tag:blogger.com,1999:blog-93376902009-02-21T02:58:22.341-07:00Bhaat baajiDuniya bhar ki bakwaas, total timepass.Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.comBlogger102125tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-16640226433458237112007-05-27T08:10:00.001-07:002007-05-27T08:11:30.391-07:00खिचडीवापसी पर तुरत फुरत तैनात स्वीट सिक्सटिन जीतु भैया (इनके सोलह ब्लाग जो ह)ैं ने याद दिला दिया कि काकटेल रेसिपी तो रह ही गई है. कोई बात नही, मधुशाला के मतवालों के लिये पोस्ट के अन्त में बहेगी हाला.<br />डाक्टर साहब भी मटरगश्ती करते हुऍ चिठ्ठे पर आये. इनके पोस्ट पर जो लाईनें लगी हैं <br />"छोटा कर के देखिये जीवन का विस्तार ।<br />आँखो भर आकाश है बाँहों भर संसार ॥"<br />मुझे काफी सोचने वाले खतरनाक मूड में ले गई है. जब भी मैने सोचा है कुछ जबरदस्त हुआ है. जैसे मेरी पुरी थिसिस का सार ऍक सोच में ही निकला था. या फिर अमेरिका जाने का ईरादा भी सिर्फ ऍक दोपहर की सोच का निर्णय था. देखो आज क्या निकलता है मेरी सोच से. <br /><br />कुछ दिनों पहले मैने फ्रीकोनोमिक्स नामक किताब चाटी. बहुत मजेदार हट के सोचा है. स्टेटिसटिक्स के साथ कामन सेन्स को जोड कर जो चिन्तन मन्थन किया है वो सराहनीय ही नही प्रेरणादायी भी है. जरुर पडिये कहीं न कहीं कुछ तो चमकेगा ही. जैसे मुझे लगा की फिनिक्स में अगर तीन ट्रेनें डाल दिये जाऍं तो ट्रेफिक समस्या काफी हद तक निपट जाऍगी.<br /><br />आज कल मैं बौद्घ धर्म पर किताब पड रहा हुँ. मेरा मानना है की धर्म की सोच की गहराई उस समय के समाज के मानसिक स्तर का सीधा माप है. वैसे में नासतिक हुँ तो मेरा रुझान सिर्फ फिलोसोफी के छात्र के रुझान समान है, जीवन में आत्मसार करने लायक ऍक सम्पुर्ण सोच कुछ अभी तक मिली नही है। तो जगह जगह से उठाई और बनाई अधकचरी खिचडी.<br /><br />चलिये बौद्घ धर्म से काकटेल तक.<br /><br />१ भाग आइरिश विस्की<br />१.५ भाग आईरिश क्रीम<br /><br />बर्फ के उपर विस्की ग्लास में डालें और टुन्न होने तक ना पीयें.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-1664022643345823711?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-51220550474168648972007-05-26T20:35:00.000-07:002007-05-26T20:37:27.735-07:00वापसभीमसेन साहब के राग विहग को सुन कर मन कुलबुलाया, ऊगलियोँ में कुछ बैचेनी सी महसुस हुई और लगने लगी दनादन मार की-बोर्ड पर. चलो हम वापस आ गऍ. अपनी मात्रा की गलतियोँ, सोच की अपरिपक्वता लिये हुऍ. पढने का मन हो तो पढो, नही तो आगे बढो. जैसे चिठ्ठा जगत के <A href="http://www.hindini.com/fursatiya/">पितामह</A> कह दिये "हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिह" तो हम भी ईसी भाव से लिखेंगे. किसी के मन में मात्रादोष ठीक करने का कीडा हो तो हमारे बचपन के हिन्दी के मास्टर का नम्बर भेज देंगे. सभी भारी भरकम बुजुर्ग जनों को साधुवाद. वैसे कोई बताऍ लाल साहब ईतने भारी हैं, कम्बख्त उडन तश्तरी कैसे उडती होगी.<br /><br />आज तो वापसी करी है, जरा सुस्ता लुँ यारो बहुत दिनों के बाद लौटा हुँ भाटबाजी की दुकान में. रफत में आने में समय तो लगेगा.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-5122055047416864897?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1165707876832456622006-12-09T16:41:00.000-07:002006-12-09T16:44:36.846-07:00सेब की लूटसेब बोले तो "ऍप्पल". क्या है की हमें बहुत दिनों से चुल हो रही थी की क्यों ना "आई तुझा आशिर्वाद" बोल के आईपोड ले लिया जाऍ. ३० गिग के गाने बजाने में तो मेरा पूरा गोविन्दा करिश्मा का डान्स कलेक्शन आ जाऍगा. तो मैं पहुँच गया ऍप्पल स्टोर पर. मानना पड़ेगा बहुत प्यार से पेश आते हैं दुकान वाले. आप जाईऍ सोनी के स्टोर में जनाब. वहाँ पर तो पीऍसपी का डब्बा भी खोलने को तैयार नही हैं. सेब की दुकान पर बढिया गाना सुनिऍ बकैती करिये सब झकाझक. बिलकुल भारत में साड़ी की दुकान की याद आ गई. वैसे पुरुष "जी जी मैडम यह बनारसी देखिऍ" कह कर जब पल्लु खुद पर लगा कर दिखाते हैं तो बहुत गुड़ लगते हैं. खैर गुड़ छोड़ कर वापस सेब पर