्ष को नज़दीक से देखना चाहता है। इसके लिए वैज्ञानिको ने लोगो को दूसरे ग्रहो पर बसाने के लिए कार्य आरम्भ कर दिया है। जिसमे स्पेक्स एक्स ने 2024 तक लोगो को मंगल ग्रह पर बसाने की बात की है। साथ ही नासा भी इस पर योजना बना रहा है की 2030 तक लोगो को मंगल पर बसा सके।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवही\u0026nbsp;भारत\u0026nbsp;के इसरो ने 2021 तक मानव मिसन भेजेगा। उसके बाद आगे दूसरे ग्रहो पर बस्ती बसने के लिए प्रोग्राम बनाये जायेंगे। मानव दे तो चाँद पर अपना कदम रख लिया है अब वह मंगल ग्रह पर रखना चाहता है। देखने होगा की ये स्पेस एजेंसिया कब तक मंगल में बस्ती बसाने में सफल होगा।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअंतरिक्ष में क्या है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमानव की हमेश से उत्सुकता रही है की धरती के बहार क्या है। वैज्ञानिको शोध से पता चला है की ब्रम्हांड में लाखो करोडो तारे है और उसके चककर लगते है ग्रह है। इसके अलावा ब्लैक होल पुच्छलतारा और कई एस्ट्रोइड है। इसके अलावा और बहुत कुछ हो सकता है। क्योकि इंसान ने अभी ब्रम्हांड के कुछ ही भाग को जान पाए है यह हमारे कल्पना से भी बड़ा हो सकता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eअंतरिक्ष उड़ान\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eमानव ने अंतरिक्ष को पहले दूरबीन से निहारकर ग्रहो तारो का अध्ययन किया। 20 सदी में टेक्नोलॉजी के विकास से रॉकेट और कई उपकरण के विकास के कारण इंसान ने अंतरिक्ष में रॉकेट की सहायता से मानव निर्मित उपग्रह भेजा जिसकी सहायता से पृथ्वी के मौसम और बनावट का अध्ययन किया जा रहा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअंतरिक्ष पर पहले जाने वाले मानव यूरी गागरिन थे। जिन्हे\u0026nbsp;12 अप्रैल 1961 में सोवियत संघ द्वारा वोस्तोक कार्यक्रम की सहायता से स्पेस में बेजा गया था। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने 1968 में पहली बार मानव को चाँद पर भेजा था। जिसके बाद अमेरिका ने 1972 तक\u0026nbsp; 8 और कार्यक्रम बनाने जिसमे इंसान को चाँद पर भेजा गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e2015 से पहले सभी मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट को एस्ट्रोनॉट द्वारा संचालन किया जाता था लेकिन 2015 में स्वचालित अंतरिक्ष यान बनाये जाने के बाद से एस्ट्रोनॉट को और समय मिलेगा रिसर्च करने के लिए। भारत के अंतरिक्ष संस्थान इसरो\u0026nbsp;ने 2024 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभारतीय अंतरिक्ष संगठन इसरो\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eभारत\u0026nbsp;का पहला उपग्रह आर्यभट था जिसको 19 अप्रैल 1975\u0026nbsp;को\u0026nbsp;रूस की सहायता से अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। भारतीय गणितज्ञ आर्यभट ने नाम पर इस उपग्रह को रखा गया था। दूसरा उपग्रह भास्कर था जिसको 1979 में स्थापित किया गया था।1980 में भारत द्वारा निर्मित यान SLV-3 की सहायता से\u0026nbsp;रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eइसके बाद भारत के दो और रॉकेट PSLVऔर GSLV\u0026nbsp;का निर्माण किया। जनवरी 2014 को भारत ने क्रायोजनिक इंजन द्वारा जीएसएलवी-डी 5 रॉकेट का निर्माण किया। भारत आज अपनी अंतरिक्ष यानो को ले जाने में सक्षम है बल्कि वे अन्य देशो के उपग्रहों को स्थापित करने में सहायता कर रहा है। 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा गया जिसने चाँद की परिक्रमा कर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र किया। उसके बाद मंगल मिशन के माध्यम से\u0026nbsp;पहली ही बार में भारत ने\u0026nbsp;उपग्रह को मंगल के कक्षा में स्थापित करने में सफलता पायी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eअंतरिक्ष पर जाने वाले पहला भारतीय\u003c/b\u003e\u0026nbsp;राकेश शर्मा थे। जो वायुसेना में थे। उसे विज्ञानं में बहुत रूचि था और\u0026nbsp;आकाश में उड़ना बहुत पसंद था। 1971 के युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा ने तीन एस्ट्रोनॉट के साथ उड़ान भरी। जो भारत और सोवियत संघ का एक मिशन था।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eइसरो का\u0026nbsp;गगन यान\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयह भारत का मानव को अंतरिक्ष में भेजने का कार्यक्रम है। यह एक कैप्सूल होगा जिसमे तीन अंतरिक्ष यात्री को भेजा जायेगा। यह 3.4 टन का है। जिसने\u0026nbsp; 2014 में मानव रहित उड़ान भरा था। गगन यान का निर्माण 2006 से शुरु कर दिया था। इसरो ने कहा है की 2022 के पहले इस मिशन को लांच लिया जायेगा। दिसंबर 2020 और 2021 को मानवरहित प्रक्षेपण किया जायेगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह मिशन पूरी तरह से भारत द्वारा तैयार किया जा रहा है। आत्मनिर्भरत भारत की और या एक कदम है जिसमे भारत सभी उपकरण को देश में ही निर्माण कर रहा है। जिससे की दूसरे देशो पर निर्भरता कम किया जा सके।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का प्रक्षेपण केंद्र है यही से अंतरिक्ष में उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा जाता है। यह आन्ध्रप्रदेश के श्रीहरि कोटा में स्थित है, 2002 में वैज्ञानिक सतीश धवन के मरणोपरांत सम्मान में इसे सतीश धवन के नाम से पुकारा जाने लगा।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e        \u003cdiv\u003e          \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-37UoNo3hVyM/XlSWLNwlgzI/AAAAAAAAB5U/JDbIuyZ5fOEKbeS9VZeF5yupL74v_cqgACLcBGAsYHQ/s1600/solar-system-planet.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"अंतरिक्ष किसे कहते है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"500\" data-original-width\u003d\"800\" height\u003d\"200\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-37UoNo3hVyM/XlSWLNwlgzI/AAAAAAAAB5U/JDbIuyZ5fOEKbeS9VZeF5yupL74v_cqgACLcBGAsYHQ/w320-h200/solar-system-planet.jpg\" title\u003d\"अंतरिक्ष किसे कहते है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb style\u003d\"font-weight: bold; text-align: justify;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसौरमंडल क्या है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e        \u003c/h2\u003e\u003c/span\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cb\u003eसौरमंडल\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003eहमारे चारों ओर दूर-दूर तक फैला स्वच्छ विस्तृत बाहरी आकाश, एक महासमुद्र         की भांति है, इसको ही अंतरिक्ष कहते हैं। प्राचीन काल से ही वैज्ञानिकों         द्वारा इसके गूढ रहस्यों का पता लगाने का प्रयास किया जाता रहा है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        आज तो मानव निर्मित उपग्रहों, रॉकेटों, विशालकाय स्वयं-नियन्त्रित         इलेक्ट्रॉनिक दूर्बीनों एवं वेधशालाओं से इसका निरन्तर अध्ययन किया जा रहा         है। यह बाहरी आकाश या अन्तरिक्ष आश्चर्य भरे अनेकानेक स्वरूपों एवं तथ्यों         का अनन्त भण्डार है। अभी तक जो भी खोज हो पायी है उसके आधार पर इसके         विस्तार को अनन्त ही कहा जा सकता है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u0026nbsp;क्योंकि वैज्ञानिकों द्वारा विशेष शक्तिशाली अति संवेदनशील एवं         इलेक्ट्रॉनिक दूरबीन, उपग्रहों के टेलीविजन कैमरों तथा दूरबीनों से अब तक         इसके सौ प्रकाश वर्षों से भी अधिक गहराई तक की इसको विशेषताओं एवं इसके         विस्तार को ही नापकर देखा जा सका है। अब तक इसकी जो खोज की गयी है       \u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u0026nbsp;उसके अनुसार इस अनन्त अन्तरिक्ष में अनेक निहारिकाएं, काले छिद्र       (Black Holes), स्वयं विस्फोट करती निहारिकाएँ, गेलेक्सी (आकाश गंगा), अति       ज्वलनशील एवं प्रकाशशील विशेष आकार की अनेक प्रकार की निहारिकाएँ, आद्य       पदार्थों या ब्रह्माण्डीय धूल (Cosmic Dust) का संघटन, आदि का हा अब तक कित       किया जा सका है। ब्रह्माण्ड के इस स्वरूप में निचले स्तर पर तारे,ग्रह, अवान्तर प्रह, उल्का, पुच्छल तारे (धूमकेतु), उपमह (चन्द्रमा), आदि पाये       जाते हैं।     \u003c/p\u003e     \u003cdiv\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e सौरमंडल में कितने ग्रह है \u003c/span\u003e      \u003c/h3\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          सौरमण्डल या सौर परिवार के अन्तर्गत सूर्य एवं उसके प्रभाव क्षेत्र में           आने वाले आकाशीय पिण्ड अर्थात सभी नौ ग्रह\u0026nbsp;( अब दस है, उनके उपग्रह           पुच्छल तारे व उल्का पिण्ड सम्मिलित गर्व से दरी के अनुसार ग्रहों का           क्रम-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, यम व कारला           आदि हैं जबकि आकार के आधार पर इनका क्रम बृहस्पति, शनि, अरुण वरुण           पृथ्वी,शुक्र,\u0026nbsp; मंगल,बुध और यम है। जैसाकि उपर्युक्त विवेचन में           उल्लेख किया गया है कि इस विचित्र ब्रह्माण्ड में अनगिनत सौरमण्डल हैं।           सौरमण्डल का केन्द्र या जनक सूर्य है । सूर्य एवं उसके ग्रहों-उपग्रहों           का परिचय निम्नांकित है:         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003eसर्य (Sun)\u003c/b\u003e सूर्य आग का धधकता हुआ एक चमकीला गोला है। यह स्वयं           अपनी क्रियाओं से प्रकाश एवं ऊर्जा बिखेरने वाला बना रहता है। इसके धरातल           पर निरन्तर अणु-परमाणु के व अन्य विस्फोट होते रहते हैं। इसी कारण सूर्य           की सतह पर बहुत ऊँचा तापमान बना रहता है। इसकी सतह का तापमान 6 से 7 हजार           डिग्री सेण्टीग्रेड रहता है। इसके आन्तरिक एवं केन्द्रीय भाग के तापमान           कुछ करोड़ डिमी सेण्टीमेड तक पहुंच जाते हैं । वाल्कोव के अनुसार, यह           तापमान 2,00,00,000 सेण्टीमेड तक हो सकता है। सूर्य के काले धब्बों का           तापमान 1.500 सेण्टीग्रेड होता है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          सूर्य के इन धब्बों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे तापमान की सिर्फ           कल्पना ही की जा सकती है। सूर्य का आकार (आयतन) पृथ्वी से 13 लाख गुना           अधिक है एवं इसका व्यास पृथ्वी के व्यास से 109 गुना है। इतना विशाल होते           हुए भी यह अरुण: पिण्ड पृथ्वी की आकर्षण शक्ति से मात्र 28 गुना ही अधिक           भारी है, अर्थात् पृथ्वी का एक किलोग्राम सूर्य पर 28 किया होगा। इसका           दूसरा शुक्र पृथ्वी मंगल कुबेर बुद्ध अर्थ है कि अति उत्तप्त एवं गैसीय           दशा में होने से यह विशेष हल्के तत्त्वों से बना है। सूर्य का व्यास           13,93,000 किलोमीटर है। इसे अपनी कीली पर एक चक्कर पूरा करने में 25 दिन           5 घण्टे लगते हैं।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          इसका निर्णय सौर कलंकों की स्थिति से किया गया है। सूर्य का पृथ्वी से           औसत दूरी 14. 96 करोड किलोमीटर है। प्रकाश द्वारा एक सेकण्ड में लगभग 3           लाख किलोमीटर दूरी तय की जाती है। इसे मानक मानकर पृथ्वी सूर्य से 8 मिनट           22 सेकण्ड दूर है। हमारी पृथ्वी से सूर्य आकृति में अन्य नक्षत्रों की           तुलना में सबसे बडा दिखायी देता है, क्योंकि यह पृथ्वी से सबसे निकट का           तारा है अन्यथा अनेक नक्षत्र सूर्य से भी बहत बड़े हैं। आर्दा ज्येष्ठा           घनिष्टा आदि ऐसे ही नक्षत्र सूर्य से सैकड़ों गुना बड़े हैं।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u0026nbsp;ये नक्षत्र पृथ्वी से कुछ प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। इसी भांति           सबसे छोटा दिखायी देने वाला धुव तारा भी सूर्य से हजारों गुना बड़ा           है,किन्तु यह सूर्य के सौरमण्डल से 400 प्रकाश वर्ष दूर है। सूर्य के           चारों ओर दिखायी देने वाली एक पट्टी सर्य का मकट (Corona) कहलाता है। यह           सूर्य को लाखों किलोमीटर के घेरे में घेरे हुए है। जब सूर्य घूमता है तो           यह मुकट नहीं घूमता है। क्योंकि इसकी सतह सूर्य की सतह से बाहर है। ऐसा           अनुमान है कि यह सूर्य की ज्वाला द्वारा निकाले गये परमाणु एवं विद्युत           कणों के सूर्य की सतह के चारों ओर जमने से इसकी ( मुकुट को ) रचना हुई           है।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          सौरमण्डल के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों की संख्या सूर्य के पश्चात एवं अब           तक भली प्रकार से ज्ञात \u003cb\u003eनौ ग्रह\u003c/b\u003e हैं। दसवें ग्रह के बारे में           प्रारंभिक सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं। यह नौ ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी           मंगल बृहस्पति शनि अरुण\u0026nbsp;वरुण एवं कुवेर हैं। मंगल एवं बृहस्पति के           मध्य बहुत अधिक दूरी है। इसका कारण यहां पाये जाने वाले आवान्तर ग्रह या           क्षुद्र ग्रहो का समूह है। ग्रहों का परिचय निम्न प्रकार से है।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(1) बुध (Mercury)-\u003c/b\u003e यह सूर्य से सबसे निकट का प्रह और नौ ग्रहों           में से सबसे छोटा ग्रह है, किंतु यह पृथ्वी के चन्द्रमा से थोड़ा बड़ा           है। इसका व्यास 488 किलोमीटर है। यह सर्य से मात्र 576 लाख किलोमीटर की           दूरी पर हैं। बुध ग्रह को सूर्य की परिक्रमा पुरी करने में 88 दिन का समय           लगता है। अर्थात समय लगता है अर्थात इस\u0026nbsp;ग्रह का एक दिवस एवं एक रात           दोनों ही पृथ्वी के 88 दिन के बराबर होते हैं।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          बुध का कोई उपग्रह नहीं है। इस ग्रह का आधिकतम तापमान 350           सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;रहता है। अत: यहाँ पर किसी भी प्रकार के जीवन-स्वरूप की           कल्पना नहीं की जा सकती। बुध अपनी दीर्घवृत्तीय कक्षा में 1.76,000           किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूमता है। यह गति इसे सूर्य की           गुरुत्वाकर्षण शक्ति की पकड़ से सुरक्षित रखती है। बुध पर वायुमंडल नहीं           है। अतः यहाँ दिन बहुत अधिक गर्म और रातें बर्फीली होती हैं। इसका           द्रव्यमान पृथ्वी का 5.5% है।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e          \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cb\u003e(2) शुक्र (Venus)- \u003c/b\u003eयह ग्रह बुध,मंगल एवं कुबेर से बड़ा एवं             अन्य ग्रहों से छोटा है। इसका व्यास 12,104 किलोमीटर है। इसकी सूर्य से             दूरी 10 करोड 2 लाख किलोमीटर है। यहाँ का एक दिन पृथ्वी का लगभग 3/4             होता है एवं इसे सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में पच्ची के 225 दिन             लगते हैं। यह ग्रह तेज चमकने\u0026nbsp;वाला है। लगभग पृथ्वी के आकार और भार             वाला शुक्र ग्रह\u0026nbsp;गर्म और तपता हुआ ग्रह\u0026nbsp;\u0026nbsp;है। इसका सूर्य             के सम्मुख अधिकतम तापमान 100 सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;है।\u0026nbsp; अतः यहाँ भी             जीवन के विकास की सम्भावना नहीं पाई जाता।           \u003c/div\u003e          \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cbr /\u003e          \u003c/div\u003e          \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            सूर्य के विपरीत भाग में तापमान -23 डिग्री\u0026nbsp;             सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;रहता है। इस ग्रह के चारों ओर सल्फ्यूरिक एसिड के जमे             हुए बादल हैं। अनुसंधान और राडार मैपिंग द्वारा इसके बादलों को भेदने             से पता चला है कि शुक्र की सतह चट्टानों और ज्वालामुखियों से भरी है।             प्रातः पूर्व एवं सायं पश्चिम में दिखाई पड़ने के कारण इसे भोर का तारा             (Morning Star) एवं संध्या तारा (Evening Star) कहा जाता है। यह आकार             एवं द्रव्यमान में पृथ्वी से थोड़ा छोटा है अतः कुछ खगोलशास्त्री इसे             पृथ्वी की बहन भी कहते हैं।           \u003c/div\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(3) पृथ्वी (Earth)-\u003c/b\u003e यह सौरमण्डल का सबसे अधिक ज्ञात एवं मानव व           जैव जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह\u0026nbsp;है। यह बुध, शुक्र, मंगल एवं           कुबेर से बड़ा और शेष ग्रहों से छोटा है। इसका व्यास 12.756 किलोमीटर है।           इसकी सूर्य से दूरी 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर है। पृथ्वी अपनी स्थिति की           दृष्टि से सूर्य से तीसरे स्थान पर है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग चौबीस घण्टे लगते हैं एवं           सूर्य की परिक्रमा पूरा करने में 365 दिन 6 घण्टे का समय (एक वर्ष) लगता           है। यह यह अपनी कीली पर 30.1/2 झुका हुआ है। इससे पृथ्वी पर सौर ताप           प्राप्ति, वर्षा एवं अन्य अनेक क्रियाओं तथा ऋतुओं पर विशेष प्रभाव पड़ता           है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u0026nbsp;पृथ्वी पर औसत तापमान, नमी एवं विशेष वायुमण्डल की दशाएं आदि सभी           मिलकर यहाँ के जीवन के विकास में विशेष सहायक रहे हैं। ऐसा या इससे मिलता           वायुमंडल केवल मंगल ग्रह पर ही है जहाँ संभवतः कभी भिन्न प्रकार का           जीवन-स्वरूप रहा होगा। यहां का अधिकतम तापमान 58.4           सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;है।इसका एक उपग्रह           चंद्रमा है । यह उपग्रह पृथ्वी से मात्र चार लाख किलोमीटर दूर है। मध्य तापमान,           ऑक्सीजन और अधिक\u0026nbsp;मात्रा में जल की उपस्थिति के कारण पृथ्वी सौर           मण्डल का एकमात्र ऐसा ग्रह\u0026nbsp;है जहां पर जीवन हैं। लेकिन जिस तरह से           मनुष्य स्वयं इसकी सतह और वातावरण को नष्ट कर रहा है.सम्भवतः भविष्य में           ऐसा ग्रह बन जायेगा,\u0026nbsp;जिसे यहीं के निवासियों ने नष्ट किया हो।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(4) मंगल (Mars)- \u003c/b\u003eयह यह बुध एवं कुबेर से बड़ा है एवं सूर्य से           चौथे स्थान पर स्थित है। इसका व्यास 6787 किलोमीटर है। सूर्य से इसकी दरी           22 करोड़ 79 लाख किलोमीटर है। इसे सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में           पृथ्वी के 687 दिन का समय लगता है। इसके फोबोस (Phobos) तथा डिमोस           (Diemos) नामक दो उपग्रह हैं। यहाँ का तापमान 30 सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;है।           