tag:blogger.com,1999:blog-22420687.post-10114631505756956472008-04-14T06:33:00.000+05:302008-04-14T06:34:09.117+05:30निंदा के दम पर जिंदा'ये कविराज न जाने अपने आप को क्या समझता है,<br />कविता एक भी नही है, बस लाफ्फज़ी कर लो,<br />ऊट पटांग घिसे पिटे चुटकुले,<br />*&%^^ *&^&* ^%$%^$%^ &^%&^%'<br /><br />'ठीक कहते हैं और ये *&^*&$* राधेश्याम भी उसके जाल में फँस गया है,<br />सुनते हैं की इस होली पर पूरा टूर बना रहे हैं,<br />बस इनके लोग ही जायेंगे.'<br /><br />'इनके लोग सब फ्राड हैं, <br />&^%&^%&(%^,<br />मेरा तो खून खौल उठता है,<br />तुमने देखा कैसे साजिश कर के मुझे नीचा दिखाते हुए बुलाया,<br />बस जो अपनी जी हुज़ूरी करे उसको जमाओ बाकी को उखाड़ दो,<br />मैं देखता हूँ की अब मेरे कार्यक्रमों में ये कैसे आता है,'<br /><br />'वैसे एक और बात बताएं, इन लोगों का जाल इधर बाहर भी फ़ैल रहा है,<br />कम्पूटर पर भी बड़ी मार्केटिंग हो रही है,<br />चोर कहीं के, ख़ुद से एक कविता तो लिखी नहीं जाती और हरकतें,<br />मुर्गा, शराब, और भी न जाने क्या क्या,<br />&^%&^%&(^%^& हवाई जहाज से आते जाते हैं, <br />हुंह *^&*^&)*^&^%.'<br /><br />(कविराज का प्रवेश...)<br /><br />'आइये कविराज आइये,<br />चरणों में प्रणाम स्वीकारिये,<br />अभी अभी आप ही की प्रशंसा ही रही थी,'<br /><br />'वाह भाई ये हुई न बात,<br />इधर मैं भी राधेश्याम जी से आपकी स्तुति कर के आ रहा हूँ.'<br /><br />'आज तो आपको सुनकर बहुत बढ़िया लगा, क्या अंदाज़ है आपका,<br />सुन रहे हैं इधर टूर लग रहा है, <br />भूल मत जाइयेगा अपने इस भक्त को.'<br /><br />'अरे कैसी बात करते हैं, आप तो हमारे भाई हैं,<br />आपको कहाँ भूल कर जायेंगे,<br />वैसे टूर तो राधेश्याम करवा रहे हैं उनसे भी बात कर लीजियेगा.'<br /><br />(...कुछ देर तक सन्नाटा, अब कोई बोले भी तो क्या. तभी राधेश्याम जी मंच से संचालन करते हुए कहते हैं,)<br /><br />'माँ वीणावादिनी के चरणों में प्रणाम करते हुए,<br />अब हम कवि सम्मेलन के दूसरे सत्र का प्रारम्भ करते हैं,<br />माँ शारदा के सभी वरद पुत्रों से अनुरोध है की एक बार पुनः,<br />मंच की शोभा बढ़ाने के लिए यहाँ आ जाएँ.'<br /><br />और मंच की शोभा बढ़ा दी जाती है.अभिनवhttp://www.blogger.com/profile/09575494150015396975noreply@blogger.com