tag:blogger.com,1999:blog-8266441011250183695.post-40718963441585003462008-03-21T21:37:00.000+05:302008-03-21T21:37:00.000+05:30चुराता न्याय जो रण को बुलाता भी वही हैयुधिष्ठिर स्...<A><B>चुराता न्याय जो रण को बुलाता भी वही है<BR/>युधिष्ठिर स्वत्व की अन्वेशणा पातक नहीं है<BR/>नरक उनके लिए जो पाप को स्वीकारते हैं<BR/>न उनके हेतु जो रण में उसे ललकारते हैं</B></A><BR/><BR/>इस कविता की ये लाइनें तो, मैं भी गुनगुनाया करता था ! धन्यवाद मित्र, स्मरण दिलाने के <BR/>लिये ! गोचर में <I>ललकार आपकी !,</I>इस कविता से भी अधिक खूबसूरत है ! <I><B>बधाई हो,</B></I><BR/><B>चलो , आप राखी के साथ ही बने रहो ,<BR/>हमको तो यह खली भी यहाँ पर खल रहा है !</B><BR/><BR/>नमस्कार !डा० अमर कुमारhttp://www.blogger.com/profile/12658655094359638147noreply@blogger.com