tag:blogger.com,1999:blog-8465817.post-1112703948186642622005-04-05T19:25:00.000+07:002005-04-05T19:25:00.000+07:00पंकज जी,और गुरुदेव,आप लोगों की मिलती-जुलती प्रतिक्...पंकज जी,और गुरुदेव,आप लोगों की मिलती-जुलती प्रतिक्रियाएँ पढ कर,हमें,दुष्यन्त कुमार का एक शेर याद आ गया:<BR/>"दुख को बहुत सहेज कर रखना पड़ा हमें,<BR/>सुख तो किसी कपूर की टिकिया सा उड़ गया ।"<BR/><BR/>प्रतिक्रियाओं के लिए धन्यवाद स्वीकार करें।<BR/><BR/>राजेशराजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.com