tag:blogger.com,1999:blog-71377742552699412722008-06-23T23:52:34.462-07:00zero columnYogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comBlogger102125tag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-38696893036184023262008-05-01T13:07:00.000-07:002008-05-01T13:08:31.084-07:00साबरमती जेल, मुठभेडिया पुलिस वालों का अखाडा<div align="justify"><span style="font-family:verdana;"></span></div><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">साबरमती जेल के सुरक्षाकर्मी आजकल काफी परेशान हैं। आए दिन जेल में दंगल हो जाता है। सामान्य कैदी हो तो धुलाई कर बैरक में डाल दे। पर ये सब ठहरे दिग्गज पुलिस वाले।<br /><br />इन्हें कानून बखूबी मालूम है। गोली मार मुठभेड बताने में माहिर हैं। साफ है कि, इनसे निपटना किसी के बस की बात नहीं। कुछ महिने पहले कुछ पुलिसवालों ने दिग्गज वणजारा और पांडियन को हथकडी पहनाने की कोशिश की थी। बता दी कानून की किताब। कर दी अर्जी अदालत में। सुप्रीम कोर्ट के फैंसले से ले मानवाधिकार सभी कुछ पढा दिया। जीत गये। अदालत ने कह दिया, हथकडी नहीं। आरोप सिध्ध नहीं हुआ। इज्जतदार हैं!<br />इस हफ्ते सोहराबुद्दीन कांड के ये नायक वणजारा और नरेन्द्र अमीन गुत्थमगुथ्था हो गये। आई पी एस अधिकारी एक दूसरे पर ही टूट पडे क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी!<br />गुस्सा किस पर उतारते। और कैदी मिलकर उनकी धुलाई कर देते। हां, बाहर होते तो सोहराबुद्दीन जैसे एक दो को उडा गुस्सा ठंडा कर लेते। एकाद तमगा भी वर्दी पर लगवा देते।<br />कल दो और सब इंस्पेक्टरों में लठठम लठ्ठ हो गई। ये दोनों भी फर्जी मुठभेड के चक्कर में जेल में हैं। गुस्से में एक आई पी एस ने मुर्गे की रान चबाने के अंदाज में बैडमिंटन रैकेट के तार ही फाड डाले। आम किस्से में कैदियों को दूसरी जेल में भेज देते हैं। पर इन्हें कही भी भेजें तेवर तो पुलिसिया ही रहेंगें।</span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-33503926193346893622008-05-01T13:04:00.000-07:002008-05-01T13:05:32.991-07:00मोदी जी ने मीडिया की पैरवी की !<div align="justify"><span style="font-family:verdana;"></span></div><p align="justify"><span style="font-family:verdana;"> मोदी जी तो मोदी जी हैं। कब क्या करें, कब क्या बोलें कोई कह नहीं सकता। शायद मोदी जी खुद भी नहीं।<br />हाल ही में दिल्ली में जब उनके चाहकों ने जब टीवी पत्रकारों की धज्जीयां उडाई थी तब वे इस प्रकार बैठे रहे जैसे उन्हें इससे कोई सम्बन्ध ही नहीं! उनके आयोजकों ने उनका सम्मान कार्यक्रम किया था। पत्र्कारों को न्यौता दे, उन्हे बेआबरु कर कूचे से निकल जाने को भी कहा।<br />पर उसके दो दिन बाद तो मोदी जी ने उनके पत्रकार प्रेम से अहमदाबाद के पत्रकारों कों अचम्भित ही कर दिया। उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल प्रेस कांफ्रेन्स शुरु हुई ही थी कि मोदी जी ने कहा कि, गुजरात के पत्रकारों की ओर से वे कुछ कहना चाहते हैं।<br />प्रफुल पटेल को भी आश्चर्य तो जरुर हुआ होगा। पर ठहरे राजनीति के मंझे खिलाडी भृकुटी तो छोडों, चेहेरे पर भी शिकन न आने दी। खैर अपने मोदीजी ने कहा कि, अहमदाबाद- लंदन सीधी उडान के अवसर पर पत्रकारों की इच्छा थी कि उन्हें उद्धाटन उडान में ले जाया जाये। पर उस वर्ष चुनाव के कारण यह नहीं हो सका। हालांकि एन डी ए सरकार थी, वे बोले।<br />प्रफुल जी हमारे पत्रकारों की टोली को आप लंदन घुमा लाओ। पटेलजी ने भी मोदी जी की बम्पर को मुंडी नीचे कर टाल दिया। मजेदार बात तो यह है कि, पिछले चार वर्षों में मोदीजी प्रफुल जी के साथ कई बार मंचस्थ हो चुके हैं।<br />मोदीजी को पत्रकार वापिस याद आये, वह भी चुनावी वर्ष में ! मोदीजी हैं। कभी भी कुछ भी कर सकते हैं !!!</span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-85771008271760960832008-04-19T04:13:00.000-07:002008-04-19T04:28:40.524-07:00गूगल आरती<a href="http://bp2.blogger.com/_jm1bq9jSw-4/SAnXPlARxYI/AAAAAAAAAFw/gzItn5cjOIA/s1600-h/madhur.JPG"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5190916708152493442" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 358px; CURSOR: hand; HEIGHT: 510px; TEXT-ALIGN: center" height="459" alt="" src="http://bp2.blogger.com/_jm1bq9jSw-4/SAnXPlARxYI/AAAAAAAAAFw/gzItn5cjOIA/s400/madhur.JPG" width="238" border="0" /></a><br /><div></div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-90179970071422846742008-04-15T11:01:00.001-07:002008-04-15T11:07:29.630-07:00आईआईएम अहमदाबाद का नया अर्थशास्त्र<p align="justify"><span style="font-family:verdana;">आईआईएम अहमदाबाद ने उसकी फीस में तीन गुना बढा़ तहलका मचा दिया। अब आपको आईआईएम अहमदाबाद का एमबीए होने के लिये रु. १२ लाख की फीस देनी होगी।<br />मानवसंसाधन मंत्री अर्जुनसिंह जो आईआईएम के पीछे हाथ धोकर पड़ गये थे, उन्होने शुरुआत में तो थोडी सी नाक भौं चढा़ई। पर, फिर वो भी चुप हो गये और फीस मंजूर हो गई। कईयो का मानना है कि अर्जुनसिंह की समस्या आईआईएम नहीं पर आईआईएम के पूर्व अध्यक्ष बकुल धोलकिया का अंदाजे बयां था। अपने समीर बरुआ ने उन्हे एक नया अर्थशास्त्र पढा दिया।<br /><br />बरुआ जी ने कहा कि एक लाख वार्षिक आय वालों की सम्पूर्ण मुफ्त पढा़ई। अन्यो को भी थोडी बहुत छूट । बरुआजी के अनुसार रु. छ्ह लाख की वार्षिक आय वालों को छूट छाट मिलेगी। उनका दावा है कि इससे ६५ प्रतिशत को लाभ मिलेगा। यह अर्जुनसिंह की ३३ प्रतिशत की मानसिक सोच से दो गुना निकला !!