लौटा जाऍ. तो हमने आई पोड लिया २४९ में. पर नही जनाब साथ में ऍक केस भी लेना होगा. केस की कीमत ३५ ! खैर वह भी लिया. पर अडापटर तो चाहिऍ ना की सिर्फ कम्पयुटर से ही चार्ज करेंगे. अडापटर तो साथ में देना था. वेरी चीप! वह भी मिला १५-२० में. हमने पूछा की भाई बैटरी मिलेगी दूसरी. बोले नही दादा. वह तो आपको हर ४०० चार्ज के बाद ऍप्पल के पास भेजना पड़ेगा. वह दुसरा आई पाड भेजेंगे. हायँ !! मलतब ! जै का बात हुई ! तो पोस्ट का खर्चा. वह भी हम ही. चलो फ्री में तो बदल दोगे ना. नही ! कितने क्या पूरे ६२ !! मार दिया दद्दा !! हर साल दो साल में ७० का चूना लगाना पड़ेगा. हमने तुरंत वहीँ से अपने ब्रोकरेज पर कन्नेकट मारा और दनादन सेब के स्टाक खरीद लिये. जय हो स्टीव जाब की. कमाल का जाब करा है. निरन्तर कमाई करी जाऍगी. फिर जब वापस किया जाऍगा तो कुछ रीबेट दे कर नया माडल बेच दिया जाऍगा.<br /><br />वैसे जितने भी लोग आईपाड शफ्फल लेने के मूड में हों सोच लें. ८० का शफ्फल साल भर की बैटरी. नई बैटरी ६५ की. मतलब साल भर के ही काम का रहा शफ्फल. विक्लप ढेरों रहे शफ्फल के आइरिवर, सेनडिस्क आदि के.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116570787683245662?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com6tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1162038782579403292006-10-28T05:28:00.000-07:002006-10-28T05:33:02.630-07:00तुरत फुरत + Centuryसुबह सुबह रचनात्मक और पचनात्मक कब्ज हो गई. पाखाने में जो बैठ कर दिमाग में आया वो यहाँ चैंप रहा हुँ. मेरे आज १०० पोस्ट हो गऍ !!<br /><br />ठन्डी की सुबह फिरोजशाह कोटला मैदान पर औस<br />पवेलियन में बैठ कर चैपल दे रहा सबको धौंस<br />दे रहा सबको धौंस की खबरदार जो प्रेस से बोले<br />रन बने ना बने जो मुँह खोला वो हल्ले हो ले.<br />हल्ले हो ले वो भी जो पठान को बेट्समेन ना माने<br />गाँगुली का नाम लेने वाला भी अपनी शामत जाने.<br />अपनी शामत जाने खान गम्भीर और नेहरा<br />कैफ का देखना नही मुझे कुछ बरसों ं तक चेहरा.<br />चेहरा देख देख जिनका उम्मीद लगाऍ काली<br />वो द्रविड़ बन बैठे पुतले वैंगसरकर बजाऍ ताली.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116203878257940329?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com6tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1161949219119602022006-10-27T04:39:00.000-07:002006-10-27T04:40:19.136-07:00नऍ ताजे फोटुनऍ ताजे फोटु डाले हैं फ्लिकर पर. सेनफ्रानसिस्को ब्रिज के, नागर वाले बाबा के, जबलपुर के भेड़ाघाट के और विशाल गढ्ढे के. <A href="http://www.flickr.com/photos/22268869@N00/">Flickr Photos</A><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116194921911960202?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1160428957249163212006-10-09T14:21:00.000-07:002006-10-09T17:10:21.206-07:00रिडिफ्फ की बकवास पत्रकारिता<A href="http://ia.rediff.com/news/2006/oct/10us.htm?q=tp&file=.htm">Rediff news</A> मुख्य समाचार है की भारतीय प्रवासी संख्या १५० प्रतिशत हो चुकी है अमेरिका में. अन्दर पढा तो मालुम पढा की बात सिर्फ वाशिंगटन की हो रही है. क्या बकैती है. बिलकुल दैनिक बकवासकर के स्तर की पत्रकारिता है रिडिफ्फ की. <br />Check out <A href="http://www.desinc.net/review_gamerunner">Game Runner</A> !! Boy am i stoked ! This will be the solution to obesity people, you first heard it from Kali's Mouth. Gaming combined with treadmill. Wow !!! fantastic.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116042895724916321?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1160360662228230832006-10-08T19:17:00.000-07:002006-10-08T19:24:22.250-07:00कानपुरिऍ नोट करेंदुनिया की सातवीँ सबसे प्रदुषित नगर का खिताब मिला है कानपुर को. खबर <A href="http://www.time.com/time/asia/2006/environment/kanpur.html?cnn=yes">यहाँ देखें</A>.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116036066222823083?