tag:blogger.com,1999:blog-27324674.post-3626117416420246822008-01-29T16:22:00.000+05:302008-01-29T16:22:00.000+05:30शुक्रिया मनीष. अभी कहीं निदा फ़ाज़ली का लिखा यह नज...शुक्रिया मनीष. अभी कहीं निदा फ़ाज़ली का लिखा यह नज़्म पढ़ा- <BR/><BR/>कराची एक माँ है<BR/>बम्बई बिछुड़ा हुआ बेटा<BR/>यह रिश्ता प्यार व पाकीज़ा रिश्ता है<BR/>जिसे अब तक न कोई तोड़ पाया है<BR/>न कोई तोड़ सकता है<BR/>गलत है रेडियो, झूठी है सब अख़बार की ख़बरें<BR/>न मेरी माँ कभी तलवार खाने रन में आई है<BR/>न मैंने अपनी माँ के सामने बंदूक उठाई है<BR/>यह कैसा शोरो हंगामा है<BR/>यह किस की लड़ाई है.<BR/>और प्रिय ज़ाकिया के बारे में फिर कभी.Arvind Dashttp://www.blogger.com/profile/04454157250490714006noreply@blogger.com