<br />बरुआ जी का कहना है कि बढती महंगाई और सरकार द्वारा वेतन वृद्धि के कारण यह बढोतरी की गई। अब अन्य आईआईएम और आईआईटी भी इस शानदार सोच पर विमर्श कर रहे है।<br />शुक्र है बरुआ जी ने यह नहीं कहा कि मासिक महंगाई के दर पर हर महिने फीस में परिवर्तन होगा। आशा है कि मुद्रास्फिति में कमी पर अपने बरुआजी फ़ीस कम भी करेंगे!!</span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-79942404404714942662008-04-15T10:49:00.000-07:002008-04-15T10:59:52.268-07:00भाजपा विद्यायक मधु श्रीवास्तव के कारनामे<div align="justify"><span style="font-family:verdana;">वडोदरा जिला के चम्बल स्टाईल दाढी मूछ वाले विद्यायक मधु श्रीवास्तव को बेस्ट बेकरी कांड ने मीडिया में पहचान दी। हट्टे कट्टे लम्बे चौडे़ मधु श्रीवास्तव इस कांड के कारण सुर्खियो में आते रहते हैं।<br /> पर होली पर तो उन्होने कमाल कर डाला। उनकी हुड्दंग सुर्खियों में छा गई। जलूस निकला। बेफिक्राना अंदाज से हवा में पिस्तोल से हवा में गोलिया दाग दी। बुरा हो टीवी वालों का, उन्होने मधु श्रीवास्तव की हवाई फायर की कैसेट चला डाली। उन पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया। मधुजी भी इस खेल के शातिर खिलाडी ठहरे। बोले भैय्ये ये तो नकली चाईना मेड बन्दूक थी। चढ़ बैठे पुलिस पर! तुम यह बताओ कि मेरे खिलाफ केस किस आधार पर दर्ज किया आपने।<br />पुलिस कह रही है बन्दूक असली थी और अपने श्रीवास्तव जी अडें हुए हैं कि नहीं वो नकली थी।राम जाने सच क्या है?<br />पर श्रीवास्तव जी का सुर्खी योग बरकरार है। मुम्बई एयर पोर्ट पहुंचे, लंदन जाने के लिये। अधिकारियों ने उनके कागजों की पडताल की तो मालूम चला कि अपने श्रीवास्तव जी तो विदेश जा ही नही सकते। कोर्ट ने उन पर यह बंदिश लगा रखी है। उन्हे हवाई जहाज में चढ़ने ही नही दिया, टिकट होने के बावजूद भी। एक और सुर्खी के साथ चमक गये श्रीवास्तव जी मीडिया में।</span> </div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-51836543073941007852008-04-10T10:27:00.000-07:002008-04-10T10:38:05.328-07:00मोदी, मिल्ट्री, मीडिया और माकटेल<p align="justify"><span style="font-family:verdana;">मिल्ट्री वालों की प्रेस कान्फेंस का अपना ही आकर्षण है। मुफ्त में दारु। गुजरात जैसे राज्य में तो यह विशेष आकर्षण है। दारुबंदी जो है यहां। आप फौजियों की प्रेस कांफ्रेंस में बेफिक्री से मदहोश हो सकते हैं।</span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">पर पिछले कुछ समय से फ़ौजियों की प्रेस कांफ़्रेंस सूखी ही रहती है। दारू तो छोडो बीयर भी नही मिलती है। काकटेल की जगह मॊकटेल परोस देते है, अपने फ़ौजी भाई। बोलो कोई चीयर्स कैसे करे। साफ़ है कई लोग तो आते ही नही हैं । कुछ आते हैं तो फ़ौजियो की शुष्कता को कोसते रहते हैं।</span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">अपने मित्रो के हित में हमने अपनी खोजी पत्रकारिता की सारी तरकीबे लगा दी। हमारे पास फौज में पत्रकारों की दारुबंदी का विश्वसनिय जवाब है। आप इसे हमारा 'स्कूप' कहें तो हमें काफी आनन्द होगा!हुआ यूं कि २००४ में वायुसेना के तत्कालिन एयर मार्शल पी. के. मेहरा, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने गये। इस औपचारिक मुलाकात में बातों बातों में मेहरा ने वेट के कारण महंगी हुई शराब की तर्ज पर फौजी की समस्या बयां की। </span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">आपको बता दें कि मेहराजी उस समय दक्षिण पश्चिम एयर कमांड के कमान्डर थे। कई राज्यों के सीमक्षेत्र वाली इस एयर कमान्ड का मुख्यालय गांधीनगर है।अपने मोदीजी को भी शायद इस मुद्दे की आशंका थी। तपाक से बोले, मेहराजी आपके फौजी सस्ती दारु को बाहर ब्लैक में बेचते हैं। आपकों यह तो मालूम होगा कि गुजरात में दारुबंदी है। मेहराजी बोले ऎसी बात है। और एक फौजी कमान्डर से गुजरात के कमान्डर ने वादा किया कि वे देखेगें कि इस प्रकार की घटना न हो। इस समझौते ( हां जी एमओयू ) के तहत फौजियों की शराब सस्ती हो गई।</span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">मेहरा ने मुख्यमंत्री के चैम्बर से बाहर निकल विंग कमान्डर टी के सिंगा को कहा कि देखो किसी सिवीलियन को दारु नहीं। बेचारे सिंगा क्या करते ? आदेश जारी हो गये। सबसे बडी समस्या सिंगा के लिये हुई ! उन्हे जनसम्पर्क अधिकारी के रुप में आये दिन पत्रकारों से पाला पडता था। पर फौज तो फौज है और सिंगा पहले फौजी फिर पीआरओ !</span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;">यह प्रथा नौ सेना में भी आ गई। उसका करण था उसके कमान्डर उत्पल वोरा का गुजराती होना। पहला गुजराती कमान्डर जैसी दर्जनों सुर्खिया बटोरने वाले वोरा ठहरे गुजरात के व्यापारी ब्रेन। उन्होने मध्यम मार्ग ढूंढ निकाला। नौ सेना के जहाज पर पत्रकारों को दारु पिलाओ। गुजरात की दारु बन्दी समुन्द्र में तो नहीं लगती।पर अपने भाई लोगों को दारु पीने वोराजी के जहाज पर पोरबन्दर जाना पडे़ ! बार बार यह थोडे ही सम्भव है।</span> </p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-50884516525815354632008-04-10T10:25:00.000-07:002008-04-10T10:43:03.418-07:00फ्लैट अर्थ न्यूज : मीडिया का नग्न सत्य<div align="justify"><span style="font-family:verdana;"></span></div><p align="justify"><span style="font-family:verdana;"> ब्रिटेन के खोजी पत्रकार निक डेवीस की नई पुस्तक फ्लैट अर्थ न्यूज ने मीडिया में तहलका मचा दिया है। फरवरी में प्रकाशित इस पुस्तक पर सेमीनारों में और रेडियो टीवी पर चर्चा हो रही है।<br />पुस्तक का शीर्षक स्पाट पृथ्वी समाचार है। जिस तरह पृथ्वी गोल है और कभी भी सपाट नहीं हो सकती है उसी प्रकार सही समाचार एक गलत कल्पना है।