अतः यहाँ पर जीवन होने की सम्भावना की जाती रही है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e          \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e          \u003c!--link ads--\u003e          \u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e          \u003cscript\u003e            (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({});           \u003c/script\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          जब सन 1909 में यह ग्रह पृथ्वी के समीप था, तब अमेरिकी विद्वान           \u003cb\u003eलोवेल \u003c/b\u003eने इसे एरिजोना में दूरबीन की सहायता से देखा तथा           महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे जिनके\u0026nbsp;सम्बन्ध मे सभी विद्वान एकमत नहीं           थे। NASA (संयुक्त राज्य अमेरिका) द्वारा प्रस्तुत सन 1992 की खोज एवं\u0026nbsp;रिपोट के\u0026nbsp;अनुसार आज से           लगभग 100 करोड वर्ष पूर्व यहाँ पर विशाल सागर या जल भंडार या तब संभवतः           यहाँ विशेष प्रकार का जैव-विकसित रहा होगा। मंगल की बंजर भूमि का रंग           गुलाबी है। अतः इसे लाल ग्रह (Red Planet) भी कहा जाता है। यहाँ पर           चट्टानें और शिलाखंड हैं। इसकी सतह पर गहरे गड्ढे,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eऔर घाटियाँ           हैं।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(5) वहस्पति (Jupiter\u003c/b\u003e) यह सौर मण्डल का सबसे बड़ा मह है। स्थिति           के हिसाब से यह सूर्य से पांचवें स्थान पर है। इसकी सूर्य से दूरी 77           करोड़ 83 लाख किलोमीटर है। इसका व्यास 1,42,800 किलोमीटर है।\u0026nbsp; इसे           सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी के 11 वर्ष 9 माह का समय लग           जाता है। इसका तापमान बहुत नीचा -132\" सेण्टीग्रेट\u0026nbsp;रहता है। अतः           यहाँ किसी भी प्रकार का जीवन संभव नहीं है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          इसके 16 उपग्रह\u0026nbsp;हैं,\u0026nbsp; इनमें से एक उपमह तो बुध, मंगल व कुबेर           से भी बड़ा है। यह ग्रह गैनिमीड है। अन्य उपग्रहों में यूरोपा, कैलिस्टो           एवं आलमथिया आदि हैं। इसके चौदहवें उपग्रह की खोज सन् 1917 में हुई थी।           बृहस्पति ग्रह\u0026nbsp;का द्रव्यमान\u0026nbsp;\u0026nbsp;सौरमण्डल के सभी ग्रहों का           71% एवं आयतन डेढ़ गुना हैं। दूर के उपग्रहों में से दो विपरीत दिशा में           परिभ्रमण करते हैं। यहाँ विचित्र विशेषता वाले उपग्रह भी है। पायनियर ने           अन्तरिक्ष अभियान प्राप्त चित्रों से पृथ्वी के विशाल लाल धब्बे की खोज           की है। वोयजर-1 ने बाद में बतलाया कि वास्तव में विशाल लाल धब्बा अशान्त           बादलों के घेरे में विशाल चक्रवात है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;यहाँ पर धूल भरे बादल           और ज्वालामुखी भी हैं।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(6) शनि (Saturn)\u003c/b\u003e -यह बृहस्पति के पश्चात् सबसे बड़ा ग्रह है ।           इसका व्यास 1,20,000 किलोमीटर है। यह सूर्य से 142.7 करोड़ किलोमीटर दूर           है। इसे सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी के 29.5 वर्ष लग जाते           हैं। यहाँ पर भीषण शीत पड़ती है और अधिकतम तापमान भी -151° सेण्टीग्रेट           रहते हैं। इसके 21 उपग्रह हैं । इसका सबसे बड़ा उपग्रह टिटॉन है। यह आकार           में बुध ग्रह के बराबर है। अन्य उपग्रहों में मीमास, एनसीलाहु, टेथिस,           डीऑन, रीया, हाइपेरियन, झ्यापेट्स तथा फोबे हैं। फोबे उपग्रह शनि की           कक्षा में, विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है। शनि ग्रह के चारों ओर एक           सुन्दर अंगूठी (वलय) बनी हुई है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u0026nbsp;इस वलय की उत्पत्ति भीतरी उपग्रहों के विखण्डित होकर धूल कणों में           बदलने एवं उन पर जमी हई गैसों के साथ बलय के आकार में (अंगूठी) संगठित           होने से हुई है। यह वलय या अंगूठी अथवा कुण्डली शनि की सतह से मात्र 13           हजार किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है। वोयजर-1 ने जानकारी दी है कि शनि           ग्रह के वलय हजारों तरंगों की पट्टी है । इस पट्टी की मोटाई 100 फीट है।           इसके चन्द्रमा टिटॉन पर नाइट्रोजनीय वातावरण और हाइड्रोकार्बन मिले हैं।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          इन दोनों की उपस्थिति से जीवन के लक्षण का पता चलता है, लेकिन यहाँ पर           जीवन का अस्तित्व नहीं मिला है। शनि ग्रह पर हाइड्रोजन एवं हीलियम गैस           पायी जाती हैं तथा कुछ\u0026nbsp;मात्रा में मीथेन एवं अमोनिया भी मिलती हैं।           शनि ग्रह की प्रमख विशेषता उसके चारों ओर गैस हिमकण एवं छोटे-छोटे ठोस           चट्टानों के मलवे का पाया जाना है। इस ग्रह पर सूर्य का केवल           1/100\u0026nbsp;वाँ भाग ही पड़ता है ।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          (\u003cb\u003e7) अरुण (Naptune) \u003c/b\u003e- यह ग्रह बृहस्पति व शनि से छोटा है। इसका           व्यास 51.800 किलोमीटर है। यह सौर मण्डल की बाहरी सीमा के निकट सूर्य से           286.96 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आकार में यह वरुण से कुछ           बड़ा है। इसमें 15 उपग्रह हैं। इनमें एरियल, अम्बिरयल,टिटेनिया, ओबेरान           तथा मिराण्डा आदि प्रमुख है। इसे सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में           पृथ्वी के 84 वर्ष का समय लगता है। यहाँ के तापमान -200° सेण्टीग्रेड से           भी नीचे रहते हैं। वोयजर-2 ने नेपच्यून की 5 वलयों का पता लगाया है।         \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cbr /\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          इसके नाम क्रमशः अल्फा, बीटा,गामा, डेल्टा और इपसिलॉन आदि हैं। अरुण ग्रह           की खोज सन् 1781 में सर विलियम हरशल नामक विद्वान ने की थी।           प्रथम\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eउपग्रह\u0026nbsp;\u003c/span\u003eटाइटन           है जो पृथ्वी के चन्द्रमा से बड़ा है तथा वरुण की सतह के समीप है।           दूसरा\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eउपग्रह\u0026nbsp;\u003c/span\u003eमेरीड           है। इसमें से तीन वलय इतनी हल्की थीं कि उनका पता एक सप्ताह बाद लगा।           खगोलविदों का अनुमान है कि इसकी बाहरी वलय\u0026nbsp;बर्फ चन्द्रिकाओं से भरी           है. और आंतरिक वलय पतली और कठोर है। यह विपरीत दिशा में घूमता है।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(8) वरुण (Uranus)-\u003c/b\u003e इस ग्रह की खोज सन 1846 में जर्मन खगोलज           \u003cb\u003eजोहान गाले\u003c/b\u003e ने की। यह\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eग्रह\u0026nbsp;\u003c/span\u003eबृहस्पति, शनि, एवं अरुण से छोटा तथा अन्य\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eग्रहो\u0026nbsp;\u003c/span\u003eसे बड़ा है। इसका व्यास 49,500 किलोमीटर ह. इसकी सूर्य से दूरी 449.66           करोड़ किलोमीटर है। इसे सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी के           164 वर्ष\u0026nbsp;का समय लगता है। इसके 8 उपग्रह है। यहाँ का तापमान           -185\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eसेण्टीग्रेड\u0026nbsp;\u003c/span\u003eरहता है। युरेनस एकमात्र ऐसा है जो एक ध्रुव\u0026nbsp;से दूसरे ध्रुव तक           अपनी प्रदक्षिणा कक्ष में सूर्य के सम्मख रहता है। वोयजर-2 ने 9 गहरी कसी           हई व्लय और कार्क स्क्रू के आकार का 40 लाख वर्ग किलोमीटर से बड़े           चम्बकीय क्षेत्र का पता लगाया।         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cbr /\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e(9) यम या कुबेर (Pluto)-\u0026nbsp;\u003c/b\u003eप्लूटो यूनानी संस्कृति व           (सौरमण्डल के) दर्शन के अनुसार पाताल का देवता कहलाता है। अतः अंतरिक्ष           में\u0026nbsp;सबसे अधिक गहराई पर होने से\u0026nbsp;इसका नाम प्लटो (Pluto)           पड़ा।\u0026nbsp;इसका उपमह एक है। यह ग्रह बुध के पश्चात् सबसे छोटा है एवं           सौरमण्डल की बाहरी सीमा पर सूर्य से 590\u0026nbsp;करोड किलोमीटर की दूरी पर           स्थित है। इसे सूर्य का एक चक्कर पुरा करने में पृथ्वी के 248 वर्ष लगते           यही।\u0026nbsp;इसका व्यास 3,040 किलोमीटर है। यह सबसे ठंडा ग्रह\u0026nbsp;है एवं           यहाँ के तापमान -220 सेण्टीग्रेड\u0026nbsp;से भी निचे रहते है। आधुनिक वञनि           को ने इस गृह को अब ग्रह की श्रेणी से बहार कर दिया है।\u0026nbsp;         \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e "},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7025484282642749061"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7025484282642749061"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/what-is-space-in-hindi.html","title":"अंतरिक्ष किसे कहते है - What is space in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-GSvwgeDWcvI/XyAvhw0nn_I/AAAAAAAADWo/fEEPNLAbs3kcAp41EGJS4F_-10eF5UY3ACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h180/10078922-16x9-large.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-3445873938927954319"},"published":{"$t":"2020-02-24T20:30:00.007+05:30"},"updated":{"$t":"2023-08-04T06:45:48.878+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"ज्वालामुखी किसे कहते हैं - volcano in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e     \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eज्वालामुखी एक सोये हुए दानव के सामान होता है जिसके अंदर गर्मी से भरी ज्वाला होती है। और यह अचानक इसके अंदर से बाहर आ जाती है। यह एक अकस्माक घटना है यही कारण है की इससे अधिक जान माल की हानि होती है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cb\u003eज्वालामुखी किसे कहते हैं\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eज्वालामुखी         पृथ्वी के अंदर पाए जाने वाले गर्म जावा का दरार या छेद होता है। जिससे लावा,         धूल जैसे,राख बाहर आते है। लावा के ठंडा होने से पर्वत या पहाड़ का निर्माण         हो जाता है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/p\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      ज्वालामुखी आंतरिक घटना है जो आकस्मिक एवं शीघ्र घटित होती हैं इसके       कारण\u0026nbsp;सतह पर तत्काल विनाशकारी प्रभाव दिखाई देता है।       ज्वालामुखी\u0026nbsp;जैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है एक ज्वाला उगलने वाला या आग का       पहाड़।\u003c/p\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003c/span\u003e    \u003c/p\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      इसमें से बहुत ऊँचे तापमान पर आग की लपटें व गैसीय पदार्थ तेजी से धरातल की       ओर फेंक दिए जाते हैं। इसी कारण यह दूर से आग फेंकने वाली गोली\u0026nbsp;जैसी       दिखाई देती है।\u0026nbsp;     \u003c/p\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड, गन्धक व गन्धक       ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन, अमोनिया आदि गैस होते हैं। इसके       साथ भारी मात्रा में जलवाष्प, धूल एवं राख भी निकलती है।     \u003c/p\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eजो आप अपने आस-पास पहाड़ देखते है कही न कही वह ज्वालामुखी से बना         है।\u0026nbsp;यह\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/03/blog-post_75.html\"\u003eभूकंप\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के कारण भी हो सकता है। यदि आप\u0026nbsp;भूकंप\u0026nbsp;के बारे में जानना चाहते है तो आपको डिटेल पोस्ट मिल         जायेगा।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/p\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वालामुखी की परिभाषा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003cb\u003eवारसेस्टर महोदय के अनुसार\u003c/b\u003e\u0026nbsp;- ज्वालामुखी प्रायः एक गोल आकार         का छिद्र अथवा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eखुला भाग होता है जिससे होकर पृथ्वी के अत्यंत तप्त भूगर्भ से गैस, जल,         तरल लावा तथा चट्टानों के टुकड़ों\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eसे युक्त गर्म पदार्थ पृथ्वी के धरातल पर प्रकट होते हैं।\u003c/span\u003e    \u003c/p\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eइंग्लिश में ज्वालामुखी को वोल्केनो कहा जाता है। जिसका अर्थ पाताल का         मार्ग से है। यूनान शब्द वूलकेनो से इसका विस्तार हुआ है। \"पृथ्वी के भीतरी         भाग से जो गर्म लावा निकलता हैं उसे ज्वालामुखी कहते हैं\u003c/span\u003e।\u0026nbsp;     \u003c/div\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\"\u003eज्वालामुखी के मुख को 'ज्वालामुखी शंक' कहते हैं।\" जहा से लावा, ठोस         पदार्थ और अनेक प्रकार की जलती हुई गैसें, धूल, राख तेजी से बहार निकलती         है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/p\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003e        ज्वालामुखी\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u0026nbsp;\u003c/span\u003eके कारण\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          ज्वालमुखी के कई कारण हो सकते है। मै आपको यहाँ 3 प्रमुख कारण के बारे           में चर्चा करने वाला हूँ। अब आपको बता हो गया होगा की ज्वालामुखी क्या           है। ये पृथ्वी के आंतरिक गतिविधि है। और इसका कारण भी आंतरिक होता           है।\u0026nbsp;         \u003c/p\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cb\u003e1. भूगर्भ में ताप का बढ़ना\u003c/b\u003e - यदि आप पृथ्वी के अंदर जाते है तो         गहराई बढ़ने पर 32 मीटर की गहराई में 1 सेंटीग्रेड तापमान बढ़ता जाता है और         50 किलोमीटर की गहराई पर तापमान अधिक हो जाता है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        वहाँ पाये जाने वाले आणविक तत्वों के विखण्डन से भी ताप बढ़ने में सहायता         मिलती है। अब आपके मन में सवाल यह आया होगा की कोईभी वस्तु अधिक तापमान में         पिघल जाता है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        यह सत्य है लेकिन पृथ्वी के अधिक दबाव के कारण वह ठोस रहता है। यदि कोई         स्थान पर दबाव काम होता है तो अंदर का लावा ज्वालामुखी के रूप में बाहर         निकने लगता है।\u0026nbsp;       \u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cb\u003e2. गैसों व जलवाष्प की उत्पत्ति\u003c/b\u003e - समुद्र या महसागर में जल किसी         दरार की सहायता से नीचे चला जाता है। और वह अधिक गहराई में चला जाता है। और         गहराई के साथ तापमान बढ़ता रहता है।\u0026nbsp;       \u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        जिससे की जल वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। यह जलवाष्प दबाव के कारण 135°         सेण्टीग्रेड तक गर्म हो जाता है। और कमजोर स्थल पर बहार निकलने का प्रयास         करता है। साथ मेग्मा भी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ने लगता है।       \u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        इसी कारण प्रशांत महासागर के चारों ओर सबसे अधिक ज्वालामुखी पाये जाते हैं।         क्योंकि यह पृथ्वी का सबसे अधिक असन्तुलित व कमजोर भू-भाग है।\u0026nbsp;       \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cp\u003e          \u003cb\u003e3. लावा \u003c/b\u003e- ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा जिसे मेग्मा भी कहा           जाता कहते हैं। सभी जगहों पर एक अवस्था में नहीं पाया जाता। यह लावा           गैसों के साथ मिलकर गतिशील एवं क्रियाशील बन जाता है।\u0026nbsp;         \u003c/p\u003e        \u003cp\u003e          जिस प्रकार कोल्ड्रिंग के बोतल से दबाव हटाते ही वह तेजी से बाहर आने का           प्रयास करता है। उसी प्रकार से गैस मिश्रित लावा भी पृथ्वी के कमजोर           भागों से या दरार से पृथ्वी की सतह की ओर आने लगता है।\u0026nbsp;         \u003c/p\u003e        \u003cp\u003e          किन्तु ज्वालामुखी इस बात पर निर्भर करती है कि लावा गाढ़ा है या द्रव           अवस्था में है।\u0026nbsp;         \u003c/p\u003e        \u003cp\u003e          गेसों का दबाव अधिक होने से भयंकर विस्फोट भी हो सकता है जबकि द्रव लावा           में धीमा विस्फोट होता है। लावा मुख्यतः सिलिका की मात्रा के अनुसार पतला           या गाढ़ा होता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-bWLOMurzkrU/YKJpmb8OcpI/AAAAAAAAE48/QvOpBf6kVGUu8FVRBmucPLQQFf7-448BwCLcBGAsYHQ/s1280/20210517_183018_1.webp\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ज्वालामुखी किसे कहते - volcano in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"1141\" data-original-width\u003d\"1280\" height\u003d\"285\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-bWLOMurzkrU/YKJpmb8OcpI/AAAAAAAAE48/QvOpBf6kVGUu8FVRBmucPLQQFf7-448BwCLcBGAsYHQ/w320-h285/20210517_183018_1.webp\" title\u003d\"ज्वालामुखी किसे कहते - volcano in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वालामुखी के प्रकार\u0026nbsp;         \u003c/span\u003e      \u003c/h3\u003e           \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;arial\u0026quot; , \u0026quot;helvetica\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #202020;\"\u003eज्वालामुखी के तीन के होते है -\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e\u003cb\u003e1.\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e\u003cb\u003eसक्रिय ज्वालामुखी\u003c/b\u003e -\u0026nbsp; सक्रिय             ज्वालामुखी नाम से स्पष्ट है ऐसी ज्वालामुखी में समय-समय पर विस्फोट             होता रहता है। इसके दुनिया में कई उदाहरण हैं।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eजैसे - सकुराजिमा एक सक्रीय ज्वालामुखी है जो की जापान में स्थित है।             इसके आवला गल्र्स ज्वालामुखी - कोलंबिया, माउंट मेरापी ज्वालामुखी -             इंडोनेशिया, माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी -\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/italy-ki-rajdhani.html\"\u003eइटली\u003c/a\u003e\u0026nbsp;आदि। ये सभी सक्रिय             ज्वालामुखी है।