tag:blogger.com,1999:blog-32861265867682988512009-07-13T10:26:04.349+05:30दालानMUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.comBlogger108125tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-76023357545884781962009-05-18T15:37:00.000+05:302009-05-18T15:38:28.627+05:30ले लीजिये न , प्लीज !!!<div align="justify"> ले लीजिये न , प्लीज !!!<br />लालू जी : ये मैडम , प्लीज , ले लीजिये न हमारा समर्थन ! देखिये न , हम तीनो भाई लोग एकदम लाईन में खडा हैं ! रात से खाना नहीं खाए हैं - एकदम भूखे हमर पेट फूल के ढोलक हो गया है ! आप समर्थन ले लीजिये गा ता हम कुछ खायेंगे पीयेंगे ! ए , रघुवंश बाबु , जगातानंद बाबु , ए उमाशंकर जी - आप लोग कहे नहीं अपना जात भाई - दिघ्घी राजा को कुछ समझाते हैं ! का दो का दो - कलह से बकर बकर बोले जा रहे हैं ! कहिये ना - लालू जी अब हम तीनो लोग के नेता हैं ! ए अमर भाई - का ई आप इगो धर लिए हैं - जाईये , दिघ्घी रहा के गोर धरिये ! "राजा ता राजा ही नु रहेगा " ! जब हम मैडम का गोर धर सकते हैं ता आप को कहे लाज लगता है ! बुरबक - राजमहल से खाली हाथ लौटेगा ?<br />दिघ्घी राजा : हा हा हा हा !<br />मुलायम : ये तो पुरे रावन की तरह हंस रहे हैं !<br />लालू : ( मुलायम के कान में ) : एकदम आप उत्तर प्रदेश के पक्का अहीर रह गए ! देखिये 5 साल हम दिल्ली में रह कर कितना बदल गए ! आप लोग एकदम से मेरा चांस डूबा दीजिए गा !<br />मुलायम : लालू जी , आप बहुत फालतू बोलते हैं - इस कारन से ही आपके यहाँ हम सम्बन्ध नहीं किये !<br />दिघ्घी राजा : अरे आप लोग लड़िये नहीं ! सब बात मैडम के ड्राइंग रूम तक जा रहा है ! अच्चा ये बताएं - आप दो तो नज़र आ रहे हैं - तीसरा कौन है - लाइन में ?<br />लालू : ए हो , ए हो देवेगौडा भाई ? किधर गए ? धत् , ई जतरा पहर - चाय पीने चले गए का ? बेटा जो न करावे ?:( राजा जी , ई अपना देवेगौडा भाई भी हैं - तीन थो साथ में हैं ! ई भी कर्नाटका के अहीर हैं !<br />मुलायम : अमर जी , किधर गए ? अरे भाई , जयाप्रदा कहीं भागी नहीं जा रही है - इधर - राजा साहेब से बात फाइनल कीजिए और मैडम से टाइम ले लीजिये , मिलाने का ! ( लालू जी को ड्राप भी किया जा सकता है - कान में )<br />लालू : हमको सब सुनायी देता है ! राजा बाबु - ई ड्राइंगरूम में मैडम इतना देर से किस से फ़ोन पर बात कररही हैं ?<br />दिघ्घी राजा : हा हा हा हा हा हा हा हा ! कोई है , आपके प्रदेश से ! </div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-7602335754588478196?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com13tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-21895165332007062532009-05-05T14:50:00.003+05:302009-05-05T15:20:09.502+05:30हमारी बहने और बेटियाँ<div align="justify"><span class="">कल शाम से ही न्यूज़ चॅनल पर शुभ्रा सक्सेना , शरणदीप कौर और किरण कौशल के चर्चे शुरू हो गए ! आखिर हो भी न , क्यों ? भारत में मध्यम वर्ग के लिए बना बेहतरीन नौकरी "आई ० ए ० यस ०" की परीक्षा में इन तीनो ने प्रथम , द्वितीये और तीसरा स्थान प्राप्त किया है !<br />दोपहर में भोजन करने गया तो रजत शर्मा वाले न्यूज़ चैनल पर इनके बारे में थोडा डिटेल से दिखाया जा रहा था ! बेटी और बीबी दोनों ध्यान से देख और सुन रहे थे और मै कनखियों से !<br />कुछ दिन पहले मेरे एक दोस्त ने कहा था - "किसी भी समाज के स्तर को जानना है तो उस समाज में औरत की क्या स्थिति है - वो पता करो " ! कहने का मतलब - किसी भी परिवार , गाँव , जात , शहर , राज्य या देश की सही मायने में उन्नत्ती पता करना चाहते हैं तो हमें यह देखना होगा की - वहां की औरत को कितना सम्मान और अधिकार मिला है !<br />बचपन दिन याद आ गया - जहाँ कहीं भी अपने अधिकार के लिए कोई महिला पाई गयी - उसको इंदिरा गाँधी की संज्ञान दे दी गयी ! दूर से ही लोग उसे इंदिरा गाँधी बोलने लगते थे ! अब कोई भी इन महिलाओं को इंदिरा गाँधी नहीं कहता - या यूँ कहिये - स्वीकार कर लिया है !<br />किसी परिवार में किसी महिला का राज चलता था तो उसे "पेटीकोट" राज कहते थे - अब ऐसे शब्द सुनायी नहीं देते हैं - सिवाय भारतीये जनता पार्टी के नेतागण के मुह के अलावा !<br />अब "इंदिरा गाँधी " और "पेटीकोट राज " की जगह - इंदिरा नूयी , कल्पना चावला और अब शुभ्रा सक्सेना जैसी महिलाओं ने ले लिया है ! लेकिन इस परिवर्तन को आने में काफी वक़्त लग गया ! और अभी बहुत कुछ बाकी है !<br />आर्थीक रूप से अगडा पंजाब में सब से ज्यादा "भ्रूण" हत्या होती है - यह या इस तरह का समाज कभी भी सही अगड़ा का पहचान नहीं हो सकता ! इससे लाख गुना बेहतर बिहार के गाँव का वोह गरीब है - जिसके यहाँ कन्या पूजा का प्रचलन है !<br />हमारे हिन्दू समाज में कन्या को हमेशा देवी का अवतार माना गया है - मसलन - शादी के समय - सिन्दूर दान के ठीक पहले - कन्या - वर के दाहिने तरफ बैठती है - मतलब वोह पुजनिये और आदरनिए है !<br />कुछ लोग समाज में बढ़ते तलाक़ को महिलाओं की प्रगती से जोड़ कर देखते हैं - मै ऐसा नहीं मानता - महिला तो मानसिक रूप से आगे बढ़ गयी - लेकिन में पुरुष अभी भी वहीँ है - फिर खुद अपने पैरों पर खडी महिला - कब तक अत्याचार सहेगी ?<br />अब अपनी सोच में बदलाव लायें - और बहन - बेटी को समोचित स्थान दें - अभी भी समय है - </span></div><div align="justify"><span class=""></span></div>रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<br /><br /><blockquote><p align="justify">श्रीमती शुभ्रा सक्सेना इंदिरापुरम में ही रह कर पुरे भारत में सर्वोच्य स्थान प्राप्त किया - उनका प्रारंभिक पढाई - लिखाई - बोकारो के इर्द गिर्द हुयी - जो इनके प्रेरणा श्रोत हैं - और आशा है - वोह भारत की ग्रामीण परिवेश को भली भांती समझते हुए - समाज कल्याण में खुद को समर्पित करेंगी !<br /></p></blockquote><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-2189516533200706253?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com8tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-4770167161407380382009-04-24T09:51:00.000+05:302009-04-24T09:52:58.094+05:30देश का बीमा कैसे होगा ?<span class=""></span><br /><div align="justify"><span class="">देश का बीमा कैसे होगा ? किसके हाथ देश सुरक्षित रहेगा ? इतिहास कहता है - किस किस ने लूटा ! जिस जिस ने नहीं लूटा - वोह इतिहास के पन्नों से गायब हो गया ! गाँधी जी , राजेन बाबु , तिलक इत्यादी को अब कौन पढ़ना और अपनाना चाहता है ?<br />विनोद दुआ मेरे सब से पसंदीदा पत्रकार है ! सन १९८४ से उनको देखता आया हूँ - जब उनकी और कोट वाले प्रणय रोंय दोनों का कद लगभग बराबर होता था ! अब प्रणय रोंय के लिए विनोद दुआ एक बेहतर इमानदार ढंग से काम करते हैं !<br />विनोद दुआ के कल वाले प्रोग्राम में अपूर्वानंद जी आये थे - कुछ ४-५ वाक्य ही बोल पाए की समय ख़तम हो गया - जो कुछ वो बोले - बहुत सही बोले - नेता अब जनता से दूर हो गए हैं - भारतीय जनता पार्टी और खानदानी कौंग्रेस को छोड़ किसी के पास देश के लिए नीति नहीं है - बाकी के क्षेत्रीय दल बस "सियार" की भूमिका में शेर के शिकार में अपना ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मात्र की खोज में हैं , कोई दलगत नीति नहीं है !<br />अब इस हाल में देश का कौन सोचेगा ? देश को एक रखने में धर्म का बहुत बड़ा रोल है ! देश का विभाजन १९४७ में धरम के आधार पर हुआ क्योंकि एक ख़ास जगह हिन्दू और मुस्लिम का जमावाडा हो गया था ! अब ऐसा लगभग नहीं है - हिन्दू मुस्लिम दोनों देश के हर प्रान्त और हर गाँव में हैं - और यही डोर देश को बंधे रखे हुयी हैं और भारतीय जनता पार्टी को भी अपनी रणनीति बदलने से मजबूर कर दी !<br />विकास ही हर वक़्त मुद्दा नहीं होता है - ऐसा होता तो "दलालों" से भरपूर पिछली सरकार सन २००४ में नहीं हारती ! विकास का सही मायने में अर्थ चमकता दिल्ली और बंगलुरु नहीं है - जहाँ वहां एक भाई - बड़ी गाडी में घूम रहा है और दूसरा भाई खेतों में भूखा मर रहा है ! इस मामले में सानिया गाँधी बधाई के पात्र हैं !