tag:blogger.com,1999:blog-78734729741317393422009-07-12T20:22:17.762+05:30धान के देश में! : Hindi Blogजी.के. अवधिया का ब्लोगजी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.comBlogger261125tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-32658145458951583052009-06-26T12:17:00.002+05:302009-06-26T12:21:15.048+05:30सन् 1905 में छपा हिन्दी लेखसंसार की अन्य भाषाओं की तुलना में हमारी भाषा हिन्दी की उम्र सबसे कम है अर्थात् मात्र लगभग चार सौ साल जबकि अन्य सभी भाषाएँ कई हजारों साल पुरानी हैं। इन चार सौ सालों में भी पहले लगभग तीन सौ सालों तक अवधी तथा ब्रजभाषा को ही हिन्दी माना जाता रहा। आज जिस रूप में हिन्दी है, हिन्दी ने उस रूप को धारण करना उन्नीसवीं शताब्दी के पहले दशक में शुरू किया जब श्री देवकीनन्दन खत्री जी ने चन्द्रकान्ता तथा चन्द्रकान्ता सन्तति उपन्यासों को रचा। यद्यपि इन दोनों उपन्यासों को हिन्दी साहित्य में बहुत उच्च स्थान प्राप्त नहीं है किन्तु इन दोनों उपन्यासों ने अपनी रोचकता से लाखों लोगों को हिन्दी की ओर आकर्षित कर उन्हें हिन्दी सीखने के लिये मजबूर कर दिया। चन्द्रकान्ता सन्तति आज भी मेरे प्रिय उपन्यासों में से एक है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी भी चन्द्रकान्ता सन्तति उपन्यास के प्रेमी रहे हैं।<br /><br />उन्नीसवीं शताब्दी के पहले दशक में, जबकि हिन्दी ने अपना नया रूप धरना शुरू किया, उर्दू ही आम लोगों की मुख्य भाषा थी। नीचे जो लेख दिया जा रहा है वह भी उर्दू में ही लिखा गया था और यह लेख 14 मार्च सन् 1905 में उस जमाने के अवध अखबार में छपा था तथा इसकी हिन्दी नकल को खत्री जी अपने उपन्यास चन्द्रकान्ता सन्तति के उपसंहार में सन्दर्भित किया था। वही लेख मैं यहाँ पर प्रस्तुत कर रहा हूँ:<br /><br />(यहाँ पर इस लेख की रचना शैली को बताना मेरा मुख्य उद्देश्य है लेख का विषय नहीं)<br /><br /><blockquote>अगले जमाने में फिलासफर (वैज्ञानिक) लोग अपनी बुद्धि से जो चीजें बना गये हैं अब तक यादगार हैं। उनकी छोटी सी तारीफ यह है कि इस समय के लोग उनके कामों को समझ भी नहीं सकते। उनके ऊँचे हौसले और ऊँचे खयाल की निशानी चीन के हाते की दीवार है और हिन्दुस्तान में भी ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनका किस्सा आगे चल कर मैं लिखूँगा। इस समय "दीवार कहकहा" पर लिखना चाहता हूँ।<br /><br />मैंने सन् 1899 ई॰ में अखबार आलम मेरठ में कुछ लिखा था जिसकी मालिक अखबार ने बड़ी प्रसंशा की थी, अब उसके और विशेष सबब खयाल में आये हैं जो बयान करना चाहता हूँ।<br /><br />मुसलमानों के प्रथम राज्य में उस समय के हाकिम ने इस दीवार की अवस्था जानने के लिये एक कमीशन भेजा था जिसके सफर का हाल दुनिया के अखबारों में प्रकट हुआ है।<br /><br />संक्षेप में यह कि कई आदमी मरे परन्तु ठीक तौर पर नहीं मालूम हो सका कि उस दीवार के उस तरफ क्या हाल चाल है।<br /><br />उसकी तारीफ इस तरह है कि उस दीवार की ऊँचाई पर कोई आदमी जा नहीं सकता और जो जाता है वह हँसते हँसते दूसरी तरफ गिर जाता है, यदि गिरने से किसी तरह रोक लिया जाय तो जोर से हँसते हँसते मर जाता है।<br /><br />यह एक तिलिस्म कहा जाता है या कोई और बात है, पर यदि सोचा जाय तो यह कहा जायगा कि अवश्य किसी बुद्धिमान आदमी ने हकीमी कायदे से इस विचित्र दीवार को बनाया है।<br /><br />यह दीवार अवश्य कीमियाई विद्या से मदद लेकर बनाई गई होगी।<br /><br />यह बात जो प्रसिद्ध है कि दीवार के उस तरफ जिन्न और परी रहते हैं जिनको देख कर मनुष्य पागल हो लजाता है और उसी तरफ को दिल दे देता है, यह बात ठीक हो सकती है परन्तु हँसता क्यों है यह सोचने की बात है।<br /><br />काश्मीर के केशर के खेत की भी यही तारीफ है। तो क्या उसकी सुगन्ध वहाँ जाकर एकत्र होती है, या वहाँ भी केशर के खेत हैं जिसे हँसी आती है? परन्तु ऐसा नहीं है क्योंकि ऐसा होता तो यह भी मशहूर होता कि केशर की महक आती है। नहीं नहीं, कुछ और ही हिकमत है जैसा कि हिन्दुस्तान में किसी शहर की मसजिद की मीनारों में यह तारीफ थी कि ऊपर खड़े होकर पानी का भरा हुआ गिलास हाथ में लो तो वह अपने आप ही छलकने लगता था। इसकी जाँच के लिये एक इन्जीनियर साहब ने उसे गिरवा दिया और फिर उसी जगह बनवाया परन्तु वह बात नहीं रही। या आगरा में ताजबीबी के रोजे के फौवारों के नल जो मिट्टी के खरनैचे की तरह थे जैसे खपरैल या बगीचे के नल होते हैं। संयोग से फौवारों का एक नल टूट गया, उसकी मरम्त की गई, दूसरी जगह से फट गया यहाँ तक कि तीस चालीस वर्ष से बड़े बड़े कारीगरों ने अपनी अपनी कारीगरी दिखाई परन्तु सब व्यर्थ हुआ। अब तक तलाश है कि कोई उसे बना कर अपना नाम करे, मतलब यह कि "दीवार कहकहा" भी ऐसी ही कारीगरी से बनी है जिसकी कीमियाई बनावट मेरी समझ में यों आती है कि सतह जहाँ जमीन से आसमान तक कई हिस्सों में अलग की गई है, लम्बाई का भाग कई हवाओं से मिला है जैसे आक्सीजन, नाईट्रोजन, हाइड्रोजन, कार्बोलिक एसिड ग्यास, क्लोराइड इत्यादि। फिर इन हवाओं में से और भी कई चीजें बनती हैं जैसे कि नाइट्रोजन का एक मोरक्कब पुट आक्साइड आफ नाइट्रोजन है (जिसकि लाफिंग ग्यास भी कहते हैं)। बस दुनिया के उस सतह पर जहाँ लाफिंग ग्यास जिसको हिन्दी में हँसाने वाली हवा कहते हैं पाई गई है, उस जगह पर यह दीवार सतह सतह जमीन से इस ऊँचाई तक बनाई गई है। इस जगह पर बड़ी दलील यह होगी कि फिर वह बनाने वाले आदमी कैसे उस जगह अपने होश में रहेंगे, वह क्यों न हँसते हँसते मर गये? और यही हल करना पहिले मुझसे रह गया था जिसे अब उस नजीर से जो अमेरिका में कायम हुई है हल करता हूँ, याने जिस तरह एक मकान कल के सहारे एक जगह से उठा कर दूसरी जगह रख दिया जाता है उसी तरह यह दीवार भी किसी नीची जगह में इतनी ऊँची बनाकर कल से उठाकर उस जगह रख दी गई है जहाँ अब है। लाफिंग ग्यास में यह असर है कि मनुष्य उसके सूँघने से हँसते हँसते दम घुट कर मर जाता है।<br /><br />अब यह बात रही कि आदमी उस तरफ क्यों गिर पड़ता है? इस खिंचाव को भी हम समझे हुए हैं परन्तु उसकी केमिस्ट्री (कीमियाई) अभी हम न बतायेंगे, इसको फिर किसी समय कहेंगे।</blockquote><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-3265814545895158305?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-7639254922948272932009-06-23T10:55:00.004+05:302009-06-23T11:10:18.375+05:30कम्प्यूटर के छलावेकम्प्यूटर अनेकों बार हमारी आँखों को कैसे धोखा देता है यह इन चित्रों को देखने से समझ में आता है।<br />(चित्रों को बड़ा करके देखने के लिये उन पर क्लिक करें।)<br /><br />ये रेखाएँ समानान्तर हैं या झुकाव लिये हुये?<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn3ywmgLI/AAAAAAAAAng/0MsZWdR3vW0/s1600-h/i1.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 244px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn3ywmgLI/AAAAAAAAAng/0MsZWdR3vW0/s400/i1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350390565532238002" border="0" /></a>केन्द्र में स्थित काली बिन्दु को एकटक देखिये। कुछ ही क्षणों में उसे घेरने वाला भूरा वृत सिकुड़ कर गायब होने लगेगा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4BPSYtI/AAAAAAAAAno/5FN29D_MexA/s1600-h/i2.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 283px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4BPSYtI/AAAAAAAAAno/5FN29D_MexA/s400/i2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350390569419039442" border="0" /></a>अपना ध्यान केन्द्र की काली बिन्दु पर केन्द्रित किये हुये सिर आगे पीछे करिये। भीतरी वृत घूमता हुआ लगने लगेगा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBqNTKopVI/AAAAAAAAAoo/BOGloCEl9kY/s1600-h/Capture.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 345px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBqNTKopVI/AAAAAAAAAoo/BOGloCEl9kY/s400/Capture.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350393134031873362" border="0" /></a>आराम से बैठे हुये एकाग्रतापूर्वक चित्र के बीच में बने हुये चार बिन्दुओं को 30-40 सेकेंड तक देखते रहिये। फिर अपने पास की दीवार को देखें (दीवार चिकनी तथा एक रंग में ही पेंट की हुई होनी चाहिये)। आपको प्रकाश से बना एक वृत दिखाई पड़ने लगेगा। दीवार को देखते हुये एक दो बार पलकें झपकायें, यह पूरा चित्र उभरता हुआ दिखाई देगा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4akMk8I/AAAAAAAAAnw/FcUqQy0Yiig/s1600-h/i3.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 330px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4akMk8I/AAAAAAAAAnw/FcUqQy0Yiig/s400/i3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350390576217625538" border="0" /></a>इस चित्र को देखकर बताइये कि क्या यह एनीमेटेड है? जी नहीं, यह एनीमेशन नहीं है। ये वृत स्वयं नहीं घूम रहे हैं बल्कि आपकी आँखें इन वृतों को घुमा रही हैं। विश्वास नही होता हो तो किसी भी एक वृत को एकटक देखिये उसका घूमना बंद हो जायेगा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4afg8AI/AAAAAAAAAn4/QQZj9eRRsl8/s1600-h/i4.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 292px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4afg8AI/AAAAAAAAAn4/QQZj9eRRsl8/s400/i4.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350390576197988354" border="0" /></a>बताइये कि दोनों आड़ी रेखायें समानान्तर हैं या झुकाव लिये हुये?<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4rTciNI/AAAAAAAAAoA/Rq0nbbGT6dA/s1600-h/i5.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 249px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBn4rTciNI/AAAAAAAAAoA/Rq0nbbGT6dA/s400/i5.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350390580710770898" border="0" /></a>दोनों चित्रों के बीच में बने हुये वृतों में कौन बड़ा है और कौन छोटा? आपको जान कर आश्चर्य होगा कि दोनो बराबर हैं न तो कोई छोटा है और न ही कोई बड़ा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpWSYHqTI/AAAAAAAAAoI/-rqd2qF4d5c/s1600-h/i6.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 291px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpWSYHqTI/AAAAAAAAAoI/-rqd2qF4d5c/s400/i6.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350392188927191346" border="0" /></a>क्या यह सम्भव है?<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpWpV2YXI/AAAAAAAAAoQ/lTzCdWwvyCc/s1600-h/i7.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 215px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpWpV2YXI/AAAAAAAAAoQ/lTzCdWwvyCc/s400/i7.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350392195091685746" border="0" /></a>बीच के धन चिन्ह पर निगाह केन्द्रित करें, कुछ ही क्षणों में घूमती हुईं बैंगनी वृतों का रंग हरा नजर आने लगेगा।<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpW3_V3II/AAAAAAAAAoY/e4_ksFBYoZE/s1600-h/i8.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 400px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpW3_V3II/AAAAAAAAAoY/e4_ksFBYoZE/s400/i8.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350392199023811714" border="0" /></a>जमीन या आसमान?<br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpW5gs6mI/AAAAAAAAAog/U2DYmZvIgbY/s1600-h/i9.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 362px; height: 400px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SkBpW5gs6mI/AAAAAAAAAog/U2DYmZvIgbY/s400/i9.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5350392199432170082" border="0" /></a>आपको यह लेख भी पसंद आयेगा <a href="http://internetindia.agoodplace4all.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2-internet-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2-conjuration"><span style="font-weight: bold;">"अंतरजाल या इन्द्रजाल?"</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-763925492294827293?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com8tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-18452910161923847602009-06-22T11:01:00.000+05:302009-06-22T11:02:10.925+05:30लिखना हमें आता नहीं अरु बन गये ब्लोगरदासचलिये आज मैं अपना किस्सा बता ही दूँ। किस्से का सारांश है<br /><br /><span style="font-weight: bold;">आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।