\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e2.\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eनिष्क्रिय\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e\u003cb\u003eज्वालामुखी\u003c/b\u003e\u0026nbsp; - \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eनिष्क्रिय ज्वालामुखी उसे कहा जाता है जो लंबे समय में नहीं फटे लेकिन             भविष्य में फिर से फटने की आशंका है।\u0026nbsp;इस तरह की ज्वालामुखी में कम             से कम 10,000 वर्षों से विस्फोट नहीं हुआ होता है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eउदाहरण -\u0026nbsp;मौना केआ - संयुक्त राज्य अमेरिका।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eमाउंट एजिज़ा - कनाडा।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eकिलिमंजारो पर्वत - तंजानिया।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e\u003cb\u003e3.\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003e\u003cb\u003eमृत ज्वालामुखी\u003c/b\u003e - \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eमृत ज्वालामुखी या विलुप्त ज्वालामुखी भी कहते हैं जो मानव इतिहास में             कभी सक्रीय नहीं होते हैं।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eमृत ज्वालामुखियों के उदाहरण\u0026nbsp;बेन नेविस, यूनाइटेड किंगडम का सबसे             लंबा पर्वत,\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eउत्तरी प्रशांत महासागर में हवाईयन-सम्राट सीमाउंट श्रृंखला             और\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #202020;\"\u003eपेरू में हुस्करैन आदि।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eज्वालामुखी के लाभ और हानि\u003cspan\u003e\u0026nbsp;\u0026nbsp; \u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/h3\u003e        \u003cp\u003e\u003cb\u003eज्वालामुखी के लाभ\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e        \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eज्वालामुखी विस्फोट से हमारे ग्रह के कोर की गर्मी को स्थिर करने में           मदद मिलती है।         \u003c/li\u003e\u003cli\u003eतरल लावा के सूखने के बाद ज्वालामुखी\u0026nbsp;नए भूमि रूपों का निर्माण           करते हैं।         \u003c/li\u003e\u003cli\u003eलावा और राख का उपयोग विभिन्न कार्यो के लिए किया जाता है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eलावा में विभिन्न खनिज होते हैं जो मौजूदा मिट्टी को समृद्ध बनाते           हैं।         \u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e                                \u003cp\u003e\u003cb\u003eज्वालामुखी के नुकसान\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e        \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eयह बहुत विनाशकारी होता\u0026nbsp;है।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eज्वालामुखी विस्फोट से हानिकारक गैसें भी निकलती हैं।\u003c/li\u003e\u003cli\u003eलावा ताप\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\" style\u003d\"text-align: left;\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e\u0026nbsp;के लिए एक बूस्टर के रूप में कार्य करता है।         \u003c/li\u003e\u003cli\u003eलावा का प्रवाह अक्सर कई मौतों का कारण बनता है।\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e                              \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e       "},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3445873938927954319"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/3445873938927954319"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html","title":"ज्वालामुखी किसे कहते हैं - volcano in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-bWLOMurzkrU/YKJpmb8OcpI/AAAAAAAAE48/QvOpBf6kVGUu8FVRBmucPLQQFf7-448BwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h285/20210517_183018_1.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-4780038440097616511"},"published":{"$t":"2020-02-19T16:59:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-05T08:23:09.953+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"अमेजॉन का जंगल किस देश में है - amazon forest"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv\u003e    \u003cp\u003eदक्षिण अमेरिका के अमेज़ॅन में पृथ्वी पर बचे सभी उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। ग्रह की सतह के केवल 1% को कवर करने के बावजूद, अमेज़ॅन उन सभी वन्यजीव प्रजातियों में से 10% का घर है जिनके बारे में हम जानते हैं - और शायद बहुत कुछ जो हम अभी तक नहीं जानते हैं। हमारे शोध से पता चलता है कि अमेज़ॅन में औसतन हर 3 दिनों में एक 'नई' प्रजाति के जानवर या पौधे खोजे जा रहे हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहालाँकि, दुर्भाग्य से, क्योंकि जंगल के विशाल हिस्से इतनी तेजी से नष्ट हो रहे हैं, हम शायद कभी भी उसके पास मौजूद सभी धन को नहीं जान पाएंगे। पूरी दुनिया के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी लोग अमेज़न पर निर्भर हैं। न केवल भोजन, पानी, लकड़ी और दवाओं के लिए, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय कार्बन और जल चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, जलवायु को स्थिर करने में मदद करने के लिए।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u0026nbsp;अमेज़ॅन पहले की तरह घेराबंदी में है। वनों की कटाई और आग एक बार फिर बढ़ रही है, और संरक्षित क्षेत्रों और स्वदेशी भूमि को बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इसे पहले से कहीं ज्यादा हमारी मदद की जरूरत है। हम अमेज़ॅन की महत्वपूर्ण जीवन-निर्वाह भूमिका के बिना जलवायु संकट से नहीं निपट सकते।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eअमेज़न के बारे में\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयह विशाल अदम्य जंगल बड़े पैमाने पर खेती और पशुपालन, बुनियादी ढांचे और शहरी विकास, अस्थिर लॉगिंग, खनन और जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरे में है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहां क्या दांव पर लगा है, इसका अंदाजा लगाने के लिए बस दो त्वरित तथ्य। 1) अमेज़ॅन में पृथ्वी पर कहीं और की तुलना में प्राइमेट की अधिक प्रजातियां हैं। 2) आप अमेज़ॅन में एक पेड़ पर अधिक प्रकार की चींटियां पा सकते हैं, जितना कि आप कुछ पूरे देशों में पा सकते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहम अमेज़ॅन की रक्षा करने में मदद करने के लिए इतने दृढ़ हैं, अपने लोगों के लाभ के लिए और संपूर्ण ग्रह के लिए। आपकी मदद अत्यावश्यक होगी।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eउष्णकटिबंधीय वर्षावन की रक्षा करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान\u003c/p\u003e\u003cp\u003eहमने कई अन्य संगठनों के साथ कोलम्बियाई अमेज़ॅन के केंद्र में चिरीबिकेट नेशनल पार्क का विस्तार करने के लिए दशकों तक काम किया। हम अंत में 2018 में जीत गए, और अधिक अच्छी खबर में पार्क को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया - इसके विशाल मूल्य की मान्यता। वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, कृषि सीमा का विस्तार, अवैध लकड़ी की निकासी, अवैध फसलें और अनियोजित बस्तियाँ, कोलंबिया के जंगलों के लिए महत्वपूर्ण खतरे बने हुए हैं: देश का 66 प्रतिशत वनों की कटाई अमेज़न क्षेत्र में होती है। अब हम कोलंबिया की संरक्षित क्षेत्र प्रणाली में भूमि की मात्रा बढ़ाने के लिए एक कोष के निर्माण का समर्थन कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि भूमि ठीक से प्रबंधित और संरक्षित है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pz8EaESCL5Y/XlQFYZCyZ9I/AAAAAAAAB4Y/NTr-PiG0G98gYBTBLF8cySBlddZ3nbFJACLcBGAsYHQ/s1600/amazon%2BRainforest-compressed.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"amazon forest in which country in hindi अमेजॉन का जंगल किस देश में है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"600\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"320\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-pz8EaESCL5Y/XlQFYZCyZ9I/AAAAAAAAB4Y/NTr-PiG0G98gYBTBLF8cySBlddZ3nbFJACLcBGAsYHQ/w320-h320/amazon%2BRainforest-compressed.jpg\" title\u003d\"amazon forest in which country in hindi अमेजॉन का जंगल किस देश में है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4780038440097616511"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/4780038440097616511"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/amazon-forest.html","title":"अमेजॉन का जंगल किस देश में है - amazon forest"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-pz8EaESCL5Y/XlQFYZCyZ9I/AAAAAAAAB4Y/NTr-PiG0G98gYBTBLF8cySBlddZ3nbFJACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h320/amazon%2BRainforest-compressed.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-2105640996205804508"},"published":{"$t":"2020-02-17T20:40:00.001+05:30"},"updated":{"$t":"2023-01-06T09:07:11.429+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"मरुस्थल कितने प्रकार के होते हैं - types of desert"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e  \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-8DrEecSlNxI/X3gKJwHrYPI/AAAAAAAAELk/MuaQy51HKpI16503wKB2oGYxqpCIXQU4ACPcBGAYYCw/s600/20201003_102702.webp\" style\u003d\"display: block; padding: 1em 0px; text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-8DrEecSlNxI/X3gKJwHrYPI/AAAAAAAAELk/MuaQy51HKpI16503wKB2oGYxqpCIXQU4ACPcBGAYYCw/s320/20201003_102702.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e     \u003cp\u003eमरुस्थल क्या होता है और यहां कितने प्रकार का होता है डेजर्ट को हिंदी में मरुस्थल कहा जाता है। मरुस्थल का वातावरण कैसा होता है। और मरुस्थल कितने प्रकार के होते है, तो चलिए जानते हैं मरुस्थल के बारे में।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमरुस्थल क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eरेगिस्तान पृथ्वी की सतह के लगभग पांचवें हिस्से को कवर करते हैं और वहां होते हैं जहां वर्षा 50 सेमी / वर्ष से कम होती है। हालांकि अधिकांश रेगिस्तान, जैसे कि उत्तरी अफ्रीका का सहारा और दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका, मैक्सिको और ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान, कम अक्षांशों पर पाए जाते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eलेकिन अन्य प्रकार के रेगिस्तान, ठंडे रेगिस्तान, यूटा और नेवादा के बेसिन और रेंज क्षेत्र में पाए जाते हैं। पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में अधिकांश रेगिस्तानों में विशिष्ट वनस्पतियों के साथ-साथ विशेष कशेरुकी और अकशेरूकीय जानवरों की काफी मात्रा है। इन मिट्टी में अक्सर प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं लेकिन उत्पादक बनने के लिए केवल पानी की आवश्यकता होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारत\u0026nbsp;में थार का मरुस्थल बहुत ही प्रसिद्ध है और लोगों का मानना है कि मरुस्थल केवल रेतीली ऐसी बंजर जमीन होती है। जहां पर खेती बाड़ी या ऐसे ही कुछ भी काम नहीं किए जा सकते जोकि हमारे फायदे के लिए हो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eमैं यहां पर आपको बताना चाहूंगा की मरुस्थल केवल रेतीली जमीन या बंजर जमीन से नहीं होता बल्कि मरुस्थल\u0026nbsp;बर्फ\u0026nbsp;से जगह ढका हुआ ऐसा भी हो सकता है जहां पर खेतीवाड़ी नहीं की जा सकती या ऐसे औद्योगिक काम नहीं किए जा सकते जो मानव के लिए उपयोगी है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहां पर मैं आपको उदाहरण के माध्यम से बता दूं कि अंटार्कटिक भी एक मरुस्थल ही है। जो विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल है और यहां पर पूरा बर्फ जमा होता है। यहां मौसम का कोई प्रभाव नहीं होता यहां हमेशा बर्फ जमा रहता है। एक प्रकार से यहां एक बंजर जमीन ही है। जो हमारे हिसाब से या\u0026nbsp;भूगोल\u0026nbsp;शास्त्रों के हिसाब से एक मरुस्थली है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमरुस्थल के प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cdiv\u003e\u003cp\u003eरेगिस्तान के चार मुख्य प्रकारों में गर्म और शुष्क रेगिस्तान, अर्ध-शुष्क रेगिस्तान, तटीय रेगिस्तान और ठंडे रेगिस्तान शामिल हैं। गर्म और शुष्क रेगिस्तानों में तापमान साल भर गर्म रहता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. शुष्क रेगिस्तान\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eरेगिस्तानी बायोम पृथ्वी की सतह का लगभग पांचवां हिस्सा कवर करता है। इस बायोम में मिट्टी की एक परत होती है जो रेगिस्तान के प्रकार के आधार पर या तो रेतीली, बजरी या पथरीली हो सकती है। रेगिस्तान में आमतौर पर एक वर्ष में अधिकतम 50 सेंटीमीटर वर्षा होती है, और रेगिस्तान में रहने वाले जीव इस अत्यंत शुष्क जलवायु के अनुकूल होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकुछ प्रसिद्ध शुष्क रेगिस्तानों में सहारा मरुस्थल शामिल है जो अफ्रीकी महाद्वीप के अधिकांश भाग को कवर करता है और मोजावे रेगिस्तान संयुक्त\u0026nbsp;राज्य\u0026nbsp;अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. अर्ध-शुष्क रेगिस्तान\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eगर्म और शुष्क रेगिस्तानों की तुलना में थोड़े ठंडे होते हैं। अर्ध-शुष्क रेगिस्तानों में लंबी, शुष्क ग्रीष्मकाल के बाद कुछ वर्षा के साथ सर्दियाँ आती हैं। अर्ध-शुष्क मरुस्थलीय बायोम यूरोप, उत्तरी अमेरिका, रूस और उत्तरी एशिया में पाए जाते हैं। वे शुष्क रेगिस्तान के समान हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजिनमें लंबी गर्मी अधिक गर्म और सर्दियों के दौरान न्यूनतम वर्षा होती है। गर्मियों के तापमान शुष्क रेगिस्तानों की तरह तीव्र नहीं होते हैं, रात का तापमान ठंडा होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसंयुक्त राज्य अमेरिका में, यूटा, मोंटाना और पूरे ग्रेट बेसिन में अर्ध-शुष्क रेगिस्तान पाए जाते हैं, जो कैलिफोर्निया और नेवादा से मैक्सिको तक फैला है। अर्ध-शुष्क रेगिस्तान की मध्यम जलवायु इसे कई जानवरों की प्रजातियों का घर बनाती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. तटीय रेगिस्तान\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eअन्य प्रकार के रेगिस्तानों की तुलना में थोड़ा अधिक आर्द्र होते हैं। हालांकि तट से घने कोहरे आते हैं, फिर भी बारिश कम ही होती है। दक्षिण अमेरिका में चिली का अटाकामा रेगिस्तान तटीय रेगिस्तान का एक उदाहरण है। ठंडे रेगिस्तान अभी भी सूखे हैं। लेकिन अन्य प्रकार के रेगिस्तानों की तुलना में बहुत कम तापमान हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअटलांटिक तटीय रेगिस्तान उत्तरी अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में सबसे पश्चिमी क्षेत्र है। यह अटलांटिक तट के साथ एक संकीर्ण पट्टी पर कब्जा करती है, जहां ठंडी कैनरी करंट द्वारा अधिक कोहरा और धुंध उत्पन्न होता है, जो विभिन्न प्रकार के लाइकेन, रसीले और झाड़ियों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नमी प्रदान करता है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. ठंडे मरुस्थल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eठंडे रेगिस्तानों में गर्मियाँ गर्म होती हैं लेकिन अत्यधिक ठंडी सर्दियाँ होती हैं। ये मरुस्थल उच्च, समतल क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जिन्हें पठार कहा जाता है, या दुनिया के समशीतोष्ण क्षेत्रों में पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है। समशीतोष्ण क्षेत्र ध्रुवीय क्षेत्रों और उष्णकटिबंधीय के बीच स्थित हैं। अन्य प्रकार के रेगिस्तानों की तरह, ठंडे रेगिस्तानों में बहुत कम बारिश व हिमपात अधिक होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअधिकांश लोग रेगिस्तान को गर्म, रेतीले स्थान मानते हैं। यह हमेशा सच नहीं होता है। बहुत ठंडे स्थानों को भी मरुस्थल कहते हैं। इन जगहों पर पानी जम जाता है। पौधे और जानवर इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं। जीवन यहाँ बहुत दूभर होता है। जैसे अंटार्कटिका ठंडे मरुस्थल का एक अच्छा उदाहरण है। जहा केवल बर्फ ही बर्फ है।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eमरुस्थल की पहचान\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003eमरुस्थल एक बंजर क्षेत्र होता है जहा पेड़ पौधे बहुत कम पाए जाते है। मिट्टी रेतीली होती है। ऐसी क्षेत्रों में धूल भरी आंधी चलती रहती है। कुल मिलाकर यहाँ जीवन बहुत कठिन होता है। पानी की कमी के मरुस्थल का निर्माण कारण होता हैं। हलाकि अन्य कारक भी मरुस्थल को जन्म देते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eरेगिस्तान में ज्यादा पत्तेदार पेड़ नहीं होते क्योंकि वहां पानी का अभाव होता है और जहां बर्फीले इलाके होते हैं वहां पर उस वातावरण के हिसाब से ही पेड़ पौधे पाए जाते हैं। प्रायः मरुस्थल के रूप में उन्हीं स्थानों को रखा गया है जहां पर वर्षा 50 डिग्री सेल्सियस से कम होती है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eजब लोग रेगिस्तान के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर ऊंट और खड़खड़ाहट वाले सांप दिमाग में आ जाते हैं, हालांकि कई और जानवर रेगिस्तान को घर कहते हैं। लोमड़ी, मकड़ी, मृग, हाथी और शेर सामान्य रेगिस्तानी प्रजातियाँ हैं। सहारा रेगिस्तान में पाया जाने वाला एडैक्स मृग दुनिया के सबसे खूबसूरत मृगों में से एक है। दुर्भाग्य से, पूरी दुनिया में लोग इसके सुंदर सींग चाहते हैं और इसलिए वे खतरे में हैं।