tag:blogger.com,1999:blog-72654109935224783862009-07-06T08:44:57.392+05:30वाह! मनीसंकट में सबसे बड़ा साथी पैसा होता हैकमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.comBlogger325125tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-3015043819560414812009-07-06T08:41:00.001+05:302009-07-06T08:44:57.400+05:30आम बजट तय करेगा शेयर बाजार की चाल<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SlFr6HnJkVI/AAAAAAAACIw/dGr2CdAgsUo/s1600-h/stock-1.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5355180078140068178" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 113px; CURSOR: hand; HEIGHT: 150px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SlFr6HnJkVI/AAAAAAAACIw/dGr2CdAgsUo/s200/stock-1.jpg" border="0" /></a><br /><div>भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार 6 जुलाई का दिन बेहद अहम है। आम बजट वाला यह दिन घरेलू शेयर बाजार की अगली चाल तय करेगा और यह भी पता चल जाएगा कि यदि तेजी की चाल आती है तो कौन-कौन से सैक्‍टर निवेशकों के लिए मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए फायदेमंद साबित होंगे और यदि बाजार गिरता है तो किन सैक्‍टरों से बचना चाहिए। हालांकि, लंबी अवधि की दृष्टि से देखें तो आज किए जाने वाले कड़े निर्णय भी मीठे साबित हो सकते हैं। देश की अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने और उसे गति देने के लिए काफी कुछ मरम्‍मत की जरुरत पड़ेगी।</div><br /><div><br />वेबदुनिया में पिछले दिनों शेयर बाजार की रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्धीप की बदल रही स्थिति का जिक्र किया था कि श्रीलंका, पाकिस्‍तान और भारत में ऐसे कारक बन रहे हैं कि आने वाले वर्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के होंगे। उसमें से सभी बातें सच साबित हुई हैं। हमने कहा था कि श्रीलंका में तमिल चीतों का दम निकल जाएगा, वह हो चुका है। पाकिस्‍तान में तालिबान को घेरकर मारे जाने की योजना पर इन दिनों स्‍वात घाटी में जोरशोर से काम चल जा रहा है। तीसरा, भारत में लोकसभा चुनाव के तहत एक मजबूत सरकार बगैर वामदलों के आई जिससे मध्‍यावधि चुनाव का खतरा टल गया।</div><br /><div><br />6 जुलाई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 15444 से 14144 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4577 से 4222 के बीच रहेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि तत्‍कालिक मोर्चे पर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 14995-15203-15401 अंक पहुंचने की संभावना है। लेकिन सेंसेक्‍स 14000 के नीचे बंद होता है तो यह 12717-11825-10932 अंक तक आ सकता है। सेंसेक्‍स 15600 को पार कर जाता है तो यह 16197-17980-19555 अंक तक जा सकता है।<br /><br />कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर के वायस चेयरमैन आदित्‍य जैन का कहना है कि टेक्निकल और फंडामेंटल को छोड़कर बाजार पूरी तरह से आम बजट पर निर्भर है। विनिवेश-टैक्स रिफॉर्म और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पैकेज के साथ एसटीटी-कैपिटल गेन पर बाजार की नजर रहेगी। असरकारक विनिवेश प्रक्रिया से राजकोषीय घाटे की भरपाई आसान होगी जिससे बाजार एक बड़ी छलांग लगाकर 15713-15789-15824/ 4655-4688 के नए स्तर बना सकता है।<br /><br />जैन का कहना है कि मंदी से निपटने के लिए उद्योगों की दी गई रियायतें अगर सरकार जारी रखती है और कैपिटल मार्केट को अधिक मजबूत बनाने के लिए नए फॉर्मूले लाती है और साथ ही एफडीआई-एफआईआई का निवेश बढ़ाने की अनुमति कुछ क्षेत्रों में उदारतापूर्वक देती है तो बाजार 15900-15962-16000/ 4705 के स्तर को पार कर सकता है। बजट की वजह से बाजार के निचले स्तरों पर भी जाने की संभावना है। सरकार का घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर रियायत की जगह टैक्स या सैस के फॉर्मूलों से खजाना भरने की खबर आती है तो तीव्र उतार-चढ़ाव के आसार ज्यादा हैं। निवेशक वैल्यूएशन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग, थर्ड जेनरेशन वाले फर्टिलाइजर, केमिकल और पेस्‍टीसाइड वाले स्टॉक के साथ पावर और रूरल डेवलपमेंट से जुड़े शेयरों पर ध्यान दें।<br /><br />प्‍योर ग्रोथ, नई दिल्‍ली के प्रबंध निदेशक आकाश जिंदल का कहना है कि निवेशक सोमवार को बजट आने से पहले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू (सरकारी कंपनियां) और बैंकिंग (निजी एवं सरकारी) शेयरों में खरीद करें। लेकिन, निर्यातोन्‍मुखी कंपनियों और लाइफस्‍टाइल कंपनियों के शेयरों से पूरी तरह दूर रहें। बजट पेश होने के बाद पूरा बाजार इस आधार पर चलेगा कि बजट में प्रावधान कैसे आते हैं। यदि प्रावधान अनुकूल हुए तो सेंसेक्‍स में एक हजार अंक तक की तेजी आ सकती है और प्रतिकूल प्रावधानों से यह एक हजार अंक तक घट भी सकता है। </div><br /><div><br />जिंदल कहते हैं कि बजट की बातों का पूरी तरह बाजार पर असर रहेगा, हालांकि दीर्घकाल की बात की जाए तो भारतीय शेयर बाजार अच्‍छा रहेगा। वे कहते हैं कि मुझे बीएसई सेंसेक्‍स में आने वाले दिनों में 30 फीसदी की बढ़त दिखाई दे रही है। जबकि, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, पीएसयू और बैंकिंग शेयरों में यह बढ़त 40-50 फीसदी रहेगी।</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-301504381956041481?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-75035320976282762672009-05-04T07:16:00.003+05:302009-05-04T07:18:52.334+05:30शेयर बाजार की दिशा का अहम समय<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/Sf5JLY-xI4I/AAAAAAAACIg/lA6kI3mx1hk/s1600-h/stock-6.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5331779468886352770" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 136px; CURSOR: hand; HEIGHT: 77px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/Sf5JLY-xI4I/AAAAAAAACIg/lA6kI3mx1hk/s200/stock-6.jpg" border="0" /></a> भारतीय शेयर बाजार के लिए चार मई से शुरु हो रहा सप्‍ताह बेहद अहम है और 16 मई तक शेयर बाजार अनेक उतार चढ़ाव का सामना करता रहेगा। स्‍वाइन फ्लू और राजनीतिक जोड़तोड़ इन दो सप्‍ताहों में शेयर बाजार की अगली दिशा तय कर देंगे। हालांकि, लोकसभा के नतीजों से ही यह पता चल सकेगा कि दिल्‍ली में किस दल के हाथ कुर्सी लगेगी और उसके मित्र दल कौन कौन होंगे लेकिन नतीजों से पहले ही जिस तरह की हलचल राजनीतिक गलियारों में हो रही हैं उसका आम जनता से मिले वोट से कोई सारोकार नहीं है। केवल व्‍यक्तिगत स्‍वार्थ को सर्वोपरि रखा जा रहा है क्‍योंकि जनता से तो अब पांच साल बाद मिलना है।<br /><br />शेयर बाजार की इस रिपोर्ट में पिछली बार भारतीय उपमहाद्धीप की बदल रही स्थिति का जिक्र किया था कि श्रीलंका, पाकिस्‍तान और भारत में ऐसे कारक बन रहे हैं कि आने वाले वर्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के होंगे। श्रीलंका में तमिल चीतों का काफी दम निकल गया है, जबकि पाकिस्‍तान में ओबामा प्रशासन ने जरदारी को कमजोर खिलाड़ी मानते हुए नवाज शरीफ से पींगे बढ़ाना शुरु कर दिया है ताकि उन्‍हें कुर्सी का आनंद देने की एवज में तालिबान को पाकिस्‍तान में घेरकर मारा जा सके। तालिबान से हर देश परेशान हैं और अमरीका को सभी का इस मुद्दे पर समर्थन मिलेगा। इस बीच, भारत में लोकसभा चुनाव के लिए चौथे चरण का मतदान होने की तैयारी चल रही है।<br /><br />लोकसभा के लिए चौथे और पांचवें चरण के लिए मतदान होने से पहले दिल्‍ली में कुर्सी पाने के लिए जोड़तोड़ का गणित शुरु हो गया है। वामदलों की आलोचना के बीच उनके समर्थन की भी जोरशोर से कोशिश चल रही है। कांग्रेस के अलावा तीसरा मोर्चा भी केंद्र में सरकार बनाने के लिए वामदलों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। लेकिन वामदलों में से प्रकाश कारत तो खुद ही प्रधानमंत्री बनने की लालसा प्रकट कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा सीधे सीधे नहीं चाहता कि कांग्रेस की सरकार बनें और उसे उसके साथ रहना पड़े। हालांकि ऐसा साथ देश हित में कम, ब्‍लैकमेलिंग की राजनीति के लिए ज्‍यादा होगा। तीसरा मोर्चा चाहता है कि सरकार वह खुद बनाए और कांग्रेस समर्थन दे ताकि सब कुछ उसके हाथों में रहें। भाजपा भी जोर लगा रही है कि उसके बिछड़े साथी और यूपीए से नाराज दल उसके साथ आ जाएं तो आडवाणी का सपना पूरा हो सके। भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कहा है कि उन्‍हें वामपंथियों से भी हर्ज नहीं हैं। यानी दक्षिण और वाम मिलकर दिल्‍ली की कुर्सी पर बैठ जाएं।<br /><br />एक थ्‍योरी यह भी उभर रही है कि इन छोटे छोटे दलों का सफाया करने के लिए क्‍यों नहीं कांग्रेस और भाजपा ही दोस्‍ती कर लें। खैर! जो भी हो लेकिन यह जोड़तोड़ शेयर बाजार पर गहरा असर छोड़ेगा। कांग्रेस या भाजपा की नीतियों में खास फर्क नहीं है इसलिए इनके सत्ता में बैठने को बाजार सामान्‍य तरीके से लेगा लेकिन तीसरे मोर्चे की सरकार आने पर शेयर बाजार बड़ा गोता लगा सकता है। राजनीति के इस सर्कस में चल रहे खेल पर निवेशकों को काफी सचेत होकर नजर रखनी होगी क्‍योंकि ऐसा न हो कि आज सर्कस में जो जमूरा है वह कहीं रिंग मास्‍टर न बन जाएं और रिंग मास्‍टर जमूरा।<br /><br />4 मई से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 11855 से 10888 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 3622 से 3322 के बीच रहेगा। लेकिन सेंसेक्‍स के लिए 11588 अंक और निफ्टी के लिए 3533 अहम स्‍तर हैं। इन स्‍तरों के ऊपर शेयर बाजार में तेजी का नया दौर शुरु हो जाएगा। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने स्‍वाइन फ्लू पांचवें लेवल का बताया है और यदि छठें लेवल में प्रवेश करने के साथ एशियाई देशों में फैल गया तो बाजार के लिए भी घातक होगा। इस बीच, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फरवरी में 2436 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की लेकिन मार्च में 530 करोड़ रुपए और अप्रैल में 6508 करोड़ रुपए की जोरदार शुद्ध खरीद की है जो सकारात्‍मक कारक है। <br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 11500 के ऊपर जाता है तो अगले रेसीसटेंस 12500-13000 हैं। स्‍टॉप लॉस 10700 का रखें। साप्‍ताहिक सपोर्ट 11000 और 10700 पर हैं जबकि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 11600 पर है।<br /><br />सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन, सूरत के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि अगले सप्‍ताह पहला रेसीसटेंस 11613-11690 है और दूसरा 11816-11900 के मध्‍य है। स्‍टॉप लॉस 11273 का कड़ा स्‍टॉप लॉस रखते हुए 11410 के ऊपर तेजी का कारोबार किया जा सकता है। यदि दुनिया भर के शेयर बाजारों में बड़ी तेजी दिखती है तो सेंसेक्‍स ऊपर में अधिकतम 12143 तक जा सकता है। सेंसेक्‍स यदि 11600 के पार बंद नहीं होता है और यह 11400 के स्‍तर को तोड़ देता है तो यह नीचे में 11160 अंक तक आने की आशंका है। इस स्‍तर के टूटने पर सेंसेक्‍स 10957-10880 और 10755-10677 तक जा सकता है।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक सुप्रीम इंडस्‍ट्रीज, फेडरल बैंक, टाटा कैमिकल्‍स, सेंचुरी टेक्‍सटाइल, जुआरी इंडस्‍ट्रीज, श्रीसीमेंट, शीपिंग कार्पोरेशन, बैंक ऑफ बड़ौदा, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस इंफ्रा, नेशनल फर्टिलाइजर, बजाज हिंदुस्‍तान, जयश्रीटी और नवीन फ्लोरिन पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-7503532097628276267?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-57039663099004230192009-04-27T12:41:00.001+05:302009-04-27T12:44:03.571+05:30भारतीय शेयर बाजार नई तेजी की ओर<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SfVawveEE2I/AAAAAAAACIY/kgkAnaN4Elc/s1600-h/india.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5329265527485633378" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 102px; CURSOR: hand; HEIGHT: 127px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SfVawveEE2I/AAAAAAAACIY/kgkAnaN4Elc/s200/india.jpg" border="0" /></a><br /><div>अंतरराष्‍ट्रीय इक्विटी विश्‍लेषक फर्म इलियटवेव ने जब यह कहा कि भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्‍स अगले 15 साल में एक लाख अंक पर पहुंच जाएगा तो अनेक निवेशकों और विश्‍लेषकों ने इसे हसंने के अंदाज में लिया कि आज क्‍या होगा, यह बताओं, 15 साल किसने देखें। लेकिन एशियाई बाजारों में आने वाले दिन भारतीय शेयर बाजार के होंगे। हो सकता है घरेलू शेयर बाजार चीन जैसे बाजार को भी पीछे छोड़ दें।</div><div><br />भारतीय शेयर बाजार के बेहद मजबूत बनने के अनेक कारक अब पैदा होते जा रहे हैं जिसमें अति धैर्यवान निवेशक भारी भरकम मुनाफा कमाने की स्थिति में होंगे। लेकिन इस खजाने को हासिल करने के‍ लिए आज किए गए निवेश पर धैर्य रखना होगा। यहां धैर्य रखने की समय सीमा पर एक बात साफ कर दूं कि धैर्य का मतलब यह कदापी नहीं हैं कि आज शेयर खरीदें और अगले 15 साल तक उन्‍हें न देखें। अपने निवेश पर बीच बीच में मुनाफावसूली करते रहें और हर गिरावट पर फिर से खरीद जरुर करते रहें। यह न तो इंट्रा डे ट्रेडिंग है और ना ही चुपचाप बैठने वाली सलाह।</div><div><br />भारतीय उपमहाद्धीप में हमारे शेयर बाजार के लिए जो सकारात्‍मक कारक पैदा हो रहे हैं वे भौगोलिक हैं। श्रीलंका में पिछले कई सालों से तमिल चीतों ने जो उत्‍पात मचा रखा था उसका एक स्‍तर पर अंत होने जा रहा है। तमिल चीतों की वजह से न तो श्रीलंका में शांति थी और न ही भारत चैन से रह पा रहा था। जब यह समस्‍या बर्दाशत की सीमा को पार कर गई तो श्रीलंका सरकार ने वह कदम उठाया जो सभी प्रयास के बाद उठाया जाता है। तमिल चीतों का सफाया होने के बाद भी कुछ वर्ष श्रीलंका के लिए कठिन होंगे लेकिन यदि वहां की सरकार ने कड़ाई से काम लिया तो वह एक जमाने की तरह फिर बेहतर प्रगति की ओर बढ़ता दिख सकता है। हमारे कुछ राजनीतिक दल वहां भारत सरकार का हस्‍तक्षेप चाहते हैं लेकिन यह श्रीलंका का मामला है और जब हम अपने यहां किसी दूसरे देश का हस्‍तक्षेप बर्दाशत नहीं कर सकते तो हमें वहां हस्‍तक्षेप करना भी नहीं चाहिए। जिन चीतों ने भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या की, उनके बचाव के लिए सरकार को हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस सफाये से आने वाले वर्षों में हमें अपनी दक्षिण सीमाओं पर शांति मिल सकती है।<br /><br />अब बात करते हैं पाकिस्‍तान की। पाकिस्‍तान में इन दिनों तालिबान धीरे धीरे इस्‍लामाबाद की ओर बढ़ रहा है। एक समय अमरीकी राष्‍ट्रपति ओबामा प्रशासन ने भी तालिबानियों से बात करने की इच्‍छा जता दी थी ताकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्‍या का अंत हो सके। लेकिन लगता है ओबामा प्रशासन ने कई कारणों से अपनी नीति को थोड़ा बदला है। स्‍वात घाटी के बाद बुनेर जिले में आगे बढ़े तालिबानियों के इस्‍लामाबाद पहुंचने पर अमरीका जरुर कार्रवाई करेगा। इस समय केवल पाकिस्‍तानी फौज छोटे मोटे मोर्चे के मूड में है लेकिन खुलकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अमरीका पाकिस्‍तान में तालिबान को चारों तरफ से घेरकर मारना चाहता है। विश्‍व समुदाय इस तरह के आतंक से तंग आ चुका है। हालांकि, यह काम आसान नहीं है लेकिन इस पर काम चल रहा है। पाकिस्‍तान में तालिबान की कब्र खोदने में कुछ वर्ष लग सकते हैं लेकिन इसके बाद परमाणु भट्टियों से रहित पाकिस्‍तान के नव निर्माण में भारत की बड़ी भूमिका होगी क्‍योंकि उसकी जमीन एक समय भारत का ही हिस्‍सा थी।<br /><br />अब बात हमारे देश की...देश इस समय लोकसभा चुनाव से गुजर रहा है। यह तो सभी को पता है कि अगली सरकार भी गठबंधन सरकार होगी लेकिन नतीजों से पहले जिस तरह हर छोटे दलों के नेता अपने स्‍वार्थों के लिए जोड़ तोड़ करने, मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की जुगत कर रहे हैं वह तमाशा आम जनता अच्‍छी तरह देख रही है। अगली सरकार चाहे कांग्रेस की अगुवाई में बनें या भाजपा की में, लेकिन यदि स्‍थाई मामला न बना तो देश में मध्‍यावधि चुनाव होंगे जिसमें जनता कांग्रेस या भाजपा में से किसी एक को साफ बहुमत देकर सत्ता की चाबी सौंप सकती है। देश में अब युवाओं की संख्‍या सर्वाधिक है और यह वर्ग वाकई काम चाहता है और सारा हिसाब किताब साफ साफ। ऐसे में यदि राजनीतिक हितों की लड़ाई में मध्‍यावधि चुनाव हुए तो मंत्री बनने के लिए तड़पने वाले नेताओं का कैरियर खत्‍म हो सकता है। यह ऐसा मोड़ होगा जहां भारत में एक बार फिर बेहतर और मजबूत सरकार आने का मौका होगा। ये तीन ऐसे कारक हैं जो भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था और बाजार के लिए मील का पत्‍थर साबित होंगे। <br /><br />27 अप्रैल से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में शेयर बाजार केवल तीन दिन ही कारोबार करेगा। 30 अप्रैल गुरुवार को लोकसभा चुनाव के लिए मुंबई में मतदान होने की वजह से शेयर बाजार बंद रहेगा। 1 मई को महाराष्‍ट्र दिवस पर शेयर बाजार बंद रहेगा। गुरुवार को बाजार बंद होने की वजह से एफ एंड ओ अप्रैल सीरिज का निपटान बुधवार को होगा।