</span><br /><span style="font-weight: bold;">लिखना हमें आता नहीं अरु बन गये ब्लोगरदास॥</span><br /><br />अब उपरोक्त दोहे में मात्रा सही है या नहीं यह देखने का कष्ट मत करियेगा क्योंकि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि 'लिखना तो आता नहीं...'।<br /><br />अक्टूबर 2004 में अपनी नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृति ले लेने के बाद मेरे पास समय ही समय था, साथ ही कम्प्यूटर और इन्टरनेट कनेक्शन भी था। सुन रखा था कि नेट से कमाई करने के बहुत सारे तरीके हैं। तो सारा समय मैं इस चक्कर में इन्टरनेट को खंगालते रहता था। खंगालते खंगालते पता चला कि हिन्दी ब्लोगिंग नाम की भी एक चिड़िया होती है। बस क्या था ब्लोगर में एक खाता खोल लिया। अब समस्या यह थी कि 'लिखना तो...', पर जब अपना एक ब्लोग बना ही लिया है तो कुछ न कुछ पोस्ट करना भी जरूरी है। सोचा कि किस्सा हातिमताई या सिंहासन बत्तीसी या फिर बैताल पच्चीसी आदि को अपने ब्लोग में डाला जाये। पर लगा कि इन कहानियों की ओर भला आजकल कौन तवज्जो देने वाला है?<br /><br />फिर ध्यान में आया कि मैं नहीं लिख सकता तो क्या हुआ, मेरे स्वर्गीय पिताश्री के तो बहुत सी रचनाएँ मेरे पास है। पिताजी को अपने जमाने के पत्र पत्रिकाओं में छपते तो अवश्य थे किन्तु उन्हे उसके बावजूद भी सन्तुष्टि नहीं थी। वे अपनी रचनाओं को स्वतंत्र रूप से प्रकाशित देखना चाहते थे। एक बार अपने उपन्यास धान के देश में को स्वयं प्रकाशक बन कर प्रकाशित भी किया। पुस्तक तो खैर क्या बिकी हाँ घड़ी चेन आदि सभी बिक गये। तो मैंने उसी उपन्यास को अपने ब्लोग में डालना शुरू कर दिया। फिर उनकी कविताओं को। फिर उनकी अन्य रचनाओं को। पर एक दिन वह भी आ गया कि मेरे पास अपने ब्लोग में डालने के लिये उनकी एक भी रचना नहीं बची।<br /><br />ब्लोगिंग का नशा अब तक लत बन चुकी थी। क्या करें? जबरदस्ती जो मन में आये लिखना शुरू कर दिया और आज तक ब्लोगर बने हुये हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-1845291016192384760?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-85964817240596458812009-06-05T11:51:00.001+05:302009-06-05T11:53:06.153+05:30बनवारी के बंडल उर्फ मेरी पसंद के कुछ लतीफे<span style="font-weight: bold;">- 1 -</span><br /><br />बनवारी लाल जी ट्रेन में सफर कर रहे थे। आखरी बोगी में उनकी सीट थी। प्यास लगी थी इसलिये स्टेशन में गाड़ी रुकने पर पानी लेने चले। पानी के नल तक पहुँचने के आधे रास्ते में ही ट्रेन छूटने की सीटी सुनाई पड़ी और बिना पानी लिये दौड़ते भागते वापस अपनी बोगी में आ गये। जब अगले स्टेशन में गाड़ी रुकी तो फिर पानी लेने चले पर इस बार भी ट्रेन ने छूटने की सीटी दे दी। लाचार होकर फिर बिना पानी लिये वापस आ गये। यात्रा पूरी हो गई किन्तु वे पानी नहीं ला सके। यात्रा समाप्ति पर वे स्टेशन मास्टर के पास गये और शिकायत पुस्तिका मांग कर उसमे लिखा -<br /><br /><span style="font-weight: bold;">"किसी भी ट्रेन में आखरी बोगी होनी ही नहीं चाहिये।"</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;">टीपः यदि आखरी बोगी रखनी ही है तो उसे बीच में रखा जाये।</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;">- 2 -</span><br /><br />बात बहुत पुरानी है। एक बार बनवारी लाल जी को किसी काम से इंग्लैंड जाना पड़ा। काम जरूरी था अतः वहाँ पहुँचते ही बिना कुछ खाये पिये काम में लग गये। काम खत्म होते होते पूरा दिन बीत गया। सही सही काम हो जाने के बाद ध्यान आया कि काम के चक्कर में खाना भी नहीं खाया है। भूख बहुत जम के लगी थी इसलिये सीधे होटल के डायनिंग हाल में गये। वेटर ने मीनू ला कर रख दिया। बनवारी लाल जी बेचारे अंग्रेजी पढ़ना जानते नहीं थे पर यह दिखाना भी नहीं चाहते कि उनको अंग्रेजी पढ़ना नहीं आता इसलिये एक ट्रिक से काम लिया। मीनू के कुछ आयटमों में पेंसिल से टिक का निशान लगा दिया और इशारे से बता दिया कि निशान वाले आयटम्स ले आओ। इत्तिफ़ाक की बात है कि जिन सात आठ खाने के आयटम्स में उन्होंने निशान लगाया था वे सारे के सारे सूप थे।<br /><br />वेटर ने सभी सूप लाकर टेबल पर रख दिया। बनवारी लाल जी को आश्चर्य हुआ कि सभी चीजें पानी जैसी क्यों हैं। खैर यह सोच लिया कि ये अंग्रेज लोग भारत जैसा लज़्ज़तदार खाना क्या जानेंगे, ऐसा ही खाना खाते होंगे। एक सूप को एक चम्मच चखा और अजब सा मुँह बना कर छोड़ दिया। अब सूप स्वादिष्ट तो होता नहीं है और वे, दिन भर के भूखे, बेचारे बिना स्वाद वाला खाना खा ही नहीं सकते थे। एक एक कर के सभी सूपों को चखा और आखिर में गुस्से से चम्मच को क्राकरी पर जोर से पटक कर अपने कमरे में आकर भूखे ही सो गये। कमरे में आने पर दरवाजे पर भी गुस्सा उतारा था और उसे भड़ाक से बंद किया था। जोर से दरवाजा बंद करने से उनके कमरे का नंबर प्लेट पलट कर उलटा हो गया और कमरे का नंबर 6 की जगह 9 हो गया।<br /><br />इधर 9 नंबर कमरे में जो सज्जन ठहरे थे उन्हें पिछले तीन चार दिनों से मोशन नहीं हो रहा था। होटल के डॉक्टर हर प्रकार की दवा दे चुके थे और किसी दवा ने काम नहीं किया था। अब डॉक्टर उन्हें एनीमा देना चाहते थे किन्तु वो सज्जन इसके लिये तैयार न थे। डॉक्टर ने होटल के मैनेजर से जाकर वाकया बताया और कहा कि यदि एनीमा नहीं दिया गया तो वो सज्जन मर भी सकते हैं और होटल की बहुत बदनामी हो सकती है। मैनेजर ने कहा अपने साथ चार हट्टे कट्टे वेटरों को ले जाइये और जबरदस्ती उन सज्जन को एनीमा दे दीजिये। डॉक्टर ने कहा कि मेरी ड्यूटी का शिफ्ट खत्म हो गया है और मैं जा रहा हूँ। दूसरे शिफ्ट के डॉक्टर आ चुके हैं उनसे यह काम करवा लीजिये।<br /><br />दूसरा डॉक्टर चार वेटर्स को लेकर बनवारी लाल जी के कमरे में आये क्योंकि उनके कमरे का नंबर 9 हो चुका था। वेटर्स ने बनवारी लाल जी के हाथ पैरों को कस के पकड़ लिया, मुँह में कपड़ा ठूँस दिया ताकि वे चिल्ला न सकें और डॉक्टर ने एनीमा दे दिया। अपना काम करके वे चलते बने। बनवारी लाल जी बेचारे क्या कर सकते थे? चुप चाप रात बिता दी और सबेरे के फ्लाइट से वापस भारत आ गये।<br /><br />उनके इस यात्रा के बाद बीस बाइस साल बीत गये। एक दिन उनका भांजा उनके पास आया और बोला कि उसे इंग्लैंड जाना है वहाँ के बारे में उसे सब कुछ समझा दे ताकि उसे किसी प्रकार की तकलीफ न हो। बनवारी लाल जी ने कहा, "और सब तो ठीक है भांजे, पर एक बात का ध्यान रखना कि यदि खाना पसंद न आये तो क्राकरी चम्मच को मत पटकना। ऐसा करने पर वे अंग्रेज रात को बहुत बुरी सजा देते हैं।"<br /><br /><span style="font-weight: bold;">- 3 -</span><br /><br />बनवारी लाल जी अपने चार पाँच साल के लड़के को लेकर उद्यान में घूमने के लिये गये। वहाँ पर एक आदमी, जिसकी तोंद निकली हुई थी, को देख कर लड़के ने पूछा, "पापा, उस आदमी का पेट इतना बड़ा क्यों है?" बनवारी लाल जी ने बताया, "बेटा, वो उद्योगपति है। उद्योगपतियों के पेट बहुत बड़े हो जाते हैं।"<br /><br />थोड़ी देर के बाद लड़के ने एक गर्भवती महिला को देखा और बोला, "पापा, पापा, देखो एक और उद्योगपति!"<br /><br />बनवारी लाल जी ने लड़के को डॉंटते हुये कहा, "चुप बे, वो पतिउद्योग है।"<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-8596481724059645881?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-54688243071779762512009-05-28T10:27:00.003+05:302009-05-28T17:35:45.314+05:30तरस जाओगे भीख देने के लिये यदि हम मांगने न आयें तो"कुछ दे दो बाबा, भगवान आपका भला करेगा।" मेरे पास आकर वो बोला। अच्छा खासा जवान आदमी था, किसी प्रकार की शारीरिक अपंगता भी न थी।<br /><br />"हट्टे-जवान आदमी होकर भी भीख मांगते शर्म नहीं आती। कुछ काम क्यों नहीं करते?" मैंने कहा।<br /><br />"काम ही तो कर रहा हूँ। क्या भीख मांगना काम नहीं है? हम लोग यदि मांगने न आयें तो आप लोग भीख देने के लिये तरस जायेंगे। कुछ देना है तो दीजिये, फालतू उपदेश देकर मेरे धंधे का वक्त खोटा मत कीजिये।"<br /><br />उसकी बातें सुनकर मेरे ज्ञान चक्षु खुल गये। मैंने सोचा ठीक ही तो कह रहा है। जेब से एक रुपये सिक्का निकाल कर कहा, ये लो।<br /><br />उसने एक के सिक्के को तुच्छ नजरों से देखा और बोला, "एक रुपये से क्या होता है साहब आजकल? एक रुपये में एक सिगरेट तक तो नहीं मिलता। सिगरेट की बात छोड़िये, एक पानी पाउच तक तो नहीं आता, रायपुर की इस बढ़ी हुई गर्मी में दुकानदार लोग एक रुपये के पानी पाउच को दो रुपये से तीन रुपये तक में बेच रहे हैं, लोग यह तक नहीं जानते कि अधिक पैसे लेकर उन्हें महीनों पुराने स्टॉक का सड़ा पानी दिया जा रहा है। दस रुपये नहीं तो कम से कम पाँच रुपये तो दीजिये।"<br /><br />मैं बोला, "देखो, एक रुपया लेना है तो लो नहीं तो चलते बनो।"<br /><br />"वाह साहब, दोस्तों के साथ 'बार' में बैठ कर दारू पीने में तो हजार पाँच सौ रुपये खर्च कर दोगे। 'वेटर' को ही बीस पचीस रुपये टिप दे दोगे। पर हमें दस पाँच रुपये भी नहीं दे सकते।"<br /><br />उसकी बातों में अब मुझे भी थोड़ा रस आने लगा था। मैंने कहा, "दारू चाहे अच्छा हो या बुरा पर वह कम से कम हमारे अंग में तो जाता है, वेटर भी अपनी सेवाएँ देता है। पर तुम्हें देने से भला क्या मिलेगा?"<br /><br />"हमें देने से आपको पुण्य मिलेगा साहब जो परलोक में आपके काम आयेगा। और सबसे बड़ी बात तो हमारा आशीर्वाद मिलेगा जो अमूल्य है और इस लोक में आपकी बढ़ती करेगा। बस अब जल्दी से दस रुपये दे दीजिये।"<br /><br />"देख भाई, एक रुपये ले कर चलता बन। और भी लोगों से मांगेगा तो दस पाँच रुपये बन ही जायेंगे।"<br /><br />"एक रुपया तो मैं किसी से नहीं लेता साहब, मैं तो पुण्य और आशीर्वाद का व्होलसेल डीलर हूँ। देना है तो कम से कम पाँच रुपये दीजिये।"<br /><br />"मैं चिल्हर पुण्य और आशीर्वाद लेना चाहता हूँ भाई थोक नहीं, जाओ तुम कोई और ग्राहक ढूंढो और मैं कोई चिल्हर दुकानदार देखूँगा।"<br /><br />कुछ देर तो वो मुझे बड़ी हिकारत भरी नजर से देखता रहा फिर चला गया।<br /><br />अब मेरे भी संस्कार कुछ ऐसे हैं कि वह एक रुपया मुझे काटने लगा, जब तक मैं उस रुपये को दान में न दे देता मुझे चैन नहीं मिलने वाला था। अब मैं इन्तिजार करने लगा कि कोई दूसरा भिखारी आये तो मैं उसे वो एक रुपया दे दूँ।<br /><br />कुछ देर बाद मेरी मुराद पूरी हुई और एक दूसरा भिखारी मेरे पास आ कर बोला, "एक रुपया दे दीजिये साहब, गरीब भिखारी को।"<br /><br />था तो वह भी पहले वाले जैसा ही याने कि हट्टा कट्टा जवान पर उसे काम करने के लिये कहने की हिम्मत अब मेरी न हुई क्योंकि मैं खुद ही अपने एक रुपये से पीछा छुड़ाना चाहता था। पर मेरे अचेतन में एकाएक पहले भिखारी के शब्द गूँज उठे और अनायास ही मेरे मुँह से निकल पड़ा, "एक रुपये से आजकल होता क्या है?"<br /><br />वो बोला, "होता तो कुछ भी नहीं है साहब पर देने वाली की औकात देख कर मांगना पड़ता है।"<br /><br />मुझे पहली बार अपनी औकात का पता चला। मैंने उसे एक रुपया थमाते हुये कहा, "तुम मांगने वालों की किस्मत खुल गई है कि रायपुर में एक जमाने से अठन्नी चवन्नी का चलन बन्द हो चुका है। नहीं तो एक आदमी से मुश्किल चवन्नी ही मिलती, मैं भी तुम्हें चवन्नी ही दिया होता।"<br /><br />"तो क्या आप समझते हैं कि मैं आपकी चवन्नी ले लेता?" आश्चर्यमिश्रित स्वर में उसने मुझसे कहा, "नहीं साहब, मैं कभी भी आपकी चवन्नी नहीं लेता क्योंकि मैं अपने से कम औकात वालों से भीख नहीं लेता बल्कि उन्हें खुद ही कुछ दे दिया करता हूँ।"<br /><br />एक रुपये से मेरा पीछा छूट चुका था इसलिये मैं खुश था और इसीलिये आगे बिना कुछ कहे सुने उसे चुपचाप चले जाने दिया।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-5468824307177976251?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com10tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-41982434839487783762009-05-20T11:39:00.000+05:302009-05-20T11:42:48.398+05:30सौ वर्ष पहले का हिन्दी लेखआज से सौ साल पहले हिन्दी के विषय में क्या धारणाएँ थीं और हिन्दी का विकास कैसे हुआ आदि के विषय में नीचे दिये गए लेख से जानकारी मिलती है जिसे कि बीसवीं शताब्दी के पहले दशक में बाबू देवकीनन्दन खत्री जी ने अपने विख्यात उपन्यास चन्द्रकान्ता सन्तति के उपसंहार में लिखा थाः<br /><br /><blockquote>प्रिय पाठक महाशय, अब चन्द्रकान्ता सन्तति के लेख प्रणाली के विषय में कुछ कहने की इच्छा होती है।