</span></p><p align="justify"><span style="font-family:verdana;"> डेवीस ने पुस्तक में कई ऎसे किस्से दर्ज किये हैं। मिलेनियम बग द्वारा दुनिया के कम्प्यूटरों पर वायरस के आक्रमण का समाचार दुनिया भर में १९९९ के अंत में छा गया। एंटी वायरस उद्योग के लिये यह अरबो खरबों कमाने का धंधा बन गया। फिर क्या ?<br />निक डेवीस खोजी पत्रकार के रुप में प्रतिष्ठित हैं। उनका कहना है कि समाचारों को दुनिया जासूसी संस्थाओं और पी आर कम्पनियों की कारस्तानियों का अड्डा बन गया है। खर्चा कम करने के नाम पर खबरों की सच्चाई जानने के प्रयत्नों पर जोर नही दिया जाता है। पत्रकार दो तीन फोन कर जानकारी इकट्ठा कर लेते हैं। अधिकतर समाचार प्रेसनोट को रिराईट कर बनाये जाते है। अधिकारिक जानकारी के नाम पर सरकारी अधिकारी का बयान ले छुट्टी पा ली जाती है।<br />इस पुस्तक की लोकप्रियता का कारण यह है कि पत्रकार जानते है डेवीस की बात में काफी दम है। अपने २७ वर्षों के पत्रकारिता के अनुभव के आधार पर मैं यह कहता हूं कि डेवीस की किताब एक नग्न सत्य है। मीडिया के बारे में !<br />डेवीस ने इस पुस्तक की वेबसाइट भी बनाई है। मजेदार बात यह है कि इस वेबसाइट पर प्रतिक्रिया देने वाले पत्रकार बडा नाम है। पर इन सभी के नाम के साथ जुडा़ शब्द भूतपूर्व मीडिया की ताकत दर्शाता है। साफ है कि कामकाजी पत्रकार मीडिया की टीका कर अपने साथियों और मालिकों से दुश्मनी मोल नही लेना चाहता। प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ भी लिखने वालों की विडम्बना यह है कि वे खुद इस माफिया की गुलामी स्वीकर कर स्वतंत्रता-स्वतंत्रता के खेल से लोगों को गुमराह कर रहे हैं। </span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-66005280660142456482008-04-10T08:56:00.000-07:002008-04-10T09:02:58.952-07:00पुलित्जर पुरुस्कार<p align="justify"><span style="font-family:verdana;"> इस सप्ताह पत्रकारिता में प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरुस्कार की धोषणा हुई। १४ में से छह पुरुस्कार प्राप्त कर वाशिंगटन पोस्ट छाया रहा। १९१७ में शुरु हुए इस पुरुस्कार ने विश्व स्तर पर अपना स्थान बना लिया है।<br />इस पुरुस्कार की शुरुआत इसके प्रणेता जोसेफ पुलित्जर के निधन के बाद हुई। पुलित्जर ने उनकी वसियत में इस पुरस्कार के लिये राशि निश्चित की थी। साथ कोलम्बिया युनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म का प्रावधान किया था।<br />पुलित्जर की कहानी एक संधर्षशील पत्रकार प्रकाशक की कहानी है। उसने उसके जीवन काल में भ्रष्टाचार के विरुध अभियान चलाया । पुलित्जर प्राईज के द्वारा उन्होने उनके अभियान को एक सतत अभियान बना दिया। इस प्राईज की विशेषता यह है कि इसकी जूरी को नियमो में परिवर्तन की छुट दी गई है। इससे इसमे नई श्रेणियों का समावेश भी हुआ है। हंगरी के सम्पन्न परिवार में जन्में जोसेफ पुलित्जर का जन्म १० अप्रैल १८४७ में हुआ। प्रतिवर्ष अप्रैल में ही पुलित्जर प्राईज दिये जाते हैं। उनकी इच्छा फौज में जाने की थी। पर कमजोर स्वास्थ्य और दृष्टि के कारण वे इसमे सफल नहीं हुए। कलम के सिपाही के रुप में वे एक अन्तराष्ट्रीय व्यक्तित्व बन गये।<br />सामान उठा और होटल में वेटरगिरी करने वाले पुलित्जर का भाग्य भी एक आकस्मिक घटना से खुल गया। एक दिन एक लाईब्रेरी में उन्होने दो शतरंज के खिलाडियों को कुछ चाले समझाई। ये खिलाडी काफी प्रभावित हुए। उन्होने पुलित्जर से काफी चर्चा की। ये दोनों जर्मनी के मशहूर अखबार के सम्पादक थे। उन्होने पुलित्जर को नौकरी दी। और वह पत्रकार बन गया।<br />२५ वर्ष की उम्र में वह प्रकाशक बन गया। सुबह से रात तक काम करने वाले पुलित्जर ने खोजी पत्रकारिता पर जोर दिया। जल्द ही वह और उसका अखबार मशहूर हो गये। उन्होने आर्थिक संकट में फंसे न्यूयोर्क वर्ल्ड को खरीद उसकी भी कायापलट दी।<br />पर खराब स्वास्थ्य के कारण ४३ वर्ष की उम्र के बाद वे कभी अखबार के कार्यालय में नहीं गये। इसी दौरान उन्हे आवाज से एलर्जी हो गई और दो दशक तक अपनी नौका में एक साउन्ड प्रूफ़ कमरे में ही रहे। इसे लोग टावर ऑफ साइलेन्स के नाम से पुकारते थे।<br /> इसी समय के दौरान व्यवसायिक स्पर्धा में उन्हें कई अखबारों का सामना भी करना पडा़। १९११ में उनका निधन हो गया। १९१२ में कोलम्बिया स्कूल ऑफ जर्नलिज्म की शुरुआत हुई और १९१७ में पुलित्जर पुरुस्कार की।</span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-21495197794183985342008-04-02T11:03:00.000-07:002008-04-02T11:05:35.288-07:00गुजरात पर रिसर्च के लिये विधानसभा लाइब्रेरी!<div align="justify"><span style="font-family:verdana;">अपने गुजरात विधान सभा के नये अध्य्क्ष आजकल विधान सभा के पुस्तकालय का उपयोग बढाने मे लगे हुए है । ७७००० से अधिक पुस्तकों वाले इस पुस्तकालय की विडम्बना यह है कि किताबे पढने वाला कोई नही है। इसके सदस्य केवल १८२ विधायक और विधानसभा के सदस्य ही है। मुश्किल से एक दर्जन विधायक इसका उपयोग करते हैं।<br />जनवरी मे विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद अपने भट्ट्जी ने लाइब्रेरी का जब दौरा किया तब यह बात बाहर आई। उन्होने सभी विधायकों को इस पुस्तकालय का उपयोग करने को कहा। विधान सभा के बजट सत्र के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत मे उन्होने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गुजरात पर रिसर्च करना चाहता है तो वे उसे लाइब्रेरी की पूरी सुविधा देंगे। विधानसभा की कार्ववाही का रिकार्ड राज्य के ईतिहास का एक अनोखा रूप है।<br />अपने भट्ट्जी ठहरे मीडिया गुरू। उनका कहना है कि नर्मदा पर हुई बहस नर्मदा के कार्य का एक अधिकारिक दस्तावेज है। इसी प्रकार राज्यपाल का विधानसभा को सम्बोधन राज्य की प्राथमिकताऒ के बदलते स्वरूप को प्रतिबिम्बित करता है। किसी भी पी एच डी छात्र के एक अच्छे गाईड बन सकते हैं अपने भट्टजी! अखबारवालो को अच्छी कापी देने मे तो माहिर हैं ही अपने भट्टजी । यह समाचार इसका एक अच्छा उदाहरण है।