<br />संजय शर्मा भैया कहते हैं - हम भारतीय भावुक होते हैं - बस , इंतज़ार है - प्रियंका गाँधी के राजनीती के मैदान में कूदने का - फिर देखियेगा ! उनका इशारा बिलकुल ही साफ़ था की कैसे फूंक फूंक के , देश को एक रखने के लिए सानिया गाँधी अपने बच्चों में परिपक्वता ला रही हैं और सही समय का इंतज़ार कररही हैं !<br />वोह आगे कहते हैं - क्या अडवाणी अगर प्रधान मंत्री नहीं बन पाए तो भारतीय जनता पार्टी का क्या होगा ? क्या नरेन्द्र मोदी जैसे कट्टर हिन्दू पुरे देश को स्वीकार होंगे ? क्या राजनाथ सिंह जैसे लोग बुध्दिमान अरुण जेटली को स्वीकार होंगे ? अगर आडवानी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए तो ??? भारतीय जनता पार्टी का क्या होगा ?<br />देश के सुरख्सित बीमा के लिए - कौंग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों का जिन्दा रहना बेहद जरूरी है - ताकी - देश को क्षेत्रीय "सियारों" से बचाया जा सके ! </span></div>रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-477016716140738038?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com1tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-17342325121119929882009-04-23T16:38:00.001+05:302009-04-23T16:40:39.520+05:30रेलगाडी का अपहरण<div align="justify">रेलगाडी का अपहरण ! मतलब की सुन के माथा चकरा गया ! आदमी का , हवाई जहाज का पनिया जहाज का , ई सब का अपहरण सुने थे - रेलगाडी के अपहरण का आईडिया जिसके पास आया था - उसको पुरस्कार मिलाना चाहिए !<br />बच्चा थे त चरी सुने थे , फिर डकैती कैसे होता है सुने और देखे भी ! हम लोग का बाल बच्चा सब त जनम से ही आतंकवाद , नकसलवाद सुन रहा है ! बाबु , जमाना अडवांस हो गया है !<br />अब कुछ दिन में सुनियेगा की पटना का अपहरण हो गया :( एक पत्रकार बोला , बबुआ लालू जी त १५ साल से पूरा बिहार का ही अपहरण किये हुए थे ! वाह ! भाई वाह ! तले दुसर पत्रकार बोला की - महाराज ई नेता सब त पूरा देश का ही अपहरण कर लिया है ! हो गया शुरू - बहस !<br />ई सब लोगिक सुन के लगा की रेलगाडी का अपहरण त कुछ नहीं है :( सब कोई लुटने पर लगा हुआ -लगता है बहुत कुछ हाथ से फिसल गया ! दुःख हुआ - टेंशन में नींद आ गया !<br />सुबह नींद खुला त सुने की शर्मा जी का गाडी चोरी हो गया ! वाइफ बोली की - बीमा से पैसा उनको मिल जायेगा - आप जाईये और कुछ लूट कर लाईये तब घर में कुछ चूल्हा चौकी जलेगा !<br />बेटा सब बात चित सुन रहा था - हंसने लगा - और गाने लगा -<br />यह देश है वीर लुटेरों का , </div><div align="justify">ड़कैतों का </div><div align="justify">इस देश का यारों </div><div align="justify">क्या कहना ?</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-1734232512111992988?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-47330191714463126412009-04-22T10:28:00.001+05:302009-04-22T10:30:05.323+05:30मुसलमानों को भी जीने दो !!<div align="justify"><span class="">अजीब तमाशा है ! बिहार के चुनाव में मुसलमानों को पेर कर रख दिया है ! नेता और मीडिया ने उनके रातों को नींद ख़राब कर दी है ! क्या किसी का गुनाह सिर्फ इसलिए हैं की वोह मुस्लमान में जनम ले लिया ? क्यों नहीं हम भी उनको अपनी तरह मानते हैं ? कितना थूक का घूँट उनको पीने पर मजबूर करेंगे !<br />मई ऐसा इसलिए महसूस कर रहा हूँ की ऐसा मेरी जाती के साथ भी पत्रकार और बाकी के नेता करते आ रहे हैं - वैशाली से रघुवंश बाबु खडा है - कोई पत्रकार उनकी जाती नहीं लिखेगा लेकिन उनके खिलाफ लड़ रहे - मुन्ना शुक्ल को भूमिहार बाहुबली जरुर बोला और लिखा जायेगा ! अजीब तमाशा है - भाई ? रविश जैसे पत्रकार भी खुलेआम हमला बोल देते हैं !<br />ऐसा लगता है की बाहुबली भूमिहारों का और नचनिया बजनिया - कायस्थों का प्रयाय्वाची शब्द बन गए हों ! वैसा ही तो मुसलमानों को भी लगता होगा ! क्या उनका वोट सिर्फ लालू-मुलायम को सता की गाडी तक पहुचने के लिए है ? क्या वोह कभी इस देश के मुख्या धरा में शामिल नहीं होंगे ? क्या हमेशा उनको वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं समझा जायेगा ?<br />क्यों नहीं जीने देते उनको - क्यों नहीं उनको बच्चों को यह महसूस करने देते हो की वोह भी एक भारतीये हैं ? क्या गुनाह किया है उन्होंने ? </span></div><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-4733019171446312641?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com5tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-62932987527892024312009-04-21T12:03:00.001+05:302009-04-21T12:32:37.643+05:30चुनाव और लगन !!<div align="justify"><span class="">बिहार में चुनाव और लगन दोनों का जोर है ! छपरा जिला के लौंडा के नाच और पटना के चुनाव - दोनों में कोई फरक नहीं नज़र आता है - मुझे ! अजीब हाल है - पढ़ा लिखा , नौकरी पेशा वाला जात को बस "नचनिया - बजनिया " ही अपना नेता नज़र आता है ! ये चुनाव नहीं जिद है ! दुःख होता है - चुनाव को जिद की तरह लड़ा जाता है !<br />बचपन का दिन याद है - चुनाव में "खड़ा" कैसे हुआ जाता है - समझ में नहीं आता था - फिर लोग चुनाव में "बैठ" कैसे जाता है ? कौंग्रेस और इंदिरा गाँधी पसंदीदा थी ! अब कभी कभी टी वी वाला सब इंदिरा गाँधी का विजुअल दिखता है तो बचपन याद आ जाता है !<br />चौधरी चरण सिंह ने एक बार कहा था - देश का प्रधान मंत्री - वही बन सकता है - जो दिल्ली में रहेगा ! बाबु जी हमको दिल्ली भेज दिए ! यहाँ त अजब का हिसाब किताब है - कोई नेता १००-२०० करोड़ से कम का अवकात ही नहीं रखता है ! कल रविश भाई का स्पेशल रिपोर्ट देख रहा था - मंत्र मुग्ध हो गया - रविश भाई पसंदीदा हैं - लेकिन अंत में जब वोह बिहार और अपनी जात का दरद - अपनी लेखनी में लिखते हैं तो दुःख होता है - ऊंचाई के साथ साथ आपको बहुत कुछ छोड़ना होता है ! खैर !<br />पहला चरण के बाद - लालू जी को पसीना आ गया फिर क्या रातों रात , कल तक उनका जूठा खाने वाले पत्रकार भी बदल गए ! नीतिश भी वैसे पत्रकारों को आँख तरेर दिया ! अब मरता दलाल - क्या न करता :(<br />लेकिन प्रधान मंत्री कौन बनेगा ? देवेगौडा जैसा प्रधानमंत्री बनाने से अच्छा है की साल भर के अन्दर दूसरा चुनाव ! सवाल और भी हैं ? अडवानी बाबा का क्या होगा ? उनका पार्टी का क्या होगा ? कुकुर के भांती सब लडेगा ! डूब जायेगा ! और भारतीय राजनीती को सियार सब खा जायेगा ! </span></div><span class=""></span><br /><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-6293298752789202431?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-9411157589603195612009-04-04T09:54:00.002+05:302009-04-04T11:09:23.244+05:30चुनाव स्पेशल : - देश का दुर्भाग्य !<span class=""></span><br /><div align="justify"><span class="">चुनाव स्पेशल : देश का दुर्भाग्य !<br />मालूम नहीं कब और कैसे धीरे धीरे क्षेत्रीय राजनितिक दल दिल्ली की कुर्सी अपने अपने हाथों से हिलाने लगे और कुर्सी दिन बा दिन कमज़ोर होती गयी ! वाजपयी जी तो आंध्र के चन्द्र बाबु नायडू के शिकार बने तो मन मोहन के चारों तरफ लालू - मुलायम और पासवान जैसे लोग थे !<br />हम वोटर भी अजीब हैं ! लोकसभा का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ता देखना चाहते हैं ! साडी धोती की गठ जोड़ की तरह वोट देते हैं ! जात पात में पूरा देश बटा हुआ है ! कोई भी अछूता नहीं है ! अगर कोई खुद को कहता है की मई इस तरह के जात पात से अलग हूँ - तो वोह सफ़ेद झूठ बोलता है ! भले ही वोह ब्राहमणों के द्वारा चलाया जा रहा इंफोसिस में काम कर रहा हो या किसी न्यूज़ चैनल का खुख्यत या विख्यात पत्रकार !<br />बिहार में नीतिश कुमार ने ब्राह्मणों को टिकट नहीं दिया - अब देखिये - इसका दर्द रविश जैसे पत्रकार पर भी पड़ने लगा ! भले वोह मुह से नहीं करह रहे हों लेकिन दर्द तो चेहरा पर नज़र आ ही जाता है - जैसे मुहब्बत को आप छुपा नहीं सकते !