अनुराग अन्वेषी

About Me

हमेशा कोशिश होती है कि कुछ नया करूं, कुछ अलग करूं। कुछ ऐसा रचूं, जो ख़ुद के जी के साथ-साथ दूसरों के मन को भी भाए। मन को रुच गया तो जादूगरों की जादूगरी भी साधी। स्कूल में बच्चों को पढ़ाया भी और रेडियो-टीवी के लिए एंकरिंग करने के साथ-साथ स्क्रिप्ट भी लिखी। फिलहाल एक अख़बार में बतौर चीफ कॉपी एडिटर ख़बरों को काटने-छांटने और सजाने-संवारने की ज़िम्मेवारी निभा रहा हूं। वैसे मुझे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की यह कविता बेहद लुभाती है : 'लीक पर वे चलें जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं। हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पथ प्यारे हैं।' जाहिर है, मेरा मन हमेशा अपने अनगढ़ तरीके से बनाये रास्ते को पसंद करता है। पर दूसरों की कोई सलाह या सुझाव रास आ जाये तो उसे स्वीकार भी करता है और उस पर अमल भी।

My Blogs

Team Members

जिरह सागर नाहर
शेष है अवशेष शैलप्रिया