</div><div><br />चालू सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 11569 के ऊपर बंद होने पर 11877 अंक तक पहुंच सकता है। इसे 10922 पर सपोर्ट मिलेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 3555 के ऊपर बंद होने पर 3644 अंक तक पहुंच सकता है। इसे 3355 पर सपोर्ट मिलेगा।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में इस समय तेजडि़यों और मंदडि़यों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। दोनों बाजार पर छाने की कोशिश में लगे हुए हैं। सेंसेक्‍स के 11400 के ऊपर रहने पर अगले गंभीर रेसीसटेंस 12500-13000 हैं। साप्‍ताहिक सपोर्ट 11000 और 10700 पर हैं जबकि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 11400 पर देखने को मिलेगा। शार्ट टर्म और पोजीशनल निवेशक 10700 को बेंचमार्क के रुप में इस्‍तेमाल करें एवं इसे सामने रखते हुए निकट भविष्‍य के लिए लांग पोजीशन बनाए रख सकते हैं।<br /><br />कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर लि. भोपाल के वायस चेयरमैन आदित्‍य एम. जैन का कहना है कि 27 अप्रैल से शुरु होने वाले सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स के रेसीसटेंस स्‍तर 11368-11407-11488-11542-11600-11662-11723-11778-11824-11893-12009-12073-12128-12170-12236-12303 हैं। जबकि, सपोर्ट स्‍तर 11280-11192-11031-10958-10902-10834-10761-10703-10651.10589-10532-10438-10362-10303-10216 है। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज के निफ्टी के रेसीसटेंस स्‍तर 3502-3523-3554-3588-3601-3626-3668-3690-3716-3747-3776-3799-3834-3858 है। जबकि, सपोर्ट स्‍तर 3464-3443-3414-3393-3369-3345-3322-3294-3267-3246-3218-3200-3178-3151-3117-3100 है।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक काकतिया सीमेंट शुगर्स, फेडरल बैंक, दिवान हाउसिंग, एचडीआईएल, श्री सीमेंट, अबान ऑफशोर, प्रोक्‍टर एंड गेम्‍बल, पेपर प्रॉडक्‍टस, बीजीआर एनर्जी सिस्‍टम्‍स, बैंक ऑफ बड़ौदा, ग्‍वालियर कैमिकल इंडस्‍ट्रीज, रिलायंस इंफ्रा, रेडिंग्‍टन, जेएसडब्‍लू स्‍टील, जिंदल शॉ, जिंदल ड्रिलिंग, एक्सिस बैंक और जेएसडब्‍लू होल्डिंग्‍स पर ध्‍यान दे सकते हैं। </div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-5703966309900423019?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-61655844124158363422009-03-09T05:18:00.002+05:302009-03-09T05:27:58.405+05:30शेयर बाजार को आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी !<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SbRZt-D9w9I/AAAAAAAACIA/7hBUFNMvwv0/s1600-h/stock-7.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5310968506865271762" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 130px; CURSOR: hand; HEIGHT: 98px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SbRZt-D9w9I/AAAAAAAACIA/7hBUFNMvwv0/s200/stock-7.jpg" border="0" /></a> मंदी में डूबे शेयर बाजार को क्‍या अब आखिरी धक्‍का मारने की तैयारी हो रही है। आम निवेशक के विचारों को आगे रखें तो शेयर बाजार में मंदी का अंत नहीं है और उन्‍हें ऐसा लगता है सब कुछ जीरो हो जाएगा। लेकिन ऐसा है नहीं। आम निवेशक की मनोस्थिति में उसे जीरो के अलावा कुछ नहीं दिख रहा जबकि अंधेरे के बाद उजाला और उजाले के बाद अंधियारा प्रकृति का नियम है।<br /><br />शेयर बाजार में यह कोई पहली बार मंदी नहीं आई है। ऐसा कई बार हुआ है लेकिन अब तक निचले और आकर्षक स्‍तर पर लेवाली कर फिर लौटी तेजी में मुनाफाकमाने वाले इस बार की मंदी में गच्‍चा खा गए हैं। हर घटे स्‍तर को निचला स्‍तर मानकर शेयर खरीदने वालों ने पैसा कमाया ही नहीं, बल्कि गंवाया ही है। शेयर बाजार की तलहटी का पता न लगते देख अब ऐसे निवेशकों ने खरीद रोक दी है। मंदडि़यों ने पूरे देश को ही नहीं बल्कि सारी दुनिया को मंदी में उतार दिया है। बस बेचो..बस बेचो...यही एक शब्‍द सब जगह गुंज रहा है। लेकिन हर बार ऐसा हुआ है पूरी तरह मंदी या तेजी में डूबा देने के बाद खिलाड़ी खेल बदलते हैं।<br /><br />यदि आपको याद हो तो दिसंबर 2008 में हर कोई मानकर चल रहा था कि रिलायंस पावर का आईपीओ लिस्‍टेड होते समय सेंसेक्‍स को 27, 30 और 35 हजार पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। उस समय जिसने भी गिरावट की बात की या मुनाफावसूली की, उस पर हर कोई हंसता था। नवंबर से जनवरी 2009 के दौरान बार बार यह कहा जा रहा था कि यह समय मुनाफा वसूली का है। मुनाफावसूली करते रहना ज्‍यादा बुद्धिमानी का खेल होगा। पेड़ चाहे कितना लंबा हो जाए वह आसमान को छू नहीं सकता....लेकिन अधिकतर निवेशकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया और घाटे में उतर गए।<br /><br />मंदी में आकंठ डूबे शेयर बाजार में धीरे धीरे खेल पलटने की तैयारी चल रही है। सेंसेक्‍स की तलहटी 6994 का दिख रहा है और यदि यहां कोई छोटी दुर्घटना होती है तो यह 6700 अंक तक जा सकता है। लेकिन यहां से शेयर बाजार की स्थिति पलटती हुई दिख रही है। हालांकि, एक बात साफ कर लें कि अब जो तेजी होगी वह राकेट की गति से नहीं आएगी। यदि निवेशक यह मान रहे हों कि बाजार अपनी इस तलहटी से सीधे 15 या 21 हजार अंक पहुंच जाएगा, वे इस भ्रम में न रहें। बाजार के बढ़ने पर बीच बीच में बिकवाली दबाव साफतौर पर दिखेगा जो सेंसेक्‍स को अपनी पिछली ऊंचाई तक पहुंचाने में काफी समय लग सकता है।<br /><br />शेयर बाजार के महाखिलाड़ी अब आम चुनाव के इस माहौल में अनेक झूठ और सच के सहारे निवेशकों से उम्‍दा कंपनियों के शेयर पूरी तरह निकलवाने का प्रयास करेंगे ताकि बेहद सस्‍ते में ये शेयर खरीदकर वे अपने पोर्टफोलियों को मजबूत बना सकें। आम निवेशक अब दिल से नहीं दिमाग से काम लें और अच्‍छी कंपनियों के शेयर न बेचें। याद रखें इस बाजार में हर बार मंदी के बाद तेजी लौटी है। खुद निवेशक भी होमवर्क करें और पढ़ने के साथ सारी घटनाओं पर नजर रखें एवं अनके अर्थ सही दिशा में निकालने की कोशिश करें। कहावत है खुद को स्‍वर्ग जाना हो तो खुद को ही मरना पड़ता है। अमरीका और यूरोप में मंदी के बीच भारत में औद्योगिक फंड, एफआईआई, लोकल फंड और बड़े खिलाड़ी शेयर बाजार को ढीला रखने का प्रयास करेंगे लेकिन चतुर निवेशक अपने पोर्टफोलियों में वे बेहतरीन शेयरों को शामिल कर सकते हैं जो मंदी के इस आखिरी धक्‍के में तलहटी पर होंगे।<br /><br />9 मार्च से शुरु हो रहा नया सप्‍ताह शेयर बाजार के लिए छोटा सप्‍ताह है क्‍योंकि शेयर बाजार में 10 और 11 मार्च को अवकाश रहेगा। नए सप्‍ताह में केवल तीन दिन ही कारोबार होगा। नौ मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 8585 से 7979 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 2727 से 2424 के बीच कारोबार करेगा।<br /><br />शेयर बाजार के लिए मार्च महीना अच्‍छा नहीं रहा है। पिछले 16 साल में से 12 साल मार्च महीने ने नकारात्‍मक रिटर्न दिया है। केवल चार साल ही मार्च महीने ने सकारात्‍मक रिटर्न दिया है। पिछले वर्षों में मार्च महीने में औसतन 3.5 फीसदी नकारात्‍मक रिटर्न मिला है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर कार्पोरेट टैक्‍स की जमा होने वाली राशि पर रहेगी। यदि इस टैक्‍स में कोई असामान्‍य कमी देखने को मिली तो शेयर बाजार का बंटाढार हो सकता है।<br /><br />सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि अगले सप्‍ताह के लिए बैलेंस पाइंट 8378 के मुकाबले पिछला बंद स्‍तर 8325 के कम होने की वजह से नरमी का रुख दिखाता है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्‍य रहेगा। नई मंदी 8209 के नीचे, स्‍टॉप लॉस 8314 का रखें या 8443 से 8547 के बीच स्‍टॉप लॉस 8584 का रखें। 8200 का स्‍तर टूटने पर 7972 से 7811 तक गिरने की संभावना। यदि 7800 के नीचे सेंसेक्‍स आता है तो मंदी में रहे अन्‍यथा बढ़कर 8200 से 8395 आने के आसार। 7800 के नीचे सेंसेक्‍स के रहने पर यह 7662 से 7558 तक आ सकता है। तेजी का कारोबार 8550 के ऊपर करें और स्‍टॉप लॉस 8443 का रखें। तेजी के दौरान सेंसेक्‍स बढ़कर 8820 जाने के आसार लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में अब अक्‍टूबर 2008 के निचले स्‍तर की परीक्षा होगी। हालांकि, पिछले सप्‍ताह पुलबैक की बात थी जो नहीं हो सका। नए सप्‍ताह में सेंसेक्‍स के लिए रेसीसटेंस स्‍तर 8378-8710-8762 होंगे। साप्‍ताहिक सपोर्ट 7994-7696 और 7278 होंगे। सेंसेक्‍स बढ़कर 8535 के ऊपर बंद होता है तो इसकी तलहटी 8047 तय है और यहां से पुलबैक देखने को मिलेगा। इस पुलबैक के तहत सेंसेक्‍स 9725 तक पहुंच सकता है। लेकिन यदि सेंसेक्‍स 8047 से तत्‍काल गिरता है तो इसके कम से कम 7697 तक जाने की संभावना है।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक पेट्रोनेट एलएनजी, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, भारती एयरटेल, श्रेई इंफ्रा, पुंज लायड, मीक इलेकट्रॉनिक्‍स, एस्‍सार शीपिंग, सुजलॉन एनर्जी और जी न्‍यूज पर ध्‍यान दे सकते हैं।<br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-6165584412415836342?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-2902088255172933652009-03-02T08:14:00.001+05:302009-03-02T08:18:09.912+05:30शेयर बाजार में अगली गिरावट से पहले पुलबैक रैली संभव<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SatIcweNF7I/AAAAAAAACHg/KU7b2gh0SNQ/s1600-h/stock-6.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5308416244671387570" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 136px; CURSOR: hand; HEIGHT: 77px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SatIcweNF7I/AAAAAAAACHg/KU7b2gh0SNQ/s200/stock-6.jpg" border="0" /></a> ‘अवर इकॉनामी आर लैस इफेक्‍टेड देन अदर्स...’ भारत दुनिया भर की मंदी से अलग है, देश की आर्थिक विकास दर को कोई आंच नहीं आएगी, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍‍था स्‍थानीय मांग पर आधारित है...जैसी बात कहकर आम जनता और निवेशकों को भ्रम में रखने वाले हमारे अर्थशास्‍त्री नेताओं और ब्‍यूरोक्रेटस को अब पता चलने लगा है कि वाकई अमरीकी व यूरोपीय मंदी हमारी तरफ तेजी से बढ़ रही है। शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट से पहले केवल आम चुनाव तक एक पुलबैक रैली की संभावना है जिसे हमारे यहां सुधार की संज्ञा दी जा रही है लेकिन स्थिति खराब होने के आसार अधिक है।<br /><br />आर्थिक विकास की दर को नौ से आठ और फिर सात फीसदी बताने वाले अर्थशास्‍त्री अब स्‍वीकार कर रहे हैं कि यह 5.3 से 5 फीसदी ही रह सकती है। आम उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की मांग घटने से ही महंगाई दर 3.36 फीसदी पहुंची हैं। जबकि हकीकत में जीवन की जरुरत वाली वस्‍तुओं के दाम वाकई उतने नहीं घटे हैं जितनी महंगाई दर का कम होना बताया जा रहा है। औद्योगिक उत्‍पादन के साथ अब कृषि क्षेत्र भी विकास दर में गिरावट दिखा रहा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मौजूदा यूपीए सरकार ने सरकारी तिजोरी पूरी तरह खोल दी है और देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार साफ हो रहा है। केंद्र सरकार की देखादेखी जिन राज्‍यों में कांग्रेस की सरकारें नहीं है वे भी आम आदमी का वोट हासिल करने के लिए दानवीर बनती जा रही हैं।<br /><br />सरकारी दानवीरता के अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है जिससे भावी खतरे को भांपते हुए स्‍टैंडर्ड एंड पुअर ने देश की रेटिंग को स्थिर से नकारात्‍मक कर दिया है। इस एजेंसी ने भारतीय बाजार और कार्पोरेट सैक्‍टर में निवेश न करने की सलाह दी है। विदेश में रह रहे भारतीय बेरोजगार होकर देश लौटने लगे हैं। इन नकारात्‍मक कारकों को देखते हुए यदि चालू तिमाही के बाद आर्थिक रिकवरी के संकेत नहीं मिलते हैं तो हमें और बुरे माहौल से गुजरने के लिए तैयार रहना होगा।<br /><br />अमरीका और यूरोप में कार्पोरेट सैक्‍टर तगड़े परिवर्तन कर कंसोलिडेशन की तैयारी की जा रही है। निजी उद्योगों का राष्‍ट्रीयकरण किया जा रहा है। ऐसे में हमारे घरेलू कार्पोरेट सैक्‍टर को भी अपने आपको कसने की तैयारी करनी होगी। निवेशक अब वही कंपनियों को निवेश के लिए चुनें जिनकी भावी योजनाएं और भविष्‍य वास्‍तविकता पर आधारित हों। भारी भरकम सम्‍पदा और कारोबारी अवसर जिन कंपनियों के पास हों, उन्‍हें प्राथमिकता दे। साथ ही यह निवेश ऐसी कंपनियों के शेयरों का भाव वास्‍तविक होने पर करें क्‍योंकि बाजार कभी भी भागकर नहीं जाता।<br /><br />सप्‍ताह का पहला दिन शेयर बाजार के लिए खास रहेगा क्‍योंकि रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के निदेशक मंडलों की बैठक होगी जिसमें रिलायंस पेट्रोलियम के विलय का फैसला होगा। आने वाले दिनों में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों में खासी हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों को रिलायंस पेट्रोलियम के शेयरों से दूर रहना चाहिए क्‍योंकि इस विलय से जो भी फायदा होगा वह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के शेयरधारकों को होगा।<br /><br />2 मार्च से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्‍स का रेसीसटेंस 9095 अंक। सेंसेक्‍स के 8595 अंक टूटने पर 8345 आने के आसार। नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) के निफ्टी का रेसीसटेंस 2826 अंक। निफ्टी के 2676 अंक से टूटने पर 2585 अंक जाने के आसार हैं।<br /><br />सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि 2 मार्च से शुरु हो रहे सप्‍ताह में 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करें जबकि 8746 के नीचे मंदी का कारोबार करने की सलाह। 8925 के ऊपर तेजी का कारोबार करते समय स्‍टॉप लॉस 8835 का रखें। इसके ऊपर में 9074-9125 तक जाने की संभावना। इससे ऊपर जाने पर 9215 तक पहुंचने के आसार। सेंसेक्‍स के 8746 अंक से टूटने पर 8602-8546 के बीच पहला सपोर्ट। 8546 का स्‍तर टूटने पर 8454-8401 अंक देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में 8746 का स्‍तर टूटने पर तेजी का कारोबार करना जोखिमी हो सकता है।<br /><br />मोदी का कहना है कि 9070 तक पहुंचने से पहले यदि सेंसेक्‍स 8870 के नीचे बंद होता है या बंद होने के आसार दिखाता है तो यह 8746 तक करेक्‍शन कर सकता है। इस स्‍तर के टूटने की स्थिति में भारी गिरावट की आशंका है। इस तरह जोन और स्‍तर का अध्‍ययन यह बताता है कि अगले सप्‍ताह शेयर बाजार दो तरफा घटबढ़ करेगा।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार में और गिरावट से पहले पुलबैक दिखाई देगा। वे कहते हैं कि बीएसई सेंसेक्‍स को 8631-8619 पर काफी कठिन सपोर्ट मिलने के आसार हैं। यदि सेंसेक्‍स इस स्‍तर से नीचे आता है तो यह बुरी तरह टूट सकता है। जब तक सेंसेक्‍स 8631 के ऊपर है, इसमें 9725-8600 के बीच उतार चढाव दिखता रहेगा। साप्‍ताहिक रेंसीसटेंस 9053 और 9433 पर देखने को मिल सकता है। सेंसेक्‍स गिरकर 8600 के नीचे आता है तो यह कम से कम 8295 तक आएगा।<br /><br /><span class=""></span>इस सप्‍ताह निवेशक ग्‍लेक्‍सोस्मिथक्‍लाइन कंज्‍यूमर, एनटीपीसी, हिंदुस्‍तान डोर ओलिवर, गोदरेज कंज्‍यूमर प्रॉडक्‍टस, बैंक ऑफ बड़ौदा, गुजरात स्‍टेट पेट्रो, जी न्‍यूज, रिलायंस नैचुरल रिसोसर्स, भारत अर्थ मूवर्स और हिंदुस्‍तान यूनिलीवर पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-290208825517293365?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-52875068259364761022009-02-24T06:25:00.002+05:302009-02-24T06:29:40.317+05:30बीएसई सेंसेक्‍स का 6940 अंक के आसपास बनेगा बॉटम<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SaNFpZjytoI/AAAAAAAACHQ/9NOfZoiK7vI/s1600-h/stock-2.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5306161363510539906" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 124px; CURSOR: hand; HEIGHT: 99px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SaNFpZjytoI/AAAAAAAACHQ/9NOfZoiK7vI/s200/stock-2.jpg" border="0" /></a> दुनिया भर के शेयर बाजारों के निवेशकों के सामने इन दिनों एक ही सवाल है कि इस गिरते बाजार का बॉटम कहां हैं। क्‍या होगा सबसे निचला स्‍तर जहां से शेयर बाजार फिर ऊपर की ओर लौट सकता है। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था वाले देश अमरीका से लेकर छोटी अर्थव्‍यवस्‍था वाला हर देश इन दिनों मंदी के दलदल में फंसता जा रहा है। अर्थव्‍यवस्‍थाओं के लिए एक के बाद एक आ रहे राहत पैकेज छोटे पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में शेयर बाजारों के बॉटम की बात कौन करें।<br /><br />दुनिया के विख्‍यात निवेशक जॉर्ज सोरोस का कहना है कि विश्व की वित्तीय प्रणाली पूरी तरह से बिखर चुकी है। उनकी राय में इस संकट से जल्द छुटकारा मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इस बार का संकट दूसरे विश्व युद्घ से पहले की महामंदी से भी गंभीर है। उन्होंने अभी के संकट की तुलना सोवियत संघ के पतन से की। निवेश बैंकर लीमैन ब्रदर्स के पिछले साल सितंबर में पतन को उन्होंने मौजूदा वित्तीय प्रणाली के लिए एक निर्णायक मोड बताया। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में एक डिनर में उन्होंने कहा कि हमने वित्तीय प्रणाली को बिखरते देखा है। ये लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि संकट का सबसे बुरा दौर कब होगा और कहां से हालात में बेहतरी शुरू होगी, यह कहना मुश्किल है।<br /><br />जॉजे सोरोस का कहना बेहद सही है और इस समय कोई भी बाजार का निचला स्‍तर नहीं जानता फिर भी निवेशकों के इस सवाल का जवाब ढूंढा जा रहा है कि वह निचला स्‍तर क्‍या होगा जहां से बाजार फिर से सुधार की ओर होंगे और उस स्‍तर पर निवेश करना एक बड़ा मौका होगा। भारतीय शेयर बाजार के संदर्भ में बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का यह स्‍तर 6940 अंक लगता है। बड़ी संभावना यही है कि शेयर बाजार इस स्‍तर को छूने के बाद फिर से ऊपर की ओर लौटने लगे। इस स्‍तर के बाद 6779 अंक वह दूसरा स्‍तर है जहां से तेजी की ओर बाजार मुड़ सकते हैं। बाजार को यह निचला स्‍तर पूर्वी यूरोप के बैंकिंग जगत से आने वाली बुरी खबरों की वजह से देखना पड़ेगा। पूर्वी यूरोप से बुरी खबरें आने के बाद वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍थाओं की हालत साफ हो जाएगी और उसके बाद सुधार के किए गए ठोस प्रयास धीरे धीरे अपना रंग दिखाने लगेंगे। ऐसे में हो सकता है चीन व भारत जैसे देशों की अर्थव्‍यवस्‍था से अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था से डिकपलिंग होती नजर आए। डिकपलिंग यानी दूसरी अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर निर्भरता की समाप्ति। चीन और भारत दुनिया के बड़े उपभोक्‍ता देश हैं, ऐसे में हमें अपने उत्‍पादों की खपत की लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने की आवश्‍यकता नहीं है।<br /><br />सूरत कॉमर्शियल कार्पोरेशन के इक्विटी विश्‍लेषक गोपाल मोदी का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशक हरेक गिरावट पर 10 से 15 फीसदी निवेश करते रह सकते हैं। लेकिन मुख्‍य सवाल यह उठता है कि अल्‍प अवधि (शार्ट टर्म) के निवेशक कब निवेश करें....मेरा मानना है कि चौथी तिमाही और पहली तिमाही के नतीजे अत्‍यंत नकारात्‍मक आएंगे और उस समय निवेश का शानदार मौका मिलेगा। शेयर बाजार हमेशा भविष्‍य को वर्तमान में प्रदर्शित करता आया है। अत: जब गहरी नकारात्‍मकता बाजार में पैदा होगी तभी बाजार अपना बॉटम बनाएगा....कारण सीधा है कि कोई भी नेगेटिव नतीजे, कारक सामने आने वाले हैं और उन्‍हें देखकर ही बाजार इस समय गिर रहा है और जब यह नकारात्‍मकता सामने आएगी तब बाजार अपना बॉटम बनाएगा..।<br /><br />मोदी कहते हैं कि इस बात को तकनीकी तौर पर समझें तो सितंबर 2001 में बॉटम बनाकर सुधार की ओर आगे बढ़े बाजार ने केवल एक बार साप्‍ताहिक आधार पर गेप ओपनिंग के साथ शुरुआत की है। और यह गेप ओपनिंग 24 जून 2005 को 6940 के स्‍तर पर देखने को मिला है। इसी तरह जनवरी 2008 में 18970 के स्‍तर के पास डाउन गेप ओपनिंग देखने को मिला....इन दोनों गेप में सुधार और गिरावट असामान्‍य रुप से देखने को मिली। मेरा मानना है कि बाजार मौजूदा गिरावट की चाल में वर्ष 2005 के स्‍तर पर आएगा और यहां मंदी का दौर पूरा होने की संभावना है।<br /><br />वर्ष 2009 की पहली तिमाही में 8883 अंक के नीचे सेंसेक्‍स बारबार जा चुका है। यह 8883 का स्‍तर डाउन साइड ट्रिगर है। सेंसेक्‍स 9686 अंक से ऊपर बंद नहीं होता है तो मंदी का कारोबार किया जा सकता है। मार्च अंत तक सेंसेक्‍स के 6779 अंक आने की संभावना है। 24 फरवरी से शुरु हो रहे सप्‍ताह में बीएसई सेंसेक्‍स 9198 से 8488 अंक और एनएसई निफ्टी 2848 से 2628 के बीच घूमता रहेगा।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स का अगले सप्‍ताह अहम सपोर्ट स्‍तर 8631 है। बाजार में 9725-8631 के बीच उतार चढ़ाव बना रहेगा। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 9080-9395-9275 है। साप्‍ताहिक निचला स्‍तर 8631-8524 और 7650 है।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक पिरामल हैल्‍थकेयर, कंटेनर कार्पोरेशन, रिलायंस कम्‍युनिकेशन, सेसा गोवा, बारटोनिक्‍स, टोरेंट पावर, ईआईडी पैरी, जीएमआर इंफ्रा, एल एंड टी और मुंजाल ऑटो पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-5287506825936476102?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-81119519166536987352009-01-27T06:40:00.001+05:302009-01-27T06:44:04.338+05:30शेयर बाजार के लिए बड़ी हलचल का है यह सप्‍ताह<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SX5fZuokayI/AAAAAAAACHA/q3x1tHoUbC4/s1600-h/stock-7.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5295775107453840162" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 130px; CURSOR: hand; HEIGHT: 98px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SX5fZuokayI/AAAAAAAACHA/q3x1tHoUbC4/s200/stock-7.jpg" border="0" /></a> कार्पोरेट नतीजों के इस मौसम में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के बेहतर कार्य नतीजों और देश की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्‍ट्रीज का प्रदर्शन आशंका से कम खराब आने की वजह से निवेशकों ने शेयर बाजार में अपने निवेश को बनाए रखा हैं। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की कई बुनियादी बातों ने निवेशकों के मन में यह विश्‍वास बैठा रखा है कि शेयर बाजार में तेजी की किरण जल्‍दी दिखाई देगी। हालांकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था अमरीका में नए राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के आने से पूर्व राष्‍ट्रपति रुजवेल्‍ट जैसे चमत्‍कार की उम्‍मीद की जा रही है। लेकिन ओबामा के लिए मंदी की चपेट में आई अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था को उबारने की कोई जादूई छड़ी नहीं है। लेकिन वे 1929 की महामंदी से उबारने के रुजवेल्‍ट के किए गए प्रयासों से कई पाठ सीख सकते हैं। यदि ओबामा अमरीका को मंदी से उबार ले जाते हैं तो वे इस सदी के महानायक बनकर उभर जाएंगे।<br /><br />अमरीका और यूरोप में बैंकिंग जगत को अपना अस्तित्‍व टिकाए रखना मुश्किल नजर आ रहा है। यहां पैदा हुई बैंकिंग जगत की मुश्किलों ने दुनिया के सभी देशों पर प्रतिकूल असर डाला है, हालांकि भारत में भारतीय रिजर्व बैंक की सख्‍ती ने बैंकिंग जगत को नुकसान होने से बचाया है जिसके लिए हमारे वित्तीय जगत को उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े कदमों की वजह से 31 दिसंबर 2008 को समाप्‍त तिमाही में सरकारी बैंकों और चुनिंदा निजी बैंकों ने शंका-कुशंकाओं को दरकिनार कर उम्‍दा वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, विजया बैंक, यूको बैंक, आईसीआईसीआई बैंक सहित अनेक बैंक विपरीत परिस्थितियों में अपने मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज करने में सफल रहे हैं।<br /><br />इससे उल्‍ट अमरीका में मेरिल लिंच का बैंक ऑफ अमरीका में विलय किया गया। सिटी बैंक को आर्थिक संकट से उबारने के लिए तगड़ा पैकेज दिया गया। अब खुद बैंक ऑफ अमरीका संकट में है, जिसे भारी भरकम वित्तीय पैकेज दिया जा रहा है तो सिटी बैंक का राष्‍ट्रीयकरण करने की नौबत आ गई है। ब्रिटेन में भी बार्कलेज बैंक के राष्‍ट्रीयकरण की स्थिति आ गई है। अमरीका और यूरोप को अब समझ में आ गया है कि बैंकिंग क्षेत्र में भारत की नीति कारगर रही है और वे उसी रास्‍ते पर बढ़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद भारत में भी बैंकिंग क्षेत्र में कंसोलिडेशन का दौर आ सकता है क्‍योंकि मार्च 2009 और जून 2009 के वित्तीय नतीजे इस क्षेत्र के बड़ी चुनौती होंगे।<br /><br />इस सप्‍ताह की शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक की ऋण एवं मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा के साथ होगी। रिजर्व बैंक 27 जनवरी ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। पिछले चार महीनों में बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 9 से घटाकर पांच फीसदी करने, रिवर्स रेपो दर को 6 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने के बाजवूद कार्पोरेट जगत का कहना है कि ब्‍याज दरों में अभी और कटौती होनी चाहिए। कल्‍पतरु मल्‍टीप्‍लायर के वाइस चैयरमेन आदित्‍य जैन का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी समीक्षा में रिवर्स रेपो-रेपो और सीआरआर में परिवर्तन करती है तो शेयर बाजार में हल्‍की सी रैली की संभावना बन सकती है। 9094 जो टेन डेज ओ लाइन है, को आसानी से तोड़कर लगातार 2-3 दिन ऊपर बंद होने से सेंसेक्‍स 9188-9261-9397 तक की दौड़ लगा सकता है।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 27 जनवरी से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 9111 अंक से 8244 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 2811 अंक से 2544 के बीच कारोबार करेगा। इस सप्‍ताह 29 जनवरी को डेरीवेटिव्‍ज सेंगमेंट में जनवरी एफ एंड ओ का निपटान होना है। अत: शेयर बाजारों में भारी उथल पुथल देखने को मिल सकती है।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि शेयर बाजार के मंदी की ओर बढ़ने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। 27 जनवरी से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में इसका रेसीसटेंस स्‍तर 8905-9178।9420 अंक होंगे। साप्‍ताहिक सपोर्ट 98400-7622 अंक पर देखने को मिलेगा। सेंसेक्‍स के लिए 8316 और 7697 अहम बॉटम होंगे। यदि इन स्‍तरों पर सेंसेक्‍स को सपोर्ट नहीं मिला तो यह तत्‍काल टूटकर 7100-7000 अंक आ जाएगा।<br /><br />आदित्‍य जैन का कहना है कि अभी निवेशक किसी प्रकार के लंबी-शार्ट अवधि के लिए निवेश न करें। डेली कारोबारी बाजार की दिशा के विपरीत न चले वरना स्थिति बिगड़ सकती है। ओवर नाइट कैरी न कर नफे नुकसान को उसी दिन सेटल करें, स्टॉप लॉस पद्धति का पालन सख्‍ती से करें। हमने देखा है कि जो जादूगर के मुट्ठी की रेत अभी सोना नहीं बन पाई है। निवेशक के मुनाफे की रेत धीरे धीरे हाथ से गिरकर मिट्टी में मिल गई और कैपिटल आधी रह गई है। बाजार में नया पैसा ब्‍याज से लेकर कतई न लगाएं वरना ब्‍याज का घोड़ा आपको रौंद डालेगा। निवेशक यह भी न भूले की सुरंग कितनी लंबी क्‍यों न हो दूसरे सिरे पर उजाला जरुर मिलेगा। <br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक फैडरल बैंक, सत्‍यम कंप्‍यूटर, एल एंड टी, एनटीपीसी, भारत बिजली, करुर वैश्‍य बैंक, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज और जिंदल फोटो पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-8111951916653698735?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-32162186025138058932008-12-29T17:00:00.002+05:302008-12-29T17:03:18.007+05:30अगले वर्ष निफ्टी 2333-4888 के बीच रहेगा<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SVi1L0dn8aI/AAAAAAAACFo/n1f_g6cw2Ck/s1600-h/moniters.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5285173377385361826" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 136px; CURSOR: hand; HEIGHT: 95px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SVi1L0dn8aI/AAAAAAAACFo/n1f_g6cw2Ck/s200/moniters.jpg" border="0" /></a> वर्ष 2008 अमरीका में सब प्राइम, मार्गेज संकट में खरबों डॉलर की एसेटस की धुलाई, अमरीकी वित्तीय प्रणाली के आधार स्‍तंभ सिटी ग्रुप, मेरिल लिंच, मार्गन स्‍टेनली, एआईजी सहित अनेक संस्‍थाओं को हिलाकर रख देने एवं पश्चिमी देशों की वित्तीय प्रणाली खोखली साबित करने के साथ विदा ले रहा है। वर्ष 2008 में दुनिया भर के शेयर बाजारो ने अपना उच्‍च स्‍तर और निम्‍न स्‍तर तो देखा ही, वित्त एवं इक्विटी क्षेत्र के बड़े बड़े खिलाड़ी बाजार की चाल को जानने में नाकामयाब रहे। दुनिया भर में 1929 जैसी महामंदी होने के बावजूद भारत की वित्तीय प्रणाली जिसमें अभी भी काफी कुछ सरकारी नियंत्रण के तहत है, पर इसकी आंच कम आई।<br /><br />आर्थिक महामंदी को रोकने के लिए दुनिया के लगभग सभी देश जोरदार कोशिश कर रहे हैं। इस कोशिश के तहत उद्योगों, वित्त बाजारों को प्रोत्‍साहन एवं राहत देने के लिए स्‍टीम्‍युलस पैकेज घोषित किए जा रहे हैं लेकिन ये पैकेज असरकारक नहीं दिख रहे। अमरीका, ब्रिटेन, जापान सहित अनेक देशों में ब्‍याज दर शून्‍य के करीब आ गई है लेकिन अर्थव्‍यवस्‍थाएं पटरी पर आने का नाम ही नहीं ले रहीं। अब कार्पोरेट जगत ने अपनी विस्‍तार, विविधीकरण की विशाल योजनाओं को ठंडे बस्‍ते में डालना शुरु कर दिया है और अपने आप को इस महामंदी से बचाने में लग गया है। भारत सरकार भी अब अर्थव्‍यवस्‍था में जान फूंकने के लिए जल्‍दी ही दूसरा आर्थिक पैकेज घोषित करने जा रही है।<br /><br />इस वर्ष अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड 147 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा जिससे सभी कमोडिटी के दाम आसमान पर पहुंच गए लेकिन उपभोक्‍ताओं ने ही खरीद रोक दी जिससे क्रूड सहित सभी कमोडिटी को दाम आज जमीन पर हैं। उपभोक्‍ताओं ने बाजारों को यह कहावत याद दिलाई कि अति की गति नहीं होती।<br /><br />वर्ष 2007 के अंत तक बाजार विश्‍लेषक इंडिया ग्रोथ स्‍टोरी का राग अलाप रहे थे लेकिन वर्ष 2008 का भविष्‍य का भान उन्‍हें था ही नहीं। ग्रोथ स्‍टोरी की चमक में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने कोई 71486.50 करोड़ रुपए का भारत में निवेश किया लेकिन इन निवेशकों पर अपने देश में पड़े रिडम्‍पशन दबाव की वजह से अब तक वे भारत में 53 हजार करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। वर्ष 2008 की जनवरी में सेंसेक्‍स 21206 अंक पहुंच गया था जो इस साल अक्‍टूबर में नीचे में 7687 अंक आने के बाद अब दस हजार अंक के आसपास स्थिर होने के लिए संघर्ष कर रहा है।<br /><br />कार्पोरेट सेक्‍टर द्धारा एडवांस टैक्‍स के रुप में 43700 करोड़ रुपए अदा किए गए हैं जो 22 फीसदी कम है। कर की यह अदायगी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में कार्पोरेट सेक्‍टर के कामकाजी नतीजे अच्‍छे नहीं होंगे। 31 मार्च 2008 को समाप्‍त होने वाली तिमाही के नतीजे काफी निराशजनक आ सकते हैं। इस आशंका से जनवरी से मार्च तक अर्थव्‍यवस्‍था और बाजार में शंका और कुशंका का दौर बना रहेगा। जून 2009 के बाद ही शेयर बाजार में सुधार की गुंजाइश बन रही है, हालांकि बाजार ने बुरे कारणों को लगभग डिस्‍काउंट कर लिया है लेकिन भारत-पाक सीमा पर बढ़ा तनाव सेहत के लिए खराब है। युद्ध होने की स्थिति में कैसे कैसे हथियारों का उपयोग होगा इसके बारे में इस समय अनुमान लगाना कठिन है क्‍योंकि पाकिस्‍तान में फौज पर सरकार का नहीं बल्कि तालिबानियों का कब्‍जा लगता है। अमरीका और ब्रिटेन सहित अनेक देश इस आशंका को कई बार जता चुके हैं कि पाकिस्‍तान के परमाणु हथियार चरमपंथियों के हाथों के करीब हैं। दूसरा, युद्ध की तैयारी और युद्ध लड़ने की स्थिति में रक्षा पर भारी भरकम खर्च होगा जिसका अर्थव्‍यवस्‍था पर बड़ा दबाव दिखेगा जो बाजार के लिए बड़ा नकारात्‍मक कारक बनेगा, इसलिए जब तक सीमा पर मामला ठंडा नहीं होता और सब कुछ कुशलता से नहीं निपट जाता शेयर बाजार के बुरे दिन खत्‍म नहीं होंगे।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 29 दिसंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 9767 अंक से 8888 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 2979 अंक से 2727 के बीच कारोबार करेगा। अगले वर्ष यानी 2009 की बात की जाए तो बीएसई सेंसेक्‍स के 7111 से 14888 अंक और एनएसई निफ्टी के 2333 से 4888 अंक के बीच रहने की संभावना है।<br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स पिछले सप्‍ताह कुल 770 अंक गिरा। पिछले सप्‍ताह के रुझान को देखते हुए नए सप्‍ताह में इसका रेसीसटेंस स्‍तर 9599-9903-10209 अंक होंगे। साप्‍ताहिक सपोर्ट 9024-8316-8146 अंक पर देखने को मिलेगा। यदि सेंसेक्‍स 10209 अंक को पार कर बंद होता है तो इसमें एक बार फिर तेजी का रुझान देखने को मिलेगा। वे कहते हैं कि जब तक सेंसेक्‍स 10945 को पार नहीं करता निवेशकों को हर बढ़त पर अपनी पोजीशन खाली करते रहना चाहिए। आने वाले कुछ सप्‍ताह तक सेंसेक्‍स की चाल 10935-8316 के बीच रहेगी।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक यूनिकैम लैबोरेटरीज, सत्‍यम कंप्‍यूटर, पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, अल्‍सथाम प्रोजेक्‍टस, यस बैंक, इंडियन होटल्‍स, रिलायंस पेट्रोलियम, भारत बिजली, पेंटालून रिटेल, जयप्रकाश एसोसिएटस, भारती एयरटेल और बाटा इंडिया पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-3216218602513805893?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-60611732548805196482008-12-22T11:58:00.003+05:302008-12-22T12:11:46.614+05:30पैकेज की ऑक्‍सीजन से शेयर बाजार को उठाने की कोशिश<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SU82MypNkaI/AAAAAAAACFg/rX5ypzBAUZE/s1600-h/stock-6.