<br />कौंग्रेस भी अजीब है - बिहार में भूंजा की तरह टिकट को बांटा है ! कभी कभी लालू की बी टीम की तरह नज़र आता है ! कहीं वोट कटवा तो कहीं परंपरा को ढ़ोने की तरह ! <br />कुछ भी हो - हमें वोट राष्ट्रीय दलों को ही देना चाहिए ! विधान सभा चुनाव में क्षेत्रीय दल ठीक हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दल को वोट देने का मतलब - आने वाले समय में देश को बांटना है ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class="">मेरी बात से कई लोग सहमत होंगे और कई नहीं भी ! आशीष मिश्र जो अमेरिका में रहते हैं - कहते हैं - अमेरिका में रह कर मै जात पात से ज्यादा उस सरकार को देखना पसंद करूँगा जो राज्य या देश की इकोनोमी को दिशा और गती प्रदान करे - भले वोह लालू हों या नीतिश या राहुल बाबा !<br />वहीँ अजीत जो अमेरिका में हैं - जो बिहार के सभी पत्रकारों से हमेशा संपर्क में रहते हैं - कहते हैं - अगर मै चुनाव लडूं - तो मुझे मेरे घर वाले भी वोट नहीं देंगे ! समाज सेवा करने के और भी विकल्प हैं ! </span></div><div align="justify"><span class="">बंगुलुरु के रहने वाले श्री सर्वेश उपाध्द्याय कहते हैं - एक साफ़ सुथरी छवी वाले उम्मीदवार और राजनितिक दल ही देश को सही दिशा में ले जा सकता है ! क्षेत्रीय दल को आगे बढ़ने में राष्ट्रीय दलों की ही भूमिका रही है ! राष्ट्रीय दलों की मुध्धा विहीन राजनीती और अडवानी जैसे कमज़ोर नेतृत्व का फल है - क्षेत्रीय दल !<br />अब आप क्या कहते हैं ? </span></div><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-941115758960319561?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com2tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-7374268309873739842009-02-24T13:00:00.001+05:302009-02-24T13:03:28.613+05:30अमिताभ और जया बच्चन से एक सवाल !<span class=""></span><br /><div align="justify"><span class="">अमिताभ और जया बच्चन से एक सवाल !<br />जया जी का एक बयान आया है ! स्लाम्डाग विदेशी फ़िल्म है - भारत में इतना शोर क्यों हैं ? बात में दम है ! अमिताभ जी सन १९८४ में एक चुनाव लड़े थे - अलाहाबाद से लोकसभा चुनाव ! पर उनके जितने की खुशी में "मुजफ्फरपुर" में मिठाई बटी थी ! वोह भी खासकर एक जाती विशेष के द्वारा ! पटना में भी बटी थी ! इसमे कोई अजीब बात नही है ! हम हर कोई कहीं न कही एक दुसरे से जुड़े हैं ! मेरी पहचान मेरे घर में "रंजन" व्यक्ति विशेष से है ! घर से बहार मेरी पहचान मेरे परिवार से जुडी है ! दुसरे गाँव में मै फलाना गाँव का कहलाता हूँ ! दिल्ली में बिहारी कहलाता हूँ और बंगलुरु और मुंबई में उत्तर भारतीय ! वहीँ अमरीका में एक एशियन और मंगल ग्रह पर एक पृथ्वी वासी ! और जब अमेरिका में कोई भारतीय मिलेगा तब हम उसका जात नही पूछेंगे जैसा की हम बिहार में कोई बिहारी मिले तो ऐसा कर सकते हैं ! अगर मुजफ्फरपुर के कायस्थ जाती के लोग अमिताभ की १९८४ की अल्लाहबाद की जीत में अपनी खुशी खोज सकते हैं फिर हम सब भारतीय "रहमान , गुलज़ार और पुत्तोकोटी " में अपनी जीत क्यों नही ?<br />ठीक उसी तरह यह सिनेमा को बनाया तो विदेशी लोग हैं - लेकिन इस सिनेमा में कई कलाकार या सभी सभी के कलाकार भारतीय हैं संगीत भारतीये हैं और अधिकतर तकनिकी लोग भारतीये हैं ! रहमान साहब और बोब्बी जिंदल में फरक है ! रहमान साहब विशुध्ध भारतीय हैं और हम सबको उनको नाज़ है ! वैसे उन्होंने ने कई सिनेमा में बहुत ही बढ़िया संगीत दिया है !<br />हर कलाकार और तकनिकी लोग अपने आप में सम्पूर्ण हैं - यह सौभाग्य है की सब को एक ऐसे छत के नीचे काम करने का अवसर मिला - जहाँ से एक राह निकली और "ऑस्कर" ..."ऑस्कर" और नई पीढी को प्रेरणा !<br />जहाँ तक गरीबी को दिखने से लोगों को ऐतराज है फ़िर तो हमारे अधिकतर सिनेमा गरीबी और भ्रष्टाचार के इर्द गिर्द ही घुमते हैं !<br />चलिए गुलज़ार साहब के गीत से इस लेख को समाप्त करते हैं -<br />"आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं ...आप से भी ख़ूबसूरत आपके अंदाज़ हैं ....."<br />और सुभास घई की सलाह "जय हो " शब्द को इस गीत से जोड़ना सचमुच कमाल हो गया ! </span></div>रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-737426830987373984?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com9tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-74108820897320403552009-02-21T11:23:00.001+05:302009-02-21T11:29:52.186+05:30श्री नीतिश कुमार की विकास यात्रा समाप्त हुयी !<div align="justify">दालान पर हुए सर्वे से पता चलता है की करीब ५८ % जनता मानती है की श्री नीतिश कुमार की विकास यात्रा "एक अछ्छी पहल " है ! वहीँ १७ % जनता मानती है की यह आने वाले लोकसभा की तयारी और जनता की नब्ज़ जानने की एक कोशिश है ! कुछ लोग इसे बकवास भी मानते हैं क्योंकि नीतिश अपने विकास यात्रा में काफी लाव लस्कर के साथ गए ! जैसे श्री नीतिश कुमार को अप्रवासी भारतीयों का सम्मलेन एक "पिकनिक" लगता है है ठीक उसी तरह कई लोग इस विकास यात्रा को एक नए राजा की अपने चमचों ke साथ मनाई गयी पिकनिक भी लगाती है ! वैसे कोसी का कहर राजनितिक दलों पर टूटना अभी बाकी है ! चुनाव नजदीक है ! बेचैनी चारों तरफ़ है ! </div><strong>रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !</strong><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-7410882089732040355?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-44226657899178702692009-02-13T11:27:00.003+05:302009-02-13T11:36:44.929+05:30पप्पू न बने - वोट दें !<a href="http://2.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SZUNjgMEfII/AAAAAAAAAtQ/TRIOBYykNRk/s1600-h/Nitish_Kumar.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5302159039885769858" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 99px; CURSOR: hand; HEIGHT: 122px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SZUNjgMEfII/AAAAAAAAAtQ/TRIOBYykNRk/s400/Nitish_Kumar.jpg" border="0" /></a><br /><div align="justify">हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार आज कल "विकास यात्रा" पर हैं - राष्ट्रीय मीडिया ने ज्यादा तरजीह नही दी ! नीतिश कुमार के साथ साथ मुझे भी काफी दुःख है - ! चलिए , कोई बात नही ! "दालान " ब्लॉग पर नीतिश कुमार की "विकास यात्रा" पर अपने वोट डालें ! वोटिंग मशीन इस पोस्ट के ठीक दाहिने तरफ़ है ! </div><br /><div>याद रहे !- पप्पू वोट नही देता ! </div><br /><div>कहीं आप पप्पू तो नही ? </div><br /><div></div><br /><div>रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-4422665789917870269?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com9tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-3819484226441678622009-02-12T10:27:00.004+05:302009-02-12T14:03:28.651+05:30"चलनी हंसली सूप के - तोरा में बड़ा छेद "<div align="justify"><span class="">"चोरी किया रे ! क्रेजी किया रे ! " कितना अछ्छा लगता है ! एकदम झकास ! ऋतिक रौशन और ऐश्वर्य राय जब चोरी करें तो हम ताली बजाते हैं ! बाबा , ये हैं टी वी पत्रकारिता के बेताज बादशाह ! हर एक टी वी पत्रकारों की चाहत - काश इस चॅनल में नौकरी मिल जाती ! ज्यादा नही , कल के इनके दो प्रमुख रिपोर्ट की चर्चा करें !<br />एक शाम ८.३० में आता है - विषय था - " भारत में मनोरोग" ! देखा बहुत अछ्छा लगा ! मजा आ गया ! लगा की कितना अच्छा प्रोग्राम बनाते हैं - ये लोग ! तभी तो बिना टीआरपी के भी ये चॅनल सब से अच्छा है ! थोड़ी देर बाद सुबह की बासी अखबार उठाया ! <strong>अरे ये क्या ? "भारत में मनोरोग " तो टाईम्स ऑफ़ इंडिया ne सुबह तड़के ही छाप दिया ! धत् तेरे की - मै बेवजह बासी समाचार पर ताली पीट रहा था !