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com6tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1160280924992658172006-10-07T21:14:00.000-07:002006-10-07T21:15:25.013-07:00जीतु बदहवासताजा सनसनीखेज खबर ! <br /><br /><a href="http://www.jitu.info">जीतु भाई</a> नारद की टेस्टिंग करते करते अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. ताबड़‍ तोड़ लेख लिखे जा रहे हैं. सारा हिन्दी ब्लाग जगत अकेले ही कवर कर रहे हैं. दिमाग के सारे आईडिऍ खपा देने के बाद अब किक्रेट पर लिखने लगे हैं. बाजार में अफवाह गरम है की वे अब अपने पुराने लेख फिर से पालिश मार कर छापने वाले हैं. कुवैत की ईनटरनेट सुविधाऍं ठप्प हो रही है जीतु के लोड के नीचे (नही नही वो दुर सन्चार केन्द्र पर नही कूद रहे हैं. बिल्डिंग पर ईतना भार डालना गैरकानूनी जो है)<br /><br />उम्मीद करी जा रही है की यह परेशानी स्थायी है ताकि जीतु के पोस्ट न्युयार्क की सबवे की गति से छपते रहें.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116028092499265817?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1160279383080717322006-10-07T20:47:00.000-07:002006-10-07T20:49:43.106-07:00आज कल के पुलिंदेभज्जी के बालों का किस्सा पढ कर याद आया की मेरा ऍक अभिन्न सरदार मित्र अकसर मुंडेर पर पीठ कर बाल सुखाता था. जब कोई आवारा उसके बाल देखकर फब्ती कसता तो वह मुड़ कर बत्तीसी निपोरता था. <br /><br />आज चलो ऍक पहेली पूछते हैं, बूझो तो जाने. आपके पास ऍक ३ लीटर का और ऍक ५ लीटर का बरतन है. आप नरमदा नदी के किनारे बैठे हैं, जितना चाहो पानी ईस्तेमाल करो. तो बताओ बिना किसी और माप के कैसे मुझे ठीक नाप के ४ लीटर पानी दोगे ?<br /><br />"वी" में खेलने पर बचपन से ईतना जोर दिया गया है की क्या बताऊँ, आज क्रिकेट मैच था. काफी रोमांचकारी उतार चढाव रहे. आखिरी में रन नही बने, क्योंकि लपेटे मारने की आदत ही नही है. ४२ पर नाट आउट लौट आया मैच ७ रन से हरा कर टीम को. काफी हल्ला हुआ. सबको बीयर पिलाई तब जा कर हल्ला बंद हुआ टीम का. फैसला लिया गया की मुझे सिर्फ पहले नंबर पर भेजा जाऍगा क्योंकि मैं लपेटे नही मार सकता. <br /><br />कल न्यु जर्सी तरफ पतझड़ के रंग बिरंगे पेड़ देखने जा रहा हुँ. लौट कर पिक्चरें अपलोड करुँगा.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-116027938308071732?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1156766205146903152006-08-28T04:56:00.000-07:002006-08-28T04:56:45.163-07:00छुट्टी की बातेंपहले तो प्रत्यक्षा को साधुवाद लिखने का आईडिया देने का. हमने सोचा चलो हमहुँ छुट्टी के बारे में लिखें. कुछ समय कटे मेरा और आपका. शनिवार से चालु होती है छुट्टी. सुबह जल्दी उठने की आदत है तो मैं सुबह ७ बजे तक जाग ही जाता हुँ. नियम से भारत में सभी को फोन करता हुँ. साढे सात बजे से टैनिस खेलने का कार्यक्रम प्रारंभ होता है अगर मौसम साथ दे तो. नही तो स्कवाश खेला जाता है. १० बजे तक. फिर खरीददारी का रुख होता है, तुरत फुरत. हमें शौक है गन्दी सन्दी सबजियाँ महँगे दाम खरीदने का. इसलिऍ हम दोनो ही आरगेनिक खाना खरीदते हैं जिसमे पेस्टिसाईड का प्रयोग नही होता. दोपहर का खाना बाहर खाने के बाद बालक की फरमाईश पुरी करने के लिऍ अकसर हमें चिड़ियाघर में पाया जाता है. कई बार समझाया बेटा नानी मामा और मम्मी से काम चला लो, पर लगता है उनसे हफ्ते भर में बोर हो जाता है. कई बार पिज्जा और गेम पारलर की भी फरमाईश हो चुकी है जो पूरी की जाती है. वैसे विडियो गेम खेलने में मजा मुझे भी बहुत आता है. <br />शाम को मै बनता हुँ घसियारा माली. मेरी पत्नी के हिसाब से यह काम मेरी कँजुसी को डिफाइन करता है. महीने के १२० डालर बचाने के लिऍ में हर शनिवार ४ से ५ तक घास काटता हुँ और बागड़ की कटाई करता हुँ. मित्रों के टपकने का अकसर यही समय होता है जिसके कारण मेरी पत्नी अकसर दुखी पाई जाती हैं की क्योँ माली टाईप ईमेज दिखाते हो. मेरा मानना है की मुझसे कभी उधार नही माँगे जाने की वजह ही यही है की जो माली के १२० नही खर्च करेगा उससे कौन उधार माँगेगा. शाम को अकसर मित्रों के साथ हाहा ठीठी और फिल्मों मे समय बीत जाता है. कई बार ताश, कैरम की महफिल भी लग जाती है और शहर भर के आलु समोसों में पक जाते हैं. ११ बजे तक सबको भगा कर अगले दिन की नौटंकी का प्लान बनाया जाता है.