tag:blogger.com,1999:blog-24830994389454223692008-06-15T11:26:50.881-07:00पिताश्री की रचनायेंvivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comBlogger15125tag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-31292858289541795582008-05-18T01:36:00.000-07:002008-05-18T01:37:20.962-07:00जयपुर बम विस्फोट परजयपुर बम विस्फोट पर <br /> <br /> प्रो सी बी श्रीवास्तव<br /> सी ६ विद्युत मण्डल कालोनी <br /> रामपुर जबलपुर<br /><br />बह चुका आंसानियत का खून कई बाजार में <br />कोसते हैं लोग सब अब तुम्हें इस संसार में <br />सिरफिरों ! आतंकवादी ! आदमियत के दुश्मनों <br />आदमियत को भी तो समझो लौट फिर इंसा बनो <br /><br />निरपराधों की निरर्थक ले रहे तुम जान क्यों <br />नासमझदारी पै अपनी है तुम्हें अभिमान क्यों <br />आये दिन चाहे जहाँ पर लगाते तुम आग हो <br />जला के रख देगी वह ही तुम्हारे ही बाग को <br /><br />खून का औ आग का ये खेल है अच्छा नहीं <br />तुम्हारा ये जुनुं कल कर सकेगा रक्षा नहीं <br />आदमी हो ये नहीं है आदमी का आचरण<br />कुत्तों सा होता है जग में दुष्टों का जीवन मरण <br /><br />जाति के भाषा के या फिर धर्म के उन्माद में<br />जो भी उलझे जग को उनने ही किया बरबाद है <br />किये तो विस्फोट इतने पर तुम्हें है क्या मिला <br />बद्दुआयें लेने सबकी कब रुकेगा सिलसिला <br /><br />मिटा के औरों के घर परिवार उनकी जिंदगी <br />कर रहे हो तुम समझते हो खुदा की बन्दगी <br />तो ये जानो हर तरह से ये तुम्हारी भूल है <br />बोता जो जैसा वही मिलता उसे ये उसूल है <br /><br />कुछ न हासिल होगा खुद के किये पै पछताओगे <br />कमाने को पुण्य निकले पाप में मिट जाओगे <br />राख हो जाओगे जलकर जुल्म की इस राह में <br />गलाने की शक्ति होती त्रस्त की हर आह में <br /><br />जहाँ जन्में पले विकसे और सब कुछ पा रहे <br />उसी अपने देश और समाज को क्यों खा रहे <br />सही सोच विचार अब भी दिला सकता यश बड़ा <br />ज्योंकि अब्दुल हमीद को सम्मान पदक सुयश जड़ा <br /><br /><br /><br /><br />प्रो सी बी श्रीवास्तवvivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-42898143198718507342008-05-18T01:34:00.000-07:002008-05-18T01:35:16.476-07:00ये मन ध्यान प्रभु का भुलाने न पायेये मन ध्यान प्रभु का भुलाने न पाये<br /><br /> प्रो सी बी श्रीवास्तव<br /> सी ६ विद्युत मण्डल कालोनी <br /> रामपुर जबलपुर<br /><br />ये मन ध्यान प्रभु का भुलाने न पाये ।<br />शिथिलता कहीं कोई आने न पाये ।।<br /><br />बड़ी ही प्रबल हैं विषय वासनायें <br />सदा अपने चंगुल में मन को फसाँये ।<br />वही बच सके जो रहे साफ निश्छल<br />औ प्रभु की कृपा से गये जो बचाये ।।१।।<br /><br />यहाँ मोहमाया ने सबको भुलाया <br />न कोई समय पर कभी काम आया ।<br />हरेक रास्ते में है धोखे हजारों<br />सदा कर्म अपने ही बस काम आये ।।२।।<br /><br />है दुनियाँ पुरानी मगर अजनबी है <br />कभी कुछ है लेकिन अलग कुछ कभी है ।<br />बदलती रही सदा ये अपनी चालें<br />करेगी ये कल फिर कोई क्या बताये ?३।।<br /><br />है बस अपना खुद का औ प्रभु का सहारा <br />न ऐसा कोई जो कभी न हो हारा .।<br />थके हारे मन को मिली चेतना नई<br />तभी जब भी भगवान ने पथ दिखाये ।।४।।