tag:blogger.com,1999:blog-6662165.post-1080060390115827032004-03-23T11:46:00.000-05:002004-05-24T16:13:40.106-04:00निसर्ग से उपदेशबहते पानी की खनखनाहट में <br />कहता है यह झरना <br />जल्दी संभल जा पगले <br />देर हो जायेगी वरना || <br /> <br />खिलते हुए रंगो से <br />समझाते है ये फूल <br />मत उलझो दुनिया के रंगो में <br />कौन है तू यह मत भूल || <br /> <br />प्रवाहित वायु की संथ लहरें <br />गुनगुनाती हैं कानों में <br />भज पल हर हरी नाम तू <br />क्या रखा है गंगा स्नानो में || <br /> <br />सूरज की चमकती किरणें <br />ले आती हैं यह संदेश <br />निशा की गहराई में भी <br />छिपा है यही उपदेश || <br /> <br />भक्तो के तत्व मसी की <br />यही है आर्त पुकार <br />ज्ञानियों के अहं ब्रम्हास्मी में <br />बसी है यही झंकार || <br /> <br />सृष्टी के सभी अंगो का <br />यह एकमात्र कहना <br />जगा प्रभु मिलन की ज्योती <br />वरना, यहीं है बार बार मरना ||<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6662165-108006039011582703?l=arunuvach.blogspot.com'/></div>Arun Kulkarnihttp://www.blogger.com/profile/05235974306032930613noreply@blogger.com