tag:blogger.com,1999:blog-374965012009-02-20T23:15:19.638-08:00डा० राष्ट्रबंधुडॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.comBlogger22125tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-47600726819950139912007-02-16T05:18:00.000-08:002007-02-16T05:28:50.302-08:00परिचय<a href="http://3.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWvtHpv3rI/AAAAAAAAAAc/Xt1yvCAHj_Y/s1600-h/DR.Rashtrabandhu.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5032121348339523250" style="WIDTH: 156px; CURSOR: hand; HEIGHT: 195px" height="256" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWvtHpv3rI/AAAAAAAAAAc/Xt1yvCAHj_Y/s320/DR.Rashtrabandhu.jpg" width="208" border="0" /></a><br /><div><br />डॉ० राष्ट्रबंधु</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-4760072681995013991?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-20131589885656506882007-02-16T05:17:00.000-08:002007-02-16T05:18:05.636-08:00विविध लिंकविविध लिंक<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-2013158988565650688?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-22173231878506393232007-02-16T05:02:00.000-08:002007-02-16T05:04:20.858-08:00टाइगर हिल अष्टकधक धक करने लगता है दिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />ऊँची चोटी तक बर्फ जमी<br />मुश्किल से मिलती है गर्मी<br />सीधे चढ़ना पड़ता इस पर<br />ऑक्सीजन की है बहुत कमी<br />दुर्गम में आ बैठे कातिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />पाकिस्तानी घुस पैठ हुई<br />गतिविधियों की गति तेज हुई<br />बंकर खोदे, रणक्षेत्र बना<br />कब्जे की बढ़ने लगी सुई<br />खतरे की घंटी ट्रिल ट्रिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />पाकिस्तानी मिल जाते थे<br />मजहब का जाल बिछाते थे<br />अपना उल्ल्ू सीधा करते<br />मछली की तरह फँसाते थे<br />कब तक हम सहते रह गाफिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />सहसा हिल गया हिमालय था<br />श्रीनगर लेह पथ में भय था<br />था शीतयुद्ध सहमे शहरी<br />बदला लेने का निश्चय था<br />यह द्रास, वटाला, है करगिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />भारत ने उनको ललकारा<br />जनता ने उनको धिक्कारा<br />लेने के देने पड़े उन्हें<br />सेना ने गिन-गिनकर मारा<br />पर्वत पर आग गई थी खिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />बर्बरता ने झुकना सीखा<br />निष्ठुरता ने रुकना सीखा<br />दुष्टों का दमन हुआ ऐसा<br />जैसे बिल में घुसना सीखा<br />बिलबिला गए बनते काबिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />हमने रक्खा है स्वाभिमान<br />बलिदान शौर्य का कीर्तिमान<br />यह वीर भोग्या वसुन्धरा<br />विज्ञान कृषक जय जय जवान<br />गाथा गायेगा विश्व निखिल<br />यह टाइगर हिल।<br /><br />कृष्णा, काबेरी गंगा है<br />लहराता दिव्य तिरंगा है<br />पति, पुत्र पिता जो हैं शहीद<br />आँखें नम हैं, मन चंगा है<br />लहरों से कब विचलित साहिल<br />यह टाइगर हिल।<br />यह टाइगर हिल।।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-2217323187850639323?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-42036288330116156972007-02-16T05:01:00.002-08:002007-02-16T05:02:26.205-08:00तालमेलएक फूल पाँखुरी<br />फूल छोड़कर बढ़ी<br />वायु के बहाव में<br />पंक में गिरी झड़ी<br />हो गई विवश विलाप कर रही<br />रूप रंग गंध लिए मर रही।<br /><br />एक बूँद नीर की<br />साथ छोड़कर बढ़ी<br />ताप में जली भुनी<br />भाप की बढ़ी चढ़ी<br />सूखने लगी अलग थलग हुई<br />बन गई प्रवाह में छुई मुई।<br /><br />एकता के योग से<br />एक तारिका गिरी<br />अपशकुन हुआ कहीं<br />व्योम में लगी झिरी<br />तालमेल टूटना प्रलाप है<br />तालमेल बैठना प्रताप है।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-4203628833011615697?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-85963914780425462592007-02-16T05:01:00.001-08:002007-02-16T05:37:42.501-08:00डॉ० राष्ट्रबंधु की दो बाल पुस्तकें<a href="http://1.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWy-npv3tI/AAAAAAAAAAw/Z_yCrDBimak/s1600-h/rashtrageet2.