Geetkaar

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पथराये नयनों के सपने, जब जब बिखरे हैं आंखों से शब्दों की डोरी में मैने तब तब उनको पिरो लिया है पीर किसी के मौन ह्रदय की, याकि किसी के अधरों की स्मित यह कुछ की है सबने जिसको गीतों का दे नाम दिया है

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गीतकार की कलम राकेश खंडेलवाल