tag:blogger.com,1999:blog-63508532204576736482009-02-21T00:34:26.864-08:00MEDIA COLLEGEMedia Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.comBlogger8125tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-9026678721797682382007-11-13T02:44:00.000-08:002007-11-13T02:46:54.731-08:00भारतीय प्रेस परिषद् में शिकायत करने की विधि<div align="left"><strong><em><span style="font-size:130%;color:#666600;">1. समाचारपत्रों के विरुध्द शिकायत</span></em></strong><br />कोई भी व्यक्ति, किसी समाचारपत्र के विरुध्द पत्रकारिता के औचित्य तथा रुचि में मान्य नैतिक सिध्दांतों के व्यवधान के विरुध्द प्रेस परिषद् में शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायतकर्ता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे उस समाचार से परिवेदित अथवा सीधे सम्बध्द हो। आरोपित व्यवधान समाचारपत्र के किसी समाचार अथवा वक्तव्य के प्रकाशन, अप्रकाशन अथवा अन्य सामग्री जैसे व्यंगचित्र, चित्र, छायाचित्र, मनोरंजन सामग्री अथवा विज्ञापनों के रूप में हो सकते हैं। जनता में से कोई भी व्यक्ति पत्रकार हो अथवा स्वतंत्र पत्रकार। किसी समाचार अधिनियम द्वारा प्रकाशित समाचार, जो किसी भी माध्यम से प्रसारित किया गया हो, के विरुध्द भी शिकायत की जा सकती है।<br />प्रेस परिषद् (जांच प्रक्रिया) विनिमय, 1979 की धारा 3 (1) के अंतर्गत परिषद् में शिकायत दर्ज करने हेतु समय सीमा निर्धारित की गई है। समाचारपत्रों/पत्रिकाओं में किसी सामग्री के प्रकाशन/अप्रकाशन अथवा सम्पादक/श्रमजीवी द्वारा व्यावसायिक अनाचरण के विरुध्द शिकायत के लिए 4 माह की समय सीमा का प्रावधान है। निहित अवधि के पश्चात निवेशित परिवाद के अनुपालन में हुए विलम्ब का उचित कारण बताते हुए क्षमायाचना की जा सकती है जिसे अध्यक्ष महोदय द्वारा संतुष्ट होने पर क्षमा किया जा सकता है।<br /><strong><span style="color:#006600;">प्रथमत: सम्पादक का ध्यानाकर्षण<br /></span></strong>जांच विनियमों के अंतर्गत यह आवश्यक है कि शिकायतकर्ता, समाचारपत्र के सम्पादक को लिखकर उनका ध्यान प्रथमत: पत्रकारिता नीति अथवा अरुचि की आक्षेपित व्यवधान से सम्बध्द समाचार की ओर आकृष्ट करें। ऐसे पूर्व संदर्भ किसी विषय को प्रथम दृष्टांत में निपटने का अवसर प्रदान करते हैं। यह नियम आवश्यक है, क्योंकि यह सम्पादक को दोषारोपण के परिचय अथवा शिकायत के विवरण से अवगत करवाता हो। यह विदित है कि कुछ मामलों में शिकायतकर्ता को असत्य सूचना प्राप्त हुई हो अथवा तथ्यों का अपनिरुपण किया गया हो। दूसरी ओर, यह एक अनवधान त्रुटि का मामला हो सकता है जिसे सम्पादक स्वीकार और संशोधित करने हेतु तत्पर हों, यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट हो तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है।<br />जहां, समाचारपत्र को लक्षित किये जाने के पश्चात कोई व्यक्ति शिकायत को आगे बढ़ाने की इच्छा रखता है, उसे सम्पादक के साथ हुए पत्र व्यवहार की प्रतियां भी शिकायत के साथ संलग्न करनी चाहिए, यदि सम्पादक की ओर से कोई उत्तर प्राप्त न हो तो यह तथ्य शिकायत में उल्लेखित करना चाहिए।<br />शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत में उस समाचारपत्र, सम्पादक अथवा पत्रकार का नाम तथा पता लिखना चाहिए जिसके विरुध्द शिकायत की गई हो। शिकायत के साथ प्रकाशित समाचार की मूल कतरन या उसकी स्वत: प्रमाणित प्रतिलिपि अंग्रेजी अनुवाद सहित यदि वह किसी अन्य भाषा में हो, भी प्रेषित की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता को लिखना चाहिए कि शिकायती समाचार अथवा प्रकाशित सामग्री किस प्रकार आपत्तिजनक है। उन्हें अन्य सम्बध्द विवरण भी, यदि कोई हो, तो निवेशित करना चाहिए।<br />किसी सामग्री के अप्रकाशन की शिकायत के मामले में शिकायतकर्ता को लिखना चाहिए कि उनसे किस प्रकार पत्रकारिता नीति का उल्लंघन हुआ है।<br /><strong><span style="font-size:130%;">उद्धोषणा</span></strong><br />परिषद किसी ऐसे मामले पर विचार नहीं करती जो न्यायालय में विचाराधीन हो। शिकायतकर्ता को घोषणा करनी होगी कि अपनी सम्पूर्ण जानकारी तथा विश्वास के अनुसार उन्होंने परिषद् के समक्ष सम्पूर्ण सम्बध्द तथ्य प्रस्तुत कर दिये हैं तथा शिकायत में कथित किसी विषय के संबंध में किसी न्यायालय में कोई मामला लम्बित नहीं है। एक अन्य घोषणा करना भी आवश्यक हैकि ''परिषद द्वारा जांच की अवधि में शिकायत में कथित मामला न्यायालय की किसी कार्यवाही का विषय बन जाता है तो वे इसकी सूचना परिषद् को देंगे।'' </div><div align="left">.</div><div align="left"><strong><em><span style="font-size:130%;color:#006600;">2. प्रेस की स्वतंत्रता के अतिक्रमण के विरुध्द शिकायत</span></em></strong><br />समाचारपत्र, पत्रकार अथवा कोई भी संस्थान अथवा व्यक्ति, केंद्रीय अथवा राज्य सरकार अथवा किसी संगठन अथवा व्यक्ति के विरुध्द प्रेस की स्वतंत्र कार्यवाही में हस्तक्षेप, प्रेस की स्वतंत्रतापर अतिक्रमण के विरुध्द शिकायत कर सकता है। ऐसी शिकायत में कथित अतिलंघन का संपूर्ण विवरण इस घोषणा के साथ होना चाहिए कि मामला न्यायालय में लंबित नहीं है, जिस पर परिषद् से पूर्वोल्लिखित जांच प्रक्रिया के अनुसरण में कार्य करेगी।