tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-73302317896562571212008-03-23T12:15:00.000+05:302008-03-23T12:15:00.000+05:30आज फिर जख्‍़म हरे कर देने वाला वाक्‍या अ‍ाखिर उठा ...आज फिर जख्‍़म हरे कर देने वाला वाक्‍या अ‍ाखिर उठा ही गया। आज के ही दिन अर्थात 23 मार्च 1931 को गांधी जी की ऐतिहासिक भूल के परिणाम स्‍वरूप भगत सिंह ,सुखदेव व राजगुरू को फाँसी हुई थी। गांधी की के कारण आज इतिहास इन वीरों को खो बैठा। गांधी की बात सिर्फ किताबों तक ही ठीक लगती है अगर वास्‍तविकता में देखा जाये गांधी जी ने कभी भी राष्‍ट्र के समक्ष्‍ा अपने अहं को सर्वोपरी रखने की कोई कसर नही छोड़ी थी। <BR/><BR/>मुझे कहने में कतई संकोच नही कि गांधी का भारत और भारतीय प्रेम के मध्‍य बहुत बड़ी राजनैतिक सोच रही थी। जिसमें काग्रेसी सत्‍ता के परिणाम स्वरूप उनके अलोचनात्‍मक कार्यो पर पर्दे डाले गये।mahashaktihttp://www.blogger.com/profile/17276636873316507159noreply@blogger.com