<br /><br />जिस समय मैंने चन्द्रकान्ता लिखनी आरम्भ की थी उस समय कविवर प्रतापनारायण मिश्र और पण्डितवर अम्बिकादत्त व्यास जैसे धुरंधर किन्तु अद्भुत सुकवि और सुलेखक विद्यमान थे तथा राजा शिवप्रसाद राजा लक्ष्मणसिंह जैसे सुप्रतिष्ठित पुरुष हिन्दी की सेवा करने में अपना गौरव समझते थे, परन्तु अब न वैसे मार्मिक कवि हैं और न वैसे सुलेखक। उस समय हिन्दी के लेखक थे परन्तु ग्राहक न थे, इस समय ग्राहक हैं पर लेखक नहीं हैं। मेरे इस कथन का यह मतलब नहीं है कि वर्तमान समय के साहित्यसेवी प्रतिष्ठा के योग्य नहीं हैं बल्कि यह मतलब है कि जो स्वर्गीय सज्जन अपनी लेखनी से हिन्दी के आदि युग में हमें ज्ञान दे गए हैं वे हमारी अपेक्षा बहुत बढ़ चढ़ कर थे। उनकी लेख प्रणाली में चाहे भेद रहा हो परन्तु उन सब का लक्ष्य यही था कि इस भारत भूमि में किसी तरह मातृभाषा का एकाधिपत्य हो, लेकिन यह कोई नियम की बात नहीं है कि वैसे लोगों से कुछ भूल हो ही नहीं उनसे भूल हुई तो यही कि प्रचलित शब्दों पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। राजा शिवप्रसाद के राजनीति के विचार चाहे कैसे रहे हों पर सामाजिक विचार उनके बहुत ही प्राञ्जल थे और वे समयानुकूल काम करना खूब जानते थे, विशेषतः जिस ढंग की हिन्दी वे लिख गए हैं उसी से वर्तमान हिन्दी का रास्ता कुछ साफ हुआ है।<br /><br />चाहे कोई हिन्दू हो चाहे जैन या बौद्ध हो और चाहे आर्य समाजी या धर्म समाजी ही क्यों न हो परन्तु जिन सज्जनों के मानवीय अवतारों और पूर्वजनों ने इस पुण्यभूमि का अपने आविर्भाव से गौरव बढ़ाया है उनमें ऐसा अभागा कौन होगा जो पुण्यता और मधुरता युक्त संस्कृत भाषा के शब्दों का प्रचुर प्रचार न चाहेगा? मेरे विचार में किसी विवेकी भारत सन्तान के विषय में केवल यह देख कर कि वह विदेशी भाषा के शब्दों का प्रसार कर रहा है यह गढ़न्त कर लेना कि वह देववाणी के पवित्र शब्दों का विरोधी है भ्रम ही नहीं किन्तु अन्याय भी है। देखना यह चाहिये कि ऐसा करने से उसका मतलब क्या है। भारतवर्ष में आठ सौ वर्ष तक यवनों का राज्य रहा है इसलिये फारसी अरबी के शब्द हिन्दू समाज में "नपठयेत यावनी भाषा" की दीवार लांघ कर उसी प्रकार आ घुसे जिस प्रकार हिमालय के उन्नत मस्तक को लांघ कर वे स्वयं आ गए, यहाँ तक कि महात्मा तुलसीदासजी जैसे भगवद्भक्त कवियों को भी "गरीबनिवाज" आदि शब्दों का बर्ताव दिल खोल के करना पड़ा।<br /><br />आठ सौ वर्ष के कुसंस्कार को जो गिनती के दिनों में दूर करना चाहते हैं उनके उत्साह और साहस की प्रशंसा करने पर भी हम यह कहने के लिये मजबूर हैं कि वे अपने बहुमूल्य समय का सदुपयोग नहीं करते बल्कि जो कुछ वे कर सकते थे उससे भी दूर हटते हैं। यदि ईश्वरचंद विद्यासागर सीधे सादे शब्दों में बंगला में काम न लेते तो उत्तर काल के लेखकों को संस्कृत शब्द के बाहुल्य प्रचार का अवसर न मिलता और यदि "राजा शिवप्रसादी हिन्दी" प्रकट न होती तो सरकारी पाठशालाओं में हिन्दी के चन्द्रमा की चांदनी मुश्किल से पहुँचती। मेरे बहुत से मित्र हिन्दुओं की अकृतज्ञता का यों वर्णन करते हैं कि उन्होंने हरिश्चन्द्रजी जैसे देश हितैषी पुरुष की उत्तम पुस्तकें नहीं खरीदी, पर मैं कहता हूँ कि यदि बाबू हरिश्चन्द्र अपनी भाषा को थोड़ा सरल करते तो हमारे भाइयों को अपने समाज पर कलंक लगाने की आवश्यकता न पड़ती और स्वाभाविक शब्दों के मेल से हिन्दी की पैसिंजर भी मेल बन जाती। प्रवाह के विरुद्ध चल कर यदि कोई कृतकार्य हो तो निःसन्देह उसकी बहादुरी है परन्तु बड़े बड़े दार्शनिक पण्डितों ने इसको असम्भव ठहराया है। सारसुधानिधि और कविवचनसुधा की भाषा यद्यपि भावुकजनों के लिये आदर की वस्तु थी परन्तु समय के उपयोगी न थी। हमारे "सुदर्शन" की लेख प्रणाली को हिन्दी के धुरन्धर लेखकों और विद्वानों ने प्रशंसा के योग्य ठहराया है परन्तु साधारणजन उससे कितना लाभ उठा सकते हैं यह सोचने की बात है। यदि महाकवि भवभूति के समान किसी भविष्य पुरुष की आशा ही पर ग्रन्थकारों और लेखकों को यत्न करना चाहिये तो मैं सुदर्शन संपादक पण्डित माधवप्रसाद मिश्र को भी भविष्य की आशा पर बधाई देता हूँ पर यदि ग्रन्थकारों को भविष्य की अपेक्षा वर्तमान से अधिक सम्बन्ध है तो निःसन्देह इस विषय में मुझे आपत्ति है।<br /><br />किसी दार्शनिक ग्रन्थ या पत्र की भाषा के लिये यदि किसी बड़े कोष को टटोलना पड़े तो कुछ परवाह नहीं परन्तु साधारण विषयों की भाषा के लिये भी कोष की खोज करनी पड़े तो निःसन्देह दोष की बात है। मेरी हि्न्दी किस श्रेणी की हिन्दी है इसका निर्धारण मैं नहीं करता परन्तु मैं यह जानता हूँ कि इसके पढ़ने के लिये कोष की तलाश करनी नहीं पड़ती। चन्दकान्ता के आरम्भ के समय मुझे विश्वास न था कि उसका इतना अधिक प्रचार होगा, यह मनोविनोद के लिये लिखी गई थी, पर पीछे लोगों का अनुराग देखकर मेरा भी अनुराग हो गया और मैंने अपने उन विचारों को जिनको मैं अभी तक प्रकाश नहीं कर सका था फैलाने के लिये इस पुस्तक को द्वार बनाया और सरल भाषा में उन्हीं मामूली बातों को लिखा जिससे मैं उस होनहार मण्डली का प्रियपात्र बन जाऊँ जिसके हाथ में भारत का भविष्य सौंप कर हमें इस असार संसार से विदा होना है। मुझे इस बात से बड़ा हर्ष है कि मैं इस विषय मे सफल हुआ और मुझे ग्राहकों की अच्छी श्रेणी मिल गई। यह बात बहुत से सज्जनों पर प्रकट है कि "चन्द्रकान्ता" पढ़ने के लिये बहुत से पुरुष नागरी की वर्णमाला सीखते हैं और जिनको कभी हिन्दी सीखना न था उन लोगों ने भी इसके लिये सीखी।<br /><br />हिन्दी के हितैषियों में दो प्रकार के सज्जन हैं। एक तो वे जिनका विचार यह है कि चाहे अक्षर फारसी क्यों न हों पर भाषा विशुद्ध संस्कृत मिश्रित होनी चाहिये और दूसरे वे जो चाहते हैं कि चाहे भाषा में फारसी शब्द मिले भी हों पर अक्षर नागरी होना चाहिये। पहिले मैं पंजाब के आर्यसमाजियों को और धर्मसभा वालों को मान लेता हूँ जिनके लेखों में वर्णमाला के सिवाय फारसी अरबी को कुछ भी सहारा नहीं, सब कुछ संस्कृत का है, और दूसरे पक्ष में मैं अपने को ठहरा लेता हूँ जो इसके विपरीत है। मैं इस बात को भी स्वीकार करता हूँ कि जिस प्रकार फारसी वर्णमाला उर्दू का शरीर और अरबी फारसी के उपयुक्त शब्द उसके जीवन हैं, ठीक उसी प्रकार नागरी वर्णमाला हिन्दी का शरीर और संस्कृत के उपयुक्त शब्द उसके प्राण कहे जा सकते हैं। यदि यह देश यवनों के अधिकार में न हुआ होता, और यदि कायस्थादि हिन्दू जातियों में उर्दू भाषा का प्रेम अस्थिमज्जागत न हो गया होता तो हिन्दी का शरीर और जीवन पृथक दिखलाई देता। उसी प्रकार हमारे ग्रन्थों की सजीव उत्पत्ति होती जिस प्रकार द्विज बालकों की होती है। शरीर में यदि आत्मा न हो तो वह बेकार है और यदि आत्मा को उपयुक्त शरीर न मिल कर पशु पक्षी आदि का शरीर मिल जाय तो भी वह निष्फल ही है, इसलिये शरीर बना कर फिर उसमें आत्मदेव की स्थापना ही न्याययुक्त और लाभप्रद है। "चन्द्रकान्ता" और "सन्तति" में यद्यपि इस बात का पता नहीं लगेगा कि कब और कहाँ भाषा का परिवर्तन हो गया परन्तु उसके आरम्भ और अन्त में आप ठीक वैसा ही परिवर्तन पायेंगे जैसा बालक और वृद्ध में। एक दम से बहुत से शब्दों का प्रचार करते तो कभी सम्भव न था कि उतने संस्कृत शब्द हम कुपढ़ ग्रामीण लोगों को याद करा देते जिनके निकट काला अक्षर भैंस के बराबर था। मेरे इस कर्तव्य का आश्चर्यमय फल देख कर वे लोग भी बोधगम्य उर्दू के शब्दों को अपनी विशुद्ध हिन्दी में लाने लगे हैं जो आरम्भ में इसीलिये मुझ पर कटाक्षपात करते थे। इस प्रकार प्राकृत प्रवाह के साथ साथ साहित्यसेवियों की सरस्वती का प्रवाह बदलता देख कर समय के बदलने का अनुमान करना कुछ अनुचित नहीं है। जो हो भाषा के विषय में हमारा वक्तव्य यही है कि वह सरल हो और नागरी वाणी में हो क्योंकि जिस भाषा के अक्षर होते हैं उनका खिंचाव उन्हीं मूल भाषाओं की ओर होता है जिससे उनकी उत्पत्ति हुई है।<br /></blockquote><br />उपरोक्त लेख में इसके बाद लेखक के ग्रन्थों, "चन्द्रकान्ता" और चन्द्कान्ता सन्तति", के भाव तथा कथानक के विषय में लिखा गया है अतः शेष अंश को उद्धृत करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहाँ पर सिर्फ हिन्दी के विकास ही मुख्य विषय है। आज के सन्दर्भ में भी मेरा विचार यह है कि कम्प्यूटर तथा इंटरनेट से सम्बन्धित अंग्रेजी शब्दों को हमें अपना लेना चाहिये।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-4198243483948778376?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-81652764433559480312009-05-11T14:43:00.000+05:302009-05-11T14:44:41.360+05:30देवनागरी लिपि - पूर्णतः वैज्ञानिक लिपिशायद आपको पता होगा कि हमारी हिन्दी की वर्णमाला, वास्तव में देवनागरी वर्णमाला, पूर्णतः वैज्ञानिक है। वर्ण या अक्षर ध्वनि को प्रदर्शित करने वाले संकेत होते हैं और देवनागरी वर्णमाला को पूर्णतः ध्वनि की उत्पत्ति के आधार पर ही बनाया गया है। मनुष्य ध्वनि उत्पन्न करने के लिये अर्थात् बोलने के लिये कंठ से होठों तक के तंत्र का प्रयोग करता है और देवनागरी वर्णमाला में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि एक ही प्रकार से उत्पन्न होने वाली ध्वनियों का विशेष वर्ग हो।<br /><br />कंठ से निकलने वाली ध्वनियों को स्वर कहा जाता है और उन ध्वनियों को जिनके उच्चारण के लिये उनके साथ स्वरों का मेल होना आवश्यक होता है व्यंजन कहा जाता है। देवनागरी के स्वर अ, आ इ, ई, उ, ऊ ए, ऐ, ओ, औ, अं तथा अः सीधे कंठ से उत्पन्न होते हैं तथा इनके बोलने में अन्य स्वर तंत्र जैसे कि जीभ, तालू, मूर्धा, होठ आदि का कहीं प्रयोग नहीं होता। इन 12 स्वरों के अतिरिक्त देवनागरी के चार और स्वर ऋ, ॠ, ऌ तथा ॡ हैं जो कि सीधे कंठ से उत्पन्न नहीं होते किन्तु माने स्वर ही जाते हैं। इनमें से अंतिम तीन स्वरों का प्रयोग केवल संस्कृत में ही होता है, इनका प्रयोग हिन्दी में बिल्कुल ही नहीं होता। अन्य लिपियों में भी सीधे कंठ से निकलने वाली ध्वनियों को स्वर (vowel) कहा जाता है जैसे कि अंग्रेजी में a e io u स्वर (vowel) हैं।<br /><br />शेष 36 व्यंजन हैं जिन्हें कि उनकी उत्पत्ति के आधार पर आठ वर्गों में बाँटा गया है जो कि नीचे दर्शाये जा रहे हैं<br /><br />क ख ग घ ङ (क वर्ग)<br />च छ ज झ ञ (ख वर्ग)<br />त थ द ध न (त वर्ग)<br />ट ठ ड ढ ण (ट वर्ग)<br />प फ ब भ म (प वर्ग)<br />य र ल व (य वर्ग)<br />स श ष ह (स वर्ग)<br />क्ष त्र ज्ञ (क्ष वर्ग)<br /><br />एक वर्ग के वर्णो के उच्चारण करने पर हर बार ध्वनि तंत्रों की एक ही जैसी क्रिया होती है जैसे कि प वर्ग के वर्णों को बोलने में दोनों होठ आपस में जुड़ कर अलग होंगे।<br /><br />यहाँ पर यह भी बता देना उचित है कि ड़ तथा ढ़ की गणना देवनागरी के 52 अक्षरों में नहीं होती बल्कि ये संयुक्ताक्षर कहलाते हैं।<br /><br />देवनागरी लिपि का पूर्णतः वैज्ञानिक आधार पर होने के ही कारण माना जाता है कि यह कम्प्यूटर के लिये सर्वथा उपयुक्त लिपि है किन्तु अक्षरों के अनेकों प्रकार से मेल होने की जटिलता के कारण इस लिपि में कैरेक्टर्स की संख्या का निर्धारण न हो पाने के कारण इसका कम्प्यूटर की भाषा में सही सही प्रयोग हो पाना अभी तक सम्भव नहीं हो सका है।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-8165276443355948031?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-76018121010086218672009-05-10T14:42:00.000+05:302009-05-10T14:43:15.153+05:30हम तो बेवकूफ हैं जो हर रोज माँ का चरणस्पर्श करते हैंसोचा कि चलो थोड़ा ब्लोगवाणी को भी झाँक लें। अरे यहाँ तो आज माँ ही माँ हैं। मैं तो ठहरा पुराना आदमी जिसे कि किस दिन कौन सा डे है पता ही नहीं रहता। ब्लोगवाणी में झाँकने से पता चला कि आज मदर्स डे है।<br /><br />सोचने लगा कि हम तो बेवकूफ हैं जो हर रोज माँ का चरणस्पर्श करके उसके प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं (आज वे इस संसार में नहीं है तो भी प्रतिदिन उन्हें याद करके मन ही मन में उन्हें प्रणाम कर लिया करते हैं)। आज के लोग अधिक बुद्धिमान हैं जिन्होंने माँ का सम्मान करने के लिये साल में एक दिन तय कर लिया है। मदर्स डे के दिन माँ का खूब सम्मान कर लो फिर बाकी दिन उन्हें देखने की भी क्या जरूरत है?<br /><br />जमाना बदल गया है पर अफसोस है कि हम जमाने के साथ नहीं बदल सके।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-7601812101008621867?