tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-81136813552349102572007-04-01T11:40:00.000+05:302007-04-01T11:40:00.000+05:30कई बार जीवन में ऐसे मौके आते हैं जब स्वयं को एकदम ...कई बार जीवन में ऐसे मौके आते हैं जब स्वयं को एकदम बेबस महसूस करते हैं...<BR/><BR/>कविता से ही-<BR/><BR/>रोशनी जब चुभने लगी....<BR/>आँखे मूँद ली.....<BR/>अँधेरा जो दिखा....<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>आवाज़ जब शोर बना....<BR/>कर्ण ढ़क दिये.....<BR/>सन्नाटा जो सुनाई दिया....<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>हसीं ...रोई... हैरान...और परेशान हुई....<BR/>जब भाव थम गये...<BR/>सब शांत हो गया....<BR/>इस शांती को मैं पहचानती नहीं.....<BR/><BR/>सांसों के लय को जीवन कहा...<BR/>जब साँस रुक चली...तो जीव मृत हुआ....<BR/>जो अमृत इस मृत में छुपा ...<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>कौन सी दहलीज़ पर खड़ी हूँ....<BR/>अंको से दूर.....<BR/>शून्य से इतने कऱीब....<BR/>फासले कौन से मिट रहे....<BR/>यह जानती नहीं......<BR/><BR/>सन्नाटों का शोर....<BR/>भावों का अभाव....<BR/>अँधेरे में जो साया दिखा...<BR/>उसे पहचानती नहीं.....<BR/><BR/>क्या आज हो गई हर अहसास से दूर हूँ......<BR/>या फिर.....<BR/>खुद के...खुदा के....<BR/>किस के करीब हूँ....<BR/>मैं जानती नहीं......<BR/>................................<BR/><BR/><BR/><BR/>वेदना को जब स्व में गूंद लो तो संवेदना बन जाती है....<BR/>भुलाने की कोशिश शायद सही नहीं...मुमकिन भी नहीं... <BR/>दर्द भी जहाँ में कितने हैं...कुछ अपने हैं ...कुछ अपनो के...<BR/>फिर किसने कहा जीवन में दर्द नहीं होता...<BR/>कल था....आज है...कल भी होगा....<BR/>कुछ दवा से...कुछ दुआ से झेलना होगा...<BR/>इस भट्टी में खुद को झोंक खरा करना होगा....<BR/>माँ का दर्द कुछ कम करना होगा...जिन्दगी पर फिर से हँसना होगा....Bejihttp://www.blogger.com/profile/16964389992273176028noreply@blogger.com