<br />परिषद् द्वारा व्यक्त विचार दो महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं, अभिधानत: (1) प्रेस की स्वतंत्रता का दुरुपयोग, किसी का ध्यान आकृष्ट किये बिना अथवा तब तक सिध्द नहीं हो सकता जब तक कि उस ओर ध्यान आकृष्ट न किया जाए अथवा विरोध के बिना घटित नहीं हो सकता तथा (2) प्रेस को स्वयं के हित में अश्लील अथवा अन्य आपत्तिजनक लेख प्रकाशित नहीं करने चाहिए अर्थात ऐसे लेखन जो स्वयं प्रेस सहित गठित परिषद् जैसी किसी निष्पक्ष निर्णायक समिति द्वारा पत्रकारिता नीतियों के मान्यता प्राप्त मानकों से निम्न स्तर के माने गए हैं क्योंकि इससे प्रेस की अत्यधिक बहुमूल्य स्वतंत्रता का ही क्षय होगा। </div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-902667872179768238?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-81383151332241384402007-10-21T05:46:00.000-07:002007-10-21T05:49:04.100-07:00हिन्दी में ब्लॉग कैसे बनाएँयह पृष्ठ का आशय है कि यहाँ पर <a title="Blogger" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Blogger">ब्लॉगर</a>, <a title="WordPress" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/WordPress">वर्डप्रैस</a> तथा <a class="new" title="WordPress.Com" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php?title=WordPress.Com&action=edit">वर्डप्रैस.कॉम</a> जैसे <a title="Blog" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Blog">ब्लॉग</a> तंत्रांशों पर हिन्दी ब्लॉग बनाने के बारे में बताया जाए। दूसरा उद्देश्य है, ब्लॉगर व अपने (किराये के या मुफ्त) वेबसर्वर पर हिन्दी ब्लॉग कैसे कॉन्फिगर करना है, इस के बारे में जानकारी देना।<br />ब्लॉग अथवा चिट्ठा के बारे में अधिक जानने हेतु <a title="Blog" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Blog">यह लेख</a> पढ़ें। <a name=".E0.A4.85.E0.A4.AA.E0.A4.A8.E0.A4.BE_.E0.A4.AC.E0.A5.8D.E0.A4.B2.E0.A5.89.E0.A4.97_.E0.A4.95.E0.A5.88.E0.A4.B8.E0.A5.87_.E0.A4.B6.E0.A5.81.E0.A4.B0.E0.A5.81_.E0.A4.95.E0.A4.B0.E0.A5.87.E0.A4.82_.3F"></a><br />.<br /><span style="font-size:130%;"><strong>अपना ब्लॉग कैसे शुरु करें ?</strong></span><br />ब्लॉग लिखने के लिये सबसे अच्छी चीज यह है कि इसके लिये आपको खास तकनीकी ज्ञान की जरूरत नही है और ना ही किसी तरह के पैसा खर्च करने की। बस जरूरत है तो इच्छा शक्ति की, विचारों के प्रवाह की और थोड़े से समय की। ज्यादातर लोग आपसे कहेंगे कि शुरुआती ब्लॉगर के लिये ब्लॉग लिखने के लिये सबसे सुगम और सरल साधन <a class="external text" title="http://blogger.com" href="http://blogger.com/" rel="nofollow">ब्लॉगर</a> ही है। बस अपना अकाउंट बनाइये और शुरु हो जाइये…किसी समस्या के आने पर आपके अनेक मददगार मौजूद है <a class="external text" title="http://akshargram.com/Paricharcha" href="http://akshargram.com/Paricharcha" rel="nofollow">परिचर्चा</a> तथा <a class="external text" title="http://groups-beta.google.com/group/Chithakar" href="http://groups-beta.google.com/group/Chithakar" rel="nofollow">चिट्ठाकार गूगल समूह</a> में, जिनके आप तुरत फुरत सदस्य बन सकते हैं, आवेदन करने भर की देर है। <a name=".E0.A4.AC.E0.A5.8D.E0.A4.B2.E0.A5.89.E0.A4.97_.E0.A4.B6.E0.A5.81.E0.A4.B0.E0.A5.82_.E0.A4.95.E0.A4.B0.E0.A4.A8.E0.A5.87_.E0.A4.95.E0.A5.87_.E0.A4.B2.E0.A4.BF.E0.A4.8F_.E0.A4.9C.E0.A4.B0.E0.A5.82.E0.A4.B0.E0.A5.80_.E0.A4.B8.E0.A4.BE.E0.A4.AE.E0.A4.BE.E0.A4.A8"></a><br />[<a title="Edit section: ब्लॉग शुरू करने के लिए जरूरी सामान" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php?title=Making_a_Hindi_Blog&action=edit&section=3">edit</a>] ब्लॉग शुरू करने के लिए जरूरी सामान<br />हमारा परामर्श है कि अपना ब्लॉग आप <a title="Unicode" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Unicode">यूनिकोड</a> हिन्दी का ही प्रयोग करें। यूनिकोड के प्रयोग से न केवल आपका ब्लॉग फॉन्ट के उपर निर्भरता से दूर होता है बल्कि गूगल जैसे खोज इंजनों से आपके ब्लॉग की सामग्री भी आसानी से खोजी जा सकती है। फॉन्ट के उपर निर्भरता दूर होने का कारण यह है कि आपके पाठक के कंप्यूटर पर बस एक अदद यूनिकोड फॉन्ट की दरकार होती है, यह नहीं कि हर जालस्थल को पढ़ने के लिये अलग अलग फॉन्ट डाउनलोड करना पड़े। आजकल कई बेहतरीन यूनिकोड हिन्दी फॉन्ट उपलब्ध हैं, अगर आप विंडोज एक्सपी पर हैं तो कोई दिक्कत ही नहीं, क्योंकि यह मंगल नामक यूनिकोड हिन्दी फॉन्ट से लैस होता है।<br />तो मुद्दे की बात यह है कि आपकी मशीन पर कम से कम एक यूनिकोड हिन्दी फॉन्ट होना चाहिए। बेहतर हो कि आप के पास हो विंडोज एक्सपी या नवीनतम लिनक्स तथा ब्राउज़र हो इंटरनेट एक्सप्लोरर 6। अधिक और सटीक जानकारी के लिये आप <a class="external text" title="http://devanaagarii.net" href="http://devanaagarii.net/" rel="nofollow">देवनागरी डॉट नेट</a> पर अवश्य जायें। एक बार यूनिकोड हिन्दी के लिए मशीन सेटअप हो जाने के उपरांत तो ब्लॉग लिखना ईमेल लिखने जितना ही आसान है। <a name=".E0.A4.AC.E0.A5.8D.E0.A4.B2.E0.A5.89.E0.A4.97_.E0.A4.AA.E0.A4.B0_.E0.A4.B9.E0.A4.BF.E0.A4.A8.E0.A5.8D.E0.A4.A6.E0.A5.80_.E0.A4.AE.E0.A5.87.E0.A4.82_.E0.A4.95.E0.A5.88.E0.A4.B8.E0.A5.87_.E0.A4.B2.E0.A4.BF.E0.A4.96.E0.A5.87.E0.A4.82"></a><br />.