<br />आज भट्ट्जी से मिलना हुआ। उन्होने एक डिजाईनर को बुलाया हुआ था। एक अच्छे रिसर्च हाल की रूपरेखा दे रहे थे। बोले ब्रिटिश लाइब्रेरी के मैनेजर सतीश देशपांडे जैसे एक्सपर्ट की सलाह ले इसे एक ऎसी लाइब्रेरी बनाना है जिसमे लोग शांति से पढ सके और चाहे तो उन मुद्दों पर चर्चा कर सकें !! भट्ट्जी का आफ़र सभी के लिये है, कोई भी उनका सम्पर्क कर सकता है.</span></div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-22984115088292280542008-04-02T08:37:00.000-07:002008-04-02T08:39:31.396-07:00फ़र्जी मुठभेड हीरो वणजारा को मानवाधिकार याद आया<div align="justify"><span style="font-family:verdana;"></span></div><p align="justify"><span style="font-family:verdana;"> गुजरात के बाहोश अफ़सर डी जी वणजारा और उनके साथी आला अफ़सर आजकल काफ़ी परेशान है। उनके वकील का कहना है कि पुलिस उनकी तौहीन कर रही है। पुलिस उन्हे हथकडी पहनाने की बात कर रही है। वणजारा और उनके साथी सोहराबुद्दिन की फ़र्जी मुठ्भेड के लिये आजकल साबरमती जेल मे हैं ।<br />कुछ समय पहले वणजारा ने अस्वस्थता की शिकायत की थी। जेल के डाक्टर का कहना था कि सिविल अस्पताल ले जाओ इन्हे। उन्हे ले जाने के लिये पुलिस बुलाई गई। इन्सपेक्टर ने हथकडी लगाने की बात की। वणजारा आग बबुला हो गये। बोले कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ़ है।<br />कुछ दिन बाद यही घटना एक अन्य अफ़सर के साथ हुई। उन्होने भी आग बबुला हो पुलिस के साथ जाने से इंकार कर दिया। सोहराबुद्दिन की फ़र्जी मुठ्भेड और उसकी बीबी को जिंदा जलाने के किस्से मे गुजरात और राजस्थान पुलिस के एक दर्जन पुलिसवाले जेल मे हैं । इनमे तीन आइ पी एस अधिकारी है।<br />इनके वकील ने अहमदाबाद के एक अदालत मे शिकायत की है और कहा है कि वणजारा और उनके साथी आला अफ़सरो के साथ पुलिस का व्यवहार मानवाधिकार भंग का मामला है। देखा फ़र्जी मुठभेड वालो को भी मानवाधिकार याद आता है, जब खुद का किस्सा होता है।खैर जिस अदालत पर लोग मानवाधिकार का गलत पक्ष लेने की बात करते है, उसने इस किस्से मे पुलिस के आला अफ़सरो को १४ अप्रैल को हाजिर होने को कहा है जहा उनसे पूछा जायेगा कि वो वणजारा और उनके साथी आला अफ़सर को हथकडी लगाने की बात क्यों करते हैं ?</span></p>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-67933729340660811562008-04-01T04:39:00.000-07:002008-04-01T04:43:47.112-07:00अब शेर हाथी दत्तक लो !<div align="justify"><span style="font-family:verdana;">अहमदाबाद नगर निगम एक अनोखी योजना लाया है। आप इसके प्राणी संग्राहलय के किसी भी प्राणी या पक्षी को दत्तक ले सकते है। हम यह स्पष्ट कर दे कि आप इन्हें घर नहीं ले जा सकते हैं । पर इनके घर के बाहर आप्के नाम की तख्ती लगी होगि जो आपको और अन्य को यह बतायेगी कि इसके पालक पिता या माता आप हैं।<br />आप इनसे मिलने जा सकते हैं। आप इनकी खाने पीने और रहने की व्यवस्था के बारे मे संग्राहलय के अधिकारी की कान खिचाई कर सकते हैं। संग्राहलय के अधीक्षक डा आर के साहू का कहना है कि काफ़ी लोग इसमे रस ले रहे हैं। ऎक व्यक्ति अपने पुत्र की सालगिरह पर एक चिडिया दत्तक लेने का विचार कर रहा है। उसका कहना है कि जन्मदिन का खर्चा चिडिया के नाम !<br />साहू के अनुसार यह प्राणी संग्राहलय को फ़ंड तो दिलवायेगा ही, साथ ही यह अहमदाबाद के लोगो मे प्राणी प्रेम भी बढायेगा।<br />आप दत्तक लेना चाहते है किसी को । चिडिया का एक साल का रू ३६००, हाथी का रू २.५८ लाख, हिप्पोपोटोमस का १.५१ लाख और चीते का १.<span class="">२६ लाख </span></span></div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-15573111944209908482008-03-31T20:44:00.000-07:002008-03-31T20:47:36.060-07:00नोट को सम्मान दो<div align="justify"><span style="font-family:verdana;">नोट को सम्मान कौन नही देता है ? नोट के लिये तो लोग क्या नही करते? लक्ष्मी की पूजा करते है। भगवान से सौदा करते हैं। कहते हैं कि हे भगवान हमें इतने पैसे दे दो, हम तुम्हे ये दे देंगे। कटकी बोलो या फ़िर कहो कमीशन।<br />पर नोट यानी कि कागज़ के नोट की तो हालत खस्ता है। लोग इस पर ना जाने क्या क्या लिखते हैं ? जरा सोचो कितना महंगा राईटिंग पैड होता है यह लिखा हुआ नोट। लोग फ़ूलों की माला पहराते हैं। पर कितने महंगे फ़ूल खरीदे जा सकते हैं। और फ़िर गले से फ़ूल उतरे नहीं कि गये कचरे की टोकरी में।<br />नोटों की माला पहनाओ और अगले को उसकी कीमत बताओ। और उसके दरबार मे अपना रुतबा बढाओ!</span></div><div align="justify"><span style="font-family:verdana;">कितना जोरदार ख्याल है? लोग करते ही हैं यह सब। पर अपने रिजर्व बैंक का मानना है कि यह सब तो बेचारे नोट का अपमान है। नोट भगवान है, रिजर्व बैंक का कहना है। वो इंसान के गले का हार कैसे बन सकता है। रिजर्व बैंक ने हाल ही मे सभी से अपील की है कि नोट भगवान है उसे सम्मान दो। मान गये अपने रिजर्व बैंक के इस अध्यात्म दर्शन को।<br />बोलो जै नोट भगवान की!!!!</span></div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-6189194188952035652008-03-31T20:24:00.000-07:002008-03-31T20:28:09.697-07:00अहमदाबाद में सस्ती शराब<div align="justify"><span style="font-family:verdana;">आहमदाबाद और शराब । पूरे गुजरात मे जब शराबबंदी है, तब अहमदाबाद मे शराब कैसे मिल सकती है? वो भी सस्ती शराब ! आज अहमदाबाद के एक अखबार ने पहले पन्ने पर सस्ती शराब के समाचार छापे। अखबार का कहना है कि यह पुलिस द्वारा पकडी गई शराब है। यह ४० से अधिक उम्र वालों को ही मिलेगी। पहले आओ, माल पाओ।