tag:blogger.com,1999:blog-820818569436833942008-07-24T23:07:36.063-07:00आयुषवेदडॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comBlogger110125tag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-69471469630576583792008-07-24T23:06:00.000-07:002008-07-24T23:07:36.092-07:00बच्चे की दो बार हड्डी टूट चुकी है....Adarniya Doctor Saheb,<br />Aapke blog http://aayushved.blogspot.com/ par main apne bete ki ek samasya ke baare mein aapki salah lene chahta hoon. Uski umra 20 maheene ki hai aur usse ab tak 2 baar fracture ho chka ho, doctors ka kehna hai ki usse calcium ki kami hai. Unhone kucch test bhi karane ke liye kaha hai taaki sahi-sahi pata lagaya ja sake ki kami kahan hai? In tests ko bhi hum sheeghra karayenge.<br />Aapka bahut abhar hoga yadi aap is sthiti mein kuchh samadhan sujhayen.<br />Dhanyawad, Pankaj<br /><span style="color:#ff0000;">पंकज जी, आपकी बेटे की उम्र मात्र २० माह है और दो बार फ़्रैक्चर हो चुका है तथा डाक्टर्स ने आपको बच्ची के कुछ टैस्ट कराने के लिये कहा है ताकि समस्या समझ आ सके यानि कि इस तरह के डाक्टर्स पूरी तरह से पैथोलाजिकल रिपोर्ट्स के आधार पर ही रोग निश्चय करते हैं और यदि मानवीय भूल या मशीनी गड़बड़ी के कारण रिपोर्ट गलत आ गयी तो गलत दिशा में उपचार के कारण मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। इन डाक्टर्स में क्या इतनी अक्ल नहीं रहती कि ये अपने विवेक के आधार पर रोग-विनिश्चय कर सकें? यदि आप मेरी सलाह को गम्भीरता से लेते हैं तो व्यर्थ में फालतू टैस्ट करवा कर परेशान होने के स्थान पर बच्चे को निम्न दवाएं लगभग तीन माह तक दें, दरअसल अनेक कारणों से बच्चों की अस्थियों में कुछ हद तक भंगुरता आ जाती है किन्तु इनके पीछे मुख्यतः कुपित होने वाला दोष वात ही रहता है--<br />१. कुक्कुटाण्डत्वक भस्म आधी-आधी रत्ती दिन में दो बार एक चम्मच शहद के साथ चटाएं।<br />२. आभा गुग्गुल आधी-आधी गोली दिन में दो बार इसी प्रकार पीस कर शहद में चटाएं।<br />इन दवाओं के सेवन से बच्चे की हड्डियां तो मजबूत होंगी ही साथ ही वह पुष्ट भी होगा।<br /><br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-62888141700080864242008-07-24T12:06:00.000-07:002008-07-24T12:08:21.031-07:00मोटापे की समस्या....Namaskar Sir,<br />Main 26 saal ki hoon.Main ek house wife hoon.Mere height 5'4''hai aur weight 70kg hai.Mujhe do samasyain hain.Pehle to Sir main apane Motape ko le kar pareshan hoon.Mera khana niyamit aur santulit hai.Niyamit 10-15 minute vyam bhi karti hoon.Per samajh mein nahi aata ki main moti kyon hoti ja rahi hoon.main ise lekar bahoot pareshan hoon.Doosri samasya yeh hai ki main aur mere pati 7 mahine se bachhe ke liye try kar rahe hain per hame safalta nahi mil pa rahi hai,doctors ke report bhi sabhi normal hain bas thoda iron ki kami hai isliye doctor ke kehane per jyada vyam nahi kar sakti.Humne doctor se bhi pucha ki kahin ye motape ki wajah se to nahi,per unhone BMI(Body mass index test) bhi kiya sab normal hai.Kya bachhe ke liye try karte samay kisi baton ka dhyan rakhna padhta hai?Kripya karke in dono samasyein ka kuch upaye batein.<br />Dhanyawad.<br />श्रीमती लकी<br /><span style="color:#ff0000;">समस्या के हल हेतु आप नियमित रूप से न्यूनतम छह माह से साल भर तक इन दवाओं का सेवन करें --<br />१ . मेदोहर विडंगादि लौह १ गोली + मेदोहर गुग्गुल २० गोली + त्रिमूर्ति रस १ गोली को दिन में तीन बार मेदारि पेय के दो चम्मच के साथ लें।<br />२. आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली दिन में दो बार भोजन के बाद गर्म जल से लें।<br />दवाएं खाली पेट न लें। अन्य किसी औषधि की आवश्यकता नहीं है।<br /><br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-16745671258404803782008-07-16T22:52:00.000-07:002008-07-16T22:53:59.252-07:00गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं,खांसी बहुत रहती है।डॉ साहब नमस्कारमेरी बेटी को खांसी बहुत रहती है। खांसी सूखी है। बहुत इलाज करा चुका हूं। एलोपैथी भी और होम्योपैथी भी। कुछ फायदा होता है बाद में मर्ज फिर वही हो जाता है। बेटी की उम्र साढ़े आठ साल है। बचपन से ही उसके गले में मटर के दाने के आकार की दो गांठे हैं। मैने मांटूर टेस्ट भी तीन बार करा लिया है। रिपोर्ट निगेटिव आती है। प्राइमरी कॉप्लेक्स की संभावना डॉक्टर बताते हैं मगर रिपोर्ट निगेटिव है। गले में टांसिल भी हैं। क्या इससे उसका विकास रुक सकता है। मैं काफी परेशान हूं। बेटी का किसी भी काम में मन नहीं लगता या यूं कहूं वह किसी भी काम में तल्लीनता से नहीं जुटती। कांफीडेंस की भी कमी है। आखिर मैं क्या करूं और क्या इन लक्षणों का बीमारी से कोई संबंध में मुझे दिशा दें।योगेश जादौन, बीहड़<br /><span style="color:#ff0000;">योगेश जी,आपकी बेटी की समस्या को बहुत गम्भीरता से समझने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि आपकी बेटी की समस्या जीर्ण हो चुकी है किन्तु जिस तरह से डाक्टर संभावना के आधार पर अनुमान लगा कर चिकित्सा करते हैं उससे प्रतीत होता है कि ऐसे डाक्टर बच्चों को मात्र प्रायोगिक जंतु ही समझते हैं। बच्ची के दोष जीर्ण हो कर परस्पर क्लिष्ट आवरणॊं में पहुंच चुके होने के कारण ही ऐसा होता है कि यदि लाक्षणि उपचार दे दिया जाए तो कुछ समय के लिये लाभ हो जाता है किंतु फिर वही समस्या अधिक जोर से उभर आती है। आप बच्ची को आधुनिक परीक्षणों की कसौटी पर घिसवाना बंद करिये इन परीक्षणों की हकीकत मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। किसी भी कार्य में तल्लीनता न आने का कारण ही यह है कि बच्ची जब खांसी से परेशान है तो उस उम्र की बच्ची क्या बड़े से बड़ा हठयोगी भी परेशान हो जायेगा और उसकी तल्लीनता भंग हो जाएगी। टांसिल में सूजन होना तो सहज बात है कि इस परिस्थिति में वह हो ही जाएगी। आप बच्ची को निम्न उपचार न्यूनतम छह माह तक दें-<br />१ . रुदन्ती चूर्ण एक ग्राम + स्वर्णबसंत मालती रस १२५ मिग्रा + श्रंग भस्म १२५ मिग्रा. + सितोपलादि चूर्ण ५०० मिग्रा इन सबकी एक खुराक बना कर शहद के साथ दिन में इसी तरह तीन बार चटायें। दवा खाली पेट न दें।<br />२. शिला सिंदूर ६५ मिग्रा + कांचनार गुग्गुल एक गोली दिन में तीन बार वासारिष्ट के दो चम्मच के साथ दें।<br />सुपाच्य आहार दीजिये,बाजारू चीजों से परहेज कराएं। जल्दी-जल्दी उपचार बदलना भी घातक सिद्ध होता है यह ध्यान रखिये।