tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-40670744395703764312008-03-21T12:57:00.000+05:302008-03-21T12:57:00.000+05:30जहाँ व्यावसायिकता हावी हो , वहाँ मर्यादाओं की परिक...जहाँ व्यावसायिकता हावी हो , वहाँ मर्यादाओं की परिकल्पना अधूरी रह जाती है , आपके विचार अत्यन्त सटीक है , दिनेश जी ने ठीक ही कहा है ,कि " इसे पढ़ कर कइयों की होली मायूस हो जाएगी।" आपको होली की कोटिश: बधाईयाँ !रवीन्द्र प्रभातhttp://www.blogger.com/profile/11471859655099784046noreply@blogger.com