'ताइर'

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ख़ुद के बारे में इस शायरी से ज़्यादा कुछ केहना लाज़मी नहीं लगता... मैं हूँ यहाँ, पर यहाँ नहीं हूँ, सोचूं जो मैं तों कहाँ नहीं हूँ? यूं तों हर शेय पर मकाम है मेरा, बस देखना चाहूँ ख़ुद को, मैं वहाँ नहीं हूँ...

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गुलज़ार नामा कुश रंजना [रंजू भाटिया] Saee_K Manvinder manishi... Piyush k Mishra
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