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5282500481309839778" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 136px; CURSOR: hand; HEIGHT: 77px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SU82MypNkaI/AAAAAAAACFg/rX5ypzBAUZE/s200/stock-6.jpg" border="0" /></a> भारतीय शेयर बाजार पिछले साल इन्‍हीं दिनों भारी ऊफान पर थे और बीएसई सेंसेक्‍स के जल्‍दी ही 30 हजार, 35 हजार तक पहुंचने जाने की गर्मा गर्म चर्चाएं हर निवेशकों के बीच हो रही थी लेकिन इस साल बातें केवल यह हो रही है कि अब क्‍या लगता है। इस क्‍या लगता है के लिए अमरीका के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति बिडेन का कहना है कि देश की इकॉनमी पर पूरी तरह धराशायी होने का खतरा मंडरा रहा है। 'देश की इकॉनमी हमारी सोच से कहीं ज्यादा बुरी हालत में 600 से 700 अरब डॉलर के एक प्रोत्साहन पैकेज की जरुरत है। इकॉनमी को पूरी तरह धराशायी होने से बचाने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है। बिडेन के इस बयान को समझे तो शेयर बाजार के हालात जल्‍दी अच्‍छे होने के संकेत नहीं है।<br /><br />अमरीका और कई देशों में अर्थव्‍यवस्‍था को फिर से खड़ा करने के लिए वित्तीय पैकेज दिए जा रहे हैं। अलग अलग उद्योगों के लिए पैकेज दर पैकेज आ रहे हैं। भारत में भी अर्थव्‍यवस्‍था को खड़ा करने के लिए इसी कदम का अनुसरण किया जा रहा है। पहले 30700 करोड़ रुपए के पैकेज के बाद सरकारी बैंकों का सस्‍ता होम लोन पैकेज आया। अब निजी बैंक भी सस्‍ते होम लोन के पैकेज ला रहे हैं। योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया भी कह चुके हैं कि अगले साल और वित्तीय पैकेज की जरुरत पड़ेगी। भारतीय रिजर्व बैंक भी ब्‍याज दरों में और कटौती करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि राहत पैकेज दर राहत पैकेज बाजार के इंजन को कितनी ऊर्जा देते रहेंगे।<br /><br />विदेशी संस्‍थागत निवेशक चालू कैलेंडर वर्ष में अब तक 52700 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली कर चुके हैं। हालांकि, इन निवेशकों ने पिछले तीन साल में जितनी राशि निवेश की उसकी तुलना में यह बिकवाली काफी कम है। अमरीका, यूरोप और एशियाई देशों में जोरदार मंदी छाने से हर निवेशक का वित्तीय सिस्‍टम पर से भरोसा उठ गया है और यही वजह है कि शेयरों में आई घबराहट भरी बिकवाली से बैंकों और फंडों पर रिडम्‍पशन दबाव बढ़ गया जिससे अनेक वित्तीय संस्‍थाओं के दिवालिया होने की स्थिति आ गई। वर्ष 2008 में ही शेयर बाजार ने अर्श से फर्श तक का सफर कर लिया। सेंसेक्‍स 21 हजार के सफर से 27 अक्‍टूबर को 7679 के निचले स्‍तर पर पहुंचा। निवेशकों को निवेश के महामंत्र जानने का दावा करने वाले एसेट मैनजमेंट फंड और सिस्‍टेमेटिक इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (आईएसपी) के नाम पर दुकान चलाने वाले खुद साफ हो गए और महान ज्ञान का दावा करने वाले ये संस्‍थागत निवेशक आम निवेशकों का विश्‍वास खो बैठे।<br /><br />कमोडिटी बाजारों में तेजी होने पर शेयर बाजार में मंदी और शेयर बाजार में तेजी हो तब कमोडिटी बाजार में मंदी, क्रूड में तेजी होने पर कार्पोरेट सेक्‍टर पर बुरा असर, क्रूड के दाम नीचे आने पर कार्पोरेट जगत को फायदा लेकिन पिछले दो साल में यह समीकरण उल्‍टा हो गया। हेज फंडों और माफिया निवेशकों ने गत दो वर्ष में इतनी जोरदार उल्‍ट पुलट की कि इस दौरान तगड़ी तेजी और मंदी दोनों एक साथ देखने को मिली।<br /><br />अमरीका में ऑटो कंपनियों जनरल मोटर्स और क्रिसलर को 14 अरब डॉलर की मार्च 2009 तक ऑकसीजन मिल जाने, ऑटो कर्ज सस्‍ते होने, क्रूड के दाम घटकर 34 डॉलर प्रति बैरल आने की सकारात्‍मक चर्चा से निवेशक चांदी व सोने से बाहर निकलकर इक्विटी बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। यह आकर्षण कुछ समय रह भी सकता है लेकिन इस बीच भारतीय रक्षा मंत्री से सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों की मुलाकात हुई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस बैठक के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि पाकिस्‍तान पर आतंकवाद फैलाने के मामले में सैन्‍य कार्रवाई हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है। इसलिए निवेशकों को चाहिए कि वे काफी सचेत रहे और ऐसा न हो कि अल्‍पकाल में मुनाफा कमाने के लिए हाथों हाथ खरीद रहे शेयर हथगोले साबित हो जाए।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 22 दिसंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 10568 अंक से 9568 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 3222 अंक से 2922 के बीच कारोबार करेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स के लिए 10945 का स्‍तर अहम रेखा सीमा है। शेयर बाजार में पुलबैक रैली के अगले स्‍तर 10209-10945 होंगे। सेंसेक्‍स की परीक्षा 10945 के स्‍तर पर होगी और यह देखना होगा कि इस स्‍तर पर बाजार की प्रतिक्रिया कैसी होती है। अगले पुलबैक स्‍तर 13238-14757-16276 हैं। सेंसेक्‍स के 11 हजार के स्‍तर को पार कर लेने पर 13238 का स्‍तर देखने को मिल सकता है लेकिन इसके लिए सेंसेक्‍स का 8316 का स्‍तर नहीं टूटना चाहिए। कुल मिलाकर तेजडि़यों और मंदडियों के लिए 10945 का स्‍तर अहम है।<br />इस सप्‍ताह निवेशक नेस्‍ले इंडिया, इंडियन होटल्‍स, एचडीएफसी, टाटा कैमिकल्‍स, इंद्रप्रस्‍थ गैस, टाइटन इंडस्‍ट्रीज, 3 आई इंफोटेक, पीवीआर पर ध्‍यान दे सकते हैं।<br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-6061173254880519648?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-15104949240059397362008-12-08T05:47:00.002+05:302008-12-08T05:51:07.343+05:30शेयर बाजार में गर्मी लाने के प्रयास<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/STxn2XmOyFI/AAAAAAAACE4/ReQwokstTWM/s1600-h/stock.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5277207047116343378" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 114px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/STxn2XmOyFI/AAAAAAAACE4/ReQwokstTWM/s200/stock.jpg" border="0" /></a> वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद सहमे और कमजोर मानसिकता वाले शेयर बाजार में सरकार जान डालने के प्रयास में जुट गई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कमी की है ताकि सस्‍ते कर्ज उपलब्‍ध हो सके ताकि कार्पोरेट क्षेत्र और आम आदमी इसका लाभ उठा सके और सुस्‍त पड़ी अर्थव्‍यवस्‍था में जान आ सके। साथ ही केंद्र सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपए का एक खास पैकेज अर्थव्‍यवस्‍था के अलग अलग सेक्‍टरों के लिए घोषित किया है, जो शेयर बाजार सहित समूची अर्थव्‍यवस्‍था को गति देगा।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 8 दिसंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 9444 अंक से 8644 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 2844 अंक से 2589 के बीच कारोबार करेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स में पुलबैक अभी बना हुआ है, हालांकि, इसकी प्रकृति इस समय ढुलमुल है जो पुलबैक का ही एक हिस्‍सा होता है। सेंसेक्‍स को तत्‍काल 8649-8316 पर सपोर्ट मिलेगा। यदि सेंसेक्‍स 8316 अंक के नीचे बंद होता है तो इसकी परीक्षा 7697 अंक पर होगी और यहां से गिरने पर यह 6250-6150-6069 अंक तक जा सकता है। लेकिन यदि सेंसेक्‍स 9162-9435 के रेसीसटेंस से ऊपर बंद होता है तो 9721 अंक पर इसकी परीक्षा होगी। इस स्‍तर के पार करने पर यह 10945 अंक तक पहुंच सकता है।<br /><br />इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शॉर्ट टर्म लैंडिंग रेट यानी रेपो रेट एक फीसदी घटाकर 6।5 फीसदी कर दी है। यह वह दर है जिस पर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से ओवरनाइट के लिए कर्ज लेते हैं। रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंकों के लिए कर्ज लेना आसान हो जाएगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट को भी एक फीसदी घटाया है। अब यह दर पांच फीसदी होगी। यह वह दर है जिस पर बैंक अपने पास रखे अतिरिक्‍त नकद को रिजर्व बैंक के पास रखते हैं। हालांकि, बैंक ने सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है। नई दर आज 8 दिसंबर से लागू हो रही है। इसी तरह, अमरीका, चीन, यूरोपीय समुदाय, ब्रिटेन और न्‍यूजीलैंड सहित अनेक देश भी ब्‍याज दरें घटा चुके हैं ताकि औद्योगिक कारखानों को चालू रखा जा सके।<br /><br />अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड अपने 147 डॉलर प्रति बैरल के उच्‍च स्‍तर से गिरकर 40 डॉलर के करीब पहुंच चुका है जिससे सभी कमोडिटी के दाम नीचे आए हैं। इस तरह बाजार के लिए सकारात्‍मक खबरें आ रही हैं लेकिन घरेलू निवेशक आंतकी हमले से इतने डरे सहमे हुए हैं कि उनके विश्‍वास को जीतना कठिन हैं। देश धीरे धीरे लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है। दिल्‍ली में बैठी यूपीए सरकार के लिए अगला चुनाव जीतना काफी कठिन हो गया है। यही वजह है कि अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने के अलावा पाकिस्‍तान को आतंक के मुद्दे पर सबक सीखाना उसके लिए जरुरी होता जा रहा है।<br /><br />यूपीए सरकार यदि पाकिस्‍तान को पटखनी देती है तो उसके लिए अगला आम चुनाव जीतना काफी आसान हो जाएगा। लेकिन पाकिस्‍तान से युद्ध होने पर शेयर बाजार को खासा झटका लग सकता है और सेंसेक्‍स 7100 के स्‍तर तक जा सकता है। इस बीच, केंद्र सरकार ने मंदी से निपटने के लिए 20 हजार करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है। साथ ही सेनवैट में भी 4 फीसदी की कटौती की गई है। इस पैकेज से निर्यात, टेक्‍सटाइल, आवास और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर क्षेत्रों को खास फायदा होगा।<br /><br />भारतीय शेयर बाजार में अब विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की बिकवाली की धार कमजोर पड़ी है। इन निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से काफी नीचे भावों पर मिल रहे शेयरों में खरीद भी शुरु की है। इन निवेशकों ने अब अल्‍प अवधि के बजाय मध्‍यम से लंबी अवधि की निवेश रणनीति तय की है। इस समय ये निवेशक पावर, फार्मा, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और बैंक शेयरों में निवेश कर रहे हैं।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक फैडरल बैंक, कोलगेट पामोलिव, ब्रिटानिया इंडस्‍ट्रीज, ईआईडी पैरी, ट्रेंट, ताज जीवीके होटल्‍स, एनटीपीसी, सन टीवी नेटवर्क और क्‍युमिंस इंडिया पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-1510494924005939736?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-46874483570297048312008-12-02T09:42:00.002+05:302008-12-02T09:46:57.667+05:30सेंसेंक्‍स 7100 अंक आने की आशंका !<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/STS2Ex04bII/AAAAAAAACEg/ZDC7-dL2mxY/s1600-h/stock.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5275041256768564354" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 114px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/STS2Ex04bII/AAAAAAAACEg/ZDC7-dL2mxY/s200/stock.jpg" border="0" /></a> मुंबई में आतंकी हमले के बाद अब पाकिस्‍तान के खिलाफ युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है जिससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजारों में एक बार फिर नरमी बढ़ सकती है। अमरीकी अखबार न्‍यूयार्क टाइम्‍स ने खुलासा किया है कि भारत पाकिस्‍तान में चल रहे आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को खत्‍म करने की योजना बना रहा है और वह आंतकवाद पर पाकिस्‍तान के साथ निर्णायक लड़ाई लड़ने के मूड में है।<br />भारत यदि पाकिस्‍तान के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर युद्ध लड़ता है तो शेयर बाजार को मंदी का सामना करना पड़ेगा और मुंबई स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स 7100 अंक तक आ सकता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़े जाने वाले युद्ध की आशंका से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना और पैसा निकालने की तैयारी में हैं जिससे बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ सकता है। एक संभावना यह भी व्‍यक्‍त की जा रही है कि आतंकवाद से निपटने के लिए अमरीका, ब्रिटेन और भारत मिलकर पाकिस्‍तान से युद्ध कर सकते हैं। आर्थिक मंदी से जूझ रही दुनिया के लिए आतंकवाद एक बड़ा खतरा है और अब इससे निपटने का वक्‍त आ गया है। इस बीच अमरीका सहित अनेक देश अपनी अपनी अर्थव्‍यवस्‍थाओं को दुरुस्‍त करने के लिए वित्तीय पैकेज घोषित कर रहे हैं लेकिन बाजार के प्रति निवेशकों का विश्‍वास लौटाने में खासा समय लगेगा।<br /><br />भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली मुंबई में हुए ताजा आतंकी हमले के बाद बढ़ सकती है। चालू कैलेंडर वर्ष में ये निवेशक अब तक 54500 करोड़ रुपए से अधिक के शेयरों की बिकवाली कर चुके हैं। आतंक के बढ़ते साये में बिगड़ रही परिस्थितियों की वजह से यदि विदेशी निवेशकों अपना पैसा भारतीय बाजार से निकालते हैं तो रुपया और कमजोर पड़कर 55-57 के स्‍तर की ओर बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत की क्रेडिट रेटिंग में संभावित नेगेटिव परिवर्तन दलाल स्‍ट्रीट के लिए मुसीबत बढ़ा सकते हैं।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 1 दिसंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 9477 अंक से 8633 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 2888 अंक से 2744 के बीच कारोबार करेगा। चीन ने अपनी ब्‍याज दरों में हाल में कटौती की है और अब बाजार उम्‍मीद कर रहा है कि भारतीय रि‍जर्व बैंक भी जल्‍दी ही ब्‍याज दरों में कटौती कर सकता है। ब्‍याज दर में कटौती शेयर बाजार की मौजूदा पुलबैक रैली को आगे बढ़ा सकता है। विश्‍लेषकों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घरेलू विकास दर 7.6 फीसदी रही जो उम्‍मीद से बेहतर है लेकिन आगे रास्‍ता कठिन है जिसकी वजह से ब्‍याज दर में की जाने वाली कटौती अर्थव्‍यवस्‍था की सेहत के लिए बेहतर होगी।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स में पुलबैक अभी बना रहेगा। पिछले सप्‍ताह मुंबई में आतंकी हमले के बावजूद सेंसेक्‍स में कुल 177 अंक की बढ़त रही। वे कहते हैं कि 6 यदि 8316 से नीचे नहीं जाता है तो पुल बैक 9195-9448-9721 तक रहेगा जो आगे बढ़कर 10300-11000 अंक तक जा सकता है। लेकिन सेंसेक्‍स 8316 से नीचे चला जाता है तो यह 7697-6260-6150 और इसके बाद 4227 तक जा सकता है। इसके सपोर्ट स्‍तर 8342-8316-7697 और 7222 हैं। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 9385-9461 पर देखने को मिलेगा।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया, हिंडाल्‍को इंडस्‍ट्रीज, इंडियन होटल, इक्रा, एशियन पेंट्स, अदानी एंटरप्राइजेज और हिंदुस्‍तान यूनिलीवर पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-4687448357029704831?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-45137115209335543552008-11-25T16:21:00.002+05:302008-11-25T16:23:16.269+05:30नौकरी खोने वालों के लिए दस सुझाव<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSvY3tozVsI/AAAAAAAACEY/xeoitFuS11k/s1600-h/joblost.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5272546240422434498" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 99px; CURSOR: hand; HEIGHT: 124px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSvY3tozVsI/AAAAAAAACEY/xeoitFuS11k/s200/joblost.jpg" border="0" /></a> नौकरी का एकाएक चले जाना एक भयानक सपने की तरह होता है। एकदम से किंकर्तव्यविमूढता की स्थिति और ढेर सारा तनाव। अनिश्चित भविष्य के प्रति ढे़र सारी चिन्ताओं का बोझ और उदासियां। ऐसे में आशा की किरण खोजना काफी धैर्य और संयम का काम होता है, लेकिन यही एक रास्ता है जो हालिया मुसीबतों से किसी को भी निकालकर आगे ले जाता है। ऐसे में अपना संयम खोने वाले उन संभावनाओं को भी खो देते हैं, जो ऐसे वक्त में बेहतर अवसरों की तरह उनके पक्ष में कार्य कर सकती हैं।<br /><br />1. सबसे पहले तो शांत और स्थिर चित्त के साथ तर्क पूर्ण तरीके से अपनी विचारशक्ति को बरकरार रखने की जरूरत होती है। लगता भले ही हो, लेकिन किसी के साथ एकाएक ऐसी घटना होते ही, बाकी सारी चीजें भी एकाएक नकारात्मक तरीके से बदल नहीं गई होती हैं। जरूरी है कि चीजों के बारे में अपने आशावादी नजरिए को बरकरार रखा जाए। आप मानें या नहीं, लेकिन लोगों में आपकी निराश भावनाओं को सूंघ लेने की गजब की शक्ति होती है और यदि आपका आत्मविश्वास और उत्साह अपनी जगह पर कायम है, तो इसका अच्छा प्रभाव लोगों को आपके पक्ष में निर्णय करने को प्रेरित भी करता है।<br /><br />2. दूसरी बात है कि नौकरी से बाहर होते वक्त केवल मिलने वाले 'पैकेज' के चेकों पर ध्यान देना ही जरूरी नहीं, उन संभावनाओं पर भी पर्याप्त गौर किया जाना चाहिए, जो भावी कैरियर के लिए उपयुक्त रूप से लाभप्रद हो सकती हैं, जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम या अन्य तरह से आर्थिक सक्षमता दिलाने में सहायता करने वाले कार्यक्रम। अगर कंपनी आपको ऐसा कोई ऑफर देती है, तो उस पर पर्याप्त विचार करें।