<br /></strong>अब चलिए - इनके दुसरे प्रोग्राम पर ! एंकर हैं - भोजपुरी मिक्स बिहारी टोन में हिन्दी बोलने वाले ! वैसे इनकी बोली और घबराहट में बहुत सुधार हुआ है ! रिपोर्ट का विषय था - " कोला वार" ! बहुत बढ़िया प्रस्तुति ! मजा आ गया ! अपने मनपसंदीदा एंकर को देख मन प्रफुल्लित हो गया ! बेटा को बोला - देखो , ये भी अपने गाँव तरफ़ के ही हैं ! बहुत पैसा मिलता है ! बड़ा गाडी है ! बहुत बड़े सोसाइटी के टॉप पेंट हाउस में रहते हैं ! और मेरी तरह ये भी "ब्लॉग" लिखते हैं ! बेटा भी मन ही मन सोचा होगा की उसके बाबु जी भी 'बड़े लोग" के बारे में कुछ जानते हैं ! प्रोग्राम ख़त्म हुआ और मै फ़िर एक बार अखबार की तरफ़ मुडा ! <strong>धत् तेरे की - यह प्रोग्राम तो सुबह की बासी इकनॉमिक टाईम्स के पहले पन्ने पर छापा "कोला वार " की हु बहु कॉपी है ! </strong></span></div><div align="justify"><strong></strong> </div><div align="justify"><strong><blockquote><p><strong><em>घर से लंच कर के अभी अभी लौटा हूँ - वहां समाचार चल रहा था और कुछ बेहतर एन डी टी वी - इंडिया देख रहा था - दोपहर के समाचार में "बापू के चश्मे की नीलामी " का रिपोर्ट चल रहा था ! यह रिपोर्ट आज के टाईम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पन्ने पर छपा है !</em> </strong></p><p><strong><br />क्या यही आपकी अवकात है ?</strong></p></blockquote></strong></div><div align="justify"> </div><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह !<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-381948422644167862?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com6tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-83467453092207534682009-02-05T12:31:00.001+05:302009-02-05T12:49:01.720+05:30कुछ सफ़ेद बाल !<div align="justify">जिंदगी इतनी व्यस्त हो गयी कि समय कैसे गुजर गया पता ही नही चला ! पिछले हफ्ता बालों को रंगने की कोशिश की ! ९ वर्षीय बेटा हंसने लगा ! मुझे भी अपना बचपन याद आ गया - बाबु जी पहली दफा बालों को सलून से रंग के आए थे और मंद मंद मुस्कुरा रहे थे - सच पूछिये तो उस वक्त मुझे अछ्छा नही लगा था ! मन ही मन कहा था - बाबु जी को ऐसा नही करना चाहिए था ! पत्नी का जोर था सो मैंने भी बालों को रंग लिया ! कान के आस पास के बाल थोड़े उजले नज़र आ रहे थे - कई बार तो दिल को तस्सल्ली दिया कि आइना झूठ बोल रहा है ! पर बकरे कि अम्मा कब तक खैर मनाती ! जब भी आईने अपने सफ़ेद को बालों को देखता और सोचता अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है ! कई शौक तो अभी छूछे ही हैं ! दिल अभी भी जवान है ! यूँ कहिये तो दिल अभी भी २४ वर्ष का ही है ! कई सालों से दिल कि उम्र बढ़ी ही नही ! पर शरीर ने तो अजब कि रफ़्तार पकड़ ली है ! दुःख होता है - भगवान् के नियम पर ! ऐसा नही होना चाहिए ! दिल और शरीर दोनों कि रफ़्तार एक होनी चाहिए ! हर वक्त कुछ सिखने का मौका मिलता है - अछ्छा लगता है ! सोचता हूँ - अगली बार गलती नही करूँगा ! पर , अब ऐसा लगता है कि अब अवसर नही आयेंगे ! जो हो गया सो गया ! यह सोच घबरा जाता हूँ ! अपने कई सपने और उम्मीदों को अपने बच्चों में देखने लगता हूँ ! शायद , बाबु जी भी यही सोचते थे ! कुछ लोग कहते हैं - बच्चों को आजाद कर दीजिए , उनको अपनी जिंदगी जीने दीजिए ! ऐसा कैसे हो सकता है ? मेरे कई सपने अभी अधूरे हैं - इनको कौन पुरा करेगा ? अपना खून ही , न ! क्या गुनाह है अगर अपने सपने को अपने खून कि नज़र से देखना चाहता हूँ ? बच्चे भी तो मेरे अपने ही हैं , न ! और सपने भी मेरे ही हैं ! </div><br />रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-8346745309220753468?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com16tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-14852147382311619562009-01-23T13:26:00.001+05:302009-01-23T13:27:19.314+05:30तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?हमें जो कुछ कहना था आम जनता की तरफ़ से उसका एक पार्ट लिख दिया .बुरा लगा उनको जो सबकी बुराई करने की अच्छी-खासी दरमाहा [वेतन] लेते हैं. आप ग़लत हैं बन्धु ! मुझे टी.वी.की समझ नही है ये आपने लिख तो दिया .आपको आज़ादी का मतलब पता है ? समाचार का मतलब पता है ? अपने अधिकार और कर्तव्य का मतलब पता है ? नही पता है तो पांचवी का किताब पढ़े ,क्योंकि आप पांचवी पास से तेज नही है. पर घबराने की जरुरत नही है पदमश्री की उपाधि आप जैसे को मिल ही जाती है . आप हमारे राष्ट्राधिकारी तक को अंगुली दिखा सकते है लेकिन जिलाधिकारी की अंगुली पकड़कर चलने में परेशानी महसूस करते हैं . बताता हूँ जिलाधिकारी वह चीज है जिसके लिए आप स्नातक करते ही तीन बार पूरे जोर से तैयारी के उपरांत परीक्षा दिए और असफलता हाथ लिए पत्रकारिता में हाथ आजमाने लगे .सेंसरशिप का स्वरुप क्या था ? बैचैन कर देनेवाला था क्या ? मेरे ख़्याल से अभी विचार होना था . जिस प्रकार बच्चे छत से खेलते हुए निचे लुढ़क न जाए इसके लिए सुरक्षा घेरा दिया जाता है बस वही घेरा आपके इलाके में सेंसरशिप कहा जाता है .मेरे ख्याल से किसी की भी हद तो तय होनी ही चाहिए .आप खड़े कहाँ है इसकी समझ रहती तो बाउंड्री वाल की चर्चा ही न होती. आप अतिवादी से घिरे अपने आपको नही पाते ?नेताओं से पीटने ,गाली मिलने के अवसर का बार बार प्रसारण क्यों नही होता . जनता तो साथ होना चाहती है आपके साथ ऐसे मुद्दे पर .टी.वी जो है उसे समझने की समझ है हमें .आप जिनको आदर्श मानते है क्या कर पाये बोफोर्स का सोर्स लगाकर राज्य सभा पहुंचे तो गंभीरता की चादर ओढ़ बैठे .टी .वी. को क्या समझूं १०० चैनल में ५०% का आरक्षण आप न्यूज वालों ने ले लिया है .जिस पर न्यूज कम व्यूज ज्यादा होता है ,और अपने पास भी व्यूज खूब है . ५० के ५० पर कभी कसाब को कभी ओबामा को एक साथ देखते है .साक्षात्कार के लिए जिसे बुलाया जाता है उसे बोलने नही दिया जाता ,उसे तो माफ़ी मांगने के साथ समय का अभाव बताया जाता है फ़िर बार बार एक ही ख़बर दिखने दिखाने की क्या मजबूरी है .क्या कसाब , आरुशी ,प्रिंस ,ओबामा टाइप खबरे ही क्यों दिन रात चले . भारत विशाल देश है ,और क्या खबरों की अकाल नही किए हुए हैं आप लोग . आपकी चालाकी से आम जनता भी अब चालाक हो गई है . आपकी ख़बर पर एतवार कौन करता है ,आपका लाईव टेलेकास्ट पर से भी भरोसा उठ जाना साधारण बात तो है नही .इसलिए हे ख़बरदाता ख़बर की आंधी नही बयार चलाओ .पब्लिक रिमोट से ख़बर लेता रहेगा .आप खबरों को मल्टीप्लाई करते हो .हम पब्लिक तुंरत डिवाइड करने के बाद स्वीकारते हैं. आप जिसको डिवाइड करते हो हम मल्टीप्लाई करते है .अब बताइये आपने अपना विश्वास खोया है या पाया है ? आलोचना झेलिये ,झेलना होगा ! बिलबिलाइये नही .हम नेता नही है की आपसे सचेत रहे. जनता जो सोंचती है वो लिखा था ,लिखूंगा ."तुम नही होते तो हम मर जाते !" वाला गाना तो जनता कभी नही गाएगी. इसलिए हम केवल ये ही कहेंगे"तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?"<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-1485214738231161956?l=daalaan.blogspot.com'/></div>Sanjay Sharmahttp://www.blogger.com/profile/06139162130626806160noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-51133077436436875922009-01-15T17:25:00.001+05:302009-01-15T17:30:54.524+05:30मेरी मर्ज़ी !आप भी दूध के धुले तो हो नही ! बड़ा चिल पों मचा रहे हैं आजकल आप लोग .थोड़ा सा प्रतिबन्ध क्या लगा ,लगे अपने आपको लोकतंत्र का सबसे सजग प्रहरी बताने . अरे आप सजग रहते तो सरकार सजग नही रहती क्या ? आपके प्रसारण पर रोक लगाने वाला सरकार कहाँ से हो गया .ये काम तो आपके चैनल के मालिक के जिम्मे था . अच्छा किया विरोध करके . भला एक आई एस अफसर को क्या समझ हो सकती है ख़बर के असर का .ख़बर का असर कैसे ,कहाँ ,और कब डालना है ,कोई आप मिडिया से सीखे .कड़ी मेहनत सच्चे लगन से अर्जित पत्रकारिता का डीग्री डिप्लोमा से भला ,झटके में पाई जिला समाहर्ता के पद से कैसी तुलना .दिखाइए न जो जो दिखाना है , जो हो रहा है उसी को तो दिखाते है आप . प्रिन्स को गढे में आपने नही डाला था . सैफ अली के हाथ पर करीना आपने नही लिखा था .अभिषेक की ऐश्वर्या से शादी आपने तो कराई नही .मुंबई हमले पर लगातार आपकी देशहित नजरें थी ही . पर कैमरा उधर मुंह घुमा ही लेता है जहाँ देश हित नजर आए .राजनीतिक विचार धारा में डुबकी लगाने वाले पंडूबी पक्षी आप भी है .