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-115676620514690315?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com13tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1156078970213454502006-08-20T06:02:00.000-07:002006-08-20T06:02:50.230-07:00नागर वाले बाबा के दर्शन.पिछले हफ्ते हमने हर सच्चे अमेरिका भक्त देसी की तरह नागर वाले बाबा के झरने यानि नायादरा फाल्स के दर्शन किऐ. झरने के विहन्गम रूप को देख कर अनेकोनेक पुण्य कर्मों के फल को प्राप्त किया जाता है ऐसी मान्यता है. कुल मिला कर सप्ताहन्त में १६ घन्टे की कार यात्रा रही. रास्ता रमणीय था सो थकान ज्यादा नही हुई. गरमी के दिनों मे हरे हरे पेड़ों से पटे पहाड़ थकती आँखों में नया जोश भर देते हैं. ८ घन्टे बाद हमने कार रोकी झरने के समीप बने देसी ढाबे पर. धार्मिक भारतीय भक्तों को यह जगह पसन्द है इसका सबूत है जगह जगह उगे हुऍ ढाबे. भोजन करने के पश्चात "मेड आफ द मिस्ट" नामक जहाज पर यात्रा करी जो सीधे झरने के मुख पर ले जाकर खड़ी हो जाती है. झरना दो तरह का है. पहले छोटा झरना है जिसके बाद आता है घोड़े की नाल के आकार का बढा झरना जिसमे प्रचुर वेग से लाखो गेलन पानी नीचे चट्टानों पर गिरता है. जो मिस्ट या धुँध इस पानी के गिरने से बनती है इस नजारे को और भी सुन्दर बना देती है. १ घन्टा जहाज पर बिताने के बाद हम चले "केव आफ द विन्ड" की और. इसमे आप छोटे वाले झरने के ठीक नीचे खड़े होकर पानी के वेग को महसुस कर सकते हैं. साबुन लगा कर जाइऐ, झरने के पानी से नहाकर चमचमाते हुऐ निकलेंगे. <br />इस परम पूण्यदायी धाम के दर्शन करने के बाद हम वापस लौट चले कालीधाम की ‌और. रासते में हम रुके बफैलो में जहाँ से "बफैलो विन्गस" का नाम पड़ा है. ना ना प्रकार के चिकन विन्गस चबाकर हमने जो गाड़ी सरपट दौड़ाई तो सीधे रोकी घर पर. चित्र हम आज कल में अपलोड कर देंगे.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-115607897021345450?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1155267421056225982006-08-10T20:35:00.000-07:002006-08-10T20:37:01.056-07:00Yesterdays comments11:42 PM <br />अनूप शुक्ला said...<br /><br /> अरे काली भाई ,कहाँ रहे इतने दिन? क्या करते रहे?<br />Very Busy -- work -- switching jobs , switching between cities.<br /> 11:45 AM <br />Tarun said...<br /> काली भाई , वैसे आप क्या करते है ?<br /> अरे काली भाई, आप न्यूयार्क में वैसे करते क्या हैं ;)<br />Ha Ha Ha, wahi jo almost all desis karte hai, computer baba per aankhe phodte hain.<br /> 7:34 PM <br />संजय बेंगाणी said...<br /><br /> बड़ा बेहुदा मगर पसन्दीदा सवाल हैं.<br /> सबसे ज्यादा खराब तब लगता हैं, जब आप बेरोजगार होते हैं.<br />:)<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-115526742105622598?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1155266968553170492006-08-10T20:28:00.000-07:002006-08-10T20:32:54.746-07:00भविष्य की प्लेन यात्रा.आपने आज अखबार में पढ़ा होगा किस प्रकार विमान में धमाका करने का प्रयत्न किया गया. सुरक्षा कदमों के चलते पहले तो जूते ही निकलवाऍ जाते थे, आगे तो कपड़ों का नियम बनाया जाऍगा कुछ ऐसा.<a href="http://www.sam-incorporated.com/gifs/pareos.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px;" src="http://www.sam-incorporated.com/gifs/pareos.jpg" border="0" alt="" /></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-115526696855317049?