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com5tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-47963434688738756492009-05-08T13:04:00.002+05:302009-05-08T13:10:40.396+05:30एक ओर आलिंगन बिजनेस तो दूसरी तरफ आलिंगन अपराध$2 प्रति आलिंगन - यह भी एक बिजनेस है<br /><br />यू ट्यूब के इस व्हीडियो क्लिप में देखें कि आलिंगन भी बेचा जा सकता हैः<br /><br /><br /><object width="560" height="340"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/wJfYAJJYMqg&amp;hl=en&amp;fs=1"><param name="allowFullScreen" value="true"><param name="allowscriptaccess" value="always"><embed src="http://www.youtube.com/v/wJfYAJJYMqg&amp;hl=en&amp;fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="560" height="340"></embed></object><br /><br /><span style="font-weight: bold;">मित्रवत आलिंगन के कारण पाकिस्तानी महिला पर्यटन मंत्री का पदत्याग</span><br />(दो साल पुराना समाचार)<br /><br />पैराशूटिंग क बाद अपने पैराशूट इंस्ट्रक्टर को पाकिस्तानी महिला पर्यटन मंत्री नीलोफर बख्तियार के द्वारा मित्रवत आलिंगन देने के कारण इस्लामिक मौलवियों ने फतवा जारी किया तथा परिणामस्वरूप उन्हें अपना पद छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ा।<br /><br />पूरा समाचार पढ़ने के लिये <a href="http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6681645.stm"><span>यहाँ</span> <span>क्लिक</span> </a><span><a href="http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6681645.stm">करें</a>।</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-4796343468873875649?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-20813872670632691112009-05-04T18:33:00.002+05:302009-05-04T18:37:41.620+05:30एक ऐसा आविष्कार जो इंटरनेट की काया पलट कर रख देगाएक नया क्रांतिकारी वेब सॉफ्टवेयर इस महीने लांच होने जा रहा है जो कि प्रश्नों को समझ कर उनके उत्तर देने में समर्थ होगा। वेब प्रबंधन के इतिहास में अपने प्रकार का यह पहला सॉफ्टवेयर होगा जो कि गूगल के सर्च इंजिन से होड़ ले सकेगा।<br /><br />वोल्फरैम अल्फा नामक इस नये सिस्टम का पिछले सप्ताह हार्वर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका में प्रदर्शन किया गया। यह सिस्टम इंटरनेट में निहित जानकारियों का वैश्विक संग्रह करेगा और जानकारी से सम्बन्धित प्रश्नों को समझने तथा उनके सामान्य भाषा में उत्तर देने में उसी प्रकार समर्थ होगा जिस प्रकार से कोई व्यक्ति होता है।<br /><br />यद्यपि यह सिस्टम अभी नया है किन्तु इसने प्रौद्योगिकी विद्वानों और इंटरनेट पर नजर रखने वालों के मध्य असीम उत्तेजना उतपन्न कर दिया है।<br /><br />कंप्यूटर विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई खोज इंजन इंटरनेट के विकास में एक विकासवादी छलांग होगी। एक इंटरनेट और कंप्यूटर विशेषज्ञ नोवा स्पिवैक का कहना है कि वोल्फरैम अल्फा न केवल गूगल के जितना ही महत्वपूर्ण सिद्ध होगा बल्कि एक अलग उद्देश्य को भी पूरा करेगा।<br /><br />"माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई क्या है?" जैसे प्रश्न का वोल्फरैम अल्फा न केवल सीधा सीधा उत्तर देगा बल्कि माउंट एवरेस्ट से सम्बन्धित समस्त सूचनाओं, जैसे कि उसके आसपास के अन्य पर्वत श्रेणियों, वहाँ बसे बस्तियों आदि, को भी ग्राफ और चार्ट के साथ प्रस्तुत करेगा।<br /><br />वोल्फरैम अल्फा के ब्रिटिश आविष्कारक डॉ. स्टीफन वोल्फरैम के अनुसार इस आविष्कार की असली योग्यता इसके कार्य करने क्षमता है। यदि आप इस सिस्टम से गोल्डन गेट ब्रिज की लम्बाई की तुलना माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई से करने के लिये कहेंगे तो यह तुलना कर के दिखा देगा। या फिर यदि आप पूछेंगे कि जिस दिन जॉन एफ कैनेडी की हत्या हुई थी उस दिन लंदन का मौसम कैसा था तो यह क्रास चेक करके आपके प्रश्न का सही सही उत्तर देगा। यहाँ तक कि आप इससे ऐसा प्रश्न करेंगे जो कि समझने में अस्पष्ट लगे तो यह अनुमान लगाने का प्रयास करेगा कि आपका वास्तविक प्रश्न क्या हो सकता है।<br /><br />डॉ. वोल्फरैम अमेरिका में रहने वाले 49 वर्षीय भौतिकशास्त्री हैं जिन्हें कि अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने "पार्टिकल फिजिक्स" में PhD कर लिया था। उन्होंने बताया कि इसी माह में यह वोल्फरैम अल्फा को लांच कर दिया जायेगा और यह तो अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुवात ही है।<br /><br />यह सिस्टम इंटरनेट में संग्रहित विभिन्न सार्वजनिक डेटाबेस, जैसे कि विकीपेडिया, के साथ ही साथ अनेकों निजी डेटाबेस की जानकारी के आधार पर कार्य करता है। इसके डेटाबेस के रखरखाव अद्यतन के लिये 1000 कार्यकर्ताओं की आवश्यकता होगी। सूचनाओं को अद्यतन नियमित रूप से किया जायेगा।<br /><br />सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस सिस्टम का उपयोग कोई भी कर सकता है और वह भी बिल्कुल मुफ्त!<br /><br /><span style="font-weight: bold;">इंटरनेट का संक्षिप्त इतिहास</span><br /><ul><li>1969 इंटरनेट अमेरिकी रक्षा विभाग के द्वारा UCLA के तथा स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान कंप्यूटर्स का नेटवर्किंग करके इंटरनेट की संरचना की गई।</li><li>1979 ब्रिटिश डाकघर पहला अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बना कर नये प्रौद्योगिकी का उपयोग करना आरम्भ किया।</li><li>1980 बिल गेट्स का आईबीएम के कंप्यूटर्स पर एक माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम लगाने के लिए सौदा हुआ।</li><li>1984 एप्पल ने पहली बार फ़ाइलों और फ़ोल्डरों, ड्रॉप डाउन मेनू, माउस, ग्राफिक्स का प्रयोग आदि से युक्त "आधुनिक सफल कम्प्यूटर" लांच किया।</li><li>1989 टिम बेर्नर ली ने इंटरनेट पर संचार को सरल बनाने के लिए ब्राउज़रों, पन्नों और लिंक का उपयोग कर के वर्ल्ड वाइड वेब बनाया।</li><li>1996 गूगल ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में एक अनुसंधान परियोजना शुरू किया जो कि दो साल बाद औपचारिक रूप से काम करने लगा।</li><li>2009 डॉ। स्टीफन वोल्फरैम ने "वोल्फरैम अल्फा" लांच किया।</li></ul>अंग्रेजी में और अधिक जानकारी के लिये <a href="http://www.independent.co.uk/life-style/gadgets-and-tech/news/an-invention-that-could-change-the-internet-for-ever-1678109.html">यहाँ क्लिक करें</a>।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-2081387267063269111?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-32811360546346724932009-04-28T11:22:00.002+05:302009-04-28T11:32:33.143+05:30समय दीजिये<div style="text-align: center;"><span style="font-weight: bold;">अध्ययन</span><br /></div><div style="text-align: center;"><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanyHcuEI/AAAAAAAAAnY/Vs19Cey-uUo/s1600-h/read.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 206px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanyHcuEI/AAAAAAAAAnY/Vs19Cey-uUo/s400/read.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329617217298151490" border="0" /></a><br /><span>अध्ययन</span> <span>के</span> <span>लिये</span> <span>समय</span> <span>दीजिये</span>... <span>अध्ययन</span> <span>ही</span> <span>ज्ञान</span> <span>का</span> <span>स्रोत</span> <span>है।</span><br /><span style="font-weight: bold;">हास्य</span><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanXfSilI/AAAAAAAAAnI/yvzTh9j1b0I/s1600-h/laugh.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 300px; height: 285px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanXfSilI/AAAAAAAAAnI/yvzTh9j1b0I/s400/laugh.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329617210150390354" border="0" /></a><span>हास्य</span> <span>के</span> <span>लिये</span> <span>समय</span> <span>दीजिये</span>... <span>हास्य</span> <span>ही</span> <span>आत्मा</span> <span>का</span> <span>संगीत</span> <span>है</span>!<br /><span style="font-weight: bold;">प्रेम</span><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanSZvE8I/AAAAAAAAAnA/GXf6w-8OTYc/s1600-h/rose.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanSZvE8I/AAAAAAAAAnA/GXf6w-8OTYc/s400/rose.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329617208784917442" border="0" /></a><span>प्रेम</span> <span>के</span> <span>लिये</span> <span>समय</span> <span>दीजिये</span>... <span>प्रेम</span> <span>ही</span> <span>चिर</span> <span>यौवन</span> <span>का</span> <span>रहस्य</span> <span>है</span>!<br /><span style="font-weight: bold;">प्रकृति दर्शन</span><br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanvO437I/AAAAAAAAAnQ/hUNNw23dn7I/s1600-h/nature.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfaanvO437I/AAAAAAAAAnQ/hUNNw23dn7I/s400/nature.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329617216524050354" border="0" /></a>प्रकृति दर्शन के लिये समय दीजिये... प्रकृति दर्शन ही मन की शांति है!<br /></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-3281136054634672493?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-39705552961196613352009-04-27T13:43:00.003+05:302009-04-27T13:49:38.595+05:30मन को मोहने वाले ये चित्र<span>एक</span> <span>मित्र</span> <span>ने</span> <span>कन्याकुमारी</span> <span>जिले</span> <span>के</span> <span>ये</span> <span>चित्र</span> <span>मुझे</span> <span>भेजे</span> <span>हैं।</span> <span>सभी</span> <span>चित्र</span> <span>इतने</span> <span>मनमोहक</span> <span>हैं</span> <span>कि</span> <span>जी</span> <span>चाहा</span> <span>कि</span> <span>इन्हें</span> <span>आप</span> <span>लोगो</span> <span>के</span> <span>साथ</span> <span>शेयर</span> <span>करूँ।</span><br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKYrwn7I/AAAAAAAAAmw/ZNXx9v8k6Bs/s1600-h/kk5.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKYrwn7I/AAAAAAAAAmw/ZNXx9v8k6Bs/s400/kk5.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282460720078770" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKDWjXWI/AAAAAAAAAmo/3cID5dIG4Ec/s1600-h/kk4.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKDWjXWI/AAAAAAAAAmo/3cID5dIG4Ec/s400/kk4.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282454993984866" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKLl_1-I/AAAAAAAAAmg/pmcE27ngr4Y/s1600-h/kk3.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqKLl_1-I/AAAAAAAAAmg/pmcE27ngr4Y/s400/kk3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282457206249442" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqJ_cRRRI/AAAAAAAAAmY/Vee3aO0um50/s1600-h/kk2.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqJ_cRRRI/AAAAAAAAAmY/Vee3aO0um50/s400/kk2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282453944222994" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqJ1hI0jI/AAAAAAAAAmQ/5XDQOyTRGWY/s1600-h/kk1.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqJ1hI0jI/AAAAAAAAAmQ/5XDQOyTRGWY/s400/kk1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282451280286258" border="0" /></a><span></span><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqUiefwsI/AAAAAAAAAm4/ZUiWAcTukcs/s1600-h/kk6.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 225px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SfVqUiefwsI/AAAAAAAAAm4/ZUiWAcTukcs/s400/kk6.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329282635147494082" border="0" /></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-3970555296119661335?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-13580739445971797872009-04-25T13:10:00.002+05:302009-04-25T13:16:13.617+05:30चुनाव के समय जरूरी जिन्सों के दाम क्यों बढ़ जाते हैं?हमारे छत्तीसगढ़ में 16 अप्रैल को लोक सभा चुनाव था। ठीक चुनाव के दिन जब मैं अरहर दाल लेने के लिये गया तो पता चला कि 35-36 रु. किलो बिकने वाले अरहर दाल का दाम उस रोज 60 रु. किलो था। मेरा अनुभव है कि चुनाव के दिनों में रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े हुये ही रहते हैं। समझ से बाहर की बात है कि आखिर चुनाव के समय मंहगाई क्यों बढ़ जाती है?