तभी तो गुजरात और दिल्ली से जीतते हुए को हार के कगार पर खड़ा बताते रहे . हरवक्त केवल शिवराज पाटिल ही नही कोट बदलते थे ,आप भी चोला बदलते रहते हैं . लोकतंत्र के चारो प्रहरी में से कोई एक भी सजग नही है .एक सोया आदमी दुसरे सोये को कैसे जगा सकता है ? अपनी जोरदार खर्राटे से ? चौबीस मिनट के लायक जिसके पास समाग्री न हो वो चौबीस घंटे चैनल बजा रहा है . आप तो माध्यम हो सरकार बनाने गिराने का आप पर प्रतिबन्ध सर्वथा अनुचित है .एक दुसरे के लिए सिद्ध खतरे की घंटी को बजने देना चाहिए . देश हित में जरूरी है अधिकार अपनी मर्ज़ी का .कर्तव्य भी अपनी मर्ज़ी का . मैं चाहे ये करू मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी . है कि नही ?<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-5113307743643687592?l=daalaan.blogspot.com'/></div>Sanjay Sharmahttp://www.blogger.com/profile/06139162130626806160noreply@blogger.com10tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-4491173817567293022008-12-20T10:22:00.003+05:302008-12-20T10:31:31.233+05:30महबूब कैसा हो ? पार्ट -४<div align="center"><a href="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SUx7b4DSajI/AAAAAAAAAo8/BuZ0gojq4YQ/s1600-h/Silsila.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5281732181831608882" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SUx7b4DSajI/AAAAAAAAAo8/BuZ0gojq4YQ/s400/Silsila.jpg" border="0" /></a><strong><span style="font-size:130%;">तेरी बाहों में है जानम , मेरे जिस्म-ओ-जान पिघलते !</span></strong><br /><div align="justify"><span class="">काफी दिनों के बाद शायद वर्षों बाद कल शाम "सिलसिला" देखी ! अमिताभ की कुछ चुनिन्दा फिल्मों में से एक ये भी है जिसके गीतों को मै कई हज़ार बार गुनगुना चुका हूँ ! १९८१ में जब यह रिलीज़ हुई उस वक्त शायद फ्लॉप हो गयी थी - पर संदेश और प्रेम के अनेक रूप इसमे देखने को मिलते हैं ! अमिताब गजब के स्मार्ट दिख रहे हैं वहीँ रेखा एक परफेक्ट "महबूबा" ! कुछ भी कहिये - अमिताभ की पेर्सोनालिटी के सामने बॉलीवुड के कई अभिनेता फीके नज़र आते हैं ! इस सिनेमा में कश्मीर की वादियों में अमिताभ जब रंग बिरंगे स्वेटर पहने अपनी भरी आवाज़ और लंबे कदमों से चलते नज़र आते हैं तो सिनेमा देख मज़ा आ जाता है !<br />कहानीकार के रूप में ख़ुद को विख्यात बनाने वाले "जावेद अख्तर " साहब इस सिनेमा में पहली बार "गाना" लिखे जिसे अमिताभ और लता दीदी ने अपनी आवाज़ दी है - " यह रात है .........यह कहाँ आ गए हम ..यूँ ही साथ चलते चलते ...." प्रख्यात संतूर वादक और वान्सुरी वादक श्री शिव और हरिप्रसाद चौरसिया जी ने संगीत क्या दिया - ये संगीत आज भी जवान है !<br />रेखा अमिताभ से १०-१२ साल छोटी हैं और इस सिनेमा को बनते हुए वक्त उन दोनों का प्रेम अपने चरम सीमा पर रहा होगा ! सिनेमा देख ऐसा लगता है - जैसे अमिताभ के लिए वक्त ठहर गया हो ! 36-37 वर्षीय अमिताभ सचमुच में एक मर्द नज़र आ रहे हैं - जिससे कोई भी "रेखा" निकल आए ! </span></div><br /><span class=""></span><br /><br /><strong>रंजन ऋतुराज सिंह , इंदिरापुरम</strong><br /></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-449117381756729302?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com2tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-9919326429868660862008-12-19T13:34:00.002+05:302008-12-19T13:47:32.838+05:30नीतिश कुमार ने "ललकार" दिया है !<div align="justify"><span class=""><a href="http://hindustandainik.com/news/2031_2226539,0068.htm">नीतिश ने ललकार दिया है !</a> कुब्बत है तो चुनाव लड़िये ! राजनेताओं को गाली मत दीजिए ! बात में दम है ! लेकिन नीतिश बाबु - नेतागिरी को आपलोगों ने भले आदमी के लिए कहाँ छोडा है ? अब कौन राजेन बाबु आएगा ? आप लोग धर के उसको जात पात में ऐसा लपेटियेगा की वोह बेचारा बाप बाप कर के भाग खडा होगा ! आपको तो एक इमानदार ऑफिसर तक बर्दास्त नहीं होता है फिर भला कैसे आप राजनीती में अच्चे लोगों को बर्दास्त करेंगे ?? </span></div><div align="justify">आप बिहार में क्या खेला खेल रहे हैं - सबको पता है ! मंत्री की क्या अवकात है वोह मंत्री से बेहतर कोई नहीं जानता होगा ! सवर्णों को लालू का भूत का किस्सा सुना सुना पर भूखे पेट सोने को मजबूर कर देते हैं ! कभी आस पदोश से आपके ऊपर चढ़ बैठा तो बन्दर बिल्ली वाला खेल शुरू हो जाता है ! 'पसना' में कभी भूमिहार तो कभी कायस्थ तो कभी राजपूत तो कभी बाबा जी लोग ! ई खेला में बहुत आराम से आप दूसरा चुनाव जीत जायेंगे ! </div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify">अछ्छा , नीतिश बाबु , एक बात बताएं - ई चोर ऑफिसर सब आपको क्या 'नज़र' आता है ? या ये सब खाली हल्ला है ? जेतना बड़का बड़का ऑफिसर सब है सब का नॉएडा - दिल्ली में हर महिना एक कोठी ख़रीदा रहा है - आपको नज़र नहीं आता है या फेर आप आँख बांध कर बैठे हैं ? </div><p align="justify">पत्रकार लोग से इमानदार ऑफिसर को धमकी भेज्वाते हैं ! वाह ! भाई वाह ! चमचागिरी सब राजा को पसंद है ! कहे की मतलब की आप राजा हो ही गए ! बधाई हो ! ई सब खेला १,अन्ने मार्ग का है - जो वहां जाता है - राजा बन जाता है ! </p><p></p><br /><p></p>रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-991932642986866086?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com3tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-1976373121021115192008-12-17T10:29:00.003+05:302008-12-17T10:49:38.053+05:30महबूबा कैसी हो ? पार्ट - ३<div align="justify"><a href="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SUiH5blFiCI/AAAAAAAAAo0/ZyKdcy4XPMs/s1600-h/Anuradha_Bali.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5280619983817508898" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 267px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SUiH5blFiCI/AAAAAAAAAo0/ZyKdcy4XPMs/s400/Anuradha_Bali.jpg" border="0" /></a> अब जरा इनसे पूछिये की महबूबा कैसी हो ? चंदर से चाँद बन गए और फिजा को अपना लिया ! साली , मुहब्बत चीज़ ही कुछ ऐसी है ! वोह वाला गाना याद आ गया - 'ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं ' ! जब स्वप्नसुंदरी मेनका सामने हो फिर 'विश्वामित्र' की क्या औकात ? पर , विश्वामित्र बनने को कौन बोलता है ? चंदर बन जाईये ! एक से मुक्ति पायें और दुसरे को अपना लें ! सिनेमा में मुहब्बत बहुत अच्छा लगता है और हकीकत में समाज गाली देता है ! "शिल्पा शेट्टी" और कंगना राउत वाला "लाइफ इन मेट्रो " देखा है , न ! बेहद ख़ूबसूरत और दिल के करीब ! पर हकीकत में ऐसा कुछ हो जाए तो मेरे जैसा "बिहारी" को फांसी पर लटका दिया जाए ! समाज न तो जीने देता है और न ही मरने ! बहुतों की फिदरत में घुट घुट के मरना नहीं लिखा होता है - सो वोह अपना रास्ता खुद ही बना लेते हैं ! </div><div align="justify"> </div><div align="justify">"बुढाऊ" धर्मेन्द्र में दिव्यसुन्दरी हेमा आंटी को कुछ न कुछ तो जरुर नज़र आया होगा ! बस , यही "कुछ नज़र आना " सब बवाल का जड़ है ! कहते हैं ३२ वर्षीय राम को १४ वर्षीय सीता से धनुष तोड़ने के पहले ही वाटिका में "नज़र" मिल गयी थी ! वोह ! क्या जालिम घड़ी होगी ! रामायण लिख गया ! खुद से कई वर्ष बड़ी राधा के प्रेम में वंशी बजाते कृष्ण को हम सभी अपने घर में पूजते हैं ! </div><div align="justify"> </div><div align="justify">पर असली आनंद तो नज़र मिलाने में ही है ! मिलाते रहिये ! बस स्टाप से लेकर ऑफिस तक ! नज़र से दिल का रास्ता को 'ब्लाक' कर दीजिए - आप खुश रहेंगे वर्ना पेट पर लात लगते देर नहीं लगेगा !<br /></div><div align="justify">खैर , इंशाल्लाह ! चाँद और फिजा की मुहब्बत - चाँद के पैसे ख़तम होने के बाद तक भी बरक़रार रहे - हम तो बस यही दुआ कर सकते हैं !