tag:blogger.com,1999:blog-8231814.post-62139177254914710342007-04-14T01:19:00.001+05:302007-04-14T01:19:08.368+05:30आज लिखे कुछ नये शब्द तुम्हारे लिये<span style="font-size:100%;">क्यों न छूटता चलूं मैं<br />जड़ संवादों की<br />अंतहीन बेड़ियों से<br /><br />क्यों न मैं विचरूं मुक्त<br />सह-सार की खोज में<br />इंकार के<br />ऊंचे दरख्तों के पीछे<br /><br />क्यों न परछाई बन<br />मैं साथ हो जाऊं,<br />तु्म्हारी आंखों के सामने<br />हर क्षण<br /><br />तुम्हारा अस्तित्व<br />तु्म्हारा अहसास<br />अब परे है तुम से<br /><br />क्योंकि मेरे मन में<br />तुम्हारी<br />एक नई परिभाषा<br />जन्म लेती है हर सांझ</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8231814-6213917725491471034?l=anandkjain.blogspot.com'/></div>कृतिकारnoreply@blogger.com3