<br /><strong><span style="font-size:130%;">ब्लॉग पर हिन्दी में कैसे लिखें</span></strong><br />यूनिकोड हिन्दी तथा फोनेटिक टूल्स के आगमन से हिन्दी में टाइप करना अत्यंत सरल हो गया है। फोनेटिक IME अथवा रेमिंगटन/इनस्क्रिप्ट आदि टूल्स के प्रयोग द्वारा टाइपिंग की जानकारी <a title="How to type in Hindi" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/How_to_type_in_Hindi">यहाँ</a> पढ़िए। इन टूल्स से आप ब्लॉग में भी लिख सकते हैं और अन्य साथियों के ब्लॉग पर कमेंट भी कर सकते हैं।<br />इसके अतिरिक्त <a title="Blogger" href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Blogger">ब्लॉगर</a> ने हाल ही में अपने पोस्ट एडीटर में ट्रांसलिटरेशन टूल भी उपलब्ध कराया है जिससे कि आप बिना किसी अन्य टूल की सहायता से भी हिन्दी में ब्लॉग लिख सकते हैं।<br /><br /><span style="color:#006600;"><a href="http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Making_a_Hindi_blog">Making a Hindi Blog</a></span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-8138315133224138440?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-1167462792282210072007-10-21T05:14:00.001-07:002007-10-21T05:38:33.952-07:00हिन्दी में वेबसाइट का प्रयोग<div align="left">कम्प्यूटर तकनीकी और सूचना विज्ञान आज इस स्थिति में है कि हम बड़ी ही आसानी से हिन्दी भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। कुछ वर्षों पहले जिस साधारण कार्य को करने के लिए मुझे एक विशेष प्रकार का कम्प्यूटर हार्डवेयर प्रयोग करना पड़ता था और उसके बाद भी मनोवाँछित कार्य नहीं हो पाता था, आज वह कार्य कुछ ही क्षणों में हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी को हिन्दी में ई-मेल करना चाहते हैं तो यह कार्य आज बड़ी आसानी से संभव है। हिन्दी में ई-मेल करने के लिए अलग-अलग वेबसाईटों पर कई लोगों ने कई सुविधा स्थापित कर रखी हैं।<br />.<br />इसी प्रकार अगर आप सोचते हैं कि हिन्दी लिपि देवनागरी में टाइप करना कठिन है, तो कृपया ध्यान दें। देवनागरी में टाइप करना बहुत ही सरल है और इसके लिए आपको किसी टाइपिंग के विद्यालय आदि में जाने की कोई आवश्यकता भी नहीं है। आप बड़ी ही सरलता से घर बैठे ही अपने कम्प्यूटर पर हिंदी में टाइप करना सीख सकते हैं। आज ही, और अभी ही इसका सरल अभ्यास आरंभ कीजिए। परंतु इसके पहले कुछ पृष्ठभूमि समझना आवश्यक है।<br />.<br />भारतीय वैज्ञानिकों ने सभी भारतीय भाषाओं के लिए वैज्ञानिक ढंग से शोध करके एक की-बोर्ड का क्रम बनाया है। आपने देखा होगा कि अंग्रेजी का की-बोर्ड एक निश्चित आयोजन का प्रयोग करता है। इसी तरह हिन्दी को कम्प्यूटर पर प्रयोग करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने भी एक की बोर्ड का आयोजन किया जिसमें सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाले अक्षर बीच के बटनों पर होते हैं। उदाहरणतः अ, प, र, क और छोटी मात्राएँ आदि जिनका प्रयोग अधिक होता है उन्हें की-बोर्ड की बीच की पंक्ति में रखा गया है और कम प्रयोग होने वाले अक्षर उँगलियों की सहज पहुँच से दूर की ऊपरी या निचली पंक्ति पर रखे गये है।<br />.<br />सभी भाषाओं को आसानी से जाल पृष्ठों पर उपलब्ध करवाने के विषय में लगातार कार्य चल रहा है और इसके लिए एक विश्व संस्था का गठन किया गया है जो कि सारे विश्व की भाषाओं को उन भाषाओं के व्यक्तिगत नियमों के अनुसार कम्प्यूटर पर प्रयोग करने कि सुझाव और निर्देश तैयार करती है। इस संस्था का नाम यूनिकोड.आर्ग है। इस संस्था का उद्देश्य विश्व की विभिन्न भाषाओं में सूचना के आदान-प्रदान, विश्लेषण और लिखित जानकारी की प्रस्तुति है। इस हेतु हर भाषा के वर्णों के लिए नियमावली बनाई गई है। यह नियमावली किसी भी भाषा के वर्णों को उनके योग्यता ( प्रयोग में वरीयता योग्यता का आधार होता है) के अनुसार एक क्रम में आयोजित करती है। इस प्रकार बने क्रम को किसी भी आपरेटिंग सिस्टम पर समान रूप से प्रयोग किया जा सकता है। चूँकि उनकी वरीयता निर्धारित होती है इसलिए इस पद्धति पर आधारित फाँन्ट केवल लेख लिखने का कार्य करने के स्थान पर डाटाबेस और वर्क्स शीट आदि में भी प्रयोग किये जा सकते हैं।<br />.<br />कम्प्यूटर में यदि हम जब किसी भाषा की लिपि में लेख टाइप करना चाहते हैं, तो उसके लिए किसी न किसी फॉन्ट का प्रयोग करते हैं। अंग्रेजी तथा कई देवनागरी लिपि मे कुछ टाइप करना चाहते हैं तो उसके लिए कई प्रकार के फॉट उपलब्ध हैं। अंग्रेजी के ज्यादातर फॉन्ट एक निश्चिट की-बोर्ड सारणी का प्रयोग करते हैं। परंतु देवनागरी के ज्यादातर फॉन्ट अलग-अलग नियमों की सारणी का प्रयोग करते हैं। इस कारण इन सभी फोन्टों में आपस में जानकारी का आदान-प्रदान कठिन हो गया है। इसी कारण यूनिकोड आधारित फान्ट इस समस्या को दूर करने के लिए बनाये गये हैं।