<br /><br />3. इस समय को एक अवसर की तरह देखिए। यह उस कैरियर विकल्प की खोज में भी सहायक हो सकता है, जिसको अभी तक आप 'आइडियल' रूप में सोचते रहे हों। जीवन विविध विकल्पों से भरा हुआ होता है इसमें अपने अनुकूल चुनने के लिए आप पेशेवर सलाहकार की पूरी मदद ले सकते हैं।<br /><br />4. अपने स्वास्थ्य को चुस्त-दुरूस्त रखें। इसके लिए आपने अपने तरीकों की जो दिनचर्या बना रखी थी, उसे नियमित रखें। यह आपको तनावमुक्त रखने में भरपूर मदद करेगा। आपको अपने खर्चों की जिन मदों में कटौती करनी पड़े, स्वास्थ्य संबंधी खर्चों का नंबर उनमें सबसे अंत में आना चाहिए।<br /><br />5. मदद हासिल करना सीखिए, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। सामुदायिकता की मददगार भावना से भरे लोग आपके आसपास हैं, जो कई बार आपके अभिमान के चलते आपके काम नहीं आ पाते। परिवार और मित्रों से बेहतर सम्पर्क कई बार आपकी उम्मीदों से कई गुना उम्‍दा परिणाम भी दे जाते हैं।<br /><br />6. लोगों को सुनिए, जो कई बार आपकी उन अच्छाइयों को भी आपके सम्मुख स्पष्ट कर देते हैं, जिनके प्रति आप सचेत नहीं होते। सलाहों का विश्लेषण आपको स्वयं ही अपने हालात के मुताबिक करना होता है, लेकिन इनको आने से रोकना नहीं चाहिए। अच्छे विचार, आश्चर्यजनक समाधान, कहीं भी, कभी भी, किसी के भी द्वारा आप तक आ सकते हैं, इसलिए रास्ते खुले रहने देना चाहिए।<br /><br />7. खुद को उदासियों के स्तर से बाहर आने में मदद दीजिए ताकि तार्किक तरीके से सोचा जा सके। लोगों की उन बातों को प्रोत्साहन मत दीजिए, जो नकारात्मक रवैया दर्शाती हों। लोगों की सतही टिप्पणियां, निराशाजनक सोच उसी तरह आपको प्रभावित करते हुए हताश कर सकती है, जिस तरह किसी प्रेरक व्यक्तित्व की बातें आपके भीतर उम्मीद जगा सकती हैं। इसलिए लोगों में यह फर्क समझने की कोशिश आपको ज्यादा से ज्यादा उन लोगों के सम्पर्क में लाएगी जो आपके लिए अच्छे साबित हो सकते हैं।<br /><br />8. अपने लक्ष्य और मानक निर्धारित करें कि आप अपनी अगली नौकरी या आर्थिक कार्य से कितनी दूर हैं, और फिर अपने बनाए नियमों का कड़ाई से पालन करें। कई जगह यदि वांछित अर्हताओं की तुलना में आपके स्तर में कुछ कमियां आड़े आती हैं, तो कई बार जरूरी से ज्यादा योग्यताएं भी बाधा बन जाती हैं। इसलिए, सही जगह पर क्लिक करने तक आपको इंतजार तो करना ही होगा, प्रयासों के साथ किया जाने वाला इंतजार।<br /><br />9. खर्चों पर नियंत्रण रखने की रणनीति पर अमल करने की आपकी मजबूरी को न समझते हुए, यदि आपके मित्र आपकी संगत में खुद को असहज महसूस करने लगें, तो इस मित्रता की समीक्षा करने की जरूरत है। सही मित्र वह है, जो आपकी पूरी परिस्थिति के प्रति एक संवेदनशील सोच रखता है और यदि आप तथाकथित 'स्टेट्स' के चलते, अपनी चादर से बाहर पैर निकालने का प्रयास करते हैं, तो वह आपको सचेत भी करता है।<br /><br />10. अपने विकल्पों के बारे में बात करते समय सकारात्मक भाषा प्रयोग करिए और दृढ रहिए। आर्थिक स्थिति के बारे में लगातार संदर्भों से बचें, जो नई नौकरी के रास्ते में बाधा उपस्थित करते हैं। यह नैतिक रूप से उत्तम है। अगर आप इन बातों का विश्वास करते हैं तो सही व्यक्ति तक आप जल्दी पहुंच सकेंगे।<br /><br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-4513711520933554355?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-40900241574516512532008-11-21T12:58:00.002+05:302008-11-21T13:03:42.218+05:30पांच तरीके एक सफल कार्यकारी जीवन के<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSZj90rf7hI/AAAAAAAACEI/amUejk865tQ/s1600-h/life.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5271010327648005650" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 101px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSZj90rf7hI/AAAAAAAACEI/amUejk865tQ/s200/life.jpg" border="0" /></a> फार्च्युन-500 कंपनियों को पिछले 14 सालों से सेवा प्रदान करने वाली एक प्रबंधन सलाहकार कंपनी की संस्थापिका और अध्यक्ष नैन्‍सी कोलासुर्डो ने अपनी पुस्तक 'गेट ए लाईफ दैट डज नॉट सक' में नए उद्यमियों के लिए कुछ बेहतरीन तरकीबों का उल्लेख किया है जो अच्छी तरह से जीवन जीने के बारे में और अपने कारोबार की सफलतापूर्वक शुरूआत करने के बारे में उपयोगी हो सकती हैं। उद्यमिता को विकसित और परिपुष्ट करने के लिए जरूरी इन पांच प्रमुख तत्वों के बारे में आप भी जानिए।<br /><br />1- <strong>चुनिए आप जो, जैसा चाहते हैं</strong>, इसे समझने के लिए इस पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। ऐसा करने से आप अच्छे चुनाव कर सकेंगे। यदि आपने कोई मनचाहा कारोबार शुरू करना तय कर लिया है, लेकिन पैसा आपके पास है नहीं और कुछ परेशान करने वाली उधारियां भी आप पर अभी बकाया हैं। ऐसे में, यह ध्यान केन्द्रीयकरण आपको पैसे की व्यवस्था के अन्य विकल्पों पर तार्किक रूप से सोचने में मदद देता है कि पैसा परिवार के लोगों से उधार ले लिया जाए या वे चीजें बेचकर जुटा लिया जाए, जिनकी जीवन में अति महत्त्वपूर्ण जरूरत नहीं। यह हमेशा चुनने का विषय होता है।<br /><br />2- <strong>अच्छे विचार उत्पन्न करें</strong> अधिकतर नए उद्यमी अपने नए कारोबार की गिरावट के प्रति तो सचेत रहते हैं, लेकिन वे स्वयं पर इतना सचेत फोकस नहीं रखते। सबसे सफल उद्यमी वे होते हैं, जो अच्छी चीजों पर फोकस करते हैं, उन संभावनाओं पर जो आगे हो सकती हैं। यह सोचने का तरीका ही है, जो आपको सफलता की ओर ले जाता है।<br /><br />3-<strong> शुरूआत</strong> नए उद्यमी ढेरों विचारों से ओत-प्रोत होते हैं, लेकिन जब तक वे उनको कार्यरूप में परिणत नहीं करते, तब तक कुछ भी घटित नहीं होता और परिस्थितियां ज्यों की त्यों बनी रहती हैं। परिस्थितियों की यथास्थिति, अपने उन विचारों के प्रति भी संदेह को जन्म देने लगती है, जो अमल में लाए जाने पर बेहतर परिणाम दिखा सकते थे। दूसरों की कंपनी में कार्य करने वाले उद्यमी अपना कार्य-व्यापार आरम्भ करने की सोचने पर सुरक्षात्मक कारणों से चिंतित होते हैं। लोग सोचते हैं कि वे उलझ जाएंगे और समस्याग्रस्त हो जायेंगे, लेकिन सच यह है कि जैसे ही आप कोई छोटी सी भी, अनूठी शुरूआत करते हैं, तो इसके साथ ही नई संभावनाओं के द्वार खुलने आरम्भ हो जाते हैं। इन संभावनाओं की आप पहले से ही भविष्यवाणी नहीं कर सकते, न ही आपके लिए कोई दूसरा इसे निश्चित करने वाली भविष्यवाणी कर सकता है। लेकिन अवसरों का सृजन इसी तरह से होता है। एक बार वांछित और अवांछित समस्याओं से परिचित हो जाने के बाद आप उनसे निबटते हुए, अपनी गति को बढा़ना सीख जाते हैं।<br /><br />शुरूआत छोटी तरह से ही हुआ करती है। यह एक फोन कॉल से भी हो सकती है, जब आप अपने गुरू से सम्पर्क करें या योजना को लागू करने से पहले अपने खाते में छोटी-छोटी धनराशियां इकट्ठा करना शुरू करें। कार्य का आरम्भ एक आश्चर्यजनक प्रस्थान-बिन्दु होता है। तमाम चीजों और विचारों के बीच चुनिये कि आपकी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? सभी चीजें एक दूसरे से संबंधित हैं, जिनके बीच समायोजन, शुरूआत के पीछे स्वयंमेव आता है।<br /><br />4- <strong>एक व्यवस्था निर्मित करें</strong> उद्यमियों के बारे में यह देखा गया है कि सामान्यतया प्रबंधन करते हुए वे अपने कार्य को अधिक सुचारू रूप से विकसित नहीं कर पाते। सही लेखे रखने के लिए और ग्राहकों से वादे पूरे करने के लिए उनको कुछ प्रणालियां अपनानी होती हैं। इसे वे खुद यदि नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसे लोगों को पकड़ना चाहिए जो कम महत्त्वपूर्ण होते हुए भी ऐसे गुणों से युक्त होते हैं, फिर चाहे वह उनका हेयर-स्टाइलिस्ट ही क्यों न हो। ऐसे लोगों की भी निससंकोच मदद ली जा सकती है।<br /><br />कार्य शुरू करते समय की जाने वाली सबसे बड़ी चूक में शुमार है वादों का पूरा न किया जाना। वादे- आपूर्तिकर्ताओं के प्रति, सहकर्मियों के प्रति, समुदाय में किसी के भी प्रति। अधिकतर उद्यमी अपने उत्पाद के प्रति, अपनी सेवा और उद्देश्यों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उस बुनियादी ढांचे के प्रति उतने अधिक सचेत नहीं होते, जो इसमें अप्रत्यक्ष रूप से मददगार होता है। बिना समवेत व्यवस्था के योजनाओं को लागू किया जाना, बालू पर बहुमंजिला भवन निर्मित करने की तरह है। वांछित सफलता के लिए इन बातों की गांठ बांध लेना बहुत आवश्यक है।<br /><br />5- <strong>कहिए वह जो आप चाहते हैं, करिये वह जो आप कहते हैं</strong> आपकी समवेत शक्ति आप में निहित है। आपकी प्रतिष्ठा से अधिक महत्त्वपूर्ण कुछ और चीजें भी होती हैं। ढेर सारे वादे करके उनकी कसौटी पर खरे न उतरना बुरी बात है। इस तरह चीजें स्वयमेव घटित होने लगती हैं और उन पर से आपका नियंत्रण खत्म होने लगता है। कार्य को विश्वसनीय और प्रशंसनीय तरीके से चलाने के लिए जरूरी है कि आप वही कहें, जो किया जाना सम्भव हो, और वह भी तय समय सीमा के अंदर और जो कहा है, उसे किए जाने का पूरा प्रयास करें।<br /><br />अधिकतर कारोबारों में शुरूआती स्तर पर पूर्व सम्पर्कों, रिश्तों का लाभ उठाया जाता है, जहां वादों की अति से बचना चाहिए। शुरूआती दौर अति उत्साह भरा होता है, जबकि ग्राहकों एवं अन्य व्यापारिक सहयोगियों को सभी मानकों पर पूर्ण संतुष्ट करने लायक योग्यता हासिल करने में वक्त लगता है।<br /><br />अपने सिस्टम को स्वयं व्यवस्थित करें। सफल कारोबारी, बेताबियों से बचते हैं और धैर्यपूर्वक वही वादे करते हैं, जिनको पूरी तरह निभाया जा सकता हो। चीजों से भावनात्मक लगाव न रखना अधिक हितकर होता है, जो आपको दुश्वारियों के समय संवेदनशील कार्यवाही के बजाय तार्किक फैसले करने को प्रेरित करता है। वांछित परिणाम की प्रत्याशा साकार करने के लिए आपको सर्वाधिक मदद अपनी करनी होगी। अच्छे विचार और अच्छे चयन के अभाव में आप अपने कार्य को ज्यादा देर तक, ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सकते। आपके विचारों तथा आप द्वारा नहीं की गई कार्यवाहियों के मध्य का अंतर ही जीवन को गिरावट की ओर ले जाता है। इस अंतर को कमतर करने के प्रयास किए जाने चाहिए, जिसमें यह बातें मददगार होंगी।<br /><div><br /><br /><div></div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-4090024157451651253?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-33941300908255336562008-11-18T13:41:00.000+05:302008-11-18T13:43:04.600+05:30जब जॉब खोना पड़े<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSJ4yuhwoxI/AAAAAAAACD4/8OgKhymseEE/s1600-h/job.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5269907326855324434" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 100px; CURSOR: hand; HEIGHT: 150px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SSJ4yuhwoxI/AAAAAAAACD4/8OgKhymseEE/s200/job.jpg" border="0" /></a> लगभग रोज ही विभिन्‍न कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों की तादाद घटाने के लिए तरह-तरह की कसरत करने की खबरें आ रही हैं। कहीं स्वैच्छिक (?) छुट्टी पर भेजा जा रहा है, कहीं आधे वेतन पर कुछ सालों के लिए समाजसेवा के लिए कार्मिकों को मुक्त किया जा रहा है, तो कहीं सीधे ही बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है कि निकलो भाई, हम आपका बोझ अब नहीं उठा सकते। लेकिन इसके बावजूद शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जिसकी जिंदगी में इस वजह से कोई बड़ा परिवर्तन न आए। अगर इस दौर में आप प्रभावित होने से बचे हैं, तो आप खुशकिस्मत हैं। लेकिन यदि प्रभावित हुए हैं, तो आपको कुछ तरीकों पर जरूर सोचना चाहिए, जिनको अपनाकर आप इस परिस्थिति से बाहर निकल सकते हैं और नए सिरे से मुस्करा सकते हैं।<br /><br />1- शांत बने रहें। चाहे यह अपेक्षित हो या नहीं, चाहे यह कैसे भी हुआ हो, आपको शांत बने रहने की जरूरत है। कुछ भी कदम उठाने से पहले उत्तेजित या तनावग्रस्त होने पर आप अनजाने ऐसा कुछ भी कर सकते हैं, जो आपको नहीं करना चाहिये। एमिली पोस्ट के निदेशक और 'एटिकेट:एडवांटेज इन बिजनेस' के लेखक पीटर पोस्ट कहते हैं-"आपको कंपनी से बाहर किया जाना आपके लिए खुशी की बात तो नहीं ही है, जबकि यह निर्णय आपका अपना नहीं हो। भले ही आपको बाहर किया जा रहा है, लेकिन इसे ध्यान में रखिये कि आपके बॉस और आपके सहकर्मियों से आप हमेशा के लिए विदा नहीं ले रहे हैं, संभवत: फिर उनसे सामना हो सकता है। अपनी भावनाओं को काबू में रखना बहुत ही अच्छी बात है" एक प्रबंधन सलाहकार कंपनी की उपाध्यक्ष बारबरा बारा के मुताबिक-"आपको हमेशा पेशेवराना तरीके से विदा लेनी चाहिए। आप चाहें या न चाहें, लेकिन जहां से आप बाहर जा रहे हैं, वह कंपनी सदैव आपके लिये एक सन्दर्भ का कार्य करेगी।"<br /><br />2- अपने पुराने एम्प्लॉयर का अधिकतम उपयोग करें। हो सकता है कि छोड़ी जा रही कंपनी आपको छोड़ने के एवज में पुनर्प्रशिक्षण या कार्मिक सहायता कार्यक्रम या अन्य किसी प्रकार के लाभ का प्रस्ताव दे रही हो, जिसे अपनाने से आपको आगे कैरियर में मदद मिल सकने के लिए आपको यह विकल्प खुला रखना चाहिए, उस हर चीज के साथ, जो आप कर सकते हैं। भले ही आपकी परिस्थिति तात्कालिक अस्थिरता का शिकार हो, लेकिन इसका असर आपकी असीमित संभावनाओं पर नहीं पड़ना चाहिए, जो आपके आगे बरकरार होती हैं। एक ब्लॉगर एवं मानव संसाधन सलाहकार आइरिन कोयलर के अनुसार- "यह आपको बाहर निकल जाने और तनावग्रस्त हो जाने के लिए प्रेरित करता है, मगर बाहर निकलने से पहले आप हर एक से सम्पर्क सूचनाएं और राय-मश्वरा जरूर प्राप्त कर लें।" किसी कंपनी से प्रस्थान करने की दशा में वहां के कार्मिकों, आपके अधिकारियों से आपका अन्तर्व्यवहार आपकी भावी योजनाओं को प्रभावित करता है, इसलिए उन लोगों के सामने समस्याएं कम आती हैं और समर्थन ज्यादा मिलते हैं, जो संबंधों को हर हाल में मधुर बनाए रखने में यकीन रखते हैं।<br /><br />3- पेशेवर सलाह प्राप्त करिए। एक सेवेरेंस समझौते पर हस्ताक्षर करने की दशा में पहले इसका भली-भांति अवलोकन अवश्य करें। कभी-कभी इस पैकेज में सौदेबाजी की संभावना होती है, खासकर तब, जब भारी मात्रा में छंटनी के बजाय एक-दो लोगों के साथ ऐसा किया जा रहा हो। समझौते को समुचित और वास्तविक लाभप्रद स्तर तक लाने के लिये अटार्नी की मदद ली जानी चाहिए। इसे सामान्यतया अटार्नी द्वारा ही तैयार किया जाता है और इससे मानव संसाधन विभाग जुड़ा होता है, जिसमें अधिकतम प्राप्त करने की प्रत्याशा में प्रयास किए जाने चाहिए।<br /><br />4- इसे अपने कैरियर के पुनरावलोकन के अवसर के रूप में देखिए। कार्य से बाहर किया जाना अच्छी चीज तो नहीं ही हो सकती, लेकिन यह आपको एक कदम पीछे जाकर यह देखने का आपको मौका भी देता है, कि क्या आपको कुछ अलग हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए? इससे आप अपनी योग्यताओं/क्षमताओं को नये तरह से प्रयोग कर सकते हैं, या उस तरह से भी, जैसे आपने पहले सोचा भी नहीं हो। खाली वक्त में स्वैच्छिक, स्वयंसेवी के तौर पर कार्य के अवसरों का उपयोग किए जाने में समझदारी है। यह आपकी योग्यताओं को तरोताजा रखता है और नए संपर्कों का लाभ उठाने के अवसर देता है। अपने अगले बेहतरीन विकल्प के बारे में सोचने का समय निकालें। देखिये कि क्या विकल्प मौजूद हैं और अन्य संगठनों के लिए आप किस तरह से क्या कर सकते हैं।<br /><br />5- अपनी वित्तीय स्थिति पर निगाह रखिए। अचानक कार्यमुक्ति आपकी आमदनी और वित्तीय स्थिति में बड़ा परिवर्तन लाती है। कंपनी छोड़ने के एवज में होने वाली सभी वित्तीय प्रापतियों को और अपनी बचतों का आगणन करें और देखें कि कितने वक्त के बाद आपको वास्तव में नौकरी करने की जरूरत पड़ेगी। वित्तीय स्थिति अधिक मजबूत होने की दशा में, 'एक अधिक बेहतर' नौकरी की तलाश में लगने वाले समय से आप समझौता कर सकते हैं। अधिक पैसे पास न होने की दशा में आपको अधिक सतर्कता से काम लेना होगा। सामूहिक योजनाओं का लाभ उठायें, जिनमें कम व्यय पर आपकी कई प्रकार की आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं।<br /><br />6- अपने सम्पर्कों के सम्पर्क में रहें। लोग बिना नौकरी की नई स्थिति में एकाएक आने के बाद अपने इष्ट-मित्रों, परिजनों से कतराना शुरू कर देते हैं। किसी और को ऐसी परिस्थिति में पाकर आप जिस तरह उसकी मदद करने को आतुर होते हैं, उसी ततरह दूसरे भी आपकी मदद कर सकते हैं, इसलिए सम्पर्क में रहना बेहतर है। सभी अनौपचारिक सम्पर्कों के अलावा औपचारिक सम्पर्क, जैसे सोशल नेटवर्किंग आदि भी नई नौकरी की खोज, या तनावमुक्ति में आपकी मदद कर सकते हैं। अपने सम्पर्कों का बुद्धिमत्तापूर्वक इस्तेमाल करें।<br /><br />7- सक्रिय बने रहिए और लोगों की पहुंच में रहें। एक नियमित कार्य के बिना चीजों के साथ तालमेल बिठाए रखना दुष्कर कार्य है। कई महीनों तक लगातार नौकरी की खोज हताशा और निराशा से भी सामना करा सकती है। अपनी बेहतरी के लिए, अपनी दिनचर्या को नियमित रखने का पूरा प्रयास करें, सक्रियतापूर्वक अपने मेलजोल को जारी रखते हुए नौकरी की तलाश करें। सब कुछ समाप्त नहीं हो गया है, ऐसी सोच के साथ अपनी जिंदगी से व्यक्तिगत आनंद और मनोरंजन के लम्हों से बिल्कुल बेगाने न हों। विपरीत परिस्थिति का सामना करके जब आप फिर से जिंदगी का संतुलन साधते हैं, तो यह आपको और अधिक मजबूत तथा योग्य बनाता हुआ आपके आत्मविश्वास और प्रतिभा को निखारने वाला होता है।<br /><br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-3394130090825533656?