\u003c/p\u003e\u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eविश्व के प्रसिद्ध मरुस्थल\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003e\u003cdiv\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cb\u003eएशिया\u003c/b\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eगोबी मरुस्थल - चीन और मंगोलिया\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकाराकुम मरुस्थल - तुर्कमेनिस्तान\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकिज़िल कुम मरुस्थल - कजाखस्तान और उजबेकिस्तान\u003c/li\u003e\u003cli\u003eथार-चोलिस्तान मरुस्थल - भारत और पाकिस्तान\u003c/li\u003e\u003cli\u003eअरबी मरुस्थल मरुस्थल - ओमान जार्डन इराक\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cb\u003eअफ्रीका\u003c/b\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eसहारा मरुस्थल - उत्तरी अफ्रीका\u003c/li\u003e\u003cli\u003eकालाहारी मरुस्थल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eनामिब मरुस्थल\u003c/li\u003e\u003cli\u003eनूबियन मरुस्थल\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cbr /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cb\u003eदक्षिण अमेरिका\u003c/b\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003col\u003e\u003cli\u003eआटाकामा\u003c/li\u003e\u003cli\u003eला ग्वाजि़रा\u003c/li\u003e\u003cli\u003eमोजेव मरूस्थल\u003c/li\u003e\u003c/ol\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. अटाकामा मरुस्थल - अमेरीका\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cdiv\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eये मरुस्थल\u0026nbsp;दक्षिण अमेरिका\u0026nbsp;में है यह कैलिफोर्निआ में स्थित मौत की घाटी से 50 गुना सूखा है। चिली का अटाकामा रेगिस्तान, पृथ्वी पर सबसे शुष्क गैर-ध्रुवीय रेगिस्तान है, जो तटीय कॉर्डिलेरा डे ला कोस्टा पर्वत श्रृंखला और एंडीज पर्वत के बीच लगभग 600 मील की दूरी पर फैला हुआ है। यह क्षेत्र आश्चर्यजनक भूगर्भीय संरचनाओं का दावा करता है और इसने वैज्ञानिकों को अनुसंधान के भरपूर अवसर प्रदान किए हैं।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eअटाकामा पृथ्वी पर सबसे पुराना रेगिस्तान है और पिछले 150 मिलियन वर्षों से अर्ध-शुष्क परिस्थितियों का अनुभव किया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस क्षेत्र में अद्वितीय भूगर्भिक और वायुमंडलीय स्थितियों के संयोजन के कारण, रेगिस्तान का आंतरिक भाग लगभग 15 मिलियन वर्षों से अति शुष्क रहा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eकैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के मृदा वैज्ञानिक रोनाल्ड अमुंडसन के अनुसार, यह पूरी तरह से सूखा आंतरिक-रेगिस्तानी क्षेत्र लगभग 50,000 वर्ग मील में फैला है। अटाकामा बर्फ से ढके एंडीज पर्वत की छाया में बसा है, जो पूर्व से वर्षा को रोकता है। पश्चिम में, प्रशांत महासागर से ठंडे पानी का ऊपर उठना वायुमंडलीय परिस्थितियों को बढ़ावा देता है जो समुद्री जल के वाष्पीकरण में बाधा डालते हैं और बादलों और बारिश के गठन को रोकते हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. थार मरुस्थल - भारत\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eथार के कुछ क्षेत्र उत्तर पश्चिमी भारतीय राज्यों\u0026nbsp;गुजरात,\u0026nbsp;राजस्थान\u0026nbsp;में\u0026nbsp;अरावली पर्वत\u0026nbsp;श्रृंखला के पश्चिम में स्थित है, जो सीमा पार\u0026nbsp;पाकिस्तान\u0026nbsp;के पंजाब और सिंध क्षेत्रों तक फैली हुई है। इसे 9वां सबसे बड़ा उपोष्णकटिबंधीय रेगिस्तान माना जाता है। लगभग 5,000 साल पहले, यह रेगिस्तान मोहनजोदड़ो और हड़प्पा का स्थल था, प्राचीन शहर जो प्राचीन मिस्र, मेसोपोटामिया और मिनोअन क्रेते के समकालीन सभ्यता का समर्थन करते थे।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eथार रेगिस्तान निस्संदेह\u0026nbsp;भारत-प्रशांत क्षेत्र में सबसे दुर्गम क्षेत्र है; फिर भी, यह प्रति किमी 2 में 80 से अधिक लोगों की मानव जनसंख्या घनत्व का समर्थन करता है। जिससे यह दुनिया में सबसे घनी आबादी वाला रेगिस्तान बन जाता है। रेगिस्तान कई बड़े स्तनधारियों के साथ अपेक्षाकृत समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करता है। यहाँ की मुख्य जंगली जिव नीला बैल, काला हिरण, और भारतीय चिंकारा हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eयहाँ सर्दियों में तापमान बहुत काम होता है, जबकि गर्मियों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है। जुलाई से सितंबर तक वर्षा 100-500 मिमी तक सीमित होती है, लेकिन ज्यादातर अप्रत्याशित और अनिश्चित होती है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. सहारा मरुस्थल - अफ्रीका\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eयह विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल है। सहारा नाम अरबी शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है मरुस्थल। यह\u0026nbsp;अफ्रीका\u0026nbsp;के उत्तर में स्थित है। जिसकी लम्बाई 5600 किलोमीटर और चौड़ाई 1300 किलोमीटर में फैला है। यह मरुस्थल\u0026nbsp;क्षेत्रफल के हिसाब से यूरोप के बराबर है। और भारत से दो गुना बड़ा है। माली, अल्जीरिया, मोरक्को, मुरितानिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, नाइजर, चढ़, सूडान और मिस्र देशो तक फैला है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभूमध्य सागर तट पर स्थित उपजाऊ क्षेत्र, माघरेब के एटलस पर्वत और मिस्र और सूडान में नील घाटी को छोड़कर, उत्तरी अफ्रीका का अधिकांश भाग, रेगिस्तान में शामिल है। यह पूर्व में लाल सागर और उत्तर में भूमध्य सागर से लेकर पश्चिम में\u0026nbsp;अटलांटिक महासागर\u0026nbsp;तक फैला हुआ है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदक्षिण में, यह साहेल, नाइजर नदी घाटी के आसपास अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय सवाना की एक बेल्ट और उप-सहारा अफ्रीका के सूडान क्षेत्र से घिरा है। सहारा को कई क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है, जिसमें पश्चिमी सहारा, केंद्रीय अहगर पर्वत, तिबेस्टी पर्वत, वायु पर्वत, टेनेरे रेगिस्तान और लीबिया के रेगिस्तान शामिल हैं।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. गोबी मरुस्थल - मंगोलिया\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eगोबी मरुस्थल चीन और मंगोलिया में स्थित है। यह विश्व के\u0026nbsp;सबसे बड़े मरुस्थलों में से एक है। गोबी को ठन्डे मरुस्थलों में गिना जाता है।\u0026nbsp;एशिया\u0026nbsp;महाद्वीप\u0026nbsp;के मगोलिया\u0026nbsp;देश\u0026nbsp;में अधिकांश भाग फैला है। गोबी शब्द मंगोलियन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है - जलहरी स्थान।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआज गोबी एक रेगिस्तान है लेकिन प्राचीन काल में ऐसा नहीं था। प्राचीन कल में यह स्थान\u0026nbsp;समृद्ध भारतीय बस्तियां बसी थी। गोबी एशिया का सबसे बड़ा और संसार का 5 वा बड़ा रेगिस्तान है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगोबी मरुस्थल पूर्वी एशिया में एक बड़ा रेगिस्तान क्षेत्र है। इसमें उत्तरी और पूर्वोत्तर चीन और दक्षिणी मंगोलिया के कुछ हिस्से शामिल हैं। गोबी के रेगिस्तानी घाटियाँ अल्ताई पर्वत और उत्तर में मंगोलिया के घास के मैदानों और पश्चिम में तकलामकान रेगिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में हेक्सी कॉरिडोर और तिब्बती पठार और दक्षिण-पूर्व में उत्तरी चीन के\u0026nbsp;मैदान\u0026nbsp;से घिरी हुई हैं।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगोबी तिब्बती पठार द्वारा निर्मित हिंद महासागर से गोबी क्षेत्र तक पहुंचने वाली वर्षा को रोकता है। यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा रेगिस्तान है और अरब रेगिस्तान के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेगिस्तान है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e5. कालाहारी मरुस्थल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयह रेगिस्तान अफ्रीका के दक्षिण क्षेत्र में स्थित है। कालाहारी मरुस्थल का क्षेत्रफल 9 लाख वर्ग किलोमीटर है। इस रेगिस्तान में लगभग 8 - 19 सेमी वर्षा होती है। यह उष्ण कटिबंधीय मरुस्थल है। यहाँ कुछ जगहों में साल के तीन महीने बारिश होती है। जिसके कारण पौधे उग जाते है। 1980 में यहाँ पर जीव संरक्षण के कार्यक्रम चलाये गए थे। कालाहारी में कई रंग के रेत पाए जाते है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e6. ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eयह\u0026nbsp;ऑस्ट्रेलिया\u0026nbsp;का एक महत्वपूर्ण रेगिस्तान है। इसका क्षेत्रफल 338000 वर्ग किलोमीटर है। विक्टोरिया रेगिस्तान में रेतीले टीलों का भरमार पाया जाता है। रेगिस्तान की उचाई 500 से 1000 फुट है। यह पर समतल क्षेत्र भी होते है जो छोटे - छोटे चम चमते पत्थर से भरे होते है।\u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e7. कोहरा मरुस्थल - अमेरिका\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eकोहरा रेगिस्तान ऐसे भाग को कहा जाता है। जहा अधिकतर जल कोहरे के नमी से आती है। इस मरुस्थल में जानवरो और पौधों को इसी से पानी मिलता है। दक्षिण अमेरिका में चिली के तट पर स्थित आटाकामा desert , अफ्रीका में नामीब desert , उत्तर अमेरिका में कैलिफोर्निया रेगिस्तान अरबी प्रायदिव में कोहरा डेजर्ट इसके उदाहरण है।\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003c/span\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003cdiv\u003e \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2105640996205804508"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/2105640996205804508"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2020/02/types-of-desert.html","title":"मरुस्थल कितने प्रकार के होते हैं - types of desert"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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nadi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp\u003e    \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003eगंगा नदी      भारत के लोगो के       लिए नदी मात्र नहीं है बल्कि इसे माँ का दर्जा दिया गया है। कई ग्रंथो में       गंगा नदी को पवित्र नदी मन गया है लेकिन आज ये नदी प्रदूषित हो रहा है। आज       हमें गंगा को पहले की तरह प्रवित्र करना होगा। फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे       पानी को नदियों में न छोड़कर उसे फिर यूज़ करने लायक बनाना चाहिए।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e    \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003eगंगा नदी से जुड़े कई जानकारी आपको इस पोस्ट में मिलेगा। गंगा कहा से निकलती       है इसकी सहायक नदिया कौन कौन सी है। गंगा नदी का नाम गंगा कैसे पड़ा       आदि।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e  \u003c/p\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e    \u003ch2\u003e      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e गंगा नदी कहा से निकलती है\u0026nbsp; \u003c/span\u003e    \u003c/h2\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003eगंगा नदी           हिमालय          के गंगोत्री           हिमनद से निकलती है। ये उत्तराखंड में राज्य में स्थित है। हमालय से निकलकर           ऋषिकेश कानपूर अलाहबाद वाराणसी पटना कलकत्ता उसके बाद समुद्र में जाकर           मिल जाता है। गंगा नदी के किनारे कई           शहर बसे\u0026nbsp;हुए है। जो सांस्कृतक और धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध           है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e      \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003e\u003c/span\u003e      \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में बहने वाली नदी है। इसकी कुल लम्बाई 2,525         किलोमीटर है। यह नदी उत्तराखंड राज्य के पश्चिमी हिमालय में बहती है, और         उत्तर भारत के गंगा के मैदान से होकर बांग्लादेश में पहुंच जाती है। जहां         पर बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।       \u003c/p\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        गंगा हिंदुओं की सबसे पवित्र नदी है। यह उन लाखों भारतीयों के लिए एक जीवन         रेखा है जो इसके तट पे रहते हैं और अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इस पर निर्भर         हैं। इसे\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/10/hindu-dharm-in-hindi.html\" style\u003d\"text-align: left;\"\u003eहिंदू धर्म\u003c/a\u003e\u0026nbsp;में देवी गंगा के रूप में पूजा जाता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eगंगा नदी के किनारे कई प्राचीन         राजधानिया बसी थी जैसे पाटलिपुत्र,\u0026nbsp; कन्नौज, कारा, काशी, पटना,         हाजीपुर, मुंगेर, भागलपुर, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर, काम्पिल्य, और कोलकाता         आदि। गंगा का मुख्य तना देवप्रयाग शहर में शुरू होता है, भागीरथी और         अलकनंदा इसकी स्रोत धारा है। इन नदियों के संगम से गंगा नदी का का निर्माण         होता है।\u003c/p\u003e          \u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगंगा नदी प्रदूषण के कारण\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        गंगा नदी पर गंभीर प्रदूषण का खतरा है। इससे न केवल इंसानों को बल्कि         जानवरों को भी खतरा होता है। गंगा नदी मछलियों की लगभग 140 प्रजातियों और         उभयचरों की 90 प्रजातियों का घर है। नदी में स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं।         जिनमें लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी शामिल हैं जैसे घड़ियाल और दक्षिण एशियाई         नदी डॉल्फिन।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-C8zCO-Qj64w/XyAlgSDHD_I/AAAAAAAADWc/yPVTZgWqFe8xTj_J8P8Vtto6SarQ9HOHACLcBGAsYHQ/s600/ganga%2Brever.png\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"गंगा नदी कहा से निकलती है\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-C8zCO-Qj64w/XyAlgSDHD_I/AAAAAAAADWc/yPVTZgWqFe8xTj_J8P8Vtto6SarQ9HOHACLcBGAsYHQ/w320-h213/ganga%2Brever.png\" title\u003d\"गंगा नदी कहा से निकलती है\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        वाराणसी के पास नदी में मानव अपशिष्ट से बैक्टीरिया का स्तर भारत सरकार की         आधिकारिक सीमा से सौ गुना से भी अधिक होता है। गंगा को साफ करने के         लिए\u0026nbsp; गंगा एक्शन प्लान की पहल की गयी थी जो विफल रहा है। जिसका प्रमुख         कारण भ्रष्टाचार, सरकार में इच्छाशक्ति की कमी, खराब तकनीकी         विशेषज्ञता,\u0026nbsp;         पर्यावरण        नियोजन और मूल धार्मिक अधिकारियों के समर्थन की कमी है।       \u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e      \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपौराणिक धारना\u0026nbsp;\u003c/span\u003e    \u003c/h3\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cp style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003eसागर के 60 हजार पुत्रो को ऋषि दुर्वाशा ने कुछ कारण वस् श्राप देकर मार           दिया था। उन सभी के आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए\u0026nbsp;भागीरथी ने गंगा           नदी को धरती पर लेन के लिए भगवान ब्रम्हा की हजारो साल तपस्या किया तब           गंगा का धरती पर आगमन हुआ। और भागीरथी के 60 हजार पूर्वजो को मुक्ति मिली           थी।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e      \u003c/p\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003ch2\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगंगा नदी की लम्बाई कितनी है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e        \u003cp\u003e          \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-family: inherit;\"\u003eगंगा नदी हिमालय उत्तराखण्ड से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है               जिसकी कुल लम्बाई 2525 किमी है। जो हजारो किमी की भूमि को सिंचित               करता है। इस नदी में कई प्रकार की मछली की प्रजाति पायी जाती है। इस               नदी के पुराणों ग्रंथो में उल्लेख मिलता है। जो गंगा नदी की गरिमा का               बखान करती है। ये नदी उत्तर से पूर्व की ओर बहती है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;इसकी               समुद्र से उचाई 3892 मीटर है।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e        \u003ch2\u003e\u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eगंगा की सहायक नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e          \u003cspan face\u003d\"arial, helvetica, sans-serif\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-family: inherit;\"\u003eगंगा की सहायक नदियाँ - यमुना\u0026nbsp;काकशी रामगंगा ताप्ती कर्णाली गंदक               कोसी चम्बल बेतवा केन और दक्षिणी तोस है ये सभी नदिया गंगा की प्रमुख               सहायक नदिया है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cdiv\u003e          \u003cp\u003eगंगा हिमालय से दक्षिण और पूर्व की ओर बहती है, पहाड़ से निकलते ही एक घाटी का निर्माण करती है। यह उत्तर भारत में बहते हुए बंगाल की खाड़ी में खाड़ी में खो जाती है। गंगा की कई सहायक नदियाँ नेपाल, बांग्लादेश और चीन (\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-tibet.html\"\u003eतिब्बत\u003c/a\u003e) के आस-पास के क्षेत्रों से निकलती हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eगंगा नदी उत्तरी भारत से होकर गुजरती है और हिंदू धर्म का पालन करने वालों के लिए यह पवित्र नदी है। भारत में चार सौ मिलियन से अधिक लोग इसके क्षेत्र में रहते हैं जिसे गंगा बेसिन के रूप में जाना जाता है। एक नदी बेसिन एक ऐसा क्षेत्र है जो एक नदी द्वारा बहाया जाता है, जैसे कि गंगा, और उसकी कोई भी सहायक नदी। इसका मतलब है कि बेसिन क्षेत्र में सतही जल और वर्षा जल से नदियों में प्रवाहित होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e            गंगा नदी पर बनाये गए बांध पहला है। पश्चिम बंगाल में बनाये गए फरक्का             बांध जहा पर गंगा नदी के पानी को रोका जाता है और बिजली उत्त्पन करने             के साथ फसल की सिचाई की जाती है। ये बांध पश्चिम बंगाल के विकाश में             महत्वपूर्ण रहा है।           \u003c/p\u003e          \u003cp\u003e            टिहरी बांध यह उत्तराखंड में टिहरी स्थान पर बनाया गया है। ये गंगा की             सहायक नदी भागीरथी पर बनाया गया है। इसके अलावा भीमगोड़ा बांध हरिद्वार             में बनाया गया है।           \u003c/p\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7026784184018275877"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7026784184018275877"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/11/ganga-nadi.html","title":" गंगा नदी कहा से निकलती है - ganga nadi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-C8zCO-Qj64w/XyAlgSDHD_I/AAAAAAAADWc/yPVTZgWqFe8xTj_J8P8Vtto6SarQ9HOHACLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/ganga%2Brever.png","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5343848680863428798"},"published":{"$t":"2019-11-20T10:28:00.005+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-11T10:50:48.344+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"भारत का क्षेत्रफल कितना है - india position by area"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित है। यह 3,287,263 वर्ग किलोमीटर के कुल\n  क्षेत्रफल के साथ दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। भारत उत्तर से दक्षिण तक\n  3,214 किमी और पूर्व से पश्चिम तक 2,933 किमी की दूरी को कवर करता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसकी भूमि सीमा 15,200 किमी और समुद्र तट 7,516.6 किमी है। भारत हिंद महासागर से\n  घिरा है विशेष रूप से, पश्चिम में अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम में लक्षद्वीप सागर,\n  पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी भारत को श्रीलंका से उसके तत्काल दक्षिण-पूर्व\n  में अलग करती है, और मालदीव आठ डिग्री चैनल के पार भारत के लक्षद्वीप द्वीप समूह\n  के दक्षिण में लगभग 125 किलोमीटर दूर है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मुख्य भूमि से लगभग 1,200 किलोमीटर\n  दक्षिण-पूर्व में, म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया के साथ समुद्री सीमाएँ साझा\n  करते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कन्याकुमारी 8°4′41″N और 77°55′230″E पर भारतीय मुख्य भूमि का सबसे दक्षिणी छोर\n  है, जबकि भारत में सबसे दक्षिणी बिंदु ग्रेट निकोबार द्वीप पर इंदिरा पॉइंट है।\n  सबसे उत्तरी बिंदु जो भारतीय प्रशासन के अधीन है, इंदिरा कर्नल, सियाचिन ग्लेशियर\n  है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  भारत का प्रादेशिक जल समुद्र तट से 12 समुद्री मील की दूरी तक फैला हुआ है। भारत\n  में 2,305,143 किमी 2 का 18वां सबसे बड़ा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र है।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5343848680863428798"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5343848680863428798"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/11/india-position-by-area.html","title":"भारत का क्षेत्रफल कितना है - india position by area"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}]},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-6644270657103828020"},"published":{"$t":"2019-10-02T18:49:00.033+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-03T08:56:57.778+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"वायु प्रदूषण किसे कहते हैं - vayu pradushan kise kahate hain"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e\n  वायु गैसों का मिश्रण है। वायुमंडल में नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीजन 21\n  प्रतिशत, आर्गन 0.93 प्रतिशत, कार्बन डाइऑक्साइड 0.03 प्रतिशत और नियॉन, मीथेन,\n  हीलियम जैसी अन्य गैस कम मात्रा में उपस्थित होते है। नम वायुमंडल में लगभग 5\n  प्रतिशत जल वाष्प पाया जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायुमंडल पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 100 किलोमीटर आकाश तक फैला हुआ है। वायु पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। वायुमंडल में सभी गैस एक संतुलित मात्रा में उपस्थित हैं। जिसके कारण यहाँ जीवन पाया जाता हैं। कई जीव जंतु सास लेने के लिए ऑक्सीजन पर निर्भर करते है। जबकि पेड़ पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड निर्भर होते हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eवायु में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की अधिकता जीवन को नुकसान पंहुचा सकता हैं। जिसके कारण कई\n  गंभीर बीमारिया होती हैं। यह ओजोन परत को नष्ट करती हैं जिससे सूर्य से निकलने वाले हानिकारण किरणे पृथ्वी तक बहुच जाती हैं। और त्वचा से संबंधित बीमारियां उत्पन्न करती हैं।\u003c/p\u003e\n\u003ch2\u003e\n  \u003cspan\u003eवायु प्रदूषण किसे कहते हैं\u003c/span\u003e\n\u003c/h2\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु में कई प्रकार के हानिकारक गैस और धूल मिल जाते हैं। इसे वायु प्रदूषण कहा\n  जाता हैं। यदि दूषित हवा में बहुत दिनों तक रहा जाये तो जानलेवा बीमारिया होने का\n  खतरा रहता है। हवा को प्राण दायनी कहा गया है। यदि इसमें जहरीली गैस मिश्रित हो जाते\n  है तो यह प्राणघातक बन जाती हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण वायुमंडल में हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति से होता है।\n  यह सभी जिव-जंतु और समग्र पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।\n  वायु प्रदूषण औद्योगिक, परिवहन और\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/02/volcano-in-hindi.html\"\u003eज्वालामुखी\u0026nbsp;\u003c/a\u003eविस्फोट जैसे प्राकृति कारण से भी हो सकता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEilKLdrXUsRVoInlGKKtGeLg79O23jkerIgNluKnYRBIPVv_On1fyTDY6640jJkjhyZVlkSljHfv9DSxNRSv27xTgrnbZLRgnbjpHhgAmU1In1rZ9huDvCsvRLWSqM8vuL_fHNFD3wtNwimYZs93ZO9dxQ-MTbLK7cGCZvQ9tGuePbvew64SEQc84CZ7Iqp/s600/20230727_064809.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"वायु प्रदूषण किसे कहते हैं - vayu pradushan kise kahate hain\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"393\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"210\" src\u003d\"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEilKLdrXUsRVoInlGKKtGeLg79O23jkerIgNluKnYRBIPVv_On1fyTDY6640jJkjhyZVlkSljHfv9DSxNRSv27xTgrnbZLRgnbjpHhgAmU1In1rZ9huDvCsvRLWSqM8vuL_fHNFD3wtNwimYZs93ZO9dxQ-MTbLK7cGCZvQ9tGuePbvew64SEQc84CZ7Iqp/w320-h210/20230727_064809.webp\" title\u003d\"वायु प्रदूषण किसे कहते हैं - vayu pradushan kise kahate hain\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n\u003c/div\u003e\n\u003cp\u003e\n  मुख्य रूप से वायु प्रदूषकों में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और\n  कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल होते हैं। जो श्वसन और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन\n  सकते हैं। वायु प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है। अधिक आबादी वाले शहरों और औद्योगिक\n  क्षेत्रों में प्रदूषण के उच्च स्तर पाए जाते है जो गंभीर स्वास्थ्य संबंधी\n  चिंताओं को जन्म देती है।\n\u003c/p\u003e\n\n\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eवायु प्रदूषण के कारण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\n\u003cp\u003eवायु प्रदूषण के कारण निम्न लिखित हैं -\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cli\u003eकारखानों से निकलने वाला धुँवा।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eवाहनों से निकलने वाला धुआँ।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eकोयले तथा खनिज तेल के जलने से निकलने वाला धुआँ।\u003c/li\u003e\n  \u003cli\u003eज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाला धुआँ।\u003c/li\u003e\n\u003c/ul\u003e\n\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  सड़कों पर मोटर वाहनों की लंबी लाईने लगी होती है। वाहनों से निकलने वाले धुएं से\n  वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है इसके अलावा फैक्टरी से हानि कारक गैस निकलती हैं जो\n  वायुमण्डल को दूषित करती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण कई तरह से होते है। अधिकांश वायु प्रदूषण कारखानों, कारों, विमानों\n  से निकलने वाले गैसों से होता हैं। लकड़ी या सिगरेट के धुएं को भी वायु प्रदूषण\n  माना जाता है। ये सब मानव निर्मित प्रदुषण है। वायु प्रदूषण के कुछ प्रकार\n  प्राकृतिक भी हो सकते हैं जैसे कि ज्वालामुखी से निकलने वाले धुएं या राख से वायु\n  प्रदूषण होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  बड़े शहरों में वायु प्रदूषण सबसे आम है। जहां कई अलग-अलग स्रोतों से प्रदुषण\n  होता है। कभी-कभी पहाड़ या ऊंची इमारतें प्रदूषित वायु को फैलने से रोकती हैं।\n  जिसके कारण प्रदूषित हवा बादल के रूप में दिखाई देता है। इसे स्मॉग कहा जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  गरीब और विकासशील देशों के बड़े शहरों में अधिक वायु प्रदूषण होता है। WHO के\n  अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कुछ कराची, (पाकिस्तान) नई दिल्ली\n  (भारत) बीजिंग, (चीन) लीमा, (पेरु) और काहिरा (मिस्र) हैं। हालाँकि कई\n  विकसितदेशों में भी वायु प्रदूषण की समस्या है। लॉस एंजिल्स को स्मॉग सिटी के नाम\n  से भी जाना जाता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण कई प्रकार के घरेलु कारणो से भी होता हैं। मिट्टी के तेल, लकड़ी और\n  कोयले के जलने से हवा दूषित हो सकता है। ये धुएं सांस लेने में मुश्किल पैदा करते\n  हैं।\n\u003c/p\u003e\n\n\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eवायु प्रदूषण के प्रभाव\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से मनुष्य को कई प्रकार की समस्या हो सकती है।\n  इसका प्रभाव अल्पकालिक और दीर्घकालिक भी हो सकता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कुछ शोध के अनुशार वायु प्रदूषण श्वसन संबधी खतरा पैदा करता हैं। इसके अलावा हृदय\n  रोग, मधुमेह, मोटापा और प्रजनन तंत्रिका संबंधी बीमारिया भी उत्पन्न करता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  इसके अल्पकालिक प्रभाव में निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां आती हैं।\n  प्रदूषित वायु के सम्पर्क में आने से नाक, गले, आंख, या त्वचा में जलन जैसी\n  समस्या भी हो सकती है। वायु प्रदूषण से सिरदर्द, चक्कर आने जैसी समस्या भी हो\n  सकती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभाव वर्षों तक या पूरे जीवनकाल तक रह सकते हैं। वे\n  किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण भी बन सकता हैं। वायु प्रदूषण से लंबे समय तक\n  स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव में हृदय रोग, फेफड़े का कैंसर और श्वसन संबंधी\n  बीमारियां शामिल हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण भी लोगों की नसों, मस्तिष्क, गुर्दे, यकृत और अन्य अंगों को\n  दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है की जो जन्म दोष का\n  कारण बनता है। वह भी वायु प्रदूषण के कारण होता है। वायु प्रदूषण के कारण दुनिया\n  भर में हर साल लगभग 2.5 मिलियन लोग मारे जाते हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan\u003e\u003cb\u003eग्लोबल वार्मिंग क्या है\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2019/09/global-warming-in-hindi.html\"\u003eग्लोबल वार्मिंग\u003c/a\u003e\u0026nbsp;एक पर्यावरणीय घटना है। जो वायु प्रदूषण के कारण होती है। यह दुनिया भर के\n  जलवायु और तापमान को प्रभावित करता है। वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा\n  में वृद्धि के कारण तापमान में वृद्धि\u0026nbsp;होती है।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है जिसका ग्लोबल वार्मिंग पर सबसे अधिक\n  प्रभाव पड़ता है। जीवाश्म ईंधन को जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जित होता\n  है। इसके अलावा कारों और विमानों, घरों और कारखानों से भी कार्बन डाइऑक्साइड का\n  उत्सर्जन होता हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  अन्य ग्रीनहाउस गैसों में मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और फ्लोराइड युक्त गैस शामिल\n  हैं। मीथेन कोयला संयंत्रों और कृषि प्रक्रियाओं से उत्सर्जित होता है। नाइट्रस\n  ऑक्साइड कारखानों और जीवाश्म ईंधन के जलने से उत्सर्जन होता है।\n\u003c/p\u003e\n\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eवायु प्रदूषण के उपाय\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\n\u003cp\u003e\n  वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जिसका मानव स्वास्थ्य, वन्य जीवन पर\n  दूरगामी प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण को कम करने और इसके हानिकारक प्रभावों को\n  कम करने के कई तरीके हैं।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  1. वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कारों, सार्वजनिक\n  परिवहन या साइकिल का उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  2. बिजली संयंत्रों से उत्सर्जन को कम करने के लिए सौर, पवन, जल, या परमाणु ऊर्जा\n  जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख करना चाहिए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  3. प्रदूषकों को अवशोषित करने और हानिकारक गैसों को कम करने के लिए शहरी\n  क्षेत्रों में पेड़ों और पौधों की संख्या को बढ़ाना चाहिए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  4. सरकार को वाहनों, उद्योगों और बिजली संयंत्रों से निकलने वाले हानिकारक गैसों\n  को सीमित करने के लिए सख्त नियम बनाना चाहिए।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  5. जनता को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करने की\n  आवश्यकता हैं ताकि वह इसके बारे में जान सके और वायु प्रदुषण को कम करने में मदद\n  कर सके।\n\u003c/p\u003e\n\u003cp\u003e\n  6. सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोगकिया जा सकता हैं,\n  जिसके कारण वायु प्रदुषण को कम किया जा सकता हैं।\n\u003c/p\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6644270657103828020"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/6644270657103828020"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/10/vayu-pradushan-kise-kahate-hain.html","title":"वायु प्रदूषण किसे कहते हैं - vayu pradushan kise kahate hain"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEilKLdrXUsRVoInlGKKtGeLg79O23jkerIgNluKnYRBIPVv_On1fyTDY6640jJkjhyZVlkSljHfv9DSxNRSv27xTgrnbZLRgnbjpHhgAmU1In1rZ9huDvCsvRLWSqM8vuL_fHNFD3wtNwimYZs93ZO9dxQ-MTbLK7cGCZvQ9tGuePbvew64SEQc84CZ7Iqp/s72-w320-c-h210/20230727_064809.webp","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-7307605110631781463"},"published":{"$t":"2019-02-21T17:25:00.002+05:30"},"updated":{"$t":"2023-06-05T08:29:52.399+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"दिन और रात क्यों होता है - din aur raat kyon hota hai"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"display: none;\"\u003e  \u003cimg alt\u003d\"\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6oNBzocvpzk/X3gKKmHaC3I/AAAAAAAAELk/096trzY_s6YZnlv8TIPBLf2CJGOG4pZOACPcBGAYYCw/s320/20201003_102851.webp\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e    \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-family: \u0026quot;arial\u0026quot;;\"\u003eजब से मनुष्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003eको सोचने समझने की शक्ति मिला है। तब से अकास\u0026nbsp; के बारे में जानने की     इच्छा रही है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते बढ़ाते\u0026nbsp;कई वैज्ञानिक ने ब्रम्हांड के अनेक     राज खोले है।\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"text-align: justify;\"\u003eदिन रात का होना एक प्राकृतिक घटना\u0026nbsp;है जो सूर्य और पृथ्वी केघूर्णन गति के कारण होता\u0026nbsp;हैये सवाल अक्सर\u0026nbsp;भूगोल के विद्याथी के मन में आता ही है। तो चलिए जानते है दिन और रात क्यों होता है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e  \u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e      दिन और रात क्यों होता है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eजब हमे मालुम नहीं था कि पृथ्वी सूर्य का चककर लगता\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eहै। तो हम यही मानते थे कि सूर्य पृथ्वी का चक्कर लगाता होगा है। लेकिन यह बात सही नहीं है। वैज्ञानिक\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eने पता लगाया कि पृथ्वी\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eसूर्य की परिक्रमा लगाता है। उसी कारण दिन और रात\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u0026nbsp;होता है। साथ ही 24 घंटे में पृथ्वी\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eअपना एक चकरा लगता है,\u0026nbsp;जिस तरफ सूर्य की रौशनी पृथ्वी पर पड़ता है वह स्थान पर\u0026nbsp;दिन       होता है और\u0026nbsp;उसके पीछे की ओर रात होता है। इसी कारण कहीं दिन होता है तो कहीं रात       होती है।\u003c/span\u003e  \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eदिन के समय आप सूर्य को देख सकते हैं, और इसकी रोशनी और गर्मी आप तक पहुंची है। रात का समय तब होता है जब सूर्य पृथ्वी के दूसरी ओर होता है। और इसका प्रकाश और ऊष्मा आपको नहीं मिलती है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदिन और रात पृथ्वी की अपनी धुरी के एक काल्पनिक रेखा पर घूमने से होती है और ग्रह के विभिन्न भाग पर सूर्य के प्रकाश पड़ने पर दिन होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e  \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e  \u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e         \u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e      \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसूर्य ग्रहण क्यों होता है         \u003c/span\u003e      \u003c/h3\u003e    \u003c/div\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eजब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो वह कभी-कभी सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाती है। जब ऐसा होता है, तो चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। यह सूर्य ग्रहण का कारण बनता है। सूर्य ग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी पर एक छाया डालता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eसौर ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं।\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपहला पूर्ण सूर्य ग्रहण है। पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल पृथ्वी पर एक छोटे से क्षेत्र से दिखाई देता है। पूर्ण ग्रहण देखने वाले लोग पृथ्वी से टकराने वाले चंद्रमा की छाया के केंद्र में होते हैं। आसमान बहुत काला हो जाता है, मानो रात हो गई हो। पूर्ण ग्रहण के लिए, सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी को एक सीधी रेखा में होना होता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eदूसरे प्रकार का सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण है। यह तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी बिल्कुल पंक्तिबद्ध नहीं होते हैं। सूर्य अपनी सतह के केवल एक छोटे हिस्से पर एक अंधेरा छाया है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eतीसरा प्रकार का सूर्य ग्रहण कुंडलाकार सूर्य ग्रहण है। कुंडलाकार ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है। क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर है, इसलिए यह छोटा लगता है। यह सूर्य के पूरे दृश्य को अवरुद्ध नहीं करता है। सूरज के सामने चंद्रमा एक अंधेरे डिस्क की तरह दिखता है। इसके कारण चंद्रमा के चारों ओर एक वलय जैसा दिखता है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://2.bp.blogspot.com/-P2mFTgU9w2k/XG6RL3PKRuI/AAAAAAAAAk4/9bxFzgMjPdIF3lgOJ6m3GKYEqAFwb1pBwCLcBGAs/s1600/untitled-design-163.jpg\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"पृथ्वी पर दिन और रात किस गति के कारण होते हैं पृथ्वी पर दिन-रात किस प्रकार होते हैं समझाइए दिन रात होने के कारणों पर प्रकाश डालिए पृथ्वी पर दिन और रात होने का क्या कारण है पृथ्वी पर दिन और रात का कारण बताओ पृथ्वी की किस गति के कारण दिन-रात होते हैं दिन और रात क्यों होता है - din aur raat kyon hota hai\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"424\" data-original-width\u003d\"728\" height\u003d\"186\" src\u003d\"https://2.bp.blogspot.com/-P2mFTgU9w2k/XG6RL3PKRuI/AAAAAAAAAk4/9bxFzgMjPdIF3lgOJ6m3GKYEqAFwb1pBwCLcBGAs/w320-h186/untitled-design-163.jpg\" title\u003d\"पृथ्वी पर दिन और रात किस गति के कारण होते हैं पृथ्वी पर दिन-रात किस प्रकार होते हैं समझाइए दिन रात होने के कारणों पर प्रकाश डालिए पृथ्वी पर दिन और रात होने का क्या कारण है पृथ्वी पर दिन और रात का कारण बताओ पृथ्वी की किस गति के कारण दिन-रात होते हैं दिन और रात क्यों होता है - din aur raat kyon hota hai\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003eसूर्य ग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी पर दो छाया बनाता है। पहले छाया को अम्ब्रा कहा जाता है। यह छाया पृथ्वी पर पहुँचते ही छोटा हो जाता है। यह चंद्रमा की छाया का गहरा केंद्र है। दूसरी छाया को पेनम्ब्रा कहा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचते ही पेनम्ब्रा बड़ा हो जाता है। प्रायद्वीप में खड़े लोगों को आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। सेंटर में खड़े लोगों को पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eसौर ग्रहण हर 18 महीने में एक बार होता है। चंद्र ग्रहणों के विपरीत, सूर्य ग्रहण केवल कुछ मिनटों तक रहता है।\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eचंद्र ग्रहण क्या है\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003eचंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा में घूमता है, और साथ ही, पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। कभी-कभी पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच चलती जाती है। जब ऐसा होता है। तो पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध करती है। चंद्रमा की सतह पर प्रकाश पड़ने के बजाय, पृथ्वी की छाया उस पर पड़ती है। जिसके कारण चंद्र ग्रहण होता है। चंद्र ग्रहण तभी हो सकता है जब चंद्रमा पूर्ण हो।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eरात में पृथ्वी से चंद्रग्रहण देखा जा सकता है। चंद्र ग्रहण दो प्रकार के होते हैं: पूर्ण चंद्र ग्रहण और आंशिक चंद्र ग्रहण।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eपूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के बिल्कुल सीध पर होते हैं। हालांकि चंद्रमा पृथ्वी की छाया में है, लेकिन कुछ सूरज की रोशनी चाँद तक पहुँचती है। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है, जिसके कारण पृथ्वी का वायुमंडल अधिकांश नीली रोशनी को छान लेता है। इससे चंद्रमा पृथ्वी पर लोगों को लाल दिखाई देता है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eआंशिक चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। आंशिक ग्रहण में, पृथ्वी की छाया पृथ्वी के सामने चंद्रमा के किनारे पर बहुत अंधेरा दिखाई देती है। आंशिक चंद्रग्रहण के दौरान लोग पृथ्वी से क्या देखते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा कैसे पंक्तिबद्ध हैं।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eचंद्रग्रहण आमतौर पर कुछ घंटों तक रहता है। हर साल कम से कम दो आंशिक चंद्र ग्रहण होते हैं, लेकिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दुर्लभ हैं। और चंद्रग्रहण को देखना सुरक्षित होता है।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e    \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e              सूर्य और पृथ्वी की दुरी कितनी है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003eसूर्य सौर मंडल के केंद्र में स्थित है। सौर मंडल के सभी पिंड - ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, आदि - विभिन्न दूरी पर इसके चारों ओर घूमते हैं। बुध ग्रह, जो सूर्य के सबसे करीबी ग्रह है, अपनी अण्डाकार कक्षा में 47 मिलियन किलोमीटर के करीब पहुंच जाता है।\u0026nbsp; जबकि ऊर्ट क्लाउड में ऑब्जेक्ट्स, सौर मंडल के बर्फीले शेल, 9.3 ट्रिलियन मील की दूरी पर स्थित हैं। लेकिन पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी क्या है?\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003eपृथ्वी ऊर्ट क्लाउड से करीब 100,000 गुना नजदीक है, औसतन 92,955,807 मील।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"color: black; font-size: small;\"\u003eसूर्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003eके\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eप्रकाश\u003c/span\u003e\u0026nbsp;को धरती पहुंचने के लिए करीबन 8मिनट\u0026nbsp;और\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e16.6 सेकंड का समय लगता है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003eसूर्य से पृथ्वी की औसत दुरी करीबन 14,96,00,000 किमी\u0026nbsp;यानि 9,29,60,000 मील है तथा\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #222222;\"\u003eजो पृथ्वी से लगभग 109\u0026nbsp;गुना अधिक है।\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"color: black; font-size: small;\"\u003eसूर्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003eपृथ्वी से इतना\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003eदूर\u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003eहोने बाउजूद\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"color: black; font-size: small;\"\u003eसूर्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003eका प्रकाश\u0026nbsp;मात्र 8 मिनिट में\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003eपहुंच जाता है।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: medium;\"\u003eपृथ्वी से सूर्य की दूरी को एक खगोलीय इकाई या AU कहा जाता है, जिसका उपयोग पूरे सौर मंडल में दूरियों को मापने के लिए किया जाता है।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003eउदाहरण के लिए, बृहस्पति सूर्य से 5.2 AU दूर है। नेपच्यून सूर्य से 30.07 AU दुरी पर है। नासा के अनुसार, निकटतम स्टार, प्रोक्सिमा सेंटौरी की दूरी 268,770 AU है। हालांकि, लंबी दूरी को मापने के लिए, खगोलविद प्रकाश-वर्ष का उपयोग करते हैं। तो प्रॉक्सिमा सेंटॉरी लगभग 4.25 प्रकाश वर्ष दूर है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e; font-size: large;\"\u003eपृथ्वी की कक्षा का आकार\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003eपृथ्वी प्रत्येक 365.25 दिन या एक वर्ष में सूर्य के चारों ओर एक पूर्ण\u0026nbsp; चककर लगाती है। हालांकि, पृथ्वी की कक्षा एक पूर्ण गोलाकार नहीं है। इसका आकार अंडाकार, या दीर्घवृत्त की तरह होता है। एक वर्ष के दौरान, पृथ्वी कभी-कभी सूर्य के करीब जाती है और कभी-कभी सूर्य से दूर जाती है। पृथ्वी का सूर्य के निकटतम दुरी, जिसे पेरिहेलियन कहा जाता है, जनवरी की शुरुआत में आता है और यह लगभग 1 मिलियन एयू\u0026nbsp; या 91 मिलियन मील (146 मिलियन किमी) है। सूर्य की पृथ्वी से सबसे अधिकतम दूरी को उदासीनता कहा जाता है। यह जुलाई की शुरुआत में आता है और इसकी दुरी लगभग 94.5 मिलियन मील (152 मिलियन किमी) होती है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003e\u003cb\u003eसूर्य की दूरी का पता किसने लगाया था\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan style\u003d\"color: #2e2e2e;\"\u003eऐतिहासिक रूप से, सूर्य की दूरी को मापने वाला पहला व्यक्ति वर्ष 250 ई.पू. के आसपास ग्रीक खगोलशास्त्री अरिस्टार्चस था। उन्होंने सूर्य और चंद्रमा के आकार और दूरी को मापने के लिए चंद्रमा के चरणों का उपयोग किया। एक आधे चंद्रमा के दौरान, तीन खगोलीय पिंडों को समकोण बनाते हुए। पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोण को मापकर, उन्होंने निर्धारित किया कि सूर्य, चंद्रमा से 19 गुना अधिक है, और इस प्रकार 19 गुना बड़ा है। वास्तव में, सूरज चंद्रमा से लगभग 400 गुना बड़ा है।\u003c/span\u003e\u003c/p\u003e      \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी का क्षेत्रफल कितना है\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          पृथ्वी के सतह का क्षेत्रफल काफी विशाल है वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी           के सतह का क्षेत्रफल\u0026nbsp;\u003cspan color\u003d\"rgba(0 , 0 , 0 , 0.87)\" style\u003d\"background-color: white; font-size: 16px;\"\u003e\u003cb\u003e510,100,000\u0026nbsp;km²\u003c/b\u003e \u003c/span\u003e\u003cspan style\u003d\"background-color: white; font-size: 16px;\"\u003eहै।\u0026nbsp;\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--link ads--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eपृथ्वी की आयु कितनी है।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #2e2e2e;\"\u003e\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e          \u003c/h3\u003e          \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"background-color: white; color: #2e2e2e;\"\u003eउत्पत्ति हुई है उसका अंत अवश्य होगा अतः पृथ्वी का भी एक आयु आंकी               गई है। यह कई लखो साल से ब्रम्हांड पर\u0026nbsp;\u003cspan style\u003d\"color: black;\"\u003eसूर्य का चक्कर लगा\u003c/span\u003e\u0026nbsp;रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सभी ग्रह और तारे की एक               आयु होती है तथा उसके बाद वह समाप्त हो जाता है। पृथ्वी की आयु लगभग               4.5 अरब वर्ष है।\u003c/span\u003e          \u003c/p\u003e        \u003c/div\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cspan style\u003d\"background-color: white; color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003e            \u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"link\" data-ad-slot\u003d\"8669344271\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e \u003c/span\u003e\u003c/span\u003e      \u003c/div\u003e      \u003cdiv\u003e        \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e            \u003cspan style\u003d\"background-color: white;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\" style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह कौन सा है\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e          \u003c/h3\u003e        \u003c/div\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          \u003cspan style\u003d\"background-color: white; color: #2e2e2e; font-size: 16px;\"\u003e\u003cspan face\u003d\"\u0026quot;verdana\u0026quot; , sans-serif\"\u003eचांद पृथ्वी का मात्र एक प्राकृतिक ग्रह है यह पृथ्वी से अलग हो गया               था पृथ्वी का चक्कर लगाने लगा यह पृथ्वी की ग्रैविटी\u0026nbsp;को बहुत               प्रभावित करता है।चाँद\u0026nbsp;के\u0026nbsp;कारण ही समुद्र में ज्वार भटा               आता है।\u003c/span\u003e\u003c/span\u003e        \u003c/p\u003e        \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e          पृथ्वी पर कई बड़े           महासागर है इससे           अनुमान लगाया जा सकता है कि जल की पृथ्वी पर काफी अधिक मात्र में है।           लेकिन सभी मीठे जल नहीं है अर्थात्\u0026nbsp; पीने और सिंचाई योग्य नहीं है।           पृथ्वी पर\u003cb\u003e 71%\u003c/b\u003e भाग जल से घिरा हुआ है और 29% भाग स्थल से धिरा है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e      \u003c/div\u003e    \u003c/div\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cdiv dir\u003d\"ltr\" style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e\u003c/div\u003e\u003c/div\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7307605110631781463"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/7307605110631781463"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2019/02/din-aur-raat-kyon-hota-hai.html","title":"दिन और रात क्यों होता है - din aur raat kyon hota hai"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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parvat"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cp\u003e  \u003cb\u003eहिमालय \u003c/b\u003eपर्वतमाला   भारतीय उपमहाद्वीप  को मध्य   एशिया और   तिब्बत से   अलग करता है। हिमालय पर्वत   पाकिस्तान,अफगानिस्तान , भारत,   नेपाल,   भूटान,   चीन और   म्यांमार आदि 7 देशों   की सीमाओं में फैला हुआ हैं। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  सदियों से हिमालय की गुफाओं में ऋषि-मुनियों का वास रहा है और वे साधु इन हिमायल   की गोदी में तपस्या करते थे।   हिन्दू धर्म  के अनुसार हिमालय के   कैलाश पर्वत पर   भगवान शिव विराजमान है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हिमालय पर्वत से कई जीवन दायनी नदी निकलती है जो भारत में जल की पूर्ती का मुख्य   साधन है इसके अलावा भारत में हिमालय से निकने वाली नदियों को माता की   तरह\u0026nbsp;पूजा जाता है। जिसमे मुख्य\u0026nbsp;गंगा नदी,   यमुना नदी  और   ब्रह्मपुत्र नदी  है। \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहिमालय पर्वत का निर्माण\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  यह सवाल आता है की इतना बड़ा पर्वत सृंखला आखिर बना कैसे होगा। वैज्ञानिको ने कुछ   तथ्य सामने रखा है   पृथ्वी के अंदर   प्लेटों की टक्कर होने से दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला हिमालय निर्माण   हुआ। इतना ही नहीं इस टक्कर की वजह से संसार भर के 7000 मीटर से अधिक ऊँचे   पर्वतों की श्रृंखला का निर्माण हुआ है।\u003c/p\u003e\u003cp\u003e225 मिलियन वर्ष पहले भारत ऑस्ट्रेलियाई तट पर स्थित एक बड़ा द्वीप था और टेथिस महासागर द्वारा एशिया से अलग किया गया था। सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया ने 200 मिलियन साल पहले टूटना शुरू हुआ और भारत एशिया की ओर बढ़ने लगा। 80 मिलियन वर्ष पहले भारत एशियाई महाद्वीप से 6,400 किमी दक्षिण में था, लेकिन प्रति वर्ष 9 से 16 सेंटीमीटर की दर से इसकी ओर बढ़ रहा था। इस समय टेथिस महासागर का तल एशिया के नीचे उत्तर की ओर झुक रहा होगा।\u003c/p\u003e\u003cp\u003eभारतीय महाद्वीप के एशिया पर टकराने से टेक्नॉनिक प्लेट ऊपर की ओर उठने लगे। जैसे की आप एनीमेशन में देख सकते है। इस तरह से विश्व का सबसे बड़ा पर्वत का निर्माण हुआ।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e हिमालय पर्वत की ऊंचाई\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हिमालय पर्वत की\u0026nbsp;ऊंचाई \u003cb\u003e8,848 मी\u0026nbsp;\u003c/b\u003eहै। संसार की अधिकांश ऊँची   पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 ऊंचे शिखरों में हिमालय की   अनेक चोटियाँ आती हैं। विश्व का सबसे ऊंचा शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक   शिखर है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ctable align\u003d\"center\" cellpadding\u003d\"0\" cellspacing\u003d\"0\" class\u003d\"tr-caption-container\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003ctbody\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6zcwwnzXUWM/YPZRKUdgnsI/AAAAAAAAFNw/r5usn2hWAr4mWDDZ05N1GRFuNhH9juokgCLcBGAsYHQ/s640/atul-bhat-OSpwSI9r5Xc-unsplash.webp\" style\u003d\"margin-left: auto; margin-right: auto;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"हिमालय का निर्माण कैसे हुआ - Himalaya parvat\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"397\" data-original-width\u003d\"640\" height\u003d\"198\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-6zcwwnzXUWM/YPZRKUdgnsI/AAAAAAAAFNw/r5usn2hWAr4mWDDZ05N1GRFuNhH9juokgCLcBGAsYHQ/w320-h198/atul-bhat-OSpwSI9r5Xc-unsplash.webp\" title\u003d\"हिमालय का निर्माण कैसे हुआ - Himalaya parvat\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003ctr\u003e\u003ctd class\u003d\"tr-caption\" style\u003d\"text-align: center;\"\u003eHimalaya parvat\u003cbr /\u003e\u003c/td\u003e\u003c/tr\u003e\u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के   कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा, अन्नपूर्णा, शिवशंकर,   रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, गणेय, लांगतंग, मानसलू, धौलागिरी और कंचनजंघा   आदि है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हिमालय की सबसे ऊंची चोटियाँ मकालू, कंचनजंघा, एवरेस्ट, अन्नपूर्ण और नामचा बरवा   इत्यादि है। यह भारत के अलावा\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/blog-post_26.html\"\u003eनेपाल\u003c/a\u003e\u0026nbsp;चीन\u0026nbsp; भूटान आदि देशो में फैला हुआ है।   