<br />लोकेल और फॉन्ट हर भाषा की लिपि और उसके प्रयोग के नियम उसका लोकेल निर्धारित करते हैं, जैसे देवनागरी, कन्नड़, तमिल, बंगला और अन्य भाषायें अलग-अलग नियमों के आधार पर बोली और लिखी जाती है, अतएव इन सबका लोकेल अलग-अलग होता है। पर यदि हमारे कम्प्यूटर में देवनागरी का लोकेल स्थापित भी हो तब भी हम लिपि की बनावट को अलग अलग प्रकार से लिखकर विभिन्न फॉन्टों में व्यक्त कर सकते हैं। इसीलिए कई प्रकार के फॉन्ट आते हैं। सभी भारतीय भाषाओं, जिनमें देवनागरी भी सम्मिलित है कोई एक मानक न होने के कारण कई उद्यमों ने अपने अलग-अलग नियमों के आधार पर अपने फॉन्ट बना लिए थे और इस प्रकार एक फॉन्ट में लिखी जानकारी उस फॉन्ट के उपलब्ध न होने पर जाननी संभव नही होती थी। इसके विपरीत अंग्रेजी में यह समस्या नहीं है। उदाहरण के लिए हर कम्प्यूटर के की-बोर्ड मे “a अक्षर का स्थान निश्चित है और संबधित बटन को दबाने पर ही लिखा जा सकता है, और किसी दूसरे बटन को दबाने पर हम “a” लिखने की अपेक्षा नहीं रखते हैं। परंतु यदि आपने कृति डेव फॉन्ट मे टाइप किया है, तो संभवत सी-डेक द्वारा बनाये गये गणेश फॉन्ट मे इसे नहीं पढ़ सकते हैं, क्योंकि ये दोनो फॉन्ट अ को लिखने के लिए अलग-अलग बटनों का प्रयोग करते हैं। परंतु यदि इन दोनों फॉटों का प्रयोग करके आप एक एक्सेल की स्प्रेड शीट बनायेंगे तो उसमें लिखी जानकारी को आप एक क्रम देना चाहें, जैसे अंग्रेजी में लिखी जानकारी को आप सोर्ट कर लेते हैं, तब यह संभव नहीं होगा। परंतु यदि आपने यूनिकोड समर्थित फॉन्ट का उपयोग किया है, जैसे कि मंगल आदि तब आप इस जानकारी को बिलकुल अंग्रेजी में लिखी जानकारी की तरह कम्प्यूटर के निर्देश से वरीयता दे सकते हैं (यानी सोर्ट कर सकते हैं)। यह जाल पृष्ठ यूनिकोड समर्थित फॉन्ट का प्रयोग करता है और यूनिकोड समर्थित फॉन्ट की सुविधाओं को जानने के बाद अधिकाधिक प्रयोगकर्ता भी इनका प्रयोग करने लगे हैं। यदि आप गूगल पर कोई खोज करना चाहते हैं तो आपको यूनिकोड समर्थित फॉन्ट का प्रयोग ही करना पड़ेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सबसे बढ़िया तरीका यह है कि आप अपने कम्प्यूटर में देवनागरी का लोकेल स्थापित कर लें। इस प्रकार न केवल आप देवनागरी में बनाये हुये जाल-पृष्ठ आसानी से देख पायेंगे बल्कि आप खोज और ई-पत्र भी आसानी से लिख पायेंगे।<br />.<br /><strong>देवनागरी का लोकेल अपने कम्प्यूटर में स्थापित करना देवनागरी का लोकेल</strong> माइक्रोसाफ्ट विण्डोस 2000 या उसके आगे के सभी माइक्रोसाफ्ट आपरेटिंग सिस्टम में प्रयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार रेडहेट लाइनक्स और एप्पल के ओ एस एक्स (टाइगर या नये संस्करण) में भी इसका प्रयोग आसानी से संभव है। आइये अब विण्डोस में इसे कैसे आरंभ किया जाता है इसे समझें।<br />.<br />सबसे पहले सुनिश्चित कर लें कि आपके पास विण्डोस 2000 या एक्स पी जो भी आप अपने कम्प्यूटर में प्रयोग कर रहे हैं, उसकी मूल सीडी आपके पास उपलब्ध है। विशेषकर यदि आपके पास विण्डोस 2000 या एक्स पी का पुराना संस्करण है। नये एक्स पी के संस्करणों में कभी-कभी आपको अपनी मूल सीडी की आवश्यकता नहीं भी पड़ती है। अब नीचे दिखाये गये चित्रों को देखकर अपने कम्प्यूटर में देवनागरी का लोकेल स्थापित कर लें। सबसे पहले चित्र में कंट्रोल पैनल को दिखाया गया है। कंट्रोल पैनल दो रूपों में आता है। एक है पुराना प्रचलित तरीका और दूसरा है नया तरीका। पुराने तरीके में सभी प्रतिरूप (आइकान) एक ही विण्डो में दिखाये जाते थे। परंतु नये तरीके में उन्हे एक वर्ग व्यवस्था दे दी गई है। प्रस्तुत चित्र नयी व्यवस्था का है परंतु पुराने प्रकार के कंट्रोल पैनल में आप Regional Options" का प्रयोग करके यह कार्य कर सकते हैं। सर्वप्रथम या फिर Date, time langauage and regional options" जो भी आपके कंट्रोल पैनल में दिख रहा है उस पर क्लिक करें। अब आपके सामने दूसरा चित्र आयेगा। इस चित्र में भाषाओं वाले बटन पर क्लिक करें। अब आपके सामने तीसरा चित्र आयेगा। इस चित्र में देखें कि Install files for complex scripts and right-to-left languages(including thai) के सामने टिक का निशान लगा हुआ है। यदि नहीं लगा है तो लगा कर ओके बटन दबायें। यदि आपके आपरेटिंग सिस्टम को मूल स्थापन Installation CD) सीडी की आवश्यकता होगी तो इसी स्थान पर आपसे मूल सीडी की माँग की विण्डो सामने आ जायेगी और मूल सीडी को कम्प्यूटर में लगाने के बाद कम्प्यूटर आवश्यक सॉफ्टवेयर स्वयं लोड कर लेगा। हो सकता है कि कम्प्यूटर रिबूट करना चाहे। यदि ऐसा हो तो कम्प्यूटर के पुनः बूट करने के बाद आप आगे की विण्डो में दिखाया गया कार्य कर सकते हैं।<br />.<br />अब पुनः पहले की दोनों विण्डो के द्वारा होते हुये तीसरे विण्डो पर पहुँचे और details के बटन पर क्लिक करें। तत्पश्चात् आपके सामने चौथी विण्डो आयेगी। अब इस विण्डो में add के बटन पर क्लिक करें और मेनू में से हिन्दी का चयन कर लें। अब हिन्दी आप को Installed services में दिखने लगेगी। अब यदि आप advanced बटन पर क्लिक करेंगे तो आपको दिखेगा कि आप किस प्रकार आप कम्प्यूटर में प्रयुक्त भाषा को अपने इच्छानुसार बदल सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बायीं shift aur alt key एक बार दबाने पर आपका की बोर्ड हिन्दी में टाइप करेगा और फिर से दबाने पर वापस अंग्रेजी में लिखने लगेगा। इस समय यदि आप नीचे की बार में देखें तो एक छोटा प्रतिरूप EN या HI दिखायेगा। जिसका अर्थ है कि आप अंग्रेजी या हिन्दी की-बोर्ड का प्रयोग कर रहे हैं। यदि आपको फिर भी कोई समस्या आये तो आप हमें ई-मेल से संपर्क स्थापित कर सकते हैं।<br />.</div><div align="left"><div><div><div><br /><strong><a href="http://www.pustak.org/bs/morecontent.php?block=53">चित्र सहित जानने लिए यहां क्लिक करें</a><a href="http://3.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtIBYWw7fI/AAAAAAAAAEA/mwqejggRQCs/s1600-h/hindi-Kaise-page1.