<br /><br />सदा ध्यान से शुध्दता मन ने पाई <br />यही शुध्दता ही है सच्ची कमाई ।<br />सदा ज्योति बन आये भगवान आगे<br />कि निष्पाप मन से गये जब बुलाये ।।५।।vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-53120746796825240132008-05-09T09:57:00.000-07:002008-05-09T09:58:27.633-07:00प्रार्थनाप्रार्थना <br /> प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध<br /> C-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur , <br /> Jabalpur (M.P.) 482008<br /> मोबा ०९४२५४८४४५२<br /><br /><br /><br />हे दीनबन्धु दयालु प्रभु तुम विश्व के आधार हो<br />तुम बिन्दु में हो सिन्धु , अणु में अपरिमित विस्तार हो ।<br /><br />तुम चेतना , आलोक , ऊर्जा , गति अलख पावन परम् <br />तम में फँसे , माया भ्रमित , अल्पज्ञ , सीमित नाथ हम ।<br />निर्बल , समय की धार में असहाय बहते जा रहे <br />तुम कर कृपा दे हाथ अपना नाथ हमें उबार लो ।।१।। हे दीन...<br /><br />आनन्द , सत् चित् , शाँत , शुभ , सत्यं , शिवं , तुम सुन्दरम्<br />अपने बुने ही जाल में भूले , फँसे , उलझे हैं हम<br />सब चाहकर भी रात दिन भ़म से सुलझ पाते नही <br />इस आर्त मन की दुख भरी प्रभु प्रार्थना स्वीकार हो ।।२।। हे दीन...<br /><br />मिलता नही सुख चैन मन को कहीं भी संसार में <br />तृष्णा का माया मृग लुभाता मन को हर व्यवहार में ।<br />नल से निकल जल सी बही सी जा रही है जिन्दगी <br />इसको सहेज , सँवारने को देव अपना प्यार दो।।३।। हे दीन...vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-91687406705256637232008-03-05T04:36:00.000-08:002008-03-05T04:39:16.275-08:00तब और अब 2<a href="http://bp0.blogger.com/_NOtmBFdwv1w/R86UYgVe2PI/AAAAAAAAAD0/I4CH36jg9_c/s1600-h/tab+aur+ab+2.bmp"><img style="cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_NOtmBFdwv1w/R86UYgVe2PI/AAAAAAAAAD0/I4CH36jg9_c/s320/tab+aur+ab+2.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5174236170613086450" /></a>vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-44214123449328023792008-03-05T04:29:00.000-08:002008-03-05T04:32:53.405-08:00तब और अब<a href="http://bp0.blogger.com/_NOtmBFdwv1w/R86S5gVe2OI/AAAAAAAAADs/mH-pUGrBgAY/s1600-h/tab+aur+ab+1.bmp"><img style="cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://bp0.blogger.com/_NOtmBFdwv1w/R86S5gVe2OI/AAAAAAAAADs/mH-pUGrBgAY/s320/tab+aur+ab+1.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5174234538525513954" /></a>vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-26321301527116623552008-01-03T23:04:00.001-08:002008-01-03T23:04:34.270-08:00सिर्फ बातें व्यर्थ हैं कुछ काम होना चाहियेसिर्फ बातें व्यर्थ हैं कुछ काम होना चाहिये<br /><br />प्रो. सी.बी.