<br />रिपोर्टर ने अपनी तरफ़ से काफ़ी मेहनत भी की लगती है। उसने यह भी बताया है कि सरकारी दुकान पर क्या भाव है और सस्ती शराब का क्या दाम है। महिलाओं और बालकों को दारू नही बेची जायेगी । उम्र का सबूत लाना जरूरी है।<br />भैये यह है अंदाज अपने अहमदाबाद के एक अखबार के अप्रैल फ़ूल मनाने का। यह अखबार है संदेश । गुजरात समाचार का अंदाज ही अलग है। अखबार मे सूचना है कि यदि अखबार के गिफ़्ट कूपन मे सूर्य का निशान पाओ तो हमसे रु१,००० ले जाओ!!<br />यह तो आप को गुजरात मे अप्रैल फ़ूल की एक झलक बतलाने के लिये है, आपका अप्रैल फ़ूल बनाने के लिये नही।</span></div>Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-48591298555894589722008-02-27T05:11:00.001-08:002008-02-27T05:13:17.184-08:00मीडिया मास्टर भट्टजीसुर्खियों में कैसे छा जाना यह तो सीखे कोई वरिष्ट भाजपा नेता अशोक भट्ट से। विषय कोई भी हो , हमारे भट्टजी उसे मीडिया में इस तरह से उछाल सकते हैं जैसे अपने धोनी भाई किसी भी खिलाडी की बॉल को बाउन्ड्री तक पंहुचाते है।<br /><br />सबसे अधिक बार निर्वाचित विधायक का भट्टजी का रिकार्ड खुद ही एक बडी उपलब्धी है। इसे कोई संयोग कह सकता है। पर कानून मंत्री के रुप में जिस तरह से उन्होने सुर्खिया बटोरी इसने एक बात तो सिद्ध कर दी कि कानून मंत्रालय तर्क आधारित बोरिंग विषय का मन्त्रालय नहीं है।<br /><br />अब विधानसभा के अध्यक्ष के नाते, विधानसभा की कार्रवाई में उनकी भूमिका उन्हे हर रोज अखबारों में जगह दिलवाती है। यह तो उनके पद से जुडी कार्रवाई है। पर हमारे भट्टजी तो भट्टजी हैं। विधानसभा के अंदर ही नही, वे तो बाहर भी काफ़ी सक्रिय है।<br /><br />पिछले हफ़्ते कुछ पत्रकार उनसे मिलने पहुंचे। मुद्दा था विधानसभा का प्रवेश पास। भट्टजी के लिये यह कोई बडी बात नहीं थी। बोले नो प्रोब्लम। चाय-पकौडे खाओ। और फिर उन्होने बताया कि किस तरह विधानसभा की समृद्ध लायब्रेरी विधायकों की उदासीनता का शिकार है।विधायक उसका उपयोग ही नहीं करते। इसलिये उन्होंने पत्र लिख विधायकों से आग्रह किया है कि वे पुस्तकालय का उपयोग करें!<br /><br /> पत्रकार कोई प्रतिक्रिया दे, उससे पहले ही उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक भी विधानसभा का अंग हैं। भट्टजी उनके अनुभव और ज्ञान का पूरा उपयोग करना चाहते हैं। और उन्होंने इन पूर्व विधायकों के लिये विधानसभा लाउन्ज में बैठने की इजाजत दे दी हैं!!<br /><br />भट्टजी का मूड देख पत्रकारों ने कहा कि विधानसभा कैन्टीन सब्जी मार्केट जैसी हो गई है। पत्रकारों को बैठने के लिये जगह भी नहीं होती। कुछ करो। भट्टजी बोले तथास्तु। और जैसे ही पत्रकार इस हफ़्ते कैन्टीन में गये उन्होंने देखा कि कैन्टिन में पत्रकारों के लिये एक अलग पार्टींशन हो गया था!!!<br /><br /> मोदीजी के राज में पिछले पांच वर्षो में अपने भट्टजी सुर्खीयां तो मार लेते थे, पर पहले की तरह पत्रकारों के साथ भोजन मिलन नहीं कर पाते थे। वो क्या किसी भी मंत्री की हिम्मत नहीं थी कि मोदीजी के जुबानी फरमान का उल्लंघन कर पत्रकारों के साथ चाय भी पी ले। खाने की बात तो छोडो। मोदीजी ने सबकी बोलती बंद कर रखी थी।<br /><br />खैर अब तो अपने भट्टजी अध्यक्ष सर्वोपरी हैं। जिस दिन अध्यक्ष बने तब पत्रकारों को नये घर पर खाने पर बुला लिया। और विधानसभा के तीसरे दिन ही पत्रकारों को सर्किट हाऊस में दावत का ऐलान किया।<br /><br /> अपने भट्टजी तो गृह में और गृह के बाहर पूरी तरह से प्रोफेशनल हैं। खाने से पहले पत्रकारों से दो मिनट के लिये मिले। बोले मैंने २९ फरवरी से तीन दिन के लिये ज्ञान शिविर का आयोजन किया है। गुजरात और बाहर से विभिन्न विषयों के विद्वान विधायकों को संसदीय इतिहास, परम्परा और प्रणाली से अवगत करायेंगे।<br /><br />पूरे देश में पहली बार। लोकसभा के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी खुद आयेंगे इस शिविर में भाग लेने। देखा अपने मीडिया मास्टर भट्टजी की सुर्खीबाजी की दक्षता!!!! क्या कोई रिर्पोटर इस खबर को मिस कर सकता है। और भट्टजी का माल पानी जीमने के बाद पत्रकार यह राष्ट्रीय समाचार बनाने में लग गये।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-20322690144852444702007-12-11T19:51:00.000-08:002007-12-11T19:52:34.248-08:00मोदीजी के लियी दिल्ली नही आसांभाजपा ने आडवाणी को उसके प्रधानमंत्री के रूप मे जनता के सामने पेश किया है। सभी अचम्भे में हैं कि यह क्यॊ हो रहा है? दिल्ली के अखबार इसे मोदी के लिये स्पष्ट संकेत के रूप मे देख रहे हैं कि भैया दिल्ली दूर है गांधीनगर मे ही संतुष्ट रहो। गुजरात मे चुनाव के प्रथम चरण की पूर्व संध्या पर इस प्रकार का निवेदन वास्तव मे काफ़ी रहस्यमय है।<br /><br />ऎसे मे प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह भी चुस्की लेने से बाज नही आये। जब वडोदरा मे पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यह क्या है, तो तपाक से बोले कि यह मोदी को दिल्ली से दूर रखने का उपाय है। भाजपा के नेता खुद मोदी से डरे हुए हैं ।इससे अधिक वेधक और कोई जवाब शायद ही हो सकता था।<br /><br />अहमदाबाद मे आये तो यहा भी यह सवाल उन्हे पूछा गया। उनका जवाब था कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। उसी सांस मे बोले कि भाजपा ने आडवाणी को ऎसे पद के लिये उम्मीदवार बनाया है जो अभी खाली ही नही हुआ है !<br /><br />अंदर का मामला कुछ भी हो, एक बात तो साफ़ है कि अरूण शौरी से ले और सभी नेता जो मोदी को प्रधानमंत्री के रूप मे बता रहे थे उनकी बोलती बंद हो जायेगी। भाजपा जहां खाना खाने जैसा काम भी रण्नीति का ही एक भाग होता है, वहां उसके नेता शायद अभी से ही दिल्ली वालॊं के लिये दिल्ली रिजर्व कर रहे हैं। मोदी अगर गुजरात हार जाते हैं तो उनका खाली दिमाग दिल्ली की कुर्सी के लिये षडयंत्र रचना शुरू न कर दे!!!