tag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-9644420311167102192008-05-05T06:55:00.003+05:302008-05-05T08:57:26.513+05:30लाख से ज्यादा पेङ अगले दो महिने में काटे जायेंगे: कौन रोकेगा विनाश?बस्तर में इन दिनो किसी न किसी बहाने जंगल सफाया करने का काम धङल्ले से जारी है,कंही वैध(?)तो कंही अवैध नक्सली प्रभावित क्षेत्र के बहाने जंहा वनविभाग ने अपनी आंखें बंद कर रखी है वंही इसका फायदा उठाने में लकङी तस्करों ने कोई कसर नही छोङा है वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी की मिली-भगत के कई मामले भी सामने आए है हाल में ही कांकेर के नरहरपुर मे एक रेंजर को गांव वालों द्वारा पकङकर पुलिस को सौंपा गया था <br />कंही-कंही जंहा नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से जंगल कटने से बचा हुआ है तो सङक किनारे के लाखों पेङ नक्सलियों ने ही काटकर सङक में बिछा दिये कथित जनयुद्ध(?) के इन सिपाहियों ने यह दुष्कृत्य पुलिस के साथ मोर्चाबन्दी करते हुये अथवा प्रायः हर महिने बस्तर बंद के आव्हान के दौरान किया पिछले तीन वर्षों में वन कटाई के आंकङों में बहुत बङा योगदान कथित शांति सिपाही(?) सलवा-जूङूम कार्यकर्ताओं का भी है,जिन्होने नये खेत और घर बनाने के नामपर नक्सलियों से मोर्चाबंदी लेते हुये निर्ममता पूर्वक अपने धारदार हथियार पेङो पर चलाये दक्षिण बस्तर के सघन वनो में सलवा - जूङूम कार्यकर्ताओं द्वारा गाजर मूली की तरह पेङ काटे जाने खबरें छपती रही है नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा लेते हुये पुलिस के उपर भी पेङों की कटाई व तस्करों से मिली-भगत का आरोप लगते रहा है तीन वर्ष पूर्व कांकेर से लगे राष्टीय राजमार्ग के किनारे तीन पहाङ सहित हजार एकङ के लग-भग जंगल पुलिस प्रशिक्षण के नाम पर 'जंगल वार' वालों ने हथिया लिये <br />विकास(?) के नाम पर बनाये गये सरकारी योजनाओं,बांध निर्माण,सङक निर्माण तथा भवन निर्माण आदि निरंतर चलने वाली योजनाओं में हरे-भरे बृक्षों की बलि दी जाती रही है अकेले कोसारटेडा सिंचाई परियोजना में ही अगले दो महिने में 42हजार बृक्षों की कटाई किये जाने का घोषित सरकारी कार्यक्रम है यह परियोजना बस्तर के कोंडागांव क्षेत्र में बनना है, जिसके डूबान क्षेत्र में आ रहे 42हजार बृक्षों में साल,सागौन,आम,साजा के अलावा दूर्लभ प्रजातियों सैकङो वर्ष पुराने पेङ शामिल है इनमे छोटे बृक्षों की गिनती शामिल नही है इस परियोजना के क्रियान्वयन मे वन विभाग भी उत्साह के साथ भिङ गया है पेङों की कटाई के लिये पावर चेन्स की ब्यवस्था वन विभाग ने कर लिया है, जिससे मिनटों मे विशाल बृक्ष को जमीन मे सुलाया जा सकता है इसके लिये वन विभाग को 46करोङ रुपये की राशि भी सिंचाई विभाग द्वारा दिया जा चुका हैवनसंरक्षक के अनुसार दस बिजली चलित आरियों से इन बृक्षों को बरसात से पहले काटा जायेगा <br /><br />इसके अलावा कोंडागांव से राजनांदगांव रोड चौङीकरण के नाम पर लग-भग पांच हजार बृक्ष काटे जाने है वन विभाग के एक बङे अधिकारी के अनुसार शासकीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर अगले दो महिने में वैध(?) तरीके से एक लाख से ज्यादा पेङ काटे जाने है कंहा है पर्यावरणप्रेमी ?कौन रोकेगा इस विनाश लीला को ! न्यायालय भी इन दिनो इस विनाश लीला को कथित विकास के लिये आवश्यक परिणिति घोषित कर चुका है उन नेता,मंत्री,अधिकारी व कथित समाजसेवियों की फेहरिस्त भी लंबी हो गई है, जिन्होने जंगल कटाई को धंधे के रुप में अपना कर अपने आपको समृद्ध कर खुद को बहरा व अंधा घोषित कर रखा है <br /><br />\<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6932955722433521608-964442031116710219?l=ghotul.blogspot.com'/></div>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.com0