</div><div align="justify"> तभी तो - 'रब ने बना दी जोड़ी " ! </div><div align="justify"><br /><br />रंजन ऋतुराज सिंह , इंदिरापुरम !<span class=""></span><br /></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-197637312102111519?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com6tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-66028480583342431802008-12-09T17:09:00.002+05:302008-12-09T17:36:48.275+05:30मतवाला हाथी !<div align="justify"><span class=""> यूँ तो हम भी एक ब्राह्मण है ! लेकिन दादा- परदादा खेती बारी कराने लगे और छोटे मोटे खेतिहर बन गए ! बड़े बड़े जमींदारों को देख दरवाजे पर उनलोगों ने एक हाथी रख लिया ! हम सभी बचपन की हाथी की सवारी करते थे ! कभी कभी हाथी का महावत खेतों से उसको ले कर जाता था ! जिसके खेत की घुस गया - १०-२० किलो अनाज खा जाता था ! कभी गाली सुनने को मिलता तो कभी किसान चुप चाप ही रहते ! "कभी किसी खेत की हाथी अपना 'लीद' छोड़ दिया करता था - तब वही किसान खुश भी हो जाते , क्योंकि मुफ्त का 'खाद' मिल जाता था ! " </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class="">हमारे महावत होते थे - "अल्शेर मियां' ! उनका दो काम होता था - पहला - हाथी का देख भाल करना और दूसरा घर की बन्दूखों की नली को साफ़ करना ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class="">एकबार हाथी पगला गया और "अल्शेर मियां' को पटक दिया ! ऐसा लगा की आज तो 'अल्शेर मियां ' की मौत आ ही गयी ! खैर , किसी तरह उनकी जान बची ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class="">तो भाई लोग , आप लोगों को पता चल ही गया होगा की - इस बार के चुनाव की उत्तर प्रदेश का "हाथी" किसका खेत चार गया और किसके खेत की 'लीद' दे गया ! यह तो देश की प्रमुख राजनितिक हस्तियों को पता होगा ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class=""> पर महावत के रूप की हाथी की sawari कर रहे पंडित लोगों को हाथी के पागल होने के पहले ही सावधानी से रास्ता बदल लेना होगा ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह ,<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-6602848058334243180?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-57012852173871500782008-12-04T15:54:00.000+05:302008-12-04T15:56:16.734+05:30महबूबा कैसी हो ? भाग - २<div align="justify">प्रमोद मेरे बचपन का साथी था ! मालूम नहीं - अभी वोह कहाँ है ? +२ तक हम सभी साथ में थे ! ११ विन में उसको मुहब्बत हो गया था ! जाडे के दिन थे - पूरा दिन छत पर ही गुजरता था ! कभी तो दर्शन होंगे ! ठीक जैसे आज कल मै जीमेल के सामने बैठा होता हूँ की कभी तो मुलाकात होगी ! बहुत नकचढी थी ! गुस्सा तो हर वक़्त नाक पर बैठा होता था ! हम सभी मजबूर थे क्योंकि प्रमोदवा की वोह प्रेमिका थी ! प्रमोद को छोड़ वोह हमारे गैंग के सभी को लोफर ही समझती थे ! क्या क्या नहीं हम सभी ने किया प्रमोद के लिए ! उस ज़माने में साईकिल होती थी ! अपना कॉलेज छोड़ प्रमोदवाली के कॉलेज का ही चक्कर लगाया करते थे ! कभी रिक्शा में नजर आ गयी तो हमारा पहला काम होता था - प्रमोद को बताना ! उस ज़माने में मोबाईल भी नहीं होती ! साईकिल से हांफते हुन्फाते प्रमोद को खोज उसके प्रेमिका के सलवार और समीज का रंग बताते थे ! फिर उसी रंग का कपडा खोजा जाता और प्रमोद बाबु वही पहन कर निकलते थे ! गदहा ! एक दम गदहा था - प्रमोद ! अपनी महबूबा को देख नजरें नीची कर लेता ! कुछ कह नहीं पता था ! मैंने कई दफा कहा - पकड़ ले "कलाई" और ले जा छत के कोना में और सब कुछ कह दे ! अभागा , कुछ नहीं कर पाया ! फिर मै इंजीनियरिंग में आ गया और प्रमोद से थोड़ी दुरी बन गयी ! बाद में पता चला की - प्रमोद वाली का बियाह हो गया ! और प्रमोद को नौकरी ! अब जब कभी प्रमोद को देखता हूँ तो सब कुछ याद आ जाता है ! क्या वोह जमाना था ! प्रमोद की पत्नी को भी शायद हमारे "गैंग' के बारे में पता चल गया ! अब वोह मुस्कुरा देती है ! शायद उनका भी कोई 'प्रमोद' होता होगा !<br />कहने का मतलब - प्रेम गुनाह नहीं है ! हर किसी को प्रेम का अधिकार है ! अब आप किस रूप में और कैसे करते हैं - यह आप पर निर्भर करता है !<br />कई बार ऐसा देखा जाता है की प्रेम का पता - प्रेमी प्रेमिका को छोड़ किसी और नहीं चल पता ! मेरी नजर में शायद यही सर्वोत्तम है ! पर कहते हैं 'इश्क और मुस्क , छुपे नहीं छिपता है " !<br />क्रमशः </div><br />रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-5701285217387150078?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com5tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-25206633866300587792008-12-04T13:18:00.002+05:302008-12-04T13:21:17.458+05:30महबूबा कैसी हो ? भाग - एक<div align="justify">महबूबा कैसी हो ?<br />तीखे नाक , घुंघराले बाल , मृगनयनी आँख और मालूम नहीं क्या क्या ? कहते हैं 'दिल लगी दिवार से फिर परी क्या चीज़ है ' ! कई शिकायत करते हैं की उनकी महबूबा की जुबान बहुत तीखी है - बहूत मूडी है - मै कहता हूँ - ' एक परवाना जला इस कदर शोर मचा - शमा , सारी रात जली - न कोई गिला और न कोई शिकवा ! कभी तो उस तीखी जुबान के अन्दर बसा हुआ एक कोमल ह्रदय तो देखो !<br />खैर , बहुत सारे कवी कहानीकार लोगों ने मुहब्बत पर बहुत कुछ लिखा है और हम सभी ने महसूस भी किया है ! मेरे लिए आकर्षण और मुहब्बत में बहुत का अंतर नहीं है ! सब कुछ लुटा देने बाद भी कुछ और लूटा देने को जब जी चाहे तो समझ लीजिये - :)<br />निगाहें मिल गयी और जुबान पर एक मुस्कान आ गयी ! बस आप गए काम से ! एक मर्द होने के नाते एक ख़ूबसूरत महिला को जी भर देखने की चाहत गलत है या सही यह मै नहीं जानता ! यह मुहब्बत है या आकर्षण - यह भी नहीं पता फिर भी मालूम नहीं क्यों निघाहें मिलाने को जी चाहता है !<br />तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है - हमने दुनिया से अलग एक गाँव बसा रखा है ! उस धन की कीमत कुछ भी नहीं जिस धन को लुटेरा लुटे ना , पत्थर से सीसा टकरा कर वोह कहते हैं - दिल टूटे ना ! अरे इन गानों में क्या रखा है ?<br />ना उम्र की सीमा हो और न जनम का हो कोई बंधन - जी हाँ ! मुहब्बत कभी भी , कहीं भी और कितने बार भी हो सकता है ! दिल पर दीमाग को हावी न होने दें - फिर देखिये दुनिया कितनी रंगीन है ! दिल टूट गया - fevicol से चिपका कर दुबारा ट्राई को तैयार हो जाईये !<br />हमारे ज़माने में - निगाहों से बात होती थी ! जब एक से ही दो को मुहब्बत हो जाए - फिर क्या कहना ! तीनो आग में जलते रहेंगे ! ऐसी ही आग में हम भी एक बार जल चुके हैं ! मेरे अजीज दोस्त को भ्रम हो गया था अब वोह कहता है निगाहों का भ्रम मुझे हो गया था ! पर , मुझे पता है मुझे कभी भ्रम नहीं होता ! और दोस्ती को शहीद हो गयी - एक और प्रेम गाथा ! न उसको मिली और न ही मुझे ! दोनों दोस्त झाल बजाते रह गए ! इसलिए कहता हूँ - बेवकूफों से दोस्ती न रखें !<br />क्रमशः : </div>रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-2520663386630058779?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com2tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-90632103147665431212008-12-03T11:57:00.003+05:302008-12-03T12:10:15.128+05:30बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ !देखिये ! आप देख सकते हैं ! आप देख सकते हैं कि कैसे हम अपनी जान पर खेल कर आपको वह सब कुछ दिखा रहे हैं जो आप घर बैठे देख रहे हैं.जो आप देखना नही चाहते वो भी दिखाने को हम मोर्चा खोले बैठें हैं. इस देश का हम चौथा स्तभ हैं ,और जब स्तभ जमीं पर लुढ़क -लुढ़क कर मजबूत आधार दे रहा हो तो खतरों के निशान से ऊपर खतरा बह रहा है .ऐसा समझा जाना चाहिए . हम आपको बता दें कि वही सबकुछ हम अभी तक दिखा रहे थे जो आप आँख बंद करके देखना चाहा था .अब बात अलग है कि अभी सेना -पुलिस के मना करने पर वो सब कुछ हम नही दिखा पा रहे जो मेरा कैमरा अभी भी देख रहा है .हम नही चाहते कि आतंकवादी को हमारे जरिये कुछ मदद मिले .हम सेना पुलिस के साथ हैं हम उनकी कारवाई में खलल नही डालना चाहते. इसलिए लाइव दिखा कर आतंकी का लाईफ नही बढ़ाना चाहते.