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-2247353060509354712007-12-07T20:05:00.000-08:002007-12-07T20:10:33.971-08:00देते है भगवान को धोखा...उपकार फ़िल्म के मशहूर गाने कस्मे वादे प्यार वफ़ा, सब वादे हैं वादों का क्या इस गाने की कडियां आज अहमदाबाद के अखबारॊ मे चमक रही हैं । यह उमा भारती की भारतिय जनशक्ति पार्टी के विज्ञापन का शीर्षक है। देते है भगवान को धोखा, इन्सा को क्या छोडेंगे..। फ़िल्म मे यह गाना प्राण पहली बार उन्हे मिली अच्छे आदमी की भूमिका मे गातें है। पर यह विज्ञापन अपने को हिन्दु ह्र्दय सम्राट कहलवाने वाले मोदी को प्राण की विलन की भूमिका मे दर्शाता है ।<br /><br />आधा पन्ने के इस विज्ञापन से उमा भारतीजी के उम्मीदवार यह कह रहे हैं कि मोदी ने हिन्दुत्व का नाम ले वोट बटोरे हैं और बाद मे हिन्दुऒं को धोखा दिया है।इसमे मोदी का एक मुसलमान के साथ विचार विमर्श करते हुए फ़ोटो है। एक दूसरा कवितामय बयान है, पांच साल-मोहम्मद अली जिन्दाबाद, चुनाव के समय याद आये हिन्दुवाद, वाह रे भाजप तेरा अवसरवाद। टूटा हुआ त्रिशूल मोदी के टूटे हिन्दूत्व को बतलाता है।<br /><br /> मोदी ने हिन्दुऒ को क्या क्या वादे किये थे और वो अभी तक पूरे नही किये यह कहकर विज्ञापन कहता है -ये सब सारे संत हैं, मोदी तेरा अंत है।<br /><br />चुनाव परिणाम जो भी आये, आजकल गुजरात के मतदाता चुनाव प्रचार की चुस्किया ले रहे हैं!!!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-31069686961187208502007-12-07T10:06:00.000-08:002007-12-07T10:08:32.126-08:00कांग्रेस राहुल गांधी पर सट्टा खेलेगीकांग्रेस ने आखिरकार राहुल गांधी को गुजरात के जनमत संग्राम मैदान मे उतारने का निर्णय कर लिया है। राहुल रविवार को सूरत शहर मे उनका रोड शो करेंगे। रविवार प्रथम चरण के प्रचार का आखिरी दिन है। साफ़ है कि उन्हे चुनाव मे काफ़ी देर से उतारा जा रहा है।<br /><br />रहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के चुनाव मे क्या गुल खिलाये यह सभी को मालूम है। और हाल ही मे शराब के पक्ष मे उनके खुले विचार खुले रूप मे रख उन्होने एक और विवाद को न्योता दे दिया है। आज जब कांग्रेस गुजरात मे नशाबंदी की पैरवी कर रही है तब चुनाव प्रचार मे राहुल को बुलाना यानि कि आ बैल मुझे मार की स्थिती पैदा करना है।<br /><br />राहुल का सूरत प्रचार पांच बैठकों को प्रभावित करेगा। ये हैं सूरत उत्तर, पूर्व, पश्चिम, चोर्यासी और ओलपाड। सुबह ११ से शाम ५ तक राहुल यहां प्रचार करेंगे। साफ़ है कि भाजपा इस मौके को नही छोडेगी। और कांग्रेस के पास कोई बचाव भी नही है!!!!! पर राहुल ठहरे सोनिया पुत्र, बेचारे कांग्रेसियों को मैडम की गुड बुक मे रहना है या नही?Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-51877899574932164612007-12-07T02:50:00.000-08:002007-12-07T03:00:30.793-08:00भाजपा का गरीबी मुक्त गुजरात का वादाआखिरकार भाजपा ने उसका चुनावी धोषणा पत्र जारी कर ही दिया। उसकी भाषा में कहें तो उनका संकल्प पत्र।<br /><br />कांग्रेस ने गरीबों को कलर टीवी देने का वादा किया है तो अपने भाजपाईयों ने तो गुजरात में सभी को घर देने क वादा किया है। उस घर में चौबिस घंटे बिजले होगी।<br /><br />रही बात किसानों की। सभी किसानों के खेतों में कुओं पर बिजली कनैक्शन होगा। नहरों में सिंचाई के लिये पानी होगा।<br /><br />इन्दिरा गांधी के दिनों की याद दिलाता हुआ उसका नारा है, गरीबी मुक्त गुजरात! प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि पांच वर्ष बाद गुजरात में “गरीबी रेखा से नीचे” शब्द ही नहीं होगा।<br /><br />भाजपा के इस गुजरात में सभी साक्षर होंगे। सभी के घर में नल होंगे जिसमें गुणवत्ता वाला पेयजल होगा। सभी गांव शहरों से मजबूत ऑल वेदर सड़कों से जुडे होगें। युवा शक्ति को रु.१००० करोड के रिवालविंग फंड के द्वारा सक्रिय शक्ति बनाया जायेगा।<br /><br />यह सब कैसे किया जायेगा, इसके लिये कितना धन ख्रर्च होगा, वह कैसे जुटाया जायेगा जैसे प्रश्नों के उत्तर मे भाजपाई नेताओं का कहना है कि यह मत पूछों। हम यह सब कर लेंगें!!<br /><br />भाजपा के चुनावी प्रमुख मुद्दे इस तरह है-सुरक्षित, सलामत और समृद्ध गुजरात, गुजरात १२ प्रतिशत वृद्धिदर हासिंल करेगा, सकल घरेलु उत्पादन दुगना और प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय रु.८०,००० होगी, पारदर्शक और प्रामाणिक राज्य व्यवस्था, गरीबी मुक्त गुजरात, सभी घर विहीन परिवारो को घर, प्राथमिक शिक्षा में १०० प्रतिशत पंजिकरण और शून्य ड्रोप आउट, सभी घरों में नल द्वारा शुद्ध पीने का पानी, गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले परीवार के लिए सर्वग्राही स्वास्थ्य विमा कवच, सभी गांवों को बारह मास पक्का रास्ता ।<br />स्वस्थ,स्वच्छ और निर्मल गुजरात,युवाशक्ति का विकासशील उपयोग, रिवोल्वींग फंड के रचना, बच्चों और वृद्धों की विशेष देखभाल, वंचितों के विकास के लिये विशेष योजना, उद्योग,वाणिज्य और ढांचागत क्षेत्र में वैश्विक स्तर, स्थापित विधुत ऊर्जा में दुगना कर २०,००० मेगावॉट।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-31874059430356287672007-12-06T20:36:00.000-08:002007-12-06T20:40:41.171-08:00चुनाव का आतंकी खेलशान्ती सुरक्षा और विकास की बातें करते करते कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आतंकवाद की बातें करने लग गये हैं । भाजपा ने कल एक विज्ञापन दिया था। उसमे बताया गया था कि भाजपा के शासन मे गुजरात में तो केवल एक निर्दोष ही मरा है।