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-85728656575972632008-11-03T11:36:00.000+05:302008-11-03T11:37:17.559+05:30ड्रैगन भी मंदी की चपेट में<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQ6U3j6-nJI/AAAAAAAACDU/d5Fg8h8JhIM/s1600-h/dragon.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5264308696699018386" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 108px; CURSOR: hand; HEIGHT: 137px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQ6U3j6-nJI/AAAAAAAACDU/d5Fg8h8JhIM/s200/dragon.jpg" border="0" /></a> लो अब ड्रैगन भी मंदी की चपेट में आता जा रहा है। चीन की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था अब अपनी भविष्‍यवाणी के विपरीत ठंडी पड़ती जा रही है जिसने दुनिया के सामने यह चिंता पैदा कर दी है जो अर्थव्‍यवस्‍था उनकी मांग के आधार पर नैया पार लगा सकती थी वही अब उनके वित्तीय संकट को और बढ़ा देगी।<br /><br />चीन सरकार ने जो आंकडें पेश किए हैं उनके मुताबिक चीन की आर्थिक विकास दर वर्ष दर वर्ष तीसरी तिमाही में नौ फीसदी रही। यह दर अभी भी बढि़या दिख रही है लेकिन यह तेजी से घटती भी जा रही है। दूसरी तिमाही में विकास दर 10.1 फीसदी रही जो पहली तिमाही में 10.6 फीसदी थी। चीन की आर्थिक विकास दर वर्ष 2002 के बाद पहली बार दस फीसदी से नीचे रहने की संभावना है। अनेक अर्थशास्‍त्री तो चीनी सरकार के इस विकास दर को तेज करने के अनेक कदम उठाने के बावजूद अगले साल आठ फीसदी से कम रहने की आशंका जता रहे है।<br /><br />अमरीका और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्‍ताओं की मांग तेजी से घटने की वजह से निर्यात को झटके लग रहे हैं। इससे चीन के प्रॉपर्टी बाजार की भी हालत कमजोर हो रही है। बीजिंग सहित दूसरे कई शहरों में ढ़ेरों इमारतों को आज भी अपने खरीददारों का इंतजार है। पीटरसन इंस्‍टीटयूट ऑफ इंटरनेशनल इकॉनामिक्‍स के वरिष्‍ठ फैलो निकोल्‍स लॉर्डी का कहना है कि यद्यपि चीन की वित्तीय प्रणाली साख संकट से अभी बची हुई है लेकिन पर्याप्‍त विकास के लिए उठाए जा रहे कदम गलत दिशा में उठ रहे हैं।<br /><br />चीन में सितंबर से लेकर अब तक ब्‍याज दरों में दो बार कटौती हो चुकी है। महंगाई दर भी फरवरी के 8.7 फीसदी से कम होकर सितंबर में 4.6 फीसदी रही लेकिन ड्रैगन पर पड़ रही मंदी की छाया धीरे धीरे बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि वहां की सरकार ने अब लचीली और दूरदर्शी आर्थिक नीतियों का वादा किया है जबकि पहले वह स्थिर और तेजी से विकास करने वाली अर्थव्‍यवस्‍था की हामीदार थी। चीन सरकार ने कपड़ा और श्रम-रियायत आधारित उत्‍पादों के लिए कर छूट में बढ़ोतरी करने, छोटे कारोबारियों को बैंक कर्ज अधिक देने, हाउसिंग सौदों पर कर घटाने और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर निर्माण को गति देने का वादा किया है।<br /><br />हालांकि, इस समय चीन में उपभोक्‍ता खर्च का हिसाब किताब बेहतर है। खुदरा क्षेत्र में सितंबर में रिटेल बिक्री बढ़कर 17.9 फीसदी पहुंच गई जो इस साल की शुरुआत में 13 से 14 फीसदी थी। लेकिन मई से वहां कार की बिक्री, दहाई अंक की विकास दर और हवाई यात्राओं में हर महीने कमी आती दिख रही है। होम फर्निशिंग और एप्‍लायंसेस की बिक्री घटती जा रही है। अर्थशास्‍त्री इस बात की साफ शंका जता रहे हैं कि वहां असल उपभोक्‍ताओं की स्थिति सुर्खीयों में चमकाए जा रहे उपभोक्‍ताओं से अलग है।<br /><br />चीन के बाजार में जर्मन मशीन टूल निर्माता और जापानी कंसट्रक्‍शन उपकरण निर्माता जो अब तक मौज कर रहे थे, मंदी की ठंडक से परेशान हो उठे हैं। चीन में जर्मनी की वस्‍तुओं का आयात 2.5 फीसदी घटा है। दक्षिण कोरिया से चीन को होने वाला निर्यात भी सितंबर में 15.5 फीसदी रहा जो अगस्‍त में 20.7 फीसदी और जुलाई में 30.4 फीसदी था। चीन में यही हाल जापानी कंपनियों का है। चीन सरकार मानती है कि वैश्विक वित्त संकट ने अनेक देशो के निवेशकों और उपभोक्‍ताओं के विश्‍वास को हिला दिया है और चीन इससे अपवाद नहीं है। हालांकि, दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था में अभी भी चीन का अहम स्‍थान है और उसके अकेले के दम पर काफी कुछ निर्भर करता है।<br /><br />समूची दुनिया में प्रति व्‍यक्ति आय के मामले में चीन का स्‍थान 100वां है। जबकि बाजार विनिमय दर के आधार पर इसका योगदान छठे स्‍थान पर है। खरीद शक्ति पैरीटी के आधार पर चीन दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था का दसवां हिस्‍सा खपत करता है, जो काफी अहम है। चीन विकास के रास्‍ते पर है लेकिन उसकी अपनी घरेलू मांग उतनी अधिक नहीं है जितनी आबादी के हिसाब से होनी चाहिए थी। चीन के 1.3 अरब लोगों का सामूहिक खर्चा पिछले साल 1.2 खरब डॉलर रहा, जबकि अमरीका के 30 करोड़ लोगों ने 9.7 खरब डॉलर खर्च किए।<br /><br />चीन में लोगों का खर्चा हाउसिंग क्षेत्र में बढ़ा है जिसकी वजह से सीमेंट और स्‍टील का आयात तेजी से बढ़ा। लेकिन पिछले साल वहां हाउसिंग के दाम तेजी से बढ़ने की वजह से सरकार चिंतित हो उठी और उसने बैंकों से दूसरे आवास के लिए दिए जाने वाले कर्ज के नियम कड़े करने को कहा। इस कदम से इस साल चीन के अनेक शहरों में हाउसिंग के दाम या तो स्थिर हैं अथवा गिर गए हैं। चीन के अनेक बिल्‍डर मानते हैं कि आने वाले दिनों में दाम और गिरेंगे जिसकी वजह से खरीददार भी इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं। अर्थशास्‍त्री यह मानते हैं कि चीन की सरकार विकास की गर्मी को बनाए रखने के पूरे प्रयास कर रही है लेकिन वैश्विकरण के दौर में आई इस मंदी की ठंडक से कोई देश नहीं बच सकता।<br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-8572865657597263?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-70468249946940034242008-11-03T11:31:00.003+05:302008-11-03T11:33:02.316+05:30निवेशक लौटने लगे दलाल स्‍ट्रीट में<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQ6T0YkIdqI/AAAAAAAACDM/ZKIe5d1avQw/s1600-h/stockmarket.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5264307542599169698" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 93px; CURSOR: hand; HEIGHT: 96px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQ6T0YkIdqI/AAAAAAAACDM/ZKIe5d1avQw/s200/stockmarket.jpg" border="0" /></a> दलाल स्‍ट्रीट में यह दिवाली वाकई जगमग दिवाली रही और मायूस निवेशकों के चेहरों पर फिर से रौनक लौटने लगी। बीएसई सेंसेक्‍स के पिछले सप्‍ताह 9700 अंक पार करने के साथ एक बार फिर निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जाने लगा है कि चलो दलाल स्‍ट्रीट। लेकिन कुछ इक्विटी विश्‍लेषक इस गर्मी को रीलिफ रैली मानते हैं। यानी इस तेजी के टिकाऊ होने के आसार नहीं हैं।<br /><br />एक फंड प्रबंधक का कहना है कि दलाल स्‍ट्रीट में पिछले सप्‍ताह आई तेजी में घटी महंगाई दर की अहम भूमिका रही। दुनिया भर में खासकर अमरीकी वित्तीय बाजार में आया संकट अभी दूर होने के आसार नहीं हैं। साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी बड़े सुधार के आसार कम हैं। इस बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुख्य दरों में कटौती करके एक बार फिर चौंकाया है। रिजर्व बैंक ने शनिवार दोपहर अचानक सीआरआर और एसएलआर में एक फ़ीसदी और रेपो रेट में 0.5 फीसदी की कटौती कर दी। कटौती के बाद सीआरआर अब 5.5 फीसदी रेपो दर 7.5 फीसदी और एसएलआर 24 फीसदी हो गई है। एक अनुमान के मुताबिक इस कटौती से सिस्टम में करीब 85 हजार करोड़ रुपए आएंगे। नकदी की समस्या से जूझ रहे बैंकिंग सिस्टम को इससे निश्चित तौर पर राहत मिलेगी।<br /><br />सरकार और रिजर्व बैंक द्धारा उठाए जा रहे कुछ कदमों से शेयर बाजार के खिलाडि़यों की राय में बीएसई सेंसेक्‍स निकट भविष्‍य में 11 हजार अंक के करीब पहुंच सकता है लेकिन इस स्‍तर पर भारी मुनाफा वसूली के पक्‍के आसार हैं जिससे सेंसेक्‍स एक बार फिर काफी नीचे आ सकता है। असल में किसी को भी अब यह भरोसा नहीं हैं कि मौजूदा गर्माहट टिकेगी। यही वजह है कि निवेशक इस समय दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंककर पीता है, कि स्थिति में हैं। अधिकतर निवेशक अपनी पोजीशन आगे ले जाने के बजाय कारोबार बंद होते होते काटना ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 03 नवंबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 10473 अंक से 9111 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 33088 अंक से 2683 के बीच कारोबार करेगा।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स बड़ी तेजी से अपने निचले स्‍तर 7697 से रिकवर हुआ है जो यह बताता है कि सेंसेक्‍स आईसीयू से बाहर आया है लेकिन यह देखना होगा कि पुलबैक रैली कितनी बड़ी होती है क्‍योंकि कहीं ऐसा न हो कि इसके तेजी से बढ़ने से पहले इसकी हवा निकल जाए। वे कहते हैं कि साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 10539-10750 है और साप्‍ताहिक सपोर्ट 9118-8366-7697 पर दिखाई देगा। वासुदेव पुलबैक स्‍तर 10532-11395-12284 अंक का मानते हैं।<br /><br />शेयर बाजार के मौजूदा निचले स्‍तर पर अब एचएनआई और रिटेल निवेशकों ने फिर से शेयर खरीदने की हिम्‍मत दिखाना शुरु किया है। यह संख्‍या बड़ी नहीं है लेकिन काफी निवेशक मानते हैं कि इस समय शेयरों के भाव अपने सही प्राइस पर हैं और कई टुकड़ों में शेयरों की खरीद की जा सकती है। नीचे भावों पर खरीद और ऊपरी भावों पर बिकवाली......शेयर बाजार के इस सामान्‍य सिद्धांत को जानता तो हर कोई है लेकिन साहस करने वालों की संख्‍या कम होती है। दुनिया के विख्‍यात निवेशक वारेन बफेट के अनुयायियों के लिए तो यह समय शेयरों की खरीद और लंबे समय के लिए निवेश का है।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक अरेवा टी एंड डी, हिंडाल्‍को, मैक्‍स इंडिया, आईओएन एक्‍सचेंज, पुंज लायड, टिस्‍को, वोल्‍टास, गेल, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज, इंडियन बैंक और टीटागढ़ वैगन पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-7046824994694003424?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-2175084147835493922008-10-30T08:27:00.001+05:302008-10-30T08:34:35.624+05:30तमाशा शार्ट सेलिंग का: हेज फंडों को करारी मात<a href="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQkjSnjig9I/AAAAAAAACC8/fT_bEtTFj-s/s1600-h/vwporsche_1016852c.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5262776442321798098" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 125px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQkjSnjig9I/AAAAAAAACC8/fT_bEtTFj-s/s200/vwporsche_1016852c.jpg" border="0" /></a> लंदन के अति समझदार हेज फंडों को जिस तरह उनकी बेतहाशा समझदारी के चलते, जर्मन कार कंपनी पोर्श ने 20 अरब डॉलर की करारी चोट दी है, उसकी वजह से हेज फंडों में मचे रोने-पीटने को सांत्वना देने का जिगर किसी में नहीं बचा है।<br /><br />अधिकांश जर्मन इसे 'लालची' हेज फंडों पर जर्मन कार उद्योग की शानदार जीत के तौर पर महसूस कर रहे हैं जिनमें ज्यादातर पोर्श के ग्राहक हैं। हेज फंडों ने यह भारी रकम उस बाजार रणनीति की वजह से गंवाई, जिसे अभी तक बाजार में चांदी काटने का शानदार अल्पकालिक (शार्ट टर्म) तरीका समझा जाता रहा और जिसकी वजह से तमाम हेज फंडों को दुनिया भर में विद्रोही कमाऊ सपूतों की चमकदार छवि मिली। अब हाल यह है कि उनमें से अधिकांश को अपनी जान के लाले पड़ गए हैं। लीमैन ब्रदर्स के पतन और इसके बाद मचे विश्वव्यापी विकराल आर्थिक संकट की वजह से दुनिया भर की अनेक नामी-गिरामी वित्तीय संस्थाओं के लिए यह चोट, ताबूत की आखिरी कील की तरह है। लेकिन इस मसले को लेकर हेज फंडों के साथ सहानुभूति उनके अपने परिवार के सिवा और किसी की हो ही नहीं सकती।<br /><br />अगर कार बनाने वाली नामी कंपनी पोर्श ने इसमें केंद्रीय भूमिका निभाई, जैसा कि उस पर आरोपों की झड़ी लगाई जा रही है, तो सम्भवत: यह बाजार से छेड़छाड़ का इसके भयंकर दुष्परिणामों समेत पहला सबसे बड़ा मामला माना जाएगा। हालांकि पोर्श ने इसे पूर्णतया कानूनी करार देते हुए इसमें कुछ भी गलत नहीं बताया है। जर्मन नियामक 'बाफिन' का मानना है कि अगर आंतरिक गड़बड़ी का कोई मामला पाया जाता है तो पूरे मामले की जांच कराई जा सकती है (हालांकि अभी तक जांच संबंधी कोई कार्यवाही किए जाने के संकेत नहीं हैं।) लेकिन बाफिन पोर्श के द्वारा कुछ भी गलत नहीं किए गए होने के दृष्टिकोण को स्वीकार कर रहा है। दूसरे शब्दों में, यह मामला ऐसा है कि इसमें पीड़ित हेज फंडों की करतूतों की समीक्षा की जानी चाहिए।<br /><br />असल में सारा मामला जर्मनी की एक अन्य नामी कार कंपनी वॉक्सवैगन में हेज फंडों द्वारा शार्ट पोजीशन लिए जाने से शुरू हुआ था जबकि विश्वव्यापी मंदी के दौर में जर्मन कार कंपनियों के शेयर भी ओवरवैल्यूड देखे जा रहे थे और जिनका गिरना तय माना जा रहा था। अमेरिका में कार कंपनियों के शेयरों का भट्ठा बैठने के साथ दुनिया भर के मोटर निर्माता संकट में थे और पोर्श, अपनी मुख्य प्रतिद्वंदी, वॉक्सवैगन में अपनी हिस्सेदारी बढा़कर 50 फीसदी करने की इच्छा पहले ही जाहिर कर चुकी थी। ऐसे में वॉक्सवैगन के सामान्य शेयरों की बाजार में कमी करके हेज फंडों को अपनी विजय सुनिश्चित नजर आ रही थी। लेकिन डेरिवेटिव सौदों और ऑप्शन आदि के जरिए जिस तरह से पोर्श ने अपनी हिस्सेदारी गोपनीय रूप से तकरीबन 75 फीसदी कर ली, (जिसके कि 42.6 फीसदी के होने का अनुमान था) वही हेज फंडों के लिए प्राणघाती हो गया। 20 फीसदी की सरकारी हिस्सेदारी के बाद बाजार में वॉक्सवैगन के शेयरों का अकाल पड़ गया।<br /><br />वॉक्सवैगन के शेयर गिरने की आशा में जर्मनी के पेंशन फंडों से शेयर उधार लेकर पोजीशन ले बैठे हेज फंडों पर गाज गिराते हुए, वॉक्सवैगन का शेयर राकेट की गति से बाजार में चढा़ और बाजार पूंजीकरण के मामले में एकाएक ही वॉक्सवैगन को संसार की सबसे बड़ी कंपनी बनाते हुए, जर्मनी के मुख्य सूचकांक डॉक्स' में शामिल हो गया। शुक्रवार को 210 पर बंद हुआ यह शेयर अगले कारोबारी दिन में 1005 का स्तर छूने के बाद 945 पर बंद हुआ। बाजार में केवल 6 फीसदी शेयर ही कारोबार के लिए उपलब्ध होने की वजह से यह जोरदार गर्मी आई। इस तरह हेज फंडों को किसी एक अकेली कंपनी के शेयरों में होने वाले सबसे बड़े घाटे का अलार्म बज गया।<br /><br />इस साल की दूसरी छमाही में कुल 500 अरब का घाटा हेज फंडों को उनके द्वारा शार्ट सेलिंग पर भरोसा किए जाने के कारण होने का अनुमान मार्गन स्टेनले के विशेषज्ञों ने लगाया है। पिछले सप्ताह 50 फीसदी नीचे आए वॉक्सवैगन के शेयर के बारे में ज्यादातर लोगों के साथ जिस दौरान हेज फंड भी इस शेयर के जल्दी ही ध्वस्त होने के कयास लगा रहे थे, उसी दौरान पोर्श गुपचुप इसमें अपनी हिस्सेदारी मजबूत करते हुए करीब तीन चौथाई कर रही थी।(जबकि पिछले मार्च में इसने वॉक्सवैगन में अपना नियंत्रण 50 फीसदी से बढा़ने की बात को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वॉक्सवैगन के शेयरहोल्डरों के ढांचे को देखते हुए, इसमें 75 फीसदी का नियंत्रण हासिल करने की संभावना न के बराबर है।) मौजूदा हालात में, कुल कार्यक्रम में सबसे बड़े फायदे में पोर्श रही है, जो अपने खिलाफ सभी आरोपों को हवा में उड़ा रही है।<br /><br />आरोपों-प्रत्यारोपों का यह दौर लंबा चले या न चले, कई हेज फंडों को यह करारी चोट दिवालियेपन के कगार पर ला चुकी है। एक नजर शार्ट-सेलिंग के पहलूओं पर डालें कि शार्ट सेलिंग क्या है? दांव या असफलता?<br />-एक निवेशक शेयर या अन्य परिसम्पत्तियों को धारक से उधार लेता है।<br />-ये शेयर बाजार में इस उम्मीद में बेच दिए जाते हैं कि बाजार आगे और गिरेगा।<br />-शेयरों को वापस गिरी कीमतों पर खरीदने का लक्ष्य रखा जाता है। ऐसा करके उधार लिए गए शेयर मूल धारक को वापस लौटा दिए जाते हैं।<br />-अगर ट्रेडरों की बड़ी तादाद शेयरों की एक साथ शार्ट सेलिंग करती है, तो शेयर की कीमत गिरना तय होता है।<br />-एक ओवर-वैल्यूड शेयर के भाव को वाजिब कीमतों पर लाने में शार्ट-सेलिंग की अहम भूमिका होती है।<br /><br /><br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-217508414783549392?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-79408984095369167412008-10-29T13:37:00.001+05:302008-10-29T13:40:22.378+05:30दिवाली से दिवाली तक सेंसेक्‍स<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQgZs7rvRmI/AAAAAAAACCs/yFzquwpfmS8/s1600-h/diwali.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5262484424308508258" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 130px; CURSOR: hand; HEIGHT: 125px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQgZs7rvRmI/AAAAAAAACCs/yFzquwpfmS8/s200/diwali.jpg" border="0" /></a> देश भर में दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्‍या लौटने की खुशी में दिवाली का पर्व मनाया जाता है। साथ ही धन की देवी लक्ष्‍मी की खास कृपा पाने के लिए आज उनकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन शेयर बाजार के निवेशक काफी निराश है। उनके लिए दिवाली का पर्व खुशी की जगह मातम का पर्व बन गया है। जहां पिछली दिवाली पर बीएसई सेंसेक्‍स 20 हजार अंक के आसपास था, वहीं इस दिवाली पर यह 8500 अंक पर है।