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5032124947522117330" style="WIDTH: 255px; CURSOR: hand; HEIGHT: 363px" height="347" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWy-npv3tI/AAAAAAAAAAw/Z_yCrDBimak/s320/rashtrageet2.jpg" width="242" border="0" /></a><br /><span style="font-size:130%;color:#006600;"><strong>मेरे प्रिय राष्ट्रीय गीत</strong></span><br /><strong><span style="font-size:130%;color:#006600;"></span></strong><br /><div align="center"><strong><span style="font-size:130%;color:#006600;">****</span></strong></div><br /><br /><br /><br /><div align="center"><a href="http://2.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWyj3pv3sI/AAAAAAAAAAo/3xvtAO4d52o/s1600-h/rashtrageet.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5032124487960616642" style="WIDTH: 275px; CURSOR: hand; HEIGHT: 374px" height="336" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_0_GGr25ReU4/RdWyj3pv3sI/AAAAAAAAAAo/3xvtAO4d52o/s320/rashtrageet.jpg" width="297" border="0" /></a><br /></div><br /><br /><div align="center"><br /><span style="font-size:130%;color:#006600;"><strong>देशभक्ति के गीत<br /></div></strong></span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-8596391478042546259?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-76214078139279010262007-02-16T05:00:00.000-08:002007-02-16T05:01:02.459-08:00न्यारा उन्मेषफूलों और फलों का देश<br />मीठा स्वाद सलोना वेश<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br /><br />पर्वत रखते हैं ऊँचाई<br />रत्नाकर रखते गहराई<br />नदियों में बहता है अमृत<br />निर्झर ने ताकत दिखलाई<br />मेघ माँगते हैं आदेश<br />हरा भरा करते परिवेश<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br /><br />काली पीली कुछ सिन्दूरी<br />कहीं भुरभुरी गोरी भूरी<br />मिट्टी कोहनूर रखती है<br />फसलों ने की आशा पूरी<br />अन्नपूर्णा माँ का वेश<br />दानशीलता का संदेश<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br /><br />यहाँ शारदा गीत सुनाती<br />माँ रणचण्डी हमें जगाती<br />कृतियों ने इतिहास रचाया<br />हम गाते हैं गीत प्रभाती<br />गंध भरे इसके अवशेष<br />नित्य नया न्यारा उन्मेष<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-7621407813927901026?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-72367014208617706782007-02-16T04:58:00.000-08:002007-02-16T04:59:52.924-08:00जय हो वीर जवानों कीवीर जवानों की जय हो<br />भारतमाता की जय हो<br /><br />जो कि सत्य के लिए अड़े<br />जो कि न्याय के लिए लड़े<br />भारत माँ की रक्षा में<br />प्राणदान के लिए बढ़े।<br />सत्कर्मों का संचय हो<br />भारतमाता की जय हो।<br /><br />सर्दी में जो पड़े रहे<br />मोर्चे पर जो अड़े रहे<br />नेफा में कश्मीर में<br />ले बन्दूकें खड़े रहे<br />पराधीनता का क्षय हो<br />भारतमाता की जय हो।<br /><br />उनसे सबकी आजादी<br />उनसे सबकी खुशहाली<br />राणा शिवा सुभाष वे<br />युग उनसे गौरवशाली<br />परंपरा यह अक्षय हो<br />भारतमाता की जय हो।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-7236701420861770678?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-15853249953654523952007-02-16T04:57:00.000-08:002007-02-16T04:58:36.275-08:00सिपाही सेचाचा नेहरू कहते थे तुम सब लोग सिपाही हो<br />मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।<br /><br />मेरे पास न वरदी है,<br />यह मत सोचो धर दी है<br />मुझको नहीं जरूरत है,<br />मुझे न लगती सरदी है।<br />कहीं भूल या चूक हो,<br />तुम रखते बन्दूक हो<br />लाठी मेरे पास है,<br />दुश्मन सिर दो टूक हो<br />सैबर जेट उड़ाऊँगा,<br />अपने नैट उड़ाऊँगा<br />सव लाख को मारकर,<br />गोविंद सिंह कहाऊँगा।<br />मुक्तिवाहिनी पर अपनी, तुम सब लोग गवाही हो<br />मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।<br /><br />केसरिया बाना पहने<br />आया विजय बसंत है<br />दुश्मन ठण्डे पड़ गए<br />यह अनन्त विजयन्त है<br />तुमको प्यारा देश है<br />मुझको तो तुम प्यारे हो<br />नहीं अकेले तुम कहीं<br />जय जवान के नारे हो<br />धरती धन के लिए नहीं<br />सच्चाई पर मरता हूँ<br />दुखी गरीब जहाँ भी हैं<br />सबकी रक्षा करता हूँ।