<br /><br />चुनाव की बात चली है तो ज्ञानदत्त जी की बात याद आ गई जिसे कि उन्होंने फेसबुक में ऐसे लिखा हैः<br /><blockquote><span style="font-weight: bold;">कल यहां चुनाव है और मैं तय नहीं हूं कि वोट दिया जाय या नहीं। केण्डीडेट कोई खरा नहीं लगता। संसद की स्टेबिलिटी के लिये मुख्य राष्ट्रीय दलों में एक को चुनने का विकल्प है। यह भी मन में आता है कि वोट न दे कर आगे संसद में होने जा रही जूतमपैजार से अपने को यह कह कर अलग कर सकूंगा कि इन्हें चुनने में मेरा कोई हाथ नहीं! :-)</span><br /></blockquote>वास्तव में क्या किया जाना चाहिये? वोट न देने से लगता है कि हम अपने राष्ट्रीय कर्तव्य से मुख मोड़ रहे हैं और यदि वोट दें तो अक्षम केण्डीडेट को देना मजबूरी हो जाती है। इसीलिये मैंने फेस बुक में ज्ञानदत्त जी को टिप्पणी की है किः<br /><blockquote>मेरा विचार है कि मतपत्र में मतदान के लिये एक विकल्प यह भी होना चाहिये "इनमें से कोई नहीं"।</blockquote>आप लोगों का क्या विचार है?<br /><br /><br />आप इसे भी पढना पसंद करेंगे - <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF/"><span style="font-weight: bold;">आर्टिकल</span><span style="font-weight: bold;"> </span><span style="font-weight: bold;">मार्केटिंग</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-1358073944597179787?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-5433494800580540402009-04-22T13:08:00.004+05:302009-04-22T13:28:33.650+05:30फंतासी (Fantasy)<span>ये</span> <span>फन्तासियाँ</span> (Fantasies) <span>आपको</span> <span>अवश्य</span> <span>पसंद</span> <span>आयेंगे।</span><br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8MM2WzI/AAAAAAAAAlg/oWqIuMajUKM/s1600-h/fantasy.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 284px; height: 400px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8MM2WzI/AAAAAAAAAlg/oWqIuMajUKM/s400/fantasy.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327419644153584434" border="0" /></a><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7Nso59ELI/AAAAAAAAAmI/ddT0fN4ciJo/s1600-h/fantasy5.gif"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 390px; height: 400px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7Nso59ELI/AAAAAAAAAmI/ddT0fN4ciJo/s400/fantasy5.gif" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327421576004309170" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L88X0qWI/AAAAAAAAAmA/CxoQP7nEyK0/s1600-h/fantasy4.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 277px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L88X0qWI/AAAAAAAAAmA/CxoQP7nEyK0/s400/fantasy4.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327419657084512610" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8u0lt-I/AAAAAAAAAl4/KbmK6VqIAys/s1600-h/fantasy3.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 400px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8u0lt-I/AAAAAAAAAl4/KbmK6VqIAys/s400/fantasy3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327419653447071714" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8RQBPCI/AAAAAAAAAlw/cWBp7s3hJ7Q/s1600-h/fantasy2.jpeg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 296px; height: 400px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8RQBPCI/AAAAAAAAAlw/cWBp7s3hJ7Q/s400/fantasy2.jpeg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327419645509057570" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8cUiaGI/AAAAAAAAAlo/qYuRcGbi1EA/s1600-h/fantasy1.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 300px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/Se7L8cUiaGI/AAAAAAAAAlo/qYuRcGbi1EA/s400/fantasy1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327419648480798818" border="0" /></a><br /><br />ये फन्तासियाँ (Fantasies) आपको अवश्य पसंद आयेंगे।<br /><br />सौजन्यः मुम्बईहैंगआउट<br /><br />इसे भी आप पढ़ना चाहेंगे - <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8B/"><span style="font-weight: bold;">नेट से कमाई करने के लिये सोशल नेटवर्किंग साइट्स का फायदा कैसे लें?</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-543349480058054040?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-29512001564892514022009-04-20T10:36:00.002+05:302009-04-20T10:41:06.693+05:30सन् 1952 तथा 1953 के लोकप्रिय फिल्मी गीतइस अवधि में बैजू बावरा और अनारकली के गाने सर्वाधिक लोकप्रिय हुये। प्रस्तुत है 1952 तथा 1953 के लोकप्रिय फिल्मी गीतों की सूचीः<br /><table border="1" width="100%"><tbody><tr><td align="center"><b>Song Title<br />गीत के बोल</b></td><td align="center"><b>Singers<br />गायक/गायिका</b></td><td align="center"><b>Music Director<br />संगीत निर्देशक</b></td><td align="center"><b>Lyricis<br />गीतकार</b></td><td align="center"><b>Movie<br />फिल्म</b></td><td align="center"><b>Year of release<br />प्रदर्शन वर्ष</b></td></tr><tr><td>Akeli mat jaiyo raadhe jamuna ke teer<br />अकेली मत जइयो राधे जमुना के तीर</td><td>Mohammed Rafi, Lata Mangeshkar<br />मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Bachpan ki muhabbat ko<br />बचपन के मुहब्बत को</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Jhoole mein pavan ki aayi bahaar<br />झूले में पवन के आई बहार</td><td>Mohammed Rafi, Lata Mangeshkar<br />मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Kisine apna banaake mujhko<br />किसी ने अपना बना के मुझको</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Patita<br />पतिता</td><td>1953</td></tr><tr><td>Man tadpat hari darshan ko aaj<br />मन तड़पत हरि दरशन को आज</td><td>Mohammed Rafi<br />मोहम्मद रफी</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Mohe bhool gaye saanvariya<br />मोहे भूल गये साँवरिया</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Muhabbat aisi dhadkan hai<br />मुहब्बत ऐसी धड़कन है</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी. रामचन्द्र</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जयपुरी</td><td>Anarkali<br />अनारकली</td><td>1953</td></tr><tr><td>Aaj tumse door ho kar aise roya mera pyaar<br />आज तुमसे दूर होकर ऐसे रोया मेरा प्यार</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Usha Khanna<br />उषा खन्ना</td><td>Anjaan<br />अन्जान</td><td>Daera<br />दायरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>ञere qismat ke kharidaar ab to aaja<br />मेरे किस्मत के खरीदार अब तो आ जा</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी. रामचन्द्र</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Anarkali<br />अनारकली</td><td>1953</td></tr><tr><td>Aaja re aa nindiya tu aa<br />आ जा री आ निंदिया तू आ</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Salil Choudhary<br />सलिल चौधरी</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Do Beegha Zameen<br />दो बीघा जमीन</td><td>1953</td></tr><tr><td>Aaja re ab mera dil pukaara<br />आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा</td><td>Lata Mangeshkar, Mukesh<br />लता मंगेशकर, मुकेश</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जयपुरी</td><td>Aah<br />आह</td><td>1953</td></tr><tr><td>Ae gham-e-dil kya karoon<br />ऐ गमे दिल क्या करूँ</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Sardar Malik<br />सरदार मलिक</td><td>Majaz<br />मजाज़</td><td>Thokar<br />ठोकर</td><td>1953</td></tr><tr><td>Andhe jahaan ke andhe raaste<br />अंधे जहान के अंधे रास्ते</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Patita<br />पतिता</td><td>1953</td></tr><tr><td>Badi mushkil se dil ki beqaraari ko qaraar aaya<br />बड़ी मुश्किल से दिल की बेकरारी को करार आया</td><td>Shamshad Begum<br />शमशाद बेगम</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Jaan Nisar Akhtar<br />जां निसार अख्तर</td><td>Naghma<br />नग़मा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Door koi gaaye<br />दूर कोई गाये</td><td>Lata Mangeshkar, Mohammed Rafi, Shamshad Begum< लता मंगेशकर, मोहाम्मद रफी, शमशाद बेगम/td></td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Dua kar gham-e-dil khuda se dua kar<br />दुआ कर गमे दिल खुदा से दुआ कर</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी. रामचन्द्र</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Anarkali<br />अनारकली</td><td>1953</td></tr><tr><td>Hai sabse madhur woh geet jinhe<br />हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Patita<br />पतिता</td><td>1953</td></tr><tr><td>Mitti se khelte ho baar baar kisliye<br />मिट्टी से खेलते हो बार बार किसलिये</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Patita<br />पतिता</td><td>1953</td></tr><tr><td>O duniya ke rakhwaale<br />ओ दुनिया के रखवाले</td><td>Mohammed Rafi<br />मोहम्मद रफी</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Raaja ki aayegi baraat<br />राजा की आयेगी बारात</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Aah<br />आह</td><td>1953</td></tr><tr><td>Raat andheri door savera<br />रात अंधेरी दूर सवेरा</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जयपुरी</td><td>Aah<br />आह</td><td>1953</td></tr><tr><td>Shaam-e-gham ki qasam<br />शामे गम की कसम</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Khaiyyam</td><td>Majrooh Sultanpuri<br />मजरूह सुल्तानपुरी</td><td>Footpath<br />फुटपाथ</td><td>1953</td></tr><tr><td>Tu ganga ki mauj main jamuna ka dhaara<br />तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा</td><td>Lata Mangeshkar, Mohammed Rafi<br />लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Baiju Bawra<br />बैजू बावरा</td><td>1953</td></tr><tr><td>Yaad kiya dil ne kahaan ho tum<br />याद किया दिल ने कहाँ हो तुम</td><td>Hemant Kumar, Lata Mangeshkar<br />हेमन्त कुमार, लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जयपुरी</td><td>Patita<br />पतिता</td><td>1953</td></tr><tr><td>Yeh shaam ki tanhaaiyaan aise mein tera gham<br />ये शाम की तनहाइयाँ ऐसे में तेरा गम</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Aah<br />आह</td><td>1953</td></tr><tr><td>Yeh zindagi usiki hai jo kisika ho gaya<br />ये जिंदगी उसी की है जो किसी का हो गया</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी. रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Anarkali<br />अनाकली</td><td>1953</td></tr><tr><td>Zindagi pyaar ki do chaar ghadi hoti hai<br />जिंदगी प्यार की दो चार घड़ी होती है</td><td>Hemant Kumar, Lata Mangeshkar<br />हेमन्त कुमार, लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी. रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Anarkali<br />अनाकली</td><td>1953</td></tr></tbody></table><br />आप इसे भी पढ़ना पसंद करेंगे - <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-11-%E0%A4%B2%E0%A5%8B/"><span style="font-weight: bold;">इंटरनेट से कमाई करने के लोकप्रिय तरीके</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-2951200156489251402?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-15643738845357885262009-04-18T10:46:00.002+05:302009-04-18T10:53:21.345+05:30सन् 1951 के लोकप्रिय फिल्मी गीतइस बात में तो दो मत होना ही नहीं चाहिये किस सन् 1950 से 1980 के मध्य बने फिल्मों के गीत सुमधुर संगीत के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। ये वो हिन्दी गाने हैं जो कि आज तक लोकप्रिय हैं। मैंने उन गीतों की विवरण सहित सूची वर्षानुसार तैयार करने का प्रयास किया है। यद्यपि समस्त लोकप्रिय फिल्मी गीतों की सूचीबद्ध करना बहुत कठिन है किन्तु जहाँ तक हो सका मैंने सूची में अधिक से अधिक गीतों को सम्मिलित करने की कोशिश की है। आज प्रस्तुत है सन् 1951 के लोकप्रिय गीतों की सूची। सन् 1951 में राजकपूर के फिल्म आवारा के गीत सबसे अधिक पसंद किये गये थे यहाँ तक कि उन गानों ने रूस में भी धूम मचा दिया था।