tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1162038782579403292006-10-28T05:28:00.000-07:002006-10-28T05:33:02.630-07:00तुरत फुरत + Centuryसुबह सुबह रचनात्मक और पचनात्मक कब्ज हो गई. पाखाने में जो बैठ कर दिमाग में आया वो यहाँ चैंप रहा हुँ. मेरे आज १०० पोस्ट हो गऍ !!<br /><br />ठन्डी की सुबह फिरोजशाह कोटला मैदान पर औस<br />पवेलियन में बैठ कर चैपल दे रहा सबको धौंस<br />दे रहा सबको धौंस की खबरदार जो प्रेस से बोले<br />रन बने ना बने जो मुँह खोला वो हल्ले हो ले.<br />हल्ले हो ले वो भी जो पठान को बेट्समेन ना माने<br />गाँगुली का नाम लेने वाला भी अपनी शामत जाने.<br />अपनी शामत जाने खान गम्भीर और नेहरा<br />कैफ का देखना नही मुझे कुछ बरसों ं तक चेहरा.<br />चेहरा देख देख जिनका उम्मीद लगाऍ काली<br />वो द्रविड़ बन बैठे पुतले वैंगसरकर बजाऍ ताली.Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com