<br /><br />दुनिया की आर्थिक नीति तय करने वाले देश अमरीका के वित्तीय संकट में फंसने से पिछले दस महीनों में दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है और अब इस मंदी को वर्ष 1929 की महामंदी के समान बताया जा रहा है। यह मंदी कहां जाकर ठहरेगी कोई नहीं जानता क्‍योंकि कई देशों की आर्थिक स्थिति तो इतनी डगमगा गई है कि वे दिवालिया होने के कगार पर खड़े हैं। समूचे देश इसके लिए जोरदार प्रयास कर रहे हैं कि यह मंदी महामंदी साबित न हो और जल्‍दी से जल्‍दी बेहतर आर्थिक उपायों से इस पर नियंत्रण पाया जा सके। मौजूदा मंदी का सीधा असर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के बैरोमीटर शेयर बाजार पर भी पड़ा है जिसमें पिछले दस महीनों में निवेशकों के करोड़ों रुपए स्‍वाहा हो गए हैं। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स आईसीयू में है। वे कहते हैं कि 31 अक्‍टूबर 2008 को समाप्‍त होने वाले सप्‍ताह में साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 9339-10111 और 10820 रहेगा। जबकि, साप्‍ताहिक निम्‍न स्‍तर 7928-6250-6150 रहेंगे।<br /><br />बीएसई सेंसेक्‍स के इतिहास की बात करें तो इसने वर्ष 1992 में 4546 अंक और वर्ष 2000 में 6150 का ऊपरी स्‍तर बनाया था। वर्ष 1992 में बना 4546 का ऊपरी स्‍तर वर्ष 1993 में गिरकर 1980 अंक के स्‍तर पर आ गया था, जो तकरीबन 56।34 फीसदी की गिरावट दिखाता है। इसी तरह वर्ष 2000 में 6150 की ऊचाई से सेंसेक्‍स 2594 अंक आ पड़ा। यानी 57.43 फीसदी की कमी। सेंसेक्‍स को 4546 अंक से 1980 तक आने में 12 महीने लगे जबकि 6150 से 2594 आने में 19 महीनों का समय लगा। इसके बाद वर्ष 2003 तक यानी कुल 38 महीनों तक करेक्‍शन का ही दौर रहा। बीएसई सेंसेक्‍स ने अपनी पिछली ऊंचाई 21206 को छूआ और पिछले सप्‍ताह 8587 अंक यानी 59.51 फीसदी की धुलाई में नौ महीनों का समय लगा। यह धुलाई भाव और समय दोनों ही ढंग से ज्‍यादा तेज रही।<br /><br />पिछली दिवाली पर 9 नवंबर 2007 को बीएसई सेंसेक्‍स 18907 अंक था जो इस दिवाली पर 8500 अंक के करीब आ गया है। दुनिया भर के शेयर बाजारों की अगली चाल इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि अमरीका में अगला राष्‍ट्रपति कौन बनता है और वह अपने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने के लिए किस तरह के कदम उठाता है। इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर भी यही स्थिति होगी। अब लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बनेंगे, बिगड़ेंगे। अगले आम चुनाव के बाद यदि तीसरा मोर्चा सत्ता में आता है तो शेयर बाजार के लिए घातक होगा लेकिन भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक दल की सरकार बनती है तो शेयर बाजार में तेजी का दौर शुरु हो जाएगा।<br />इस दिवाली से अगली दिवाली के बीच बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्‍स 6100 से 12900 के बीच घूमता रहेगा। जबकि, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 1800 से 3800 के बीच रहेगा।<br /><br />शेयर बाजार में बड़ी रिकवरी पर बिकवाली दबाव का जोर रहेगा जिससे लगातार तेजी की उम्‍मीद न करें। निवेशकों में पैदा हुए भय से समूचा माहौल मंदी का बन गया है। लेकिन निवेशकों को चाहिए कि वे खुद होमवर्क करें और देखें कि अब मंदी कहां तक बढ़ सकती है। बाजार में तेजी के समय और तेजी एवं मंदी के समय और मंदी का राग अलाप अलाप कर निवेशकों को गलत रास्‍ते पर दौडने वालों की कमी नहीं है। इसलिए अपना होमवर्क करना जरुरी हे क्‍यों‍कि शेयर बजार में आपका पैसा लगेगा ना कि तेजी-मंदी का ढोल पीटने वालों का। अपना निवेश अब हर गिरावट पर 20-20 फीसदी के टुकड़ों में करते रहे और बेहतर फंडामेंटल एवं प्रबंधन वाली कंपनियों के शेयरों को खरीदते रहे। यह निवेश का एक बेहतर मौका साबित होगा।<br /><br />इस दिवाली से अगली दिवाली तक के लिए निवेशक पेट्रोनेट एलएनजी, एनटीपीसी, एलआईसी हाउसिंग, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, व्‍हर्लपूल इंडिया, आईओएन एक्‍सचेंज, सेल, फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक, अपोलो हॉस्पिटल, ब्रिटानिया इंडस्‍ट्रीज, वोकहॉर्ट, वोलटैम्‍प ट्रांसफार्मर्स, जीवीके पावर, इक्रा, क्‍युमिंस इंडिया, स्‍वराज इंजिन, मद्रास सीमेंट, ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग शेयरों की हलचल पर नजर रख सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-7940898409536916741?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-87732044833404800202008-10-28T14:24:00.002+05:302008-10-29T14:26:36.499+05:30सेंसेक्‍स का सुपर शो<a href="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQglBJ8PdVI/AAAAAAAACC0/AOJ0gzXZ08Q/s1600-h/sensex.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5262496866361111890" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 89px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQglBJ8PdVI/AAAAAAAACC0/AOJ0gzXZ08Q/s200/sensex.jpg" border="0" /></a> रजनीकांत<br /><br />जनवरी में जंप लगाया (Month High-21206- Low-15332)<br />फरवरी में फेड होना शुरू किया (Month High 18895- Low 16457)<br />मार्च में मारकाट मचाया (Month High- 17227- Low 14677)<br />अप्रैल में कुछ एडवांस हुआ (Month High- 17480- Low 15297)<br />मई में हुआ कुछ और मस्त (Month High -17735- Low 16196)<br />जून में शुरू हुआ जलजला (Month High -16632- Low 13405)<br />जुलाई में निवेशकों के और जले हाथ (Month High -15130- Low 12514)<br />अगस्त में जगाई आस (Month High - 15579- Low 14002)<br />सितंबर में फिर खूब ढाहा सितम (Month High -15107- Low 12153)<br />अक्टूबर में तेज किया अटैक (Month High -13203- Low 8566)<br />क्या नवंबर में करवाएगा नो-नो....<br />दिसंबर में भी क्या यह रहेगा दिशाहीन...<br />इस साल कैसा रहेगा सेंसेक्स का शो<br />सुपर हिट या सुपर फ्लाप ।<br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-8773204483340480020?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-55796604188458296422008-10-27T12:02:00.000+05:302008-10-27T12:04:40.479+05:30ये रहे अगले हैवीवेट्स<a href="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQVgluQSicI/AAAAAAAACCM/lp8Qsd-A8JA/s1600-h/moniters.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5261717940840073666" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 136px; CURSOR: hand; HEIGHT: 95px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQVgluQSicI/AAAAAAAACCM/lp8Qsd-A8JA/s200/moniters.jpg" border="0" /></a> भारतीय शेयर बाजार जनवरी से लगातार गिरावट की ओर है और अब रोज मुक्‍त रुप से गिर रहा है। लेकिन इक्विटी विश्‍लेषकों को यह नहीं पता है कि इसका बॉटम लेवल कहां होगा। वाह मनी की राय में पहला निचला स्‍तर बीएसई सेंसेक्‍स का 7500 अंक है। बीएसई सेंसेक्‍स के इस स्‍तर पर आने पर जिन शेयरों की आप खरीद करना चाहते हैं उनमें 20-20 फीसदी शेयरों की खरीद चालू की जा सकती है लेकिन यह निवेश यह मानकर करें कि आपको अगले दो साल तक इस पैसे की जरुरत नहीं है।<br /><br />हमारी राय में बीएसई सेंसेक्‍स इस दिवाली से अगली दिवाली तक 6100 से 12900 के बीच और एनएसई का निफ्टी 1800 से 3800 के बीच घूमता रहेगा। वाह मनी पेश कर रहा है कुछ खास शेयरों की सूची जिनमें आप हर घटे भाव पर निवेश कर सकते हैं जो आपके लिए बेहद फायदेमंद रहेंगे। इस सूची में हैवीवेट्स की कमी खल सकती है लेकिन ये शेयर मुनाफे के हिसाब से अगले हैवीवेट्स होंगे।<br /><br />पेट्रोनेट एलएनजी<br />एनटीपीसी<br />एलआईसी हाउसिंग<br />इंडसइंड बैंक<br />एक्सिस बैंक<br />बैंक ऑफ बड़ौदा<br />व्‍हर्लपूल इंडिया<br />आईओएन एक्‍सचेंज<br />सेल<br />फिलिप्‍स कार्बन ब्‍लैक<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-5579660418845829642?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com3tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-9455149319291554102008-10-24T12:49:00.005+05:302008-10-24T13:02:32.997+05:30महा रिटर्न जय मंत्र<a href="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQF3SGLc1kI/AAAAAAAACB8/vdewODbUTUQ/s1600-h/bse-1.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5260616992525440578" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 150px; CURSOR: hand; HEIGHT: 113px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SQF3SGLc1kI/AAAAAAAACB8/vdewODbUTUQ/s200/bse-1.jpg" border="0" /></a> सही तरीके और सही मात्रा में शेयर आधारित फंडों का चयन, निवेशक के लिए लंबे समय के निवेश लक्ष्यों के मामले में अति महत्त्वपूर्ण है। अब इस तरीके और मात्रा के साथ जुड़े 'सही' के पुछल्ले से निबटने के लिए पेशेवर सलाहकार की शरण में जाना आसान उपाय है, लेकिन अपनी गाढी कमाई की पूंजी को जोखिम भरे शेयर बाजार में निवेशित करने का इरादा करते समय कुछ महत्त्वपूर्ण बातें खुद भी ध्यान में रखी जानी चाहिए। इससे एक तो आत्मविश्वास बढता है और दूसरे सचेतता आती है जो कि रूपए-पैसे के मामले में सुरक्षा के लिहाज से बहुत ही जरूरी है।<br /><br />1- सबसे पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें। यह निवेश के अनुभवों, आपके दृष्टिकोण और भावनात्मक दृढता पर आधारित होता है। जोखिम उठाने की क्षमता और इच्छा दो अलग-अलग चीजें हैं, यह याद रखना बहुत जरूरी है। जोखिम क्षमता के आधार पर ही निवेश की अति सुरक्षित, या सामान्य सुरक्षित या आक्रामक रणनीति बनानी चाहिए। अति सुरक्षित नीति जहां पूंजी की सुरक्षा को सर्वोच्च सुनिश्चित करती है, वहीं रिटर्न के मामले में कमजोर भी साबित होती है जबकि आक्रामक रणनीति बेहद अच्छे रिटर्न भी दिला सकती है और आपकी कुल पूंजी को डुबो भी सकती है। इस लिहाज से मध्य का मार्ग ज्यादा लोगों को रास आता है, यानी संतुलित जोखिम के साथ संतुलित रिटर्न।<br /><a href="http://wahmoney.blogspot.com/2008/01/blog-post_11.html"><strong>पढ़ें: डर पर हावी लालच<br /></strong></a>2- बाजार में तेजी के समय कम कीमत वाले शेयरों की कीमत से आकर्षित होकर खरीदारी करना, तब खतरनाक साबित होता है जब मूल्यांकन सटीक न किया गया हो। 'वैल्यू इन्वेस्टिंग' का मंत्र अनेकों बार वारेन बफेट का नाम ले-लेकर दोहराया जाता है, लेकिन खरीदारी के वक्त इसे भुला देने वाले लोगों की तादाद भी बहुत ज्यादा है, जो बाद में किंकर्तव्यविमूढता की स्थिति में पहुंचते देखे गए हैं। कीमत का आय से अनुपात भी बहुप्रचलित तरीका है। माना एक शेयर 1000 और दूसरा 10 रूपए का बिक रहा है, लेकिन पहली कंपनी की प्रति शेयर आय 200 रूपए है तो इसका पी/ई हुआ 5, और अगर दूसरी कंपनी की प्रति शेयर आय 1 रूपया है, तो इसका पी/ई हुआ 10, इसका मतलब यह कि दूसरा वाला शेयर पहले की तुलना में दूना महंगा है।<br /><br />3- मुक्त नकदी प्रवाह जानना जरूरी है। यह जानना जरूरी है कि कंपनी द्वारा दिखाया जा रहा लाभ कंपनी के पास नकदी के रूप में है और कहीं ऋण खातों में ही समायोजित तो नहीं हो रहा है।<br /><a href="http://wahmoney.blogspot.com/2007/12/blog-post_17.html"><strong>पढ़ें: पेड़ छू नहीं सकता आकाश को<br /></strong></a>4- हालांकि कंपनी की अतीत की गतिविधियाँ, भविष्य पर असर डालती हैं, लेकिन शेयर का भावी मूल्य कंपनी की भावी योजनाओं, रणनीतियों और बाजार परिस्थितियों पर ज्यादा निर्भर होगा, न कि इस पर, कि पहले कंपनी क्या करती रही। इसलिए, भावी संभावनाओं को पहचानने की कोशिश ज्यादा से ज्यादा की जानी चाहिए।<br /><br />5- कुछ भी थोक में न खरीदें। बाजार का भविष्य कोई नहीं जानता और अच्छा और बुरा समय कभी भी सर्वदा के लिए समाप्त नहीं होता। इसलिए, अनुशासित निवेश की बात की जाती है, ताकि जोखिम का समय-काल से तालमेल बिठाया जा सके।<br /><br />6- यद्यपि विविधीकरण आवश्यक है, लेकिन ढेरों योजनाओं में एक साथ निवेश करके अति विविधीकरण के अपने दुष्परिणाम भी देखे गए हैं। ब्लू-चिप बड़ी कंपनियों, मझोली संभावनाशील कंपनियों और छोटी, लेकिन बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के बीच एक संतुलन के साथ अपने छोटी, मध्यम और लंबी अवधि के निवेश लक्ष्यों के बीच जिसने अपने पोर्टफोलियो को सही तरह से व्यवस्थित कर लिया, वही असली खिलाड़ी साबित होता है।<br /><br />7- हर सम्भव प्रयास करके शेयरों में वही पूंजी लगाई जानी चाहिए, जिसकी आवश्यकता एक लंबे समय तक, कम से कम चार-पांच साल तक न पड़ने वाली हो। लंबी अवधि, बाजार की अनिश्चित अस्थिरता से निबटकर आपके लिए बेहतरीन रिटर्न की फसल तैयार करती है।<br /><br />8- बेचने का कोई सर्वमान्य मुहूर्त नहीं होता। कभी भी, जब आपको जरूरत हो, बेचिए, लेकिन यह ध्यान में रखिए कि समय का जो लक्ष्य आपने निवेश करते समय तय किया था, वह अगर पूरा किया जा सका है, तो निर्णय अधिक सटीक होगा।<br /><br />इन छोटी-मोटी, सीधी-सादी बातों को ध्यान में रखना न तो पिछड़ापन है, न ही फिजूल की दिमागी कसरत। याद रखिए, भविष्य की ठीक-ठीक पैमाइश कर सकने वाला कोई टूल न बना है, न बनेगा। अनुशासित रहकर सामान्य नियमों का पालन करने से ही आप अपने पोर्टफोलियो को एक कमाऊ और वफादार साथी में तब्दील कर सकते हैं और वर्तमान जैसे बाजार के कितने ही हिचकोलों से निबटकर मुसकरा सकते हैं।<br /><br /><div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-945514931929155410?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-87415034412043719812008-10-21T07:30:00.001+05:302008-10-21T07:30:18.334+05:30अन्तरात्मा खडी़ बजार में...<p>मोहन वर्मा</p> <p><a href="http://lh3.ggpht.com/kamaljalaj/SP03jx8KTNI/AAAAAAAABb4/hfwM1qDbI8U/s1600-h/horse%20car%5B2%5D.jpg"><img style="border-right: 0px; border-top: 0px; border-left: 0px; border-bottom: 0px" height="244" alt="horse car" src="http://lh4.ggpht.com/kamaljalaj/SP03prk4BxI/AAAAAAAABb8/E8xUtFTXYyc/horse%20car_thumb.jpg?imgmax=800" width="184" border="0" /></a> पश्चिम बंगाल की जनता के नाम अपने खुले पत्र में टाटा ने बहुत बुनियादी सवाल उठाया है, कि कानून का शासन, आधुनिक ढांचा और औद्योगिक विकास दर वाले खुशहाल राज्य बनाम टकराव, आंदोलन, हिंसा और अराजकता के विध्वंसकारी राजनीतिक माहौल से बरबाद होते राज्य में से पश्चिम बंगाल की जनता किस प्रकार के राज्य को चुनना चाहेगी?</p> <p>इस मूलभूत सवाल के परिप्रेक्ष्य में यह जानना दिलचस्प है, कि एक ही शब्द के मायने, एक ही बात की परिभाषाएं, किस तरह व्यक्तियों और समुदायों के लिए अलग-अलग विरोधाभासी रूख अख्तियार करती हैं। कानून का शासन यह है कि राज्य प्राकृतिक संसाधनों को उन ब़डे देशी-विदेशी उद्योगपतियों के हवाले कर दे, जिनकी औद्योगिक परियोजनाओं की सफलताएं, भारत के भावी विकसित स्वरूप का निर्माण करने वाली हैं। कानून का शासन वे लोग मानें, जिनकी जिंदगियों में शेयरों का, कंपनियों का कोई सीधा दखल नहीं, बल्कि जिनकी जिंदगी की शर्तें जल-जंगल और जमीन से जुडी़ हैं। पश्चिम बंगाल सरकार कानून के शासन के परीक्षण के इस मामले में विफल रही और अंतत: टाटा के आगे बिछ-बिछ जाने को तैयार विभिन्न मुख्यमंत्रियों में से टाटा ने एक मजबूत हिंदू को चुन लिया।</p> <p>आधुनिक ढांचे की बात करते ही कल्पना में मल्टीप्लेक्सों-मॉलों-हाइवे-फ्लाईओवरों-ऊंची चमकीली बिल्डिंगों और सजे-धजे खर्चीले लोगों से पटे पडे़ शहरों की दौडती-भागती तस्&#8205;वीर आपके दिलोदिमाग में उभरती है कि नहीं? जहां बच्चों के लिए ब्रांडेड नैपी से लेकर जवानों के लिए विश्व स्तर के सारे साजो-सामान, सुख-सुविधाएं और बुजुर्गों के लिए ओल्ड-होम्स मौजूद हों। अब रही औद्योगिक विकास दर, तो इस दर के साथ भारत को विश्व की आर्थिक महाशक्ति की पांत में ला खडा़ करने को आतुर लोगों के लिए पर्यावरणवादी और जल-जंगल-जमीन से जुडे लोगों के सुर में सुर मिलाने वाले अराजकतावादी और विध्वंसकारी लोग, बुरे सपने की तरह हैं, जो उडीसा से बंगाल तक और छत्तीसगढ़ से झारखंड तक पोस्को-टाटा-वेदान्ता-सलेमग्रुप आदि-आदि-इत्यादि कंपनियों के खिलाफ इंटरनेट, पम्फलेट, जुलूस, धरना-प्रदर्शन, लोगों को उकसाने, जनहित याचिकाओं आदि-आदि-इत्यादि तरीकों से मुश्किलों पर मुश्किलें खडी करते जा रहे हैं।</p> <p>पूंजी के सर्वसमावेशी चरित्र पर अंगुली उठाने में अपने खिलाफ विकास विरोधी, वामवादी, साम्यवादी, राजनीतिप्रेरित आदि-आदि किस्म के फतवे जारी हो जाने के चांस ज्यादा हैं, लेकिन कौन साबित कर सकता है कि खुशहाली के मानक सबके लिए एक जैसे हो सकते हैं ? हिंदुस्&#8205;तान को आजादी मिलने के बाद आधी सदी तक कितने ऐसे लोग थे, जो देश की प्रगति को सेंसेक्&#8205;स के साथ जोड़कर देखते थे? सेंसेक्&#8205;स ने जिन लोगों को धनकुबेर बनाया उन्होंने चमचमाती कारों, लग्जरी विमान यात्राओं, शानदार एयरकंडीशन्ड बिल्डिंगों की दुनिया में खोकर राहत की सांस ली, कि चलो देर से ही सही, भारत विकसित होना शुरू तो हुआ।