<br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-1547047875062647122008-07-10T07:33:00.000-07:002008-07-10T07:34:21.224-07:00पांच-छह साल से पाइल्स से पीड़ित हूं........डाक्टर साहब नमस्कार<br />मेरी उम्र इस समय 40 साल है। समस्या यह है कि मैं पिछले करीब पांच-छह साल से पाइल्स से पीड़ित हूं। शुरू के दिनों में कभी-कभार खून आने पर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। यो यों कहिए कि मुझे पता भी नहीं चला। घर-परिवार में पहले से किसी को भी यह बीमारी थी ही नहीं। जब पता चला तो मैंने एलोपैथी के डाक्टरों को दिखाया। उन्होंने कुछ दवाइयां दीं और बताया कि जब दिक्कत हो, इनका इस्तेमाल करें। उनका कहना था कि यह पहली स्टेज है। दवाइयां लेता रहा। कई बार नहीं भी ली। इसी दौरान शहर बदलते रहे। कभी कहीं, कभी कहीं। दूसरी ओर अनदेखी, आलस और अकड़ से परेशानी बढ़ती चली गई। अब तो सप्ताह में तीन-चार दिन लेट्रिन के साथ खून आता है। धार निकलती है। खून के कतरे भी आते हैं। एक-दो बार तो खून के रिसने से अंडरवियर और पेंट भी खराब हो गया। तब से डर बढ़ गया है। आपको यह भी बता दूं कि मैंने दिक्कत की जानकारी होने के बाद से मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाली सब्जियों का इस्तेमाल बंद कर दिया है। पहले भी बाजार में कम ही खाता था। अब न के बराबर है। खाने में कोई खास शौक नहीं। पत्नी जो बनाती है, खा लेते हैं। पानी खूब पीता हूं। दिनचर्या (मेरे ही हिसाब से) के मुताबिक सुबह 9-10 बजे उठता हूं। अखबार पढ़े, फ्रेश हुआ और एक गिलास दूध पीकर आफिस चला गया। दोपहर तीन बजे के आसपास घर पहुंचकर खाना खाता हूं। शाम को पांच बजे फिर आफिस के लिए। रात में 12-1 बजता है, लौटने तक। पहले खाना नहीं ले जाता था। अब ले जाता हूं। 11 बजे के आसपास खा लेता हूं। रात में लौटने पर एक गिलास दूध फिर पीता हूं। हां, यह बताना भी जरूरी है कि मैं गुटखा बहुत खाता हूं। सप्ताह में छुट्टी वाले दिन तीन-चार पैग शराब (मैजिक मोमेंट्स) पीता हूं। कभी-कभार दो दिन लगातार हो जाती है। इस समय मैं होम्योपैथी का इलाज करवा रहा हूं। अच्छे और नामी डाक्टर हैं। करीब तीन महीने होने को आए। कई बार लगता है कि अब ठीक हो रहा हूं, लेकिन यह विश्वास कुछ समय बाद खडिंत होने लगता है। उन्होंने हालचाल पूछ कई बार दवाइयां भी बदलीं। पिछले सप्ताह डाक्टर साहब ने हालचाल पूछ कर 15 दिन की दवाई दी। सकारात्मक नतीजा न आने से डाक्टर साहब भी थोड़ी हैरत में लगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह इस समस्या को ठीक करने के बाद ही पैसे लेंगे। डाक्टर साहब की सलाह पर कुछ दिन पहले ही मैंने गुटखा कुछ कम किया है। अच्छा होने केलिए (बाद में पीने की पाबंदी खुद ही हटाने की इच्छा से भी ) शराब नहीं पी। मेरी सेहत पहले भी खास अच्छी नहीं थी। हां, कोई समस्या नहीं थी। लेकिन, इधर लगातार कमजोरी महसूस होती है। पेंट भी ढीली हो गई हैं। कमर पिचक गई है। चेहरे पर बुढ़ापा नजर आने लगा हैं। बाल गिर चुके हैं। अधगंजे जैसी स्थित है। सप्ताह भर से खून की धार तो नहीं निकल रही। खून आ रहा है। कतरे भी आ रहे हैं। इलाज से भरोसा टूट रहा है। आपरेशन कराने की भी सोची। कई लोगों ने बताया कि यह कारगर नहीं रहता है। मैंने पूरी कहानी लिख दी है। मौजूदा परिस्थितियों में मुझे क्या करना चाहिए? दिनचर्या और दिक्कत के लिहाज से सलाह और औषधि के लिए आप के भरोसे हूं।<br />प्रदीप मिश्र<br /><span style="color:#ff0000;">प्रदीप भाई,बड़ा आश्चर्य है कि आप खुद मुझे बताते जा रहे हैं कि गुटखा बहुत खाता हूं ,कभी-कभी शराब भी पीता हूं और आपकी दिनचर्या भी कुछ खास स्वास्थ्यकर नहीं है। डाक्टर आपका मन रखने के लिये आपको जो भी दे रहे होंगे वह अस्थायी प्रभाव ही दिखाएगा क्योंकि आप खुद ही अपनी जान के दुश्मन बने बैठे हैं। आप स्वयं पत्रकार है तो भली प्रकार जानते हैं कि अच्छे से अच्छा गुटखा भी स्वास्थ्य के लिये कितना हानिकर है तो अपने ऊपर दया करें और इसे कम नहीं बल्कि सख्ती से बंद कर दें(अगर संभव न हो तो दवाएं व्यर्थ होंगी)। गनीमत है कि बस बुढ़ापा ही दिख रहा है कैंसर के यमदूत नहीं दिख रहे। आपको होम्योपैथी या एलोपैथी नहीं बल्कि आयुर्वेद के साथ सिम्पैथी की जरूरत है। आप खुद जहर खाते रहें और फिर इलाज कराते रहें तो तीन माह क्या जीवन भर भी चाहें तो लाभ न होगा। आप निम्न उपचार लेना प्रारंभ करें,इस बार आपका भरोसा नहीं टूटेगा--<br />१ . नीम का तेल १०० मिली + १० ग्राम कपूर + १० ग्राम पिपरमिंट(यह पान में ठंडक के लिये मिलाया जाता है)। इस मिश्रण के दो बराबर भाग अलग-अलग शीशियों में भर लें। एक भाग को स्थानिक लेप के लिये प्रयोग करें यानि मलद्वार में अंदर तक आहिस्ते से उंगली से लगाएं और दूसरे भाग में से रो्ज सुबह शौच से निपटने के बाद चार बूंद के बताशे में भर कर निगल लें व आधे घंटे तक पानी न पियें।<br />२ . शुभ्रा भस्म २५० मिग्रा किशमिश में भर कर नाश्ते के बाद व शाम को छह बजे(या आसपास सुविधानुसार) पानी से निगल लें।<br />३ . रात्रि भोजन के बाद दो चम्मच त्रिफ़ला चूर्ण एक कप गर्म जल में घोल कर पी लें।<br />४ . अश्वगंधारिष्ट + अंगूरासव मिला कर दो दो चम्मच दिन में तीन बार सेवन करें।<br />इस उपचार को पंद्रह दिन तक लेने के बाद शुभ्रा भस्म का सेवन यदि रक्त आना बंद हो गया हो तो बंद कर दीजियेगा अन्यथा पंद्रह दिन आगे जारी रखियेगा।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-16801259409291986622008-07-09T09:42:00.000-07:002008-07-09T09:43:14.246-07:00बचपन से ही जुखाम की काफ़ी शिकायत रही हैनमस्ते डाक्टर साहब,मेरी उम्र चालीस साल है। मुझे बचपन से ही जुखाम की काफ़ी शिकायत रही है। काफ़ी इलाज करा लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। बचपन में DNS का आपरेशन भी हुआ था। पहले सर्दी के साथ खांसी भी आती थी और नाक से पानी बहता था। अब नाक से पानी नहीं बहता लेकिन नाक जाम रहती है और सिर भारी रहता है। अब कभी खांसी नही होती। कुछ साल पहले मुझे जांडिस हुआ था जिसके बाद थोड़ा हाजमा बिगड़ गया। खासकर दूध नहीं पचा पाता। गैस और एसिडिटी रहती है। आफिस में बैठे-बैठे काम करने से वजन बढ़कर ७५ किग्रा. हो गया है। कमजोरी और दिन भर थकान महसूस होती है। थोड़ा चलने पर सांस भारी हो जाती है। अक्सर सर्दी और गैस की वजह से सिरदर्द होता है जिसे दूर करने के लिये combiflam की गोली खा लेता हूं। आभारी रहूंगा अगर कोई इलाज बता सकें। हो सके तो ये भी बताएं कि क्या दवाएं बनी-बनायी मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं?<br />सुभाष डी., मुम्बई<br /><span style="color:#ff0000;">सुभाष जी,मुझे आप जैसे लोगों के साथ बहुत आसानी होती है जो कि अपनी समस्या को विस्तार से लिखते हैं। आपने जो भी लिखा वह आपकी समस्या को अच्छे तरीके से स्पष्ट करता है। आपके दोष को मैं इस तरह से बता सकता हूं कि कफ़ के ऊपर पित्त का आवरण है जिसके कारण आप इस तरह परेशान हैं और मुझे पूरी उम्मीद है कि ये पित्त की समस्या का कारण आपको पूर्वकाल में हुआ पीलिया रोग रहा है, जोकि उपचार से ठीक तो हो गया किन्तु अपना प्रभाव जाते जाते आपकी देह पर छोड़ गया। चिन्ता की बात नहीं है आप निम्न उपचार लें और यकीन मानें कि आप शतप्रतिशत स्वस्थ हो जाएंगे किंतु बढ़े हुए वजन के लिये आपको नियमित व्यायाम करना आवश्यक है। आप यदि चाय-काफ़ी का सेवन करते हों तो बंद कर देना आपके लिये हितकर रहेगा साथ ही धूम्रपान भी आपके लिये अपथ्य है।<br />१ . त्रिफला चूर्ण रात्रि भोजन के बाद एक चम्मच हल्के गर्म जल से सेवन करें।<br />२ . कामदुधा रस(साधारण) एक-एक गोली दिन में तीन बार सुबह दोपहर व रात्रि को साधारण जल के साथ सेवन करें।<br />३ . सितोपलादि चूर्ण दो ग्राम को शहद(मध या honey) के साथ दिन में तीन बार सेवन करें।<br />COMBIFLAM का सेवन तत्काल बंद कर दीजिये, दवा के नाम पर आप जो खा रहे हैं वह आपके स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रहा है। इस दवा(?) का अक्सर सेवन आपकी किडनी का भयंकर नुकसान करता है। आप इस उपचार को एक माह तक लें फिर आप देखिये कि आप स्वस्थ महसूस करेंगे। यदि आप दूध पीना चाहते हैं तो एक गिलास दूध में तीन छुहारे(खारिक) की गुठली निकाल कर उबालें फिर छुहारे चबा लें और दूध पी लीजिये। आप इस तरह दूध की थोड़ी मात्रा से शुरू कर सकते हैं। ये दवाएं आपको आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर सरलता से मिल जाएंगी।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-11761945133204311922008-07-08T05:46:00.000-07:002008-07-08T05:48:55.915-07:00पत्नी मात्र २८ साल की उम्र में बीमारियों का गोदाम बन गयी हैडाक्टर साहब,नमस्ते<br />मेरी पत्नी को पिछले चार माह से बहुत कमजोरी महसूस होती है, आंखो से सामने अंधेरा छा जाता है, हाथ पैरों के तलवों में जलन होती रहती है, आंखो के नीचे काले घेरे बन गये हैं, चक्कर आते हैं, पेड़ू में भारीपन महसूस होता है,भूख कम हो गयी है, प्यास ज्यादा लगती है, किसी काम में मन नहीं लगता, स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया है, कमर में दर्द होता रहता है, योनि से सफेद पानी जैसा पतला दूधिया सा स्राव बहता रहता है; कुल मिला कर मेरी पत्नी मात्र २८ साल की उम्र में बीमारियों का गोदाम बन गयी है। मेहरबानी करके यदि उसकी इन सारी तकलीफ़ों का आयुर्वेद में कोई इलाज हो तो बताइये।<br />उमेश तोमर,ग्वालियर(म.प्र.)<br /><span style="color:#ff0000;">उमेश जी, आप अपनी पत्नी की बीमारी के ढेर सारे लक्षणों से क्षुब्ध हो गये हैं। आपको प्रतीत हो रहा है कि ये सारी अलग-अलग बीमारियां हैं। इस बारे में स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये सब मात्र एक बीमारी "श्वेत प्रदर" के लक्षण हैं। यदि आपने इसका इलाज कराया है और कुछ दिन बाद फिर वही लक्षण उभर आये तो मैं बताता हूं कि वे दवाएं मात्र लक्षणों काउपचार कर रहीं थीं मूल कारण को समझा ही नहीं गया था। सबसे पहले आप अपनी पत्नी को नीम के पत्तों के काढ़े से एक सप्ताह तक योनि में डूश(पिचकारी नुमा यंत्र से योनि के अंदर तक धुलाई करने को डूश लेना कहते हैं) लेने को कहें। खान-पान पर विशेष ध्यान दीजिये तेज मिर्च मसाले, गरिष्ठ भोजन, चायनीज व्यंजनों तथा बाजारू साफ़्टड्रिंक्स से सख्त परहेज करें, यदि इन पदार्थों का सेवन करा तो औषधियों का कोई लाभ न होगा। अब निम्न दवाएं दें-<br />१ . प्रदरान्तक रस १० ग्राम + मधुमालिनी बसन्त रस ५ ग्राम + कुक्कुटाण्ड्त्वक भस्म ५ ग्राम + स्वर्ण बंग ५ ग्राम + प्रवाल पिष्टी ५ ग्राम इन सभी को मिला कर इतना घोंटिये कि स्वर्ण बंग की चमक दिखना बंद हो जाए। इसके बाद इस पूरे मिश्रण की चालीस बराबर पुड़िया बना लीजिये व एक-एक पुड़िया शहद के साथ सुबह-रात को चटवाएं तथा ऊपर से दूध पिला दें।<br />२ . सफेद मूसली १० ग्राम + माजू १० ग्राम + माई १० ग्राम + मोचरस १० ग्राम + अशोक छाल १० ग्राम + चिनिया गोंद १० ग्राम + इलायची १० ग्राम + संगजराहत २० ग्राम + तालमखाना २० ग्राम + चिकनी सुपारी ३० ग्राम + मंजीठ ३० ग्राम + सिंघाड़े का आटा ५०० ग्राम + खरेटी २५० ग्राम + गाय का घी एक किलो तथा इन सबके बराबर वजन में खांड ले लीजिये। पहले गोंद को घी में भून लीजिये व बारीक पीस लीजिये। सिंघाड़े के आटे को भी हल्का सा भून लीजिये। अब सबको मिला कर छोटे-छोटे लड्डू बना लीजिये। एक-एक लड्डू का सेवन सुबह शाम दूध के साथ करवाइये।<br />इस पूरे उपचार को दो माह तक चारी रखिये पहले ही सप्ताह में आश्चर्यजनक लाभ दिखाई देगा किन्तु स्थायी लाभ के लिये दो माह तक प्रयोग करवाएं।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-997373551223631172008-07-07T08:29:00.000-07:002008-07-07T08:30:21.323-07:00बाल काफ़ी तेजी से सफ़ेद होना शुरू हो गए हैंडाक्टर साहब नमस्कारमेरी उम्र २३ साल है. उसकी खुराक सामान्य है. दिनचर्या साधारण है मैं एक काल सेंटर में काम करती हूं । वहां कभी कभी नाइट शिफ़्ट भी करना होता है। मैं अक्सर भूख लगने पर वहां उपलब्ध कराए जाने वाला फ़ास्ट फ़ूड खा लिया करती हूं, जो कि मुझे पसंद भी है। मेरी समस्या है कि पिछले छह माह से मेरे बाल काफ़ी तेजी से सफ़ेद होना शुरू हो गए हैं। बाकी एम.सी. वगैरह की कोई समस्या नही है सब सामान्य है। कोई उपचार बताएं क्योंकि मैं बालों में रंग रोगन लगाना नहीं चाहती ,सुना है उससे बचे-खुचे बाल भी सफेद हो जाते हैं और फिर जीवन भर उस खिजाब को लगाना पड़ता है।<br />सुवर्णा माली,जळगांव<br /><span style="color:#ff0000;">सुवर्णा बहन,आपकी समस्या का कारण आपकी फ़ास्ट फ़ूड की पसंद है। आप चिन्ता न करें आपको कोई खिजाब या बालों को रंग नहीं लगाना पड़ेगा। सबसे पहले आप अपनी खाने की आदत पर प्रतिबन्ध लगाएं और फिर निम्न उपचार को लगातार कम से कम तीन माह तक लीजिये और अपेक्षित परिणाम आने पर आगे जारी रखिये --<br />१ . अमलतास का गूदा १५ ग्राम दो कप पानी में उबालें व उसे सुबह सुबह नित्य कर्म से निपटने के बाद पी लें।<br />२ . नाश्ते के बाद आरोग्यवर्धिनी बटी २-२ गोली सुबह शाम दूध के साथ लें।<br />३ . गुडूची(गिलोय या गुळवेल नाम से भी जानी जाती है) का चूर्ण + नीम के पत्तों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें व भोजन के बाद दोनो समय आधा-आधा चम्मच जल से लिया करें।<br />४ . सुबह शाम नाक के दोनो छिद्रों में भ्रंगराज तेल की चार-चार बूंदें डालिये।<br />आपको आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिलेगा बस नियम से उपचार जारी रखिये।