संजय विद्रोही

About Me

संजय विद्रोही नाम मैंने खुद रखा.विद्रोह मेरे स्वभाव में है.समाज से विद्रोह, व्यवस्था से विद्रोह, खुद से विद्रोह. समाज ऒर परिवार के अनुभव इस विद्रोह को निरन्तर धार देते रहे हैं.घर वालों का दिया नाम संजय शर्मा चलते चलते डा. संजय शर्मा हो गया ऒर भीड में कहीं खो गया.जीविकोपार्जन के लिए एक कालेज में रसायन-शास्त्र पढाता हूँ , परिवार चला रहा हूँ. पत्रकार बनना चाहता था,अध्यापक हो गया. कवि-सम्मेलनों में गजलें पढने लगा, तो पत्र- पत्रिकाऒं में कहानियाँ छपने लगी. जब महफिलों में शायर की तरह तार्रूफ होने लगा, तो रसायन-शास्त्र की दो पुस्तकें आ गई.कुछ एसा ही सिलसिला अब तक जारी है...... घर में एक प्यारी-सी बीवी ऒर दो गॊलू- मोलू से बच्चे हैं.जिन को देखकर जीते रहने के बहाने मिलते रहते हैं. .....मेरा इतना-सा जीवन है. प्रकाशित पुस्तकें: बक्खड,गोदनामा, कभी यूँ भी तो हो(हिन्दी कहानी संग्रह), टळकतॆ पाणी री लीक (राजस्थानी कविता) तथा रसायन शास्त्र की चार पाठ्यपुस्तकें.

Interests

Favorite Movies

Favorite Music

Favorite Books

संजय विद्रोही's Blogs

  Blog Name Team Members