हम आपको साफ़ कर दें कि फिलहाल न तो हम "सबको रखे आगे " टी.वी. न "सबसे तेज टी.वी.'' हैं हम आपको बता दे फिलहाल दिल में इंडिया लिए मचल रहा हूँ मन तो कर रहा है कि सूचना के अधिकार के तहत आपको वो सब दिखा दूँ .पर ऐसा मैं नही करने जा रहा . हम आपको बता दे कि केवल दिखाने को मना किया गया हैबताने को मना नही किया गया है . हम आपको वह सब कुछ बताते रहेंगे .जो हम और हमारे कैमरे देखते रहेंगे. पर दिखायेंगे नही . जो दिखाया गया वो अनजाने में गलती से मिस्टेक हो गया. हम आपको बता दे कि हम “लाईव” नही दिखाते तो हमारे "फाइव" नही जाते . फाइव कहीं फिफ्टी न हो जाय इसलिए दिखाना बंद . हम आपको साफ़कर दें आतंकवाद से भिड़ने के तरीके में लोकतंत्र का हर स्तम्भ का मिस्टेक ,एक दुसरे के मिस्टेक को ओवरटेक करता गया है. हम आपको बता दे कि मिनट से ही घंटा बनता है . मेरे दिखाने से ५९ मिनट का काम ५९ घंटे तक चलेगा . पर आपको हम यकीं दिलाते हैं कि हमारा कैमरा नही चलेगा.आप देख सकते हैं कि अपने जांवाज कमांडो चारो तरफ़ से घेरे खड़े हैं .निचे कहीं आतंकी उतरे तो रेपिड एक्शन फोर्स के गोली का शिकार बनेगे , उनसे बचेगे तो ऐ टी एस ,ऐ टी एस से बचेंगे मुंबई पुलिस कि गोली से बच नही सकते .मतलब कि आतंकी पुरी तरह घिर गए हैं. गोलिया मेरी जुबान से भी तेज चल रही है . दहशत का माहौल हैदेखिये फ़िर से दो ग्रेनेड फेंक दिया है .एक कमांडो बुरी तरह घायल हो गया है अम्बुलेंस बुलाया गया है. देखिये ये सब हम आपको इसलिए नही दिखा रहे हैं कि हम नही चाहते कि आतंक का सहयोग हो. हम आपको बता दे आतंकी को लगातार फ़ोन पर पाकिस्तान से गाइड लाईन मिलने से आतंकी को लगातार लाईफ लाईन मिलती जा रही है .केवल दिखाने से ही उनकी मदद मिलेगी आंखों देखी बताने से मदद नही मिलती है सो हम बताये जा रहे हैं. लेट लेट कर , भाग-भाग कर .ये बात अलग है कि हमारे ऊपर भी ग्रेनेड दागे जा रहे हैं हमें उसकी परवाह नही है .हम सेना का मनोबल बढ़ने में विश्वास रखते हैं. अब ये अनुभव हर लड़ाई को लाईव करने में काम आएगा . देखिये पहले कमेंट्री रेडियो से होती थी अब टी.वी. पर प्रसारण होता है .हमारी टी.वी. को कभी मौका मिलता नही क्रिकेट मैच दिखाने का ,हमेशा सौजन्य से काम चलाता रहा , कोई फ़िल्म वाला अपने फाइटिंग सीन को कभी कवर नही करने दिया .वैसे आप सभी की इच्छा पूर्ति प्रतिबन्ध से पहले कर चुका हूँ .हम इनके प्रतिबन्ध को अनुबंध मानता हूँ .आप संयम और धैर्य धारण किए रहे क्योंकि हम इस बीच एक भी विज्ञापन तो दिखाया नही. फ़िर कहीं जाने की जरूरत नही है ,बने रहिये हमारे साथ . देखिये हम धैर्य और संयम के संगम में डूबे उतावले होकर जिम्मेवार मिडिया दिखाने में कोई संयम रख नही पाये हाँ अलबता देश के दुश्मन को आदर सूचक शब्द से नवाज़ते रहे .मतलब भाषा पर संयम कायम था .हमने आतंकवादी के लिए "वह " की जगह "वे" "ग्रेनेड फेंक रहा है " की जगह "ग्रेनेड फेंक रहे हैं." बोलता रहा .आप देख सकते है न्योता देकर बुलाने के बावजूद दो आतंकी और १०० अपने के ढेर होते ही "रद्दी रिजेक्टेड पाटिल " भारत माता की जय बोल रहे हैं ,जबकि ये अधिकार अबतक भाजपा अपने कोटे का समझ रही थी.उनके मुस्कान से लबरेज जयकारा से आगे की लड़ाई में जीत हाशिल हुई .जितने नेता आते गए अपने थोबडा दिखाने हम आपको दिखाते रहे . कल्ह हम फ़िर दिखायेगे जो सिर्फ़ हम दिखा सकते हैं.अपनी फजीहत कोई और न करे इसके लिए हम आपके सहयोग से नेताओं को कल्ह तरीके से घेरेंगे . हम लगातार ५९ घंटे तक बक-बक करते रहे .पर उनके एक लाईन से उनको लाईन हाज़िर करवा देंगे. आप देख सकते हैं कि क्या हमने जुगाड़ लगाया हैं ,कल्ह आपके घर आऊंगा ,आपको रास्ते में रोक कर पूछूँगाकि कैसा लगा मेरा हिम्मत से भरा लाईव दिखाने की हिमाकत .<br />अंत में हम आपको बता दें . हम चौबीसों घंटे तीन पाँच करते रहते हैं . क्या दिखाया जाय क्या नही दिखाया जाय उसकी समझ न होते हुए भी लोकतंत्र का सबसे समझदार स्तभ का तगमा अपने गले लटकाय रहता हूँ. और आपको हम ये भी बता दे कि ये देखने की चीज थी इसलिए ही बार बार दिखाया गया ,लगातार दिखाया गया । <br />हर बार यह अपराध हमसे हो जाता है । आपकी नज़रें वो सब कुछ नही देख पाती जो मुझमे समाहित है .<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-9063210314766543121?l=daalaan.blogspot.com'/></div>Sanjay Sharmahttp://www.blogger.com/profile/06139162130626806160noreply@blogger.com4tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-85951855370766406982008-11-25T14:51:00.002+05:302008-11-25T15:07:20.040+05:30रंग रसिया<a href="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SSvER9uboYI/AAAAAAAAAok/PHFAEY8X4zo/s1600-h/rang-rasiya.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5272523601673429378" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 236px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SSvER9uboYI/AAAAAAAAAok/PHFAEY8X4zo/s400/rang-rasiya.jpg" border="0" /></a><br /><div align="justify"><span class=""> बंगालन कामुक</span> और ४१ वर्षीय ( नोबेल पुरस्कार के विजेता अमर्त्य सेन की पुत्री ) 'नंदना सेन' को देखने की इच्छा हो चली है ! </div><div align="justify">राजा रवि वर्मा पर आधारित "रंग रसिया" भारत के किस वर्ग को पसंद आएगी , यह कहना मुश्किल है - पर मेरे विख्यात पत्रकार दोस्त श्री देवब्रत कहते हैं - काम - वासना कला के उस नोक की तरह होती है जिसके बैगर धार नहीं आती !</div><div align="justify"> प्रेम बिना वासना अधुरा है ! और काम बिना प्रेम अधुरा है ! भक्ति और प्रेम में अंतर होता है - शायद यही बहुत लोग समझ नहीं पाते हैं ! भक्ति में काम और वासना नहीं होती ! भक्ति सब से परे और सर्वोत्तम है ! पर काम और वासना का सफ़र बिना प्रेम अधुरा है ! और एक स्त्री और पुरुष का प्रेम बिना काम और वासना अधुरा है ! खैर , यह मामला सिर्फ मेरे नज़र तक ही नहीं है ! आप सभी "रंग रसिया" देखिये और इस परिचर्चा में शामिल होवें ! </div><div> </div><div></div><div><strong>रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा</strong></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-8595185537076640698?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com5tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-20426622199234706952008-11-05T09:44:00.009+05:302008-11-05T10:02:25.357+05:30नॉएडा में महापर्व "छठ पूजा"<a href="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREhIVDy87I/AAAAAAAAAns/hkU2z1CpWvE/s1600-h/IMG_0078.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265025866348557234" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREhIVDy87I/AAAAAAAAAns/hkU2z1CpWvE/s400/IMG_0078.jpg" border="0" /></a><br /><div><a href="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREgwXV_MII/AAAAAAAAAnk/fN8xNHJjwAs/s1600-h/IMG_0065.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265025454644867202" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREgwXV_MII/AAAAAAAAAnk/fN8xNHJjwAs/s400/IMG_0065.jpg" border="0" /></a><br /><br /><div><a href="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREge7VkCmI/AAAAAAAAAnc/_cPk03IykDg/s1600-h/IMG_0064.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265025155069119074" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREge7VkCmI/AAAAAAAAAnc/_cPk03IykDg/s400/IMG_0064.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><div><a href="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREgEL47eRI/AAAAAAAAAnU/6KLoM4gE6sA/s1600-h/IMG_0066.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265024695655954706" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREgEL47eRI/AAAAAAAAAnU/6KLoM4gE6sA/s400/IMG_0066.