tag:blogger.com,1999:blog-7203744.post-1138580806811309022006-01-29T19:25:00.000-05:002006-09-18T22:57:41.630-04:00मत कहो, आकाश में कुहरा घना हैमत कहो, आकाश में कुहरा घना है,<br />यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।<br /><br />सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,<br />क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है ।<br /><br />इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है,<br />हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है ।<br /><br />पक्ष औ' प्रतिपक्ष संसद में मुखर हैं,<br />बात इतनी है कि कोई पुल बना है<br /><br />रक्त वर्षों से नसों में खौलता है,<br />आप कहते हैं क्षणिक उत्तेजना है ।<br /><br />हो गई हर घाट पर पूरी व्यवस्था,<br />शौक से डूबे जिसे भी डूबना है ।<br /><br />दोस्तों ! अब मंच पर सुविधा नहीं है,<br />आजकल नेपथ्य में संभावना है ।<br /><br />- <a href="http://hindipoetry.blogspot.com/2006/09/blog-post_18.html">दुष्यन्त कुमार</a>Munishhttp://www.blogger.com/profile/01237020444765003132noreply@blogger.com