tag:blogger.com,1999:blog-6844073841955717003.post-51498498059605730122007-06-06T23:16:00.000+05:302007-06-06T23:16:00.000+05:30भाईजी..जै रामजी की.आपरो चिट्ठो बांच्यो.मे मालवा को...भाईजी..जै रामजी की.आपरो चिट्ठो बांच्यो.मे मालवा को हूं..ने राजस्थानी मालवी की मां हे.आंपी प्रयत्न करता रा तो अपणी लोक-भाषा को मान वदतो रेवेगो. नी तो जस तर म्हारो छोरो पूछे कि डैड (जीता जी dead कर दियो है)अड़तीस कई वे हे.बीने फ़ोर्टी एट बोलो... जद समझ पडे हे .तो म्हें अपणी बात म्हारी बोली मालवी में की हे .पूरी उम्मीद हे कि आप समझ जाओगा.आपरी बारता खूब चोखी हे...मन राजी होगो.लिखता रेवेजो<BR/>कोई बांचे नी बांचे ...आप चिंता मत करजो..<BR/>लिखवा - बांचवा से ज बोली ..भाषा बणे हे.<BR/><BR/>थोडो़ लिख्यो हे..पूरो जाणजो.<BR/>लिखी.....<BR/>आपरो भई..<BR/>गाम इंदौर को <BR/>संजय पटेलjoglikhisanjaypatelkihttp://www.blogger.com/profile/08020352083312851052noreply@blogger.com