tag:blogger.com,1999:blog-23262232.post-1141538111023882642006-03-04T21:54:00.000-08:002006-03-04T21:55:11.030-08:00गीत नया गाता हूँ-अटल बिहारी वाजपेयीगीत नया गाता हूँ-अटल बिहारी वाजपेयी<br /><br />टूटे हुए तारों से फूटे वासन्ती स्वर,<br />पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर,<br /><br />झरे सब पीले पात,<br />कोयल की कुहुक रात,<br /><br />प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ<br /><br />गीत नया गाता हूँ<br /><br />टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी?<br />अन्तर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी<br /><br />हार नहीं मानूँगा,<br />रार नई ठानूँगा,<br /><br />काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ<br />गीत नया गाता हूँMoglihttp://www.blogger.com/profile/10882385754551486879noreply@blogger.com