श्रीवास्तव<br />सेवा निवृत प्राध्यापक<br />वर्तमान पता <br />c-6, mpseb colony, rampur Jabalpur ,पिन ४८२००८<br />फोन ०७६१ २७०२०८१<br />मोबा. ९४२५४८४४५२ email vivek1959@yahoo.co.in<br /><br /><br /><br /><br /><br />सिर्फ बातें व्यर्थ हैं कुछ काम होना चाहिये<br />हर हृदय की शांति सुख आराम होना चाहिये<br /><br />बातें तो होती बहुत पर काम हो पाते हैं कम <br />बातों में विश्वास कअ पेगअम होना चाहिये<br /><br />उड़ती बातों औ॔ दिखावों से भला क्या फायदा<br />कअम हों जिनके सुखद परिणाम होनअ चाहिये<br /><br />हवा के झोंकों से आके सोच यदि जावे बिखर <br />तो सजाने कअ उन्हें व्यायाम होना चाहिये<br /><br />लोगों की नजरों में बसते स्वप्न हैं समृद्धि के<br />पाने नई उपलब्धि नित संग्राम होना चाहिये<br /><br />पारदर्शी यत्न ऐसे हों जिन्हें सब देख लें <br />सफलता जो मिले उसका नाम होना चाहिये <br /><br />सकारात्मक भावना भरती है हर मन में खुशी <br />सबके मन का आनन्द सुख का धाम होना चाहिये <br /><br />आसुरी दुष्वृत्तियों के सामयिक उच्छेद को <br />साथ शाश्वत सजग तत्पर राम होना चाहिये !!vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-19839160263257916712007-10-22T23:57:00.000-07:002007-10-22T23:59:43.449-07:00राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !<br /><br />प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध<br />c-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur ,<br />Jabalpur (M.P.) 482008<br />मोबा ०९४२५४८४४५२<br />हो रहा आचरण का निरंतर पतन राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !<br />हैं जहाँ भी कहीं हैं दुखी साधुजन लेके उनकोशरण क्यों बचाते नहीं !<br />है सिसकती अयोध्या दुखी नागरिक कट गये चित्रकूटों के रमणीक वन<br />स्वर्णमृग चर रहे दण्डकारण्य को पंचवटियों में बढ़ गया है अपहरण<br />घूमते हैं असुर साधु के वेश में अहिल्याये कई फिर बन गईं हैं शिला<br />सारी दुनियाँ में फैला अनाचार है रुकता दिखता नहीं ये बुरा सिलसिला<br />हो रहा गाँव नगरों में सीता हरण राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !<br />सारे आदर्श बस सुनने पढ़ने को हैं आचरण में अधिकतर है मनमानियां<br />जिसकी लाठी है उसकी ही भैंस है राजनेताओं में दिखती हैं नादानियां<br />स्वप्न में भी न सोचा जो होता है वो हर समस्या उठाती नये प्रश्न कई<br />मान मिलता है कम समझदार को भीड नेताओं की इतनी है बढ़ गई<br />हर जगह डगमगा गया है संतुलन राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !<br />बढ़ती जाती है कलह हर जगह बेवजह नेह सद्भाव पडते दिखाई नहीं<br />एकता प्रेम विश्वास हैं अधमरे आदमियत आदमी से हुई गुम कहीं<br />स्वार्थ सिंहासनों पर आसीन है कोई समझता नहीँ किसी की व्यथा<br />मिट गई रेखा लक्षमण ने खींची थी जो राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-49314088316052144982007-10-17T00:20:00.000-07:002007-10-17T00:21:39.479-07:00श्री चित्रगुप्त देवेशॐ श्री चित्रगुप्त देवेश जय हो श्री चित्रगुप्त स्वामी.................सुखदाता तुम , दुखत्राता तुम , प्रभु अन्तरयामीब्रम्ह देव के मानस सुत तुम , काया से उभरे जग का लेखा जोखा रखते कलम दवात धरे समदर्शी निष्पक्छ विचारक शांत न्यायकारी विमल दृष्टि ,ग्यानी , गुन सागर जग के हितकारि ॐ श्री चित्रगुप्त देवेश जय हो श्री चित्रगुप्त स्वामी...............चिर अविनाशी , घट घट वासी जन जन के स्वामी हर मन की इच्छा के ग्याता , वरदाता नामी रखते प्रभु तुम छण छण हर जन जीवन का लेखा छुपी न तुमसे कभी किसी की ,गुप्त चित्त रेखा ॐ श्री चित्रगुप्त देवेश जय हो श्री चित्रगुप्त स्वामी...............