दूसरी ओर UPA के शासन मे ५६१९ । मजेदार बात यह है कि इस विज्ञापन मे केवल गुजरात के शासन के चार वर्षो की बात कही गई है। साफ़ है कि यदि मोदीजी के ६ साल ले तो गोधरा और अक्षरधाम भी आ जाये और फ़िर यह आंकडा काफ़ी बडा हो जाये!और फ़िर मोदीजी यह मुद्दा उठा ही नही सकते !<br /><br />आज कांग्रेस ने विज्ञापन दिया है। उसमे NDA सरकार के समय के आंकडे दिये गये हैं । विज्ञापन देख लगता है कि UPA सरकार के कार्यकाल मे तो आतंकवाद की कोई घटना ही नही हुई है। मोदीजी और कांग्रेसियों दोनों को लगता है कि जनता बेवकूफ़ है। आज के जमाने मे जब लोगो के पास जानकारी के बहुत सारे माध्यम हो गये हैं इस प्रकार की सोच राजनीतिक दलों का बेवकूफ़ी का एक खुला प्रदर्शन नही तो और क्या!!!!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-63628054091000404022007-12-06T01:43:00.000-08:002007-12-06T01:44:00.121-08:00मोदी के विकासवाद का हिन्दू चेहराअपने मोदीजी ने इस बार चुनाव मैदान मे विकास का नारा लगाया। पूरे देश मे उनके समर्थकों ने कहा कि विकासवाद और राष्ट्रवाद ही मोदीजी का पर्याय है। वे देश की शक्ती हैं यह नारा लगने लगा। खैर अब पूरी दुनिया को मालूम पड गया है की मोदीजी का विकासवाद उनके हिन्दुवाद का ही स्वरूप है। अब वो सोहराबुद्दीन को मारने की ही बात कर रहे हैं ।<br /><br />आज पूरे देश मे चर्चा है कि मोदीजी ने कितनी महिलाऒ को टिकट दी है। उन्होने कितने नये चेहरों को शामिल किया है। पर क्या किसी ने गौर किया है कि एक भी मुसलमान को टिकट नही दी गई है। गुजरात मे १३ प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं। १८२ बैठके है । २००२ में भी एक भी मुसल्मान को टिकट नही दी गई थी। क्या उसे एक भी उम्मीदवार नही मिल रहा है। आज हरिजनो और पिछडो को टिकट दे पार्टी यह जाहिर कर रही है की वह कितना समतोल विकास कर रही है।<br /><br />क्या हम राज्य के १३ प्रतिशत नागरिकों को नजर अंदाज कर राज्य का विकास कर सकते हैं ? क्या मोदीजी यह जताना चाहते हैं कि मुसलमानों को जो मिले जैसे मिले उससे ही संतोश कर लेना चाहिये क्योकि गुजरात हिन्दु राष्ट्र है!!!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-71748836562624258222007-12-05T23:44:00.000-08:002007-12-05T23:45:12.615-08:00अब आचार्य धर्मेन्द्र उतरे मैदान मेइस चुनाव मे गुजरात सम्तों का चुनावी अखाडा बन गया है। चुनाव की घोषणा से पहले ही सम्तों ने यह सम्केत दे दिये थे कि वे मुख्य मंत्री मोदी के साथ नही हैं। पर मोदीजी का शयद यह मानना था कि और सभी की तरह साधु संत भी उन्ही की वजह से उनकी दुकाने चला रहे हैं।<br /><br />पर उमा भारती पहली थी जिन्होने उनके इस विचार को तोडा। उतार दिये ५३ उम्मीदवार मैदान मे। बाद मे गुलांट मार गई। पर उनके बंदे तो अभी भी मैदान मे अडिग खडे हैं। किसी को मालूम ही नही उमाजी किस खेमे मे हैं। उनके साक्षात्कार तो यह कहते हैं कि वे मोदी की बहन बन उनके साथ है। पर, उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष सघंप्रिय गौतम जी कहना है कि वे पूरी तरह से मोदी के खिलाफ़ मैदान मे हैं।<br /><br />अभी यह अनिश्चिता खत्म हुई नही है कि आचार्य धर्मेन्द्र मैदान मे कूद पडे हैं। उनका कहना कै कि वे राष्ट्रिय विचारधारारा के साथ हैं। उन्होने इसके लिये नागरिक जागरण मंच भी बनाया है जिसका नारा है-जीता है भारत, जीतेगा भारत!! पत्रकारों के लाख पूछने पर भी उन्होने यह नही बताया कि वो किसके साथ हैं !!!! फ़िर किसका क्या साथ देंगे धर्मेन्द्रजी।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-3405384771951570272007-12-05T20:34:00.000-08:002007-12-05T20:35:14.752-08:00मोदी के ये NRG प्रेमीसुना है कि अमेरीका मे मोदी प्रेमियों ने एक अभियान शुरू किया है। नोट और वोट से मोदी की मदद के लिये। उन्हे मालूम है कि मोदी का नाम आते ही गुजरात के दंगो की बात आयेगी । इसका जवाब उन्होने अमेरीका के अंदाज मे ही तैयार कर लिया है। उनके समर्थक अमेरिका में कह रहे हैं कि जैसे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल को केवल उनकी गर्ल फ्रेंड मोनिका लेवंसिकी से सेक्सी रिश्तों की नजर से ही देखना ठीक नहीं होगा, उसी प्रकार मोदी को केवल गुजरात दंगों से ही देखना उचित नहीं होगा। <br /><br />इन मित्रों का कहना है कि मोदी को भारत को श्क्तीशाली बनाने के लिये जिताना हरूरी है!!!<br /><br /><br />मोदी की सहायता के लिए बना है 'सपोर्ट गुजरात फोरम । उसने 'एनआरजी' को पकड़ने के लिए टीवी, रेडियो, ई-मेल, एसएमएस आदि साधनों का सहारा लिया है। फोरम ने विदेश मे बसे गुजरातियों से अपील की है कि वह गुजरात में अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और दोस्तों को ई-मेल और टेलिफोन करके 'मोदी भाई' को जिताने के लिए पूरी कोशिश करें। न्यू यॉर्क के एक पॉपुलर रेडियो स्टेशन को सपोर्ट गुजरात ने एक विशेष इन्टरव्यू में कहा है कि मोदी को केवल गुजरात दंगों की नजर से देखना ठीक नहीं होगा। सपोर्ट गुजरात ने इश मौके पर कहा कि क्या पूरी दुनिया में दंगे नहीं होते? पाकिस्तान, फ्रांस, लोस ऐंजिलिस में भी दंगे होते हैं। <br /><br />विदेश में मोदी के प्रचारक दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इतिहास रचा है, वह कर दिखाया है जो पिछले 50 सालों में भारत में नहीं हो पाया। मोदी की दूरदृष्टि और फिलॉसफी रही है- ज्ञान शक्ति, ऊर्जा शक्ति, जल शक्ति, जन शक्ति और रक्षा शक्ति। सपोर्ट गुजरात का दावा है कि अब गुजरात आतंकवाद से मुक्त है जबकि अन्य राज्यों में यह एक बड़ी समस्या है। इंटरव्यू में यह पूछे जाने पर कि गुजरात दंगों के लिए मोदी ही को जिम्मेवार माना जाता है, सपोर्ट गुजरात ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में गुजरात से 3 गुना ज्यादा लोग सिख दंगों में मारे गए थे, मगर उसकी कोई बात नहीं करता। <br /><br />हमे यह जान कर बहुत खुशी हुई की अपने ये गुजराती भाई अमेरिका मे बैठ कर भी गुजरात का कितना ख्याल रखते है। हे मित्रो गुजरात को आप जैसे हितेछुऒं की जरूरत है। आप और मोदी मिलकर गुजरात को दुनिया का नम्बर वन बनायें। आज जब गुजरात को मोदी ने स्वर्ग बना दिया है तो आप इस स्वर्ग का आनन्द लीजिये। यहा आईये और गुजरात को देखिये। मोदीजी की प्रचार सी डी मे तो बहुत देख लिया!