tag:blogger.com,1999:blog-6662165.post-1104310191986336232004-12-29T03:49:00.000-05:002004-12-29T03:49:00.000-05:00निराकार साथी तो "मन" ही हो सकता है। साथी के सामिप्...निराकार साथी तो "मन" ही हो सकता है। साथी के सामिप्य में भी कई बार एकांत कि चाह होती है, हरेक के जीवन में अपना एक व्यक्तिगत कोना तो होता ही है। यदि हमसफर यह समझ लें, तो साथ और एकांत की चाह दोनों पूरी हो सकती हैं।Debashishhttp://www.blogger.com/profile/05581506338446555105noreply@blogger.com