<br /><br /><table border="1" width="100%"><tbody><tr><td align="center"><b>Song Title<br />गीत के बोल</b></td><td align="center"><b>Singers<br />गायक/गायिका</b></td><td align="center"><b>Music Director<br />संगीत निर्देशक</b></td><td align="center"><b>Lyricis<br />गीतकार</b></td><td align="center"><b>Movie<br />फिल्म</b></td><td align="center"><b>Year of release<br />प्रदर्शन वर्ष</b></td></tr><tr><td>Aa gup-chup gup-chup pyaar karen<br />आ गुप-चुप गुप-चुप प्यार करें</td><td>Hemant Kumar, Sandhya Mukherjee<br />हेमंत कुमार, संध्या मुखर्जी</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Saza<br />सजा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Aa jaao tadapte hain armaan<br />आ जाओ तड़पते हैं अरमां</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जायपुरी</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Aawaara hoon<br />आवारा हूँ</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जायपुरी</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Bachpan ke din bhula na dena<br />बचपन के दिन भुला न देना</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Deedar<br />दीदार</td><td>1951</td></tr><tr><td>Bholi surat dil ke khote<br />भोली सूरत दिल के खोटे</td><td>Chitalkar, Lata Mangeshkar<br />चीतलकर, लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Albela<br />अलबेला</td><td>1951</td></tr><tr><td>Dam bhar jo udhar munh phere<br />दम भर जो उधर मुँह फेरे</td><td>Lata Mangeshkar, Mukesh<br />लता मंगेशकर, मुकेश</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Awaara आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Dheere se aaja ri ankhiyaan mein<br />धीरे से आजा री अँखियन में</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Albela<br />अलबेला</td><td>1951</td></tr><tr><td>Ek bevafa se pyaar kiya<br />इक बेवफा से प्यार किया</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जायपुरी</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Ghar aaya mera pardesi<br />घर आया मेरा परदेसी</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Ham tujhse muhabbat karke sanam<br />हम तुझसे मुहब्बत करके सनम</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जायपुरी</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Hue ham jinke liye barbaad<br />हुये हम जिनके लिये बरबाद</td><td>Mohammed Rafi<br />मोहम्मद रफी</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Deedar<br />दीदार</td><td>1951</td></tr><tr><td>Jabse balam ghar aaye<br />जबसे बलम घर आये</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Hasrat Jaipuri<br />हसरत जायपुरी</td><td>Awaara<br />आवारा</td><td>1951</td></tr><tr><td>Leja meri duaaen leja<br />ले जा मेरी दुआयें ले जा</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Deedar<br />दीदार</td><td>1951</td></tr><tr><td>Meri kahaani bhoolnewaale<br />मेरी कहानी भूलने वाले</td><td>Mohammed Rafi<br />मोहम्मद रफी</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Deedar<br />दीदार</td><td>1951</td></tr><tr><td>Meri yaad mein tum na aansu bahana<br />मेरी याद में तुम ना आँसू बहाना</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Madan Mohan<br />मदन मोहन</td><td>Raja Mehdi Ali Khan<br />राजा मेंहदी अली खां</td><td>Madhosh<br />मदहोश</td><td>1951</td></tr><tr><td>Saiyyaan dil mein aana re<br />सैंया दिल में आना रे</td><td>Shamshad Begum<br />शमशाद बेगम</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Bahaar<br />बहार</td><td>1951</td></tr><tr><td>Shaam dhale khidki tale<br />शाम ढले खिड़की तले</td><td>Chitalkar, Lata Mangeshkar<br />चीतलकर, लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Albela<br />अलबेला</td><td>1951</td></tr><tr><td>Shola jo bhadke dil mera dhadke<br />शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के</td><td>Chitalkar, Lata Mangeshkar<br />चीतलकर, लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Albela<br />अलबेला</td><td>1951</td></tr><tr><td>Tadbeer se bigdi hui taqdeer banaale<br />तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले</td><td>Geeta Dutt<br />गीतादत्त</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Sahir Ludhiyanvi<br />साहिर लुधियानवी</td><td>Baazi<br />बाजी</td><td>1951</td></tr><tr><td>Tere bina aag yeh chaandni tu aaja<br />तेरे बिना आग ये चांदनी तू आ जा</td><td>Lata Mangeshkar, Manna Dey<br />लता मंगेशकर, मन्ना डे</td><td>Shankar Jaikishan<br />शंकर जयकिशन</td><td>Shailendra<br />शैलेन्द्र</td><td>Awaara</td><td>1951</td></tr><tr><td>Thandi hawaaen lehraake aaye<br />ठंडी हवायें लहरा के आयें</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Sahir Ludhiyanvi<br />साहिर लुधियानवी</td><td>Naujawan<br />नौजवान</td><td>1951</td></tr><tr><td>Tum na jaane kis jahaan mein<br />तुम न जाने किस जहाँ में</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Sahir Ludhiyanvi<br />साहिर लुधियानवी</td><td>Saza<br />सजा</td><td>1951</td></tr></tbody></table><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-1564373884535788526?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-5465038691978453852009-04-17T11:06:00.004+05:302009-04-17T12:11:46.207+05:30ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो<span style="font-weight: bold;">"ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो"</span> एक अमर गीत है जिसे कि सन् 1950 में मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे इस तलत महमूद ने गाया था, संगीतकार थे अनिल विश्वास और फिल्म थी आरजू। सन् 1950 के अन्य लोकप्रिय फिल्मी गीत हैं:<br /><br /><table border="1" width="100%"><tbody><tr><td align="center"><b>Song Title<br />गीत के बोल</b></td><td align="center"><b>Singers<br />गायक/गायिका</b></td><td align="center"><b>Music Director<br />संगीत निर्देशक</b></td><td align="center"><b>Lyricis<br />गीतकार</b></td><td align="center"><b>Movie<br />फिल्म</b></td><td align="center"><b>Year of release<br />प्रदर्शन वर्ष</b></td></tr><tr><td>Ae dil mujhe aisi jagah le chal<br />ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल</td><td>Talat Mehmood<br />तलत महमूद</td><td>Anil Biswas<br />अनिल बिस्वास</td><td>Majrooh Sultanpuri<br />मजरूह सुल्तानपुरी</td><td>Aarzoo<br />आरजू</td><td>1950</td></tr><tr><td>Chale jaana nahin hai nain milaake<br />चले जाना नहीं नैन मिलाके</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Husnlal Bhagatram<br />हुस्नलाल भगतराम</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Badi Bahen<br />बड़ी बहन</td><td>1950</td></tr><tr><td>Chhod baabul ka ghar<br />छोड़ बाबुल का घर</td><td>Shamshad Begum<br />शमशाद बेगम</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Babul<br />बाबुल</td><td>1950</td></tr><tr><td>Chup chup khade ho<br />छुप छुप खड़े हो</td><td>Lata Mangeshkar, Premlata<br />लता मंगेशकर, प्रेमलता</td><td>Husnlal Bhagatram<br />हुस्नलाल भगतराम</td><td>Qamar Jalalabadi<br />कमर जलालाबादी</td><td>Badi Bahen<br />बड़ी बहन</td><td>1950</td></tr><tr><td>Gore gore o baanke chhore<br />गोरे गोरे ओ बाँके छोरे</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Samadhi<br />समाधि</td><td>1950</td></tr><tr><td>Jo dil mein khushi ban kar aaye<br />जो दिल में खुशी बन कर आये</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>Husnlal Bhagatram<br />हुस्नलाल भगतराम</td><td>Rajendar Krishan<br />राजेन्द्र कृशन</td><td>Badi Bahen<br />बड़ी बहन</td><td>1950</td></tr><tr><td>Khayalon mein kisi ke<br />खयालों में किसी के</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Roshan<br />रोशन</td><td><br /></td><td>Bawre Nain<br />बावरे नैन</td><td>1950</td></tr><tr><td>man mor man mor hua matwaala<br />मन मोर हुआ मतवाला</td><td>Suraiyya<br />सुरैया</td><td>Sachin Dev Burman<br />सचिन देव बर्मन</td><td>Narendra Sharma<br />नरेन्द्र शर्मा</td><td>Afsar<br />अफसर</td><td>1950</td></tr><tr><td>Mehfil mein jal utthi shama<br />महविल में जल उठी शमा</td><td>Lata Mangeshkar<br />लता मंगेशकर</td><td>C. Ramchandra<br />सी.रामचन्द्र</td><td>Pyarelal Santoshi<br />प्यारेलाल संतोषी</td><td>Nirala<br />निराला</td><td>1950</td></tr><tr><td>Milte hi aankhen dil hua<br />मिलते ही आँखें दिल हुआ</td><td>Shamshad Begum, Talat Mehmood<br />शमशाद बेगम, तलत महमूद</td><td>Naushad<br />नौशाद</td><td>Shakeel Badayuni<br />शकील बदाँयूनी</td><td>Babul<br />बाबुल</td><td>1950</td></tr><tr><td>Teri duniya mein dil lagta nahin<br />तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं</td><td>Mukesh<br />मुकेश</td><td>Roshan<br />रोशन</td><td>Kedar Sharma<br />केदार शर्मा</td><td>Bawre Nain<br />बावरे नैन</td><td>1950</td></tr><tr><td>Woh paas rahe ya door रहे<br />वो पास रहें या दूर रहें<br /></td><td>Suraiyya<br />सुरैया</td><td>Husnlal Bhagatram<br />हुस्नलाल भगतराम</td><td>Qamar Jalalabadi<br />कमर जलालाबादी</td><td>Badi Bahen<br />बड़ी बहन</td><td>1950</td></tr><tr></tr></tbody></table><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-546503869197845385?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-1111964183448417902009-04-08T09:43:00.001+05:302009-04-08T09:49:22.352+05:30कुछ व्यक्तित्व विकास उक्तियाँअपनी तुलना इस संसार के किसी अन्य व्यक्ति से कभी भी न करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो स्वयं का अपमान करते हैं।<br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">एलेन स्ट्राइक</span><br /></div><br />यदि हम उस व्यक्ति से प्रेम नहीं कर सकते जिसे कि हम देख रहे हैं तो हम भगवान से कैसे प्रेम कर सकेंगे जिन्हें कि हम देख नहीं सकते?<br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">मदर टेरेसा</span><br /></div><br />विजय का अर्थ हमेशा सर्वप्रथम होना नहीं होता बल्कि विजय का अर्थ होता है कि आप किसी काम को पहले से बेहतर ढंग से कर रहे हैं।<br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">बोनी ब्लेयर</span><br /></div><br />मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं 1000 बार असफल हुआ बल्कि मैं यह कहूँगा कि असफल होने के 1000 रास्ते हैं।<br /><br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">थामस एडीसन</span><br /></div><br />हर कोई यह सोचता है कि मैं संसार को बदल दूँगा पर यह कोई नहीं सोचता कि मैं स्वयं को बदल लूँ।<br /><br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">लियो टॉल्स्टाय</span><br /></div><br />हर किसी पर विश्वास कर लेना खतरनाक बात है पर उस से भी खतरनाक बात है किसी पर भी विश्वास न करना।<br /><br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">अब्राहम लिंकन</span><br /></div><br />यदि कोई यह समझता है कि उसने अपने जीवन में कभी भी कोई गलती नहीं की है तो इसका मतलब हुआ कि उसने अपने जीवन में कभी भी कुछ नया नहीं किया।<br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">आइंसटीन</span><br /></div><br />विश्वास, वादा, सम्बन्ध और दिल - इन चारों में से कभी किसी को न तोड़ें टूटने पर ये आवाज उत्पन्न नहीं करते सिर्फ अत्यधिक दर्द उत्पन्न करते हैं।<br /><br /><div style="text-align: right;"><span style="font-weight: bold;">चार्ल्स</span><br /></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-111196418344841790?