<br /><br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-38178857927213309752008-06-29T12:28:00.000-07:002008-06-29T12:29:12.893-07:00पखाना नही होता है सप्ताह में एक बार ही बस.......डाक्टर साहब नमस्कारमेरी बेटी २२ साल की है. उसकी खुराक सामान्य है. एक समय में ३ रोटी खाती है. उसे पखाना नही होता है. सप्ताह में एक बार. उसकी यह दिक्कत पिछले ५ साल से हैं. ज्यादा मसाला हमलोग नही खाते हैं. घर से बाहर का खाना कम ही खाती है. कुछ दिनों के लिए एलोपथिक दवाई ली. पहले पहल दवाई ने काम किया. अब वो भी नही काम कर रहा. आप कुछ निदान बताये?अग्रिम धन्यवादराजेश रोशन -- Rajesh Roshanhttp://rajeshroshan.com<br /><span style="color:#ff0000;">राजेश साहब,आपने बताया कि बिटिया की उम्र २२ वर्ष है किन्तु मलत्याग हेतु उचित वेग नही आता और जबकि वह भोजन सामान्य रुप से ले ही रही है तो स्वस्थ शरीर में भोजन ग्रहण करने के बाद पाचन की क्रिया पूर्ण होने के दौरान विभिन्न आवश्यक तत्त्वॊं का आंतो द्वारा चूषण कर लिया जाता है और शेष रहे पदार्थ को मल के रूप में आकुंचन-प्रकुंचन गति द्वारा आगे बढ़ा कर मलाशय तक पहुंचा दिया जाता है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो स्वाभाविक है कि यह दर्शाता है कि कुछ ऐसा है जोकि असामान्य व रुग्ण है। आपने समस्या को तनिक संक्षिप्त में लिखा है और कुछ आवश्यक बातों का जिक्र नहीं कर पाए हैं जैसे कि क्या बच्ची का मासिक धर्म का चक्र सामान्य है? एलोपैथी की कौन सी दवा दी गयी थी जो कि अब कारगर नहीं है? क्या पेट में दर्द या ऐसी कोई अनुभूति होती है? खैर इन बातों को जाने दीजिये मैं इस बीमारी को आयुर्वेद के निदान के अनुसार चिरस्थायी मलावरोध मानता हूं जो कि आंतो की मांसपेशियों की दुर्बलता के कारण होता है और इस समस्या में सबसे बड़ा नुकसान मरीज को तब होता है जब उसे तेज से तेज जुलाब या रेचक पदार्थ और औषधियां दी जाती हैं। इस तरह से मरीज का मर्ज और बढ़ कर बदतर हालत में आ जाता है। निम्न औषधियों को नियम से दें --<br />१ . नाराच रस एक गोली + विश्वतापहरण रस एक गोली दिन में तीन बार हलके गर्म जल से लें।<br />२ . अग्नितुण्डी बटी एक गोली + विजयपर्पटी २५० मिग्रा. + दशमूलषटफल घृत १० ग्राम को मिला कर एक पाव दूध से दिन में भोजन के बाद दो बार दें।<br />३ . कुमार्यासव २५ मिली + द्राक्षारिष्ट २५ मिली दिन में दो आर भोजन के बाद दें।<br />चोकर की रोटियां खाने में प्रयोग करें तथा चना भिगो कर उसमें नमक व अदरख मिला कर नाश्ते के लिये सुबह दें। इस उपचार को न्यूनतम एक माह तक धैर्यपूर्वक प्रयोग करें उसके बाद मेहरबानी करके मुझे सूचित करें यदि अधीर होंगे तो लाभ की संभावना न्यून होगी।<br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-77068056614010768632008-06-27T06:33:00.000-07:002008-06-27T06:34:50.054-07:00छह साल से हाथ के कांपने से परेशान हैं ...सर,मेरे बड़ी बहन के पति जिनकी उम्र ४५ वर्ष है पिछले छह साल से हाथ के कांपने से परेशान हैं जिसके कारण वे अपना लेखन कार्य तो त्याग ही चुके हैं और साथ ही अन्य कार्य भी बड़ी कठिनाई से कर पाते हैं।साथ ही उन्हें हल्का सिरदर्द भी लगातार बना रहता है जो कि कभी इतना तेज हो जाता है कि लगता है कि सिर में धमाका हो कर सिर फट जाएगा,,बेचैनी के साथ कभी उल्टी ही हो जाती है। सिरदर्द के लिये उन्हें रोज ही एलोपैथिक का दर्द निवारक ब्रूफेन लेना पड़ता है, हाथ के कांपने के बारे में तो तमाम डाक्टरों को उन्होंने दिखाया लेकिन निराशा ही हाथ आयी है। ये स्थिति उनके छोटे भाई के एक्सीडेन्ट में मौत के समाचार के मिलने के बाद से है। भोजन हजम नही होता है, बेमन से ही खाते हैं। कभी-कभी सीने में जलन और खट्टी डकारें आती हैं। अतिसंवेदनशील स्वभाव हो गया है बच्चों पर बहुत गुस्सा कर बैठते हैं। हमारी मदद करिये और कोई सटीक इलाज बताइये हम जीवन भर आभारी रहेंगे।<br />गोपीनाथ,झुंझनू<br /><span style="color:#ff0000;">गोपीनाथ जी आपके बहनोई जी की बीमारी पुरानी है अतः पंचकर्म से शोधन करना आवश्यक है अन्यथा लाभ की संभावना न्य़ून ही रहती है। अतः सबसे पहले उनके सारे शरीर को महानारायण तेल से स्वेदन करें और इसके लिये नाड़ी स्वेदन विधि अपनाना उचित होगा। जिसके लिये महानारायण तेल को बराबर जल के साथ मिला लें किन्तु तेल तो जल में मिलता नहीं है फिर भी इस मिश्रण को प्रेशर कुकर में डाल कर हल्की आंच पर रख दें जिससे कि उस पानि के गर्म होने पर उसके साथ में तेल की भी भाप निकले जिसे आप कुकर के ऊपर की सीटी हटा कर एक पाइप कस लें और इस पाइप के द्वारा सारे शरीर पर भाप से सेंक दीजिये। ऐसा दस दिन तक सुबह स्नान करने के बाद करें व फिर बदन को कपड़े से ढंक दें ताकि हवा न लगे। उसके बाद में बस्ति देना है जिसके लिये गौ मूत्र ३२ तोला + इमली का गूदा ८ तोला + पुराना गुड़ ८ तोला + सेंधा नमक एक तोला + सोया(सोवा) के बीजों का बारीक चूर्ण एक तोला लेकर भली प्रकार से मथ कर मिला लें व हल्का गुनगुना सुहाता सा गर्म इसको गुदा द्वार से एक सिरिंज के माध्यम से अन्दर पहुंचाइये(एनिमा देना इसी क्रिया की भांति है)। इस क्रिया को दस दिन तक सुबह नित्यकर्म से फ़ारिग होने के बाद करें। इसके बाद पुनः ऐसी ही क्रिया करनी है पर औषधि अलग रहेगी जिसके लिये वातहर तेल २० मिली + सोआ व मदन फ़ल का चूर्ण मिला कर पूर्ववत बस्ति क्रिया करें। रोगी को सीधा लिटा कर गुदा में औषधि प्रवेश करवा कर नितम्बों को चार-पांच बार थपथपाएं तथा रोगी को बताएं कि वह अपनी एड़ियों को नितम्बों पर पटके। यह बस्ति द्वारा दी औषधि एक से चार घन्टे में बाहर आती है। इसे छह दिन तक दें। महानारायण तेल की पतली धार बना कर शिरोधारा दे यह दो दिन तक करें।<br />निम्न औषधियां मौखिक सेवन के लिये दें--<br />१ अभ्रक भस्म १२५ मिग्रा + सूतशेखर रस २५० मिग्रा + प्रवाल पिष्टी २५० मिग्रा + गिलोय सत्व ५०० मिग्रा + स्वर्णमाक्षिक भस्म २५० मिग्रा इन सब की एक खुराक बनाएं व दिन में दो बार दूध के साथ दीजिये।<br />२ . भोजन के बाद चित्रकादि बटी एक गोली + अविपत्तिकर चूर्ण २ ग्राम + चंदनादि लौह २५० मिग्रा एक मात्रा दो बार दूध में अश्वगंधा पका कर खीर जैसा बना कर उससे लें।<br />३ . महावात विध्वंसन रस एक एक गोली + शिरशूलादिवज्र रस दो दो गोली पानी से दें।<br />इस पूरे उपचार को न्यूनतम दो माह तक दें।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-38844267158977846742008-06-23T06:24:00.000-07:002008-06-23T06:25:15.549-07:00ढेर सारी बीमारियां एक साथ हैं ऐसा लगता है.......डा. साहब आपके बारे में भड़ास से पता चला था। मै भड़ास का नियमित पाठक और कभी कभी लिख भी लेता हूँ। आपसे कुछ अपनी पत्नी (आयु 39 साल) के बारे चिकित्सीय राय लेना चाहता हूँ। मेरी पत्नी को निम्न परेशानियाँ रहती हैः-1. सुबह तथा रात लेटते ही पिण्डिलियों में दर्द रहता है।