tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-75230795689920903062007-10-23T01:19:00.000+05:302007-10-23T01:19:00.000+05:30संजय भाईआपके दिल में उठा द्वंद जायज है. हर प्रोफेश...संजय भाई<BR/><BR/>आपके दिल में उठा द्वंद जायज है. हर प्रोफेशन की कुछ न कुछ डिमान्ड ऐसी होती है जो आपके सामान्य परिवारिक दायित्वों के निर्वहन पर असर डालती है. ऐसे में एक सामनजस्य बैठाना ही कुशलता का परिचायक है.<BR/><BR/>आपका पेशा ऐसा ही कि शाम को वक्त नहीं मिल पाता. तब कोशिश करके छुट्टी के दिन या जब जब भी जितना समय दे पायें, उतना दें. साल में एक बार मय परिवार अपने रहवास से कुछ दूर अलग वातावरण में छुट्टी मनाने जरुर जायें. यह एक स्वस्थ परंपरा होगी और जीवन के यादगार पल.<BR/><BR/>बाकी तो व्यवसायिक मजबूरियाँ घर वाले भी समझते हैं. धीरे धीरे बच्चे भी समझ जाते हैं. सब कुछ जो किया जा रहा है, उसका निहित में तो परिवार ही है.<BR/><BR/>प्रसन्न रहें. अनेकों शुभकामनायें.<BR/><BR/>वो जिस महिला ने आपकी पत्नि को मिसड कॉल किया, उसके कृत्य को देखते हुए आराम से कहा जा सकता है कि उनके संबंध सामान्य नहीं हैं.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.com