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1154919380763887022006-08-06T19:55:00.000-07:002006-08-06T19:56:20.783-07:00आप क्या करते हैंमुझसे जब भी यह प्रश्न किया जाता है मन में कुछ सवाल आते हैं. क्यों पूछ रहे हो? जान कर क्या करोगे? क्या फर्क पडता है? तुमसे मतलब? कई काम करता हुँ, सुबह जाग कर नहाता हुँ जनाब किस किस विषय में बताऊँ. कई लोग तो जानने को ईतने आतुर होते हैं की नाम पुछने से पहले ही सवाल दाग देते हैं. हमारे देसीजनों में यह सवाल ज्यादातर जल्दी निकल आता है. कई बार मैने खेल कर देखा है ईस सवाल के मारफत लोगों से. जैसे कभी बोल देता हुँ किराने की दुकान पर काम करता हुँ, कभी की बार टेन्डर हुँ, कभी की वेटर हुँ, कभी की वाल स्र्टीट पर लाखों करोडो कमाने वाला ट्रेडर हुँ. बहुत मजेदार रंग देखें हैं लोगों की आँखों में. समझ कभी नही आया की क्यों कर पैसे वाला बनते ही लोग बहुत मिलनसार हो जाते हैं. क्या फर्क पडता है. जितने भी व्यवसाय गिनाऍ हैं सभी में मित्रजन हैं. सबसे ज्यादा काम तो बार टेन्डर और वेटर ही आया है. कभी किसी रईस से पैसा थोडे ही चहिऐ जो रईसों से मित्रता का दिखावा करें. <br />अमेरिका में पहली पिढी के भारतीयों में पैसे की हाव और होड जिस मात्रा में है वो किसी में नही है. धन ही जीवन है, जो जलन दुसरों की सफलता पर मैने देखी है, तौबा ! कभी नही समझा क्यों. कोई समझाओ मुझे की क्या वजह है ईस कुंठा जलन की. कोम्पिट करने की भावना, प्रगतिशील होना तो सही है पर किसी और की सफलता से मेरे जीवन पर क्या असर? कोई समझाओ मुझे.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-115491938076388702?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1145830646426658022006-04-23T15:16:00.000-07:002006-04-23T15:17:26.446-07:00Cool Code Monkey song<a href="http://data.coolnicks.co.uk/Code%20Monkey.mp3">Code Monkey Song</a><br /><br />My Life, my song.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-114583064642665802?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1145764211750824862006-04-22T20:49:00.000-07:002006-04-22T20:50:11.783-07:00रजनीश भाई के सवालों के जवाबQuestion --- (कुल मिला कर आर्थिक रुप से सम्पन्न जीवन मिल रहा है भारत में. आज भी पर भारत में रहना घाटे का सौदा है केवल आर्थिक रुप से देखा जाऍ तो) काली भईया, इन दोनों बातों का आपसी मेल समझ नहीं आया। <br /><br />Answer -- मित्र चुँकी आप संगीत पसंग हैं; फर्क है इन दो गानो काः<br /><br />आ जा की जिन्दगी है छोटी <br />अपने घर पर भी है रोटी<br /><br />बाप बडा न भईया<br />न ईश्वर है ना मईया<br />द होल थिंग इस दैट की भईया सबसे बडा रुपइया.<br /><br />Question -- थोड़ा ठीक से समझाईए. अंत की कुछ बातें भी ऊपर से निकल गईं।<br />Answer -- सीधा हिसाब है की हरे पत्ते को पाना बहुत मुश्किल और रिस्की रास्ता हो गया है अतः ग्यानी जन बसने का ईरादा त्याग कर कंम्पनियाँ कूदते रहते हैं<br /><br />Question -- कुल मिलाकर बात ये समझ नहीं आई कि अभी आप वहां ख़ुश हैं कि नहीं<br />Answer -- हम तो ठहरे यायावरी रमते जोगी. धन से प्रेम बहुत है पर जीवन धन से बहुत उपर है. वैसे भी हमारा हरा पत्ता मिल चुका है तो हम इस समस्या से मुक्त हैं.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-114576421175082486?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1145763470177398092006-04-22T20:37:00.000-07:002006-04-22T20:37:50.196-07:00Oye Baba long time no see -- kidda baba oye mainu dassiसमय का पहिया कुछ हीरो होन्डा की गति से घूम रहा है मित्र जनों. किसी महान दार्शनिक ने कहा है की समय ‌और सन्तोष का ३६ का आँकडा है. जो फुरसतिया हो गया वो जी गया वरना दौड मेरे चूहे तुझे पैसा मिलेगा. मैने न्युयार्क पहुँच कर जितने लालच को देखा है वो कहीँ नही देखा. किसी कि भी आँखों मे चमक देखनी हो तो बस उसे कुछ भी बोलो जिससे लगे की धन प्राप्ति होगी. नीरस से नीरस जीव जी उठेगा. काफी नकली लोग देखे. ६ डालर की लाते की चु्स्की मारते हैं पर पार्किंग का १ डालर का टिकिट नही खरीदते. ऍक देसी दुकान में २ मैनहेटनड भारतीय महिलाओं की वार्तालाप कुछ युँ रही. "यु नो आइ टेक पापड ऍन स्टफ फोर वेन आइ फील नोस्टालजिक, नोट गुड फोर हेल्थ" हमको देख कर कुछ आँखे मटकाई , उपर से नीचे तक टटोला, "टू देसी चिपो केटेगरी" में डाला और लाईन काटने की कोशिश करी हमसे. हमारा जवाब कल<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-114576347017739809?