2. सुबह तलुओं में दर्द होता है।3. घुटने में अक्सर दर्द रहता है।4. पेड़ू (lower abdomen) आगे की तरफ काफी निकल रहा है।5. सिर के पिछले भाग में अक्सर दर्द रहता है।6. गले में खराश रहती है परन्तु कफ नहीं निकलता है।7. खाँसी रहती है।8. कमर में दर्द रहता है।9. माहवारी लगभग 24-25 दिन पर होती है तथा 2-3 दिन तक रहती है वहाव भी काफी कम होता है।10. सुबह-सुबह काफी डकार आती है।11. सोते-सोते अक्सर हथेलियाँ अकड़ जाती हैं।12. सोने मे अक्सर ऐसा महसूस होता जैसे किसी ने दाब लिया हो।13. भीड़-भाड़ वाली जगह पर एकदम बहुत तेज हाजत महसूस होती तथा उस समय गुदा मार्ग में काफी जलन होती है।14. पैरो में दवाने पर गड्डे पड़ जाते है।आशा है आप उचित मार्गदर्शन करेगें।प्रतीक्षा में(अजीत कुमार मिश्रा)<br /><span style="color:#ff0000;">अजीत भाईसाहब,आपने जो लक्षण लिखें हैं उनसे स्पष्ट पता चलता है कि ये लक्षण अचानक नहीं उपजे हैं और न ही ऐसा होगा कि आपने इनका उपचार न कराया हो क्योंकि जितने कुछ आप लिख रहे हैं वह दर्शाता है कि देह में वात का विकार है जिसमें कि अपान वायु के दोष की प्रबलता है और साथ ही कफ का आवरण भी है। इन लक्षणों के साथ ही उनकी भोजन के प्रति रुचि तथा पाचन भी सही न होगा जिसके बारे में आप कदाचित बताना भूल गए। इन सभी लक्षणों को मिला कर आप आधुनिक चिकित्सा के अनुसार किसी एक रोग का नाम नहीं दे सकते अतः एलोपैथी में उपचार संभव भी नहीं है। आप उन्हें पहले एक दिन सुबह नित्यकर्म से फ़ारिग होने के बाद नारियल का तेल तीन चाय के चम्मच यानि अनुमानतः तीस मिली. नाश्ते के स्थान पर दें और दिन में कुछ भी खाने को न दें यानि एक दिन मात्र इसी पर गुजारा करना है। अगले दिन सुबह इसी प्रकार मंजन से पहले हल्के गर्म जल में नमक मिला कर जितना अधिक पी सकें रख लीजिये व पिला दीजिये ताकि आसानी से मुंह में उंगली डालते ही उल्टी हो जाए व जो दोष पेट में संचित हों वे निकल जाएं। इसके बाद नाश्ते में दलिया अथवा साबूदाना दें और दोपहर में यधि भोजन करें तो इसी तरह से हल्का आहार लें। ध्यान रखिये कि चाय, काफ़ी,डबलरोटी, बिस्किट, बासी भोजन, दूसरे टाइम का रखा हुआ चावल,दही, मटर,गोभी,सभी प्रकार की खटाई, घुईंया(अरबी),भिण्डी, केला,सारे शीतल पेय तथा बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स आदि से सख्त परहेज रखिये। अब उन्हें अगले दिन से सामान्य आहार देना प्रारंभ करें तथा निम्न उपचार दें--<br />१ . नई इमली का गूदा व भिलावा(इसे मराठी में बिबवा और कई स्थानों पर भल्लातक कहते हैं) शुद्ध बराबर मात्रा में लेकर कूट लें ब २५० मिग्रा. वजन की गोलियां बना कर सुखा लें। एक-एक गोली दिन में तीन बार मट्ठे से दीजिये मट्ठा उपलब्ध न होने पर जल से दें। यदि इस औषदि को एक सप्ताह तक लगातार लेते हैं तो फिर तीन दिन के लिये बंद कर दें व ध्यान रखें कि जिस दिन दवा देने में विराम दे रहे हों उस दिन उन्हें नारियल की कच्ची गरी का लगभग १०० ग्राम सेवन अवश्य कराएं यह आप दिन में थोड़ा-थोड़ा करके करा सकते हैं,दूसरे व तीसरे दिन कोई आवश्यक नहीं है।<br />२ . कच्ची हरी हल्दी एक किलो छील कर कद्दूकस में घिस लें व ५०० ग्राम शुद्ध गाय के घी में भून लें + घी में भुना आधा किलो गेहूं का आटा जैसे कि हलुआ बनाने से पहले भूनते हैं + तगर ५०० ग्राम + बादाम की मींगी ५० ग्राम + चिरोंजी ५० ग्राम + अश्वगंध ५० ग्राम + सोंठ घी में भुनी ५० ग्राम; इन सबको घी से मिला कर लगभग एक छटांक वजन के लड्डू बना लें व एक-एक लड्डू सुबह शाम गर्म दूध से दें।<br />३ . सुबह निहारे मुंह एक चम्मच एलोवेरा का गूदा खिलाएं, पंद्रह दिन तक देने के बाद एक सप्ताह तक बंद कर दें।<br />४ . दशमूल क्वाथ एक-एक चम्मच दिन में तीन बार दें।<br />इस उपचार को दो माह तक लगातार दें, आशातीत लाभ होगा।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-31870916519684919252008-06-21T04:18:00.000-07:002008-06-21T04:19:46.915-07:00बाल झड़ रहे हैं.........मेरी उम्र २४ साल है और मेरे बाल बहुत तेजी से कम हो (झड़) रहे है और ७५ % से ज्यादा बाल सफ़ेद भी हो गए है. मुझे इसके निवारण का कोई उपाए बताइये. नवीन, मद्रास<br /><span style="color:#ff0000;">नवीन जी,बालों के झड़ने के अनेक कारण होते हैं। कभी ये पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण झड़ते हैं और कभी किसी बीमारी के लक्षण के रूप में तो कभी आपकी दिनचर्या की गड़बड़ी या ऊटपटांग सौन्दर्य प्रसाधनो का प्रयोग इनके झड़ने का कारण बनते है या इन्हें सफेद कर देते है। इसलिये पहले तो यह जान लेना जरूरी होता है कि क्या कारण मुख्य है जो इसके पीछे है। लेकिन फिर भी मैं आपको एक सामान्य उपचार बता देता हूं जो कि आपको लाभ देगा किन्तु आवश्यक है कि मूल कारण को दूर किया जाए, संतुलित आहार लिया जाए और दिनचर्या को नियमित करा जाए। आप निम्न उपचार लें --<br />१ . आरोग्यवर्धिनी बटी एक गोली + सप्तामृत लौह २५० मिग्रा + भ्रंगराज चूर्ण एक ग्राम इन सबको मिला कर शहद के साथ सेवन करें दिन में तीन बार।<br />२ . सुबह नित्य कर्म से फ़ारिग होने के बाद आधा चम्मच घीग्वार(ग्वारपाठा) जिसे एलोवेरा भी कहते हैं ,इसका गूदा खाएं व आधा घंटे तक पानी न पिएं।<br /></span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-61345024221360200802008-06-19T21:21:00.000-07:002008-06-19T21:29:19.034-07:00माताजी को लाभ हुआ....<a href="http://bp2.blogger.com/_MQfSflArwoU/SFsw5Mu1t9I/AAAAAAAAAEI/0fkPDrxFq9I/s1600-h/satish+mummy+arthritis.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5213814752839841746" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 568px; CURSOR: hand; HEIGHT: 391px; TEXT-ALIGN: center" height="300" alt="" src="http://bp2.blogger.com/_MQfSflArwoU/SFsw5Mu1t9I/AAAAAAAAAEI/0fkPDrxFq9I/s400/satish+mummy+arthritis.jpg" width="468" border="0" /></a><br /><div></div><span style="color:#ff0000;">भाई साहब,प्रसन्नता की बात है कि माताजी को लाभ हुआ है और उत्तरोत्तर स्वास्थ्य अच्छा हो रहा है। आपने उनके खाने-पीने के विषय में लिखा है कि वे मात्र पपीता खा कर रहती हैं तो बड़ा दुःख हुआ। आप उन्हें खाने में निम्न पदार्थ दे सकते हैं--<br />दूध,घी,दही,फटा हुआ दूध, नये तिल,नये गेहूं, बाजरा, मूंग, प्याज, मूली,जौ,करेला, तोरई, उड़द,सहजन,लहसुन,परवल,अनार का फल, आम, अंगूर,नारंगी,संतरा,नींबू,बेर,महुआ,इमली जैसे सभी मीठे पल जो कदाचित कच्चे में खट्टॆ रहते हैं।<br />निम्न पदार्थ मत खाने को दें--<br />मटर,चना,जामुन,पत्तियों वाले साग,सुपारी,राजमा, चावल,डबल रोटी,बिस्कुट, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ।<br />जोड़ो की अकड़न के लिये अब आप माता जी को महानारायण तेल की ५ मिली मात्रा का एनिमा रोज लेने को बताइये। इसका तरीका ऊपर की पोस्ट MYELITIS वाले उत्तर में दिया गया है साथ ही महानारायण तेल से प्रभावित अंग की मालिश करिये व स्नान के लिये गर्म जल का ही प्रयोग करें।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-62081771688655953102008-06-19T09:10:00.000-07:002008-06-19T09:11:19.038-07:00नींद में लार आती है......नींद के दौरान मुंह में लार भर जाता है, इससे बार-बार नींद खुल जाती है। कुल्ला करना पड़ता है।<br />पवन<br /><span style="color:#ff0000;">पवन जी,आपने अपनी समस्या को अत्यंत संक्षेप में लिखा है लेकिन कोई बात नही हल एकदम सटीक और उतना ही छोटा है आप ये उपचार लें--<br />देशी पान का हरा पत्ता रात में सोते समय चबाइये ,ध्यान रहे कि ये पान लगाया हुआ न हो बस पान का पत्ता ही हो। उसके बाद पानी न पिएं और सो जाएं। इस उपचार को लगातार लाभ होने तक कई दिन तक लीजिये उम्मीद है कि एक सप्ताह में पर्याप्त लाभ दिखेगा और आपको संतुष्टि होगी।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-85916275513192739112008-06-19T09:00:00.000-07:002008-06-19T09:05:17.161-07:00मेरा जीवन बर्बाद होने से बचा लीजिए..........डॉक्टर साहब को चरण स्पर्श, आपका ब्लॉग देखकर मैं आपके प्रति नतमस्तक हूँ क्योंकि आप निस्वार्थ लोगों की मदद कर रहे हैं। डॉक्टर साहब मुझे लगता है कि आप मेरे लिए मसीहा बनकर आए हैं। क्योंकि मेरी परेशानी ही कुछ ऐसी है कि जिसे ना तो किसी को बता सकते हैं और ना ही अंदर_ही_अंदर घुटकर जी सकते हैं। काफी प्रयासों (गुगल पर सर्च करके) मुझे आपका ब्लॉग प्राप्त हुआ। मुझे लगता है कि आप ही एकमात्र ऐसे इंसान है जो दूसरे इंसानों का दुख-दर्द समझते हैं। डॉक्टर साहब मेरी उम्र ३० वर्ष है, मेरी सेकंड मैरिज हुई है। पहली पत्नी के साथ मैंने २ साल सुखी वैवाहिक जीवन बिताया (इस समय कोई समस्या नहीं थी, फिर भी कोई संतान उत्पन्न नही हुई) लेकिन भगवान की मर्जी के आगे किसका बस चलता है, पहली बीवी नहीं रही। फिर २ साल इंतजार करने के बाद अब (फरवरी २००८) में मेरी दूसरी शादी मेरे से १० साल छोटी उम्र की लड़की से हुई है (मेरी बीवी की उम्र है २० साल और मेरी ३० साल) लेकिन अब मेरी पहले जैसी सेक्स की इच्छा नहीं रही। अब मेरी सेक्स में रुचि खत्म हो गई है। और सेक्स करने की कोशिश करता हूँ तो लिंग में पर्याप्त कठोरता नहीं आ पाती और बहुत जल्द ही शीघ्र पतन हो जाता है, जिससे मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा हूँ। मुझे दुख इस बात का है कि अभी तो शुरुआत है, अभी तो बच्चे भी पैदा करना होंगे, यह सब सोचकर मेरा मन घबराता है। अगर ३० साल की उम्र में यह हाल है तो ४० तक भगवान जाने क्या होगा, और वह (मेरी बीवी) ने तो अभी जवानी में कदम ही रखा है। उसे तो कम से कम १०-१५ साल तक संतुष्ट करना ही होगा नहीं तो अनर्थ हो जाएगा। आप जानते होंगे डॉक्टर साहब की क्या अनर्थ हो जाएगा? (मेरा जीवन, और इज्जत बर्बाद हो जाएगी)। प्लीज डॉक्टर साहब मुझे इस मनुष्य जीवन का आनंद लेने का मार्ग बताएँ। वरना मुझे आत्महत्या के लिए और कोई रास्ता नहीं दिखाई देता। मैं क्या करू? एक बात और बताना चाहता हूँ कि पहली शादी के पहले मैंने ५-७ साल तक हस्तमैथुन भी किया था, और मुझे लगता है कि इसी के कारण मेरी आज यह हालत हुई है। प्लीज डॉक्टर साहब मेरा जीवन बर्बाद होने से बचा लीजिए। कोई अच्छी-सी दवाई बताएँ मैं आपका जीवन भर आभारी रहूँगा। प्लीज आपसे मेरा बार-बार निवेदन है। आपकी सलाह के इंतजार में....<br />धन्यवाद<br />दिनेश कर्मा<br /><span style="color:#ff0000;">दिनेश जी,विश्वास प्रदर्शित करने के लिये आपका आभारी हूं। आपकी समस्या जितनी बड़ी आपको महसूस हो रही है सच में वह आपकी मानसिक स्थिति के कारण है अन्यथा सब कुछ सामान्य है बस छोटी सी समस्या है। पहले तो एक बात विशेष ध्यान दीजिये कि आप रोज रात को भोजन के बाद एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म जल में घोल कर पी लिया करें ताकि कब्जियत न रहे और पेट बराबर साफ होता रहे। अब लीजिये कि क्या उपचार लेना होगा --<br />१ . शतावर ४० ग्राम + गोखरू ४० ग्राम + कुलंजन ४० ग्राम + विदारीकंद ४० ग्राम + कौंच(केवांच) के बीज ४ ग्राम + उटंगन के बीज ४ ग्राम + छोटी पीपल ४ ग्राम + छोटी इलायची के बीज ४ ग्राम + नागकेशर ४ ग्राम + सफेद मूसली ४ ग्राम + लाल चंदन ४ ग्राम + छरीला ४ ग्राम + गिलोय(गुळवेल)सत्व ४ ग्राम + वंशलोचन ४ ग्राम + मोचरस १० ग्राम ; इन सबको आप किसी भी आयुर्वेद के दवा विक्रेता से सरलता से ले सकते हैं इन्हें पीस कर सुबह शाम गाय के दूध से दो-दो चम्मच सेवन करें तथा उसके बाद १० ग्राम नारियल की गरी चबा लें।<br />२ . अश्वगंधा चूर्ण,चीनिया कपूर, खुरासानी अजवायन, जायफ़ल, जावित्री, अकरकरा,बच, शुद्ध भांग, रस सिंदूर ; इन सबको सात-सात ग्राम की मात्रा में लेकर कसकर घोंट लें। इन्हें पचास ग्राम मिश्री पीस कर मिला लें। इस मिश्रण को चार-चार ग्राम की मात्रा में रात में भोजन के बाद मलाई मिला कर चाट लीजिये और अगर मिल सके तो ऊपर से एक मूली खा लीजिये।<br />३ . पुष्पधन्वा रस एक-एक गोली सुबह शाम दूध से लीजिये।<br />४ . वानरी गुटिका एक गोली + स्वर्णबंग एक रत्ती(१२५ मिग्रा)+ कौंचा पाक एक चम्मच मिला कर दिन में दो बार चाट लें ऊपर से दूध पी लीजिये।<br />यकीन मानिये कि चार दिन बाद आप खुद ही मुझे मेल करके धन्यवाद कर रहे होंगे कि चमत्कार हो गया। औषधि सेवन तीन माह तक करें व सेवन काल में मिर्च-मसाले व खटाई का सेवन न करें,मांसाहार बंद कर दें।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-13827300112336716802008-06-19T08:25:00.000-07:002008-06-19T08:26:57.637-07:00The doctors called this diseases "MYELITIES".Dear Sir,<br />My name is Naveen Gupta and I live in Kharar (Punjab) Near Chandigarh, I read your website Aayushved.<br />On Oct. 28, 2007 , suddenly I felt pain in my back(spinal cord i.e. lumber area). then after few hours , the full area below stomach(i.e. both legs, urine and stool passing) stopped working means legs were not taking the weight and I was enable to move and urine and stools passing was not in control. Then I got the allopathic treatment from Chandigarh( Neuron Surgeon). The doctors called this diseases "MYELITIES". At that time only, I came to know that I am diabetic patient also. Earlier I was completely on wheel chair, Then I have taken some ayurvedic medicines(Vatchintamani Ras, Yoginder Ras with Honey and two time Massage with Dabur Lal Tail mixed with Ajvain, Affim, Mushak Kapur) due to which I started walking with the help of Stick. No doubt, There is a great improvement but, still I cannot walk properly like a normal man. There is a major problem in my left leg ( I feel as if there is a strain and sprain in left thigh).