वीतराग तुम तुम्हें परम प्रिय ,सत्य न्याय शिक्छा सदा शांति प्रिय सात्विक भक्तों की करते रक्छा भक्ति भाव से मिल हम करते पूजन आराधन करो देव स्वीकार , सफल हो तन मन धन साधनॐ श्री चित्रगुप्त देवेश जय हो श्री चित्रगुप्त स्वामी...............कृपा करो प्रभु हर कुल में नित सुख समृद्धि पले हो सदभाव हरेक के मन में , प्रेमल ज्योति जले दूर अँधेरा हो हर घर से , आश किरन छाये दुःखो से तपता जीवन पा आशीष मुस्काये ॐ श्री चित्रगुप्त देवेश जय हो श्री चित्रगुप्त स्वामी................vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-64891486907361901992007-10-16T00:27:00.000-07:002007-10-16T00:29:18.464-07:00राम जाने कि क्यों राम आते नहींहो रहा आचरण का निरंतर पतन ,<br /> राम जाने कि क्यों राम आते नहींहै<br />सिसकती अयोध्या दुखी <span class=""></span><br /><span class=""></span>देके उनको देके शरण क्यों बचाते नहीं ?<br />..................अनुगुंजन सेvivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-81704599622204136932007-10-16T00:20:00.000-07:002007-10-16T00:25:46.971-07:00मेघदूतम् का श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवादमहाकवि कालीदास कृत मेघदूतम् का श्लोकशः हिन्दी <span class=""></span><br /><span class=""></span>द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव<br />संस्कृत<br /> सुखमुपगतं दुःखमेकान्ततोवानीचैर्गच्छिति उपरिचदशा चक्रमिक्रमेण<br />अनुवाद<br />किसको मिला सुख सदा या भला दुःखदिवस रात इनके चरण चूमते हैंसदा चक्र की परिधि की भाँति क्रमशःजगत में ये दोनों रहे घूमते हैं...................मेघदूतम् हिन्दी पद्यानुवाद से अंशvivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-22572292707840829682007-10-16T00:17:00.000-07:002007-10-16T00:19:52.371-07:00धर्म तो प्रेम का दूसरा नाम हैधर्म तो प्रेम का दूसरा नाम है ,<br /> प्रेम को कोई बंधन नहीं चाहिये<br />सच्ची पूजा तो होती है मन से जिसे<br /> आरती धूप चंदन नहीं चाहियेvivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-69947167355563794852007-10-16T00:14:00.000-07:002007-10-16T00:16:19.858-07:00हंस वाहिनी वीण वादिनी शारदेशुभवस्त्रे हंस वाहिनी वीण वादिनी शारदे ,<span class=""></span><br /><span class=""></span>संसार को अवलंब दे आधार दे !<br />रही घर घर निरंतर आज धन की साधना ,<br />स्वारथ के चंदन अगरु से अर्चना आराधना<br />आतम वंचित मन सशंकित विश्व बहुत उदास है<br />,चेतना जग की जगा मां वीण की झंकार दे !vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-39377945799318708562007-10-16T00:08:00.000-07:002007-10-16T00:11:03.804-07:00हम सबकी माँ भारत माताहिमगिरि शोभित सागर सेवितसुखदा गुणमय गरिमा वालीसस्य श्यामला शांति दायिनीपरम विशाला वैभवशाली ॥प्राकृत पावन पुण्य पुरातनसतत नीती नय नेह प्रकाशिनिसत्य बन्धुता समता करुणास्वतंत्रता शुचिता अभिलाषिणि ॥ग्यानमयी युग बोध दायिनीबहु भाषा भाषिणि सन्मानीहम सबकी माँ भारत मातासुसंस्कार दायिनि कल्यानी ॥vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-30187589510968726322007-10-11T03:01:00.001-07:002007-10-11T03:04:04.074-07:00राम सेतु ध्वँस परियोजना सेतुसमुद्रम पर !