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-28170363562530719602009-04-03T12:45:00.005+05:302009-04-03T14:19:56.023+05:30भगवान राम ने 37 वर्ष की अवस्था में रावण का वध किया था<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdW6aLQdMnI/AAAAAAAAAlY/A5MQ52jQOdE/s1600-h/lordrama.jpg"><img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 360px; height: 288px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdW6aLQdMnI/AAAAAAAAAlY/A5MQ52jQOdE/s400/lordrama.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5320363493669286514" border="0" /></a><br />इंडियन रेव्हन्यू सर्विस के श्री पुष्कर भटनागर दिल्ली ने एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से सिद्ध किया था कि भगवान श्री राम का जन्म 10 जनवरी सन् 5114 को हुआ था। भटनागर जी ने अमेरिका से एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्राप्त किया जिसके द्वारा सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण की गणना की जाती है। इस सॉफ्टवेयर में यदि ग्रहों तथा नक्षत्रों का मान डाल दिया जाये तो यह गणना कर के उसका काल बता देता है।<br /><br />वाल्मीकि रामायण में महर्षि श्री वाल्मीकि ने राम जन्म, राम वनवास, खरदूषण वध, रावण वध तथा वनवास समाप्ति के समय ग्रहों तथा नक्षत्रों का विवरण दिया है। इन विवरणों को श्री भटनागर जी ने सॉफ्टवेयर में डाल दिया जिससे कि निम्न परिणाम मिलेः<br /><br />राम जन्म - 10 जनवरी 5114 (ईसा पूर्व)<br />राम वनवास - 05 जनवरी 5089 (ईसा पूर्व) राम की उम्र 25 वर्ष<br />खरदूषण वध - 07 अक्टूबर 5077 (ईसा पूर्व) राम की उम्र 36 वर्ष<br />रावण वध - 02 दिसम्बर 5076 (ईसा पूर्व) राम की उम्र 37 वर्ष<br />वनवास समाप्ति - 02 जनवरी 5075 राम की उम्र 39 वर्ष<br /><br />जानकारी <a href="http://www.hvk.org/articles/1003/90.html">http://www.hvk.org/articles/1003/90.html</a> से <span>साभार<br /><br />पुनश्चः मुझे खेद है कि मुझसे दो स्थानों में टायपिंग की गलती हो गई थी जिन्हें कि मैंने अब सुधार दिया है। गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिये हेम पाण्डे जी का धन्यवाद!<br /><br /></span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-2817036356253071960?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com8tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-1828516582946893142009-04-02T10:02:00.001+05:302009-04-02T10:05:23.478+05:30यूट्यूब में अपलोडेड मेरे व्हीडियो क्लिप को 250 से भी अधिक लोगों ने देखाकल शाम तीन चार बजे मैंने यूट्यूब में अपना एक व्हीडियो क्लिप अपलोड किया था और आज सबेरे (मतलब चौबीस घंटे के भीतर ही) मैने देखा कि उस क्लिप को 250 से भी अधिक लोग देख चुके हैं, चार टिप्पणियाँ भी आई हैं और रेटिंग भी मिला है। मुझे वास्तव में बहुत खुशी हुई कि चलो मेरे बनाये व्हीडियो को भी लोगों ने पसंद किया है। बस अपनी खुशी आप लोगों के साथ बाँटने के लिये ये पोस्ट लिख मारी।<br /><br />व्हीडियो क्लिप का url है <a href="http://www.youtube.com/watch?v=WmNAIoh7Cuw">http://www.youtube.com/watch?v=WmNAIoh7Cuw</a><br /><br />यदि आप भी वहाँ जाकर कमेंट्स पढ़ें तो मुझे और खुशी होगी।<br /><br />व्हीडियो नीचे इम्बेड कर रहा हूँ।<br /><br /><center><object width="425" height="344"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/WmNAIoh7Cuw&amp;hl=en&amp;fs=1"><param name="allowFullScreen" value="true"><param name="allowscriptaccess" value="always"><embed src="http://www.youtube.com/v/WmNAIoh7Cuw&amp;hl=en&amp;fs=1" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="425" height="344"></embed></object></center><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-182851658294689314?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-66095032693656986252009-04-01T17:45:00.003+05:302009-04-15T11:26:31.060+05:30गूगल की नई देन गूगल आटोपायलटक्या आपको गूगल के नवीनतम फीचर गूगल आटोपायलट के विषय में पता है?<br /><br />गूगल आटो पायलट या जीमेल आटोपायलट गूगल का सबसे नया फीचर है जो कि आपके मेल का स्वतः जवाब देकर आपके जीमेल के मेलबॉक्स को ओव्हरफ्लोइंग होने से बचायेगी। पूरी जानकारी देखने के लिये <a href="http://mail.google.com/mail/help/autopilot/index.html"><span style="font-weight: bold;">यहाँ क्लिक करें</span></a>।<br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdNbsgOMqVI/AAAAAAAAAk4/NDzR9nXnuQ0/s1600-h/Capture.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 249px; height: 400px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdNbsgOMqVI/AAAAAAAAAk4/NDzR9nXnuQ0/s400/Capture.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5319696404976544082" border="0" /></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-6609503269365698625?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-69290502351090094112009-03-31T09:49:00.003+05:302009-03-31T09:55:38.522+05:30एडसेंस का अधिक से अधिक लाभ कैसे लें?इतना तो हम सभी जानते हैं कि एडसेंस के विज्ञापन पर क्लिक होने से हमारी कमाई होती है किन्तु किसी एक क्लिक मात्र 1 सेंट मिलता है तो किसी अन्य क्लिक से 3 डालर तक भी मिल जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि आपके ब्लोग में एक क्लिक से 1 डालर से 3 डालर तक मिलने वाले विज्ञापन ही आयें तो आपकी कमाई अधिक होगी और यदि आपके ब्लोग में एक क्लिक से मात्र 1 सेंट मिलने वाले विज्ञापन ही आयें तो आपकी कमाई कम होगी।<br /><br /><span style="font-weight: bold;">वास्तव में गूगल विज्ञापन से प्राप्त होने वाली अपनी आमदनी का एक हिस्सा हमें एडसेंस से आमदनी के रूप में देता है। यदि किसी विज्ञापन से उसे अधिक आमदनी होगी तो वह हमें अधिक रकम देगा और यदि किसी विज्ञापन से उसे कम आमदनी होगी तो वह हमें कम रकम देगा।</span> तो क्यों न आप ऐसे निशे (niche) पर अपना ब्लोग बनायें जिसमें कि अधिक कीमत वाले विज्ञापन ही मिलते हैं।<br /><br />ऐसे निशे (niche) को जानने के लिये अनेकों सॉफ्टवेयर हैं जिनमें से कुछ मुफ्त में भी मिलते हैं। स्वयं गूगल का कीवर्ड टूल ऐसा ही एक मुफ्त सॉफ्टवेयर है जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है।<br /><br /><a href="https://adwords.google.com/select/KeywordToolExternal">https://adwords.google.com/select/KeywordToolExternal</a><br /><br />उपरोक्त साइट में जाने पर हमें अपने कीवर्ड को टाइप करने के लिये एक बॉक्स मिलता है जो कि नीचे दर्शाया गया है।<br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGaiqMF12I/AAAAAAAAAkg/ZfEdnSyFZvk/s1600-h/kwt1.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 199px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGaiqMF12I/AAAAAAAAAkg/ZfEdnSyFZvk/s400/kwt1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5319202555132499810" border="0" /></a><br />अब मान लीजिये कि मेरा निशे <span style="font-weight: bold;">bollywood</span> है और मैं बॉक्स में उसे टाइप करता हूँ तो यह टूल उन समस्त कीवर्डस को उनके विज्ञापनों की अपेक्षित कीमतों के साथ दिखायेगा।<br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGai9a6_NI/AAAAAAAAAko/LG4VTu_Oz5Y/s1600-h/kwt2.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 270px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGai9a6_NI/AAAAAAAAAko/LG4VTu_Oz5Y/s400/kwt2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5319202560294976722" border="0" /></a><br />उपरोक्त चित्र से साफ जाहिर है कि बॉलीवुड से सम्बन्धित विज्ञापनों से गूगल को 44 से 60 सेंट तक की आमदनी होती है जिसका कि एक हिस्सा वह एडसेंस आमदनी के रूप में हमें देगी।<br /><br />अब मान लीजिये मेरा निशे <span style="font-weight: bold;">credit card</span> है तो इस निशे को बॉक्स में टाइप करने के बाद आये परिणाम हैं<br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGajYbfJpI/AAAAAAAAAkw/uEoqAFDNT_s/s1600-h/kwt3.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 283px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/SdGajYbfJpI/AAAAAAAAAkw/uEoqAFDNT_s/s400/kwt3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5319202567545104018" border="0" /></a>तो स्पष्ट है कि इस निशे पर यदि ब्लोग बनाया जाये तो अधिक आमदनी होगी।<br /><br />इस निशे पर मैंने आज ही एक अंग्रेजी ब्लोग बनाया है जो है <a href="http://creditcard.agoodplace4all.com">Credit Card</a><br /><br />हिन्दी ब्लोग्स के लिये हम अपनी इस जानकारी का फिलहाल प्रयोग नहीं कर सकते किन्तु यदि चाहें तो ब्लोगर साथी अंग्रेजी ब्लोग बना कर इसका लाभ ले सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-6929050235109009411?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-64659290367552142052009-03-29T11:27:00.004+05:302009-03-29T11:30:30.829+05:30अब आपके ब्लोग को मिलेगा एडसेंस के इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापनगूगल ने हिन्दू नववर्ष के शुभ दिन हिन्दी ब्लोगर्स को उपहार के रूप में दिया है <span style="font-weight: bold;">एडसेंस के इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापन (Interest Based Ads)</span>। कल पाबला जी के पोस्ट <a href="http://bspabla.blogspot.com/2009/03/blog-post_28.html">"आ गया, आ गया, आ गया! गूगल एडसेंस आ गया!!"</a> को पढ़कर बड़ी खुशी हुई।<br /><br />गुमान तो मुझे 13 मार्च 2009 को ही हो गया था कि गूगल वाले जल्दी ही हिन्दी पर मेहरबान होने वाले हैं क्योंकि उस दिन मुझे गूगल से मेल आया था कि वे इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापन लांच करने जा रहे हैं। पर इस विषय पर मैंने कोई पोस्ट यह सोचकर नहीं लिखा था कि इस विषय में समुचित जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद ही लिखेंगे।<br /><br />हाँ तो अब आपको अपने ब्लोग के लिये <span style="font-weight: bold;">धनोपार्जन (monetize)</span> का आप्शन तो मिल गया है और अब तक शायद आपने उसे एक्टिव्हेट भी कर लिया होगा। पर विज्ञापन आपको कुछ दिनों के बाद ही मिलने शुरू होंगे। क्योंकि गूगल के मेल में मुझे अपने <a href="http://agoodplace4all.com/"><span style="font-weight: bold;">हिन्दी वेबसाइट</span></a> के प्रायवेट पालिसी को इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापनों को ध्यान में रख कर बदलने के लिये 8 अप्रैल 2009 तक का समय दिया गया था इसलिये मेरा अनुमान है कि शायद अप्रैल 2009 के दूसरे पखवाड़े से या फिर मई 2009 से ही विज्ञापन मिलने शुरू होंगे। तब तक आपके ब्लोग में सार्वजनिक सेवा विज्ञापन ही आते रहेंगे।<br /><br />एडसेंस के कांटेस्चुअल विज्ञापन आपके पोस्ट की सामग्री के आधार पर विज्ञापन प्रदर्शित करता है किन्तु हिन्दी के अब तक सपोर्टिंग लेंग्वेज न होने के कारण आपके पोस्ट की सामग्री को गूगल बोट समझ नहीं पाता और इसीलिये हमारे ब्लोग्स को एडसेंस विज्ञापन नहीं मिल पा रहे थे। नये इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापनों को हमारे पोस्ट की सामग्री से कुछ भी लेना देना नहीं है बल्कि यह आपके पाठकों की रुचि पर आधारित है, अतः ये विज्ञापन हमारे ब्लोग्स को मिलने शुरू हो जायेंगे।<br /><br />इंटरेस्ट बेस्ड विज्ञापनों के विषय में अधिक जानकारी के लिये देखें - <a href="http://adsense.blogspot.com/2009/03/driving-monetization-with-ads-that.html">Driving monetization with ads that reach the right औडिएंस</a><br /><br /><span>हिन्दी</span> <span>ब्लोग्स</span> <span>से</span> <span>कमाई</span> <span>की</span> <span>अगली</span> <span>कड़ी</span> - <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%8D/"><span style="font-weight: bold;">स्व प्रेरणा</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-6465929036755214205?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-74796615909431907742009-03-28T13:39:00.001+05:302009-03-28T13:42:54.513+05:30ऐसा सिर्फ भारत में होता है!<span>जी</span> <span>हाँ</span>, <span>ऐसा</span> <span>सिर्फ</span> <span>भारत</span> <span>में</span> <span>होता</span> <span>है</span>!<br /><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQwWyaaWI/AAAAAAAAAjo/wmaojsG2P_c/s1600-h/india1.