<br />Please tell me the best treatment for my problem.<br />Thanks<br />Naveen Kumar Gupta<br />H.No 3323, W.No-9,<br />Kharar(Punjab)-140301<br /><a href="mailto:Naveenkhoney@hotmail.com">Naveenkhoney@hotmail.com</a><br /><a href="mailto:Akshitnaveen@yahoo.co.in">Akshitnaveen@yahoo.co.in</a><br />Mobile 9888169656<br /><span style="color:#ff0000;">नवीन जी आपकी समस्या को समझा और इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि अब आपको योगेन्द्र रस का सेवन बंद कर देना चाहिये तथा वृहत वात चिन्तामणि रस एक-एक गोली दिन में तीन बार दूध के साथ लें। महानारायण तेल की पांच मिली तेल का दिन में एक बार (बस्ति)एनिमा लें,यह काम करने के लिये आप नित्य कर्म से फारिग हो कर नाश्ता करने के बाद एक 10 ML वाली डिस्पोजेबल सिरिंज ले लीजिये व उसमें निडिल न लगाएं तथा ५ मिली तेल इसमें भर कर मलद्वार में लगभग आधी सिरिंज डाल कर वह तेल गुदा के अंदर पिचकारी की तरह हल्के हाथ से छोड़ दें। इसके बाद पैरों को ऊपर करके आधा घंटा लेटे रहें जिससे कि तेल बाहर की तरफ़ न बह आए। यह क्रिया एक माह तक नियमित रोज करिये। प्रभावित अंग पर महानारायण तेल से ही मालिश करवाइये। साथ ही साठी कि चावलों को पका कर कपड़े में बांध कर प्रभावित अंग की सिकाई करिये। लगातार तीन माह सिकाई व औषधि सेवन से आप पहले की तरह दौड़ने लगेंगे यह आश्वासन मैं आपको आयुर्वेद के प्रति निष्ठा के साथ दे रहा हूं। ईश्वर करे कि आप उक्त अवधि से पहले ही स्वस्थ हो जाएं।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-33027569625826377392008-06-18T06:45:00.000-07:002008-06-18T06:46:21.980-07:00जुखाम बना ही रहता है और........सर में अपनी जुखाम से बहुत परेशान हूँ आज से लगभग 6 साल पहले मुझे typhoide हुआ था उस समय साथ साथ मुझे जुखाम भी हो गया था. जुखाम इतना हुआ की मेरे नाक से गंदगी के साथ साथ बहुत गन्दी बदबू आने लगी थी / एक कई दोक्टारो से दिखाया पर आराम नही मिला उन दवानिओं से बदबू तो बंद हो गई पर मुझे उसके बाद मै जुखाम बना ही रहा / कई इलाज करवा चुका हूँ अब तो गर्दन के पीछे की तरफ़ दर्द भी रहने लगा है/ आंखे भारी भारी रहती है / सिर भी भारी रहता है सारा शरीर भी परफेक्ट नही रहेता है शरीर भी भारी भारी रहता है / काम मै दिल नही लगता है / कई दोक्टोर्स से इलाज करवा चुका हूँ पर कही भी कुछ आराम नही दिखाई देता है एईलोपथिक और आयुर्वेदिक दवा भी खा चुका हूँ पर कुछ आराम नही है. आपसे अनुरोध है की किर्प्या करके कुछ मेरे लिए कारगर इलाज बताने की क्रीपा करे. आपकी महान किरपा होगी. रमेश मैथानी जोसीमाथ चमोली (उत्तराखंड)<br /><span style="color:#ff0000;">रमेश जी आपने अपनी समस्या के बारे में आपने जो भी लिखा है वह ये बताने के लिये पर्याप्त है कि आपको कितनी परेशानी हो रही है। अब आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी। लीजिये समाधान प्रस्तुत है -<br />१ . आप १०० ग्राम खड़ी हल्दी की गांठे ले लीजिये और एक मिट्टी का छोटा सा मटका या घड़ा और अब इस घड़े में चूना लेकर ऐसी तह लगा दीजिये कि उसके ऊपर आप हल्दी की गांठें रख सकें तथा शेष रहा चूना इसके ऊपर तह लगा कर रख दीजिये और ऊपर से इतना पानी ऐसे डाल दीजिये कि ये सब डूब जाए लेकिन वो तहें न हिल पाएं। अब इसे ढंक कर किसी स्थान पर सुरक्षित रख दें चार पांच दिन में जब पानी सूख जाए तो हल्दी की गांठो को निकाल कर हाथ से रगड़ कर साफ़ कर लें फिर इसका बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को आधा चम्मच दिन में दो बार भोजन के बाद शहद से चाट लिया करें।<br />२ . नाक के दोनो छेदों में षड्बिन्दु तेल की छह-छह बूंदें दिन में दो बार डालिये।<br />३ . कपूर १० ग्राम + पिपरमिंट(जो पान में ठंडक के लिये पानवाले डालते हैं) १० ग्राम मिला कर एक बहुत टाइट ढक्कन की शीशी में रख दें ये मिल कर तेल बन जाएगें। इसे दिन में दो बार सिर के तालू में लगाइये।<br />बाजारू साफ़्ट ड्रिंक्स से परहेज़ करिये आपको तुरंत लाभ होगा।</span>डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)http://www.blogger.com/profile/13368132639758320994noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-82081856943683394.post-53682660813985527242008-06-18T06:27:00.000-07:002008-06-18T06:28:52.333-07:00सफेद दाग हैं, माताजी व बहन को भी हैं यानि कि आनुवांशिक......एक महिला...उनकी उम्र २४ साल है और पिछले १२ सालोंसे सफ़ेद दाग नामकी बीमारी से पीड़ित हैं...उनकी माँ के पूरे शरीर में सफ़ेद दाग हैं... यानी बीमारी आनुवंशिक है..इनकी बहन भी देखते देखते पुरीतरह से सफ़ेद हो गई है...और इन मित्र के दोनों पैरों में लम्बाई में सफ़ेददाग हैं...खासकर उँगलियों की हड्डियाँ जहाँ से उंगलियाँ होती हैं....यानि उँगलियों के उभारों पर सफ़ेद दाग हैं..हाथ में लम्बे लम्बे चकत्ते हैं..इतना ही नही कई छोटे छोटे दाग पूरे शरीर में उभर रहे हैं...कुल मिलाकर शरीर का ३० फीसदी हिस्सा सफ़ेद दाग की चपेट में है....अभी आप ही की तरह एक मानवीय इंसान से मिलकर था जिसका मकसद भी जड़ीबूटियों के जरिये लोगों को ठीक करना है..वे बेहद काबिल भी लगे ...एक ख़ास बात जो उन्होंने बताई वो यह की अब ये दाग कभी ठीक नही हो सकते क्यूंकि ये बहुत पक्के हो चुके हैं... उन्होंने मेरी मित्र के हाथों में चिकोटीकाटी और उनको खूब दबाया पर अचरज की बात की उनमें न कोई निशाँ बना न कोई खून के दौरान का निशाँ था जैसा आम आदमी को अगर किया जाए तो वहाँ लाल हो जायेगा या निशाँ बन जायेगा...उन सज्जन ने बताया की त्वचा की जितनी परतें हैं वे सब प्रभावित हैं सफ़ेद दाग के रोग से...और नसों में खून का दौरानही नही हो रहा है...उन सज्जन ने कहा की जब खून का दौरान ही नही हो रहा त्वचा के उस स्थान में तो वहाँ कुछ होने के चांस बिल्कुल नहीहैं...उदाहरण देते हुए कहा की जैसे एक वायरस अपने आस पास की चीजों को प्रभावित करता है उसी तरह सफ़ेद दाग के चकत्ते भी बाकी बची त्वचा को प्रभावित कर सफ़ेद दाग फैला रहे हैं... वह इंसान अपनी समाजसेवा के लिए जाना जाता है और उसने कहा की डॉक्टर भले पैसा कमाने के लिए आपको टहलाते रहे पर इसका कोई इलाज नही है...अभी इनके चेहरे पर एक स्पॉट है जो इनके मुताबिक आगे सफ़ेद दाग में बदल जायेगा... मेरी मित्र जो दुनिया की बेहतरीन इंसानों में हैं कई बार रो चुकीहैं परेशान हो चुकी हैं.......