</p> <p>अराजकता, विध्वंस, टकराव और हिंसा की बात करने से पहले एक पहेली बूझिए कि विश्वव्यापी आर्थिक मंदी, बडी वित्तीय संस्थाओं के धराशायी होने, बेलआउट के घंटी हिलाऊ सरकारी प्रयासों के बावजूद दुनिया भर के शेयर बाजारों के ताश के महलों की तरह ढहने, निवेशकों के माथा पीटने का यह दौर न आया होता, और दुनिया की प्रगति के साथ अपना दुलारा सेंसेक्&#8205;स भी पचीस-तीस हजारी पालने में झूल रहा होता, तो क्या भारत से गरीबी-शोषण-अत्याचार-बालश्रम-स्त्री शोषण-कन्या भ्रूण हत्या-जातीय हिंसा-कुपोषण-बेरोजगारी-वेश्यावृत्ति-आतंकवाद-अंधविश्वास आदि-आदि समाप्त हो गए होते ? सैकडों करोड़ रूपए में चुनाव-प्रचार के ठेके नामी विज्ञापन कंपनियों को देने वाली राजनीतिक पार्टियाँ जब सत्ता में आती हैं तो पूंजीवादी ताकतों के बे-धौंस चरने-खाने को देश परोस देना उनकी एक मजबूरी, और किसान-मजदूर के हित की माला जपना और लोक-लुभावन योजनाएं बनाना, तथाकथित जनकल्याणकारी फैसलों की जुगाली करना दूसरी मजबूरी होती है। </p> <p>आप निवेशक हैं, तो इन कंपनियों का मुनाफा दिन-दूना रात-चौगुना बढ़ने की कामना करेंगे, ताकि आपको भी फायदा हो सके, जिसे अन्तत: कंपनियों द्वारा आक्रामक तरीके से समाज में विकसित की गई उपभोगवादी मानसिकता के चलते कंपनियों की जेब में ही फिर जाना है। कोढ और खाज से ग्रस्त वेश्या अपना चेहरा मेकअप से पोत-पात कर ग्राहक रिझाने को बाजार में बैठी हो, लेकिन खुजली लगी हो, तो खुजाना पडे़गा ही। और तब मवाद हाथ के जरिए चेहरे पर भी लगकर असलियत बयान करेगा। यह खुजली-नासूर की अराजकता है, जो 'स्थिति शांतिपूर्ण लेकिन नियंत्रण में' टाइप प्रयासों से दबाए नहीं दबेगी, प्रगति सुनिश्चित करने के दावों भरे बयान चाहे जितने भी आते रहें। समाज में आर्थिक स्तर पर बने कई वर्गों के बीच विकास को जिस तरह उपधाराओं में बंट जाने दिया गया है, उसके चलते जिसके हिस्से में गंदा नाला आया है, उसके आक्रोश का सामना मिनरल वॉटर वाले, गंगाजल वाले को करना ही पडेगा। एक मुख्यधारा बनाकर सभी को इसमें शामिल करने की बात दूर की कौडी है, जिसके बारे में सोचने तक की फुरसत किसी को नहीं। तो, फिलहाल मंदी का स्यापा करते लैपटॉप धारियों को एक खिडकी से और दूसरी खिडकी से तोडफोड-अराजकता-हिंसा-आगजनी-हत्या-फसाद मचाती भीड को देख-देख कर ठंडी आहें भरते रहिए।</p> <div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-8741503441204371981?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-17278596386786976142008-10-20T17:19:00.002+05:302008-10-20T17:23:13.503+05:30धैर्यवान का साथ देगा शेयर बाजार<a href="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SPxwvCW4vMI/AAAAAAAABbw/FnZtZByxNSw/s1600-h/bse8.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5259202418250923202" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SPxwvCW4vMI/AAAAAAAABbw/FnZtZByxNSw/s200/bse8.jpg" border="0" /></a> भारत ही नहीं दुनिया भर के शेयर बाजार इस समय वैश्विक वित्तीय संकट की चपेट में हैं जिससे आम और खास दोनों तरह के निवेशक बुरी तरह मायूस हैं। शेयर बाजारों का और बुरा हाल होने की आंशका अभी भी बनी हुई है लेकिन इतिहास इस बात का भी गवाह है कि बुरे दौर से गुजरने के बाद इस बाजार ने हमेशा बेहतर रिटर्न दिया है तभी तो दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वारेन बफेट इस समय बेहतर अमरीकी कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। असल में शेयर बाजार और लक्ष्‍मी ने हमेशा धैर्यवानों का साथ दिया है।<br /><br />न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे अपने लेख में वारेन बफेट ने कहा है कि अमरीका को खरीदो, मैं इसे खरीद रहा हूं। वित्तीय संकट के केंद्र में बैठे इस शक्तिशाली और धैर्यवान निवेशक का एक-एक शब्द निवेशकों के लिए पत्थर की लकीर जैसे होता है और इसका सकारात्मक असर दुनिया भर के बाजारों में पड़ सकता है। वे लिखते हैं कि 20 वीं सदी में अमरीका ने दो विश्वयुद्धों के साथ लंबे समय तक चला शीतयुद्ध और अनेक मंदियां देखी। हर बार लगा कि रिकवर कर पाना कठिन है बावजूद डॉव जोंस 11497 पर पहुंच गया।<br /><br />अमरीका, ताईवान सहित अनेक देशों ने अपने यहां शेयरों में शार्ट सेल पर रोक लगा दी है ताकि मंदडि़ए ज्‍यादा हावी न हो सके लेकिन भारत में सेबी ने इस पर कोई निर्णय नहीं किया है। सेबी के पूर्व अध्‍यक्ष डी आर मेहता के कार्यकाल में शार्ट सेल पर रोक लगाई गई थी जिसे पिछले दिनों हटा लिया गया। अब एक बार फिर घरेलू शेयर बाजार में अब यह मांग जोरों पर उठ रही है कि जिस शार्ट सेल और फ्यूचर एंड ऑप्‍शन (एफएंडओ) ने अमरीकी शेयर बाजार का पतन किया उस पर भारत में रोक लगनी चाहिए। सेबी ने अभी तक इस पर कुछ खुलकर नहीं कहा है लेकिन उसने शार्ट सेल संबंधी आंकड़े और उसके प्रभाव को जानने की कसरत शुरु कर दी है।<br /><br />आईएमएफ के फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर जॉन लिप्स्की का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र में घट रही घटनाओं से आने वाले कुछ महीनों तक अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा। वित्त क्षेत्र में बड़े संकट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिलायंस कैपिटल के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने पिछले दिनों कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरधारकों से कहा था कि अंतरराष्‍ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण के मद्देनजर मौजूदा वित्तीय संकट से भारत भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता।<br /><br />आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट के उप प्रबंध निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश शाह मानते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारतीय बाजार कितने मजबूत हैं या हम क्या करते हैं। सबसे बड़ा असर बात से पड़ेगा कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार कैसा रहता है।इस समय अधिकतर इक्विटी विश्‍लेषक चुप हैं और उन्‍हें यह पता ही नहीं है कि बाजार कहां जाकर ठहरेगा। बस गिरने के साथ और गिरने की बात और बढ़ने के साथ उछाल की बात। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि शेयर बाजार पूरी तरह पहाड़ के नीचे आ जाएंगे। वाह मनी की राय में बीएसई सेंसेक्‍स नीचे में 7500 अंक तक जा सकता है लेकिन निवेशकों को बेहतर शेयरों की खरीद नौ हजार के आसपास से करनी चाहिए और यह खरीद 20 फीसदी हिस्‍से की होनी चाहिए। यानी नौ हजार अंक के बाद हर बड़ी नरमी पर इतने फीसदी ही खरीद। उदाहरण यदि आप टिस्‍को के सौ शेयर खरीदना चाहते हैं तो हर गिरावट पर 20-20 शेयर ही खरीदें। एक साथ सौ शेयर नहीं खरीदें। लेकिन एक बात यहां ध्‍यान रखें कि यह खरीद दो से तीन साल के लिए करें क्‍योंकि सेंसेक्‍स को नई ऊंचाई पर पहुंचने में इतना वक्‍त लगेगा ही।<br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 20 अक्‍टूबर से शुरु हो रहे नए सप्‍ताह में 10388 अंक से 9527 अंक के बीच घूमता रहेगा। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 3185 अंक से 2921 के बीच कारोबार करेगा। तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बीएसई सेंसेक्‍स को 8799 अंक पर सपोर्ट मिलना चाहिए क्‍योंकि यही वह स्‍तर है जहां भारतीय शेयर बाजारों ने तेजी की दौड़ शुरु की थी और सेंसेक्‍स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था। सेंसेक्‍स का निचली रेंज 9720-8800 अंक दिखती है लेकिन यह अंतिम नहीं है क्‍योंकि बाजार सर्वोच्‍च है और उससे ऊपर कोई नहीं हो सकता। इस सप्‍ताह बीएसई सेंसेक्‍स को 9300-8799 पर सपोर्ट मिल सकता है। साप्‍ताहिक रेसीसटेंस 10585-11259-11870 पर देखने को मिलेगा। यदि सेंसेक्‍स इस सप्‍ताह 11870 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह तगड़ा निचला स्‍तर बनाने से बच सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की 24 अक्‍टूबर को मौद्रिक नीति की समीक्षा के अलावा 23 अक्‍टूबर को रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के नतीजे सामने आएंगे, जिनका बाजार पर सीधा असर पड़ेगा।<br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक नीतिन फायर प्रोटेक्‍शन, बैंक ऑफ बड़ौदा, कार्बोरेंडम यूनिवर्सल, कर्नेक्‍स माइक्रोसिस्‍टम, एचडीएफसी बैंक, सुजलान एनर्जी, रेडिगंटन इंडिया, गेल, मैरिको, ओनमोबाइल ग्‍लोबल पर ध्‍यान दे सकते हैं। इसके अलावा हैवीवेट्स में हर उतार चढ़ाव का सावधानी के साथ फायदा उठा सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-1727859638678697614?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-43699561533476166102008-10-17T14:31:00.001+05:302008-10-17T14:35:19.470+05:30सेंसेक्‍स का और टूटना बाकी<a href="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SPhVEvDbrRI/AAAAAAAABbg/Hk5q2RozJeo/s1600-h/bse9.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5258046104793754898" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SPhVEvDbrRI/AAAAAAAABbg/Hk5q2RozJeo/s200/bse9.jpg" border="0" /></a> दुनिया की सबसे बड़ी 14 खबर डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था ने घुटने टेक दिए हैं...यह बात है अमरीकी अर्थव्‍यवस्‍था की जो समूची दुनिया में अपने डॉलर का डंका बजवा रही थी लेकिन इसे अब एक बार फिर 1929-30 की महामंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है। 700 अरब डॉलर की अमरीकी वित्तीय बचाव योजना भी मंदी के इस तूफान में ऊंट के मुंह में जीरा साबित होती नजर आ रही है। दुनिया भर के आर्थिक ज्ञानी तो यह मानते हैं कि 1930 के ग्रेस डिप्रेशन के बाद यह सबसे बड़ा वित्तीय झटका है। लिक्विडिटी इन्‍फयूजन से लेकर अधिग्रहण तक, जो कुछ भी संभव है किया जा रहा है। इससे वित्तीय बाजारों में कुछ स्थिरता की उम्‍मीद की जा सकती है लेकिन पहले जैसी गर्मी लौट पाएगी, यह कठिन लग रहा है।<br /><br />आईएमएफ के फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर जॉन लिप्स्की का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र में घट रही घटनाओं से आने वाले कुछ महीनों तक अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा। वित्त क्षेत्र में बड़े संकट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिलायंस कैपिटल के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने पिछले दिनों कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरधारकों से कहा था कि अंतरराष्‍ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण के मद्देनजर मौजूदा वित्तीय संकट से भारत भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट के उप प्रबंध निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश शाह मानते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारतीय बाजार कितने मजबूत हैं या हम क्या करते हैं। सबसे बड़ा असर बात से पड़ेगा कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार कैसा रहता है।<br /><br />इस समय अधिकतर इक्विटी विश्‍लेषक चुप हैं और उन्‍हें यह पता ही नहीं है कि बाजार कहां जाकर ठहरेगा। बस गिरने के साथ और गिरने की बात और बढ़ने के साथ उछाल की बात। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि शेयर बाजार पूरी तरह पहाड़ के नीचे आ जाएंगे। वाह मनी की राय में बीएसई सेंसेक्‍स नीचे में 7500 अंक तक जा सकता है लेकिन निवेशकों को बेहतर शेयरों की खरीद नौ हजार के आसपास से करनी चाहिए और यह खरीद 20 फीसदी हिस्‍से की होनी चाहिए। यानी नौ हजार अंक के बाद हर बड़ी नरमी पर इतने फीसदी ही खरीद। उदाहरण यदि आप टिस्‍को के सौ शेयर खरीदना चाहते हैं तो हर गिरावट पर 20-20 शेयर ही खरीदें। एक साथ सौ शेयर नहीं खरीदें। लेकिन एक बात यहां ध्‍यान रखें कि यह खरीद दो से तीन साल के लिए करें क्‍योंकि सेंसेक्‍स को नई ऊंचाई पर पहुंचने में इतना वक्‍त लगेगा ही। लक्ष्‍मी ने हमेशा धैर्यवानों का साथ दिया है इसलिए धैर्य रखें और इंतजार करें अंधेरे के बाद फिर उजाले का।<br /><br />वाह मनी ब्‍लॉग काफी समय से अपडेट नहीं हो पा रहा था जिसका खेद है। इसकी वजह मां की तबियत ठीक नहीं होना था। वे इस संसार से 28 सितंबर 2008 को विदा हो गईं। उनके जाने के बाद आज यह पहली पोस्‍ट है।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-4369956153347616610?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com2tag:blogger.com,1999:blog-7265410993522478386.post-21168017005858702342008-08-11T12:07:00.001+05:302008-08-11T12:09:44.977+05:30शेयर बाजार ट्रेडिंग जोन में<a href="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SJ_eQccSwoI/AAAAAAAABbA/C6J8H_Wb-xc/s1600-h/bse9.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://1.bp.blogspot.com/_M3V8TVFK6do/SJ_eQccSwoI/AAAAAAAABbA/C6J8H_Wb-xc/s200/bse9.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5233145666121941634" /></a><br />भारतीय शेयर बाजार इस समय पूरी तरह ट्रेडिंग जोन में है और निवेशकों को इस समय लंबी अवधि के निवेश के बजाय पूरी तरह एक कारोबारी की तरह लाभ उठाना चाहिए। लेकिन ज्‍यादातर निवेशक एक गलती करते हैं और वे वैल्‍यू स्‍टॉक पर दांव लगा बैठते हैं जो फंडामेंटल व टेक्निकल तौर पर बेहद मजबूत होते हैं लेकिन निवेशकों की शिकायत होती है कि उनके शेयर चल ही नहीं रहे। जबकि, बाजार जब पूरी तरह ट्रेडिंग जोन में हो तो निवेश ग्रोथ स्‍टॉक में करना चाहिए। <br /><br />अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड के दाम 147 डॉलर से घटकर 116 डॉलर प्रति बैरल आ जाने से अर्थव्‍यवस्‍था पर सबसे घातक मार करने वाला कारक ठंडा होता नजर आ रहा है। लेकिन सरकार के समाने अभी भी बढ़ती महंगाई दर को काबू में करना, उच्‍च ब्‍याज दरों को फिर से कम करना और औद्योगिक उत्‍पादन बढ़ाना मुख्‍य चुनौतियां हैं। हालांकि, अब आम चुनाव का समय जैसे जैसे नजदीकी आ रहा है सरकार की प्राथमिकताओं में भी ये ही बातें आ गई हैं ताकि चुनावी समर में फतह हासिल की जा सके। ऊंची ब्‍याज दर की वजह से कर्ज की मांग में आने वाली कमी और अंतरराष्‍ट्रीय कमोडिटी बाजारों में आई नरमी से आने वाले दिनों में महंगाई दर घट सकती है जो इस समय 13 साल के उच्‍च स्‍तर 12.01 फीसदी पहुंच चुकी है। महंगाई दर में 14 अगस्‍त से कमी आने की आस है। <br /><br />दिल्‍ली के सत्ता गलियारें में अब वामपंथियों की तूती बोलना बंद हो गई है और नई यूरिया नीति के बाद बैंकिंग व बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार कमर कसती नजर आ रही है। सरकार ने इसके संकेत पंजाब एंड सिंध बैंक की इक्विटी पुनर्रचना करने के फैसले से दिए हैं। सरकार का इरादा निजी क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश को बढ़ाने की छूट देने का है। यदि ऐसा होता है तो बैंकिंग क्षेत्र में बड़ी उथल पुथल देखने को मिल सकती है। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने पिछले सप्‍ताह साप्‍ताहिक आधार पर 1527.90 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की है। इन निवेशकों की अब हर सप्‍ताह बढ़ रही खरीद भारतीय शेयर बाजार में लौट रहे विश्‍वास का आभास देने लगी है। <br /><br />बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स इस सप्‍ताह में 15470 के ऊपर बंद होने पर 15773 पहुंचने के आसार हैं। बीएसई सेंसेक्‍स में सपोर्ट स्‍तर 14560 अंक पर है। जबकि नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 4619 अंक से ऊपर बंद होता है तो यह 4710 अंक तक पहुंच सकता है। इसमें सपोर्ट स्‍तर 4344 अंक है। <br /><br />ब्‍लैकस्‍टोन समूह की पुनीता कुमार सिन्‍हा का कहना है कि जब तक वैश्विक स्थिति में सुधार नहीं आता शेयर बाजार ट्रेडिंग रेंज में बना रहेगा। मौजूदा गर्मी क्रूड के दाम गिरने का नतीजा है। वे मानती हैं कि सेंसेक्‍स की ऊपरी सीमा 17-18 हजार रह सकती है। हालांकि सेंसेक्‍स की फिर से परीक्षा 12500 अंक पर होने से वे इनकार नहीं करतीं। निवेशकों निवेश के लिए संतुलित एप्रोच करनी चाहिए ना कि आक्रामक। <br /><br />एनविजन कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी निलेश शाह का कहना है कि अगले चार से आठ सप्‍ताह तक सेंसेक्‍स 13500-16000 के बीच घूमता रहेगा। अगले कुछ सप्‍ताह तक बाजार मौजूदा स्‍तरों पर कंसोलि‍डेटेड होता रहेगा। यह निवेशकों के लिए मुनाफा वसूली का बेहतर समय है।<br /><br />तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि 11 अगस्‍त से शुरु होने वाले सप्‍ताह में गिरावट को शेयर खरीद का मौका समझना चाहिए। हालांकि स्‍टॉप लॉस 14500 का रखा जाना चाहिए। बाजार की नरमी की स्थिति में सपोर्ट स्‍तर 15031-14639 है। बीएसई सेंसेक्‍स के 15800 से ऊपर होने पर निवेशकों को मुनाफा वसूली करनी चाहिए। <br /><br />इस सप्‍ताह निवेशक एक्सिस बैंक, आरएनआरएल, बजाज हिंदुस्‍तान, बलरामपुर चीनी, रेणुका शुगर, इप्‍का लैब, त्रिवेणी इंजी‍नियरिंग, स्‍टरलाइट इंडस्‍ट्रीज, इंफोटेक एंटरप्राइजेज, जीएमआर इंफ्रा, हरिसन मलयालम, कैनफिन होम्‍स, एवररेडी इंडस्‍ट्रीज, श्‍याम टेलीकॉम और हिंदुस्‍तान आर्गेनिक पर ध्‍यान दे सकते हैं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7265410993522478386-2116801700585870234?l=wahmoney.blogspot.com'/></div>कमल शर्माhttp://www.blogger.com/profile/00891524525052861677noreply@blogger.com1