<br />मेरा नाम मुजीब है, उनके लिए तबाही हो<br />मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-1585324995365452395?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-54172857862508777012007-02-16T04:56:00.000-08:002007-02-16T04:57:28.141-08:00धरती को प्रणाम मेराकण कण को प्रणाम मेरा<br />क्षण क्षण को प्रणाम मेरा<br />प्रतिभा को प्रणाम मेरा<br />धरती को प्रणाम मेरा।<br /><br />चित्रकूट, वृन्दावन, केरल<br />सोमनाथ उज्जयिनी धाम<br />रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर<br />कपिवस्तु साँची अभिराम।<br />श्रमण बेल गोला, अजमेरी<br />आस्था को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />जहाँ गुफाएँ और सुरंगें<br />कहती हैं श्रम की महिमा<br />खजुराहो, कोणार्क, अजंता<br />जड़ को देते हैं गरिमा।<br />चेतन शिल्पकार अनजाने<br />प्रतिभा को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />मिट्टी के नीचे चट्टानें<br />जहाँ संगमरमर शैशव<br />बंजर धरती में भी धन है,<br />सतत् साधना से वैभव<br />प्रासादों में पाषाणों की<br />शोभा को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />वर्षा सब ऋतुओं में रहती<br />गढ़ती है मनचाहा रूप<br />हरियाली का फल फसलें हैं<br />जिनका रूपक भव्य अनूप।<br />सृजन प्ररूप पानी पर निर्भर<br />कृषकों को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />छोटे पर्वत बड़े हो गए<br />बूढ़े कमर झुकाए हैं<br />उनके ऊपर पशु चलते हैं<br />पक्षी पर फैलाए हैं<br />विंध्याचल सहयाद्रि हिमालय<br />श्रमिकों को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />नैमिष, उत्पल, दण्डक, सुन्दर<br />वन अंचल केवल हैं शेष<br />आग और पानी रखते हैं<br />खनिज खनन देते अवशेष।<br />बैलाडीला, झारखण्ड के<br />श्रमिकों को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br /><br />कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी के,<br />कण कण में इतिहास सना<br />मैदानी भागों में जन जन<br />के कारण विस्तार बना।<br />कच्छ, पोखरन हरिकोटा<br />वैज्ञानिक को प्रणाम मेरा।<br />कण कण ......।।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-5417285786250877701?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-1927108786918215172007-02-16T04:54:00.000-08:002007-02-16T04:55:48.157-08:00महिमादस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की<br />श्रद्धा मनु ने परिवारों की, छवि मर्यादा पेश की।<br /><br />अंधकार में रवि-गति बनकर<br />प्रगति अनोखी चली अकेली<br />लोग कंदराओं में जब थे,<br />थी ईंटों की यहाँ हवेली।<br />यज्ञ केन्द्र में विविध कलाएँ साक्षी हैं परिवेश की,<br />दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।<br /><br />हमने कृषि उन्नति लाने को<br />नदियों का था जाल बिछाया<br />हमने तटबंधों पर अनगिन<br />सुविधाओं का साज सजाया<br />ये नदियाँ हैं संस्कृति रक्षक अलग अलग गणवेश की,<br />दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।<br /><br />जिओ और जीने दो सबको<br />इसने जीवन लक्ष्य बनाया<br />अभिलेखों में चिह्न सुरक्षित<br />परहित करना था सिखलाया<br />गुण गरिमा को और बढ़ाएँ, यह महिमा संदेश की,<br />दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-192710878691821517?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-41740583869559062122007-02-16T04:53:00.000-08:002007-02-16T04:54:42.907-08:00साधनातुम चलो देश रुकता नहीं<br />मत झुको देश झुकता नहीं<br />कुछ करो मान सम्मान हो<br />कुछ करो दूर व्यवधान हो<br />गिड़गिड़ाना नहीं जिन्दगी<br />ध्यान रखना न अपमान हो।<br /><br />मान अभिमान से तुम जिओ<br />घी उधारी न लेकर पिओ<br />बेंचकर मान, माँगो नहीं<br />कर्ज के वस्त्र टाँगो नहीं<br />कायरों के गले अर्गला<br />त्याग साहस की है शृंखला।<br /><br />तुम चलो देश आगे बढ़े<br />ध्यान दो देश ऊपर चढ़े<br />वीरता से कसो तुम कमर<br />तो परिश्रम का होगा असर<br />देश कुर्बानियों से बना<br />त्याग का नाम है साधना।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-4174058386955906212?