tag:blogger.com,1999:blog-58635464284023711182009-02-20T17:37:01.694-08:00Vivek ji waniThis is blog devoted for Vivek ji quotes which appear in his discourses and in in the magazine which run by his devoted organisation ananda hi ananda.Amrita kaurnoreply@blogger.comBlogger7125tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-31506444837991540082007-12-29T03:25:00.000-08:002007-12-29T03:47:27.674-08:00जीवन प्रभात"जीवन की धार में ,अश्रुओं का भार है ,<br /> <br /> कांटे हैं घ्रणा के तो ,<br /><br /> पुष्पों में बसा हुआ ,प्रेम का सिंगार है,<br /><br /> चलने वाले तू चला चल ,<br /><br /> देर कि सबेर में नूतन प्रभात है "<br /> <br /><br /> " लहुओं के रंग में बस आसुओं का भेद है,<br /> <br /> पक्षिओं के घोसलों से जो भी संगीत है ,<br /><br /> सुख कि मृदंग पर , दुःख का गीत है<br /><br /> आस कर चला जो भी , टूट कर बिखर gaya<br /><br /> नाम तक बचा नहीं , शब्द भी नहीं बचे,<br /><br /> दूर तक उड़ा जो भी , पात धाक सो गिर पड़ा<br /><br /> कभी जो जिंदगी कि गलिओं में , ठहाकों से गूंजते<br /><br /> शमशानो ही शान में , आज उनका भी नाम है,<br /><br /> चलने वाले ,इतना जो तू समझ चला,<br /><br /> ठहरा-चला तू, चला -चला ,ठहरा हुआ<br /><br /> जिंदगी कि बेल में ,फिर तुझसे ही जान है ,<br /><br /> ओस कि बूदों से बना, तेरा जीवन प्रभात है "<br /><br /><br /><br /><span style="font-size:180%;">विवेक जी</span><br /><br />सोर्स : आनंद ही आनंद मैगज़ीन<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-3150644483799154008?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-43450943630655742822007-12-08T02:02:00.001-08:002007-12-08T02:11:39.126-08:00जीवन जो मैंने देखा:जीने के लिए कारणों को मत खोजो , जीवन पूरा ही अकारण है , जब तक जीवन कारणों के आधार पर खड़ा रहेगा जीवन सुख , दुःख का मेल होगा , और जैसे ही हँसने और रोने के लिए कारन विदा हो जाते हैं तब ही आनंद कि गूंज हमारे प्राणों को प्रेम का रस दे सकती है "<br /><br /><br /><br />विवेक जी " जीवन जो मैंने देखा "<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-4345094363065574282?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-5827485262085917112007-10-26T07:43:00.000-07:002007-10-26T07:52:47.125-07:00प्रेम क्या है" जहाँ तक मैं देख पता हूँ मुझे तू यही लगता , पूरी दुनिया कम से कम प्रेम के मामले में भिखारी है , हर एक कोई प्रेम पाना चाहता है , कोई प्रेम अकारण नहीं देना चाहता , संबंध अगर कमजोर हो रहें हैं तो कारण सिर्फ इतना है , हम सब सम्बंधों में प्रेम की आशा से जाते हैं , हम प्रेम देना नहीं , पाना चाहते हैं , और दो भिखारी क्या एक दुसरे को दे सकते हैं , वो तो केवल मांग कर साकते हैं ।<br /><br />विवेक जी " प्रेम -मेरी जानी "<br /><br />सोर्स : आनंद ही आनंद , नेशनल मैग्जिन<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-582748526208591711?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-54819542381010903502007-10-20T03:14:00.000-07:002007-10-20T03:21:29.531-07:00राम मेरे राम" कृष्ण अगर मनुष्य कि सभ्यता के , विचार , तर्क और दर्शन हैं तो फिर राम मेरे देखे , हमारी सभ्यता के वो स्वरूप हैं जो स्वयमेव <em><strong>जीवन</strong></em> के प्रतिबिम्ब हैं."<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-5481954238101090350?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-49301346986545475632007-10-10T03:55:00.000-07:002007-10-10T04:28:04.505-07:00कृष्ण मेरी आँखों से" कृष्ण मेरे लिए उस व्यक्ति का नाम है जिसने जीवन जैसा है , उसे उसी रूप मैं स्वीकार किया था , ना तो भागा था , ना तो कुछ छोड़ा था , जीवन जो भी कुछ दिया उसे वैसे ही स्वीकार किया , जीवन मैं आनंद तभी पैदा होता है जब , हम स्वीकारने को राजी हो जाते हैं , और जीवन जब स्वीकार्यता का परिचय बन जता है तभी , होंठों से बंश्री के स्वर लहर जाते हैं , प्रेम का साहस नृत्य बनकर जीवन को आनंद का परिचय देता है "<br /><br /><br /><em><span style="font-family:lucida grande;">विवेक जी " कृष्ण मेरी द्रष्टि मैं " प्रवचनांश से</span><br /></em><br />सोर्स: आनंद ही आनंद , मैगजीन से<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-4930134698654547563?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-21846078287343251982007-10-07T23:13:00.000-07:002007-10-07T23:26:27.040-07:00ये प्रेम है" जिसने कभी प्रेम ही नहीं किया , वो कभी ईश्वर को पाने कि पात्रता भी नहीं रख सकता , जो प्रेम कर सकता है , जो स्वयम प्रेम हो सकता वही एक दिन ईश्वर को पाने कि पात्रता रख सकता है , वही एक दिन परमात्मा हो सकता है , मेरे लिए परमात्मा पूजने का नहीं , सवाल परमात्मा होने का है , ये धरती अब मनुष्यों के दम पर ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकती , इस धरती को , अब जरुरत है परमात्मा कि है , और एक नहीं कई , बहुत दिनों तक इस धरती को सहारा मंदिरों मैं बैठे हुए परमात्मा नहीं दे सकते , राम और <span class="">jesus</span> जैसे लोगों को इस धरती पर चलने कि है , और हममे और आप से ही "<br /><br />विवेक जी<br /><br />सोर्स; " प्रेम का सूरज " प्रवचन से<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-2184607828734325198?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-5863546428402371118.post-85418543154364001702007-10-07T06:02:00.000-07:002007-10-07T06:09:14.589-07:00विवेक जी के अनुसार धर्म"मैं तो कहता हूँ भगवन है कि नहीं ये बड़ा सवाल नहीं है , जो हम सब पूँछ रहे हैं , अगर वो नहीं है तो हम सब को मिलकर उसे पैदा करना है , हमको भगवन होना है / बड़ा सवाल भगवन को पूजने का नहीं है , सवाल भगवन होने का है ।"<br /><br />विवेक जी ,<br /><br />सोर्स : आनंद ही आनंद , मैगज़ीन , जून माह \<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5863546428402371118-8541854315436400170?l=vivekjiwani.blogspot.com'/></div>Amrita kaurnoreply@blogger.com0