tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-10935857510112153102008-03-23T20:17:00.000+05:302008-03-23T20:17:00.000+05:30अच्छा, चर्चा हो रही है. एक बात है, चर्चा न हो मजे ...अच्छा, चर्चा हो रही है. एक बात है, चर्चा न हो मजे की बातें जानने के लिए मिलें ही नहीं. अब देखिये न, ये चर्चा न हुई होती तो पता कैसे चलता कि गाँधी केवल व्यक्तिगत रूप पर श्रेष्ठ थे. मतलब ये कि सार्वजनिक तौर पर तो 'खतम' रहे होंगे. दूसरा ये कि दलाली की राजनीति उन्होंने ही शुरू की. <BR/><BR/>ये दलाली वाली बात सुनकर एक बार के लिए लगा कि किसी और गांधी की बात हो रही है. लेकिन महात्मा शब्द लगा हुआ है तो बापू के बारे में ही बात हो रही होगी. वैसे अनिल जी को हाथों-हाथ ये भी बता देना चाहिए था कि किसके दलाल थे. विद्वान् नहीं है तो क्या हुआ. इतनी बात तो पता होगी ही.<BR/><BR/>महान लोगों के बारे में एक बात कही जाती है.<BR/><BR/>Great men are remembered for their failures and ordinary for their triumphs.Shiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.com