tag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-7187648578117038762007-03-29T10:28:00.001+05:302007-03-29T10:28:22.875+05:30होली वाटरहर प्रतिमा का चरणामृत,<br />गुरुद्वारे का अमृत,<br />मस्जिद की आबोहयात,<br />और बडे वाले गिरजे का,<br />होली वाटर।<br />॰॰॰कुछ नहीं चखा मैंने।<br />पर वो दिन याद है<br />॰॰॰गुनगुना पानी लायीं थी तुम।<br />...जानू सर्दी हो गयी है तुम्हैं,<br />ठंडा पानी मत पीना,<br />प्लीज..<br />और खूब खयाल रखना अपना।<br />और मैं पागल,<br />बोला,<br />तुम हो ना,<br />मेरा खयाल रखने को।<br />अब पानी फीका लगता है,<br />बेरंगा॰॰॰बेस्वाद॰॰॰<br />पर वो दिन याद हैं,<br />जब पानी रंगीन हो जाता था,<br />तुम्हैं छूकर।<br />अब मेरे गाल का वो पिंपल ठीक हो गया है,<br />जुकाम भी नहीं है,<br />मौसम भी गरम है।<br />तुम आज भी मेरा खयाल रखती हो,<br />पर क्या जाना जरूरी था?<br />देवेश वशिष्ठ 'खबरी'<br />9410361798देवेश वशिष्ठ ' खबरी 'http://www.blogger.com/profile/03089045465753357873noreply@blogger.com