tag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-74776415313825959002008-04-22T05:44:00.000+05:302008-04-22T07:34:37.973+05:30े सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र के आंकङे<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_kHwc9WuSVxM/SA1HWXrW1wI/AAAAAAAAAC4/Q6NJIs7XIlw/s1600-h/salwa%2Bjudum%2Bcanon%2Bfodder.jpg"><img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://3.bp.blogspot.com/_kHwc9WuSVxM/SA1HWXrW1wI/AAAAAAAAAC4/Q6NJIs7XIlw/s320/salwa%2Bjudum%2Bcanon%2Bfodder.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5191884395066611458" border="0" /></a><br />नक्सलियों ने सन् 2007 के दौरान 635 हमले किये हैं जिनमें 242 नागरिकों और 125 सुरक्षा बल के जवानों की मौत हुई है. उन्होंने स्कूल, पुलिस चौकियों, पंचायत भवन, रेलवे सम्पत्ति, बिजली टावर, खदान आदि ढहाए हैं. कहा गया है कि इस एक साल में नक्सलियों ने 55 प्राथमिक स्कूल भवन, 8 पंचायत भवन, 9 शाला आश्रम, 9 हास्टल, 8 आंगनबाड़ी केन्द्र और 18 अन्य भवनों को नष्ट किया है. इनके भय से बस्तर के भयभीत ग्रामीणों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है और इन शिविरों में भी नक्सली हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं. इन परिस्थितियों में नक्सलियों के खिलाफ जनता की ओर से खड़ा किया गया सलवा जुड़ूम अभियान जबरिया रोकना सरकार के लिए संभव नहीं है.<br />शपथ पत्र में कहा गया है कि सरकार ने बस्तर में 3400 विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिसका पुलिस एक्ट में प्रावधान है. ये एसपीओ नक्सलियों के आतंक को रोकने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं.असाधारण परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर की तरह यहां भी एसपीओ कारगर हैं. सरकार ने कहा है कि कहीं-कहीं यह संयोग है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ने वाले एसपीओ में से कुछ सलवा जुड़ूम के सदस्य हैं.<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6932955722433521608-7477641531382595900?l=ghotul.blogspot.com'/></div>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.com0