tag:blogger.com,1999:blog-36105113.post-84931789105718317822007-07-31T05:08:00.000-07:002007-07-31T05:15:06.012-07:00मेरी पसंद की कुछ काव्य रचनाएँअपने कम्प्यूटर को फॉर्मेट करते समय गलती से मेरी महाभारत संबंधी सामग्री भी मिट गई इसलिये कुछ समय के लिये मैं महाभारत को मुल्तवी कर रहा हूँ। ज्योंही महाभारत संबंधी लेखों को मैं फिर से पूरा करूँगा, आपकी सेवा में हाजिर कर दूँगा। तब तक के लिये मैं अपनी पसंद की काव्य रचनाओं से आपको अवगत कराता हूँ। हरि हरसे हरि देखकर, हरि बैठे हरि पास। या हरि हरि से जा मिले, वा हरि भये उदास॥ (अज्ञात) उपरोक्त दोहा जी.के. अवधियाhttp://www.blogger.com/profile/09998235662017055457noreply@blogger.com