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-6102630985462143402007-02-16T04:52:00.000-08:002007-02-16T04:53:23.588-08:00गाँवयूक्लिप्टस की जगह नीम की छाँव हो<br />सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।<br /><br />जैसे पानी घुस जाता है गाँव में<br />शहर जबरिया घुस जाता है गाँव में।<br />पंचतत्व बिक गए भैंस है पानी में,<br />सज्जनता जीवित है कथा-कहानी में<br />नहीं काँइए कौवे जी की काँव हो<br />सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।<br /><br />शहर बदल देता है नक्शा गाँव का<br />धूमधड़ाका है ाकुनी के दाँव का<br />ऊँची ऊँची दीवारों का बड़ा शहर<br />बहुत दिखावा मगरमच्छ ढा रहा कहर<br />लंका में निश्छल अंगद का पाँव हो<br />सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।<br /><br />साँसें लेना बहुत कठिन है धुआँ घुसा<br />बिना बुलाए अतिथि शोर बस गया ठुसा<br />बैलों की घंटियाँ बजें ट्रैक्टर छोड़ें<br />कम्प्यूटर को सोच समझ कर ही जोड़ें<br />सबका सुख दुख एक बने वह ठाँव हो<br />सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डॉ० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-610263098546214340?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-25609145951973128782007-02-16T04:51:00.001-08:002007-02-16T04:51:56.393-08:00chitra<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-2560914595197312878?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-72288969379305697732007-02-16T04:49:00.000-08:002007-02-16T04:51:30.075-08:00हम बच्चे प्यारे हैंआकाश हमारा है, हमसे उजियारे हैं<br />तारों जैसे चमचम, आँखों के तारे हैं<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />सौतेले रिस्तों को ध्रुव ने जितना जाना<br />प्रहलाद पिता पीड़ित ने भोगा जुरमाना<br />हम वंचित सारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />लवकुश सीता माँ के, गायक बंजारे हैं<br />तुलसी के चौरे के, हम दीपक न्यारे हैं<br />हम भाग्य तुम्हारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />दुनिया छोटी लगती, दुनियादारी ठगती<br />एकलव्य हमारा है, संतोष सहारा है<br />कर्तव्य हमारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />अधिकार तुम्हारे हैं, तानों के मारे हैं<br />बरगद की छाया में, अपनों से हारे हैं<br />हम स्वयं सहारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />हम अपना श्रम देकर, सभ्यता सँवारे हैं<br /><br />सबकी नजरों से हम गए उतारे हैं<br />मुस्कान सँवारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />हम वोट नहीं देते, हम नोट नहीं लेते<br />बटते कब पक्षों में, यक्षों या कक्षा में<br />आवरण उघारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br /><br />बनकर जुलूस लम्बा, छोटापन धारे हैं<br />जो जीत चुनाव गए, हम उनके मारे हैं<br />कब लगे किनारे हैं,<br />हम बच्चे प्यारे हैं।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डा० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-7228896937930569773?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-89565697856505308482007-02-16T04:48:00.000-08:002007-02-16T04:49:21.898-08:00बच्चे हिन्दुस्तान केबच्चे हिन्दुस्तान के<br />चलते सीना तान के<br />तानसेन की तरह गा रहे<br />नया तराना शान से।<br /><br />हम किरणों जैसा चमकाते<br />कण कण के इतिहास को<br />हम विलास को छोड़ मोड़ते<br />वैभवपूर्ण विलास को।<br />हमने अपने रथ के घोड़े<br />रक्खे हरदम तान के<br />भाग्य बनाते अपने सबके<br />बंजर रेगिस्तान के।<br />बच्चे हिन्दुस्तान के....।।<br /><br />शीत चाँदनी जैसे हम हैं<br />पूरएामासी लक्ष है<br />नहीं अमावस्या में अटके<br />मंजिल दूर समक्ष है।<br />गीता गायन करते रहते<br />कर्म प्रमुखता मान के।<br />बच्चे हिन्दुस्तान के .....।।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डा० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-8956569785650530848?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-85960037862555705582007-02-16T04:46:00.000-08:002007-02-16T04:48:19.392-08:00गौरव गानयह धरती बलिदान की<br />जय हो हिन्दुस्तान की।<br /><br />जिन्हें नहीं चिन्ता थी अपने प्राणों की<br />चोटें सहीं तमंचों तीर कृपाणों की<br />थाती है अहसान की<br />जय हो हिन्दुस्तान की!