एवरेस्ट शिखर विश्व की सबसे ऊंची चोटी है जो नेपाल में है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eभूगोल\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हिमालय भारत के पूर्वोत्तर भाग में फैला है। वे लगभग 1,500 मील (2,400 किमी) को   कवर करते हैं और भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, भूटान और नेपाल के देशों से   होकर गुजरते हैं। हिमालय की श्रृंखला तीन समानांतर श्रेणियों से बनी होती है   जिन्हें अक्सर ग्रेटर हिमालय, लेजर हिमालय और आउटर हिमालय के रूप में जाना जाता   है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहिमालय से निकलने वाली नदियाँ\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हिमालय पर्वत में 15 हजार से ज्यादा   हिमनद हैं जो   12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व   का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सिंधु, गंगा,   ब्रह्मपुत्र और यांगतेज है तथा सहयक नदी नर्मदा, कावेरी और महानदी है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहिमालय का महत्व\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  हिमालय की विशाल पर्वतमाला साइबेरियाई शीतल जलवायु को रोक कर भारतीय उपमहाद्वीप   को जाड़ों में आधिक ठण्ढा होने से बचाती हैं। और वर्षा में\u0026nbsp;मानसून\u0026nbsp;की हवाओ को रोकर वर्षा कराती है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हिमालय का सबसे बड़ा महत्व दक्षिणी एशिया के क्षेत्रों के मौसम में परिवर्तन का   मुख्य कारण है। हिमालय पर्वत से भारत को कई प्रकार से लाभ होता हैं। सुरक्षा की   बात करे तो हिमालय उत्तर में\u0026nbsp; स्थित देशो के आक्रमण से हमें सुरक्षा प्रदान   करता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  इसके अलावा यहाँ से निकलने वाली नदी हमें जीवन देती है क्योकि जल ही जीवन है।   हिमालय के विशाल आकर के कारण इसके निकट वाले क्षेत्र पर वर्षा अधिक होता है जिससे   किसानो को फायदा होता है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eहिमालय की गोद में बसा राज्य\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp\u003e  भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर, सियाचिन,   उत्तराखंड,   हिमाचल, सिक्किम,   असम,   अरुणाचल आदि हिमालय के गोद में बसा हुआ है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  हिमालय क्षेत्र को चार प्रमुख प्रादेशिक भागों में बाँटा गया है। यह विभाजन   घाटियों के आधार पर किया गया है। हिमालय का प्रादेशिक विभाजन निम्नलिखित   है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--mobile article--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1422942514\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: 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\u003ctbody\u003e    \u003ctr\u003e      \u003cth\u003eहिमालय का प्रादेशिक विभाजन\u003c/th\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकश्मीर हिमालय\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eकमाऊ हिमालय\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eनेपाल हिमालय\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e    \u003ctr\u003e      \u003ctd\u003eअसम हिमालय\u0026nbsp;\u003c/td\u003e    \u003c/tr\u003e  \u003c/tbody\u003e\u003c/table\u003e\u003cp\u003e  \u003cbr /\u003e  1 कश्मीर हिमालय - जिन्हें   पंजाब हिमालय या पश्चिमी हिमालय भी कहा जाता है, हिमालय पर्वतमाला के चार विभाजनों में   से एक है। सिंधु नदी से सतलुज नदी के बीच फैली लगभग 560\u0026nbsp; किलोमीटर लम्बी   हिमालय श्रंखला को कश्मीर हिमालय कहा जाता है। इसके अंतर्गत कश्मीर, जम्मू तथा   हिमाचल में स्थित इस पर्वत श्रंखला आते है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  2 कमाऊ हिमालय - सतलुज नदी से काली नदी के बीच फैली लगभग 320 किलोमीटर लम्बी   हिमालय श्रंखला को\u0026nbsp; कुमाऊँ हिमालय कहा जाता है। इसके अंतर्गत उत्तराखण्ड तथा   हिमाचल प्रदेश में स्थित इस पर्वतमाला आता है। इसके पश्चिम में कश्मीर हिमालय   स्थित हैं। कुमाऊँ हिमालय चारोंपर्वतमाला में सबसे छोटा है। यह अपनी झीलों तथा   प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  3 नेपाल हिमालय - काली नदी से तीस्ता नदी के बीच फैली लगभग 800 किलोमीटर लम्बी   हिमालय श्रंखला को ही नेपाल हिमालय कहा जाता है। नेपाल,\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/history-of-tibet.html\"\u003eतिब्बत\u003c/a\u003e\u0026nbsp;तथा सिक्किम में   स्थित इस पर्वत श्रंखला तक इसका विस्तार फैला हुआ है। नेपाल हिमालय चारों   विभाजनों में सबसे बड़ा है। पश्चिम में कुमाऊँ हिमालय स्थित हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003cp\u003e  4 असम हिमालय - भूटान की पूर्वी सीमा से लेकर पूर्व में त्संगपो नदी के बड़े मोड़   तक असम हिमालय का\u0026nbsp; विस्तृत है। \"असम पर्वतमाला \" नाम होने के बावजूद इसके   पर्वत दक्षिणपूर्वी तिब्बत, उत्तरी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में फैले हुए   हैं। \u003c/p\u003e \u003cp\u003e\u003cb\u003eहिमालय पर्वत से जुड़े तथ्य\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eहिमालय पर्वत का क्षेत्रफल 595,000 km² है\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमाउंट एवरेस्ट की उचाई 8848 मीटर है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमाउंट एवेरेस्ट का नेपाली सागरमाथा है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eएडमंड हिलेरी माउंट एवरेस्ट में सबसे जाने वाले व्यक्ति है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eमाउंट एवरेस्ट को संस्कृत में देवगिरि कहते है।\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    हिमालय पर्वत भारत और चीन के बीच फैला है हिमालय\u0026nbsp; अधिकतर भाग नेपाल\u0026nbsp;     क्षेत्र में आता है।\u0026nbsp;   \u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपारिस्थितिकी\u003c/span\u003e  \u003c/h3\u003e  \u003cp\u003e    एवरेस्ट और 2k जैसे पहाड़ों को डराने वाले क्षेत्र की हमारी धारणाओं पर हावी     होते हैं, हिमालय     जैव विविधता    से समृद्ध है। पर्वतों के आधार पर जलवायु उष्णकटिबंधीय से लेकर बारहमासी बर्फ     और उच्चतम ऊंचाई पर बर्फ तक है। ये जटिल और विविध     पर्यावरण-क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं: एक     पारिस्थितिक खतरा अंततः कई लोगों के लिए खतरा है। यहां हिमालयी पारिस्थितिकी के कुछ उदाहरण     दिए गए हैं:   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eमोंटेन ग्रासलैंड्स और श्रूबलैंड्स:\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    पश्चिमी अल्पाइन झाड़ियों और घास के मैदानों को 9,850 और 16,400 फीट के बीच     पाया जा सकता है। इन क्षेत्रों में ठंड सर्दियों और हल्के ग्रीष्मकाल होते हैं     जो पौधे के विकास की अनुमति देते हैं। रोडोडेंड्रोन पौधे निचले झाड़ियों को कवर     करते हैं, जबकि अल्पाइन घास के मैदान, सीधे ऊपर, गर्म महीनों में वनस्पतियों की     एक श्रृंखला की मेजबानी करते हैं। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जानवरों में     हिम तेंदुआ, हिमालयन तहर, कस्तूरी मृग और पिकास शामिल हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eशीतोष्ण शंकुधारी वन:\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    उत्तर-पूर्व में समशीतोष्ण उप-अल्पाइन कोनिफर वन 8,200 से 13,800 फीट की ऊंचाई     पर पाए जाते हैं। आंतरिक घाटी क्षेत्र में स्थित, ये वन आसपास की पर्वत     श्रृंखलाओं द्वारा कठोर मानसून की स्थिति से सुरक्षित हैं। प्रमुख पेड़ प्रकार     देवदार, हेमलॉक, स्प्रूस और देवदार हैं। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जानवरों     में लाल पांडा, टेकिंस और कस्तूरी मृग शामिल हैं।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eसमशीतोष्ण और मिश्रित वन:\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    6,600 से 9,800 फीट की मध्य ऊँचाई में पाए जाने वाले पूर्वी क्षेत्र में     विस्तृत और शंकुधारी वन हैं। ये वन लगभग 80 इंच वार्षिक वर्षा प्राप्त करते     हैं, ज्यादातर मानसून के मौसम के दौरान। स्वदेशी ओक और मेपल के अलावा, ऑर्किड,     लाइकेन और फर्न जैसे पौधे भी क्षेत्र में विकसित होते हैं। पक्षियों की 500 से     अधिक प्रजातियों सहित वन्यजीवों की एक विशाल रेंज कूलर मौसम के दौरान यहां पाई     जाती है, इससे पहले कि वे गर्म ग्रीष्मकाल से बचने के लिए उच्च ऊंचाई पर चले     जाते हैं। यह गोल्डन लंगूर बंदरों के लिए प्राथमिक घर भी है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003eउष्णकटिबंधीय वन:\u003c/p\u003e  \u003cp\u003e    1,650 से 3,300 फीट की दूरी पर स्थित है। बाहरी हिमालय श्रृंखला की एक संकीर्ण     पट्टी के साथ हिमालयी उपोष्णकटिबंधीय विस्तृत जंगल हैं। यहां विभिन्न क्षेत्रों     की स्थलाकृति, मिट्टी के प्रकार, और वर्षा के स्तर के लिए पौधे के जीवन की एक     विस्तृत श्रृंखला है। वन प्रकारों में उपोष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार, उत्तरी     शुष्क मिश्रित पर्णपाती वन, नम मिश्रित पर्णपाती वन, उपोष्णकटिबंधीय चौड़े     जंगल, उत्तरी उष्णकटिबंधीय अर्ध सदाबहार वन और उत्तरी उष्णकटिबंधीय आर्द्र     सदाबहार वन शामिल हैं। वन्यजीवों में बाघ और एशियाई हाथी सहित कई खतरे वाली     प्रजातियाँ शामिल हैं। इस क्षेत्र में पक्षियों की 340 से अधिक विभिन्न     प्रजातियाँ पाई जा सकती हैं।   \u003c/p\u003e\u003c/div\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8458782336141776800"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/8458782336141776800"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2018/10/himalaya-parvat.html","title":"हिमालय का निर्माण कैसे हुआ - Himalaya parvat"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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तंत्र - Water ecosystem in Hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\" trbidi\u003d\"on\"\u003e  \u003cdiv style\u003d\"display: none; text-align: center;\"\u003e    \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-5IbVCWttPUE/XmnV8y75ByI/AAAAAAAACJI/zfRJAvlAGessBdWcrMyOzwN9mMezvZeBwCLcBGAsYHQ/s1600/Ecological%2Bsystem%2Bof%2Bwater.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जल का पारिस्थितिकी तंत्र  Water ecosystem in Hindi, jal paristhitik tantra, तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"427\" data-original-width\u003d\"640\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-5IbVCWttPUE/XmnV8y75ByI/AAAAAAAACJI/zfRJAvlAGessBdWcrMyOzwN9mMezvZeBwCLcBGAsYHQ/w320-h213/Ecological%2Bsystem%2Bof%2Bwater.jpg\" title\u003d\"जल का पारिस्थितिकी तंत्र  Water ecosystem in Hindi, jal paristhitik tantra, तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eमहासागर पृथ्वी की सतह का लगभग 70 प्रतिशत भाग को कवर करता\u0026nbsp;हैं। और समुद्र     के\u0026nbsp;पानी में लवण की उपस्थिति अधिक होती\u0026nbsp;है। लेकिन यह की\u0026nbsp;जलवायु,     मीठे पानी के स्रोत से\u0026nbsp;भिन्न हो सकता है। समुद्री जीवों को नमक के लगातार     बदलते स्थिर स्तर के अनुकूल रहना होता है।   \u003c/p\u003e  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    पृथ्वी में मुख्यतः जलीय एवं     स्थलीय पारीस्थिक तन्त्र    होते हैं। यहां पर\u0026nbsp;\u003cb\u003eजल का पारिस्थितिकी तंत्र\u003c/b\u003e\u0026nbsp;का वर्णन किया     गया है।   \u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eपारिस्थितिक चक्र क्या है\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    पारिस्थितिकी तंत्र में\u0026nbsp;विभिन्न तत्वों के चक्र का अध्ययन किया जाता है।     यह पारितंत्र का अभिन्न अंग होता\u0026nbsp;है। इसके अंतर्गत विभिन्न चक्र को     दर्शाया जाता है। जैसे कार्बन चक्र, ऑक्सीजन चक्र, नाइट्रोजन चक्र आदि।\u0026nbsp;\u003c/p\u003e  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजलीय पारिस्थितिकी तंत्र\u003c/span\u003e  \u003c/h2\u003e  \u003cdiv\u003e    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e      जल में निवास करने वाले जीव जंतु और       पर्यावरण से परस्पर निर्भरता और उसके प्रभाव का अध्ययन ही जल का परिस्थिक तंत्र है।       इसके अंतर्गत जीवो की निर्भरता और उसके पर्यावण पर योगदान क्या है इसकी       जानकारी मिलती है। समुद्र, तालाब, नदी में जलीय जीव निवास करते है इन जीवो       जन्म से मृत्यु तक के अध्ययन को पारिस्थितिक तंत्र के अंतर्गत रखा गया       है।\u0026nbsp;     \u003c/p\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003c/div\u003e \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\u003c/div\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003eस्वच्छ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eसमुद्री जल पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eपोखर अथवा तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eझील का पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/li\u003e  \u003cli\u003eआर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र\u0026nbsp;\u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003cp\u003e  जलीय पारिस्थितिक तन्त्र \u003cb\u003e- \u003c/b\u003eजलीय पारिस्थितिक तन्त्र को समझाने के लिए यहां   पर स्वच्छ जलीय पारिस्थितिक तन्त्र का उदारण के रूप में तालाब का पारिस्थितिक   तन्त्र लिया गया है। जिसमें निम्नलिखित घटक पाये जाते हैं \u003c/p\u003e\u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-family: inherit; font-size: large;\"\u003eस्वच्छ जलीय पारिस्थितिक तन्त्र\u003c/span\u003e\u003c/h2\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cb\u003e 1. अजैविक घटक\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  तालाब के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन तथा अन्य गैसें व अकार्बनिक तत्व   घुले रहते हैं। कुछ अजैविक घटक तालाब के निचले स्तर में पाये जाते हैं।   ये\u0026nbsp;सूर्य की ऊर्जा द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा अजैविक घटकों की   उपस्थिति में हरे जलीय पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  जो विभिन्न जिवो के लिए खाना और घर\u0026nbsp;होता है। इन पौधो व जीवों की मृत्यु के   पश्चात जलीय पदार्थ विघटित होकर अजैविक घतको के रूप में पुनः पानी में मिल जाता   है और यह पारिस्थितिक तन्त्र बराबर चलता रहता है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\u003cb\u003e 2. जैविक घटक\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  इसके अंतर्गत सभी जीव, जैसे - उत्पादक\u0026nbsp; उपभोक्ता\u0026nbsp; तथा अपघटनकर्ता आते   हैं। जिनका वर्णन निम्न प्रकार है - \u003c/p\u003e\u003cscript async\u003d\"\" src\u003d\"https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js\"\u003e\u003c/script\u003e\u003c!--mobile article--\u003e\u003cins class\u003d\"adsbygoogle\" data-ad-client\u003d\"ca-pub-4178635254815754\" data-ad-format\u003d\"auto\" data-ad-slot\u003d\"1422942514\" data-full-width-responsive\u003d\"true\" style\u003d\"display: block;\"\u003e\u003c/ins\u003e\u003cscript\u003e     (adsbygoogle \u003d window.adsbygoogle || []).push({}); \u003c/script\u003e\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e(1) उत्पादक\u0026nbsp;\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  तालाब के पारिस्थितिक तन्त्र के प्राथमिक उत्पादक जलीय पौधे होते हैं। \u003c/p\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\u003c/p\u003e\u003cul style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cli\u003e    \u003cb\u003eपादप प्लवक -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eये हरे रंग के तैरने वाले शैवाल हैं। ये अति सूक्ष्म     होते हैं। तालाब के जल में प्रकाश की किरने जहां तक पहुंच पाती है वहां तक इनकी     संख्या काफी अधिक होती है। उदाहरण- माइक्रोसिस्टिस, युग्लीना, वालवॉक्स,     ऐनाबीना।\u0026nbsp;   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    \u003cb\u003eरेशेदार शैवाल - \u003c/b\u003eये\u0026nbsp;पानी में तैरते हुए तथा किनारों की ओर घना जाल     बनाते हैं हुए तालाबों में पाये जाते हैं। उदाहरण - ऊड़ोगोनियम, स्पाइरोगाइरा,     कारा।\u0026nbsp;   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    \u003cb\u003eनिमग्न पादप -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eये पौधे जड़ों द्वारा तालाब की जमीन से लगे होते हैं।     उदाहरण- हाईड्रिला, वेलिसनेरिया।   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    \u003cb\u003eनिर्गत पादप\u0026nbsp; -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eइस पादप की जड़ें पानी की जड़ें पानी के अंदर     तथा शेष भाग\u0026nbsp; पानी के ऊपर निकला होता है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;उदाहरण - रीड।   \u003c/li\u003e  \u003cli\u003e    \u003cb\u003eसतह पर तैरने वाले पादप\u0026nbsp; -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eये पौधे पानी की सतह के ऊपर तैरते     रहते हैं। उदाहरण- पिस्टिया   \u003c/li\u003e\u003c/ul\u003e\u003cp\u003e\u003c/p\u003e\u003ch4 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e    \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-M1RbW3ZZTXM/Xw58pO_Fp8I/AAAAAAAADTY/HihywML5GNgw5JfXL2TDJdx_V9vifMKqgCLcBGAsYHQ/s1600/8ed737889ca7eb3e989ebd6110776b3c.jpg\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जल का पारिस्थितिकी तंत्र Water ecosystem in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"251\" data-original-width\u003d\"500\" height\u003d\"160\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-M1RbW3ZZTXM/Xw58pO_Fp8I/AAAAAAAADTY/HihywML5GNgw5JfXL2TDJdx_V9vifMKqgCLcBGAsYHQ/s320/8ed737889ca7eb3e989ebd6110776b3c.jpg\" title\u003d\"जल का पारिस्थितिकी तंत्र Water ecosystem in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e  \u003c/div\u003e  \u003cbr /\u003e  \u003cb\u003e\u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e(2) उपभोक्ता\u003c/span\u003e\u003c/b\u003e\u003c/h4\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  तालाब में पाये जाने वाले विभिन्न प्राणियों का समूह उपभोक्ता होता है। \u003c/p\u003e\u003cb\u003eप्राथमिक उपभोक्ता -\u003c/b\u003e यह पादपों को खाते हैं इन्हे अग्र वर्गों में बांटा जाता है -\u0026nbsp;1. प्राणी प्लवक,\u0026nbsp;ये तालाब के अंदर लहरों के साथ तैरते रहते हैं। उदाहरण- साइकलोप्स, डैफनीया ,कोपीपोड और रोटिफर। 