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123768189619072498" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtIBYWw7fI/AAAAAAAAAEA/mwqejggRQCs/s400/hindi-Kaise-page1.jpg" border="0" /></a></strong></div><br /><a href="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHhIWw7eI/AAAAAAAAAD4/T4dQ55ozsTA/s1600-h/hindi-Kaise-page2.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123767635568291298" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHhIWw7eI/AAAAAAAAAD4/T4dQ55ozsTA/s400/hindi-Kaise-page2.jpg" border="0" /></a><br /><br /><div><strong></strong></div><br /><br /><br /><div><strong></strong></div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHV4Ww7dI/AAAAAAAAADw/UXtSlqVISdM/s1600-h/hindi-Kaise-page3.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123767442294762962" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHV4Ww7dI/AAAAAAAAADw/UXtSlqVISdM/s400/hindi-Kaise-page3.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><div><strong></strong></div><br /><br /><br /><div></div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHI4Ww7cI/AAAAAAAAADo/Co6mL3YSSNA/s1600-h/hindi-Kaise-page4.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123767218956463554" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtHI4Ww7cI/AAAAAAAAADo/Co6mL3YSSNA/s400/hindi-Kaise-page4.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong></strong></div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtGc4Ww7bI/AAAAAAAAADg/0XD7pTqKU0U/s1600-h/hindi-Kaise-page4.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123766463042219442" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtGc4Ww7bI/AAAAAAAAADg/0XD7pTqKU0U/s400/hindi-Kaise-page4.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div></div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtGL4Ww7aI/AAAAAAAAADY/cKwZfp6yFj0/s1600-h/hindi-Kaise-page5.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123766170984443298" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtGL4Ww7aI/AAAAAAAAADY/cKwZfp6yFj0/s400/hindi-Kaise-page5.jpg" border="0" /></a><br /><a href="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtF7IWw7ZI/AAAAAAAAADQ/phwO0nbLoQ4/s1600-h/hindi-Kaise-page6.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123765883221634450" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtF7IWw7ZI/AAAAAAAAADQ/phwO0nbLoQ4/s400/hindi-Kaise-page6.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong><a href="http://www.pustak.org/bs/morecontent.php?block=53">चित्र सहित जानने लिए यहां क्लिक करें</a><a href="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtFsIWw7YI/AAAAAAAAADI/fsfokQjdQTU/s1600-h/hindi-Kaise-page7.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123765625523596674" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtFsIWw7YI/AAAAAAAAADI/fsfokQjdQTU/s400/hindi-Kaise-page7.jpg" border="0" /></a></strong></div><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong><a href="http://www.pustak.org/bs/morecontent.php?block=53">चित्र सहित जानने लिए यहां क्लिक करें</a><a href="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtFJIWw7XI/AAAAAAAAADA/0AXl4s6aQk0/s1600-h/hindi-Kaise-page8.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5123765024228175218" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_nz0rimrLQNk/RxtFJIWw7XI/AAAAAAAAADA/0AXl4s6aQk0/s400/hindi-Kaise-page8.jpg" border="0" /></a></strong></div><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong></strong></div><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong></strong></div><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div><strong></strong></div></div></div><br /></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-116746279228221007?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-62009362386625279342007-10-20T20:59:00.001-07:002007-10-20T21:00:49.053-07:00दबी , दबती , दब गई जन पत्रकारिता<a href="http://pucl.org/">डा० पुश्कर राज </a><br />पुष्कर राज जी पी यू सी एल के सचिव हैं लेकिन इससे ज्यादा वे उनकी आवाज़ हैं जिनकी कोई आवाज़ नही। या फिर जिनकी आवाजें जबरदस्ती दबा दी गई हैं। कुछ लोगो के लिए मानव अधिकारों की बात करना एक फैशन की तरह है और कुछ के लिए पैशन की तरह। हम कहते तो हैं कि आपकी आज़ादी वहाँ से शुरू होती है जहाँ मेरी नाक ख़त्म होती है लेकिन मानव अधिकारों के मामले मे न तो कही नाक है और ना ही आज़ादी। पड़े होते रहें आज़ादी के साठ साल पूरे। आज भी वही बेआवाज़ हैं जो आज से साठ साल पहले थे। मीडिया भी मानव अधिकारों के वही मामले उठाती है जिसमे टी आर पी हो , ग्लैमर हो , अंग्रेजी हो और चट्खारापन हो। इन सारी बातो से पुष्कर जी काफी व्यथित नज़र आते हैं। इन्होने यह लेख मेरे आग्रह पर एक संध्य्कालीन अखबार के लिए दिया था जो अब मैं बजार मे प्रकाशित कर रहा हूँ। -राहुल<br />.<br />.