tag:blogger.com,1999:blog-23262232.post-28871392105147091512007-10-17T13:22:00.001-07:002007-10-17T13:22:50.369-07:00क्या करेंमेरी, तेरी, निगाह में<br />जो लाख इन्तेज़ार हैं<br /><br />जो मेरे, तेरे तन बदन में<br />लाख दिल फ़िगार हैं<br /><br />जो मेरी, तेरी उंगलियों की बेहिसी से<br />सब कलम निज़ार हैं<br /><br />जो मेरे, तेरे शहर की<br />हर इक गली में<br />मेरे, तेरे नक्श-ए-पा के बेनिशां मज़ार हैं<br /><br />जो मेरी, तेरी रात के<br />सितारे ज़ख्म ज़ख्म हैं<br /><br />जो मेरी, तेरी सुबह के<br />गुलाब चाक चाक हैं<br /><br />ये ज़ख्म सारे बे-दवा<br />ये चाक सारे बे-रफ़ू<br />किसी पे राख चांद की<br />किसी पे ओस का लहू<br />ये हैं भी या नहीं बता<br />ये हैं की महज़ जाल हैं<br />मेरे तुम्हारे अन्कबूत-ए-वहम क बुना हुआ<br />जो है, तो इस का क्या करें<br />नही है, तो भी क्या करें<br />बता, बता<br />बता, बता<br /><br />फैज़, १९८०<br />मेरे दिल, मेरे मुसाफिरMoglihttp://www.blogger.com/profile/10882385754551486879noreply@blogger.com