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-30334326210847873592007-12-05T10:22:00.000-08:002007-12-05T10:23:11.826-08:00मोदी का मुखोटे के पीछे का चेहरामोदी केवल विकास की हे बात करना चाहते हैं । वे गोधरा या अन्य किसी ऎसे मुद्दे पर चर्चा नही करना चाहते जो अदालत के समक्ष हो। पिछले काफ़ी समय से ये बाते दोहराने वाले मोदी अब जहां भी जाते हैं, सोहराबुद्दिन की मुठभेड की चर्चा जरूर करते हैं । लोगो से यह भी पूछते हैं कि सोहराबुद्दिन का मर्डर नही करता तो क्या करता?<br /><br />आज जब सुप्रीम कोर्ट मे यह मामला है, गुजरात सरकार यह कह चुकी है कि यह फ़र्जी मुठभेड थी तब मोदी का यह कहना कि सोहराबुद्दिन आतंकवादी था इसलिये उन्होने उसे उडा दिया यह क्या दर्शाता है? उधर गुजरात सरकार का वकील परेशान है कि वह अदालत मे क्या कहे मोदी के इस विधान के बाद?<br /><br />पर मोदी के इस विधान के बाद पुलिस की गुत्थी सुलझ गई है ? अभी तक पुलिस यह नही जान पाई है कि उसके आला अफ़सरों ने यह फ़र्जी मुठभेड क्यो की थी ? मोदी ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सब उनकी कारस्तानी थी!!! है क्या पुलिस मे उन्हे पकडने की ? इस विधान ने मोदी के विकास के मुखोटे को हटा कर असली कोमी चेहरे को उजागर किया है।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-77772892712952199642007-12-05T07:43:00.000-08:002007-12-05T07:45:16.803-08:00बुरे फ़ंसे विहिप नेताविश्व हिन्दु परिषद के अंतरराष्ट्रिय अध्यक्ष अशोक सिंहल की हालत खस्ता है । तेजाबी निवेदन करने वाले सिंहल्जी को मालूम नही था कि संतो के बारे मे किया गया उनका बयान उनको कितना भारी पडेगा। उन्होने मोदी का विरोध करने वाले संतो के मान्सिण्घ और जयचंद कहा। इस समाचार का छपना क्या था कि गुजरात मे भूचाल आ गया। संतो ने सिंहल को सबक सिखा देने का एलान कर दिया।<br /><br />मोदी की पैरवी का यह अंदाज इतनाभारी पडा कि आर एस एस ने उन्हे तत्काल संतो की माफ़ी मांगने का फ़रमान दे डाला। साफ़ है कि गुजरात के साधु संत वैसे ही मोदी के खिलाफ़ मोर्चा खोले बैठे हैं। उधर उमा भारती के चेले भी ५१ बैठको पर मोदीजी के सामने बंदूक ताने बैठे हैं । एसे मे संतो को नारज करना मतलब आग मे घी डालना हैं।<br /><br /> नतीजन अपने अशोकजी को आज गुजराती अखबारों मे बडे बडे विज्ञापन दे माफ़ी मांगनी पडी। उन्होने जयचंद और मानसिंह जैसे शब्दो का प्रयोग किया था। समाचार दो कालम के थे, खुलासा चार कालम का। मूल समाचार की लंबाई १० से.मी और खुलासा ३० से.मी लम्बा। साफ़ है जिन्होने समाचार नही पढा था उन्होने खुलासे से अशोकजी के खतरनाक भाषा प्रयोग के बारे मे जाना!! <br /><br />उनके इस माफ़ी विज्ञापन का शीर्षक है-संतो के अपमान के बजाय मै मरना अधिक पसंद करूंगा। उन्होने यह भी बताया कि वे संत सेवक परिवार से हैं । मैं संतो के अपमान की बात स्वप्न भी नही सोच सकता।<br /><br />अशोकजी ये तो बताईये की आपको इतना बडा विज्ञापन देने की जरूरत क्यो पडी। अगर आप की बात मे इतना ही दम था तो संत आपके मौखिक खुलासे से ही क्यो नही मान गये। और मजेदार तो यह है कि उन्होने खुद को संतो का रजकण कहा है।Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7137774255269941272.post-48163225047512110842007-12-04T20:20:00.000-08:002007-12-04T20:22:17.365-08:00केशुभाई बोले...कल रात केशुभाई ने दूसरा गोला दागा। दो दिन पहले उनके विचारो मे लिपटा हुआ सरदार पटेल उत्कर्श समिति का एक विग्यापन छपा था। कल तो वे खुद बोले। उन्होने मोदी का नाम नही लिया, पर जो भी बोले,जितना भी बोले उससे साफ़ था कि उनकी जंग मात्र मोदी के शासन के खिलाफ़ हैं। उनका इंटरव्यु एक चैनल पर प्रसारित हुआ।<br /><br />केशुभाई गुजरात मे भाजपा को शून्य से शुरू करने वाले नेताऒ मे से एक है। दो बार मुख्य मंत्री रह चुके केशुभाई पटेल और नरेन्द्र मोदी कट्टर राजनीतिक दुश्मन हैं ।<br /><br /> इनका कहना था कि गुजरात मे डर का माहौल है, वहां लोकतंत्र नहीं तानाशाही है। उनकी बात शायद गुजरात के बाहर के लोगों को समझ मे ना आये। गुजरात मे भी आम आदमी यह समझ नही पा रहा है। यदि हम विधान सभा की कार्यवाही हे देखे तो मालूम पडेगा कि आप सरकार के या मोदी के विरुद्ध मुद्दा छेडिये और शासक पक्ष का हंगामा शुरू।बहुमति के जोर पर जल्द ही विरोध करने वाले को सदन के बाहर।<br /><br />किताबों मे लोकतंत्र पढ्ने वाले इस व्यवहारिक लोकतंत्र को नही समझ पायेंगे। पर यह गुजरात की हकीकत है। साफ़ है कि भाजपा का कोई सदस्य तो सदन मे सरकार की बुराई नही कर पायेगा। सदन के बाहर मोदीजी बाहर वालों की तो छोडो, खुद की पार्टी वालों की भी नही सुनते।<br /><br />उन्होने निवेश का मुद्दा भी छेडा।साफ़ है की सारा निवेश कुछ चुने हुए उध्योगपतियों से ही आ रहा है। उसका फ़ल भी उन्ही को ही मिल रहा है। आम आदमी का क्या?<br /><br /> पर केशुभाई ने ये सभी बातें गोल गोल कहीं । ना तो मोदी का नाम लिया और ना ही उनका कोई विकल्प सुझाया। <br /><br />औरों की बात छोडॊ, केशुभाई आप खुद नरेन्द्र मोदी से कितने डरे हुए हैं कि वो कहीं आप को पार्टी से बाहर नही निकलवा दे!!!!Yogesh Sharmahttp://www.blogger.com/profile/07183084459399181101noreply@blogger.com