<br />कुछ वर्ष पहले एक जाने माने पत्रकार द्वारा संचालित एक पत्रकारिता आधारित वेबसाईट ने रक्षा सौदों से सम्बंधित घोटालों का पर्दाफाश किया था। नतीजतन देश की राजनीति व नौकरशाही मे खलबली मच गई। भाजपा , जो उस समय सत्ता मे थी उसके अध्यक्ष को इस्तीफ़ा देना पड़ा था तथा कई सैनिक अफसरों पर गाज भी गिरी। देश की जनता ने <a href="http://www.tehelka.com/">'तहलका'</a> नामक इस वेबसाईट की काफी तारीफ की। आम जनता का मानना था कि राष्ट्रिय हित ही पत्रकारिता का पहला धर्म होना चाहिऐ न कि किसी विशेष वर्ग अथवा दल का हित साधन। आम नागरिक का मानना था कि तहलका ने रक्षा सौदों मे भ्रष्टाचार उजागर करके सामाजिक हित का कार्य किया , लेकिन अगले तीन चार साल तहलका नामक इस संस्था के लिए काफी कष्ट भरे साबित हुए। भाजपा सरकार ने बदले की भावना से प्रेरित होकर उस छोटे से औधोगिक प्रतिष्ठान के खिलाफ कई मुकदमे बना दिए जिसकी आर्थिक सहायता तहलका को मिल रही थी। नतीजा यह हुआ कि तहलका बंद हो गया , पत्रकार बेरोजगार हो गए और सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाना महंगा साबित हुआ। हालांकि कुछ अंतराल बाद तहलका फिर शुरू हुआ जो कि एक अलग किस्सा है ।<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_l4k30fylmCc/Rr_aPl9C8cI/AAAAAAAAAOI/5I1f8B0VDSs/s1600-h/213180_dadri6.jpg"></a>यह घटना इस तथ्य की द्योतक है कि पत्रकारिता एक मुश्किल शगल है। खास करके जब इसके पीछे एक राजनितिक अथवा आर्थिक वरद हस्त न हो और अगर राजनितिक और आर्थिक उद्देश्य पत्रकारिता के पीछे होंगे तो वह पत्रकारिता नही है बल्कि एक व्यवसाय है ,जैसे दुकान पर बैठकर चीज़े बेचना। यही बात आम नागरिक को समझनी चाहिऐ। विशेषकर तब जब वह एक लोकतांत्रिक समाज मे रह रहा हो। देश मे आज की पत्रकारिता के परिदृश्य पर अगर नज़र दौडायें तो कमोबेश एक समरूप स्थिति नज़र आती है। जो चमकीला है वह बिकता है। अगर किसी अमीर के घर चोरी होती है तो वह पहले पेज के खबर बनती है , गरीब के घर की चोरी को अन्तिम पन्ना भी नसीब नही होता । मुझसे अक्सर मेरे टेलीविजन के पत्रकार दोस्त कहते हैं कि कही कोई मानव अधिकारों के हनन का मामला हो तो हमे बतायें। पर हाँ , जिसके मानव अधिकारों का हनन हो उसकी प्रोफाइल अच्छी होनी चाहिऐ । मतलब अगर वह महिला है तो खूबसूरत हो , और उस पर भी अंग्रेजी बोले । बेहतर टी आर पी का तर्क जन संवेदनाओं तथा जन आकाँक्षाओं को दरकिनार करते हुए हमारे वर्तमान जीवन की पत्रकारिता की कड़वी सच्चाई है।पिछले दिनों दादरी मे किसानो की विरोध सभा को पुलिस ने बेरहमी से कुचला। स्त्रियों , बच्चों व बूढों को लाठियों से पीता गया , गाँव वालों के घरों को लूटा गया लेकिन क्योंकि किसानो का समूह कोई टेलीविजन चैनल या अख़बार नही चलाता इसलिये इस खबर की रिपोर्टिंग का नजरिया इस तरह का था जैसे सरकार तो अधिकृत जमीन का मुआवजा दे रही है पर किसान ही बखेडा खड़ा कर रहे हैं। क्योंकि मामला देश के एक बडे औधोगिक प्रतिष्ठान से जुडा था इसलिये रिपोर्टरों द्वारा भेजी लंबी तफ्सीलें मालिकों के इशारे पर अख़बार मे एक या दो कालम की बनकर रह गई ,वह भी बीच के किन्ही पन्नो पर।<br />.<br />पूरे देश के पत्रकारिता पर नज़र डालें तो आप पाएंगे कि अख़बार , टेलीविजन और एफ एम् रेडियो पर सिर्फ औधोगिक प्रतिष्ठानों का क़ब्जा है। इसीलिये जब हिंदुस्तान टाइम्स के कर्मचारी अपनी आम करने की परि स्थितियों के विरोध मे हड़ताल करते हैं या यू एन आई के पत्रकार जी टी वी द्वारा अधिग्रहण का विरोध करते हैं तो उनके विरोध का स्वर जनता तक नही पंहुचता । उदारीकरण और भूमंडलीकरण के इस दौर मे संसाधनों का केंद्रीकरण , पूँजी का केंद्रीकरण , ज्ञान का केंद्रीकरण तथा सूचना का केंद्रीकरण एक उभरता खतरा है। इस ख़तरे की चाय देश के विभिन्न भागों मे महसूस की जा रही है तथा विरोध के स्वर छोटे छोटे जन आंदोलनों के रुप मे उभर रहे हैं।इन जन आंदोलनों को एक व्यापक स्तर पर लाने के लिए जन पत्रकारिता की जरुरत है। ऎसी पत्रकारिता जो आम जनता की आवाज़ आम जनता के बीच पंहुचाते हुए मानवीय अस्मिता तथा अधिकारों की रचना करे। ऐसा तभी होगा जब इनमे से ही कुछ लोग धन की बैसाखी का सहारा लिए बिना पत्रकारिता को एक सामाजिक कर्म के रुप मे देखेंगे और पोषित करेंगे।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-6200936238662527934?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-88329234788595528132007-10-20T20:56:00.000-07:002007-10-20T20:57:21.209-07:00‘वेब पत्रकारिता का भविष्य उज्ज्वल’<div align="left">साभार <a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2007/01/070117_seminar_iimc.shtml">बीबीसी</a> :<br />पाणिनी आनंद</div><div align="left">बीबीसी संवाददाता, दिल्ली<br />“वेब पत्रकारिता में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व बहुत दिन नहीं रहने वाला है. क्षेत्रीय और स्थानीय भाषा में बन रहे वेब पोर्टलों और वेबसाइटों का प्रभाव बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और इनका भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है.”<br />यह कहना है बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के मार्केटिंग विभाग के कंट्रोलर एलेन बूथ का. एलेन बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की ओर से दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान में वेब पत्रकारिता पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे.<br />हालांकि एलेन बूथ इस बात की चर्चा करने से भी नहीं चूके कि वेब पत्रकारिता में सबसे बड़ा सवाल विश्वसनीयता को लेकर भी है.<br />उन्होंने कहा, “आज लोगों को इतनी जगहों से समाचार मिल रहे हैं कि लोगों के लिए समाचारों की विश्वसनीयता एक बड़ा मुद्दा है. यह वेब पत्रकारिता के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.”<br />सेमिनार में पारंपरिक मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता के बीच की दूरियों की चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने कहा, “देश में कंप्यूटर साक्षरता बढ़ रही है. हिंदी में संभावनाएँ और चुनौतियाँ अधिक हैं लेकिन अभी इंटरनेट पर हिंदी में सामग्री का बहुत अभाव है.”</div><div align="left"><br /><strong><span style="color:#336666;">बढ़ता बाज़ार</span></strong><br />बीबीसी हिंदी सेवा के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव ने इस अवसर पर मौजूद छात्रों के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “बाज़ार ने क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को बहुत महत्व दिया है और आने वाले समय में बाज़ार के दबाव में ही सही लेकिन सभी को हिंदी सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को स्वीकार करना पड़ेगा.”<br />उन्होंने छात्रों को समझाया कि वेब पत्रकारिता में भविष्य बनाने के लिए किस तरह की तैयारी और किन बातों को ध्यान में रखने की ज़रूरत है.<br />वहीं बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की संपादक सलमा ज़ैदी ने बीबीसी हिंदी ऑनलाइन के अब तक के सफ़र पर प्रकाश डाला.<br />उन्होंने कहा, “वेब पत्रकारिता करने वालों का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है. उनकी ख़बर एक पल में सारी दुनिया में पहुँच जाती है जो कि अन्य समाचार माध्यमों में संभव नहीं है.”<br />सेमिनार में बोलते हुए वेब दुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभी इंटरनेट की पहुँच बहुत कम है. कंप्यूटर के दाम अभी आम आदमी की पहुँच से काफ़ी अधिक हैं.<br />बहस<br />वेब पत्रकारिता के भविष्य और संभावनाओं पर चर्चा के साथ ही कई मुद्दों पर जमकर बहस भी हुई.<br />मसलन, हिंदी वेब पत्रकारिता में फॉन्ट की समस्या और हिंदी भाषा के बदलते स्वरूप पर भी छात्रों और अतिथियों ने चर्चा की.<br />इस अवसर पर बोलते हुए आईआईएमसी में हिंदी पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष, प्रोफ़ेसर प्रदीप माथुर ने कहा कि मीडिया का लोकतंत्रीकरण करने में वेब पत्रकारिता बड़ी भूमिका निभा रहा है लेकिन अभी भारत में हिंदी वेब पत्रकारिता के क्षेत्र में काफ़ी कुछ किए जाने की ज़रूरत है.<br />कार्यक्रम का संचालन बीबीसी की बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर विनीता द्विवेदी ने किया.</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-8832923478859552813?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-59138054775172518872007-10-17T22:25:00.000-07:002007-10-17T22:31:41.114-07:00लिखने से पहले- थोड़ा बदलने की कोशिश करिए -ऋतु मिश्र<div align="left">आमतौर पर यह माना जा रहा है या जो भी छापा या लिखा जा रहा है। उसमें यह संकेत होता है कि विकासात्मक पत्रकारिता का मतलब बड़े-बड़े विद्वानों के लेख छापना। भारी भरकम फैक्ट, आंकड़े या ढेर सारे एक्सपर्ट के बयान। बुरा मत मानिए यह सब एक आम आदमी के लिए बेहद उबाउ और बेकार ही साबित होता है। विकासात्मक पत्रकारिता के नाम पर अखबार मालिक या ज्यादातर संपादकों के मन में भी यह बात रहती है कि कोई भी सामाजिक मुद्दा उठाना है तो एक पूरा पेज पांच एक्सपर्ट्स की राय से भर दिया जाए। इससे केवल वो एक्सपर्ट्स कुछ उससे जुड़े लोग और अखबार की कुछ साख बनी रहती है, पर आप सर्वे करा लीजिए आम आदमी ने उस पेज की बमुश्किल कुछ लाइनें पढ़ी होंगी। वह उस भाषा, उन आंकड़ों को देखकर ही पीछे हट जाता है।<br /><br />हमे विकास से जुड़ी खबरें और उनके प्रस्तुतिकरण को कमर्शियल फिल्मों की स्क्रिप्ट की तरह लेना होगा। हमें उसे बॉक्स ऑफिस यानी कि टारगेट ग्रुप की हिट खबर बनानी होगी। इसके लिए हमें उसमें वो सारी चीजें जोड़नी होगी जो एक कमर्शियल फिल्म की स्क्रिप्त में रहती है। आप रंग से बसंती देखिए सुपर हिट रही। इसकी तुलना आप शहीद भगतसिंह बनाइए, गिने-चुने दर्शक मिलेंगे। रंग दे बसंती में थीम वही है देशभक्ति पर प्रस्तुति का तरीका बदला है। हमें भी वही करना है। खबरों को लिखते वक्त कुछ नई चीजें हमें ध्यान रखनी होगी। मैं जानती हूं आप में से ज्यादातर लोगों को पहली नजर में यह ठीक नहीं लगेगा। हमें विकास से जुड़ी खबरों में भी थोड़ा सा मसाला लगाना होगा। यानी उसे इस ढंग से पेश करना होगा कि आपका टारगेट समूह उसे पढ़ने को आकर्षित हो। 'न्यूज टुडे' ने शाम का अखबार होने के बावजूद अपने सामाजिक सरोकार को बनाए रखा। हमेशा सेनसेशन के बजाए इंफार्मेशन पर जोर दिया।<br />इसके लिए उसमें हमने अखबार की खबरों में ये चीजें डाली-<br /><strong><span style="color:#006600;">एक्शन<br />इमोशन<br />रिलेशन<br />डेफिनेशन<br />रिलीजन<br />ड्रामा<br />फीयर<br />फैक्ट<br />हेडलाइन और फोटोग्राफ्स</span></strong></div><div align="left"><strong><span style="color:#006600;">.<br /></span><span style="font-size:130%;color:#336666;">एक्शन</span></strong>- खबर पूरी तरह एकदम लाइव दिखे, पढ़ने वाले को लगे ये मेरे आसपास की या मेरी ही बात चल रही है।