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1144122428829967252006-04-03T20:45:00.000-07:002006-04-03T20:47:08.846-07:00हरे पत्ते का दर्द.मेरे पास आओ मेरे दोस्तों ऍक किस्सा सुनाऊँ.<br />केसे बताऊँ रेटरोगेशन की रात थी,<br />सबके सब अटके हरे पत्ते की बात थी<br /><br />चला जा रहा था में डरता हुआ<br />वीसा आज ऍकस्पायर हुआ कल ऍक्सपायर हुआ<br />बोलो बुश महाराज की जय <br />बोलो रिपब्लिकन पार्टी की जय.<br /><br />अकसर मुझसे पूछा जाता है की भारतीय पढी लिखी जनता भारत क्यों लौट रही है. मुख्य कारण तो खैर भारत में बढती तनख्वाह है. मेरे सभी मित्रजन २० लाख सालाना या ज्यादा कमा रहे हैं. कट-कटा कर भी लाख रुपया महीने तो मिल ही रहे हैं. कुल मिला कर आर्थिक रुप से सम्पन्न जीवन मिल रहा है भारत में. आज भी पर भारत में रहना घाटे का सौदा है केवल आर्थिक रुप से देखा जाऍ तो. सुख-सुविधा के मामले में भारत में अभी भी कई समस्याऍ होती हैं.<br />दूसरा प्रमुख कारण है परिवार का भारत में होना. <br />तीसरा प्रमुख कारण है अमेरिका का मूर्खतापूर्ण रवैया ईम्मिग्रेशन के बारे में. आजकल अधिकांश लोगों को ५ से ८ साल का समय लग रहा है. केलिफोर्निया, नयुयोर्क और अन्य अप्रवासी बहुल जगहों पर शायद और भी ज्यादा. मुश्किल यह है की इस दौरान नौकरी नही बदली जा सकती. नही तो सारी प्रकिया शुरुआत से चालू करनी पडती है. तो जब कम्पनियां कई बार इस का फायदा उठा कर प्रमोशन, तनख्वाह वगैरह नही बढातीं. तो समझो आपका कैरियर अटका ५ से ८ साल के अंतराल के लिऍ. ईस बीच अगर कंपनी डूबी या आपको निकाला गया तो फिर चलो लाईन के अंत में. कुल मिला कर जीवन में स्थिरता और उन्नति पर रोक लग जाती है हरे पत्ते के बिना. ईस परिस्थिति में जो निपुण भारतीय हैं वो अकसर ब्रिटेन या भारत का रसता नाप लेते हैं. जो भारत सरकार के गिफ्ट किऍ मेघावी युवावर्ग मिल रहा है अमेरिका को मुफ्त में उसे काहे को लौटा रहे हैं समझ नही आ रहा है. अब मेरे जैसे लोग पिछले ८ साल में अमेरिका को जितना टैक्स दिया है कई लोग जीवन भर नही देते हैं. पढाने बढाने का खर्चा पढा कुल मिला कर ० अमेरिका पर. तो भैया काहे नही रख रहे हो जो मुफ्त में काम करने वाले गधे मिल रहे हैं. <br />दूसरा नुकसान होता है नौकरियाँ बाहर जाने का. समझो में बैंगलोर जाता हुँ. तो क्या काम तो करुँगा साफ्टवेयर का ही. अभी अमेरिका में पैसा रहता है, तब भारत में रहेगा. नुकसान किसका ? कम्पनियाँ फायदे में रहे्गी पर अमेरिकी समाज घाटे में. यह बात जिसकी समझ में आई वो है जॉन मैकेन पर बेचारा नेतागिरी में कुछ ज्यादा नही कर सकता. <br /><br />सभी जनता अब बकझक चालु करे और अपने विचार सामने रखे. <br /><br />वैसे मेरा हरा पत्ता ३ साल पहले मिल चुका है.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-114412242882996725?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1143347026577071342006-03-25T21:13:00.000-07:002006-03-25T21:23:46.606-07:00बचना ऐ हसीनो लो में आ गया.मित्र जनों कई दिनों के ईंतजार के बाद आपके शहर में फिर से आ गया है काली चरण ! <br />जीतू, स्वामी ऍट आल मित्र जनों को राम राम, दुआ सलाम. पापी पेट के लिऍ हम साफ्टवेयर कर्मी देस विदेस भटकते रहते हैं. तो हम भी रेगिस्तान से निकल कर मिनिसोटा होते हुऍ न्युयार्क पहुँच गऍ हैं. किस्सा कल लिखेंगे, कल पढियेगा ईस मिनि यायावारी के बारे में. रात के ११ और लम्बे सफर के बाद मेरे १२ बज रहे हैं. बाकी कल.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-114334702657707134?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1138458643407722182006-01-28T07:29:00.000-07:002006-01-28T07:30:43.583-07:00बस युँ हीआज मैने रंग दे बसंती देखी. बढिया है. देख लो बिना दिमाग पर जोर डाले.<br /> आजकल समय का बहुत टोटा हो गया है. नये काम पर करीब ११ घंटे रोज खप रहे हैं. आज समय मिला है तो मकान की ढुंढाई चल रही है. ईतनी ठंड में बाहर जा कर मकान देखने में बारह बज जाती है. ठंड में दिमाग पर भी ताला लग गया है, कुछ मसला ही नही मिल रहा है चेपने को. <br />ठंड में पीना हो तो बस "जैक डेनियल" के साथ कोक मिलाओ और मजे करो.