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREfrVJUYoI/AAAAAAAAAnM/89qSx0cWrIk/s1600-h/IMG_0037.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265024268643885698" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREfrVJUYoI/AAAAAAAAAnM/89qSx0cWrIk/s400/IMG_0037.jpg" border="0" /></a><br /><br /><br /><br /><br /><div><a href="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREfQUWsCwI/AAAAAAAAAnE/Kl_llH0UB10/s1600-h/IMG_0076.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5265023804575058690" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_fabeCWoNzTg/SREfQUWsCwI/AAAAAAAAAnE/Kl_llH0UB10/s400/IMG_0076.jpg" border="0" /></a><br /><div></div><div></div><div>रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा से </div><div><strong>दालान</strong> के लिए ! </div><br /><br /><br /><br /><br /><br /><div></div></div></div></div></div></div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-2042662219923470695?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com3tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-83113949664743614302008-09-11T11:49:00.004+05:302008-09-11T12:13:25.181+05:30स्काईलैब की याद<div align="justify"><span class=""> कल जेनेवा के नजदीक जो कुछ भी वैज्ञानिक परीक्षण हुआ - सन १९८० के <strong>स्काईलैब</strong> की याद आ गयी ! उस वक्त भी ऐसा ही हंगामा हुआ था ! हम लोग बच्चa थे और बाबु जी और दादा जी के पास रेडियो ! रेडियो की तरह तरह की आशंका व्यक्त की जाती थी ! ऐसा लगता था की - मुजफ्फरपुर की ही ठीक हमारे दरवाजे पर ही - स्काईलैब गिर पड़ेगा ! हम बच्चे काफी आशंकित हो उठे थे ! उसी दौर की हर रोज "बिहार के भाग्य-निर्माता" जे प्रकाश जी की मृत्यु की ख़बर भी बेचैन कर देती थी ! unake karan कई बार स्कूल छुट्टी दे दिया करता था ! फ़िर शाम को पता चलता था की जय प्रकाश नारायण नही मरे और हम बच्चे खुश हो जाया करते थे की चलो जिस दिन वोह मरेंगे उस दिन तो छुटी जरुर मिलेगी ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><div align="justify"><span class="">एक चैनल है - इंडिया टीवी - एक दू घंटा लगातार देख लीजिये तो फ़िर आपको रात भर नींद नही आयेगी या फ़िर आप पागलपन के शिकार हो जायेंगे ! अजीब हाल है ! बिल्कुल "सत्य-कथा" और मनोहर कहानियाँ की तरह ! प्रेम -अपराध और ना जाने क्या क्या ? </span></div><div align="justify"><span class="">रविश बाबु , बिहारी हिन्दी की समाचार पढ़ते नज़र आ रहे हैं ! डरते भी हैं - कहीं "बिहारी" का ठप्पा न लग जाए ! मेरी दादी कहती है - "कोई कहीं जाए -जहाँ का जन्म होता है - वोह उसके साथ हमेशा लगा रहता है " ! कहने का मतलब की - रविश बाबु - राष्ट्रीय समाचार पढ़ते वक्त - भोजपुरी स्टाइल हिन्दी नही चलेगा ! "राज ठाकरे" अंकल आपको घुर कर देखते हैं ! </span></div><div align="justify"><span class=""></span> </div><span class=""></span><br />रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-8311394966474361430?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com3tag:blogger.com,1999:blog-3286126586768298851.post-20257632387190824112008-09-09T12:45:00.004+05:302008-09-10T09:21:49.679+05:30नीतिश भैया, सुनीता मर गयी<span class=""></span><br /><div align="justify"><span class="">नंदू भैया (नंदकिशोर यादव, स्वास्थ्य मंत्री), सुनीता मर गयी। गणेश यादव ka sab kuchh loot gaya । कोसी क्षेत्र के पीएमसीएच में दो-तीन दिन की यंत्रणा के बाद सोमवार को अंतत: उसकी मौत हो गई। असह्य प्रसवपीड़ा से गुजरती उस सुनीता और वैसी अनेक बाढ़पीडि़त महिलाओं की ही नहीं, हजारों बीमारों की दुर्दशा से मैंने आपको आगाह किया था। पता नहीं, आपने ध्यान दिया भी कि नहीं? दुखद यह है कि वह सबको बताकर मरी; सबके सामने मरी। उसकी कोख में पड़े बच्चे का हाथ बाहर निकल गया था। मैंने शुक्रवार की रात करीब पौने एक बजे सुनीता को भारी कदमों से लेबर रूम की तरफ बढ़ते देखा था। पति गणेश यादव उसका हाथ थामे था। ब्लीडिंग से सुनीता की साड़ी लाल थी। आज ये खून सूखे हुए दिख रहे थे। भैया, मैंने आपको बताया था कि क्यों यह दंपति इस खौफ में से मर रहा है कि निर्वश न हो जायें। दरअसल उनके दो बच्चे वेगवती कोसी की नई धार में बह गये और आज आपकी व्यवस्था ने कोख वाले शिशु को जन्म ही नहीं लेने दिया। गणेश-सुनीता मजरूहा (त्रिवेणीगंज) से आये थे। आपके अस्पताल पहुंचने में सुनीता को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ी। इससे पहले त्रिवेणीगंज अस्पताल में कई दिनों रहना पड़ा था। भैया, आपके सदर अस्पताल के डाक्टरों-नर्सो ने उसकी समुचित देखभाल नहीं की। खून चढ़ाने के नाम पर उसे प्राइवेट क्लीनिक भेज दिया। क्लीनिक वाले ने खून चढ़ाने के बाद फिर उसे अस्पताल भगा दिया। और इस सदर अस्पताल ने उसे फिर त्रिवेणीगंज भगा दिया। इस भागमभाग में सुनीता के पति गणेश ने भी उसका साथ छोड़ दिया, भाग गया। उसे लग गया था कि सुनीता नहीं बचेगी। आज सुनीता की मां दुलैर देवी उसे लेकर फिर सदर अस्पताल आयी। शाम चार बजे के करीब उसकी मौत हो गयी। उसकी लाश फर्श पर पड़ी थी। पिछले हफ्ते भर के दौरान उसे बेड तक नहीं मिला। अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंजीत कुमार सिंह दोषी डाक्टरों पर हत्या का मुकदमा चलाने की बात कहते हैं। भैया मैं फिर दोहरा रहा हूं-मौत के मुहाने पर खड़ी सुनीता देवी जैसी जिंदगियों की कमी नहीं है। सुनीता बस एक प्रतीक थी। यह बीमार इलाका और खासकर आपका यह अस्पताल आपके अस्तित्व को खुली चुनौती दे रहा है। इस अस्पताल को फौरन अस्पताल बनाइये, वरना यह सैकड़ों मौतों का कारण बन आपको, आपकी सरकार को बदनाम करायेगा। आप जैसे रहनुमाओं से जनता का भरोसा टूट जायेगा। अगर वाकई आप कोसी के आसन्न खतरों से जनता को बचाना चाहते हैं, लोगों को मेगा शिविर में रखना चाहते हैं, तो अपनी व्यवस्था को भरोसेमंद बनाइये। और सुनीताओं को मरने नहीं दीजिये। भइया, आप जानते हैं कि इस अस्पताल में सामान्य दिनों में भी सहरसा, सुपौल, मधेपुरा के लोग इलाज को आते हैं। प्रलय ने तो बीमारों की तादाद में कई सौ गुना की वृद्धि की है। आपके विद्वान अफसरों को भी इस बात से इनकार नहीं होगा कि यह संख्या और बढ़ेगी। जरा आप भी देखिये, वाकई कोसी के पीएमसीएच में इस लायक तैयारी है? सुनीता आपके दावों और उसकी शर्मनाक जमीनी हकीकत बता गयी। क्या उसकी मौत के जिम्मेदार चिह्नित होंगे; सजायाफ्ता होंगे? बहरहाल, नंदू भैया! एक और उदाहरण सुन-जान लीजिये। मुझे इसी अस्पताल में ऐसी ही एक टिमटमाती जिंदगी दिखी। यह है-पवन कुमार ठाकुर का 16 दिन का बच्चा। पवन सुपौल के रहने वाले हैं। वे अपने बच्चे को गोद में बिठा उसके नाक में आक्सीजन की पाइप लगाये हुए दिखे। ये क्या हो रहा है? भइया, आपकी नर्से कहां हैं? पवन की पच्ी अपने बच्चे को ऐसे निहारती रहती है, मानों उसके एक-एक रोएं को अपनी आंख में बसा लेना चाहती है, ताकि कल को कुछ हो जाये तो सब कुछ याद रहे। इस तरह की याद बड़ी खतरनाक होती है भैया। कुछ जल्दी कीजिये न! बहुत लोग मरने वाले हैं। आपकी सरकार को मेगा श्मशान घाट व कब्रिस्तान बनाना पड़ सकता है।</span></div><div align="justify">=======================================</div><div align="justify"><span class="">साभार : दैनिक जागरण , पटना </span></div><div align="justify">=======================================</div><div align="justify"><span class="">मुख्यमंत्री जी - </span></div><div align="justify"><span class="">क्या गुनाह है इन हजारों "गणेश यादव" जैसे लोगों का ? यह पीडा आप तक क्यों नही पहुंचती है ? </span><br />------------------------<br />रंजन ऋतुराज सिंह , नॉएडा</div><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3286126586768298851-2025763238719082411?l=daalaan.blogspot.com'/></div>MUKHIYA JEEhttp://www.blogger.com/profile/03013961954702865267mukhiya.jee@gmail.com4