<br /><br /><span style="color:#003333;">उदाहरण-</span> आप हेडिंग दे दीजिए सिगरेट पीने से जान को खतरा, कम लोग पढ़ेंगे, आप लिखिए- ऐसे छुटती है काफिर मुंह की लगी- ज्यादातर लोग रूकेंगे, पढ़ेंगे।<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#003333;"><strong>इमोशन</strong></span>- कोई ऐसी केस स्टडी हो जिसमें पढ़ने वाली आंखों में आंसू निकल आए।<br />रिलेशन- जब आप स्टोरी को एक पारिवारिक टच देंगे। रिश्तों को जोड़ेंगे। सीधे-सीधे बताएंगे कि शराब पीकर गाड़ी चलाएं पर एक बार अपने पीछे देख लें, जिन्हें बेसहारा छोड़कर जा रहे हैं, उनके बारे में सोचे। आपकी मौत के बाद आपकी बीवी क्या करेगी, बच्चे किसके सहारे जिएंगे।<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#000099;"><strong>डेफिनेशन</strong></span>- इस सबके बीच आप एक बॉक्स तुरंत उस बीमारी की या समस्या की वैज्ञानिक या सामाजिक परिभाषा लगा दीजिए। आदमी एक बहाव में उसे भी पढ़ जाएगा। इसके विपरीत आप स्टोरी उसकी परिभाषा से शुरू करेंगे तो वह वहीं पर पढ़ना छोड़ देगा।<br /><br /><br /><strong><span style="font-size:130%;color:#003300;">रिलीजन</span></strong>- आप किसी भी मुद्दे को थोड़ा सा धार्मिक टच दे दीजिए फिर देखिए उसका असर। आप ऐसे कहेंगे कि पॉलीथिन का इस्तेमाल मत करिए। कोई ध्यान नहीं देगा, आप लिखिए भगवान को जहर लगा प्रसाद मत चढ़ाइए। देखिए मंदिरों के बाहर पॉलिथीन बैग्स में प्रसाद खरीदने से लोग मना करने लगेंगे। आप लिखिए प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश प्रतिमा से नदियाें में प्रदूषण फैलता है कोई नहीं मानेगा। आप लिखिए विसर्जन के बाद आपके गणेश जी खंडित होकर पड़े रहते हैं, इससे आपकी दुआ कबूल नहीं होगी। मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कीजिए। देखिए असर।<br /><br /><span style="font-size:130%;color:#666600;"><strong>ड्रामा-</strong></span> कुछ काल्पनिक भयावहता या भविष्य की अच्छाइयां बताइए। पेड़ वाले पेज पर सिलेंडर।<br /><br /><br /><span style="font-size:78%;">यह आलेख विकास संवाद (सचीन जैन) के बैनर तले आयोजित राष्ट्रीय मीडिया संवाद में उनके वक्तव्य पर आधारित है। रीतू मिश्रा राजस्थान पत्रिका के अखबार समुह का अखबार समुह का न्यूज़ टुडे सांध्य दैनिक, इन्दौर की सम्पादक हैं.</span></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-5913805477517251887?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-57715195182110408922007-10-16T20:21:00.000-07:002007-10-16T20:36:49.292-07:00मीडिया कॉलेज मे आपका स्वागत है,<div align="left"><strong>मीडिया कॉलेज मे आपका स्वागत है, हमारे सरोकार एक सुंदर समाज के हैं, देश-समाज को एक बेहतर दिशा मे ले जाने का हमारे मन मे एक सुंदर सपना है, माध्यम हमेशा से एक जरुरी चीज रही है, आज हमारे पास ब्लॉग, वेबसाइट, ब्लॉग साइट अभिव्यक्ति के नए माध्यम हैं हमें इनका इस्तेमाल करना है</strong><strong>.</strong></div><div align="left"><strong>.</strong></div><div align="left"><strong><span style="font-size:130%;color:#000066;"> मीडिया कॉलेज कोशिश करेगा कि यह पूरी तरह खुला मंच बना रहे, यहाँ कोई अध्यापक नहीं है सब एक दूसरे को सिखा सकते हैं, १०० फीसदी खुला मंच ..........................</span></strong></div><div align="left"><strong>.</strong></div><strong><div align="left"><br />आप भी इसमे शामिल हो सकते हैं, दोस्ती का हाथ आगे करें, ईमेल करें या फ़ोन</div><div align="left">.</div><div align="left">- मनोज श्रीवास्तव - 9990664423 manojsrivats@gmail.com<br />- शिराज केसर - 9211530510 <a href="mailto:kesaraba@gmail.com">kesaraba@gmail.com</a></strong></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-5771519518211040892?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-6350853220457673648.post-11020474398525961952007-10-16T09:37:00.000-07:002007-10-16T10:58:47.138-07:00Contact Us<div align="left"><strong>Satish Kumar Jain - 9990700106 </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Neetu Singh tomar - neetu.singhtomar@yahoo.co.in </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Rekha - sush0203@yahoo.com</strong></div><div align="left"><strong>.<br />Prashant Singh - 9873596532 <a href="mailto:media_pras@yahoo.co.in">media_pras@yahoo.co.in</a> </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Munna - Jha - 9818656167 <a href="mailto:munna@journlist.com">munna@journlist.com</a> </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Piyush ku dubey - 9968200721 </strong><a href="mailto:piyush4u.p@yahoo.co.in"><strong>piyush4u.p@yahoo.co.in</strong></a><strong> </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Manoj Sriwastwa - 9990664423 manojsrivats@gmail.com </strong></div><div align="left"><strong>.<br />Siraj Kesar - 9211530510 </strong><a href="mailto:kesaraba@gmail.com"><strong>kesaraba@gmail.com</strong></a></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6350853220457673648-1102047439852596195?l=media-college.blogspot.com'/></div>Media Schoolhttp://www.blogger.com/profile/09175011077939831138noreply@blogger.com0