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113845864340772218?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1137968104764943722006-01-22T15:14:00.000-07:002006-01-22T15:15:04.810-07:00लो मै॓ आ गया.काफी दिनो॓ के बाद आज लिखने का अवसर मिला है. अभी कुछ दिनों से मैं घर बदली में व्यस्त था. फिनिक्स की गरमी से उठ कर मिनिसोटा की सरदियों में. काफी उदास मौसम है. कडाके की ठंड है. पर क्या करो लालच है नौकरी का जो खीँच लाया है. जो लोग बरफ में नही रह रहे हैं उन सभी समझदारों को मेरा सलाम. कसम से किस बेवकूफ ने सोचा होगा ईतनी ठंड में बस्ती बनाने का. अगर कभी कार बंद हो गई ठंड में तो लगता है एंबुलैंस बुलानी पडेगी. <br />हर तरफ बरफ ही दिखाई देती है. सारा शहर बरफ से पटा पडा है. किसी भी चीज पर खुला हाथ रख दिया तो बारह बज जाती है. <br /><br />बाकी बाद में, कुछ पेट में दाना डाला जाए.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113796810476494372?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1136684387546283882006-01-07T18:38:00.000-07:002006-01-07T18:39:47.576-07:00आस्ट्रेलिया है सही चेम्पियनवैसे तो में क्रिकेट के बारे में ज्यादा लिखता नही हुँ क्योंकि सभी जनता जनार्दन रिडिफ,ईंडिया टाईम्स पर क्रिकेट चाट कर ही ब्लाग-बाँची करती है. पर जो जीत आस्ट्रेलिया ने साोउथ-अफ्रीका पर हासिल करी है वह मुझे काफी प्रेरणादायी लगी, ना सिर्फ खेल के मैदान में बल्कि जीवन के खेल में भी. प्रोत्साहन के योग्य तो स्मिथ भी हैं जिनहोने सीरिज बराबर करने के लिए सोच-समझ के एक चुनौती रखी रिकी पोंटिग के सामने. जो साहस, आत्मविश्वास, चुनौती का सामना करने का जज्बा आस्ट्रेलिया ने दिखाया है वो मेरी सोच में सच्चे चैंपियन बनने की राह दिखाता है जीवन के हर पहलु में. कई बार हमारे सामने जीवन विकल्प रख देता है. अकसर एक रास्ता होता है जो १-० के ड्रा वाली विजय की तरफ ले जाता है. काम तो चल ही जाएगा, सुरक्षित राह, बिना जोखम का, बिना परिवर्तन का. और दुसरा होता है द्रुगम जिसमें खतरे होते हैं, काबिलियत का इम्तेहान होता है पर जो विजय होती है वह सम्पूर्ण होती है. रिकी पोंटिग ने सिखाए हैं असली लीडर के गुण. देखें हमारे नेता (सॉारी क्रिकेटर) क्या करते हैं पाकिस्तान में.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113668438754628388?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1136267650113049252006-01-02T22:53:00.000-07:002006-01-02T22:54:10.133-07:00अधूरा पोस्ट२००६ की शुरुआत तो बहुत मजेदार रही. एक मित्र के यहाँ पार्टी में गए. बढिया खाना-पीना, कैरम, ताश आदि खेल और देर रात तक अंताक्शरी का कार्यक्रम चला. मौज करने का बहाना है, वर्ना सभी दिन एक से ही होते हैं. १ जनवरी की सुबह कौन सा सुरज पश्चिम से निकलता है.<br /><br />आज-कल मित्रों और घर के काम की वजह से बढिया बकर नही हो पा रही है यहाँ. दिमाग उलझा है जीवन के छोटे-बङे कार्यों में, संधर्षों में. चल रहा है जितना ईन्दौर में छप्पन की चाट दुकानें. क्या है की जबर बकास निकालने के लिए दिमाग एक तरह की अघोरी बाबा उज्जैन वाले तरह की सोच में रहना चाहिए, तबही ईंसान का ध्यान दुनिया भर की बकवास में जाता है. जैसे मानो आप ट्रेन में जा रहे हों तो अगर आप किसी किताब में लगे हैं तो आप का ध्यान साहनी साहब के बकवास ईश्तिहार पर जाने से तो रहा. तो अभी ईस पोस्ट को अधूरा मान के समाप्त करता हुँ. आज-कल में कुछ ज्यादा विषय सामग्री वाला पन्ना काला करुँगा.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113626765011304925?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1135828767413810892005-12-28T20:59:00.000-07:002005-12-28T20:59:27.593-07:00नए साल के लक्षय१)अबके जो नौकरी ली है अगर निकाला नही गया तो कमसकम साल भर यहाँ पर काम करुँगा. <br />२)साल भर किराए के मकान में रहुँगा नही तो कमसकम ६ महीने तो रहुँगा ही. जो मजा दूसरों को कङकती ठंड में फोन करके बोलने का है "दद्दु पानी बह रहा है, ठीक करो" वह मकान मालिक बनने के सिरदर्द में कहाँ.