tag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-48591298555894589722008-02-27T05:11:00.001-08:002008-02-27T05:13:17.184-08:00मीडिया मास्टर भट्टजीसुर्खियों में कैसे छा जाना यह तो सीखे कोई वरिष्ट भाजपा नेता अशोक भट्ट से। विषय कोई भी हो , हमारे भट्टजी उसे मीडिया में इस तरह से उछाल सकते हैं जैसे अपने धोनी भाई किसी भी खिलाडी की बॉल को बाउन्ड्री तक पंहुचाते है।<br /><br />सबसे अधिक बार निर्वाचित विधायक का भट्टजी का रिकार्ड खुद ही एक बडी उपलब्धी है। इसे कोई संयोग कह सकता है। पर कानून मंत्री के रुप में जिस तरह से उन्होने सुर्खिया बटोरी इसने एक बात तो सिद्ध कर दी कि कानून मंत्रालय तर्क आधारित बोरिंग विषय का मन्त्रालय नहीं है।<br /><br />अब विधानसभा के अध्यक्ष के नाते, विधानसभा की कार्रवाई में उनकी भूमिका उन्हे हर रोज अखबारों में जगह दिलवाती है। यह तो उनके पद से जुडी कार्रवाई है। पर हमारे भट्टजी तो भट्टजी हैं। विधानसभा के अंदर ही नही, वे तो बाहर भी काफ़ी सक्रिय है।<br /><br />पिछले हफ़्ते कुछ पत्रकार उनसे मिलने पहुंचे। मुद्दा था विधानसभा का प्रवेश पास। भट्टजी के लिये यह कोई बडी बात नहीं थी। बोले नो प्रोब्लम। चाय-पकौडे खाओ। और फिर उन्होने बताया कि किस तरह विधानसभा की समृद्ध लायब्रेरी विधायकों की उदासीनता का शिकार है।विधायक उसका उपयोग ही नहीं करते। इसलिये उन्होंने पत्र लिख विधायकों से आग्रह किया है कि वे पुस्तकालय का उपयोग करें!<br /><br /> पत्रकार कोई प्रतिक्रिया दे, उससे पहले ही उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक भी विधानसभा का अंग हैं। भट्टजी उनके अनुभव और ज्ञान का पूरा उपयोग करना चाहते हैं। और उन्होंने इन पूर्व विधायकों के लिये विधानसभा लाउन्ज में बैठने की इजाजत दे दी हैं!!<br /><br />भट्टजी का मूड देख पत्रकारों ने कहा कि विधानसभा कैन्टीन सब्जी मार्केट जैसी हो गई है। पत्रकारों को बैठने के लिये जगह भी नहीं होती। कुछ करो। भट्टजी बोले तथास्तु। और जैसे ही पत्रकार इस हफ़्ते कैन्टीन में गये उन्होंने देखा कि कैन्टिन में पत्रकारों के लिये एक अलग पार्टींशन हो गया था!!!<br /><br /> मोदीजी के राज में पिछले पांच वर्षो में अपने भट्टजी सुर्खीयां तो मार लेते थे, पर पहले की तरह पत्रकारों के साथ भोजन मिलन नहीं कर पाते थे। वो क्या किसी भी मंत्री की हिम्मत नहीं थी कि मोदीजी के जुबानी फरमान का उल्लंघन कर पत्रकारों के साथ चाय भी पी ले। खाने की बात तो छोडो। मोदीजी ने सबकी बोलती बंद कर रखी थी।<br /><br />खैर अब तो अपने भट्टजी अध्यक्ष सर्वोपरी हैं। जिस दिन अध्यक्ष बने तब पत्रकारों को नये घर पर खाने पर बुला लिया। और विधानसभा के तीसरे दिन ही पत्रकारों को सर्किट हाऊस में दावत का ऐलान किया।<br /><br /> अपने भट्टजी तो गृह में और गृह के बाहर पूरी तरह से प्रोफेशनल हैं। खाने से पहले पत्रकारों से दो मिनट के लिये मिले। बोले मैंने २९ फरवरी से तीन दिन के लिये ज्ञान शिविर का आयोजन किया है। गुजरात और बाहर से विभिन्न विषयों के विद्वान विधायकों को संसदीय इतिहास, परम्परा और प्रणाली से अवगत करायेंगे।<br /><br />पूरे देश में पहली बार। लोकसभा के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी खुद आयेंगे इस शिविर में भाग लेने। देखा अपने मीडिया मास्टर भट्टजी की सुर्खीबाजी की दक्षता!!!! क्या कोई रिर्पोटर इस खबर को मिस कर सकता है। और भट्टजी का माल पानी जीमने के बाद पत्रकार यह राष्ट्रीय समाचार बनाने में लग गये।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.com