(उन सज्जन ने कहा कि लयूकोदेर्मा नामक पौधे का रस देंगे वह लगाने के लिए जिससे थोड़ा बहुत फायदा होगा)... पत्र काफ़ी विस्तार से है अतः आवश्यक जानकारी को ही लिया जा रहा है।<br />उपाय बताइये। धन्यवाद<br />अनाम<br /><span style="color:#ff0000;">आपकी मित्र की समस्या को गहराई से समझा,निस्संदेह वे बहुत मानसिक पीड़ा का सामना कर रही हैं। आपने विस्तार से बताया है कि इन्हें ये रोग आनुवांशिक कारणों से हुआ है और वे कई जगह उपचार भी ले चुकी हैं। आपने ये भी लिखा कि किन्ही सज्जन ने उन्हें ल्युकोडर्मा नामक पौधे का रस देंगे जो कि उन्हें आंशिक लाभ देगा। जहां तक मेरी वनस्पति शास्त्र की जानकारी है इस नाम के किसी पौधे,पेड़ या लता आदि से मैं परिचित नहीं हूं क्या ये कोई विदेशी पौधा है? मेहरबानी करके उन सज्जन से इस विषय पर स्पष्ट जानकारी लेकर मुझे सूचित अवश्य करें और उन्हें बताएं कि यदि वे सचमुच सेवा का भाव रखते हैं तो आयुषवेद के माध्यम से उक्त जानकारी अधिकतम लोगों को लाभान्वित कर पाएगी। एक बात बताना अनिवार्य मानता हूं कि जिस प्रकार गंदे वस्त्र पर यदि हम कोई रंग करना चाहें तो वह ठीक से न चढ़ सकेगा इसलिये उसे धो-सुखा कर ही रंग करना सही तरीका है इसी तरह यदि जीर्ण हो चुके रोगों में शरीर का सम्यक शोधन न करा जाए तो दी हुई मूल्यवान से मूल्यवान औषधि व्यर्थ हो जाती है। देह के शोधन की प्रक्रिया कदाचित थोड़ी बड़ी सी लगेगी किन्तु इतना तो आपकी मित्र को करना होगा और संभव है कि आपको भी इसमें सहयोग करना पड़े। आयुर्वेद में देह के शोधन के लिये शास्त्रोक्त पद्धति है "पंचकर्म"। ये हैं -- स्नेहन,स्वेदन,वमन,विरेचन तथा मर्दन ; आवश्यकतानुसार इनमें से कभी-कभी किसी एक-दो या सभी कर्मो का प्रयोग करा जाता है। पहले आप इनको पंचकर्म के लिये मानसिक तौर पर तैयार कर लें व बताएं कि रोने से समस्याओं का हल नहीं मिलता अतः डट कर बीमारी से लड़ पड़ें ताकि आरोग्य जय कर सकें। सर्वप्रथम स्नेहन के लिये इन्हें पहले दिन नाश्ता करने के बाद पंचतिक्त घृत २५ ग्राम की मात्रा में बाकुची के काढ़े के साथ पिलाएं। बाकुची के काढ़े को बनाने के लिये १० ग्राम बाकुची के चूर्ण को दो कप पानी में उबालें व आधा रह जाने पर छान लें बस बन गया काढ़ा प्रयोग के लिये। दूसरे दिन से चौथे दिन तक ५० ग्राम की मात्रा में पंचतिक्त घृत पिलाएं। स्नान करने के बाद सारे शरीर पर बाकुची के तेल से कम से कम आधा घंटे कसकर रगड़-रगड़ कर मालिश करी जाए। ये पक्रिया कुल मिलाकर चार दिन जारी रखिये और इस दौरान पंचतिक्त घृत पिलाने के बाद आधा घंटे घूमे फिरें ताकि उस स्नेह द्रव्य का देह में संचार हो जाए यदि विश्राम करा तो कार्य व्यर्थ हो जाएगा और फलीभूत न होगा। दोपहर में जोर से भूख लगने पर पुराना चावल और दूध मिला कर दें उपचार काल तक यदि कुछ और जीभ के स्वाद के चक्कर में खाया तो मूर्खता होगी और प्यास लगने पर सादे पानी के स्थान पर जौ को पानी में उबाल कर ’बार्लीवाटर" तैयार कर लें वह दें। इसके बाद स्वेदन करना होगा यानि कि जैसे आजकल आधुनिक लोग "सोना बाथ" लेते हैं यानि कि पसीना लाकर त्वचागत दोषों को बाहर आने को प्रेरित करना। इसके लिये इन्म चीजें प्रत्येक १०० ग्राम लें -- नीम के पत्ते + बेर के पत्ते + खैर(जिससे कत्था बनता है) की छाल + इन्द्रायण के फल + हल्दी + बाकुची + चित्रक + आक(इसे मदार या अकवन या अकउआ या अकौड़ा भी कहते हैं) के पत्ते + दशमूल का चूर्ण(ये बना हुआ आयुर्वेदिक दवा विक्रेताओं के पास मिल जाएगा) लेकर हलका मोटा सा कूट लें। इस मिश्रण को दस लीटर पानी में डालें(आप आवश्यकतानुसार दवा इसी अनुपात में कम कर सकते हैं) प्रेशर कुकर के ऊपर की सीटी को निकाल कर उसके स्थान पर एक ट्यूब फ़िट कर दें ताकि मिश्रण के उबलने पर निकलने वाली भाप को हम एक स्थान पर उपयोग कर सकें इस ट्यूब के द्वारा उस भाप को प्रभावित स्थान पर छोड़ें जैसे कि बच्चों को जुकाम होने पर या स्त्रियां सौंदर्योपचार लेते समय वेपर्स लेती हैं,ठीक उसी तरह करना है कि प्रभावित अंग पर वह औषधीय भाप अपना प्रभाव दिखा सके। यदि बतायी गयी औषधियों में से कोई न मिले तो जितनी मिलें उन्हें ही प्रयोग कर लें। बाद में आधे घंटे के स्वेदन के बाद कुकर में जो पदार्थ बचा है उसे एक कपड़े की पोटली में बांध कर शरीर पर सेंके। यह कार्य आप चार दिन तक करें। अब रोगी को वमन कराना है ताकि जो दोष आमाशय में आ गये हैं वमन से बाहर निकल सकें। इसके लिये अगले दिन सुबह सुबह नित्य कर्म से फ़ारिग होकर बिलकुल गले तक भर कर गन्ने का रस पिलाएं और इतना पिलाएं कि पेट तो भर जाए व अधिकता के कारण जी मिचलाने लगे कि अब उल्टी हो जाएगी ऐसे में गले में उंगली डाल कर उल्टी कर दें जिससे उत्क्लेष होकर सारा दोष वमन से बाहर आने को प्रेरित होगा। जब पेट के आहार के निकलने के बाद पीत औषधि व कुछ चिकनाई आदि निकल कर डकार आ जाए तो समझिये कि वमन पूर्ण हो गया। भूख लगने पर कोई भी फल का जूस दें तथा दोपहर में मूंग की एक दम पतली खिचड़ी दें व रात को भोजन में खिचड़ी,दलिया अथवा सत्तू दें। इस तरह से तीन दिन करें। अब आगे के चार दिन तक बस हल्का भोजन दें जिसमें साग आदि हो भारी भोजन वर्जित है यानि चार दिन तक देह को विश्राम देना है इसके बाद अब सुबह पहले की भांति पंचतिक्त घृत ५० ग्राम की मात्रा में बाकुची के काढ़े के साथ पिलाएं व दो घन्टे बाद दो चम्मच गन्धर्व हरीतकी नामक औषधि योग को एक कप हलके गर्म जल में घोल कर पिला दें इससे कुछ देर बाद तीन चार दस्त होंगे जब भूख लगे तो मूंग की दाल की खिचड़ी व दलिया साबूदाना आदि हल्का आहार दें। इस तरह अगले दिन भी करें यानि विरेचन कर्म दो दिन करना है फिर बंद कर दें। अगर पेट में दस्तों के कारण दर्द हो तो एक गोली हाजमोला दे सकते हैं।<br />इस क्रम को यानि पंचकर्म को करने के बाद अब बारी आती है औषधि उपचार की जिसके लिये उन्हें निम्न औषधियां नियमानुसार दें --<br />१ . पंचतिक्त घृत गुग्गुल एक गोली + आरोग्यवर्धिनी बटी दो गोली + उदयभास्कर रस एक गोली दिन में तीन बार चार चम्मच खदिरारिष्ट+महामंजिष्ठादि क्वाथ के मिश्रण से दें,खाली पेट न दें।<br />२ . बाकुची चूर्ण १०० ग्राम + रस माणिक्य ५० ग्राम मिला कर जोर से घॊंट लें व दिन में दो बार इसमें से एक-एक ग्राम मात्रा लेकर गोमूत्र के साथ दिन में दो बार सेवन कराएं।<br />३ . बाकुची २० ग्राम + स्वर्णमाक्षिक भस्म ५ ग्राम + लौह भस्म ३ ग्राम + रसौत ४ ग्राम + काले तिल १० ग्राम + चित्रक ५ ग्राम; इन सबको घॊंट कर मिलालें व दो ग्राम मात्रा को गोमूत्र के साथ दिन में तीन बार सेवन करें, खाली पेट दवा न लें।<br />४ . अच्छी मेंहदी के ताजे पत्ते ४० ग्राम + अदरक का रस १० ग्राम + सोना गेरू(लाल गेरू) ४० ग्