tag:blogger.com,1999:blog-8932637.post-1102870558456618562004-12-12T08:44:00.000-08:002004-12-12T21:42:21.736-08:00ग़ज़ल - हामिद बहराईचीइन आंखों में बरसात का आंगन न मिलेगा
<br />तुम लौट के आओगे तो सावन न मिलेगा
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<br />कि रोके से रुकेंगे न ये बहते हुए आंसू
<br />जब जाके इन्हें आपका दामन न मिलेगा
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<br />कान्हा तेरी मुरली की सदा कौन सुनेगा
<br />राधा तो मिलेगी यहां मधुबन न मिलेगा
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<br />'हामिद' न यकीं आए तो तुम देख लो आके
<br />घर पे मेरे टूटा हुआ बर्तन न मिलेगा
<br />Ramannoreply@blogger.com