tag:blogger.com,1999:blog-975038114465948062.post-5874526380549496142007-05-15T18:00:00.000+06:302007-05-15T18:00:26.805+06:30हिमालय क्यों डगमगा रहा है<div align="left">उधर देखो, हिमालय क्यों डगमगा रहा है<br />ना कोई भूकंप आया है<br />ना किसी तूफान में ताकत है<br />फिर क्या है<br />जो इस पहाड़ को हिला रहा है<br />शायद यह नाराज है<br />हमने जो खून बहाया है<br />इसकी गोद में<br />आतंक का दामन छुपाया है<br />भारत को चीरा<br />और पाकिस्तान को बनाया है<br />खैर थी इतनी भी<br />पर हमने दुश्मनी को बढ़ाया है<br />यही वजह है शायद<br />आज हिमालय हिलता ही जा रहा है<br />पहले खीचं डाली सरहद<br />फिर आसमां को बाटां<br />मां की छाती से बच्चे को छीना<br />मजहब के नाम पर<br />यह क्या गुनाह किया<br />रास ना आया तभी<br />अडिग गिरी डगमगा रहा है<br />सियासत के गलियारों से<br />गदंगी की बू आती है<br />जो अमन के बजाए<br />कारगिल को लाती है<br />ना छुपने दो उन फरिश्तों को<br />ना झुकने दो उन अरमानों कों<br />जिन्होने दोस्ती का दिया जलाया है<br />वरना देख लो अभी से<br />हिमालय डगमगा रहा है<br />घर जले थे पंजाब में<br />तपिश है अभी उस आग में<br />देख लो चाहे तुम<br />महीने लग जाते हैं पहुचने में<br />अमृतसर और लाहौ्र के<br />चन्द लम्हों के फासले में<br />ना जाने हश्र क्या हो्गा<br />यह हिमालय हिलता ही जा रहा है<br />गलती जो कर दी थी कभी<br />ना दोहराओ तुम अभी<br />छा जाने दो खुशी<br />उन बुझे बुझे से चेहरों पर<br />जो दो ना पायें हैं जी भर<br />बिछड़े हैं जबसे दिल जिगर<br />कैसे भूल जाते हो<br />दर्द धरती के स्वर्ग का<br />इंसान हैं वो<br />जीने का हक उन्हे भी दो<br />दोस्ती का पैगाम लाऔ<br />तोड़ डालो मुहं उस तीसरे का<br />जो हुंकारता है दूर से<br />और हमारे बीच टागं अड़ाता है<br />देर ना हो जाए कहीं<br /><span class="">क्योंकि हिमालय डगमगा रहा है </span><br />सब रास्ते खोल दो<br />मिटा दो सरहद की जंजीरों को<br />भारत-पाक चलो उस राह पर<br />जहां अमन नजर आता है<br /><span class="">कहीं एसा ना हो जाए 'ज़ालिम' </span><br /><span class="">अपवादों की धरती पे<br />टूट जाए यह पहाड़ </span><br /><span class="">और मिटा दे सरहद सदा के लिए <br />यह हो जाएगा </span></div><div align="left">क्योंकि हिमालय हिलता ही जा रहा है </div>SUNIL DOGRA जालिमhttp://www.blogger.com/profile/13066188398781940438noreply@blogger.com