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 240px; height: 400px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQwWyaaWI/AAAAAAAAAjo/wmaojsG2P_c/s400/india1.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5317714051698682210" border="0" /></a><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw5csUeI/AAAAAAAAAjw/kjL4zoChacM/s1600-h/india2.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 381px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw5csUeI/AAAAAAAAAjw/kjL4zoChacM/s400/india2.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5317714061002822114" border="0" /></a><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw6sQ6qI/AAAAAAAAAj4/fe10uaqf_DE/s1600-h/india3.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 400px; height: 355px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw6sQ6qI/AAAAAAAAAj4/fe10uaqf_DE/s400/india3.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5317714061336570530" border="0" /></a><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw31ZAfI/AAAAAAAAAkA/lFaQTHR6QP0/s1600-h/india4.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer; width: 373px; height: 400px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_RbpLBrHSeIs/ScxQw31ZAfI/AAAAAAAAAkA/lFaQTHR6QP0/s400/india4.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5317714060569543154" border="0" /></a><br />हिन्दी ब्लोग्स से कमाई की अगली कड़ी - <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%8D/"><span style="font-weight: bold;">स्व प्रेरणा</span></a><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-7479661590943190774?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7873472974131739342.post-23114911923895340502009-03-27T12:09:00.003+05:302009-03-27T12:23:42.921+05:30हिन्दी ब्लोग्स से कमाई - कुछ और बातेंआप लोगों ने मेरे कल के पोस्ट में अपनी प्रतिक्रियाएँ देकर मेरा उत्साहवर्धन किया इसके लिये आप सभी को धन्यवाद!<br /><br />आज के अपने लेख में मैं कुछ और बातें बताने जा रहा हूँ जिससे कि स्पष्ट हो जाये कि इंटरनेट मार्केटिंग क्या चीज है और हिन्दी के उन ब्लोगरों को, जो वास्तव में ब्लोगिंग के जरिये कुछ आमदनी चाहते हैं, आर्थिक लाभ मिल सके। सबसे पहले मैं कल की टिप्पणियों को ध्यान में रख कर कुछ बातें कहना चाहूँगा।<blockquote><span style="font-weight: bold;">नरेश सिह राठौङ said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> इच्छा तो करती है लेकिन आशा नही है कि कमा पायेंगे । जानकारी बहुत अच्छी लगी । हिन्दी ब्लोग पर इसे गुप्त रखा जाता है । इसका ज्ञान तो बहुत से लोगो को है जो कमा भी रहे है लेकिन दूसरों के साथ शेयर करना नही चाहते है ।</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;">Suresh Chiplunkar said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> नरेश जी की बात से सहमत हूँ कि ऐसे उपाय कई लोग अपना रहे हैं, लेकिन बताते किसी को नहीं हैं…</span><br /><br /></blockquote>नरेश जी, आप बिल्कुल कमायेंगे पर आपको निराशा त्यागनी होगी। यह सही है कि इन बातों को न केवल हिन्दी वाले बल्कि अंग्रेजी वाले भी प्रायः गुप्त रखते हैं क्योंकि इन जानकारियों को वे ईपुस्तक का रूप देकर बेचते हैं। किन्तु मैं इन बातों को इसलिये बता रहा हूँ क्योंकि मैं चाहता हूँ कि कम से कम हिन्दी ब्लोगर्स को कुछ तो आर्थिक लाभ मिले। इन जानकारियों को प्राप्त करने के लिये मैंने पिछले पाँच वर्षों में अनेकों अंग्रेजी वेबसाइट्स, ब्लोग्स आदि की खाक छानी है और यह भी हो सकता है कि मैं भी आप लोगों को केवल उतनी ही जानकारी दूँ जिससे कि आपकी कमाई की शुरुवात हो जाये किन्तु बहुत सी गूढ़ बातों को, जिनसे कि आमदनी बढ़ती जाये, मैं भी बाद में बेचने का प्रयास करूँ।<br /><span style="font-weight: bold;"></span><blockquote><span style="font-weight: bold;">Suresh Chiplunkar said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> वैसे एक बात बताना चाहूँगा कि दो साल से ऊपर हो गये ब्लॉग लिखते 300 से ऊपर बड़ी-बड़ी पोस्ट लिख मारी, एक पैसे की कमाई नहीं हुई आज तक, उलटा दो-चार लेख "भाई" लोग फ़ोकट में उठा ले गये ब्लॉग से… :(</span><br /></blockquote>सुरेश जी, मैं आपके लेखों को पढ़ते रहता हूँ और आपका बहुत बड़ा प्रशंसक भी हूँ। आपकी बेबाक शैली मुझे बहुत अच्छी लगती है। किन्तु मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि आपके वर्तमान लेखों से नाम तो कमाया जा सकता है, धन नहीं। धन कमाने के लिये आपको कुछ अलग प्रकार के लेख लिखने होंगे। मेरे आज के पोस्ट को पढ़ने के बाद स्पष्ट हो जायेगा कि आपको किस प्रकार के लेख लिखने हैं।<br /><span style="font-weight: bold;"></span><blockquote><span style="font-weight: bold;">ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> काम की बात बताई अवधिया जी। एडसेंस का फाइन प्रिण्ट ध्यान से नहीं पढ़ा। कहीं इन साइट्स का विज्ञापन उसके साथ करार का उल्लंघन तो नहीं?</span><br /></blockquote>ज्ञानदत्त जी, मैंने आपकी शंका का समाधान कल अपनी टिप्पणी और फूटनोट में कर दिया था पर हो सकता है कि बाद में जोड़े जाने के कारण बहुत से लोगों ने उसे न पढ़ा हो। इसलिये मैं यहाँ पर उसे दुहरा रहा हूँ:<br /><br /><span style="font-weight: bold;">इन विज्ञापनों से एडसेंस के किसी नियम का उल्लंघन नहीं होता। आप इन्हें बेझिझक एडसेंस के साथ प्रकाशित कर सकते हैं।</span><br /><span style="font-weight: bold;"></span><blockquote><span style="font-weight: bold;">लवली कुमारी / Lovely kumari said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> काफी लम्बा प्रोसेस है पर देखूंगी कर के वक्त मिलते ही.जानकारी का धन्यवाद.</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;">अल्पना वर्मा said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> bahut kaam ki jaankari hai.</span><br /><span style="font-weight: bold;"> thoda comlicated sa lag raha hai process...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;">mamta said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> पर अभी पूरा समझने मे हमें थोड़ा समय लगेगा । </span><br /></blockquote>लवली कुमारी जी, वास्तव में कुछ अधिक लम्बा प्रोसेस नहीं है, पहली बार किसी काम को करने पर कठिन और लम्बा लगता है। और फिर रजिस्ट्रेशन तो केवल एक बार कराना है जिसमें अधिक समय लगेगा बाद में तो मात्र मिनट का काम है।<br /><br />अल्पना जी, कुछ भी काम्प्लीकेटेड नहीं है, एक बार करके तो देखिये पर मेरे आज के पोस्ट को पढ़ लेने के बाद।<br /><br />ममता जी, बहुत आसान है, यदि फिर भी कुछ शंका हो तो आप, और अन्य ब्लोगर साथी भी, बेहिचक मुझे पते पर ईमेल कर सकते हैं। जहाँ तक हो सकेगा मैं व्यक्तिगत रूप से सभी शंकाओं का समाधान करने का प्रयास करूँगा।<br /><blockquote><span style="font-weight: bold;">दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> यह सब करने पर कुछ बखेड़ा सा लग रहा है।</span></blockquote>दिनेशराय जी, विश्वास कीजिये कि कुछ भी बखेड़ा नहीं है, बहुत आसान है। और हाँ आपके अंग्रेजी ब्लोग <a href="http://judisndia.blogspot.com/"><span style="font-weight: bold;">Law &amp; Life</span></a> से तो अच्छी कमाई के अवसर हैं। आप अपने विधि विषयक ज्ञान को ईपुस्तक बना कर आसानी के साथ बेच सकते हैं।<br /><span style="font-weight: bold;"></span><blockquote><span style="font-weight: bold;">PD said...</span><br /><br /><span style="font-weight: bold;"> ham bas itna hi kahenge ki ham Yatra.com se hi apni har flight book karte hain.. apne blog par uska link laga den to agli bar ham yahin se vahan jakar ticket book kar liya karenge.. kam se kam apne kisi blog bhai ka fayda to ho jayega.. :)</span><br /></blockquote>धन्यवाद प्रशांत! मैंने इस ब्लोग में यात्रा.कॉम का बैनर लगा दिया है।<br /><br /><span style="font-weight: bold;">अन्य सभी टिप्पणीकारों को मेरा हार्दिक धन्यवाद!</span><br /><br />हाँ तो अब हम आज के अपने विषय पर आते हैं। सबसे पहले तो यह जान लें कि इंटरनेट मार्केटिंग क्या है। संक्षेप में कहा जाये तो<br /><br /><span style="font-weight: bold;">अपने या किसी अन्य उत्पादक के उत्पादों को बेचने के लिये उन्हें इंटरनेट के असंख्य प्रयोगकर्ताओं के समक्ष अपने वेबसाइट ब्लोग के द्वारा प्रस्तुत करने को इंटरनेट मार्केटिंग कहा जाता है अर्थात् ऐसा व्यापार जिसे कि इंटरनेट के जरिये किया जाये। इंटरनेट व्यापार में आपका वेबसाइट ब्लोग, जो कि विश्व भर के लाखों करोड़ों लोगों की आसान पहुँच में होता है, आपकी दूकान के रूप में परिवर्तित हो जाता है।</span><br /><br />अब मैं आप लोगों को यह बता दूँ कि वर्तमान में जो हमारे हिन्दी ब्लोग्स हैं वे इंटरनेट मार्केटिंग के लिये विशेष उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि उनमें निहित सामग्री अनेकों प्रकार के हैं और इंटरनेट मार्केटिंग के लिये इंटरनेट मार्केटिंग के लिये ऐसे ब्लोग की आवश्यकता होती है जो कि किसी एक ऐसे विषय पर केन्द्रित हो जिससे कि सम्बन्धित उत्पाद को बेच कर आमदनी प्राप्त किया जा सके। <span style="font-weight: bold;">ऐसे विषय को अंग्रेजी में निशे (</span><span style="font-weight: bold;">Niche</span><span style="font-weight: bold;">) कहा जाता है।</span><br /><br />तो मेरा सुझाव है कि आप लोग अपने वर्तमान ब्लोग्स में अपने उत्पाद से सम्बन्धित बैनर्स आदि तो लगा दें किन्तु उनसे विशेष आमदनी की उम्मीद न रखें। आपकी विशेष कमाई कैसे होगी यह मैं आगे बताने जा रहा हूँ।<br /><br />सबसे पहले तो, जैसा कि मैंने कल भी कहा था, <a href="http://www.dgm-india.com/dgm/Affiliate-signup.htm"><span style="font-weight: bold;">डीजीएम.प्रो</span></a> का मुफ्त सदस्य बन जायें। रजिस्ट्रेशन के लिये <a href="http://www.dgm-india.com/dgm/Affiliate-signup.htm"><span style="font-weight: bold;">यहाँ क्लिक करें</span></a>। (यहाँ पर यह मत समझ लीजियेगा कि मैं अपना कोई रीफरल लिंक दे रहा हूँ जिससे कि मुझे कुछ अतिरिक्त आय हो सके।)<br /><br /><span style="font-weight: bold;">अब वहाँ उपलब्ध उत्पादों में उन उत्पादों का चयन करें जिनके विषय में </span><span style="font-weight: bold;">आप</span><span style="font-weight: bold;"> कुछ अच्छे लेख लिख सकते हैं।</span> उन उत्पादों के कैम्पेन ज्वॉयन करने के लिये क्लिक कर दें और इंतजार करें। दो तीन दिनों में ही आपको ईमेल आ जायेगा कि आपका आवेदन स्वीकार हुआ या निरस्त हो गया। वैसे निरस्त होने के अवसर बहुत कम हैं।<br /><br />अब मान लीजिये कि नौकरी.कॉम को आपको प्रमोट करना है। तो सबसे पहले आप एक नया ब्लोग बनायें जो कि नौकरी, आजीविका आदि से सम्बन्धित हो। <span style="font-weight: bold;">उसका नाम भी आप नौकरी, आजिविका, साक्षात्कार जैसा कुछ दे सकते हैं। अब आपको अपने इस ब्लोग में नौकरी से सम्बन्धित लेख डालते जाना है जैसे कि "नौकरी के लिये आवेदन कैसे करें", "रिज्यूम कैसे लिखें", "प्रभावशाली रिज्यूम", "साक्षात्कार कैसे दें" आदि आदि।</span> आप यदि सोचेंगे तो आपको बहुत सारे लेखों के लिये शीर्षक मिल जायेंगे। हाँ अपने उस ब्लोग के साइड बार आदि में नौकरी.कॉम के बैनर्स अवश्य लगायें और अपने प्रत्येक लेख में उचित स्थानों पर अपना एफिलियेट लिंक देना भी कदापि न भूलें। <span style="font-weight: bold;">लेख के बीच में कुछ अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग अवश्य करें जैसे कि "साक्षात्कार (interview)"।</span> इससे आपका ब्लोग सर्च इंजिन्स को आकर्षित करेगा।<br /><br />इस सिलसिले को मैं जारी रखूँगा और बताउँगा कि कैसे जल्दी से जल्दी आपके ब्लोग के विषय में लोग जानेंगे, कैसे वह लोकप्रिय होगा, कैसे उससे आमदनी होनी शुरू होगी आदि पर इस ब्लोग में नहीं बल्कि <a href="http://incomewithnet.agoodplace4all.com/"><span style="font-weight: bold;">नेट से आमदनी! (Income with Net)</span></a> में, क्योंकि मेरा यह ब्लोग इस विषय के लिये उचित मंच नहीं है।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7873472974131739342-2311491192389534050?l=dhankedeshme.blogspot.com'/></div>जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com7