2. तरणक - ये अपने चलन अंग की सहायता से तैरते हैं। 3.नितलक - तालाब के तल पर रहने वाले हैं।\u003cbr /\u003e\u003cbr /\u003e\u003cb\u003eद्वितीयक तथा तृतीयक उपभोक्ता -\u003c/b\u003e ये शाकाहारी जलीय जन्तु का भक्षण करते हैं। उदाहरण-\u0026nbsp;मछली,मेढक,पानी का सांप।\u003cbr /\u003e\u003cbr /\u003e\u003cb\u003eसर्वोच्च उपभोक्ता -\u0026nbsp;\u003c/b\u003eये द्वितीयक तथा तृतीयक उपभोक्ता का भक्षण करते हैं।\u003cbr /\u003eउदाहरण- बड़ी मछली,बगुला,कछुआ।\u003cbr /\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan\u003e\u003cb\u003eअपघटक -\u0026nbsp;\u003c/b\u003e\u003c/span\u003eजलीय पौधे तथा जन्तुओं के मरने के पश्चात अनेक सूक्ष्म जीवी (Microorganism)   उनके कार्बनिक पदार्थों को साधारण तत्वों में बदल देते हैं। ये मुक्त तत्व पौधों   के द्वारा उपयोग में पुनः ले लिये जाते हैं।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eसमुद्री पारिस्थितिकी तंत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  समुद्र में कई प्रकार के जिव पाए जाते है। और पृथ्वी का सबसे बड़ा जिव व्हेल भी   समुद्र में पाए जाते है। पृथ्वी का 70 प्रतिसत भाग जल से भरा हुआ है। यह उच्च लवण   होता है। और लाखो किस्म के जीव होते है। ये सभी एक दूसरे पर निर्भर करते है। और   आपस में समुद्री चक्र का निर्माण करते है। यही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र है। \u003c/p\u003e\u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eतालाब का\u0026nbsp;पारिस्थितिकी तंत्र\u003c/span\u003e\u003c/h3\u003e\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e  तालाब में पाए जाने वाले जीवो की निर्भरता और पर्यवरण पर प्रभाव को तालाब की   परिस्थिक तंत्र कहा जाता है। छोटे जिव से लेकर बड़े जिव तालाब में एक दूसरे पर   निर्भर होते है। उत्पादक उपभोक्त और उपघातक के रूप में रहते है। जैसे बड़े मछली   छोटे मछली को खाते है। छोटे मछली लार्वा को अपना खाना बनाते है। इसी प्रकार सभी   जीव एक दूसरे पर निर्भर होते है।\u0026nbsp; \u003c/p\u003e"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1577619156810067156"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/1577619156810067156"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2018/10/water-ecosystem-in-hindi.html","title":"जलीय पारिस्थितिकी तंत्र - Water ecosystem in Hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh patel"},"uri":{"$t":"https://www.blogger.com/profile/01851998082914717250"},"email":{"$t":"noreply@blogger.com"},"gd$image":{"rel":"http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail","width":"32","height":"29","src":"//blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEj4AMrXYUH4Qw46mpO07zw9xdtavBcG3QJVtAnpJV24OmY2cZXUha-yLbOtcOzXERP0WaQEHAqae1rIdnf_o5yB6wkZ1psYL7-Qeq6fNjkBwgrD5ZvA5EzuyCuagZlOShc/s125/IMG_20210117_162137.jpg"}}],"media$thumbnail":{"xmlns$media":"http://search.yahoo.com/mrss/","url":"https://1.bp.blogspot.com/-5IbVCWttPUE/XmnV8y75ByI/AAAAAAAACJI/zfRJAvlAGessBdWcrMyOzwN9mMezvZeBwCLcBGAsYHQ/s72-w320-c-h213/Ecological%2Bsystem%2Bof%2Bwater.jpg","height":"72","width":"72"}},{"id":{"$t":"tag:blogger.com,1999:blog-8453319261367074729.post-5486504999416418460"},"published":{"$t":"2018-10-26T12:17:00.003+05:30"},"updated":{"$t":"2023-12-02T04:22:39.831+05:30"},"category":[{"scheme":"http://www.blogger.com/atom/ns#","term":"Geography"}],"title":{"type":"text","$t":"जैव भू रासायनिक चक्र क्या है - biogeochemical cycle in hindi"},"content":{"type":"html","$t":"\n\u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  जीवमंडल में प्राणियों तथा वातावरण के बीच रासायनिक पदार्थों के आदान-प्रदान की\n  चक्रीय गति को \u003cb\u003eजैव भू रासायनिक चक्र \u003c/b\u003eकहते\n  है।\u0026nbsp;पृथ्वी\u0026nbsp;के\u0026nbsp;वातावरण में सभी तत्वों की एक\u0026nbsp;निश्चित मात्रा\n  होती हैं। जिसकी आवश्यकता जीवधारियों को हमेशा रहती है।\u0026nbsp;\n\u003c/p\u003e\n\n\u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      इन तत्वों को\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/05/biological-and-abiotic-resources.html\"\u003eजैविक घटक और अजैविक घटक\u003c/a\u003e\n      कहते हैं ये भूमि और वायुमण्डल में विधमान होते है। और वहां से पुनः\n      जीवधारियों के बीच चक्रीय गति से पहुंचते हैं। यह क्रिया लगातार चलता\n      रहता\u0026nbsp;है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003eकुछ जैव भू रासायनिक चक्र निम्नलिखित है -\u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    1.\u0026nbsp;गैसीय चक्र - इसमें\u0026nbsp;कार्बन डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन\n    चक्र आते हैं।\u003cbr /\u003e\n    2. सेड़ीमेंट्री चक्र - इस चक्र मे फास्फोरस, सल्फर आदि आते हैं।\u003cbr /\u003e\n    3. जलीय चक्र - इस चक्र के द्वारा वायुमण्डल और वातावरण के बीच जल का\n    आदान-प्रदान होता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003eजैव भू रासायनिक चक्र क्या है\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जैव भू रासायनिक चक्र जिसे भु-रसायन चक्र भी कहा जाता\u0026nbsp;है। इसमें प्राकृतिक\n    या जैविक कारण से पृथ्वी के तत्व का एक सर्कल में चक्र चलता रहता है। उसे ही\n    जैव भू रासायनिक चक्र कहते है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जैसे जल का वाष्प में परिवर्त होना फिर पानी बनाना अधिक ठंड में\u0026nbsp;बर्फ का\n    बनाना ये जल का चक्र है। इसी प्रकार ऑक्सीजन कार्बन और अन्य\n    गैस\u0026nbsp;का\u0026nbsp;भी एक निश्चित क्रम में\u0026nbsp;चक्र चलता रहता\u0026nbsp;है। ये सभी\n    जैव भू रसायन चक्र के अंतर्गत आते है।\u003c/p\u003e\u003cdiv style\u003d\"text-align: center;\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"जैव भू रासायनिक चक्र - biogeochemical cycle in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"399\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"212\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-48Q-wXBTdUI/X3gKLzt_cKI/AAAAAAAAELI/qDE_4hRxsB0csDrMGFzGFzqeUmUX2ESnwCPcBGAYYCw/w320-h212/20201003_103959.webp\" title\u003d\"जैव भू रासायनिक चक्र - biogeochemical cycle in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जैव भू रासायनिक चक्र के प्रकार नीचे दिए गए है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eजैव रासायनिक चक्र\u003c/b\u003e - नाइट्रोजन चक्र, ऑक्सीजन चक्र, कार्बन चक्र,\n    फास्फोरस चक्र और जल चक्र हैं। जैव-रासायनिक चक्रों में हमेशा संतुलन की स्थिति\n    होती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e1. नाइट्रोजन चक्र\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      वायुमण्डल में नाइट्रोजन 78% होता है। वायुमण्डल ही नाइट्रोजन का मुख्य स्रोत\n      है,लेकिन जीव वायुमण्डल से इस नाइट्रोजन को सीधे ग्रहण नही कर सकते हैं। या\n      ग्रहण करने में\u0026nbsp;असमर्थ होते हैं। केवल कुछ जीवाणु,जल व भूमि में रहने\n      वाले नीले-हरे शैवाल तथा नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले कुछ जीव ही नाइट्रोजन\n      का सीधे उपयोग कर सकते हैं।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\n      \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-cqWMfQsQX8s/YMUl7n3N8PI/AAAAAAAAE-A/5yq50lMKY8YN2YaVJ7TTxQ5FFmLqE2c0ACPcBGAYYCw/s600/20210613_025048.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"नाईट्रोजन चक्र जैव भूरासायनिक चक्र Biogeochemical cycle in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-cqWMfQsQX8s/YMUl7n3N8PI/AAAAAAAAE-A/5yq50lMKY8YN2YaVJ7TTxQ5FFmLqE2c0ACPcBGAYYCw/w320-h213/20210613_025048.webp\" title\u003d\"नाईट्रोजन चक्र जैव भूरासायनिक चक्र Biogeochemical cycle in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n    \u003c/div\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      पोधे नाइट्रेट आयन को अमीनों-समूह में बदलते हैं,जिसे पौधे जमीन से ग्रहण\n      करते हैं। पौधों से नाइट्रोजन\n      \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2020/07/rexgin.html\"\u003eशाकाहारी\u003c/a\u003e\u0026nbsp;प्राणियों में और उनसे मांसाहारी प्राणियों के शरीर में पहुंचती\n      है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जल एवं भूमि में उपस्थित नाइट्रेट भी नाइट्रोजन के मुक्य स्रोत हैं। पौधे\n      नाइट्रेट का अवशोसण करके उन्हें अमीनो अमल तथा प्रोटीन में बदल देते\n      हैं।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जिन्हें जीव ग्रहण करते हैं। मृत पेड़-पौधों व जन्तुओं के शरीर में स्थित\n      नाइट्रोजनी कार्बनिक पदार्थ तथा उत्सर्जी पदार्थों पर जीवाणु क्रिया करके\n      उन्हें पुनः नाइट्रेट में बदल देते हैं,जिन्हें पौधे पुनः ग्रहण करते है और\n      यह चक्र पुनः चलता रहता है।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cb\u003eपूर्ण जानकारी :\u003c/b\u003e\n      \u003ca href\u003d\"https://www.rexgin.in/2021/07/nitrogen-cycle-in-hindi.html\"\u003eनाइट्रोजन चक्र\u003c/a\u003e\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e2. ऑक्सीजन चक्र\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      वायुमण्डल में ऑक्सीजन 21% होता है। ऑक्सीजन जीव में श्वसन के द्वारा ग्रहण\n      किया जाता है। यह कार्बोहाइड्रेट का ऑक्सीकरण करके पानी और कार्बन डाइऑक्साइड\n      बनाती है।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cdiv class\u003d\"separator\" style\u003d\"clear: both; text-align: center;\"\u003e\n      \u003ca href\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hHA6yVgGtOA/YMUrCfA8ZQI/AAAAAAAAE-E/Q49DTFDnkNkowf609DTGQdZkEQm-d3Y4wCLcBGAsYHQ/s600/20210613_031404.webp\"\u003e\u003cimg alt\u003d\"ऑक्सीजन चक्र का चित्र जैव भू रासायनिक चक्र क्या है - biogeochemical cycle in hindi\" border\u003d\"0\" data-original-height\u003d\"400\" data-original-width\u003d\"600\" height\u003d\"213\" src\u003d\"https://1.bp.blogspot.com/-hHA6yVgGtOA/YMUrCfA8ZQI/AAAAAAAAE-E/Q49DTFDnkNkowf609DTGQdZkEQm-d3Y4wCLcBGAsYHQ/w320-h213/20210613_031404.webp\" title\u003d\"ऑक्सीजन चक्र का चित्र जैव भू रासायनिक चक्र क्या है - biogeochemical cycle in hindi\" width\u003d\"320\" /\u003e\u003c/a\u003e\n    \u003c/div\u003e\n    \u003cdiv\u003e\u003c/div\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003cdiv\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      ऑक्सीजन जीव की मृत्यु के बाद क्षय होकर पुनः वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड\n      तथा पानी के रूप में चली जाती है। हरे पौधों में जल कच्चे पदार्थ के रूप में\n      कार्य करता है और प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन में टूट जाता\n      है। स्वतन्त्र ऑक्सीजन वायुमण्डल में चली जाती है। इस प्रकार ऑक्सीजन चक्र\n      चलता रहता है।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e3. कार्बन डाइऑक्साइड चक्र\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    जीवन का आधार माने जाने वाली जीवद्रव्य में उपस्थित सभी कार्बनिक यौगिकों, जैसे\n    - प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट्स,वसा तथा न्यूक्लिक अम्ल आदि सभी जीवधारियों के लिए\n    प्रमुख ऊर्जा के स्रोत हैं। इनके ऑक्सीकरण से ऊर्जा मिलती है। वायुमण्डल में\n    0.03% कार्बन डाइऑक्साइड होती है।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    इसका उपयोग सर्व प्रथम हरे पौधे करते हैं और पकाश-संश्लेषण द्वारा\n    कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं। शाकाहारी प्राणी इन पौधों को ग्रहण करते\n    हैं। जिससे ये कार्बनिक पदार्थ प्राणियों के शरीर में पहुंच जाते हैं।\u0026nbsp;\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    अब शाकाहारी प्राणियों को मांसाहारी प्राणी खाते हैं और ये कार्बनिक पदार्थ\n    मांसाहारी प्राणियों के शरीर में पहुंच जाते हैं। इनमे से कुछ भाग शरीर की\n    व्रिद्धि के लिए उपयोग में ले ली जाती हैं। कुछ भाग श्वसन क्रिया में कार्बन\n    डाइऑक्साइड में परिवर्तित होकर वायुमण्डल में चली जाती है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cb\u003eRelated posts -\u0026nbsp;\u003ca href\u003d\"https://www.questionmug.com/2021/10/paristhitik-tantra-ki-paribhasha.html\"\u003eपारिस्थितिक तंत्र क्या है\u0026nbsp;\u003c/a\u003e\u003c/b\u003e\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    वायुमण्डल की कार्बनडाइऑक्साइड का कुछ भाग समुद्र जल द्वारा अवशोषित होकर\n    समुद्री पौधों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण में उपयोग कर ली जाती है और कुछ कार्बन\n    डाइऑक्साइड कार्बोनेट के रूप में अवशोषित हो जाता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    प्राणियों और पौधों की मृत्यु के बाद कार्बनिक पदार्थ कार्बन डाइऑक्साइड और जल\n    में अपघटित हो जाते हैं। जिसे पुनः पौधों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। इस\n    प्रकार (कार्बन) कार्बनडाइऑक्साइड का चक्र चलता रहता है।\n  \u003c/p\u003e\n  \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n    \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e4. कैल्सियम चक्र\u003c/span\u003e\n  \u003c/h2\u003e\n  \u003cdiv style\u003d\"text-align: justify;\"\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      कैल्सियम का मुख्य स्रोत चटटान होते हैं। इन चट्टानों में कैल्सियम के यौगिक\n      पाये जाते हैं। ये चट्टानी यौगिक पानी में घुलनशील होते हैं। पौधे इनका\n      मिट्टी से अवशोषण करते हैं तथा जन्तु के शरीर में पानी के साथ शरीर में\n      कार्बनिक यौगिकों के रूप में पहुंचते हैं।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जन्तुओ एवं पौधो की मृत्यु के बाद ये कैल्सियम अपघटित होकर घुली हुई अवस्था\n      में पानी में मिल जाती है। नदियों के पानी द्वारा कैल्सियम को समुद्र के पानी\n      में पहुंचा दिया जाता है। समुद्र में सतहिकरन विधि द्वारा समुद्र की सतह में\n      जमा होकर पुनः चट्टानों का रूप ले लेता है। इस प्रकार कैल्सियम चक्र अनवरत\n      चलता रहता है।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003ch2 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e5. जल चक्र\u003c/span\u003e\n    \u003c/h2\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जल पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है। पानी तीन रूप में पाया जाता है - ठोस,\n      तरल और गैस। पानी पृथ्वी की जलवायु प्रणाली के प्रमुख हिस्सों को एक साथ\n      जोड़ता है। जल इ बिना जीवन संभव नहीं है। और जल चक्र जैव भु-रसायन चक्र का\n      अहम् हिस्सा है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जल चक्र पृथ्वी और वायुमंडल के भीतर पानी की निरंतर गति को दर्शाता है। यह एक\n      जटिल प्रणाली है जिसमें कई अलग-अलग प्रक्रियाएं शामिल हैं। तरल पानी वाष्प\n      में वाष्पित हो जाता है, बादलों के रूप में संघनित होता है, और बारिश इ रूप\n      में वापस धरती पर बरसता है। अधिक ठंड में बर्फ के रूप में जम जाता है। तथा\n      गर्मी पड़ने पर पिघल कर तरल रूप में वापस आ जाता है। और फिर वाष्प बनकर आसमान\n      में संघनित होता है यह प्रक्रिया निरंतर चलता रहता है। इसे ही जल चक्र कहा\n      जाता है।\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003ch3 style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      \u003cspan style\u003d\"font-size: large;\"\u003e\n        जैव विविधता की दृष्टि से भारत एक देश है\u003c/span\u003e\n    \u003c/h3\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      भारत भौगोलिक रूप से सामान नहीं है यहाँ पर्वत पठार और मैदान है। भारत में कई\n      प्रकार के जीव जंतु पाए जाते है। इसका यह कारण है की भारत बहुत विशाल देश है\n      जो विश्व में क्षेत्रफल के आधार पर सातवा सबसे बड़ा देश है। इतना बड़ा\n      क्षेत्रफल होने के कारण कई प्रकार के जिव जंतु पाए जाते है।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      आपको बता दू की जीवो के बीच पाए जाने वाले विभिन्नता को जैव विविधता कहा जाता\n      है। और भारत में हजारो किस्म के जिव पाए जाते है। जो वातावरण और स्थान के\n      आधार पर अलग अलग जगह पाए जाते है।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      भारत के उत्तर में हिमालय है जहाँ बर्फ पड़ती है। और यही से बड़ी नदियों का\n      उद्गम होता है। यह कई ऐसे जिव पाए जाते है तो भारत के अन्य स्थान पर नहीं पाए\n      जाते है। पश्चिम में थार मरुस्थल है।\u0026nbsp;\u0026nbsp;\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      जहा वर्षा बहुत काम होती है यहाँ कटीले पेड़ और कम पानी वाले पौधे उगते है।\n      ऐसे जिव पाए जाते है जो रेतीले और गर्म मौसम को सहन कर सकते है। मध्य भारत के\n      जंगलो में कई बड़े और छोटे जानवर की विविधता पायी जाती है।\n    \u003c/p\u003e\n    \u003cp style\u003d\"text-align: left;\"\u003e\n      भारत एक ऐसा देश है जहा पर जैव विविधता की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण देश है\n      जहा समुद्री जंगली और गर्म स्थान वाले जानवर पाए जाते है।\n    \u003c/p\u003e\n  \u003c/div\u003e\n\u003c/div\u003e\n"},"link":[{"rel":"edit","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5486504999416418460"},{"rel":"self","type":"application/atom+xml","href":"https://www.blogger.com/feeds/8453319261367074729/posts/default/5486504999416418460"},{"rel":"alternate","type":"text/html","href":"https://www.rexgin.in/2018/10/biogeochemical-cycle-in-hindi.html","title":"जैव भू रासायनिक चक्र क्या है - biogeochemical cycle in hindi"}],"author":[{"name":{"$t":"Rajesh 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