tag:blogger.com,1999:blog-32145305.post-14975184492808087372007-02-04T02:05:00.000-08:002007-02-04T02:05:00.000-08:00स्त्री को बीकीनी में स्वीकारने में कठीनाई क्यों हो...स्त्री को बीकीनी में स्वीकारने में कठीनाई क्यों होती है, यह समझ से बाहर है. मानो सारी सभ्यता कपड़ो में सिमट कर रह गई है.<br />गंगा तट पर टुबकी लगाने भागते भूत(जैसे)जैसे लोग (संत) किस सभ्यता की उपज है?<br />याद रखिये भारत का वह स्वर्णकाल था जब स्त्रीओं पर वस्त्रो को लेकर कोई प्रतिबन्ध नहीं था. कमर से उपर कपड़े पहनने अनिवार्य नहीं थे. तब हम सबसे सभ्य थे.संजय बेंगाणीhttp://www.blogger.com/profile/07302297507492945366noreply@blogger.com