संदीप

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जीने दो मुझे, अनदेखा, अनजाना, अदृश्य सा ताकि बिना किसी शोक के निकल जाये ये साँस, अजनबी युँहि मुझे सारे जहाँ से रहने दो, पता ना हो मेरा किसी भी अनात्म-भाव के पास

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