<br />३)हर हफ्ते कमसकम ३ - ४ घंटे वर्जिश करुँगा. पूरे जनवरी नही तो पहले २ हफ्ते तो करुँगा ही.<br />४)हर महीने २ किताबें पढुँगा. १ काल्पनिक और दूसरी अकल्पनिय :) (फिक्शन और नाॅन-फिक्शन)<br />५)हर हफ्ते १ चिठ्ठा प्रविष्ठी जरुर लिखुँगा. <br />६)हर सप्ताहंत पर ५ फोटो जरुर निकालुँगा.<br />७)हर महीने १ सप्ताहंत पर बाहर घूमने जरुर जाऊँगा.<br />८)घर पर दिन में ज्यादा से ज्यादा १ घंटा कम्पयुटर पर बिताऊँगा.<br />९)जो तीर-कमान का कोर्स में ३ साल से करने का सोच रहा हुँ इस साल गर्मियोँ में जरुर करुँगा.<br />१०)बेटे को गर्मियोँ में हर महीने १ बार मछली पकङने जरुर ले जाऊँगा.<br /><br />सबसे जरुरी अगले साल की विश लिस्ट दिसंबर के पहले हफ्ते तक जरुर बना लुँगा. <br />आप भी बताएँ की आप के क्या लक्षय हैं नए साल के लिए.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113582876741381089?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1135749874238773912005-12-27T23:01:00.000-07:002005-12-27T23:04:34.256-07:00क्या बात है, आने वाली नए साल की पहली रात है.यह प्रविष्ठी है मेरे पिछले साल की प्रमुख गतिविधियों का लेखा-जोखा. साल शुरु हुआ था एक नए काम से. ८-९ महीने का अनुबंध था जो मित्र के बार - २ बोलने पर ले लिया था. काम रुचिकर रहा, दोस्तों के साथ काम करके मजा भी बहुत आया, सीखने भी बहुत कुछ मिला. अभी - २ नयी नौकरी मिल गई है जिसमे फिर कुछ पुराने यार दोस्त मिल रहे हैं. कार्य एकदम नए क्षेत्र में है. कुछ नया करने - सीखने को मिलेगा ऐसी उम्मीद है. <br /><br />बेटा ईस साल और बढा हो गया है. साल की शुरुआत में चिन्ता थी की ३ साल का हो गया और फर्राटे से बोल नही रहा. अब समस्या है की चुप ही नही होता. सुबह से शाम तक लगातार बोलता रहता है. मेरा बेटा पैदाईशी टीनऐजर है. हर बात की वजह जरुरी है समझना. बहस में अव्वल नम्बर. हर मसले को सही से बच्चा लाॉॅजिक में समझाओ नही तो हजार सवाल झेलो. हमसे ईस साल झेला नही गया तो हमने बता दिया की सैंटा असली जिंदगी में नही है. सुन कर जितना सुकून उसे मिला मानो गया में बुद्ध को महाप्रयाण मिल गया हो. जहाँ सुन्दर बालाएं दिखीं छोटे कपङों में वहीं पर बालक पास जाने का भरसक प्रयास शुरु कर देता है. ४ में यह हाल है १४-१५ में क्या होगा. माताजी के स्वास्थय में इस वर्ष काफी सुधार आया. यहाँ आकर रहीं ६-७ महीने तो मन प्रसन्न रहा. श्रीमती जी के नसीब में ईस साल भी एक बार साल में मेरे हाथ का चाय या खाना मिलने का सपना अधूरा रह गया. मेरा मानना है की<br />जिसका काम उसी को साझे<br />और करे तो डंका बाजे<br />पहले ही फैल जाओ तो कभी चान्स ही ना छोङो. आशीष ध्यान रखें.<br /><br />घूमने में ईस साल यूटाह और कोलराडो की हसीन वादियाँ और पहाङ, लोस एन्जलस का डिजनीलैंड, लास वैगास के केॅसीनो और शो, नयूयोर्क की क्रिसमस की चकाचौंध, सैन फ्रांसिसको के पास के विनयार्ड की सैेर, ग्रांड कैनयन के विशाल गढ्ढे का दर्शन प्रमुख गतिविधियाँ रहीं. भारत जाने का कार्यक्रम तो अब २००८ में ही बनेगा.<br />पुरानेॅ शौक में क्रिकेट बरकरार रहा. शतरंज और सु-डोकु का शौक भी चर्रा रहा है. सेहत के लिए अब टैनिस में भी मन लगा रहा हुँ. दिन में २४ घंटे ही क्यों होते हैं?<br />ब्लागिंग का चस्का और बढ गया है. भारतीय मूल के लेखकों के भेजे से निकली खिचङी पढ कर खबरें, नए विचार, मनोरंजन सभी मिला. बहुत किस्मत की बात लगी इतने सारे नए मित्रों का मिलना. बेबाक विचारों का आदान-प्रदान, नोंक-झोंक सभी कुछ आनंददायी रहा. <br />सेहत के मामले में वर्ष कुछ सही नही रहा. कोहनी में चोट लगने के कारण २-३ महीने दर्द रहा. वजन भी सेनसेकस के समान बढा. पर जब खेलना शुरु तो वजन भी कम होने लगा. बाबा रामदेव की सी.डी. मित्र से मिल गई है जिसके साथ १ तारीख से नियम से कसरत करने का ईरादा है. <br /><br /> आज थकान हो रहीं है. कल आगे लिखुँगा. डायरीनुमा प्रविष्ठी है, बोर हुए तो क्षमा.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/9337690-113574987423877391?l=hankabaji.blogspot.com'/></div>Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com3