आस्तीन का अजगर

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अजगर के बस में चाकरी नहीं, सिर्फ आलस है और जानलेवा आलिंगन...उसने जकड़ रखा है जिंदगी को धड़कते दिल के बहुत करीब..आस्तीन के अजगर का अपना अरण्य है जहां वह खुद को कभी खोता है, कभी पाता है और कभी बेपरवाह होकर पसर जाता है. वह एक जीते जाते आदमी का खंड व्यक्तित्व है जिसकी अजनबियत ही उसकी पहचान है. वह एक सिगरेट की पन्नी के पीछे यह लिख कर छोड़ गया है- मुझे ढूंढने की कोशिश न करना, मैं जा चुका हूं

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अखाड़े का उदास मुगदर