tag:blogger.com,1999:blog-6983683548216379982008-05-29T07:17:33.928-07:00जीवन की कविताKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comBlogger9125tag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-6620431001819075902007-07-03T12:17:00.000-07:002007-07-03T12:29:24.272-07:00ग़ज़ल्<a href="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/RoqjYkqElcI/AAAAAAAAAAs/d5N_EkkCQys/s1600-h/IMGA0049.JPG"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5083054771993351618" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/RoqjYkqElcI/AAAAAAAAAAs/d5N_EkkCQys/s320/IMGA0049.JPG" border="0" /></a><br /><div>इश्क वो इबादत है </div><br /><div>आंखो में हो आंसू </div><br /><div>ओंठो पे मुशकान उभर आये</div><br /><div></div><br /><div>प्यार मे टूट कर मंजिल पर पहुंच जाये</div><br /><div></div><br /><div>महबूब के दीदार से दिल मे पाकीजगी का हो एहसास </div><br /><div>और दिल से निकली हुई आहो मे हो दुआये</div><br /><div></div><br /><div>कितना ही क्यो न हो महबूब फरेबी</div><br /><div>फिर भी देखो जब उसे तो प्यार उमड आये</div><br /><div></div><br /><div>तेरा काम ही है आशनायी कृष्ण </div><br /><div>बात तब है जब बेवफायी पर भी तुझको प्यार आये</div>Krishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-88003042830343449432007-07-02T22:19:00.000-07:002007-07-03T12:15:25.495-07:00ग़ज़ल्<a href="http://bp1.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/Rong1kqElbI/AAAAAAAAAAk/p-IC65xhfGg/s1600-h/krish10.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5082840865442141618" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://bp1.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/Rong1kqElbI/AAAAAAAAAAk/p-IC65xhfGg/s320/krish10.jpg" border="0" /></a><br /><div>नाज़ हमको भी था दीवानों की शखसिअत पर </div><br /><div>दिलो मे झांक कर देखा तो गमगीनिओ का इज़ाफा निकला </div><br /><div></div><br /><div>जिसको समझता था मै कोहिनूर अब तक</div><br /><div>आज़ देखा तो वह पतथर निकला</div><br /><div></div><br /><div>आशा थी मुझे सूरज की चमक होंगी उसमे</div><br /><div>रात मे देखा तो दम तोडत हुआ दीपक निकला</div><br /><div></div><br /><div>जिसे कहता था अपने घर का चान्द </div><br /><div>अधियारी रात मे देखा तो टिमटिमाता हुआ तारा निकला </div><br /><div></div><br /><div>जिसे समझता था बुजरगो की दुआ का आलम</div><br /><div>मौके वारदात पर वहा काफिर निकला </div><br /><div></div><br /><div>जिसे समझता था गुलिस्तान अब तक</div><br /><div>शैरे गुलसन की तो वहा कांटो का अशियाना निकला</div><br /><div></div><br /><div>जिसे समझता था प्रेम का मकान</div><br /><div>वहा देखा तो गम का कारखाना निकला </div>Krishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-78244766442036569692007-07-02T12:08:00.001-07:002007-07-03T12:13:48.027-07:00ग़ज़ल्<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/RolSV0qElaI/AAAAAAAAAAc/1K9MAofXRJY/s1600-h/krish5.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5082684189330150818" style="FLOAT: left; MARGIN: 0pt 10px 10px 0pt; CURSOR: pointer" alt="" src="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/RolSV0qElaI/AAAAAAAAAAc/1K9MAofXRJY/s320/krish5.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br />आज तेरी याद मुझको सताती है बहुत<br />आज की रात प्यासी है बहुत<br /><br />तेरा एहसस समन्दर की तरह है<br />तेरी याद मुझे तडपाती है बहुत<br /><br />एक ख्वाइस हि तेरे दीदार की मुझे<br />ज्यादा न सही कुछ लम्हो के किरदार की तेरेKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-82711464518612094182007-07-02T12:08:00.000-07:002007-07-03T12:12:18.607-07:00ग़ज़ल्आज तेरी याद मुझको सताती है बहुत<br />आज की रात प्यासी है बहुत<br /><br />तेरा एहसस समन्दर की तरह है<br />तेरी याद मुझे तडपाती है बहुत<br /><br />एक ख्वाइस हि तेरे दीदार की मुझे<br />ज्यादा न सही कुछ लम्हो के