राम सेतु ध्वँस परियोजना सेतुसमुद्रम पर !<br />प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध<br />C-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur ,<br />Jabalpur (M.P.) 482008<br />मोबा ०९४२५४८४४५२<br />भारत सुन्दर देश है मन मोहक परिवेश !<br />कण कण इसका दे रहा आध्यात्मिक सँदेश !<br />अनुपम है सँसार मेँ इसका रूप विधान !<br />देव भूमि विख्यात यह मानव का वरदान !<br />सभी दिशाओँ का इसे सहज प्राप्त प्रतिसाद !<br />वायु गगन जल यँहाँ के हरते सकल विषाद !<br />हिम गिरि देता जल इसे उदधि विमल वातास !<br />ॠषि मेधाओँ ने रचा है इसका इतिहास !<br />सँतोषी हैँ नागरिक कर्मठ यहाँ किसान !<br />सबके मन की भावना जीवन का कल्याण !<br />रहे मित्र इसके सदा सभी पडोसी देश !<br />पहुँचाता जिन तक रहा यह धार्मिक उपदेश !<br />जब जब असुरोँ ने किया यहाँ कहीँ उत्पात !<br />सदाचार ने हो प्रकट उसका किया निपात !<br />स्वर्ण द्वीप लँका मेँ था रावण निशिचर राज !<br />बुद्धिमान हो भी रहा करता रहा अराज !<br />सेतु बँध कर के वहाँ पहुँचे तब श्री राम !<br />जो थे मर्यादा पुरुष आदर्शोँ के धाम !<br />लँका तक निर्माण कर लघु द्वीपोँ पर सेतु !<br />रामेश्वर से राम गये सीता रक्षा हेतु !<br />जनमानस की आस्था का यह सेतु महान !<br />राजनीति पर आज की स्वार्थ लिप्त बेइमान !<br />ओछी दृष्टि लिये हुये करते हैँ हर काम!<br />बेशर्मी से कह रहे कहाँ हुये थे राम !<br />तोड सेतु की भूमि को जल पथ का निर्माण<br />करने को तैयार हैँ बिन सोचे परिणाम !!<br />जगह जगह पर हो रहा प्रकृति सँग खिलवाड !<br />सभी स्वार्थवश कर रहे लेकर कोई आड !<br />इससे जन हित की जगह दिखता बडा विनाश !<br />राजनीति से उठ चला लोँगोँ का विश्वास !!<br />अच्छा हो सदबुद्धि देँ नेताओँ को राम !<br />जिससे होँ सब कर्म शुभ होँ न कोई बदनाम !!vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2483099438945422369.post-36092491561548143322007-10-09T22:45:00.000-07:002007-10-09T22:46:48.279-07:00राम से भारत का सम्मान जुडा हैराम से भारत का सम्मान जुडा है !<br />प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध<br />c-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur ,<br />Jabalpur (M.P.) 482008<br />मोबा ०९४२५४८४४५२<br />राम की गाथा चरित्र व जीवन से आदर्श महान जुडा है !<br />राम के नाम से धर्म नहीं जन जीवन का मन प्राण जुडा है !<br />राम का सौम्य स्वभाव स्नेह सुशीलता निर्मल पावन गंगा !<br />राम से संस्कृति का यश गान है भारत का सम्मान जुडा है !<br /><br />राम तो है एक शाश्वत चेतन तत्व कभी भी जो म्लान नहीँ है !<br />राम की मानस मूर्ति सशस्त है अक्छय है म्रियमाण नहीँ है !<br />राम का नाम सदा सुखधाम है जन जन हित नित दीप प्रकाशित !<br />ऐसे श्री राम से जिसको हो विरोध वो हो कुछ भी इंसान नहीँ है !<br /><br />राम है बुध्दि विवेक सनेह दया तप त्याग की उज्ज्वल मूरत !<br />एक विनम्र विवेकी उदार सनेही स्वरूप की सात्विक सूरत !<br />राम को बाँध न पाई कभी कोई धर्म या देश विशेष की सीमा<br />भारत दक्छिण पूर्वी एशिया विश्व में व्याप्त है राम की कीरत !!vivek ranjan shrivastavahttp://www.blogger.com/profile/06945725435403559585noreply@blogger.com