tag:blogger.com,1999:blog-9028675.post-1099697731109839132004-09-03T18:34:00.000-04:002004-11-05T18:35:31.110-05:00हमराही डरो नहीं होंगे कामयाबहमराही डरो नहीं होंगे कामयाब हमराही डरो नहीं होंगे कामयाब मुश्किलें हर क़दम हैं डगर-डगर लाखों हाथ एक साथ साथ हैं मगर दूर हैं मंज़िलें कर न तू फ़िकर चीर के अँधेरी रात लायेंगे आफ़ताब ||स्थायी|| चल रे मिलके चल, धुन बजे मगन उमड़-घुमड़ कर छा रहे बादल अब हमें तो दर्द का न ख़ौफ़ है ज़रा हम हरी-भरी बनायेंगे वसुन्धरा अब तो न रुकना अब तो न थकना मुड़ के देखो ना चुकाना है हमें तो अब पुराना हर हिसाब ||v9yhttp://www.blogger.com/profile/07973018577021600722noreply@blogger.com