किरदार की तेरेKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-29198937071600548582007-07-02T11:57:00.000-07:002007-07-03T12:08:43.521-07:00ग़ज़ल्आज तेरी याद मुझको सताती है बहुत<br />आज की रात प्यासी है बहुत<br />तेरा एहसास समन्दर की तरह है<br />तेरी याद मुझे तड्पाती है बहुत<br />एक ख्वाइस है तेरे दीदार की मुझे<br />ज़्यादा न सही कुछ लम्हो के किरदार की तेरेKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-57752647082969299872007-07-02T08:33:00.000-07:002007-07-03T12:16:30.953-07:00ग़ज़ल्<a href="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/Rokcu0qElYI/AAAAAAAAAAM/-1I3HJTXvVU/s1600-h/krish6.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5082625245198980482" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://bp2.blogger.com/_OJaTdCiqRlw/Rokcu0qElYI/AAAAAAAAAAM/-1I3HJTXvVU/s320/krish6.jpg" border="0" /></a><br /><div><br /><br />कौन रहता है मुस्तकिल अपने असूलो पर<br />लोग हर लम्हा यहा रंग बद्लते है<br />किस पर हो यकी किस पर गुम करू<br />लोग हर् रोज नई शक्ल मे धलते है<br />किससे करू वफा वेवफा किसे कहू<br />यहा नफरत को लोग बडे ढंग से समझते है<br />मिजाज अपना ही बदल लेता हू कृष्ण<br />दीवनगी की लोग यहा कद्र कहा करते है</div>Krishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-71142875421141372052007-05-06T13:05:00.000-07:002007-05-08T15:32:10.251-07:00गजल१६-०१-१९९९<br /><br />लोग कहते है की मोहब्बत में आबाद हुआ करते है<br />मैंने देखा है की बर्बादियों के भी समान हुआ करते है<br />यूं तो आशिकी में दिल को सुकून मिलाता है<br />लेकिन वहां दर्द व गम के सरे सामान हुआ करते है<br />मोहब्बत में पाकीज़गी का जिक्र सुना है हमने<br />मैंने देखा <span style="font-size:+0;"></span>है की जिल्लत के भी सारे सामान हुआ करते है<br />इश्क की कार्गुज़ारिओं का बयाँ क्या करे कृष्ण<br />इश्क में हर लम्हा लोग कुर्बान हुआ करते है<br />दीवानों की जुबानी है माशूक बडे दिलकश होते हैं<br />ठीक कहता हूँ अगर उनके पास दिल तोडनें के भी औजार हुआ करते हैं<br /><br />कृष्ण कुमार मिश्र<br /><br />Krishna Kumar Mishra<br />77, Canal Road Shiv Colony Lakhimpur Kheri-262701<br />Uttar Pradesh<br />India<br />cellular-091-9451925997Krishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-41361402966754609162007-05-05T14:39:00.000-07:002007-05-05T14:54:11.965-07:00एक ग़ज़लतलाश थी हमकों एक अशियानें की<br />आशियाँ जितने मिलें खौफ बारिश का था उनको<br />चाहत थी वफ़ा की बड़ी हमको<br />पर वेवाफाई का खौफ था उनको<br />हसरत उनको भी बड़ी थी मेरी मोहब्बत की<br />पर जगाह्सायी का खौफ था उनको<br />जमां कीतने रंग दीखाता है हमें<br />पर भटक जानें का खौफ है हमको<br />इसक होती है इबादत माशूक के बुत की<br />पर बुत के खो जाने का खौफ है हमको<br />दौर ए ज़माने को क्या कहूं कृष्ण<br />अब तो इस अदाम्खाने से खौफ है हमको<br />या फीर इस जमाने से खौफ है हमको<br /><br />कृष्ण कुमार मीश्राKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-698368354821637998.post-63873098482516089452007-05-05T13:40:00.000-07:002007-05-05T14:09:29.272-07:00मेरे भाव मेरी संबेद्नायेंतुझमें क्या हैं <br />जो पागल बनाता है मुझें <span></span><br />नित नई तरंग नित नया अध्याय<br />जो तुझसे है समबंधित!<br /><br />तेरा ही गुणगान तेरा ही मान<br />क्यो भाता है मुझे<br />इतना अपनापन इतनी आत्मीयता<br />जो सिर्फ तुझसे है<br />कितना ससक्त है तेरा आकर्षण<br />जो हमेशा लुभाता है मुझे<br />तेरा ही स्मरण<br />चाहे हो उसमें कटुता या सरसता<br />हर वक्ता याद तेरी दीलाता है मुझे<br />क्या प्रेम है तुझसे या मात्र आकर्षण<br />या वासना का जाल<br />किशासे ग्रशित है मेरा मन<br />अस्मंजश में हूँ<br />फीर भी निश्छल हूँ<br />कयोंकी तुझ पर ही पूर्ण समर्पित हूँ<br /><br />कृष्ण कुमार मीश्रा<br />७७, कैनाल रोड़ शीव कालोनी लखीमपुर खेरी<br />उत्तर प्रदेश<br />भारतKrishna Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/02572677057574166435noreply@blogger.com