<br /><br />चिन्ता केवल देशमान रख लेने की<br />मुँह की हार शत्रुओं को दे देने की<br />गाथाएँ सम्मान की<br />जय हो हिन्दुस्तान की!<br /><br />गिरा जहाँ है खून वहीं काबा-काशी<br />मातृभूमि जिनके जीवन से गरीयशी<br />मर्यादा इंसान की<br />जय हो हिन्दुस्तान की!<br /><br />पूजे जाते चित्र उन्हीं के घर-घर में<br />गाये जाते गीत हृदय के मंदिर में<br />ध्यान रखेंगे आन की<br />जय हो हिन्दुस्तान की!<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डा० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-8596003786255570558?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-37648160535146639062007-02-16T04:45:00.000-08:002007-02-16T04:46:41.094-08:00प्यारा प्यार भारत देशप्यारा प्यारा देश<br />मीठा स्वाद सलोना वेश<br />प्यारा प्यार भारत देश।<br /><br />पर्वत रखते हैं ऊँचाई<br />रत्नाकर रखते गहराई<br />नदियों में बहता है अमृत<br />निर्झर ने ताकत दिखलाई।<br />मेघ माँगते हैं आदेश<br />हरा भरा करते परिवेश<br />प्यारा प्यारा भारत देश!<br /><br />काली पीली कुछ सिन्दूरी<br />कहीं भुरभुरी गोरी भूरी<br />मिट्टी कोहिनूर रखती है<br />फसलों ने की आशा पूरी<br />अन्नपूर्णा माँ का वेश<br />दानशीलता का संदेश<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br /><br />यहाँ शारदा गीत सुनाती<br />माँ रणचण्डी हमें जगाती<br />कुटियों ने इतिहास रचाया<br />हम गाते हैं गीत प्रभावी<br />गंध भरे इसके अवशेष<br />नित्य नया न्यारा उन्मेष<br />प्यारा प्यारा भारत देश।<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डा० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-3764816053514663906?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-91356030092704541392007-02-16T04:43:00.000-08:002007-02-16T04:45:18.271-08:00माँगने से क्या पायेंगे !हाथों में तकदीर हमारी, हाथ बढ़ायेंगे<br />भाग्य बनाने से स्वदेश का, हम सुख पायेंगे<br />माँगने से क्या पायेंगे !<br /><br />हम भारत की नन्हीं कलियाँ<br />महकायेंगे रस्ते गलियाँ<br />भारत क्या है? सारी जनता<br />बिना प्रगति गति चित्र अजन्ता<br />गायेंगे हम राग भैरवी अलख जगायेंगे<br />स्वर्ग कल्पना से उतार कर भू पर लायेंगे।<br />अचम्भा कर दिखलायेंगे<br />माँगने से क्या पायेंगे ?<br /><br />आजादी क्या, पकी फसल है<br />बढ़ने वाली नदी नसल है<br />समता क्या है भाई-चारा<br />मजबूती का ईंटा-गारा<br />भेदभाव की हर बाधा को दूर भगायेंगे<br />पाने को सहयोग सभी का हम अपनायेंगे।<br />फूट से हम मिट जायेंगे।<br />माँगने से क्या पायेंगे?<br /><br />हम भविष्य को सींच रहे हैं<br />हम विकास-रथ खींच रहे हैं<br />हमने गीत रचे हलचल के<br />भावी कलाकार हम कल के<br />राष्ट्रीयता का मनचाहा रूप बनोयेंगे<br />अपने को न्योछावर करके सब सुख पायेंगे।<br />त्याग का मान बढ़ायेंगे<br />माँगने से क्या पायेंगे?<br />***<br /><span style="color:#990000;">-डा० राष्ट्रबंधु</span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-9135603009270454139?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-1163234084864217692006-11-11T00:34:00.000-08:002006-11-11T00:34:44.863-08:00विविध लिंक-3विविध लिंक<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-116323408486421769?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-1163234052225140432006-11-11T00:33:00.000-08:002006-11-11T00:34:12.226-08:00विविध लिंक-2विविध लिंक<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-116323405222514043?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-1163234020262332462006-11-11T00:29:00.000-08:002006-11-11T00:33:40.263-08:00विविध लिंकविविध लिंक<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-116323402026233246?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com0tag:blogger.com,1999:blog-37496501.post-1163233305545906132006-11-11T00:20:00.000-08:002007-02-16T04:43:18.302-08:00प्रतिक्रियाएँप्रतिक्रियाएँ<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/37496501-116323330554590613?l=rashtrabandhu.blogspot.com'/></div>डॉ॰ व्योमhttp://www.blogger.com/profile/10667912738409199754noreply@blogger.com1