tag:blogger.com,1999:blog-7124647974393569217.post-27118039132633817542008-02-03T09:57:00.000-06:002008-02-03T09:57:00.000-06:00हां अभी एग्रीगेटर पर शीर्षक देख मैं आपकी इस टिप्‍प...हां अभी एग्रीगेटर पर शीर्षक देख मैं आपकी इस टिप्‍प्‍णी को पढने जा रहा था चलिए आपने वाजिब सवाल उठाया है हिन्‍दी में बुढभस बढ रही है,सवाल है कि दिल्‍ली में अधिकांश लेखक अपनी गोटी लाल करने के सिवा और क्‍या कर रहे हैं। ये गंभीर लोग खुद एक गभ्ीर ब्‍लाग नहीं खडा कर सकते तो यही मीन मेख निकालेंगे,सबसे बडा सवाल है ब्‍लाग के अर्थ का ।वह चिटठा है तो इसे जो लोग केवल खुदतक सीमित रख्ाने से आगे सबसे जोड रहे हैं वे हिन्‍दी के प्रतिबदध लोग हैं।उदय प्रकाश ,विष्‍णुनागर आदि ने ब्‍लाग की शुरूआत कर अच्छी पहल की नये लेखकोंे काे आगे बढाने के लिहाज से। दरअसल यह नयी दुनिया है इसे देखने के लिए लेंस का नंबर कुछ बढाना होगा।karvaanhindiacom.blogspot.comnoreply@blogger.com